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बहन का खुला आसमान और भाई का साथ
#1
यह मेरी पहली कहानी है और इसमें भाई-बहन का रोमांस है, और बाद में शायद इनसेस्ट भी हो सकता है। लेकिन सिर्फ भाई-बहन दो ही किरदार नहीं होंगे। इसमें एडल्टरी और ककल्ड भी होगा। शुरू में सिर्फ भाई-बहन का रोमांस ही होगा। तो जिन्हें यह पसंद नहीं, वे इसे न पढ़ें। और कोई इस कहानी में लॉजिक की बात न करे।

मैं पहली बार लिख रहा हूँ, इसलिए लिखने का ज्यादा आइडिया नहीं है। मैं जैसे मन में आएगा वैसे ही लिखता जाऊँगा। आप सुझाव दे सकते हो। हफ्ते में एक बार अपडेट दूँगा। अभी के लिए यही प्लान है। आगे अगर ज्यादा समय मिला तो फ्रीक्वेंसी बढ़ सकती है, और अगर कम समय मिला तो फ्रीक्वेंसी कम भी हो सकती है।

कहानी लिखने का एकमात्र मकसद यह है कि मैंने xboard, exbii और xossip पर बहुत सारी कहानियाँ पढ़ी हैं और उन पर हिलाने में बहुत मजा लिया है। कहानी पढ़ते हुए हिलाना सबसे ज्यादा मजेदार है। पोर्न इसके आगे कुछ भी नहीं। लेकिन जो रीडिंग में दिलचस्पी रखते हैं, सिर्फ उन्हें ही यह अच्छा लगेगा। तो मेरी भी ड्यूटी है कि थोड़ा योगदान दूँ। लिखना मेरे बस की बात नहीं है, इसलिए भाषा सपाट/सादी होगी। अगर आपको अच्छा न लगे तो बताना। मैं बदलाव की कोशिश करूँगा।
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#2
*कैरेक्टर्स*

1) हर्ष।  
मेरी उम्र 18 साल है। मैंने 12वीं पूरी की है। मेरा लंड लंबा तो है ही, लेकिन मोटा ज्यादा है। मोटाई दूसरों से थोड़ी ज्यादा है। इस कहानी में जितने भी लंड आएंगे वो मोटाई में मेरे से कम ही होंगे और लंबाई भी मेरे लंड जितनी या उससे कम ही होगी। एग्जैक्ट साइज किसी का नहीं लिखूँगा, आपको जो अच्छा लगे इमेजिन कर लेना।

2) पीनल। हर्ष की सगी बहन पीनल हर्ष से 7 साल बड़ी है। हर्ष उनकी बहुत रिस्पेक्ट करता हूँ। 2 साल पहले उनकी शादी हुई और वो शादी के बाद अपने पति के साथ दूसरे शहर में रहती हैं। हर्षसे 7 साल बड़ी होने के कारण उन्होंने एक माँ की तरह हर्ष की देखभाल की है। हर्ष के दिल में उनके लिए बहुत रिस्पेक्ट है और हर्ष उनके लिए कुछ भी कर सकता हूँ। हर्ष अपनी दीदी को कभी उदास नहीं देख सकता।

3) राहुल। पीनल के पति बहुत हैंडसम और खुले विचारों वाले हैं और पीनल से बहुत प्यार करते हैं। वो भी हर्ष की तरह दीदी को कभी उदास नहीं देख सकते और पीनल के लिए कुछ भी कर सकते हैं। वो एक कंपनी में जॉब करते हैं।

और भी कैरेक्टर्स हैं लेकिन उनके बारे में अभी ठीक से सोचा नहीं है। जैसे-जैसे आएंगे बताता जाऊँगा।

और हाँ, मैं फालतू की बातें ज्यादा नहीं लिखूँगा। आपको शायद यह कहानी कभी-कभी फास्ट फॉरवर्ड में जाते हुए लगेगी।

---

**अपडेट 1**
हर्ष..........

मैंने 12वीं पूरी कर ली और अब मैं आगे की पढ़ाई अपनी दीदी के शहर में करने वाला हूँ। मेरा एडमिशन उनके शहर में हुआ है। दीदी को कॉल करके पहले ही बता दिया था।

जब मैं दीदी के घर पहुँचा तो दीदी और जीजू मुझे देखकर बहुत खुश हो गए। जीजू ने मुझे गले लगा लिया। वैसे भी मेरी जीजू से अच्छी बनती थी।

वैसे मैं बता दूँ कि जीजू मुझसे 4 साल बड़े हैं और दीदी से 3 साल छोटे। जीजू ने दीदी को हमारे एक कॉमन रिलेटिव की शादी में देखा और दीदी उनको इतनी पसंद आ गई कि कैसे भी करके दीदी के साथ उनकी शादी हो गई।

तो मैं बता रहा था कि जीजू ने मुझे गले लगा लिया और बहुत खुश लग रहे थे। दीदी भी बहुत खुश थीं लेकिन हमारा रिश्ता ऐसा था कि हम एक-दूसरे को बहुत प्यार करते हुए भी कभी एक-दूसरे को गले नहीं लगाते थे। लेकिन जीजू ने दीदी से कहा – “ये क्या पीनल, तुम्हारा सगा भाई आया है और तुम खुश नहीं?”

