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Incest परिवार के गंदे राज़
#81
अमन ने धीरे-धीरे अपनी उंगली कमला चाची की गाँड से बाहर खींची। उंगली चमक रही थी और उससे तेल और उनकी गरमाई चिपकी हुई थी। कमला चाची ने एक लंबी, काँपती साँस ली। उनका शरीर अभी भी हल्की-हल्की लहरों में काँप रहा था।
अमन ने उनकी कमर दोनों हाथों से पकड़ी और एक ही झटके में उन्हें चित कर दिया। कमला चाची अब बिस्तर पर फैली हुई थीं। उनके विशाल स्तन तेल की वजह से दीये की रोशनी में चमक रहे थे। निप्पल पूरी तरह खड़े और गाढ़े लाल हो चुके थे। अमन एक पल के लिए बस उन्हें निहारता रहा। फिर झुक गया।
उसने बाएँ स्तन को दोनों हथेलियों से दबाया और मुँह में भर लिया। इतनी जोर से चूसा कि कमला चाची की कमर बिस्तर से उठ गई और एक गहरी सिसकारी निकल गई।
“आआआह्ह्ह… अमन… हाँ… जोर से चूस… मेरे दूध को पी जा…”
अमन ने निप्पल को जीभ से तेज-तेज फटकारा, फिर दाँतों के बीच हल्के से दबाकर खींचा। दूसरा स्तन भी नहीं छोड़ा। एक हाथ से उसे मसलते हुए मुँह से दूसरे को जोर-जोर से चूसने लगा। कमला चाची के नाखून उसकी पीठ पर गड़ गए। उनकी साँसें अब पूरी तरह बिखर चुकी थीं।
उसी समय अमन का दाहिना हाथ नीचे की तरफ बढ़ गया। उंगलियाँ उनकी गर्म जाँघों के बीच पहुँचीं। चूत पहले से ही पूरी तरह भीगी हुई थी। पानी जाँघों की अंदरूनी सतह पर चमक रहा था। अमन ने दो उंगलियाँ एक साथ अंदर धंसा दीं।
“आआआआह्ह्ह्ह…!” कमला चाची की चीख निकल गई। उनका शरीर मचल उठा।
अमन स्तन चूसते हुए उंगलियों को तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। कभी उंगलियों को मोड़कर अंदर की दीवार को सहलाता, कभी अंगूठे से ऊपर वाली घुंडी को जोर से रगड़ता। कमला चाची का सिर बार-बार तकिये पर इधर-उधर हो रहा था। उनके स्तन अमन के मुँह और हाथों में दब-दबकर और भी लाल और संवेदनशील हो गए थे।
“आह्ह्ह… चूस मुझे… और उंगली… और तेज कर… आआह्ह… मेरी चूत पूरी गिली हो गई है तेरे लिए…”
थोड़ी देर बाद कमला चाची ने खुद अमन का हाथ पकड़कर ऊपर खींचा। उनकी आँखें कामुकता से भारी थीं। उन्होंने अमन के अंडरवियर के इलास्टिक में उंगलियाँ डाल दीं और एक झटके में उसे नीचे खींच दिया। अमन का मोटा, नसों से भरा, पूरी तरह खड़ा लंड झटके से बाहर निकल आया। सिर चमक रहा था और हल्का सा पानी टपक रहा था।
कमला चाची ने उसे दोनों हाथों में ले लिया। आँखें फैल गईं। उन्होंने लंड को धीरे-धीरे जड़ से लेकर सिर तक सहलाया।
“बाप रे… कितना मोटा और भारी हो गया है तू…,” उन्होंने हांफते हुए कहा। आवाज में हवस साफ थी। “इतना गरम… इतना सख्त… आज तो ये लंड मेरी चूत फाड़ देगा। कितना रसीला लग रहा है… मुँह में ले लूँ क्या?”
अमन ने कुछ नहीं कहा। बस उनकी जाँघें और चौड़ी कर दीं। खुद धीरे-धीरे नीचे सरक गया। कमला चाची के दोनों पैर उसके कंधों पर रख दिए। फिर अपना चेहरा उनकी पूरी खुली, चमकती और पानी से लथ-पथ चूत के सामने ले गया।
पहले उसने गहरी साँस में उनकी गंध ली। फिर जीभ निकालकर सबसे नीचे से लेकर ऊपर तक एक बहुत धीमा और लंबा चाटा मारा। कमला चाची की कमर जोर से उछल गई।
“आआआआह्ह्ह्ह… अमन…!”
अमन ने रुके बिना दोनों हाथों से उनकी मोटी गाँड पकड़ ली और अपनी जीभ उनकी चूत के अंदर धंसा दी। तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। कभी ऊपर वाली घुंडी को जोर से चूसता, कभी जीभ को पूरा अंदर डालकर घुमाता, कभी नीचे की तरफ जाकर छोटी छेद को भी चाट जाता। चूसने और पानी की आवाजें कमरे में गूँजने लगीं।
कमला चाची अब पूरी तरह नियंत्रण खो चुकी थीं। दोनों हाथों से अमन का सिर पकड़कर अपनी चूत में और जोर से दबाने लगीं। उनकी जाँघें काँप रही थीं।
“आआआह्ह्ह… ओоооह्हह्ह… हाँ… ऐसे ही… मेरी रसीली चूत चूस… जीभ अंदर तक ले जा… आआह्ह… और तेज… अमन… मैं… मैं जाने को हुई… आआआह्ह्ह… माँаааа…!”
उनका शरीर अचानक बहुत तेज अकड़ गया। जाँघें अमन के सिर को जकड़ गईं। एक लंबी, काँपती और दबी हुई चीख निकलते हुए उनका पहला पानी अमन के मुँह, नाक और ठुड्डी पर छूट गया। अमन ने जीभ नहीं हटाई। वह उनकी चूत को धीरे-धीरे चाटता और चूसता रहा जब तक उनकी शरीर की लहरें पूरी तरह शांत नहीं हो गईं।
कमला चाची बिस्तर पर पूरी तरह ढीली पड़ी थीं। छाती तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थी। पूरा शरीर पसीने से चमक रहा था। आँखें अधखुली थीं और होंठ हल्के-हल्के काँप रहे थे।
अमन धीरे से ऊपर उठा। उसके होंठ और ठुड्डी उनके पानी से चमक रहे थे। उसने कमला चाची के कान के पास होंठ ले जाकर बहुत धीमी लेकिन भारी आवाज में कहा,
“अब बाकी की प्यास भी बुझाऊँ चाची?”
कमला चाची ने हांफते हुए आँखें खोलीं। आवाज में सिर्फ हवस बची थी।




[img=464x3400][Image: vagina-gif-m.gif] [Image: vagina-gif-26.gif][/img]


अमन ने कमला चाची के कान के पास से होंठ हटाए। उनके चेहरे पर अभी भी पहला पानी छोड़ने के बाद की थकी हुई कामुकता तैर रही थी। अमन उठकर उनके सीने के सामने घुटनों के बल बैठ गया। उसका मोटा, चमकता हुआ लंड सीधे उनके चेहरे के सामने झूल रहा था। सिर से हल्का सा पानी टपक रहा था।
कमला चाची ने आँखें खोलीं। उनकी निगाह लंड पर जाकर ठहर गई। उन्होंने दोनों हाथों से उसे जड़ से पकड़ लिया। हथेलियों में उसका वजन और गर्माहट महसूस करके उनकी साँसें फिर तेज हो गईं।
“इतना मोटा… इतना गरम…,” उन्होंने फुसफुसाकर कहा। “आज तो मेरा मुँह भी फाड़ देगा ये।”
उन्होंने जीभ निकालकर लंड के सिर को धीरे-धीरे चाटा। चारों तरफ घुमाया। फिर आँखें अमन पर टिकाए हुए पूरा सिर मुँह में ले लिया। गहरी साँस के साथ नीचे की तरफ जाने लगीं। आधा लंड उनके मुँह में समा गया। गले तक।
“उम्मम्म… गह्ह्ह…” उनकी नाक से आवाज निकली।
अमन ने उनके बालों में उंगलियाँ फँसा लीं। लेकिन जोर नहीं लगाया। बस महसूस करता रहा। कमला चाची ने लंड को मुँह से बाहर निकाला। लार की लंबी डोर लटक रही थी। फिर से मुँह में लिया। इस बार और गहरा। उनकी गर्दन की मांसपेशियाँ तन गईं। वे जोर-जोर से चूसने लगीं—कभी सिर्फ सिर को चाटतीं, कभी पूरा अंदर ले जाकर गले तक ठेलतीं। आवाजें गंदी और गीली हो रही थीं।
“चाची… बहुत गहरा ले रही हो…,” अमन की आवाज भारी हो गई।
कमला चाची ने लंड मुँह से निकाला। हांफते हुए बोलीं, “तेरा लंड ही ऐसा है… मुँह में लेते ही चूत और भी गिली हो जाती है।” उन्होंने फिर से उसे मुँह में ठूंस लिया। दोनों हाथों से जड़ को मसलती रहीं। अमन की कमर हल्की-हल्की हिलने लगी।
थोड़ी देर बाद अमन ने उनका सिर पीछे खींचा। लंड उनके होंठों से छूटते ही एक पतली लार की लकीर टूटी। अमन ने उन्हें फिर से उल्टा कर दिया। कमला चाची अब घुटनों और हाथों के बल थीं। उनकी विशाल गाँड अमन के बिल्कुल सामने थी—गोल, चमकदार और थपथपाई हुई।
अमन ने दोनों हाथों से उनकी गाँड के भाग फैलाए। बीच में छोटी सी गुलाबी छेद तन गई। उसने झुककर पहले हल्की साँस फूँकी। फिर जीभ निकालकर सीधे उस छेद पर लगा दी।
“आआआह्ह्ह… अमन… वहाँ…!” कमला चाची की कमर झटके से आगे को चली गई।
अमन ने रुके बिना जीभ से उनकी गाँड की छेद को चाटना शुरू कर दिया। कभी गोला बनाता, कभी नोक अंदर धंसाता, कभी पूरे हिस्से को चूस लेता। कमला चाची की सिसकारियाँ अब तकिये में दब रही थीं। उनका शरीर बार-बार मचल रहा था।
“आह्ह्ह… ओоооह… जीभ… अंदर… आआह्ह… गंदी हरकत… लेकिन… मत रोक…!”
अमन ने उनकी गाँड पर एक जोरदार थप्पड़ मारा और जीभ और गहराई तक घुसेड़ दी। कमला चाची की जाँघें काँपने लगीं। पानी उनकी चूत से नीचे की तरफ रिस रहा था।
जब कमला चाची लगभग फिर से झड़ने के करीब पहुँचीं तो अमन ने अचानक पीछे हटा। उनके पीछे घुटनों के बल बैठ गया। अपने लंड का सिर उनकी भीगी चूत पर लगाया। सिर्फ सिर। धीरे-धीरे अंदर धकेला और फिर बाहर निकाल लिया। फिर से सिर्फ सिर अंदर किया। बार-बार। पूरा नहीं डाला।
“आआआह्ह्ह… अमन… मत तड़पा… पूरा डाल…!” कमला चाची ने पीछे मुड़कर देखा। आँखों में याचना थी।
अमन ने उनकी कमर पकड़ी। फिर से सिर्फ सिर अंदर-बाहर करने लगा। चूत की गीली आवाज आने लगी। कमला चाची खुद पीछे की तरफ धक्का देने लगीं, लेकिन अमन हर बार उन्हें रोक लेता।
“पूरा दे… रंडी की तरह चोद मुझे… आआह्ह… कितना तड़पा रहा है… डाल दे अंदर… पूरा…!” कमला चाची की आवाज अब टूट रही थी। गालियाँ और मिन्नतें एक साथ निकल रही थीं। “मेरी चूत फाड़ दे… आज मुझे अपनी रंडी बना ले… अमन… डाल…!”
अमन ने उनकी गाँड पर एक और थप्पड़ मारा। फिर कमर पकड़ी। और एक ही गहरे, जोरदार धक्के में अपना पूरा लंड उनकी चूत में जड़ तक धंसा दिया।
“आआआआआह्ह्ह्हह्ह…!”
कमला चाची की लंबी चीख कमरे में गूँज उठी। उनका शरीर आगे को झुक गया। अमन अंदर तक धंसा हुआ रुका रहा। दोनों की साँसें तेज चल रही थीं।
अब असली चुदाई शुरू होने वाली थी।


[img=464x3400][Image: vagina-gif-51.gif] [Image: big-tits-37.gif][/img]


