27-01-2026, 09:58 PM
(This post was last modified: 28-01-2026, 12:24 AM by rohitkapoor. Edited 2 times in total. Edited 2 times in total.)
एक शाम जब मैं ऑफिस से वापस आ रही थी तो बारिश शुरू हो गयी और मैं उसकी दुकान के सामने आ कर खड़ी हो गयी। बारिश अचानक शुरू हुई थी तो मेरे कपड़े भीग चुके थे और जैसा मैं पहले ही बता चुकी हूँ कि ऑफिस जाने के टाईम पे मैंने ब्रा और फैंटी पहनना छोड़ दिया था तो बारिश में भीगने से मेरे कपड़े मेरे जिस्म से चिपक गये थे और मेरा एक-एक अंग अच्छी तरह से नज़र आ रहा था। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं नंगी हो गयी हूँ। शरम भी थोड़ी आ रही थी पर अब क्या कर सकती थी। ऊपर से आज ऑफिस में एस-के के साथ व्हिस्की के दो तगड़े पैग पी लिये थे और थोड़े नशे में मुझे अपना सिर बहुत हल्का महसुस हो रहा था और ऐसे मौसम में जिस्म में जैसे मीठी सी मस्ती दौड़ रही थी। चूत में अभी भी एस-के की मलाई का गीलापन महसूस दे रहा था।
अनिल अकेला ही था दुकान में। उसने मुझे अंदर बुलाया और मैं उसकी दुकान के अंदर आ गयी। उसने एक गद्देदार स्टूल दिया मेरे बैठने के लिये। उसे शायद मेरी साँसों में व्हिस्की की महक़ आ गयी थी और मुझे ठंड से काँपते देख वो बोला कि “आपके लिये चाय मंगवाऊँ या शायद आप रम प्रेफर करेंगी... मेरे पास ओल्ड कास्क रम है इस वक्त।“ मैं मना नहीं कर सकी.... ठंड बहुत लग रही थी। थोड़ी देर पहले ही एस-के के ऑफिस में व्हिस्की पी थी तो अब चाय पीने से बेमेल हो सकता था। इसलिये मैंने कहा कि इस मौसम में रम ही ठीक रहेगी। मैं स्टूल पे बैठ गयी और उसने मुस्कुराते हुए अपनी दराज़ में से रम की बोतल निकाल कर एक ग्लास में थोड़ी सी डाल कर मुझे दी। मैंने दो घूँट में ही पी ली.... ठंड में रम बहुत अच्छी लग रही थी। मैंने ग्लास रखा तो इससे पहले मैं मना करती, उसने थोड़ी सी और मेरे ग्लास में डाल दी और इस बार दूसरे ग्लास में अपने लिये भी थोड़ी सी डाल दी। वो धीरे-धीरे सिप कर रहा रहा था और मुझे देख रहा था। हम दोनों कभी इधर उधर की बातें भी कर लेते। उसने मुझे बताया कि वो कॉमर्स का ग्रेजुयेट है और फैशन डिज़ाईनिंग का कोर्स भी कर रहा है। इसी लिये ट्रायल के तौर पे लेडीज़ टेलर की दुकान खोल ली है। उसका घर कहीं और था लेकिन दुकान हमारे इलाके में थी। वो डेली आता जाता था अपनी मोटर बाईक पर। उसने मेरे बारे में भी पूछा। उसने मेरे ड्रेसिंग सेंस की भी काफी तारीफ की। वो बोला, कि “मैंने आपको कईं बार यहाँ से गुज़रते देखा है और आप हमेशा ही लेटेस्ट फैशन के कपड़े बहुत ही एप्रोप्रियेटली पहनती हैं... और आपकी चाल तो बिल्कुल किसी मॉडल जैसी है।“ मैं उसकी बात सुन कर हँस दी। ऐसे ही हम बातें करते रहे। थोड़ी देर के बाद बारिश रुक गयी तो मैं उसको थैंक यू कह कर जाने लगी तो उसने कहा कि “इसमें थैंक यू की क्या बात है मैडम.... कभी हमें अपनी खिदमत का मौका दें तो हमें खुशी होगी।“ वॉव.... जब उसने मैडम कहा तो मुझे अनिल एक दम से बहुत ही अच्छा लगने लगा। उसकी ज़ुबान से अपने लिये मैडम सुन कर मुझे बहुत ही अच्छा लगा और मैं किसी छोटे बच्चे की तरह खुश हो गयी। फिर उसने पूछा कि “मैडम, आप ठीक हैं ना... आप कहें तो मैं आप के साथ घर तक चलूँ।“ उसका मतलब समझकर मैंने हंस कर कहा कि “नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है.... मैं ठीक से चल सकती हूँ.... मुझे अक्सर ड्रिंक्स लेने की आदत है... और फिर तुम्हारे दुकान छोड़कर मेरे साथ आने से कस्टमर्स को परेशानी होगी।“
