20-01-2026, 04:48 PM
अध्याय १० शीला का कॉल
प्राची अब अपना जीवन बहुत एंजॉय कर रही थी अब सब कुछ उसको अपने कंट्रोल में लगता था , आशीष उसकी हर बात मानता और खेमू भी प्राची के आगे पीछे घूमा करता , सत्यम अपने काम में इतना व्यस्त था कि उसको घर में क्या हो रहा उससे मतलब ही नहीं था वो ज्यादातर अपने काम से बाहर ही रहता कभी कभार घर में आता तो बस खा के अपने कमरे में । रही बात मंजू देवी की तो वो अंदर ही अंदर जल रही थी , लेकिन कुछ कर नहीं पा रही थी क्योंकि आशीष और खेमू उसकी बिल्कुल भी सुन नहीं रहे थे । प्राची मंजू को मंत्रों से वश में कर सकती थी और वो आगे कभी ना कभी करेगी भी लेकिन प्राची मंजू देवी के बेबसी का आनंद ले रही थी ।
प्राची अब घर की मालकिन थी , हर काम उसके अनुसार ही होता , खाना भी प्राची के पसंद का ही बनता और जायदातर मंजू खाना बनाती , प्राची कभी कभार ही किचन में घुसती जब उसको मन होता खाना बनाने का । खेमू दिन भर प्राची की सेवा में लगे रहता , दोपहर का खाना प्राची को उसके रूम में ले जाके देने का काम खेमू ही करता, यहाँ तक की साग सब्जी लेने से पहले भी प्राची से पूछ कर जाता ।
आशीष का काम अच्छा चल रहा था और प्राची जानती थी कि उसके ऐसो आराम के लिए पैसा जरूरी है इसीलिए वो आशीष को दिन में बिना कुछ परेशान किए उसका काम करने देती और रात में सोने से पहले उसको हमेशा कुछ ना कुछ नया अनुभव दे के सुलाती जिसके कारण आशीष प्राची के प्यार में दीवाना हो गया था , उसको रोज़ एक्साइटमेंट रहता कि घर जाकर आज नया क्या होगा ।
प्राची अपने बच्चे को शीला के पास ही छोड़ कर आई थी ताकि जब तक सब वश में ना हो जाए तब तक बच्चा नानी के साथ आराम से रहे । प्राची रोज़ शीला से फ़ोन पर बच्चे का हाल चाल लेती और साथ में ही अपने जादू का ब्योरा शीला को बताती । शीला एक अच्छी माँ और गुरु की तरह प्राची को सलाह दिया करती ।
एक दिन दोपहर को प्राची को शीला का कॉल आया :
शीला : कैसे हो बेटा ?
प्राची : सब ठीक है माँ, मैं जस्ट अपने रूम में खाना खा के आई हूँ । आराम कर रही हूँ ।
शीला: और सब कंट्रोल में हैं ना ?
प्राची: हाँ सब सही है । अब कोई नहीं है मुझे रोकने वाला ।
शीला और प्राची दोनों हँसते हैं ।
शीला : सुन , गोसाईं जी कल शहर आए थे । हमारे घर में रुके थे कल रात को।
गोसाईं जी के रुके होने की ख़बर से प्राची की चूत गीली हो जाती है , उसे एक पल के लिए अफ़सोस भी होता कि काश मैं वहाँ होती उनके साथ । प्राची अपना ध्यान शीला के बातों पर लाती हुए बोलती है : अरे ! बहुत अच्छी बात है । कैसे आना हुआ था उनका ?
शीला : वो उनको कुछ आयुर्वेदिक जड़ी बूटी किसी बड़े नेता को पहुंचाना था , इसीलिए वे स्वयं यहाँ आए थे ।
प्राची : तो हमारे घर कैसे रुके ?
शीला : मैंने खाना के लिए उनको बुलाया था , फिर बहुत निवेदन करने पर यहाँ रुकने को तैयार हुए ।
प्राची को मन ही मन अपनी ही माँ से जलन हो रहा था , “ साली पूरा अकेले मज़ा ली होगी कल” प्राची के मन ही मन सोचती है ।
प्राची : अच्छा ! क्या बोल रहे थे ?
