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Adultery FLAT MATE
#66
एपिसोड 20: सिलवटें

हमेशा, हर दिन शक करने के लिए कुछ नहीं होता था.... कभी-कभी दो-तीन सप्ताह ऐसे बीत जाते थे मानो मुझे मम्मी और इमरान को लेकर कभी कोई शिकायत थी ही नहीं!

यकीन मानिए, ऐसे दिन और सप्ताह मेरे लिए किसी मृत-संजीवनी से कम नहीं होते थे.... मम्मी वाकई में मेरी प्यारी मम्मी लगती थीं और इमरान मेरा सबसे अच्छा दोस्त। खुशियाँ, सौहार्द और शान्ति तो मानो चौबीस घंटे घर के मेन दरवाज़े के बाहर हाथ जोड़े खड़े रहते हैं की, 'भैया, प्लीज़... थोड़ा सा और अंदर आने दो...'

ऐसे दिनों में, मम्मी का पूरा ध्यान घर और मेरे पे होता था.... मैंने टाइम पर खाया की नहीं, सही मात्रा में खाया... कितना खाया... कब तक काम रहेगा... समय निकाल कर थोड़ा ज़्यादा आराम क्यों नहीं कर लेता, इत्यादि।

इमरान भी अपने काम में जी तोड़ व्यस्त रहता। कई बार ऐसा हुआ की वो रातों में घर लौटा तक नहीं!

दो-तीन दिन बाद जब लौटता तब देख कर ऐसा लगता की मानो कहीं से जंग लड़ कर आया है, या फिर शायद कुली-मिस्त्री का काम कर रहा था... उसके कपड़ों और शक्ल की हालत ही ऐसी होती थी।

ऐसे ही दिन कट रहे थे....

कि एक दिन अचानक कुछ ऐसा हुआ जिसकी एक महीन कल्पना शायद मैंने बहुत पहले ही कर लिया था अपने दिमाग के किसी कोने में, लेकिन स्वीकार करने या फिर इसके वास्तविक होने की सोच भर को दूर से प्रणाम कर लेता था...
 
हुआ कुछ ऐसा....

रविवार का दिन था....

सुबह के आठ बजे थे। अमूमन इस वक्त मम्मी रसोई में पुरानी, घरेलू सूती साड़ी का पल्लू कमर में लपेटे, भाप उड़ाती चाय और नाश्ते की तैयारी में जुटी होती थींऔर नाश्ते के साथ-साथ दोपहर के खाने का प्रबंध भी शुरू हो जाता था.... लेकिन, आज जब मैं कमरे से बाहर निकला, तो रसोई सूनी थी।

ड्राइंग रूम से आती हल्की सी महक ने मेरा ध्यान खींचावह कोई धुप-अगरबत्ती या फिर मम्मी की फेवरेट चंदन की खुशबू नहीं थी, बल्कि इमरान के उस महंगे बॉडी लोशन और फ्रेंच परफ्यूम की बहुत बारीक, धीमी सी महक थी जिसका वो अक्सर ही शो ऑफ किया करता था...

मैं दबे पांव हॉल की तरफ बढ़ा

मम्मी अपने कमरे का दरवाजा थोड़ा खुला रखकर आईने के सामने खड़ी थीं। जो दृश्य मैंने देखा, उसने मुझे अपनी ही जगह पर जड़ कर दिया मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं, और दिल में दबा शक अचानक एक तीखे सच की तरह सामने आकर खड़ा हो गया।

मम्मी ने एक नए डिजाइन का गहरा वाइन-रेड रंग का सलवार-सूट पहन रखा थाअच्छा जँच भी रही थी... लेकिन बात सिर्फ नए कपड़ों की नहीं थी; बात उस 'कट' और 'फिटिंग' की थी जो कभी मेरी सीधी सादी मम्मी की पसंद से कोसों दूर हुआ करती थी।

गदराए कंधे पर टिकने वाला वो डीप-कट वाला गला, और कुर्ती का वो बॉडी-हगिंग शेप... वह पोशाक किसी भी लिहाज से बीरभूम की उस ढलती उम्र की शांत महिला की नहीं लग रही थी। वह कपड़ा मम्मी के शरीर से इस कदर चिपका हुआ था कि उनकी सुडौल काया की एक-एक बनावट उभर कर सामने आ रही थी। वह आईने में घूम-घूमकर खुद को देख रही थींकभी थोड़ा मुड़कर अपना साइड प्रोफाइल देखतीं, तो कभी अपने कंधे पर से सरकते हुए दुपट्टे को एक बहुत ही आधुनिक और सलीकेदार अंदाज में ढीला छोड़ देतीं...

कभी थोड़ा आगे झुक कर कुर्ती के डीप गले से झाँकते क्लीवेज को देख कर मंद-मंद मुस्कराती, तो कभी पूरी तरह मुड़ कर उस कसे कपड़े में अपना पिछवाड़ा देखती…!

