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Fantasy तांत्रिक बहू
#13
अध्याय ५  गुप्त संभोग
प्राची ने अगले दस दिन गोसाईं जी के कहे अनुसार मंत्र जाप किया और हर दिन लगभग उनका दिनचर्या समान था , गोसाईं जी ने रोज़ नए नए संभोग के गुर प्राची को इस दस दिन में सिखाए । प्राची की चूत और गांड़ दोनों बड़े से बड़े लंड लेने में अब सक्षम हो गए । आत्मविश्वास से प्राची भर गई थी और शरम तो जैसे अब दूर दूर नहीं रही । रोज़ गोसाईं जी के साथ संभोग से प्राची गोसाईं जी से खुल के बात करने लग गई , गोसाईं जी ने प्राची का समर्पण देख समझ गए थे कि ये अपनी माँ जैसे ही तेज तांत्रिक बनेगी ।
दसवे दिन के अंत में  प्राची और गोसाईं जी चुदाई खत्म करके साथ में चटाई से में लेटे थे । प्राची : गोसाईं जी आपने कहा था की दसवे दिन मेरे प्रश्नों का उत्तर देंगे ।
गोसाईं जी प्राची को अपने पास खींचते है और  कहते है की पूछो जो पुछना है ।
प्राची : ये विद्या क्या सच में मेरे कठिनाइयाँ हाल कर सकती है ?
गोसाईं जी : बिल्कुल तुम्हारे साथ साथ तुम किसी दूसरे कोभी मदद कर सकती हो । लेकिन मैं अपने शिष्यों को हमेशा ख़ुद की सहायता के लिए तन्त्रो का उपयोग करने को कहता हूँ ।
प्राची : क्यों? हम किसी और की मदद क्यों ना करे ?
गोसाईं जी : जब तुम अपना कार्य करते हो तो तुमको पता होता है कि सही ग़लत क्या है लेकिन दूसरों की सहायता में हमेशा झूठ और धोके का ख़तरा बना रहता है । और इस विद्या को बदला या किसी के बुरे की भावना से किया जाए तो दुष्परिणाम होते है । इसीलिए जिसने जितनी तकलीफ़ दी है बस उसको वो वापस कर दो । यही सुरक्षित रास्ता है ।
प्राची : आपने ये कब सीखा ?
गोसाईं जी : जब मैं 22 साल का था तब , इसी गुफा में साधना करने के लिए हमारे गुरु परमानंद जी आए थे । तुम्हारी नानी उस समय नई ब्याह कर आई थी और जंगल में लकड़ी इकट्ठा करने आती थी , वही उनका भेंट परमानंद जी से हुआ और मैंने उन दोनों को साधना करते हुए देखा तो मैंने भी परमानंद जी से ये विद्या सिखाने के लिए अनुरोध किया
उन्होंने मुझे और तुम्हारे नानी को एक साथ विद्या इसी गुफा में सिखाई ।
प्राची गर्व से फूल जाती है , उसे लगता है कि भले वो गोसाईं जी को इतने साल वो नहीं जानती थी लेकिन वो उसके परिवार के बहुत करीबी थे । प्राची अपने एक हाथ से गोसाईं जी के लिंग को सहलाती रहती है और पूछना जारी रखती है : क्या आपने नानी के साथ भी यहाँ संभोग किया है ?
गोसाईं जी : हाँ , यही और तुम्हारी माँ शीला के साथ भी इसी गुफा में इक्कीस दिन तक ।
प्राची : लेकिन नानी तो परमानंद जी की शिष्या थी ? तो आप उनसे संभोग कैसे किए ?
गोसाईं जी : देखो प्राची । संभोग एक प्राकृतिक क्रिया है , ये हमारे खाने और शौच करने जैसा ही शरीर के लिए जरूरी है बाहर समाज ने जरूर इसे निषिध् बना के रखा हुआ है लेकिन उसको हटा के अपने भावनाओ को वश में करके संभोग किया जाए तो ये केवल फायदा ही देता है । तुम्हारी नानी को संभोग परमानंद जी ने सिखाया लेकिन मुझे तुम्हारी नानी ने ।
प्राची : मैंने कभी सोचा नहीं था की अपने पति के अलावा भी मैं किसी के साथ ये सब कर सकती हूँ।
गोसाईं जी:तुम सीखने के लिए यहाँ आई हो ना की संभाग कि लिए , संभाग तो बस सीखने की क्रिया में महत्वपूर्ण पड़ाव है ।
प्राची : मैं मंत्र जाप करती हूँ , लेकिन संभाग महत्वपूर्ण क्यों है ?
