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Misc. Erotica हिंदी की सुनी-अनसुनी कामुक कहानियों का संग्रह
इसी तरह से पूरा एक वीक, एस-के मेरे साथ ही रहा। हम दिन-रात अलग-अलग स्टाईल में चुदाई करते रहे और मस्ती में टाईम गुजरता रहा। उस पूरे वीक में मैं सिर्फ हाई-हील के सैंडल ही पहने, बिल्कुल नंगी रही। एक वीक के बाद अशफाक वापस आ गये तो उन्होंने पूछा कि मेरा काम कैसे चल रहा है तो मैंने कह कि,हाँ ठीक ही चल रहा है.... एस-के यहाँ ही आ कर मुझे सब कुछ सिखा देते हैं। 

अशफाक ने आँख मार कर कहा कि कुछ हमें भी तो बताओ कि अब तक क्या क्या सिखा दिया है हमारी प्यारी सी किरन जान को.... तो मेरे मुँह पे खुद-ब-खुद शरम आ गयी और अशफाक मुझे गौर से देखने लगा और कहा कि,किरन! एस-के मेरा सबसे प्यारा दोस्त है.... देखना कि उसको कोई तकलीफ ना हो और जब वो घर पे ही आता है काम सिखाने के लिये तो उसका पूरा खयाल भी रखा करो। 

मैंने मुस्कुरा कर सर हिला दिया और कहा कि ठीक है, मैं एस-के के पूरा खयाल रखुँगी, तुम फिक्र ना करो। ऐसी ही दो मतलब की बातें हुई जिससे मुझे एक आयडिया तो हो गया कि अगर एस-के मुझे चोद भी दे तो अशफाक कोई फ़ील नहीं करेगा और मुझे ख़याल आया के शायद अशफाक चाहता भी यही हो के एस-के मुझे चोदे और मुझे मुतमाइन करे। खैर ये मेरा और एस-के कि चुदाई का सिलसिला चलता रहा। अब तो जैसे एस-के ही मेरा शौहर था। वो ही मुझे चोदता था और मैं उसके चोदने से बिल्कुल मुतमाइन थी।

 
एक टाईम हमने एस-के को डिनर पे बुलाया। हम तीनों ने खाना खाया। डिनर के बाद सोफ़े पे बैठे व्हिस्की पी रहे थे तो अशफाक ने एस-के से कहा कि एस-के! किरन तुम्हारी बहुत तारीफ करती है कि तुम उसको काम अच्छी तरह से समझा रहे हो और उसकी पूरी मदद कर रहे हो। मैंने देखा कि एस-के के चेहरे पे एक रंग आ के चला गया। उसने समझा कि शायद अशफाक को उसके और मेरे रिश्ते का किसी तरह से पता चल गया पर एस-के ने कुछ कहा नहीं तो मैंने ही कहा कि हाँ अशफाक! एस-के बहुत ही अच्छी तरह से मुझे काम समझा रहे हैं, तुम फिक्र ना करो और मैं उनका पूरा खयाल भी रख रही हूँ जैसा तुम ने कहा था। 

मैंने देखा कि अशफाक के चेहरे पे इतमिनान दिखने लगा और फिर एस-के ने भी कहा कि यार अशफाक! किरन एक बहुत ही अच्छी लड़की है उसने काम बहुत ही जल्दी सीख लिया और अच्छी तरह से कर भी रही है और हाँ वो मेरा अच्छी तरह से खयाल भी रखती है। 

फिर अशफाक ने कहा, देखो किरन! एस-के कि खिदमत में किसी किस्म की कमी ना रह जाये, तो फिर मैंने कहा कि हाँ, तुम फिक्र ना करो मैं सब देख लूँगी। अशफाक की बातों से ऐसे अंदाज़ा होता था कि हमारे बारे में वो कुछ समझ गया था या हमें आपस में चुदाई का सुझाव दे रहा था। हमारी कुछ समझ में नहीं आ रहा था। खैर हमने सोचा कि अगर अब अशफाक को पता भी चल जाये तो कोई बात नहीं...... जब ऐसी कोई बात आयेगी तो देखा जायेगा।
 
