02-01-2026, 08:23 PM
(This post was last modified: 09-01-2026, 08:28 PM by rohitkapoor. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
एस-के ने अपना लंड तेल के डिब्बे में डाल कर पूरी तरह से तेल से भर लिया। फिर वो मेरे ऊपर आ गया और चूतड़ों के बीच में लंड रख कर मेरे ऊपर झुक गया और मेरे कंधों को मालिश करने लगा। उसका लंड दोनों चूतड़ों के बीच में ऊपर-नीचे ऊपर-नीचे हो रहा था। कभी-कभी लंड का सुपाड़ा फिसल के चूत के सुराख में घुस जाता तो मुझे बहुत मज़ा आता और कभी फिसल के गाँड के सुराख में अटक जाता तो मुझे तकलीफ होती पर मैंने कुछ कहा नहीं क्योंकि तकलीफ उतनी ज़्यादा नहीं होती थी। उसका लंड बिना गाँड के सुराख में घुसे, चूतड़ों की खायी में ऊपर नीचे हो रहा था। अब वो फिर से मेरे जिस्म पे झुका हुआ था और पीठ की मालिश कर रहा था जिससे उसका लंड गाँड के सुराख से टकरा रहा था। उसने बहुत सा तेल फिर से मेरी गाँड में डाल दिया और अपने लंड के सुपाड़े को गाँड के सुराख में घुसा कर ऊपर से तेल टपकाने लगा जिससे तेल डायरेक्ट उसके सुपाड़े पर और गाँड के छेद में गिरता हुआ मुझे महसूस हो रहा था। ऐसे ही करते-करते वो प्रेशर दे रहा था तो सुपाड़ा पूरा अंदर चला गया। मेरी गाँड खुलने-बंद होने लगी। उसने कहा, “रिलैक्स किरन!” तो मैं चौंकी और कहा, “नहीं एस-के प्लीज़..... गाँड मे नहीं डालना नहीं तो मैं मर जाऊँगी।“ एस-के ने कहा “तुम फिक्र ना करो किरन, तुम्हें कोई तकलीफ नहीं होगी.... मैं गारंटी देता हूँ”, तो मैंने कहा, “नहीं प्लीज़!” तो एस-के ने कहा कि “तुम हमारी शर्त को भूल रही हो।“ मैंने पूछा “कैसी शर्त?” एस-के ने कहा, “ओह तुम मेरी शर्त भूल गयी क्या? रात यहीं गुज़ारने की?” तो मुझे अचानक याद आ गया और मैं घबरा गयी। तब समझ में आया कि ये किस शर्त की बात कर रहा है। पर अब क्या हो सकता था और अब मुझे यकीन हो गया कि आज मेरी गाँड की खैर नहीं। एस-के मेरी गाँड मारे बिना छोड़ने वाला नहीं। मैं डर रही थी पर कुछ कर भी नहीं सकती थी।
मैं एस-के की मिन्नतें करने लगी कि प्लीज़ गाँड मारने को छोड़ के कोई भी शर्त मंज़ूर है तो उसने कहा, “अब नहीं हो सकता.... तुमने कहा था कि तुम्हें मेरी हर शर्त बिना सुने ही मंज़ूर है।“ एस-के ने कहा, “देखो किरन, आज तो मैं तुम्हारी गाँड ज़रूर मारूँगा और अगर तुम अपनी गाँड को टाइट करोगी तो तुम्हें तकलीफ होगी। तुम्हारी गाँड में फ़ुल तेल लगा हुआ है और अगर तुम अपनी गाँड को बिल्कुल रिलैक्स कर दोगी तो बिल्कुल भी तकलीफ नहीं होगी और लंड आसानी गाँड के अंदर फिसल जायेगा क्योंकि मैं मेरे लंड को और तुम्हारी गाँड को तेल से चिकना कर चुका हूँ..... तो बेहतर यही है कि तुम रिलैक्स हो जाओ और गाँड में लंड लेने का मज़ा लो।