अमन का पूरा लंड कमला चाची की चूत में जड़ तक धंसा हुआ था। उनकी दीवारें उसके लंड को जोर से जकड़ रही थीं। दोनों एक पल के लिए थम गए। सिर्फ भारी साँसें चल रही थीं। फिर अमन ने कमला चाची की कमर दोनों हाथों से कसकर पकड़ी।
पहले धीमा धक्का। बाहर निकाला… और फिर एक ही झटके में पूरा अंदर तक धंसा दिया।
“आआआआह्ह्ह्ह… अमन…!” कमला चाची की चीख निकली। उनके नाखून चादर में गड़ गए।
अमन ने अब रुकना बंद कर दिया। दोनों हाथों से उनकी मोटी गाँड पकड़कर जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। हर धक्के के साथ उनकी गाँड उसके पेट से टकरा रही थी। थप्पड़-थप्पड़ की आवाज कमरे में गूँजने लगी। लंड की घुसने-निकलने की गीली आवाज साफ सुनाई दे रही थी—छप-छप, छप-छप।
“ले… ले रंडी… इतनी गिली चूत… कितना पानी छोड़ रही है तू…!” अमन की आवाज भारी और गंदी हो गई थी।
“आआह्ह… ओоооह… हाँ… चोद… जोर से चोद… मेरी चूत फाड़ दे… आआह्ह…!” कमला चाची तकिये में मुँह गड़ाए चीख रही थीं। हर धक्के के साथ उनका शरीर आगे को झपटता। स्तन बिस्तर पर रगड़ खा रहे थे।
अमन ने अचानक उनका बालों का जूड़ा पकड़कर सिर पीछे खींच लिया। उनकी कमर और ज्यादा मुड़ गई। अब धक्के और गहरे और तेज हो गए। कमला चाची की चीखें तेज हो गईं।
“आआआह्ह्ह… बाल खींच… और जोर से… आआह्ह… मेरी चूत में आग लग गई… अमन…!”
थोड़ी देर बाद अमन ने लंड बाहर निकाला। कमला चाची कराह उठीं। उन्होंने उन्हें चित कर दिया। दोनों पैरों को फैलाकर अपने कंधों पर रख लिया। फिर एक ही धक्के में पूरा लंड फिर से उनकी चूत में उतार दिया।
“आआआआह्ह्ह्ह… इतना गहरा…!”
अब अमन उनके ऊपर था। एक हाथ से उनका दाहिना स्तन जोर से मसल रहा था, दूसरे से उनकी कमर दबाए हुए था। धक्के इतने जोर के थे कि बिस्तर की चरमराने की आवाज भी आने लगी। कमला चाची के स्तन हर धक्के के साथ ऊपर-नीचे उछल रहे थे। निप्पल अमन की उंगलियों में दब-दबकर लाल हो चुके थे।
“चाची… तेरी चूत कितनी टाइट है… घुट रही है मेरे लंड को…!” अमन हांफते हुए बोला।
“आह्ह… क्योंकि तेरा लंड बहुत मोटा है… आआह्ह… और तेज… मत रोक… आज पूरी रात चोद…!”
अमन ने दोनों स्तनों को एक साथ मुट्ठी में भर लिया और निप्पलों को मरोड़ते हुए धक्के और तेज कर दिए। कमला चाची की आँखें उल्टी होने लगीं। उनका मुँह खुला रह गया। सिर्फ अस्पष्ट आवाजें निकल रही थीं—
“आआआह्ह… ओоооह… उउउम्म… अमन… मैं… फिर से… आआह्ह… जा रही हूँ…!”
उनका शरीर अकड़ गया। जाँघें अमन की कमर को जकड़ गईं। एक लंबी, काँपती चीख के साथ उनका दूसरा पानी अमन के लंड और जाँघों पर छूट गया। अमन रुका नहीं। वह उसी तेज गति से चोदता रहा। पानी की आवाज और भी तेज हो गई।
जब कमला चाची की काँपने की लहरें थोड़ी कम हुईं तो अमन ने उनके पैरों को अपने कंधों से उतारा। खुद पीछे हटा। कमला चाची हांफते हुए बिस्तर पर पड़ी थीं। चूत से पानी रिस रहा था। अमन ने उन्हें फिर से पलट दिया। इस बार गाँड और ऊँची करवाई। तकिया उनके पेट के नीचे रख दिया।
अब उनकी गाँड पूरी तरह उठ गई थी। अमन ने लंड का सिर उनकी चूत पर लगाया और एक ही झटके में जड़ तक धंसा दिया। फिर से डॉगी स्टाइल। लेकिन इस बार और गहराई वाला एंगल।
“आआआआह्ह्ह्ह… बाप रे… अब तो गर्भ तक जा रहा है…!” कमला चाची चिल्लाईं।
अमन ने उनकी गाँड पर बार-बार थप्पड़ मारे। लाल निशान पड़ गए। धक्के इतने जोर के थे कि कमला चाची का पूरा शरीर हर बार आगे को खिसक जाता। वे तकिये को मुँह से पकड़कर चीख रही थीं।
“ले रंडी… ले अपने भतीजे का लंड… इतनी चुदाई कभी किसी ने दी क्या तुझे…?”
“नहीं… आआह्ह… कभी नहीं… तेरा लंड सबसे अलग है… आआह्ह… चोद… मेरी गाँड भी लाल कर दे…!”
अमन ने एक हाथ उनकी गाँड की छेद पर रखा। उंगली गीली करके अंदर धंसा दी। अब एक साथ चूत में लंड और गाँड में उंगली चल रही थी। कमला चाची पागल हो गईं।
“आआआआह्ह्ह… दोनों जगह… आआह्ह… मैं मर जाऊँगी… अमन… बहुत हो गया… आआह्ह…!”
उनका तीसरा पानी भी उसी पोजीशन में निकल गया। शरीर इतना काँपा कि अमन को उनकी कमर कसकर पकड़नी पड़ी। अमन ने उंगली निकाल दी लेकिन लंड अंदर ही रखा। धीरे-धीरे धक्के लगाते हुए उनकी पीठ पर झुक गया। कान के पास गंदी बातें करता रहा।
“अभी तो शुरू की है चाची… रात लंबी है… अभी तेरी दोनों छेद भरूँगा…”
कमला चाची हांफते हुए बस इतना कह पाईं, “भर… आज जितना चाहे भर दे… मैं तेरी रंडी हूँ…”
अमन ने मुस्कुराते हुए फिर से जोरदार धक्के शुरू कर दिए। बिस्तर की चरमराहट, मांस की थपथपाहट, गीली आवाजें और कमला चाची की बेकाबू चीखें—सब मिलकर कमरे को एक गंदे, गर्म जंगल में बदल चुके थे।



[img=464x3400][Image: 23463.gif] [Image: straight-005-12.gif] [Image: straight-006-6.gif] [Image: 59612888.gif] [Image: porn-fat-women-14.gif] [Image: porn-fat-women-13.gif][/img]


अमन ने कमला चाची की कमर और कसकर पकड़ी। अब उसमें कोई रहम नहीं बचा था। उसने डॉगी स्टाइल में ही धक्के की रफ्तार अचानक दोगुनी कर दी। लंड उनकी चूत में इतनी तेजी से अंदर-बाहर हो रहा था कि मांस की थपथपाहट और पानी की छप-छप की आवाज एक हो गई थी।
“आआआआह्ह्ह… अमन… धीरे… बहुत जोर से… आआह्ह… रुक…!” कमला चाची चिल्लाईं। उनका शरीर हर धक्के के साथ आगे को खिसक रहा था।
लेकिन अमन ने सुना ही नहीं। उसने उनके बालों को मुट्ठी में भरकर और पीछे खींच लिया। कमर झुका दी। अब हर धक्का गर्भ की गहराई तक जा रहा था। कमला चाची की चीखें और तेज हो गईं।
“आआआह्ह… चुतिया… इतना जोर से मत चोद… मेरी चूत फट जाएगी… आआह्ह…!”
अमन ने उनकी गाँड पर दो जोरदार थप्पड़ मारे। “चुप रख रंडी… तू तो इसलिए लेटी है कि मैं तुझे जानवर की तरह चोदूँ… ले अब…!”
वह और बेतहाशा हो गया। दोनों हाथों से उनकी मोटी गाँड को फैलाए हुए इतनी ताकत से धक्के मार रहा था कि कमला चाची का पूरा शरीर काँप रहा था। बिस्तर की चरमराने की आवाज तेज हो गई। कमला चाची अब गालियाँ बकने लगीं—बहुत गंदी।
“आआह्ह… साले… भतीजे का लंड… मेरी चूत में… आआह्ह… रंडी बना दी तूने मुझे… चोद… और चोद… हरामी… आआह्ह… मेरी चूत का पानी निकाल…!”
अमन ने अचानक लंड बाहर निकाला। कमला चाची कराह उठीं। उसने उन्हें फिर से चित किया। दोनों पैरों को फैलाकर लगभग कंधों तक मोड़ दिया। फिर एक ही झटके में पूरा लंड फिर से उनकी चूत में उतार दिया। अब मिशनरी में भी वही जानवर वाली ताकत थी।
“आआआआह्ह्ह्ह… बापू… इतना गहरा…!”
अमन उनके ऊपर लेट गया। एक हाथ से उनका गला हल्के से दबाए हुए था, दूसरे से स्तन मसल रहा था। धक्के इतने भारी थे कि कमला चाची की साँसें अटकने लगीं। वे अमन की पीठ पर नाखून चला रही थीं। खून की हल्की लकीरें निकल आईं।
“साले… जानवर… मेरी चूत फाड़ रहा है… आआह्ह… चोद… और तेज… रंडी की औलाद… आआह्ह…!”
अमन ने उनका गला छोड़कर दोनों स्तनों को मुट्ठी में भर लिया। निप्पलों को मरोड़ते हुए धक्के और तेज कर दिए। कमला चाची की आँखें अब पूरी तरह उल्टी हो चुकी थीं। मुँह से लार बह रही थी। वे सिर्फ गालियाँ और चीखें निकाल पा रही थीं।
“आआह्ह… चुदाई के प्यासे कुत्ते… मेरी चूत चोद… आआह्ह… पानी… फिर से पानी आ रहा है… आआआह्ह्ह…!”
उनका चौथा पानी इतनी जोर से छूटा कि अमन के पेट और जाँघों तक भीग गया। लेकिन अमन रुका नहीं। वह उसी रफ्तार से चोदता रहा। कमला चाची का शरीर अब बेकाबू काँप रहा था। वे लगभग बेहोश जैसी हो गई थीं, लेकिन गालियाँ अभी भी मुँह से निकल रही थीं।
थोड़ी देर बाद अमन ने लंड बाहर निकाला। कमला चाची हांफते हुए बिस्तर पर पड़ी थीं। चूत पूरी तरह खुली और लाल हो चुकी थी। पानी लगातार रिस रहा था। अमन ने उन्हें फिर से उल्टा किया। गाँड ऊपर की। इस बार उसने लंड का सिर उनकी गाँड की छोटी छेद पर लगाया।
कमला चाची ने महसूस करते ही आँखें फाड़ दीं। “नहीं… अमन… वहाँ नहीं… बहुत मोटा है… फट जाएगी… आआह्ह…!”
अमन ने कुछ नहीं सुना। उसने दोनों हाथों से उनकी गाँड फैलाई और धीरे-धीरे लेकिन लगातार दबाव डालते हुए लंड का सिर अंदर धकेला। कमला चाची की चीख निकल गई।
“आआआआआह्ह्ह्ह… माँ… निकाल… बहुत दर्द… आआह्ह…!”
अमन रुक गया। बस सिर अंदर था। फिर धीरे-धीरे और अंदर धकेलने लगा। आधा… फिर और… जब पूरा लंड उनकी गाँड में समा गया तो दोनों थम गए। कमला चाची के शरीर में पसीना छूट रहा था। आँखों से आँसू निकल आए थे।
“आह्ह… साले… गाँड फाड़ दी… आआह्ह… हरामी…!”
अमन ने उनकी कमर पकड़ी। पहले बहुत धीमे धक्के लगाए। फिर धीरे-धीरे रफ्तार बढ़ाई। जब कमला चाची की गाँड थोड़ी ढीली पड़ी तो उसने जोरदार धक्के शुरू कर दिए। अब गाँड की चुदाई भी उतनी ही जानवर जैसी हो गई थी जितनी चूत की थी।
“आआआह्ह… ओоооह… गाँड… फट रही है… आआह्ह… चोद… साले… मेरी गाँड चोद… रंडी बना दी तूने… आआह्ह…!”
अमन ने एक हाथ उनकी चूत पर रखा। उंगलियों से घुंडी को रगड़ते हुए गाँड में जोर-जोर से लंड ठेलने लगा। कमला चाची पागल हो गईं। वे तकिये को दाँतों से पकड़कर चीख रही थीं और गालियाँ बक रही थीं।
“आआह्ह… भोसड़ीके… गाँड में लंड… चूत में उंगली… आआह्ह… मैं मर गई… चोद… और चोद… हरामी जानवर… आआआह्ह्ह…!”
अमन की साँसें भी अब उखड़ने लगी थीं। उसने उनकी गाँड पर बार-बार थप्पड़ मारे। लाल निशान और गहरे हो गए। धक्के इतने भारी हो गए कि कमला चाची का पूरा शरीर हर बार बिस्तर में धँस जाता। आखिरकार अमन ने कुछ गहरे, भारी धक्के लगाए और उनकी गाँड के अंदर ही अपना पूरा पानी छोड़ दिया। गरम धाराएँ उनकी आँतों में भर गईं।
“आआआह्ह… भर दी… साले… गाँड में भर दी… आआह्ह…!” कमला चाची की आखिरी चीख निकली। उनका शरीर एक लंबी काँप के साथ ढीला पड़ गया।
अमन कुछ देर तक अंदर ही पड़ा रहा। दोनों के शरीर पसीने से पूरी तरह नहाए हुए थे। कमरे में सिर्फ भारी साँसों की आवाज बची थी। दीये की लौ लगभग बुझने के करीब थी।
अमन ने धीरे से लंड बाहर निकाला। कमला चाची की गाँड से उसका पानी रिसने लगा। वे बिस्तर पर बेहोश जैसी पड़ी थीं। शरीर पर थप्पड़ों और नाखूनों के निशान थे। चूत और गाँड दोनों लाल और सूजे हुए थे।
अमन उनके पास लेट गया। उनके बालों को चेहरे से हटाया। कमला चाची ने आँखें थोड़ी सी खोलीं। आवाज पूरी तरह बैठ चुकी थी।
“जानवर…,” उन्होंने हांफते हुए फुसफुसाया। “आज… सच में रंडी बना दिया तूने…”
अमन ने उनके माथे पर हल्का चुंबन किया। दोनों थककर एक-दूसरे के पास पड़े रहे। रात अब अपनी अंतिम गहराई में डूब रही थी।





