14-12-2025, 10:13 PM
अध्याय ८ आशीष की वापसी
प्राची घर वापस आकर दो तीन दिन आराम करती है , अपने बच्चे को समय देती है । गोसाईं जी के गुफा की एक एक बात प्राची को रह रह कर याद आती है । कभी कभी उसे ये एक सपने जैसे लगता , उसे अब तक अपनी शक्तियों का एहसास भी नहीं था कि वो कुछ कर भी सकती है या नहीं ।
शीला प्राची को कुछ दिनों तक किसी भी बात में नहीं टोकती उसे पता था कि प्राची क्या सह कर आई है , शीला को एहसास था कि प्राची के शरीर को अभी आराम की जरूरत है , आखिर शीला भी कभी इस दौर से गुज़री थी , शीला को अच्छी बात ये लगती है कि प्राची ने भी दीक्षा गोसाईं जी से ही लिया है जिनसे कभी शीला की माँ और शीला ने दीक्षा लिया था । शीला किचन में काम करते हुए गोसाईं जी को याद करती है “गोसाईं जी का उम्र लगभग अब अस्सी पार हो ही गया होगा फिर भी हम तीन औरतों का उन्होंने पानी निकाल दिया था , लगभग बीस साल पहले प्राची के जन्म के थोड़े समय पहले ही शीला की दीक्षा पूरी हुई थी और उसी जगह पे प्राची की नानी , शीला एयर दो और औरतों ने गोसाईं जी के साथ संभोग किया था । उस समय तो गोसाईं जी के शरीर का बल अपने चरम में रहा होगा । शीला अपनी दीक्षा के बाद समय और आवश्यकता के हिसाब से बहुत मर्दों से संभोग किया लेकिन किसी के साथ उसको वो सुख नहीं मिलता था जो गोसाईं जी के साथ आता है । “ शीला ये सब सोचते हुए खाना बना रही होती है तभी प्राची किचन में आती है ।
प्राची : क्या बना रही हो माँ ?
शीला : आज तेरे पापा को बैगन खाने का मन है , सबके लिए आज वही बना है ।
प्राची: हम्म .. मैं सोच रही थी की अब आगे क्या करूँ ? क्या आशीष को मुझे बुलाना चाहिए ?
शीला थोड़ी ख़ुश होती है कि आख़िर कर प्राची अपने आराम से निकल कर अपने परिवार के लिए सोच रही है ।
शीला : हाँ तुम अब बुला सकती हो , लेकिन तुमको पता है ना कैसे बुलाना है ?
प्राची जानती है की गोसाईं जी के सिखाए मंत्रों से आशीष को बुलाना है , लेकिन वो अकेले इनके प्रयोग को लेके थोड़ी डरी हुई है । इसीलिए वो शीला के पास आई है ।
प्राची : हाँ । लेकिन मैं चाह रही कि आप साथ में रहो , मुझे अकेले में आदत नहीं , गोसाईं जी के साथ अभी तक जी भी अभ्यास था वो मैंने किया है लेकिन ऐसे अकेले कभी नहीं ।
शीला थोड़ी मुस्कुराती हुई प्राची के कंधे में हाथ रख के कहती है “ मैं कहाँ जा रही ? मैं हूँ ना हमेशा तेरे साथ !”
माँ का आश्वासन पाकर प्राची की चिंता थोड़ी कम होती है । उसे पता तो है आशीष को बुलाना है लेकिन बोलना क्या है और आगे उसके घर जाकर क्या करना है उसे मालूम नहीं , उसे इन सब कामो के लिए शीला की मदद चाहिए । लेकिन प्राची समय आने पर ही अपने सवालों को शीला से पूछना चाहती है वो नहीं चाहती कि शीला भी उसे बेवक़ूफ़ समझे ।
रात को खाना खा के शीला एक खाली रूम में तांत्रिक पूजा की तैयारी कर लेती है प्राची भी अपनी माँ के साथ उसी रूम में जाती है ,दोनों अपने कपड़े उतारते है । अब प्राची या शीला दोनों एक दूसरे के नग्नता के आदि हो चुके है जैसे कोई पति पत्नी । इसीलिए प्राची या शीला को अब इसमें शर्म या नयापन जैसा कुछ भी नहीं लगता । दोनों ने गोसाईं जी को नमन करके अपना कार्यक्रम चालू किया , मंत्रों के जाप और मोमबत्ती की रोशनी से
रूम में गोसाईं जी के गुफा जैसा ही माहौल बन गया । ये पूजा लगभग एक घंटे चला और दोनों ने मंत्र जाप ख़त्म करके अपने कपड़े पहले और सोने चले गए । प्राची को आशीष को देखने की उत्सुकता थी वो सब कुछ पहले जैसा सामान्य करना चाहती थी इसी उम्मीद में की कल आशीष जल्दी आ जाए प्राची सो गई ।
इधर इस समय आशीष अपने दोस्तों के साथ घूम कर वापस घर आया था, बिस्तर में गिरते ही उसका नींद पड़ गया । मंत्र ने अपना असर दिखाना चालू किया , आशीष को एक सपना आया जिसने प्राची और आशीष सुहाग रात वाला संभोग कर रहे है , प्राची सपने में हक़ीक़त से ज़्यादा खूबसूरत और मादक लग रही थी , आशीष उसके कसे बदन को निचोड़ रहा था जैसे कोई चूसने से पहले कड़े आम को निचोड़ करके नरम करता है । उसके चूत की महक पहले से तीक्ष्ण और जायदा कामुक लग रही थी ।प्राची अपने मुंह में आशीष का लंड भर के उसको चूस रही है आशीष उत्तेजना और दर्द के कारण आहें भर रहा है । आशीष आज अपनी पत्नी का रस पान करना चाहता है वो प्राची की चूत को अपने मुंह में भरता है और ताक़त से खाता है , प्राची अपना सारा पानी आशीष को पीला रही होती है , आशीष मदहोशी में आके प्राची के ऊपर चढ़ता है और अपना लंड उसके चूत में डालने ही वाला होता है कि उसकी आँख खुल जाती है ।
आशीष उठ के बिस्तर में बैठ जाता है , पसीने से भीगा हुआ जैसे उसने सच में मेहनत की हो , लंड एकदम सख्त और चूत में घुसने को आतुर । आशीष अपना होश संभालते हुए वापस लेटता है आजतक उसको प्राची में लिए ऐसे तड़प नहीं उठा जैसे आज उसको लग रहा था । खड़े लंड को शांत करने के लिए वो मूठ मारता है , प्राची को याद करके तुरंत उसका लंड पानी छोड़ देता है। आशीष का लंड तो शांत हुआ लेकिन उसके अंदर प्राची से संभोग के लिए एक अजीब से तड़पन चालू हो जाती है । आज तक जिस पत्नी को वो बिना तवज्जो दिए चोदता था आज उसके लिए ही अचानक इतनी बेचैनी आशीष को समझ नहीं आता । वो पूरे रात में प्राची को याद करके तीन बार मूठ मारता है और आख़िरकार तीन बजे रात में जाके उसकी नींद लगती है ।
