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Misc. Erotica हिंदी की सुनी-अनसुनी कामुक कहानियों का संग्रह
डॉली ने कहा कि क्या हुआ आँटी ??” तो मैं अपने सपनों से बाहर आ गयी और उससे कहा कि नहीं कोई खास बात नहीं.... मैं तुम्हारी मम्मी और डैडी के बारे में सोच रही थी.... तुम बहुत शरारती हो... अपने मम्मी-डैडी की चुदाई देखती हो.... और तुम्हें कैसे पता ये चुदाई है?” वो बोली,आँटी, मैं बच्ची नहीं हूँ.... सब समझती हूँ। ये कहकर वो हँस पड़ी। तो और क्या-क्या करती हो तुम छुप कर... मैंने मुस्कुराते हुए पूछा। वो थोड़ा शर्मा गयी और बोली, आँटी आप भी ना...! मैंने फिर उसे उकसाया तो उसने बताया कि उसने अपने पेरेंट्स की ब्लू फिल्मों की सी-डियाँ कई बार छुप कर देखी हैं और शराब भी पी है। मैं उसकी बातें सुनकर गरम हो गयी थी। मैं अपनी टाँगें फ़ोल्ड करके उसकी दोनों टाँगों के बीच में बैठी थी और मैंने उसकी दोनों टाँगों को फैला करके तेल दोनों जाँघों पे डाल दिया और धीरे-धीरे पहले तो तेल फैलाया और फिर मालिश करने लगी। उसकी दोनों टाँगों को अपनी मुड़ी हुई जाँघों पे रख लिया और डॉली को थोड़ा सा अपनी तरफ़ खींच लिया जिससे वो थोड़ा सा सामने खिसक आयी और उसकी चूत के दोनों लिप्स खुल गये। मैंने देखा कि उसकी चूत अंदर से बहुत पिंक है और छोटी सी क्लीटोरिस चूत के ऊपर टोपी कि तरह है और चिकनी चूत मस्त लग रही थी। मेरा बहुत मन कर रहा था कि मैं उसकी मक्खन जैसी चूत को सहलाऊँ, मसाज करूँ और उसकी चूत को चूम लूँ पर ऐसा करने से अपने आपको रोक लिया। मैं बस उसकी जाँघों की ही मालिश कर रही थी।
 
मैंने डॉली से पूछा कि कैसा लग रहा है तो उसने कहा कि बहुत अच्छा लग रहा है आँटी, थोड़ा सा और ऊपर तक दर्द हो रहा है और उसने अपनी चूत के करीब हाथ रख कर बताया कि करीब यहाँ तक दर्द हो रहा है तो मैं और ज़्यादा ऊपर तक मालिश करने लगी। उसकी जाँघें बहुत ही हसीन थी क्योंकि वो डाँस सीख रही थी और डाँस क्लास अटेंड करती थी। मालिश करते वक्त मेरी चूचियाँ आगे पीछे हो रही थीं तो डॉली उनको गौर से देख रही थी। मेरी नज़र डॉली पे पड़ी कि वो मेरी चूचियाँ देख रही है तो मैंने मुस्कुराते हुए पूछा, क्या देख रही हो डॉली?” तो वो शर्मा गयी और बोली कि ये मुझे अच्छे लग रहे हैं, पता नहीं मेरे कब इतने बड़े होंगे। मैंने कहा, फिक्र ना करो.... जल्दी ही बड़े हो जायेंगे.... दो या तीन साल में ही बड़े हो जायेंगे। उसने पूछा कि और क्या क्या होगा मेरे जिस्म में, तो मैंने उसकी मोसंबी जैसी चूचियों को पकड़ के कहा कि ये बड़े हो जायेंगे.... इतने बड़े कि पूरे हाथ में समा जायें। मेरे हाथ उसकी चूचियों पे लगते ही उसके मुँह से एक आआहह निकल गयी तो मैंने पूछा, क्या हुआ डॉली.... क्या दर्द हो रहा है?” तो उसने कहा नहीं आँटी, आप के यहाँ हाथ रखने से बहुत अच्छा लगा और मुझे बहुत मज़ा आया तो मैं हँस पड़ी और उसकी चूचियों को अपने दोनों हाथों में पकड़ कर दबा दिया। उसने फिर से सिसकरी ली तो मैं समझ गयी कि ये लड़की बेहद गरम है और जवानी में तो कयामत बन जायेगी।
 