अमन और कमला चाची दोनों इतने थक चुके थे कि न तो अमन अपने कमरे जा सका, न कमला चाची कुछ बोल पाईं। वे उसी बिस्तर पर, एक-दूसरे के पास ही सो गए। कमला चाची का सिर अमन की छाती पर था। अमन का एक हाथ उनकी कमर पर पड़ा रह गया। दीये की लौ धीरे-धीरे बुझ गई। कमरे में सिर्फ उनकी भारी लेकिन नियमित साँसें रह गईं।
सुबह की हल्की रोशनी खिड़की से अंदर आ रही थी जब कमला चाची पहले उठीं। शरीर में दर्द था—खासकर जाँघों और निचले हिस्से में। वे थोड़ा लंगड़ाते हुए उठीं, लेकिन चेहरे पर एक अजीब सी शांत खुशी थी। उन्होंने अमन को हल्के से जगाया।
“अमन… उठो बेटा। अब अपने कमरे चले जाओ। कोई उठने वाला है।”
अमन नींद भरी आँखों से उठा। शरीर भारी लग रहा था। लंड में भी हल्का दर्द हो रहा था। कमला चाची ने उसके कपड़े उठाकर दिए। अमन ने चुपचाप पहन लिए। कमला चाची पहले ही नहा चुकी थीं। बाल गीले थे, चेहरा साफ था। साड़ी भी नई पहनी हुई थी। देखने से बिलकुल नहीं लग रहा था कि कल रात यही औरत इतनी बेकाबू होकर चुदी थी कि चलने लायक भी न रहे। बस थोड़ा धीरे चल रही थीं और आँखों में हल्की सी चमक बाकी थी।
अमन ने दरवाजा धीरे से खोला और अपने कमरे की तरफ चल दिया। गलियारा अभी भी शांत था। वह अपने बिस्तर पर जाकर लेट गया। शरीर इतना थका हुआ था कि आँखें तुरंत बंद हो गईं। आज कॉलेज जाने का कोई इरादा नहीं था। लंड में दर्द हो रहा था और पूरी रात की थकान हड्डियों में बस गई थी। वह दिन भर आराम करने वाला था।
रात का समय हुआ। घर फिर से शांत हो चुका था। अमन अभी भी अपने कमरे में लेटा हुआ था कि दरवाजे पर हल्की दस्तक हुई। रेणु अंदर आईं। लालटेन लेकर। उन्होंने दरवाजा बंद किया और बिस्तर के किनारे बैठ गईं।
अमन ने इस बार विस्तार से सब बता दिया। कैसे उसने कमला चाची को ठीक वैसा ही चोदा जैसा रेणु ने कहा था—जानवर की तरह, बिना रहम के, दोनों छेदों में। कैसे कमला चाची गालियाँ बकती रहीं और कैसे आखिर में गाँड भी फाड़ दी। फिर उसने अपने लंड के दर्द के बारे में भी बताया।
रेणु अंत तक चुपचाप सुनती रहीं। जब अमन खत्म हुआ तो उन्होंने हल्की मुस्कान दी।
“अच्छा किया। उन्हें वैसी ही चाहिए थी।” फिर उनकी आवाज थोड़ी गंभीर हो गई। “लंड में दर्द हो रहा है न?”
अमन ने सिर हिलाया।
रेणु ने कहा, “कल कॉलेज से लौटते समय शहर से एक ट्यूब ले आना। मैं नाम लिखकर दे देती हूँ। उसे लगा लेना। आराम हो जाएगा। और हाँ… अब कुछ दिनों तक कोई चुदाई नहीं। शरीर को आराम चाहिए।”
अमन ने रेणु का हाथ पकड़ लिया। आँखों में आँखें डालकर बोला, “दीदी… लेकिन मैं आपको ऐसे कभी नहीं चोदूँगा। मैं आपको बहुत प्यार करता हूँ। अगर आप मेरी बहन नहीं होती… तो आपसे ही शादी कर लेता।”
रेणु का चेहरा हल्का सा लाल हो गया। वे शर्मा गईं। उन्होंने अमन की तरफ देखा और धीमे स्वर में कहा, “बहुत बातें बनाने लगा है तू nowadays।”
फिर उन्होंने अमन के माथे पर बहुत हल्का और लंबा चुंबन किया। होंठ कुछ पल तक वहीं रुके रहे। उसके बाद वे उठ खड़ी हुईं।
“सो जाओ। आराम करो।”
रेणु मुस्कुराते हुए कमरे से निकल गईं। दरवाजा धीरे से बंद हो गया।
अमन अकेला रह गया। छत की तरफ देखते हुए लेटा रहा। शरीर थका हुआ था, लंड में दर्द था, लेकिन मन में एक अजीब सी शांति थी। कमला चाची वाली रात खत्म हो चुकी थी। अब कुछ दिन आराम। और रेणु का वह हल्का शर्माना… उसके दिमाग में बार-बार घूम रहा था।
वह करवट लेकर सो गया।
रात फिर शांत हो गई।
Fuckuguy
albertprince547;
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#82
Very nice update waiting for next ji
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#83
Nice update ghar mein Pahla account Chachi ki choot name ki bank mein khul gaya hai agla number kiska hoga waiting for next
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#84
अमन की आँखें सुबह की रोशनी के साथ खुलीं। शरीर अभी भी भारी था, लेकिन कल जितनी थकान नहीं रह गई थी। लंड में हल्का दर्द बाकी था। उसने करवट ली, फिर उठकर बैठ गया। आज कॉलेज जाना जरूरी था।
नहा-धोकर तैयार हुआ। नाश्ता करके निकला। गली में राधा पहले से खड़ी थी। दोनों की निगाहें मिलीं। राधा ने हल्की मुस्कान दी।
“आज आ गए कॉलेज?” राधा ने धीमे स्वर में पूछा। “कल छुट्टी मार ली थी।”
अमन मुस्कुराया। “थोड़ा आराम चाहिए था। तबीयत ठीक नहीं लग रही थी।”
दोनों साथ-साथ कॉलेज की तरफ चलने लगे। बातें हल्की रहीं—पढ़ाई, मौसम, छोटी-मोटी बातें। राधा के चेहरे पर राहत थी कि अमन फिर सामान्य व्यवहार कर रहा है। कक्षा में पहुँचते ही अमन ने देखा कि राजिया आज आ गई थी। वह अपनी जगह पर बैठी थी। निगाहें अमन पर गईं। दोनों ने एक-दूसरे को देखा। राजिया ने बहुत हल्के से सिर हिलाया।
ब्रेक में राजिया मौका देखकर अमन के पास आई। आसपास भीड़ थी, लेकिन उसने धीमी आवाज में पूछा, “घर कब आओगे?”
अमन ने चारों तरफ देखा। राधा अपनी सहेलियों के साथ बात कर रही थी, उनकी तरफ पीठ किए हुए। अमन ने राजिया की तरफ झुककर बहुत धीमे स्वर में कहा, “जल्द। सब्र करो मेरी जान।”
राजिया के गाल हल्के लाल हो गए। उसने कुछ नहीं कहा, बस नज़रें झुकाकर वहाँ से चली गई। अमन ने राधा की तरफ देखा—वह कुछ नहीं देख पाई थी।
कॉलेज खत्म होने के बाद अमन घर पहुँचा। लंड में दर्द अभी भी हल्का-हल्का हो रहा था। उसने माँ से कहा, “माँ, पिताजी की बाइक दे दो। शहर जाकर एक दवाई लेनी है। डॉक्टर ने बताई थी।”
माँ ने अनुमति दे दी। अमन ने बाइक निकाली और पास के शहर की तरफ निकल पड़ा। हवा चेहरे पर लग रही थी। कई दिनों बाद शहर का रास्ता अच्छा लग रहा था। दिमाग थोड़ा हल्का हो रहा था।
शहर पहुँचकर उसने एक केमिस्ट की दुकान ढूँढी। रेणु ने जो नाम बताया था, वही ट्यूब खरीद ली। दवाई लेकर वह थोड़ा और आगे गया। नज़र एक साफ-सुथरी कॉफी शॉप पर पड़ी। मन किया थोड़ी देर रुकने का। बाइक साइड में लगाई और अंदर चला गया।
कॉफी शॉप आधुनिक थी। हल्की संगीत की आवाज आ रही थी। अमन ने एक कोने में बैठकर चाय का ऑर्डर दिया। थोड़ी देर बाद एक लड़की ट्रे लेकर आई।
अमन ने सिर उठाया… और बस देखता रह गया।
लड़की बिल्कुल किसी फिल्मी हीरोइन जैसी लग रही थी। गोरी रंगत, लंबे बाल, तेज फीचर्स। जेह्नवी कपूर जैसी अदाएँ। आधुनिक कपड़ों में थी—फिट जींस और हल्के रंग की टॉप। चलने का अंदाज भी शहर जैसा था। वह मुस्कुराते हुए अमन के टेबल के पास आई।
“सर, योर टी,” उसने अंग्रेजी में कहा। आवाज साफ और मीठी थी।
अमन जैसे सपने से जागा। “हाँ… थैंक यू।”
लड़की ने कप टेबल पर रखा, एक बार मुस्कुराई और दूसरी टेबल की तरफ चली गई। अमन उसकी पीठ देखता रह गया। मन में एक अजीब सा खिंचाव पैदा हो गया। इतनी आधुनिक और खूबसूरत लड़की… गाँव के लड़के के लिए बिल्कुल अलग दुनिया जैसी लग रही थी।
उसने चाय पी। लेकिन मन नहीं भरा। उसने एक वेटर को बुलाया। पाँच सौ का नोट देते हुए धीमे स्वर में पूछा, “वो जो लड़की थी… चाय देने वाली… वो कौन है?”
वेटर ने नोट लिया और मुस्कुराते हुए बताया, “वो इस कॉफी शॉप की मालकिन हैं सर। सोनाल जी। खुद संभालती हैं सब कुछ।”
अमन ने सिर हिलाया। सोनाल। नाम भी कानों में अच्छा लगा। वह उससे बात करना चाहता था, लेकिन जल्दबाजी नहीं करनी थी। आज पहली मुलाकात थी। बस देखने में ही सब कुछ कह गया था।
चाय खत्म करके वह उठा। बाइक की तरफ बढ़ा। शहर की हलचल छोड़कर गाँव की तरफ निकल पड़ा। दिमाग में सोनाल का चेहरा बार-बार आ रहा था—उसकी मुस्कान, उसकी आवाज, उसका आधुनिक अंदाज।
गाँव के करीब पहुँचते-पहुँचते सूरज ढलने लगा था। और रस्ते में आगे कुछ और इंतजार कर रहा था।