दीदी: अरे किसने कहा मैं खुश नहीं। मैं बहुत खुश हूँ, अब कैसे बताऊँ कि मैं कितनी खुश हूँ...

जीजू: अरे तो कम से कम अपने भाई को गले तो मिलो...

दीदी यह सुनकर थोड़ी शर्माने लगीं और मुझे भी थोड़ी शर्म आ रही थी... हमारे बीच प्यार बहुत था लेकिन ऐसे कभी दिखाया नहीं था...

जीजू: अरे ऐसे खड़ी क्यों हो, चलो जल्दी से गले लगो...

और जीजू ने दीदी को पकड़ के मेरे गले लगा दिया। दीदी भी मेरे गले लग गईं...

मैंने भी दीदी को गले लगाया। हम भाई-बहन आराम से एक-दूसरे से गले मिल रहे थे, इतने में जीजू ने कहा – “ऐसे नहीं, कस के गले मिलो। तुम सगे भाई-बहन हो, कोई गैर नहीं...” और इतना बोलकर जीजू दीदी को पीछे से हग करने लगे लेकिन उनके हाथ मेरे पीछे लपेट लिए... दीदी हम दोनों के बीच में थीं...

आज पहली बार मैं दीदी को ऐसे गले मिल रहा था और वो भी इतना कसके। दीदी ने भी मुझे कसके गले लगाया... मुझे कुछ सूझा नहीं तो मैंने भी दीदी को कसके गले लगाया और मेरे हाथ जीजू के पीछे ले गया। ऐसा लग रहा था जैसे मैं और जीजू गले लग रहे हों...

दीदी ने अपना सर मेरे कंधे पे रख दिया और मैंने अपना सर दीदी के कंधे पे...

दीदी पता नहीं अभी-अभी नहाकर आई थीं या और कुछ था, लेकिन दीदी के शरीर से बहुत अच्छी खुशबू आ रही थी। दीदी के स्तन मुझे अपनी छाती पर महसूस हो रहे थे। यह पहली बार था कि मैं दीदी के स्तनों को इस तरह महसूस कर रहा था। हाँ, मेरे दिमाग में कोई गलत विचार नहीं था लेकिन दीदी की चूचियाँ अच्छे से महसूस हो रही थीं। दीदी के दोनों बूब्स बड़े-बड़े थे और सख्त भी थे... हम तीनों कुछ देर ऐसे ही गले लगे रहे...

फिर जीजू अलग हुए और कहा – “चलो भाई, अभी-अभी क्या सारा प्यार अपने भाई को दे दोगी। कुछ बाद के लिए भी बचा कर रखो।”

दीदी: भाई के लिए बहन का प्यार कभी खत्म नहीं होता, चाहे जितना प्यार वो अपने भाई पर लुटाए...

जीजू: अरे मैं तो मजाक कर रहा था। वो अभी आया है, उसे भूख लगी होगी, उसकी पसंद का कुछ बनाओ... मैं भाई-बहन के बीच में कैसे आ सकता हूँ। तुम चाहो तो पूरा दिन और रात अपने भाई के गले लगी रहो...

दीदी: हाँ हाँ, मेरा भाई है, मैं उसे दिन-रात गले लगाऊँगी, उसमें क्या...

मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या बोलूँ...

जीजू: मेरा कुछ काम है, हर्ष तुम फ्रेश हो जाओ, मैं थोड़ी देर में आता हूँ फिर साथ में खाएँगे...

और जीजू घर से निकल गए... और दीदी भी किचन में चली गईं...

मैं फ्रेश होकर सोफे पे बैठा था और मोबाइल देख रहा था। मेरा नेट स्लो था तो मैंने दीदी से हॉटस्पॉट करने को कहा। दीदी ने कहा – “मैं खाना बना रही हूँ, तू खुद ही कर ले।” मैं किचन में गया और दीदी का मोबाइल लेकर आया। दीदी ने मुझे पैटर्न बताई तो मैंने अनलॉक किया और हॉटस्पॉट किया।

तभी मुझे याद आया कि मैंने एक ऐप बनाई थी और उसका टेस्टिंग करना था, तो क्यों न दीदी के मोबाइल में ही टेस्टिंग करूँ। मैंने अपने फोन से ऐप शेयर की और दीदी के मोबाइल में इंस्टॉल कर दी।

वो ऐप ऐसी थी कि आप किसी की भी कॉल सुन सकते थे और माइक्रोफोन से आसपास की बातें भी सुन सकते थे। वो ऐप इंस्टॉल होने के बाद हाइड हो जाती और किसी को पता भी नहीं चलता...

