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Misc. Erotica हिंदी की सुनी-अनसुनी कामुक कहानियों का संग्रह
एस-के के चले जाने के बाद हम सोने के लिये अपने बेडरूम में चले गये। मुझे टोटल अंधेरे में नंगी सोने की आदत है, इसी लिये सोने के टाईम पे हम नाइट लैंप नहीं लगाते। और ये सोच कर नंगी सोती हूँ कि कभी अशफाक की आँख खुल जाये और उसका मूड आ जाये तो हो सकता है कि कभी मुझे सही तरीके से चोद दे, जब कि ऐसा कभी हुआ नहीं। अंधेरे में लेटे-लेटे अशफाक ने मेरी चूचियों को दबाना और मसलना शुरू किया तो मैंने उसका आधा उठा हुआ लंड अपने हाथ में पकड़ लिया और दबाने लगी। अशफाक का एक हाथ मेरी चूत का मसाज कर रहा था और मैं गरम होने लगी और चूत में से जूस निकलने लगा। अशफाक को हमेशा ही चुदाई की जल्दी होती है, चाहे उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हुआ हो या नहीं। तो आज भी यही हाल था उसका। लंड अभी पूरी तरह से सख्त भी नहीं हुआ था और वो मेरे जिस्म पे चढ़ आया और टाँगों के बीच बैठ कर अपने आधे खड़े लंड को मेरी चूत में रगड़ने लगा। उसके लंड से थोड़ा प्री-कम निकल रहा था, जिससे मेरी चूत स्लिपरी तो हो गयी थी पर उसके लंड में अभी भी सखती नहीं आयी थी। वो मेरे ऊपर झुक आया और लंड को चूत में घुसाने की कोशिश करने लगा और लंड का सुपाड़ा तो अंदर घुस ही गया किसी तरह से। शायद चूत बहुत गीली हो गयी थी उसके प्री-कम से। खैर लंड का सुपाड़ा तो अंदर घुसा और उसने एक झटका मारा और लंड अंदर घुसेड़ने की कोशिश की, पर उसी वक्त उसके लंड में से मलाई निकल गयी और थोड़ी चूत के अंदर और थोड़ी चूत के बाहर ही निकल गयी। मेरे मुँह से "ओह शिट" निकल गया। अशफाक गहरी साँस लेता हुआ मेरे ऊपर से लुढ़क के मेरे बाजू में लेट गया।
 
मैं पूरी तरह से गरम हो चुकी थी और साथ ही खाने के बाद पिये हुए तीन पैग व्हिस्की का नशा-सा भी छाया हुआ था। मेरा मस्ती के मारे बुरा हाल था और चूत में आग लगी हुई थी पर क्या करती। अशफाक अपनी मलाई मेरी चूत के बाहर ही गिरा के बाथरूम चला गया तो मैंने अपनी उंगली चूत में घुसेड़ के अंदर बाहर-करना शुरू कर दिया और एस-के का लंड और उसकी चुदाई का सोचते-सोचते मैं बहुत ज़ोर से झड़ गयी। अशफाक ने बाथरूम से बाहर निकलते-निकलते मुझे अपनी उंगली चूत में डाल कर अंदर-बाहर करते देख लिया पर कुछ बोला नहीं। शायद खुद ही कुछ समझ गया होगा कि मैं ऐसा क्यों कर रही हूँ, क्योंकि वो अच्छी तरह से नहीं चोद सका और मैं प्यासी रह गयी थी, इसी लिये अपने ही हाथों अपनी चूत का मसाज कर रही हूँ। 
 
