तभी मौका पाकर उनमें से एक ने मेरी सलवार का नाड़ा खोल ही दिया और मेरी सलवार और भीगी पैंटी को एक साथ नीचे खींचने लगा। पता नहीं मुझे क्या हुआ मैंने भी अपनी गाँड सीट से ऊपर उठा दी और उसे मेरी सलवार और पैंटी मेरे घुटनों के नीचे तक खींच दी। फिर उसने अपनी उंगली को अपने मुँह में डाल कर गीला किया और मेरी चूत के हल्का सा अंदर ऊपर-ऊपर घुमाने लगा। हाय अल्लाह! मैं तो पागल सी हो गयी और मेरे मुँह से तेज़-तेज़ आहें निकलने लगी। बच्चों से भरी स़्क़ूल की बस में अपनी नंगी चूत खोले मैं अपने ही स्टूडेंट से उसमें उंगली करवा रही थी। इस एहसास ने मेरी गरमी और बढ़ा दी और मैं कुछ ही पलों में फिर झड़ गयी।
मेरे झड़ते ही उसने मेरी पैंटी ओर सलवार को ऊपर कर दिया और मेरा नाड़ा दोबारा बाँध दिया। फिर वो बोला, “तबस़्सुम़ मैम अगर आपको चुदाई का पूरा मज़ा लेना है तो आप घर फोन कर दीजिये कि आप अपनी किसी सहेली के घर जा रही हो और हमारे स्टॉप पर ही उतर जाओ! ये संजय पास ही अपने घर से कार ले आयेगा... हम इसके खेत पे चलते हैं ऐश करने के लिये.... बाद में शाम को हल्का सा अंधेरा होते ही अपको आपके घर के करीब छोड़ देंगे!”
मैंने थोड़ा शरमाते हुए गर्दन हिलाकर रज़ामंदी ज़ाहिर की। मेरे अब्बू और अम्मी एक हफ़्ते के लिये अजमेर गये हुए थे एक रिश्तेदार की शादी में लेकिन मैं इन लड़कों को ये ज़ाहिर नहीं करना चाहती थी इसलिये अपने पर्स में से मोबाइल निकाल कर झूठमूठ एस-एम-एस करने का नाटक किया। इतने में जब उनका स्टॉप आ गया तो मैं उनके पीछे-पीछे वहीं उतर गयी। बस में आगे बैठी एक टीचर ने पूछा, “अरे तब़्बू... तुम कहाँ छुपी बैठी थी और तुम यहाँ क्यों उतर रही हो?”
मैंने कहा, “मैं यहाँ अपनी एक सहेली के घर जा रही हूँ... कई दिनों से मिली नही उससे और आज किस्मत से जल्दी छुट्टी हो गयी तो मैंने सोचा उसे मिल लूँ.... और मेरा थोड़ा सर दर्द कर रहा था... इसलिये पीछे की सीट पर लेट कर थोड़ा सो गयी थी!”
“अरे तू अभी कुछ दिन पहले भी तो बीमार हो गयी थी! तेरी अम्मी से बोलुँगी कि अपनी बेटी को कुछ अच्छा खिलाया करो... स्लिम और खूबसूरत दिखने के चक्कर में कैसे सूख के मरी जा रही है!” उनमें से सबसे उम्र-दराज़ टीचर जो मेरी अम्मी को जानती थी वो बोली।
“जी सकीना आँटी ज़रूर बता देना... पर मैं इतनी भी कमज़ोर नहीं हूँ... आप मुझे कभी अपनी क्लास के मुस्टंडों की पिटाई करते देखना... फिर पता चलेगा आपको!” मैं हंसते हुए बोली और बस से उतर गयी।
बस से उतरी तो बारिश रुक गयी थी। मैं पीछे की जानिब चल पड़ी और एक साइड वाली गली में मुड़ गयी और एक तन्हा जगह पर जा कर खड़ी हो गयी। हवस में मैं इतनी बहक गयी थी कि उस वक़्त एक मर्तबा भी मुझे किसी तरह की शर्मिंदगी या बद-अखलाक़ी का एहसास नहीं हुआ। मेरी शरमो-हया और सारी सक़ाफ़त और अखलाक़ियत हवस की आग में फ़ना हो गयी थी। धड़कते दिल के साथ मैं बेकरारी से उन लड़कों के आने का इंतज़ार कर रही थी। जिस्म की आग ने मुझे इतना अंधा कर दिया था कि एक दफ़ा भी ख्याल नहीं आया कि मैं कोई गुनाह करने जा रही हूँ और इस बदकारी का क्या नतीजा होगा। मेरी टाँगें काँप रही थी और चूत गिली हो रही थी और इक्साइटमेम्ट में निप्पलों में भी सनसनाहट महसूस हो रही थी।
![[Image: IMG-0220.jpg]](https://i.ibb.co/BLDgk5X/IMG-0220.jpg)
