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Adultery FLAT MATE
एपिसोड 27: कोशिशें और किस्मत
मस्तिष्क की बनावट भी बड़ी विचित्र होती है। जब कोई गहरा आघात आपकी अंतरात्मा पर लगता है, तो इंसान या तो पूरी तरह टूटकर बिखर जाता है, या फिर उसके भीतर का कोई हिस्सा खुद को अलग करके एक तटस्थ, कठोर दर्शक की कुर्सी पर जा बैठता है।

मेरे साथ भी यही हो रहा था। अपने ही घर की दहलीज पर, अपनी ही माँ और अपने दोस्त के बीच की इस अदृश्य दीवार को गिरते देखकर, मैं भीतर से दो-फाड़ हो चुका था।

मैं अक्सर रात के सन्नाटे में, जब कमरे की बत्ती बुझा दी जाती और पंखे की घरघराहट के सिवा कोई आवाज न होती, खुद से ही जिरह करने लगता। मैं अपने ही विचारों से ऐसे पेश आता जैसे कोई मंझा हुआ वकील अदालत में किसी संदिग्ध गवाह से सवाल पूछ रहा हो, या कोई संजीदा मनोवैज्ञानिक किसी विक्षिप्त मरीज के अवचेतन की परतें उधेड़ रहा हो।

"देव, तुम जो देख रहे हो, क्या वह वाकई सच है? या फिर तुम्हारे अपने भीतर का कोई गहरा पूर्वाग्रह उन दोनों के सामान्य मेलजोल को इस बदसूरत शक्ल में ढाल रहा है?" मैं खुद से सवाल करता।

फिर भीतर से ही एक सर्द, तीखा जवाब उभरता

"पूर्वाग्रह? भला इस तरह की कोई पूर्वाग्रह क्यों होगी? आखिर ऐसी कौन सी बात है जो दोनों आपस में छुप-छुपा करते हैं? बिल्कुल दो लवर्स की तरह! नहीं। तुम जो देख रहे हो, वह सिर्फ धुंध नहीं है; उसके पीछे कोई ऐसी आग सुलग रही है जो पूरे घर को राख करने पर तुली है।"

"लेकिन अगर यह सब सिर्फ एक विधवा का इस नए, आधुनिक शहर में खुद को सहज करने का प्रयास हुआ तो? क्या उम्र के चालीसवें पड़ाव को पार कर चुकी एक औरत को खुलकर सांस लेने, अपनी देह को सुंदर महसूस कराने का कोई अधिकार नहीं है?"

"अधिकार है... सौ बार है... लेकिन उस अधिकार की कीमत क्या एक बेटे के विश्वास की बलि है? क्या उस नए जीवन का माध्यम सिर्फ और सिर्फ इमरान जैसा कोई तीसरा शख्स ही हो सकता था?"

इन सवालों का कोई अंत नहीं था...

दिनभर दफ्तर में बैठकर फाइलों के पन्नों को पलटते हुए भी मेरे भीतर यह अदालती बहस चलती रहती। इस अंतहीन जिरह ने मुझे मानसिक रूप से निचोड़ कर रख दिया था। और इस सब के केंद्र में थींमेरी मम्मी, और उनके तन पर चढ़ते वो नए, अजीबोगरीब लिबास।

मम्मी के पहनावे में आया बदलाव कोई अचानक आया तूफान नहीं था, बल्कि यह एक बेहद सधी हुई, धीमी आंच की तरह था जो रोज थोड़ा-थोड़ा सुलग रहा था। बीरभूम की उस पुरानी, मटमैली सूती साड़ियों की तहों में खुद को छिपाकर रखने वाली मेरी माँ अब धीरे-धीरे एक ऐसे रूप में ढल रही थीं जिसे देखकर कोई भी सामान्य आंख एक पल के लिए ठहर जाने को विवश हो जाए।

उनके कपड़ों में पहली नजर में कोई फूहड़पन या अश्लीलता नहीं दिखती थी। दूर से देखने पर वे पूरी तरह शालीन, संभ्रांत और किसी भी भरे-पूरे परिवार की घरेलू स्त्री जैसी ही लगती थीं। लेकिन उस शालीनता के रेशों में एक बेहद बारीक, महीन और उद्दाम खुलापन गूंथा हुआ था।