सुबह आशीष की नींद खुली और उसके दिमाग में अभी भी एक ही शख़्स थी प्राची ।
आशीष हाथ में चाय लिए बैठा और सोचते रहा कि “आख़िर ऐसा क्या हुआ , अचानक से प्राची की इतनी याद मुझे क्यों आ रही है ? क्या मुझे उससे मिलना चाहिए ? लेकिन मिलना भी तो ठीक नहीं है , आख़िर इतनी लड़ाइयों के बाद किस मुंह से उससे मिलने जाऊ और मिलने से मेरे माँ बाप भी कौनसा खुस रहेंगे ।”
आशीष यही सब सोचते हुए प्राची के बदन के बारे में सोचने लगा कसी हुई और एकदम फिट, आज से पहले ऐसा नहीं हुआ था की प्राची को सोच के आशीष तीन तीन बार मूठ मारले लेकिन कल रात से प्राची आशीष के दिमाग में घर कर गई थी ।
इधर प्राची सुबह होते ही अपने आप को संवारने में लग गई ।
गोसाईं जी के साथ इक्कीस दिन बिताने के बाद प्राची अब अपने बदन में भौ और सर में छोड़ के कहीं बाल नहीं रखती थी इसीलिए उसने सुबह उठके पहले अपने शरीर को साफ़ किया , एक काले रंग के साड़ी नाभि के नीचे से , बैकलेस ब्लाउज के साथ प्राची ने पहना , गहरे रंग का लिपस्टिक और उससे ही मैच होता गहरा मेकअप । प्राची अब पेंटी और ब्रा नहीं पहनती थी शौच के बाद सफाई के लिए भी प्राची ने एक चमकीला बालू का पथ्थर रखा था बिल्कुल वैसे ही जैसे गोसाईं जी ने सिखाया था ।
ये प्राची का नया रूप था , आत्मविश्वास से भरी हुई प्राची आशीष के इंतज़ार में थी । शीला भी जान रही थी कि एक दो दिन के भीतर ही आशीष का आना होगा अब बस देखना ये था कि प्राची के मंत्रों में ताक़त कितना था ।
शाम होते होते आशीष का हालत ख़राब होने लगा वो अब अपने आपको रोक नहीं पा रहा था ,आख़िरकार हार मानते हुए उसने प्राची से मिलने का सोचा । आशीष ने प्राची को फ़ोन लगाया लेकिन कोई उत्तर नहीं । आशीष की बेचैनी बढ़ गई उसने मंजू देवी को फ़ोन लगा के कहा दोस्तों के साथ बाहर जा रहा रात में देर होगी । आशीष अक्सर दोस्तों के साथ बाहर जाता तो मंजू देवी को इसमें कोई अजीब बात नहीं लगी । आशीष अपनी गाड़ी उठा के प्राची के घर को चला , तेज जितना तेज वो जा सकता था ।
प्राची के फ़ोन में जैसे आशीष का काल आया प्राची ने दौड़ के शीला के पास पहुँची , शीला ने मुस्कुराते हुए प्राची को गले लगाया और बोली “ जादू का असर हो रहा है,तेरी मेहनत अब रंग लाने वाली है, करने दे उसको फ़ोन , तू मत उठाना , देखना कैसे कुत्ते की तरह दम हिलाते वो घर आयेगा । “ शीला और प्राची दोनों हसते है , हालाकि प्राची को “कुत्ते” वाली बात थोड़ी चुभी पर उसने अपनी माँ को नहीं टोका ।
शाम को प्राची के घर की घंटी बजती है । घर में शीला और प्राची ही थे । दोनों समझ गए की आशीष आ चुका है । शीला जाती है दरवाजा खोलने , आशीष सामने खड़ा प्राची को खोज रहा था , शीला के पैर छूते हुए “ मुझे प्राची से कुछ बात करना है, क्या अभी कर सकता हूँ ।”
शीला : अब बात क्यों करनी है ? तुमनेतलाक़ के पेपर भी भेज दिए है । अब मेरी बेटी को छोड़ दो वो और दर्द नहीं सह सकती ।”
आशीष : मुझे उसी बारे में बात करनी है । मैं सब ठीक कर दूँगा एक बार बस आप मुझे प्राची से मिला दो ।
शीला : बेटा तुम्हारे ठीक करने से अब बात कहाँ बनने वाली है ? तुम्हारे माँ बाप नहीं मानेंगे । कितना कुछ बोलके गई है तुम्हारी माँ उस दिन ।
आशीष : अपनी माँ की तरफ़ से मैं माफ़ी माँगता हूँ । आप प्लीज़ उनकी बातों को दिल से मत लीजिए ।
शीला अपना मुज सिकोड़ती है जैसे उसे आशीष के बैटन पर भरोसा ना हो और कहती है : हम भी चाहते है सब ठीक हो जाए बेटा , तुम अपने घर वालो को मना लेना ,ठीक है तुम अंदर आ जाओ , मैं बुलाती हूँ प्राची को।
आशीष शीला के पीछे पीछे घर में घुसता है इस बात से अनजान की जिस प्राची से वो मिलने जा रहा है वो पहली वाली प्राची नहीं एक नई औरत है । आशीष हाल में जाके सोफा में बैठता है , प्राची जान बूझकर थोड़ा देर बाद हाल में जाती है ।
प्राची को देख के आशीष को ऐसा लगा की वो पहली बार उसे देख रहा है । इतना मेक अप केल रंग की साड़ी वो भी नाभि के नीचे तक , आज प्राची के उरोज़ भी उठे और भरे हुए नज़र आ रहे थे । आशीष अपने जगह में उठ के खड़ा हो गया , आशीष चाहता था कि वो प्राची को पकड़ कर गले से लगा ले । प्राची चुप चाप आशीष को देख रही थी उसकी नज़रों से पता नहीं चल पा रहा था कि वो आशीष से प्यार करती है या नफ़रत । आशीष ने बात लेने की पहल कि
आशीष: मुझे पता है मैंने बहुत परेशान किया है तुमको । लेकिन मैं सब ठीक करने आया हूँ ।
प्राची का मन थोड़ा हल्का हुआ , आख़िरकर इतने दिनों तक जिसके लिए उसने इतना मेहनत किया था वो सफल हो रहा था, आशीष उसके सामने अपनी गलती मानते हुए खड़ा था । लेकिन प्राची अब सब अपने हिसाब से चलाना चाहती थी इसीलिए उसने सब बातें क्लियर करके ही वापस जाने का सोचा ।
प्राची: आपकी मम्मी का क्या ? वो मानेगी और बाकी घर वाले ?
