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Misc. Erotica हिंदी की सुनी-अनसुनी कामुक कहानियों का संग्रह
Bohat hi lajawaab story hai!
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Behad mazedaar stories.
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Very nice story
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Behad lajawaab
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Sabhi kahaniya ek se badh kar ek hai… 
Update please
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(02-02-2026, 06:55 PM)ShaziaMirza Wrote: Bohat hi lajawaab story hai!

Thank you!
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(18-02-2026, 04:36 AM)ArfaS Wrote: Behad mazedaar stories.

thanks
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(19-02-2026, 10:34 PM)K MD THABREZ Wrote: Very nice story

Thank you
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(21-02-2026, 08:50 AM)ShakirAli Wrote: Behad lajawaab

Shukriya!
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(22-02-2026, 09:34 PM)Sahil.A Wrote: Sabhi kahaniya ek se badh kar ek hai… 
Update please

thanks
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दुकान का शटर बंद करने से दुकान में ठंडी हवा के झोंके नहीं आ रहे थे, वैसे बाहर तो अच्छी खासी सर्दी होने लगी थी। हम दोनों अंदर ड्रेसिंग रूम में आ गये, जहाँ वो मेरा नाप लेने वाला था। दुकान का शटर गिरते ही मुझे लगा जैसे हम एक सेपरेट रूम में अकेले हैं और मेरे खयाल में आया कि इस दुकान में मैं और अनिल अकेले हैं और हमें देखने वाला कोई नहीं। मेरे दिमाग में गर्मी चढ़ने लगी। नशा तो पहले ही चढ़ा हुआ था। जिस्म में खून तेज़ी से दौड़ने लगा साँस तेज़ी से चलने लगी और एक अजीब सा सुरूर महसूस होने लगा। खैर उसने अंदर की लाईट जला दी। ड्रेसिंग रूम बहुत बड़ा तो नहीं था लेकिन बहुत छोटा भी नहीं था। मीडियम साईज़ का था जहाँ पर एक तरफ़ बड़ा सा मिरर लगा हुआ था ताकि अगर कोई लड़की चेक करना चाहे तो कपड़े पहन कर मिरर में देख सकती थी। वो मेरे सामने खड़ा हो गया और पहले उसने सलवार का नाप लेने को कहा। जैसे टेलर्स की आदत होती है, नाप लेने से पहले वो थोड़ा सा झुका और मेरे सामने बैठते-बैठते उसने मेरी सलवार के सामने के हिस्से को पकड़ के थोड़ा सा झटका दिया जिससे सलवार थोड़ी सी सरक के नीचे हुई। मैंने जल्दी से सलवार को ऊपर से पकड़ लिया। उसने अब नाप लेना शुरू किया। साईड से कमर से पैर तक का नाप लेते हुए उसने पूछा कि मैडम आप अधिकतर इतनी ही ऊँची हील पहनती हैं क्या....? मैं उसी हिसाब से नाप लेना चाहता हूँ। मैंने कहा, हाँ यही चार-साढ़े चार इंच और कईं दफ़ा पाँच इंच तक! उसके बाद वो फिर टेप का बड़ा वाला हिस्सा जिस पर मेटल लगा होता है, उसको जाँघों के अंदर पकड़ कर साईज़ लेने लगा तो वो मेटल का पीस मेरी चूत से टकराया और मेरे मुँह से एक सिसकरी सी निकल गयी। उसने पूछा, क्या हुआ मैडम?” तो मैंने कहा,कुछ नहीं.... तुम नाप लो। उसने उस मेटल के पीस को थोड़ा और अंदर किया तो मुझे लगा जैसे वो पीस मेरी चूत के लिप्स को खोल के अंदर घुस गया और क्लीटोरिस को टच करने लगा। जैसा कि मैं पहले ही बता चुकी हूँ कि जब से ऑफिस जाने लगी थी, मैंने अब पैंटी और ब्रा पहनना करीब- करीब छोड़ ही दिया था तो आज भी मैंने ना पैंटी पहनी थी और ना ब्रा ।
