03-12-2025, 10:20 PM
अध्याय ६ अभ्यास
अब सत्रह दिन बीत चुके थे प्राची का गुप्त संभोग का अभ्यास लगभग पूरा हो चुका है । नैनी खाना लेके आती है और प्राची को दिन भर में अपनी नींद पूरी करने को कहती है क्योंकि गोसाईं जी आज शाम में आयेंगे और अब से दो दिन पूरा यही रहेंगे । प्राची ने हाँ में सर हिलाया और खाना खा के सो गई । शाम में गोसाईं जी आते है , प्राची पहले से जाग चुकी थी और उनका इंतज़ार कर रही थी । गोसाईं जी ने रस्सी हाथ में लिया और ज़मीन पर बैठ गए । प्राची सोच रही थी कि गोसाईं जी आज रस्सी अपने पैरो से कैसे नहीं बाँध रहे है । इतने में गोसाईं जी ने प्राची से कहा “ तुम आज हमारी गोद में बैठोगी । “ गोसाईं जी पालती मोड़ के चटाई पर बैठे थे , प्राची अपना पीठ गोसाईं जी की ओर करके उनके गोद में भैया गई । गोसाईं जी ने रस्सी लेके अपने और प्राची को कमर से करके बाँध दिया , प्राची का पीठ गोसाईं जी के पेट से सात गया और उसकी चूत एकदम लिंग के ऊपर सट गई । गोसाईं जी का लिंग सख़्त होने लग गया प्राची उसको अपनी चूत पर महसूस करने लगती है और उसकी चूत पानी छोड़ कर लिंग का स्वागत करती है । गोसाईं जी ने प्राची को गोद से थोड़ा ऊपर कर प्राची की चूत में अपना लिंग डाल दिया । प्राची की चूत अब फ़ैल कर बड़े आराम से जड़ तक पूरे लिंग को अंदर ले लेती है । प्राची का कमर अपने आप हिलने लगता है तो गोसाईं जी रस्सी के पकड़ को और कसते हुए उसे कहते है :हिलों मत । जैसे नींबू को निचोड़ा था वैसे ही अब मेरे लिंग को निचोड़ो।
प्राची एक आज्ञाकारी शिष्या की तरह गोसाईं जी के बात पर अमल करती है । प्राची पूरी ताक़त लगा कर चूत की मांसपेशियों को सिकोड़ती है और गोसाईं जी के लिंग को हर तरफ़ से दबाने की कोसिस करती है । उसकी चूत इतना पानी छोड़ रही होती है कि चूत के रस से गोसाईं जी के अंडे और जाँघ दोनों भीग जाते है । लगभग पंद्रह मिनट के मेहनत के बाद प्राची थका हुआ महसूस करती है और उसकी चूत की पकड़ लिंग पर धीमें पड़ती जाती है । गोसाई जी ने जब ये महसूस किया तो प्राची को रोकते हुए कहा:” तुम रुक के आराम करो और जब फिर साँस आए तब फिर अभ्यास चालू करो ।”
प्राची दस मिनट के लिए रुकती है और फिर पूरी ताक़त से गोसाईं जी को आधे घंटे तक निचोड़ती है । प्राची के निचोड़ने के कारण गोसाईं जी का लिंग बहुत सख़्त हो गया था , हालाकि प्राची आख़िरी दो हफ़्ते से भी जायदा समय से गोसाईं जी से संभोग कर रही थी लेकिन उनके लिंग की ये सख़्ती पहली बार महसूस कर रही थी । प्राची थक कर फिर से रुकती और पाँच मिनट में वापस अपना अभ्यास चालू करती है इस बार थोड़ी और ज़ोर से ताक़त लगाती है , प्राची गोसाईं जी को झाड़ना चाहती है और उनके लिंग की सख़्ती और हलचल से समझ जाती है कि वो भी चरम सुख में पहुँचने वाले है और होता भी ऐसे ही है लगभग आधे घंटे के और निचोड़ने के कारण गोसाईं जी प्राची के चूत में ही अपना सारा वीर्य भर देते है । गोसाईं जी के वीर्य की गर्मी प्राची अपने गर्भाशय तक महसूस करती है , उसके मन में ख्याल आता है कि अगर बच्चा पकड़ लिया तो वो क्या करेगी , लेकिन एक पल में ही उसका ये डर गायब हो जाता है क्योंकि वो जानती है कि गोसाईं जी और उसकी माँ शीला सब संभाल लेंगे । कुछ देर उसी अवस्था में दोनों बैठे रहते है फिर गोसाईं जी प्राची को अभ्यास जारी करने कहते है । प्राची अपना अभ्यास जारी रखती है और अगले आठ घंटे तक यही कार्यक्रम चलता है ।