आशीष : मैं सबको मना लूँगा । तुम बस अब हाँ करो । मैं तलाक़ की अर्जी भी वापस लूँगा ।
प्राची: आप घर में सबको बता के यहाँ आए हो?
आशीष : नहीं । लेकिन मैं संभाल लूंगा ।
प्राची जानती थी की आशीष ने घर वालो को नहीं बताया होगा लेकिन वो अपनी ताक़त को परखना चाहती थी ।
प्राची : तो बताओ उनको , अभी फ़ोन करके ।
आशीष : पहले तुम हाँ या ना बोलू तभी बताऊँगा ।
प्राची : आपको बताना होगा , उसके बाद ही बात होगा नहीं तो वापस चले जाओ । मेरी ज़िंदगी आपके बिना भी ठीक चल रही है ।
आशीष को जाने के बाद से एक सिहरन सी हुई , उसने तुरंत फ़ोन लगा के मंजू देवी को सब बात बता दिया । मंजू देवी को भी समझ नहीं आ रहा था कि जो लड़का कल तक प्राची की बात भी नहीं कर रहा था आज अचानक उसके घर में कैसे .. लेकिन आशीष को अभी केवल प्राची चाहिए थी वो मंत्रों के इतने वश में था की प्राची जो कुछ भी बोलती वो करता ।
प्राची: बहुत अच्छे । अब बोलो ।
आशीष : मुझे माफ कर दो अब तुम जैसे बोलोगी वैसे ही होगा , तुम चाहोगी तो हम अलग घर लेके रहेंगे । लेकिन तुम साथ आ जाओ ।
प्राची अलग घर लेके नहीं रहना चाहती थी क्योंकि वो अपने बच्चे के लिए सबका प्यार चाहती थी और उसको अब अपने ताक़त पे पूरा यकीन भी हो गया था वो जान गई थी की अब इनका पूरा घर आसानी से वश में हो जाएगा ।
प्राची : ठीक है माफ़ किया लेकिन मेरे माँ बाप को भी उस दिन इतना कुछ बोल के गए थे उसके लिए माफ़ी मांगो ।
आशीष सीधे अंदर किचन में जाके शीला के पैर छू के माफ़ी माँगता है । शीला उसको उठा के बोलती ह “कोई बात नहीं बेटा! अब मैं चाहती हूँ तुम दोनों ख़ुशी से रहो”
आशीष वापस प्राची के पास आता है । प्राची अब बहुत हल्का महसूस और रही थी क्योंकि उसका काम पूरा हो गया था । प्राची के पापा भी वापस घर आके आशीष को देख के ख़ुश होते सब साथ में खाना खाते है । प्राची आशीष को रुकने कहती है ।आशीष की मन माँगी मुराद पूरी हो जाती है ।
रात में सोने के लिए जैसे ही दोनों रूम में जाते है आशीष पहली की तरह प्राची पे टूट जाता है । उसके बदन के हर कोने को चूमने लगता है , प्राची को ये सब बहुत अच्छा लगता है की उसका पति उसका मुरीद हो गया , वो साथ देने लगती है ।
आशीष जल्दी ही प्राची के तन से उसकी काली साड़ी निकालता है अंदर कुछ नहीं , चूत एकदम साफ़ , सूजी हुई किसी पाव रोटी की तरह बिल्कुल वैसे ही जैसे उसने सपने में देखा था । प्राची केवल केल बैकलेस ब्लाउज में अपने बिस्तर पर पड़ी हुई थी, आशीष जैसे ही प्राची के ऊपर चढ़ने की कोसिस किया प्राची ने अपना एक पैर उसके कंधों पर रख के उसे रोकते हुए कहा : मैं तुम्हारी रानी हूँ । बोलो
आशीष : हाँ तुम मेरी रानी हो ।
आशीष थोड़ा ताक़त लगाता है लेकिन प्राची अपना पैर नहीं हटाती ।
प्राची: अब से जैसा मैं कहूँगी तुम वैसा ही करोगे ।
आशीष : हाँ मेरी रानी वैसा ही करूँगा । तेरे हर इच्छा मेरे सर आँखो पर ।
प्राची : मुझे नंगी करने से पहले अपने कपड़े खोलो ।
आशीष जल्दबाजी में अपने सारे कपड़े उतार देता है ।उसका लंड एकदम सख्त तना हुआ ।आज वो इतना उतावला होता है जैसे कॉलेज के किसी स्टूडेंट ने अपनी मैडम को ही पा लिया हो। प्राची की नज़र जैसे ही आशीष के लंड पे पड़ती है उसे गोसाईं जी की याद आ जाती है । कैसे आज उसके पति का लंड उसको पराया लग रहा है और वो ऐसा महसूस करती है जैसे गोसाईं जी का लंड ही उसका अपना है । प्राची अपने आप को संभालते हुए आशीष को अपने ओर बुलाती है और अपना पैर ऊपर करके बोलती है : अँगूठा चूसो ।
आशीष तुरंत पैर के अंगूठे को मुंह में लेके चूसने लगता है , कुछ देर चूसने के बाद वो ऊपर की ओर आगे बढ़ता है लेकिन प्राची उसके हरकत को समझ के अपना दूसरा पैर आगे करती है । आशीष दूसरा अंगूठा भी चूसता है । प्राची की सेवा में आज आशीष को एक अलग ही आनंद की अनुभूति होती है, चूसते हुए आशीष की नज़र प्राची के साँवले और कसे बदन पर घूम रही होती है , आशीष को आज ऐसा लग रहा था मानो वो पहली बार इस बदन को भोग रहा है, इतना आकर्षण मानो आशीष चाट चाट के प्राची के बदन को साफ़ करना चाहता है। बार बार आशीष की नज़र फुले हुए चूत पर रुक जाती है वो प्राची कि नज़रो में देखता है जैसे उससे आज्ञा माँग रहा हो आगे बढ़ने के लिए । प्राची अपना पैर नीचे करके आशीष को आगे बढ़ने देती है , आशीष पूरे पैरों को चूमते हुए धीरे धीरे ऊपर की ओर आता है, आशीष अब इस बात का ध्यान रखता है की किसी भी बात से प्राची नाराज़ ना हो और उसको रोके नहीं । प्राची अपनी दोनों टांगे खोल के आशीष का स्वागत करती है । आशीष चुत के सामने रुक के उसको निहारता है जैसे मिठाई खाने से पहले उसे देख के भी स्वाद लिया जाता है । आशीष पहले भी ये चूत देखा था लेकिन इतनी मादकता उस समय इसमें नहीं थी , आज चूत पहले से बहुत ढीली और फैली हुई लग रही थी , आशीष वश में होते हुए भी गोसाईं जी के मेहनत को नज़रअंदाज़ नहीं कर पाया लेकिन वो कुछ भी ग़लत बोलके प्राची को नाराज़ नहीं इतना चाहता था । अपने पति को इतना पास पाकर प्राची की चूत ने भी पानी छोड़ दिया , आशीष ने पानी को किसी प्रसाद की तरह स्वीकारा और अपने मुंह में प्राची की चूत को भर के खाने लगा ।