[Image: IMG-4458.jpg]
उसका हाथ मेरी जाँघों के अंदर वाले हिस्से में था और नाप ले रहा था जिससे मेरी आँखें बंद हो गयी और टाँगें अपने आप ही खुल गयी थी और मैं उसके हाथ को अपनी चूत से खेलने का आसान एक्सेस दे रही थी। मेटल पीस चूत के अंदर महसूस करते ही चूत गीली होना शुरू हो गयी और जिस्म में सनसनी दौड़ने लगी। वो खड़ा हो गया और मेरी कमर का नाप लेने लगा और बोला कि मैडम कमीज़ को थोड़ा ऊपर उठा लीजिये तो मैंने कमीज़ को थोड़ा उठाया जिससे मेरा पेट दिखायी देने लगा तो उसने कहा कि मैडम आपका कलर तो क्रीम जैसा है और बहुत चिकना भी है। मैं शर्मा गयी पर कुछ नहीं बोली। जबसे मुझे उसका हाथ मेरी जाँघों के अंदर महसूस हुआ, उसी वक़्त से मुझे तो मस्ती छाने लगी थी और चूत में खुजली भी होने लगी थी। मैं सोचने लगी कि फैशन -मॉडल्स ऐसे कैसे नंगी हो कर नाप देती होंगी। ये सोचते ही मेरा भी मन करने लगा कि अनिल अगर मुझसे भी कहे तो मैं नंगी हो कर नाप दे सकती हूँ और फिर ये खयाल आते ही मैं और गीली हो गयी।
 
इतने में वो खड़ा हो गया और कमीज़ का नाप लेने लगा। लंबाई लेने के लिये कंधों से नीचे तक टेप लगाया। टेप मेरी चूचियों को टच करने लगा तो एक दम से मेरे निप्पल खड़े हो गये और साँसें तेज़ी से चलने लगी। फिर उसने मुझे हाथ सीधे रखने को कहा और मेरी बगल के अंदर से टेप डाल कर चूचियों के ऊपर से नाप लेना शुरू किया। उसी वक़्त पे पीछे से जब वो टेप ठीक कर रहा था तो उसकी गरम साँस मेरे नंगे कंधों पे महसूस होने लगी जिससे मैं और गरम हो गयी। वो भी करीब मेरी ही हाईट का था। जब वो खड़ा हुआ तो मेरे हाथ को ऐसा लगा जैसे उसका लंड मेरे हाथ से टच हुआ हो। बस ऐसा महसूस होते ही मेरे ज़हन में एस-के का लंड घूमने लगा। वो थोड़ा और आगे आया और टेप पीछे से ठीक करने लगा तो इस बार सही में उसका लंड मेरे हाथ पे लगा। उसका लंड एक दम से खड़ा हो चुका था। शायद वो भी गरम हो गया था। उसका लंड मेरे हाथ से टच होते ही मेरी चूत समंदर जैसी गीली हो गयी और मुझे यकीन हो गया कि उसे भी एहसास था कि उसका लंड मेरे हाथ से टकराया है पर वो पीछे नहीं हटा और अपने लंड को मेरे हाथ पे ही रखे-रखे टेप ठीक करने लगा। मेरी साँसें तेज़ी से चलने लगी और मेरे ज़हन में जो शाम से चुदाई का भूत सवार था वो अब ज़ोर पकड़ने लगा और मैं हवस की आग में जलने लगी। ऊपर से शाम की व्हिस्की और अभी अनिल के साथ पी हुई रम का नशा मेरी हवस को और भड़का रहा था और मैं सोचने लगी कि अगर अनिल ने मुझे नहीं चोदा तो मैं खुद ही उसको चोद डालुँगी आज। नशे भरे मेरे दिमाग में आया कि उसके अकड़े हुए लंड को पकड़ कर अपनी गीली गरम चूत में घुसेड़ डालूँ पर बड़ी मुश्किल से अपने आप को कंट्रोल कर पायी और चाहते हुए भी उसके लंड को अपनी मुट्ठी में ले कर नहीं दबाया। 