“ मैंने सोचा कि आज तो मेरी गाँड इस लौड़े से नहीं बच सकती तो क्यों ना एस-के जैसे कहता है, मैं वैसे ही करती रहूँ। ये खयाल आते ही मैंने अपनी गाँड को रिलैक्स कर दिया और गहरी-गहरी साँस लेने लगी जिससे मेरी गाँड कुछ रिलैक्स हुई। मैंने फिर कहा, “देखो एस-के बहुत धीरे करना, नहीं तो मेरी गाँड फट जायेगी।“ एस-के ने हँस कर कहा, “तो क्या हुआ..... चूत भी तो फट चुकी है तुम्हारी.... अब अगर गाँड भी फट जायेगी तो क्या प्रॉबलम है।“ मैंने कहा, “मुझे बहुत दर्द होगा” तो उसने कहा कि “तुम गाँड को रिलैक्स रखो इससे तुम्हें कोई दर्द नहीं होगा, ओके?” तो मैंने भी कहा, “ओके।“
अब वो फिर से मालिश करने लगा। लंड का सुपाड़ा ऐसे ही गाँड के छेद में ही टिका हुआ था। उसने थोड़ा सा और तेल खुली हुई गाँड में टपकाया और लंड के सुपाड़े को अंदर-बाहर करने लगा। अब उसका लंड और मेरी गाँड, बहुत ही चिकने हो चुके थे और सुपाड़ा आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था। एस-के अब मेरे ऊपर फिर से झुक कर करीब लेट गया और मेरे कंधों को ऐसे पकड़ लिया कि उसके दोनों हाथ मेरी दोनों चूचियों के बीच में थे, जिससे मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। उसने धीरे-धीरे अपनी गाँड उठा-उठा कर लंड के सुपाड़े को मेरी गाँड के अंदर-बाहर अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। दोनों के जिस्म चिकने होने से फिसल रहे थे। तकिया मेरी गाँड के नीचे होने से गाँड ऊपर उठ गयी थी और लंड को अंदर आने की दावत दे रही थी। एस-के ने सुपाड़ा अंदर-बाहर करते-करते एक जम के झटका दिया तो लंड तकरीबन आधा गाँड के अंदर घुस गया और मेरे मुँह से एक चींख निकल गयी “हाय.... मैं मर गयीईईईईईई..... निकाल लो इसे आआआआहहहह।“ वो थोड़ी देर ऐसे ही आधा लंड अंदर घुसेड़ कर मेरे ऊपर लेटा रहा। मेरी गाँड एस-के के लंड से कुछ एडजस्ट हुई तो फिर एस-के थोड़ा सा ऊपर उठ गया और फिर से अपने लंड पे, जो आधा मेरी गाँड के अंदर घुसा हुआ था, उसके डंडे पे तेल उढ़ेलने लगा और लंड को अंदर बाहर करने लगा। तेल उढ़ेलने से लंड का डंडा और स्लिपरी हो चुका था और गाँड का सुराख भी स्लिपरी हो गया था।
एस-के ने कहा, “किरन अब तुम थोड़ा सा ऊपर उठ कर अपने नीचे से तकिया निकल लो..... अब उसकी ज़रूरत नहीं है...... ऐसे ही नीचे रहेगा तो तुम्हें और दर्द होगा।“ मैं थोड़ा सा उठी और एस-के ने मेरे नीचे से तकिया निकाल लिया। एस-के ने कहा, “किरन अब तुम अपनी गाँड को थोड़ा सा ऊपर उठा लो” तो मैंने अपने चूतड़ों को थोड़ा ऊपर उठा लिया। अब मैं बेड पे उलटी लेटी थी और मेरी गाँड थोड़ी सी ऊपर उठी हुई थी और एस-के का मूसल लंड गाँड में आधा अंदर घुसा हुआ था। एस-के ने फिर से अपने हाथ मेरे जिस्म के नीचे से डाल के कंधों को पकड़ लिया और उसके हाथ मेरी चूचियों से लगने लगे। दोनों हाथ दोनों चूचियों के बीच में थे। दोनों थोड़ी देर तक ऐसे ही चिपके हुए लेटे रहे। अब मेरी गाँड उसके लंड से पूरी तरह एडजस्ट हो चुकी थी और मेरी गाँड अपने आप ही थोड़ी सी उठ गयी और