वे जब सिल्क या जॉर्जेट की साड़ियां पहनतीं, तो उनकी प्लेट्स इतनी करीने से नाभि के ठीक नीचे तक सिमटी होती थीं कि उनके चलने के साथ देह का हर उतार-चढ़ाव एक सधी हुई लय में हरकत करता था। साड़ी का पल्लू अब उनके सीने को पूरी तरह ढकने की बजाय केवल एक बारीक पट्टी की तरह सिमटकर बाएँ कंधे पर एक खूबसूरत ब्रोच से बंधा रहता था। उस पल्लू के ढलकाव से उनका दाहिना हिस्सा, पेट की चिकनी ढलान और कमर की वो गहरी, सुडौल रेखाएं एकदम साफ उजागर होती थीं।

और उनके ब्लाउज... वे बीरभूम के किसी साधारण टेलर के सिले हुए ढीले-ढाले ब्लाउज नहीं थे। वे शहर के किसी महँगे बुटीक के तराशे हुए सांचे थे। पीछे से उनका गला इतना गहरा कटवा होता था कि उनकी पूरी रीढ़ की हड्डी और पीठ की चिकनी त्वचा धूप में चमक उठती थी। नीचे ब्लाउज की पतली स्ट्रैप के साथ सिर्फ दो बेहद पतली, रेशमी डोरियाँ बँधी होती थीं, जिनके सिरों पर लटके छोटे-छोटे लटकन जब उनके चलने पर हिलते, तो ऐसा लगता मानो कोई मूक पुकार गूँज रही हो।

आगे से भी गले की बनावट ऐसी थी जो उनके उन्नत वक्षस्थल के उभार को ढकने की बजाय उन्हें एक सधा, कसा और ऊपर की ओर उठा हुआ आकार देती थी।

जब वे सलवार-कमीज पहनतीं, तो वह दृश्य और भी विचलित करने वाला होता। कमीज का कपड़ा इतना महीन और शरीर से इस कदर चिपका हुआ होता था कि उनकी कमर का मोड़ और कूल्हों की बनावट हर कदम के साथ स्पष्ट रेखाएं खींचती थी। साइड की चाक (स्लिट्स) कमर के काफी ऊपर तक खुली होती थीं, जिससे उनके चलने पर पतली पायजामी या चूड़ीदार के ऊपर से त्वचा की एक हल्की सी झलक अनायास ही कौंध जाती थी।

वे जब भी हॉल से गुजरतीं, तो हवा में किसी महँगे बॉडी मिस्ट या चंदन, या जैस्मिन के परफ्यूम की खुशबू तैर जाती। उनके बँधे हुए बालों से कुछ लटें हमेशा गर्दन पर छूटी रहती थीं, जो उनके पसीने की नमी से चिपककर और भी गहरी लग रही थीं।

एक दिन सुबह नाश्ते की मेज पर जब वे चाय की केतली लेकर आईं, तो इमरान वहीं बैठकर अपने मोबाइल पर उँगलियाँ चला रहा था। मम्मी ने झुककर उसकी प्याली में चाय डाली। झुकते ही उनके कंधे का पल्लू थोड़ा और नीचे सरक गया, जिससे उनकी चूचियों का ऊपरी हिस्सा और गले की उन नाजुक नसों के साथ वो लंबी घाटी पूरी तरह बेपर्द हो गईं।

इमरान ने मोबाइल से नजरें उठाईं...

उसकी आँखों में कोई हड़कंप नहीं था, न ही कोई संकोच

उसने बेहद धीमे, लगभग सम्मोहित भाव से मम्मी के चेहरे को देखा, और फिर उसकी निगाहें उस ढलके हुए पल्लू से होती हुई उनकी अधखुली चूचियों पर जाकर ठहर गईं।

"आँटी जी, आज की चाय में दूध थोड़ा ज्यादा लग रहा है," इमरान ने एक गहरी, सधी हुई आवाज में कहा। उसके चेहरे पर वही पुरानी धूर्तता साफ दिख रही थी।

मम्मी ने एक पल के लिए अपनी नजरें नीची कीं। उनके गालों पर एक बहुत हल्की, बादामी सी लाली छा गई...