जाँघों पे मालिश करते-करते मेरे अंगूठे उसकी चूत के मोटे-मोटे लिप्स तक आ रहे थे और जब भी अंगूठा उसकी चूत से टकराता तो वो अपने चूतड़ उछाल देती और सिसकरी लेती। मैंने पूछा,क्या हो रहा है?” तो वो बोली कि बहुत मज़ा आ रहा है आँटी, अब जाँघों को छोड़ कर यहीं पे करो ना मालिश। मुझे भी अपने कॉलेज के टाईम का अपनी क्लासमेट ताहिरा के साथ चूतों से खेलना और सिक्स्टी-नाईन पोज़िशन में एक दूसरे की चूतों को चाटना याद गया तो मैं सब कुछ भूल कर डॉली की चूत का मसाज करने लगी और अपनी अँगुलियों से उसकी क्लिटोरिस को मसलने लगी। उसके मुँह से बस सिसकारियाँ ही निकल रही थीं। मैंने डॉली की टाँगों को पकड़ कर थोड़ा और अपनी तरफ़ खींचा तो उसकी टाँगें और खुल गयीं और चूत थोड़ा ऊपर उठ गयी और कुछ और करीब आ गयी। मैं झुक कर उसकी चूत को किस करने लगी। मेरे लिप्स उसकी चूत पे लगते ही उसके मुँह से एक चींख सी निकल गयी और उसने मेरे सिर पर हाथ रख लिया और अपने चूतड़ उछाल के मेरे मुँह पे चूत को रगड़ने लगी। मैंने अपने दोनों हाथ उसके चूतड़ों के नीचे रख कर उसकी चूत को और उठाया और उसकी चिकनी चूत के अंदर ज़ुबान डाल कर उसकी मक्खन जैसी चिकनी चूत को चाटने लगी। उस वक्त मैं अपने आप को वही ग्यारहवीं-बारहवीं में पढ़ने वाली लड़की समझ रही थी और डॉली को अपनी क्लासमेट ताहिरा समझ रही थी और ये बिल्कुल भूल गयी थी कि मैं एक शादी शुदा औरत हूँ और डॉली से काफी बड़ी हूँ। पर उस वक्त मुझे याद था तो बस ताहिरा का मेरे बेड में रहना और हमारा एक दूसरे की चूतों को चाटना। अपने आप को छोटी ग्यारहवीं-बारहवीं की किरन समझते हुए और नीचे लेटी हुई डॉली को ताहिरा समझते हुए मैं पलट गयी और अपनी चूत को डॉली के मुँह पे रख दिया और उसकी गाँड के नीचे हाथ रख कर उसकी चूत को थोड़ा ऊपर उठा लिया और उसकी छोटी सी मक्खन जैसी चूत को चूसने लगी। उसने मेरी चूत में अपनी ज़ुबान डाल दी और मेरी चूत को चूसना शुरू कर दिया। मेरे जिस्म में मस्ती छायी हुई थी और मैं जितनी तेज़ी से अपनी चूत उसके मुँह से रगड़ रही थी, उतनी ही तेज़ी से उसकी चूत को भी चूस रही थी और अपनी ज़ुबान उसकी चूत में डाल कर ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर और पूरी चूत को मुँह में लेकर काटने लगी। 
[Image: 9087108.jpg]
उसने अपने चूतड़ उछाल कर मेरे मुँह में चूत को ज़ोर-ज़ोर से रगड़ना शुरू कर दिया और वो जोश में मेरी चूत ज़ोर-ज़ोर से चाटने और चूसने लगी और मेरे जिस्म में एक बिजली सी दौड़ने लगी। मैं काँपने लगी और मुझे महसूस हुआ कि अब मेरा जूस निकलने वाला है और मेरा जिस्म हिलने लगा और मेरी चूत में से जूस निकलने लगा, जिसे डॉली मज़े ले लेकर पीने लगी और एक ही सैकेंड में डॉली काँपने लगी और उसकी चूत में से भी जूस निकल पड़ा। उसकी चूत भी बहुत ही नमकीन हो गयी और उसकी आँखें बंद हो गयी थी उसकी चूत से बहुत ज़्यादा जूस निकला। मैं उसके ऊपर ऐसे ही लेटी रही। थोड़ी देर में फिर जब मुझे होश आया तो पलट के उसके बगल में सीधी लेट गयी और बोली कि सॉरी डॉली, पता नहीं मुझे क्या हो गया था.... मुझे तुम्हारे साथ ये सब नहीं करना चहिये था तो उसने कहा नहीं आँटी, आप ऐसा कुछ मत सोचिये.... ये तो मैं अपनी फ्रैंड के साथ कईं दफ़ा कर चुकी हूँ और मुझे इसमें बहुत मज़ा भी आता है। मुझे फिर अपनी फ्रैंड ताहिरा का खयाल आया और मैं सोचने लगी कि शायद ये सब कॉलेज की लड़कियों के लिये नॉर्मल सी बात है और शायद सभी कॉलेज की लड़कियाँ जो एक दूसरे की बेस्ट फ्रैंड्स हैं, छिपछिपा कर ऐसे ही करती हैं।
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RE: हिंदी की सुनी-अनसुनी कामुक कहानियों का संग्रह - by rohitkapoor - 08-01-2026, 09:50 PM



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