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Fantasy तांत्रिक बहू
#21
Please pati ko beijat or lachar mat dikhana please prachi bhi ek bete ki maa hai
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#22
next update kab aayega
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#23
अध्याय ८ आशीष की वापसी 
प्राची घर वापस आकर दो तीन दिन आराम करती है , अपने बच्चे को समय देती है । गोसाईं जी के गुफा की एक एक बात प्राची को रह रह कर याद आती है । कभी कभी उसे ये एक सपने जैसे लगता , उसे अब तक अपनी शक्तियों का एहसास भी नहीं था कि वो कुछ कर भी सकती है या नहीं ।
शीला प्राची को कुछ दिनों तक किसी भी बात में नहीं टोकती उसे पता था कि प्राची क्या सह कर आई है , शीला को एहसास था कि प्राची के शरीर को अभी आराम की जरूरत है , आखिर शीला भी कभी इस दौर से गुज़री थी , शीला को अच्छी बात ये लगती है कि प्राची ने भी दीक्षा गोसाईं जी से ही लिया है जिनसे कभी शीला की माँ और शीला ने दीक्षा लिया था । शीला किचन में काम करते हुए गोसाईं जी को याद करती है “गोसाईं जी का उम्र लगभग अब अस्सी पार हो ही गया होगा फिर भी हम तीन औरतों का उन्होंने पानी निकाल दिया था , लगभग  बीस साल पहले प्राची के जन्म के थोड़े समय पहले ही शीला की दीक्षा पूरी हुई थी और उसी जगह पे प्राची की नानी , शीला एयर दो और औरतों ने गोसाईं जी के साथ संभोग किया था । उस समय तो गोसाईं जी के शरीर का बल अपने चरम में रहा होगा । शीला अपनी दीक्षा के बाद समय और आवश्यकता के हिसाब से बहुत मर्दों से संभोग किया लेकिन किसी के साथ उसको वो सुख नहीं मिलता था जो गोसाईं जी के साथ आता है । “  शीला ये सब सोचते हुए खाना बना रही होती है तभी प्राची किचन में आती है ।
प्राची : क्या बना रही हो माँ ?
शीला : आज तेरे पापा को बैगन खाने का मन है , सबके लिए आज वही बना है ।
प्राची: हम्म .. मैं सोच रही थी की अब आगे क्या करूँ ? क्या आशीष को मुझे बुलाना चाहिए ?
शीला थोड़ी ख़ुश होती है कि आख़िर कर प्राची अपने आराम से निकल कर अपने परिवार के लिए सोच रही है ।
शीला : हाँ तुम अब बुला सकती हो , लेकिन तुमको पता है ना कैसे  बुलाना है ?
प्राची जानती है की गोसाईं जी के सिखाए मंत्रों से आशीष को बुलाना है , लेकिन वो अकेले इनके प्रयोग को लेके थोड़ी डरी हुई है । इसीलिए वो शीला के पास आई है ।
प्राची : हाँ । लेकिन मैं चाह रही कि आप साथ में रहो , मुझे अकेले में आदत नहीं , गोसाईं जी के साथ अभी तक जी भी अभ्यास था वो मैंने किया है लेकिन ऐसे अकेले कभी नहीं ।
शीला थोड़ी मुस्कुराती हुई प्राची के कंधे में हाथ रख के कहती है “ मैं कहाँ जा रही ? मैं हूँ ना हमेशा तेरे साथ !”
माँ का आश्वासन पाकर प्राची की चिंता थोड़ी कम होती है । उसे पता तो है आशीष को बुलाना है लेकिन बोलना क्या है और आगे उसके घर जाकर क्या करना है उसे मालूम नहीं , उसे इन सब कामो के लिए शीला की मदद चाहिए । लेकिन प्राची समय आने पर ही अपने सवालों को शीला से पूछना चाहती है वो नहीं चाहती कि शीला भी उसे बेवक़ूफ़ समझे ।
रात को खाना खा के शीला एक खाली रूम में तांत्रिक पूजा की तैयारी कर लेती है प्राची भी अपनी माँ के साथ उसी रूम में जाती है ,दोनों अपने कपड़े उतारते है । अब प्राची या शीला दोनों एक दूसरे के नग्नता के आदि हो चुके है जैसे कोई पति पत्नी । इसीलिए प्राची या शीला को अब इसमें शर्म या नयापन जैसा कुछ भी नहीं लगता । दोनों ने गोसाईं जी को नमन करके अपना कार्यक्रम चालू किया , मंत्रों के जाप और मोमबत्ती की रोशनी से
रूम में गोसाईं जी के गुफा जैसा ही माहौल बन गया । ये पूजा लगभग एक घंटे चला और  दोनों ने मंत्र जाप ख़त्म करके अपने कपड़े पहले और सोने चले गए । प्राची को आशीष को देखने की उत्सुकता थी वो सब कुछ पहले जैसा सामान्य करना चाहती थी इसी उम्मीद में की कल आशीष जल्दी आ जाए प्राची सो गई ।
इधर इस समय आशीष अपने दोस्तों के साथ घूम कर वापस घर आया था, बिस्तर में गिरते ही उसका नींद पड़ गया । मंत्र ने अपना असर दिखाना चालू किया , आशीष को एक सपना आया जिसने प्राची और आशीष सुहाग रात वाला संभोग कर रहे है , प्राची सपने में हक़ीक़त से ज़्यादा खूबसूरत और मादक लग रही थी , आशीष उसके कसे बदन को निचोड़ रहा था जैसे कोई चूसने से पहले कड़े आम को निचोड़ करके नरम करता है । उसके चूत की महक पहले से तीक्ष्ण और जायदा कामुक लग रही थी ।प्राची अपने मुंह में आशीष का लंड भर के उसको चूस रही है आशीष उत्तेजना और दर्द के कारण आहें भर रहा है । आशीष आज अपनी पत्नी का रस पान करना चाहता है वो प्राची की चूत को अपने मुंह में भरता है और ताक़त से खाता है , प्राची अपना सारा पानी आशीष को पीला रही होती है , आशीष मदहोशी में आके प्राची के ऊपर चढ़ता है और अपना लंड उसके चूत में डालने ही वाला होता है कि उसकी आँख खुल जाती है ।
आशीष उठ के बिस्तर में बैठ जाता है , पसीने से भीगा हुआ जैसे उसने सच में मेहनत की हो , लंड एकदम सख्त और चूत में घुसने को आतुर । आशीष अपना होश संभालते हुए वापस लेटता है आजतक उसको प्राची में लिए ऐसे तड़प नहीं उठा जैसे आज उसको लग रहा था । खड़े लंड को शांत करने के लिए वो मूठ मारता है , प्राची को याद करके तुरंत उसका लंड पानी छोड़ देता है। आशीष का लंड तो शांत हुआ लेकिन उसके अंदर प्राची से संभोग के लिए एक अजीब से तड़पन चालू हो जाती है । आज तक जिस पत्नी को वो बिना तवज्जो दिए चोदता था आज उसके लिए ही अचानक इतनी बेचैनी आशीष को समझ नहीं आता । वो पूरे रात में प्राची को याद करके तीन बार मूठ मारता है और आख़िरकार तीन बजे रात में जाके उसकी नींद लगती है ।
