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Misc. Erotica Kahani mere ghar ki
bahut hi majedaar, lazzatdar aur chatpata update hai yah yaar
bahut bahut maja agaya padhke, bahut achi writings!
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(16-09-2026, 11:56 AM)Blackheart Wrote: bahut hi majedaar, lazzatdar aur chatpata update hai yah yaar
bahut bahut maja agaya padhke, bahut achi writings!

Thanks dost
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**"आप सभी के इस प्यार भरे और शानदार कमेंट्स के लिए दिल से शुक्रिया! ❤️**

**यह पढ़कर सच में बहुत खुशी हुई कि आपको यह अपडेट इतना मज़ेदार और लज़्ज़तदार लगा। आपकी यही तारीफ मुझे और भी बेहतर लिखने के लिए प्रेरित करती है।**

**मेरी कोशिश हमेशा यही रहेगी कि कहानी का हर नया मोड़ इतना गहरा और रोमांचक हो कि हर पाठक खुद को रवि की जगह महसूस करे और हर पाठिका खुद को मम्मी की जगह देख सके। मैं चाहता हूँ कि आप सिर्फ कहानी पढ़ें नहीं, बल्कि उसे खुद जी सकें!**

**जुड़े रहिये, अभी तो बहुत कुछ और भी मज़ेदार आने वाला है! ?"**
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सुबह की ताज़ा धूप खिड़की से अंदर आ रही थी, लेकिन मेरे अंदर एक अजीब सा अंधेरा छाया हुआ था। नहाने के बाद भी मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं खुद को साफ़ नहीं कर पाया हूँ। वो पिछली ररात... वो सब कुछ... मेरे दिमाग में किसी डरावनी फिल्म की तरह बार बार चल रहा था।

जैसे ही मैं तैयार होकर किचन की तरफ बढ़ा, मम्मी की आवाज़ सुनाई दी। वो पूजा करने के बाद नाश्ता बना रही थीं। उनकी सादगी, उनका वो शांत चेहरा और उनके माथे पर लगा तिलक सब कुछ इतना पवित्र लग रहा था कि मुझे अपनी ही त्वचा में खुजली होने लगी।

"गुड मॉर्निंग मम्मी," मैंने बहुत ही धीमी और लड़खड़ाती हुई आवाज़ में कहा। मेरी नज़रें फर्श पर टिकी थीं। मैं चाहकर भी अपनी आँखें ऊपर नहीं उठा पा रहा था।

जैसे ही मैंने ये कहा, मुझे महसूस हुआ कि मम्मी की नज़रें मुझ पर हैं। मुझे ऐसा लगा जैसे उनकी आँखें मेरे अंदर झाँक रही हों, जैसे वो मेरे चेहरे के पीछे छिपे उस 'हवसी' को देख रही हों जो कल रात उनके कान में वो सारी गंदी और अश्लील बातें बोल रहा था। वो शब्द... वो 'अपवित्र' शब्द जो मैंने उनके शरीर और उनकी मर्यादा के बारे में कहे थे... वो मेरे अंतर्मन में किसी ज़हर की तरह गूँज रहे थेे।

मम्मी ने कुछ कहा नहीं, बस उनकी चूड़ियों की खनक सुनाई दी। वो खनक मुझे और भी ज़्यादा बेचैन कर रही थी। मुझे लग रहा था कि वो जानती हैं। उन्हें पता है कि मेरा ये सिर झुका होना सिर्फ शर्म नहीं, बल्कि उस 'गंदगी' का बोझ है जो मैंने कल रात उनके साथ बाँटा था। मैं उनके सामने खड़ा तो था, लेकिन मेरा मन उस अपराधबोध (guilt) की आग में जल रहा था।
किचन में सन्नाटा इतना गहरा था कि मुझे अपनी ही धड़कनें सुनाई दे रही थीं। मैं बस फर्श को घूर रहा था, जैसे वहाँ कोई खजाना छुपा हो। मम्मी की मौजूदगी मेरे इतनी करीब थी कि मैं उनकी साड़ी की हल्की सी महक और उनके शरीर की गर्मी महसूस कर सकता था, लेकिन मेरा कलेजा जैसे पत्थर का हो गया था।

तभी मम्मी की आवाज़ आई। "रवि... क्या बात है? आज नाश्ता भी नहीं कर रहे हो? और ये क्या हाल बना रखा है अपना? नज़रें क्यों चुरा रहे हो मुझसे?""** बहुत ही शांत और सौम्य थी, लेकिन उस शांति के पीछे एक अजीब सी गहराई थी।उनकी आवाज़ सुनकर मेरे गले में एक गोला सा फंस गया। मैंने हिम्मत जुटाकर बहुत ही धीरे से कहा, "कुछ नहीं मम्मी... बस, रात को देर से सोया था तो थोड़ी थकान है।"

मैंने सोचा कि शायद वो मान जाएँगी, लेकिन मम्मी ने एक हल्की सी आह भरी। मुझे लगा जैसे उन्होंने मेरी झूठ को पकड़ लिया हो।"थकान?" उन्होंने दोहराया, और उनके लहजे में एक शरारती सी खनक थी जो मुझे और भी डरा गई। "थकान तो शरीर की होती है रवि... लेकिन तुम्हारी आँखों में जो ये बेचैनी है, ये जो ये भारीपन है... ये थकान नहीं लग रहा। ऐसा लग रहा है जैसे तुम्हारे मन में कोई बोझ है। कोई ऐसी बात जो तुम मुझसे कहना चाहते हो, पर कह नहीं पा रहे?"

मेरा दिल ज़ोर से धड़का। मुझे लगा जैसे वो सीधे मेरे सीने के पार देख रही हैं। "नहीं मम्मी... ऐसा कुछ नहीं है। मैं ठीक हूँ।" मैंने फिर से नज़रें झुका लीं।

तभी मैंने महसूस किया कि वो मेरे और करीब आईं। उनकी चूड़ियों की खनक मेरे कानों के पास गूँजी। उन्होंने बहुत ही कोमल स्वर में पूछा, "सच में? क्योंकि मुझे तो लग रहा है कि तुम मुझसे कुछ छुपा रहे हो। क्या रात को कुछ ऐसा हुआ था... या तुमने कुछ ऐसा कहा था... जो तुम्हें अभी भी परेशान कर रहा है?"उनके शब्दों ने मेरे अंदर जैसे बिजली दौड़ा दी। "क्या... क्या कहा था मैंने?" मैंने लड़खड़ाते हुए पूछा। मेरा गला सूख रहा था।

मम्मी ने एक लंबी सांस ली और बहुत ही धीमी, लगभग फुसफुसाती हुई आवाज़ में कहा, "वही... जो तुमने रात के अंधेरे में मेरे कान में कहा था। वो शब्द जो इतने 'गंदे' थे कि शायद तुम्हें लग रहा है कि तुम अब मेरे सामने खड़े होने के काबिल नहीं।"


मम्मी के उन शब्दों ने मेरे अंदर जैसे सब कुछ तहस नहस कर दिया। उनके मुँह से उन 'गंदे' शब्दों का ज़िक्र होते ही मेरा सिर शर्म से झुक गया। मुझे लगा जैसे मैं ज़मीन के अंदर धँस जाऊँ। मेरा गला रुँध गया और आँखों में आँसू भर आए। वो जो रात का जुनून था, वो सुबह की इस पवित्रता के सामने एक बहुत बड़ा गुनाह लग रहा था।

"मम्मी... मुझे माफ़ कर दीजिए... मैं बहुत बुरा हूँ," मेरी आवाज़ काँप रही थी। मैं फूट फूट कर रो पड़ा। "कल रात मैं... मैं अपने आप पर काबू नहीं रख पाया। मैंने आपसे जो कुछ भी कहा, जो कुछ भी किया... वो बहुत ही गलत था। मैं आपको ठेस पहुँचाना नहीं चाहता था, पर मेरी जुबान से निकले वो शब्द... वो बहुत ही घटिया थे। मैं खुद को माफ़ नहीं कर पा रहा हूँ।"

मैं वहीं किचन के फर्श पर बैठ गया, मेरा सिर झुका हुआ था और कंधे सिसकियों से काँप रहे थे। मुझे लग रहा था कि मम्मी शायद मुझे डाँटेंगी या फिर मुझसे बात करना छोड़ देंगी।तभी मुझे महसूस हुआ कि कोई मेरे पास आया। मम्मी ने धीरे से घुटनों के बल बैठकर मुझे अपने करीब कर लिया। उनके हाथों की वो जानी पहचानी गर्माहट जब मेरे बालों में और मेरी पीठ पर महसूस हुई, तो मेरा रोना और बढ़ गया।

"बस... बस मेरे बच्चे, चुप हो जाओ," मम्मी ने बहुत ही कोमल और ममता भरी आवाज़ में कहा। उन्होंने मुझे अपने सीने से लगा लिया। उनकी साड़ी की खुशबू और उनके शरीर की वो सोंधी महक मेरे चेहरे पर लग रही थी। वो मुझे बिल्कुल वैसे ही पुचकार रही थीं जैसे कोई माँ अपने छोटे से बच्चे को तब संभालती है जब वो बहुत ज़्यादा डर गया हो या रो रहा हो।

"शह्ह्ह... रोते नहीं। देखो मेरी तरफ," उन्होंने मेरे गालों पर हाथ फेरते हुए कहा। "तुम बुरे नहीं हो रवि,वो जो हुआ, मुझे बुरा नहीं लगा, मुझे तो बस तुम्हारी ये बेचैनी देख कर दुख हो रहा है।"उन्होंने मेरे सिर को चूम लिया और मुझे और भी कसकर गले लगा लिया। "मेरा बच्चा इतना परेशान क्यों होता है? तुम मेरे हो, और मैं तुम्हारी हूँ। इसमें कोई गुनाह नहीं है।"उनकी उस बात ने मेरे दिमाग के सारे तार झकझोर कर रख दिए।उन्होंने मेरे माथे पर एक कोमल सी चुंबन दी, मुझे लगा जैसे मेरे शरीर में बिजली का एक हल्का सा करंट दौड़ गया हो।

उनकी उस ममता भरी पुचकार और उनके सीने की धड़कन को महसूस करते हुए, मेरा वो भारीपन धीरे धीरे कम होने लगा। मुझे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे मेरे अंदर का वो सारा तूफान, वो सारी बेचैनी और वो सारा अपराधबोध, उनकी ममता की लहरों में धीरे धीरे बहकर शांत हो रहा है।
जैसे किसी जलते हुए इंसान को ठंडे पानी की फुहार मिल गई । उनकी बाहों में सिमटकर मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं फिर से वही छोटा बच्चा बन गया हूँ, जिसे दुनिया की किसी बात का डर नहीं है, जिसे बस अपनी माँ की गोद में सबसे ज़्यादा सुरक्षा महसूस होती है।

लेकिन उस सुरक्षा के साथ साथ, एक और अजीब सी भावना मेरे भीतर उठ रही थी। उनकी छाती से मेरा चेहरा सटा हुआ था, और उनके शरीर की वो गर्माहट, उनकी साँसों की लय और उनकी साड़ी का वो अहसास ये सब मिलकर मेरे भीतर एक बहुत ही जटिल (complex) हलचल पैदा कर रहे थे। एक तरफ मैं उनके सामने अपनी 'गलतियों' के लिए शर्मिंदा था, और दूसरी तरफ, उनकी इसी ममता और इस करीबियत ने मेरे अंदर दबे हुए उस 'जुनून' को फिर से धीरे से सहला दिया था।

मुझे लग रहा था जैसे मेरा शरीर दो हिस्सों में बँट गया है एक हिस्सा जो उनकी गोद में सुकून पाकर शांत होना चाहता है, और दूसरा हिस्सा जो कल रात की तरह ही फिर से उन 'गंदी' बातों और उस 'पाप' की ओर खिंच रहा है। उनकी पुचकार मुझे शांत तो कर रही थी, लेकिन उनके शरीर की वो खुशबू और उनकी कोमलता मुझे फिर से उसी कामुकता के रास्ते की तरफ धकेल रही थी। मैं बस उनके सीने पर सिर रखे उनकी धड़कनें सुन रहा था, और मन ही मन सोच रहा था *क्या ये ममता मुझे बचा रही है, या ये मुझे और भी गहरे दलदल में धकेल रही है?

उसके तुरंत बाद जो हुआ, उसने मेरी साँसें ही रोक दीं।मम्मी ने मेरे चेहरे से अपने हाथ हटाए और मेरी आँखों में देखते हुए एक ऐसी गहरी, अर्थपूर्ण मुस्कान दी जिसे देखकर मेरा कलेजा मुँह को आ गया। उस मुस्कान में सिर्फ ममता नहीं थी, बल्कि एक ऐसी शरारत और एक ऐसी चुनौती थी जो सीधे मेरे जिस्म को झकझोर रही थी।

"अब अच्छे बच्चों की तरह जल्दी से नाश्ता कर लो," उन्होंने बड़े ही प्यार भरे लेकिन अधिकारपूर्ण लहजे में कहा। "देखो, मैंने तुम्हारी मनपसंद स्वीट डिश बनाई है मूंग का हलवा। ये तुम्हारे शरीर को भी खूब एनर्जी देगा..." और फिर, उनकी आवाज़ अचानक थोड़ी धीमी और भारी हो गई, "क्योंकि... आज रात तुमने काफी मेहनत की थी ना?"

इतना कहते ही उन्होंने बहुत ही खूबसूरती से अपनी एक आँख झपकाई जिसे हमारे पंजाब में आँख मारना कहते हैं। वो पल ऐसा था जैसे वक्त थम गया हो। उनके उस एक इशारे और उन शब्दों ने मेरे कानों में किसी नशीले संगीत की तरह काम किया। 'मेहनत'... वो शब्द मेरे दिमाग में बार बार गूँजने लगा। वो इशारा साफ़ कह रहा था कि वो सब जानती हैं, वो सब समझती हैं और वो उस रात की हर एक हरकत को याद कर रही हैं।

"अब नाश्ता करो और जाओ कॉलेज। मैं दोपहर में तुम्हारा इंतज़ार करूँगी... मेरे सोना बच्चा।" उन्होंने मेरे गाल को हल्के से सहलाया और एक ऐसी नज़र डाली जिसने मुझे ये अहसास करा दिया कि दोपहर का इंतज़ार सिर्फ मेरे लिए नहीं, बल्कि उस 'एनर्जी' के दोबारा इस्तेमाल के लिए भी होगा।

मैं हक्का बक्का सा वहीं बैठा रह गया। मेरा शरीर पसीने से तर बतर हो रहा था और मेरा मन अब नाश्ते पर नहीं, बल्कि उस 'मूंग के हलवे' में और उस 'दोपहर' के इंतज़ार में डूब चुका था। मुझे समझ आ गया था कि मम्मी सिर्फ मुझे सांत्वना नहीं दे रही थीं, बल्कि वो मुझे उस खेल के लिए फिर से तैयार कर रही थीं।
मैंने नाश्ता किया और इस उमंग के साथ कॉलेज पहुंच के आज दोपहर रेस्ट के समय फिर से मम्मी के जिस्म के साथ खेलने का मौका मिलने वाला है।
कॉलेज की घंटी बज चुकी थी, लेकिन मेरे लिए समय जैसे थम सा गया था। क्लास में टीचर ब्लैकबोर्ड पर कुछ लिख रहे थे और उनकी आवाज़ एक बैकग्राउंड शोर की तरह मेरे कानों में गूँज रही थी, पर मेरा ध्यान कहीं और ही था।

मेरा पूरा शरीर एक अजीब सी बेचैनी से भरा हुआ था। जैसे ही मैं अपनी डेस्क पर बैठता, मुझे मम्मी के उस स्पर्श की याद आती। उनकी वो कोमल सी चुंबन और फिर वो गहरी, अर्थपूर्ण मुस्कान... वो मुस्कान मेरे दिमाग से निकल ही नहीं रही थी। "आज रात तुमने काफी मेहनत की थी ना?" उनके वो शब्द मेरे कानों में किसी नशीली फुसफुसाहट की तरह बार बार गूँज रहे थे।

मैं अपनी किताब खोलकर बैठा था, पर पन्ने पलटने का कोई मतलब नहीं था। मेरी नज़रें बार बार खिड़की से बाहर देख रही थीं, जैसे मैं उस दोपहर का इंतज़ार कर रहा हूँ जो अभी बहुत दूर है। मेरा शरीर अंदर ही अंदर उबल रहा था। जब भी मैं आँखें मूँदता, मुझे मम्मी का वो आँख मारना (wink करना) साफ़ दिखाई देता। उस एक पल ने मेरे भीतर एक ऐसी आग लगा दी थी जिसे बुझाना नामुमकिन लग रहा था।

पसीने की एक हल्की सी बूंद मेरी कनपटी से होकर नीचे गिर रही थी। क्लास के बाकी बच्चे अपने दोस्तों से बातें कर रहे थे, हँस रहे थे, लेकिन मैं एक अलग ही दुनिया में था। मुझे महसूस हो रहा था कि मेरी पैंट के अंदर मेरा शरीर खुद ब खुद प्रतिक्रिया दे रहा है। रात की 'मेहनत' की यादें मेरे जिस्म में एक सिहरन पैदा कर रही थीं। मेरा मन बार बार बस एक ही बात कह रहा था *'जल्दी घर जाना है... जल्दी मम्मी के पास जाना है।'*

हर बीतता मिनट मुझे और भी बेचैन कर रहा था। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरा शरीर अब और इंतज़ार नहीं कर पाएगा। मैं बस उस घड़ी के काँटों को तेज़ी से घूमते देखना चाहता था ताकि मैं उस घर की दहलीज पर कदम रख सकूँ जहाँ मम्मी मेरा इंतज़ार कर रही थीं। मेरा ध्यान पढ़ाई पर नहीं, बल्कि उस 'मूंग के हलवे' की ताकत और उस 'दोपहर' के उस रहस्यमयी वादे पर था।

***


दूसरी तरफ, घर के शांत और सुहावने माहौल में मम्मी रसोई में खड़ी थीं। बाहर की धूप खिड़की से छनकर आ रही थी, लेकिन रसोई के अंदर का माहौल कुछ अलग ही था। मम्मी ने आज एक हल्की और आरामदायक सूती साड़ी पहनी थी, जो उनके शरीर की बनावट को बहुत ही खूबसूरती से उभार रही थी।उनकी आँखों के सामने रवि का वह चेहरा आ जाता वह चेहरा जो कल रात 'मेहनत' करते समय पूरी तरह से समर्पित और बेकाबू हो गया था।

*"रवि कितना छोटा है ना..."* उन्होंने मन ही मन सोचा और एक गहरी साँस ली। *"इतना छोटा, पर उसकी चाहत और उसकी ताकत... कितनी बेबाक है।"*

तभी उनके मन में एक चिंता की लहर उठी। उन्होंने चूल्हे की आंच धीमी की और सोचने लगीं, *"पर क्या यह सही होगा? बेचारा बच्चा है... कल रात भी उसने इतनी मेहनत की कि उसे ढंग से नींद भी नहीं आई होगी। अगर मैं आज दोपहर में फिर से उसे काम पर लगा दूँगी, तो कहीं वह बीमार न पड़ जाए। उसका शरीर अभी बढ़ रहा है, उसे आराम की भी ज़रूरत है।"*

मम्मी का हाथ एक पल के लिए रुक गया। वह खिड़की के बाहर देखने लगीं। उनके मन में द्वंद्व चल रहा था। एक तरफ ममता थी जो उसके स्वास्थ्य की चिंता कर रही थी, और दूसरी तरफ वह 'इच्छा' थी जो रवि की उन नशीली आँखों और उसकी तड़प को देखकर जाग उठती थी।

*"लेकिन अगर मैंने मना कर दिया तो?"* उन्होंने खुद से सवाल किया। *"रवि तो बहुत जल्दी नाराज़ हो जाता है। वह मुझसे उम्मीद लगाए बैठा होगा। अगर मैंने उसे आज टाल दिया, तो शायद वह उदास हो जाए या फिर वह मुझसे दूर होने लगे।"*

मम्मी के चेहरे पर एक शरारती और गहरी सोच वाली मुस्कान फैल गई। उन्होंने अपनी आँखें थोड़ी झुका लीं और एक मास्टरप्लान बनाने लगीं।