व्हिस्की पीते-पीते हम ऐसे ही बैठे बातें कर रहे थे तो एस-के ने कहा कि कुछ महीनों बाद उसको दो हफतों के लिये न्यू-यॉर्क जाना पड़ रहा है। एस-के ने मज़ाक में कहा कि यार अशफाक! अगर तुम इजाज़त दो तो मैं किरन को भी न्यू-यॉर्क की सैर करा लाऊँ तो अशफाक ने कहा, अरे इसमें पूछने की क्या बात है.... ये तो बड़ी अच्छी बात है.... ले जाओ..... वो यहाँ अकेले में बोर होती रहती है और मेरा कोई ठिकाना भी तो नहीं है.... कभी भी मुझे बिज़नेस के सिलसिले में बिना प्रोग्राम के ही कहीं भी चले जाना पड़ता है तो एस-के ने कहा, नहीं यार! मैं तो मज़ाक कर रहा था तुम तो सीरियस हो गये। 
[Image: image-5.jpg]
अशफाक ने कहा, अरे नहीं यार! मैं सच में संजीदा हूँ.... अगर तुम्हें कोई प्रॉबलम ना हो.... आई मीन कि कोई बिज़नेस की प्रॉबलम..... तो एस-के ने कहा, नहीं यार! मुझे किया प्रॉबलम हो सकती है। अशफाक ने कहा, तो फिर क्या प्रॉबलम है ले जाओ किरन को अपने साथ यार..... मैं कह रहा हूँ ना। अशफाक और एस-के ऐसे ही बातें कर रहे थे और मैं कभी अशफाक की सूरत देखती तो कभी एस-के की और समझने की कोशिश कर रही थी कि कहीं ये दोनों वाकय संजीदा हैं या दोनों ही मज़ाक कर रहे हैं।
 
एस-के ने कहा, देखो यार मुझे ले जाने में कोई ऐसी प्रॉबलम तो नहीं है पर तुम्हें तो पता है कि वहाँ कान्फ्रेंस में जा रहा हूँ और कान्फ्रेंस वाले जिस फाइव-स्तार होटल में कान्फ्रेंस होती है उअसी होटल मेरं एक कमरा देते हैं। एक तो उसी होटल में दूसरा कमरा मिलना मुश्किल होगा और मिला भी तो एक दिन का किराया ही बीस-हज़ार रुअप्ये के हिसाब से दो हफ्तों के डेढ़-लाख लग जायेंगे... वैसे भी डबल बेड के रूम में एक ही बेड होता है, रहने दो.... मैं तो ऐसे ही मज़क कर रहा था। 

अशफाक ने कहा अरे यार..... ऐसी भी क्या बात है.... एक ही रूम में रह लेना और मेरी तरफ़ मुड़ कर अशफाक ने पूछा कि क्यों किरन.... तुम रह सकती हो ना एस-के के साथ एक ही रूम में?? बेड के एक तरफ़ तुम सो जाना और एक तरफ़ एस-के सो जायेगा तो मैंने शरम से लाल लाल हो के कहा, तुम भी कैसी बातें करते हो अशफाक..... बिना सोचे समझे.... तुम्हें कुछ पता भी है कि तुम क्या कह रहे हो?” 

उसने कहा, अरे यार किरन.... जाओ थोड़ा घूम फिर कर आओ.... बाहर की दुनिया देख लो..... इंडिया में कहाँ-कहाँ फिरोगी.... मैं तो तुम्हें नहीं ले जा सकता..... एस-के के साथ जाने में क्या प्रॉबलम है?” 

मैंने कहा, क्या अशफाक.... तुम भी ना ऐसे-ऐसे प्रपोज़ल दे रहे हो जो तुम भी जानते हो कि कभी नहीं हो सकता, तो अशफाक ने कहा, क्यों नहीं हो सकता??? अरे बाबा मैं तुम्हें परमिशन दे रहा हूँ ना और एस-के मेरा बचपन का दोस्त है और हम दोनों ने बहुत मस्तियाँ भी की हैं.... मैं एस-के को अच्छी तरह से जानता हूँ। 

फिर अशफाक और एस-के दोनों साथ में हँसने लगे और एस-के ने कहा, क्या यार अशफाक.... जाने दो ना.... किरन के सामने क्या हमारी पुरानी बातें लगाये बैठे हो तुम.... वो भी क्या सोचेगी हमारे बारे में। 

मैंने हँस के कहा, नहीं मैं कुछ नहीं सोचने वाली.... जवानी में तो हर कोई इंजॉय करता ही है.... हो सकता है आप लोगों ने भी कुछ ऐसे ही इंजॉय किया होगा, मैंने आँख मारते हुए कहा तो अशफाक ने कहा कि, हाँ बाबा! तुम भी तो जवान हो जाओ और थोड़ा इंजॉय कर के आओ... कमरे की फिक्र मत करो... मैं खर्चा उठाने को तैयार हूँ। 

एस-के ने बात खतम करते हुए कहा कि यार..... अभी तो टाईम पड़ा है..... तुम दोनों मिल के सोर्ट ऑउट कर लो..... मुझे तो कोई प्रॉबलम नहीं है.... किरन मेरे साथ जा सकती है..... ऐसी कोई बात नहीं। जब तुम लोग निर्णय करलो तो बता देना..... मैं सारे इंतज़ाम कर लूँगा। फिर अशफाक से हाथ मिला कर और मेरे कंधे पे हाथ रख कर अपनी तरफ़ थोड़ा सा खींचा और गूड-बॉय कह कर वो चला गया।
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RE: हिंदी की सुनी-अनसुनी कामुक कहानियों का संग्रह - by rohitkapoor - 02-01-2026, 08:27 PM



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