प्राची ने इन आठ घंटों में गोसाईं जी को पाँच बार चरम सुख दिया और उनके गाढ़ा वीर्य उसकी गर्भाशय में भर गया था और अब वह जगह नहीं होने के कारण चूत के रास्ते बाहर आकर उसकी चुतड़ो में फ़ैल गया । गोसाईं जी ने रस्सी का बंधन खोलते हुए प्राची को अपने साथ चटाई पे लिटा दिया और प्राची की तारीफ़ करते हुए बोले “ आज तुमने बहुत अच्छी तरह से संभव किया है । तुम गुप्त संभाग करना जान चुकी हो , बहुत अरसे बाद मैं एक रात में इतनी बार चरम सुख को प्राप्त किया है ।” प्राची अपना तारीफ़ सुनके फूले नहीं समाती और गोसाईं जी को ज़ोर से गले लगा लेती है । दोनों उसी अवस्था में सो जाते है । अगले दिन प्राची गोसाईं जी को जगाते हुए कहती है कि उसे शौच जाना है , गोसाईं जी और प्राची दोनों नंगे ही गुफा के बाहर आते है बाहर धूप में प्राची का साँवला बदन सोने की तरह चमकता है और गोसाईं जी का काला शरीर ऐसे चमकता है मानो अभी तेल की मालिश करा कर आ रहे हो । दोनों उसी जगह में शौच के लिए जाते है । गोसाईं जी कल रात के संभोग के बाद प्राची के प्रति सौम्य हो गए थे आज उनको प्राची के लिए बहुत प्यार आ रहा था , वो बड़े गौर से प्राची की सुंदर और सांवली चूत को मूत्र त्याग करते देखते है , प्राची के मूत्र के साथ बहुत मात्रा में वीर्य भी बाहर आ रहा होता है । गोसाईं जी हाला मुस्कुराते है और प्राची के सोच लेने के बाद अपने हाथों में पत्थर लेके प्राची की गांड साफ़ करते है । प्राची अब अपना सब शरम त्याग चुकी थी उसे बहुत ख़ुशी हुई की गोसाईं जी उसके प्रति प्यार की भावना रख रहे थे, वही प्यार जो वो आशीष से पाने के लिए तरस गई थी ।
दोनों वापस गुफा में आते है । नैनी थोड़े देर में खाना लेके आती है। गोसाईं जी रात के थकान के कारण दबा के खाते और प्राची को भी अच्छे से भोजन हेतु कहते है क्योंकि अभी ये अभ्यास उनको अगले चौबीस घंटे और करना था ।
खाना के फिर अभ्यास वाली अवस्था में दोनों बैठते है , प्राची की चूत में गोसाईं जी लिंग लगाते है । प्राची फिर निचोड़ना चालू करती है लेकिन इस बार गोसाईं जी भी अपने लिंग से प्राची की चूत का पानी खींचते है । जब चूत की पानी कम होने लगता है तो गोसाईं जी खींचना बंद कर देते है और फिर चूत को पानी से भरने तक प्राची को निचोड़ने देते है और जैसे ही चूत रस से भर जाती उनका लिंग पूरा रस पी जाता । प्राची के लिए ये कल रात जैसे आसान नहीं था , चूत के रस सूखने से प्राची को चूत में जलन होता और उसकी मेहनत आउट बढ़ जाती जिससे गोसाईं जी को झड़ाने के लिए वो पूरी ताक़त नहीं लगा पा रही थी ।दिन भर लग भाग यही खेल चलते रहा । प्राची पाँच बार और गोसाईं जी पूरे दिन में एक बार चरम सुख तक पहुँचे ।
रात में नैनी ने खाने में मुर्गा औरमटन लाया । प्राची इतने दिनों के बाद ऐसा खाना देख के बहुत ख़ुश हुई और दबा के गोसाईं जी और प्राची ने खाना खाया । खा कर दोनों फिर सुबह चार बजे तक अभ्यास करते रहे । प्राची रात में पाँच बार झड़ी और गोसाईं जी को उसने दो बार चरम सुख दिया । दोनों ऐसे थक चुके थे जैसे समंदर को तैर के पार किया हो। दोनों चार बजे चटाई में सो गए । अगले सुबह गोसाई जी ने प्राची को कहा कि आज बीसवा दिन है, तुम आज दिन भर आराम करो ।आज रात में तुमको गुफा से बाहर निकालूँगा और आख़िरी तंत्र पूजा होगा ।
बाक़ी आगे …
