Posts: 76,182
Threads: 890
Likes Received:
11,668 in 9,578 posts
Likes Given: 22
Joined: Dec 2018
Reputation:
118
भाभी सामान्य होने पर अपने कपड़े ठीक करके बाहर चली गईं.. मगर मैं ऐसे ही पड़ा रहा।
कुछ देर बाद भाभी चाय का कप लेकर मेरे पास आईं और मुझे देख कर हँसने लगीं क्योंकि मैं अब भी नँगा ही पड़ा हुआ था।
तभी दरवाजे की घण्टी बजी.. शायद मम्मी-पापा आ गए थे। मैं उठ कर जल्दी से अपने कपड़े पहनने लगा और भाभी चाय का कप मेरे पास रख कर दरवाजा खोलने चली गईं।
मम्मी-पापा आ गए थे इसलिए भाभी उनके पास चली गईं.. और मैं चाय पीने लगा।
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
Posts: 76,182
Threads: 890
Likes Received:
11,668 in 9,578 posts
Likes Given: 22
Joined: Dec 2018
Reputation:
118
उसके बाद मेरी और भाभी की कोई बात नहीं हुई मगर मेरा जब भी भाभी से सामना होता.. तो भाभी मुझे देख कर मुस्कुराने लगतीं और मैं भी भाभी की मुस्कुराहट का जवाब मुस्कुराहट से देता।
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
Posts: 76,182
Threads: 890
Likes Received:
11,668 in 9,578 posts
Likes Given: 22
Joined: Dec 2018
Reputation:
118
मम्मी-पापा के आ जाने के बाद भाभी घर के कामों में व्यस्त हो गईं और मैं ऐसे ही घर में घूमता रहा। घूम तो क्या रहा था.. बस जल्दी से रात होने का इन्तजार कर रहा था।
यह मेरा दिल ही जानता है कि मैं कैसे समय निकाल रहा था, भाभी के साथ दोपहर में जो कुछ हुआ था, मैं बस उसे ही सोच सोच कर अपने आप उत्तेजित हो रहा था।
इस दौरान मेरी और भाभी की कोई बात नहीं हुई मगर जब भी मेरा भाभी से सामना होता.. तो भाभी मुझे देख कर मुस्कुराने लगतीं।
मैं भी भाभी की मुस्कुराहट का जवाब मुस्कुराकर देता।
खैर.. कैसे भी करके रात हो गई, मैंने जल्दी से खाना खाया और रोजाना की तरह ही भाभी के कमरे में जाकर पढ़ाई करने लगा।
पढ़ाई तो कहाँ हो रही थी, बस मैं तो भाभी के कमरे में आने का इन्तजार कर रहा था।
करीब दस बजे भाभी घर के काम निपटा कर कमरे में आईं। भाभी ने अभी भी दिन वाले ही कपड़े पहने हुए थे। भाभी के आते ही मेरे शरीर का तापमान अचानक से बढ़ गया और दिल जोरों से धड़कने लगा।
भाभी मुझे देखकर थोड़ा सा मुस्कुराईं और फिर कमरे का दरवाजा बन्द करके अपनी साड़ी निकालने लगीं। शर्म के कारण भाभी से बात करने की मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी, मैं बस चोर निगाहों से भाभी को देख रहा था।
भाभी ने साड़ी निकाल कर सोफे पर डाल दी और मात्र पेटीकोट व ब्लाउज में बिस्तर पर जाकर लेट गईं।
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
Posts: 76,182
Threads: 890
Likes Received:
11,668 in 9,578 posts
Likes Given: 22
Joined: Dec 2018
Reputation:
118
[img=736x1280]blob:https://xossipy.com/ed9b2743-5e3b-454e-856c-f4d43a9fa0b4[/img]
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.
Posts: 76,182
Threads: 890
Likes Received:
11,668 in 9,578 posts
Likes Given: 22
Joined: Dec 2018
Reputation:
118
करीब दस बजे भाभी घर के काम निपटा कर कमरे में आईं। भाभी ने अभी भी दिन वाले ही कपड़े पहने हुए थे। भाभी के आते ही मेरे शरीर का तापमान अचानक से बढ़ गया और दिल जोरों से धड़कने लगा।
भाभी मुझे देखकर थोड़ा सा मुस्कुराईं और फिर कमरे का दरवाजा बन्द करके अपनी साड़ी निकालने लगीं। शर्म के कारण भाभी से बात करने की मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी, मैं बस चोर निगाहों से भाभी को देख रहा था।
भाभी ने साड़ी निकाल कर सोफे पर डाल दी और मात्र पेटीकोट व ब्लाउज में बिस्तर पर जाकर लेट गईं।
जिंदगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं.
भीड़ है क़यामत की फिर भी हम अकेले हैं.