*"नहीं... मैं उसे मना नहीं करूँगी। मैं उसे मना भी नहीं करूँगी और उसे थकाऊ भी नहीं होने दूँगी।"* उन्होंने मन ही मन तय कर लिया। *"मैं कुछ ऐसा बनाऊँगी जिससे वह गहरी नींद सो जाए, ताकि उसका शरीर पूरी तरह से रिलैक्स हो जाए। और जब वह जागेगा... तो वह पहले से भी ज्यादा ऊर्जावान और फुर्तीला महसूस करेगा। उसका शरीर पूरी तरह से तरोताजा हो चुका होगा और उसकी सारी थकान मिट चुकी होगी। फिर वह रात के काम के लिए पूरी तरह से तैयार होगा एकदम ताज़ा और जोश से भरा हुआ।"

मम्मी ने मन ही मन मुस्कुराते हुए अपनी योजना को अंतिम रूप दिया। उन्होंने रसोई के मसालों और जड़ी बूटियों के डिब्बों को एक बार फिर से देखा। अब उन्हें पता था कि उन्हें क्या करना है। वह रवि की सेहत के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहती थीं, बल्कि वह चाहती थीं कि उनका 'छोटा सा बच्चा' जब उनके पास आए, तो वह थका हुआ नहीं बल्कि एक शेर की तरह ऊर्जा से लबरेज हो।

। उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी एक ऐसी चमक जिसमें ममता भी थी और एक गहरा, नशीला आकर्षण भी।

***उनके चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान थी जो किसी गहरी साजिश और ममता के मेल से बनी थी। उन्होंने धीरे से चूल्हे की आंच को धीमा किया और अपनी आँखों में एक चमक लिए उन मसालों की ओर देखा जो अब उनके हाथ में थे।

"मेरा बच्चा..." उन्होंने मन ही मन बुदबुदाया, "आज उसे वो सब मिलेगा जिसकी उसे तलाश है, पर मेरे तरीके से।"

उन्होंने एक पीतल के बर्तन में गाढ़ा, मलाईदार दूध उबलने के लिए रखा। जैसे ही दूध में उबाल आने लगा, उन्होंने उसमें केसर के बारीक रेशे डाले। केसर का वह सुनहरा रंग दूध में घुलते ही पूरे रसोई में एक भीनी भीनी, नशीली खुशबू फैलने लगी। पर मम्मी का असली इरादा तो कुछ और ही था। उन्होंने एक छोटी सी कटोरी में जायफल को रगड़कर उसका महीन पाउडर तैयार किया। उस पाउडर की तीखी और मदहोश कर देने वाली महक ने उनके अपने ही दिमाग को एक पल के लिए सुन्न कर दिया।

उन्होंने चुटकी भरा जायफल का पाउडर और थोड़ा सा अश्वगंधा उस उबलते हुए केसरिया दूध में मिला दिया। दूध अब सिर्फ एक पेय नहीं रह गया था; वह एक 'अमृत' बन चुका था एक ऐसा नशा जो रवि के शरीर की सारी थकान को सोख लेगा और उसे एक ऐसी गहरी, बेखबर नींद में सुला देगा जहाँ उसे सिर्फ मीठे और मदहोश करने वाले सपने आएंगे।

मम्मी ने उसमें एक चम्मच शुद्ध शहद भी मिला दिया ताकि वह स्वाद में इतना मीठा और मखमली हो जाए कि रवि उसे एक ही बार में पी जाए। उनका मकसद साफ था वह चाहती थीं कि रवि दोपहर में इस दूध को पीकर एक ऐसी गहरी नींद में चला जाए जिससे उसकी मांसपेशियों का एक एक रेशा पूरी तरह से रिलैक्स हो जाए। वह चाहती थीं कि जब वह सोकर उठे, तो उसकी आँखों में वही पुरानी प्यास हो, लेकिन उसके शरीर में एक नई, अदम्य शक्ति और फुर्ती हो।

वह उसे थकाकर तोड़ना नहीं चाहती थीं, बल्कि वह उसे उस तरह से तैयार करना चाहती थीं कि जब रात का अंधेरा गहराए और वह 'काम' शुरू हो, तो रवि एक थके हुए लड़के की तरह नहीं, बल्कि एक ऐसे योद्धा की तरह उनके सामने हो जो अपनी हर इच्छा को पूरी ताकत के साथ पूरा करने के लिए बेताब हो।

मम्मी ने उस गर्म प्याले को अपने हाथों में लिया और खिड़की के बाहर देखने लगीं। उन्हें पता था कि रवि बस आने ही वाला है।
"...वह बस उस पल का इंतज़ार कर रही थीं जब रवि की आहट सुनाई देगी।उनके हाथ थोड़े कांप रहे थे डर से नहीं, बल्कि उस उत्तेजना से जो इस आने वाले खेल को सोचकर उनके भीतर उठ रही थी।


आखिरकार कॉलेज की छुट्टी की घंटी बजी और जैसे ही वह आवाज़ सुनाई दी, मेरे दिल की धड़कनें और तेज़ हो गईं। पूरे दिन मेरा ध्यान पढ़ाई में नहीं, बल्कि सुबह मम्मी द्वारा दिए गए उन इशारों में था। मेरे दिमाग में बस एक ही बातp घूम रही थी कि आज मम्मी के साथ खूब मस्ती करूंगा दोपहर में,ये सब सोचते हुए मैं बस घर पहुँचने के लिए तड़प रहा था। मेरा पूरा शरीर उस रोमांच और भूख से भरा हुआ था। मैं बस यही सोच रहा था कि खाना खाने के बाद हम सीधे बेडरूम में जाएँगे और जो भी बातें अधूरी रह गई थीं, उन्हें पूरा करेंगे। मैं उनके शरीर को करीब से महसूस करने के लिए बेताब था।

लेकिन भूख और प्यास की वजह से मेरा शरीर थोड़ा सुस्त महसूस कर रहा था। मम्मी ने घर में घुसते ही सबसे पहले मुझे नींबू पानी पिलाया। उसके बाद उन्होंने मेरे लिए दाल, सब्जी, रोटी और चावल का पूरा भरपेट लंच तैयार किया । खाना खाते वक्त भी मेरा ध्यान बार बार मम्मी की उन कोमल हरकतों पर जा रहा था।

तभी मम्मी मेरे पास वो जादुई दूध का प्याला लेकर आईं। उन्होंने बहुत ही प्यार से कहा, **"ये ले बेटा, ये ताकतवर्धक दूध पी ले। देखते ही देखते तेरी सारी थकान और सुस्ती छू मंतर हो जाएगी और ये तेरे बदन में गजब का जोश भर देगा।"**

मैं मन ही मन मुस्कुरा रहा था और सोच रहा था कि जैसे ही इस दूध से मेरी थकान मिटेगी, मैं मम्मी को जी भर कर प्यार करूँगा। मैं उस दूध को एक 'एनर्जी ड्रिंक' समझ रहा था जो मुझे मम्मी के साथ बिताए जाने वाले उस खास वक्त के लिए ताकत देगा ,मुझे लगा था कि यह मुझे जोश देगा, पर पता नहीं क्यों, दूध खत्म होते ही मेरी आँखें भारी होने लगीं और नींद से बोझिल होने लगीं...

"दोस्तों, कहानी अब एक ऐसे मोड़ पर है जहाँ रवि की अगली हरकत पूरी रात का मिजाज तय करेगी। अब आप तय कीजिये कि रवि के साथ क्या होना चाहिए:"

**विकल्प 1: चिड़चिड़ापन और वेहसिपन (The Frustrated Madness)**
रवि दोपहर के 4 बजे उठता है। उसका शरीर पूरी तरह सेक्स के लिए तड़प रहा है, उसका लंड बुरी तरह चुदाई मांग रहा है, लेकिन जैसे ही उसकी आँख खुलती है, उसे अहसास होता है कि मौका हाथ से निकल चुका ह। वह भारी मन और चिड़चिड़ेपन के साथ दुकान पर जाता है, लेकिन पूरा दिन उसका दिमाग बस एक ही बात पर घूमता रहता है कि उसका शरीर उसे इस वक्त साथ नहीं दे पा रहा। यह चिड़चिड़ापन और यह अधूरी प्यास रात को एक भयानक रूप ले लेगी। रात को जब वह मम्मी के पास जाएगा, तो वह प्यार से नहीं बल्कि अपनी पूरी **'चिढ़'** और **'वेहसिपन'** के साथ मम्मी को चुदाई देगा। वह अपनी सारी भड़ास मम्मी के शरीर पर निकालेगा।

**विकल्प 2: असीमित जोश और ताकत (The Beastly Stamina)**
रवि अपनी नींद पूरी करता है और शाम के करीब 7 बजे उठता है। इस वक्त तक उसका शरीर पूरी तरह तरोताजा हो चुका है। ऊपर से मम्मी के दूध का जो असर उसके शरीर पर हुआ है, उसकी वजह से उसके अंदर एक अलग ही किस्म का **'जोश'** और **'जुनून'** भरा हुआ है। उसके पास कोई चिड़चिड़ापन नहीं है, बल्कि एक असीमित ऊर्जा है। वह पूरी रात मम्मी को बिना रुके, बिना थके, एक जंगली जानवर की तरह लगातार **चोदेगा**। यह रात सिर्फ और सिर्फ बेतहाशा सेक्स और चरम सुख के नाम होगी।

**अब आप बताइए, रवि किस रास्ते पर चले? कमेंट्स में अपना वोट दें!**
[+] 5 users Like Motalund14's post
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Option 2 pyar hona hewaniya nahi isliye option 2 puri rat sex kare aur uncle ko bhi bula le
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bahot pyari update hai yaar, I loved it
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Is kahaani khatarnak hota ja raha hai yaar!
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bahut hi majedaar aur masaladar update yaar, bada maja aya padhke
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**"आप सभी के इन शानदार और जोशीले कमेंट्स के लिए बहुत बहुत शुक्रिया! ❤️**

**Asli lund जी, आपके द्वारा दिए गए ऑप्शन 2 ने कहानी में एक नया ही मोड़ ला दिया है मम्मी, रवि और अंकल! यह वाकई बहुत ही धमाकेदार होने वाला है। ?**

**और Farah, Sharmin Shila और Pakeeza chut जी... आप लोगों के कमेंट्स पढ़कर मज़ा आ गया! लेकिन एक छोटी सी गुजारिश है आप लोग सिर्फ तारीफ न करें, बल्कि खुलकर अपनी राय भी दें। आप जितना खुलकर मम्मी के बारे में या मेरे बारे में बोलेंगे, कहानी की रफ़्तार उतनी ही तेजी से बढ़ेगी।**

**आप लोग जितने ज्यादा 'Bold' होकर कमेंट्स करेंगे और ऑप्शंस देंगे, अपडेट्स उतने ही जल्दी जल्दी आएंगे और कहानी में बोल्डनेस भी उतनी ही बढ़ती जाएगी। तो प्लीज, अगली बार सिर्फ 'I loved it' न कहें, बल्कि अपनी पसंद का ऑप्शन भी ज़रूर बताएं ताकि मैं तुरंत लिखना शुरू कर सकूँ!**

**जुड़े रहिये, क्योंकि अब कहानी और भी ज्यादा मसालेदार और बेबाक होने वाली है! ??"**
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रवि की भारी साँसों की आवाज़ कमरे के सन्नाटे में गूँज रही थी। वह गहरी और थकी हुई नींद में डूब चुका था। उसकी नींद इतनी गहरी थी कि उसे अपने आसपास की दुनिया का कोई होश नहीं था।
मम्मी उसे देख रही थीं। रवि को इस तरह बेसुध होकर सोते हुए देख उनके दिल में एक अजीब सी ममता और फिक्र जाग उठी। उनके मन में एक माँ वाली ममता उमड़ रही थी। उन्होंने धीरे से उसके माथे पर हाथ फेरा वह हाथ जो कुछ देर पहले तक उत्तेजना और वासना से भरा था, अब सिर्फ एक माँ की ममता और देखभाल से भरा था।
'कितना थका हुआ लग रहा है मेरा बच्चा,' उन्होंने मन ही मन सोचा। उनके दिमाग में अब कोई कामुक विचार नहीं थे, बल्कि सिर्फ रवि की सेहत और उसकी सुकून भरी नींद की चिंता थी। उन्होंने देखा कि रवि के चेहरे पर नींद में भी एक अजीब सी बेचैनी थी, जैसे वह किसी अधूरेपन से जूझ रहा हो।
**"मम्मी ने कमरे का AC फुल स्पीड पर कर दिया ताकि बाहर की उमस भरी गर्मी कमरे के भीतर न पहुँच सके और एक ठंडी सी सिहरन पूरे माहौल में फैल जाए। वह चाहती थीं कि रवि बिना किसी परेशानी के अपनी नींद पूरी कर सके।।"**उनके मन में बस एक ही ख्याल था 'सो जा मेरे लाल,उसके बाद तो तुझे सारी रात मेरे साथ जागकर बहुत काम करना है।'
वह कुछ देर तक वहीं बैठी रही, बस उसे सोते हुए देखती रहीं। एक माँ की तरह, जो अपने बच्चे की हर छोटी बड़ी ज़रूरत का ख्याल रखती है। उनकी आँखों में रवि के लिए कामुक भावना के साथ प्रेम और उसकी सुरक्षा की भावना भी थी। वह चाहती थीं कि जब रवि उठे, तो वह पूरी तरह तरोताजा और ऊर्जा से भरा हुआ महसूस करे।
मम्मी ने रवि को चादर से अच्छे से ढँक दिया और उसके माथे को चूमकर एक लंबी सांस ली। उनके मन में एक अजीब सा सुकून था कि उन्होंने अपने बेटे की सेहत और उसकी रात की ऊर्जा के लिए जो किया है, वह सफल रहा। अब उन्हें भी खुद को थोड़ा आराम देना था, क्योंकि उन्हें पता था कि आज की रात बहुत लंबी और थका देने वाली होने वाली है। रवि को पूरी रात बिना रुके अपनी भूख मिटाने के लिए तैयार करना था, और इसके लिए मम्मी को भी खुद को भी तरोताजा रखना ज़रूरी था।

मम्मी ने भी अपनी आँखें मूँद लीं और कुछ देर के लिए गहरी नींद की आगोश में चली गईं। कमरे में एक भारी और शांत सन्नाटा पसर गया था।

लेकिन मम्मी की नींद बहुत कच्ची थी। जैसे ही कुछ देर बाद उनकी आँख खुली, उन्होंने घड़ी की तरफ देखा। उन्हें अहसास हुआ कि अगर वह अभी नहीं उठीं, तो दुकान का काम पिछड़ जाएगा। उन्होंने खुद को झटके से संभाला और अपनी थकान को किनारे रख दिया। उनके दिमाग में बस एक ही बात चल रही थी रवि की रात की 'जरूरतों' को पूरा करने के लिए उन्हें पूरी तरह तैयार रहना है।

मम्मी जल्दी से उठीं, अपना चेहरा धोया और खुद को तैयार किया। उन्होंने सोचा कि दुकान का काम निपटाकर वह जल्दी घर लौट आएँगी ताकि रवि के जागने से पहले वह खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से उस 'तूफान' के लिए तैयार कर सकें जो आज रात उनके साथ होने वाला था।

बिना किसी शोर के, मम्मी दबे पाँव कमरे से बाहर निकलीं और सीधे दुकान की तरफ चल दीं। उनके मन में एक तरफ ममता थी और दूसरी तरफ उस आने वाली रात का एक अनजाना सा रोमांच।
मम्मी दुकान की तरफ बढ़ तो रही थीं, लेकिन उनके दिमाग में जो चल रहा था, वह किसी भी आम औरत के ख्यालों से कोसों दूर और बेहद **'खतरनाक'** था। दुकान की भीड़ और शोर के बीच भी उनका मन बार बार उसी कमरे की ओर भाग रहा था जहाँ रवि बेसुध सोया हुआ था।

जैसे जैसे वह कदम बढ़ा रही थीं, उनके मन में एक विचार किसी ज़हरीली लत की तरह फैलता जा रहा था। वह सोच रही थीं कि आज की रात सिर्फ रवि के लिए ही क्यों? रवि का जोश, उसका वह जंगलीपन और उसकी वह भूख... क्या वह अकेले ही इस सब को संभाल पाएँगी? क्या वह रवि की उस बेतहाशा प्यास को पूरी रात तृप्त कर पाएँगी?

तभी उनके दिमाग के एक अंधेरे कोने से एक ऐसा ख्याल निकला जिसने उनके शरीर में एक सिहरन पैदा कर दी। **परदीप भाई साहब...'**

मम्मी के कदम एक पल के लिए ठिठके। उन्होंने खुद को झकझोरा, लेकिन वह ख्याल अब उनके काबू में नहीं था। उनके मन में एक बहुत ही **'Taboo'** और **'Dark'** योजना आकार ले रही थी। वह सोच रही थीं कि अगर प्रदीप भाई साहब भी वहाँ होते, तो नज़ारा कितना अलग होता। रवि का वह कच्चा जोश और अंकल का वह अनुभवी और भारीपन... अगर ये दोनों मिलकर उन्हें घेर लेते, तो क्या होता?

'क्या यह गलत है?' उनके मन ने एक पल के लिए पूछा, लेकिन तुरंत ही उनकी कामुक कल्पनाओं ने उस सवाल को दबा दिया। उन्हें लगा कि अगर अंकल भी इस खेल का हिस्सा बन जाएँ, तो आज की रात सिर्फ सेक्स नहीं, बल्कि एक ऐसा **'Carnival of Pleasure'** होगा जिसे रवि और वह कभी नहीं भूल पाएंगे। वह कल्पना मात्र से ही महसूस कर सकती थीं कि कैसे तीन जिस्म एक दूसरे में उलझे होंगे, कैसे वह अंकल और रवि के बीच में पिसती हुई उस चरम सुख की लहर को महसूस करेंगी।रवि की तरफ से उसे कोई डर नहीं था क्योंकि वो तो पहले से ही इस threesom को महसूस करना चाहता था ,इसका भागीदार बनकर।

मम्मी के चेहरे पर एक अजीब सी, गहरी और रहस्यमयी मुस्कान आ गई। वह जानती थीं कि वह क्या करने वाली हैं। वह अंकल को बुलाने का विचार अब सिर्फ एक ख्याल नहीं, बल्कि एक **'Mission'** बन चुका था। वह चाहती थीं कि आज की रात उनके जीवन की सबसे **'Wild'** और **'Unforgettable'** रात हो।

दुकान पहुँचते पहुँचते उनके मन में सब तय हो चुका था। वह अब सिर्फ एक माँ या एक औरत नहीं थीं, वह एक ऐसी खिलाड़ी बन चुकी थीं जो आज रात एक बहुत बड़ा और **'Hot'** खेल खेलने वाली थीं।
मम्मी की धड़कनें अब इतनी तेज हो गई थीं कि उन्हें महसूस हो रहा था कि उनका सीना किसी पिंजरे में बंद पंछी की तरह फड़फड़ा रहा है। दुकान के काउंटर के पीछे खड़े होकर वह ग्राहकों को सामान तो दे रही थीं, लेकिन उनकी आँखों के सामने जो दृश्य नाच रहे थे, वे किसी भी सभ्य इंसान के होश उड़ा देने के लिए काफी थे।

उनके मन में एक गहरा और डरावना सवाल बार बार कौंध रहा था **'क्या मैं वाकई यह कर पाऊँगी? इस उम्र में... क्या मेरा शरीर एक साथ दो मर्दों के इस बेतहाशा, जंगली और बेकाबू वार को झेल पाएगा?'** वह कल्पना कर रही थीं कि एक तरफ रवि का वह कच्चा, अनियंत्रित और युवा जोश होगा, और दूसरी तरफ अंकल का वह भारी, अनुभवी और ताकतवर मर्दानापन। वह सोच रही थीं कि जब ये दो विपरीत ताकतें उनके जिस्म पर एक साथ हमला करेंगी, तो क्या वह उस सुख के भंवर में डूबकर संभल पाएँगी या फिर पूरी तरह टूट जाएँगी? उन्हें डर था कि कहीं यह रोमांच उनके शरीर के लिए बहुत भारी न पड़ जाए।