दुपट्टा छाती को ढकने के बजाय केवल एक तरफ के कंधे पर पिन से अटका हुआ था.. उनका दूसरा कंधा और कुर्ती की वो बारीक सिलाई साफ झलक रही थी। यह बिल्कुल वैसा ही स्टाइल था जैसा शहर की आज़ाद ख्याल, स्टाइलिश और एलिट-क्लास औरतें अपनाती थीं।

मम्मी ने अपने हाथों में कांच की पारंपरिक चूड़ियों की जगह केवल एक हाथ में पीतल का एक चौड़ा, नक्काशीदार ब्रेसलेट पहन रखा था। उनके बालों का जूड़ा भी आज गायब था; उसकी जगह उनके बाल पीछे आधे बंधे थे और बाकी कंधे पर बिखरे हुए थे। वह आईने के करीब गईं, अपने होठों पर हल्के गुलाबी रंग की लिप-ग्लोस की चमक को देखा और मुस्कुरा दीं।

वह मुस्कान... वह एक 40 के पार की माँ की सादगी भरी मुस्कान नहीं थी, उसमें एक औरत का अपने रूप को लेकर जगा नया आकर्षण, नयी जिज्ञासा थी

मेरी छाती में जैसे सांस अटक गई। यह वो महिला बिल्कुल नहीं थी जिसे मैं बीरभूम से लाया था। मुझे तुरंत इमरान के लैपटॉप की वो खौफनाक रात याद आई

पता नहीं क्यों याद आई... लेकिन आई...

याद आने का कोई कारण अगर देना ही पड़े तो यही दूँगा कि उस रात लैपटॉप की स्क्रीन पर इमरान जिस तरह से मम्मी की पुरानी सलवार-सूट वाली तस्वीरों को ज़ूम कर-करके देख रहा थाउनके साइड प्रोफाइल का झुकाव, उनकी कुर्ती का कसाव, और पीछे से उनके चलने का अंदाजआज मम्मी का यह नया रूप हूबहू उसी 'डिजाइन' में ढला हुआ लग रहा था! ऐसा लगता था जैसे इमरान ने ही किसी कुशल मूर्तिकार की तरह मेरी माँ के पहनावे और उनके हाव-भाव को अपनी पसंद के मुताबिक ढाल दिया हो।

"मम्मी..."  एक सूखी सी आवाज़ निकली।

मम्मी ने चौंककर पीछे देखा।

एक पल के लिए उनके चेहरे पर चोरी पकड़े जाने जैसी घबराहट आई। उन्होंने तुरंत अपने दुपट्टे को दोनों हाथों से खींचकर आगे करने की कोशिश की, लेकिन फिर ना जाने कहाँ से एक नया आत्मविश्वास उनके चेहरे पर आ गया।

"अरे देव, तू उठ गया?" उन्होंने अपने बाल संवारते हुए कहा, "देख तो, यह सूट कैसा लग रहा है? वो... इमरान कह रहा था कि इस शहर में इतने ढीले-ढाले कपड़े पहनकर बाहर निकलोगी तो लोग अजीब नजरों से देखेंगे। कल जब मैं उसके साथ मार्केट गई थी, तो उसने ही बुटीक से यह नया कपड़ा पसंद करवाया था। कह रहा था कि आंटी आप पर यह रंग और यह कट बहुत जंचेगा।"

'इमरान ने पसंद कराया था...' ये शब्द मेरे कानों में किसी जलते हुए तेजाब की तरह गिरे…. 'यह रंग और यह कट'....! तो बात अब धीरे-धीरे यहाँ तक पहुँच रही है!!

इमरान ने मेरी माँ के कपड़ों की फिटिंग तय की थी? इमरान ने यह तय किया था कि मेरी माँ का गला कितना गहरा होगा और उनका दुपट्टा किस कंधे पर ढलकेगा?

'साला मादरच...'     मैंने मन ही मन कहा...

"मम्मी, आप... आप ये क्या पहन रही हैं?" मेरी आवाज अविश्वास से कांप रही थी "आपको कभी इस तरह के कपड़े पहनते नहीं देखा। यह फिटिंग, यह स्टाइल... बीरभूम में तो आपने कभी..."

"बीरभूम अलग था देव," मम्मी ने मेरी बात बीच में ही काट दी। उनकी आवाज में पहली बार एक अजीब सी कड़वाहट या शायद एक तीखी आत्मनिर्भरता थी,

"वहां जिंदगी ठहर गई थी अब मैं इस शहर में हूँ, तेरे साथ। क्या मुझे थोड़ा सा सजने-संवरने का हक नहीं है? क्या उम्र के इस पड़ाव पर आकर मैं अपनी पसंद के कपड़े भी नहीं पहन सकती? तू भी अब इमरान की तरह सोच में थोड़ा आधुनिक बन।"

"मैं आधुनिक हूँ मम्मी,..."