आशीष के सर को अपने हाथों से प्राची अपने चूत की सॉर्ट दबाए जा रही थी , प्राची को गोसाईं जी के मुँह की आदत थी , गोसाईं जी किसी भेड़िए के ताक़त से चूत को खाते थे उसके सामने आशीष किसी पिल्ले के ताक़त से खा रहा था , प्राची चले कितना भी ताक़त से आशीष को दबा ले उसको वो सुख अब कहाँ से मिल पाता । प्राची को थोड़ी देर में ये बात समझ में आ ही गई और उसने आशीष को हल्का छोड़ कर अपना चूत चटवाती रही । आशीष से मन भर के चूत चटाने के बाद प्राची अपना ब्लाउज खोल के आशीष का मुंह अपने दूध में लगा देती है । गोसाईं जी ने इक्कीस दिन तक प्राची का स्तनपान किया था उसके बाद आज वो किसी मर्द से अपना स्तन खाली कराना चाहती है । आशीष दोनों स्तनों को पी के खाली किया । प्राची ने आशीष को बेड में लिटाया और 69 अवस्था में आके आशीष के ऊपर बैठ गई । प्राची ने अपने पति के लंड को मुंह में लिया और चूसने लग गई , प्राची अपना चूत आशीष को खाने को दे दिया । आशीष को प्राची का चूसना बहुत तेज लगा , उसको लंड में ताक़त का एहसास हो रहा था , और थोड़े देर में ही वो प्राची को जकड़ कर उसके मुंह में अपना माल छोड़ दिया। प्राची ने पूरा वीर्य पी लिया लेकिन आशीष का लंड अपने मुंह से नहीं निकाला, प्राची अपना पकड़ लंड में हल्का करके मुंह को आगे पीछे करने लगी। आशीष को झड़ने के कारण लंड में हल्का जलन लग रहा था लेकिन प्राची के पकड़ हल्का करने के कारण उसने कुछ नहीं कहा । प्राची अपना चूत चटवाते हुए बार बार अपना गांड आशीष के नाक में रगड़ रही थी , आशीष ने पहले गांड़ नहीं चाटी थी इसलिए उसको उसकी गंध तीक्ष्ण लग रही थी लेकिन प्राची एक मंझे हुए खिलाड़ी की तरह धीरे धीरे आशीष के नाक की तरफ़ अपनी गांड को लाती थोड़ा देर रखेंगे के बाद फिर दूर ले जाती । प्राची आज आशीष को अपना गांड चटवाने के मन में थी । आशीष ये समझ पाता उसे पहले ही प्राची ने उसे अपने गांड की खुशबू से परिचित करवाया । प्राची के हल्के चुसाई के बाद आशीष का लंड फिर खड़ा हो रहा था । प्राची मौका सही समझ के अपना कमर हिलाना चालू करती है , अपनी चूत को आशीष के मुंह में रगड़ती है और गांड़ को आशीष के नाक में । आशीष अब गांड के महक से नहीं बच पाता और छूत के लालच में चुप चाप प्राची की गंदी गांड के महक को सूंघते रहता है । प्राची पूरी ताक़त से अपनी चूत को आशीष के पूरे मुंह में भर देती है । आशीष अब केवल नाक से सांस ले सकता है और उसके हर सांस के साथ प्राची की नशीली महक उसके फेफड़ों तक जाती है । आशीष अपना भाग्य समझ के उसको स्वीकार करता है । आशीष के शरीर अब शांत एकाग्र हो जाता है , वो प्राची के गांड से सांस ले रहा होता है , लंड अब एल्ड रॉड की तरह सख्त । प्राची समझ जाती है कि उसका काम अब हो गया। वो कमर को ढीली करती है और अपना कूल्हा उठा के आशीष के मुंह में थोड़े दूर में रखती है , आशीष अपनी पत्नी के भरे हुए गांड की सुंदरता देख के उत्तेजित हो उठता है और अपने हाथों से प्राची के दोनों भारी कूल्हों को अलग करके अपना जीभ उसकी महकती गांड के छेद में रख के चाटने लगता है ।
प्राची को तो मानो जैसे स्वर्ग मिल गया हो एक महीने पहले तक जो आदमी तलाक़ की बात कर रहा था आज वो उसकी गांड चाट रहा है , शीला और गोसाईं जी को प्राची मन ही मन धन्यवाद देती है । मन भर के अपना गांड साफ़ कराने के बाद प्राची सीधे होके अपने पति की सवारी करती है। लंड को चूत
में डालने के बाद दो चार गुप्त संभोग के निचोड़न से आशीष तुरंत ही अपना माल छोड़ देता है । प्राची जानती है की अब उसकी प्यास आशीष नहीं बुझा सकता लेकिन वो खुस है की उसका पति अब वापस उसके पास आ गया है ।
बाकी आगे …
प्राची घर वापस आकर दो तीन दिन आराम करती है , अपने बच्चे को समय देती है । गोसाईं जी के गुफा की एक एक बात प्राची को रह रह कर याद आती है । कभी कभी उसे ये एक सपने जैसे लगता , उसे अब तक अपनी शक्तियों का एहसास भी नहीं था कि वो कुछ कर भी सकती है या नहीं ।