मैं दीदी का फोन वापस दे आया। थोड़ी देर में जीजू भी आ गए। हमने साथ खाना खाया और बैठकर बातें करने लगे। दीदी खुश तो बहुत थीं लेकिन शायद उनके कपड़े उनको अनकंफर्टेबल लग रहे थे। दीदी ने सलवार-कुर्ता पहने थे लेकिन वो बार-बार उन्हें सही कर रही थीं। जीजू ने भी यह नोटिस किया लेकिन कुछ कहा नहीं।

फिर हम अपने-अपने रूम में चले गए। उनके बेडरूम के बगल वाले रूम मुझे दिया था। रूम के अंदर जाके मैं बेड पर लेट गया और दीदी ने जब गले लगाया था उसके बारे में सोचने लगा।

कितना अच्छा लगा था मुझे जब दीदी के गले लगा था। मुझे लगा मैं दीदी के और करीब आ गया हूँ और हमारा रिश्ता और मजबूत हो गया है। वैसे दीदी के दोनों बड़े-बड़े स्तन मुझे अब भी महसूस हो रहे थे लेकिन मुझे उसमें कुछ गलत नहीं लगा। अगर दो लोग गले मिलेंगे तो उनके अंग एक-दूसरे को महसूस तो होंगे ही, चाहे वो भाई-बहन ही क्यों न हों और इसमें गलत भी क्या है। उल्टा अब मुझे दीदी पर ज्यादा ही प्यार आने लगा था। ऐसा लग रहा था दीदी ही मेरा सब कुछ है। और ऐसे सोचते-सोचते मैं सो गया।

शाम को हम फ्रेश होकर हॉल में बैठे थे। दीदी चाय बनाने किचन में गईं और जीजू भी पीछे-पीछे गए। मैंने मोबाइल निकाला और तभी मुझे ख्याल आया कि चलो ऐप की टेस्टिंग करते हैं। वैसे जीजू और दीदी की बातें ऐसे सुनना मुझे ठीक नहीं लगा, फिर सोचा आखिर क्या ही बातें करेंगे, सुन लेता हूँ। मैंने इयरफोन लगाए और सुनने लगा...

जीजू: सुनो ना।  
दीदी: क्या है।  
जीजू: तुम्हारा भाई आया है तो मैं सोच रहा था कि हम रात को थोड़ी पार्टी कर लें...  
दीदी: पार्टी मेरे भाई के साथ? वो पार्टी नहीं करता।  
जीजू: तुम्हे कैसे पता तुम्हारा भाई पार्टी नहीं करता। बियर तो पक्का पीता होगा...  
दीदी: नहीं, वो बियर भी नहीं पीता।  
जीजू: तुम उसे बच्चा समझना बंद करो जानू। वो 18 साल का हो गया है और वो पक्का दोस्तों के साथ पार्टी करता होगा और उसकी कोई गर्लफ्रेंड भी होगी और हो सकता है तुम्हारे भाई ने उसे चोदा भी होगा...  

(यह सुनके मुझे अजीब सा रोमांच हुआ। मैं पहली बार पति-पत्नी की बातें ऐसे सुन रहा था और पत्नी मेरी सगी बहन थी)

दीदी: मेरा भाई ऐसा नहीं है, मैं उसे जानती हूँ। और मेरे भाई के बारे में ऐसा मत बोलो।  
जीजू: ओके सॉरी बाबा, लेकिन तुम्हे अपनी सोच बदलनी होगी। तुम उसे छोटे बच्चे जैसे हर वक्त ट्रीट नहीं कर सकतीं। हाँ, तुम थोड़ी देर उसे लाड़-प्यार करो वो ठीक है। लेकिन तुम्हे उसे उसकी उम्र और बॉडी के अनुसार समझना होगा। वो दिखने में मुझसे भी बड़ा लगता है, भले ही मुझसे 4 साल छोटा हो। अगर तुम ऐसे ही करती रही तो वो तुमसे दूर होता जाएगा।

थोड़ी देर कोई कुछ नहीं बोला और थोड़ी देर बाद...

