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Misc. Erotica हिंदी की सुनी-अनसुनी कामुक कहानियों का संग्रह
दिन ऐसे ही गुज़रते रहे। ऑफिस आते-जाते अनिल मुझे देखता और मैं उसको देखती और हमारी नज़रें एक दूसरे को एक अंजाना इशारा देती रहीं। हम इशारों ही इशारों में एक दूसरे को विश भी कर लेते। कभी तो आहिस्ता से हाथ भी उठा के इशारा कर लेते जो किसी और को नज़र नहीं आता। ऐसे ही जैसे लवर्स एक दूसरे को इशारा करते हैं। इसी तरह से हम दोनों के बीच में एक अंजाना ब्रिज बन गया। किसी दिन वो दुकान के अंदर होता और मुझे दिखायी नहीं देता तो उस दिन अजीब सा महसूस होता। दिल में एक बेचैनी रहती। मैं चाहने लगी कि मेरे उसकी दुकान के सामने से गुज़रने के टाईम पे वो मैं उसको देख लूँ तो मुझे इत्तमिनान हो जाये। ऐसे ही करीब तीन हफते गुज़र गये।

 एक दिन मैं घर में ही थी और ऑफिस नहीं गयी थी। एक हफते से एस-के भी ऑउट ऑफ टाऊन था। अशफाक भी अपने टूर पे थे। सलमा आँटी से तो खैर मैं हर रोज़ मिलती थी लेकिन आज सुबह ही वो भी अपनी किसी मौसी के घर गयी हुई थीं। मैं बहुत ही बोर हो रही थी। शाम से एस-के की भी बहुत याद आ रही थी। मन कर रहा था कि कहीं से एस-के आ जाये और मुझे बड़ी बेदर्दी से चोद डाले और इतना चोदे कि मेरी चूत एक बार फिर से फट जाये और खून निकल आये। एस-के से चुदाई का सोचते ही मेरी चूत गीली होने लगी। मैं अब घर पर अकेली होती तो सिर्फ सैंडल पहने हुए बिल्कुल नंगी ही रहती थी। मैंने झट से व्हिस्की का पैग बनाया और एक झटके में नीट ही पी गयी और फिर दूसरा पैग लेकर एक-ब्लू फिल्म की सी-डी लगाकर बैठ गयी। सोफ़े पर बैठे-बैठे ही अपनी टाँगें खोल दीं और मेरा हाथ खुद-ब-खुद चूत में चला गया। मैं अपनी चिकनी चूत को अपने हाथ से सहलाने लगी और मेरी आँखें बंद हो गयी। मैं अपनी उंगली अंदर-बाहर करने लगी और थोड़ी ही देर में झड़ गयी।
 
मुझे मार्केट से कुछ खाने का सामान भी लेना था तो सोचा कि मार्केट जाऊँगी तो शायद सैक्सी खयालात मेरे दिल से निकल जायेंगे। फिर खयाल आया कि चलो क्यों ना अपने सलवार कमीज़ का कपड़ा भी ले लूँ और सिलने के लिये दे दूँ। ये सोचते ही मैंने अपनी अलमरी से दो नये सलवार सूट के कपड़े निकाले और बैग में डाल कर बाहर निकल गयी। देर शाम हो चुकी थी। बाहर ठंडी-ठंडी हवा भी चलने लगी थी और लगाता था जैसे बारिश होगी पर हो नहीं रही थी। अनिल की दुकान तो बज़ार में जाते हुए पहले ही पड़ती थी तो मैं पहले वहीं चली गयी। उस वक़्त अनिल कहीं बाहर गया हुआ था। उसका कोई मुलाज़िम बैठा था। उसने बताया कि अनिल अभी दस मिनट में आ जायेगा.... तो मैंने कहा,ठीक है.... ये कपड़े यहीं रहने दो.... मैं भी बाकी शॉपिंग के लिये जा रही हूँ, वापसी में आ जाऊँगी.... अनिल से कह देना कि किरन मैडम आयी थी और ये कपड़े रख कर गयी है.... अभी आ जायेगी। उसने कहा, ठीक है और कपड़े एक साईड में रख दिये।
 