कुछ ही देर में एक काले शीशों वाली टाटा सफ़ारी आ कर मेरे सामने रुकी और उसका पिछली सीट वाला दरवाजा खुला। उसमें से मेरा एक स्टूडेंट नीचे उतरा और बोला, “अंदर आ जाओ तब़्बु मैडम!” अंदर पीछे की सीट पर एक लड़का बैठा था जबकि दो लड़के आगे बैठे थे। जैसे ही मैं गाड़ी के अंदर घुसकर बैठने लगी तो अंदर बैठे दूसरे लड़के ने मुझे कमर से पकड़ कर ज़ोर से अपनी गोद में खींच लिया। दूसरे ने भी फ़ौरन अंदर बैठते ही गाड़ी का दरवाज़ा बंद किया और गाड़ी चल पड़ी। जिस लड़के की गोद में मैं बैठी थी उसने अपना एक हाथ मेरी बगल में से निकालकर मेरी छाती पर रख दिया और मेरे मम्मे ज़ोर से रगड़ने लगा और दूसरा हाथ उसने मेरी रानों के बीच मेरी चूत पर रख दिया और उसे प्यार से मसलने लगा।
दूसरे लड़के ने मेरे ऊँची पेन्सिल हील वाली सैंडल वाले पैरों को पकड़ा और मेरी टाँगों को अपनी जानिब खींच लिया। अब मेरी टाँगें उसके अगल बगल थीं और वो मेरी टाँगों के बीच। “साली रंडी! कुत्ती! क्लास में बहुत मारती है ना... आज तेरी गाँड ना फाड़ दी तो हमारे नाम बदल देना!” ये कहते ही वो मेरी चूत को ज़ोर से मसलने लगा। दूसरे वाले ने झुक कर मेरे होंठों को अपने होंठों से सी लिया और मेरे निचले होंठ को काटने लगा और मेरे मम्मों को मसलने लगा। तभी आगे बैठा लड़का बोला, “यार दारू के ठेके पे रोकना पहले... दारू पी के तब्बू मैडम जी को चोदने में और मज़ा आयेगा!”
“हाँ यार... इस साली तब़्बू को भी पिलायेंगे तो ये भी खुल के चुदवायेगी....!” दूसरा बोला। स़्क़ूल की बस में तो चारों लड़के फिर भी मुझसे इज़्ज़त और अदब से बात कर रहे थे लेकिन अब उनका लहज़े में अचानक तब्दीली आ गयी थी और बेहद बद-तमीज़ी से पेश आ रहे थे। ‘मैम’ या ‘मैडम’ कहते हुए भी उनका लहज़ा तंज़िया था।
इधर एक लड़के ने ज़ोर से अपने दाँत मेरी कमीज़ में बाहर निकल रहे थोड़े से कंधे वाले हिस्से पर गड़ा दिये। मेरे मुँह से चींख और सिसकरी एक साथ निकली। उस एक लम्हे में मुझे दर्द और मज़े का एक साथ ऐसा एहसास हुआ कि मुझे लगा कि मैं उसी लम्हे झड़ जाऊँगी लेकिन झड़ी नहीं। वो दोनों मिल के मुझे मसल रहे थे.... चूम रहे थे... काट रहे थे और मेरे होंठों से मुसलसल सिसकारियाँ निकल रही थी। इतने में कार हाइ-वे पे एक शराब के ठेके पे रुकी तो उन्होंने मुझे अपने बीच में सीधी कर के बिठा लिया। आगे ड्राइविंग सीट वाला संज़य उतर कर ठेके पे चला गया। इतनी देर मेरी अगल-बगल बैठे दोनों लड़के मुझे दोनों तरफ से चूमते रहे और मेरे मम्मे और रानें सहलाते रहे। मैं भी मस्त होकर उनकी युनिफॉर्म की ग्रे पैंट के ऊपर से उनके लंड मसलते हुए महसूस करने लगी।
इतने में संजय शराब की बोतल लेकर आ गया। आगे बैठा दूसरा लड़का बोला, “यार गिलास तो हैं नहीं कार में... खेत पे जा के ही दो-दो पैग खींचेंगे!”
ये सुनकर मेरी बगल में बैठा एक लड़का हंसते हुए बोला, “यार तब़्बु मैम को क्यो इंतज़ार करवा रहे हो... लाओ इन्हें तो बोतल से ही पिला दें थोड़ी... तो खेत पे पहुँचने तक इसकी शरम तो खुल जाये...!”
ये सुनकर मैं इंकार करते हुए बोली, “नहीं.. नहीं... मैं शराब नहीं पीती... तुम चारों को पीनी हो तो पियो... मैं नहीं पियुँगी!”
“अरे तब्बू मैम... पी कर तो देखो... जब थोड़ा नशा होगा तो चुदाई में खूब मज़ा आयेगा....!” मेरे बगल में बैठा एक लड़का बोतल खोलते हुए बोला और मेरे होंठों से लगाने लगा तो मैंने मुँह फेरते हुए फिर इंकार किया, “नहीं... मुझे नहीं पीनी... पहले कभी नही पी मैंने...!”
“अरे रंडी तब़्बू साली... पहले नहीं पी तो आज पी ले... अपने स्टूडेंट्स के साथ चुदाने भी तो पहली बार आयी है कि नहीं... या फिर और दूसरे स्टूडेंट्स से चुदवाया है पहले!” उनमें से एक लड़का बोला और सब हंसने लगे। “थोड़ी सी पी लो तबस़्सुम़ मैम... कुछ नहीं होगा... हम चारों के नाम के दो-दो घूँट भर लो बस... फिर अच्छी नहीं लगे तो और ज़ोर नहीं देंगे!” आगे ड्राइविंग सीट से संजय बोला।