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Fantasy तांत्रिक बहू
#30
Heart 
अध्याय ९ प्राची के ससुर खेमू 
आशीष प्राची को घर आने के लिए माना लेता है । लेकिन मंजू देवी प्राची को देख कर खुश नहीं होती और बाकी घरवाले भी अचंभित होते है कि अचानक ऐसा क्या हुआ की एक दिन के अंदर ही आशीष का मन बदल गया । प्राची काले  रंग की चमकीली साड़ी और स्लीवलेस ब्लाउज पहन के वापस घर आई, बाल लंबे खुले हुए, स्तन पहले से बड़े और उभरे हुए , कूल्हे भी भरे हुए और दरार भी अब साफ़ नज़र आ रहा था , ना ब्रा और ना ही पैंटी  , ब्रा और पैंटी के बिना प्राची अपने को आज़ाद और ज़्यादा विश्वास से भरी हुई महसूस करती है। गोसाईं जी ने अपनी सारी ताक़त से प्राची में इतने बदलाओ लाए थे जो कि हर किसी को साफ़ नज़र आ रहा था ।
प्राची घर में घुसते ही मंजू देवी के पास गई , पॉव ना छूकर सीधे गले मिली ,
 “माँ जी अब सब ठीक होगा , मैं आप लोगो को शिकायत का मौक़ा नहीं दूँगी ।”
प्राची ने मंजू के गले मिलते हुए कहा , मंजू थोड़े सदमे में थी , एक तो प्राची की सुंदरता में चार चाँद लग गया था ऊपर से उसकी बातें भी नरम और मीठी हो गई , मंजू समझ नहीं पायी की क्या बोले वो बस एक बनावटी मुस्कान बना के वहाँ से पूजा के लिए मंदिर चली गई । प्राची हाल में आके खेमू (अपने ससुर ) से मिली । खेमू प्राची के बदन में आए बदलाओ को नज़रअंदाज़ नहीं कर सका , प्राची ने झुक कर खेमू के पांव छुए , प्राची जानती थी वो क्या कर रही है , खेमू ने सरसरी नज़र प्राची के सुडौल और बढ़े हुए उरोजों पर मारी , उसने कभी प्राची को ग़लत नज़रों से नहीं देखा था लेकिन आज ना चाहते हुए भी उसके मन में प्राची का बदन आकर्षण पैदा कर रहा था । प्राची खेमू के आँखो में देखते हुए बोली : “आशीर्वाद दो ससुर जी अब सब अच्छा रहे “
“हाँ , ख़ुश रहो”खेमू बोला । प्राची मुस्कुराते हुए अपने कमरे में गई सब सामान ठीक ठाक करके आराम करने गई । आशीष भी आज अपने काम से फुर्सत ले कर प्राची की मदद कर रह था । कल की रात आशीष को असीम आनंद प्राप्त हुआ वो आज भी वही लालसा में था , किसी भी कीमत पर प्राची को दिन भर खुश रखो और रात में प्राची तुमको खुश रखेगी ।
हुआ भी कुछ वैसे ही । कुछ दिन तक सब सामान्य तौर पर। चलते गया । प्राची के व्यवहार से आशीष,खेमू और उसका देवर सत्यम बहुत ख़ुश थे बस मंजू को प्राची से तक़लीफ़ था , मंजू को ये बात नहीं पच रही थी की प्राची में इतना बदलाव कैसे आ गया और घर के सारे मर्द उसका कहा मान रहे थे ये बात भी मंजू को चुभ रही थी । मंजू की तकलीफ़ प्राची को समझ आ रही थी लेकिन प्राची मंजू पे ध्यान नहीं दे रही थी , वो चाहती थी की मंजू थोड़ा और परेशान हो , अपने पति और बेटो को प्राची के पीछे देखे उसके बाद मंजू देवी पे कुछ जादू किया जाएगा । आशीष को रोज़ रात में गुप्त सम्भोग के कुछ झटके दे कर प्राची खुश  कर देती , कुछ ही दिनों में आशीष इतना प्राची के वश में हो गया कि उसे प्राची की हर बात सही लगती और बाकी सबकी बातों को वो नज़र अंदाज़ कर देता ख़ास कर मंजू देवी की उन बातों को जो वो प्राची के ख़िलाफ़ बोलती।