दीदी: हाँ बाबू, तुम सही हो लेकिन क्या करूँ। वो मेरे सामने छोटे से बड़ा हुआ है। मैंने उसे अपना दूध न पिलाया हो लेकिन एक माँ के जैसे सँभाला है। कुछ भी होता तो वो मम्मी-पापा के पास नहीं जाता बल्कि मेरे पास आता। लेकिन तुम सही हो। मुझे उसे छोटे बच्चे जैसे ट्रीट नहीं करना चाहिए।  
जीजू: थैंक गॉड तुम समझ गईं। मैं उसे पार्टी के बारे में पूछूँगा, अगर वो ना कहेगा तो मैं फोर्स नहीं करूँगा। ठीक है।  
दीदी: ठीक है, लेकिन तुम दोनों पार्टी करोगे तो मैं क्या करूँगी।  
जीजू: हम तीनों मिलकर पार्टी करेंगे और क्या...  
दीदी: पागल, मैं अपने भाई के साथ कैसे पार्टी करूँ।

(वैसे यह सुनकर मुझे सरप्राइज हुआ कि दीदी भी पार्टी करती हैं। लेकिन अच्छा भी लगा कि दीदी अपनी मर्जी से जीती हैं और अपनी लाइफ खुलकर एंजॉय करती हैं। दीदी की बातें सुनकर मुझे दीदी के लिए बहुत अच्छा लग रहा था। बस ऐसे ही दीदी खुश रहें और खुलकर एंजॉय करें।)

जीजू: अब तुम्हे अपने भाई के लिए हमें तो छूट देनी होगी। इतना तो करना ही होगा...  
दीदी: कोई नहीं। मेरे भाई के लिए मैं कुछ भी कर सकती हूँ। लेकिन अगर वो मना करे तो उसे फोर्स मत करना।  
जीजू: फोर्स नहीं करूँगा बाबा। तुम मुझे नहीं जानती क्या।

और फिर किसिंग की आवाज़ आने लगी।  
दीदी: क्या कर रहे हो। मेरा भाई हॉल में है।  
जीजू: अरे तो क्या हुआ। उसे क्या नहीं पता होगा कि रोज रात को मैं उसकी बहन की चुदाई करता हूँगा।  
दीदी: तो क्या मेरे भाई के सामने मुझे चोदोगे।  
जीजू: अरे किस तो कर सकता हूँ ना।  
दीदी: नहीं, भाई के सामने कोई किस नहीं।  
जीजू: ठीक है बाबा, जैसा तुम कहो।

(जीजू और दीदी की बातें सुनके मेरा मूड बन गया था। पता नहीं क्यों मुझे अच्छा लग रहा था और मैं खुश था। मैं खुश था मेरी प्यारी दीदी के लिए। लेकिन मैं सोचने लगा कि दीदी शादी के बाद बोल्ड हो गई हैं। लेकिन वो खुश थीं और मैं उनके लिए खुश था। और आखिर पति-पत्नी का रिश्ता ऐसा ही होना चाहिए। वो मेरी दीदी थीं लेकिन जीजू की बीवी थीं। वैसे जीजू उनसे तीन साल छोटे थे।)

थोड़ी देर बाद जीजू बाहर आए और दीदी भी चाय लेकर आईं। हमने चाय पी और इधर-उधर की बातें करने लगे।
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#3
Update 2

हर्ष.............

शाम को मैं और जीजू बगीचे में घूमने गए। वहाँ एक जगह बैठकर हम बातें करने लगे।

जीजू: और बताओ हर्ष, क्या चल रहा है?  
मैं: कुछ नहीं जीजू, सब बढ़िया।  
जीजू: कोई लड़की पटाई की नहीं?  
मैं: कहाँ जीजू, अभी तक कोई नहीं पटी।  
जीजू: अरे क्या बात कर रहे हो? यानी कि अभी तक चूत देखी भी नहीं?  
मैं: हाँ जीजू।  
जीजू: मैंने तेरी उम्र में तो चोद भी लिया था।  
मैं: वाओ जीजू, कौन थी?  
जीजू: मेरे एक दोस्त की बहन थी।  
मैं: लेकिन दोस्त की बहन हमारी भी बहन जैसी होती है। दोस्त की बहन चोदना गलत नहीं?  
जीजू: देख हर्ष, जब लड़की चुदवाना चाहती हो तो वो किसी से भी चुदवा कर ही रहती है। अगर मैं उसे नहीं चोदता तो वो किसी और से चुदवाने लगती। बेहतर था कि मैं ही उसे चोदूँ। उसकी सेफ़्टी तो रहेगी। और वैसे भी मैंने मेरे दोस्त को बता दिया था कि उसकी बहन मुझसे चुदवाना चाहती थी और मैं उसे चोदता हूँ।  
मैं: फिर आपके दोस्त ने क्या कहा?  
जीजू: उसे भी ठीक लगा। किसी अनजान से चुदवाने से बेहतर है मैं ही उसे चोदूँ। किसी गैर पे भरोसा नहीं कर सकते। क्या पता बाद में वो उसे ब्लैकमेल करे या अपने दोस्तों से भी चुदवाए या फिर उसकी वीडियो इंटरनेट पे डाल दे।  
मैं: हाँ ये बात तो सही है। एक बार इज्जत चली गई फिर वापस नहीं आती।  
जीजू: हाँ भाई, क्या करें, हमने लड़की की इज्जत को उसकी चूत के अंदर क़ैद कर लिया है। अगर किसी लड़की की चूत में लंड चला गया मतलब उसकी इज्जत चली गई। और लड़का चाहे कुछ भी करे।  
मैं: हाँ जीजू, लेकिन क्या करें, हमारी सोसाइटी ऐसे ही चलती है। सबके लिए अलग नियम हैं।  
जीजू: अच्छा चल, वो सब जाने दे। एक बात बता, तू दारू पीता है कि नहीं?

