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Misc. Erotica Kahani mere ghar ki
मंदिर से शंख की एक लंबी और गूँजती हुई आवाज़ आई  'पूँऊऊऊऊऊँ...' और ठीक उसी पल, जैसे उस पवित्र शंख की आवाज़ ने हमारे पाप को चरम पर पहुँचा दिया हो, मम्मी का शरीर धनुष की तरह पीछे की ओर खिंच गया। "आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह! बेटा! मैं आ गई! आह्ह्ह्ह्ह्ह!" उनकी चूत में एक ज़ोरदार संकुचन (contraction) हुआ और वो मेरे लिंग को इतनी ज़ोर से भींचने लगीं कि मेरा दम घुटने लगा।

"उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़... मम्मी... मैं भी... मैं भी आ रहा हूँ! आह्ह्ह्ह्ह!" मैंने अपनी पूरी ताकत झोंक दी और आखिरी कुछ झटके मारे। "धप! धप! धप! धप!" मेरा लिंग उनकी चूत की गहराई में जाकर जम गया। "आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह"...मेरे शरीर के अंदर एक भयानक विस्फोट सा हुआ। जैसे ही मम्मी की चूत ने मेरे लिंग को आखिरी बार ज़ोर से भींचा, मेरा सारा वीर्य एक तेज़ और गर्म धार के साथ उनकी चूत की गहराई में फूट पड़ा। "धप... धप... धप..." मेरी कमर के आखिरी झटके सीधे उनके गर्भाशय के मुहाने से टकरा रहे थे। "छप... छप... छप..." मेरा गाढ़ा, सफेद वीर्य उनकी चूत के अंदर भरता जा रहा था। "आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह! बेटा... उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़... कितना गर्म है... तू कितना गरम है अंदर... आह्ह्ह्ह्ह!" मम्मी की आवाज़ अब एक दबी हुई सिसकी में बदल गई थी।

जैसे ही मेरा वीर्य निकलना बंद हुआ, हम दोनों हाँफते हुए एक दूसरे के शरीर से चिपक गए। कमरे में अब सिर्फ हमारी भारी भारी साँसों की आवाज़ गूँज रही थी। बाहर मंदिर से शंख की आवाज़ अब शांत हो चुकी थी और सिर्फ दूर कहीं से आती हल्की घंटियों की आवाज़ सुनाई दे रही थी। "टन... टन..." सुबह की ताज़ी हवा खिड़की से आ रही थी, लेकिन हमारे कमरे का माहौल अभी भी वासना की गर्मी और पसीने की गंध से भरा हुआ था।

मम्मी ने अपनी आँखें खोलीं, जो अभी भी मदहोश थीं। उन्होंने धीरे से अपना हाथ मेरे सिर पर रखा और मेरे माथे से पसीना पोंछा। उनके चेहरे पर एक अजीब सी संतुष्टि और पाप की वो चमक अभी भी बरकरार थी। "बेटा... तूने आज मुझे पागल कर दिया... आह्ह्ह्ह्ह... ऐसा मज़ा कभी नहीं आया," उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा। उनका शरीर अभी भी मेरे लिंग के दबाव से काँप रहा था।

मेरा लिंग अभी भी उनकी चूत के अंदर ही था, और जैसे जैसे वह धीरे धीरे ढीला पड़ रहा था, मुझे महसूस हो रहा था कि मेरा वीर्य और उनकी चूत का गीलापन मिलकर बाहर की ओर बह रहा है। "स्लर्प... छप..." एक छोटी सी आवाज़ के साथ थोड़ा सा वीर्य उनके जाँघों के बीच से बाहर निकलकर चादर को गीला कर रहा था। हम दोनों उस परम सुख के बाद एक अजीब से सन्नाटे में डूबे हुए थे, जहाँ बाहर की दुनिया की पवित्रता और हमारे कमरे की इस गंदगी के बीच का अंतर मिट चुका था।
"...मम्मी की आँखों में अभी भी वही मदहोश कर देने वाली चमक थी, लेकिन उनके चेहरे पर एक हल्का सा पछतावा भी था। हम दोनों चुपचाप लेटे हुए थे, और कमरे में पसरा सन्नाटा हमारे उस 'पाप' की गवाही दे रहा था। बाहर मंदिर से आती आरती की आवाज़ें हमारे कानों में पड़ रही थीं, जो हमें बार बार याद दिला रही थीं कि हम किस तरह के अनैतिक संबंध में डूबे हुए हैं। पूजा और आरती के समय इस तरह की कामुकता... यह सोचकर ही मन में एक अजीब सा भारीपन आ रहा था।