फिर मैं धीरे-धीरे बड़े एहतियात से चल कर घर आ गयी क्योंकि एक तो सड़क पर काफी पानी भर गया था और मैंने महसूस किया कि मेरे कदम बीच-बीच में काफी लड़खड़ा जाते थे। किस्मत से मैं कहीं गिरी नहीं और महफूज़ घर पहुँच गयी। उस रात जब मैं सोने के लिये बेड पर लेटी तो मेरे ज़हन में अनिल ही घूमता रहा। उसका रम पिलाना और रम का ग्लास देते-देते मेरे हाथ से अपने हाथ टच करना, मुझे मीठी-मीठी नज़रों से देखना और फैशन मॉडल्स से मुझे तशबीह देना और खासकर के मुझे मैडम कहना और ये कहना कि हमें भी अपनी खिदमत का मौका दें तो हमें खुशी होगी....। मुझे ये सब याद आने लगा तो मैं खुद-ब-खुद मुस्कुराने लगी और सोचने लगी के कौनसी खिदमत का मौका देना है अनिल को और ये सोचते ही एक दम से मेरी चूत गीली हो गयी और मेरी उंगली अपने आप ही चूत के अंदर घुस गयी और मैं क्लीटोरिस का मसाज करने लगी। मैंने अपनी उंगली को चूत के सुराख में घुसेड़ कर अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया और सोचने लगी कि अनिल कैसा चोदता होगा? वैसे उससे चुदवाने का ऐसा मेरा कोई इरादा तो नहीं था पर ये खयाल आते ही मैं झड़ गयी और थोड़ी देर में गहरी नींद सो गयी। सुबह उठी तो सबसे पहले सोच लिया कि अनिल से अपने कुछ सलवार-कमीज़ सिलवाऊँगी।
अनिल अकेला ही था दुकान में। उसने मुझे अंदर बुलाया और मैं उसकी दुकान के अंदर आ गयी। उसने एक गद्देदार स्टूल दिया मेरे बैठने के लिये। उसे शायद मेरी साँसों में व्हिस्की की महक़ आ गयी थी और मुझे ठंड से काँपते देख वो बोला कि “आपके लिये चाय मंगवाऊँ या शायद आप रम प्रेफर करेंगी... मेरे पास ओल्ड कास्क रम है इस वक्त।“ मैं मना नहीं कर सकी.... ठंड बहुत लग रही थी। थोड़ी देर पहले ही एस-के के ऑफिस में व्हिस्की पी थी तो अब चाय पीने से बेमेल हो सकता था। इसलिये मैंने कहा कि इस मौसम में रम ही ठीक रहेगी। मैं स्टूल पे बैठ गयी और उसने मुस्कुराते हुए अपनी दराज़ में से रम की बोतल निकाल कर एक ग्लास में थोड़ी सी डाल कर मुझे दी। मैंने दो घूँट में ही पी ली.... ठंड में रम बहुत अच्छी लग रही थी। मैंने ग्लास रखा तो इससे पहले मैं मना करती, उसने थोड़ी सी और मेरे ग्लास में डाल दी और इस बार दूसरे ग्लास में अपने लिये भी थोड़ी सी डाल दी। वो धीरे-धीरे सिप कर रहा रहा था और मुझे देख रहा था। हम दोनों कभी इधर उधर की बातें भी कर लेते। उसने मुझे बताया कि वो कॉमर्स का ग्रेजुयेट है और फैशन डिज़ाईनिंग का कोर्स भी कर रहा है। इसी लिये ट्रायल के तौर पे लेडीज़ टेलर की दुकान खोल ली है। उसका घर कहीं और था लेकिन दुकान हमारे इलाके में थी। वो डेली आता जाता था अपनी मोटर बाईक पर। उसने मेरे बारे में भी पूछा। उसने मेरे ड्रेसिंग सेंस की भी काफी तारीफ की। वो बोला, कि “मैंने आपको कईं बार यहाँ से गुज़रते देखा है और आप हमेशा ही लेटेस्ट फैशन के कपड़े बहुत ही एप्रोप्रियेटली पहनती हैं... और आपकी चाल तो बिल्कुल किसी मॉडल जैसी है।“ मैं उसकी बात सुन कर हँस दी। ऐसे ही हम बातें करते रहे। थोड़ी देर के बाद बारिश रुक गयी तो मैं उसको थैंक यू कह कर जाने लगी तो उसने कहा कि “इसमें थैंक यू की क्या बात है मैडम.... कभी हमें अपनी खिदमत का मौका दें तो हमें खुशी होगी।“ वॉव.... जब उसने मैडम कहा तो मुझे अनिल एक दम से बहुत ही अच्छा लगने लगा। उसकी ज़ुबान से अपने लिये मैडम सुन कर मुझे बहुत ही अच्छा लगा और मैं किसी छोटे बच्चे की तरह खुश हो गयी। फिर उसने पूछा कि “मैडम, आप ठीक हैं ना... आप कहें तो मैं आप के साथ घर तक चलूँ।“ उसका मतलब समझकर मैंने हंस कर कहा कि “नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है.... मैं ठीक से चल सकती हूँ.... मुझे अक्सर ड्रिंक्स लेने की आदत है... और फिर तुम्हारे दुकान छोड़कर मेरे साथ आने से कस्टमर्स को परेशानी होगी।“
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