(मुझे पता था जीजू क्यों पूछ रहे हैं, लेकिन मैं क्या बोलता। जीजू से मैं झूठ बोलना नहीं चाहता था और सच बोलता तो दीदी का भरोसा टूट जाता। आख़िरकार मैंने सच बोला।)

मैं: हाँ जीजू, पीता हूँ।  
जीजू: अरे तो इतना सोच क्यों रहे हो। ये तो नॉर्मल है और तुम कोई गलत काम तो नहीं कर रहे। चल आज रात को थोड़ी पार्टी कर लें।  
मैं: नहीं जीजू, दीदी क्या सोचेंगी।  
जीजू: देख हर्ष, जिनसे हम दिल से प्यार करते हैं उनके सामने कुछ छुपाना नहीं चाहिए और ऐसी दोहरी ज़िंदगी नहीं जीनी चाहिए। दुनिया के सामने हम ये सब छुपाने को मजबूर हैं लेकिन अपनों के साथ खुलकर जीना चाहिए। हो सकता है तुम्हारी दीदी को ये जानकर शॉक लगे लेकिन अगर बाद में पता चला कि तुमने झूठ बोला है तो उसे शॉक नहीं लगेगा बल्कि दुख होगा। और मैं पिनल को दुखी नहीं देख सकता। इसलिए बेहतर है कि तुम अपनी दीदी से कुछ न छुपाओ। और उसे उतना भी शॉक नहीं लगेगा जैसा तुम सोच रहे हो।  
मैं: वो कैसे?  
जीजू: वो रात को पार्टी करते वक्त बताऊँगा।  
मैं: ठीक है जीजू।  
जीजू: फिर पार्टी करते हैं रात को।  
मैं: हाँ जीजू, करते हैं।  
जीजू: अच्छा तुम सिर्फ़ बीयर पीते हो या सब कुछ?  
मैं: कुछ भी चलेगा जीजू।  
जीजू: ये हुई ना बात।

फिर हम घर आ गए।

घर आकर जीजू दीदी को अपने कमरे में ले गए। मेरे मन में ख्याल आया कि वह दोनों क्या बातें कर रहे होंगे और जीजू अचानक दीदी को अपने कमरे में क्यों ले गए। मैंने ईयरफ़ोन लगाए और दोनों की बातें सुनने लगा।

जीजू: आज मैं और तुम्हारा भाई पार्टी करने वाले हैं।  
दीदी: क्या, इसका मतलब मेरा छोटा भाई शराब पीता है।  
जीजू: अरे तुम इतना ओवररिएक्ट क्यों कर रही हो। वो छोटा बच्चा नहीं है। तुम्हीं उसे छोटा बच्चा समझ रही हो।  
दीदी: हाँ शायद मैं उसे आज भी बहुत छोटा समझ रही हूँ लेकिन वह बड़ा हो गया है। मुझे समझना चाहिए था।  
जीजू: अच्छा हम ऊपर वाले कमरे में जाकर पार्टी करते हैं और बाद में आकर सब साथ में खाना खाएँगे।

जीजू बाहर आए और मुझे ऊपर वाले कमरे में ले गए। फिर हम दोनों पार्टी करने बैठे। जीजू ने पेग बनाए और हम दारू पीने लगे।

मैं: अच्छा जीजू, आप बता रहे थे कि दीदी को शॉक नहीं लगेगा तो क्या बात थी।  
जीजू: वैसे तो मुझे यह बात तुम्हें नहीं करनी चाहिए लेकिन फिर भी बताता हूँ। तुम्हारी दीदी भी दारू पीती है।

मेरा मुँह खुला रह गया।

मैं: क्या सच में?  
जीजू: हाँ भाई, तुम्हारी दीदी को बीयर और वाइन बहुत पसंद है। वैसे वह सब कुछ पीती है। लेकिन तुम अपनी दीदी को जज मत करो। सबको अपनी लाइफ़ खुलकर जीने का पूरा अधिकार है। और मैंने तुम्हारी बहन को पूरी छूट दे रखी है। वह जैसे चाहे अपनी लाइफ़ जी सकती है।  
मैं: नहीं जीजू, मैं दीदी को जज नहीं कर रहा हूँ लेकिन मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ, बस इतनी-सी बात है।  
जीजू: तुम दोनों भाई-बहन एक जैसे हो। खुद तो सब कुछ करना चाहते हो और करते भी हो लेकिन सोचते हो कि दूसरा यह न करे।  
मैं: नहीं नहीं जीजू, ऐसी बात नहीं है। दीदी कुछ भी करें, अगर दीदी खुश हैं तो मैं भी खुश हूँ।  
अच्छा जीजू, और भी कुछ बताओ न दीदी के बारे में।  
जीजू: नहीं हर्ष, और मैं कुछ नहीं बताऊँगा। ये तुम्हारी दीदी की पर्सनल लाइफ़ है। जितना तुम्हारी दीदी तुम्हें बताना चाहेंगी वो खुद बताएँगी। दारू वाली बात कोई बड़ी बात नहीं और तुम थोड़ा कंफ़र्टेबल हो इसलिए बताई।  
मैं: हाँ जीजू, मुझे पूछना भी नहीं चाहिए था।