मम्मी ने धीरे से मेरा हाथ पकड़ा और फुसफुसाते हुए कहा, "बेटा... अभी मन नहीं भरा है... अभी और करना है मुझे।"

मैंने एक लंबी साँस ली और घड़ी की तरफ देखा। "मम्मी, अभी सुबह के 4:20 हो गए हैं। बहुत देर हो गई है। अब थोड़ा सो लेते हैं, दोपहर को फिर करेंगे।"

मम्मी ने तुरंत मुँह बनाया और मेरा हाथ ज़ोर से दबाया, "नहीं! मुझे अभी चाहिए।"

मैंने उन्हें समझाने की कोशिश की, "मम्मी, अगर हम अभी फिर से शुरू कर देंगे तो हम पूरी तरह से थक जाएँगे। फिर हम आराम कब करेंगे? हम जागेंगे कब? आपको पूजा पाठ भी तो करना है, और दुकान भी तो समय पर खोलनी है। अगर दुकान समय पर नहीं खुली और लोग आवाज़ देने लगे, तो आप उन्हें क्या जवाब देंगी कि दुकान अभी तक क्यों नहीं खुली?" मैंने अपनी थकी हुई आवाज़ में कहा, "और सच तो यह है मम्मी, कि मेरा अब खड़ा भी नहीं हो रहा... आपने मुझे इतना निचोड़ दिया है कि शरीर में जान ही नहीं बची।"

मम्मी के चेहरे पर एक चालाकी भरी मुस्कान आई। उन्होंने मेरी आँखों में देखते हुए कहा, "इन सब बातों का हल मेरे पास है।"

मैंने हैरान होकर पूछा, "वो क्या?"

मम्मी ने बड़ी सहजता से कहा, "हम कह देंगे कि रिश्तेदारी में जागरण था, इसलिए हम रात भर सोए नहीं और सुबह 7 बजे ही घर लौटे हैं। इसीलिए अभी नींद आ रही है और दुकान थोड़ी देर से खुलेगी।"

मैंने सिर हिलाया, "पर मम्मी, मेरा यह भी तो नहीं खड़ा हो रहा..." मैंने अपनी ढीली पड़ती हुई उत्तेजना की ओर इशारा करते हुए अपनी पैंट पहनने की कोशिश की।

लेकिन मम्मी का इरादा कुछ और ही था। जैसे ही मैंने अपनी पैंट ऊपर की, मम्मी ने झपटकर मेरी पैंट को नीचे से पकड़ा और एक झटके में खींचकर दूर फेंक दी। "तू तो मेरा शेर बच्चा है, तू कैसे हार मान सकता है?" उन्होंने गरजते हुए कहा।

इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाता, उन्होंने मुझे ज़ोर से धक्का दिया और मैं बिस्तर पर पीछे की ओर गिर गया।

"...जैसे ही मैं बिस्तर पर गिरा, मम्मी पूरी तरह से मेरे ऊपर आ गईं। उनकी भारी और गर्म छाती सीधे मेरे सीने से टकराई। उनके शरीर से अभी भी पसीने और कामुकता की वो तीखी गंध आ रही थी जो मुझे पागल कर रही थी। उन्होंने बिना एक पल गंवाए मेरे चेहरे को अपने दोनों हाथों में जकड़ लिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। "उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़...!" उनकी किस (kiss) इतनी गहरी और भूखी थी कि मुझे लगा जैसे वो मेरा सारा दम ही सोख लेंगी। उनकी जीभ मेरे मुँह के अंदर घुसकर मेरी जीभ के साथ ऐसे लड़ रही थी जैसे कोई युद्ध चल रहा हो।

"हम्मममम... आह्ह्ह्ह्ह..." उनके किस करते करते उनके हाथों का जादू शुरू हुआ। उनका एक हाथ मेरे बालों में उलझा हुआ था, और दूसरा हाथ नीचे की ओर बढ़ रहा था। जैसे ही उनका हाथ मेरे उस हिस्से पर पहुँचा जो अभी थका हुआ और ढीला पड़ा था, मेरे शरीर में बिजली की एक लहर दौड़ गई। "आह्ह्ह्ह्ह! मम्मी... पर..." मैंने विरोध करने की कोशिश की, लेकिन मेरी आवाज़ खुद मेरी दबी हुई आह में बदल गई।

