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Incest परिवार के गंदे राज़
#61
Koi chanse hai kya .................kuch din hi bat do
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#62
Dear Fuckuguy sab thik to hai na aap 16/09/2026 ke baad online bhi nahi aaye or na hi aapki koi khabar so please ek massage hi daal dijiye apni salamti ka hum sab ko aapki bahut chinta ho rahi hai
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#63
UPDATE

राजिया ने कागज को फिर से खोला। भाई की मोटी, जल्दबाजी में लिखी हुई लिखावट बार-बार आँखों के सामने घूम रही थी—
“अगर मेरे साथ कुछ हुआ… तो अमन से पूछना।”
कमरे में दीये की लौ अब बहुत छोटी रह गई थी। तेल लगभग खत्म हो चुका था। अँधेरा कोनों से सरककर बीच तक आ पहुँचा था। राजिया की उंगलियाँ कागज के किनारे पर इतनी कस गई थीं कि कागज की धार हथेली में गड़ने लगी थी। लेकिन दर्द उसे महसूस नहीं हो रहा था।
उसने कागज को धीरे से मोड़ा और अपनी कुर्ती की अंदर वाली जेब में रख लिया। फिर भाई के तकिये को दोनों हाथों से पकड़कर सीने से लगा लिया। महक अभी भी बाकी थी—सस्ते साबुन और पसीने की। आँखें बंद करते ही भाई का चेहरा आ गया। फिर वह रात जब मंकी कैप पहने आदमी ने उसे रात भर जिया था। और अब यह नोट।
“तू जानता था…” उसने बहुत धीमी आवाज में कहा। “तू जानता था कि कुछ होने वाला है।”
बाहर आँगन में सन्नाटा था। लेकिन राजिया को लगा जैसे दीवार के उस पार कोई साँस ले रहा हो। उसने खिड़की की तरफ देखा। कुछ नहीं दिखा। फिर भी शरीर में एक ठंडी धारा दौड़ गई। उसने दीया बुझा दिया और अँधेरे में लेट गई। आँखें खुली थीं। नींद कहीं दूर थी।
सुबह जब रुक्साना उठीं तो राजिया पहले से चूल्हे के पास बैठी चाय बना रही थी। आँखें सूजी हुई थीं, लेकिन चेहरे पर कोई भाव नहीं था। रुक्साना ने कुछ नहीं पूछा। दोनों ने चुपचाप चाय पी। घर में भाई की खाली चारपाई अभी भी वैसे ही पड़ी थी। किसी ने उसे हटाया नहीं था।
कॉलेज जाते समय राजिया ने काले रंग का सूट पहना। बाल कसकर बाँधे। चेहरे पर कोई मेकअप नहीं। वह अब पहले जैसी चंचल लड़की नहीं लग रही थी। गली से निकलते समय उसकी निगाह चौधरी हवेली की तरफ चली गई। आँगन में अमन बैग लेकर निकल रहा था। दोनों की निगाहें एक पल के लिए मिलीं। राजिया ने नजर नहीं फेरी। अमन ने भी नहीं। बस दोनों ने एक-दूसरे को देखा और फिर अपने-अपने रास्ते चल दिए।
कॉलेज में माहौल सामान्य लग रहा था, लेकिन राजिया के चारों तरफ एक अदृश्य घेरा सा बन गया था। लड़के उससे बात करने से कतराते। लड़कियाँ फुसफुसातीं। राधा ने दूर से ही सिर हिलाया, लेकिन पास नहीं आई। अमन अपनी जगह पर बैठा किताब देख रहा था। राजिया ने पूरी क्लास में सिर्फ एक बार उसकी तरफ देखा—लंबा और ठंडा। अमन ने महसूस किया, लेकिन प्रतिक्रिया नहीं दी।
ब्रेक में राजिया अकेली पानी की टंकी के पास खड़ी थी। अमन दूर से देख रहा था। रेणु की सलाह उसके दिमाग में घूम रही थी—“न ज्यादा बचो, न ज्यादा पास जाओ। बस सामान्य।” इसलिए वह गया नहीं। लेकिन राजिया की निगाह बार-बार उसकी तरफ लौट रही थी। जैसे वह कुछ तलाश रही हो।
शाम को घर लौटते समय अमन ने महसूस किया कि कोई उसका पीछा कर रहा है। गली के मोड़ पर रुककर पीछे मुड़ा तो कोई नहीं दिखा। लेकिन वह अहसास बना रहा। घर पहुँचकर उसने सामान्य व्यवहार रखा। माँ ने पूछा तो कहा कि कॉलेज थका देने वाला था। बाबा ने सिर पर हाथ रखा। सरला चाची ने मिठाई दी। कमला चाची ने दूर से ही एक निगाह डाली—वह पुरानी चमक अभी भी आँखों में थी, लेकिन आज उन्होंने कुछ नहीं कहा।
रात के खाने के बाद अमन अपने कमरे में आया। दिमाग में राजिया की वह लंबी निगाह और भाई वाली घटना घूम रही थी। तभी दरवाजे पर दस्तक हुई। रेणु अंदर आईं। लालटेन की रोशनी कम थी। उन्होंने दरवाजा बंद किया और बिस्तर के किनारे बैठ गईं।
“आज राजिया कॉलेज आई थी,” अमन ने पहले ही बता दिया। “मुझे घूरा। बहुत देर तक।”
रेणु ने गंभीर होकर सुना। “अब वह सक्रिय हो गई है। सिर्फ शोक में नहीं है। कुछ सोच रही है।”
अमन ने सिर हिलाया। “मुझे भी लगा। जैसे वह कुछ ढूँढ रही हो।”
रेणु ने उसका हाथ पकड़ा। “अब तुम्हें और सावधान रहना होगा। राधा के साथ भी अभी दूरी बनाए रखना। कोई नई नजदीकी मत बढ़ाना। और कमला चाची… वे इंतजार कर रही हैं। लेकिन अभी उनका समय नहीं है।”
अमन चुप रहा। रेणु ने उसकी आँखों में देखा।
“तुम थके हुए लग रहे हो। आज शरीर की शिक्षा नहीं होगी। आज सिर्फ बात होगी।”
अमन ने हैरानी से देखा। रेणु ने हल्की मुस्कान दी।
“हर रात शरीर नहीं सिखाना होता। कभी-कभी दिमाग को भी आराम देना पड़ता है। तुम एक साथ बहुत सारी आग संभाल रहे हो। अगर नियंत्रण खो दिया तो सब जल जाएगा।”
उसने अमन के बालों में हाथ फेरा। “सो जाओ। और राजिया की निगाहों को अपने दिमाग में ज्यादा मत घुमाओ। वह तुम्हें डरा नहीं सकती जब तक तुम खुद न डरो।”
रेणु चली गईं। अमन अकेला रह गया। पहली बार कई रातों बाद रेणु ने सिर्फ बात की थी। कोई स्पर्श नहीं, कोई शिक्षा नहीं। सिर्फ चेतावनी और समझ। अमन ने महसूस किया कि यह भी एक तरह की शिक्षा थी—रुकना सीखना।
उसी रात राजिया अपने कमरे में बैठी थी। भाई का नोट फिर से निकाला। बार-बार पढ़ा। फिर उसने एक छोटा सा डायरी निकालकर उसमें लिखना शुरू किया।
“आज अमन ने मेरी निगाह को सहन किया। पहले वह नजरें बचाता था। अब नहीं। या तो वह निर्दोष है… या बहुत चालाक।”
उसने पेन रोक लिया। बाहर हवा चल रही थी। खिड़की की दरार से ठंडी हवा आ रही थी। राजिया ने अचानक खिड़की की तरफ देखा। कुछ नहीं था। लेकिन मन में वही अहसास लौट आया जो पिछली रात हुआ था—जैसे कोई बाहर खड़ा हो।
उसने डायरी बंद की और दीया बुझा दिया। अँधेरे में लेटकर उसने फुसफुसाकर कहा,
“मैं इंतजार करूँगी। तू गलती करेगा। और जब करेगा… तो मैं वहीं हूँगी।”
गाँव सोया हुआ था। लेकिन दो घरों में नींद नहीं आ रही थी। एक में शक की आग जल रही थी। दूसरे में सावधानी का कवच कसता जा रहा था।
और इन दोनों के बीच राधा थी—जो कुछ भी नहीं जानती थी, लेकिन महसूस कर रही थी कि अमन के आसपास कुछ बदल रहा है।
अगली सुबह जब अमन कॉलेज गया तो राधा गली में मिली। उसने हल्की मुस्कान दी, लेकिन आँखों में सवाल था।
“तुम इन दिनों… थोड़े दूर लग रहे हो,” उसने बहुत धीमे स्वर में कहा।
अमन ने उसकी आँखों में देखा। रेणु की सलाह याद आई। उसने नरम स्वर में जवाब दिया,
“थोड़ा पढ़ाई का दबाव है। तुम परेशान मत होना।”
राधा ने कुछ और कहना चाहा, लेकिन अमन ने बात बदल दी। दोनों कॉलेज तक साथ चले, लेकिन वह पुरानी आसानी अब नहीं थी। राधा को लगा जैसे उनके बीच कोई अदृश्य दीवार खड़ी हो गई हो।
कॉलेज में राजिया फिर से अपनी जगह पर बैठी थी। आज उसकी निगाह अमन पर पहले से ज्यादा देर तक टिकी रही। अमन ने सामान्य व्यवहार रखा। लेकिन अंदर ही अंदर वह महसूस कर रहा था कि घेरा धीरे-धीरे सिकुड़ रहा है।
दोपहर में जब अमन घर लौटा तो आँगन में कमला चाची अकेली बैठी थीं। उन्होंने उसे देखते ही बुलाया।
“इधर आ।”
अमन पास गया। कमला चाची ने उसका हाथ पकड़ा। उंगलियाँ कलाई पर घूमीं।
“तुम इन दिनों बहुत संभलकर चल रहे हो,” उन्होंने धीमी आवाज में कहा। “डर लग रहा है क्या?”
अमन ने उनकी आँखों में देखा। “डर नहीं चाची। बस सावधानी।”
कमला चाची हल्की मुस्कुराईं। “सावधानी अच्छी चीज है। लेकिन ज्यादा सावधानी से मौके भी निकल जाते हैं।”
अमन ने कुछ नहीं कहा। कमला चाची ने उसका हाथ छोड़ दिया। लेकिन आँखों में वह चुनौती बाकी थी।
रात को रेणु फिर आईं। इस बार उन्होंने अमन का चेहरा देखते ही समझ लिया कि दिन भारी रहा है।
“बताओ,” उन्होंने कहा।
अमन ने सब बताया—राधा की बात, राजिया की निगाहें, कमला चाची का इशारा। रेणु अंत तक चुपचाप सुनती रहीं। फिर बोलीं,
“अब तुम्हें एक फैसला करना होगा। या तो तुम इन सारी आगों के बीच से निकलोगे, या जल जाओगे। मैं तुम्हें शरीर सिखा सकती हूँ, नियंत्रण सिखा सकती हूँ। लेकिन फैसला तुम्हें खुद करना होगा।”
अमन ने सिर हिलाया। रेणु ने उसका हाथ पकड़ा।
“आज मैं तुम्हें कुछ नहीं सिखाऊँगी। सिर्फ इतना याद रखना—जो छुपा है वह हमेशा छुपा नहीं रहता। और जो दिखता है वह हमेशा सच नहीं होता।”
वह चली गईं।
अमन खिड़की के पास जाकर बाहर देखा। अँधेरा गाढ़ा था। कहीं दूर कुत्ते की आवाज आई। मन में एक सवाल घूम रहा था—
राजिया कितनी दूर तक जाएगी?
और क्या वह सच में अकेली है… या उसके पीछे भी कोई है?
रात गहरी होती गई। हवेली के अंदर कई साँसें चल रही थीं। और गाँव के किनारे वाले छोटे से घर में एक लड़की डायरी में लिख रही थी—
“कल मैं उसके करीब जाऊँगी। देखूँगी कि वह कितना संभल सकता है।”
कहानी अब एक नए मोड़ पर खड़ी थी। जहाँ शरीर की भूख से ज्यादा खतरनाक था—शक का धीरे-धीरे बढ़ता जाल।