लेकिन जैसे ही यह डर उनके मन में गहरा उतरने लगा, उन्होंने अपनी आँखें जोर से बंद कीं और अपने अतीत के उन अंधेरे और नशीले पन्नों को पलटने लगीं। वह खुद को झकझोरते हुए मन ही मन मुस्कुराईं और सोचने लगीं, **'डर कैसा? मैं तो पहले भी इन सब रास्तों पर चल चुकी हूँ। प्रदीप अंकल और उनके दोस्तों के साथ... मैंने तो सिर्फ थ्रिसम ही नहीं, बल्कि फोरसम के भी वो नशीले और गंदे स्वाद चखे हैं जिन्हें याद करके आज भी जिस्म में एक अजीब सी सिहरन दौड़ जाती है।'** उन पुरानी यादों ने उनके भीतर दबी हुई उस 'बदमाश' औरत को पूरी तरह जगा दिया था।

तभी उनके दिमाग में एक ऐसा विचार आया जिसने उनके होश उड़ा दिए और उनके चेहरे पर एक गहरी, कामुक मुस्कान ला दी। वह सोचने लगीं कि इस बार का खेल पिछले अनुभवों से कहीं ज्यादा **'Dark'** और **'Intense'** होने वाला है। * इस बार खेल में कोई अजनबी नहीं, बल्कि मेरा अपना रवि है। मेरा अपना खून! जब वह पहली बार इस थ्रिसम के खौफनाक और मदहोश कर देने वाले चक्रव्यूह में कदम रखेगा, जब वह अपनी आँखों से देखेगा कि उसकी माँ दो मर्दों के बीच कैसे पिस रही है और कैसे उन दोनों के वार को झेल रही है... तो वह नज़ारा कितना मस्ती भरा होगा!'**


वह कल्पना कर रही थीं कि रवि को अंदाज़ा भी नहीं होगा कि आज की रात उसके लिए क्या होने वाला है। वह सोच रही थीं कि जब रवि अपनी माँ के साथ एक निजी पल बिताने की उम्मीद कर रहा होगा, लेकिन जैसे ही उसकी नज़र अंकल के उस भारी और मदहोश कर देने वाले साये पर पड़ेगी, उसके चेहरे के हाव भाव हैरानी और खुशी में बदल जायेंगे,क्योंकि उसकी भी तो दिली इच्छा है मेरे और प्रदीप भाई साहब के साथ मिलकर मजे यानि threesom करने की। वह देखना चाहेगा कि कैसे उसकी माँ, जिसे वह अब तक सिर्फ एक माँ के रूप में देखता आया था, दो मर्दों के बीच एक खिलौने की तरह पिस रही है। वह देखना चाहेगा कि कैसे अंकल का अनुभव और रवि का कच्चा जोश मिलकर उसके जिस्म को एक युद्ध के मैदान में बदल देंगे।

मम्मी के मन में एक अजीब सी बेचैनी और उत्तेजना का मेल था। उन्होंने सोचा, **'रवि को इस थ्रिसम का हिस्सा बनाकर मैं उसे वो सब सिखाऊँगी जो उसने कभी सपनों में भी नहीं सोचा होगा। वह देखेगा कि कैसे एक औरत दो मर्दों के वार को अपने भीतर समा लेती है। वह देखेगा कि कैसे उसकी माँ की चीखें और उसकी सिसकियाँ एक साथ मिलकर कमरे की हवा को और भी भारी और गंदा बना देंगी।'**

तभी उनके दिमाग में एक व्यावहारिक चिंता ने दस्तक दी। **'पर अगर थ्रिसम हुआ, तो मैं एक पल के लिए भी सो नहीं पाऊँगी। कल रात की थकान अभी उतरी भी नहीं है और अगर मैं इस पागलपन में बीमार पड़ गई तो काम कैसे चलेगा?'** उन्होंने अपनी थकान और शरीर की सीमाओं को महसूस किया, लेकिन उनकी कामुकता उनके डर पर भारी पड़ रही थी। उन्होंने तुरंत एक योजना बनाई, **'नहीं, मैं रवि को छुट्टी करवा लूँगी।हम दोनों मिलकर एक दूसरे को बारी बारी से रेस्ट देंगे।सुबह रवि दुकान खोल लेगा मै पूजा पाठ के बाद सो के अपनी नींद पूरी कर लूंगी ,फिर मैं दुकान देख लूंगी रवि नींद पूरी कर लेगा।


अब उनके पास सब कुछ तय था। डर और रोमांच के इस भंवरजाल में फंसी मम्मी ने अपनी हिम्मत जुटाई और फैसला किया कि अब और इंतज़ार नहीं किया जा सकता।


**अब मम्मी देख रही थीं कि प्रदीप अंकल की तरफ कोई आता जाता मिले, ताकि वह उनके ज़रिए प्रदीप अंकल को सुनहरा संदेश भेज सकें कि आज रात घर आ जाएँ। वैसे तो मम्मी रवि को भी भेज सकती थीं, पर वह तो गहरी नींद में था और पता नहीं कब जागे। उन्होंने सोचा, 'चलो, इसी बहाने रवि के लिए भी एक सरप्राइज हो जाएगा उसकी अधूरी इच्छा पूरी करने वाला एक जबरदस्त सरप्राइज ,मदहोश कर देने वाला सरप्राइज!'**
**तभी मम्मी की नज़र गली से जाते हुए एक आदमी पर पड़ी। वह जग्गू अंकल थे वही जग्गू जो प्रदीप का सामान लेने अक्सर हमारी दुकान पर आया करते थे। उन्हें देखते ही मम्मी खुशी से झूम उठीं और तुरंत उन्हें आवाज़ लगाई, "जग्गू! अरे ओ जग्गू! ज़रा सुनो तो!"**

**मम्मी की आवाज़ सुनकर उन्होंने अपनी बाइक रोकी और दौड़ते हुए मम्मी के पास आ गए। "जी बहनजी, " जग्गू अंकल ने बड़े अदब से कहा।**

**मम्मी ने इधर उधर देखते हुए धीरे से कहा, "जग्गू, प्रदीप भाई साहब को बोलना कि आज रात को कोई ज़रूरी काम है, तो घर आ जाएँ।"**

**जैसे ही मम्मी ने यह कहा, दोनों की नज़रें मिलीं। उन दोनों की आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जैसे वे आँखों ही आँखों में कोई गहरा और गुप्त राज साझा कर रहे हों। तभी अचानक जग्गू अंकल ने शरारत भरी मुस्कान के साथ अपनी एक आँख दबाई और बोले, "अरे बहनजी! कभी हमें भी कोई जरुरी काम बता दिया करो, हम भी आजकल सब कामों में काफी माहिर हो गए हैं,और हर काम तसल्लीबख्श करते हैँ!"**

**मम्मी ने जग्गू अंकल की इस बेशर्म और नटखट बात पर उन्हें मुस्कुराते हुए झिड़क दिया और कहा, "चुप रहो बदतमीज़! अपनी उम्र देखो और अपनी बातें देखो, बस जाओ यहाँ से!"**
पर भाभी जी(जग्गू अंकल मम्मी को कभी भाभी जी तो कभी बहनजी कहकर बुलाता था),प्रदीप भाई साहब तो......

**"पर भाभी जी, प्रदीप भाई साहब तो......"

*जग्गू ने प्रदीप अंकल के बारे में मम्मी से क्या कहा? और उस रात आखिर क्या क्या हुआ? यह जानने के लिए कृपया अगला पार्ट पढ़ें। और हाँ, आप सभी पाठकों से गुज़ारिश है कि कमेंट में अपनी कल्पना ज़रूर लिखें कि आखिर जग्गू अंकल ने मम्मी को प्रदीप अंकल के बारे में क्या कहा होगा!*
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Pradeep incle ghar aye to Ravi bahut khush ho use surprise mile to mummy khud kahe mene mere bete ki khudhi kr liye bualayq he ab age decision mera beta tu khud lena aur vo uncle ko bole uncle app mummy ko pyar do aur mummy app bhi uncle ko pyar do meri bajah se app alag huye the ajj dono app
Pradeep bole nahi hum teeno to phir beta kahe ok per pahle app dono pyar karo me and me join ho jsoungs aur beta khud uncle ko nanga kare aur mummy ko bhi ucnle ke liye
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(17-09-2026, 05:14 PM)Asli lund Wrote: Pradeep incle ghar aye to Ravi bahut khush ho use surprise mile to mummy khud kahe mene mere bete ki khudhi kr liye bualayq he ab age decision mera beta tu khud lena aur vo uncle ko bole uncle app mummy ko pyar do aur mummy app bhi uncle ko pyar do meri bajah se app alag huye the ajj dono app
Pradeep bole nahi hum teeno to phir beta kahe ok per pahle app dono pyar karo me and me join ho jsoungs aur beta khud uncle ko nanga kare aur mummy ko bhi ucnle ke liye

> "वाह! आपकी कल्पना तो वाकई में आग लगा देने वाली है! ? आपने जिस तरह से सीन को सोचा है, उसे पढ़कर ही रोमांच महसूस हो रहा है। बस थोड़ा इंतज़ार और कीजिए दोस्त... जल्द ही हम आपकी इस कल्पना को कहानी में साकार रूप देंगे और एक धमाकेदार 'Threesome' अपडेट लेकर आएंगे! जुड़े रहिये! ❤️"
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Apse request he ek seen esa bhi banana jab uncle ka pund mummy ki chut me ho aur mummy ke boobs bete ke muh me aur mummy bete ko apne seene se chipka lar dudh pila rahi ho aur niche chut me uncle ka lund le rahi ho
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(17-09-2026, 10:12 PM)Asli lund Wrote: Apse request he ek seen esa bhi banana jab uncle ka pund mummy ki chut me ho aur mummy ke boobs bete ke muh me aur mummy bete ko apne seene se chipka lar dudh pila rahi ho aur niche chut me uncle ka lund le rahi ho

Ok bhai
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shandar............
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(18-09-2026, 02:45 PM)saya Wrote: shandar............

Thanks
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**"पर भाभी जी, प्रदीप भाई साहब तो..."**
**जग्गू ने मुस्कुराते हुए कहा, "भाभी जी, प्रदीप भाई साहब तो आज ही सुबह गाँव गए हैं और दो दिन बाद ही आएंगे। तभी तो मैं कह रहा हूँ कि मैं कर दूँ आपका काम। एक बार करवा के तो देखो।"**
**मम्मी ने उसे झिड़कते हुए कहा, "बदतमीज़! अपनी हद में रहो। और वैसे भी, मेरा बेटा जवान हो गया है, अगर उसने सुन लिया तो तुम्हारी हड्डी पसली एक कर देगा।"**जैसे वो डरा नहीं सचेत कर रही हो के रवि न सुन ले।
** उनके दिल में तो ये चलने लगा कि प्रदीप भाई नहीं तो जग्गू ही सही। पर मेरे डर से उन्होंने ऐसा कहा,मम्मी की हल्की मुस्कुराहट देखकर जग्गू अंकल को लगा कि अब वो दिन दूर नहीं जब मम्मी उसके नीचे होगी।*
**जग्गू ने एक टेढ़ी मुस्कान दी और बिना कुछ कहे वहाँ से चला गया। मम्मी उसे जाते हुए देखती रहीं, और जैसे ही वो गली के मोड़ पर मुड़ा, मम्मी ने राहत की सांस ली।**
**मम्मी अब दुकान पर अकेली थीं। दुकान में सन्नाटा था और ग्राहकों का आना जाना कम था। मैं घर पर गहरी नींद में सोया हुआ था, इसलिए मम्मी को यहाँ अकेले होने का अहसास हो रहा था। पर उनका दिमाग कहीं और ही भटक रहा था।**

**वो सामान समेटने की कोशिश कर रही थीं, पर उनका ध्यान बार बार जग्गू के उन शब्दों पर जा रहा था *"एक बार मुझ पर भरोसा करके तो देखो, आपको पछतावा नहीं होगा।"* जग्गू की वो आवाज़ और उसकी आँखों की वो चमक उनके दिमाग से निकल ही नहीं रही थी।**
**"क्या कह रहा था वो? कितना बेशर्म है..." उन्होंने खुद से बुदबुदाते हुए कहा, पर उनके चेहरे पर गुस्सा होने के बजाय एक अजीब सी शर्म और बेचैनी थी। वो बार बार अपने चेहरे को हाथों से ढक लेतीं, क्योंकि उन्हें महसूस हो रहा था कि जग्गू की बातों ने उनके अंदर एक ऐसी आग सुलगा दी है जिसे वो खुद भी नहीं समझ पा रही थीं।**

**दुकान के सन्नाटे में उन्हें अपनी ही धड़कनें सुनाई दे रही थीं। एक तरफ रवि और प्रदीप की यादें थीं, तो दूसरी तरफ जग्गू का वो बेबाक अंदाज़। वो खुद से लड़ रही थीं कि वो ऐसा क्यों सोच रही हैं, पर जग्गू का ख्याल उनके मन से जा ही नहीं रहा था।**** मम्मी का मन अब उनके काबू में नहीं था। जग्गू के जाने के बाद भी उसकी वो बेशर्म बातें उनके दिमाग में किसी ज़हरीली लत की तरह फैलती जा रही थीं। वो सामान सहेजने की कोशिश तो कर रही थीं, पर उनके हाथ काँप रहे थे।**

प्रदीप अंकल और जग्गू उनवल को अपने मन से निकल कर वो कल्पना करने लगीं कि रवि का जवान शरीर, उसकी ताकत और उसकी बेताबी उन्हें किस हद तक ले जा सकती है। वो सोच रही थीं कि रवि के साथ होने वाली वो रसीली और जंगली 'चूदाई' कैसी होगी... कैसे वो उसे अपने अंदर महसूस करेंगी।**
**जैसे जैसे वो उस खयाली रात के बारे में सोचती जा रही थीं, उनके शरीर में एक अजीब सी गर्मी महसूस होने लगी। जग्गू की वो बातें और रवि के साथ होने वाले उस शारीरिक मिलन की कल्पना ने उनके अंदर की दबी हुई प्यास को जगा दिया था। उनका शरीर अब खुद ब खुद उत्तेजित हो रहा था।**

**मम्मी ने अपनी आँखें बंद कर लीं। उन्हें महसूस हो रहा था कि उनका शरीर अंदर से भीग रहा है। वो खुद को संभाल नहीं पा रही थीं। एक तरफ जग्गू की वो बेबाक बातें थीं और दूसरी तरफ रवि के साथ होने वाली उस रात की वो बेकाबू चाहत। वो दुकान के उस अकेलेपन में, ख्यालों के ही भंवर में डूबकर खुद ही चरम सुख की ओर बढ़ने लगी थीं।**
********शाम के ठीक 6:30 बज रहे थे। जैसे ही मेरी आँख खुली, मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मैं किसी दूसरी ही दुनिया से वापस आया हूँ। शरीर में एक अजीब सी स्फूर्ति थी, एक ऐसा जोश और ताज़गी जो मैंने पहले कभी महसूस नहीं की थी। ऐसा लग रहा था जैसे मेरी रगों में खून नहीं, बल्कि बिजली दौड़ रही हो। मैं एकदम तरोताज़ा महसूस कर रहा था।**

**मैंने जल्दी से मुँह हाथ धोया और खुद को तैयार किया। मेरा मन बहुत हल्का और ऊर्जा से भरा हुआ था। मैं सीधा दुकान की तरफ चला गया। दुकान पहुँचते ही मैंने देखा मम्मी वहीं बैठी थीं। मैंने मुस्कुराते हुए उनसे कहा, "जाओ मम्मी, कुछ बना लो खाने के लिए। सिंपल सा ही बनाना, मैं तब तक दुकान संभाल लेता हूँ। पता नहीं आज मुझे इतनी गहरी और लंबी नींद क्यों आ गई, जैसे मैं हफ़्तों से सोया न हूँ।"**

**मम्मी ने मेरी तरफ देखा और एक बहुत ही प्यारी और गहरी मुस्कान दी। उनकी आँखों में एक चमक थी जिसे मैं समझ नहीं पाया। वो मन ही मन मुस्कुरा रही थीं और शायद कुछ सोच रही थीं। मुझे लगा जैसे वो मेरी इस नई फुर्ती को देखकर खुश हैं।**

**मैंने आगे कहा, "सॉरी मम्मी, आज आपको सारा दिन दुकान पर अकेले बैठना पड़ा। अगर आप कहें तो मैं बाहर से ढाबे से डिनर मंगवा लूँ? आपको मेहनत नहीं करनी पड़ेगी।"**

**मम्मी ने प्यार से मेरा हाथ थपथपाया और बोलीं, "नहीं बेटा, तू परेशान मत हो। मैं फटाफट घर जाकर कुछ बना लूँगी, तू बस दुकान पर ध्यान दे।"**

**उनकी आवाज़ में एक अलग ही सुकून था। मुझे लग रहा था कि आज का दिन बहुत अच्छा होने वाला है। मैं पूरी तरह से जोश में था और अपनी इस नई ताकत का अनुभव कर रहा था, पर मुझे इस बात का अंदाज़ा भी नहीं था कि मेरी इस 'ताज़गी' के पीछे मम्मी का वो खास 'स्पेशल दूध' था, जिसे उन्होंने मेरे लिए बड़े प्यार और इरादे से बनाया था।**
**रात का खाना मेज़ पर लगा था। घर के अंदर का माहौल एकदम शांत था, लेकिन इस शांति के पीछे एक भारीपन था एक ऐसी उत्तेजना जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल था।**

**मम्मी आज कुछ अलग ही अंदाज़ में थीं। उन्होंने खाने के साथ कुछ बहुत ही 'खास' चीज़ें तैयार की थीं। खाना परोसते समय वो बार बार मेरी और देख रहीं थीं। उन्होंने खुद भी खाने के साथ कुछ ऐसी चीज़ें ली थीं जो उनके शरीर में एक अलग ही गर्मी और स्टैमिना भर रही थीं। उनके चेहरे पर एक अजीब सी लाली थी और उनकी साँसें थोड़ी भारी और तेज़ लग रही थीं।**

**मम्मी ने मेरी थाली के पास एक छोटा सा कटोरा रखा। उसमें एक गाढ़ा, मखमली मिश्रण था ताज़ा और बेहद गाढ़ी मलाई के साथ मिलाया हुआ एक गुप्त जड़ी बूटी का चूर्ण। उसकी खुशबू में एक नशा था जो सीधे दिमाग पर वार कर रहा था। मम्मी ने एक चम्मच उठाया और उस मलाईदार मिश्रण को उसमें भर लिया। वह मिश्रण इतना गाढ़ा था कि चम्मच से गिर भी नहीं रहा था।**
**मम्मी ने मेरे करीब आते हुए, अपना चेहरा मेरे चेहरे के बिल्कुल पास लाया। उनकी साँसों की गर्मी मुझे अपनी त्वचा पर महसूस हो रही थी। उन्होंने धीरे से चम्मच मेरे होंठों पर टिका दिया।**

**"बेटा, ये खा ले... ये मैंने खास तेरे लिए बनाया है। इसे खाने के बाद तुझे ऐसी ताकत महसूस होगी जो तूने कभी सोची भी नहीं होगी," मम्मी ने बेहद धीमी, मखमली और भारी आवाज़ में कहा। उनकी आँखों में एक ऐसी गहरी और मदहोश कर देने वाली चमक थी जिसने मेरे होश उड़ा दिए थे।**

**मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और जैसे ही उस गाढ़ी मलाई और जड़ी बूटी के मिश्रण को अपने मुँह में लिया, एक बिजली सा झटका महसूस हुआ। वो मिश्रण इतना ठंडा और मलाईदार था कि पहले तो उसे सुकून मिला, लेकिन जैसे ही गले से नीचे उतरा, शरीर के अंदर एक दहकती हुई आग की लहर दौड़ गई।**

**उस जड़ी बूटी के मिश्रण का असर जादुई था। मुझे महसूस हुआ कि मेरा खून उबलने लगा है। मेरे दिल की धड़कनें इतनी तेज़ हो गईं कि मुझे अपने सीने में उनका शोर सुनाई देने लगा। मेरे शरीर की हर नस में एक अजीब सी बेचैनी और भारीपन भर गया। मेरा जोश अब किसी सीमा को नहीं मान रहा था; महसूस हो रहा था कि मेरा शरीर फटने को तैयार है।**