उन्होंने तुरंत अपने पल्लू को सँवारने की कोई हड़बड़ी नहीं दिखाई; बल्कि बेहद इत्मीनान से, अपनी उंगलियों से उस कपड़े को बस छूकर ठीक किया, जैसे वे चाहती हों कि इमरान की नजरें वहां कुछ पल और टिकी रहें।

"तुम्हें दूध पसंद है ना, इसलिए डाल दी," मम्मी ने धीमी आवाज में कहा। उनके स्वर में वो पुरानी कठोरता नहीं थी, बल्कि एक ऐसी तरलता थी जो सिर्फ किसी बेहद करीबी के सामने ही निकल सकती है।

मैं अपने कमरे से दरवाजे की आड़ से सब कुछ देख-सुन रहा था

मेरा जबड़ा इतनी जोर से भिंच गया था कि कानों के पास की नसें फड़कने लगी थीं। वे दोनों मेरे सामने थे, मेरे अस्तित्व के चंद फीट की दूरी पर, फिर भी उन्होंने मुझे उस पूरे दृश्य से ऐसे बाहर कर दिया था मानो मैं वहां था ही नहीं। उनके बीच कोई शारीरिक स्पर्श नहीं हुआ था, कोई मर्यादा खुलेआम नहीं तोड़ी गई थी, लेकिन उस झुके हुए बदन, उस ढलके हुए पल्लू और इमरान की उन भूखी, स्थिर आँखों के बीच एक ऐसा मौन संभोग घटित हो चुका था जिसने मेरे रोंगटे खड़े कर दिए थे।

घर के इस दमघोंटू, जहरीले माहौल से बाहर अगर कोई एक जगह थी जहाँ मेरी आत्मा को कुछ पल के लिए सांस लेने की जगह मिलती थी, तो वह थी रुया की मौजूदगी।

ऑफिस में काम करते हुए जब मेरा दिमाग मम्मी के कपड़ों या इमरान की उस शातिर मुस्कान की यादों से फटने लगता, तब रुया का मेरे केबिन में आना किसी वरदान जैसा लगता था। पिछले दो हफ्तों में हमारे बीच की औपचारिकताएं जैसे पिघलकर बह गई थीं।

हम अब सिर्फ 'सहकर्मी' नहीं थे; हमारे बीच एक ऐसा कोमल, अनकहा रिश्ता पनप रहा था जो बिना किसी वादे के भी बेहद मजबूत महसूस होता था।

"देव, तुम फिर से लंच करना भूल गए?"

एक दिन दोपहर को वह मेरे केबिन का कांच का दरवाजा थोड़ा सा धकेलकर अंदर दाखिल हुई। उसने हल्के आसमानी रंग का एक ढीला-ढाला कुर्ता पहन रखा था, उसके बाल पीछे एक साधारण क्लिप में बंधे थे और चेहरे पर किसी भी किस्म के आर्टिफिशियल मेकअप का कोई नाम-ओ-निशान नहीं था। उसकी आँखों में एक ऐसी सहज, पारदर्शी मासूमियत थी जो मेरी मम्मी के चेहरे से अब पूरी तरह गायब हो चुकी थी।

"अरे नहीं रुया, बस यह क्लाइंट की शीट खत्म कर रहा था। भूख नहीं है आज," मैंने स्क्रीन से बिना नजर हटाए कहा, हालांकि मेरा सिर भूख और तनाव से चकरा रहा था।

रुया ने बिना कुछ कहे मेरे सामने रखी फाइलों को एक तरफ खिसकाया और अपना स्टील का टिफिन बॉक्स खोलकर मेरी मेज पर रख दिया।

उसमें मेथी के पराठे और घर का बना सूखा आलू रखा था।

"जब तक तुम यह दो पराठे खत्म नहीं करोगे, मैं यह शीट आगे फॉरवर्ड नहीं होने दूंगी," उसने नकली सख्ती दिखाते हुए अपनी बाहें मोड़ लीं।

मैंने उसकी तरफ देखा। उसके उस मासूम चेहरे में कोई छल नहीं था, कोई छिपा हुआ एजेंडा नहीं था।

थी तो बस एक मादक मुस्कान

और उसके एक खास कोण में खास तरीके से झुके होने के कारण हल्की सी क्लीवेज दिख रही थी


[Image: Lunch.jpg]

मैंने उधर ज्यादा नहीं देखाएक हल्की स्माइल देकर चुपचाप पराठे का एक निवाला तोड़ा।

"तुम इतनी अच्छी क्यों हो, रुया?" मेरे मुंह से अनायास ही निकल गया, "मतलब... इस मतलबी शहर में, इस ऑफिस में, जहाँ हर कोई अपने मतलब की चादर ओढ़े बैठा है, तुम दूसरों की इतनी परवाह क्यों करती हो?"

