Thread Rating:
  • 19 Vote(s) - 2.84 Average
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5
Misc. Erotica हिंदी की सुनी-अनसुनी कामुक कहानियों का संग्रह
अचानक मुझे अपनी सास के खाँसने की आवाज़ सुनाई दी। मेरी सास की आँख खुल गयी थी और उसने मुझसे पूछा, बहू! हम कहाँ तक पहुँच गये?” अपनी सास के इस तरह बे-वक्त उठने पर मुझे इतनी मायूसी हुई और गुस्सा भी आया कि कह दूँ कि टाँगेवाले के लंड तक पहुँच गये हैंक्यों साली तुझे भी चूसना है क्या?” लेकिन मैंने अपने जज़्बातों पर काबू किया और बस इतना बोली, अम्मी अभी तो हम आधे रास्ते तक तक ही पहुँचे हैं! ये भी एक तरह से सच ही था क्योंकि अब तक मैं टाँगेवाला का लण्ड सिर्फ पकड़ने और चूसने में ही कामयाब हुई थी लेकिन चूत में नहीं लिया था। टाँगेवाला घबरा गया था और मुझे अपने से परे हटाने की कोशिश कर रहा था लेकिन मैंने उसे ऐसा करने से रोक दिया। मैं जानती थी कि उसकी डर बे-बुनियाद है क्योंकि मेरी सास को दिन में भी मुश्किल से नज़र आता है और रात के अंधेरे में तो अंधी जैसी ही थी। मैंने लण्ड चूसना ज़ारी रखा।

यकीन मानें, अपनी सास की मौजूदगी में एक अजनबी का लंड चूसते हुए मुझे अजीब सा सनसनी खेज़ मज़ा आ रहा था और वो कुछ कर भी नहीं सकती थी। टाँगेवाले को भी शायद एहसास हो गया कि मेरी सास को रात में नज़र नहीं आता। उसने मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा और इशारा किया कि मैं उसका लंड चूसना ज़ारी रखूँ। उसका नौ इंच लंबा और तीन इंच मोटा लंड मेरे थूक से सरासर भीगा हुआ और ज्यादा चमक रहा था और मैं उसे और ज्यादा भिगोती जा रही थी।
 
अचनक टाँगेवाला धीरे से फुसफुसाया, हाय मेमसाब! प्लीज़ ज़रा और जोर से चूसिये और मेरे गोटे भी सहलाइये तो एक बार मेरा पानी निकल जायेगा फिर ढाबे में ऐश करेंगे आराम से!
 
अब मेरी सास के पूरी तरह जगे होने की वजह से हम खुल कर बातें नहीं कर सकते थे लेकिन फिर मैंने सोचा कि अगर टाँगेवाले का एक दफा इखराज हो जाता है तो दूसरे राऊँड में यकीनन मुझे ज्यादा लुत्फ देगा। इसलिये मैंने उसके लंड पर ज्यादा प्रेशर लगाया और उसके गोटे सहलते हुए मैंने एक और दबंग हरकत की। धीरे से आगे खिसक कर मैंने बंदूक की गोली जैसे अपने निप्पल उसके लंड के सुपाड़े पर लगा दिये और धीरे से उससे बोली, देखो कैसे मेरे निप्पल तुम्हारे लौड़े को चूम रहे हैं उफफफफ! मुझे पता था कि उसका इखराज होने के करीब ही है, इसलिये उसे और जोश दिलाने के लिये मैं अपने निप्पल उसके लंड पे रगड़ने लगी।
 
वो अपने क्लाइमैक्स के बेहद करीब था और कराहने लगा, आआआहहहऽऽऽऽऽ मैं तो गया आअहहहऽऽऽऽ! और इसके साथ ही उसके लंड से पिचकारियाँ छूट कर मेरे मम्मों और चेहरे पर गिरने लगी। उसके लण्ड से आखिरी बूँद तक निचोड़ लेने के लिये मैंने उसे सहलाना ज़ारी रखा। उसकी मलाई का ज़ायका इतना लज़ीज़ था कि मैं अपने चेहरे और मम्मों पे लगी मलाई बस चाटती ही रह गयी। उसे हवस भरी नज़रों से देखते हुए मैं अपनी उंगलियाँ भी चाटने लगी। जब मैंने नीचे देखा तो मेरे निप्पलों से टपकती उसके लंड की मलाई बेहद चोदू नज़ारा पेश कर रही थी।
[+] 1 user Likes rohitkapoor's post
Like Reply


Messages In This Thread
RE: हिंदी की सुनी-अनसुनी कामुक कहानियों का संग्रह - by rohitkapoor - 12-07-2022, 11:56 PM



Users browsing this thread: 38 Guest(s)