**मम्मी ने खुद भी एक बड़ा निवाला उस गाढ़ी मलाई के मिश्रण का लिया। जैसे ही उन्होंने उसे निगला, उनके चेहरे पर एक मदहोश कर देने वाली मुस्कान आ गई। उस मिश्रण ने उनके शरीर में भी एक अजीब सी उत्तेजना भर दी थी। उनके शरीर की गर्मी बढ़ने लगी थी, उनकी त्वचा में एक अजीब सी संवेदनशीलता आ गई थी और उनकी साँसें अब और भी गहरी और भारी हो गई थीं।**

**मम्मी ने अपनी आँखें खोलकर मेरी बेताब आँखों में झाँका,मेरी आँखों में जो प्यास और जो बेताबी थी, वो अब साफ़ दिख रही थी। मम्मी ने धीरे से अपना हाथ मेरे हाथ पर रखा और फुसफुसाते हुए पूछा, "कैसा लग रहा है तुझे? क्या महसूस हो रहा है तेरे अंदर?"**
**मेरे पास कहने के लिए शब्द नहीं थे। उसे बस इतना पता था कि अब और इंतज़ार करना नामुमकिन है। मम्मी की वो मलाईदार खुशबू, उनके शरीर की बढ़ती हुई गर्मी और वो जादुई मिश्रण सब कुछ मिलकर मुझे एक ऐसे जुनून की ओर धकेल रहे थे जहाँ से वापसी का कोई रास्ता नहीं था।**
**
मेरे पूरे शरीर में उस मलाईदार मिश्रण ने एक ऐसी आग लगा दी थी जिसे बुझाना नामुमकिन लग रहा था। मेरी रग रग में खून नहीं, बल्कि पिघला हुआ लावा दौड़ रहा था। मम्मी की आँखों में वो चमक और उनके शरीर से आती वो मदहोश कर देने वाली खुशबू मुझे पागल कर रही थी। मेरा दिमाग काम करना बंद कर चुका था, बस एक ही चीज़ की चाहत थी उनका स्पर्श।

जैसे ही मम्मी ने मेरा हाथ छुआ, मुझे लगा जैसे बिजली का कोई तेज़ झटका मेरे पूरे शरीर में फैल गया हो। मैंने बिना सोचे समझे, एक जंगली जानवर की तरह उनका हाथ अपने मज़बूत हाथों में जकड़ लिया। मेरा दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था कि मुझे डर था कहीं वो सीना चीरकर बाहर न निकल आए।

मेरा दूसरा हाथ खुद ब खुद उनकी ओर बढ़ गया। मेरी उंगलियाँ कांप रही थीं, लेकिन मेरा इरादा पक्का था। मैंने अपना हाथ धीरे से उनके उभारों पर रखा। उनकी छाती की गर्मी और उस मलाईदार मिश्रण के असर से उनकी त्वचा जो इतनी नरम और संवेदनशील हो गई थी, उसे छूते ही मेरा रोम रोम उत्तेजित हो उठा। मेरा हाथ वहाँ दब रहा था, और उनकी साँसों की गर्मी मेरे चेहरे पर महसूस हो रही थी।
मैंने उनकी आँखों में आँखें डालकर, एक बेताब और भारी आवाज़ में इशारे से कहा कि वो मेरे पास आ जाएँ, कि मैं अब और इंतज़ार नहीं कर सकता। मेरा शरीर अब बस उनके और करीब आने के लिए तड़प रहा था।
मम्मी ने मेरी आँखों में देखा। उनके चेहरे पर एक शरारती और मदहोश कर देने वाली मुस्कान आई। उन्होंने मेरे हाथ को हल्का सा दबाया और बहुत ही धीमी, रेशमी आवाज़ में बोलीं, "इतने उतावले क्यों हो रहे हो रवि? ज़रा सब्र तो करो... पहले किचन का काम तो निपटा लेने दो।"

उनकी ये बात सुनकर मेरा संयम पूरी तरह टूट गया। 'किचन का काम'... उनके शब्दों में एक तरह का खेल था, एक तरह का इंतज़ार था जो मेरी उत्तेजना को और भी ज़्यादा भड़का रहा था। मुझे पता था कि वो काम खत्म होते ही वो मेरे पास होंगी, और तब जो होगा, उसकी कल्पना मात्र से ही मेरे शरीर के निचले हिस्से में एक ज़बरदस्त हलचल होने लगी थी। मैं बस उस पल का इंतज़ार करने लगा जब वो रसोई से वापस आएँगी और ये रात हमारे जुनून की गवाह बनेगी।
किचन से उनके जाने के बाद, कमरे में सन्नाटा तो था, लेकिन मेरे दिमाग में एक तूफ़ान मचा हुआ था। मैं बिस्तर पर लेटा हुआ था, लेकिन मेरा शरीर शांत नहीं था। उस जड़ी बूटी वाले मिश्रण ने मेरे अंदर जो आग लगाई थी, वो अब धधक रही थी। मेरी हर साँस भारी थी और मेरा पूरा ध्यान बस दरवाज़े पर टिका था। मैं बस उस पल की प्रतीक्षा कर रहा था जब वो वापस आएँगी।

तभी, दरवाज़े के खुलने की हल्की सी आवाज़ आई। मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा। मम्मी कमरे में दाखिल हुईं, लेकिन वो वैसी नहीं थीं जैसी वो पहले थीं। उनके आने का अंदाज़ ही सब कुछ बदल देने वाला था। उन्होंने अपनी साड़ी उतार दी थी और अब उन्होंने एक **बेहद पतली और सिल्क की सेक्सी नाइटी** पहनी हुई थी।वो नाइटी इतनी महीन और पारभासी (translucent) थी कि उसके नीचे उनके शरीर की हर एक लकीर और उनकी गोरी त्वचा साफ़ झलक रही थी। नाइटी का गहरा पीला रंग उनके शरीर की चमक को और भी उभार रहा था। जैसे ही वो कमरे के अंदर आईं, उनकी चाल में एक अजीब सी मदहोशी और लचक थी। नाइटी का रेशमी कपड़ा उनके उभारों और उनके कूल्हों की बनावट के साथ इस तरह चिपक रहा था जैसे वो उनके शरीर का ही हिस्सा हो। हर कदम के साथ वो कपड़ा उनके शरीर पर लहरा रहा था, जिससे उनकी जादुई बनावट और भी साफ़ दिख रही थी।
जैसे ही वो कमरे में आईं, उनकी वही नशीली और मलाईदार खुशबू पूरे कमरे में फैल गई। उनकी आँखों में अब कोई हिचकिचाहट नहीं थी, बल्कि एक गहरी, भूखी चमक थी। उनके चेहरे पर पसीने की नन्ही बूंदें चमक रही थीं, जो उस जड़ी बूटी के असर से उनके शरीर की बढ़ती हुई गर्मी को बयां कर रही थीं।

वो धीरे धीरे चलकर मेरे पास आईं। नाइटी की सरसराहट और उनके चलने की वो मदहोश कर देने वाली लय मेरे कानों में संगीत की तरह गूँज रही थी। जब वो मेरे बिस्तर के पास रुकीं, तो उनकी साँसें इतनी तेज़ और भारी थीं कि मैं उन्हें साफ़ सुन सकता था। नाइटी का गला इतना गहरा था कि उनके उभारों का नज़ारा मेरी आँखों के बिल्कुल सामने था। वो नाइटी उनके शरीर की गर्मी से थोड़ी सी भीगी हुई लग रही थी, जिससे वो और भी ज़्यादा उत्तेजक लग रही थीं।उन्होंने झुककर मेरी ओर देखा। उनके झुकते ही नाइटी का कपड़ा और भी नीचे की ओर खिंच गया, जिससे उनका पूरा वजूद मेरी नजरों के सामने था जैसे ही वो मेरे बिस्तर के पास झुकीं, नाइटी का वो पतला रेशमी कपड़ा उनके भारी उभारों के नीचे और भी खिंच गया। उनकी त्वचा की वो मखमली चमक और नाइटी के आर पार दिखती उनकी देह की बनावट ने मेरे दिमाग के सारे तार तोड़ दिए। उनकी आँखों में जो वासना थी, वो अब मेरे अंदर के जानवर को पूरी तरह जगा चुकी थी।
मैंने बिना एक पल गँवाए अपना हाथ आगे बढ़ाया और उनकी कमर को ज़ोर से जकड़ लिया। नाइटी का वो ठंडा रेशमी अहसास और उनके शरीर की वो भयंकर गर्मी दोनों का मेल ऐसा था कि मेरे शरीर में बिजली दौड़ गई। वो झटके से मेरे और करीब आ गईं और उनके शरीर का पूरा वज़न मेरे ऊपर आ गया। उनके शरीर से आती वो नशीली खुशबू अब मेरे फेफड़ों में भर रही थी, जिससे मेरा सिर चकराने लगा।
"मम्मी..." मेरे गले से बस एक दबी हुई और भारी आवाज़ निकली। मेरा हाथ उनकी कमर से फिसलकर धीरे धीरे ऊपर की ओर बढ़ने लगा। नाइटी का वो महीन कपड़ा मेरी उंगलियों के नीचे किसी जादू की तरह महसूस हो रहा था। जैसे ही मेरा हाथ उनके उभारों तक पहुँचा, उन्होंने एक लंबी और गहरी आह भरी। उनकी वो आह मेरे कानों में किसी नशीले संगीत की तरह गूँजी।
मैंने उन्हें खींचकर अपने ऊपर ले लिया। अब हम दोनों के बीच नाइटी का वो पतला सा पर्दा भी नहीं बचा था। उनके शरीर की गर्मी मेरे सीने से टकरा रही थी। मैंने अपना चेहरा उनकी गर्दन के पास ले जाकर उनकी उस मलाईदार त्वचा को चूमना शुरू किया। उनकी गर्दन से उठती वो गरमाहट और उनकी तेज़ होती साँसें बता रही थीं कि वो भी अब और इंतज़ार नहीं कर सकतीं।

उनके हाथ मेरे बालों में उलझ गए और उन्होंने मुझे और भी ज़ोर से अपनी ओर खींच लिया। नाइटी का वो रेशमी कपड़ा अब उनके शरीर से इस तरह चिपक गया था जैसे वो उनके जिस्म का ही हिस्सा हो। मैंने उनके कानों के पास फुसफुसाते हुए कहा, "अब और इंतज़ार नहीं होता..." मम्मी ने मेरी आँखों में देखते हुए अपनी उंगलियाँ मेरे होंठों पर रखीं और एक मदहोश कर देने वाली मुस्कान के साथ धीरे से कहा, "तो फिर देर किस बात की है रवि? आज रात हमें रुकना नहीं है।"

उनके इन शब्दों ने मेरे अंदर के संयम की आखिरी दीवार को भी ढहा दिया। मैंने उनके होंठों को अपने होंठों के नीचे दबा लिया और उस रात का वो उन्माद शुरू हुआ जिसे हम दोनों ही सदियों तक याद रखने वाले थे।जैसे ही हमारे होंठ मिले, कमरे की हवा में एक तरह का विस्फोट सा हुआ। वो चुंबन सिर्फ एक शुरुआत थी; उसमें हम दोनो की कामुकता और उस जड़ी बूटी का नशा मिला हुआ था। उनकी जीभ मेरी जीभ से टकराई और मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे शरीर में बिजली का एक तेज़ झटका लगा हो। उनकी पकड़ मेरी पीठ पर और भी मज़बूत हो गई, जैसे वो मुझे अपने शरीर के अंदर समा लेना चाहती हों।

मैंने उनके शरीर को और भी गहराई से महसूस करने के लिए उनके शरीर को ऊपर की ओर खींचा। नाइटी का वो पतला रेशमी कपड़ा अब हमारे बीच एक बाधा बन रहा था। मैंने अपने हाथों को उनकी कमर से ऊपर ले जाते हुए उनके उभारों को अपनी मुट्ठी में भर लिया। जैसे ही मेरी उंगलियों ने नाइटी के कपड़े के ऊपर से उनके गर्म और सख्त उभारों को छुआ, उनके मुँह से एक बहुत ही गहरी और कामुक 'आह' निकली। वो थरथरा उठीं और अपना सिर पीछे की ओर झुका लिया, जिससे उनकी वो मखमली गर्दन पूरी तरह से मेरे सामने खुल गई।मैंने अपना चेहरा उनकी गर्दन की ओर झुकाया और उनकी उस कोमल त्वचा को अपने दांतों से हल्का सा काटते हुए चूमना शुरू किया। उनकी खुशबू और उनके शरीर की गर्मी मुझे पूरी तरह से मदहोश कर रही थी। मेरा एक हाथ अब नाइटी के नीचे चला गया उसकी त्वचा इतनी चिकनी और मखमली थी कि मेरा हाथ फिसलने लगा। जैसे ही मेरी उंगलियां उनकी कमर के निचले हिस्से और उनके कूल्हों के पास पहुँचीं, उनकी साँसें और भी तेज़ और उखड़ी हुई हो गईं।"रवि... आह... और सहलाओ..." उनकी आवाज़ में एक अजीब सी बेताबी थी, जो मुझे और भी उग्र बना रही थी।
मैंने नाइटी के पतले स्ट्रैप्स को धीरे से उनके कंधों से नीचे सरका दिया। अब वो नाइटी उनके शरीर पर बस एक बोझ की तरह लटक रही थी। मैंने एक झटके में उस नाइटी को उनके ऊपर से हटा दिया, और अब वो पूरी तरह से मेरे सामने थीं बिना किसी पर्दे के, अपनी पूरी कामुकता के साथ। उनके शरीर की चमक और उनकी बनावट को देखकर मेरी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा। उनके उभारों की गोरापन और उनकी देह की वो लचक किसी खुदा की बनाई हुई सबसे खूबसूरत चीज़ लग रही थी।

मैंने उन्हें बिस्तर पर धीरे से लिटाया और उनके ऊपर झुक गया। अब हमारा पूरा शरीर एक दूसरे से रगड़ खा रहा था। उनके शरीर की गर्मी मेरे शरीर की गर्मी से मिलकर एक आग पैदा कर रही थी। मैंने उनके स्तनों के बीच अपना चेहरा छिपा लिया और उन्हें चूमना शुरू किया, जबकि मेरा हाथ उनके शरीर के सबसे निजी और संवेदनशील हिस्सों की तलाश में नीचे की ओर बढ़ रहा था। जैसे ही मेरा हाथ उनके सबसे संवेदनशील और गीले हिस्से के करीब पहुँचा, उन्होंने अचानक मेरा हाथ अपने हाथ में लिया और मुझे थोड़ा पीछे धकेला। उनकी आँखों में एक शरारती और बेहद कामुक चमक थी। उन्होंने धीरे से कहा, "रवि, आज सिर्फ तुम ही नहीं, मैं भी तुम्हें महसूस करना चाहती हूँ।"******इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाता, उन्होंने अपनी कामुक आँखों में एक ऐसी बेताबी भरी कि मेरा पूरा अस्तित्व काँप उठा। उनकी उंगलियाँ किसी कुशल जादूगर की तरह काम कर रही थीं। उन्होंने सबसे पहले मेरी शर्ट के पहले बटन पर अपनी पकड़ बनाई और एक झटके में उसे खोल दिया। जैसे ही शर्ट का पहला बटन खुला, कमरे की ठंडी हवा मेरे गर्म सीने से टकराई, लेकिन उनकी गर्म साँसें मेरे शरीर पर आग लगा रही थीं। उनकी उंगलियाँ जब मेरे बटन खोलती जा रही थीं, तो मुझे उनके हाथों की थरथराहट महसूस हो रही थी वो भी उतनी ही उत्तेजित थीं जितने मैं। शर्ट के हर बटन के खुलने के साथ मेरी धड़कनें तेज़ होती जा रही थीं। जब शर्ट पूरी तरह खुली और कंधों से फिसलकर ज़मीन पर गिरी, तो मुझे एक अजीब सी बेबसी और समर्पण का अहसास हुआ। उनकी नज़रें मेरे नग्न सीने पर ऐसे टिकी थीं जैसे वो मेरी त्वचा को अपनी आँखों से छू रही हों।
फिर उन्होंने मेरे बेल्ट की तरफ हाथ बढ़ाया। बेल्ट के खुलने की वो 'क्लिक' की आवाज़ सन्नाटे में गूँज उठी और मेरे कानों में किसी संगीत की तरह लगी। उनकी उंगलियाँ मेरी पैंट की ज़िप पर पहुँचीं। जैसे ही उन्होंने ज़िप को नीचे की ओर खींचा, एक तेज़ सरसराहट हुई जिसने मेरे पूरे शरीर में बिजली दौड़ा दी। पैंट को नीचे सरकाते हुए उनकी नज़रें लगातार मेरे शरीर के हर उभार को निहार रही थीं। उनके चेहरे पर एक ऐसी भूख थी जिसे देखकर मेरा रोम रोम उत्तेजित हो उठा।
अब बस मेरी अंडरवियर ही बची थी। उन्होंने मेरी आँखों में आँखें डालकर एक गहरी और मदहोश कर देने वाली मुस्कान दी। जैसे ही उन्होंने अंडरवियर के इलास्टिक को नीचे की ओर खींचना शुरू किया, मेरे शरीर के भीतर का तनाव चरम पर पहुँच गया। जैसे ही कपड़ा नीचे फिसला, मेरा उत्तेजित और सख्त लिंग झटके के साथ बाहर निकला। वो पूरी ताकत और गर्व के साथ हवा में लहराते हुए बाहर आया, जैसे मम्मी को 'सलामी' दे रहा हो। वो पूरी तरह से तना हुआ, लाल और उत्तेजित था, जो उनकी आँखों के सामने अपनी मौजूदगी का ऐलान कर रहा था।
उसे बाहर निकलते देख उनकी साँसें अचानक रुक गईं और उनकी आँखें फैल गईं। उनके चेहरे पर एक ऐसी प्यास और हैरानी का मिला जुला भाव था जिसे देख कर मेरा लिंग और भी ज़्यादा सख्त हो गया। वो मेरे उस उभार को देखकर खुद को रोक नहीं पाईं। उनकी नज़रें मेरे उस हिस्से पर जम गईं जो अब उनके ठीक सामने था, और उनके मुँह से एक दबी हुई 'आह' निकल गई। उस पल मुझे महसूस हुआ कि हम दोनों ही उस आग के घेरे में थे जहाँ अब सिर्फ और सिर्फ वासना का राज था
मम्मी की उस कामुक प्यास ने मुझे पूरी तरह से अपने वश में कर लिया था। उन्होंने मेरे नग्न शरीर को इस तरह से घेर लिया था जैसे मैं उनका अपना शिकार हूँ और अब मेरा बचना नामुमकिन है। उन्होंने बहुत ही नजाकत और गहराई के साथ अपना चेहरा मेरे माथे के पास लाया और एक लंबी, मखमली और गर्म चुंबन मेरे माथे पर अंकित कर दिया। वो चुंबन सिर्फ एक स्पर्श नहीं था, बल्कि मेरे बदन पर कब्जा कर लेने का एक गहरा ऐलान था।"मेरा बच्चा... आज तू सिर्फ मेरा है," उन्होंने मेरे कान के पास फुसफुसाते हुए कहा। उनकी आवाज़ में एक ऐसी भारीपन और प्यास थी जिसने मेरे रोंगटे खड़े कर दिए। "आज मैं तुझे अपनी रूह तक में उतार लूँगी।"

फिर उनकी गर्म साँसें मेरी आँखों के ऊपर महसूस होने लगीं। उन्होंने अपनी जीभ से मेरी पलकों को धीरे से सहलाया और फिर मेरी आँखों के चारों ओर अपने होंठों को फेरते हुए एक गहरा अहसास दिया। "आँखें बंद मत करना रवि... देखना कि तेरी मम्मी तुझे कैसे अपना बना रही है," उन्होंने शरारत और वासना भरी आवाज़ में कहा।उनकी जीभ मेरे गालों पर किसी मखमली लहर की तरह दौड़ रही थी। जैसे ही उन्होंने मेरे गालों को अपने होंठों के बीच लिया और उन्हें ज़ोर से चूसना शुरू किया, मेरे मुँह से एक दबी हुई सिसकी निकल गई *"आह्ह्ह... मम्मी..."* मेरा शरीर उनके स्पर्श से कांप उठा। उन्होंने मेरे गाल के मांस को अपने दांतों से हल्का सा दबाया और फिर उसे ज़ोर से चूसने लगीं।***"उफ़्फ़... मम्मी, बहुत... बहुत अच्छा लग रहा है," मैं सिसकते हुए बोला। मेरा गला सूख रहा था और मेरी साँसें उखड़ने लगी थीं।उन्होंने मेरे गाल को चूसते हुए ही धीरे से कहा, "अभी तो शुरुआत है मेरे लाल... अभी तो तुझे पता भी नहीं कि मैं तेरे शरीर के साथ क्या क्या कर सकती हूँ। बस अपनी सिसकियाँ संभाल कर रख, क्योंकि आज रात तू बहुत शोर मचाने वाला है।"

