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Fantasy तांत्रिक बहू
#20
अध्याय ७ अंतिम रात्रि
बीसवें दिन के शाम आते आते प्राची का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था , सैकड़ो मंत्र जो गोसाईं जी ने दिए थे , प्राची ने याद तो कर लिए लेकिन उसका आत्मविश्वास हिल रहा था और उसे लग रहा था कि वो मंत्रा भूल जाएगी । जैसे अपने परीक्षा के पहले प्राची सब एक बार याद करती है वैसे ही सब मंत्रों को प्राची याद करने की कोसिस कर रही थी। अंदर ही अंदर डर के साथ उसको ये उत्तेजक संभोग वाले दिन खत्म होने का भी दुख हो रहा था । शाम में लगभग आठ बजे नैनी आई, गुफा में कुछ पूजा पाठ का सामान लायी थी । उसके पीछे ही गोसाईं जी और शीला दोनों नंगे होके गुफा में प्रवेश करते है । प्राची शीला को देख के बहुत ख़ुश हुई और नंगी ही जाके उससे गले मिल गई । शीला ने प्राची को गले से लगाया और कहा कि उसको बहुत गर्व है की प्राची आज इस मुकाम तक पहुँच चुकी है । चारों के लिए नैनी खूब सारा खाना लाए थी । चारों ने पेट भर खाना खाने के बाद पूजा चालू किया ।
नैनी , शीला , गोसाईं जी और प्राची चारों ज़मीन में एक गोला बना के बैठ गए और मंत्र जाप चालू किया , पूरी गुफा मंत्रों के भिनभिनाहट से गूँज उठी थी । लगभग एक घंटे जाप करने के बाद गोसाईं जी बोले “ अब प्राची को अंतिम रूप से तैयार करने के लिए हमे गुफा से बाहर जाने का समय आ गया है “
गोसाईं जी उठ के खड़े हो गए और उसके पीछे बाक़ी सभी । गोसाईं जी ने प्राची को गोद में उठा लिया और गुफा से बाहर निकल गए , पीछे पीछे शिला और नैनी भी मंत्रों का जाप करते हुए चल दिए । थोड़े देर अंधेरे जंगल में चलने के बाद वो एक छोटे झरने के बगल में जाके रुके । झरने के बगल में समतल सूखी चिकनी मिट्टी का  ज़मीन था और वही नैनी ने दिया जलाया और गोसाईं जी ने प्राची और अपना रस्सी का बंधन खोलते हुए प्राची को नीचे बैठा दिया । चारों दीये के चारों तरफ़ गोला बना के बैठ गए । “प्राची आज तुम एक तांत्रिक बन जाओगी और इस शक्ति का इस्तेमाल सोच समझ के तुमको करना होगा , वड़ा करो की तुम इसका दुरुपयोग नहीं करोगी?”
प्राची: “मैं आज प्राप्त होने वाली शक्तियों का दुरुपयोग नहीं करूँगी”
गोसाईं जी “ अब चलो अपने जगह पर पेशाब करो ?”
शीला , नैनी अपनी फटी हुई चूत से मूत्र का तेज धार बैठे बैठे ही ज़मीन पर छोड़ते है , प्राची कोसिस कर रही होती है लेकिन डर के मारे उसकी मूट चूत से बाहर ही नहीं आ पाती है , गोसाईं जी भी अपने लिंग को बिना छुए चिकनी मिट्टी पर ही बैठे बैठे बहुत सारा मूत्र त्याग करते है , गोसाईं जी प्राची के नीचे ज़मीन सूखी पाके प्राची की चुत में उँगली घुसाते है और उसे प्रयास करने के लिए कहते है , बहुत ताक़त लगाने के बाद आख़िर
में प्राची कुछ बूँद ज़मीन पर गिराती है ।
नैनी तुरंत  चारों के द्वारा गीली की गई मिट्टी को उठा के एक पुतले के समान बना के दिए के आगे रखती है ।
गोसाईं जी “ प्राची ये तांत्रिक राक्षस है जिनकी आज पूजा करने के बाद ही तुमको तंत्र की शक्ति प्राप्त होगी ।”
प्राची हाँ में सिर हिलाती और गोसाईं जी नैनी को इशारा करती है , नैनी एक खोपड़ी में कुछ द्रव्य लाके गोसाईं जी को देती है , गोसाईं जी खोपड़ी को हाथ में लेते है और द्रव्य का कुछ घूँट गटक के शीला को खोपड़ी दे देते है शीला ने भी उसे पी के नैनी को और फिर नैनी ने प्राची को दिया । प्राची ने बचे सारे दरवाज़ा को पी लिया उसका स्वाद कुछ दारु जैसा था , प्राची को लगा जैसे दारू में जड़ी बूटी मिला के दिया गया है । द्रव्य को पीने के बाद प्राची का बदन गर्म होने लगा , उसको हल्का नशा ही रहा था । शीला, नैनी और गोसाईं जी एक साथ ज़ोर ज़ोर से मंत्र जपना चालू किए । घने अंधेरे जंगल में मंत्रों का शोर और हल्का नशा प्राची के पूरे बदन को मदमस्त कर दिया था , वो तांत्रिक बनने की इस अंधेरे काले राह के मुँह पर आके अब खड़ी थी जहाँ से पीछे देखा नहीं जा सकता था ।