अगली सुबह अमन ने रेणु की सलाह को गंभीरता से लिया।
वह खेतों वाले छोटे रास्ते से नहीं गया। मुख्य सड़क से कॉलेज पहुँचा। राधा गली में नहीं मिली। शायद वह भी जानबूझकर अलग रास्ता चुन रही थी। कॉलेज पहुँचकर अमन ने अपनी जगह पर बैठते ही महसूस किया कि राजिया की निगाह फिर से उसकी पीठ पर है। लेकिन आज उसने मुड़कर नहीं देखा। किताब खोली और ध्यान पढ़ाई पर लगाने की कोशिश की।
ब्रेक में अमन ने पानी की टंकी की तरफ जाने के बजाय कक्षा में ही रहना पसंद किया। राधा बाहर गई थी। राजिया भी गई। दोनों की अनुपस्थिति में अमन को थोड़ी राहत मिली। लेकिन वह राहत ज्यादा देर नहीं टिकी।
दोपहर की छुट्टी के बाद जब वह घर की तरफ लौट रहा था तो गली के मोड़ पर राजिया खड़ी मिली। अकेली। जैसे वह जानबूझकर उसका इंतजार कर रही हो।
अमन की चाल एक पल के लिए धीमी पड़ी, लेकिन उसने रुकने के बजाय सामान्य गति बनाए रखी। राजिया ने उसका रास्ता नहीं रोका। बस इतना कहा,
“अमन।”
अमन रुक गया। दोनों के बीच थोड़ी दूरी थी। आसपास लोग आ-जा रहे थे, इसलिए राजिया ने आवाज बहुत ऊँची नहीं की।
“मैंने सोचा था तुम आज भी उसी रास्ते से जाओगे,” उसने कहा। आवाज में कोई आरोप नहीं था, सिर्फ एक अजीब सी शांति।
अमन ने जवाब दिया, “आज मन नहीं था।”
राजिया ने सिर हिलाया। “अच्छा। तो फिर कल मिलते हैं।”
वह मुड़कर चली गई। अमन वहीं खड़ा रह गया। “कल मिलते हैं” वाली बात उसके दिमाग में गूँजती रही। राजिया अब सिर्फ सवाल नहीं पूछ रही थी। वह मुलाकातों का पैटर्न भी बना रही थी।
घर पहुँचकर अमन ने सीधा अपने कमरे में जाने की कोशिश की, लेकिन आँगन में कमला चाची फिर से बैठी थीं। उन्होंने इस बार नहीं बुलाया। सिर्फ उसकी तरफ देखा। लंबी, समझदार निगाह से। अमन ने नमस्ते कहा और अंदर चला गया। कमला चाची की चुप्पी आज उनके स्पर्श से भी ज्यादा भारी लग रही थी।
शाम को राधा ने पहली बार खुद अमन को नोटिस करने की कोशिश की। कॉलेज के बाहर वह थोड़ी देर खड़ी रही। अमन जब निकला तो उसने धीमे स्वर में कहा,
“तुम इन दिनों सच में बदल गए हो।”
अमन ने उसकी तरफ देखा। राधा की आँखों में नाराजगी नहीं थी। बल्कि एक हल्की सी चिंता और थकान थी।
“पढ़ाई का दबाव है,” अमन ने वही पुराना जवाब दिया।
राधा ने सिर हिलाया। “अगर कभी बात करनी हो… तो कहना।”
वह और कुछ नहीं बोली। बस इतना कहकर चली गई। अमन ने उसका पीठ देखता रहा। दीवार और मोटी हो चुकी थी, लेकिन राधा अभी भी दरवाजा बंद नहीं कर रही थी। वह इंतजार कर रही थी—कि अमन खुद आए।
रात को जब रेणु आईं तो अमन ने दिन की हर छोटी बात बताई। राजिया का गली में इंतजार करना, कमला चाची की चुप निगाह, और राधा का वह छोटा सा वाक्य।
रेणु ने इस बार काफी देर तक कुछ नहीं कहा। लालटेन की लौ उनके चेहरे पर काँप रही थी। आखिरकार उन्होंने धीमे स्वर में कहा,
“राजिया अब तुम्हें अपने तरीके से घेर रही है। वह तुम्हें डरा नहीं रही। वह तुम्हें आदत डाल रही है—कि तुम उसकी मौजूदगी को सामान्य समझने लगो। यह सबसे खतरनाक तरीका है।”
अमन चुप रहा।
“और राधा…” रेणु ने गहरी साँस ली। “वह अभी भी तुम्हारा इंतजार कर रही है। लेकिन अगर तुम ज्यादा देर तक दीवार बनाए रखा तो वह खुद दीवार बन जाएगी। फिर तोड़ना मुश्किल हो जाएगा।”
अमन ने धीमे स्वर में पूछा, “तो मैं क्या करूँ दीदी?”
रेणु ने उसकी आँखों में देखा। “कुछ दिन और सब्र करो। राजिया को अपनी चाल चलने दो। तुम सिर्फ अपनी जगह पर बने रहो। कोई नया कदम मत उठाना। न उसके करीब जाना, न राधा से पूरी तरह दूर होना। संतुलन बनाए रखना।”
बात खत्म होने के बाद रेणु ने अमन के बालों में हाथ फेरा। इस बार उनका स्पर्श सिर्फ आश्वासन देने वाला था। कोई शिक्षा नहीं, कोई शरीर की बात नहीं। सिर्फ एक बड़ी बहन का सहारा।
रेणु के जाने के बाद अमन खिड़की के पास बैठ गया। बाहर अँधेरा गाढ़ा था। मन में राजिया की आवाज घूम रही थी—“तो फिर कल मिलते हैं।”
उसी समय गाँव के किनारे वाले छोटे घर में राजिया डायरी खोल रही थी। उसने आज की बात लिखी—
“आज वह मुख्य सड़क से गया। मतलब मेरी बात उसके दिमाग में है। वह बच रहा है। लेकिन बचने वाला आदमी हमेशा निर्दोष नहीं होता। कभी-कभी सबसे चालाक आदमी ही सबसे ज्यादा बचता है।”
उसने पेन रोका। फिर एक नई लाइन जोड़ी—
“कल मैं उसकी दिनचर्या का पहला पन्ना भरूँगी। कहाँ जाता है, कितनी देर लगता है, किससे बात करता है। भाई ने कहा था अमन से पूछना… तो मैं पूछूँगी। लेकिन अपने तरीके से। धीरे-धीरे।”
डायरी बंद करके उसने दीया बुझा दिया। अँधेरे में लेटकर वह सोचती रही। शक अभी भी वहाँ था। लेकिन शक के नीचे एक और भावना भी हिलोरें ले रही थी—जिसे वह अभी नाम नहीं दे पा रही थी।
रात गहरी होती गई।
हवेली के अंदर अमन सोने की कोशिश कर रहा था। आँखें बंद करता तो राजिया की ठंडी निगाहें आ जातीं। कभी राधा का थका हुआ चेहरा। कभी कमला चाची की चुप चेतावनी।
और गाँव के दूसरे छोर पर राजिया आँखें खोले अँधेरे को घूर रही थी।
दोनों के बीच की दूरी अब सिर्फ गलियों और खेतों की नहीं रह गई थी। वह दूरी अब एक अदृश्य खेल में बदल चुकी थी—जहाँ एक बच रहा था और दूसरी घेर रही थी।
कल नया दिन आने वाला था। और उस दिन राजिया अपना अगला कदम बढ़ाने वाली थी।
Fuckuguy
albertprince547;
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#64
अगली सुबह अमन ने अपनी दिनचर्या और संकुचित कर ली।
वह घर से निकला तो मुख्य सड़क से ही गया। खेतों वाला छोटा रास्ता उसने पूरी तरह छोड़ दिया था। कॉलेज पहुँचकर उसने अपनी जगह पर बैठते ही किताब खोल ली। आज उसने ब्रेक में भी कक्षा से बाहर कदम नहीं रखा। पानी की जरूरत पड़ने पर भी वह आखिरी समय पर गया और जल्दी लौट आया। राजिया की निगाहें उसे कई बार महसूस हुईं, लेकिन उसने एक बार भी मुड़कर नहीं देखा।
कॉलेज के बाद अमन तुरंत घर की तरफ निकल पड़ा। वह नहीं जानता था कि उसके पीछे लगभग पचास कदम की दूरी पर राजिया चल रही थी। वह पेड़ों और दीवारों की आड़ लेकर आ रही थी। न ज्यादा करीब, न इतनी दूर कि खो जाए। उसकी निगाह अमन के हर कदम पर थी—कहाँ रुकता है, किससे बात करता है, कितनी तेजी से चलता है।
अमन गली के मोड़ पर एक बार रुका। उसे लगा जैसे कोई देख रहा हो। उसने पीछे मुड़कर देखा। सड़क खाली थी। सिर्फ दूर एक कुत्ता सड़क पार कर रहा था। वह सिर हिलाकर आगे बढ़ गया। लेकिन वह अहसास उसके साथ घर तक गया।
घर पहुँचते ही सरला चाची ने उसे रोक लिया।
“आज चेहरा और थका लग रहा है,” उन्होंने चिंतित स्वर में कहा। “कुछ खाकर जाओ।”
अमन ने मुस्कुराते हुए सिर हिलाया। “थकान है चाची। आराम कर लूँगा।”
सरला चाची ने उसके बालों में हाथ फेरा। उनकी निगाह में माँ जैसी चिंता साफ थी। कमला चाची आँगन के दूसरे कोने में बैठी थीं। उन्होंने इस बार कुछ नहीं कहा। सिर्फ अमन को देखा। लंबी, चुप निगाह से। वह निगाह अमन के पीठ पर तब तक बनी रही जब तक वह अपने कमरे में गायब नहीं हो गया।
शाम को राधा कॉलेज के बाहर नहीं मिली। अमन ने थोड़ी देर इंतजार किया, लेकिन वह दिखाई नहीं दी। घर लौटकर उसने सोचा कि शायद राधा अब सच में दूरी बना रही है। यह ख्याल उसके अंदर एक हल्की सी टीस छोड़ गया।
रात के खाने के बाद रेणु आईं। लालटेन की रोशनी कम रखी हुई थी। उन्होंने दरवाजा बंद किया और बिस्तर के किनारे बैठ गईं।
अमन ने दिन की बातें बतानी शुरू कीं। राजिया का पीछा करने का अहसास, सरला चाची की चिंता, कमला चाची की चुप्पी, और राधा का न मिलना।
रेणु अंत तक चुपचाप सुनती रहीं। फिर धीमे स्वर में बोलीं,
“अब वह सिर्फ सवाल नहीं पूछ रही। वह तुम्हें पढ़ रही है। तुम्हारी आदतें, तुम्हारे रास्ते, तुम्हारा समय। यह निगरानी का चरण है। अगर तुमने इन दिनों कोई गलती की—कोई अलग रास्ता, कोई अलग मुलाकात—तो वह नोट कर लेगी।”
अमन ने सिर हिलाया। “मुझे लग रहा था कोई पीछे है। लेकिन दिखा कुछ नहीं।”
“दिखाई नहीं देगी,” रेणु ने कहा। “चालाक औरत कभी सामने से नहीं आती। वह पीछे से घेरती है।”
रेणु ने अमन का हाथ पकड़ा। “कुछ दिन और सब्र करो। राधा को भी समय दो। अगर तुम अभी उसके पास गए और कुछ अधूरा जवाब दिया तो वह और दूर चली जाएगी। उसे लगना चाहिए कि तुम खुद उसके पास लौट रहे हो—मजबूरी में नहीं।”
अमन चुप रहा। रेणु ने उसके माथे पर हल्का हाथ फेरा।
“सो जाओ। और खिड़की के बाहर बार-बार मत झाँको। वह तुम्हें वहाँ भी नाप रही होगी।”
रेणु चली गईं। अमन अकेला रह गया। उसने खिड़की की तरफ देखा, लेकिन पास नहीं गया। बस अँधेरे को दूर से निहारता रहा।
उसी समय गाँव के किनारे वाले घर में राजिया डायरी खोल रही थी। आज का पन्ना उसने बड़े ध्यान से भरा—
“आज उसने मुख्य सड़क चुनी। कॉलेज के बाद सीधे घर गया। बीच में एक बार रुका, पीछे मुड़ा। मतलब उसे अहसास हो रहा है। लेकिन पकड़ नहीं पा रहा।
समय: घर से निकला 7:40
कॉलेज पहुँचा 8:05
वापसी 2:20
घर पहुँचा 2:45
कोई मुलाकात नहीं। राधा नहीं मिली। कमला चाची ने सिर्फ देखा।
कल फिर से पीछा करूँगी। अगर वह एक भी दिन अलग रास्ता अपनाता है तो समझ जाऊँगी कि वह कुछ छुपा रहा है।”
उसने पेन रोका। फिर आखिरी लाइन लिखी—
“भाई ने कहा था अमन से पूछना। मैं पूछ रही हूँ। अपने तरीके से। अब सब्र की बारी मेरी है।”
डायरी बंद करके उसने दीया बुझा दिया। अँधेरे में लेटकर वह सोचती रही। शक अभी भी वहाँ था। लेकिन शक के साथ एक और चीज भी बढ़ रही थी—एक अजीब सा आकर्षण। वह अमन को जितना पढ़ रही थी, उतना ही वह उसके दिमाग में बैठता जा रहा था।
रात गहरी होती गई।
हवेली के अंदर अमन आँखें खोले लेटा रहा। उसे नींद नहीं आ रही थी। हर छोटी आवाज पर उसका ध्यान चला जाता। कभी लगता कोई गलियारे में चल रहा है, कभी लगता खिड़की के बाहर कोई खड़ा है।
और गाँव के दूसरे छोर पर राजिया शांत भाव से सोने की कोशिश कर रही थी। उसके होंठों पर हल्की सी मुस्कान थी—जैसे वह कोई खेल खेल रही हो जिसमें अगला मोहरिया उसी के हाथ में हो।
कल फिर से वही दिनचर्या दोहराने वाली थी।
लेकिन दोनों में से एक अब और करीब आ चुका था।
और दूसरा… और सतर्क।