मुझे बाकी शॉपिंग में एक घंटे से कुछ ज़्यादा ही लग गया। वापस आते वक्त तक तो रात के तकरीबन आठ बज गये थे। मैं सोच रही थी कि कहीं अनिल दुकान ना बंद कर दे, इसी लिये जल्दी से उसकी दुकान की ओर बढ़ी। अनिल दुकान में आ चुका था और उसकी दुकान भी खाली हो चुकी थी। वो भी बंद करने की तैयारी कर रहा था और साथ ही मेरा इंतज़ार भी कर रहा था। उसका दूसरा स्टाफ छुट्टी कर चुका था और अनिल दुकान में अकेला ही था। मुझे देख कर वो खुश हो गया और उसका चेहरा चमकने लगा। मैंने देखा कि वो रम पी रहा था। उसने मेरे लिये भी एक पैग बना दिया। हालांकि मैंने शाम को ही दो पैग व्हिस्की के पिये थे और बहुत हल्का सा असर मुझ पर बरकरार था लेकिन ठंडी हवा चल रही थी और मेरा मन पीने का कर रहा था। वैसे भी एस-के और सलमा आँटी के साथ रह कर मैं पीने की बहुत आदी हो गयी थी और जब कभी भी पीने का मौका मिले तो मना नहीं कर पाती थी। दिन भर में आम तौर पे चार-पाँच पैग हो ही जाते थे लेकिन ऐसा कभी-कभार ही होता था कि मैं नशे में बुरी तरह चूर हो जाऊँ। मैंने उसको थैंक्स कहा और अपना ड्रिंक सिप करने लगी जो ठंड में बहुत ही अच्छा लग रहा था। उसने पूछा, आपके कपड़े हैं मैडम?” तो मैंने कहा, हाँ.... बहुत दिनों से सोच रही थी कि तुमसे कुछ ड्रेस सिलवाऊँगी तो आज चली आयी।
[Image: 8-E9-AAEBC-F813-4-FC9-B6-A2-EFFAC0-B4-B031.png]
मैं भी फ्री थी और कोई काम नहीं था। मुझे भी टाईम पास करना था तो दो पैग पीने तक हम इधर-उधर की बातें करते रहे। मेरे पूछने पर उसने बताया कि वो फैशन डीज़ाईनिंग का कोर्स भी कर रहा है तो मैंने उससे फैशन डीज़ाईनिंग के बारे में पूछा। उसने मुझे फैशन डीज़ाईनिंग के बारे में काफी कुछ बताया और बात-बात में बताया कि मैडम कईं बार किसी खास डिज़ाईन के लिये जिस फैशन-मॉडल का नाप लेना होता है तो उसको नंगा करके नाप लिया जाता है ताकि फिटिंग सही बैठे। मैं हैरान रह गयी और पूछा कि लड़कियाँ नंगी हो जाती हैं?” तो उसने कहा हाँ मैडम.... अगर किसी को अच्छी तरह से और सही फ़िटिंग का ड्रेस सिलवाना हो तो बहुत अराम से नंगी हो जाती हैं लेकिन उस टाईम पे बस वही डिज़ाईनर अंदर होता है जो नाप ले रहा होता है ताकि फैशन-मॉडल बस एक ही डिज़ाईनर के सामने नंगी हो.... पूरी क्लास के सामने नहीं। मैंने कहा कि ऐसे कैसे हो सकता है?” तो उसने कहा कि मैं सच कह रहा हूँ मैडम.... हम ऐसे ही नाप लेते हैं!” तो मैंने हँसते हुए कहा कि क्या मेरा भी ऐसे ही लोगे?” तो उसने कहा कि अगर आप भी सही और परफेक्ट फिटिंग के डिज़ाईनर कपड़े सिलवाना चाहती हैं और अगर आपको कोई ऑबजेक्शन ना हो तो आप अपने कपड़े निकाल सकती हैं.... नहीं तो हम सैंपल साईज़ से ही काम चला लेते हैं। मैंने कहा कि मैं तो सैंपल नहीं लेकर आयी तो उसने कहा कि मैं ऐसे ही ऊपर से आपका साईज़ ले लुँगा.... आप अंदर ड्रेसिंग रूम में चलिये। अभी मैं सोच ही रही थी कि क्या करूँ, इतने में हवा बहुत ही तेज़ी से चलने लगी और उसके काऊँटर पर रखे कपड़े उड़के नीचे गिरने लगे और नाप के रजिस्टर के पन्ने फड़फड़ाने लगे तो उसने अपनी दुकान का शटर जल्दी से गिरा दिया और नीचे गिरे हुए कपड़े उठाने लगा। मैंने देखा कि उसने लुँगी पहनी हुई है और टी-शर्ट। जब उसने देखा कि मैं उसकी लूँगी को हैरत से देख रही हूँ तो उसने बताया कि मार्केट में किसी दुकान से नीचे उतरते हुए कील लगने से उसकी पैंट फट गयी तो इसी लिये उसने पैंट चेंज कर के लुँगी बाँध ली थी।
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RE: हिंदी की सुनी-अनसुनी कामुक कहानियों का संग्रह - by rohitkapoor - 28-01-2026, 10:30 PM



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