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Misc. Erotica हिंदी की सुनी-अनसुनी कामुक कहानियों का संग्रह
थोड़ी देर तक ऐसे ही लेटे रहे। फिर एस-के ने मुझे उठाया और पूछा कि किरन मज़ा आया क्या तो मैंने एक ज़ोरदार चुम्मा लिया और कहा, एस-के किरन की छोटी सी चूत को अपने लंबे मोटे मूसल जैसे लंड से चोदे और किरन को मज़ा ना आये, ऐसे हो सकता है किया ?? और ये तुम्हारा ही लंड है जिसने मेरी प्यासी चूत की प्यास बुझायी है और इस में लगी आग को ठंडा किया है। एस-के हँसने लगा और मुझे उसी हालत में उठा कर बाथरूम में ले गया और शॉवर खोल दिया। दोनों ने एक दूसरे को साबुन लगाया और अच्छी तरह से एक दूसरे को साफ़ किया और नहाने लगे। नहाते-नहाते मैं एस-के के लंड को पकड़ के मसलती रही तो वो फिर से खड़ा हो गया। यही हाल मेरी चूत का भी था। एस-के जब मुझे साबुन लगा के चूत धो रहे थे तो अपनी उंगली चूत के सुराख के अंदर डाल के उंगली से चोदने लगे। मैं भी मस्ती में आ गयी और एस-के से लिपट गयी। इसी तरह से नहाते-नहाते मस्ती करते रहे और फिर हम बाथरूम के बाहर निकल आये और टॉवल से एक दूसरे के जिस्म को साफ़ किया और फिर सोफ़े पे आ के बैठ के व्हिस्की पीते हुए बातें करने लगे और एक दूसरे के जिस्म से खेलने लगे। एस-के ने अशफाक के बारे में पूछा कि वो कैसे चोदता है तो मैंने बता दिया कि शादी के कुछ ही दिनों तक तो उसका लंड मेरी चूत के अंदर गया और बस दो या तीन धक्कों में उसकी क्रीम निकल गयी। ऐसे लगाता था जैसे क्रीम उसके लंड के सुपाड़े में रेडी है, चूत की गर्मी लगी और क्रीम निकल गयी। उसके बाद से तो अब तक ऐसा है कि कभी तो उसका छोटा सा पतला लंड पूरी तरह से अकड़ता भी नहीं और कभी अकड़ भी जाता है तो चूत के अंदर घुसाने से पहले ही मेरी चूत के लिप्स के ऊपर ही अपनी क्रीम गिरा देता है जिससे मेरी चूत की आग बढ़ जाती है पर मुतमाइन कभी नहीं हुई और शादी के बाद से पहली चुदाई से लेकर आज तक मुझे उसके लौड़े से कभी सेटिसफेक्शन नहीं मिला। कल जब तुमने चोदा तो मुझे पता चला की सही मानों में चुदाई कैसे होती है और औरत को चुदाई का मज़ा कैसे आता है। जब मैं सत्रह-अठारह साल की थी तो मेरे कज़न ने मुझे चोदा था पर अब तो उस बात को भी तकरीबन दस-ग्यारह साल हो गये हैं और उस टाईम पे मुझे मेरे कज़न के लंड से चुदवाने में बहुत मज़ा आया था पर तुम्हारी चुदाई और तुम्हारा लंड तो इतना वंडरफुल है कि जी चाहता है कि तुम मुझे चोदते जाओ और मैं तुम से चुदवाती जाऊँ। एस-के ने पूछा, अच्छा तो तुमने कज़न से भी चुदवाया है तो मैंने कहा हाँ, ऐसे ही हो गया था बस और फिर उसको अपनी पहली चुदाई की दास्तान सुना डाली। एस-के मेरी कहानी सुनते-सुनते फिर से मेरे बूब्स को दबाने लगा और मेरा हाथ पकड़ के अपने लंड पे रख दिया, जो फिर से अकड़ के लोहे जैसा सख्त हो चुका था और मैं उसके लंड को दबाने लगी।

 
एस-के ने पूछा, अब कैसा लग रहा है किरन, तो मैंने कहा बहुत मस्त फ़ील कर रही हूँ....  इस व्हिस्की का नशा सा छाया हुआ है और सारे जिस्म में एक अजीब सा मीठा-मीठा मस्ती-भरा दर्द जैसे हो रहा है। एस-के ने कहा, चलो मैं तुम्हारे जिस्म की मालिश कर देता हूँ तो मैंने कहा,माशा अल्लाह! मालिश से तो मज़ा ही आ जायेगा.... चलो बेडरूम में चलते हैं। उसने कहा कि कोई प्लास्टिक हो तो बेड पे बिछा दो। मैंने कहा कि नहीं, ऐसा कोई प्लास्टिक तो नहीं है..... मैं कोई पुरानी वाली बेडशीट बिछा देती हूँ और अलमारी से एक पुरानी वाली बेड शीट निकाल के बेड पे बिछा दी। एस-के ने पूछा कौन सा तेल है तो मैंने कहा मालिश के लिये कौन-सा तेल अच्छा होता है। उसने पूछा कि घर में ऑलिव ऑयल है क्या?” तो मैंने कहा कि हाँ, है एक डिब्बा ऑलिव ऑयल का.... क्या उससे मालिश करोगे?” एस-के ने कहा कि हाँ, वो ऑलिव ऑयल ही सब से अच्छा होता है मालिश के लिये। मैं थोड़ा सा लड़खड़ाती और सैंडल खटखटाती हुई दूसरे रूम में गयी और ऑलिव ऑयल का डिब्बा लेकर आ गयी।
 