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नशे से मेरी हिम्मत खुल रही थी और अब मैंने फ़ैसला कर लिया कि मैं भी नंगी हो कर ही नाप दुँगी। मैंने कहा, अनिल! क्या तुम मेरे लिये भी डिज़ाईनर और परफेक्ट फिटिंग की सलवार कमीज़ बना सकते हो?” तो उसने कहा कि मैडम उसके लिये आपको... मैंने कहा, कोई बात नहीं यहाँ सिर्फ़ हम दो ही तो हैं.... क्या हुआ, कोई बात नहीं..... जैसा तुम चाहोगे मैं नाप दे दुँगी तो उसके चेहरे से खुशी छलकने लगी। उसने कहा कि ओके मैडम, आप अपने कपड़े उतार लीजिये तो मैंने कमीज़ के अंदर हाथ डाल के कमीज़ को ऊपर उठा कर निकाल दिया जिससे मेरी गोल-गोल चूचियाँ हिलने लगीं। उसके मुँह से वोव वंडरफुल निकल गया। अब मैं उसके सामने आधी-नंगी खड़ी थी। उसने कहा कि अब सलवार भी निकाल दीजिये मैडम, ताकि मैं नाप ले सकूँ तो मैंने सलवार का स्ट्रिंग खोल दिया और मेरी सलवार फरमान बरदार कनीज़ की तरह से मेरे कदमों में गिर पड़ी। मैंने अपने सैंडलों के स्ट्रैप खोल कर सलवार को अपने पैरों से निकाल कर एक तरफ़ हटा दिया। फिर उसने कहा कि मैडम आप सैंडल पहन लीजिये ताकि आपके सैंडल की ऊँचाई के अनुसार मैं आपका नाप ले सकुँ और क्योंकि हाई-हील से आपकी चेस्ट और हिप्स का पोसचर भी पर्फेक्ट रहेगा और मैं ठीक से आपकी ड्रेस बना सकुँगा।

अब मैं सिर्फ हाई-हील सैंडल पहने, उसके सामने बिल्कुल ही नंगी खड़ी थी। मेरी उसी दिन की शेव की हुई चिकनी चमकदार चूत देख कर उसने कहा आप बहुत ही खूबसूरत हैं मैडम। इतनी खूबसूरत मैंने किसी को नहीं देखा.... आप एक दम से परफेक्ट फिगर की हो... आपको तो मॉडलिंग करनी चाहिये। उसके मुँह से अपनी तारीफ सुन कर मुझे बेहद अच्छा लग रहा था। बाहर हवा तेज़ी से चलने लगी थी और लाईट बार-बार जलने-बुझने लगी जैसे कहीं लूज़ कनेक्शन हो गया हो तो उसने साईड में रखी हुई एक केंडल जला दी। नशे और हवस में मेरा रहा-सहा पश-ओ-पेश भी हवा हो गया था और मैंने हँसते हुए पूछा कि क्या नाप लेते वक्त तुम सिर्फ़ मॉडल्स को ही नंगा करते हो या तुम भी नंगे हो जाते हो?” तो वो शर्मा गया और बोला कि अगर मॉडल चाहे तो मैं भी नंगा हो कर ही नाप लेता हूँ। मैंने फिर हँसते हुए कहा कि अब क्या इरादा है?” तो उसने कहा कि मैडम अगर आप चाहें तो मैं भी आपकी तरह ही नंगा हो कर नाप ले सकता हूँ। मैंने कहा, तुम्हारी मर्ज़ी और अपनी टाँगें थोड़ी खोल दी ताकि वो नाप लेना शुरू कर सके। उसने मेरा इशारा शायद समझ लिया था और बैठे-बैठे ही अपनी टी -शर्ट निकाल दी। अब वो सिर्फ़ लुँगी में बैठा हुआ था और नाप लेना शुरू किया। एक बार फिर से उसके हाथ मेरे जाँघों के अंदर वाले हिस्से पे लगने लगे और मेटल का पीस चूत के अंदर महसूस होने लगा। उसने भी शरारत में मेटल पीस चूत के अंदर घुसा दिया और मैंने अपनी टाँगें खोल दीं। मेटल पीस चूत के अंदर लगते ही मेरे मुँह से मस्ती भरी सिसकरी निकल गयी। उसकी अँगुलियाँ मेरी चूत से टकरा रही थीं और मेरी चूत और ज़्यादा गीली होने लगी। उसने बैठे-बैठे पूछा कि मैडम, सच आप चाहती हैं कि मैं भी नंगा हो जाऊँ?” तो मैंने मुस्कुरा के कहा, तुम्हारी मर्ज़ी.... मुझे तो कोई प्रॉबलम नहीं है क्योंकि मैं भी तो तुम्हारे सामने नंगी खड़ी हूँ।