मम्मी ने मेरे होंठों को छोड़ते हुए फुसफुसाकर कहा, "चुप कर... बस महसूस कर।" उनका हाथ बहुत ही कुशलता से मेरे लिंग को सहलाने लगा। उनकी उंगलियों की छुअन इतनी कोमल और फिर अचानक इतनी ज़ोरदार थी कि मेरा शरीर काँपने लगा। "छप... छप... स्लर्प..." उनके हाथ के घर्षण से पैदा होने वाली आवाज़ कमरे के सन्नाटे में गूँज रही थी। "मम्मी... आप... आह्ह्ह्ह्ह... बहुत तेज़ कर रही हैं..."

मम्मी ने रुकने के बजाय अपनी पकड़ और मज़बूत कर ली। उन्होंने अपने अंगूठे से मेरे लिंग के ऊपरी हिस्से (glans) को सहलाना शुरू किया। "देख... देख कैसे तेरा शेर वापस जाग रहा है," उन्होंने शरारत भरी और मदहोश आँखों से देखते हुए कहा। मैं देख सकता था कि मेरी थकी हुई नसें फिर से फूलने लगी थीं। मेरा लिंग धीरे धीरे फिर से सख्त होने लगा और उनके हाथ की गर्मी में तपने लगा। "आह्ह्ह्ह्ह... मम्मी... उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़... मेरा शरीर फिर से गरम हो रहा है..."

मम्मी ने अपने शरीर को और भी ज़ोर से मेरे ऊपर झुकाया, जिससे उनका भारी स्तन मेरे चेहरे को छूने लगा। "अब देख... अब तुझे नींद नहीं आएगी, सिर्फ मेरी प्यास लगेगी," उन्होंने मेरे कान के पास आकर बेहद कामुक आवाज़ में कहा और फिर से मेरे गले पर अपनी जीभ फेरते हुए लंड को धीरे धीरे सहलाना जारी रखा।
"...मम्मी के हाथों के जादू और उनकी गर्म छुअन से मेरा लिंग थोड़ा बहुत अकड़ तो गया था, लेकिन वह अभी भी पूरी तरह से सख्त नहीं हुआ था। मैंने लड़खड़ाती हुई आवाज़ में कहा, 'मम्मी... मैंने कहा ना, अब नहीं होगा... यह पूरी तरह खड़ा नहीं हो रहा है।'

मम्मी ने मेरी आँखों में एक ऐसी नज़र डाली जिसमें अदम्य साहस और कामुकता का मिश्रण था। उन्होंने मेरे चेहरे को सहलाते हुए बेहद आत्मविश्वास से कहा, 'अपनी मम्मी के होते हुए चिंता क्यों करते हो बेटा? तुम्हारी मम्मी टावर गिराने के साथ साथ, उस टावर को फिर से खड़ा करने में भी पूरी माहिर है!' उनकी यह बात सुनकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए।

इससे पहले कि मैं कुछ बोल पाता, मम्मी नीचे की ओर झुक गईं। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं, लेकिन उनके शरीर की हरकत मुझे सब कुछ महसूस करा रही थी। उन्होंने धीरे से मेरे लिंग की ऊपरी चमड़ी (foreskin) को पीछे हटाया और फिर... "आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह
"...जैसे ही मम्मी ने मेरी चमड़ी को पीछे हटाया और अपनी जीभ की नोक से मेरे लिंग के छेद (glans tip) को छुआ, मेरे पूरे शरीर में एक ज़ोरदार बिजली का झटका सा लगा। "आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह! मम्मी... उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़!" मेरे मुँह से एक ऐसी चीख निकली जो दर्द और बेइंतहा सुख का मिला जुला मिश्रण थी। मेरा शरीर बिस्तर पर धनुष की तरह तन गया।