सुबह आशीष की नींद खुली और उसके दिमाग में अभी भी एक ही शख़्स थी प्राची ।
आशीष हाथ में चाय लिए बैठा और सोचते रहा कि “आख़िर ऐसा क्या हुआ , अचानक से प्राची की इतनी याद मुझे क्यों आ रही है ? क्या मुझे उससे मिलना चाहिए ? लेकिन मिलना भी तो ठीक नहीं है , आख़िर इतनी लड़ाइयों के बाद किस मुंह से उससे मिलने जाऊ और मिलने से मेरे माँ बाप भी कौनसा  खुस रहेंगे ।”
आशीष यही सब सोचते हुए प्राची के बदन के बारे में सोचने लगा कसी हुई और एकदम फिट, आज से पहले ऐसा नहीं हुआ था की प्राची को सोच के आशीष तीन तीन बार मूठ मारले लेकिन कल रात से प्राची आशीष के दिमाग में घर कर गई थी ।
 
इधर प्राची सुबह होते ही अपने आप को संवारने में लग गई ।
गोसाईं जी के साथ इक्कीस दिन बिताने के बाद प्राची अब अपने बदन में भौ और सर में छोड़ के कहीं बाल नहीं रखती थी इसीलिए उसने सुबह उठके पहले अपने शरीर को साफ़ किया , एक काले रंग के साड़ी नाभि के नीचे से , बैकलेस ब्लाउज के साथ प्राची ने पहना , गहरे रंग का लिपस्टिक और उससे ही मैच होता गहरा मेकअप । प्राची अब पेंटी और ब्रा नहीं पहनती थी शौच के बाद सफाई के लिए भी प्राची ने एक चमकीला बालू का पथ्थर रखा था बिल्कुल वैसे ही जैसे गोसाईं जी ने सिखाया था ।
ये प्राची का नया रूप था , आत्मविश्वास से भरी हुई प्राची आशीष के इंतज़ार में थी । शीला भी जान रही थी कि एक दो दिन के भीतर ही आशीष का आना होगा अब बस देखना ये था कि प्राची के मंत्रों में ताक़त कितना था ।
शाम होते होते आशीष का हालत ख़राब होने लगा वो अब अपने आपको रोक नहीं पा रहा था ,आख़िरकार हार मानते हुए उसने प्राची से मिलने का सोचा । आशीष ने प्राची को फ़ोन लगाया लेकिन कोई उत्तर नहीं । आशीष की बेचैनी बढ़ गई उसने मंजू देवी को फ़ोन लगा के कहा दोस्तों के साथ बाहर जा रहा रात में देर होगी । आशीष अक्सर दोस्तों के साथ बाहर जाता तो मंजू देवी को इसमें कोई अजीब बात नहीं लगी । आशीष अपनी गाड़ी उठा के प्राची के घर को चला , तेज जितना तेज वो जा सकता था ।
प्राची के फ़ोन में जैसे आशीष का काल आया प्राची ने दौड़ के शीला के पास पहुँची , शीला ने मुस्कुराते हुए प्राची को गले लगाया और बोली “ जादू का असर हो रहा है,तेरी मेहनत अब रंग लाने वाली है, करने दे उसको फ़ोन , तू मत उठाना , देखना कैसे कुत्ते की तरह दम हिलाते वो घर आयेगा । “  शीला और प्राची दोनों हसते है , हालाकि प्राची को “कुत्ते” वाली बात थोड़ी चुभी पर उसने अपनी माँ को नहीं टोका ।
शाम को प्राची के घर की घंटी बजती है । घर में शीला और प्राची ही थे । दोनों समझ गए की आशीष आ चुका है । शीला जाती है दरवाजा खोलने , आशीष सामने खड़ा प्राची को खोज रहा था , शीला के पैर छूते हुए “ मुझे प्राची से कुछ बात करना है, क्या अभी कर सकता हूँ ।”
शीला : अब बात क्यों करनी है ? तुमनेतलाक़ के पेपर भी भेज दिए है । अब मेरी बेटी को छोड़ दो वो और दर्द नहीं सह सकती ।”
आशीष : मुझे उसी बारे में बात करनी है । मैं सब ठीक कर दूँगा एक बार बस आप मुझे प्राची से मिला दो ।
शीला : बेटा तुम्हारे ठीक करने से अब बात कहाँ बनने वाली है ? तुम्हारे माँ बाप नहीं मानेंगे । कितना कुछ बोलके गई है तुम्हारी माँ उस दिन ।
आशीष : अपनी माँ की तरफ़ से मैं माफ़ी माँगता हूँ । आप प्लीज़ उनकी बातों को दिल से मत लीजिए ।
शीला अपना मुज सिकोड़ती है जैसे उसे आशीष के बैटन पर भरोसा ना हो और कहती है  : हम भी चाहते है सब ठीक हो जाए बेटा , तुम अपने घर वालो को मना लेना ,ठीक है तुम अंदर आ जाओ , मैं बुलाती हूँ प्राची को।
आशीष शीला के पीछे पीछे घर में घुसता है इस बात से अनजान की जिस प्राची से वो मिलने जा रहा है वो पहली वाली प्राची नहीं एक नई औरत है । आशीष हाल में जाके सोफा में बैठता है , प्राची जान बूझकर थोड़ा देर बाद हाल में जाती है ।
प्राची को देख के आशीष को ऐसा लगा की वो पहली बार उसे देख रहा है । इतना मेक अप केल रंग की साड़ी वो भी नाभि के नीचे तक , आज प्राची के उरोज़ भी उठे और भरे हुए नज़र आ रहे थे । आशीष अपने जगह में उठ के  खड़ा हो गया , आशीष चाहता था कि वो प्राची को पकड़ कर गले से लगा ले । प्राची चुप चाप आशीष को देख रही थी उसकी नज़रों से पता नहीं चल पा रहा था कि वो आशीष से प्यार करती है या नफ़रत । आशीष ने बात लेने की पहल कि
आशीष: मुझे पता है मैंने बहुत परेशान किया है तुमको । लेकिन मैं सब ठीक करने आया हूँ ।
प्राची का मन थोड़ा हल्का हुआ , आख़िरकर इतने दिनों तक जिसके लिए उसने इतना मेहनत किया था वो सफल हो रहा था, आशीष उसके सामने अपनी गलती मानते हुए खड़ा था । लेकिन प्राची अब सब अपने हिसाब से चलाना चाहती थी इसीलिए उसने सब बातें क्लियर करके ही वापस जाने का सोचा ।
प्राची: आपकी मम्मी का क्या ? वो मानेगी और बाकी घर वाले ?
आशीष : मैं सबको मना लूँगा । तुम बस अब हाँ करो । मैं तलाक़ की अर्जी भी वापस लूँगा ।
प्राची: आप घर में सबको बता के यहाँ आए हो?
