24-02-2026, 08:42 PM
(This post was last modified: 24-02-2026, 10:02 PM by rohitkapoor. Edited 2 times in total. Edited 2 times in total.)
नशे से मेरी हिम्मत खुल रही थी और अब मैंने फ़ैसला कर लिया कि मैं भी नंगी हो कर ही नाप दुँगी। मैंने कहा, “अनिल! क्या तुम मेरे लिये भी डिज़ाईनर और परफेक्ट फिटिंग की सलवार कमीज़ बना सकते हो?” तो उसने कहा कि “मैडम उसके लिये आपको...।“ मैंने कहा, “कोई बात नहीं यहाँ सिर्फ़ हम दो ही तो हैं.... क्या हुआ, कोई बात नहीं..... जैसा तुम चाहोगे मैं नाप दे दुँगी” तो उसके चेहरे से खुशी छलकने लगी। उसने कहा कि “ओके मैडम, आप अपने कपड़े उतार लीजिये” तो मैंने कमीज़ के अंदर हाथ डाल के कमीज़ को ऊपर उठा कर निकाल दिया जिससे मेरी गोल-गोल चूचियाँ हिलने लगीं। उसके मुँह से ‘वोव वंडरफुल’ निकल गया। अब मैं उसके सामने आधी-नंगी खड़ी थी। उसने कहा कि “अब सलवार भी निकाल दीजिये मैडम, ताकि मैं नाप ले सकूँ” तो मैंने सलवार का स्ट्रिंग खोल दिया और मेरी सलवार फरमान बरदार कनीज़ की तरह से मेरे कदमों में गिर पड़ी। मैंने अपने सैंडलों के स्ट्रैप खोल कर सलवार को अपने पैरों से निकाल कर एक तरफ़ हटा दिया। फिर उसने कहा कि “मैडम आप सैंडल पहन लीजिये ताकि आपके सैंडल की ऊँचाई के अनुसार मैं आपका नाप ले सकुँ और क्योंकि हाई-हील से आपकी चेस्ट और हिप्स का पोसचर भी पर्फेक्ट रहेगा और मैं ठीक से आपकी ड्रेस बना सकुँगा।“
अब मैं सिर्फ हाई-हील सैंडल पहने, उसके सामने बिल्कुल ही नंगी खड़ी थी। मेरी उसी दिन की शेव की हुई चिकनी चमकदार चूत देख कर उसने कहा “आप बहुत ही खूबसूरत हैं मैडम। इतनी खूबसूरत मैंने किसी को नहीं देखा.... आप एक दम से परफेक्ट फिगर की हो... आपको तो मॉडलिंग करनी चाहिये।“ उसके मुँह से अपनी तारीफ सुन कर मुझे बेहद अच्छा लग रहा था। बाहर हवा तेज़ी से चलने लगी थी और लाईट बार-बार जलने-बुझने लगी जैसे कहीं लूज़ कनेक्शन हो गया हो तो उसने साईड में रखी हुई एक केंडल जला दी। नशे और हवस में मेरा रहा-सहा पश-ओ-पेश भी हवा हो गया था और मैंने हँसते हुए पूछा कि “क्या नाप लेते वक्त तुम सिर्फ़ मॉडल्स को ही नंगा करते हो या तुम भी नंगे हो जाते हो?” तो वो शर्मा गया और बोला कि “अगर मॉडल चाहे तो मैं भी नंगा हो कर ही नाप लेता हूँ।“ मैंने फिर हँसते हुए कहा कि “अब क्या इरादा है?” तो उसने कहा कि “मैडम अगर आप चाहें तो मैं भी आपकी तरह ही नंगा हो कर नाप ले सकता हूँ।“ मैंने कहा, “तुम्हारी मर्ज़ी” और अपनी टाँगें थोड़ी खोल दी ताकि वो नाप लेना शुरू कर सके। उसने मेरा इशारा शायद समझ लिया था और बैठे-बैठे ही अपनी टी -शर्ट निकाल दी। अब वो सिर्फ़ लुँगी में बैठा हुआ था और नाप लेना शुरू किया। एक बार फिर से उसके हाथ मेरे जाँघों के अंदर वाले हिस्से पे लगने लगे और मेटल का पीस चूत के अंदर महसूस होने लगा। उसने भी शरारत में मेटल पीस चूत के अंदर घुसा दिया और मैंने अपनी टाँगें खोल दीं। मेटल पीस चूत के अंदर लगते ही मेरे मुँह से मस्ती भरी सिसकरी निकल गयी। उसकी अँगुलियाँ मेरी चूत से टकरा रही थीं और मेरी चूत और ज़्यादा गीली होने लगी। उसने बैठे-बैठे पूछा कि मैडम, “सच आप चाहती हैं कि मैं भी नंगा हो जाऊँ?” तो मैंने मुस्कुरा के कहा, “तुम्हारी मर्ज़ी.... मुझे तो कोई प्रॉबलम नहीं है क्योंकि मैं भी तो तुम्हारे सामने नंगी खड़ी हूँ।“