प्राची ने खुल के खेमू के सामने अंग प्रदर्शन चालू किया । अपने उरोजों और गांड को मटका मटका कर वो खेमू को ललचाती , शुरू में खेमू बहू के लिहाज़ के कारण अपने मन पे काबू करने की कोसिस की लेकिन आख़िर में उसका मन एक मर्द का था जो एक जवान औरत के जाल में फ़स ही गया । खेमू भी प्राची के सामने अब जाने के बहाने खोजता ताकि थोड़ा बहुत झाँक ताँक कर सके । मंजू देवी खेमू और प्राची के बीच चल रहे इस अंतर्द्वंद से अनजान थी , इसीलिए महीने भर के अंदर ही खेमू के मन में प्राची ने अपने लिए कामुकता को पैदा कर ही दिया। प्राची जानती थी कि मंजू देवी को वश में करने की चाबी खेमू ही है ।
प्राची ने खेमू के लिए एक योजना तैयार की , वो अपनी एक पुरानी पेंटी बाहर निकाल कर रखी और आशीष के साथ संभोग के बाद आशीष को उसी पेंटी से अपनी चूत पोछने को कहती । आशीष ने लगातार एक हफ़्ते तक उस पेंटी से प्राची की चुदी हुई गीली चूत को साफ़ किया , प्राची को मादकता की महक से वो पैंटी पूरी तरह भर गई , महक ऐसी तीव्र की कोई भी मर्द के नथुनों मे लगे तो उसका लैंड खड़े हो जाए । आशीष में एक रात सेक्स के बाद प्राची से पूछा की रोज़ इस पेंटी से चूत साफ़ करती हो , इसको साफ़ कर दी क्या ?
प्राची : पानी में साफ़ करने से कपड़ा ख़राब हो जाएगा । एक काम करना सुबह उसको छत में सुखाना ।
आशीष : हाँ मेरी जान । इसको छत में सूखा दूँगा दिनभर की धूप में ये साफ़ हो जाएगी ।
प्राची : भूलना मत जानू। अब मेरा ये सब काम तुम ही किया करो मैं थक जाती हूँ ।
आशीष : हाँ जानू । जो भी काम हो आप मेरे से बोला करो मैं कर के दे दूँगा ।
प्राची : लेकिन जब तुम घर में नहीं रहते तो समझ में नहीं से की किससे अपना काम कराऊ? मम्मी जी तो अभी तक मुझे ज़्यादा पसंद नहीं करती ।
आशीष: मम्मी को मैं मना लूँगा , चिंता मत करो । और पापा भी तो घर में ही रहते है उनको बोला करो वो कर देंगे ।
प्राची : हाँ , अब से उनको ही बोल दूँगी । आख़िर इस घर के जिम्मेदार मर्द तो वो ही है ना ।
आशीष: हाँ ।
अगली सुबह ऑफिस जाने से पहले आशीष प्राची की पेंटी लेके छत में जाता है और बाकी कपड़ों के साथ पेंटी को तार में सूखो कर नीचे आ जाता है । पैंटी वाली चाल को खेमू आसानी से चुगेगा ये प्राची जानती थी आखिर कर महीने भर से प्राची में खेमू को अपना जवान बदन दिखा दिखा के तैयार जो किया था ।
खेमू खाने के बाद दोपहर में टहलने के लिए छत जाता है वहाँ उसकी नज़र प्राची के पैंटी पर पड़ती है ,” मेहरून रंग की चड्डी ज़रूर प्राची की है।” मन में खेमू सोचता है । वो अपना ध्यान उसके पेंटी से हटाकर टहलने में लगाने की कोसिस करता है लेकिन बार बार महरून पेंटी उसका ध्यान खींचता है । खेमू आख़िरकार पेंटी के पास जाके खड़े होके उसे ध्यान से देखने लगता है , चूत के पानी के निशान साफ़ दिखाई दे रहे थे , खेमू को लगा के ये चड्डी तो धो के सुखाने रखी है फिर इसमें निसान कैसे ?