गाँव के बाहरी रास्ते पर अमन बाइक धीमी कर रहा था कि अचानक एक परिचित आवाज आई।
“अरे बाबूजी के बेटे!”
अमन ने बाइक रोक दी। रुक्साना सड़क के किनारे खड़ी थीं। काले सूट में। बाल खुले हुए। उन्होंने अमन को देखते ही मुस्कुरा दिया और पास आ गईं।
“कहाँ चले गए थे इतनी देर?” रुक्साना ने पूछा। आवाज में हल्की शिकायत और शरारत दोनों थी। “मैं तो सोच रही थी कहीं खो तो नहीं गए।”
अमन बाइक पर बैठे-बैठे मुस्कुराया। “शहर गया था काकी। दवाई लेने।”
रुक्साना और करीब आ गईं। उन्होंने बाइक के हैंडल पर हाथ रख दिया। उंगलियाँ अमन की उंगलियों के बहुत पास थीं। “दवाई… या कोई और चीज?” उन्होंने आँखें सिकोड़ते हुए कहा। “चेहरा देखकर लग रहा है मन कहीं और उलझा हुआ है।”
अमन ने उनकी आँखों में देखा। रुक्साना की निगाह साफ चुनौती दे रही थी। उन्होंने अपना पल्लू ठीक करते हुए और धीमी आवाज में कहा, “कभी हमारे बगीचे में भी आ जाया करो। आम तो अब बहुत मीठे हो गए हैं… और कुछ चीजें तो छूने से भी मीठी लगती हैं।”
अमन के मन में ख्याल आया—“एक बार रेणु दीदी से पूछकर इसका भी काम खत्म कर दूँ। वैसे भी इसकी मोटी गाँड का ख्याल कई दिनों से दिमाग में है।” उसने हल्की मुस्कान दी। “जल्द ही आऊँगा काकी। वादा।”
रुक्साना ने उसका हाथ हल्के से दबाया। “वादा याद रखना। ज्यादा देर मत लगाना।” फिर वे मुस्कुराते हुए एक तरफ हो गईं। अमन ने बाइक स्टार्ट की और घर की तरफ बढ़ा।
घर पहुँचते ही आँगन में कमला चाची खड़ी थीं। उन्होंने अमन को देखते ही आवाज लगाई।
“कहाँ खो गए थे इतनी देर? बाइक लेकर निकले थे तो लगा कहीं भाग ही गए।”
अमन पास गया। चारों तरफ देखा। आँगन खाली था। माँ अंदर थीं। उसने हल्की शरारत भरी आवाज में कहा, “चाची, आपकी याद आ रही थी इसलिए जल्दी लौट आया।”
कमला चाची की आँखों में चमक आ गई। अमन ने एक बार फिर आसपास देखा, फिर साड़ी के पल्लू के अंदर हाथ सरका दिया। उंगलियाँ सीधे उनकी चूत पर जा लगीं। कपड़ों के ऊपर से ही। बहुत गरम और थोड़ी नम थी।
कमला चाची की कमर हल्की सी काँप गई। “आह्ह… शैतान… यहाँ… कोई देख लेगा…” लेकिन उन्होंने अमन का हाथ नहीं हटाया। बल्कि एक पल के लिए और सट गईं।
अमन ने उंगलियों से हल्का दबाव डाला, फिर हाथ निकाल लिया। “बाद में मिलते हैं चाची।” इतना कहकर वह मुस्कुराते हुए अपने कमरे की तरफ भाग गया। पीछे कमला चाची खड़ी मचलती रह गईं।
कमरे में आकर अमन ने तुरंत पैंट का नाड़ा खोला। रेणु वाली ट्यूब निकाली और लंड पर धीरे-धीरे लगाने लगा। ठंडी क्रिम लगते ही हल्का आराम मिला। दर्द कुछ कम हुआ। वह बिस्तर पर लेट गया।
दिमाग में पहले कॉफी शॉप वाली सोनाल का चेहरा आया। इतनी आधुनिक, इतनी अलग। “क्या मैं उसे पटा सकता हूँ? वह शहर की मालकिन है… मैं गाँव का लड़का…” फिर रुक्साना का ख्याल आया। उसकी मोटी गाँड, उसकी बेशर्म निगाहें। “आज रात रेणु दीदी से पूछता हूँ। रुक्साना बहुत तंग कर रही है। इसे भी लंड का सबक सिखाना होगा।”
इन्हीं ख्यालों में उसकी आँखें बंद हो गईं। नींद आ गई।
रात के लगभग बारह बजे दरवाजे पर दस्तक हुई। रेणु अंदर आईं। लालटेन लेकर। उन्होंने अमन को हल्के से जगाया। अमन उठकर बैठ गया।
“सब बताओ,” रेणु ने सीधे कहा।
अमन ने दिन की हर बात विस्तार से बताई—राजिया वाली छोटी बात, शहर जाकर दवाई लेना, कॉफी शॉप में सोनाल से मुलाकात, फिर रास्ते में रुक्साना का फ्लर्ट, और घर आकर कमला चाची के साथ किया गया छोटा सा शरारती स्पर्श।
रेणु ने ध्यान से सुना। रुक्साना वाली बात पर उन्होंने सिर हिलाया। “ठीक है। लेकिन ध्यान से करना। वह राजिया की माँ है। कोई गलती हुई तो उलझ सकता है।”
फिर सोनाल वाली बात पर रेणु मुस्कुराईं। “अगर तुम चाहो तो कोई भी लड़की पट सकती हो। तुम्हें बस बातें बनानी आनी चाहिए… और वह तो अब अच्छी आती हैं। इतना टेंशन मत लो।”
अमन ने रेणु का हाथ पकड़ लिया। “दीदी… आपके साथ सुहागरात कब मना सकता हूँ?”
रेणु का चेहरा फिर से हल्का लाल हो गया। उन्होंने अमन की तरफ देखा और धीमे स्वर में कहा, “ज्यादा शैतान हो गया है तू। सब कुछ तो दे चुकी हूँ तुझे… बस थोड़े दिन और रुक जा।”
फिर उन्होंने अमन के होंठों पर एक नरम लेकिन गहरा चुंबन कर दिया। कुछ पल तक होंठ जुड़े रहे। उसके बाद रेणु उठ खड़ी हुईं।
“सो जाओ। आराम करो।”
वे मुस्कुराते हुए कमरे से निकल गईं।
अमन बिस्तर पर लेटा रहा। रेणु के चुंबन की गर्माहट होंठों पर बाकी थी। लेकिन दिमाग में एक नाम घूम रहा था।
अगला टारगेट—रुक्साना।
वह करवट लेकर सो गया।

अगले दिन अमन ने सामान्य दिनचर्या से कॉलेज गया।
सुबह राधा गली में मिली। दोनों साथ-साथ चले। बातें हल्की रहीं—पढ़ाई, आने वाले टेस्ट, छोटी-मोटी बातें। राधा के चेहरे पर मुस्कान थी। अमन ने जानबूझकर उसके करीब रहकर बात की ताकि वह सहज महसूस करे।
कॉलेज में राजिया ने ब्रेक के समय फिर से मौका निकाला। अमन के पास आकर बहुत धीमे स्वर में पूछा, “कल छुट्टी है न?”
अमन ने सिर हिलाया। “हाँ।”
राजिया ने और कुछ नहीं पूछा। बस एक बार देखा और चली गई। उसकी आँखों में इंतजार साफ था, लेकिन अमन ने कोई वादा नहीं किया।
कॉलेज खत्म होने के बाद अमन घर की तरफ चल पड़ा। गाँव के बाहरी रास्ते पर रुक्साना फिर से मिलीं। वे जैसे जानबूझकर वहीं खड़ी थीं।
“आज भी शहर नहीं गए?” रुक्साना ने मुस्कुराते हुए पूछा।
अमन ने बाइक रोक दी। “नहीं काकी। कल छुट्टी है… रविवार। सोचा था कल आपके बगीचे में आ जाऊँ। आम खाने।”
रुक्साना की आँखों में चमक आ गई। उन्होंने एक कदम करीब आकर कहा, “दो बजे आना। उस समय खेत में कोई नहीं होता। बिल्कुल अकेले रहेंगे।”
अमन ने सिर हिलाया। “ठीक है काकी। दो बजे।”
रुक्साना मुस्कुरा दीं। “इंतजार रहेगा।”
अमन घर पहुँचा। आँगन में उसकी छोटी बहन कविता कपड़े सुखा रही थी। अमन उसके पास गया।
“आज अकेली काम कर रही हो दीदी?” उसने हल्की मुस्कान के साथ पूछा।
कविता ने सिर उठाया। “तू आ गया? माँ अंदर हैं।”
अमन ने उसके पास जाकर कहा, “अकेले में कितनी प्यारी लगती हो। रोज नहीं दिखती ऐसी।”
कविता के गाल हल्के लाल हो गए। उसने पल्लू ठीक करते हुए कहा, “बातें मत बना… जा हाथ-मुँह धो ले।” लेकिन आवाज में गुस्सा नहीं था। बल्कि हल्की शर्म थी। अमन मुस्कुराते हुए अंदर चला गया। कविता उसकी पीठ देखती रह गई।
रात का खाना खाकर अमन अपने कमरे में आ गया। आज रेणु नहीं आईं। कमरा शांत था। वह बिस्तर पर लेट गया। दिमाग में कल का दो बजे का समय घूम रहा था—रुक्साना, बगीचा, अकेला खेत।
आँखें बंद करते ही नींद आ गई।
रात बिना किसी दस्तक के गुजर गई।

रविवार की सुबह अमन देर तक सोया रहा। छुट्टी का दिन था। जब उठा तो घर में हल्की-हल्की हलचल थी। आँगन में उसकी दोनों बहनें—कविता और मीना—बैठी बातें कर रही थीं। अमन उनके पास जाकर बैठ गया।
“आज छुट्टी है न,” उसने मुस्कुराते हुए कहा। “तुम दोनों घर में कितना बोर होती होगीं। सोच रहा हूँ… आज तुम्हें फिल्म दिखा लाऊँ?”
दोनों बहनें एक साथ उसकी तरफ देखती रह गईं। मीना ने पूछा, “सच में?”
“हाँ। माँ से पूछ लेता हूँ।” अमन उठा और अंदर गया। माँ से अनुमति ली। माँ ने पहले थोड़ा मना किया, लेकिन अमन के जिद करने पर मान गईं। “जल्दी लौटना। और ध्यान रखना दोनों का।”
अमन ने दोनों बहनों को तैयार होने को कहा। थोड़ी देर में तीनों बाइक पर बैठकर शहर की तरफ निकल गए। अमन बीच में था, दोनों बहनें बारी-बारी से पीछे बैठीं। हवा में उनके बाल उड़ रहे थे। तीनों हँस रहे थे।
शहर पहुँचकर पहले अमन ने उन्हें एक अच्छे शोरूम में ले जाकर नए कपड़े दिलवाए। आधुनिक, हल्के रंग के सूट और टॉप्स। दोनों बहनों ने वहीं ट्रायल रूम में पहनकर दिखाए। अमन देखकर मुस्कुरा दिया।
“लग रही हो दोनों बिल्कुल परियाँ,” उसने कहा। “पहना रहो आज। फिल्म में इसी में जाना है।”
कविता और मीना शर्माते हुए हँस पड़ीं। अमन ने अपने लिए भी एक फिट जींस और काली टी-शर्ट ले ली। पहनकर देखा तो शरीर पर अच्छी लग रही थी। साथ में एक स्टाइलिश चश्मा भी खरीद लिया। तीनों बदलकर बाहर निकले तो लोग भी देख रहे थे।
इसके बाद आइसक्रीम पार्लर में ले जाकर उन्हें उनकी पसंदीदा आइसक्रीम खिलाई। फिर सिनेमा हॉल। फिल्म रोमांटिक कॉमेडी थी। अँधेरे हॉल में अमन बीच में बैठा था। दोनों बहनों के साथ हल्की-फुल्की शरारतें करता रहा—कभी कविता का हाथ पकड़ लेता, कभी मीना के बाल हल्के से खींच देता। दोनों शर्मातीं लेकिन मना नहीं करतीं। फिल्म के दौरान तीनों खूब हँसे।
फिल्म खत्म होने तक बारह बज रहे थे। लौटते समय अमन ने उसी कॉफी शॉप के सामने बाइक रोकी। “थोड़ी कॉफी पी लेते हैं।”
अंदर गए। टेबल लिया। ऑर्डर दिया। थोड़ी देर बाद वही लड़की—सोनाल—ट्रे लेकर आई। लेकिन आज उसका व्यवहार अलग था। चेहरे पर मुस्कान नहीं थी। थोड़ा गुस्सा और अजीब सा भाव था। उसने कप टेबल पर रखे और बिना ज्यादा बोले चली गई।
मीना ने धीमे स्वर में पूछा, “भैया, ये दीदी इतना गुस्सा क्यों लग रही हैं?”
अमन ने कंधे उचकाए। “मुझे क्या पता। शायद मूड खराब हो।”
कॉफी पीकर तीनों घर की तरफ निकल पड़े। अमन के दिमाग में सोनाल का गुस्सा भरा चेहरा घूम रहा था, लेकिन उसने ज्यादा नहीं सोचा।
घर पहुँचे तो दोपहर हो रही थी। अमन ने सबको आँगन में बुलाया। माँ, सरला चाची, कमला चाची, कविता, मीना—सब आ गईं। अमन ने एक-एक करके पैकेट निकाले। हर एक के लिए नई साड़ी थी। अच्छी, रंग-बिरंगी।
“ये लो… सबके लिए छोटा सा गिफ्ट,” उसने मुस्कुराते हुए कहा।
महिलाएँ हैरान रह गईं। माँ की आँखों में आँसू आ गए। सरला चाची ने अमन के गाल पर चुंबन कर दिया। कमला चाची ने भी मुस्कुराते हुए गाल पर हल्का सा चुंबन किया। कविता और मीना ने एक साथ कहा, “हमारे भैया बेस्ट हैं!”
माँ ने अमन को अपने गले से लगा लिया। आँसू रोक नहीं पा रही थीं। “मेरा बेटा… इतना सोचता है सबका।” धीरे-धीरे बाकी महिलाएँ भी आ गईं। सबने मिलकर अमन को गले लगा लिया। अमन हँसते हुए बोला, “इतना मत दबाओ… मेरी साँसें रुक जाएँगी!”
माँ ने हल्के से उसकी पीठ थपथपाई। “पगले… ऐसा नहीं बोलते। मेरे बेटे को मेरी भी उम्र लग जाए।”
सब हँस पड़े। घर में एक अच्छी सी गर्माहट फैल गई थी। अमन ने सबकी खुशी देखी, फिर धीरे से अपने कमरे की तरफ बढ़ा।
कमरे में आकर उसने घड़ी देखी। डेढ़ बज रहे थे।
अब सिर्फ आधा घंटा बाकी था।
दो बजे… रुक्साना… बगीचा।
वह खिड़की के पास बैठकर इंतजार करने लगा।