आशीष : नहीं । लेकिन मैं संभाल लूंगा ।
प्राची जानती थी की आशीष ने घर वालो को नहीं बताया होगा लेकिन वो अपनी ताक़त को परखना चाहती थी ।
प्राची : तो बताओ उनको , अभी फ़ोन करके ।
आशीष : पहले तुम हाँ या ना बोलू तभी बताऊँगा ।
प्राची : आपको बताना होगा , उसके बाद ही बात होगा नहीं तो वापस चले जाओ । मेरी ज़िंदगी आपके बिना भी ठीक चल रही है ।
आशीष को जाने के बाद से एक सिहरन सी हुई , उसने तुरंत फ़ोन लगा के मंजू देवी को सब बात बता दिया । मंजू देवी को भी समझ नहीं आ रहा था कि जो लड़का कल तक प्राची की बात भी नहीं कर रहा था आज अचानक उसके घर में कैसे .. लेकिन आशीष को अभी केवल प्राची चाहिए थी वो मंत्रों के इतने वश में था की प्राची जो कुछ भी बोलती वो करता ।
प्राची: बहुत अच्छे । अब बोलो ।
आशीष : मुझे माफ कर दो अब तुम जैसे बोलोगी वैसे ही होगा , तुम चाहोगी तो हम अलग घर लेके रहेंगे । लेकिन तुम साथ आ जाओ ।
प्राची अलग घर लेके नहीं रहना चाहती थी क्योंकि वो अपने बच्चे के लिए सबका प्यार चाहती थी और उसको अब अपने ताक़त पे पूरा यकीन भी हो गया था वो जान गई थी की अब इनका पूरा घर आसानी से वश में हो जाएगा ।
प्राची : ठीक है माफ़ किया लेकिन मेरे माँ बाप को भी उस दिन इतना कुछ बोल के गए थे उसके लिए माफ़ी मांगो ।
आशीष सीधे अंदर किचन में जाके शीला के पैर छू के माफ़ी माँगता है । शीला उसको उठा के बोलती ह “कोई बात नहीं बेटा! अब मैं चाहती हूँ तुम दोनों ख़ुशी से रहो”
आशीष वापस प्राची के पास आता है । प्राची अब बहुत हल्का महसूस और रही थी क्योंकि उसका काम पूरा हो गया था । प्राची के पापा भी वापस घर आके आशीष को देख के ख़ुश होते सब साथ में खाना खाते है । प्राची आशीष को रुकने कहती है ।आशीष की मन माँगी मुराद पूरी हो जाती है ।
रात में सोने के लिए जैसे ही दोनों रूम में जाते है आशीष पहली की तरह प्राची पे टूट जाता है । उसके बदन के हर कोने को चूमने लगता है , प्राची को ये सब बहुत अच्छा लगता है की उसका पति उसका मुरीद हो गया , वो साथ देने लगती है ।
आशीष जल्दी ही प्राची के तन से उसकी काली साड़ी निकालता है अंदर कुछ नहीं , चूत एकदम साफ़ , सूजी हुई किसी पाव रोटी की तरह बिल्कुल वैसे ही जैसे उसने सपने में देखा था । प्राची केवल केल बैकलेस ब्लाउज में अपने बिस्तर पर पड़ी हुई थी, आशीष जैसे ही प्राची के ऊपर चढ़ने की कोसिस किया प्राची ने अपना एक पैर उसके कंधों पर रख के उसे रोकते हुए कहा : मैं तुम्हारी रानी हूँ । बोलो
आशीष : हाँ तुम मेरी रानी हो ।
आशीष थोड़ा ताक़त लगाता है लेकिन प्राची अपना पैर नहीं हटाती ।
प्राची: अब से जैसा मैं कहूँगी तुम वैसा ही करोगे ।
आशीष : हाँ मेरी रानी वैसा ही करूँगा । तेरे हर इच्छा मेरे सर आँखो पर ।
प्राची : मुझे नंगी करने से पहले अपने कपड़े खोलो ।
आशीष जल्दबाजी में अपने सारे कपड़े उतार देता है ।उसका लंड एकदम सख्त तना हुआ ।आज वो इतना उतावला  होता है जैसे कॉलेज के किसी स्टूडेंट ने अपनी मैडम को ही पा लिया हो। प्राची  की नज़र जैसे ही आशीष के लंड पे पड़ती है उसे गोसाईं जी की याद आ जाती है । कैसे आज उसके पति का लंड उसको पराया लग रहा है और वो ऐसा महसूस करती है जैसे गोसाईं जी का लंड ही उसका अपना है । प्राची अपने आप को संभालते हुए आशीष को अपने ओर बुलाती है और अपना पैर ऊपर करके बोलती है : अँगूठा चूसो ।
आशीष तुरंत पैर के अंगूठे को मुंह में लेके चूसने लगता है , कुछ देर चूसने के बाद वो ऊपर की ओर आगे बढ़ता है लेकिन प्राची उसके हरकत को समझ के अपना दूसरा पैर आगे करती है । आशीष दूसरा अंगूठा भी चूसता है । प्राची की सेवा में आज आशीष को एक अलग ही आनंद की अनुभूति होती है, चूसते हुए आशीष की नज़र प्राची के साँवले और कसे बदन पर घूम रही होती है , आशीष को आज ऐसा लग रहा था मानो वो पहली बार इस बदन को भोग रहा है, इतना आकर्षण मानो आशीष चाट चाट के प्राची के बदन को साफ़ करना चाहता है। बार बार आशीष की नज़र फुले हुए चूत पर रुक जाती है वो प्राची कि नज़रो में देखता है जैसे उससे आज्ञा माँग रहा हो आगे बढ़ने के लिए । प्राची अपना पैर नीचे करके आशीष को आगे बढ़ने देती है , आशीष पूरे पैरों को चूमते हुए धीरे धीरे ऊपर की ओर आता है, आशीष अब इस बात का ध्यान रखता है की किसी भी बात से प्राची नाराज़ ना हो और उसको रोके नहीं । प्राची अपनी दोनों टांगे खोल के आशीष का स्वागत करती है । आशीष चुत के सामने रुक के उसको निहारता है जैसे मिठाई खाने से पहले उसे देख के भी स्वाद लिया जाता है । आशीष पहले भी ये चूत देखा था लेकिन इतनी मादकता उस समय इसमें नहीं थी , आज चूत पहले से बहुत ढीली और फैली हुई लग रही थी , आशीष वश में होते हुए भी गोसाईं जी के मेहनत को नज़रअंदाज़ नहीं कर पाया लेकिन वो कुछ भी ग़लत बोलके प्राची को नाराज़ नहीं इतना चाहता था । अपने पति को इतना पास पाकर प्राची की चूत ने भी पानी छोड़ दिया , आशीष ने पानी को किसी प्रसाद की तरह स्वीकारा और अपने मुंह में प्राची की चूत को भर के खाने लगा ।
आशीष के सर को अपने हाथों से प्राची अपने चूत की सॉर्ट दबाए जा रही थी , प्राची को गोसाईं जी के मुँह की आदत थी , गोसाईं जी किसी भेड़िए के ताक़त से चूत को खाते थे उसके सामने आशीष किसी पिल्ले के ताक़त से खा रहा था , प्राची चले कितना भी ताक़त से आशीष को दबा ले उसको वो सुख अब कहाँ से मिल पाता । प्राची को थोड़ी देर में ये बात समझ में आ ही गई और उसने आशीष को हल्का छोड़ कर  अपना चूत चटवाती रही । आशीष से मन भर के चूत चटाने के बाद प्राची अपना ब्लाउज खोल के आशीष का मुंह अपने दूध में लगा देती है । गोसाईं जी ने इक्कीस दिन तक प्राची का स्तनपान किया था उसके बाद आज वो किसी मर्द से अपना स्तन खाली कराना चाहती है । आशीष दोनों स्तनों को पी के खाली किया । प्राची ने आशीष को बेड में लिटाया और 69 अवस्था में आके आशीष के ऊपर बैठ गई । प्राची ने अपने पति के लंड को मुंह में लिया और चूसने लग गई , प्राची अपना चूत आशीष को खाने को दे दिया । आशीष को प्राची का चूसना बहुत तेज लगा , उसको लंड में ताक़त का एहसास हो रहा था , और थोड़े देर में ही वो प्राची को जकड़ कर उसके मुंह में अपना माल छोड़ दिया। प्राची ने पूरा वीर्य पी लिया लेकिन आशीष का लंड अपने मुंह से नहीं निकाला, प्राची अपना पकड़ लंड में हल्का करके मुंह को आगे पीछे करने लगी। आशीष को झड़ने के कारण लंड में हल्का जलन लग रहा था लेकिन प्राची के पकड़ हल्का करने के कारण उसने कुछ नहीं कहा । प्राची अपना चूत चटवाते हुए बार बार अपना गांड आशीष के नाक में रगड़ रही थी , आशीष ने पहले गांड़ नहीं चाटी थी इसलिए उसको उसकी गंध तीक्ष्ण लग रही थी लेकिन प्राची एक मंझे हुए खिलाड़ी की तरह धीरे धीरे आशीष के नाक की तरफ़ अपनी गांड को लाती थोड़ा देर रखेंगे के बाद फिर दूर ले जाती । प्राची आज आशीष को अपना गांड चटवाने के मन में थी । आशीष ये समझ पाता उसे पहले ही प्राची ने उसे अपने गांड की खुशबू से परिचित करवाया । प्राची के हल्के चुसाई के बाद आशीष का लंड फिर