एस-के ने कहा कि अब तुम सीधी लेट जाओ तो मैं ऐसे ही लेट गयी। टाँगें चौड़ी करके फैला लीं । एस-के मेरी टाँगों के बीच में घुटनों के बल बैठ गया और मेरे जिस्म पे तेल डालना शुरू किया। सारे जिस्म पे तेल डाला, चूचियों की गोलाई में और नाफ़ के सुराख में और चूत के पास तक डाल दिया और डिब्बा एक तरफ़ रख कर मालिश करना शुरू कर दिया। सारे जिस्म पे हाथ से तेल को फैला दिया और मालिश करने लगा। वो चूचियों को मसलता रहा। सारा जिस्म स्लिपरी हो गया। बहुत मज़ा आने लगा और जिस्म बहुत लाईट महसूस होने लगा। जब वो मेरे पैरों पे मालिश करने लग तो मैंने कहा कि मैं सैंडल उतार देती हूँ जिससे तुम ठीक से मालिश कर सको। वो बोला कि किरन रहने दो, इन हाई हील सैंडलों में तुम्हारे ये सैक्सी पैर और भी सैक्सी लगते हैं, और फिर उसने मेरे सैंडलों और पैरों को चूम लिया तो मैं सिसक उठी। मेरी चिकनी चूत को देख कर उसका लंड फिर से टनटना कर खड़ा हो गया था और मेरी चूत देख कर उसके लंड के मुँह में से प्री-कम का पानी आने लगा था। हम दोनों एक दूसरे की आँख से आँख मिला कर एक दूसरे को घूर रहे थे। दोनों नंगे थे और बहुत अच्छा लग रहा था। एस-के बड़ी ज़बरदस्त मालिश कर रहा था। मेरे जिस्म में मस्ती छा रही थी और मेरी चूत जूस के निकलने से गीली हो चुकी थी। उसका लंड मेरी चूत के सामने था। एक टाईम जब वो झुक कर मालिश कर रहा था और उसका लंड मेरी चूत के सामने ही था तो उसका हाथ फिसल गया। मेरी टाँगें तो फैली ही थीं, जिससे चूत खुली हुई थी और जब उसका हाथ फिसला और वो बैलेंस ऑउट होने की वजह से सामने की तरफ़ फिसल गया तो उसका लंड एक ही झटके में मेरी चिकनी चूत के अंदर घुसता चला गया। मेरी आँखें एक दम से बाहर निकल आयीं। मैं उसका लंड चूत के अंदर एक्सपेक्ट नहीं कर रही थी। एस-के ने थोड़े झटके मारे और जब मेरी चूत ने उनके लंड को एडजस्ट कर लिया और मुझे मज़ा आने लगा तो एस-के ने अपना अकड़ा हुआ लंड बाहर निकाल लिया। मैंने कहा, अरे ये क्यों, एस-के..... रहने दो ना अंदर ही.... अच्छा मज़ा आ रहा है, तो उसने कहा, रुको अभी चोदता हूँ थोड़ी देर में, पहले अच्छी तरह से मालिश तो कर लूँ, तो मैंने कहा, ठीक है।
 
फिर एस-के ने कहा, अब तुम बेड पे उलटी लेट जाओ और तकिया निकाल दो और अपने हाथों को अपने मुँह के सामने फ़ोल्ड करके रख लो, तो मैं वैसे ही लेट गयी जैसा एस-के ने बोला था। अब मैं उलटी लेटी हुई थी और इसी लिये एस-के को नहीं देख सकती थी। एस-के ने फिर मेरे पीछे पीठ पे ऑलिव ऑयल डाला और कंधों के पास और फिर पीठ पे फैला दिया और फिर मेरे गोल-गोल चूतड़ों पे तेल डाल के फैला दिया ताकि तेल नीचे ना गिरे और फिर मेरी टाँगें फैला करके वो मेरी टाँगों के बीच में फिर से घुटनों के बल बैठ गया और झुक कर दोनों हाथों से मेरे कंधों की मालिश करने लगा। ऑयल बहुत चिकना था और उसके हाथ आसानी से फिसल रहे थे। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जिस्म में मस्ती छा रही थी। मेरी आँखें बंद हो रही थी। एस-के ने मेरे पेट से थोड़ा नीचे चूत के पास फिर से तकिया रख दिया जिससे मेरे चूतड़ ऊपर उठ गये। अब एस-के मेरे दोनों चूतड़ों को मसल रहा था और ज़ोर-ज़ोर से दबा रहा था। थोड़ा और तेल डालकर उसने थोड़ा तेल मेरी गाँड खोल के उसके सुराख में भी डाल दिया। अब एस-के मेरी टाँगों के बीच में अपने पैर फ़ोल्ड करके बैठा था। ऐसी पोज़िशन में उसके लंड का सुपाड़ा कभी मेरी चूत से टकराता तो कभी गाँड से। वो आधा उठ-उठ के मालिश कर रहा था और चूतड़ों को ज़ोर-सोर से मसल रहा था और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। दोनों चूतड़ खोल-खोल के गाँड में भी तेल डाल के अपनी उंगली गाँड में अंदर बाहर करता तो मुझे और ज़्यादा मज़ा आता।
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RE: हिंदी की सुनी-अनसुनी कामुक कहानियों का संग्रह - by rohitkapoor - 02-01-2026, 08:21 PM



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