मंत्रों का असर बढ़ने लगा , मिट्टी की बनाये गये पुतले में एक काली रोशनी सी चमक आ गई जैसे किसी अँधेरे रात में दूर शहर का चमक आसामान में होता है वैसे ही। प्राची ध्यान से पुतले को देखने लगी जैसे उसके आँखे वही रुक गई हो , प्राची के मुँह से अपने मंत्र निकलने लगे ।
कुछ देर बाद मंत्र जाप करते हुए ही गोसाई जी ने अपने एक हाथ से प्राची के सीने को पीछे ओर दबाते हुए उसे ज़मीन में लेटा दिया । प्राची ज़मीन पे लेटती ही अपने टाँगे खोल दी और अपने चुत को फैला दिया । “ शीला पुतले को प्राची की योनि का स्पर्श कराओ ? गोसाईं जी ने आदेश दिया ।
आदेश पाते ही शीला ने पुतले को उठा के प्राची के योनि पर रगड़ा , उसके बाद गोसाई जी ने पुतले को वापस उसकी जगह पर रखने को कहा, शीला ने वैसे ही किया ।
मंत्र जाप अपने चरम पर था सबने अपना ताकत मंत्र पर लगा रखा था , इतने में एक काला धुंआ सा दिया से निकल के प्राची की ओर चढ़ने लगा , ऐसा लग रहा था कि कोई मर्द प्राची को चोदने के लिए उसके ऊपर चढ़ रहा है , प्राची को अचानक अपने सीने में भर महसूस हुआ , कुछ वैसा भर जब गोसाई जी उसके ऊपर होते है तब उसे महसूस होता है । प्राची पसीने से भीगने लगी थी , उसकी छाती और पेट काले  धुएँ के भार से बाद गया । प्राची को लगा कि उसकी साँस रुक जाएगी । प्राची नशे की हालत में थी लेकिन उसको अपना सारा छेद भरा हुआ लग रहा था । कुछ देर प्राची इसी तरह दर्द सहती रही और अपने आप मंत्रों के जाप के बीच ही झड़ गई । प्राची के झड़ते ही शीला और नैनी भी चीखते हुए झड़ गए ।
पुतले का कार्य पूर्ण हो चुका था पुतले को गोसाईं जी ने उठा कर हाथों से मसल दिया , कुछ मिट्टी अपने बदन पर माला और बाकी चारों को मलने के लिए दे दिया ।
शीला और नैनी ने प्राची को ज़मीन से उठा के बैठा दिया और उसके बदन पर मिट्टी मल दिया ।”प्राची तुम्हारी दीक्षा और मेहनत को तांत्रिक राक्षस ने स्वीकारा है ।” शीला प्राची को गले लगाते हुए कहती है कि” तुम अब हम में से एक हो।”
ये एक पुरानी , शैतानी और कालें जादू सीखने वालों की परंपरा थी , आज बरसो बाद गोसाईं जी ने किसी शिष्या को दीक्षा दिया था वो भी आज बहुत ख़ुश थे। शीला और नैनी दोनों ने कुछ लड़की लाके आग जलाई और शराब को को खोपड़ी में भर भर के पीने लगे । प्राची अभी भी नशे में थी लेकिन उस ए शीला एयर नैनी द्वारा पिलाये गए शराब को फिर से पी लिया । गोसाईं जी भी अपना एक अलग लोटा लेके शराब का आनंद ले रहे थे । आग तेज होने के बाद चारों नाचने लगे ।  गोसाईं जी ने नाचते हुए ही अपना लिंग लेके प्राची शीला और नैनी के अपर पेशाब  का धार छोड़ना चालू किया , नैनी और शीला किसी भूखी कुतिया की तरह लड़ लड़ कर गोसाईं जी का मूत्र अपने शरीर में रगड़ने लगी, प्राची ने भी कुछ बूँदों से अपने शरीर को मला  । मूत्र मिट्टी पसीने और शराब मिलके बड़ी कामुक गंध फैला रहे थे । गोसाईं जी ने शीला को नाचते हूँ पीछे से पकड़ा और अपने बदन से शीला की गदराई हुई बदन को घिसने लग गए । शीला भी गोसाईं जी का साथ देते हुए उनके बदन से चिपक के अपना सारा शरीर गोसाईं जी पर मल रही थी । नैनी ने आगे बढ़कर प्राची को किस किया और अपना बदन उसके शरीर से लगा के घिसने लग गई । अँधेरी रात में ये चारों जंगल के बीच में ऐसा नाच रहे थे जैसे ये इनकी आख़िरी रात हो । पसीने से तर चारों का बदन एकदम गर्म हो चुका था ।
गोसाईं जी ने शीला के योनि में अपना लिंग डालते हुए गुप्त सम्भोग का आनंद लेने लग गए । कुछ समय में शीला झड़ के ढीली पड़ गई, फिर गोसाईं जी ने नैनी को पकड़ के गुप्त संभोग किया । वो भी थोड़े देर में चीखती हुई झड़ गई। फिर बड़ी प्राची की आयी , गोसाईं जी ने पूरी ताकत के साथ प्राची को अपनी ओर खींचा और पीछे से ही  उसके गांड़ में अपना लिंग घुसा दिया , प्राची को गोसाईं जी के लंड की आदत तो हो ही गई थी लेकिन बिना चिकनाई के गांड़ में लिंग घुसने से उसकी चीख निकल गई ।
गोसाई जी अपने मर्दानगी पर गौरान्वित होके मुस्कुराते हुए बोले “ इक्कीस दिन में भी आदत नहीं हुई मेरी छोटी कुतिया?”