खड़ा हो रहा था । प्राची मौका सही समझ के अपना कमर हिलाना चालू करती है , अपनी चूत को आशीष के मुंह में रगड़ती है और गांड़ को आशीष के नाक में । आशीष अब गांड के महक से नहीं बच पाता और छूत के लालच में चुप चाप प्राची की गंदी गांड के महक को सूंघते रहता है । प्राची पूरी ताक़त से अपनी चूत को आशीष के पूरे मुंह में भर देती है । आशीष अब केवल नाक से सांस ले सकता है और उसके हर सांस के साथ प्राची की नशीली महक उसके फेफड़ों तक जाती है । आशीष अपना भाग्य समझ के उसको स्वीकार करता है । आशीष के शरीर अब शांत एकाग्र हो जाता है , वो प्राची के गांड से सांस ले रहा होता है , लंड अब एल्ड रॉड की तरह सख्त । प्राची समझ जाती है कि उसका काम अब हो गया। वो कमर को ढीली करती है और अपना कूल्हा उठा के आशीष के मुंह में थोड़े दूर में रखती है , आशीष अपनी पत्नी के भरे हुए गांड की सुंदरता देख के उत्तेजित हो उठता है और अपने हाथों से प्राची के दोनों भारी कूल्हों को अलग करके अपना जीभ उसकी महकती गांड के छेद में रख के चाटने लगता है ।
प्राची को तो मानो जैसे स्वर्ग मिल गया हो  एक महीने पहले तक जो आदमी तलाक़ की बात कर रहा था आज वो उसकी गांड चाट रहा है , शीला और गोसाईं जी को प्राची मन ही मन धन्यवाद देती है । मन भर के अपना गांड साफ़ कराने के बाद प्राची सीधे होके अपने पति की सवारी करती है। लंड को चूत
में डालने के बाद दो चार गुप्त संभोग के निचोड़न से आशीष तुरंत ही अपना माल छोड़ देता है । प्राची जानती है की अब उसकी प्यास आशीष नहीं बुझा सकता लेकिन वो खुस है की उसका पति अब वापस उसके पास आ गया है ।
बाकी आगे …
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#24
\Bass ye galat hai ki ab pati se satisfied nahi hai ye nahi karwaeye please kyu ki agar nahi accha lag raha to joint custody lekar bacche ki divorce karva do par during sex satisfaction of both party is necessary
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#25
next update kab aayega
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#26
Prachi the new tantrik
Continue please
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#27
Please update dijiye
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#28
Too unique and really amazing story, Keep going...
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#29
(05-12-2025, 09:12 AM)Nilaminbra Wrote: Mast likha hai please update jaldi do

Haan. Loved this story. Update aana chahiye, new year bhi aa gaya :)
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#30
Heart 
अध्याय ९ प्राची के ससुर खेमू 
आशीष प्राची को घर आने के लिए माना लेता है । लेकिन मंजू देवी प्राची को देख कर खुश नहीं होती और बाकी घरवाले भी अचंभित होते है कि अचानक ऐसा क्या हुआ की एक दिन के अंदर ही आशीष का मन बदल गया । प्राची काले  रंग की चमकीली साड़ी और स्लीवलेस ब्लाउज पहन के वापस घर आई, बाल लंबे खुले हुए, स्तन पहले से बड़े और उभरे हुए , कूल्हे भी भरे हुए और दरार भी अब साफ़ नज़र आ रहा था , ना ब्रा और ना ही पैंटी  , ब्रा और पैंटी के बिना प्राची अपने को आज़ाद और ज़्यादा विश्वास से भरी हुई महसूस करती है। गोसाईं जी ने अपनी सारी ताक़त से प्राची में इतने बदलाओ लाए थे जो कि हर किसी को साफ़ नज़र आ रहा था ।
प्राची घर में घुसते ही मंजू देवी के पास गई , पॉव ना छूकर सीधे गले मिली ,
 “माँ जी अब सब ठीक होगा , मैं आप लोगो को शिकायत का मौक़ा नहीं दूँगी ।”
प्राची ने मंजू के गले मिलते हुए कहा , मंजू थोड़े सदमे में थी , एक तो प्राची की सुंदरता में चार चाँद लग गया था ऊपर से उसकी बातें भी नरम और मीठी हो गई , मंजू समझ नहीं पायी की क्या बोले वो बस एक बनावटी मुस्कान बना के वहाँ से पूजा के लिए मंदिर चली गई । प्राची हाल में आके खेमू (अपने ससुर ) से मिली । खेमू प्राची के बदन में आए बदलाओ को नज़रअंदाज़ नहीं कर सका , प्राची ने झुक कर खेमू के पांव छुए , प्राची जानती थी वो क्या कर रही है , खेमू ने सरसरी नज़र प्राची के सुडौल और बढ़े हुए उरोजों पर मारी , उसने कभी प्राची को ग़लत नज़रों से नहीं देखा था लेकिन आज ना चाहते हुए भी उसके मन में प्राची का बदन आकर्षण पैदा कर रहा था । प्राची खेमू के आँखो में देखते हुए बोली : “आशीर्वाद दो ससुर जी अब सब अच्छा रहे “
“हाँ , ख़ुश रहो”खेमू बोला । प्राची मुस्कुराते हुए अपने कमरे में गई सब सामान ठीक ठाक करके आराम करने गई । आशीष भी आज अपने काम से फुर्सत ले कर प्राची की मदद कर रह था । कल की रात आशीष को असीम आनंद प्राप्त हुआ वो आज भी वही लालसा में था , किसी भी कीमत पर प्राची को दिन भर खुश रखो और रात में प्राची तुमको खुश रखेगी ।
हुआ भी कुछ वैसे ही । कुछ दिन तक सब सामान्य तौर पर। चलते गया । प्राची के व्यवहार से आशीष,खेमू और उसका देवर सत्यम बहुत ख़ुश थे बस मंजू को प्राची से तक़लीफ़ था , मंजू को ये बात नहीं पच रही थी की प्राची में इतना बदलाव कैसे आ गया और घर के सारे मर्द उसका कहा मान रहे थे ये बात भी मंजू को चुभ रही थी । मंजू की तकलीफ़ प्राची को समझ आ रही थी लेकिन प्राची मंजू पे ध्यान नहीं दे रही थी , वो चाहती थी की मंजू थोड़ा और परेशान हो , अपने पति और बेटो को प्राची के पीछे देखे उसके बाद मंजू देवी पे कुछ जादू किया जाएगा । आशीष को रोज़ रात में गुप्त सम्भोग के कुछ झटके दे कर प्राची खुश  कर देती , कुछ ही दिनों में आशीष इतना प्राची के वश में हो गया कि उसे प्राची की हर बात सही लगती और बाकी सबकी बातों को वो नज़र अंदाज़ कर देता ख़ास कर मंजू देवी की उन बातों को जो वो प्राची के ख़िलाफ़ बोलती।प्राची ने खुल के खेमू के सामने अंग प्रदर्शन चालू किया । अपने उरोजों और गांड को मटका मटका कर वो खेमू को ललचाती , शुरू में खेमू बहू के लिहाज़ के कारण अपने मन पे काबू करने की कोसिस की लेकिन आख़िर में उसका मन एक मर्द का था जो एक जवान औरत के जाल में फ़स ही गया । खेमू भी प्राची के सामने अब जाने के बहाने खोजता ताकि थोड़ा बहुत झाँक ताँक कर सके । मंजू देवी खेमू और प्राची के बीच चल रहे इस अंतर्द्वंद से अनजान थी , इसीलिए महीने भर के अंदर ही खेमू के मन में प्राची ने अपने लिए कामुकता को पैदा कर ही दिया। प्राची जानती थी कि मंजू देवी को वश में करने की चाबी खेमू ही है ।
प्राची ने खेमू के लिए एक योजना तैयार की , वो अपनी एक पुरानी पेंटी बाहर निकाल कर रखी और आशीष के साथ संभोग के बाद आशीष को उसी पेंटी से अपनी चूत पोछने को कहती । आशीष ने लगातार एक हफ़्ते तक उस पेंटी से प्राची की चुदी हुई गीली चूत को साफ़ किया , प्राची को मादकता की महक से वो पैंटी पूरी तरह भर गई , महक ऐसी तीव्र की कोई भी मर्द के नथुनों मे लगे तो उसका लैंड खड़े हो जाए । आशीष में एक रात सेक्स के बाद प्राची से पूछा की रोज़ इस पेंटी से चूत साफ़ करती हो , इसको साफ़ कर दी क्या ?