मम्मी अब पूरी तरह से काम में जुट चुकी थीं। उन्होंने अपनी जीभ से मेरे लिंग के सबसे संवेदनशील हिस्से को धीरे धीरे सहलाना शुरू किया। "स्लर्प... चप... स्लर्प..." उनकी जीभ की गीली और गर्म छुअन मेरे लिंग के हर एक कोने को सहला रही थी। कभी वो अपनी जीभ से हल्के से चूमतीं, तो कभी पूरी जीभ से उसे चाटने लगतीं। "आह्ह्ह्ह्ह... मम्मी... उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़् "...मम्मी का वो खेल अब एक पागलपन की हद तक पहुँच चुका था। उनकी जीभ और होंठों का वो तालमेल देखकर मेरी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा था। वो कभी अपनी जीभ से मेरे लिंग के ऊपरी हिस्से को सहलातीं, तो कभी अचानक नीचे झुककर मेरे अंडकोषों (supade) को अपने बेहद नरम और गर्म होंठों के बीच भर लेतीं। "हम्मममम... आह्ह्ह्ह्ह!" जैसे ही उनके होंठ मेरे अंडकोषों को हल्के से दबाते, मेरे शरीर में एक ऐसी लहर दौड़ती कि मैं बिस्तर पर छटपटाने लगता। "मम्मी... उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्...
"...तड़प और उत्तेजना अपने चरम पर पहुँच चुकी थी। मेरा लिंग अब पूरी तरह से पत्थर की तरह सख्त होकर तना हुआ था, जिसकी नसें उभर कर साफ़ दिख रही थीं। तभी मम्मी ने एक ऐसा कदम उठाया जिसने मेरे होश ही उड़ा दिए। उन्होंने अचानक अपना चेहरा मेरे लिंग के एकदम करीब लाया और बिना किसी देरी के, अपने दोनों हाथों से मेरे लिंग के आधार को पकड़कर उसे अपने गर्म और गीले मुँह के अंदर गहराई तक खींच लिया।
"स्लर्प... सुड़प... गल्प... गल्प...!"
जैसे ही मेरा पूरा लिंग उनके मुँह के अंदर गया, मुझे महसूस हुआ कि उनका मुँह कितना तंग और गर्म था। "आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह! मम्मी... उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्
"...मम्मी के उस बेइंतहा कामुक तरीके से चूसने की वजह से मेरी उत्तेजना अब काबू से बाहर हो चुकी थी। मेरा लंड अब सिर्फ खड़ा नहीं था, बल्कि वो एक दहकते हुए लोहे की तरह पत्थर बन चुका था, जिसकी नसें बुरी तरह उभर आई थीं। मेरी आँखों के सामने धुंधलापन छा गया था और मेरा पूरा शरीर पसीने से तर बतर होकर काँप रहा था। "आह्ह्ह्ह्ह... मम्मी... अब और नहीं सहा जाता... उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्!"

मैंने पूरी ताकत बटोरी और मम्मी को अपने ऊपर से हटाकर झटके से बिस्तर पर पीछे की ओर लिटा दिया। वो मेरी इस अचानक हुई हरकत से चौंक गईं, लेकिन उनकी आँखों में भी वही जंगली और कामुक प्यास थी। मैंने उनके दोनों हाथों को उनके सिर के ऊपर ज़ोर से जकड़ लिया। उनका शरीर अब पूरी तरह से मेरे नीचे था, और उनकी भारी छातियाँ तेज़ तेज़ ऊपर नीचे हो रही थीं।

मम्मी के मुँह से लार टपक रही थी और उनका पूरा चेहरा उनके काम के कारण लाल हो गया था। मैंने उनके मुँह से निकला हुआ वो ढेर सारा थूक और जो लार उनके होंठों पर थी, उसे अपने लिंग पर फैला दिया। मेरा लंड अब पूरी तरह से उनके थूक से गीला और चिकना हो चुका था। मैंने अपने उस तने हुए, गीले और गर्म लंड को उनकी गीली और तड़पती हुई चूत के मुहाने पर टिका दिया।

"देख मम्मी... देख तेरा बेटा कितना जंगली हो गया है! अब ये टावर गिरेगा नहीं, सीधा आपकी चूत के अंदर घुसकर तबाही मचाएगा!" मैंने बेहद गंदी और भारी आवाज़ में कहा।

मम्मी ने अपनी कमर को थोड़ा ऊपर उठाया और एक मदहोश कर देने वाली मुस्कान के साथ कहा, "तो फिर देर किस बात की है? अपनी इस गंदी चीज़ को मेरे अंदर उतार दे... आज अपनी इस slutty मम्मी को पूरी तरह से बर्बाद कर दे!"