उनके दांतों का वो हल्का सा दबाव और फिर उनकी जीभ का गीलापन मेरे गालों पर एक मीठा दर्द और असीम सुख दे रहा था। मैं उनके जादू के वश में था, बस उनकी हर हरकत पर अपनी सिसकियों के साथ प्रतिक्रिया दे रहा था।
उनकी यात्रा अब मेरी गर्दन की ओर बढ़ी। उन्होंने मेरी गर्दन के हर मोड़ को अपने होंठों से चूमना शुरू किया। उनकी जीभ मेरी गर्दन के नीचे की नसों पर ऐसे खेल रही थी जैसे कोई संगीतकार वाद्य यंत्र बजा रहा हो। उन्होंने मेरे कंधों को अपने दांतों से हल्का सा काटते हुए चूसना शुरू किया, जिससे मेरे शरीर में बिजली की लहर दौड़ गई। उनकी उंगलियाँ मेरी बाहों पर रेंग रही थीं, हर एक इंच को चूमते हुए और सहलाते हुए।

जैसे ही उनका चेहरा मेरे सीने तक पहुँचा, मेरा दिल ज़ोरों से धड़कने लगा। उन्होंने मेरे सीने के एक एक इंच को अपनी जीभ से चाटना शुरू किया। उनकी जीभ की वो गीली और गर्म छुअन मेरे सीने की मांसपेशियों को पिघला रही थी। फिर उनकी नज़रें मेरे निप्पल्स पर टिकीं। उन्होंने उन्हें अपने होंठों के बीच लिया और उन्हें इतनी शिद्दत से चूसना शुरू किया कि मेरी आँखें बंद होने लगीं। वो उन्हें अपने दांतों से हल्के से दबा रही थीं और फिर अपनी जीभ से उनके चारों ओर गोल गोल घूम रही थीं। उनका ये तरीका किसी अनुभवी स्त्री जैसा था, जो जानती थी कि पुरुष के शरीर का कौन सा हिस्सा उसे पागल कर सकता है।मम्मी की वह प्यासी जीभ अब मेरे पेट के निचले हिस्से की ओर एक शिकारी की तरह रेंग रही थी। उन्होंने अपनी गर्दन झुकाई और उनकी गर्म साँसें मेरी नाभि (Nabi) पर महसूस होने लगीं। उन्होंने अपनी जीभ को मेरी नाभि के चारों ओर एक घेरे की तरह घुमाना शुरू किया, जैसे वो किसी कीमती रत्न को चख रही हों। फिर, उन्होंने अपनी जीभ को उस गहरे गड्ढे में पूरी गहराई से उतार दिया। उस गीले और गर्म स्पर्श ने मेरे पेट की मांसपेशियों में एक ज़ोरदार ऐंठन पैदा कर दी।
6*"आह्ह्ह... मम्मी... उफ़्फ़... वहाँ नहीं... उफ़्फ़!"* मैं बिस्तर पर तड़पने लगा, मेरी कमर अपने आप ऊपर उठने लगी।

लेकिन वो रुकी नहीं। नाभि से आगे बढ़ते हुए उनकी जीभ मेरे पेट के निचले हिस्से के बालों वाले हिस्से को सहलाते हुए धीरे धीरे नीचे की ओर बढ़ने लगी। उन्होंने मेरी जांघों के बीच के उस बेहद संवेदनशील हिस्से को अपनी जीभ से चाटना शुरू किया। उनकी जीभ का हर प्रहार मेरे नर्वस सिस्टम में बिजली की लहरें छोड़ रहा था। उन्होंने मेरी जांघों के अंदरूनी हिस्से को अपने होंठों से चूमना शुरू किया, उनकी गर्म साँसें और गीली जीभ मुझे पागल कर रही थीं।मैं पूरी तरह से बेबस होकर तड़प रहा था। मेरी सिसकियाँ अब चीखों में बदलने लगी थीं। "मम्मी... प्लीज़... मुझे मार डालोगी आप... उफ़्फ़!" मैं दर्द और सुख के उस मिश्रण से तड़प रहा था जो सिर्फ वो ही दे सकती थीं।

तभी उन्होंने एक और ज़ोरदार झटका दिया। उन्होंने मेरे दोनों अंडकोषों (Testicles) को अपने होंठों के बीच लिया और उन्हें बहुत ही कोमलता और गहराई से चूसना शुरू कर दिया। वो अहसास इतना तीव्र था कि मेरा पूरा शरीर धनुष की तरह खिंच गया। मेरी आँखों के सामने अँधेरा छाने लगा और मैं बस उनके स्पर्श के आगे हार मान चुका था। उन्होंने मेरे अंडकोषों को अपने मुँह में भरकर ऐसे चूस रही थीं जैसे वो दुनिया का सबसे मीठा फल हो।

इसके बाद, उन्होंने अपने होंठों को मेरे लिंग के ठीक नीचे तक लाया। उन्होंने मेरे लिंग को छूना शुरू नहीं किया, बल्कि उसके चारों ओर, उसके आधार (Base) और उसके आसपास के हिस्से को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया। वो मेरे लिंग के ठीक बगल में अपनी जीभ फेर रही थीं, जिससे मेरा लिंग हवा में और भी ज़्यादा छटपटा रहा था और सख्त हो रहा था। मैं तड़प रहा था कि वो बस उस मुख्य हिस्से को छू लें, लेकिन वो मुझे तड़पाने का खेल खेल रही थीं।
तभी उन्होंने अचानक अपनी जीभ को थोड़ा ऊपर उठाया और मेरे लिंग की टिप (Tip) पर अपनी जीभ का एक हल्का सा, बहुत ही कोमल स्पर्श दिया। वो स्पर्श इतना हल्का था कि लगा जैसे कोई पंख छू गया हो, लेकिन उस एक सेकंड के स्पर्श ने मेरे पूरे शरीर में एक विस्फोट कर दिया। मेरा लिंग टिप से लेकर जड़ तक थरथरा उठा। मैं तड़प उठा, "मम्मी... उफ़्फ़... प्लीज... अब और नहीं सह सकता मैं!" मेरी आवाज़ अब एक बेबस पुकार बन चुकी थी।
लेकिन वो मुझे और तड़पाना चाहती थीं। उन्होंने अपने होंठों से लिंग को छूने के बजाय, अपनी उंगलियों से धीरे से मेरे लिंग के ऊपर शहद (Honey) की एक गाढ़ी और चिपचिपी धार गिराना शुरू किया। वो सुनहरा, मीठा और ठंडा शहद मेरे गर्म और तने हुए लिंग के ऊपर धीरे धीरे बहने लगा। शहद की वो मिठास और उसकी चिपचिपाहट मेरे लिंग की नसों पर महसूस हो रही थी।जैसे ही शहद मेरी टिप तक पहुँचा, उनकी आँखों में एक जंगली चमक आ गई। उन्होंने अपनी जीभ को पूरी तरह फैलाया और उस शहद से सने हुए मेरे लिंग को चाटना शुरू किया। शहद की मिठास और उनकी जीभ का गर्म, गीलापन मिलकर एक ऐसा नशा पैदा कर रहे थे कि मुझे लग रहा था मैं होश खो दूँगा। वो शहद को चाटते हुए अपनी जीभ को लिंग के ऊपर और नीचे बहुत ही तेज़ी से फेर रही थीं।

शहद की वजह से उनकी जीभ और मेरे लिंग के बीच एक अजीब सी घर्षण (Friction) पैदा हो रही थी एक चिपचिपा और बेहद कामुक अहसास। वो शहद को चाटते हुए बीच बीच में अपनी जीभ से लिंग के ऊपरी हिस्से (Glans) को गहराई से सहला रही थीं। "मम्मी... आह्ह्ह... ये क्या कर रही हो आप... मैं फट जाऊँगा... उफ़्फ़!" मैं बिस्तर की चादरों को अपने हाथों से ज़ोर से भींच रहा था, मेरी कमर बार बार ऊपर की ओर उठ रही थी जैसे मैं उनके मुँह में खुद को झोंक देना चाहता हूँ।

उन्होंने अब अपने होंठों को लिंग के चारों ओर कसकर लपेट लिया और शहद के साथ मिलकर एक ज़ोरदार 'सक्शन' (Suction) बनाना शुरू किया। शहद की मिठास और उनकी जीभ की वो रेंगती हुई हरकत मुझे पागल कर रही थी। वो शहद को चाट रही थीं और साथ ही मेरे लिंग को अपनी जीभ के दबाव से दबा रही थीं। मेरा पूरा शरीर पसीने से तर बतर हो चुका था और मैं बस उस एक पल का इंतज़ार कर रहा था जब वो शहद और उनकी जीभ का ये खेल मेरे चरम सुख (Orgasm) तक ले जाएगा।
शहद और उनकी जीभ का वो तालमेल मेरे दिमाग के सारे तार झकझोर रहा था। शहद की चिपचिपाहट और उनकी जीभ की गर्मी मिलकर एक ऐसा नशा पैदा कर रही थी कि मुझे अपनी सुध बुध नहीं रही थी।

जैसे जैसे वो शहद को चाटती रहीं, उनकी जीभ की गति और तेज़ होती गई। अब वो सिर्फ चाट नहीं रही थीं, बल्कि अपनी जीभ को शहद के साथ मेरे लिंग के ऊपर एक लय में ऊपर नीचे रगड़ रही थीं। शहद की वजह से उनकी जीभ और मेरे लिंग के बीच एक बहुत ही गहरा और 'Slick' (फिसलन भरा) घर्षण पैदा हो रहा था। हर बार जब वो अपनी जीभ को लिंग की टिप से लेकर जड़ तक खींचतीं, तो शहद की मिठास और उनके मुँह की गर्माहट मेरे पूरे अस्तित्व को हिला देती
"मम्मी... आह्ह्ह... बस... अब और नहीं... मैं... मैं निकलने वाला हूँ!" मैं चीख उठा, मेरी कमर बेतहाशा ऊपर नीचे होने लगी। मेरा लिंग अब इतना सख्त हो चुका था कि मुझे लग रहा था वो फट जाएगा।

तभी उन्होंने एक ऐसा कदम उठाया जिसने मुझे पूरी तरह से सुन्न कर दिया। उन्होंने अपने दोनों हाथों से मेरे अंडकोषों को ऊपर की ओर उठाया और अपने मुँह को मेरे लिंग के चारों ओर पूरी तरह से कस लिया। उन्होंने एक बहुत ही ज़ोरदार और गहरा 'सक्शन' (Suction) लेना शुरू किया। शहद की वजह से उनकी जीभ मेरे लिंग के हर एक कोने, हर एक नस को पूरी तरह से ढंक रही थी। वो शहद को ऐसे चाट रही थीं जैसे वो दुनिया का सबसे स्वादिष्ट अमृत हो।
उनकी जीभ की वो रेंगती हुई हरकत और मुँह का वो गहरा खिंचाव... आह्ह्ह! मुझे महसूस हुआ कि मेरा नियंत्रण पूरी तरह से खत्म हो गया है। मेरी आँखों के सामने सफ़ेद रोशनी की लकीरें दौड़ने लगीं। "मम्मी... उफ़्फ़... मम्मी... आआआआह्ह्ह्ह!"
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मेरी पूरी देह में एक ज़ोरदार बिजली सी दौड़ गई। मेरा शरीर अकड़ गया और मैं बिस्तर की चादरों को अपने नाखूनों से फाड़ने की हद तक ज़ोर से भींच लिया। मेरा सारा वीर्य (Semen) उस शहद और उनकी जीभ के बीच एक प्रचंड वेग के साथ फूट पड़ा। मैं बार बार और ज़ोर से झटके खा रहा था। वो शहद के साथ मिलकर मेरे निकलने वाले वीर्य को अपने मुँह में भर रही थीं, और हर झटके के साथ उनकी जीभ की गति और भी उग्र होती जा रही थी।
मैं पसीने से लथपथ, हाँफते हुए और काँपते हुए बिस्तर पर गिर पड़ा। मेरी आँखों से आँसू निकल रहे थे, लेकिन वो दर्द के नहीं, बल्कि उस बेइंतहा सुख के थे जिसने मेरे दिमाग की नसों को सुन्न कर दिया था। मेरा शरीर अभी भी झटकों से काँप रहा था, जैसे कोई बिजली का झटका लगा हो।

मम्मी ने धीरे से अपना मुँह उनके लिंग से हटाया। उनके होंठों के कोनों पर अभी भी मेरा गाढ़ा और सफेद वीर्य (Semen) लगा हुआ था, जो शहद की मिठास के साथ मिलकर एक बेहद कामुक और 'Raw' नज़ारा पेश कर रहा था। उन्होंने अपनी जीभ निकाली और बड़ी ही बेशर्मी के साथ अपने होंठों पर लगे उस वीर्य को चाट लिया। उनकी आँखों में एक अजीब सी तृप्ति थी।कुछ ही देर बाद उनकी आँखों में तृप्ति की जगह एक प्यास ने ले ली ,ये एक ऐसी प्यास थी जिसको मिटाना शायद किसी आम इंसान के बस की बात नहीं थी
मम्मी ने मेरी आंखों में देखते हुए एक गहरी, मदहोश कर देने वाली मुस्कान दी।"अभी तो शुरुआत है मेरे बच्चे..." उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा। उनकी आवाज़ में एक ऐसा भारीपन था जो सीधे मेरे शरीर के भीतर तक उतर रहा था। "अभी तो तुमने सिर्फ थोड़ा सा स्वाद चखा है, अभी तो असली दावत बाकी है।"
इतना सुनते ही मेरी रूह कांप गई,ये सोचकर कि ,***क्या मैं मम्मी के इस रूप को अपने वश में कर भी पाऊंगा?क्या उनकी इस दहकती आग को ठंडा कर पाऊंगा?***मेरे चेहरे पर घबराहट के चिन्ह साफ दिखाई दे रहे थे क्यों कि मैं मम्मी का इतना उग्गर रूप पहली बार देख रहा था।में नहीं जनता था के एक औरत की चूत की गर्मी का इतना भयानक रूप भी हो सकता है।मेरे मन में ऐसे ऐसे ख्याल आ रहे थे ,जैसे किसी प्यासी चुदक्कड राक्षसनी के पंजे में फंस गया हूं।
*मम्मी ने मेरी आँखों में झाँका और मेरी घबराहट को तुरंत भांप लिया। उन्होंने बड़ी ही कोमलता से मेरे चेहरे को अपने दोनों हाथों के बीच भर लिया और अपने अंगूठे से मेरे गालों को सहलाने लगीं। उन्होंने एक बहुत ही मीठी और ममता भरी आवाज़ में फुसफुसाते हुए कहा,
"अरे मेरे पागल बच्चे, तू डर क्यों रहा है? डर मत... देख मेरी तरफ। मैं तेरी ही तो हूँ। डर मत , तू बस अपना सब कुछ मुझ पर छोड़ दे, जैसे एक छोटा बच्चा अपनी माँ की गोद में निश्चिंत होकर सो जाता है। शायद,तू ये सोच कर डर रहा है,के कैसे सारी रात बिना एक भी पल सोए अपनी कामुक मम्मी को संतुष्ट कर सकेगा,तो सुन मेरा बेटा,आज जो तूने जो दोपहर को दूध पिय था उसके अंदर अथाह मर्दाना ताकत का ख़ज़ाना था,और जो चूर्ण दिया था तुझे, वो इतना चमत्कारी है के न तुझे थकने देगा ,न नींद आयेगी। अब तू सोचेगा के मम्मी कैसे बर्दाश्त कर पाएगी तेरी इस ताकत को तो याद कर वो चूर्ण मैने भी खाया है जिसके कारण मैं तुझे और तेरे किसी भी जंगलीपन को आराम से झेल लूंगी चाहे तू मुझे जितना भी रौंद डाल।"
**मम्मी ने मेरी आँखों में गहराई से झाँका और मेरी घबराहट को देखते ही मेरे माथे को चूम लिया। उन्होंने अपनी आवाज़ को और भी धीमा और प्यार भरा बनाते हुए कहा, "अरे मेरा बच्चा इतना क्यों काँप रहा है? देख मेरी तरफ... मैं तेरी मम्मी हूँ, कोई चुड़ैल नहीं जो मुझे देखकर डर रहा है, मै तुझे खा नहीं जाऊँगी! ? अपनी हिम्मत जुटा, मेरे लाल। देख, तू कितना ताकतवर है, बस थोड़ा सा हौसला रख।"**
**उन्होंने मेरे कान के पास आकर बड़े ही लाड़ से फुसफुसाया, "देखना, तू आज सब कुछ कर पाएगा। बिना एक भी पल रुके, तू मुझे पूरी तरह अपना बना लेगा। आज की रात ऐसी होगी कि तू इसे कभी भूल नहीं पाएगा। बस अपनी इच्छाशक्ति को जगा और मुझ पर भरोसा कर। आज रात तू मेरा बच्चा भी है और मेरा मालिक भी। बस खुद को मुझमें समर्पित कर दे।"**

**उनकी इन बातों ने मेरे भीतर एक अजीब सा जोश भर दिया। जो डर मुझे जकड़ रहा था, वह अब धीरे धीरे एक उत्तेजना और आत्मविश्वास में बदलने लगा था। उनकी ममता और उनके शब्दों के जादू ने मेरी घबराहट को पूरी तरह खत्म कर दिया।**

उन्होंने अपना एक हाथ मेरे पसीने से भीगे हुए सीने पर रखा और दूसरे हाथ से धीरे धीरे मेरे पेट के निचले हिस्से की ओर बढ़ने लगीं...मेरा लिंग जो मम्मी का उग्गर रूप देख के ढीला पड़ चुका था, धीरे धीरे फिर से पत्थर की तरह सख्त होने लगा था। वह जो अभी अभी पूरी तरह खाली हो चुका था, वह अब फिर से भारी और गर्म महसूस हो रहा था।

मम्मी ने धीरे से मेरे ऊपर अपना पूरा भार डाल दिया। उनकी रेशमी और गर्म देह जब मेरे शरीर से टकराई, तो मुझे ऐसा लगा जैसे मैं किसी जलते हुए अंगारे पर गिर गया हूँ। उन्होंने मेरे कान के पास झुककर अपनी गर्म साँसें छोड़ीं और कहा, "आज रात मैं तुम्हें चैन से सोने नहीं दूँगी। आज रात तुम थककर चूर हो जाओगे, लेकिन मैं तुम्हें तब तक नहीं छोड़ूँगी जब तक मेरा मन पूरी तरह भर नहीं जाता।
"उन्होंने अपनी उंगलियों से मेरे शरीर के संवेदनशील हिस्सों को सहलाना शुरू किया। उनके स्पर्श में एक ऐसी बेबाकी और वासना थी जो मुझे पूरी तरह से अपने वश में कर रही थी। मुझे महसूस हो रहा था कि वह आज रात थ्रिसम की उस कमी को मेरे साथ मिलकर इस तरह पूरा करेंगी कि मेरी सारी सुध बुध खो जाएगी।उनकी उंगलियाँ मेरे सीने से होते हुए धीरे धीरे नीचे की ओर सरकने लगीं। उनके स्पर्श की गर्मी मेरे रगों में दौड़ते खून को उबाल रही थी। जैसे ही उनकी उंगलियाँ मेरे पेट के निचले हिस्से के पास पहुँचीं, मेरा सख्त होता हुआ अंग उनके स्पर्श की तड़प से छटपटाने लगा। चूर्ण का असर और मम्मी की बेबाक छुअन ने मिलकर मेरे दिमाग के सारे नियंत्रण छीन लिए थे।