 [Image: trigg-1905-apic08.jpg]
मेरी चिकनी चूत लाईट में चमक रही थी और गीली भी हो गयी थी और मुझे पक्का यकीन था कि अनिल को मेरी गीली चूत की महक ज़रूर आ रही होगी। जिस तरह वो नीचे बैठा था, मेरी चूत उसके मुँह के सामने थी। उसने ऊपर टेप की तरफ़ देखते-देखते मेरी चूत पे किस कर दिया तो मेरी टाँगें खुद ही खुल गयीं और मेरा हाथ उसके सिर पे चला गया और वो घुटनों के बल झुक गया और मेरी गाँड पे हाथ रख कर मेरी चूत को चूमने और चूसने लगा। मैं तो नशे में मदहोश थी ही और हवस की आग में पहले से ही जल रही थी। उसका मुँह अपनी चूत पे महसूस करते ही मैं तो जैसे दीवानी हो गयी और उसके सिर को पकड़ के अपनी चूत में दबाने लगी। उसने मेरी पूरी चूत को अपने मुँह में लेकर दाँतों से कटा तो मेरे मुँह से मस्ती की चींख निकल गयी,आआआआहहहहह और मैं एक दम से झड़ने लगी। मेरी आँखें बंद हो गयीं और मैं अपनी चूत को उसके मुँह से रगड़ने लगी। मैं झड़ती गयी और वो मेरा जूस पीता गया। जब मेरा झड़ना खतम हुआ तो मैंने झुक कर उसके कंधों को पकड़ा तो वो उठ खड़ा हुआ। उसने पहले ही बैठे-बैठे ही अपनी लुँगी को खोल दिया था और मेरी चूत चाटते हुए वो अपना लंड मेरे सैंडलों पर रगड़ रहा था। जब वो खड़ा हुआ तो उसकी लुँगी भी नीचे गिर पड़ी और वो भी नंगा हो चुका था और उसका लंड स्प्रिंग के जैसे ऊपर नीचे हो कर हिल रहा था जैसे मेरी चूत को सेल्यूट कर रहा हो। उसका लंड भी बहुत ही मस्त था.... बड़ा और मोटा बिला-खतना लंड। नशे में मैं पूरी बेशर्म तो हो ही गयी थी और मैंने एक ही सेकेंड में उसका लंड अपने हाथ में पकड़ लिया और दबाने लगी। वॉव... मस्त और बहुत ही कड़क लंड था उसका। काफी लंबा और मोटा, लोहे जैसा सख्त था। मैंने एक हाथ उसकी बैक पे रख कर उसको अपनी तरफ़ खींच लिया और दूसरे हाथ से उसके लंड को पकड़ के अपनी चूत में ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर रगड़ने लगी। उसने झुक कर मेरी चूचियों को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। उसके लंड में से प्री-कम निकल रहा था जो चूत को स्लिपरी बना रहा था।
 [Image: wz-3676.jpg]
मेरी चूत में तो जैसे आग लगी हुई थी और नशे में मैं खड़ी-खड़ी ही हाई हील सैंडलों में झूमने लगी थी। मैं नीचे बैठ गयी और उसके लंड को किस किया और उसके लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी तो उसने मेरा सिर पकड़ कर अपनी गाँड आगे पीछे करके मेरे मुँह को चोदना शुरू कर दिया। अब मुझसे सब्र नहीं हो रहा था। अब तो बस मेरी गरम और गीली चूत को उसका लंबा मोटा कड़क और तगड़ा लंड चाहिये था। मैं बैठे-बैठे ही लेट गयी और उसको अपने ऊपर खींच लिया। बस उसी वक्त बिजली चली गयी और कमरे में एक दम से अंधेरा हो गया पर केंडल की रोशनी से रूम बहुत ही रोमैंटिक