थोड़ी देर के बाद मैंने न्यू-यॉर्क की बात छेड़ दी। मैं तो दिल से चाहती थी कि मैं एस-के के साथ जाऊँ और हर स्टाईल में खूब चुदवाऊँ। मैंने पूछा, अशफाक.... क्या तुम संजीदा हो मुझे एस-के के साथ भेजने के लिये, तो उसने कहा, हाँ किरन... जा कर आओ.... तुम्हारी भी थोड़ी आऊटिंग हो जायेगी.... कब तक घर में ही पड़ी रहोगी तो मैंने कहा, अशफाक तुमने सोचा है कि तुम क्या कह रहे हो.... अगर मैं चली गयी तो लोग क्या कहेंगे और खुद तुम कैसा फ़ील करोगे कि मैं किसी और मर्द के साथ उसके रूम में अकेली रहुँगी तो....?” अशफाक ने कहा, नहीं किरन, मैं फ्री खयालात का आदमी हूँ और ये ऐसी क्या बात है.... तुम फिक्र ना करो, मैं कुछ सोचने वाला नहीं हूँ। मैंने शरारत से उसके लंड को पकड़ के दबाया और कहा कि अगर एस-के ने मुझे ये दिखा दिया तो मैं क्या करूँ?” अशफाक ने कहा, किरन तुम्हें पता है.... एस-के का लंड इतना मोटा और बड़ा है.... उसने अपने हाथ में अंगुलियों को मिला के कहा जो मुझे अंधेरे में नज़र आ गया। मैंने पूछा,मुझे क्या करना है.... पर तुम्हें कैसे मालूम एस-के के लंड के बारे में?” तो उसने बताया कि पहली दफ़ा तो उसने कॉलेज में ही इंटरवल के टाईम पे क्लास में ही अपना लंड निकाल कर सारी क्लास को दिखाया था। मैंने कहा, क्या बात करते हो.... ऐसे कैसे कोई क्लास में सबके सामने दिखा सकता है.... लेक्चरर नहीं थे क्या?” तो उसने कहा कि,एक दिन हम कॉलेज में थे तो बारिश होने लगी और बहुत ज़ोर की होने लगी। उस दिन लेक्चरर क्लास में नहीं आये और फिर एस-के को पिशाब करना था.... बाहर जाना मुश्किल था तो किसी ने मज़ाक से कहा कि अरे यार खिड़की में खड़े हो जाओ और मूत दो तो उसने सच में ऐसे ही किया और अपने बेंच पे खड़ा हो गया और विंडो में खड़े हो कर पैंट में से लंड बाहर निकाला और मूतने लगा। सारे लड़के और लड़कियाँ हैरत से देखने लगे और जितनी देर तक वो मुतता रहा, सारे लड़के और लड़कियाँ उसके इतने मोटे और बड़े लंड को देखते रहे। फिर अशफाक ने कहा कि, अगर तुम्हें भी कभी चाँस मिले तो तुम भी देखना.... मैंने तो कभी किसी का इतना बड़ा और इतना मोटा लंड नहीं देखा। अब मैं अशफाक से कैसे कहती कि मैं उस लंड को जिसकी वो इतनी तारीफ कर रहा है, मैं अपने जिस्म के हर छेद में वो वंडरफुल लंड डलवा चुकी हूँ और उसकी क्रीम खा के पेट भी भर चुकी हूँ। मैंने कहा, धत्त मैं क्या करुँगी उसका लंड देख कर??? मुझे तो बस तुम्हारा ही लंड चाहिये.... मुझे किसी और के लंड से क्या लेना देना है, तो वो हँसने लगा और कहा कि, वो तो है ही पर अगर कभी चाँस मिले तो ट्राई ज़रूर कर लेना। मैंने बात खतम करने के लिये कहा कि, ठीक है.... देखेंगे और फिर हम दोनों सो गये।
 
उस रात हम देर तक एस-के की बातें करते रहे थे। इसी लिये सुबह देर से उठे और शॉवर लिया और ब्रेकफॉस्ट तैयार करके टेबल पे बैठ के नाश्ता करने लगे। नाश्ता करते-करते तकरीबन दस बज चुके थे तो अशफाक ने कहा कि उसको देर हो रही है.... और वो रेडी होने के लिये चला गया। इतनी देर में मैं कॉफी बना कर ले आयी। अशफाक रेडी हो के आये तो कॉफी रेडी थी। हम दोनों कॉफी पीने लगे। इतने में ही बेल बजी। मैंने डोर खोला तो एस-के खड़ा था। अंदर आते ही कहा, अरे इतनी देर से नाश्ता कर रहे हो.... क्या बात है?” तो हमने कहा कि हाँ रात देर तक बातें कर रहे थे और सोने तक बहुत रात हो गयी थी, इसी लिये सुबह देर से आँख खुली। मैं एक और कप कॉफी लेकर आ गयी और एस-के को दे दिया तो वो भी कॉफी पीने लगा और बोला कि वाह.... क्या मस्त कॉफी बनायी है आज किरन ने! अशफाक ने कहा कि सुनो एस-के, रात हमने फैसला कर लिया है और किरन तुम्हारे साथ जाने के लिये रेडी हो गयी है.... तो बाकी के इंतज़ामात मैं तुम पर छोड़ देता हूँ.... तुम जैसे चाहो कर लो... मुझे एक्सपेंस बता देना और हाँ! शायद मुझे भी कुछ दिनों के लिये मुंबई जाना पड़े। मैं मुंबई चला जाऊँगा और तुम दोनों न्यू-यॉर्क चले जाना। एस-के ने कहा, ठीक है अगर तुम दोनों ने मिल के फैसला किया है तो मुझे क्या प्रॉबलम हो सकती है.... मैं सारे इंतज़ाम कर लूँगा।
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RE: हिंदी की सुनी-अनसुनी कामुक कहानियों का संग्रह - by rohitkapoor - 08-01-2026, 09:33 PM



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