मम्मी ने अपनी कमर को धीरे से मेरे कूल्हों के ऊपर टिका दिया। उनकी रेशमी जाँघें मेरे पैरों के बीच आकर रगड़ने लगीं। उनकी देह की खुशबू और उनकी गर्म साँसें मेरे पूरे अस्तित्व को मदहोश कर रही थीं। उन्होंने अचानक अपने हाथ नीचे की ओर बढ़ाए और मेरे उस अंग को अपनी कोमल लेकिन दृढ़ पकड़ में ले लिया। "आह्ह्ह... मम्मी..." मेरे मुँह से एक दबी हुई कराह निकली। मेरा शरीर धनुष की तरह तन गया।

मम्मी ने शरारत भरी मुस्कान के साथ मेरी आँखों में देखा और फुसफुसायीं, "देख तो सही... अभी तो बस शुरुआत है और मेरा बच्चा इतना उत्तेजित हो गया है। देख इसकी गर्मी, जैसे लावा बह रहा हो।" उन्होंने अपनी पकड़ को थोड़ा और गहरा किया और धीरे धीरे ऊपर नीचे सहलाना शुरू किया। उनकी उंगलियों की लय और उनके शरीर का दबाव मुझे पागल कर रहा था।तभी उन्होंने अपनी कमर को थोड़ा ऊपर उठाया और धीरे से अपने शरीर का सबसे संवेदनशील हिस्सा मेरे सख्त अंग के ऊपर टिका दिया। उनके शरीर की नमी और गर्माहट का अहसास होते ही मुझे लगा जैसे मैं स्वर्ग के द्वार पर खड़ा हूँ। उनके शरीर की रगड़ से जो बिजली मेरे शरीर में दौड़ रही थी, उसने मुझे सुध बुध खोने पर मजबूर कर दिया था।
उन्होंने मेरे कान को अपने होंठों से लगभग छू लिया और बहुत ही गहरी, भारी आवाज़ में कहा, "अब देख, मैं कैसे तुझे अपनी प्यास बुझाना सिखाती हूँ। आज तू सिर्फ मेरा है, और मैं तेरी।"

उन्होंने अपने कूल्हों को धीरे से नीचे की ओर दबाया, मुझे महसूस हुआ कि वह अब और इंतज़ार नहीं कर सकतीं। उनकी वासना अब चरम पर थी और मेरा शरीर उस सुख के को पाने
लिए पूरी तरह तैयार था जिसे पाने के लिए मैं तरस रहा था।
जैसे ही उन्होंने अपने कूल्हों को पूरी तरह से नीचे की ओर दबाया, एक ऐसा अहसास हुआ जिसे शब्दों में बयां करना नामुमकिन था। मेरा सख्त अंग उनकी उस असीमित गर्मी और गीलेपन के सागर में पूरी तरह समा गया। वह पल इतना गहरा और तीव्र था कि मेरे शरीर में एक ज़ोरदार बिजली का झटका सा लगा और मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं।
**"आह्ह्ह्ह्ह.... मम्मी! उफ्फ... आआआह्ह्ह!"** मेरे मुँह से एक ऐसी चीख निकली जो दर्द और बेइंतहा सुख के बीच झूल रही थी। मेरा पूरा शरीर बिस्तर पर तड़पने लगा, लेकिन मम्मी ने अपनी पकड़ ढीली नहीं की। उन्होंने अपनी कमर को और भी मजबूती से मेरे शरीर पर टिका दिया, जैसे वह मुझे अपने भीतर पूरी तरह से सोख लेना चाहती हों।
मम्मी का चेहरा वासना के लाल रंग से भर गया था। उनकी साँसें अब किसी उफनते हुए समंदर की तरह तेज़ और भारी थीं। उन्होंने अपने दोनों हाथ मेरे सिर के पास बिस्तर पर टिका दिए ताकि वह अपने पूरे भार के साथ मुझ पर नियंत्रण रख सकें। उन्होंने अपनी कमर को एक लय में ऊपर नीचे करना शुरू किया एक ऐसी लय जो धीमी थी लेकिन बेहद गहरी थी। हर बार जब वह नीचे आतीं, तो मुझे महसूस होता कि वह मेरे अस्तित्व के सबसे गहरे कोने तक पहुँच रही हैं

**"हम्ममम... रवि... तू कितना गर्म है... कितना सख्त है मेरा बच्चा..."** मम्मी की आवाज़ अब पूरी तरह से बदल चुकी थी। वह एक माँ की ममता से कोसों दूर, एक ऐसी भूखी स्त्री की तरह लग रही थीं जो बरसों की प्यास बुझाने के लिए तड़प रही हो। उनकी कमर की वह 'रगड़' और उनके शरीर के टकराने की 'चप चप' की आवाज़ें कमरे के सन्नाटे को चीर रही थीं।
चूर्ण के असर ने मेरे दिमाग के सारे तर्क और होश को सुन्न कर दिया था। मुझे बस इतना महसूस हो रहा था कि मम्मी का शरीर एक जलता हुआ अंगारा है और मैं उसमें पिघल रहा हूँ। जैसे जैसे उनकी गति तेज़ होती गई, मेरा नियंत्रण पूरी तरह से खत्म होता गया। मैं बस बेबस होकर उनके कूल्हों की उस लयबद्ध हरकत के वश में था।
मम्मी ने अब अपनी गति को और भी हिंसक और बेबाक कर दिया था। वह अब सिर्फ ऊपर नीचे नहीं कर रही थीं, बल्कि अपने कूल्हों को गोल गोल घुमाते हुए (grinding) मेरे अंग को अपने भीतर पूरी तरह से जकड़ रही थीं। उनकी जाँघों की वह रेशमी रगड़ और उनके शरीर का वह भारीपन मेरी पीठ पर एक बोझ नहीं, बल्कि एक नशा बन चुका था।
**"मम्मी... मैं... मैं अब और नहीं सह पा रहा...
जैसे ही मैंने वह शब्द कहे, मम्मी की आँखों में एक जंगली चमक आ गई। उन्होंने मेरी बात को चुनौती की तरह लिया। उन्होंने अपनी गति को और भी तेज़ और हिंसक बना दिया। अब वह सिर्फ ऊपर नीचे नहीं कर रही थीं, बल्कि वह पूरी ताकत से मेरे शरीर पर वार कर रही थीं। उनके कूल्हों के टकराने की आवाज़ अब पूरे कमरे में गूँज रही थी **'चप... चप... चप...'**।
**"अच्छा? अब तू और ज्यादा चाहता है?"** मम्मी ने हाँफते हुए कहा, उनके चेहरे पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं। **"तो फिर देख, आज मैं तुझे इस हद तक ले जाऊँगी कि तू अपनी सुध बुध खोकर बस मेरा नाम पुकारेगा!"**
उन्होंने अपनी कमर को एक झटके के साथ और भी गहराई से नीचे दबाया। मुझे महसूस हुआ कि उनका शरीर अब पूरी तरह से गीला और फिसलन भरा हो चुका है। उनकी वह नमी मेरे अंग को इतनी मजबूती से जकड़ रही थी कि मुझे लगा जैसे मैं किसी गर्म और मखमली भंवर में फँस गया हूँ। चूर्ण के असर से मेरा हर नर्व एंडिंग (nerve ending) आग की तरह जल रहा था।मम्मी ने अब अपने हाथों से मेरे दोनों हाथों को पकड़कर बिस्तर पर ज़ोर से दबा दिया। वह अब पूरी तरह से मुझ पर हावी थीं। उनकी गति अब इतनी तेज़ हो गई थी कि मेरा सिर पीछे की ओर झुक गया और मैं बस बेकाबू होकर कराह रहा था। *****"आह्ह्ह... मम्मी... उफ्फ... बहुत तेज़... आह्ह्ह!"** मेरी आवाज़ अब एक जानवर की तरह निकल रही थी। मेरा शरीर धनुष की तरह तन गया था और मेरी मांसपेशियाँ ऐंठ रही थीं।

मम्मी ने अपनी कमर को गोल गोल घुमाना (grinding) शुरू कर दिया। उनके कूल्हों का वह घुमाव मेरे अंग के सबसे संवेदनशील हिस्से को बार बार रगड़ रहा था। वह रगड़ इतनी तीव्र थी कि मुझे लगा मेरा शरीर फटने वाला है। उनकी जाँघों का दबाव और उनके शरीर की वह भारी गर्मी मुझे पागल कर रही थी।****"हाँ रवि! और ज़ोर से... और गहराई से महसूस कर मुझे!"** मम्मी चिल्लाईं। उनकी आवाज़ में अब एक अजीब सी तड़प और वासना थी। उन्होंने अपनी कमर को एक लय में झटके देना शुरू किया, जिससे मेरा पूरा शरीर बिस्तर पर उछलने लगा।

तभी, मम्मी ने अचानक अपनी गति को एकदम धीमा कर दिया और बहुत ही गहराई में रुक गईं। वह मेरे ऊपर झुक गईं, उनके गीले बाल मेरे चेहरे पर गिर रहे थे और उनकी गर्म साँसें
मेरे होंठों और कभी कभी मेरी गर्दन पर किसी आग की लपट की तरह महसूस हो रही थीं। मम्मी ने अपने होंठ मेरे कान के बिल्कुल करीब सटा दिए। उन्होंने अपनी जीभ से मेरे कान के नीचे के हिस्से को चाटा और फुसफुसायीं, **"अभी तो मैंने सिर्फ तुझे जगाया है रवि... असली खेल तो अब शुरू होगा। अभी तो मैंने तुझे बस चखना शुरू किया है, अभी तो तुझे पूरी तरह से मुझमें पिघलना बाकी है।"**
उनकी यह बात सुनते ही मेरे शरीर में एक बिजली सी दौड़ गई। चूर्ण के असर ने मेरे दिमाग को पूरी तरह से सुन्न कर दिया था और मम्मी की ये बेबाक बातें मेरी वासना को सातवें आसमान पर ले जा रही थीं।
मम्मी ने अचानक अपनी पकड़ और भी मज़बूत कर ली। उन्होंने अपनी कमर को एक झटके के साथ ऊपर उठाया और फिर पूरी ताकत के साथ नीचे की ओर गिराया। इस बार उनका वार इतना गहरा और इतना तेज़ था कि मेरी चीख निकल गई। **"आह्ह्ह्ह्ह्ह... मम्मी! उफ्फ... आप मुझे मार डालेंगी... आआआह्ह्ह!"**
**"मार डालूँगी? नहीं मेरे बच्चे... मैं तुझे जी भर के जीना सिखाऊँगी,"** मम्मी ने एक हिंसक मुस्कान के साथ कहा। उन्होंने अब अपनी गति को पूरी तरह से बेकाबू कर दिया था। अब वह किसी मशीन की तरह बिना रुके, बिना थके, अपने कूल्हों को पूरी ताकत से मेरे शरीर पर पटक रही थीं। कमरे में उनके शरीर के टकराने की आवाज़ **'चप... चप... चप...'** अब एक पागलपन भरी लय में बदल चुकी थी।
मम्मी का शरीर अब पसीने से पूरी तरह तर बतर था। उनकी त्वचा की वह फिसलन और उनके शरीर से निकलने वाली वह तीखी, कामुक गंध मुझे मदहोश कर रही थी। उन्होंने अपनी कमर को इतनी तेज़ी से घुमाना (grinding) शुरू किया कि मुझे महसूस हुआ कि मेरा अंग उनके भीतर की हर एक परत को छू रहा है। वह रगड़ इतनी तीव्र थी कि मुझे लगा जैसे मेरे शरीर के अंदर लावा बह रहा हो।
**"मम्मी... मैं... मैं बस अब... निकलने वाला हूँ... आह्ह्ह! मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रहा!"** मैंने उनके कंधों को कसकर पकड़ लिया, मेरे नाखून उनकी त्वचा में धँस रहे थे। मेरा पूरा शरीर ऐंठ रहा था और मेरा अंग उनके भीतर फटने के लिए बेकरार था।

मम्मी ने मेरी आँखों में आँखें डालकर देखा। उनकी आँखें पूरी तरह से लाल और वासना से भरी हुई थीं। उन्होंने अपनी गति को और भी हिंसक बना दिया और चिल्लाकर कहा, **"नहीं रवि! अभी नहीं! तू अभी नहीं निकलेगा! जब तक मैं न कहूँ, तू रुक नहीं सकता। तुझे अपना सारा रस जब मैं चाहूं तब मुझमें छोड़ना होगा।मम्मी के उन उत्तेजक शब्दों ने मेरे के दिमाग में एक ऐसा तूफान खड़ा कर दिया था कि समझ ही नहीं आ रहा था कि वह क्या करुँ। मुझे बस इतना पता था कि एक ऐसी आग में जल रहा हूं जिससे बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है। मैं न तो रुक सकता था और न ही वह अपनी तड़प को शांत कर सकता था।
मम्मी ने मेरे चेहरे को अपने दोनों हाथों से कसकर पकड़ लिया। उनकी उंगलियां मेरे गालों को इतने प्यार और जुनून से दबा रही थीं कि मेरे होंठ थोड़े खुले हुए और सांसें तेज हो गई थीं। उनकी आँखें मेरी आँखों में गहराई तक धँस रही थीं उन आँखों में एक ऐसी **जंगली प्यास** थी जो मेरी आत्मा को अपनी वासना से भिगो लेना चाहती थी।
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**"देख मुझे रवि... मेरी आँखों में देख!"** मम्मी ने एक मदहोश कर देने वाली पुकार के साथ कहा। **"देख , तू मेरे  साथ क्या कर रहा है, ... तू बस ऐसे ही मुझमें धंसाता चला जा। रुकना मत रवि, मेरी इस प्यास को बुझा दे। जब तक मैं तृप्त न हो जाऊं तुझे रुकना नहीं है।मै तुझे अपनी गहराई में समा लेना चाहती हूँ।***मम्मी ने अपनी कमर की गति को एक नए और उत्तेजक स्तर पर पहुँचा दिया। अब वह केवल ऊपर नीचे नहीं हो रही थीं, बल्कि वह मेरे शरीर के साथ एक लय में ऐसे झूम रही थीं जैसे कोई प्यासी लहर समंदर से टकराती है। उनके शरीर का हर हिस्सा मेरे शरीर से इतनी तीव्रता से टकरा रहा था कि **'चप... चप... चप... धप... धप...'** की आवाज़ें अब पूरे कमरे में एक कामुक संगीत की तरह गूँज रही थीं। पसीने की बूंदें उनके शरीर से छिटककर मेरे चेहरे पर गिर रही थीं, जिससे उनकी त्वचा और भी चिकनी और फिसलन भरी महसूस हो रही थी।
इरा शरीर अब नियंत्रण से बाहर हो चुका था। चूर्ण के असर और मम्मी के इस बेकाबू जुनून ने उसके नर्वस सिस्टम को पूरी तरह से उत्तेजित कर दिया था।मेरा लिंग   मम्मी के भीतर एक ऐसी आग की तरह धँस रहा था जो बुझने का नाम ही नहीं ले रही थी। चूर्ण के असर ने उसकी नसों में बिजली की तरह दौड़ना शुरू कर दिया था। हर एक झटके के साथ मुझे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे मैं अपनी आत्मा को मम्मी के शरीर के भीतर छोड़ रहा हूं।
**"आह्ह्ह्ह... मम्मी... मैं... मैं बस अब और नहीं सह सकता... आह्ह्ह्ह! प्लीज... मुझे निकलने दीजिए... मैं पागल हो जाऊँगा!"** रवि की आवाज़ अब एक बेबस और मदहोश कर देने वाली पुकार बन चुकी थी। उसकी आँखों में आँसू थे, लेकिन वे दर्द के नहीं, बल्कि उस चरम सुख (Pleasure) के थे जो अब उसके बर्दाश्त से बाहर हो रहा था।
मम्मी ने मेरे कानों के पास झुककर अपनी गर्म और भीगी हुई साँसें छोड़ीं। उनकी आँखों में अब केवल **'Raw Desire'** (कच्ची वासना) थी। उन्होंने मेरे होंठों को अपने होंठों से दबा दिया और एक बेहद कामुक फुसफुसाहट के साथ कहा:
**"नहीं रवि... अभी नहीं। मुझे अभी और चाहिए। तुझे अपनी मम्मी5 की इस  तड़प को मिटाना ही होगा। तू बस एक जानवर बन जा, और अपनी सारी मर्दानगी, अपना सारा रस... सब कुछ मुझमें ही समा दे। मैं खाली हूँ रवि... मुझे अपनी इस गर्मी से पूरी तरह भर दे!"**
मम्मी की कमर की गति अब और भी तेज़ और बेकाबू हो गई थी। वह मेरे ऊपर ऐसे झूम रही थीं जैसे कोई तूफ़ान हो। उनके शरीर से निकलने वाला पसीना और उनके बीच का घर्षण (Friction) एक ऐसी फिसलन पैदा कर रहा था जिससे उनकी त्वचा आपस में टकराकर **'स्लर्प... स्लर्प...'** की गीली और उत्तेजक आवाज़ें निकाल रही थी।
मेरा शरीर अब पूरी तरह से मम्मी के वश में था। मेरी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा था और उसे सिर्फ मम्मी की खुशबू और उनकी गर्मी महसूस हो रही थी। मम्मी ने अपने दोनों हाथ रमेरे सीने पर जमा दिए और अपनी कमर को ज़ोर ज़ोर से मेरे अंगों पर रगड़ना शुरू कर दिया।
**"हाँ... ऐसे ही रवि... और गहराई तक! मुझे महसूस करा कि तू कितना प्यासा है! मुझे अपना सारा ज़हर, अपना सारा रस... सब मुझमें ही छोड़ दे!"** मम्मी की आवाज़ अब एक चीख में बदल रही थी क्योंकि वह खुद भी अपने चरम (Climax) के बेहद करीब थीं।
कमरे का तापमान जैसे बढ़ गया था।  हर एक झटका अब मम्मी के शरीर को और भी गहराई तक चीरता हुआ महसूस हो रहा था। मैं अब बस उस एक पल का इंतज़ार कर रहा था जहाँ मै अपनी सारी ऊर्जा, अपना सारा अस्तित्व और अपना सारा रस मम्मी के भीतर एक धमाके की तरह छोड़ सकूँ।
**"आह्ह्ह्ह... मम्मी... अब और नहीं... मैं... मैं आने वाला हूँ! मैं आ रहा हूँ! आह्ह्ह्ह्ह!"** मेरी आवाज़ एक ऐसी चीख में बदल गई जो सीधे रूह को कँपा देने वाली थी। मेरा पूरा शरीर धनुष की तरह तन गया था, नसें उभर आई थीं और आँखों के सामने सफ़ेद रोशनी का एक सैलाब उमड़ आया था।

मम्मी ने जैसे ही मेरी इस बेकाबू तड़प को महसूस किया, उन्होंने अपनी पकड़ और भी मज़बूत कर ली। उन्होंने मेरे शरीर को अपने और भी ज़ोर से जकड़ लिया और अपनी कमर को एक आखिरी, बेहद तीव्र और गहरी गति के साथ मेरे अंगों पर रगड़ा। उनकी अपनी आँखें भी बंद हो चुकी थीं और उनके मुँह से एक लंबी, मदहोश कर देने वाली आह निकल रही थी।
**"हाँ रवि! यहीं... यहीं छोड़ दे सब कुछ! मुझमें समा जा! आह्ह्ह्ह्ह!"** मम्मी की यह पुकार मेरे लिए आखिरी ट्रिगर बन गई।
एक जोरदार झटके के साथ, मेरा शरीर काँप उठा। मेरे भीतर का सारा दबाव, सारी गर्मी और सारा रस एक प्रचंड वेग के साथ मम्मी के भीतर फूट पड़ा। **'Splurt... splurt... splurt...'** की आवाज़ें उस सन्नाटे में गूँज उठीं। मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मेरे शरीर से  जान निकलकर मम्मी के भीतर समा रही हो। मैं अपनी पूरी ताकत के साथ मम्मी के अंदर धँस गया था, जैसे  उनके अस्तित्व का हिस्सा बन गया होऊं।
मम्मी का शरीर भी उस तीव्र रस के प्रवाह से थरथरा उठा। उनके भीतर एक ऐसा खिंचाव महसूस हुआ जिसने उन्हें भी चरम सुख के उस शिखर पर पहुँचा दिया जहाँ से वापसी मुमकिन नहीं थी। उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं और उनके मुँह से एक दबी हुई लेकिन बेहद गहरी आह निकली। **"आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह!"**