अब सत्रह दिन बीत चुके थे प्राची का गुप्त संभोग का अभ्यास लगभग पूरा हो चुका है । नैनी खाना लेके आती है और प्राची को दिन भर में अपनी नींद पूरी करने को कहती है क्योंकि गोसाईं जी आज शाम में आयेंगे और अब से दो दिन पूरा यही रहेंगे । प्राची ने हाँ में सर हिलाया और खाना खा के सो गई । शाम में गोसाईं जी आते है , प्राची पहले से जाग चुकी थी और उनका इंतज़ार कर रही थी । गोसाईं जी ने रस्सी हाथ में लिया और ज़मीन पर बैठ गए । प्राची सोच रही थी कि गोसाईं जी आज रस्सी अपने पैरो से कैसे नहीं बाँध रहे है । इतने में गोसाईं जी ने प्राची से कहा “ तुम आज हमारी गोद में बैठोगी । “ गोसाईं जी पालती मोड़ के चटाई पर बैठे थे , प्राची अपना पीठ गोसाईं जी की ओर करके उनके गोद में भैया गई । गोसाईं जी ने रस्सी लेके अपने और प्राची को कमर से करके बाँध दिया , प्राची का पीठ गोसाईं जी के पेट से सात गया और उसकी चूत एकदम लिंग के ऊपर सट गई । गोसाईं जी का लिंग सख़्त होने लग गया प्राची उसको अपनी चूत पर महसूस करने लगती है और उसकी चूत पानी छोड़ कर लिंग का स्वागत करती है । गोसाईं जी ने प्राची को गोद से थोड़ा ऊपर कर प्राची की चूत में अपना लिंग डाल दिया । प्राची की चूत अब फ़ैल कर बड़े आराम से जड़ तक पूरे लिंग को अंदर ले लेती है । प्राची का कमर अपने आप हिलने लगता है तो गोसाईं जी रस्सी के पकड़ को और कसते हुए उसे कहते है :हिलों मत । जैसे नींबू को निचोड़ा था वैसे ही अब मेरे लिंग को निचोड़ो।
प्राची एक आज्ञाकारी शिष्या की तरह गोसाईं जी के बात पर अमल करती है । प्राची पूरी ताक़त लगा कर चूत की मांसपेशियों को सिकोड़ती है और गोसाईं जी के लिंग को हर तरफ़ से दबाने की कोसिस करती है । उसकी चूत इतना पानी छोड़ रही होती है कि चूत के रस से गोसाईं जी के अंडे और जाँघ दोनों भीग जाते है । लगभग पंद्रह मिनट के मेहनत के बाद प्राची थका हुआ महसूस करती है और उसकी चूत की पकड़ लिंग पर धीमें पड़ती जाती है । गोसाई जी ने जब ये महसूस किया तो प्राची को रोकते हुए कहा:” तुम रुक के आराम करो और जब फिर साँस आए तब फिर अभ्यास चालू करो ।”
प्राची दस मिनट के लिए रुकती है और फिर पूरी ताक़त से गोसाईं जी को आधे घंटे तक निचोड़ती है । प्राची के निचोड़ने के कारण गोसाईं जी का लिंग बहुत सख़्त हो गया था , हालाकि प्राची आख़िरी दो हफ़्ते से भी जायदा समय से गोसाईं जी से संभोग कर रही थी लेकिन उनके लिंग की ये सख़्ती पहली बार महसूस कर रही थी । प्राची थक कर फिर से रुकती और पाँच मिनट में वापस अपना अभ्यास चालू करती है इस बार थोड़ी और ज़ोर से ताक़त लगाती है , प्राची गोसाईं जी को झाड़ना चाहती है और उनके लिंग की सख़्ती और हलचल से समझ जाती है कि वो भी चरम सुख में पहुँचने वाले है और होता भी ऐसे ही है लगभग आधे घंटे के और निचोड़ने के कारण गोसाईं जी प्राची के चूत में ही अपना सारा वीर्य भर देते है । गोसाईं जी के वीर्य की गर्मी प्राची अपने गर्भाशय तक महसूस करती है , उसके मन में ख्याल आता है कि अगर बच्चा पकड़ लिया तो वो क्या करेगी , लेकिन एक पल में ही उसका ये डर गायब हो जाता है क्योंकि वो जानती है कि गोसाईं जी और उसकी माँ शीला सब संभाल लेंगे । कुछ देर उसी अवस्था में दोनों बैठे रहते है फिर गोसाईं जी प्राची को अभ्यास जारी करने कहते है । प्राची अपना अभ्यास जारी रखती है और अगले आठ घंटे तक यही कार्यक्रम चलता है ।