शीला : तुझे याद कर रहे थे । पूछ रहे थे कि अब उसका परिवार कैसा चल रहा है । मैंने बताया कि आपकी कृपा से सब अच्छा चल रहा है , अब उसके घरवाले उसकी कहा मानने लगे है और सब उसके वश में चल रहा है ।
प्राची : हाँ उन्ही का आशीर्वाद है । सही कहा आपने ।
शीला : गोसाईं जी बहुत तारीफ़ भी किए तेरा । लड़की तेज जय बहुत जल्दी सीखी है विद्या को ।
प्राची सुनके बहुत ख़ुश होती है । गोसाई जी के मुँह से अपनी तारीफ़ सुनके प्राची को अपने गुफा में बिताए हुए दिन याद आने लगते है और प्राची की चूत पानी छोड़ने लगती है । प्राची शीला से बात करते हुए ही फ़ोन अपने बाएं हाथ में रखती है और लेटे हुए ही अपना दाहिना हाथ सारी के अंदर डाल कर अपनी चुत के दाने को मसलने लगती है ।
शीला : गोसाईं जी तुझसे बहुत ख़ुश है बेटा , उनके बहुत से शिष्य और शिष्यां है , पर वो किसी के बारे में ज़िक्र कम ही करते है तेरे बारे में कर रहे है मतलब की वो बहुत प्रसन्न है तुझसे ।
प्राची : ये तो बहुत अच्छी बात है माँ। मैं आऊँगी तो हम मिलने जा सकते है क्या गोसाईं जी से ?
शीला: हाँ , मैं उनसे समय ले लूँगी । हम दो दिन रुक कर आ जाएँगे । बीच बीच में जाकर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए बेटा।
दो दिन रुक के क्या होगा प्राची अच्छे से जानती थी । शीला का बात सुन वो ज़ोर ज़ोर से अपना दाना मसलने लगी।
प्राची : आह! उनसे मिलने का मन है बहुत दिन हो गए उनसे मिले। और कुछ कहा क्या उन्होंने मेरे बारे में ?
शीला समझ गई की प्राची का क्यों मिलने का मन हो रहा । वो जानती थी की गोसाईं जी का आकर्षण बड़ा तगड़ा है , वो उम्रदराज़ और इतने सालों से गोसाईं जी से संबंध बना रही है तब भी उसका भोसड़ा महीने में कितनों बार हूँ गोसाईं जी के नाम से पानी छोड़ देती है फिर तो प्राची जवान है उसकी तड़पन को शीला समझ रही थी ।
शीला : हाँ बेटा । बीच में जाकर मिल आया कर , आशीष को भी उनके पास ले जा कभी फिर वो ही तेरे को लाया ले जाया करेंगे गोसाईं जी के पास । जैसे मुझे तेरे पापा ले जाते है ।
प्राची : पता नहीं आशीष कैसे रियेक्ट करेगा पहली बार, जब तक गोसाईं जी नहीं कहते मैं उन्हें नहीं ले जाऊँगी कहीं ।
शीला : मैं एक काम करती हूँ , गोसाईं जी को तेरे ससुराल भेज देती हूँ , वहाँ जाकर वो सब सेट करके आ जाएँगे फिर कभी तेरे को कोई अपने जाने में रोकेगा नहीं । उनके बायें हाथ का काम है उनके सभी शिष्याओं के पति या ससुर ही छोड़ने आते है गोसाईं जी के पास वो भी दिनों दिनों तक ।
शीला के बातें प्राची के दिमाग़ में कम और चूत में ज़्यादा असर कर रही थी , प्राची अपना हाथ साड़ी से निकलती है और अपनी साड़ी को कमर तक ऊपर करके लेट जाती है , और उँगली अपनी गीली चूत में अंदर बाहर करने लग जाती है । दरवाजा खुला , प्राची के टाँगे में दरवाजे की ओर लेकिन प्राची के मन में कोई डर नहीं वो दरवाजा बंद करने का जह मत भी नहीं उठाती , और आँखे बंद करके शीला से बातें करते हुए उँगली करती है ।
प्राची : कल रात पापा ड्यूटी में थे क्या ?
शीला : नहीं । उनकी मॉर्निंग शिफ्ट है , तो वो अभी सुबह गए हज ड्यूटी ।
प्राची: तो कल गोसाईं जी की सेवा ? आपने की या नहीं ?