खेमू धब्बो को हाथ से मलता है , सफेद धब्बे खेमू के हाथ लगने से चड्डी से निकलने लगता है, खेमू समझ जाता है की ये बिना धुली हुई चड्डी है , सोचने भर से उसके लंड में सिहरन जाती है । वो तुरंत चड्डी को हाथ में लेके अपने नाक से लगाता है , साँस अंदर जाने के साथ साथ ही प्राची की जवानी की महक उसके फेफड़ों तक पहुँचती है , खेमू का लण्ड तक के उसके पेंट में तंबू। बना देता है । वो एक हाथ से पेंटी सूंघता है और दूसरे हाथ से अपना लंड हिलाने लगता है, प्राची की जवानी अपना जलवा दिखाती है , बूढ़ा खेमू किसी सत्रह साल के लौंडे की तरह छत में मूठ मारता है वो भी अपनी ही बहू की पैंटी सूंघते हुए । खेमू का महीने भर से प्राची के लिए भरा हुआ हवस उसे ज़्यादा देर टिकने नहीं देता और उसका लंड शहद की तहर गाढ़ा माल निकलता है , खेमू अपने माल को प्राची के चड्डी में ही पोछ कर उसे वापस सूखा जाता है ।  खेमू को आज अपने जवानी के दिन याद आ गए । जब आपके पास करने को कुछ ना हो और कुछ नया उद्देश्य मिल जाए तो जो ख़ुशी होती है वही ख़ुशी आज खेमू को हो रही थी , वो भूल गया की प्राची उसकी बहू है जिसके पेंटी में आज उसने अपना माल छोड़ के आया है , वो बस आज एक मर्द है जो अपने से तीस साल छोटी मादा के मादकता को सूंघा है ।
प्राची शाम में अपने पैंटी का अवलोकन करने के लिए छत में जाती है , अपनी पैंटी को चिपचिपा पाकर प्राची समझ गई कि ससुर जी ने दाना चुग लिया है , एक कुटिल मुस्कान प्राची के चेहरे पे आती है, अब आशीष के बाद खेमू उसके तलवे चाटने के लिए तैयार होता  हुआ प्राची को दिखाई देता है । प्राची पेंटी वही छोड़ जाती है ।
रात में सेक्स के लिए उछलता हुआ आशीष प्राची पर टूट पड़ता है , प्राची थोड़े सख्त रवैया अपनाते हुए उसे रोकती है और समझाती है कि रोज़ रोज़ के सेक्स से वो ऊबने लगी है इसीलिए कुछ दिनों का गैप लेकर ही दोनों सेक्स किया करेंगे ।
आशीष का दिल टूट जाता है , लेकिन उसकी हिम्मत नहीं होती की प्राची के बात को काटे , वो जानता है की प्राची जान तक खुस है तबतक सेक्स मिलेगा भले हर दिन ना सही लेकिन अगर गुस्सा होके वापस मायके गई तो उसके नसीब में कुछ नहीं बचेगा ।
प्राची अपना पूरा ध्यान खेमू के ऊपर लगाना चाहती है , वो अपने ससुर को बोतल में उतार कर घर का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में रखना चाहती है । आशीष को भी सेक्स के लिए थोड़ा तरसा कर उसपर अपना पकड़ मजबूत बनाने का प्राची का मन है, इतना मजबूत पकड़ की कल के दिन में किसी दूसरे मर्द से प्राची संभोग को भी आशीष अपनी किस्मत समझ के स्वीकार कर ले ।
आशीष सेक्स नहीं मिलने के कारण मुंह उतार कर के बैठा होता है , प्राची उसे देख के कहती है: आशीष तुम जाकर मेरी पेंटी ले आओ ।
आशीष : अभी ? रात में ? जाने दो ना सुबह लाऊँगा ।
प्राची : क्या जानू , तुम्हारे फायदे के लिए बोल रही . जाकर ले आओ ।
आशीष चुप चाप पेंटी लेने ऊपर जाता है और वापस रूम में घुसते ही प्राची से कहता है : दिन भर में भी ये पेंटी सूखी नहीं । अभी भी थोड़ा गीला पन बाक़ी है ।
प्राची मन ही मन हस्ती है , बुद्धू कहीं का ।
प्राची: सेक्स का रस ऐसे ही नहीं सूकता जानू । कल भी सुखना उसको , तब सूखेगा । अच्छा तुम उसकी महक लेके देखो मेरी चूत की ख़ुशबू आ रही या नहीं ?