मेरी चिकनी चूत लाईट में चमक रही थी और गीली भी हो गयी थी और मुझे पक्का यकीन था कि अनिल को मेरी गीली चूत की महक ज़रूर आ रही होगी। जिस तरह वो नीचे बैठा था, मेरी चूत उसके मुँह के सामने थी। उसने ऊपर टेप की तरफ़ देखते-देखते मेरी चूत पे किस कर दिया तो मेरी टाँगें खुद ही खुल गयीं और मेरा हाथ उसके सिर पे चला गया और वो घुटनों के बल झुक गया और मेरी गाँड पे हाथ रख कर मेरी चूत को चूमने और चूसने लगा। मैं तो नशे में मदहोश थी ही और हवस की आग में पहले से ही जल रही थी। उसका मुँह अपनी चूत पे महसूस करते ही मैं तो जैसे दीवानी हो गयी और उसके सिर को पकड़ के अपनी चूत में दबाने लगी। उसने मेरी पूरी चूत को अपने मुँह में लेकर दाँतों से कटा तो मेरे मुँह से मस्ती की चींख निकल गयी, “आआआआहहहहह “और मैं एक दम से झड़ने लगी। मेरी आँखें बंद हो गयीं और मैं अपनी चूत को उसके मुँह से रगड़ने लगी। मैं झड़ती गयी और वो मेरा जूस पीता गया। जब मेरा झड़ना खतम हुआ तो मैंने झुक कर उसके कंधों को पकड़ा तो वो उठ खड़ा हुआ। उसने पहले ही बैठे-बैठे ही अपनी लुँगी को खोल दिया था और मेरी चूत चाटते हुए वो अपना लंड मेरे सैंडलों पर रगड़ रहा था। जब वो खड़ा हुआ तो उसकी लुँगी भी नीचे गिर पड़ी और वो भी नंगा हो चुका था और उसका लंड स्प्रिंग के जैसे ऊपर नीचे हो कर हिल रहा था जैसे मेरी चूत को सेल्यूट कर रहा हो। उसका लंड भी बहुत ही मस्त था.... बड़ा और मोटा बिला-खतना लंड। नशे में मैं पूरी बेशर्म तो हो ही गयी थी और मैंने एक ही सेकेंड में उसका लंड अपने हाथ में पकड़ लिया और दबाने लगी। वॉव... मस्त और बहुत ही कड़क लंड था उसका। काफी लंबा और मोटा, लोहे जैसा सख्त था। मैंने एक हाथ उसकी बैक पे रख कर उसको अपनी तरफ़ खींच लिया और दूसरे हाथ से उसके लंड को पकड़ के अपनी चूत में ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर रगड़ने लगी। उसने झुक कर मेरी चूचियों को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। उसके लंड में से प्री-कम निकल रहा था जो चूत को स्लिपरी बना रहा था।
मेरी चूत में तो जैसे आग लगी हुई थी और नशे में मैं खड़ी-खड़ी ही हाई हील सैंडलों में झूमने लगी थी। मैं नीचे बैठ गयी और उसके लंड को किस किया और उसके लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी तो उसने मेरा सिर पकड़ कर अपनी गाँड आगे पीछे करके मेरे मुँह को चोदना शुरू कर दिया। अब मुझसे सब्र नहीं हो रहा था। अब तो बस मेरी गरम और गीली चूत को उसका लंबा मोटा कड़क और तगड़ा लंड चाहिये था। मैं बैठे-बैठे ही लेट गयी और उसको अपने ऊपर खींच लिया। बस उसी वक्त बिजली चली गयी और कमरे में एक दम से अंधेरा हो गया पर केंडल की रोशनी से रूम बहुत ही रोमैंटिक लगने लगा। उस वक्त जितने नशे और वासना में मैं चूर थी, उस हालत में म्यूनिसपैलटी का कुढ़ाघर भी मुझे रोमैंटिक लगता। खैर, मैं लेट गयी और उसको अपने ऊपर खींच लिया और अपनी टाँगें फैला लीं। अनिल मेरी दोनों टाँगों के बीच में आ गया। उसने अपने पैर पीछे की तरफ़ को सीधे कर दिये और उसका लंड मेरी चूत के लिप्स के बीच में था। अपनी दोनों कुहनियों को मेरे जिस्म के दोनों तरफ़ रख कर वो मुझ पर झुक गया और मुझे किस करने लगा। उसकी ज़ुबान मेरे मुँह में घुस गयी थी और मुझे अपनी चूत के जूस का टेस्ट उसके मुँह से आने लगा। वो अपने लंड के सुपाड़े को मेरी चिकनी चूत के अंदर-बाहर कर रहा था। मेरी टाँगें उसकी गाँड पे क्रॉस रखी हुई थी। उसने सुपाड़े को अंदर-बाहर करते-करते एक ज़ोर का धक्का मारा तो मेरे मुँह से मस्ती की “आआआआआहहहहह” निकल गयी और उसका गरम लंड मेरी तंदूर जैसी चूत में ऐसे घुस गया जैसे गरम चाकू मक्खन में घुस जाता है। उसका लंड बेहद मोटा था। उसके लंड से मेरी चूत खुल गयी थी। मेरी आँख से दो बूँद आँसू भी निकल गये। ये आँसू मस्ती के थे जिसे उसने नहीं देखा।
अब मैं सिर्फ हाई-हील सैंडल पहने, उसके सामने बिल्कुल ही नंगी खड़ी थी। मेरी उसी दिन की शेव की हुई चिकनी चमकदार चूत देख कर उसने कहा “आप बहुत ही खूबसूरत हैं मैडम। इतनी खूबसूरत मैंने किसी को नहीं देखा.... आप एक दम से परफेक्ट फिगर की हो... आपको तो मॉडलिंग करनी चाहिये।“ उसके मुँह से अपनी तारीफ सुन कर मुझे बेहद अच्छा लग रहा था। बाहर हवा तेज़ी से चलने लगी थी और लाईट बार-बार जलने-बुझने लगी जैसे कहीं लूज़ कनेक्शन हो गया हो तो उसने साईड में रखी हुई एक केंडल जला दी। नशे और हवस में मेरा रहा-सहा पश-ओ-पेश भी हवा हो गया था और मैंने हँसते हुए पूछा कि “क्या नाप लेते वक्त तुम सिर्फ़ मॉडल्स को ही नंगा करते हो या तुम भी नंगे हो जाते हो?” तो वो शर्मा गया और बोला कि “अगर मॉडल चाहे तो मैं भी नंगा हो कर ही नाप लेता हूँ।“ मैंने फिर हँसते हुए कहा कि “अब क्या इरादा है?” तो उसने कहा कि “मैडम अगर आप चाहें तो मैं भी आपकी तरह ही नंगा हो कर नाप ले सकता हूँ।“ मैंने कहा, “तुम्हारी मर्ज़ी” और अपनी टाँगें थोड़ी खोल दी ताकि वो नाप लेना शुरू कर सके। उसने मेरा इशारा शायद समझ लिया था और बैठे-बैठे ही अपनी टी -शर्ट निकाल दी। अब वो सिर्फ़ लुँगी में बैठा हुआ था और नाप लेना शुरू किया। एक बार फिर से उसके हाथ मेरे जाँघों के अंदर वाले हिस्से पे लगने लगे और मेटल का पीस चूत के अंदर महसूस होने लगा। उसने भी शरारत में मेटल पीस चूत के अंदर घुसा दिया और मैंने अपनी टाँगें खोल दीं। मेटल पीस चूत के अंदर लगते ही मेरे मुँह से मस्ती भरी सिसकरी निकल गयी। उसकी अँगुलियाँ मेरी चूत से टकरा रही थीं और मेरी चूत और ज़्यादा गीली होने लगी। उसने बैठे-बैठे पूछा कि मैडम, “सच आप चाहती हैं कि मैं भी नंगा हो जाऊँ?” तो मैंने मुस्कुरा के कहा, “तुम्हारी मर्ज़ी.... मुझे तो कोई प्रॉबलम नहीं है क्योंकि मैं भी तो तुम्हारे सामने नंगी खड़ी हूँ।“
मेरी चिकनी चूत लाईट में चमक रही थी और गीली भी हो गयी थी और मुझे पक्का यकीन था कि अनिल को मेरी गीली चूत की महक ज़रूर आ रही होगी। जिस तरह वो नीचे बैठा था, मेरी चूत उसके मुँह के सामने थी। उसने ऊपर टेप की तरफ़ देखते-देखते मेरी चूत पे किस कर दिया तो मेरी टाँगें खुद ही खुल गयीं और मेरा हाथ उसके सिर पे चला गया और वो घुटनों के बल झुक गया और मेरी गाँड पे हाथ रख कर मेरी चूत को चूमने और चूसने लगा। मैं तो नशे में मदहोश थी ही और हवस की आग में पहले से ही जल रही थी। उसका मुँह अपनी चूत पे महसूस करते ही मैं तो जैसे दीवानी हो गयी और उसके सिर को पकड़ के अपनी चूत