दो बजने में दस मिनट बाकी थे।
अमन ने काली टी-शर्ट और जींस में ही रहने का फैसला किया। शहर वाले कपड़े अभी भी पहने हुए थे। चश्मा भी लगा रखा था। घर से निकलते समय माँ ने पूछा तो बस इतना कहा, “थोड़ी देर घूमकर आता हूँ।”
खेतों की पगडंडी पर चलते हुए उसके दिल की धड़कन तेज हो रही थी। दोपहर की धूप थी, लेकिन पेड़ों की छाँव में रास्ता ठंडा लग रहा था। बगीचे के पास पहुँचते ही उसने रुक्साना को देखा।
रुक्साना एक बड़े आम के पेड़ के नीचे खड़ी थीं। आज उन्होंने गहरा लाल रंग का सूट पहना था। सूट टाइट था। उनके भारी स्तन और मोटी गाँड साफ उभर रहे थे। बाल खुले थे और हवा में हिल रहे थे। उन्होंने अमन को देखते ही मुस्कुरा दिया।
“समय पर आ गए,” रुक्साना ने कहा। आवाज में संतुष्टि थी। “सोचा था कहीं भूल तो नहीं गए।”
अमन पास गया। “कैसे भूल सकता हूँ काकी। वादा किया था।”
रुक्साना ने उसे सिर से लेकर पैर तक देखा। “आज तो शहर वाले लग रहे हो। ये कपड़े… ये चश्मा… लग रहा है कोई नया लड़का खड़ा है सामने।”
अमन हल्का मुस्कुराया। “पसंद आए?”
“बहुत,” रुक्साना ने एक कदम करीब आकर कहा। “पहले भी अच्छे लगते थे… अब तो और खतरनाक लग रहे हो।”
दोनों पेड़ की घनी छाँव में खड़े थे। चारों तरफ सन्नाटा था। दूर तक कोई मजदूर या आदमी नहीं दिख रहा था। सिर्फ पत्तों की हल्की सरसराहट।
रुक्साना ने एक आम तोड़कर अमन की तरफ बढ़ाया। “लो… पहले आम खा लो। मीठे हैं।”
अमन ने आम लिया। रुक्साना ने खुद भी एक तोड़ा। दोनों खड़े-खड़े आम खाने लगे। रस उनके हाथों और होठों पर लग रहा था। रुक्साना ने अपना अंगूठा मुँह में लेकर चाटा। अमन की निगाह उनकी तरफ चली गई।
“रस ज्यादा लग गया,” रुक्साना ने हँसते हुए कहा। फिर अचानक गंभीर हो गईं। “अमन… तुम सच में सिर्फ आम खाने आए हो?”
अमन ने आम का शेष हिस्सा एक तरफ फेंका। उनकी आँखों में देखा। “आप क्या सोचती हैं काकी?”
रुक्साना ने एक कदम और बढ़ाया। अब दोनों के बीच बहुत कम दूरी रह गई थी। उनके स्तन अमन की छाती से लगभग छू रहे थे। “मैं सोचती हूँ कि तुम बहुत चालाक हो गए हो। और मैं… मैं तुम्हें देख-देखकर पागल हो रही हूँ।”
अमन ने धीरे से उनका हाथ पकड़ लिया। “तो फिर पागल होने दीजिए काकी।”
रुक्साना की साँस तेज हो गई। उन्होंने अमन का हाथ अपनी कमर पर रख दिया। “यहाँ कोई नहीं है… दो बजे के बाद तो बिल्कुल नहीं आता कोई।”
अमन ने उनकी कमर पर हाथ फेरा। सूट के ऊपर से ही उनकी गर्माहट महसूस हो रही थी। “काकी… आप पक्का चाहती हैं?”
रुक्साना ने जवाब में अमन की टी-शर्ट पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया। “इतने दिन से तंग कर रही हूँ… अब भी पूछ रहा है? आज तो मुझे ले ले अमन… जैसे चाहे।”
अमन ने चारों तरफ एक नजर दौड़ाई। सच में कोई नहीं था। पेड़ों की घनी पंक्तियों ने उन्हें पूरी तरह छुपा रखा था। उसने रुक्साना की ठुड्डी हल्के से ऊपर उठाई और उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
पहले हल्का चुंबन। फिर गहरा। रुक्साना ने तुरंत जवाब दिया। उनके हाथ अमन के बालों में चले गए। दोनों के शरीर एक-दूसरे से सट गए। अमन का हाथ उनकी मोटी गाँड पर चला गया। सूट के ऊपर से ही मसलने लगा।
“आह्ह… अमन…” रुक्साना ने चुंबन के बीच में सिसकारी ली। “यहाँ… पेड़ के पीछे ले चल… जमीन पर…”
अमन ने उनका हाथ पकड़ा और उन्हें और अंदर, घने पेड़ों के बीच ले गया। जहाँ बाहर से बिल्कुल नहीं दिख सकता था। जमीन पर सूखे पत्ते बिछे हुए थे। रुक्साना ने खुद अपना दुपट्टा बिछा दिया।
दोनों एक-दूसरे के सामने खड़े थे। साँसें तेज चल रही थीं। अमन ने रुक्साना के सूट का जिपर धीरे से नीचे किया।
अब बगीचे की सुनसान दोपहर में एक नया खेल शुरू होने वाला था।

अमन ने रुक्साना के सूट का जिपर पूरी तरह नीचे कर दिया। कपड़ा ढीला हो गया। रुक्साना ने खुद अपने कंधों से सूट को सरकाया। अंदर उन्होंने कोई ब्रा नहीं पहनी थी। उनके भारी, गोरे स्तन बाहर आ गए। निप्पल धूप की हल्की किरणों में सख्त दिख रहे थे।
अमन की साँसें भारी हो गईं। “काकी… आपने अंदर कुछ नहीं पहना?”
रुक्साना हल्की मुस्कुराईं। आवाज में हवस साफ थी। “आते समय सोचा… आज क्या जरूरत है। तुम ही तो हो।”
अमन ने दोनों हाथों से उनके स्तन थाम लिए। वजन महसूस किया। उंगलियों से निप्पलों को हल्के से मरोड़ा। रुक्साना की कमर काँप गई।
“आह्ह… अमन… हाथों में अच्छे लग रहे हैं न मेरे दूध?”
“बहुत… बड़े और नरम,” अमन ने कहा और झुककर एक निप्पल मुँह में ले लिया। जोर से चूसने लगा। रुक्साना का हाथ उसके सिर पर चला गया। वे अमन का सिर अपने सीने से और लगाती रहीं।
“हाँ… चूस… जोर से चूस मेरे बेटे… आआह्ह…”
अमन ने दोनों स्तनों को बारी-बारी से चूसा। दाँतों से हल्के निशान बनाए। रुक्साना की सिसकारियाँ पेड़ों के बीच गूँजने लगीं। थोड़ी देर बाद अमन ने नीचे घुटने टेक दिए। रुक्साना के सूट को पूरी तरह नीचे खींच लिया। अब वे सिर्फ एक छोटी पैंटी में थीं। पैंटी बीच से पहले से ही थोड़ी गीली थी।
अमन ने पैंटी के दोनों तरफ से पकड़कर एक झटके में नीचे कर दी। रुक्साना की चूत सामने आ गई—गीली, थोड़ी घनी और चमक रही थी। अमन ने दोनों हाथों से उनकी जाँघें फैलाईं और मुँह लगा दिया।
“आआआह्ह्ह… अमन…!” रुक्साना की कमर झटके से काँपी। उन्होंने अमन के बाल पकड़ लिए।
अमन ने जीभ से उनकी चूत को चाटना शुरू किया। धीरे-धीरे, फिर तेज। घुंडी को चूसने लगा। रुक्साना का एक पैर उसके कंधे पर चढ़ गया। वे खड़े-खड़े ही अपने आप को अमन के मुँह पर दबाने लगीं।
“आह्ह… जीभ… अंदर ले जा… हाँ… ऐसे… आआह्ह… मेरी चूत चूस… बेटे…”
अमन ने जीभ अंदर तक डाल दी। चूसने की आवाज आने लगी। रुक्साना की जाँघें काँप रही थीं। थोड़ी देर में वे जोर से काँपीं और उनका पहला पानी अमन के मुँह पर छूट गया। अमन ने सब चाट लिया।
रुक्साना हांफते हुए बोलीं, “अब… अब तू ले ले मुझे… खड़ा मत रख… जमीन पर लिटा दे…”
अमन उठा। उसने अपनी जींस और अंडरवियर एक साथ नीचे कर दिए। उसका लंड पूरी तरह खड़ा था। रुक्साना ने उसे हाथ में लिया। आँखें बड़ी हो गईं।
“इतना मोटा… राजिया ने सही कहा था… आज तो मेरी चूत फाड़ देगा ये।”
अमन ने उन्हें धीरे से दुपट्टे पर लिटा दिया। उनके ऊपर आ गया। लंड का सिर उनकी गीली चूत पर लगाया। आँखों में आँखें डालकर पूछा, “काकी… डालूँ?”
रुक्साना ने दोनों पैर फैला दिए। “डाल… पूरा डाल… आज अपनी काकी को चोद… जैसे चाहे चोद…”
अमन ने कमर आगे बढ़ाई। लंड धीरे-धीरे अंदर जाने लगा। रुक्साना की चूत टाइट थी। वे दर्द और मजे से आँखें बंद कर लीं।
“आआआह्ह्ह… धीरे… बहुत मोटा है… आआह्ह…”
अमन ने एक लंबा धक्का मारा। पूरा लंड जड़ तक अंदर चला गया। दोनों एक साथ रुक गए। रुक्साना के नाखून अमन की पीठ पर गड़ गए।
“अब… अब हिल… चोद अपनी काकी को…”
अमन ने धक्के शुरू कर दिए। पहले धीमे, फिर तेज। पेड़ों के नीचे सिर्फ उनकी साँसें, सिसकारियाँ और शरीर की टकराने की आवाज गूँज रही थी। रुक्साना हर धक्के के साथ अमन को और कसकर पकड़ रही थीं।
“आह्ह… अमन… जोर से… हाँ… मेरी चूत में गहरा… आआह्ह… काकी की चूत पसंद आ रही है?”
अमन हांफते हुए बोला, “बहुत… बहुत गिली और गरम है काकी…”
वह और तेज हो गया। रुक्साना की चीखें अब दबाने के बावजूद निकल रही थीं। दोपहर का बगीचा उनकी गंदी पुकार से भर रहा था।