राजिया की नज़र से…
रात का अँधेरा मेरे कमरे में घना हो चुका था। दीये की लौ बहुत पहले बुझ चुकी थी। मैं चारपाई पर लेटी हुई थी, लेकिन नींद कहीं दूर थी। भाई का तकिया अभी भी मेरे सीने से लगा हुआ था। उसकी हल्की महक अब लगभग खत्म हो चुकी थी, लेकिन मैं उसे छोड़ नहीं पा रही थी।
डायरी मेरे तकिये के नीचे थी। आज का पन्ना मैंने ध्यान से भरा था। अमन की दिनचर्या—समय, रास्ते, रुकने की जगहें। सब कुछ। वह बच रहा था। साफ बच रहा था। मुख्य सड़क, सीधा घर, कोई额外 मुलाकात नहीं। राधा से भी दूरी। कमला चाची की निगाहों से भी बचाव।
“तू बहुत संभल रहा है अमन…” मैंने अँधेरे में फुसफुसाकर कहा। “इतना संभलना निर्दोष आदमी का काम नहीं होता।”
मेरी आँखों के सामने वह दृश्य बार-बार आ रहा था जब मैंने उससे पहली बार सीधा सवाल पूछा था। पानी की टंकी के पास। उसकी आँखें नहीं डगमगाई थीं। न कोई घबराहट, न कोई जल्दबाजी। वह शांत रहा। बहुत शांत। वही शांति मुझे सबसे ज्यादा खटक रही थी।
भाई की आवाज मेरे कानों में गूँज उठी—“अगर मेरे साथ कुछ हुआ… तो अमन से पूछना।”
मैंने कागज को जेब से निकाला। अँधेरे में भी उंगलियों के नीचे उसकी बनावट महसूस हो रही थी। भाई ने यह नोट कब लिखा होगा? क्यों लिखा होगा? क्या वह जानता था कि अमन खतरनाक है? या फिर वह खुद किसी खेल में उलझा हुआ था?
मेरा दिमाग थक चुका था, लेकिन रुक नहीं रहा था।
अमन… राधा… मूवी वाला दिन… भाई की मौत। सब कुछ एक लकीर में बँधता जा रहा था। लेकिन लकीर अभी अधूरी थी। सबूत नहीं था। सिर्फ अहसास था। और अहसास कभी अदालत में नहीं चलता।
मैंने करवट बदली। चारपाई की रस्सी ने हल्की आवाज की। माँ दूसरे कमरे में सो रही थीं। उनकी साँसें भारी थीं। रोने के बाद की थकी हुई साँसें। मैंने उन्हें जगाए बिना धीरे से उठा। खिड़की के पास गई। बाहर अँधेरा था। हवेली की तरफ का रास्ता दिख नहीं रहा था, लेकिन मैं जानती थी कि वह दिशा में अमन सो रहा होगा। शायद खिड़की के पास बैठा सोच रहा होगा कि कोई उसका पीछा तो नहीं कर रहा।
“पीछा तो कर ही रही हूँ,” मैंने अपने आप से कहा। “और अब और करीब आऊँगी।”
मैंने डायरी फिर निकाली। अँधेरे में लिखना मुश्किल था, लेकिन मुझे लिखना था। उंगलियों के स्पर्श से कागज की सतह पहचानते हुए मैंने लिखा—
“वह डरता नहीं। वह संभलता है। दोनों में फर्क है। डरने वाला आदमी गलती करता है। संभलने वाला आदमी गलती छुपाता है।
कल मैं उसका पीछा फिर करूँगी। इस बार थोड़ा और करीब से। अगर वह एक भी बार अलग रास्ता अपनाता है… तो समझ जाऊँगी कि वह कुछ छुपा रहा है।
और अगर वह निर्दोष निकला… तो भी मैं उसे छोड़ने वाली नहीं। भाई के बाद मेरे पास कुछ अपना होना चाहिए। अमन… तू अब मेरी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। चाहे शक के रूप में, चाहे और किसी रूप में।”
मैंने डायरी बंद की। कागज को फिर से जेब में रखा। खिड़की से दूर जाकर चारपाई पर लेट गई। भाई का तकिया फिर से सीने से लगा लिया।
आँखें बंद कीं तो अमन का चेहरा आ गया—शांत, संभला हुआ, और कुछ छुपाता हुआ। फिर भाई का चेहरा। फिर वह खाली चारपाई।
नींद बहुत देर से आई। जब आई तो टूटी-फूटी थी। सपने में मैं अमन के पीछे चल रही थी। वह मुड़-मुड़कर देख रहा था, लेकिन मुझे पकड़ नहीं पा रहा था। और मैं मुस्कुरा रही थी।
सुबह जब आँख खुली तो माँ चूल्हे के पास बैठी चाय बना रही थीं। मैंने उनके पैर छुए। उन्होंने मेरे सिर पर हाथ रखा। कुछ नहीं पूछा। हम दोनों जानते थे कि सवालों का कोई जवाब नहीं है।
कॉलेज जाते समय मैंने काला सूट पहना। बाल कसकर बाँधे। चेहरे पर कोई भाव नहीं रखा। गली से निकलते समय मेरी निगाह हवेली की तरफ चली गई। आँगन खाली था। अमन अभी निकला नहीं था।
मैंने अपनी चाल सामान्य रखी। लेकिन मन में हिसाब चल रहा था। आज मैं उसका पीछा और करीब से करूँगी। आज मैं देखूँगी कि वह कितना संभल सकता है।
क्योंकि अब यह सिर्फ भाई का शक नहीं रह गया था।
अब यह मेरा खेल बन चुका था।
और मैं हारने वाली नहीं थी।
Fuckuguy
albertprince547;
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#65
Aapko wapas dekhkar bahut hi jyada achchha laga but ab kathanak ghar ke gande raajon se hatkar Rajiya ke ird gird ghumne lag gayi hai Renu ko bhi side line kar diya hai aapne story ka flow bigad gaya lagta hai boring jaisa feel ho raha hai by the way nice updates waiting for next
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#66
[img=464x3400][Image: 27933175928ef9ca57e1daee333632e3.jpg][/img]


रात के लगभग बारह बज रहे थे।
अमन अपने कमरे में बिस्तर पर बैठा था। दिमाग में राजिया की निगाहें, उसका पीछा, और भाई वाला नोट बार-बार घूम रहा था। वह समझ चुका था कि राजिया अब सिर्फ शक नहीं कर रही। वह सच जानने के बहुत करीब पहुँच चुकी है। अगर वह खुद नहीं बताया तो कोई और तरीका निकाल लेगी—और तब स्थिति और खराब हो सकती है।
दरवाजे पर हल्की दस्तक हुई। रेणु अंदर आईं। लालटेन लेकर। उन्होंने दरवाजा बंद किया, सिटकिनी लगाई और बिस्तर के किनारे बैठ गईं।
अमन ने सीधा कहा, “दीदी… मुझे राजिया को सच बताना होगा।”
रेणु की आँखें थोड़ी सिकुड़ गईं। उन्होंने अमन का चेहरा ध्यान से देखा। “तुमने सोचा-समझा?”
“हाँ,” अमन ने सिर हिलाया। “वह अब बहुत करीब आ चुकी है। अगर मैंने खुद नहीं बताया तो वह कोई गलत नतीजा निकाल लेगी। फिर न सिर्फ मेरा, राधा का भी नुकसान हो सकता है।”
रेणु कुछ पल चुप रही। फिर धीमे स्वर में बोलीं, “अगर बताना ही है… तो ठीक से बताना। झटके में नहीं। उसे इतना झटका मत लगने देना कि वह टूट जाए या कोई गलत कदम उठा ले।”
अमन ने उनकी तरफ देखा। “तो कैसे बताऊँ?”
रेणु ने उसका हाथ पकड़ा। “पहले उससे कहो कि तुम उसे अकेले में पूरी सच्चाई बताना चाहते हो। घर पर नहीं—कहीं ऐसा जगह जहाँ वह सुरक्षित महसूस करे। उसकी अपनी जगह सबसे अच्छी रहेगी। रात को। जब माँ सो चुकी हों।”
अमन ने सिर हिलाया।
“और जब बताओ,” रेणु ने आगे कहा, “तो साफ बताना। कि उसके भाई ने जानबूझकर तुम्हें कुचलने की कोशिश की थी क्योंकि वह राधा को चाहता था। तुम्हारी उससे कोई दुश्मनी नहीं थी। तुमने कुछ नहीं किया। वह खुद नियंत्रण खोकर खाई में गिर गया। सच्चाई इतनी ही है।”
अमन चुपचाप सुन रहा था।
“अगर वह न माने,” रेणु ने आँखों में आँखें डालकर कहा, “तो उससे पूछना—क्या उसने कभी तुम्हें उसके भाई के साथ झगड़ते देखा? क्या तुमने कभी उसके भाई को धमकी दी? तुम तो उसे ठीक से जानते भी नहीं थे। सवालों से उसे खुद सोचने दो।”
अमन ने गहरी साँस ली। “और अगर वह रोने लगे?”
रेणु की आवाज थोड़ी नरम हो गई। “तो उसे रोने दो। रोकना मत। बस पास रहना। और… सावधान रहना। भावनाओं के उस पल में कुछ भी हो सकता है। नियंत्रण मत खोना।”
अमन ने सिर हिलाया। रेणु ने उसके माथे पर हल्का हाथ फेरा।
“कल कॉलेज में उसे कह देना। बाकी वह खुद तय करेगी।”
रेणु चली गईं। अमन अकेला रह गया। कमरे में अँधेरा था। पहली बार उसने महसूस किया कि सच छुपाने से ज्यादा मुश्किल सच बताना होता है।
अगली सुबह कॉलेज में अमन ने मौका तलाशा। ब्रेक के समय जब राजिया अकेली पानी की टंकी के पास खड़ी थी, तब वह उसके पास गया।
“राजिया,” उसने धीमे स्वर में कहा।
राजिया मुड़ी। आँखों में वही ठंडी चमक थी।
“मुझे तुमसे एक बात कहनी है,” अमन ने जारी रखा। “पूरी सच्चाई। लेकिन अकेले में। अगर तुम चाहो तो… आज रात तुम्हारे घर आ सकता हूँ। जब तुम्हारी माँ सो जाएँ।”
राजिया की आँखें एक पल के लिए चौड़ी हुईं। फिर उसने धीरे से सिर हिलाया।
“ठीक है। ग्यारह बजे के बाद। पिछवाड़े वाले दरवाजे से आना। मैं खुला रखूँगी।”
अमन ने सिर हिलाया और वहाँ से हट गया। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। पहली बार उसने खुद राजिया को बुलावा दिया था—सच बताने के लिए।
रात के ग्यारह बजने में अभी देर थी। लेकिन अमन जानता था कि आज की रात सब कुछ बदलने वाली है।