गाँड के सुराख के मसल थोड़े रिलैक्स हुए तो एस-के ने समझ लिया कि अब मैं अच्छी तरह से गाँड मरवाने के लिये रेडी हूँ। उसने अपने लंड को आधा ही अंदर-बाहर अंदर-बाहर करके मेरी गाँड मारनी शुरू कर दी। अब मुझे भी अच्छा लगने लगा और मैं मज़े लेने लगी। लंड और गाँड दोनों बहुत ही चिकने और स्लिपरी हो चुके थे। मेरी साँसें अब ठीक से चलने लगी थी। एस-के ऐसे ही गाँड के अंदर आधा लंड घुसा के धक्के मारता रहा और फिर मेरे कंधों को ज़ोर से पकड़ कर इतनी ज़ोर से झटका मारा कि मैं चिल्ला पड़ी, “ऊऊऊईईईई अल्लाहहह....आआआआ मर गयी...ईईईईईई ऊऊऊऊऊऊऊ निकाल लो!!” पर अब उसका लंड पूरा जड़ तक मेरी गाँड में घुस चुका था और मुझे उसका लंड गाँड फाड़ कर पेट में से घुस कर मुँह से बाहर तक निकलता हुआ महसूस होने लगा। दर्द से मेरी आँखें बाहर निकल गयी और साँसें रुक गयीं और मेरे सामने अंधेरा छाने लगा। शायद मैं फिर से बेहोश हो गयी थी।
मैं एस-के की मिन्नतें करने लगी कि प्लीज़ गाँड मारने को छोड़ के कोई भी शर्त मंज़ूर है तो उसने कहा, “अब नहीं हो सकता.... तुमने कहा था कि तुम्हें मेरी हर शर्त बिना सुने ही मंज़ूर है।“ एस-के ने कहा, “देखो किरन, आज तो मैं तुम्हारी गाँड ज़रूर मारूँगा और अगर तुम अपनी गाँड को टाइट करोगी तो तुम्हें तकलीफ होगी। तुम्हारी गाँड में फ़ुल तेल लगा हुआ है और अगर तुम अपनी गाँड को बिल्कुल रिलैक्स कर दोगी तो बिल्कुल भी तकलीफ नहीं होगी और लंड आसानी गाँड के अंदर फिसल जायेगा क्योंकि मैं मेरे लंड को और तुम्हारी गाँड को तेल से चिकना कर चुका हूँ..... तो बेहतर यही है कि तुम रिलैक्स हो जाओ और गाँड में लंड लेने का मज़ा लो।“ मैंने सोचा कि आज तो मेरी गाँड इस लौड़े से नहीं बच सकती तो क्यों ना एस-के जैसे कहता है, मैं वैसे ही करती रहूँ। ये खयाल आते ही मैंने अपनी गाँड को रिलैक्स कर दिया और गहरी-गहरी साँस लेने लगी जिससे मेरी गाँड कुछ रिलैक्स हुई। मैंने फिर कहा, “देखो एस-के बहुत धीरे करना, नहीं तो मेरी गाँड फट जायेगी।“ एस-के ने हँस कर कहा, “तो क्या हुआ..... चूत भी तो फट चुकी है तुम्हारी.... अब अगर गाँड भी फट जायेगी तो क्या प्रॉबलम है।“ मैंने कहा, “मुझे बहुत दर्द होगा” तो उसने कहा कि “तुम गाँड को रिलैक्स रखो इससे तुम्हें कोई दर्द नहीं होगा, ओके?” तो मैंने भी कहा, “ओके।“
अब वो फिर से मालिश करने लगा। लंड का सुपाड़ा ऐसे ही गाँड के छेद में ही टिका हुआ था। उसने थोड़ा सा और तेल खुली हुई गाँड में टपकाया और लंड के सुपाड़े को अंदर-बाहर करने लगा। अब उसका लंड और मेरी गाँड, बहुत ही चिकने हो चुके थे और सुपाड़ा आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था। एस-के अब मेरे ऊपर फिर से झुक कर करीब लेट गया और मेरे कंधों को ऐसे पकड़ लिया कि उसके दोनों हाथ मेरी दोनों चूचियों के बीच में थे, जिससे मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। उसने