लगने लगा। उस वक्त जितने नशे और वासना में मैं चूर थी, उस हालत में म्यूनिसपैलटी का कुढ़ाघर भी मुझे रोमैंटिक लगता। खैर, मैं लेट गयी और उसको अपने ऊपर खींच लिया और अपनी टाँगें फैला लीं। अनिल मेरी दोनों टाँगों के बीच में आ गया। उसने अपने पैर पीछे की तरफ़ को सीधे कर दिये और उसका लंड मेरी चूत के लिप्स के बीच में था। अपनी दोनों कुहनियों को मेरे जिस्म के दोनों तरफ़ रख कर वो मुझ पर झुक गया और मुझे किस करने लगा। उसकी ज़ुबान मेरे मुँह में घुस गयी थी और मुझे अपनी चूत के जूस का टेस्ट उसके मुँह से आने लगा। वो अपने लंड के सुपाड़े को मेरी चिकनी चूत के अंदर-बाहर कर रहा था। मेरी टाँगें उसकी गाँड पे क्रॉस रखी हुई थी। उसने सुपाड़े को अंदर-बाहर करते-करते एक ज़ोर का धक्का मारा तो मेरे मुँह से मस्ती की आआआआआहहहहह निकल गयी और उसका गरम लंड मेरी तंदूर जैसी चूत में ऐसे घुस गया जैसे गरम चाकू मक्खन में घुस जाता है। उसका लंड बेहद मोटा था। उसके लंड से मेरी चूत खुल गयी थी। मेरी आँख से दो बूँद आँसू भी निकल गये। ये आँसू मस्ती के थे जिसे उसने नहीं देखा। 
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मैंने उसको ज़ोर से पकड़ा हुआ था और मेरी टाँगें उसकी गाँड पे क्रॉस थी। उसने लंड को बाहर निकाल कर चोदना शुरू कर दिया। बहुत ही मज़ा आ रहा था उसकी चुदाई से। उसके हाथ मेरी बगल से निकल कर कंधों को पकड़े हुए थे। वो अपनी टाँगें पीछे दीवार से टिका कर गचागच चोद रहा था। उसके हर झटके से मेरे चूचियाँ डाँस करने लगी थी। कमरे में हल्की सी रोशनी चुदाई में मज़ा दे रही थी। कमरा रोमैंटिक लग रहा था और चुदाने में मज़ा आ रहा था। वो गचागच चोद रहा था और मुझे लग रहा था कि आज उसका लंड मेरी चूत फाड़ डालेगा। लेकिन मैं भी तैयार थी, मैं चाहती थी कि आज वो सच में मेरी चूत को फाड़ डाले और चोदते-चोदते मेरी चूत को अपनी मनि से भर दे। एक हफ़्ते से मेरी चुदाई नहीं हुई थी और मेरी चूत को तो बस लंड चाहिये था। मेरी चूत की खुजली बढ़ गयी थी और मैं चाहती थी कि मस्त चुदाई हो। अनिल का लंड बेहद वंडरफुल था। वो पूरी मस्ती में चोद रहा था। लंड को पूरा सुपाड़े तक बाहर निकाल-निकाल कर चूत में घुसेड़ देता तो उसके लंड का हेल्मेट जैसा सुपाड़ा मेरी बच्चे दानी से टकरा जाता और मेरा सारा जिस्म काँप जाता। अब वो बहुत तेज़ी से चोद रहा था और मैं शायद तीन बार झड़ चुकी थी। मेरे जूस से चूत बहुत ही गीली हो चुकी थी और अब उसका लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था और वो बहुत ही ज़ोर-ज़ोर से चूत फाड़ झटके मार रहा था। यंग था ना, इसी लिये पूरी ताकत से धक्के मार-मार के चुदाई कर रहा था। मेरे मुँह से खुद-ब-खुद निकलना शुरू हो गया, आआआईईईईईई  आहहहहाआआआआआ ऐसे ही...ईईईईई चोदो.... ओ‍ओ‍ओ‍ओ ऊऊऊईईईई आआआआआहहह मज़ा...आआआआ रहा है..... और ज़ोर से...ए‍ए‍ए‍ए‍ए आआंआंआंआंहहह और उसका लंड बड़ी बे-दर्दी से मेरी चूत को चोद रहा था। अब उसके चोदने की रफ़्तार बढ़ गयी थी और उसके मुँह से भी अजीब आवाज़ें निकलने लगी थी। फिर अचानक उसने अपना पूरा लंड बाहर निकाल कर इतनी ज़ोर से मेरी चूत के अंदर धक्का मार कर घुसेड़ दिया कि मेरे मुँह से चींख निकल गयी, ऊऊऊऊऊऊऊईईईईईईई अल्लाह...