शीला प्राची को कुछ दिनों तक किसी भी बात में नहीं टोकती उसे पता था कि प्राची क्या सह कर आई है , शीला को एहसास था कि प्राची के शरीर को अभी आराम की जरूरत है , आखिर शीला भी कभी इस दौर से गुज़री थी , शीला को अच्छी बात ये लगती है कि प्राची ने भी दीक्षा गोसाईं जी से ही लिया है जिनसे कभी शीला की माँ और शीला ने दीक्षा लिया था । शीला किचन में काम करते हुए गोसाईं जी को याद करती है “गोसाईं जी का उम्र लगभग अब अस्सी पार हो ही गया होगा फिर भी हम तीन औरतों का उन्होंने पानी निकाल दिया था , लगभग बीस साल पहले प्राची के जन्म के थोड़े समय पहले ही शीला की दीक्षा पूरी हुई थी और उसी जगह पे प्राची की नानी , शीला एयर दो और औरतों ने गोसाईं जी के साथ संभोग किया था । उस समय तो गोसाईं जी के शरीर का बल अपने चरम में रहा होगा । शीला अपनी दीक्षा के बाद समय और आवश्यकता के हिसाब से बहुत मर्दों से संभोग किया लेकिन किसी के साथ उसको वो सुख नहीं मिलता था जो गोसाईं जी के साथ आता है । “ शीला ये सब सोचते हुए खाना बना रही होती है तभी प्राची किचन में आती है ।
प्राची : क्या बना रही हो माँ ?
शीला : आज तेरे पापा को बैगन खाने का मन है , सबके लिए आज वही बना है ।
प्राची: हम्म .. मैं सोच रही थी की अब आगे क्या करूँ ? क्या आशीष को मुझे बुलाना चाहिए ?
शीला थोड़ी ख़ुश होती है कि आख़िर कर प्राची अपने आराम से निकल कर अपने परिवार के लिए सोच रही है ।
शीला : हाँ तुम अब बुला सकती हो , लेकिन तुमको पता है ना कैसे बुलाना है ?
प्राची जानती है की गोसाईं जी के सिखाए मंत्रों से आशीष को बुलाना है , लेकिन वो अकेले इनके प्रयोग को लेके थोड़ी डरी हुई है । इसीलिए वो शीला के पास आई है ।
प्राची : हाँ । लेकिन मैं चाह रही कि आप साथ में रहो , मुझे अकेले में आदत नहीं , गोसाईं जी के साथ अभी तक जी भी अभ्यास था वो मैंने किया है लेकिन ऐसे अकेले कभी नहीं ।
शीला थोड़ी मुस्कुराती हुई प्राची के कंधे में हाथ रख के कहती है “ मैं कहाँ जा रही ? मैं हूँ ना हमेशा तेरे साथ !”
माँ का आश्वासन पाकर प्राची की चिंता थोड़ी कम होती है । उसे पता तो है आशीष को बुलाना है लेकिन बोलना क्या है और आगे उसके घर जाकर क्या करना है उसे मालूम नहीं , उसे इन सब कामो के लिए शीला की मदद चाहिए । लेकिन प्राची समय आने पर ही अपने सवालों को शीला से पूछना चाहती है वो नहीं चाहती कि शीला भी उसे बेवक़ूफ़ समझे ।
रात को खाना खा के शीला एक खाली रूम में तांत्रिक पूजा की तैयारी कर लेती है प्राची भी अपनी माँ के साथ उसी रूम में जाती है ,दोनों अपने कपड़े उतारते है । अब प्राची या शीला दोनों एक दूसरे के नग्नता के आदि हो चुके है जैसे कोई पति पत्नी । इसीलिए प्राची या शीला को अब इसमें शर्म या नयापन जैसा कुछ भी नहीं लगता । दोनों ने गोसाईं जी को नमन करके अपना कार्यक्रम चालू किया , मंत्रों के जाप और मोमबत्ती की रोशनी से
रूम में गोसाईं जी के गुफा जैसा ही माहौल बन गया । ये पूजा लगभग एक घंटे चला और दोनों ने मंत्र जाप ख़त्म करके अपने कपड़े पहले और सोने चले गए । प्राची को आशीष को देखने की उत्सुकता थी वो सब कुछ पहले जैसा सामान्य करना चाहती थी इसी उम्मीद में की कल आशीष जल्दी आ जाए प्राची सो गई ।
इधर इस समय आशीष अपने दोस्तों के साथ घूम कर वापस घर आया था, बिस्तर में गिरते ही उसका नींद पड़ गया । मंत्र ने अपना असर दिखाना चालू किया , आशीष को एक सपना आया जिसने प्राची और आशीष सुहाग रात वाला संभोग कर रहे है , प्राची सपने में हक़ीक़त से ज़्यादा खूबसूरत और मादक लग रही थी , आशीष उसके कसे बदन को निचोड़ रहा था जैसे कोई चूसने से पहले कड़े आम को निचोड़ करके नरम करता है । उसके चूत की महक पहले से तीक्ष्ण और जायदा कामुक लग रही थी ।प्राची अपने मुंह में आशीष का लंड भर के उसको चूस रही है आशीष उत्तेजना और दर्द के कारण आहें भर रहा है । आशीष आज अपनी पत्नी का रस पान करना चाहता है वो प्राची की चूत को अपने मुंह में भरता है और ताक़त से खाता है , प्राची अपना सारा पानी आशीष को पीला रही होती है , आशीष मदहोशी में आके प्राची के ऊपर चढ़ता है और अपना लंड उसके चूत में डालने ही वाला होता है कि उसकी आँख खुल जाती है ।
आशीष उठ के बिस्तर में बैठ जाता है , पसीने से भीगा हुआ जैसे उसने सच में मेहनत की हो , लंड एकदम सख्त और चूत में घुसने को आतुर । आशीष अपना होश संभालते हुए वापस लेटता है आजतक उसको प्राची में लिए ऐसे तड़प नहीं उठा जैसे आज उसको लग रहा था । खड़े लंड को शांत करने के लिए वो मूठ मारता है , प्राची को याद करके तुरंत उसका लंड पानी छोड़ देता है। आशीष का लंड तो शांत हुआ लेकिन उसके अंदर प्राची से संभोग के लिए एक अजीब से तड़पन चालू हो जाती है । आज तक जिस पत्नी को वो बिना तवज्जो दिए चोदता था आज उसके लिए ही अचानक इतनी बेचैनी आशीष को समझ नहीं आता । वो पूरे रात में प्राची को याद करके तीन बार मूठ मारता है और आख़िरकार तीन बजे रात में जाके उसकी नींद लगती है ।
सुबह आशीष की नींद खुली और उसके दिमाग में अभी भी एक ही शख़्स थी प्राची ।