रात के ग्यारह बज चुके थे।
अमन ने काले रंग की सादी कमीज और पैंट पहन ली थी। चेहरे पर कोई टोपी या छुपाने वाली चीज नहीं थी। आज वह सच बताने जा रहा था, छुपने नहीं। घर से निकलते समय उसने खिड़की से बाहर देखा। हवेली शांत थी। रेणु की सलाह उसके कानों में गूँज रही थी—“ठीक से बताना… झटका मत लगने देना।”
गाँव की गलियाँ सुनसान थीं। कुत्तों की कभी-कभी आने वाली आवाज के अलावा सन्नाटा था। अमन ने राजिया के घर का पिछवाड़ा पहचाना। छोटा सा मिट्टी का मकान। पिछवाड़े वाला दरवाजा अधखुला था, ठीक जैसे राजिया ने कहा था।
उसने धीरे से दरवाजा धकेला। अंदर हल्की सी दीये की रोशनी थी। राजिया दरवाजे के पास ही खड़ी थी। काले रंग का ही सूट पहने हुए। बाल खुले थे। आँखों में नींद नहीं, बल्कि एक अजीब सी तैयारी थी।
“आ गए,” उसने बहुत धीमी आवाज में कहा।
अमन ने सिर हिलाया। “माँ सो गईं?”
“हाँ। काफी देर हो गई।” राजिया ने दरवाजा बंद किया और सिटकिनी लगा दी। “अंदर आओ।”
दोनों छोटे से कमरे में दाखिल हुए। भाई की खाली चारपाई अभी भी कोने में खड़ी थी। तकिया वैसा ही पड़ा था। दीये की लौ दीवार पर दोनों की छायाएँ बना रही थी। राजिया ने अमन की तरफ देखा।
“बैठो,” उसने कहा।
अमन चारपाई के किनारे बैठ गया। राजिया उसके सामने खड़ी रही। कुछ पल तक दोनों चुप रहे। फिर अमन ने बात शुरू की। आवाज शांत लेकिन साफ थी।
“राजिया… जो कुछ मैं बताने वाला हूँ, वह सुनने में भारी लगेगा। लेकिन सच यही है।”
राजिया की साँस थोड़ी तेज हो गई। उसने कुछ नहीं कहा। बस खड़ी रही।
अमन ने आँखें उठाकर उसकी तरफ देखा। “तुम्हारे भाई की मौत… एक्सीडेंट थी। लेकिन वह साधारण एक्सीडेंट नहीं थी।”
राजिया की उंगलियाँ मुट्ठी में भींच गईं।
“उस दिन… मैं और राधा शहर से लौट रहे थे। मूवी देखने गए थे। वापस आते समय तुम्हारे भाई ने मोटरसाइकिल से मुझे कुचलने की कोशिश की। जानबूझकर। पूरी रफ्तार से।”
राजिया का चेहरा सख्त हो गया। “झूठ बोल रहे हो।”
“नहीं,” अमन ने सिर हिलाया। आवाज में कोई बचाव नहीं था। सिर्फ सच्चाई। “मैंने राधा को एक तरफ धकेला। खुद भी साइड में कूदा। तुम्हारे भाई का नियंत्रण हाथ से निकल गया। मोटरसाइकिल खाई में चली गई। वह… उठ नहीं पाया।”
कमरे में सन्नाटा छा गया। दीये की लौ काँप रही थी। राजिया की साँसें अब साफ सुनाई दे रही थीं।
“क्यों?” उसने कठोर स्वर में पूछा। “मेरे भाई को तुमसे क्या दुश्मनी थी?”
अमन ने धीमे स्वर में जवाब दिया, “दुश्मनी नहीं थी। वह राधा को चाहता था। काफी दिनों से। चुपके-चुपके देखा करता था। जब उसने हमें साथ देखा… तो बर्दाश्त नहीं कर पाया।”
राजिया पीछे हटी। चारपाई के किनारे जाकर बैठ गई। उसके हाथ काँप रहे थे।
“तुम झूठ बोल रहे हो,” उसने दोबारा कहा। लेकिन आवाज में पहले जैसी मजबूती नहीं रह गई थी। “मेरा भाई… वह ऐसा नहीं कर सकता।”
अमन ने उसकी तरफ देखा। आँखों में आँखें डालकर बोला, “राजिया… क्या तुमने कभी मुझे तुम्हारे भाई से झगड़ते देखा? क्या मैंने कभी उसे धमकी दी? मैं तो उसे ठीक से जानता भी नहीं था। कॉलेज में भी मुश्किल से दो-चार बार बात हुई होगी। फिर मैं क्यों मारता उसे?”
राजिया चुप हो गई। उसकी निगाहें फर्श पर टिक गईं। दिमाग में पुरानी बातें घूमने लगीं—भाई का राधा के बारे में चुप रहना, उसकी जलन भरी निगाहें, और वह रात जब वह अमन और राधा की योजना सुनकर गुस्से में था।
अमन ने आगे कहा, आवाज और धीमी हो गई, “मैंने कुछ नहीं किया राजिया। सिर्फ अपनी और राधा की जान बचाई। बाकी… वह खुद गिर गया।”
राजिया ने आँखें बंद कर लीं। उसके होंठ काँप रहे थे। कुछ पल तक वह बिल्कुल शांत रही। फिर धीरे से बोली,
“मेरा भाई… राधा के पीछे पड़ा था…?”
अमन ने सिर हिलाया। “हाँ।”
राजिया का चेहरा बिखर गया। उसने दोनों हाथों से मुँह ढक लिया। आवाज टूटते हुए निकली, “वह… वह मुझसे कुछ नहीं बोला… कभी नहीं…”
फिर वह अचानक चारपाई पर झुक गई। तकिये में मुँह गड़ा दिया और रोने लगी। पहले दबी हुई सिसकियाँ, फिर जोर-जोर से। कंधे काँप रहे थे। आँसू तकिये को गीला करने लगे।
अमन उठकर उसके पास गया। वह चारपाई के किनारे बैठ गया। कुछ पल तक बस बैठा रहा। फिर धीरे से उसका नाम लिया,
“राजिया…”
वह रोती रही। अमन ने उसका कंधा हल्के से पकड़ा। “चुप हो जाओ… कृपया।”
राजिया ने सिर नहीं उठाया। आँसू रुक नहीं रहे थे। अमन ने और करीब खिसककर उसके बालों में हाथ फेरा। बहुत धीरे। फिर अपना चेहरा उसके करीब ले गया। दोनों के चेहरे अब बहुत नजदीक थे। राजिया की सिसकियाँ उसकी साँसों से मिल रही थीं।
अमन ने बहुत धीमी आवाज में कहा, “इस खूबसूरत चेहरे पर ये आँसू… सूट नहीं करते।”
फिर उसने अपना चेहरा और करीब किया। होंठों से उसके गाल पर बहते आँसू को छुआ। धीरे-धीरे चाटा। एक आँसू, फिर दूसरा। राजिया की साँस अटक गई। उसने आँखें खोलीं। अमन का चेहरा उसके बिलकुल सामने था। इतना करीब कि उसकी साँस महसूस हो रही थी।
राजिया कुछ नहीं बोली। बस देखती रही।
अमन ने उसके माथे से बाल हटाए। फिर बहुत धीरे से अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए। पहला स्पर्श बहुत हल्का था। जैसे पूछ रहा हो। राजिया ने जवाब नहीं दिया। लेकिन पीछे भी नहीं हटी।
अमन ने थोड़ा और दबाव दिया। होंठों को धीरे से चूसा। राजिया की साँस तेज हो गई। उसके हाथ अभी भी तकिये पर थे। अमन ने एक हाथ उसके गाल पर रखा और चुंबन को थोड़ा गहरा किया।
कुछ पल बाद राजिया के होंठ हल्के से हिले। बहुत धीरे। जैसे कोई हिचकिचाहट टूट रही हो। अमन ने महसूस किया और चुंबन को और गहरा कर दिया। अब जीभ का स्पर्श हुआ। पहले हल्का, फिर थोड़ा और।
राजिया की आँखें बंद हो गईं। उसका एक हाथ धीरे से अमन की कमीज पर आ गया। चुंबन अब लंबा होता जा रहा था। दोनों की साँसें एक-दूसरे के मुँह में मिल रही थीं। अमन ने उसका निचला होंठ हल्के से दाँतों से पकड़ा, फिर जीभ से सहलाया। राजिया की सिसकारी चुंबन के बीच में दबी हुई निकल गई।
अमन का दूसरा हाथ उसकी कमर पर चला गया। उसने उसे और करीब खींच लिया। दोनों के शरीर अब एक-दूसरे से सट चुके थे। चुंबन और गहरा, और गीला होता जा रहा था। जीभ एक-दूसरे के मुँह में घूम रही थी। कभी अमन चूस रहा था, कभी राजिया जवाब दे रही थी।
कमरे में सिर्फ उनके चुंबन की हल्की आवाज और साँसें गूँज रही थीं। दीये की लौ काँप रही थी। और बाहर रात गहरी होती जा रही थी।