अमन की रफ्तार अब तेज हो चुकी थी। वह रुक्साना की दोनों टाँगों को अपने कंधों पर उठाए हुए जोर-जोर से धक्के मार रहा था। हर धक्के के साथ रुक्साना की भारी गाँड जमीन पर पट-पट की आवाज कर रही थी। उनके स्तन भी जोर-जोर से उछल रहे थे।
“आआआह्ह्ह… अमन… इतना जोर से… आआह्ह… मेरी चूत फट जाएगी…!” रुक्साना चिल्ला रही थीं। आँखें बंद थीं, मुँह खुला हुआ था।
अमन ने झुककर उनका एक स्तन मुँह में ले लिया और जोर से चूसते हुए धक्के और तेज कर दिए। “चिल्लाना मत काकी… कोई सुन लेगा… बस मजे लो…”
“आह्ह… कैसे न चिल्लाऊँ… तेरा लंड इतना मोटा है… आआह्ह… गर्भ तक जा रहा है… अमन… और तेज… चोद अपनी काकी को…!”
अमन ने उनके दोनों हाथ पकड़कर सिर के ऊपर दबा दिए। अब वह पूरी तरह उनके शरीर पर हावी था। धक्के इतने गहरे थे कि रुक्साना की साँसें अटकने लगीं। वे अमन के मुँह में अपनी उंगलियाँ डालकर चीख दबाने की कोशिश कर रही थीं।
थोड़ी देर बाद अमन ने अचानक लंड बाहर निकाल लिया। रुक्साना कराह उठीं। “क्यों निकाल लिया… अंदर रख…!”
अमन ने उन्हें पलट दिया। “गाँड ऊँची करो काकी।”
रुक्साना तुरंत घुटनों और हाथों के बल हो गईं। उनकी मोटी, गोल गाँड हवा में उठ गई। अमन ने दोनों हाथों से गाँड फैलाई और एक ही झटके में फिर से पूरा लंड उनकी चूत में धंसा दिया।
“आआआआह्ह्ह्ह…!” रुक्साना की लंबी चीख निकल गई।
अब अमन ने उनकी कमर पकड़कर जानवरों वाली रफ्तार से चोदना शुरू कर दिया। हर धक्के के साथ उनकी गाँड उसके पेट से जोर से टकरा रही थी। थप्पड़ की आवाज पेड़ों में गूँज रही थी। अमन बीच-बीच में उनकी गाँड पर जोरदार थप्पड़ भी मार रहा था।
“ले… ले काकी… इतनी मोटी गाँड… कितने दिनों से मारने का मन था…!” अमन हांफते हुए बोला।
“आह्ह… मार… थप्पड़ मार… आआह्ह… चोद… जोर से चोद… मैं तेरी रंडी हूँ आज… आआह्ह…!” रुक्साना बिल्कुल बेकाबू हो चुकी थीं। उनके मुँह से गालियाँ और सिसकारियाँ एक साथ निकल रही थीं। “साले… इतना जोर से… मेरी चूत का पानी निकाल दे… आआह्ह…!”
अमन ने एक हाथ आगे बढ़ाकर उनके स्तन मसलने शुरू कर दिए। दूसरे हाथ से उनकी गाँड पर थप्पड़ मारता रहा। धक्के इतने तेज थे कि रुक्साना का शरीर बार-बार आगे को खिसक जाता। वे दुपट्टे को मुँह में दबाकर चीख रही थीं।
“आआआह्ह… अमन… मैं जा रही हूँ… फिर से… आआह्ह… पकड़ मुझे…!”
उनका शरीर अकड़ गया। जाँघें काँपने लगीं। एक लंबी सिसकारी के साथ उनका पानी अमन के लंड पर छूट गया। लेकिन अमन रुका नहीं। वह उसी रफ्तार से चोदता रहा। रुक्साना की चूत अब और भी गीली हो चुकी थी। पानी की आवाज साफ आ रही थी।
अमन ने अचानक लंड निकाला। रुक्साना हांफते हुए बोलीं, “क्यों रोका… अंदर ही छोड़…!”
अमन ने मुस्कुराते हुए कहा, “अब गाँड में डालूँ काकी?”
रुक्साना ने पीछे मुड़कर देखा। आँखों में थोड़ा डर और बहुत सारी हवस थी। “धीरे से… बहुत मोटा है तेरा… फट जाएगी…”
अमन ने लंड पर उनका ही पानी लगा लिया। फिर उनकी गाँड की छेद पर सिर टिकाया। धीरे-धीरे दबाव देने लगा। रुक्साना की मांसपेशियाँ तन गईं।
“आआआह्ह… दर्द… अमन… धीरे… आआह्ह…!”
अमन ने एक हाथ उनकी कमर पर रखा और धीरे-धीरे लेकिन लगातार अंदर धकेलता गया। आधा लंड घुसने पर रुक्साना ने जोर से चीख ली। अमन थोड़ा रुका, फिर बाकी का भी अंदर कर दिया। पूरा लंड उनकी गाँड में समा गया।
“आआआआह्ह्ह्ह… बाप रे… निकल… बहुत दर्द… आआह्ह…!” रुक्साना की आँखों से आँसू निकल आए।
अमन ने उनकी पीठ सहलाते हुए कहा, “सह लो काकी… अभी अच्छा लगेगा…” फिर उसने बहुत धीमे धक्के शुरू किए। पहले छोटे-छोटे। जब रुक्साना की गाँड थोड़ी ढीली पड़ी तो रफ्तार बढ़ा दी।
“आह्ह… अब… अब ठीक है… आआह्ह… चोद… धीरे-धीरे चोद मेरी गाँड…!” रुक्साना की आवाज अब दर्द से मजे में बदलने लगी थी।
अमन ने दोनों हाथों से उनकी गाँड फैलाए रखी और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। गाँड की चुदाई की आवाज चूत वाली से भी ज्यादा गंदी और तेज थी। रुक्साना अब फिर से गालियाँ बकने लगीं।
“आआह्ह… साले… गाँड फाड़ रहा है… आआह्ह… चोद… और जोर से… मेरी गाँड चोद… हरामी… आआह्ह…!”
अमन की साँसें भी उखड़ने लगी थीं। उसने रुक्साना की चूत में उंगलियाँ डाल दीं और गाँड में लंड ठेलते हुए उनकी घुंडी रगड़ने लगा। रुक्साना पागल हो गईं।
“आआआह्ह… दोनों जगह… आआह्ह… मैं मर गई… अमन… छोड़… नहीं… मत छोड़… चोद… आआआह्ह्ह…!”
उनका शरीर एक बार फिर जोर से काँपा। पानी की एक और धारा उनकी उंगलियों पर छूट गई। अमन ने महसूस किया कि वह भी अब ज्यादा देर नहीं रोक सकता। उसने कुछ गहरे, भारी धक्के लगाए और रुक्साना की गाँड के अंदर ही अपना पूरा पानी छोड़ दिया। गरम लिक्विड उनकी आँतों में भरता गया।
“आआआह्ह… भर दी… साले… गाँड में भर दी तूने… आआह्ह…!” रुक्साना की आखिरी चीख निकली। उनका शरीर ढीला पड़ गया।
अमन कुछ देर तक अंदर ही पड़ा रहा। दोनों के शरीर पसीने से नहाए हुए थे। आम के पेड़ों की छाँव में सिर्फ उनकी तेज साँसें चल रही थीं। दूर कहीं पक्षी की आवाज आ रही थी। बाकी सब शांत था।
अमन ने धीरे से लंड बाहर निकाला। रुक्साना की गाँड से उसका पानी रिसने लगा। वह उनके पास लेट गया। दोनों आँखें बंद किए पड़े रहे।
दो बजे वाली अकेली दोपहर अब पूरी तरह बदल चुकी थी।


अमन और रुक्साना दोनों पेड़ों की छाँव में पड़े हुए थे। शरीर अभी भी पसीने से चमक रहे थे। रुक्साना की साँसें धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं। अमन ने उनकी पीठ पर हाथ फेरा।
“काकी… ठीक तो हो?” उसने धीमे स्वर में पूछा।
रुक्साना ने आँखें खोलीं। चेहरे पर थकान और संतुष्टि दोनों साफ थीं। वे हल्की मुस्कुराईं। “पागल… पूछ रहा है ठीक हूँ या नहीं। तूने तो मेरी हड्डियाँ ही गला दीं।”
अमन हल्का मुस्कुराया। उसने अपना अंडरवियर और जींस पहन ली। फिर रुक्साना के सूट को उठाकर उनके पास रख दिया। रुक्साना धीरे-धीरे उठीं। शरीर में दर्द साफ झलक रहा था। वे थोड़ा लंगड़ाते हुए खड़ी हुईं। अमन ने उनका हाथ पकड़ लिया।
“दर्द हो रहा है?”
“गाँड में… बहुत,” रुक्साना ने ईमानदारी से कहा। “तेरा लंड सामान्य नहीं है अमन। राजिया सही कहती थी।” उन्होंने अपना सूट पहना। पैंटी में अभी भी गीलापन था, लेकिन उन्होंने परवाह नहीं की। दुपट्टा झाड़कर कंधे पर डाल लिया।
दोनों ने एक-दूसरे को देखा। आम के पेड़ों के बीच अजीब सी चुप्पी छा गई थी। रुक्साना ने अमन का हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींचा। उसके माथे पर एक हल्का चुंबन किया।
“आज के बाद… तुम सिर्फ बाबूजी के बेटे नहीं रहे मेरे लिए,” उन्होंने बहुत धीमी आवाज में कहा। “अब तुम… कुछ और हो।”
अमन ने कुछ जवाब नहीं दिया। बस उनका हाथ दबाया। रुक्साना ने अपने बाल ठीक किए। “अब जा। देर हो रही है। कोई देख ले तो अच्छा नहीं होगा।”
अमन ने सिर हिलाया। “आप संभल के जाना काकी।”
रुक्साना मुस्कुराईं। “तू संभल के रहना। और हाँ… फिर आना। अगली बार और देर तक रखूँगी तुझे।”
अमन ने एक आखिरी बार उनकी तरफ देखा। फिर घने पेड़ों के बीच से निकलकर पगडंडी पर आ गया। बाइक वहीं खड़ी थी। उसने हेलमेट पहना और स्टार्ट कर दी। दिल अभी भी जोर से धड़क रहा था। शरीर पर रुक्साना की खुशबू और पसीने की महक बाकी थी।
घर पहुँचते हुए सूरज ढलने लगा था। आँगन में माँ और सरला चाची बैठी थीं। अमन ने सामान्य चेहरा बनाया। बाइक साइड में लगाई।
“कहाँ चले गए थे इतनी देर?” माँ ने पूछा।
“घूम रहा था माँ। शहर वाले कपड़े पहन रखे थे तो मन कर गया थोड़ा और घूमने का।” अमन ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।
सरला चाची ने उसे गौर से देखा। “चेहरा थोड़ा थका लग रहा है। आराम कर लो।”
अमन ने सिर हिलाया और अपने कमरे की तरफ बढ़ गया। कमरे में जाकर उसने तुरंत नहाने का मन बनाया। आईने के सामने खड़ा होकर देखा—गर्दन पर हल्के नाखून के निशान थे। उसने टी-शर्ट का कॉलर ऊपर कर लिया।
नहाते समय पानी के नीचे खड़े होकर उसने दिन की पूरी घटना दोहराई। रुक्साना की चीखें, उसकी मोटी गाँड, दोनों छेदों में की गई चुदाई… सब कुछ दिमाग में ताजा था। लंड फिर से हल्का भारी हो गया, लेकिन उसने नज़रअंदाज कर दिया।
रात का खाना परिवार के साथ खाया। कमला चाची की निगाहें बार-बार उससे मिल रही थीं। कविता और मीना उसके नए कपड़ों की तारीफ कर रही थीं। सब सामान्य लग रहा था। लेकिन अमन के अंदर एक नया राज और जुड़ चुका था।
खाना खत्म करके वह अपने कमरे में आ गया। बिस्तर पर लेटते ही थकान ने घेर लिया। आज रेणु के आने का इंतजार था। उसे सब बताना था—रुक्साना वाली पूरी बात।
वह खिड़की की तरफ देखता रहा। रात गहरी हो रही थी।
और बगीचे में… रुक्साना अभी भी अपने शरीर के दर्द को महसूस करते हुए मुस्कुरा रही थीं।
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#85
रात के लगभग साढ़े बारह बज रहे थे।
अमन अभी तक सो नहीं पाया था। शरीर थका हुआ था, लेकिन दिमाग अभी भी बगीचे वाली दोपहर में उलझा हुआ था। तभी दरवाजे पर हल्की दस्तक हुई। रेणु अंदर आईं। लालटेन की रोशनी कम रखी हुई थी। उन्होंने दरवाजा बंद किया और सिटकिनी लगा दी।
अमन उठकर बैठ गया। रेणु बिस्तर के किनारे बैठ गईं। उन्होंने अमन का चेहरा देखा और समझ गईं कि आज कुछ बड़ा हुआ है।
“बताओ,” उन्होंने सीधी आवाज में कहा। “पूरा बताना।”
अमन ने गहरी साँस ली। “दीदी… आज रुक्साना के साथ हो गया।”
रेणु की आँखें थोड़ी सिकुड़ गईं। “पूरा बताओ। कैसे शुरू हुआ, कहाँ हुआ, क्या-क्या हुआ।”
अमन ने विस्तार से सब सुनाया। कैसे वह दो बजे बगीचे पहुँचा, कैसे रुक्साना लाल सूट में इंतजार कर रही थीं, कैसे बातों-बातों में छूने की नौबत आई। फिर पेड़ों के बीच ले जाना, उनके कपड़े उतरना, अमन का उनका मुँह लगाना, और उसके बाद की लंबी चुदाई। अमन ने दोनों पोजीशन, गाँड वाली बात, और रुक्साना की गालियाँ तक बता दीं। कोई बात नहीं छुपाई।
रेणु अंत तक चुपचाप सुनती रहीं। उनके चेहरे पर न गुस्सा था, न हैरानी। बस एक गंभीर भाव था। जब अमन खत्म हुआ तो उन्होंने धीमे स्वर में पूछा, “दर्द तो नहीं हुआ तुझे?”
“हल्का सा… लंड में,” अमन ने जवाब दिया। “लेकिन अब ठीक है।”
रेणु ने सिर हिलाया। “रुक्साना ने क्या कहा बाद में?”
“बोल रही थीं कि अब मैं सिर्फ बाबूजी का बेटा नहीं रहा उनके लिए। और… फिर आने को कहा।”
रेणु कुछ पल चुप रहीं। फिर अमन का हाथ पकड़ लिया। “सुन, अब से और सावधान रहना। रुक्साना राजिया की माँ है। अगर राजिया को जरा भी अंदाजा लग गया तो उलझन बढ़ जाएगी। तूने आज जो किया वह छुपाना आसान नहीं होगा।”
अमन ने सिर हिलाया। “समझ गया दीदी।”
रेणु ने उसका चेहरा दोनों हाथों में लिया। आँखों में आँखें डालकर बोलीं, “तुम बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हो अमन। कमला चाची, राजिया, अब रुक्साना… सब तुम्हारे हाथ लग रही हैं। लेकिन याद रखना—हर नया संबंध एक नया खतरा लेकर आता है।”
अमन ने रेणु के हाथों पर अपना हाथ रखा। “दीदी… आप बार-बार सावधान करती हो। लेकिन आप खुद कब तक बचोगी मुझसे?”
रेणु का चेहरा हल्का लाल हो गया। उन्होंने अमन का हाथ छुड़ाया लेकिन मुस्कान रोक नहीं पाईं। “आज फिर वही बात शुरू कर दी तूने।”
“सच पूछो तो,” अमन ने धीमे स्वर में कहा, “आज रुक्साना के साथ होते हुए भी दिमाग में आप आ रही थीं। सोच रहा था… काश आप होतीं।”
रेणु ने उसकी तरफ देखा। कुछ पल की चुप्पी के बाद वे झुकीं और अमन के होंठों पर एक नरम चुंबन कर दिया। चुंबन गहरा नहीं था, लेकिन उसमें एक अजीब सी मिठास थी। जब वे पीछे हटीं तो उनकी आवाज बहुत धीमी थी।
“थोड़े दिन और सब्र रख। मैं वादा करती हूँ… जल्द ही वह रात आएगी।”
अमन ने उनका हाथ फिर से पकड़ लिया। “सच दीदी?”
“सच।” रेणु ने उसके माथे पर हल्का चुंबन किया। “अब सो जा। आज काफी हो गया।”
वे उठ खड़ी हुईं। लालटेन उठाई। दरवाजे तक जाकर एक बार मुड़ीं। “और हाँ… रुक्साना से अगली मुलाकात से पहले मुझे जरूर बताना। समझे?”
अमन ने सिर हिलाया। “जैसी आज्ञा दीदी।”
रेणु मुस्कुराते हुए कमरे से निकल गईं। दरवाजा धीरे से बंद हो गया।
अमन बिस्तर पर लेट गया। रेणु के चुंबन की गर्माहट अभी भी होंठों पर थी। साथ में रुक्साना की चीखें और उसका शरीर भी दिमाग में घूम रहा था।
आज का दिन बहुत लंबा और घटनापूर्ण रहा था। बहनों के साथ शहर, कॉफी शॉप वाली सोनाल का गुस्सा, फिर रुक्साना के साथ बगीचे वाली दोपहर, और अब रेणु का वादा।
वह करवट लेकर लेटा। आँखें बंद करते ही नींद आने लगी।
रात फिर से शांत हो गई। लेकिन अमन के जीवन में अब एक और महिला जुड़ चुकी थी—रुक्साना।