दोनों के शरीर पसीने से लथपथ थे और एक दूसरे से इस तरह चिपके हुए थे जैसे वे दो अलग इंसान नहीं, बल्कि एक ही जान हों। कमरे में केवल उनकी तेज़ तेज़ चलती हुई साँसों की आवाज़ गूँज रही थी। मेरा सिर मम्मी के कंधे पर गिर गया था, मेरी आँखों से अभी भी खुशी और संतुष्टि के आँसू बह रहे थे। मम्मी ने मेरे गीले बालों को सहलाया और उसे अपनी बाँहों में और भी कसकर भर लिया। वासना का वह भयंकर तूफ़ान थम चुका था, लेकिन कमरे की हवा में अभी भी उस कामुकता की भारी गंध और उमस घुली हुई थी। मेरा शरीर पूरी तरह ढीला पड़ चुका था, जैसे उसकी सारी ऊर्जा और प्राण उसी एक विस्फोट में निकल गए हों। मैं  मम्मी के सीने पर अपनी भारी साँसें छोड़ रहा था, और मेरी हर साँस मम्मी की गर्म और पसीने से भीगी त्वचा को छूकर निकल रही थी।

मम्मी का शरीर अभी भी हल्के हल्के काँप रहा था। उनके भीतर मेरे उस गर्म और गाढ़े रस का अहसास उन्हें एक अजीब सी तृप्ति दे रहा था। उन्होंने मेरे सिर को अपने सीने से सटा लिया और मेरे माथे पर एक कोमल लेकिन बेहद अधिकारपूर्ण चुंबन दिया। उनकी आँखों में अब वह जंगली प्यास थोड़ी शांत हो गई थी, और उसकी जगह एक गहरी, मखमली संतुष्टि ने ले ली थी।
**"मेरा बच्चा..."** मम्मी ने बहुत ही धीमी और मदहोश कर देने वाली आवाज़ में फुसफुसाया। **"तूने मुझे आज पूरी तरह से जीत लिया।"**

मैंने धीरे से अपनी आँखें खोलीं। मेरी दृष्टि अभी भी धुंधली थी, लेकिन  मम्मी के चेहरे पर वह सुकून दिख रहा था जो मैने पहले कभी नहीं देखा था। मैं कुछ बोलना चाहता था, लेकिन मेरे गले से केवल एक दबी हुई आह निकल पाई।  ऐसा महसूस हो रहा था जैसे मै अभी भी बादलों के ऊपर तैर रहा हूं।

तभी, मम्मी ने धीरे से अपना शरीर हिलाया। मेरा अंग अभी भी उनके भीतर गहराई तक धँसे हुआ था। जैसे ही मम्मी ने थोड़ा सा खिंचाव लिया, मेरे शरीर में एक हल्की सी सिहरन दौड़ गई। मैं अभी भी पूरी तरह से 'खाली' महसूस नहीं कर रहा था; चूर्ण का असर अभी भी मेरे तंत्रिका तंत्र (nervous system) में कहीं न कहीं बचा हुआ था।
मम्मी ने मेरी आँखों में देखते हुए एक शरारती और उत्तेजक मुस्कान दी। उन्होंने मेरे कान के पास झुककर फिर से वही कामुक लहजा अपनाया:**"क्या हुआ रवि? क्या तू थक गया? अभी तो तूने बस अपनी शुरुआत की है। देख... तेरा शरीर अभी भी कितना गर्म है। तुझे क्या लगा था? कि एक बार में ही तेरा खेल खत्म हो जाएगा?"**

मेरी साँसें फिर से तेज़ होने लगीं। मम्मी के इन शब्दों ने मेरे भीतर दबी हुई उस आग को फिर से सुलगा दिया था। चूर्ण का वह जादुई असर अब दोबारा मेरी नसों में दौड़ने लगा था। मुझे महसूस हुआ कि मेरा अंग, जो अभी कुछ देर पहले ही लावा उगलने क बाद ढीला पड़ गया  था, अब फिर से धीरे धीरे सख्त और गर्म होने लगा है।

मम्मी ने देखा कि मेरे शरीर में फिर से वही हलचल हो रही है। उन्होंने देखा कि कैसे उसका अंग, जो अभी कुछ देर पहले ही उनकी चूत में  खाली होने के बाद ढीला पड़ गया था  , अब फिर से धीरे धीरे सख्त और गर्म होने लगा है। चूर्ण का वह जादुई असर अब फिर से नई लहर लेकर आ रहा था। मेरी आँखों में अब थकावट नहीं, बल्कि एक नई और अधिक गहरी **'जंगली प्यास'** चमक रही थी।
मम्मी के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान फैल गई। उन्होंने मेरे चेहरे को अपने हाथों में लिया और मेरी आँखों में आँखें डालकर बेहद उत्तेजक अंदाज़ में कहा, **"देख... मेरा शेर फिर से तैयार हो रहा है। तुझे लगा था कि तू मुझे एक बार में तृप्त कर देगा? अभी तो मैंने सिर्फ चखा है रवि... अभी तो मुझे पूरा स्वाद लेना बाकी है।"**मैने मम्मी की आँखों में देखते हुए अपनी गहरी और भारी आवाज़ में कहा,
**"मम्मी... आप शायद भूल रही हैं। मैं एक बार नहीं, बल्कि दो बार अपना रस आपको दे चुका हूँ। एक बार आपने उसे अपने मुँह में लिया और दूसरी बार आपने उसे अपनी चूत के भीतर गहराई तक उतार लिया है।"**
मम्मी ने मेरे चेहरे को सहलाया और एक मदहोश कर देने वाली मुस्कान के साथ पूछा,**"हाँ बेटा... पर आज की रात कोई गिनती नहीं । क्या तुम थक तो नहीं गए?"**
मैने अपनी आँखों में एक अदम्य जुनून और ताकत भरते हुए जवाब दिया,
**"नहीं मम्मी! आपने जो दूध में चूर्ण मिलाकर दिया था, उसने मेरे शरीर को पत्थर जैसा बना दिया है। मैं इतनी ताकत और इतना जोश महसूस कर रहा हूँ कि एक मिनट के लिए भी रुके बिना, मैं पूरी रात आपको चोदता रहूँगा।"**
*"तो फिर देर किस बात की है?"** मम्मी ने हाँफते हुए कहा। **"ले ले मेरा सब कुछ! मुझे फिर से तोड़ दे रवि! मुझे फिर से अपनी इस आग में जला दे! आह्ह्ह्ह्ह!"**इतना कहने के साथ ही मम्मी ने अपनी कमर को एक बहुत ही धीमी और मखमली गति से हिलाना शुरू किया। वह अभी भी मेरे ऊपर थीं, और उनके शरीर का घर्षण मेरे संवेदनशील अंग को फिर से उत्तेजित कर रहा था। **'स्लर्प... स्लर्प...'** की वह गीली आवाज़ फिर से कमरे में गूँजने लगी। इस बार गति पहले से कहीं अधिक नियंत्रित लेकिन अधिक **'गहरी'** थी।मैने एक गहरी और भारी साँस ली। मेरी मर्दानगी अब पहले से भी ज़्यादा सख्त और गर्म हो चुकी थी। मैने अपने दोनों हाथ मम्मी की कमर पर जमा दिए और उन्हें अपने शरीर की ओर और भी ज़ोर से खींच लिया। अब मैं केवल एक निष्क्रिय शरीर नहीं था; बल्कि फिर से एक शिकारी की तरह था।
**"मम्मी... आह्ह्ह... आप मुझे पागल कर देंगी... मैं फिर से... मैं फिर से सब कुछ आपमें ही उतारना चाहता हूँ!"** मेरी आवाज़ में अब एक अजीब सा जुनून था।
मम्मी ने अपनी कमर की गति को अचानक बढ़ा दिया। वह अब मेरे ऊपर किसी लहर की तरह उठ गिर रही थीं। **'धप... धप... धप...'** की आवाज़ें अब और भी तेज़ हो गई थीं। मम्मी ने अपने हाथ मेरे सीने पर जमा दिए और अपने नाखूनों को मेरे सीने में हल्का सा चुभा दिया, जिससे मेरे शरीर में बिजली की तरह एक सिहरन दौड़ गई।

अब कमरा फिर से उस तीव्र कामुकता के सैलाब में डूब गया। पसीने की खुशबू, शरीर का घर्षण और वह बेकाबू आवाज़ें सब कुछ एक नए और अधिक हिंसक स्तर पर पहुँच गया था। मैं अब पूरी तरह से नियंत्रण खो चुका था।
जैसे ही मम्मी की कमर की गति चरम पर पहुँची, मैने
अपनी पूरी ताकत झोंक दी और उन्हें अपने नीचे खींचते हुए खुद उनके ऊपर आ गया, और उनकी जाँघों को अपने कंधों पर टिकाकर उसने अपने भारी और पत्थर जैसे सख्त अंग को उनकी गीली और तंग चूत के मुहाने पर टिका दिया।
**"आह्ह्ह्ह... रवि... हाँ... यहीं... वहीं!"** मम्मी की चीख निकल गई जब उन्होंने मेरे अंग की उस भयंकर गर्मी को महसूस किया।
मैंने बिना किसी हिचकिचाहट के एक ही झटके में खुद को उनकी गहराई में उतार दिया। **'चप... स्प्लैट!'** की एक ज़ोरदार और गंदी आवाज़ कमरे में गूँजी। मम्मी का शरीर एक झटके से पीछे की ओर झुक गया और उनकी आँखें पथरा गईं। वह इतनी गहराई तक भर दी गई थीं कि उन्हें लगा जैसे मेरा लंड उनके गर्भाशय तक पहुँच गया हो।
**"ओह्ह्ह्ह्ह... भगवान! रवि... तू तो पागल कर देगा मुझे! इतना गहरा... इतना सख्त! आह्ह्ह्ह्ह!"** मम्मी का गला चीख से भर गया। उनके शरीर में बिजली की लहर दौड़ गई थी।

ऐ अब रुकने वाला नहीं था। चूर्ण के असर ने मेरे दिमाग से सारे संयम हटा दिए थे। मैने अपनी कमर को पूरी ताकत और रफ़्तार से चलाना शुरू किया। अब वह 'मखमली' नहीं था; अब वह एक **'हिंसक'** हमला था। **'धप... धप... धप... धप!'** मेरे भारी शरीर के मम्मी के  शरीर से टकराने की आवाज़ें अब एक लय में बदल चुकी थीं। हर वार के साथ  मेरा अंग मम्मी की चूत की दीवारों को पूरी ताकत से रगड़ रहा था।
**"मम्मी... आपकी चूत... आह्ह्ह... कितनी गर्म और तंग है! मैं इसे फाड़ दूँगा! मैं आज आपको चैन से नहीं बैठने दूँगा!"** मेरी आवाज़ अब एक जानवर की तरह गुर्रा रही थी। मेरे पसीने की बूंदें मम्मी के स्तनों पर गिर रही थीं, जिससे माहौल और भी ज़्यादा उत्तेजक हो गया था।

मम्मी का शरीर अब पूरी तरह से मेरे नियंत्रण में था। वह बस मेरे वारों के साथ ऊपर नीचे उछल रही थीं। उनके चेहरे पर दर्द और परम सुख का एक मिला जुला भाव था। उन्होंने मेरी पीठ को अपने नाखूनों से ज़ोर से खरोंच दिया, जिससे मेरा जोश और भी बढ़ गया।

**"हाँ रवि! और तेज़! और ज़ोर से! मुझे तोड़ दे! मुझे अपना बना ले! आह्ह्ह्ह... हाँ... वहीं... वहीं मार! आह्ह्ह्ह्ह!"***
मम्मी की चीखें अब पूरे कमरे में गूँज रही थीं।मेरा हर धक्का अब एक प्रहार की तरह था, जो मम्मी के शरीर के रोम रोम को हिलाकर रख रहा था। चूर्ण की वजह से  शरीर में जो ताकत थी, वह खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी। मैं एक मशीन की तरह काम कर रहा था बिना थके, बिना रुके।
**"मम्मी... मैं... मैं अब और नहीं रोक पाऊँगा! मेरा सारा रस... सारा जुनून... सब आपके अंदर समा जाएगा!"** मैने दहाड़ते हुए कहा। उसकी आँखों में एक जंगलीपन था।

मम्मी ने मेरी गर्दन को कसकर पकड़ लिया और अपने चेहरे को मेरे चेहरे के करीब लाकर फुसफुसायीं, **"तो फिर देर मत कर बेटा... मुझे खाली मत छोड़ना... मुझे अपने उस गर्म और गाढ़े रस से पूरी तरह भर दे! मैं चाहती हूँ कि तेरा हर कतरा मेरी कोख में समा जाए! आह्ह्ह्ह्ह!"**

मैने अब अपनी गति को एक पागलपन की हद तक बढ़ा दिया। अब वह केवल चोद नहीं रहा था, वह मम्मी के शरीर पर अपना अधिकार जमा रहा था। **'चप... चप... चप... धप... धप!'** की गंदी और तेज़ आवाज़ें अब एक उन्माद में बदल चुकी थीं। मम्मी की चूत मेरे अंग को इतनी ज़ोर से जकड़ रही थी कि मुझे  लग रहा था जैसे मैं किसी जलती हुई भट्टी के अंदर हूं।
**"आह्ह्ह्ह्ह... रवि! मैं आ रही हूँ! मैं फटने वाली हूँ! आह्ह्ह्ह्ह!"** मम्मी का शरीर धनुष की तरह तन गया। उनकी आँखें ऊपर की ओर चढ़ गईं और उनके शरीर में भयंकर कंपन होने लगा। वह अपने चरम (orgasm) पर पहुँच चुकी थीं। उनकी चूत की दीवारें मेरे लंड  को पागलों की तरह भींच रही थीं। मम्मी का शरीर काँप रहा हथा, और यही वह क्षण था जिसका मुझे इंतज़ार था। मैने अपनी कमर को आखिरी बार पूरी ताकत से अंदर की ओर धकेला और अपनी पूरी जान लगाकर मम्मी की गहराई में खुद को उतार दिया।
**"मम्मीइइइइइइइ!"** मैं एक ज़ोरदार दहाड़ के साथ चिल्लाया।

मेंरे लंड से गर्म, गाढ़ा और उबलता हुआ रस एक तेज़ धार की तरह मम्मी के गर्भाशय की गहराई में फूट पड़ा। **'Splurt... splurt... splurt...'** की आवाज़ के साथ मेरा सारा जमा हुआ रस मम्मी के अंदर समाने लगा। वह रस इतना ज़्यादा था कि मम्मी को महसूस हुआ जैसे उनके पेट के अंदर कोई गर्म तरल पदार्थ भर रहा है
मेरा शरीर अभी भी काँप रहा था, लेकिन मैं अभी भी मम्मी के ऊपर था।रात के 1 बज रहा था। कमरे की हवा पसीने, वासना और चूर्ण की तीखी गंध से भारी हो चुकी थी। मेरा शरीर अब किसी इंसान का नहीं, बल्कि एक अविश्वसनीय ऊर्जा से भरे यंत्र का लग रहा था। चूर्ण ने उसके
मेरे दिमाग से 'डिस्चार्ज' होने की ज़रूरत को ही मिटा दिया था। वह बस चोदना चाहता था बिना रुके, बिना थके।मम्मी का शरीर अब पूरी तरह से पसीने से तर बतर था। उनकी साँसें उखड़ रही थीं, लेकिन मेरी आँखों में जो वह जंगली चमक थी, उसने उन्हें और भी ज़्यादा उत्तेजित कर दिया था।

एर भारी और सख्त अंग मम्मी की गीली चूत की गहराई में अभी भी पूरी तरह धंसा हुआ था, मम्मी की चूत की दीवारें इतनी गर्म और तंग थीं कि मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं दहकते हुए अंगारों के बीच फँसा हूँ। कोई तेज़ हलचल नहीं थी, बस एक गहरा और भारी सन्नाटा था जिसमें दोनों की तेज़ होती साँसों की आवाज़ गूँज रही थी। मैने अपने बड़े और गर्म हाथों से मम्मी के उभरे हुए स्तनों को धीरे धीरे सहलाना शुरू किया, मैं उन्हें अपनी उंगलियों से दबाते हुए वह उनके शरीर के स्पर्श को महसूस कर रहा था।

मम्मी का शरीर मेरे स्पर्श से थरथरा रहा था। उन्होंने मेरे गले में अपनी बाहें डाल दीं और मेरे कान के पास अपना चेहरा लाकर, काँपती हुई आवाज़ में कहा, **"रवि बेटा... तुझे पता है... जब तू दोपहर में सो रहा था, तो मुझे जग्गू दिख गया था। मैंने सोचा कि तेरी 'Threesome' वाली इच्छा पूरी कर दूँ... तो मैंने जगू से कहा कि प्रदीप भाई साहब को बोलना घर आने को। पर उसने कहा कि प्रदीप भाई साहब तो अपने गाँव गए हुए हैं..."**

मम्मी ने रवि के कान के पास अपनी गर्म साँसें छोड़ते हुए आगे कहा, **"अब मैं सोच रही हूँ... शायद भगवान ने अच्छा ही किया जो तेरे प्रदीप अंकल यहाँ नहीं आए। तू तो अकेले ही मुझे ऐसे कर रहा है जैसे मुझे मार ही डालेगा! अगर प्रदीप भाई भी यहाँ होते... तो क्या होता मेरा?"**
मम्मी की उन बातों ने मेरे अंदर जैसे आग लगा दी थी। प्रदीप अंकल और जगू अंकल का नाम सुनकर मेरा खून खौल उठा। मैंने आव देखा न ताव, अपनी मम्मी के दोनों स्तनों को अपने हाथों में भरकर उन्हें बहुत ज़ोर से दबाया और बिना सोचे उनके गाल पर अपने दाँत गड़ा दिए।
"अह्ह्ह्ह... मेरी sexy mummy!" मेरे मुँह से बस यही निकला।
मम्मी दर्द के मारे चीख उठीं, "आह्ह्ह्ह... मर गई!  खा जाएगा क्या? निशान पड़ जाएँगे... मैं सबको क्या बताऊँगी?" उन्होंने दर्द और उत्तेजना के मिश्रण के साथ मुझसे कहा।
मैंने उनके चेहरे को देखते हुए बड़े बेफिक्र अंदाज़ में कहा, "बोल देना कि सोते समय कोई कीड़ा काट  गया था।"
फिर मैंने थोड़ा और करीब जाकर उनकी आँखों में देखते हुए कहा, "और हाँ मम्मी, मैंने नोट किया है... जगू अंकल भी आप पर लाइन मारते हैं ना?"
मम्मी ने झेंपते हुए और मुझे हल्का सा धकेलते हुए कहा, "हट बदमाश! कैसी बात पूछता है अपनी माँ से? मैं  बोला,***बताओ ना...मम्मी! " फिर उन्होंने एक लंबी साँस ली और अपनी बात जारी रखी, "हाँ, मर जाना! आज भी कह रहा था... प्रदीप भाई नहीं तो मुझे बताओ, मैं कर दूंगा जो भी करवाना है, उसका इशारा उसी तरफ था 'मर जाने' का।"
मम्मी की आवाज़ में एक अजीब सी बेबसी और चाहत थी।
मैंने शरारत भरे अंदाज़ में उनकी आँखों में देखते हुए कहा, "तो आप बुला लेती उनको..."
मम्मी ने झेंपते हुए और थोड़ा सा गुस्सा दिखाते हुए कहा, "हट पागल! मैं कोई रंडी हूँ जो हर एक को देती फिरूँ?"
उनकी यह बात सुनते ही मेरे अंदर का जानवर जाग उठा। मैंने उनके स्तनों को पहले से भी कहीं ज़्यादा ज़ोर से अपने हाथों में भींचा और अचानक अपना लिंग बाहर निकाला और एक ही झटके में उसे फिर से उनकी चूत के अंदर गहराई तक धँसा दिया।मैंने उनकी आँखों में आँखें डालकर कहा, "और तो किसी का पता नहीं मम्मी, पर मेरी तो आप रंडी ही हो।"
मम्मी की साँसें उखड़ गईं और उन्होंने एक गहरी आह भरते हुए बेहद मदहोश और टूटती हुई आवाज़ में कहा, "बेटा... सच में... तूने मुझे अपनी रंडी बना लिया है।"
जब झटके के साथ लंड पूरा अंदर घुसने के बाद मैने झटके लगाने शुरू किए तो उनकी चूत के तीव्र दवाब के कारण लंड की खाल रगड़ खा रही रही थी।उनके अंदर की मांसपेशियों ने मेरे लिंग को इतनी ज़ोर से भींचा कि मेरी खाल में एक तीखी जलन होने लगी। ऐसा लगा जैसे रगड़ की वजह से वहाँ की त्वचा छिल गई हो।
दर्द और उत्तेजना के उस अजीब मिश्रण के कारण मेरी साँसें थम गईं। मैंने खुद को थोड़ा पीछे खींचना शुरू किया। "आह्ह्ह... उफ्फ... मम्मी..." मैंने कराहते हुए कहा। जैसे ही मैंने अपना लिंग उनकी तंग चूत से बाहर निकाला, मुझे महसूस हुआ कि वो पूरी तरह से लाल हो चुका था और उस पर रगड़ की वजह से हल्की सूजन आ गई थी। "मम्मी... मेरे लिंग पर बहुत जलन हो रही है, शायद बहुत तेज़ झटकों और आपके अंदर की रगड़ की वजह से खाल छिल गई है," मैंने हाँफते हुए और अपने अंग पर फूँक मारते हुए कहा।