आशीष हाथ में चाय लिए बैठा और सोचते रहा कि “आख़िर ऐसा क्या हुआ , अचानक से प्राची की इतनी याद मुझे क्यों आ रही है ? क्या मुझे उससे मिलना चाहिए ? लेकिन मिलना भी तो ठीक नहीं है , आख़िर इतनी लड़ाइयों के बाद किस मुंह से उससे मिलने जाऊ और मिलने से मेरे माँ बाप भी कौनसा खुस रहेंगे ।”
आशीष यही सब सोचते हुए प्राची के बदन के बारे में सोचने लगा कसी हुई और एकदम फिट, आज से पहले ऐसा नहीं हुआ था की प्राची को सोच के आशीष तीन तीन बार मूठ मारले लेकिन कल रात से प्राची आशीष के दिमाग में घर कर गई थी ।
इधर प्राची सुबह होते ही अपने आप को संवारने में लग गई ।
गोसाईं जी के साथ इक्कीस दिन बिताने के बाद प्राची अब अपने बदन में भौ और सर में छोड़ के कहीं बाल नहीं रखती थी इसीलिए उसने सुबह उठके पहले अपने शरीर को साफ़ किया , एक काले रंग के साड़ी नाभि के नीचे से , बैकलेस ब्लाउज के साथ प्राची ने पहना , गहरे रंग का लिपस्टिक और उससे ही मैच होता गहरा मेकअप । प्राची अब पेंटी और ब्रा नहीं पहनती थी शौच के बाद सफाई के लिए भी प्राची ने एक चमकीला बालू का पथ्थर रखा था बिल्कुल वैसे ही जैसे गोसाईं जी ने सिखाया था ।
ये प्राची का नया रूप था , आत्मविश्वास से भरी हुई प्राची आशीष के इंतज़ार में थी । शीला भी जान रही थी कि एक दो दिन के भीतर ही आशीष का आना होगा अब बस देखना ये था कि प्राची के मंत्रों में ताक़त कितना था ।
शाम होते होते आशीष का हालत ख़राब होने लगा वो अब अपने आपको रोक नहीं पा रहा था ,आख़िरकार हार मानते हुए उसने प्राची से मिलने का सोचा । आशीष ने प्राची को फ़ोन लगाया लेकिन कोई उत्तर नहीं । आशीष की बेचैनी बढ़ गई उसने मंजू देवी को फ़ोन लगा के कहा दोस्तों के साथ बाहर जा रहा रात में देर होगी । आशीष अक्सर दोस्तों के साथ बाहर जाता तो मंजू देवी को इसमें कोई अजीब बात नहीं लगी । आशीष अपनी गाड़ी उठा के प्राची के घर को चला , तेज जितना तेज वो जा सकता था ।
प्राची के फ़ोन में जैसे आशीष का काल आया प्राची ने दौड़ के शीला के पास पहुँची , शीला ने मुस्कुराते हुए प्राची को गले लगाया और बोली “ जादू का असर हो रहा है,तेरी मेहनत अब रंग लाने वाली है, करने दे उसको फ़ोन , तू मत उठाना , देखना कैसे कुत्ते की तरह दम हिलाते वो घर आयेगा । “ शीला और प्राची दोनों हसते है , हालाकि प्राची को “कुत्ते” वाली बात थोड़ी चुभी पर उसने अपनी माँ को नहीं टोका ।
शाम को प्राची के घर की घंटी बजती है । घर में शीला और प्राची ही थे । दोनों समझ गए की आशीष आ चुका है । शीला जाती है दरवाजा खोलने , आशीष सामने खड़ा प्राची को खोज रहा था , शीला के पैर छूते हुए “ मुझे प्राची से कुछ बात करना है, क्या अभी कर सकता हूँ ।”
शीला : अब बात क्यों करनी है ? तुमनेतलाक़ के पेपर भी भेज दिए है । अब मेरी बेटी को छोड़ दो वो और दर्द नहीं सह सकती ।”
आशीष : मुझे उसी बारे में बात करनी है । मैं सब ठीक कर दूँगा एक बार बस आप मुझे प्राची से मिला दो ।
शीला : बेटा तुम्हारे ठीक करने से अब बात कहाँ बनने वाली है ? तुम्हारे माँ बाप नहीं मानेंगे । कितना कुछ बोलके गई है तुम्हारी माँ उस दिन ।
आशीष : अपनी माँ की तरफ़ से मैं माफ़ी माँगता हूँ । आप प्लीज़ उनकी बातों को दिल से मत लीजिए ।
शीला अपना मुज सिकोड़ती है जैसे उसे आशीष के बैटन पर भरोसा ना हो और कहती है : हम भी चाहते है सब ठीक हो जाए बेटा , तुम अपने घर वालो को मना लेना ,ठीक है तुम अंदर आ जाओ , मैं बुलाती हूँ प्राची को।
आशीष शीला के पीछे पीछे घर में घुसता है इस बात से अनजान की जिस प्राची से वो मिलने जा रहा है वो पहली वाली प्राची नहीं एक नई औरत है । आशीष हाल में जाके सोफा में बैठता है , प्राची जान बूझकर थोड़ा देर बाद हाल में जाती है ।
प्राची को देख के आशीष को ऐसा लगा की वो पहली बार उसे देख रहा है । इतना मेक अप केल रंग की साड़ी वो भी नाभि के नीचे तक , आज प्राची के उरोज़ भी उठे और भरे हुए नज़र आ रहे थे । आशीष अपने जगह में उठ के खड़ा हो गया , आशीष चाहता था कि वो प्राची को पकड़ कर गले से लगा ले । प्राची चुप चाप आशीष को देख रही थी उसकी नज़रों से पता नहीं चल पा रहा था कि वो आशीष से प्यार करती है या नफ़रत । आशीष ने बात लेने की पहल कि
आशीष: मुझे पता है मैंने बहुत परेशान किया है तुमको । लेकिन मैं सब ठीक करने आया हूँ ।
प्राची का मन थोड़ा हल्का हुआ , आख़िरकर इतने दिनों तक जिसके लिए उसने इतना मेहनत किया था वो सफल हो रहा था, आशीष उसके सामने अपनी गलती मानते हुए खड़ा था । लेकिन प्राची अब सब अपने हिसाब से चलाना चाहती थी इसीलिए उसने सब बातें क्लियर करके ही वापस जाने का सोचा ।
प्राची: आपकी मम्मी का क्या ? वो मानेगी और बाकी घर वाले ?