आशीष पेंटी के गीले भाग को नाक से सटा कर सूंघता है , एक मिला जुला सा महक उसकी नाक में जाता है , लेकिन आशीष वीर्य के महक को नहीं पहचान पाता , और वैसे भी प्राची की चूत की तीक्ष्ण गंध कई लोगो के वीर्य के महक को अपने में दबाने की क्षमता रखती है ।
आशीष: हाँ जान , मस्त महक रहा, आपके चूत की खुश्बू आ रही है ।
आशीष के पैंट में तंबू बन जाता है , प्राची उसे देख के बोलती है: हाँ वो तो तुम्हारे पैंट में दिख ही रहा है । मैं चाहती हूँ कि तुम इसे सूंघते हुए अपना लंड हिलाओ ।
आशीष: जैसी आपकी आज्ञा ।
आशीष अपना पेंट उतार के पैंटी को हाथ में लेके अपना लिंग आगे पीछे करता है । प्राची  अपने एक हाथ से उसके अंडे से खेलती है , आशीष आनंद लेते हुए पेंटी को नाक से लगाये रहता है , प्राची का हाथ आशीष के शरीर पर घूमते हुए उसके निप्पल पर जाता है , निपल को प्राची पूरे ज़ोर से उँगलियों से निचोड़ देती है , दर्द के मारे आशीष की चीख निकल गई और साथ में उसके लंड से वीर्य भी, प्राची आशीष के हाथ से पेंटी लेके आशीष का वीर्य उससे पोंछ देती है ।
निढाल होके आशीष बिस्तर पर सोता है, प्राची को कहता है कि जान आज तो अलग ही मज़ा आया ।
प्राची: हाँ सेक्स के अलावा भी बहुत से काम के सकते है, केवल लंड चूत में जाना ही मजा नहीं होता ।
आशीष: हाँ जान । सही कहा
प्राची : ये पेंटी फिर से गीली है , कल सुबह उठते ही इसको सूखा देना छत में ।
आशीष: जैसी आपकी आज्ञा ।
आशीष थक कर सो जाता है , प्राची मन ही मन सोचती है कि इस बुद्धू को ये नहीं पता कि इसमें इसके बाप का भी वीर्य  मिला है ।
अगले दिन आशीष उठते ही प्राची की पेंटी ऊपर छत में रख के आ जाता है , प्राची भी सुबह सुबह छत के एक कोने में अपने पुराने मोबाइल के कैमरा को रिकॉर्डिंग में रख कर  चालू कर देती है ।
शाम में प्राची ने एक्साइटमेंट के साथ छत से मोबाइल लाके अपना रूम लॉक करके उसे फॉरवर्ड करके देखने लगती है , हुआ वही जिसका प्राची को अंदाज़ा था , खेमू प्राची की पेंटी सूंघते हुए मूठ मार रहा था और अपना माल उसके पेंटी में पोंछ कर वापस उसी जगह पेंटी को सूखा कर चल देता है ।
प्राची की चूत ये देख कर गीली हो जाती है , प्राची को अपने हुस्न पे घमंड भी होता है , साथ ही वो सोचती है की मर्दों को फ़साना सच में कितना आसान है । प्राची समझ गई की खेमू अब उसके जाल में गैस चुकी है और अब चूत की लालच में वो प्राची की हर बात मानेगा ।
मंजू देवी भी प्राची की बुराई अब कम करती क्योंकि आशीष तो सुनता ही नहीं और अब खेमू भी मंजू देवी के बातों पर ध्यान नहीं देता था । प्राची ने गोसाईं जी के बताए गए मंत्रों का प्रयोग आशीष और खेमू पर किया , प्राची का यौवन और गोसाईं जी के मंत्रा दोनों को काबू करने के लिए पर्याप्त थे । प्राची जानबूझ कर मंजू देवी पर इन मंत्रों का प्रयोग नहीं कर रही थी क्योंकि वो मंजु देवी को उसकी ताक़त दिखा के सबक सिखाना चाहती थी । प्राची अब सारे समय घर में आराम ही करती थी , आशीष प्राची का सब काम करता यहाँ तक की कपड़े धोने से रूम जमाने तक , मंजू देवी को ये बातें बिल्कुल पसंद नहीं आती और अब तो खेमू भी प्राची की हाँ में हाँ मिलाता , प्राची जो बोलती वो मार्केट से लाकर देता , यहाँ तक की सीधे प्राची के रूम में घुस के उसके पसंद के खाने और पहनने का सामान लेक खेमू देने लगा ।