हमें ठीक-ठीक नशा हो गया था।

जीजू: एक और बात है।  
मैं: क्या बात है?  
जीजू: तुम्हारी दीदी ने आज तुम आने वाले थे इसीलिए सलवार-कुर्ता पहना है।  
मैं: ऐसा क्यों जीजू?  
जीजू: तुम्हारी दीदी को सलवार-कुर्ता पहनने की आदत नहीं। वो घर में हल्के-फुल्के कपड़े ही पहनती हैं। लेकिन उन्हें तुम्हारे सामने शर्म आ रही थी इसीलिए सलवार-कुर्ता पहना है।  
मैं: अरे मुझसे कैसा शर्माना। मैं तो सगा भाई हूँ, वो भी सात साल छोटा। दीदी कुछ भी पहनें मैं जज नहीं करूँगा, आप दीदी को बता देना। वैसे मुझे लग रहा था कि दीदी कंफ़र्टेबल नहीं हैं कपड़ों में।  
जीजू: ऐसा करते हैं, कल तुम्हारी दीदी के लिए नए कपड़े लेने चलते हैं। तुम ही पसंद करना अपनी दीदी के कपड़े।  
मैं: अरे लेकिन मैं कैसे पसंद करूँ? मुझे तो कुछ समझ नहीं आएगा। और दीदी के पास घर में पहनने के कपड़े तो होंगे ही।  
जीजू: कपड़े तो हैं लेकिन वो कुछ ज़्यादा ही छोटे हैं। तुम्हारी दीदी अकेली थीं तो पहनती थीं लेकिन तुम्हारे सामने उन्हें शर्म आएगी। और हम तीनों चलेंगे साथ में और मिलकर पसंद करेंगे।  
मैं: ठीक है जीजू।

फिर हम खाना खाने नीचे आए। दीदी हमारा इंतज़ार कर रही थीं। मैं और जीजू थोड़े नशे में थे लेकिन ज़्यादा नहीं। दीदी मुझे देखकर मुस्कुरा रही थीं और खा रही थीं। वैसे दीदी बहुत प्यारी लग रही थीं। मेरा मन दीदी को फिर से गले लगाने का हो रहा था।

हमने खाना खाया और थोड़ी देर बैठकर बातें कीं फिर गुड नाइट बोलकर अपने-अपने कमरों में जाने लगे। लेकिन जीजू ने रोक लिया।

जीजू: अरे ऐसे कोई गुड नाइट बोलता है। एक-दूसरे से गले मिलो और अच्छे से गुड नाइट बोलो।

इस बार दीदी ने कुछ नहीं कहा और मेरी ओर आने लगीं। मैं भी थोड़ा नशे में था। दीदी के पास आते ही मैंने दीदी को बाँहों में भर लिया। दीदी ने भी मुझे गले लगा लिया। फिर से दीदी के कठोर स्तन मुझे महसूस होने लगे। थोड़ी देर बाद दीदी ने गुड नाइट कहा और मैंने भी, और हमने एक-दूसरे को छोड़ा। हम अपने-अपने कमरों में चले गए। कमरे में आते ही मैं ईयरफ़ोन लगाकर दीदी और जीजू की बातें सुनने लगा।

जीजू: अरे क्या कर रही हो। आओ ना।  
दीदी: पहले ये सलवार-कुर्ता निकाल दूँ।  
जीजू: मैं निकाल दूँगा।  
दीदी: नहीं, मैं अभी निकाल देती हूँ। बहुत अनकंफ़र्टेबल लग रहा है।

थोड़ी देर बाद दीदी फिर से: हाँ अब ठीक लग रहा है। पता नहीं रोज़-रोज़ मैं कैसे पहनूँगी।  
जीजू: फ़िकर मत करो, कल से पहनने की ज़रूरत नहीं।  
दीदी: क्यों? हर्ष का क्या?  
जीजू: मेरी हर्ष से बात हो गई है। उसने कहा कि दीदी कुछ भी पहनें मैं जज नहीं करूँगा।  
दीदी: क्या, हर्ष ने ऐसा कहा? मैं नहीं मानती। मतलब मैं कुछ भी पहनूँगी तो उसे चलेगा। मेरा भाई मेरी कितनी रिस्पेक्ट करता है, वो ऐसा कह ही नहीं सकता।  
जीजू: तुम्हारी कसम जानू।