प्राची कुछ जवाब नहीं दी बस लंड को अपने अंदर लेते रही , गोसाईं जी पहले तो कुछ झटके मारे जब उनका लिंग पूरी तरह से जड़ तक प्राची की गांड में घुसा तो वो अपने लिंग से गुप्त  संभोग करने लग गए , प्राची को लगा कि गांड के अंदर का सारा माल कोई वैक्यूम क्लीनर से खींच रहा हो । प्राची के पेट में उफान आ गया , लगा की बड़ी आंत सिकुड़ कर छोटी हो रही है , उतने में गोसाईं जी ने पीछे से अपना हाथ आगे प्राची की नाभि में नीचे ले जा के वहाँ  ज़ोर से दबाया , प्राची की चीख निकल गई लगा की उसका पेट फट जाएगा । गोसाईं जी ने गुप्त संभोग बंद किया , अपने एक हाथ से प्राची के कमर को पकड़ा और दूसरा प्राची की गांड के नीचे रख के लिंग को धीरे से बाहर निकाला , गोसाईं जी का लिंग प्राची की गांड से बाहर आते ही जैसे प्राची की गांड का ज्वाला मुखी विस्फोट हो गया , मल और गोसाईं जी का वीर्य एक साथ बाहर फूट पड़े , गोसाईं जी ने अपने एक हाथ में जितना आ सकता था उतना माला लिया और अपनी छाती में मलने लगे , नैनी और शीला ने भी बचा खुचा सारा माल हाथों से लेके अपने शरीर में मला । शीला नशे में धुत्त होके घोड़ी बनके गोसाईं जी के सामने खड़े हो गई जैसे उनको अपने गांड का निमंत्रण दे रही हो,गोसाईं जी ने शीला के गांड ज्वालामुखी भी अपने लिंग से विस्फोट करवाया , शीला ने अपना माल ही अपने हाथों में लेके गोसाईं जी के लिंग की मालिश लेने लगी , फिर वैसा ही नैनी ने किया ।
घृणा और वीभत्सता की परिभाषा प्राची के ले समाप्त हो चुकी थी । हल्का नशा , मल मूत्र पसीने शराब का तीखा गंध । मन में वासना की अजीब से चाहत , प्राची बिल्कुल नए परिवेश में अपने आप को नया पायी। एक महीने पहले जो लड़की घर के अंधेरे कोने में जाने से डरती थी वो आज घने अंधेरे जंगल में सुकून पा रही है । शीला , नैनी , प्राची तीनो रात में कई बार चरम सुख को प्राप्त करते है । गोसाईं जी ने भी इतनी बार वीर्य त्याग किया कि उनका लिंग सुबह होते होते सूज कर फूल गया। सुबह चार बजे सब झरना में कूदे अपने आप को मुल्तानी मिट्टी से साफ़ किया। प्राची भी अपना शरीर का सारा गंदगी झरने में साफ़ करके बाहर निकली , एक तांत्रिक के रूप में शीला और गोसाईं जी दोनों प्राची को देख के ख़ुश और गौरान्वित थे । चारों गुफ़ा की ओर लौटे , गोसाईं जी ने प्राची को गले लगाते हुए कहा कि” अब तुम्हारे जाने का समय आ गया है, मैं तुम्हें बीच बीच में संदेश भिजवाते रहूँगा , समय समय में तुमको यहाँ आना होगा , तुम अब हमारे परिवार की एक सदस्य बन गई हो ।”
प्राची ने गोसाईं जी को दण्डवत प्रणाम किया । गोसाईं जी पहले निकल गए । नैनी गुफा में रुकी साफ़ सफाई के लिए , शीला ने प्राची के लिए उसके कपड़े लाए थे , दोनों गुफा के बाहर कपड़े पहन कर बाहर गाँव में आए ।
प्राची इक्कीस दिन बाद वापस गाँव में आके एक्सन महसूस के रही थी। गाँव में उसके पापा और बच्चे से मिलके प्राची बहुत ख़ुश हुई और सभी सुबह ही शहर के लिए वापस निकल पड़े ।
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तांत्रिक बहू - by Gomzey - 23-11-2025, 03:30 PM
RE: तांत्रिक बहू - by Pvzro - 24-11-2025, 07:29 PM
RE: तांत्रिक बहू - by Gomzey - 09-12-2025, 11:53 AM
RE: तांत्रिक बहू - by Davit - 03-02-2026, 05:57 PM



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