प्राची ने इन आठ घंटों में गोसाईं जी को पाँच बार चरम सुख दिया और उनके गाढ़ा वीर्य उसकी गर्भाशय में भर गया था और अब वह जगह नहीं होने के कारण चूत के रास्ते बाहर आकर उसकी चुतड़ो में फ़ैल गया । गोसाईं जी ने रस्सी का बंधन खोलते हुए प्राची को अपने साथ चटाई पे लिटा दिया और प्राची की तारीफ़ करते हुए बोले “ आज तुमने बहुत अच्छी तरह से संभव किया है । तुम गुप्त संभाग करना जान चुकी हो , बहुत अरसे बाद मैं एक रात में इतनी बार चरम सुख को प्राप्त किया है ।” प्राची अपना तारीफ़ सुनके फूले नहीं समाती और गोसाईं जी को ज़ोर से गले लगा लेती है । दोनों उसी अवस्था में सो जाते है । अगले दिन प्राची गोसाईं जी को जगाते हुए कहती है कि उसे शौच जाना है , गोसाईं जी और प्राची दोनों नंगे ही गुफा के बाहर आते है बाहर धूप में प्राची का साँवला बदन सोने की तरह चमकता है और गोसाईं जी का काला शरीर ऐसे चमकता है मानो अभी तेल की मालिश करा कर आ रहे हो । दोनों उसी जगह में शौच के लिए जाते है । गोसाईं जी कल रात के संभोग के बाद प्राची के प्रति सौम्य हो गए थे आज उनको प्राची के लिए बहुत प्यार आ रहा था , वो बड़े गौर से प्राची की सुंदर और सांवली चूत को मूत्र त्याग करते देखते है , प्राची के मूत्र के साथ बहुत मात्रा में वीर्य भी बाहर आ रहा होता है । गोसाईं जी हाला मुस्कुराते है और प्राची के सोच लेने के बाद अपने हाथों में पत्थर लेके प्राची की गांड साफ़ करते है । प्राची अब अपना सब शरम त्याग चुकी थी उसे बहुत ख़ुशी हुई की गोसाईं जी उसके प्रति प्यार की भावना रख रहे थे, वही प्यार जो वो आशीष से पाने के लिए तरस गई थी ।
दोनों वापस गुफा में आते है । नैनी थोड़े देर में खाना लेके आती है। गोसाईं जी रात के थकान के कारण दबा के खाते और प्राची को भी अच्छे से भोजन हेतु कहते है क्योंकि अभी ये अभ्यास उनको अगले चौबीस घंटे और करना था ।
खाना के फिर अभ्यास वाली अवस्था में दोनों बैठते है , प्राची की चूत में गोसाईं जी लिंग लगाते है । प्राची फिर निचोड़ना चालू करती है लेकिन इस बार गोसाईं जी भी अपने लिंग से प्राची की चूत का पानी खींचते है । जब चूत की पानी कम होने लगता है तो गोसाईं जी खींचना बंद कर देते है और फिर चूत को पानी से भरने तक प्राची को निचोड़ने देते है और जैसे ही चूत रस से भर जाती उनका लिंग पूरा रस पी जाता । प्राची के लिए ये कल रात जैसे आसान नहीं था , चूत के रस सूखने से प्राची को चूत में जलन होता और उसकी मेहनत आउट बढ़ जाती जिससे गोसाईं जी को झड़ाने के लिए वो पूरी ताक़त नहीं लगा पा रही थी ।दिन भर लग भाग यही खेल चलते रहा । प्राची पाँच बार और गोसाईं जी पूरे दिन में एक बार चरम सुख तक पहुँचे ।
रात में नैनी ने खाने में मुर्गा औरमटन लाया । प्राची इतने दिनों के बाद ऐसा खाना देख के बहुत ख़ुश हुई और दबा के गोसाईं जी और प्राची ने खाना खाया । खा कर दोनों फिर सुबह चार बजे तक अभ्यास करते रहे । प्राची रात में पाँच बार झड़ी और गोसाईं जी को उसने दो बार चरम सुख दिया । दोनों ऐसे थक चुके थे जैसे समंदर को तैर के पार किया हो। दोनों चार बजे चटाई में सो गए । अगले सुबह गोसाई जी ने प्राची को कहा कि आज बीसवा दिन है, तुम आज दिन भर आराम करो ।आज रात में तुमको गुफा से बाहर निकालूँगा और आख़िरी तंत्र पूजा होगा ।
बाक़ी आगे …


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