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Misc. Erotica हिंदी की सुनी-अनसुनी कामुक कहानियों का संग्रह
मैं व्हिस्की पीते हुए हैरत से आँटी की बातें बड़े गौर से सुन रही थी और मेरी चूत बेहद गीली हो गयी थी और पूरे जिस्म में और दिमाग में सनसनी सी फैली हुई थी। अगर्चे ये सब पर्वर्टिड था लेकिन शायद इसी वजह से मुझे ये सब बेहद दिलचस्प और इक्साइटिंग लग रहा था। मैंने पूछा, कैसा... कैसा लगता है... कुत्ते से चुद... चुदवाना?”

 
जस्ट अमेज़िंग.... गज़ब की मस्ती भरी और बेइंतेहा तसल्ली बख़्श धुंआधार चुदाई होती है... ऑस्कर जब मेरी कमर पे चढ़ के और मेरी गाँड से चिपक कर मुसलसल पंद्रह बीस मिनट तक अपना अज़ीम लंड मेरी चूत में दनादन पिस्टन की तरह अंदर-बाहर चोदता है तो... बस जन्नत की सैर करा देता है... चूत भी बार -बार पानी छोड़-छोड़ के बेहाल हो जाती है... कुत्ते का लंड चूत में अंदर जाने के बाद पूरा फूलता है.... और फिर जब उसके लंड की जड़ में गाँठ फूल कर चूत में फ़ंस जाती है तो वो एहसास मैं बयान नहीं कर सकती... बीस-बीस मिनट तक फिर हम दोनों चिपके रहते हैं और उसकी मनि मेरी चूत में मुसलसल गिरती रहती है...! आँटी ने मस्ती भरे अंदाज़ में कहा और फिर मेरे होंठों को चूमते हुए बोलींवैसे तुम्हें खुद ही ऑस्कर से चुदवा कर ये निहायत अमेज़िंग मज़ा ले कर देखना चाहिये!
 
सलमा आँटी की बात सुनकर मैं व्हिस्की का बड़ा सा घूँट पीते हुए लरजती हुई आवाज़ में बोली, क्या...? मैं... मैं.. रियली... लेकिन... आर यू श्योर...! कुत्ते से चुदवाने के ख्याल से मेरे जिस्म में सनसनती लहरें दौड़ने लगीं। फिर आँटी उठ कर हाई-हील के सैंडलों में अपनी मस्त गाँड मटकाती हुई ऑस्कर को लाने के लिये कमरे से बाहर चली गयीं। शाम से हम दोनों ने काफी ड्रिंक कर ली थी और सलमा आँटी के कदमों में थोड़ी-सी लड़खड़ाहट ज़ाहिर हो रही थी। दो मिनट बाद ही वो दूसरे कमरे से ऑस्कर को अपने साथ लेकर वापस आयीं और बेड पर बैठते हुए शोख अंदाज़ में बोली, सो आर यू रेडी... अपनी ज़िंदगी की सबसे बेहतरीन चुदाई का मज़ा लेने के लिये?”
 
ऊँहूँ?” मैंने धीरे से मुस्कुराते हुए गर्दन हिलायी। हमारे घर में कभी भी कोई पालतू कुत्ता या कोई और जानवर नहीं था इसलिये मुझे कुत्तों के ज़ानिब ज्यादा जानकारी नहीं थी। इस वजह से थोड़ी एइंगज़ाइअटी और घबराहट सी महसूस हो रही थी लेकिन नशे में मतवाला हवस-ज़दा दिमाग और जिस्म इस बेरहरावी में शऱीक होने के लिये बेकरार था। ऑस्कर भी बेड पर चढ़ गया और सलमा आँटी के सैंडल और पैर चाटने लगा। आँटी उसकी गर्दन सहलाने लगीं और मुझे भी ऐसा ही करने को कहा तो मैं भी उसकी कमर सहलाने लगी। ऑस्कर का नोकिला लाल लंड करीब एक-दो इंच अपने बाल-दार खोल में से बाहर निकला हुआ था। फिर आँटी ने ऑस्कर का चेहरा मेरी टाँगों की तरफ़ किया और उसे मेरी चूत चाटने के लिये कहा तो बासाख़्ता मैंने अपनी टाँगें फैला कर अपनी चूत खोल दी। ऑस्कर ने मेरी टाँगों के बीच में अपना मुँह डाल कर अपनी लंबी भीगी ज़ुबान मेरी रानों पर फिरायी तो अजीब सा एहसास हुआ। तीन-चार दफ़ा मेरी रानों को चाटने के बाद उसने अपना थूथना मेरी भीगी चूत पर लगा कर अपनी ज़ुबान नीचे से ऊपर चाटते हुए मेरी क्लिट पर भी फिरायी तो मेरा पुरा जिस्म थरथरा गया। सलमा आँटी उसे सहलाते-पुचकरते हुए उसकी हौंसला अफ़ज़ाई कर रही थीं।