"ओह! आधुनिक हो? किस तरह के आधुनिक जो अपनी मम्मी की ज़रा सी आधुनिकता पर आपत्ति कर रहे हो?"


मम्मी ने काफी तीखा कटाक्ष किया।

मैं शायद दुनिया का सब कुछ बर्दाश्त कर सकता था और हूँ, लेकिन मम्मी का ऐसा कटाक्ष नहीं... और, जहाँ तक मुझे याद है मम्मी ने इससे पहले सिर्फ एकबार ऐसा किया था, वो भी मेरे जॉब करने या न करने के निर्णय को लेकर।

आज का ये रूप और बात, पहले से कहीं अधिक अलग, बिल्कुल ही जुदा है....

मैं खामोश खड़ा उन्हें देखता रह गया।

इमरान का नाम उनके मुंह से इतनी सहजता से निकल रहा था जैसे वह कोई गैर नहीं, बल्कि उनके इस नए रूप का कोई राजदार हो। जब वह मेरे सामने से गुजरकर रसोई की तरफ गईं, तो उनकी चाल में भी एक नया लचीलापन था। उनके सूट की सिलवटें और उनकी पीठ पर झूलती वो बारीक डोरी... सब कुछ चिल्ला-चिल्लाकर कह रहा था कि मेरे पास शक करने की कोई बेबुनियाद वजह नहीं थी!!


यह कोई मेरा वहम नहीं था एक बेटा अपनी माँ के पहनावे में आए इतने बारीक और बोल्ड बदलाव को कभी गलत नहीं समझ सकता। इमरान ने मेरी माँ की सादगी पर अपनी पसंद का रंग चढ़ा दिया था, और सबसे भयानक बात यह थी कि मम्मी को इस बदलाव से कोई ऐतराज नहीं था; बल्कि वह इस नए रूप में खुद को पाकर मुस्कुरा रही थीं।


मेरे भीतर का बेटा उस दिन हार गया, और शक का वो खौफनाक भूत एकबार फिर पूरी तरह से मेरे सिर पर सवार हो गया।
 



To be Continued….
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FLAT MATE - by The_Writer - 18-05-2026, 09:35 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 19-05-2026, 01:17 PM
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RE: FLAT MATE - by KkkNad - 30-08-2026, 11:31 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 01-09-2026, 10:25 AM
RE: FLAT MATE - by Smalldick - 31-08-2026, 06:45 AM
RE: FLAT MATE - by Konika. - 31-08-2026, 07:03 AM
RE: FLAT MATE - by dragonslair - 31-08-2026, 07:58 AM
RE: FLAT MATE - by Skb21 - 31-08-2026, 09:00 AM
RE: FLAT MATE - by KkkNad - 31-08-2026, 11:59 AM
RE: FLAT MATE - by Skb21 - 31-08-2026, 02:04 PM
RE: FLAT MATE - by LENNY - 31-08-2026, 02:10 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 01-09-2026, 10:24 AM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 01-09-2026, 10:28 AM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 01-09-2026, 10:48 PM
RE: FLAT MATE - by Vikrant pelu - 02-09-2026, 09:56 AM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 08-09-2026, 02:40 PM
RE: FLAT MATE - by PakeezaAmmi - 02-09-2026, 11:27 AM
RE: FLAT MATE - by Bentley - 02-09-2026, 12:23 PM
RE: FLAT MATE - by KkkNad - 02-09-2026, 09:42 PM
RE: FLAT MATE - by Minki - 02-09-2026, 11:05 PM
RE: FLAT MATE - by abhishek.kumar - 04-09-2026, 10:55 AM
RE: FLAT MATE - by Cxer - 06-09-2026, 07:10 PM
RE: FLAT MATE - by momass - 07-09-2026, 07:43 AM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 08-09-2026, 02:42 PM
RE: FLAT MATE - by KkkNad - 07-09-2026, 04:05 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 08-09-2026, 02:39 PM
RE: FLAT MATE - by Rexd_101 - 09-09-2026, 03:15 AM
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RE: FLAT MATE - by Peeping Tom - 09-09-2026, 06:45 AM
RE: FLAT MATE - by momass - 10-09-2026, 08:21 AM
RE: FLAT MATE - by SANJUbaba@001 - 10-09-2026, 12:14 PM
RE: FLAT MATE - by Cxer - 10-09-2026, 04:42 PM
RE: FLAT MATE - by abhishek.kumar - 11-09-2026, 05:39 PM
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RE: FLAT MATE - by Cxer - 17-09-2026, 09:28 AM
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RE: FLAT MATE - by KkkNad - 21-09-2026, 07:36 AM
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RE: FLAT MATE - by SANJUbaba@001 - 21-09-2026, 09:20 PM
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