गोसाईं जी: क्या तुम दुनिया से अलग इस गुफा में दस दिन केवल मंत्र जाप से ही रह पति ? नहीं ना । संभोग मन को एकाग्र करता है और हमे बाकी दुनिया से प्रभावित होने से भी बचाता है । हमारी सोच को एकाग्र करना ही इस इक्कीस दिन का सबसे बढ़ा सबक होगा ।
प्राची को अब इस बात की गहराई का पता चला क्योंकि अभी तक तो कहीं ना कहीं मज़े अपने पति का गुस्सा उतारने के लिए वो ये सब कर रही थी । उसके मन में गोसाईं जी के लिए इज़्ज़त और भी बढ़ गई । उसके मन में उसके कुछ और सवाल थे जिनको वो पूछना  जारी रखती है : गोसाईं जी जब मैं पहली बार इस गुफा में आई थी तो आपने मेरी माँ के साथ मेरे सामने ही संभोग किया लेकिन उसने आप दोनों बिल्कुल हिल डुल नहीं रहे थे  तो आप क्या कर रहे थे ?
गोसाईं जी : अच्छा किया ये प्रश्न करके । कल से मैं तुमको संभोग के अगले चरण में लेके जाऊँगा । इसमें आंतरिक रूप से हम संभोग करते है लेकिन संभोग की तीव्रता सामान्य संभोग से आठ गुना ज़्यादा होती है ।इसे गुप्त संभोग कहा जाता है ।
प्राची : आठ गुना तीव्रता मतलब ?
गोसाईं जी :  एक भर झड़ने में जो ताक़त लगती है उससे आठ गुना ज़्यादा ताक़त और जितना मज़ा एक बार में आता है उससे आठ गुना ज़्यादा मज़ा ।
प्राची : लेकिन बिका हिले मज़ा कैसे आयेगा, मतलब जब तक घर्षण होगा नहीं तो मज़ा कैसे आ सकता है ?
गोसाईं जी : घर्षण होगा । लेकिन हमे इसके लिए अपने यौन अंगों को तैयार करना होता है। पुरुष का लिंग केवल मूत्र बाहर विसर्जित कर सकता है लेकिन योग साधना से लिंग तरल अंदर की ओर भी खींच सकते है उसी तरह योनि के अंदर भी मांसपेशियां होती है जो सामान्यतः औरत के बस में नहीं होती लेकिन योग साधना से उसको भी बस में करके अपने इच्छा अनुसार संवेदना लायी जा सकती है । यदि ऐसा पुरुष और ऐसी स्त्री जो ये दोनों क्रियाओं में निपुर्ण है वो संभोग करे तो उनको बाहर से शरीर हिलाने की आवश्यकता नहीं पड़ती । पुरुष योनि में लिंग डाल के उसके अंदर का तरल खीचता रहता है और स्त्री योनि के मांसपेशियों से लिंग को निचोड़ निचोड़ के उसके द्वारा खींचे गए तरल को बाहर करती है । ये खेल तब तक चलता है जब तक योनि लिंग से पूरा तरल और उसके बाद उसको निचोड़ के वीर्य ना निकाल दे । लेकिन इस क्रिया को किसी निपूर्ण महिला और पुरुष को ही करना चाहिए क्योंकि ऐसा क्रिया जानने वाला पुरुष किसी सामान्य स्त्री से इस तरह गुप्त संभोग करेगा तो उसके योनि और यहाँ तक की गर्भाशय को नुकसान पहुँचा सकता है , उसी तरह अगर कोई स्त्री किसी सामान्य पुरुष से गुप्त संभोग करे तो एक संभोग में ही आठ बार का वीर्य निचोड़ लेगी जिससे पुरुष की मृत्यु तक हो सकती है ।
प्राची ये सब सुनके स्तब्ध हो गई , अभी अभी तो उसको गोसाईं जी के तेज झटकों को सहने की आदत हुई थी और ऐसे लग रहा था की वो अब दुनिया के किसी भी पुरुष को संतुष्ट कर सकती है लेकिन अभी तो पहला चरण ही पार हुआ था ।
प्राची: तो क्या इसी लिए इन दस दिनों में मैं कम से कम चालीस बार झड़ी और आप एक बार भी नहीं ?