रुया की आँखों में एक पल के लिए गंभीरता की एक हल्की सी छाया तैरी.. उसने कुर्सी खींचकर मेरे सामने बैठते हुए कहा,

"क्योंकि मुझे लगता है कि जो लोग अंदर से सबसे ज्यादा टूटे होते हैं, वे बाहर से सबसे ज्यादा मजबूत दिखने का नाटक करते हैं। और तुम... देव, तुम बहुत अच्छे एक्टर हो, पर मैं तुम्हारी आँखों के पीछे की उस खाली जगह को देख सकती हूँ। कोई बात है जो तुम्हें अंदर ही अंदर खाए जा रही है।"

उसकी बात सुनकर मेरा हाथ वहीं रुक गया। मेरा जी चाहा कि मैं अपना सिर उसकी गोदी में या कंधे पर रख दूँ और फूट-फूट कर रो पड़ूँ। मैं उससे कहूँ कि रुया, मेरी मम्मी बदल गई हैं, मेरा दोस्त आस्तीन का सांप निकला है, और मैं अपने ही घर में एक अजनबी बनकर रह गया हूँ।

लेकिन मेरी ज़बान पर ताले लगे रहे।

मैं अपनी मम्मी की इज्जत को किसी तीसरे के सामने कैसे नीलाम कर सकता था? भले ही वह रुया जैसी निष्कपट लड़की ही क्यों न हो।

"कुछ नहीं है रुया... बस काम का थोड़ा तनाव है, और घर की जिम्मेदारियां," मैंने नजरें चुराते हुए झूठ बोल दिया।

रुया ने मुझे कुछ पल चुपचाप देखा, फिर अपनी हथेली को आगे बढ़ाकर मेरी हथेली पर रख दी। उसका स्पर्श इतना शीतल, इतना आश्वस्त करने वाला था कि मेरे भीतर की सारी तल्खी एक पल के लिए शांत हो गई।

"जब भी तुम्हारा मन हल्का करने का दिल करे, मैं यहीं हूँ देव। याद रखना, तुम अकेले नहीं हो," उसने बेहद कोमलता से कहा।

उसके इस स्पर्श ने मेरे भीतर जीने की एक नई उम्मीद जगाई थी। जहाँ घर में मुझे हर पल एक खौफनाक साज़िश की बू आती थी, वहीं रुया का साथ मुझे यह यकीन दिलाता था कि दुनिया अभी पूरी तरह सड़ी नहीं है। लेकिन विडंबना यह थी कि रुया के जितना करीब मैं जा रहा था, घर का वह अंधेरा मुझे उतनी ही जोर से अपनी ओर खींच रहा था। मम्मी की वह बदलती सूरत एक पल के लिए भी मेरे ज़हन से उतरती नहीं थी।

घर में चल रहे इस 'खेल' का अंत मुझे हर हाल में देखना था। मम्मी का हर दूसरे दिन सज-संवरकर बाहर निकलना अब कोई सामान्य बात नहीं रह गई थी। उनका कहना होता था कि वे मंदिर जा रही हैं, या कीर्तन में जा रही हैं, या राशन लाने जा रही हैं। लेकिन कोई औरत मंदिर जाने के लिए या राशन लाने जाने के लिए इतना गहरा बैकलेस ब्लाउज और इतनी कसी हुई पारदर्शी साड़ियां क्यों पहनेगी?

मैंने फैसला कर लिया कि अब सिर्फ घर में बैठकर कड़ियां जोड़ने से कुछ नहीं होगा; मुझे यह देखना ही होगा कि वे बाहर आखिर जाती कहाँ हैं, और किससे मिलती हैं।