एक दिन प्राची बिना टॉवल लिए नहाने चले गई और  अंदर से टॉवल के लिए आशीष को आवाज़ लगाया । आशीष नहीं था तो खेमू दौड़ते हुए टॉवल लेके बाहर पहुँच गया । मंजू देवी ये सब देख रही थी , प्राची ने खेमू को बाथरूम के बाहर अपने नहाते तक वेट करवाया , खेमू चुपचाप टॉवल लेके बाहर खड़ा रहा लेकिन मंजू देवी का खून ये देख के खौल उठा , प्राची के बाहर आते ही मंजू देवी ने खूब खरी खोटी सुनाना चालू कर दिया , प्राची एक सफेद रंग के टॉवल लपेट कर ही मंजू से लड़ाई करने लग गई , प्राची को गुस्सा होते देख खेमू ने मंजू को जमकर लताड़ लगाई , खेमू का प्राची के पक्ष में बोलने से मंजू देवी थोड़ी ठंडी पड गई । प्राची भी गुस्से में बोलते बोलते अपने कमरे की ओर गई , कमरे के अंदर जाते ही उसने बिना दरवाजा बंद किए अपना टॉवल बाहर फेंका , खेमू हाल से ही प्राची को साफ़ साफ़ देख पा रहा था,हालाकि मंजू देवी जहाँ पर थी वहाँ से प्राची का रूम नहीं देख रहा था  , पहली बार उसने प्राची को पूर्ण रूप से नग्न देखा था , उसका साँवला कसा और भरा हुआ बदन देख खेमू का लंड फुंकार मारने लगा । मंजू देवी किचन में काम करने चली हुई , खेमू एक टक प्राची को देखे जा रहा था । प्राची ने अपने ससुर जी को आवाज़ लगाई , खेमू तुरंत प्राची के कमरे के दरवाजे पे पहुँचा , प्राची आईने के तरफ़ मुँह करके नग्न खड़ी थी , खेमू प्राची की नंगी गाँड़ पे नज़र गड़ाए था ।
“टॉवल को छत पे सूखा दो , ससुर जी ।” प्राची में बेबाक होते हुए आदेश दिया । इसमें ना की गुंजाइश नहीं थी ।
“और हाँ , मेरी पैंटी सूख रही होगी तो लेते आना ।”
खेमू ने आदेश का पालन किया । वो नंगी प्राची के कमरे में घुस के उसको पैंटी दे दिया ।
प्राची बेशर्म होकर अपने ससुर के सामने पूरी नंगी घूम रही थी, कमरे का दरवाजा भी खुला था , प्राची को ना तो मंजू देवी का डर था और ना ही आशीष के आने का , उसको अपने तंत्र क्रिया पर पूरा यकीन था की सब कुछ उसके कंट्रोल में है । खेमू से पंथ हाथ में लेते ही प्राची ने उसपे लगे दाग को देखा , वो जानती थी की दाग किसका है फिर भी उसने गुस्सा करते हुए खेमू को देखा और पूछा : ये दाग कैसे लग गया ?
खेमू की आवाज़ अटक गई वो हकलाते हुए बोला : मुझे कैसे पता होगा बहू ?
प्राची : क्यों ? दिन भर छत में आप हीर रहते हो ना ?
खेमू को प्राची के उल्टे जवाब की उम्मीद नहीं थी । वो डरते हुए बोला : लेकिन मुझे नहीं पता ।
प्राची ने अपना मोबाइल निकाला और रिकॉर्डिंग चलाते हुए खेमू को दिखाया: जो करते हो उसको बोलो तो सही ससुर जी ।
खेमू का लंड जो प्राची की नंगी बदन देख के तंबू बनाये था वो वीडियो देख के ढीला पड़ने लगा । प्राची उसके सामने नहीं खड़ी बहस कर रही थी फिर भी खेमू को अपने हरकत पे खेद हो रहा था ।
प्राची खेमू को ज़्यादा सदमे में नहीं डालना चाहती थी , उसने पजामे के ऊपर से ही खेमू का लंड पकड़ लिया ,
प्राची: बड़ा बेशर्म है ये तो अभी भी खड़ा है ।
प्राची का हाथ पड़ते ही खेमू का लंड वापस तन के खड़ा हुआ , पलक झपकते ही प्राची ने पजामे का बड़ा खोल कर , खेमू का हथियार अपने हाथ में लिया ,
“आपने आज की लड़ाई में मेरा साथ दिया , उसका तोहफ़ा तो आपको मिलना चाहिए ना ?” प्राची ने कहा
खेमू : “ मैं हमेशा आपका साथ दूँगा बहू । चिंता मत करना ।
प्राची ने तेज़ी से हाथ आगे पीछे करके खेमू को झड़ा दिया , उसका वीर्य अपनी ही पेंटी में पोछ कर उसे दे दिया और छत में सुखाने बोला । खेमू किसी आज्ञाकारी नौकर की तरह अपनी बहू का चड्डी हाथ में लिए छत की आओर चला गया ।
मंजू देवी से लड़ाई में जीत कर प्राची को आज थोड़ी सुकून मिली । लेकिन वो आशीष और खेमू से अपनी और सेवा करवा कर मंजू देवी को नीचा दिखाना चाहती है ।
 
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तांत्रिक बहू - by Gomzey - 23-11-2025, 03:30 PM
RE: तांत्रिक बहू - by Pvzro - 24-11-2025, 07:29 PM
RE: तांत्रिक बहू - by Gomzey - 12-01-2026, 07:44 AM
RE: तांत्रिक बहू - by Davit - 03-02-2026, 05:57 PM



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