चुंबन अभी भी गहरा चल रहा था। दोनों की जीभ एक-दूसरे के मुँह में उलझी हुई थीं। अमन का एक हाथ राजिया की कमर पर था, दूसरा उसके गाल पर। राजिया की साँसें तेज हो चुकी थीं। उसका शरीर हल्के-हल्के अमन की तरफ झुक रहा था।
अमन ने धीरे से अपना हाथ उसकी कमर से सरकाया। उंगलियाँ ऊपर की तरफ बढ़ीं। पहले पसलियों को छुआ, फिर और ऊपर। साड़ी नहीं, सूट था। टाइट काला सूट। अमन की हथेली ने सीधे उसके बाएँ स्तन को कपड़ों के ऊपर से दबाया।
राजिया की लंबी, दबी हुई सिसकारी चुंबन के बीच में निकल गई। “उम्मhh…”
अमन ने चुंबन तोड़े बिना उसका स्तन हल्के से मसला। गोलाई को महसूस किया। निप्पल कपड़े के नीचे सख्त हो रहा था। उसने अंगूठे से गोला बनाते हुए दबाया। राजिया की कमर काँप गई। उसका हाथ अमन की कमीज पर और कस गया।
अमन ने दूसरा हाथ भी उसके दाएँ स्तन पर रख दिया। अब दोनों हाथों से कपड़ों के ऊपर से उसके भारी स्तनों को दबा रहा था, सहला रहा था, निप्पलों को उंगलियों के बीच लेकर हल्के-हल्के मरोड़ रहा था। राजिया की सिसकारियाँ तेज होने लगीं। चुंबन के बीच-बीच में उसकी आवाज निकल रही थी—
“आह्ह… अमन…”
अमन ने अचानक चुंबन तोड़ दिया। दोनों की साँसें एक-दूसरे के चेहरे पर पड़ रही थीं। राजिया की आँखें अधखुली थीं। होंठ सूजे हुए और चमक रहे थे। अमन ने उसका चेहरा दोनों हाथों में लिया। फिर धीरे से उसका सिर एक तरफ झुकाया और अपने होंठ उसकी गर्दन पर रख दिए।
पहले हल्का सा चुंबन। फिर थोड़ा और दबाकर। जीभ से चाटा। राजिया की गर्दन में सिहरन दौड़ गई। उसने आँखें बंद कर लीं। अमन ने उसके कान के नीचे वाले हिस्से को होंठों में लेकर हल्के से चूसा। राजिया की सिसकारी और साफ निकल गई।
“अमन… धीरे…”
अमन ने जवाब में और गहराई से उसकी गर्दन चूमनी शुरू कर दी। कभी दाँतों से हल्के निशान बनाए, कभी जीभ से सहलाया। उसी समय उसका एक हाथ राजिया के सूट के गले के पास पहुँचा। उंगलियाँ अंदर सरक गईं। पहले गर्दन के पास की गर्माहट महसूस हुई, फिर और नीचे।
सूट के अंदर कोई ब्रा नहीं थी। अमन की हथेली सीधे उसके नंगे, गर्म स्तन पर पड़ गई। राजिया की शरीर में एक तेज झटका सा चला। उसकी लंबी सिसकारी निकल गई—
“आह्ह्ह… अमन…!”
अमन ने पूरा स्तन मुट्ठी में भर लिया। नरम, भारी और गर्म। निप्पल उसकी हथेली में सख्त चुभ रहा था। उसने धीरे-धीरे मसलना शुरू किया। कभी हल्का, कभी थोड़ा जोर से। निप्पल को दो उंगलियों के बीच लेकर घुमाया, दबाया।
राजिया का सिर पीछे की तरफ झुक गया। उसकी साँसें अब पूरी तरह बिखर चुकी थीं। दोनों हाथ अमन की पीठ पर चले गए थे। नाखून हल्के-हल्के गड़ रहे थे।
अमन ने दूसरा हाथ भी सूट के अंदर ले लिया। अब दोनों नंगे स्तन उसकी मुट्ठियों में थे। वह उन्हें दबा रहा था, ऊपर उठा रहा था, निप्पलों को मरोड़ रहा था। साथ में गर्दन पर उसके होंठ और जीभ रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।
राजिया की आवाज अब काँप रही थी। “अमन… बहुत… आह्ह… धीरे… नहीं… जोर से मत…”
लेकिन उसके शरीर ने अलग कहानी कह रही थी। वह अमन की तरफ और सट रही थी। स्तन उसके हाथों में और अधिक दबाव माँग रहे थे। अमन ने एक निप्पल को हल्के से खींचा। राजिया की कमर उठ गई। एक और तेज सिसकारी निकली।
कमरे में दीये की लौ काँप रही थी। बाहर सन्नाटा था। और अंदर दो शरीर धीरे-धीरे एक-दूसरे की गर्माहट में खोते जा रहे थे।


अमन ने राजिया को दोनों हाथों से कमर से पकड़ा और धीरे से उठा लिया। राजिया की आँखें खुली रहीं। वह कुछ बोल नहीं पाई। अमन ने उसे चारपाई पर लिटा दिया। फिर उसके सूट के निचले किनारे को पकड़ा।
“हाथ ऊपर करो,” उसने बहुत धीमी आवाज में कहा।
राजिया ने धीरे से दोनों हाथ ऊपर कर दिए। अमन ने सूट को नीचे से ऊपर की तरफ खींचना शुरू किया। काला कपड़ा उसके शरीर से सरकता गया। पहले पेट entblößt हुआ, फिर पसलियाँ, फिर भारी स्तन। सूट उसके सिर के ऊपर से निकल गया। राजिया अब सिर्फ पैंटी में थी। उसके गोरे, गोल स्तन दीये की रोशनी में काँप रहे थे। निप्पल सख्त और गाढ़े रंग के थे।
अमन ने उसके पैरों की तरफ देखा। सलवार अभी भी पहनी हुई थी। उसने दोनों हाथों से उसका नाड़ा खोला और सलवार को धीरे-धीरे नीचे खींच लिया। राजिया ने खुद ही कमर थोड़ी उठाई ताकि कपड़ा आसानी से निकल जाए। सलवार उसके पैरों से अलग हो गई। अब वह सिर्फ काली पैंटी में लेटी थी।
अमन खड़ा हो गया। उसने अपनी कमीज के बटन खोले और उतार दी। फिर पैंट का नाड़ा खोला। पैंट नीचे गिर गई। अब वह सिर्फ अंडरवियर में रह गया था। उसका लंड कपड़े के अंदर पूरी तरह तना हुआ साफ दिख रहा था।
वह फिर से चारपाई पर चढ़ गया। राजिया के ऊपर आ गया। दोनों के शरीर की गर्माहट एक-दूसरे से टकरा रही थी। अमन ने झुककर उसके बाएँ स्तन को मुँह में ले लिया। पहले सिर्फ निप्पल को होंठों में दबाया, फिर पूरा मुँह भर लिया और जोर से चूसने लगा।
“आआआह्ह्ह्ह… अमन…” राजिया की लंबी सिसकारी निकली। उसका हाथ अमन के बालों में चला गया।
अमन ने निप्पल को जीभ से घुमाया, हल्के से दाँतों से काटा, फिर फिर से जोर से चूसा। दूसरा स्तन भी उसी हालत में था। वह बारी-बारी से दोनों को मुँह में ले रहा था। राजिया की कमर हिलने लगी थी।
“ओоооह्ह्ह्ह… अमन… उउउउम्मम्म…” उसकी आवाज अब अनियंत्रित हो रही थी।
अमन ने स्तनों से होंठ हटाए और नीचे की तरफ बढ़ा। उसकी जीभ राजिया की पसलियों पर फिसली, फिर पेट पर। धीरे-धीरे नाभि के पास पहुँची। उसने नाभि के चारों तरफ गोला बनाया, फिर जीभ को अंदर डालकर चाटा।
राजिया का शरीर अचानक मचल उठा। “आआआह्ह्ह… नहीं… वहाँ… अमन…” उसकी जाँघें काँपने लगीं। कमर बिस्तर से उठ गई।
अमन ने उसकी नाभि को फिर से चूमा, जीभ से सहलाया। राजिया के नाखून अब अमन की पीठ पर हल्के गड़ रहे थे। वह सिर इधर-उधर हिला रही थी।
अमन फिर से ऊपर आया। एक स्तन को मुँह में लिया और जोर से चूसने लगा। उसी समय उसका दाहिना हाथ नीचे की तरफ सरक गया। उंगलियाँ राजिया की जाँघ के अंदरूनी हिस्से पर फिसलीं। फिर पैंटी के किनारे तक पहुँचीं। उसने पैंटी को एक तरफ सरकाया। उंगलियाँ सीधे उसकी गर्म, गीली चूत पर पड़ गईं।
राजिया की शरीर में एक तेज झटका सा चला। उसकी आवाज और तेज हो गई—
“आआआआह्ह्ह्ह… अमन… उउउम्मम्म… वहाँ… मत…”
अमन ने उंगलियों से धीरे-धीरे उसकी चूत को सहलाना शुरू किया। बीच वाली घुंडी पर गोला बनाया। राजिया की जाँघें अपने आप खुलने लगीं। उसकी सिसकारियाँ अब कमरे में गूँज रही थीं। अमन एक स्तन चूस रहा था और नीचे उंगलियों से उसकी गीली चूत को सहला रहा था।
राजिया का पूरा शरीर काँप रहा था। आँखें बंद थीं। होंठ खुले हुए थे। आवाज टूट-टूटकर निकल रही थी—
“अमन… आआह्ह… ओооह्ह… और… धीरे… नहीं… जोर से…”
अमन ने पैंटी को और साइड में किया। एक उंगली हल्के से उसके अंदर चली गई। राजिया की कमर जोर से उठी। एक लंबी, काँपती हुई सिसकारी निकली।
कमरे में दीये की लौ अभी भी काँप रही थी। बाहर रात गहरी थी। और चारपाई पर दो शरीर अब पूरी तरह एक-दूसरे की आग में जल रहे थे।



अमन ने राजिया के स्तनों से होंठ हटाए। उसकी साँसें तेज चल रही थीं। उसने धीरे से नीचे की तरफ सरकना शुरू किया। जीभ राजिया के पेट पर फिसली, नाभि को फिर से चूमा, फिर और नीचे।
राजिया की पैंटी अभी भी एक तरफ सरकी हुई थी। उसकी चूत पूरी तरह खुली और चमक रही थी—गीली, गुलाबी और उत्तेजना से सूजी हुई। अमन ने दोनों हाथों से उसकी जाँघें और फैलाईं। फिर अपना चेहरा उसके बीच ले गया।
पहले उसने नाक से उसकी गंध ली। फिर जीभ बाहर निकाली और नीचे से ऊपर तक एक लंबा चाटा मारा।
“आआआआह्ह्ह्ह… अमन…!” राजिया की कमर बिस्तर से जोर से उठ गई।
अमन ने रुके बिना फिर से चाटा। इस बार बीच वाली घुंडी पर जीभ को गोल-गोल घुमाया। राजिया की जाँघें काँपने लगीं। उसने दोनों हाथों से अमन का सिर पकड़ लिया और अपनी चूत पर और जोर से दबा दिया।
“ओоооह्ह्ह्ह… हाँ… वहीं… अमन…”
अमन ने जीभ को उसकी चूत के अंदर डाल दिया। गर्म, तंग और गीला अंदर। वह जीभ को तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। साथ में ऊपर वाली घुंडी को भी होंठों से चूस रहा था। राजिया अब पागलों की तरह सिसकारियाँ ले रही थी।
“आआआह्ह्ह… ओоооह्ह्ह… अमन… और तेज… जीभ अंदर… आह्ह्ह…!”
उसके नाखून अमन के बालों में गड़ गए। वह अमन का सिर अपनी चूत में और दबाने लगी। कमर बार-बार ऊपर उठ रही थी। अमन ने उसकी दोनों जाँघों को अपने कंधों पर चढ़ा लिया और और गहराई तक जीभ घुसेड़ दी।
“आआआआह्ह्ह्ह… ओоооह्ह्हह्ह… तेज… और तेज चूसो अमन… उउउम्मम्म…!”
राजिया की आवाज अब पूरी तरह टूट चुकी थी। उसका शरीर काँप रहा था। अमन की जीभ उसकी चूत के अंदर घूम रही थी, चूस रही थी, चाट रही थी। कभी घुंडी को जोर से चूसता, कभी जीभ अंदर तक डालकर हिलाता।
“अमन… मैं… आआह्ह… ओооह्ह… मैं जा रही हूँ… आह्ह्ह… माаааа…!”
राजिया की जाँघें अमन के सिर को जकड़ने लगीं। उसका पूरा शरीर अकड़ गया। कमर जोर से उठी और एक लंबी, काँपती हुई चीख निकलते हुए उसका पहला पानी अमन के मुँह और ठुड्डी पर छूट गया। वह बार-बार काँपती रही। अमन ने जीभ नहीं हटाई। वह धीरे-धीरे चाटता रहा जब तक राजिया की काँपने की गति कम नहीं हो गई।
राजिया का शरीर ढीला पड़ गया। साँसें तेज चल रही थीं। छाती ऊपर-नीचे हो रही थी। आँखें बंद थीं। माथे पर पसीने की बूँदें चमक रही थीं। अमन धीरे से ऊपर आया। उसके होंठ और ठुड्डी चमक रहे थे। उसने राजिया के चेहरे को देखा।
राजिया ने आँखें खोलीं। आँखों में अभी भी उत्तेजना और थकान दोनों थे। अमन ने उसके माथे पर हल्का चुंबन किया। दोनों की साँसें अभी भी एक-दूसरे से मिल रही थीं।
कमरे में दीये की लौ शांत हो चुकी थी। बाहर रात अपनी गहराई में डूबी हुई थी। और चारपाई पर राजिया अभी भी हल्के-हल्के काँप रही थी—अपने पहले पानी के बाद।