उनकी ये बात सुनकर मेरे अंदर का जानवर जाग गया। मैंने बिना एक पल गंवाए, एक ही झटके में अपना पूरा सख्त और गीला लंड उनकी तंग चूत के अंदर गहराई तक उतार दिया। "आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह! मम्मी... उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्
"...जैसे ही मेरा पूरा लंड उनकी तंग और गर्म चूत के अंदर तक धंसा, मम्मी के मुँह से एक ऐसी चीख निकली जो पूरे कमरे में गूँज गई। "आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह! ओहो... बेटा... कितना बड़ा और गरम है तेरा ये लंड!" उनकी आँखें ऊपर की ओर चढ़ गईं और शरीर में एक तेज़ झनझनाहट दौड़ गई।

मैंने उनके दोनों हाथों को बिस्तर पर ज़ोर से दबा दिया और उनके कान के पास झुककर बेहद गंदी और भारी आवाज़ में फुसफुसाया, "मम्मी... आज मैं आपको बिल्कुल नहीं छोड़ूँगा। आज मैं आपकी इस **गश्ती** चूत को तब तक पीटूँगा जब तक आप भीख न माँगने लगें!"

मम्मी ने अपनी कमर को ज़ोर से झटके के साथ ऊपर उठाया और मेरे लंड को और गहराई से अपने अंदर खींच लिया। "हाँ... हाँ... मार मुझे! अपनी इस **गश्ती** मम्मी को अपनी मर्दानगी से तोड़ दे! आज मुझे एक slut की तरह इस्तेमाल कर!" उनकी ये बातें सुनकर मेरा दिमाग जैसे फट गया।

मैंने अब पूरी ताकत से झटके मारना शुरू कर दिया। "धप... धप... धप... धप...!" हमारे शरीर के टकराने की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। मैं बिना किसी रहम के, पूरी जंगलीपन के साथ उनके अंदर घुस रहा था और बाहर निकल रहा था। हर झटके के साथ उनका शरीर बिस्तर पर उछल रहा था।

"आह्ह्ह्ह्ह... उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्


"...कमरे में अब सिर्फ मांस के टकराने की आवाज़ें और गालियों का शोर था। मैंने उनके बालों को एक मुट्ठी में जकड़कर उनका चेहरा ऊपर की ओर खींचा। उनकी आँखें वासना से पूरी तरह सफेद पड़ चुकी थीं। मैंने उनकी आँखों मे देखते हुए कहा, "तू  एक ऐसी **गश्ती** है आज से तू मेरी रंडी है,आज तुझे चोद चोद कर तेरा भोसड़ा फाड़ कर रख दूंगा!"

मम्मी के चेहरे पर एक पागलपन भरी मुस्कान आ गई। उन्होंने मेरा गला पकड़ लिया और अपनी कमर को मेरे लंड पर इतनी ज़ोर से पटका कि मुझे लगा मेरा लंड उनकी गहराई में ही फट जाएगा। उन्होंने चीखते हुए कहा, "हाँ! बोल! और ज़ोर से बोल! मैं एक **रंडी** हूँ! और तू? तू तो **मोदरचोद** है! तू तो एक **रंडी का पैदा हुआ कमीना** है! तूने अपनी माँ की चूत को आज जिस तरह से नोचा है, उससे साबित हो गया कि तू भी किसी **हरामी की औलाद** ही है! मार मुझे... अपनी इस **कौठे की पैदासिश** को अपनी मर्दानगी से चीर दे!"

गालियों का यह सिलसिला अब एक नशा बन चुका था। हम एक दूसरे को इंसान नहीं, बल्कि गंदगी का ढेर समझ रहे थे।

"धप! धप! धप! धप!" मेरा लंड उनकी चूत के अंदर किसी हथौड़े की तरह काम कर रहा था। "तू एक **गश्ती** है! तू सिर्फ सेक्स के लिए बनी है!" मैंने चिल्लाकर कहा।

"हाँ! और तू मेरा **माँ चोद बेटा** है! अपनी इस **रंडी मां की चूत** को और गहराई तक ठोक दे!" उन्होंने पागलों की तरह चिल्लाकर जवाब दिया।
"...कमरे की दीवारों से टकराकर हमारी गालियाँ और मांस के टकराने की आवाज़ें अब एक खौफनाक संगीत बन चुकी थीं। मेरी साँसें तेज़ थीं और मेरा लंड उनकी चूत के अंदर आग की तरह दहक रहा था। मैंने उनके शरीर को पूरी ताकत से झटके दिए, जिससे उनका पूरा शरीर बिस्तर पर उछल रहा था।