(दीदी इमोशनल हो गईं)

दीदी: अरे इतनी-सी बात में तुमने कसम खाई, मुझे तुमपे पूरा यकीन है। मैं जानती हूँ तुम मुझसे कितना प्यार करते हो। मैंने तो ऐसे ही बोल दिया।

(सच तो था कि मैंने ऐसा कहा था लेकिन मैंने जिस तरह से कहा था और दीदी जिस तरह समझ रही थीं वो अलग था। मेरा मतलब था दीदी सलवार-कुर्ते के अलावा और कुछ भी पहन सकती हैं और दीदी समझ रही थीं कि कुछ भी मतलब कुछ भी पहनना। वैसे जीजू ने कसम झूठी नहीं खाई थी।)

दीदी: लेकिन कुछ भी मतलब क्या पहनूँ? मेरे पास जो है उसे तो बिल्कुल नहीं पहन सकती।  
जीजू: क्यों?  
दीदी: अरे वो कपड़े कैसे हैं तुम्हें पता है ना। नीचे बस मेरी गाँड़ कवर होगी बाकी सब खुला रहेगा और चलते-फिरते मेरी चड्डी दिखाई देगी। ऊपर भी आधे से ज़्यादा बूब्स बाहर रहते हैं।  
जीजू: तो फिर ऐसा करते हैं, हर्ष को कहीं आसपास एक कमरा किराए पर ले देते हैं।  
दीदी (गुस्से होकर): देखो आज तुमने कहा सो कहा, आज के बाद कभी ऐसी बात मत करना। चाहे कुछ भी हो, मेरा भाई मेरे साथ ही रहेगा। मैं इस अनजान शहर में उसे मुझसे जुदा नहीं रखूँगी। और मैं कितनी खुश हूँ कि मेरे भाई के साथ रहने का मुझे मौका मिला है, वो भी शादी के बाद। और तुम उसे मुझसे दूर करने की बात कर रहे हो।  
जीजू (हँसते हुए): अरे मैं तो मज़ाक कर रहा था। मेरी हर्ष से बात हुई है। कल हम तीनों तुम्हारे लिए कपड़े लेने जाएँगे और तुम्हारा भाई खुद तुम्हारे लिए कपड़े पसंद करेगा। फिर तो कोई दिक्कत नहीं है ना। वो तो तुम भाई के सामने पहन सकती हो क्योंकि उसकी पसंद के ही कपड़े होंगे तो तुम्हें शर्म भी नहीं आएगी।  
दीदी: हाँ ये ठीक है। लेकिन उसे मेरे कपड़ों की समझ नहीं होगी।  
जीजू: फ़िकर मत करो, उसे सब समझ आती होगी और हम भी तो साथ होंगे। चलो अब आ भी जाओ।

फिर किसिंग की आवाज़ आने लगी। शायद अब उनकी चुदाई शुरू होने वाली थी। वैसे तो अब मुझे नहीं सुनना चाहिए था लेकिन मैं सुनता रहा। दीदी आह… ओह… धीरे… जानू… धीरे… करती रहीं। दीदी की आवाज़ें सुनकर मेरा लंड खड़ा हो गया। मैंने लंड शॉर्ट और जांघिए से बाहर निकाला और सहलाने लगा। दीदी की कामुक आवाज़ें सुनकर लंड सहलाना बहुत अच्छा लग रहा था। दीदी की आवाज़ पतली थी और दीदी की सिसकारियाँ बहुत मादक लग रही थीं। वैसे दीदी को लेकर मेरे मन में कोई गलत विचार नहीं था। मैं बस दीदी की सिसकारियाँ सुनके लंड हिला रहा था। दीदी भी चाटो जानू… अंदर जीभ डालके चाटो… आह… ओह… ऐसा कर रही थीं। शायद जीजू दीदी की चूत चाट रहे थे। थोड़ी देर बाद थप… थप… की आवाज़ें आने लगीं। शायद जीजू दीदी को चोद रहे थे। मेरा लंड पूरा तन गया था।

थोड़ी देर बाद दीदी को चोदते हुए जीजू ने कहा:

जीजू: जानू तुम हर्ष की फ़िक्र मत करना। मैं तुम्हें कभी तुम्हारे भाई से जुदा नहीं करूँगा। मैं भी उसे अपना छोटा भाई मानता हूँ।  
दीदी: आह… अच्छा… हर्ष तुम्हारा छोटा भाई… तो फिर मैं भी तुम्हारी बड़ी बहन हो गई। आह… क्योंकि तुम मुझसे छोटे हो।  
जीजू: हाँ ये तो हुआ।  
दीदी: तो क्या तुम अभी अपनी दीदी को चोद रहे हो। बोलना बहन चोद। बोलता क्यों नहीं।  
जीजू: हाँ मैं अपनी दीदी को चोद रहा हूँ। तुम मेरी बहन हो और मैं तुम्हारा भाई हूँ और मेरा लंड मेरी बहन की चूत में है। आह… कितना मज़ा आता है बहन को चोदने में।