अमन ने राजिया के होंठों पर फिर से चुंबन किया। इस बार धीमा और गहरा। राजिया ने भी जवाब दिया। उसकी साँसें अभी भी तेज थीं। अमन ने अपना अंडरवियर नीचे सरकाया। उसका लंड पूरी तरह तना हुआ बाहर आ गया—मोटा, नसों वाला और चमकता हुआ।
उसने राजिया की पैंटी को पूरी तरह खींचकर एक तरफ फेंक दिया। फिर उसके दोनों पैरों को फैलाया और अपने आप को उसके बीच में लाया। लंड का सिर उसकी गीली चूत पर छू गया। राजिया की साँस अटक गई।
“अमन…” उसने फुसफुसाकर कहा। आवाज में डर और इच्छा दोनों थे।
अमन ने उसके माथे पर चुंबन किया। “दर्द होगा तो बताना।”
फिर उसने धीरे-धीरे कमर आगे बढ़ाई। लंड का सिर अंदर घुसने लगा। राजिया की चूत टाइट थी। वह धीरे-धीरे फैल रही थी। अमन ने और दबाव दिया। आधा लंड अंदर चला गया।
“आआआह्ह्ह… अमन… धीरे… बहुत मोटा…!” राजिया की लंबी सिसकारी निकली। उसके नाखून अमन की पीठ पर गड़ गए।
अमन रुक गया। उसने उसके होंठ चूमे। “सह लो… बस थोड़ा और…”
फिर उसने एक और धीमा धक्का मारा। पूरा लंड अंदर तक धंस गया। दोनों की साँसें एक साथ रुक गईं। राजिया की आँखें बंद थीं। माथा अमन के माथे से सटा हुआ था।
कुछ पल तक अमन अंदर ही रुका रहा। फिर उसने धीरे-धीरे बाहर खींचा और फिर अंदर धकेला। हर धक्का गहरा और नियंत्रित था। राजिया की सिसकारियाँ हर धक्के के साथ निकल रही थीं।
“आह्ह… ओооह… अमन… हाँ… ऐसे…!”
अमन ने गति थोड़ी बढ़ा दी। अब वह उसके स्तनों को दोनों हाथों से दबाते हुए चोद रहा था। निप्पलों को मरोड़ते हुए। राजिया की कमर मिलकर हिलने लगी। थोड़ी देर में उसका शरीर फिर से अकड़ने लगा।
“अमन… मैं… फिर से… आआह्ह्ह…!”
उसका दूसरा पानी अमन के लंड पर छूट गया। वह काँपती रही। अमन रुका नहीं। उसने उसके पैरों को अपने कंधों पर चढ़ा लिया और और गहराई तक जाने लगा।
“ले… और ले… राजिया…” उसने फुसफुसाकर कहा।
राजिया की आवाज अब चीख में बदल रही थी। “आआआह्ह्ह… ओоооह्ह… बहुत गहरा… अमन…!”
थोड़ी देर बाद अमन ने लंड बाहर निकाला। राजिया कराह उठी। उसने उसे पलट दिया। अब राजिया घुटनों और हाथों के बल थी। उसकी गोरी गाँड दीये की रोशनी में चमक रही थी। अमन ने पीछे से उसकी कमर पकड़ी और एक झटके में फिर से लंड चूत में धंसा दिया।
“आआआआह्ह्ह्ह…!” राजिया की चीख निकली।
अमन ने डॉगी स्टाइल में जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ राजिया की गाँड उसके पेट से टकरा रही थी। थप्पड़ की हल्की आवाज भी आने लगी। अमन एक हाथ से उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींच रहा था।
“आह्ह… अमन… जोर से… हाँ… चोदो…!” राजिया बेलगाम हो चुकी थी।
अमन की गति तेज हो गई। बिस्तर चरमरा रहा था। राजिया की सिसकारियाँ और चीखें कमरे में गूँज रही थीं। थोड़ी देर में उसका तीसरा पानी भी निकल गया। वह बिस्तर पर मुँह गड़ाकर काँपने लगी।
अमन ने लंड निकाला। राजिया को फिर से पलटा। इस बार उसने उसे अपनी गोद में बैठा लिया। राजिया की दोनों टाँगें उसकी कमर के दोनों तरफ थीं। अमन ने नीचे से लंड उसकी चूत में डाला और उसकी कमर पकड़कर उसे ऊपर-नीचे करने लगा।
“आआह्ह… ओооह… अमन… इतना गहरा…!” राजिया ने उसके गले में हाथ डाल दिए। स्तन उसके चेहरे के सामने ऊपर-नीचे हो रहे थे। अमन ने एक स्तन मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा।
राजिया खुद हिलने लगी। उसकी गति तेज होती गई। चौथा पानी भी उसी पोजीशन में निकल गया। वह अमन के गले से चिपक गई और काँपती रही।
अमन ने उसे फिर से बिस्तर पर लिटा दिया। इस बार आमने-सामने। उसने उसके दोनों पैर फैलाए और जोर-जोर से चोदने लगा। एक हाथ से उसके स्तन दबा रहा था, दूसरे से उसकी कमर। राजिया की आँखें अब उल्टी होने लगी थीं। मुँह से सिर्फ अस्पष्ट आवाजें निकल रही थीं—
“आआआह्ह… ओоооह… अमन… और… मत रोक… चोदो…!”
अमन की साँसें भी तेज हो चुकी थीं। वह अब अपनी सीमा के करीब था। लेकिन उसने राजिया को और एक बार पहुँचाने का फैसला किया। उसने गति और तेज कर दी। राजिया की चीखें तेज होती गईं। पाँचवाँ पानी निकलते ही अमन ने भी खुद को रोकना बंद कर दिया। गरम पानी की धार उसने उसकी चूत के अंदर छोड़ दी। दोनों एक-दूसरे से चिपके हुए काँपते रहे।
बहुत देर तक कमरे में सिर्फ उनकी भारी साँसें गूँजती रहीं। दीये की लौ अब बहुत छोटी रह गई थी। राजिया अमन के सीने पर लेटी हुई थी। आँखें बंद थीं। शरीर में पसीना चमक रहा था। अमन उसके बालों में हाथ फेर रहा था।
दोनों जानते थे कि आज की रात के बाद बहुत कुछ बदलने वाला है। लेकिन अभी… अभी सिर्फ यह गर्माहट बाकी थी।





अमन धीरे से राजिया के ऊपर से हटा। दोनों अभी भी पसीने से तर थे। उसने राजिया के बालों को चेहरे से हटाया और उसके माथे पर हल्का चुंबन किया। फिर चारपाई पर बैठ गया।
उसका लंड अभी भी आधा सख्त था। उस पर राजिया का पानी और उसका अपना वीर्य मिला हुआ चमक रहा था। अमन ने राजिया की तरफ देखा।
“साफ कर दो,” उसने बहुत धीमी आवाज में कहा।
राजिया ने आँखें खोलीं। थोड़ी देर तक उसे देखा। फिर धीरे से उठकर बैठ गई। उसने अमन के लंड को दोनों हाथों में लिया और मुँह के करीब ले गई। पहले जीभ से सिर को चाटा। फिर पूरे लंड को मुँह में ले लिया। धीरे-धीरे, गहराई से चूसने लगी। अमन की साँस तेज हो गई। उसने राजिया के बालों में हाथ रखा लेकिन जोर नहीं लगाया। बस महसूस करता रहा।
राजिया ने लंड को अच्छी तरह साफ किया। जीभ से चारों तरफ चाटा, मुँह से चूसा, जब तक वह साफ और चमकदार नहीं हो गया। फिर उसने होंठ हटाए और अमन की तरफ देखा।
अमन ने उसका चेहरा दोनों हाथों में लिया। “कैसा लगा तुम्हें?”
राजिया कुछ पल चुप रही। फिर बहुत धीमी आवाज में बोली, “तुमने… मुझे ठीक कर दिया। वरना मैं अपने दर्द में पागल हो जाती।”
अमन ने उसके माथे से बाल हटाए। “अब ठीक हो न?”
राजिया ने सिर हिलाया। आँखों में अभी भी नमी थी, लेकिन गुस्सा और शक अब नहीं रह गया था। उसकी जगह एक थकी हुई शांति थी।
उसी समय घर के दूसरे छोटे कमरे में रुक्साना की आँखें खुल चुकी थीं।
बेटी की आवाजें—सिसकारियाँ, चीखें, अमन का नाम—सब उसने सुन लिया था। पहले तो वह समझी कि फिर कोई कॉलेज वाला लड़का है। पहले भी कई बार उसने राजिया को घर में लड़कों को बुलाकर चोदते देखा था। लेकिन आज की आवाजें अलग थीं। इतनी गहरी, इतनी लंबी, इतनी बेकाबू। रुक्साना चुपके से बिस्तर से उठीं। दरवाजे की दरार से झाँका।
दीये की हल्की रोशनी में सब कुछ साफ दिख रहा था। अमन राजिया के ऊपर था। उसकी बेटी की टाँगें फैली हुई थीं। अमन जोर-जोर से धक्के मार रहा था। राजिया की चीखें और सिसकारियाँ निकल रही थीं। फिर पोजीशन बदली। डॉगी स्टाइल। फिर गोद में लेकर। हर बार राजिया का पानी निकलता दिख रहा था।
रुक्साना की साँसें तेज हो गईं। उनकी अपनी जाँघों के बीच गर्माहट बढ़ने लगी। उन्होंने अपना हाथ साड़ी के अंदर ले जाकर अपनी चूत पर रखा। उंगलियाँ गीली हो चुकी थीं। वे दरार से देखती रहीं—अमन का मोटा लंड उनकी बेटी की चूत में अंदर-बाहर हो रहा था। राजिया की गाँड लाल हो चुकी थी। स्तन हवा में झूल रहे थे।
जब अमन ने आखिर में राजिया के अंदर पानी छोड़ा तो रुक्साना की भी उंगलियाँ तेज हो गईं। वे अपने मुँह पर दूसरा हाथ रखकर सिसकारी दबाती रहीं। उनका पानी उनकी उंगलियों पर छूट गया। शरीर काँपने लगा। आँखों में एक अजीब सी भूख जाग गई।
“इस लंड को… मैं अपने भोसड़े में डालवा के रहूँगी,” उन्होंने मन ही मन कसम खाई। “इतनी चुदाई… मेरी बेटी ने आज तक किसी से नहीं करवाई।”
वे चुपके से अपने बिस्तर पर लौट गईं। दिल अभी भी जोर से धड़क रहा था।
दूसरी तरफ कमरे में अमन ने अपने कपड़े पहन लिए। राजिया अभी भी चारपाई पर लेटी थी। चादर आधी शरीर पर डाले हुए। अमन उसके पास बैठा। उसने राजिया का चेहरा दोनों हाथों में लिया और एक लंबा, धीमा चुंबन दिया। जीभ नहीं थी। सिर्फ होंठों का गहरा, भावनात्मक स्पर्श। राजिया ने आँखें बंद करके जवाब दिया।
जब चुंबन टूटा तो अमन ने उसके माथे पर हल्का सा होंठ रखा। “सो जाओ। अब ठीक है सब।”
राजिया ने धीमे स्वर में कहा, “जाओ… संभल के।”
अमन ने सिर हिलाया। पिछवाड़े वाले दरवाजे से निकल गया। गलियाँ अभी भी सुनसान थीं। वह चुपचाप हवेली पहुँचा। अंदर सब सो चुके थे। रेणु का कमरा भी शांत था। अमन अपने कमरे में गया। कपड़े बदले। बिस्तर पर लेट गया।
आज की रात का वजन उसके सीने पर था—सच्चाई, आँसू, फिर वह लंबी चुदाई। लेकिन थकान ने जल्दी ही उसे अपनी चपेट में ले लिया। आँखें बंद होते ही नींद आ गई।
और गाँव के किनारे वाले छोटे घर में रुक्साना अँधेरे में लेटी हुई थीं। आँखें खुली हुईं। मन में सिर्फ एक ही चेहरा और एक ही लंड घूम रहा था।
रात गहरी थी। लेकिन कई साँसें अभी भी शांत नहीं हुई थीं।
Fuckuguy
albertprince547;
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#67
Wow bahot hi romantic aur sexy update mera to pani hi nikal gaya ji eagerly waiting for next update ?
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#68
(10-10-2026, 08:41 PM)Rubina.23 Wrote: Wow bahot hi romantic aur sexy update mera to pani hi nikal gaya ji eagerly waiting for next update ?