आशीष : मैं सबको मना लूँगा । तुम बस अब हाँ करो । मैं तलाक़ की अर्जी भी वापस लूँगा ।
प्राची: आप घर में सबको बता के यहाँ आए हो?
आशीष : नहीं । लेकिन मैं संभाल लूंगा ।
प्राची जानती थी की आशीष ने घर वालो को नहीं बताया होगा लेकिन वो अपनी ताक़त को परखना चाहती थी ।
प्राची : तो बताओ उनको , अभी फ़ोन करके ।
आशीष : पहले तुम हाँ या ना बोलू तभी बताऊँगा ।
प्राची : आपको बताना होगा , उसके बाद ही बात होगा नहीं तो वापस चले जाओ । मेरी ज़िंदगी आपके बिना भी ठीक चल रही है ।
आशीष को जाने के बाद से एक सिहरन सी हुई , उसने तुरंत फ़ोन लगा के मंजू देवी को सब बात बता दिया । मंजू देवी को भी समझ नहीं आ रहा था कि जो लड़का कल तक प्राची की बात भी नहीं कर रहा था आज अचानक उसके घर में कैसे .. लेकिन आशीष को अभी केवल प्राची चाहिए थी वो मंत्रों के इतने वश में था की प्राची जो कुछ भी बोलती वो करता ।
प्राची: बहुत अच्छे । अब बोलो ।
आशीष : मुझे माफ कर दो अब तुम जैसे बोलोगी वैसे ही होगा , तुम चाहोगी तो हम अलग घर लेके रहेंगे । लेकिन तुम साथ आ जाओ ।
प्राची अलग घर लेके नहीं रहना चाहती थी क्योंकि वो अपने बच्चे के लिए सबका प्यार चाहती थी और उसको अब अपने ताक़त पे पूरा यकीन भी हो गया था वो जान गई थी की अब इनका पूरा घर आसानी से वश में हो जाएगा ।
प्राची : ठीक है माफ़ किया लेकिन मेरे माँ बाप को भी उस दिन इतना कुछ बोल के गए थे उसके लिए माफ़ी मांगो ।
आशीष सीधे अंदर किचन में जाके शीला के पैर छू के माफ़ी माँगता है । शीला उसको उठा के बोलती ह “कोई बात नहीं बेटा! अब मैं चाहती हूँ तुम दोनों ख़ुशी से रहो”
आशीष वापस प्राची के पास आता है । प्राची अब बहुत हल्का महसूस और रही थी क्योंकि उसका काम पूरा हो गया था । प्राची के पापा भी वापस घर आके आशीष को देख के ख़ुश होते सब साथ में खाना खाते है । प्राची आशीष को रुकने कहती है ।आशीष की मन माँगी मुराद पूरी हो जाती है ।
रात में सोने के लिए जैसे ही दोनों रूम में जाते है आशीष पहली की तरह प्राची पे टूट जाता है । उसके बदन के हर कोने को चूमने लगता है , प्राची को ये सब बहुत अच्छा लगता है की उसका पति उसका मुरीद हो गया , वो साथ देने लगती है ।
आशीष जल्दी ही प्राची के तन से उसकी काली साड़ी निकालता है अंदर कुछ नहीं , चूत एकदम साफ़ , सूजी हुई किसी पाव रोटी की तरह बिल्कुल वैसे ही जैसे उसने सपने में देखा था । प्राची केवल केल बैकलेस ब्लाउज में अपने बिस्तर पर पड़ी हुई थी, आशीष जैसे ही प्राची के ऊपर चढ़ने की कोसिस किया प्राची ने अपना एक पैर उसके कंधों पर रख के उसे रोकते हुए कहा : मैं तुम्हारी रानी हूँ । बोलो
आशीष : हाँ तुम मेरी रानी हो ।
आशीष थोड़ा ताक़त लगाता है लेकिन प्राची अपना पैर नहीं हटाती ।
प्राची: अब से जैसा मैं कहूँगी तुम वैसा ही करोगे ।
आशीष : हाँ मेरी रानी वैसा ही करूँगा । तेरे हर इच्छा मेरे सर आँखो पर ।
प्राची : मुझे नंगी करने से पहले अपने कपड़े खोलो ।
आशीष जल्दबाजी में अपने सारे कपड़े उतार देता है ।उसका लंड एकदम सख्त तना हुआ ।आज वो इतना उतावला होता है जैसे कॉलेज के किसी स्टूडेंट ने अपनी मैडम को ही पा लिया हो। प्राची की नज़र जैसे ही आशीष के लंड पे पड़ती है उसे गोसाईं जी की याद आ जाती है । कैसे आज उसके पति का लंड उसको पराया लग रहा है और वो ऐसा महसूस करती है जैसे गोसाईं जी का लंड ही उसका अपना है । प्राची अपने आप को संभालते हुए आशीष को अपने ओर बुलाती है और अपना पैर ऊपर करके बोलती है : अँगूठा चूसो ।
आशीष तुरंत पैर के अंगूठे को मुंह में लेके चूसने लगता है , कुछ देर चूसने के बाद वो ऊपर की ओर आगे बढ़ता है लेकिन प्राची उसके हरकत को समझ के अपना दूसरा पैर आगे करती है । आशीष दूसरा अंगूठा भी चूसता है । प्राची की सेवा में आज आशीष को एक अलग ही आनंद की अनुभूति होती है, चूसते हुए आशीष की नज़र प्राची के साँवले और कसे बदन पर घूम रही होती है , आशीष को आज ऐसा लग रहा था मानो वो पहली बार इस बदन को भोग रहा है, इतना आकर्षण मानो आशीष चाट चाट के प्राची के बदन को साफ़ करना चाहता है। बार बार आशीष की नज़र फुले हुए चूत पर रुक जाती है वो प्राची कि नज़रो में देखता है जैसे उससे आज्ञा माँग रहा हो आगे बढ़ने के लिए । प्राची अपना पैर नीचे करके आशीष को आगे बढ़ने देती है , आशीष पूरे पैरों को चूमते हुए धीरे धीरे ऊपर की ओर आता है, आशीष अब इस बात का ध्यान रखता है की किसी भी बात से प्राची नाराज़ ना हो और उसको रोके नहीं । प्राची अपनी दोनों टांगे खोल के आशीष का स्वागत करती है । आशीष चुत के सामने रुक के उसको निहारता है जैसे मिठाई खाने से पहले उसे देख के भी स्वाद लिया जाता है । आशीष पहले भी ये चूत देखा था लेकिन इतनी मादकता उस समय इसमें नहीं थी , आज चूत पहले से बहुत ढीली और फैली हुई लग रही थी , आशीष वश में होते हुए भी गोसाईं जी के मेहनत को नज़रअंदाज़ नहीं कर पाया लेकिन वो कुछ भी ग़लत बोलके प्राची को नाराज़ नहीं इतना चाहता था । अपने पति को इतना पास पाकर प्राची की चूत ने भी पानी छोड़ दिया , आशीष ने पानी को किसी प्रसाद की तरह स्वीकारा और अपने मुंह में प्राची की चूत को भर के खाने लगा ।
आशीष के सर को अपने हाथों से प्राची अपने चूत की सॉर्ट दबाए जा रही थी , प्राची को गोसाईं जी के मुँह की आदत थी , गोसाईं जी किसी भेड़िए के ताक़त से चूत को खाते थे उसके सामने आशीष किसी पिल्ले के ताक़त से खा रहा था , प्राची चले कितना भी ताक़त से आशीष को दबा ले उसको वो सुख अब कहाँ से मिल पाता । प्राची को थोड़ी देर में ये बात समझ में आ ही गई और उसने आशीष को हल्का छोड़ कर अपना चूत चटवाती रही । आशीष से मन भर के चूत चटाने के बाद प्राची अपना ब्लाउज खोल के आशीष का मुंह अपने दूध में लगा देती है । गोसाईं जी ने इक्कीस दिन तक प्राची का स्तनपान किया था उसके बाद आज वो किसी मर्द से अपना स्तन खाली कराना चाहती है । आशीष दोनों स्तनों को पी के खाली किया । प्राची ने आशीष को बेड में लिटाया और 69 अवस्था में आके आशीष के ऊपर बैठ गई । प्राची ने अपने पति के लंड को मुंह में लिया और चूसने लग गई , प्राची अपना चूत आशीष को खाने को दे दिया । आशीष को प्राची का चूसना बहुत तेज लगा , उसको लंड में ताक़त का एहसास हो रहा था , और थोड़े देर में ही वो प्राची को जकड़ कर उसके मुंह में अपना माल छोड़ दिया। प्राची ने पूरा वीर्य पी लिया लेकिन आशीष का लंड अपने मुंह से नहीं निकाला, प्राची अपना पकड़ लंड में हल्का करके मुंह को आगे पीछे करने लगी। आशीष को झड़ने के कारण लंड में हल्का जलन लग रहा था लेकिन प्राची के पकड़ हल्का करने के कारण उसने कुछ नहीं कहा । प्राची अपना चूत चटवाते हुए बार बार अपना गांड आशीष के नाक में रगड़ रही थी , आशीष ने पहले गांड़ नहीं चाटी थी इसलिए उसको उसकी गंध तीक्ष्ण लग रही थी लेकिन प्राची एक मंझे हुए खिलाड़ी की तरह धीरे धीरे आशीष के नाक की तरफ़ अपनी गांड को लाती थोड़ा देर रखेंगे के बाद फिर दूर ले जाती । प्राची आज आशीष को अपना गांड चटवाने के मन में थी । आशीष ये समझ पाता उसे पहले ही प्राची ने उसे अपने गांड की खुशबू से परिचित करवाया । प्राची के हल्के चुसाई के बाद आशीष का लंड फिर खड़ा हो रहा था । प्राची मौका सही समझ के अपना कमर हिलाना चालू करती है , अपनी चूत को आशीष के मुंह में रगड़ती है और गांड़ को आशीष के नाक में । आशीष अब गांड के महक से नहीं बच पाता और छूत के लालच में चुप चाप प्राची की गंदी गांड के महक को सूंघते रहता है । प्राची पूरी ताक़त से अपनी चूत को आशीष के पूरे मुंह में भर देती है । आशीष अब केवल नाक से सांस ले सकता है और उसके हर सांस के साथ प्राची की नशीली महक उसके फेफड़ों तक जाती है । आशीष अपना भाग्य समझ के उसको स्वीकार करता है । आशीष के शरीर अब शांत एकाग्र हो जाता है , वो प्राची के गांड से सांस ले रहा होता है , लंड अब एल्ड रॉड की तरह सख्त । प्राची समझ जाती है कि उसका काम अब हो गया। वो कमर को ढीली करती है और अपना कूल्हा उठा के आशीष के मुंह में थोड़े दूर में रखती है , आशीष अपनी पत्नी के भरे हुए गांड की सुंदरता देख के उत्तेजित हो उठता है और अपने हाथों से प्राची के दोनों भारी कूल्हों को अलग करके अपना जीभ उसकी महकती गांड के छेद में रख के चाटने लगता है ।
प्राची को तो मानो जैसे स्वर्ग मिल गया हो एक महीने पहले तक जो आदमी तलाक़ की बात कर रहा था आज वो उसकी गांड चाट रहा है , शीला और गोसाईं जी को प्राची मन ही मन धन्यवाद देती है । मन भर के अपना गांड साफ़ कराने के बाद प्राची सीधे होके अपने पति की सवारी करती है। लंड को चूत
में डालने के बाद दो चार गुप्त संभोग के निचोड़न से आशीष तुरंत ही अपना माल छोड़ देता है । प्राची जानती है की अब उसकी प्यास आशीष नहीं बुझा सकता लेकिन वो खुस है की उसका पति अब वापस उसके पास आ गया है ।
बाकी आगे …


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