उनकी बातें सुनकर मेरी हालत खराब हो गई थी। यह जीजू और दीदी क्या बातें कर रहे हैं। जीजू दीदी को अपनी बहन बोल रहे हैं और दीदी जीजू को अपना भाई बोल रही हैं और भाई-बहन बोलकर मज़े से चुदाई कर रहे हैं। वैसे ये बातें सुनकर मेरा पानी निकलने को हो गया था।

दीदी: चोदना भाई अपनी बहन को। देख तुम्हारी बहन कैसे तड़प रही है तुम्हारा लंड लेने के लिए। मज़ा आ रहा है ना अपनी बहन को चोदने में। बोलना बहन चोद, कैसा लग रहा है अपनी बहन को चोदते हुए।  
जीजू: हाँ दीदी, बहुत अच्छा लग रहा है अपनी बहन को चोदने में। क्या चूत है तुम्हारी, ऐसा लगता है कि रात-दिन तुम्हें चोदता रहूँ।  
दीदी: हाँ भाई, चोद अपनी बहन को। तुम्हारी बहन बहुत चुदक्कड़ है। उसे हर वक्त लंड चाहिए। खूब चोद अपनी बहन को और उसकी चूत की खुजली मिटा दे। आह… चोद बहनचोद… और तू नहीं चोद सकता तो किसी और को बुला ले, जो तुम्हारी बहन को तुम्हारे ही सामने चोदे।  
जीजू: हाँ दीदी, मैं भी चोदूँगा और किसी बड़े और मोटे लंड वाले से चुदवाऊँगा। जो चोद-चोद कर तुम्हारी चूत फाड़ दे।  
दीदी: हाँ भाई, मुझे तुम्हारे सामने चुदवाने में बहुत मज़ा आएगा। खूब चुदवाना अपनी बहन को और तू भी चोदना।  
जीजू: हाँ दीदी, खूब चोदूँगा तुम्हें और बड़े-बड़े लंड से चुदवाऊँगा दीदी। खूब चुदवाऊँगा तुम्हें। आह… दीदी मेरा निकलने वाला है। दीदी… मेरा निकलने वाला है।  
दीदी: आह… भाई निकाल दे अपना सारा पानी अपनी बहन की चूत के अंदर। भर दे अपने पानी से अपनी बहन की चूत।

फिर जीजू दीदी को बहुत तेज़-तेज़ चोदने लगे। शायद उनका निकलने वाला था। यहाँ मेरे लंड ने पिचकारियाँ छोड़ना शुरू कर दीं और वहाँ जीजू भी ज़ोर से चिल्लाए—आह… दीदी… दीदी मेरा निकल रहा है।

थोड़ी देर बिल्कुल शांति रही। थोड़ी देर बाद जीजू बोले…

जीजू: कैसा लगा जानू?  
दीदी: बहुत मज़ा आया।  
जीजू: याद है तुम्हें जब हम पहले भाई-बहन वाला रोल प्ले करते थे तब तुम कैसे गुस्से हो जाती थीं।  
दीदी: हाँ बाबू, याद है। लेकिन उस वक्त जब तुम मेरी चूत में लंड डालकर मुझे चोदते थे और मुझे दीदी-दीदी बोलते थे तब मेरे सामने मेरे भाई का चेहरा आ जाता था और मुझे लगता था कि मैं अपने सगे भाई से चुदवा रही हूँ और मेरा सगा भाई मुझे चोद रहा है। इसीलिए मैं गुस्सा हो जाती थी। क्योंकि अपने भाई से चुदवाना कैसा अजीब लगता है तुम समझ सकते हो। और मेरा भाई तो मेरे बारे में ऐसा कभी सोच भी नहीं सकता।  
लेकिन बाद में मुझे समझ आया कि मुझे तुम्हें ही भाई के रूप में इमेजिन करना है, ना कि अपने सगे भाई को।

(अब मेरे भी समझ में आ गया कि वह दोनों रोल प्ले कर रहे थे। यह भाई-बहन वाला रोल प्ले मैंने सुन रखा था लेकिन आज अपनी सगी बहन को भाई-बहन वाला रोल प्ले करते सुनके थोड़ा अजीब लगा था। लेकिन थोड़ी ही देर में मेरे लंड का पानी निकाल दिया था, वरना इतना जल्दी मेरा पानी नहीं निकलता। अब मुझे नींद आने लगी थी और शायद दीदी और जीजू भी सो गए थे। फिर पता नहीं मैं कब सो गया।)
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