ऑस्कर काफी जोश में मेरी चूत चाटने लगा। उसकी ज़ुबान मेरी रसीली-भीगी चूत में घुसते हुए उसमें से निकलता हुआ रस चाट रही थी। मैं आँखें बंद करके मस्ती में ज़ोर-ज़ोर से चींखने लगी। एस-के, अनिल, सलमा आँटी और डॉली सभी से चूत चटवाने में मुझे बेहद मज़ा आता था लेकिन ऑस्कर की ज़ुबान की बात ही अलग थी। अपनी चूत और क्लिट पर उस जानवर की लंबी-खुर्दरी भीगी ज़ुबान की चटाई से मेरा जिस्म बेपनाह मस्ती में भर कर बुरी तरह थरथरा रहा था। उसकी ज़ुबान मेरी चूत में इतनी अंदर तक जा रही थी जहाँ तक किसी इंसान की ज़ुबान का पहुँच पाना मुमकिन नहीं था। एक तरह से वो अपनी ज़ुबान से मेरी चूत चाटने के साथ-साथ चोद भी रहा। मैंने ज़ोर-ज़ोर से कराहते हुए मस्ती में अपने घुटने मोड़ कर बिस्तर में अपने सैंडल गड़ाते हुए अपने चूतड़ ऊपर उठा दिये और अपनी चूत उसके थूथने पर ठेल दी। उसकी ज़ुबान मेरी चूत में अंदर तक घुस कर फैलती और फिर बाहर फिसल कर मेरी धधकती क्लिट पर दौड़ती।
 
मेरे जिस्म में इस कदर मस्ती भरी लहरें दौड़ रही थीं कि मुझसे अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा था और मेरी चूत पिघल कर पानी छोड़ने लगी। बिस्तर की चादर अपनी मुठ्ठियों में कस कर जकड़ते हुए मैं मस्ती में बेहद ज़ोर से चींखी, आआआहहह आँटी ईईईई... मेरी चूत... झड़ीईईई... हाय अल्लाह.... ऑय...ऑय एम कमिंग...! मेरी चूत से बे-इंतेहा पानी निकलाने लगा जिसे ऑस्कर ने अपनी ज़ुबान से जल्दी-जल्दी चाटने लगा। ऐसा लग रहा था जैसे कि मेरा पेशाब निकल गया हो। इस कदर गज़ब का ऑर्गैज़म था कि बेहोशी सी छा गयी और मैं आँखें बंद करके हाँफने लगी। ऑस्कर अभी भी मेरी चूत चाटते हुए मेरे पनी के आखिरी कतरे पी रहा था। सलमा आँटी उसे पुचकारते हुए बोलीं, बस.. बस... इतना काफी है... डार्लिंग! और ऑस्कर को अपनी तरफ़ खींचकर उसे सहलाने लगी।
 