मैंने उनके कान के पास अपना मुँह ले जाकर दांतों से उनके कान के लोब को ज़ोर से काट लिया और फुसफुसाते हुए कहा, 'आज तू सिर्फ एक **रंडी** है! तेरी ये जो चूत है ना, ये अब सिर्फ मेरे लंड के लिए बनी है। तू एक **कोठे की पैदासिश** है और मैं तुझे आज इतना चोदूँगा कि तू अपनी हर एक गंदी याद भूल जाएगी! तू बस एक **गश्ती ** है जिसे सिर्फ ठोकना ही  चाहिए!'"

मम्मी ने मेरे सिर को अपने सीने से ज़ोर से चिपका लिया और दर्द और चरम सुख के मिले जुले अहसास में कराहते हुए बोलीं, "हाँ! ठोक मुझे! अपनी इस **रंडी की चूत** को ऐसे फाड़ दे जैसे कोई किसी **कोठे की रंडी** के साथ करता है! तू कितना बड़ा **मां चोद** है... देख कैसे अपनी माँ की चूत को जानवर की तरह नोच रहा है! तू सच में **किसी हरामी की औलाद** है, जो पैदा ही पाप करने के लिए हुआ है!"

मैंने उनके दोनों पैरों को उनके कंधों तक ऊपर उठा लिया ताकि मैं उनकी चूत की गहराई तक पहुँच सकूँ। अब मेरा हर झटका एक प्रहार की तरह था। 'धप! धप! धप!' मेरी कमर की रफ्तार अब इतनी बढ़ गई थी कि उनके शरीर से पसीना और उनकी चूत का गीलापन उछलकर मेरे पेट पर गिर रहा था।

"तू देख! देख अपनी इस **रंडी माँ** को! कैसे तू इसके अंदर अपना सारा ज़हर उतार रहा है!" मैंने चिल्लाकर कहा। "तू एक **गश्ती ** है, और मैं तेरा **हरामी बेटा**!"

"हाँ! मार मुझे! अपनी इस **रंडी** को पूरी तरह चीर डाल! मुझे अपनी **रंडी  चूत** में और गहराई तक महसूस होने दे कि तू कितना बड़ा **मां चोद** है! और ज़ोर से! और ज़ोर से ठोक!" वह पागलों की तरह चीख रही थीं, उनकी आँखें ऊपर की ओर चढ़ गई थीं और उनका पूरा शरीर झटकों से कांप रहा था।

कमरे में अब सिर्फ हमारी गंदी वासना, गालियों का ज़हर और मांस के टकराने की वो हिंसक आवाज़ें ही बची थीं।
"...हम दोनों एक दूसरे को मिटाने के लिए नहीं, बल्कि एक दूसरे के वजूद को गंदगी में डुबोने के लिए लड़ रहे थे। मेरी नसों में दौड़ रहा खून अब उबल रहा था। मैंने उनके दोनों हाथों को बिस्तर के सिरहाने से ज़ोर से जकड़ लिया ताकि वो हिल न सकें और मैं उन्हें अपनी मर्दानगी के वार से पूरी तरह बेबस कर सकूँ।

मैंने उनके चेहरे को अपने करीब खींचा और उनकी आँखों में देखते हुए दहाड़ा, 'देख अपनी इस **रंडी** हालत को! देख कि कैसे तेरा अपना **हरामी बेटा** तेरी चूत को नोच रहा है! तूने सोचा था कि तू माँ बनकर मुझे कंट्रोल करेगी? नहीं! तू तो बस  **मेरी रंडी** है जिसे आज तेरा **मोदरचोद**बेटा  इस्तेमाल कर रहा है! आज तेरी ये **फटी ** चूत मेरे लंड की गुलाम बन जाएगी!'"

मम्मी का चेहरा पसीने और वासना से तर बतर था। उन्होंने अपनी गर्दन को पीछे की ओर झटका और एक ऐसी चीख मारी जो दर्द और चरम सुख के बीच की बारीक रेखा को मिटा रही थी। "हाँ! मैं तेरी गुलाम हूं!  अपनी इस **रंडी की चूत** में अपनी मर्दानगी का ज़हर भर दे! तू सच में **किसी हरामी की औलाद** है... तूने अपनी माँ की इज़्ज़त को पैरों तले कुचल दिया है! मार मुझे... अपनी इस **रंडी** को ऐसे चोद जैसे कोई किसी **रंडी** को चोदता है!"