प्राची : पानी में साफ़ करने से कपड़ा ख़राब हो जाएगा । एक काम करना सुबह उसको छत में सुखाना ।
आशीष : हाँ मेरी जान । इसको छत में सूखा दूँगा दिनभर की धूप में ये साफ़ हो जाएगी ।
प्राची : भूलना मत जानू। अब मेरा ये सब काम तुम ही किया करो मैं थक जाती हूँ ।
आशीष : हाँ जानू । जो भी काम हो आप मेरे से बोला करो मैं कर के दे दूँगा ।
प्राची : लेकिन जब तुम घर में नहीं रहते तो समझ में नहीं से की किससे अपना काम कराऊ? मम्मी जी तो अभी तक मुझे ज़्यादा पसंद नहीं करती ।
आशीष: मम्मी को मैं मना लूँगा , चिंता मत करो । और पापा भी तो घर में ही रहते है उनको बोला करो वो कर देंगे ।
प्राची : हाँ , अब से उनको ही बोल दूँगी । आख़िर इस घर के जिम्मेदार मर्द तो वो ही है ना ।
आशीष: हाँ ।
अगली सुबह ऑफिस जाने से पहले आशीष प्राची की पेंटी लेके छत में जाता है और बाकी कपड़ों के साथ पेंटी को तार में सूखो कर नीचे आ जाता है । पैंटी वाली चाल को खेमू आसानी से चुगेगा ये प्राची जानती थी आखिर कर महीने भर से प्राची में खेमू को अपना जवान बदन दिखा दिखा के तैयार जो किया था ।
खेमू खाने के बाद दोपहर में टहलने के लिए छत जाता है वहाँ उसकी नज़र प्राची के पैंटी पर पड़ती है ,” मेहरून रंग की चड्डी ज़रूर प्राची की है।” मन में खेमू सोचता है । वो अपना ध्यान उसके पेंटी से हटाकर टहलने में लगाने की कोसिस करता है लेकिन बार बार महरून पेंटी उसका ध्यान खींचता है । खेमू आख़िरकार पेंटी के पास जाके खड़े होके उसे ध्यान से देखने लगता है , चूत के पानी के निशान साफ़ दिखाई दे रहे थे , खेमू को लगा के ये चड्डी तो धो के सुखाने रखी है फिर इसमें निसान कैसे ?
खेमू धब्बो को हाथ से मलता है , सफेद धब्बे खेमू के हाथ लगने से चड्डी से निकलने लगता है, खेमू समझ जाता है की ये बिना धुली हुई चड्डी है , सोचने भर से उसके लंड में सिहरन जाती है । वो तुरंत चड्डी को हाथ में लेके अपने नाक से लगाता है , साँस अंदर जाने के साथ साथ ही प्राची की जवानी की महक उसके फेफड़ों तक पहुँचती है , खेमू का लण्ड तक के उसके पेंट में तंबू। बना देता है । वो एक हाथ से पेंटी सूंघता है और दूसरे हाथ से अपना लंड हिलाने लगता है, प्राची की जवानी अपना जलवा दिखाती है , बूढ़ा खेमू किसी सत्रह साल के लौंडे की तरह छत में मूठ मारता है वो भी अपनी ही बहू की पैंटी सूंघते हुए । खेमू का महीने भर से प्राची के लिए भरा हुआ हवस उसे ज़्यादा देर टिकने नहीं देता और उसका लंड शहद की तहर गाढ़ा माल निकलता है , खेमू अपने माल को प्राची के चड्डी में ही पोछ कर उसे वापस सूखा जाता है ।  खेमू को आज अपने जवानी के दिन याद आ गए । जब आपके पास करने को कुछ ना हो और कुछ नया उद्देश्य मिल जाए तो जो ख़ुशी होती है वही ख़ुशी आज खेमू को हो रही थी , वो भूल गया की प्राची उसकी बहू है जिसके पेंटी में आज उसने अपना माल छोड़ के आया है , वो बस आज एक मर्द है जो अपने से तीस साल छोटी मादा के मादकता को सूंघा है ।
प्राची शाम में अपने पैंटी का अवलोकन करने के लिए छत में जाती है , अपनी पैंटी को चिपचिपा पाकर प्राची समझ गई कि ससुर जी ने दाना चुग लिया है , एक कुटिल मुस्कान प्राची के चेहरे पे आती है, अब आशीष के बाद खेमू उसके तलवे चाटने के लिए तैयार होता  हुआ प्राची को दिखाई देता है । प्राची पेंटी वही छोड़ जाती है ।
रात में सेक्स के लिए उछलता हुआ आशीष प्राची पर टूट पड़ता है , प्राची थोड़े सख्त रवैया अपनाते हुए उसे रोकती है और समझाती है कि रोज़ रोज़ के सेक्स से वो ऊबने लगी है इसीलिए कुछ दिनों का गैप लेकर ही दोनों सेक्स किया करेंगे ।
आशीष का दिल टूट जाता है , लेकिन उसकी हिम्मत नहीं होती की प्राची के बात को काटे , वो जानता है की प्राची जान तक खुस है तबतक सेक्स मिलेगा भले हर दिन ना सही लेकिन अगर गुस्सा होके वापस मायके गई तो उसके नसीब में कुछ नहीं बचेगा ।
प्राची अपना पूरा ध्यान खेमू के ऊपर लगाना चाहती है , वो अपने ससुर को बोतल में उतार कर घर का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में रखना चाहती है । आशीष को भी सेक्स के लिए थोड़ा तरसा कर उसपर अपना पकड़ मजबूत बनाने का प्राची का मन है, इतना मजबूत पकड़ की कल के दिन में किसी दूसरे मर्द से प्राची संभोग को भी आशीष अपनी किस्मत समझ के स्वीकार कर ले ।
आशीष सेक्स नहीं मिलने के कारण मुंह उतार कर के बैठा होता है , प्राची उसे देख के कहती है: आशीष तुम जाकर मेरी पेंटी ले आओ ।
आशीष : अभी ? रात में ? जाने दो ना सुबह लाऊँगा ।
प्राची : क्या जानू , तुम्हारे फायदे के लिए बोल रही . जाकर ले आओ ।
आशीष चुप चाप पेंटी लेने ऊपर जाता है और वापस रूम में घुसते ही प्राची से कहता है : दिन भर में भी ये पेंटी सूखी नहीं । अभी भी थोड़ा गीला पन बाक़ी है ।
प्राची मन ही मन हस्ती है , बुद्धू कहीं का ।
प्राची: सेक्स का रस ऐसे ही नहीं सूकता जानू । कल भी सुखना उसको , तब सूखेगा । अच्छा तुम उसकी महक लेके देखो मेरी चूत की ख़ुशबू आ रही या नहीं ?