बेहतरीन ऑर्गैज़म के लुत्फ़ का एहसास करते हुए मैं चार-पाँच मिनट तक आँखें बंद किये लेटी रही। मुझे बेहद तसल्लुत महसूस हो रही थी। जब मैंने आँखें खोलीं तो देखा कि सलमा आँटी घुटनों पे बैठी ऑस्कर का लाल गाजर जैसा लंड प्यार से सहला रही थीं। करीब सात-आठ इंच लंबा और मोटा सा नोकीला लंड सख्त होकर फड़क रहा था जिसे देख कर मेरे चेहरे की सुकून भरी मुस्कुराहट हैरत में तब्दील हो गयी। आँटी ने मुझे सेहर-ज़दा नज़रों से ऑस्कर के लंड को घूरते हुए देखा तो बोलीं, है ना लाजवाब? पास आकर इसे हाथ में महसूस करके देखो! मैं खुद को रोक नहीं सकी और शोखी से मुस्कुराते हुए उठ कर घुटने मोड़ कर बैठ गयी और अपना एक हाथ ऑस्कर के पेट के नीचे ले जा कर उसके सख्त और लरज़ते हुए गरम लंड को सहलाने लगी। उसके लंड को आगे से पीछे तक सहलाते हुए उसके लंड की फूली हुई नसें मुझे अपने हाथ में धड़कती हुई महसूस हो रही थीं। ऑस्कर के लंड से मुसलसल चिकना और पतला-सा रस चू रहा था। मोटी गाजर जैसा उसका लंड मेरे हाथ में धड़कता हुआ और ज्यादा फूलने लगा और उसकी दरार में से सफ़ेद झाग जैसा रस और ज्यादा चूने लगा और मेरा हाथ और उंगलियाँ उस चिकने रस से सन गयीं। इतने में सलमा आँटी उसके टट्टों की फुली हुई एक हाथ में पकड़ कर मुझे दिखाते हुए बोलीं, देखो ये किस कदर लज़ीज़ मनि से भरे हुए हैं...। और अपने होंथों पर ज़ुबान फिराने लगीं।
 
फिर अचानक नीचे झुक कर आँटी उसके रस से सने हुए लंड पर जीभ फिराने लगीं और उसका रिसता हुआ लंड अपने मुँह में भर कर चूसना शुरू कर दिया। ऑस्कर मस्ती से रिरियाने लगा। आँटी को ऑस्कर का लंड चूसते देख मेरे मुँह में भी पानी भरने लगा। बेसाख्ता मैं अपना हाथ अपने होंठ और नाक के करीब ले गयी तो ऑस्कर के लंड के चिकने रस की तेज़ खुशबू मेरी साँसों में समा गयी और मैं ऑस्कर के लंड के रस से सनी अपनी उँगलियों मुँह में लेकर चाटते हुए उसका ज़ायका लेने लगी। मुझे एस-के और अनिल की मनि बेहद पसंद थी लेकिन ऑस्कर के इस रस का ज़ायका थोड़ा अलग था लेकिन था बेहद लज़्ज़तदार। ऑस्कर का लंड अपने मुँह से निकालकर चटखारा लेते हुए आँटी भी बोलीं, ऊँऊँ यम्मी... तुम भी चूस के देखो... बेहद लाजवाब और अडिक्टिव ज़ायका है इसका... मेरा तो इससे दिल ही नहीं भरता! आँटी की बात पूरी होने से पहले ही मैं झुक कर अपनी ज़ुबान ऑस्कर के लंड की रिसती हुई नोक पर फिराने लगी। मैंने अपनी ज़ुबान पर उसके लंड से रिसता हुआ रस अपने मुँह में लेकर घुमाते हुए उसका ज़ायका लिया और फिर अपने हलक़ में उतार लिया। अपनी इस बेरहरावी पे मस्ती में मेरी सिसकी निकल गयी। मैं फिर उसके कुत्ते के गरम लंड पे अपनी ज़ुबान घुमा-घुमा कर लपेटते हुए चुप्पे लगाने लगी और उसमें से चिकना ज़ायेकेदार रस मुसलसल मेरी ज़ुबान पे रिस रहा था।
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RE: हिंदी की सुनी-अनसुनी कामुक कहानियों का संग्रह - by rohitkapoor - 12-03-2026, 01:46 AM



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