आआआआआ, और मैंने उसको बहुत ज़ोर से पकड़ लिया और उसके लंड में से मलाई की पिचकारियाँ निकलनी शुरू हो गयी। उसकी पहली पिचकारी जब मेरी चूत के अंदर पड़ी तो मैं फिर से झड़ने लगी और अब उसके लंड में से क्रीम निकल-निकल कर मेरी एक हफते से प्यासी चूत की प्यास बुझाने लगी। उसकी मलाई निकलती रही और मेरी चूत भरती रही। उसकी मलाई भी बहुत ही गाढ़ी थी, मज़ा आ रहा था उसकी मलाई चूत के अंदर महसूस करके।
[Image: realteenlife13.jpg]
उसके धक्के अब धीरे होने लगे और अभी भी उसका लंड अंदर ही था। वो मेरे सीने पर गिर गया जिससे मेरे चूचियाँ दब गयी। वो थोड़ी देर ऐसे ही लेटा रहा और उसका लंड अभी अंदर ही था। जब मेरा झड़ना खतम हुआ और मेरी साँसें ठीक हुई तो देखा कि अभी तक उसका लंड मेरी चूत के अंदर ही घुसा हुआ है और वैसे ही तना हुआ है, लोहे जैसा सख्त। उसकी क्रीम निकलने से भी लंड नरम नहीं हुआ था। थोड़ी ही देर में उसकी साँसें भी ठीक हो गयी और फिर उसने मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल दी और हम एक दूसरे की जीभ को चूसने लगे। कमरे में अभी भी मोमबत्ती जल रही थी और धीमी रोशनी बहुत दिलकश और रोमैंटिक लग रही थी। मैंने गौर किया है कि रूम में अगर थोड़ा अंधेरा हो और लड़की ने शराब पी हुई हो तो लड़की में शरम नहीं रहती और वो हर तरीके से चुदवा सकती है और वो भी कर लेती है जो वो बिना शराब पिये नहीं कर सकती। कुछ यही हाल मेरा भी था। मेरे पास अब कोई शरम -हया बाकी नहीं थी। ऐसा लग रहा था जैसे सारे जहाँ में बस हम दो ही हों और कोई नहीं...... फिर चाहे जिस तरह से चुदाई हो, लंड चूस लो या अपनी चूत चटवा लो... कोई फ़रक नहीं पड़ता।
 
अनिल मेरे ऊपर ही लेटा हुआ था और उसका अकड़ा हुआ सख्त लंड अभी भी मेरी चूत के अंदर घुसा हुआ था। उसका लंड मेरी चूत के अंदर ऐसे फिक्स बैठा था जैसे बोतल के ऊपर कॉर्क और लंड अंदर ही रहने की वजह से हमारी दोनों की क्रीम भी मेरी चूत के अंदर ही फंसी हुई थी, बाहर नहीं निकली थी। हम दोनों किस कर रहे थे और वो मेरी चूचियों को मसल रहा था। वो मेरे निप्पलों को अंगूठे और उंगली से मसल रहा था। थोड़ी ही देर में उसने मेरी चूचियों को चूसना शुरू कर दिया जिससे मेरी चूत में फिर से खुजली होने लगी और जिस्म में बिजली सी दौड़ने लगी। पर उसका इरादा तो कुछ और ही था। उसने एक ही हरकत में अपना लंड मेरी चूत में से बाहर निकाल लिया और इस से पहले कि मेरी क्रीम से भरी चूत में से क्रीम बहने लगती, वो पलट गया और अपनी दोनों टाँगें मेरे सिर के दोनों तरफ़ रख के अपना लंड मेरे होंठों से लगा दिया। उसके लंड से हम दोनों की मिक्स क्रीम टपक कर मेरे मुँह पे गिर रही थी तो मैंने मुँह खोल दिया और हम दोनों की मिक्स क्रीम से भीगे हुए उसके लंड को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। बहुत ही टेस्टी था उसका लंड। ऐसे लग रहा था जैसे मैं कोई शहद चूस रही हूँ।
 