शीला : अरे कैसे नहीं करूँगी । तेरे पापा खाने पीने का सब व्यवस्था करके हाल में ही थे । मैं गोसाईं जी के सेवा के लिए रात भर बेडरूम में थी।
प्राची की उँगली तेज़ी से अंदर बाहर होती है ।
प्राची : आह! गोसाईं जी ने निचोड़ दिया होगा कल आपको?
शीला प्राची के आवाज़ में भारी पन और आह की आवाज़ सुनके समझ जाती गई की प्राची अपने आप को ख़ुश कर रही है , वो उसका साथ देती है : हाँ ,जान तो रही है की हम तीन तीन औरतों को वो एक साथ सुख देते है फिर तो मैं अकेले थी , तीन बार निचोड़ा उन्होंने मुझे ।
प्राची : माँ । मुझे गोसाईं जी के लिंग की याद आ रही । वैसा ही था ना उनका ।
शीला : वही चमक और लोहे जैसे सख्ती , गर्म इतना कि कल मुझे लग रहा जैसे मैं गर्मा गरम सरिया अंदर ले लिया है ।
प्राची के मुंह से आह .. उफ़्फ़.. की आवाज़ें निकलने लगती है , आख़िर प्राची के माँ ने ही सबसे पहले उसे बेशर्म होना सिखाया था । प्राची उँगली करते समय अपने आँख को बंद रखी थी , अब हल्का आँख खोली तो देखी की खेमू दरवाज़े में खड़ा प्राची की चूत निहार रहा है , प्राची को ये बिल्कुल भी परेशान करने वाली बात नहीं लगी , लेकिन उसके ससुर के द्वारा उसे इस अवस्था में देखे जाने से उसकी चूत और गरम हो गई ।
प्राची ने चूत से उँगली निकाल कर उसी उँगली से खेमू को अपनी ओर आने का इशारा किया , खेमू अंदर आता है , प्राची दोनों टाँगों को पूरी तरह अपने ससुर के सामने फैला कर परोस देती है और बोलती है “ ससुर जी! चाट कर साफ़ कर दीजिए मुझे”
हरा सिग्नल पाकर खेमू किसी भूखे कुत्ते की तरह प्राची के जांघो और चूत को खाता है, प्राची अपने चूत के अंदर तक खेमू के जीभ को महसूस करती है । प्राची के दाने को दाँतो से दबाता और चूसता । चुदाई के खेल में खेमू माहिर था बहुत सी औरतों का रस उसने पीया था , हालाकि प्राची को आदत तो गोसाईं जी की थी लेकिन खेमू की चुसाई उसे आशीष से जायदा ताकतवर लगी , अपने ससुर को अपनी चूत खिलाते हुए प्राची बेशर्मी से अपनी माँ से बातें करने लगी ।
प्राची : गोसाईं जी का सरिया कल आपको संतुष्ट किया ना ।
शीला : हाँ , कल की रात का मज़ा ही अलग था , बड़े दिनों बाद बिस्तर में गोसाईं जी से चुदने का सौभाग्य मिला था । पूरा वसूला मैने । जल्दी ही गोसाईं जी को तेरे पास भेजती हूँ , आशीष और तेरे ससुर के सामने ही चोदेंगे तुझे , अब तेरा उँगली करना बंद होगा ।
प्राची शीला के गंदी बातों से तेज़ी से चीखते हुए झड़ जाती है और उसकी चूत से मूत की मोटी धार निकल पड़ती है । खेमू के मुंह प्राची के मूत की धार से भीग जाता है , खेमू अपनी छमता के अनुसार जितना मूत पी सकता था पी लेता है, प्राची के मूत और चूत के पानी का रस मिलकर इतना तीक्ष्ण गंध और स्वाद देते है कि बिना अपना लंड छुये ही खेमू वीर्य त्याग कर देता है । हाफते हुए वही निढाल हो जाता है ।
प्राची उठकर अपना साड़ी नीचे करती है ड्रेसिंग के आमने अपना हुलिया सुधारती है और खेमू को आदेश देती है कि बिस्तर का चादर चेंज करके मूत वाला चादर धोने में डाल दो ।
खेमू ख़ुशी ख़ुशी अपनी नई मालकिन का बात मान लेता है ।