आशीष पेंटी के गीले भाग को नाक से सटा कर सूंघता है , एक मिला जुला सा महक उसकी नाक में जाता है , लेकिन आशीष वीर्य के महक को नहीं पहचान पाता , और वैसे भी प्राची की चूत की तीक्ष्ण गंध कई लोगो के वीर्य के महक को अपने में दबाने की क्षमता रखती है ।
आशीष: हाँ जान , मस्त महक रहा, आपके चूत की खुश्बू आ रही है ।
आशीष के पैंट में तंबू बन जाता है , प्राची उसे देख के बोलती है: हाँ वो तो तुम्हारे पैंट में दिख ही रहा है । मैं चाहती हूँ कि तुम इसे सूंघते हुए अपना लंड हिलाओ ।
आशीष: जैसी आपकी आज्ञा ।
आशीष अपना पेंट उतार के पैंटी को हाथ में लेके अपना लिंग आगे पीछे करता है । प्राची  अपने एक हाथ से उसके अंडे से खेलती है , आशीष आनंद लेते हुए पेंटी को नाक से लगाये रहता है , प्राची का हाथ आशीष के शरीर पर घूमते हुए उसके निप्पल पर जाता है , निपल को प्राची पूरे ज़ोर से उँगलियों से निचोड़ देती है , दर्द के मारे आशीष की चीख निकल गई और साथ में उसके लंड से वीर्य भी, प्राची आशीष के हाथ से पेंटी लेके आशीष का वीर्य उससे पोंछ देती है ।
निढाल होके आशीष बिस्तर पर सोता है, प्राची को कहता है कि जान आज तो अलग ही मज़ा आया ।
प्राची: हाँ सेक्स के अलावा भी बहुत से काम के सकते है, केवल लंड चूत में जाना ही मजा नहीं होता ।
आशीष: हाँ जान । सही कहा
प्राची : ये पेंटी फिर से गीली है , कल सुबह उठते ही इसको सूखा देना छत में ।
आशीष: जैसी आपकी आज्ञा ।
आशीष थक कर सो जाता है , प्राची मन ही मन सोचती है कि इस बुद्धू को ये नहीं पता कि इसमें इसके बाप का भी वीर्य  मिला है ।
अगले दिन आशीष उठते ही प्राची की पेंटी ऊपर छत में रख के आ जाता है , प्राची भी सुबह सुबह छत के एक कोने में अपने पुराने मोबाइल के कैमरा को रिकॉर्डिंग में रख कर  चालू कर देती है ।
शाम में प्राची ने एक्साइटमेंट के साथ छत से मोबाइल लाके अपना रूम लॉक करके उसे फॉरवर्ड करके देखने लगती है , हुआ वही जिसका प्राची को अंदाज़ा था , खेमू प्राची की पेंटी सूंघते हुए मूठ मार रहा था और अपना माल उसके पेंटी में पोंछ कर वापस उसी जगह पेंटी को सूखा कर चल देता है ।
प्राची की चूत ये देख कर गीली हो जाती है , प्राची को अपने हुस्न पे घमंड भी होता है , साथ ही वो सोचती है की मर्दों को फ़साना सच में कितना आसान है । प्राची समझ गई की खेमू अब उसके जाल में गैस चुकी है और अब चूत की लालच में वो प्राची की हर बात मानेगा ।
मंजू देवी भी प्राची की बुराई अब कम करती क्योंकि आशीष तो सुनता ही नहीं और अब खेमू भी मंजू देवी के बातों पर ध्यान नहीं देता था । प्राची ने गोसाईं जी के बताए गए मंत्रों का प्रयोग आशीष और खेमू पर किया , प्राची का यौवन और गोसाईं जी के मंत्रा दोनों को काबू करने के लिए पर्याप्त थे । प्राची जानबूझ कर मंजू देवी पर इन मंत्रों का प्रयोग नहीं कर रही थी क्योंकि वो मंजु देवी को उसकी ताक़त दिखा के सबक सिखाना चाहती थी । प्राची अब सारे समय घर में आराम ही करती थी , आशीष प्राची का सब काम करता यहाँ तक की कपड़े धोने से रूम जमाने तक , मंजू देवी को ये बातें बिल्कुल पसंद नहीं आती और अब तो खेमू भी प्राची की हाँ में हाँ मिलाता , प्राची जो बोलती वो मार्केट से लाकर देता , यहाँ तक की सीधे प्राची के रूम में घुस के उसके पसंद के खाने और पहनने का सामान लेक खेमू देने लगा ।
एक दिन प्राची बिना टॉवल लिए नहाने चले गई और  अंदर से टॉवल के लिए आशीष को आवाज़ लगाया । आशीष नहीं था तो खेमू दौड़ते हुए टॉवल लेके बाहर पहुँच गया । मंजू देवी ये सब देख रही थी , प्राची ने खेमू को बाथरूम के बाहर अपने नहाते तक वेट करवाया , खेमू चुपचाप टॉवल लेके बाहर खड़ा रहा लेकिन मंजू देवी का खून ये देख के खौल उठा , प्राची के बाहर आते ही मंजू देवी ने खूब खरी खोटी सुनाना चालू कर दिया , प्राची एक सफेद रंग के टॉवल लपेट कर ही मंजू से लड़ाई करने लग गई , प्राची को गुस्सा होते देख खेमू ने मंजू को जमकर लताड़ लगाई , खेमू का प्राची के पक्ष में बोलने से मंजू देवी थोड़ी ठंडी पड गई । प्राची भी गुस्से में बोलते बोलते अपने कमरे की ओर गई , कमरे के अंदर जाते ही उसने बिना दरवाजा बंद किए अपना टॉवल बाहर फेंका , खेमू हाल से ही प्राची को साफ़ साफ़ देख पा रहा था,हालाकि मंजू देवी जहाँ पर थी वहाँ से प्राची का रूम नहीं देख रहा था  , पहली बार उसने प्राची को पूर्ण रूप से नग्न देखा था , उसका साँवला कसा और भरा हुआ बदन देख खेमू का लंड फुंकार मारने लगा । मंजू देवी किचन में काम करने चली हुई , खेमू एक टक प्राची को देखे जा रहा था । प्राची ने अपने ससुर जी को आवाज़ लगाई , खेमू तुरंत प्राची के कमरे के दरवाजे पे पहुँचा , प्राची आईने के तरफ़ मुँह करके नग्न खड़ी थी , खेमू प्राची की नंगी गाँड़ पे नज़र गड़ाए था ।
“टॉवल को छत पे सूखा दो , ससुर जी ।” प्राची में बेबाक होते हुए आदेश दिया । इसमें ना की गुंजाइश नहीं थी ।
“और हाँ , मेरी पैंटी सूख रही होगी तो लेते आना ।”
खेमू ने आदेश का पालन किया । वो नंगी प्राची के कमरे में घुस के उसको पैंटी दे दिया ।
प्राची बेशर्म होकर अपने ससुर के सामने पूरी नंगी घूम रही थी, कमरे का दरवाजा भी खुला था , प्राची को ना तो मंजू देवी का डर था और ना ही आशीष के आने का , उसको अपने तंत्र क्रिया पर पूरा यकीन था की सब कुछ उसके कंट्रोल में है । खेमू से पंथ हाथ में लेते ही प्राची ने उसपे लगे दाग को देखा , वो जानती थी की दाग किसका है फिर भी उसने गुस्सा करते हुए खेमू को देखा और पूछा : ये दाग कैसे लग गया ?
खेमू की आवाज़ अटक गई वो हकलाते हुए बोला : मुझे कैसे पता होगा बहू ?
प्राची : क्यों ? दिन भर छत में आप हीर रहते हो ना ?