में दबाने लगी। उसने मेरी पूरी चूत को अपने मुँह में लेकर दाँतों से कटा तो मेरे मुँह से मस्ती की चींख निकल गयी, “आआआआहहहहह “और मैं एक दम से झड़ने लगी। मेरी आँखें बंद हो गयीं और मैं अपनी चूत को उसके मुँह से रगड़ने लगी। मैं झड़ती गयी और वो मेरा जूस पीता गया। जब मेरा झड़ना खतम हुआ तो मैंने झुक कर उसके कंधों को पकड़ा तो वो उठ खड़ा हुआ। उसने पहले ही बैठे-बैठे ही अपनी लुँगी को खोल दिया था और मेरी चूत चाटते हुए वो अपना लंड मेरे सैंडलों पर रगड़ रहा था। जब वो खड़ा हुआ तो उसकी लुँगी भी नीचे गिर पड़ी और वो भी नंगा हो चुका था और उसका लंड स्प्रिंग के जैसे ऊपर नीचे हो कर हिल रहा था जैसे मेरी चूत को सेल्यूट कर रहा हो। उसका लंड भी बहुत ही मस्त था.... बड़ा और मोटा बिला-खतना लंड। नशे में मैं पूरी बेशर्म तो हो ही गयी थी और मैंने एक ही सेकेंड में उसका लंड अपने हाथ में पकड़ लिया और दबाने लगी। वॉव... मस्त और बहुत ही कड़क लंड था उसका। काफी लंबा और मोटा, लोहे जैसा सख्त था। मैंने एक हाथ उसकी बैक पे रख कर उसको अपनी तरफ़ खींच लिया और दूसरे हाथ से उसके लंड को पकड़ के अपनी चूत में ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर रगड़ने लगी। उसने झुक कर मेरी चूचियों को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। उसके लंड में से प्री-कम निकल रहा था जो चूत को स्लिपरी बना रहा था।
मेरी चूत में तो जैसे आग लगी हुई थी और नशे में मैं खड़ी-खड़ी ही हाई हील सैंडलों में झूमने लगी थी। मैं नीचे बैठ गयी और उसके लंड को किस किया और उसके लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी तो उसने मेरा सिर पकड़ कर अपनी गाँड आगे पीछे करके मेरे मुँह को चोदना शुरू कर दिया। अब मुझसे सब्र नहीं हो रहा था। अब तो बस मेरी गरम और गीली चूत को उसका लंबा मोटा कड़क और तगड़ा लंड चाहिये था। मैं बैठे-बैठे ही लेट गयी और उसको अपने ऊपर खींच लिया। बस उसी वक्त बिजली चली गयी और कमरे में एक दम से अंधेरा हो गया पर केंडल की रोशनी से रूम बहुत ही रोमैंटिक लगने लगा। उस वक्त जितने नशे और वासना में मैं चूर थी, उस हालत में म्यूनिसपैलटी का कुढ़ाघर भी मुझे रोमैंटिक लगता। खैर, मैं लेट गयी और उसको अपने ऊपर खींच लिया और अपनी टाँगें फैला लीं। अनिल मेरी दोनों टाँगों के बीच में आ गया। उसने अपने पैर पीछे की तरफ़ को सीधे कर दिये और उसका लंड मेरी चूत के लिप्स के बीच में था। अपनी दोनों कुहनियों को मेरे जिस्म के दोनों तरफ़ रख कर वो मुझ पर झुक गया और मुझे किस करने लगा। उसकी ज़ुबान मेरे मुँह में घुस गयी थी और मुझे अपनी चूत के जूस का टेस्ट उसके मुँह से आने लगा। वो अपने लंड के सुपाड़े को मेरी चिकनी चूत के अंदर-बाहर कर रहा था। मेरी टाँगें उसकी गाँड पे क्रॉस रखी हुई थी। उसने सुपाड़े को अंदर-बाहर करते-करते एक ज़ोर का धक्का मारा तो मेरे मुँह से मस्ती की “आआआआआहहहहह” निकल गयी और उसका गरम लंड मेरी तंदूर जैसी चूत में ऐसे घुस गया जैसे गरम चाकू मक्खन में घुस जाता है। उसका लंड बेहद मोटा था। उसके लंड से मेरी चूत खुल गयी थी। मेरी आँख से दो बूँद आँसू भी निकल गये। ये आँसू मस्ती के थे जिसे उसने नहीं देखा।


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