गोसाईं जी का विजिट आप अगले भाग में
प्राची अब अपना जीवन बहुत एंजॉय कर रही थी अब सब कुछ उसको अपने कंट्रोल में लगता था , आशीष उसकी हर बात मानता और खेमू भी प्राची के आगे पीछे घूमा करता , सत्यम अपने काम में इतना व्यस्त था कि उसको घर में क्या हो रहा उससे मतलब ही नहीं था वो ज्यादातर अपने काम से बाहर ही रहता कभी कभार घर में आता तो बस खा के अपने कमरे में । रही बात मंजू देवी की तो वो अंदर ही अंदर जल रही थी , लेकिन कुछ कर नहीं पा रही थी क्योंकि आशीष और खेमू उसकी बिल्कुल भी सुन नहीं रहे थे । प्राची मंजू को मंत्रों से वश में कर सकती थी और वो आगे कभी ना कभी करेगी भी लेकिन प्राची मंजू देवी के बेबसी का आनंद ले रही थी ।
प्राची अब घर की मालकिन थी , हर काम उसके अनुसार ही होता , खाना भी प्राची के पसंद का ही बनता और जायदातर मंजू खाना बनाती , प्राची कभी कभार ही किचन में घुसती जब उसको मन होता खाना बनाने का । खेमू दिन भर प्राची की सेवा में लगे रहता , दोपहर का खाना प्राची को उसके रूम में ले जाके देने का काम खेमू ही करता, यहाँ तक की साग सब्जी लेने से पहले भी प्राची से पूछ कर जाता ।
आशीष का काम अच्छा चल रहा था और प्राची जानती थी कि उसके ऐसो आराम के लिए पैसा जरूरी है इसीलिए वो आशीष को दिन में बिना कुछ परेशान किए उसका काम करने देती और रात में सोने से पहले उसको हमेशा कुछ ना कुछ नया अनुभव दे के सुलाती जिसके कारण आशीष प्राची के प्यार में दीवाना हो गया था , उसको रोज़ एक्साइटमेंट रहता कि घर जाकर आज नया क्या होगा ।
प्राची अपने बच्चे को शीला के पास ही छोड़ कर आई थी ताकि जब तक सब वश में ना हो जाए तब तक बच्चा नानी के साथ आराम से रहे । प्राची रोज़ शीला से फ़ोन पर बच्चे का हाल चाल लेती और साथ में ही अपने जादू का ब्योरा शीला को बताती । शीला एक अच्छी माँ और गुरु की तरह प्राची को सलाह दिया करती ।
एक दिन दोपहर को प्राची को शीला का कॉल आया :
शीला : कैसे हो बेटा ?
प्राची : सब ठीक है माँ, मैं जस्ट अपने रूम में खाना खा के आई हूँ । आराम कर रही हूँ ।
शीला: और सब कंट्रोल में हैं ना ?
प्राची: हाँ सब सही है । अब कोई नहीं है मुझे रोकने वाला ।
शीला और प्राची दोनों हँसते हैं ।
शीला : सुन , गोसाईं जी कल शहर आए थे । हमारे घर में रुके थे कल रात को।
गोसाईं जी के रुके होने की ख़बर से प्राची की चूत गीली हो जाती है , उसे एक पल के लिए अफ़सोस भी होता कि काश मैं वहाँ होती उनके साथ । प्राची अपना ध्यान शीला के बातों पर लाती हुए बोलती है : अरे ! बहुत अच्छी बात है । कैसे आना हुआ था उनका ?
शीला : वो उनको कुछ आयुर्वेदिक जड़ी बूटी किसी बड़े नेता को पहुंचाना था , इसीलिए वे स्वयं यहाँ आए थे ।
प्राची : तो हमारे घर कैसे रुके ?
शीला : मैंने खाना के लिए उनको बुलाया था , फिर बहुत निवेदन करने पर यहाँ रुकने को तैयार हुए ।
प्राची को मन ही मन अपनी ही माँ से जलन हो रहा था , “ साली पूरा अकेले मज़ा ली होगी कल” प्राची के मन ही मन सोचती है ।
प्राची : अच्छा ! क्या बोल रहे थे ?