Thankyou rubeena ji
Fuckuguy
albertprince547;
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#69
Nice update akhir Rajiya ka chapter close ho gaya ab Ruksana ko bhi ye lund chahiye or ghar ke gande raajon se bhi dhire dhire parda uthhate rahiye waiting for next
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#70
(11-10-2026, 06:17 AM)Skb21 Wrote: Nice update akhir Rajiya ka chapter close ho gaya ab Ruksana ko bhi ye lund chahiye or ghar ke gande raajon se bhi dhire dhire parda uthhate rahiye waiting for next

Thankyou brother
Fuckuguy
albertprince547;
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#71
Bhai waah maza aa gya, der bhee khatam ho gya aur premi bhee ben gyee
Maa tayar hai bonus me

[Image: Whats-App-Image-2026-10-03-at-2-52-51-PM.jpg]
Namaskar
Raj

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#72
Heart
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#73
Nice update
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#74
सुबह की हल्की सुनहरी रोशनी खिड़की से कमरे में फैल रही थी। अमन अभी गहरी नींद में था। चादर कमर तक खिसकी हुई थी। तभी दरवाजा बहुत धीरे से खुला। कमला चाची अंदर आ गईं। उन्होंने दरवाजा बंद किया लेकिन सिटकिनी नहीं लगाई। उनके कदम फर्श पर कोई आवाज नहीं कर रहे थे।
वे बिस्तर के पास आकर रुकीं। अमन की साँसें नियमित थीं। कमला चाची ने झुककर उसके माथे पर बहुत हल्का सा चुंबन किया। फिर गाल पर। अमन की पलकें फड़कने लगीं। आँखें धीरे-धीरे खुलीं।
कमला चाची उसके बहुत करीब थीं। उनके खुले बाल अमन के चेहरे को छू रहे थे। साड़ी का पल्लू आगे की तरफ झुका हुआ था। अमन नींद भरी आँखों से उन्हें देखता रहा।
“अब तो उठ जाओ बेटा,” कमला चाची ने बहुत धीमी और गरमाई भरी आवाज में कहा। उंगलियाँ उसके बालों में फेरने लगीं। “धूप निकल आई है… और मैं भी।”
अमन ने करवट ली। चादर और खिसक गई। कमला चाची की निगाह सीधे उसके आधे सख्त लंड पर टिक गई। उन्होंने हल्की सी मुस्कान दी और दो उंगलियों से चादर को और नीचे सरका दिया। फिर बहुत हल्के हाथों से उसके लंड का आकार महसूस किया।
“आज तो बहुत जोश में हो लगते हो,” उन्होंने फुसफुसाकर कहा। आवाज में हल्की सी साँस फूली हुई थी। “रात अच्छी रही क्या? या सुबह वाली भूख ज्यादा है?”
अमन की आँखें पूरी तरह खुल गईं। उसने कमला चाची का हाथ पकड़ लिया। “चाची… सुबह-सुबह ऐसा करती हैं तो…”
कमला चाची और झुक गईं। उनके भारी स्तन अमन के चेहरे के बिलकुल करीब आ गए। साड़ी के गले से उनकी गहरी दरार साफ दिख रही थी। उन्होंने अमन के कान के पास होंठ ले जाकर फुसफुसाया, “सुबह ही तो असली मजा है। रात वाले थक जाते हैं… सुबह वाले भूखे और ताजे रहते हैं।”
अमन ने उनका हाथ अपनी छाती पर रखा। उंगलियाँ उनकी नरम हथेली को महसूस कर रही थीं। “आज कॉलेज जाना है चाची। देर हो जाएगी।”
कमला चाची हल्की मुस्कुराईं। उन्होंने अमन के लंड पर एक बार फिर हल्का सा हाथ फेरा—जड़ से लेकर सिर तक। फिर धीरे से उठ खड़ी हुईं। “तो जाओ। लेकिन याद रखना… रात को मेरे कमरे में आना। पैरों में दर्द है। दबाना पड़ेगा।”
अमन की निगाह उनकी पीठ और गाँड पर टिक गई जब वे दरवाजे की तरफ मुड़ीं। साड़ी के नीचे उनका लचकीला, गदराया शरीर हिल रहा था। कमला चाची ने दरवाजे पर खड़े होकर एक बार पीछे मुड़कर देखा। आँखों में वह पुरानी, भूखी शरारत साफ जल रही थी। “और हाँ… पैर ही दबाने हैं या कुछ और भी… सोच लेना।”
वे मुस्कुराते हुए निकल गईं। अमन बिस्तर पर बैठा रह गया। शरीर में एक गहरी बेचैनी फैल गई थी। लंड अब पूरी तरह सख्त हो चुका था। उसने गहरी साँस ली और उठकर तैयार होने लगा।
नहा-धोकर, सादी कमीज और पैंट पहनकर जब वह घर से निकला तो गली के मोड़ पर रुक्साना खड़ी मिलीं। काले रंग का टाइट सूट पहने हुए। बाल खुले थे और हवा में हल्के-हल्के उड़ रहे थे। उन्होंने अमन को देखते ही आँखों में मुस्कान भर ली।
“बाबूजी के बेटे,” उन्होंने आवाज लगाई। आवाज में हल्की सी गरमाई थी। “आज इतनी सुबह कॉलेज? कल रात सोए नहीं लगते हो।”
अमन पास गया। “काकी, नमस्ते। थोड़ी थकान है बस।”
रुक्साना ने एक कदम और करीब लिया। अब दोनों की दूरी बहुत कम रह गई थी। उनकी आँखों में एक साफ चमक थी। “थकान आँखों में दिख रही है। रात को देर तक जागे थे क्या? या कोई और वजह है?”
अमन ने सामान्य स्वर में जवाब दिया, “बस पढ़ाई का दबाव है काकी।”
रुक्साना हल्की हँसीं। उन्होंने अपना पल्लू ठीक करते हुए कहा, “पढ़ाई की थकान मिटाने के भी तरीके होते हैं। कभी हमारे बगीचे में आना। आम तो अब पूरी तरह पक चुके हैं… और कुछ चीजें तो पकते-पकते और भी ज्यादा मीठी और रसभरी हो जाती हैं।”
अमन ने उनकी आँखों में देखा। रुक्साना की निगाह साफ कह रही थी कि बात सिर्फ आम की नहीं है। उसने हल्की मुस्कान दी। “समय मिलने पर जरूर आऊँगा काकी।”
रुक्साना ने उसका हाथ हल्के से पकड़ लिया। उंगलियाँ उसकी कलाई पर घूमने लगीं। “समय निकालना बेटा। ज्यादा देर मत करना। कुछ चीजें ज्यादा देर तक इंतजार नहीं करतीं।”
अमन ने सिर हिलाया। “ठीक है काकी।”
रुक्साना ने उसका हाथ छोड़ दिया लेकिन निगाहें उसकी पीठ पर तब तक टिकी रहीं जब तक वह गली के मोड़ से गायब नहीं हो गया। अमन के मन में एक अजीब सा ख्याल आया—घर के अंदर कमला चाची की आग, बाहर रुक्साना की भूख। दोनों तरफ से घेरा जा रहा था।
कॉलेज पहुँचते ही उसकी नजर राधा पर पड़ी। राजिया की जगह खाली थी। अमन समझ गया कि कल रात की थकान अभी बाकी होगी। वह सीधे राधा के पास गया।
“राधा,” उसने बहुत धीमे स्वर में कहा।
राधा ने सिर उठाया। आँखों में हल्की नाराजगी और थकान दोनों बाकी थीं। “हाँ?”
अमन ने चारों तरफ देखा। फिर धीरे से उसका हाथ पकड़कर उसे साइड में, पुरानी दीवार के कोने में ले गया जहाँ कोई आसानी से देख न सके। “राधा… कुछ दिनों से हमारे बीच दूरी बढ़ गई है। मैं जानता हूँ। मेरी गलती है।”
राधा चुप रही। उसकी निगाह अमन के चेहरे पर थी।
अमन ने दोनों हाथों से उसका हाथ पकड़ लिया। “माफ कर दो। सच में। तुम्हारे बिना सब अधूरा लग रहा है। मैंने तुम्हें समय नहीं दिया… ध्यान नहीं दिया। अब से रखूँगा। वादा।”
राधा की आँखें थोड़ी नरम पड़ीं। अमन ने और करीब आकर बहुत धीमे स्वर में कहा, “अब मूड ठीक करो।”
फिर उसने चारों तरफ एक नजर डाली और राधा के होंठों पर हल्का लेकिन गहरा चुंबन कर दिया। राधा पहले सहम गई। उसका शरीर थोड़ा तन गया। लेकिन अमन ने चुंबन तोड़ा नहीं। धीरे-धीरे राधा के होंठ नरम पड़ने लगे। उसने भी हल्के से जवाब देना शुरू कर दिया। चुंबन छोटा था, लेकिन उसमें वह पुरानी गर्माहट और प्यार दोनों लौट आए थे।
जब होंठ अलग हुए तो राधा के गाल लाल थे। साँसें थोड़ी तेज थीं। अमन ने उसके माथे पर हल्का सा होंठ रखा। “अब ठीक है?”
राधा ने हल्के से सिर हिलाया। आँखों में मुस्कान लौट आई थी। “थोड़ा-थोड़ा… अब बेहतर है।”
दोनों मुस्कुराए। पहली बार कई दिनों बाद उनके बीच की दीवार थोड़ी कम हुई थी। अमन ने उसका हाथ दबाया और दोनों अपनी-अपनी कक्षा की तरफ चल दिए।