उसका लंड तो अभी तक नरम नहीं हुआ था, बल्कि मेरे चूसने से उसका लंड और भी ज़्यादा अकड़ गया था और अब वो मेरे मुँह को चोद रहा था । वो आगे झुक कर मेरी मेरी चूत में अपनी उंगलियाँ अंदर-बाहर करके चोदने लगा। मैं इतनी मस्ती में आ गयी और गरम हो गयी कि उसके लंड को बहुत ही ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी और वो भी अपनी गाँड उठा-उठा के मेरे मुँह को चोदने लगा। उसने जब मेरी चूत में चार उंगलियाँ घुसेड़ीं और अंगूठे से क्लिटोरिस को रगड़ा तो मैं काँपने लगी और बहुत ज़ोर से झड़ गयी। मेरी चूत से जूस निकलने लगा और मैं कुछ ज़्यादा ही मस्ती से उसके लंड को ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी और मुझे महसूस हुआ कि उसका लंड मेरे मुँह में ही और ज़्यादा ही मोटा हो रहा है। मैं समझ गयी कि अब उसकी क्रीम भी निकलने वाली है और उसी वक्त उसने अपने लंड को मेरे हलक में पूरा अंदर तक घुसा दिया जिससे मेरी आँखें बाहर निकल आयीं और साँस बंद होने लगी। उसके लंड से मलाई की गाढ़ी-गाढ़ी पिचकारियाँ निकलनी शुरू हो गयी और डायरेक्ट मेरे हलक में गिरने लगी। उसके लंड में से मलाई निकलती ही चली गयी.... निकलती ही चली गयी और इस कदर निकली कि मुझे लगा जैसे मेरा पेट उसकी क्रीम से ही भर जायेगा। पता नहीं इतनी क्रीम कैसे निकली उसके लंड से।
 
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Very nice story
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Nice stories. Please update regularly.
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बेहद शानदार
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(28-02-2026, 12:27 AM)K MD THABREZ Wrote: Very nice story

thanks
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(01-03-2026, 07:00 PM)ShakirAli Wrote: Nice stories. Please update regularly.

thanks
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(04-03-2026, 01:39 AM)Sahil.A Wrote: बेहद शानदार

Thank you!
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हम दोनों झड़ चुके थे और दोनों के जूस निकल चुके थे और दोनों गहरी-गहरी साँसें ले रहे थे। उसका लंड मेरे मुँह में ही था और उसका मुँह मेरी चूत पे। अब उसका लंड मेरे मुँह में थोड़ा-थोड़ा नरम हो गया था पर उसके यंग लंड में अभी भी सख्ती थी। थोड़ी ही देर के बाद मैंने उसको अपने ऊपर से हटा दिया और वो नीचे मेरी बगल में लेट गया। हम दोनों करवट से लेटे थे और अभी भी मेरा मुँह उसके लंड के सामने था और मेरी चूत उसके मुँह के सामने। मैंने उसके लंड से खेलना शुरू कर दिया और उसने मेरी चूत में उंगली डाल के फिर से क्लीटोरिस को मसलना शुरू कर दिया। उसका लंड एक ही मिनट के अंदर फिर से कुतुब मिनार जैसे खड़ा हो गया तो मैंने उसको सीधा लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गयी और उसके मूसल लंड को पकड़ के अपनी चूत के छेद पर एडजस्ट करके बैठने लगी। गीला लंड धीरे-धीरे गीली चूत के अंदर घुसने लगा। उसका मूसल जैसा लंड मेरी