शीला : तुझे याद कर रहे थे । पूछ रहे थे कि अब उसका परिवार कैसा चल रहा है । मैंने बताया कि आपकी कृपा से सब अच्छा चल रहा है , अब उसके घरवाले उसकी कहा मानने लगे है और सब उसके वश में चल रहा है ।
प्राची : हाँ उन्ही का आशीर्वाद है । सही कहा आपने ।
शीला : गोसाईं जी बहुत तारीफ़ भी किए तेरा । लड़की तेज जय बहुत जल्दी सीखी है विद्या को ।
प्राची सुनके बहुत ख़ुश होती है । गोसाई जी के मुँह से अपनी तारीफ़ सुनके प्राची को अपने गुफा में बिताए हुए दिन याद आने लगते है और प्राची की चूत पानी छोड़ने लगती है । प्राची शीला से बात करते हुए ही फ़ोन अपने बाएं हाथ में रखती है और लेटे हुए ही अपना दाहिना हाथ सारी के अंदर डाल कर अपनी चुत के दाने को मसलने लगती है ।
शीला : गोसाईं जी तुझसे बहुत ख़ुश है बेटा , उनके बहुत से शिष्य और शिष्यां है , पर वो किसी के बारे में ज़िक्र कम ही करते है तेरे बारे में कर रहे है मतलब की वो बहुत प्रसन्न है तुझसे ।
प्राची : ये तो बहुत अच्छी बात है माँ। मैं आऊँगी तो हम मिलने जा सकते है क्या गोसाईं जी से ?
शीला: हाँ , मैं उनसे समय ले लूँगी । हम दो दिन रुक कर आ जाएँगे । बीच बीच में जाकर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए बेटा।
दो दिन रुक के क्या होगा प्राची अच्छे से जानती थी । शीला का बात सुन वो ज़ोर ज़ोर से अपना दाना मसलने लगी।
प्राची : आह! उनसे मिलने का मन है बहुत दिन हो गए उनसे मिले। और कुछ कहा क्या उन्होंने मेरे बारे में ?
शीला समझ गई की प्राची का क्यों मिलने का मन हो रहा । वो जानती थी की गोसाईं जी का आकर्षण बड़ा तगड़ा है , वो उम्रदराज़ और इतने सालों से गोसाईं जी से संबंध बना रही है तब भी उसका भोसड़ा महीने में कितनों बार हूँ गोसाईं जी के नाम से पानी छोड़ देती है फिर तो प्राची जवान है उसकी तड़पन को शीला समझ रही थी ।
शीला : हाँ बेटा । बीच में जाकर मिल आया कर , आशीष को भी उनके पास ले जा कभी फिर वो ही तेरे को लाया ले जाया करेंगे गोसाईं जी के पास । जैसे मुझे तेरे पापा ले जाते है ।
प्राची : पता नहीं आशीष कैसे रियेक्ट करेगा पहली बार, जब तक गोसाईं जी नहीं कहते मैं उन्हें नहीं ले जाऊँगी कहीं ।
शीला : मैं एक काम करती हूँ , गोसाईं जी को तेरे ससुराल भेज देती हूँ , वहाँ जाकर वो सब सेट करके आ जाएँगे फिर कभी तेरे को कोई अपने जाने में रोकेगा नहीं । उनके बायें हाथ का काम है उनके सभी शिष्याओं के पति या ससुर ही छोड़ने आते है गोसाईं जी के पास वो भी दिनों दिनों तक ।
शीला के बातें प्राची के दिमाग़ में कम और चूत में ज़्यादा असर कर रही थी , प्राची अपना हाथ साड़ी से निकलती है और अपनी साड़ी को कमर तक ऊपर करके लेट जाती है , और उँगली अपनी गीली चूत में अंदर बाहर करने लग जाती है । दरवाजा खुला , प्राची के टाँगे में दरवाजे की ओर लेकिन प्राची के मन में कोई डर नहीं वो दरवाजा बंद करने का जह मत भी नहीं उठाती , और आँखे बंद करके शीला से बातें करते हुए उँगली करती है ।
प्राची : कल रात पापा ड्यूटी में थे क्या ?
शीला : नहीं । उनकी मॉर्निंग शिफ्ट है , तो वो अभी सुबह गए हज ड्यूटी ।
प्राची: तो कल गोसाईं जी की सेवा ? आपने की या नहीं ?