गोसाईं जी: हाँ मैं अपना स्खलन नियंत्रित के सकता हूँ और जब तक आवश्यकता ना हो मैं वीर्य बाहर नहीं निकालता । लेकिन तुमको इसकी चिंता करने की आवश्यकता नहीं जब तुम ये विद्या सीखोगी तुमको भी मुझे निचोड़ना आ जाएगा ।
प्राची मुस्कुरा कर गोसाईं जी के गले लग जाती है और लिंग को हाथ से ज़ोर ज़ोर से दबाती है , प्राची गोसाईं जी के ऊपर चढ़ जाती है और उनके ढीले लिंग को अपनी ताजी  चुदी हुई ढीली चूत में डालती है । गोसाईं जी को प्राची का पहल किए जाना अच्छा लगता है और वो भी प्राची का साथ देते है । प्राची लिंग को अंदर डाले डाले ही गोसाईं जी से पूछती है : तो क्या हर साल मेरी माँ यहाँ आती है तो आप संभाग करते है?
गोसाईं जी: हाँ हर बार ।
प्राची : मेरे पापा को क्या ये बात पता है ?
गोसाईं जी के लिंग में अब तनाव आना चालू हो जाता है , लिंग प्राची के सवालों के कारण सख्त होते जा रहा था । गोसाईं जी प्राची के स्तनों पे हाथ फेरा कर उनको सहलाते हुए बोले : हाँ पता है । जब शीला तुम्हारी उम्र की थी तब से आ रही और तुम्हारे पापा ही का रहे है ।
प्राची : लेकिन उनको तो आपत्ति होनी चाहिए ?
गोसाईं जी : तुम्हारे पापा और शीला के बीच में गहरा प्रेम है और तुम्हारे पापा अपनी बीवी की शक्तियों से परिचित भी है इसीलिए वो भी चाहते है कि उनकी बीवी की शक्तियां बनी रहे । शीला ने अपने पति को सही तरीक़े से समझाया है और मेरी जितनी भी शिष्या है सबके पति या पिता को पता ही होता है सब उन्हें लाते है तुम्हारे पापा ही अकेले नहीं है ।
प्राची : क्या पापा में आप लोगो को कभी देखा है ?
गोसाईं जी : यहाँ इस गुफा में केवल वो ही आ सकते है जिनको तंत्र सीखना है या सीख चुके है तो यहाँ नहीं देखा लेकिन मैं जब शहर गया था तब एक रात शीला के साथ रुका था तब शीला के अनुरोध पर उनको हमारी कामक्रीडा देखने दिया था ।
प्राची ये सुनके उत्तेजित हो जाती है और अपना कमर हिलाना चालू कर देती है । वो कहती है : ये सुख जो आपसे मिल रहा मुझे भी मेरी माँ की तरह हमेशा लेना है , मेरा पति आशीष भी मान जाएगा ना ?