चूत में घुसता हुआ बेइंतेहा मज़ा दे रहा था। मैं पूरी तरह से उसके लंड पे बैठ गयी और उसका लंड जड़ तक मेरी चूत में घुस चुका था। मेरे मुँह से मस्ती की सिसकियाँ निकल रही थी। अब मैंने उसके लंड पे उछालना शुरू कर दिया जिससे मेरी चूचियाँ उसके मुँह के सामने डाँस कर रही थी। मैं उसके लंड पे ऐसे सवार थी जैसे घुड़सवार हॉर्स रेस के वक्त घोड़े पे सवर होता है। उसने मेरी चूचियों को पकड़ के मुझे अपनी तरफ़ झुकाया और चूसने लगा। अभी हम मस्ती में चुदाई कर रहे थे कि रूम में जलती मोमबत्ती खतम हो गयी थी और कमरे में एक दम से अंधेरा हो गया था। पर हमारा ध्यान तो चुदाई में था। मैं उछल-उछल के उसके लंड पे बैठ रही थी और उसका लंड मेरी चूत के बहुत अंदर तक घुस रहा था।
 
चुदाई फ़ुल स्पीड से चल रही थी। मैं उछल-उछल कर उसके कुतुब मिनार जैसे लंड पे अपनी चूत मार रही थी। उसके घुटने मुड़े हुए थे और मेरे चूतड़ उसकी जाँघों से लग रहे थे। मेरे बाल सैक्सी स्टाईल में उड़-उड़ क्र मेरे मुँह के सामने आ रहे थे। मैं ज़ोर-ज़ोर से उछल रही थी। मेरे उछलने से कभी तो पूरा लंड चूत के बाहर तक निकल जाता और जब मैं ज़ोर से उसके लंड पे बैठती तो उसका लोहे जैसा लंड गचाक से मेरी चूत में घुस कर मेरी बच्चे दानी से टकराता तो मेरे जिस्म में बिजली सी दौड़ जाती और मैं काँपने लगती। फिर अचानक ऐसे हुआ कि मैं जब उछल रही थी तो उसका पूरा लंड मेरी चूत के बाहर निकल गया और जब मैं ज़ोर से उसके लंड पे बैठी तो उसका लंड थोड़ा सा अपनी पोज़िशन से हिल गया और उसका मूसल लंड मेरी चूत में घुसने की बजाये मेरी गाँड में घुस गया। मेरी गाँड के छेद को पता ही नहीं था कि रॉकेट लंड मेरी गाँड में घुसेगा। इसलिये गाँड के मसल रिलैक्स नहीं थे और एक दम से पूरा का पूरा लंड मेरी टाइट गाँड मैं घुसते ही मेरी चींख निकल गयी, ऊऊऊऊऊऊईईईईईईईई अल्लाहहह...आंआंआंआंआं, पर अब क्या हो सकता था, लंड तो गाँड में घुस ही चुका था। मैं थोड़ी देर ऐसे ही उसके लंड को अपनी गाँड में रखे रही और जब मेरी गाँड उसके लंड को अपने अंदर एडजस्ट कर चुकी तो मैं उछल- उछल के अपनी गाँड मरवाने लगी। अब उसका लंड मेरी गाँड में आसानी से घुस रहा था। वो फ़ुल स्पीड से मेरी टाइट गाँड मार रहा था। बीच-बीच में मैं रुक कर अपनी चूत को उसके नाफ़ के हिस्से से रगड़ती थी। मैं फिर से झड़ने लगी और उसका लंड भी मेरी गाँड के अंदर फूलने लगा और अनिल ने अपनी गाँड उठा कर अपना मूसल लंड मेरी गाँड में पूरा अंदर तक घुसा दिया। फिर उसने भी अपनी क्रीम मेरी गाँड के अंदर ही निकाल दी। मैं भी झड़ चुकी थी और मदहोश हो कर उसके जिस्म पर गिर पड़ी। हम दोनों एक दूसरे से लिपट गये और पता नहीं कब हमारी आँख लग गयी और हम एक दूसरे से लिपटे हुए नंगे ही सो गये। इतनी ज़बरदस्त तस्कीन बक़्श चुदाई के बाद नींद भी बहुत मस्त आयी। सुबह मेरे सारे जिस्म में मीठा-मीठा सा दर्द हो रहा था। बार-बार अंगड़ायी लेने का दिल कर रहा था और चुदाई का सोच सोच कर खुद-ब-खुद ही मुँह पे मुस्कुराहट आ रही थी।
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