शाम का समय हो चला था जब अमन कॉलेज से घर लौटा। आँगन में माँ सुशीला चूल्हे के पास बैठी थीं। उन्होंने अमन को देखते ही आवाज लगाई।
“अमन, इधर आ।”
अमन पास गया। माँ ने उसके बैग की तरफ इशारा करते हुए कहा, “रखा दो बैग। तुम्हारी कमला चाची के पैरों में बहुत दर्द है। वे खुद बोल रही थीं कि रात को तुम थोड़ी देर दबा देना। तुम्हारे हाथ अच्छे हैं न।”
अमन ने सिर हिलाया। “ठीक है माँ। दबा दूँगा।”
माँ मुस्कुरा दीं और फिर से अपने काम में लग गईं। अमन अपने कमरे की तरफ बढ़ गया। मन ही मन एक शरारत भरी मुस्कान तैर गई।
“पैरों में दर्द…?” उसने अपने आप से कहा। “पैर नहीं, चूत में खुजली होगी। आज मिटा ही देता हूँ उनकी खुजली।”
रात का खाना परिवार के साथ बैठकर खाया। कमला चाची मेज के दूसरी तरफ बैठी थीं। बीच-बीच में उनकी निगाहें अमन से मिल जातीं। हर बार उनकी आँखों में वही चुपचाप बुलावा होता था। अमन सामान्य व्यवहार बनाए रखता। खाना खत्म होने के बाद सब अपने-अपने कमरों में चले गए।
लगभग बारह बजने वाले थे जब दरवाजे पर हल्की दस्तक हुई। रेणु अंदर आईं। लालटेन की रोशनी कम रखी हुई थी। उन्होंने दरवाजा बंद किया, सिटकिनी लगाई और बिस्तर के किनारे बैठ गईं।
अमन इस बार सीधे मुड़े। “दीदी, आज सब कुछ बताना है।”
रेणु ने सिर हिलाया। “बताओ।”
अमन ने शुरू से अंत तक सब कह दिया। कैसे उसने राजिया को सच बताया, कैसे वह रोई, कैसे दोनों के बीच दीवार टूटी, और फिर जो शारीरिक संबंध बने। कोई बात नहीं छुपाई। रेणु अंत तक चुपचाप सुनती रहीं। उनके चेहरे पर कोई हैरानी नहीं थी। बल्कि एक शांत संतुष्टि थी।
जब अमन खत्म हुआ तो रेणु ने धीरे से कहा, “अब तुम खुद सब कुछ संभालने लगे हो। मुझे सच में खुशी है। तुमने सबका दिल जीत लिया है अमन। कमला चाची, राजिया, रुक्साना… सब तुम्हारी गुलाम बनती जा रही हैं।”
अमन ने उनका हाथ पकड़ लिया। उंगलियाँ उनकी नरम हथेली में फँस गईं। “आप कब बनेंगी दीदी? मुझे आपके साथ सुहागरात मनानी है।”
रेणु हल्की मुस्कुराईं। उन्होंने अमन का चेहरा दोनों हाथों में लिया। आँखों में वह पुरानी चमक थी। “जल्दी ही। सब्र रखो। समय आने पर सब होगा।”
फिर उन्होंने अमन के होंठों पर गहरा चुंबन कर दिया। जीभ अंदर तक चली गई। दोनों की साँसें तेज हो गईं। चुंबन लंबा और गीला था। जब होंठ अलग हुए तो रेणु ने अमन के कान के पास होंठ ले जाकर फुसफुसाया,
“आज जाकर कमला चाची की खुजली मिटा देना। एकदम रंडी की तरह चोदना। क्योंकि उन्हें वैसी ही चुदाई पसंद है—जोर की, गंदी, और पूरी तरह बेकाबू।”
अमन की आँखें थोड़ी चौड़ी हो गईं। “आपको कैसे पता दीदी?”
रेणु ने उसके होंठों पर फिर से हल्का चुंबन किया। मुस्कान में रहस्य था। “समय आने पर बताऊँगी। अभी के लिए इतना काफी है। जाओ। वे इंतजार कर रही होंगी।”
रेणु उठकर खड़ी हो गईं। दरवाजे तक जाकर एक बार मुड़ीं। आँखों में हल्की सी चेतावनी और प्रोत्साहन दोनों थे। “संभल के। और मजा लेना।”
वे निकल गईं। कमरे में अँधेरा और अमन की तेज धड़कनें रह गईं।
अमन कुछ देर बिस्तर पर बैठा रहा। रेणु की बातें उसके दिमाग में घूम रही थीं—“रंडी की तरह चोदना… उन्हें वैसी ही पसंद है।” फिर वह उठा। गलियारे की तरफ बढ़ा। कमला चाची के कमरे से हल्की सी रोशनी आ रही थी।
उसने दरवाजे पर हल्के से दस्तक दी।
अंदर से कमला चाची की धीमी, गरमाई भरी आवाज आई, “आ जाओ…”
अमन ने दरवाजा खोला और अंदर कदम रखा। रात अब सच में शुरू होने वाली थी

[img=464x3400][Image: Untitled-design.png][/img]

अमन ने दरवाजा धीरे से धकेला और अंदर कदम रखा।
और फिर वह देखकर बस ठहरा रह गया।
कमला चाची बिस्तर पर लेटी हुई थीं। हरे रंग की साड़ी पहने हुए। साड़ी का पल्लू एक तरफ गिरा हुआ था। लाल लिपस्टिक उनके होंठों पर चढ़ाई हुई थी। चेहरे पर हल्का मेकअप था और माथे पर एक छोटी सी लाल बिंदी, जो उनकी सुंदरता में चार चाँद लगा रही थी। उनके बड़े-बड़े स्तन साड़ी के नीचे से उभर रहे थे और मोटी, गोल गाँड बिस्तर पर लचकीली फैली हुई थी। दीये की हल्की रोशनी में वे एकदम आइटम बम लग रही थीं।
अमन की साँसें एक पल के लिए रुक गईं। वह धीरे-धीरे उनके पास गया।
“चाची… क्या बात है आज?” उसकी आवाज में हल्की हैरानी और उत्तेजना दोनों थे। “आज तो बहुत सेक्सी लग रही हो।”
कमला चाची हल्की मुस्कुराईं। उनकी आँखों में शरारत चमक रही थी। “ऐसा कुछ नहीं है बेटा। बस… आज स्पेशल नाइट है न। इसलिए थोड़ा सँवर लिया।”
अमन उनके बिस्तर के किनारे बैठ गया। कमला चाची ने अपना हाथ उसके हाथ पर रखा।
“क्या तुम मेरी मसाज करोगे?” उन्होंने धीमी आवाज में पूछा।
अमन ने सिर हिलाया। “बिल्कुल चाची।”
कमला चाची ने धीरे से अपनी साड़ी को एक तरफ फेंक दिया। अब वे सिर्फ लाल ब्लाउज और साये में बिस्तर पर लेट गईं। उनके शरीर की नक्काशी दीये की रोशनी में और भी साफ दिखने लगी। अमन भी खड़ा हुआ। उसने अपनी कमीज उतारी, फिर पैंट। अब वह सिर्फ अंडरवियर में रह गया था। उसका लंड कपड़े के अंदर पहले से ही तना हुआ था।
वह फिर से बिस्तर पर चढ़ गया। पहले उसने कमला चाची के पैरों को अपने हाथों में लिया। तलवों को धीरे-धीरे दबाने लगा। उंगलियों से एड़ी और उंगलियों के बीच दबाव देता रहा। कमला चाची की आँखें आराम से बंद हो गईं। हल्की सिसकारी निकली।
अमन धीरे-धीरे ऊपर बढ़ने लगा। पिंडलियों को मसला, फिर जाँघों को। दोनों हाथों से उनकी मोटी जाँघों को दबाते हुए ऊपर की तरफ सरकता गया। जब उसके हाथ साये के किनारे तक पहुँचे तो उसने उंगलियों को अंदर सरका दिया। सीधे उनकी चूत पर स्पर्श किया।
“आह्ह्ह…” कमला चाची की कमर हल्की सी उठ गई।
अमन मुस्कुराया। वह और ऊपर आया। कमला चाची की नाभि पर थोड़ा तेल डाला। फिर दोनों अंगूठों से नाभि के चारों तरफ गोला बनाते हुए मसाज करने लगा। कमला चाची मचलने लगीं। उनकी साँसें तेज हो गईं।
“अमन… वहाँ… आह्ह…”
अमन ने और आगे बढ़ने का फैसला किया। उसने कमला चाची के ब्लाउज के बटन खोले। एक-एक करके। फिर ब्लाउज के दोनों भाग अलग किए। उनके विशाल, भारी स्तन बाहर आ गए। अमन की आँखें फटी की फटी रह गईं। इतने बड़े और रसीले संतरे उसने आज तक लाइव नहीं देखे थे। निप्पल गाढ़े रंग के और सख्त थे।
“चाची…” अमन की आवाज में हल्की हैरानी थी। “आपके संतरे तो बहुत बड़े और रसीले लग रहे हैं।”
कमला चाची ने आँखें खोलीं। हल्की मुस्कान के साथ बोलीं, “तो फिर रस निकाल लेना आज। जितना चाहे।”
अमन ने दोनों हाथों में तेल लिया और उनके विशाल स्तनों पर लगा दिया। फिर दोनों हाथों से मसलना शुरू कर दिया। कभी ऊपर से नीचे, कभी गोलाकार। निप्पलों को उंगलियों के बीच लेकर हल्के-हल्के मरोड़ने लगा। कमला चाची की सिसकारियाँ तेज होने लगीं।
“आह्ह्ह… अमन… हाँ… ऐसे… और जोर से दबा…”
अमन उनके स्तनों को दबाता रहा, मसलता रहा। कभी झुककर निप्पल को जीभ से चाट भी लेता। कमला चाची की कमर अब बार-बार हिल रही थी।
थोड़ी देर बाद अमन बोला, “चाची… पलट जाइए।”
कमला चाची धीरे से उल्टी लेट गईं। उनका चेहरा तकिये पर था। अमन ने उनका ब्लाउज पूरी तरह उतारकर एक तरफ फेंक दिया। फिर उनकी पीठ पर तेल डालकर मसाज करने लगा। कंधों से लेकर कमर तक। उंगलियाँ उनकी रीढ़ की हड्डी पर घूम रही थीं। कमला चाची सुकून भरी सिसकारियाँ ले रही थीं।
फिर अमन और नीचे गया। उसकी निगाहें उनकी विशाल, गोल गाँड पर टिक गईं। इतनी मस्त और खूबसूरत गाँड। उसने दोनों हाथों से उनकी गाँड को मसलना शुरू कर दिया। कभी दबाता, कभी फैलाता। फिर एक हल्का थप्पड़ मारा।
“थप्प!”
कमला चाची की गाँड हिल गई। “आह्ह… शैतान…”
अमन मुस्कुराया। उसने और थप्पड़ मारे—कभी बाएँ, कभी दाएँ। गाँड लाल होने लगी। फिर उसने उनका साया भी धीरे-धीरे नीचे खींच लिया। अब कमला चाची पूरी तरह नंगी थीं।
अमन ने उनकी गाँड के दोनों भाग फैलाए। बीच में छोटी सी गुलाबी छेद दिख रही थी। उसने उंगली पर तेल लगाया और धीरे से उस छेद पर लगाया। फिर हल्के दबाव के साथ अंदर घुसेड़ दिया।
“आआआह्ह्ह्ह… अमन…!” कमला चाची की लंबी सिसकारी निकली। उनका शरीर मचल उठा।
अमन ने उंगली को धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। कभी एक उंगली, कभी दो। कमला चाची की गाँड ऊपर उठने लगी। उनकी सिसकारियाँ अब तेज और बेकाबू हो रही थीं।
“आआआह्ह्ह… ओоооह्ह्ह… अमन… उउउम्मम्म… और तेज… आआह्ह… माаааа…!”
अमन की उंगली उनकी गाँड के छेद में तेजी से चल रही थी। कमला चाची तकिये में मुँह गड़ाए जोर-जोर से सिसकारियाँ ले रही थीं। उनका पूरा शरीर पसीने से चमक रहा था।
अमन ने झुककर उनकी गाँड पर एक और थप्पड़ मारा और उंगली और गहराई तक घुसेड़ दी।
“आआआआह्ह्ह्ह… अमन… बहुत… ओоооह्ह…!”
कमला चाची अब पूरी तरह बेकाबू हो चुकी थीं। और रात अभी शुरू ही हुई थी।
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albertprince547;
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#75
Nice update ji
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#76
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Mere sath kab koi aise khelega  Heart
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#77
Heart 
Koi to choos lo


Ko[img=464x3400][Image: RDT-20261012-0010582590733541814383662.webp][/img]
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#78
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Aisa chatne wala chahiye  Heart
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#79
(12-10-2026, 12:18 AM)Rubina.23 Wrote: [img=442x3400][Image: RDT-20261012-0009427540620879974805754.gif][/img]

Aisa chatne wala chahiye  Heart
Rubina ji kya ho gaya aapko control ji Heart
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albertprince547;
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#80
(12-10-2026, 12:31 AM)Fuckuguy Wrote: Rubina ji kya ho gaya aapko control ji Heart

[img=464x3400][Image: RDT-20261012-0038527136143699035312082.webp][/img]

Nahi hota Fuckuguy ji Heart waiting for next update  Heart
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