Continued.....
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FLAT MATE - by The_Writer - 18-05-2026, 09:35 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 19-05-2026, 01:17 PM
RE: FLAT MATE - by Uvaaaa - 19-05-2026, 11:20 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 20-05-2026, 01:14 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 21-05-2026, 09:33 PM
RE: FLAT MATE - by garamrohan - 22-05-2026, 09:17 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 25-05-2026, 08:32 AM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 25-05-2026, 08:40 AM
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RE: FLAT MATE - by Kerry Watson - 25-05-2026, 07:23 PM
RE: FLAT MATE - by Armando - 25-05-2026, 07:43 PM
RE: FLAT MATE - by garamrohan - 26-05-2026, 09:06 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 29-05-2026, 11:56 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 29-05-2026, 11:32 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 31-05-2026, 11:07 AM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 31-05-2026, 01:50 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 05-06-2026, 07:33 AM
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RE: FLAT MATE - by The_Writer - 13-06-2026, 10:39 AM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 13-06-2026, 12:48 PM
RE: FLAT MATE - by Marishka - 14-06-2026, 05:11 AM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 15-06-2026, 12:16 PM
RE: FLAT MATE - by Jannat. - 14-06-2026, 06:41 AM
RE: FLAT MATE - by Kamya Sharma - 14-06-2026, 06:55 AM
RE: FLAT MATE - by momass - 15-06-2026, 08:12 AM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 15-06-2026, 10:59 AM
RE: FLAT MATE - by wetpussy - 15-06-2026, 03:10 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 18-06-2026, 02:43 PM
RE: FLAT MATE - by Sicario - 15-06-2026, 03:26 PM
RE: FLAT MATE - by Rajun - 15-06-2026, 03:49 PM
RE: FLAT MATE - by Kamdevi. - 15-06-2026, 08:30 PM
RE: FLAT MATE - by momass - 16-06-2026, 07:18 AM
RE: FLAT MATE - by jamanuram - 18-06-2026, 12:06 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 18-06-2026, 02:41 PM
RE: FLAT MATE - by deepfake - 18-06-2026, 09:13 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 18-06-2026, 10:32 PM
RE: FLAT MATE - by Tanisha. - 19-06-2026, 03:22 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 14-07-2026, 10:53 AM
RE: FLAT MATE - by Usha Devi - 19-06-2026, 03:48 PM
RE: FLAT MATE - by The Mask of Zorro - 19-06-2026, 06:20 PM
RE: FLAT MATE - by garamrohan - 20-06-2026, 12:19 PM
RE: FLAT MATE - by momass - 30-06-2026, 06:51 AM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 14-07-2026, 10:54 AM
RE: FLAT MATE - by royarnab26 - 05-07-2026, 12:54 AM
RE: FLAT MATE - by Asli lund - 05-07-2026, 07:39 AM
RE: FLAT MATE - by momass - 07-07-2026, 11:18 AM
RE: FLAT MATE - by momass - 10-07-2026, 09:35 AM
RE: FLAT MATE - by Sexone - 14-07-2026, 03:49 PM
RE: FLAT MATE - by KkkNad - 28-07-2026, 12:00 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 30-07-2026, 11:51 PM
RE: FLAT MATE - by KkkNad - 31-07-2026, 12:53 AM
RE: FLAT MATE - by Vikrant pelu - 31-07-2026, 06:40 AM
RE: FLAT MATE - by prabudmt - 01-08-2026, 10:08 AM
RE: FLAT MATE - by Marishka - 01-08-2026, 12:43 PM
RE: FLAT MATE - by KkkNad - 02-08-2026, 04:32 PM
RE: FLAT MATE - by Rexd_101 - 02-08-2026, 04:39 PM
RE: FLAT MATE - by jamanuram - 04-08-2026, 11:50 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 06-08-2026, 10:30 AM
RE: FLAT MATE - by jamanuram - 06-08-2026, 01:56 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 06-08-2026, 10:16 PM
RE: FLAT MATE - by KkkNad - 06-08-2026, 05:42 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 06-08-2026, 10:27 PM
RE: FLAT MATE - by KkkNad - 07-08-2026, 12:55 AM
RE: FLAT MATE - by jamanuram - 09-08-2026, 12:22 AM
RE: FLAT MATE - by momass - 12-08-2026, 09:01 AM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 12-08-2026, 12:19 PM
RE: FLAT MATE - by Sumaiya Shimu - 12-08-2026, 12:53 PM
RE: FLAT MATE - by Blueman - 12-08-2026, 01:45 PM