रेणु के जाने के बाद अमन अँधेरे में लेटा रहा। नींद आने ही वाली थी कि अचानक उसके दिमाग में एक बात कौंध गई।
रुक्साना ने बगीचे में कहा था—“राजिया ने सही कहा था…”
अमन की आँखें खुल गईं। उसने छत की तरफ देखा। दिमाग तेजी से चलने लगा।
राजिया ने अपनी माँ को सब बता रखा है।
कल रात वाली बात हो या उससे पहले की… रुक्साना जानती थी। इसलिए वह इतनी बेशर्मी से अमन के पीछे पड़ी थी। माँ-बेटी दोनों एक-दूसरे की बातें जानती थीं।
अमन के होंठों पर धीमी सी मुस्कान तैर गई। उसने करवट ली और धीमे से अपने आप से कहा,
“कोई बात नहीं… अगली बार दोनों को साथ पकड़ूँगा। माँ-बेटी को एक साथ चोदूँगा।”
यह ख्याल उसके दिमाग में गूंजता रहा। रुक्साना की मोटी गाँड और राजिया का जवान शरीर… दोनों एक साथ। ख्याल ही इतना उत्तेजक था कि लंड हल्का सा तन गया, लेकिन थकान ने जल्दी ही उस पर काबू पा लिया।
अमन ने आँखें बंद कीं। मुस्कान अभी भी चेहरे पर थी।
थोड़ी देर में उसकी साँसें नियमित हो गईं। वह गहरी नींद में सो गया।
रात पूरी तरह शांत हो गई।
लेकिन अमन के मन में एक नया, खतरनाक ख्याल जन्म ले चुका था।
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#86
Super excellent work waiting for next
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#87
Update please
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#88
सुबह
अमन की नींद अभी पूरी तरह नहीं टूटी थी कि माँ की नरम आवाज ने उसे जगाया।
“अमन… उठो बेटा। सूरज निकल आया है।”
माँ सुशीला बिस्तर के किनारे खड़ी थीं। उन्होंने धीरे से उसका कंधा दबाया। अमन ने आँखें खोलीं। माँ की साड़ी का हल्का गुलाबी रंग सुबह की रोशनी में चमक रहा था। पल्लू ठीक से बँधा था, लेकिन उनकी गर्दन और हल्की खुली हुई जूड़े की लटें अमन की नज़र में आ गईं। एक पल के लिए उसका मन उलझ गया। एक तरफ यह उसकी माँ थीं… वही माँ जिन्होंने उसे पाला-पोसा। दूसरी तरफ वह औरत जिसकी जोरदार चुदाई वह दो बार अपनी आँखों से देख चुका था—एक बार बाबा के साथ, एक बार खेत में। दोनों तस्वीरें एक साथ दिमाग में घूम गईं। उसने जल्दी से नज़रें नीचे कर लीं।
“हाँ माँ… उठ रहा हूँ,” उसने कहा। आवाज में अभी नींद बाकी थी।
माँ मुस्कुराईं। “आज कॉलेज से लौटकर सीधा शहर चले जाना। घर का कुछ सामान लाना है और एक दवाई भी। लिस्ट मैं बाद में दे दूँगी। अकेले ही चले जाना, मैं नहीं आ पाऊँगी।”
“ठीक है माँ।”
माँ उसके माथे पर हल्का हाथ फेरकर चली गईं। अमन उठकर बैठ गया। दिल की धड़कन थोड़ी तेज थी। माँ का चेहरा अभी भी आँखों के सामने था।
नाश्ते का समय था। आँगन वाली बड़ी मेज पर सभी औरतें जमा थीं—माँ, सरला चाची, कमला चाची, कविता और मीना। अमन अपनी जगह पर बैठा। कमला चाची ठीक उसके सामने थीं। नाश्ता शुरू हुआ। रोटी, सब्ज़ी, दही… सब सामान्य लग रहा था। तभी अमन ने महसूस किया—मेज के नीचे से कोई नरम और गर्म चीज़ उसकी जाँघ पर फिसल रही है।
कमला चाची ने माँ से सामान्य स्वर में बात करते हुए अपना दायाँ पैर आगे बढ़ाया। उनकी एड़ी अमन की जाँघ के अंदरूनी हिस्से पर टिकी। फिर धीरे-धीरे ऊपर सरकने लगी। पैंट के ऊपर से ही उन्होंने अपने पैर की उंगलियों से अमन के लंड को दबाया। अमन का निवाला मुँह में ही रह गया। कमला चाची ने आँखें उठाकर उसकी तरफ देखा। आँखों में गहरी शरारत थी। उन्होंने पैर से लंड को सहलाना शुरू कर दिया—जड़ से लेकर सिर तक, धीरे-धीरे, दबाव बढ़ाते हुए।
अमन ने मेज के नीचे हाथ बढ़ाकर उनका पैर पकड़ने की कोशिश की, लेकिन कमला चाची ने और सटा दिया। लंड पैंट के अंदर पूरी तरह सख्त हो चुका था। कमला चाची ने पैर की उंगलियों से उसके सिर को दबाना शुरू कर दिया। अमन की साँसें भारी हो गईं। वह रोटी तोड़ते-तोड़ते मुश्किल से निगल पा रहा था। नाश्ता खत्म होने तक उसकी हालत खराब हो चुकी थी। कमला चाची ने आखिर में एक जोरदार दबाव दिया और फिर पैर हटा लिया। जैसे कुछ हुआ ही न हो।
कॉलेज में राधा गली में मिली। दोनों ने हल्की-फुल्की बातें कीं। राधा आज थोड़ी ज्यादा खुश लग रही थी। लेकिन राजिया की निगाहें अमन को कॉलेज में बार-बार चुभ रही थीं। वह अमन को इस तरह घूर रही थी जैसे वह उसके शरीर के अंदर तक देखना चाहती हो। कक्षा में, ब्रेक में, गलियारे में—हर जगह उसकी गहरी, भारी निगाहें अमन का पीछा कर रही थीं। अमन ने जानबूझकर उसकी तरफ पीठ किए रखी, लेकिन उसकी मौजूदगी महसूस हो रही थी।
कॉलेज खत्म होने के बाद अमन ने रुक्साना का इंतजार किया। खेतों वाले रास्ते पर थोड़ी देर रुका, लेकिन वे नहीं मिलीं। शायद कल की लंबी और जोरदार चुदाई की वजह से शरीर में दर्द हो रहा होगा। अमन ने राहत भरी साँस ली और घर की तरफ बढ़ गया।
घर पहुँचकर आँगन में कविता अकेली कपड़े सुखा रही थी। मीना अंदर थी। अमन उसके पास गया।
“आज अकेली काम कर रही हो दीदी?” उसने हल्की मुस्कान के साथ पूछा।
कविता ने सिर उठाया। पल्लू थोड़ा सा खिसका हुआ था। “हाँ। तू कॉलेज से आ गया? माँ तुझे शहर भेज रही हैं न?”
अमन चौकी पर उसके पास बैठ गया। “हाँ। तू इन दिनों और भी सुंदर लगने लगी है। पहले इतनी नहीं लगती थी।”
कविता के गाल हल्के गुलाबी हो गए। उसने पल्लू ठीक करते हुए कहा, “बातें मत बना… जा कपड़े बदल। माँ इंतजार कर रही होंगी।” लेकिन आवाज में मना करने वाला स्वर नहीं था। बल्कि हल्की शर्म और खुशी दोनों थीं। अमन मुस्कुराते हुए अपने कमरे की तरफ चला गया। कविता उसकी पीठ देखती रह गई।
अमन कमरे में टी-शर्ट बदल रहा था कि दरवाजा अचानक धक्का खाकर खुला। कमला चाची अंदर आ गईं। उन्होंने पीछे मुड़कर सिटकिनी लगा दी और सीधे अमन की तरफ बढ़ीं।
अमन चौंक गया। “चाची… अबही…?”
कमला चाची ने एक शब्द नहीं कहा। उन्होंने अमन की टी-शर्ट पकड़कर अपनी तरफ खींचा और उसके होंठों पर जोर से अपने होंठ रख दिए। गहरा, गीला और भूखा चुंबन। जीभ अंदर तक चली गई। अमन पहले सहम गया, फिर उसकी कमर पकड़कर जवाब देने लगा। दोनों की साँसें तेज हो गईं। कमला चाची ने अमन की पैंट के नाड़े में हाथ डाल दिए।
चुंबन तोड़ते हुए वे हांफते हुए बोलीं, “मेरी चूत बहुत गरम हो चुकी है अमन… सुबह से तरस रही हूँ। इसका पानी कब निकालेगा?”
अमन ने उनकी कमर पकड़ी। “चाची… आज नहीं। माँ ने शहर भेजा है। सामान लाना है।”
कमला चाची ने उसका लंड पैंट के ऊपर से कसकर पकड़ लिया। “मैं मर जाऊँगी… थोड़ा सा ही सही… निकाल दे मेरा पानी। तेरा चाहे न निकले।”
अमन ने गहरी साँस ली। उनकी आँखों में असली बेचैनी थी। “अरे चाची… चलो ठीक है। एक बार तुम्हारा पानी निकाल देता हूँ।”
कमला चाची की आँखों में चमक आ गई। अमन ने उन्हें दीवार से सटा दिया। उनकी साड़ी का पल्लू एक झटके में ऊपर किया। साया उठाया। अंदर कोई पैंटी नहीं थी। चूत पूरी तरह नंगी, चमकदार और पहले से गीली थी। अमन ने थूक लगाकर अपनी उंगलियाँ गीली कीं और दो उंगलियाँ सीधे उनकी चूत में डाल दीं।
“आआआह्ह्ह… अमन…!” कमला चाची की लंबी सिसकारी निकली। उनके नाखून अमन की बाहों में गड़ गए।
अमन ने उंगलियाँ निकालकर अपना लंड बाहर निकाला। थूक से गीला किया और एक ही जोरदार धक्के में अंदर तक डाल दिया। कमला चाची की पीठ दीवार से लग गई। अमन ने उनकी एक टाँग अपनी कमर पर चढ़ाई और जोर-जोर से चोदने लगा। हर धक्के के साथ उनकी गाँड दीवार से टकरा रही थी।
“आह्ह… अमन… हाँ… ऐसे… आआह्ह… कल रात वाली बात याद आ रही है… जब तूने मुझे जानवर की तरह चोदा था… दोनों छेद… आआह्ह…!”
कमला चाची गंदी और दबी हुई सिसकारियाँ ले रही थीं। अमन लगभग दस-बारह मिनट तक उसी रफ्तार से चोदता रहा। कमला चाची की चूत से पानी की आवाज आने लगी। उनका शरीर काँपने लगा।
“आआआह्ह… निकल रहा है… अमन… जोर से… आआह्ह… माँ… मैं आ गई… आआआह्ह्ह…!”
उनका पानी जोर से अमन के लंड पर छूट गया। शरीर की लहरें काँपती रहीं। अमन ने कुछ और गहरे धक्के मारे, फिर लंड बाहर निकाल लिया। खुद का पानी नहीं गिराया। लंड अभी भी पूरी तरह सख्त और चमक रहा था।
कमला चाची दीवार से लगी हांफ रही थीं। अमन ने उनके चेहरे को दोनों हाथों में लिया और एक लंबा, गहरा चुंबन किया। जीभ फिर से मिल गई। चुंबन तोड़ने के बाद कमला चाची ने उसकी टी-शर्ट ठीक की और साया नीचे किया।
“शाम को बात करते हैं…,” उन्होंने धीमी आवाज में कहा। फिर सिटकिनी खोलकर चुपचाप निकल गईं।
अमन का लंड अभी भी तना हुआ दर्द कर रहा था। वह जल्दी से वॉशरूम गया। पेशाब किया। ठंडे पानी से बार-बार धोया। किसी तरह उसे शांत किया। थोड़ी देर बाद हालत काबू में आई।
वह बाहर आया और माँ के पास गया। माँ ने एक कागज की लिस्ट दी—घर का राशन, कुछ मसाले और एक दवाई का नाम।
“ये सब ले आना। दवाई जरूर लेना। और जल्दी लौटना,” माँ ने कहा।
अमन ने लिस्ट जेब में रखी। बाइक की चाबी ली और बाहर निकला।
अब शहर का रास्ता खुला था।