खेमू को प्राची के उल्टे जवाब की उम्मीद नहीं थी । वो डरते हुए बोला : लेकिन मुझे नहीं पता ।
प्राची ने अपना मोबाइल निकाला और रिकॉर्डिंग चलाते हुए खेमू को दिखाया: जो करते हो उसको बोलो तो सही ससुर जी ।
खेमू का लंड जो प्राची की नंगी बदन देख के तंबू बनाये था वो वीडियो देख के ढीला पड़ने लगा । प्राची उसके सामने नहीं खड़ी बहस कर रही थी फिर भी खेमू को अपने हरकत पे खेद हो रहा था ।
प्राची खेमू को ज़्यादा सदमे में नहीं डालना चाहती थी , उसने पजामे के ऊपर से ही खेमू का लंड पकड़ लिया ,
प्राची: बड़ा बेशर्म है ये तो अभी भी खड़ा है ।
प्राची का हाथ पड़ते ही खेमू का लंड वापस तन के खड़ा हुआ , पलक झपकते ही प्राची ने पजामे का बड़ा खोल कर , खेमू का हथियार अपने हाथ में लिया ,
“आपने आज की लड़ाई में मेरा साथ दिया , उसका तोहफ़ा तो आपको मिलना चाहिए ना ?” प्राची ने कहा
खेमू : “ मैं हमेशा आपका साथ दूँगा बहू । चिंता मत करना ।
प्राची ने तेज़ी से हाथ आगे पीछे करके खेमू को झड़ा दिया , उसका वीर्य अपनी ही पेंटी में पोछ कर उसे दे दिया और छत में सुखाने बोला । खेमू किसी आज्ञाकारी नौकर की तरह अपनी बहू का चड्डी हाथ में लिए छत की आओर चला गया ।
मंजू देवी से लड़ाई में जीत कर प्राची को आज थोड़ी सुकून मिली । लेकिन वो आशीष और खेमू से अपनी और सेवा करवा कर मंजू देवी को नीचा दिखाना चाहती है ।
 
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#31
I am waiting for the update
thanks
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#32
hindi baatein english words me hoon to zyada behtar hoga bro
thanks
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#33
(13-01-2026, 08:12 PM)perfectmohib Wrote: hindi baatein english words me hoon to zyada behtar hoga bro

True . Next story hinglish me likhunga
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#34
Amazing story
Read my story 

हवस और नादानियां ~ (आप-बीती)


  flamethrower It's Rajan  flamethrower
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#35
(13-01-2026, 10:24 PM)Gomzey Wrote: True . Next story hinglish me likhunga

Bhai next story kyo isi story k next updates Hinglish me likho agr aap chahte ho. But Hindi font bhi alg feel deta h.
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#36
Update fast Bro
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#37
Nice story
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#38
Bhai next update when,, eagerly waiting..
Please update soon.
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#39
Please update
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#40
अध्याय १० शीला का कॉल
प्राची अब अपना जीवन बहुत एंजॉय कर रही थी अब सब कुछ उसको अपने कंट्रोल में लगता था , आशीष उसकी हर बात मानता और खेमू भी प्राची के आगे पीछे घूमा करता , सत्यम अपने काम में इतना व्यस्त था कि उसको घर में क्या हो रहा उससे मतलब ही नहीं था वो ज्यादातर अपने काम से बाहर ही रहता कभी कभार घर में आता तो बस खा के अपने कमरे में । रही बात मंजू देवी की तो वो अंदर ही अंदर जल रही थी , लेकिन कुछ कर नहीं पा रही थी क्योंकि आशीष और खेमू उसकी बिल्कुल भी सुन नहीं रहे थे । प्राची मंजू को मंत्रों से वश में कर सकती थी और वो आगे कभी ना कभी करेगी भी लेकिन प्राची मंजू देवी के बेबसी का आनंद ले रही थी ।
प्राची अब घर की मालकिन थी , हर काम उसके अनुसार ही होता ,  खाना भी प्राची के पसंद का ही बनता और जायदातर मंजू खाना बनाती , प्राची कभी कभार ही किचन में घुसती जब उसको मन होता खाना बनाने का । खेमू दिन भर प्राची की सेवा में लगे रहता , दोपहर का खाना प्राची को उसके रूम में ले जाके देने का काम खेमू ही करता, यहाँ तक की  साग सब्जी लेने से पहले भी प्राची से पूछ कर जाता ।
आशीष का काम अच्छा चल रहा था और प्राची जानती थी कि उसके ऐसो आराम के लिए पैसा जरूरी है इसीलिए वो आशीष को दिन में बिना कुछ परेशान किए उसका काम करने देती और रात में सोने से पहले उसको हमेशा कुछ ना कुछ नया अनुभव दे के सुलाती जिसके कारण आशीष प्राची के प्यार में दीवाना हो गया था , उसको रोज़ एक्साइटमेंट रहता कि घर जाकर आज नया क्या होगा ।
प्राची अपने बच्चे को शीला के पास ही छोड़ कर आई थी ताकि जब तक सब वश में ना हो जाए तब तक बच्चा नानी के साथ आराम से रहे । प्राची रोज़ शीला से फ़ोन पर बच्चे का हाल चाल लेती और साथ में ही अपने जादू का ब्योरा शीला को बताती । शीला एक अच्छी माँ और गुरु की तरह प्राची को सलाह दिया करती ।
एक दिन दोपहर को प्राची को शीला का कॉल आया :
शीला : कैसे हो बेटा ?
प्राची : सब ठीक है माँ, मैं जस्ट अपने रूम में खाना खा के आई हूँ । आराम कर रही हूँ ।
शीला: और सब कंट्रोल में हैं ना ?
प्राची: हाँ सब सही है । अब कोई नहीं है मुझे रोकने वाला ।
शीला और प्राची दोनों हँसते हैं ।
शीला : सुन , गोसाईं जी कल शहर आए थे । हमारे घर में रुके थे कल रात को।
गोसाईं जी के रुके होने की ख़बर से प्राची की चूत गीली हो जाती है , उसे एक पल के लिए अफ़सोस भी होता कि काश मैं वहाँ होती उनके साथ । प्राची अपना ध्यान शीला के बातों पर लाती हुए बोलती है : अरे ! बहुत अच्छी बात है । कैसे आना हुआ था उनका ?
शीला : वो उनको कुछ आयुर्वेदिक जड़ी बूटी किसी बड़े नेता  को पहुंचाना था , इसीलिए वे स्वयं यहाँ आए थे ।
प्राची : तो हमारे घर कैसे रुके ?
शीला : मैंने खाना के लिए उनको बुलाया था , फिर बहुत निवेदन करने पर यहाँ रुकने को तैयार हुए ।
प्राची को मन ही मन अपनी ही माँ से जलन हो रहा था , “ साली पूरा अकेले मज़ा ली होगी कल” प्राची के मन ही मन सोचती है ।
प्राची : अच्छा ! क्या बोल रहे थे ?
शीला : तुझे याद कर रहे थे । पूछ रहे थे कि अब उसका परिवार कैसा चल रहा है । मैंने बताया कि आपकी कृपा से सब अच्छा चल रहा है , अब उसके घरवाले उसकी कहा मानने लगे है और सब उसके वश में चल रहा है ।
प्राची : हाँ उन्ही का आशीर्वाद है । सही कहा आपने ।
शीला : गोसाईं जी बहुत तारीफ़ भी किए तेरा । लड़की तेज जय बहुत जल्दी  सीखी है विद्या को ।
प्राची सुनके बहुत ख़ुश होती है । गोसाई जी के मुँह से अपनी तारीफ़ सुनके प्राची को अपने गुफा में बिताए हुए दिन याद आने लगते है और प्राची की चूत पानी छोड़ने लगती है । प्राची शीला से बात करते हुए ही फ़ोन अपने बाएं हाथ में रखती है और लेटे हुए ही अपना दाहिना हाथ सारी के अंदर डाल कर अपनी चुत के दाने को मसलने लगती है ।
शीला : गोसाईं जी तुझसे बहुत ख़ुश है बेटा , उनके बहुत से शिष्य और  शिष्यां है , पर वो किसी के बारे में ज़िक्र कम ही करते है तेरे बारे में कर रहे है मतलब की वो बहुत प्रसन्न है तुझसे ।
प्राची : ये तो बहुत अच्छी बात है माँ। मैं आऊँगी तो हम मिलने जा सकते है क्या गोसाईं जी से ?