शीला : अरे कैसे नहीं करूँगी । तेरे पापा खाने पीने का सब व्यवस्था करके हाल में ही थे । मैं गोसाईं जी के सेवा के लिए रात भर बेडरूम में थी।
प्राची की उँगली तेज़ी से अंदर बाहर होती है ।
प्राची : आह! गोसाईं जी ने निचोड़ दिया होगा कल आपको?
शीला प्राची के आवाज़ में भारी पन और आह की आवाज़ सुनके समझ जाती गई की प्राची अपने आप को ख़ुश कर रही है , वो उसका साथ देती है : हाँ ,जान तो रही है की हम तीन तीन औरतों को वो एक साथ सुख देते है फिर तो मैं अकेले थी , तीन बार निचोड़ा उन्होंने मुझे ।
प्राची : माँ । मुझे गोसाईं जी के लिंग की याद आ रही । वैसा ही था ना उनका ।
शीला : वही चमक और लोहे जैसे सख्ती , गर्म इतना कि कल मुझे लग रहा जैसे मैं गर्मा गरम सरिया अंदर ले लिया है ।
प्राची के मुंह से आह .. उफ़्फ़.. की आवाज़ें निकलने लगती है , आख़िर प्राची के माँ ने ही सबसे पहले उसे बेशर्म होना सिखाया था । प्राची उँगली करते समय अपने आँख को बंद रखी थी , अब हल्का आँख खोली तो देखी की खेमू दरवाज़े में खड़ा प्राची की चूत निहार रहा है , प्राची को ये बिल्कुल भी परेशान करने वाली बात नहीं लगी , लेकिन उसके ससुर के द्वारा उसे इस अवस्था में देखे जाने से उसकी चूत और गरम हो गई ।
प्राची ने चूत से उँगली निकाल कर उसी उँगली से खेमू को अपनी ओर आने का इशारा किया , खेमू अंदर आता है , प्राची दोनों टाँगों को पूरी तरह अपने ससुर के सामने फैला कर परोस देती है और बोलती है “ ससुर जी! चाट कर साफ़ कर दीजिए मुझे”
हरा सिग्नल पाकर खेमू किसी भूखे कुत्ते की तरह प्राची के जांघो और चूत को खाता है, प्राची अपने चूत के अंदर तक खेमू के जीभ को महसूस करती है । प्राची के दाने को दाँतो से दबाता और चूसता । चुदाई के खेल में खेमू माहिर था बहुत सी औरतों का रस उसने पीया था , हालाकि प्राची को आदत तो गोसाईं जी की थी लेकिन खेमू की चुसाई उसे आशीष से जायदा ताकतवर लगी , अपने ससुर को अपनी चूत खिलाते हुए प्राची बेशर्मी से अपनी माँ से बातें करने लगी ।
प्राची : गोसाईं जी का सरिया कल आपको संतुष्ट किया ना ।
शीला : हाँ , कल की रात का मज़ा ही अलग था , बड़े दिनों बाद बिस्तर में गोसाईं जी से चुदने का सौभाग्य मिला था । पूरा वसूला मैने । जल्दी ही गोसाईं जी को तेरे पास भेजती हूँ , आशीष और तेरे ससुर के सामने ही चोदेंगे तुझे , अब तेरा उँगली करना बंद होगा ।
प्राची शीला के गंदी बातों से तेज़ी से चीखते हुए झड़ जाती है और उसकी चूत से मूत की मोटी धार निकल पड़ती है । खेमू के मुंह प्राची के मूत की धार से भीग जाता है , खेमू अपनी छमता के अनुसार जितना मूत पी सकता था पी लेता है, प्राची के मूत और चूत के पानी का रस मिलकर इतना तीक्ष्ण गंध और स्वाद देते है कि बिना अपना लंड छुये ही खेमू वीर्य त्याग कर देता है । हाफते हुए वही निढाल हो जाता है ।
प्राची उठकर अपना साड़ी नीचे करती है ड्रेसिंग के आमने अपना हुलिया सुधारती है और खेमू को आदेश देती है कि बिस्तर का चादर चेंज करके मूत वाला चादर धोने में डाल दो ।
खेमू ख़ुशी ख़ुशी अपनी नई मालकिन का बात मान लेता है ।
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