धीरे-धीरे अपनी गाँड उठा-उठा कर लंड के सुपाड़े को मेरी गाँड के अंदर-बाहर अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। दोनों के जिस्म चिकने होने से फिसल रहे थे। तकिया मेरी गाँड के नीचे होने से गाँड ऊपर उठ गयी थी और लंड को अंदर आने की दावत दे रही थी। एस-के ने सुपाड़ा अंदर-बाहर करते-करते एक जम के झटका दिया तो लंड तकरीबन आधा गाँड के अंदर घुस गया और मेरे मुँह से एक चींख निकल गयी “हाय.... मैं मर गयीईईईईईई..... निकाल लो इसे आआआआहहहह।“ वो थोड़ी देर ऐसे ही आधा लंड अंदर घुसेड़ कर मेरे ऊपर लेटा रहा। मेरी गाँड एस-के के लंड से कुछ एडजस्ट हुई तो फिर एस-के थोड़ा सा ऊपर उठ गया और फिर से अपने लंड पे, जो आधा मेरी गाँड के अंदर घुसा हुआ था, उसके डंडे पे तेल उढ़ेलने लगा और लंड को अंदर बाहर करने लगा। तेल उढ़ेलने से लंड का डंडा और स्लिपरी हो चुका था और गाँड का सुराख भी स्लिपरी हो गया था।
एस-के ने कहा, “किरन अब तुम थोड़ा सा ऊपर उठ कर अपने नीचे से तकिया निकल लो..... अब उसकी ज़रूरत नहीं है...... ऐसे ही नीचे रहेगा तो तुम्हें और दर्द होगा।“ मैं थोड़ा सा उठी और एस-के ने मेरे नीचे से तकिया निकाल लिया। एस-के ने कहा, “किरन अब तुम अपनी गाँड को थोड़ा सा ऊपर उठा लो” तो मैंने अपने चूतड़ों को थोड़ा ऊपर उठा लिया। अब मैं बेड पे उलटी लेटी थी और मेरी गाँड थोड़ी सी ऊपर उठी हुई थी और एस-के का मूसल लंड गाँड में आधा अंदर घुसा हुआ था। एस-के ने फिर से अपने हाथ मेरे जिस्म के नीचे से डाल के कंधों को पकड़ लिया और उसके हाथ मेरी चूचियों से लगने लगे। दोनों हाथ दोनों चूचियों के बीच में थे। दोनों थोड़ी देर तक ऐसे ही चिपके हुए लेटे रहे। अब मेरी गाँड उसके लंड से पूरी तरह एडजस्ट हो चुकी थी और मेरी गाँड अपने आप ही थोड़ी सी उठ गयी और गाँड के सुराख के मसल थोड़े रिलैक्स हुए तो एस-के ने समझ लिया कि अब मैं अच्छी तरह से गाँड मरवाने के लिये रेडी हूँ। उसने अपने लंड को आधा ही अंदर-बाहर अंदर-बाहर करके मेरी गाँड मारनी शुरू कर दी। अब मुझे भी अच्छा लगने लगा और मैं मज़े लेने लगी। लंड और गाँड दोनों बहुत ही चिकने और स्लिपरी हो चुके थे। मेरी साँसें अब ठीक से चलने लगी थी। एस-के ऐसे ही गाँड के अंदर आधा लंड घुसा के धक्के मारता रहा और फिर मेरे कंधों को ज़ोर से पकड़ कर इतनी ज़ोर से झटका मारा कि मैं चिल्ला पड़ी, “ऊऊऊईईईई अल्लाहहह....आआआआ मर गयी...ईईईईईई ऊऊऊऊऊऊऊ निकाल लो!!” पर अब उसका लंड पूरा जड़ तक मेरी गाँड में घुस चुका था और मुझे उसका लंड गाँड फाड़ कर पेट में से घुस कर मुँह से बाहर तक निकलता हुआ महसूस होने लगा। दर्द से मेरी आँखें बाहर निकल गयी और साँसें रुक गयीं और मेरे सामने अंधेरा छाने लगा। शायद मैं फिर से बेहोश हो गयी थी।


![[Image: doracw0139.jpg]](https://i.ibb.co/76kzMKZ/doracw0139.jpg)
![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)