मैंने अपनी रफ्तार को एक पागलपन की हद तक बढ़ा दिया। अब कोई कंट्रोल नहीं था, कोई ठहराव नहीं था। 'धप! धप! धप! धप!' मेरा लंड उनकी चूत की गहराई में किसी पिस्टन की तरह काम कर रहा था। हर झटके के साथ उनके शरीर से निकलने वाली आवाज़ और मेरी गालियाँ कमरे की दीवारों को चीर रही थीं।

"तू बस एक **रंडी** है! सिर्फ एक **रंडी**!" मैं बार बार चिल्ला रहा था।

"हाँ! मैं तेरी **रंडी** हूँ! और तू मेरा **मोदरचोद बेटा** है! और ज़ोर से... और गहराई तक... अपनी इस ** रंडी** को फाड़ दे!" वह पागलों की तरह झूम रही थीं, उनका पूरा शरीर मेरे झटकों के साथ हवा में उछल रहा था।
...कमरे में अब सिर्फ हमारी भारी साँसों की आवाज़ गूँज रही थी। हम दोनों पूरी तरह से निढाल हो चुके थे, लेकिन उस चरम सुख के बाद एक अजीब सी, गंदी सी तृप्ति हमारे भीतर समा गई थी। हमारा शरीर पसीने, वीर्य और थूक के एक चिपचिपे मिश्रण से पूरी तरह लथपथ था।

मैंने अपने कांपते हुए हाथों को उनके शरीर पर फेरा। मैंने अपनी उंगलियों से उनके स्तनों और पेट पर बिखरे हुए अपने गर्म और सफेद वीर्य को उठाया और उसे उनके पूरे शरीर पर बड़े चाव से मलना शुरू कर दिया। मैं चाहता था कि मेरा हर कतरा उनके शरीर की खाल में समा जाए। मैंने उनके माथे और गालों पर भी उस वीर्य को रगड़ दिया, जिससे उनका चेहरा एक चमकती हुई, गंदी मूरत जैसा दिखने लगा।

मम्मी ने भी हार नहीं मानी। उनकी आँखों में एक जंगली चमक थी। उन्होंने अपने पसीने और वीर्य से सने हाथों को उठाया और मेरे सीने पर रगड़ना शुरू किया। उन्होंने अपने हाथों से मेरे पेट और मेरे लंड के आसपास,और अपनी चूत से निकल  रहे र को उठाकर मेरे पूरे शरीर पर मलना शुरू कर दिया। वह उस चिपचिपेपन को अपने हाथों से मेरे शरीर की हर मांसपेशी पर फैला रही थीं, जैसे वह मुझे पूरी तरह से अपने निशान से भर देना चाहती हों। हम दोनों एक दूसरे के शरीर पर उस वीर्य और पसीने के मिश्रण को ऐसे मल रहे थे जैसे कोई पवित्र अनुष्ठान कर रहे हों एक ऐसा अनुष्ठान जो पूरी तरह से पाप और गंदगी से भरा था।

उस चिपचिपेपन और गर्मी के बीच, मैंने उनके पसीने और वीर्य से सने शरीर को अपने सीने से ज़ोर से सटा लिया। मैंने उनकी आँखों में देखा, जहाँ अब वासना की जगह एक अजीब सी शांति थी। मैंने धीरे से उनके कान में फुसफुसाया, 'थैंक यू मम्मी... आज आपने मुझे एक बहुत सुख  दिया।'

उन्होंने भी अपने थके हुए और वीर्य से सने हाथों से मेरा चेहरा छुआ और एक हल्की, थकी हुई मुस्कान के साथ कहा, 'थैंक यू बेटा... तूने आज अपनी  ** माँ** को  वो सुख दिया है जो आज तक कोई नहीं दे पाया।

सुबह के 6,:30 बज चुके थे ,हम दोनों उस गंदे, चिपचिपे और पसीने से तर बतर बिस्तर पर एक दूसरे से लिपटकर, उस भारी थकान के साथ गहरी नींद में सो गए।"
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Awesome, amazing, superb and absolutely wonderful update!
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Dashing update with absolutely stunning writings!
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superb writing bhai ...
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