गोसाईं जी: वो ख़ुद तुमको लायेगा और बाहर इंतज़ार करेगा । मैं तुमको इतना ताक़तवर बना दूँगा ।
प्राची जोश में आकर झटके तेज मारती है और गोसाईं जी से अनुरोध करती है: आप एक झलक अपने लिंग के ताक़त का दिखा दो , मेरी चूत का रस अपने लंड के अंदर लो।
गोसाईं जी : तुमको नुकसान हो सकता है जब सीखोगी तभी करेंगे ।
प्राची झुक के गोसाईं जी के निप्पल को चूसती है और दाँत से काट कर बोलती है : आप सायन्मित है केवल एक बार मुझे उस ताक़त का झलक दिखला दीजिए ।
गोसाईं जी प्राची के प्रहार से उत्तेजित होके अपने लिंग से प्राची के चूत का पानी अंदर खींचते है , प्राची को लगता है किसी ने उसके चूत में वैक्यूम क्लीनर डाल दिया हो । लगभग एक मिनट में ही प्राची की चूत सूख जाती है और उत्तेजित होके प्राची झाड़ जाती है , प्राची को झाड़ता देख गोसाईं जी तुरंत लिंग को प्राची की चूत से बाहर निकाल कर प्राची का सर अपने हाथ से पकड़ के लिंग पे लगाते है और उसके मुँह में अपना लिंग देके खींचा हुआ सारा तरल प्राची के मुँह में डालते है । प्राची सारा तरल पी जाती है और लिंग की थोड़ी चुसाई करने के बाद गोसाईं जी के बगल में लेट जाती है । प्राची आज चौथे बार झड़ी लेकिन अंतिम बार में ऐसे लग रहा था जैसे तीन बार से ज़्यादा ऊर्जा खर्च हुआ है प्राची गोसाईं जी के कंधों पर सर रख कर सो गई ।
अगले दिन नैनी  जब आई तो वो एक टोकरी में कुछ फल सब्जिया लेके आई  जिसमे परवल , खीरा , नींबू इत्यादि थे ।
नैनी ने प्राची को बताया की आज से उसकी दीक्षा का दूसरा चरण चालू होगा , जिसके लिए प्राची को अपनी चूत मजबूत करनी होगी । प्राची ने नैनी को बताया की गोसाईं जी उनको सब बता चुके है । नैनी ने बोला की मैं दिखा के सिखाती हूँ और उसने टोकरी से एक खीरा निकालने साड़ी उठा के अपनी चूत में डाल लिया और तुरंत खीरा निकला टी उसका अंदर का भाग दो टुकड़े में टूट गया था । नैनी ने प्राची को अंदर की माँसपेंसियों के बारे में सिखाया और बताया कि कैसे उसे नियंत्रित किया जा सकता है , नैनी ने समझाया कि हर दिन प्राची को एक सब्ज़ी या फल को लेके उसे चूत से मसलने की अभ्यास करना है । परवल से चालू करके खीरा और हफ़्ते के आख़िर में उसकी चूत इतनी मज़बूत होनी चाहिए कि नींबू का भी रस निकाल ले ।
प्राची बिना सवाल करे अभ्यास में लगती है । और अगले पाँच दिनों तक इसी अभ्यास में रहती है , गोसाईं जी इन पाँच दिनों में बीच बीच में आके प्राची का हौसला बढ़ाते थे और रात का संभोग लगभग रोज़ ही होता था लेकिन गोसाईं जी अब अपनी पूरी ताक़त लगा के प्राची के चूत पे प्रहार करते थे जिससे उसकी चूत की माँसपेशियाँ मजबूत हो जाए ।
नैनी भी प्राची को हमेशा आके कुछ ना कुछ काम की बात बताती थी जिसके परिणाम स्वरूप प्राची अपनी छोड़ को हफ़्ते के आख़िर दिन तक इतना मजबूर और लेती है कि नींबू निचोड़ के उसका रस निकल लेती है । जब नैनी ने ये बात गोसाईं जी को बताया कि प्राची तैयार हो गई है तो गोसाईं जी तुरंत गुफा में एक ताज़ा बड़ा नींबू लेके आए और प्राची को देके कहा दिखाओ इसे निचोड़ के । प्राची ने नींबू चूत में डाला और पूरी ताक़त लगा के नींबू को निचोड़ दिया नींबू का रस प्राची की चूत से बाहर आ रहा था और जलन के कारण आँख से आँसू बह रहे थे । गोसाईं जी ने चूत में उँगली डाल के नींबू को बाहर फेंका और घुटने में बैठ के प्राची की चूत चाट के साफ़ कर दिया । गोसाईं जी प्राची को बोले की तुम अब गुप्त संभोग हेतु तैयार हो । प्राची गर्व से अपना सर हाँ में हिलाई और नैनी को धन्यवाद देते हुए गले लग गई ।
अगला भाग जल्द ही ……
 
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तांत्रिक बहू - by Gomzey - 23-11-2025, 03:30 PM
RE: तांत्रिक बहू - by Pvzro - 24-11-2025, 07:29 PM
RE: तांत्रिक बहू - by Gomzey - 02-12-2025, 08:40 AM
RE: तांत्रिक बहू - by Davit - 03-02-2026, 05:57 PM



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