RE: FLAT MATE - by Ella - 12-08-2026, 02:22 PM
RE: FLAT MATE - by Renuka Shahane - 12-08-2026, 02:35 PM
RE: FLAT MATE - by Suhana. - 12-08-2026, 07:17 PM
RE: FLAT MATE - by shalini - 12-08-2026, 07:30 PM
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RE: FLAT MATE - by Sara Khan - 13-08-2026, 02:03 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 26-08-2026, 11:29 AM
RE: FLAT MATE - by KkkNad - 27-08-2026, 12:01 AM
RE: FLAT MATE - by Fanfunda - 13-08-2026, 02:10 PM
RE: FLAT MATE - by रसगुल्ला - 14-08-2026, 05:26 PM
RE: FLAT MATE - by jamanuram - 20-08-2026, 01:42 PM
RE: FLAT MATE - by Rexd_101 - 21-08-2026, 08:55 AM
RE: FLAT MATE - by momass - 24-08-2026, 07:41 AM
RE: FLAT MATE - by KkkNad - 24-08-2026, 08:44 PM
RE: FLAT MATE - by Sumitra Sen - 25-08-2026, 05:19 AM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 26-08-2026, 11:26 AM
RE: FLAT MATE - by Kodom Ali Mastan - 25-08-2026, 07:20 AM
RE: FLAT MATE - by Minki - 28-08-2026, 07:32 PM
RE: FLAT MATE - by 6sense - 28-08-2026, 09:46 PM
RE: FLAT MATE - by jamanuram - 28-08-2026, 11:20 PM
RE: FLAT MATE - by vengence1308 - 29-08-2026, 01:36 PM
RE: FLAT MATE - by KkkNad - 29-08-2026, 04:13 PM
RE: FLAT MATE - by jamanuram - 30-08-2026, 10:30 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 30-08-2026, 10:35 PM
RE: FLAT MATE - by jamanuram - 30-08-2026, 10:41 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 30-08-2026, 10:51 PM
RE: FLAT MATE - by KkkNad - 30-08-2026, 11:31 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 01-09-2026, 10:25 AM
RE: FLAT MATE - by Smalldick - 31-08-2026, 06:45 AM
RE: FLAT MATE - by Konika. - 31-08-2026, 07:03 AM
RE: FLAT MATE - by dragonslair - 31-08-2026, 07:58 AM
RE: FLAT MATE - by Skb21 - 31-08-2026, 09:00 AM
RE: FLAT MATE - by KkkNad - 31-08-2026, 11:59 AM
RE: FLAT MATE - by Skb21 - 31-08-2026, 02:04 PM
RE: FLAT MATE - by LENNY - 31-08-2026, 02:10 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 01-09-2026, 10:24 AM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 01-09-2026, 10:28 AM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 01-09-2026, 10:48 PM
RE: FLAT MATE - by Vikrant pelu - 02-09-2026, 09:56 AM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 08-09-2026, 02:40 PM
RE: FLAT MATE - by PakeezaAmmi - 02-09-2026, 11:27 AM
RE: FLAT MATE - by Bentley - 02-09-2026, 12:23 PM
RE: FLAT MATE - by KkkNad - 02-09-2026, 09:42 PM
RE: FLAT MATE - by Minki - 02-09-2026, 11:05 PM
RE: FLAT MATE - by abhishek.kumar - 04-09-2026, 10:55 AM
RE: FLAT MATE - by Cxer - 06-09-2026, 07:10 PM
RE: FLAT MATE - by momass - 07-09-2026, 07:43 AM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 08-09-2026, 02:42 PM
RE: FLAT MATE - by KkkNad - 07-09-2026, 04:05 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 08-09-2026, 02:39 PM
RE: FLAT MATE - by Rexd_101 - 09-09-2026, 03:15 AM
RE: FLAT MATE - by KkkNad - 09-09-2026, 05:35 AM
RE: FLAT MATE - by Peeping Tom - 09-09-2026, 06:45 AM
RE: FLAT MATE - by momass - 10-09-2026, 08:21 AM
RE: FLAT MATE - by SANJUbaba@001 - 10-09-2026, 12:14 PM
RE: FLAT MATE - by Cxer - 10-09-2026, 04:42 PM
RE: FLAT MATE - by abhishek.kumar - 11-09-2026, 05:39 PM
RE: FLAT MATE - by KkkNad - 13-09-2026, 01:30 PM
RE: FLAT MATE - by SANJUbaba@001 - 15-09-2026, 06:57 AM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 16-09-2026, 11:19 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 17-09-2026, 01:28 AM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 17-09-2026, 01:36 AM
RE: FLAT MATE - by Cxer - 17-09-2026, 09:28 AM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - Yesterday, 11:58 AM
RE: FLAT MATE - by Cxer - 19-09-2026, 07:51 PM
RE: FLAT MATE - by abhishek.kumar - 20-09-2026, 08:01 PM
RE: FLAT MATE - by KkkNad - 21-09-2026, 07:36 AM
RE: FLAT MATE - by Viraj007 - 21-09-2026, 01:46 PM
RE: FLAT MATE - by SANJUbaba@001 - 21-09-2026, 09:20 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - Yesterday, 11:54 AM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - Yesterday, 11:57 AM



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