अमन बाइक पर शहर की सड़क पर निकल चुका था। दोपहर की धूप सिर पर जल रही थी, लेकिन बाइक की रफ्तार से आने वाली हवा राहत दे रही थी। उसने जेब से माँ की दी हुई लिस्ट निकाली। साफ लिखावट में राशन, मसाले, तेल, साबुन और आखिर में एक दवाई का नाम लिखा था।
पहले वह बड़े बाजार की तरफ मुड़ा। राशन की थोक दुकान पर रुककर चावल, दाल, चीनी और आटा ले लिया। फिर मसाले वाली दुकान में हल्दी, मिर्च, जीरा और गरम मसाला। हर दुकान पर थोड़ा मोल-भाव किया, पैसे दिए और सामान बाइक के दोनों साइड में रस्सी से बाँधता गया। लगभग पैंतालीस मिनट में लिस्ट का आधा हिस्सा पूरा हो गया।
इसके बाद उसका मन अपने लिए कुछ लेने का हुआ। पिछले कुछ दिनों से शहर वाले कपड़े पहनने का शौक बढ़ गया था। एक अच्छे शोरूम में घुसा। ट्रायल रूम में जाकर तीन-चार जींस और टी-शर्ट्स intercambi। आखिर में एक डार्क नेवी ब्लू स्ट्रेचेबल जींस, दो प्लेन ब्लैक और वाइट टी-शर्ट और एक हल्की स्काई ब्लू फॉर्मल शर्ट चुन ली। बिल देखा तो थोड़ा ज्यादा था, लेकिन उसने पैसे दे दिए। पैकेट बाइक पर रखे और आगे बढ़ा।
अब बारी थी दवाई की। बाजार के आखिरी छोर पर एक साफ-सुथरी केमिस्ट की दुकान थी। अंदर गया। लिस्ट दिखाते हुए बोला, “यह दवाई चाहिए।”
दुकानदार ने नाम पढ़ा, थोड़ा सा पीछे मुड़ा और एक छोटा सफेद पैकेट निकाला। अमन ने पैकेट हाथ में लिया। ऊपर बड़े अक्षरों में लिखा था—Pregnancy Test Kit। नीचे छोटे अक्षरों में “Home Urine Pregnancy Test”।
अमन के हाथ काँप गए। पैकेट अचानक भारी लगने लगा। दिमाग में एक के बाद एक ख्याल आने लगे। क्या माँ प्रेग्नेंट हैं? बाबा वाली रात के बाद? या फिर कोई और…? उसने जल्दी से पैसे दिए, पैकेट को जेब में दबाया और दुकान से निकल आया। बाहर आकर बाइक पर बैठ गया। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मन में तय किया—रात को रेणु दीदी से जरूर पूछूँगा। आज ही।
सामान लदे बाइक को उसने उसी कॉफी शॉप की तरफ मोड़ दिया जहाँ पिछली बार सोनाल मिली थी। पार्किंग में बाइक लगाई। आईने में अपना चेहरा देखा—पसीना पोंछा, बाल ठीक किए। गहरी साँस ली और अंदर चला गया।
कॉफी शॉप में हल्की भीड़ थी। वह पुरानी वाली कोने की सीट पर जाकर बैठ गया। थोड़ी देर बाद सोनाल खुद ट्रे लेकर निकली। आज उसने हल्के गुलाबी रंग की टॉप पहनी हुई थी। बाल खुले थे। वह अमन की टेबल के पास आई तो थोड़ा रुक गई।
“आप फिर आ गए,” उसने कहा। आवाज में न नाराजगी थी, न ज्यादा खुशी। बस हल्की सी थकान।


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अमन ने हिम्मत जुटाई। “हाँ। कॉफी अच्छी लगती है यहाँ की। एक कॉफी दे दीजिए।”
सोनाल ने सिर हिलाया और अंदर चली गई। दो मिनट बाद कॉफी लेकर आई। कप टेबल पर रखते हुए बोली, “शुगर अलग है।”
अमन ने अचानक कह दिया, “सोनाल जी… एक मिनट बैठ सकती हैं क्या?”
सोनाल ने उसकी तरफ देखा। कुछ पल सोचा, फिर सामने वाली कुर्सी पर बैठ गई। “बोलिए।”
अमन ने कॉफी की तरफ देखा, फिर उसकी तरफ। “मैं गाँव से हूँ। यहाँ कभी-कभी आता हूँ। आपकी शॉप शांत लगती है… इसलिए रुक जाता हूँ। पिछली बार आपका नाम वेटर से पूछ लिया था। माफ कीजिए अगर बुरा लगा हो।”
सोनाल ने हल्की भौंहें चढ़ाईं। “आपको मेरा नाम जानने की क्या जरूरत पड़ी?”
“कोई जरूरत नहीं,” अमन ने ईमानदारी से कहा। “बस… अच्छा लगा आपसे। इसलिए।”
सोनाल कुछ देर चुप रही। फिर धीरे से बोली, “मैं ज्यादा बातें नहीं करती अजनबियों से।”
“मैं अजनबी नहीं रहना चाहता,” अमन ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया। “कभी-कभी जब आऊँ तो नमस्ते कर लूँ… इतना तो चल जाएगा न?”
सोनाल के होंठों पर हल्की सी मुस्कान तैर गई। बहुत हल्की। “नमस्ते करने में कोई बुराई नहीं। लेकिन ज्यादा उम्मीद मत रखना।”
अमन ने सिर हिलाया। “ठीक है।”
सोनाल उठ गई। “कॉफी ठंडी हो जाएगी।” इतना कहकर वह दूसरी टेबल की तरफ चली गई। अमन ने कॉफी धीरे-धीरे पी। दिल के अंदर एक हल्की सी गर्माहट फैल गई थी। पहली बार उसने उससे सीधी बात की थी। और वह भाग नहीं थी।
कॉफी खत्म करके वह उठा। बाइक की तरफ बढ़ा। सामान चेक किया। जेब में प्रेग्नेंसी टेस्ट किट का पैकेट अभी भी चुभ रहा था। दिमाग में एक तरफ सोनाल की हल्की मुस्कान थी, दूसरी तरफ वह सफेद पैकेट।
वह बाइक स्टार्ट करके गाँव की तरफ निकल पड़ा। सूरज ढलने लगा था।
शहर पीछे छूट रहा था… लेकिन कई सवाल उसके साथ चल रहे थे।


अमन जब गाँव पहुँचा तो शाम के लगभग साढ़े छह बज रहे थे। बाइक के दोनों साइड में सामान बँधा था। उसने आँगन में बाइक रोकी और धीरे-धीरे सामान उतारने लगा। माँ रसोई से निकलकर आ गईं।
“आ गए? ले आए सब?” माँ ने पूछा।
“हाँ माँ। सब ले आया।” अमन ने राशन और बाकी पैकेट उनके हाथों में दिए। आखिर में जेब से वह छोटा सफेद पैकेट निकाला और माँ की तरफ बढ़ा दिया। माँ ने पैकेट लिया, बस एक बार देखा और बिना कुछ बोले अपने पल्लू में छुपा लिया। अमन ने जानबूझकर कोई सवाल नहीं किया।
थकान और दिमाग के उथल-पुथल ने उसे जल्दी कमरे में धकेल दिया। उसने बस हाथ-मुँह धोया, टी-शर्ट बदली और बिस्तर पर गिर गया। आँखें बंद करते ही नींद आ गई। शरीर थका हुआ था, लेकिन मन अभी भी उस सफेद पैकेट और सोनाल की हल्की मुस्कान के बीच झूल रहा था।
रात के लगभग एक बज रहे थे। घर पूरी तरह शांत हो चुका था। अमन की नींद अचानक टूटी जब दरवाजे पर बहुत हल्की दस्तक हुई। रेणु अंदर आईं। लालटेन की लौ कम रखी हुई थी। उन्होंने दरवाजा बंद किया, सिटकिनी लगाई और बिस्तर के किनारे बैठ गईं।
अमन उठकर बैठ गया। चेहरे पर नींद और बेचैनी दोनों थीं।
“दीदी…” उसने धीमी आवाज में कहा, “वह दवाई… प्रेग्नेंसी टेस्ट किट थी। क्या माँ…?”
रेणु ने सिर हिलाया। “नहीं। वह दवाई सरला चाची के लिए थी।”
अमन की आँखें थोड़ी चौड़ी हो गईं। “सरला चाची? लेकिन…?”
रेणु ने हाथ उठाकर उसे रोक दिया। “अब तुम ध्यान से सुनो। और बीच में कोई सवाल मत पूछना। पूरा सुन लेना।”
अमन ने होंठ भींचकर सिर हिलाया।
रेणु ने गहरी साँस ली। आवाज बहुत धीमी लेकिन साफ थी।
“सरला चाची और तुम्हारे चाचा बहुत सालों से बच्चे की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन हो नहीं पा रहा। मैंने उन्हें समझा-समझाकर टेस्ट करवाए। रिपोर्ट आई तो पता चला कि कमी किसी में नहीं है… सिर्फ तुम्हारे चाचा में है। वे बच्चा पैदा नहीं कर सकते। यह बात वे कभी स्वीकार नहीं करेंगे। उनका मर्दाना अभिमान उन्हें ऐसा करने नहीं देगा। अगर एक साल और गुजर गया और कुछ नहीं हुआ तो चाचा दूसरी शादी कर सकते हैं। घर में दूसरी औरत आएगी… सरला चाची का क्या होगा?”
रेणु थोड़ा रुकीं। अमन की आँखों में आँखें डालकर बोलीं,
“मैंने सरला चाची से कई रातें बात की। बहुत रोईं वे। बहुत मना किया। लेकिन आखिर में मैंने उनसे साफ कहा—अगर तुम्हें बच्चा चाहिए और घर बचाना है तो सिर्फ एक ही रास्ता है। किसी ऐसे मर्द से संबंध बनाओ जो तुम्हें सच में गर्भ धारण करा सके। पहले तो उन्होंने मेरा हाथ तक नहीं छूने दिया। कहा कि वे ऐसा पाप नहीं करेंगी। लेकिन धीरे-धीरे… हफ्तों की बातों के बाद… वे मान गईं।”
रेणु ने अमन का हाथ पकड़ लिया। उनकी हथेली ठंडी थी।
“अब मैं तुमसे एक बात पूछती हूँ अमन। और तुम सोच-समझकर जवाब देना। क्या तुम अपनी सरला चाची को माँ बनने का सुख दे सकते हो?”
अमन जैसे किसी ने पत्थर से मार दिया हो। शरीर की हर नस तन गई। साँसें उथली हो गईं। सरला चाची… जो उसे बचपन से अपने बेटे की तरह पालती थीं। जो उसके माथे पर हाथ रखती थीं जब वह बीमार होता था। जो उसके लिए मिठाई छुपाकर रखती थीं। वही सरला चाची…?
दिमाग में एक के बाद एक ख्याल दौड़ने लगे। अगर उसने मना कर दिया तो? सरला चाची किसी और के पास जाएँगी। कोई गलत आदमी मिल गया तो? कोई बीमारी फैल गई तो? घर का राज खुल गया तो? चाचा ने दूसरी शादी कर ली तो सरला चाची का क्या होगा?
अमन ने आँखें बंद कर लीं। माथा दोनों हाथों से पकड़ लिया। कमरे में सिर्फ उसकी भारी साँसें सुनाई दे रही थीं। बहुत देर तक वह कुछ नहीं बोला। रेणु भी चुपचाप उसका हाथ पकड़े बैठी रहीं।
आखिरकार अमन ने आँखें खोलीं। आवाज बहुत धीमी और भारी थी।
“हाँ दीदी… मैं हाँ कहता हूँ।”
रेणु ने उसकी आँखों में झाँका। “पक्का? बाद में पीछे तो नहीं हटोगे?”
अमन ने सिर हिलाया। “नहीं। मैं करूँगा। लेकिन… सिर्फ इसलिए क्योंकि मैं नहीं चाहता कि वे किसी और के पास जाएँ।”
रेणु ने उसका हाथ जोर से दबाया। उनकी आँखों में हल्की नमी थी। उन्होंने अमन के माथे पर बहुत हल्का सा होंठ रखा।
“तुम बड़े हो गए हो अमन,” उन्होंने फुसफुसाकर कहा। “अब सो जाओ। बाकी बातें बाद में करेंगे।”
रेणु उठ खड़ी हुईं। लालटेन उठाई और दरवाजे तक गईं। एक बार पीछे मुड़कर अमन को देखा—वह अभी भी पत्थर की तरह बैठा था। फिर वे चुपचाप निकल गईं।
अमन अँधेरे में अकेला रह गया। सरला चाची का चेहरा आँखों के सामने घूम रहा था। बचपन की यादें, उनकी मुस्कान, उनका स्पर्श… और अब यह नया, भारी सच।
वह धीरे से लेट गया। आँखें खुली की खुली रह गईं।
रात बहुत गहरी थी।
और अमन के कंधों पर एक ऐसा बोझ आ चुका था जिसे उतारना अब आसान नहीं था।
Fuckuguy
albertprince547;
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#89
Nice job Sarla Chachi chudne wali hai intezaar rahega or Maa kab chudegi waiting for next
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