शीला: हाँ , मैं उनसे समय ले लूँगी । हम दो दिन रुक कर आ जाएँगे । बीच बीच में जाकर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए बेटा।
दो दिन रुक के क्या होगा प्राची अच्छे से जानती थी । शीला का बात सुन वो ज़ोर ज़ोर से अपना दाना मसलने लगी।
प्राची : आह! उनसे मिलने का मन है बहुत दिन हो गए उनसे मिले। और कुछ कहा क्या उन्होंने मेरे बारे में ?
शीला समझ गई की प्राची का क्यों मिलने का मन हो रहा । वो जानती थी की गोसाईं जी का आकर्षण बड़ा तगड़ा है , वो उम्रदराज़ और इतने सालों से गोसाईं जी से संबंध बना रही है तब भी उसका भोसड़ा महीने में कितनों बार हूँ गोसाईं जी के नाम से पानी छोड़ देती है फिर तो प्राची जवान है उसकी तड़पन को शीला समझ रही थी ।
शीला : हाँ बेटा । बीच में जाकर मिल आया कर , आशीष को भी उनके पास ले जा कभी फिर वो ही तेरे को लाया ले जाया करेंगे गोसाईं जी के पास । जैसे मुझे तेरे पापा ले जाते है ।
प्राची : पता नहीं आशीष कैसे रियेक्ट करेगा पहली बार, जब तक गोसाईं जी नहीं कहते मैं उन्हें नहीं ले जाऊँगी कहीं ।
शीला : मैं एक काम करती हूँ , गोसाईं जी को तेरे ससुराल भेज देती हूँ , वहाँ जाकर वो सब सेट करके आ जाएँगे फिर कभी तेरे को कोई अपने जाने में रोकेगा नहीं । उनके बायें हाथ का काम है उनके सभी शिष्याओं के पति या ससुर ही छोड़ने आते है गोसाईं जी के पास वो भी दिनों दिनों तक ।
शीला के बातें प्राची के दिमाग़ में कम और चूत में ज़्यादा असर कर रही थी , प्राची अपना हाथ साड़ी से निकलती है और अपनी साड़ी को कमर तक ऊपर करके लेट जाती है , और उँगली अपनी गीली  चूत में अंदर बाहर करने लग जाती है । दरवाजा खुला , प्राची के टाँगे में दरवाजे की ओर लेकिन प्राची के मन में कोई डर नहीं वो दरवाजा बंद करने का जह मत भी नहीं उठाती , और आँखे बंद करके शीला से बातें करते हुए उँगली करती है ।
प्राची : कल रात पापा  ड्यूटी में थे क्या ?
शीला : नहीं । उनकी मॉर्निंग शिफ्ट है , तो वो अभी सुबह गए हज ड्यूटी ।
प्राची: तो कल गोसाईं जी की सेवा ? आपने की या नहीं ?
शीला : अरे कैसे नहीं करूँगी । तेरे पापा खाने पीने का सब व्यवस्था करके हाल में ही थे । मैं गोसाईं जी के सेवा के लिए रात भर बेडरूम में थी।
प्राची की उँगली तेज़ी से अंदर बाहर होती है ।
प्राची : आह! गोसाईं जी ने निचोड़ दिया होगा कल आपको?
शीला प्राची के आवाज़ में भारी पन और आह की आवाज़ सुनके समझ जाती गई की प्राची अपने आप को ख़ुश कर रही है , वो उसका साथ देती है : हाँ ,जान तो रही है की हम तीन तीन औरतों को वो एक साथ सुख देते है फिर तो मैं अकेले थी , तीन बार निचोड़ा उन्होंने मुझे ।
प्राची : माँ । मुझे गोसाईं जी के लिंग की याद आ रही । वैसा ही था ना उनका ।
शीला : वही चमक और लोहे जैसे सख्ती ,  गर्म इतना कि कल मुझे लग रहा जैसे मैं गर्मा गरम सरिया अंदर ले लिया है ।
प्राची के मुंह से आह .. उफ़्फ़.. की आवाज़ें निकलने लगती है , आख़िर प्राची के माँ ने ही सबसे पहले उसे बेशर्म होना सिखाया था । प्राची उँगली करते समय अपने आँख को बंद रखी थी , अब हल्का आँख खोली तो देखी की खेमू दरवाज़े में खड़ा प्राची की चूत निहार रहा है , प्राची को ये बिल्कुल भी परेशान करने वाली बात नहीं लगी  , लेकिन उसके ससुर के द्वारा उसे इस अवस्था में देखे जाने से उसकी चूत और गरम हो गई ।
प्राची ने चूत से उँगली निकाल कर उसी उँगली से खेमू को अपनी ओर आने का इशारा किया , खेमू अंदर आता है , प्राची दोनों टाँगों को पूरी तरह अपने ससुर के सामने फैला कर परोस देती है और बोलती है “ ससुर जी! चाट कर साफ़ कर दीजिए मुझे”
हरा सिग्नल पाकर खेमू किसी भूखे कुत्ते की तरह प्राची के जांघो और चूत को खाता है, प्राची अपने चूत के अंदर तक खेमू के जीभ को महसूस करती है । प्राची के दाने को दाँतो से दबाता और चूसता । चुदाई के खेल में खेमू माहिर था बहुत सी औरतों का रस उसने पीया था , हालाकि प्राची को आदत तो गोसाईं जी की थी लेकिन खेमू की चुसाई उसे आशीष से जायदा ताकतवर लगी , अपने ससुर को अपनी चूत खिलाते हुए प्राची बेशर्मी से अपनी माँ से बातें करने लगी ।
प्राची : गोसाईं जी का सरिया कल आपको संतुष्ट किया ना ।
शीला : हाँ , कल की रात का मज़ा ही अलग था , बड़े दिनों बाद बिस्तर में गोसाईं जी से चुदने का सौभाग्य मिला था । पूरा वसूला मैने । जल्दी ही गोसाईं जी को तेरे पास भेजती हूँ , आशीष और तेरे ससुर के सामने ही चोदेंगे तुझे , अब तेरा उँगली करना बंद होगा ।
प्राची शीला के गंदी बातों से तेज़ी से चीखते हुए झड़ जाती है और उसकी चूत से मूत की मोटी धार निकल पड़ती है । खेमू के मुंह प्राची के मूत की धार से भीग जाता है , खेमू अपनी छमता के अनुसार जितना मूत पी सकता था पी लेता है, प्राची के मूत और चूत के पानी का रस मिलकर इतना तीक्ष्ण गंध और स्वाद देते है कि बिना अपना लंड छुये ही खेमू वीर्य त्याग कर देता है ।  हाफते हुए वही निढाल हो जाता है ।
प्राची उठकर अपना साड़ी नीचे करती है ड्रेसिंग के आमने अपना हुलिया सुधारती है और खेमू को आदेश देती है कि बिस्तर का चादर चेंज करके मूत वाला चादर धोने में डाल दो ।
खेमू ख़ुशी ख़ुशी अपनी नई मालकिन का बात मान लेता है ।
गोसाईं जी का विजिट आप अगले भाग में
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