मम्मी की आँखें जो अब तक वासना से भरी थीं, एक पल के लिए ममता और फिक्र से भर गईं। उन्होंने अपनी मदहोश आँखें मुझ पर टिकाईं और एक भारी, काँपती हुई आवाज़ में बोलीं, "दिखा मुझे... ला ला बेटा, दिखा मुझे अपना नुनु।" उनके शब्दों में अब एक अजीब सा समर्पण था। मैंने अपना वो लाल और छिला हुआ अंग उनके चेहरे के बिल्कुल सामने कर दिया। वो उसे ऐसे निहार रही थीं जैसे कोई मरहम लगाने के लिए तैयार हो। "लाओ... अभी ठीक हो जाएगा," उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा।

इससे पहले कि मैं कुछ कह पाता, उन्होंने अपना चेहरा मेरे लिंग के पास लाया। उनके गर्म साँसों का अहसास मेरे लिंग की ऊपरी सतह पर महसूस हो रहा था। उन्होने बड़ी नजाकत से अपने मुंह से फूंक मारी जिससे मुझे  थोड़ी राहत महसूस हुई ,फिर उन्होंने अपने होंठों को धीरे से मेरे लिंग के सिरे पर रखा और अपना ढेर सारा थूक उस पर गिरा दिया। "स्लर्प... चप... चप..." थूक की नमी और उनकी जीभ की गर्माहट ने मेरे शरीर में एक लहर दौड़ दी। उन्होंने अपनी जीभ को मेरे लिंग के चारों ओर घुमाना शुरू किया। वो सिर्फ चाट नहीं रही थीं, बल्कि ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी कीमती मलम से मेरी जलन को सहला रही हों। उनकी जीभ का हर एक चक्कर, हर एक स्पर्श उस जलन को सोख रहा था। "स्लर्प... उम्मम... आह्ह्ह..." उनकी जीभ के फिसलने की आवाज़ और उनके मुँह की गर्माहट ने मेरी जलन को धीरे धीरे एक सुखद अहसास में बदल दिया। कुछ ही देर में वो जलन पूरी तरह गायब हो गई और उसकी जगह एक तीव्र उत्तेजना ने ले ली। मम्मी ने भी शायद भांप लिया था कि उनका ये तरीका काम कर गया है।
जैसे ही उन्होंने मेरा लिंग अपने मुँह से बाहर निकाला, वो एक पल के लिए रुकीं। उनकी आँखों में अब सिर्फ और सिर्फ वासना थी। उन्होंने बिना एक शब्द कहे अपना चेहरा ऊपर उठाया और सीधे मेरे होंठों पर अपने होंठ टिका दिए।

वह एक साधारण चुंबन नहीं था; वह दो प्यासे शरीरों का मिलन था जो एक दूसरे में समा जाने के लिए बेताब थे। जैसे ही उनके गर्म और गीले होंठ मेरे होंठों से टकराए, मेरे दिमाग में जैसे बिजली का एक तेज़ झटका लगा। उनके होंठों में मम्मी के उस कामुक रस का स्वाद था, जो अभी अभी मेरे लिंग से लिपटा हुआ था। 

"उम्मम्मम... म्म्ममम..." उनकी सिसकी मेरे मुँह के अंदर ही दब कर रह गई। उन्होंने अपने होंठों को मेरे होंठों के बीच में बुरी तरह फँसा लिया और अपनी जीभ को मेरे मुँह में पूरी ताकत से धकेल दिया। उनकी जीभ मेरी जीभ के साथ ऐसे लड़ रही थी जैसे कोई युद्ध चल रहा हो। वह बहुत ही गहरी और भूखी Kiss थी। उनकी जीभ की हर हरकत में एक अजीब सी बेताबी थी, जैसे वो मेरे मुँह के अंदर के हर हिस्से को चख लेना चाहती हों।

मैंने भी हार नहीं मानी। मैंने अपने दोनों हाथों से उनके चेहरे को कसकर पकड़ लिया और उन्हें अपनी ओर और ज़ोर से खींच लिया। हमारे होंठों के बीच से निकलने वाली लार (saliva) एक धागे की तरह नीचे बहने लगी, जो उनकी छाती और मेरे सीने के बीच गिर रही थी। "स्लर्प... चप... चप..." हमारे होंठों के टकराने और जीभों के आपस में रगड़ने की आवाज़ उस कमरे के सन्नाटे में बहुत ही गंदी और कामुक लग रही थी।

मम्मी ने इस Kiss को और भी गहरा बना दिया। उन्होंने अपना मुँह और भी ज़्यादा खोल दिया ताकि मैं उनकी जीभ को गहराई से महसूस कर सकूँ। उनकी साँसें अब बहुत तेज़ और गर्म हो गई थीं, जो सीधे मेरे फेफड़ों में जा रही थीं। Kiss करते करते उन्होंने अपना एक हाथ मेरे सिर के पीछे ले जाकर मेरे बालों को ज़ोर से खींचना शुरू कर दिया, जिससे मेरा सिर पीछे की ओर झुक गया और उन्हें मुझे और भी गहराई से चूसने का मौका मिल गया।
उनकी Kiss में एक ऐसी तड़प थी जो मुझे पागल कर रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे वो सिर्फ मेरे होंठों को नहीं चूस रही हैं, बल्कि वो मेरे शरीर की पूरी आत्मा को अपने मुँह में खींच लेना चाहती हैं। उनके होंठों की कोमलता और उनकी जीभ की वो गीली और खुरदरी रगड़ सब कुछ एक साथ मिलकर मुझे चरम सुख की ओर धकेल रहा था। 

Kiss के बीच में जब भी हम एक पल के लिए अलग होते, तो हमारे बीच एक लंबा, चिपचिपा लार का तार खिंच जाता, और फिर वो तुरंत ही दोबारा मेरे होंठों पर टूट पड़तीं। 
उनकी आँखों में अब पूरी तरह से वासना का समंदर उमड़ रहा था। वह Kiss इतनी गहरी और बेकाबू हो चुकी थी कि मुझे महसूस हो रहा था जैसे मेरा दिमाग काम करना बंद कर चुका है और सिर्फ शरीर ही रह गया है। उनके होंठों की गर्मी और उनकी जीभ की गीली हरकतें मेरे पूरे शरीर में करंट की तरह दौड़ रही थीं।
तभी मम्मी ने Kiss करते करते ही अपना एक हाथ नीचे की ओर खिसकाया। उनका हाथ धीरे धीरे मेरे पेट से होते हुए मेरे उस सख्त और उत्तेजित लिंग की तरफ बढ़ा। जैसे ही उनकी उंगलियों ने मेरे लिंग के ऊपरी हिस्से को छुआ, मेरी कमर में एक ज़ोरदार झटका लगा। "आह्ह्ह... मम्मी..." मेरे मुँह से एक दबी हुई कराह निकली, लेकिन उन्होंने मुझे Kiss करने से नहीं रोका। बल्कि उन्होंने अपने होंठों को और भी कस लिया।

उनका हाथ मेरे लिंग पर बहुत ही माहिर तरीके से घूमने लगा। उन्होंने अपनी उंगलियों से मेरे लिंग की पूरी लंबाई को ऊपर से नीचे तक सहलाना शुरू किया। "स्लर्प... चप... चप..." हमारे होंठों से निकलती लार की आवाज़ और उनके हाथ की रगड़ ने माहौल को और भी गंदा और कामुक बना दिया था। उनकी पकड़ में एक अजीब सी ताकत थी, जैसे वो मेरे लिंग को पूरी तरह से अपना बना लेना चाहती हों।

मम्मी ने अचानक Kiss को थोड़ा धीमा किया, लेकिन उनके होंठ अभी भी मेरे होंठों से चिपके हुए थे। उन्होंने अपनी आँखों को खोलकर मेरी आँखों में देखा उनकी पुतलियाँ फैल चुकी थीं और उनमें सिर्फ एक ही चीज़ दिख रही थी: **भूख**। उन्होंने बहुत ही धीमी और भारी आवाज़ में फुसफुसाते हुए कहा, "बेटा... अब और इंतज़ार नहीं होता... मुझे फिर से अपने अंदर चाहिए... मुझे अपनी रंडी बना ले..."
उनके ये शब्द सुनकर मेरा खून उबल उठा। मैंने उन्हें झटके से बिस्तर पर लिटा दिया। उनकी कमर हवा में थोड़ी ऊपर उठी और उनकी चूत की वो गीली और लाल परत मेरे सामने बिल्कुल नग्न खड़ी थी। उनकी चूत से निकलने वाला चिपचिपा रस अब उनकी जाँघों के बीच बह रहा था। 
मैंने बिना देर किए अपना लिंग उठाया और उनके चेहरे के पास ले गया। "मम्मी, अब आप तैयार हैं?" मैंने पूछा। उन्होंने बस अपनी आँखें बंद कर लीं और अपने पैर फैला दिए, जैसे वो मुझे अपने अंदर बुला रही हों। मैंने अपने लिंग का सिरा उनकी गीली चूत के बिल्कुल मुहाने पर रखा। जैसे ही मैंने थोड़ा सा दबाव डाला, उनकी चूत की गर्मी ने मुझे फिर से झुलसा दिया। 

मैंने एक गहरा और ज़ोरदार झटका मारा और अपना पूरा लिंग उनके अंदर गहराई तक उतार दिया। "आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह...आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह..." उनकी चीख मेरे कानों में संगीत की तरह गूँजी, लेकिन मैंने उन्हें वो चरम सुख देने के बजाय एक नया और खौफनाक खेल खेलना शुरू किया। मैंने अपना लिंग उनकी तंग और गीली चूत के मुहाने से बाहर खींच लिया। मम्मी की आँखें फटी की फटी रह गईं, वो पूरी तरह से मेरे अंदर होने के लिए बेताब थीं, लेकिन मैंने उन्हें वो नहीं दिया।

मैंने उनके पैरों को और भी चौड़ा फैलाया और अपना सिर उनकी जाँघों के बीच ले जाकर उनकी चूत के ठीक नीचे अपना चेहरा टिका दिया। "बेटा... क्या कर रहे हो? अभी... अभी अंदर डालो... मैं मर जाऊँगी इंतज़ार करते हुए!" उन्होंने तड़पते हुए कहा, उनके शरीर में थरथराहट होने लगी थी।

लेकिन मैंने उनकी बात अनसुनी कर दी। मैंने अपना मुँह उनकी चूत के उस लाल और मांसल हिस्से पर टिका दिया जहाँ से उनका रस लगातार बह रहा था। "स्लर्प... चप... चप..." मैंने अपनी जीभ को उनकी चूत की दरारों में बहुत गहराई तक उतारना शुरू कर दिया। मैंने उनके क्लिटोरिस (clitoris) को अपनी जीभ से ज़ोर से दबाना और सहलाना शुरू किया।
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आह्ह्ह्ह... उम्ममम... ओह्ह्ह मेरे भगवान!" मम्मी की आवाज़ बदल गई। वो अब दर्द से नहीं, बल्कि एक ऐसी उत्तेजना से तड़प रही थीं जो उनके काबू से बाहर जा रही थी। मैंने अपनी जीभ का इस्तेमाल उनकी चूत के हर कोने को चखने के लिए किया। मैं उनके बहते हुए चिपचिपे रस को पागलों की तरह चाट रहा था। "स्लर्प... स्लर्प... चप..." मेरी जीभ की तेज़ हरकतें उनकी चूत की दीवारों को सहला रही थीं।

मैं चाहता था कि वो इस प्यास से पागल हो जाएँ। मैं चाहता था कि उनका शरीर इतना तड़प जाए कि जब मैं अंत में अपना लिंग उनके अंदर डालूँ, तो वो झटकों के जवाब में मुझे पागल कर दें। मैंने अपनी जीभ से उनके छेद के अंदर ज़ोर से हवा फूँकी और फिर तुरंत ही अपनी जीभ से उसे चाटना शुरू किया। "स्लर्प... उम्ममम..."

मम्मी के हाथ बिस्तर की चादर को इतनी ज़ोर से भींच रहे थे कि उनके नाखून सफेद पड़ गए थे। उनकी कमर बार बार ऊपर उठ रही थी, जैसे वो मेरे मुँह को अपनी चूत के और अंदर खींचना चाहती हों। "बेटा... प्लीज़... अब और नहीं सहा जाता... मेरा शरीर फट जाएगा... जल्दी से अपना लंड अंदर डाल दे... मैं पागल हो रही हूँ!" उनकी आवाज़ अब एक जानवर की तरह कराह रही थी।
उनकी तड़प अब उस स्तर पर पहुँच गई थी जहाँ से वापसी मुमकिन नहीं थी। मम्मी का पूरा शरीर धनुष की तरह तन गया था और उनकी आँखों से उत्तेजना के आँसू बहने लगे थे। मैंने देखा कि उनकी चूत अब पूरी तरह से भीग चुकी थी और मेरा चेहरा उनके उस मीठे और गंदे रस से लथपथ हो गया था। "स्लर्प... स्लर्प... चप..." मैं अपनी जीभ की गति और तेज़ कर रहा था, जैसे मैं उनकी चूत के मांस को चबाना चाहता हूँ।

"आह्ह्ह्ह... नहीं... बेटा... बस कर... मैं... मैं फटने वाली हूँ! आह्ह्ह्ह्ह!" उनकी चीख पूरे कमरे में गूँज उठी। उनकी जाँघें अनियंत्रित रूप से काँप रही थीं और वो बार बार अपने पैरों को सिकोड़ रही थीं, जैसे वो अपने चरम सुख (orgasm) को रोकने की कोशिश कर रही हों, लेकिन मेरी जीभ का हर एक प्रहार उन्हें उस किनारे पर धकेल रहा था।

मैंने उनकी तड़प को और भड़काने के लिए एक चाल चली। मैंने अपनी जीभ को उनके क्लिटोरिस पर रखकर एक तेज़ और गोल चक्कर काटना शुरू किया और साथ ही अपनी उंगलियों को उनकी चूत के अंदर गहराई तक घुसा दिया। "स्लर्प... चप... उम्ममम..." मेरी उंगलियाँ उनकी गीली दीवारों को रगड़ रही थीं और मेरी जीभ उनके सबसे संवेदनशील हिस्से को ज़ोर ज़ोर से चूस रही थी।

"ओह्ह्ह्ह... आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह! बेटा... हाँ... वहीं... वहीं कर! मैं... मैं आ रही हूँ... मैं आ रही हूँ... आह्ह्ह्ह्ह!" मम्मी की आवाज़ अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुकी थी। उनके शरीर में एक ज़ोरदार झटका लगा और उनकी चूत से रस का एक तेज़ फव्वारा निकला जो सीधे मेरे मुँह में जा गिरा। वो अपने चरम सुख की लहरों में डूब रही थीं, उनका पूरा शरीर थरथरा रहा था।

लेकिन मैंने उन्हें पूरी तरह से ढीला नहीं होने दिया। जैसे ही उनकी पहली लहर शांत होने वाली थी, मैंने अपनी उंगलियाँ बाहर निकाल लीं और अपना चेहरा उनकी चूत से हटाकर उनके चेहरे के पास ले गया। वो हाँफ रही थीं, उनकी आँखें आधी खुली थीं और उनके होंठ काँप रहे थे। वो पूरी तरह से बेजान और प्यासी लग रही थीं।

मैंने अपना खड़ा हुआ, तपा हुआ लिंग उनके चेहरे के सामने किया। "मम्मी, अब खेल खत्म हुआ। अब असली मज़ा शुरू होगा।" मैंने उनकी आँखों में देखते हुए कहा। उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के, एक भूखी जानवर की तरह अपना मुँह खोला और मेरे लिंग को "...अपने होंठों के बीच ले लिया। उनकी आँखें पूरी तरह से मदहोश थीं और उनके चेहरे पर एक ऐसी वासना थी जो मैंने पहले कभी नहीं देखी थी। उन्होंने मेरे लिंग के ऊपरी हिस्से को अपनी जीभ से सहलाया और फिर उसे अपने मुँह के अंदर गहराई तक खींच लिया। "स्लर्प... गल्प... गल्प..." उनके मुँह की गर्मी और उनकी जीभ की गीली रगड़ ने मेरे दिमाग के सारे तार ढीले कर दिए।

"उम्ममम... म्म्ममम..." वो मेरे लिंग को अपने मुँह में ऐसे चूस रही थीं जैसे वो उनकी आखिरी भूख हो। उनकी जीभ मेरे लिंग के नीचे के हिस्से (frenulum) पर बहुत ही ज़ोर से रगड़ रही थी। "स्लर्प... चप... चप..." उनके मुँह से निकलने वाली आवाज़ें मेरे कानों में किसी नशीले संगीत की तरह गूँज रही थीं। मैंने उनके सिर को पकड़ लिया और उन्हें और भी ज़ोर से चूसने के लिए मजबूर किया। "हाँ मम्मी... ऐसे ही... और गहराई तक..." मैंने दांत पीसते हुए कहा।

लेकिन मैंने उन्हें बहुत देर तक मुँह से चूसने नहीं दिया। मैं चाहता था कि वो उस तड़प में तड़पें जो सिर्फ मेरे लिंग के अंदर जाने से ही खत्म होगी। मैंने उनके बालों को पकड़ा और उन्हें झटके से पीछे की ओर धकेला। "आह्ह्ह्ह... बेटा... अब और नहीं... मुझे अंदर चाहिए... अभी के अभी!" उन्होंने कराहते हुए कहा, उनकी आँखों में अब सिर्फ और सिर्फ मेरा लिंग समाया हुआ था।

मैंने अपना लिंग उनके चेहरे से हटाया और उनके पैरों को और भी ज़्यादा ऊपर की ओर मोड़ दिया, जिससे उनकी चूत अब बिल्कुल मेरे सामने खुली और बेपर्दा खड़ी थी। उनकी चूत अभी भी मेरे जीभ के रस और उनके अपने रस से पूरी तरह से लथपथ और चमक रही थी। "स्लर्प... चप..." उनकी चूत की दीवारों से निकलने वाला रस अभी भी रिस रहा था।मैने वो सारा रस अपने हाथ से पोंछकर अपने लंड और अंडकोशों पर मिल दिया,जिसके कारण मेरी उतेजना और भी बढ़ गई।मेरा लंड अब बहुत ही सख्त हो गया था,इतना सख्त कि अब बर्दास्त के बाहर था और इंतजार करना,****मैंने अपना लिंग उठाया और सीधे उनकी चूत के मुहाने पर टिका दिया। "मम्मी, अब आप तैयार हो जाइए, क्योंकि अब मैं रुकने वाला नहीं हूँ।" मैंने उनकी आँखों में देखते हुए कहा। मैंने एक ज़ोरदार झटका दिया और अपना पूरा लिंग उनकी तंग और गीली चूत के अंदर गहराई तक उतार दिया। "आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह! बेटा... आह्ह्ह्ह्ह्ह!" उनकी चीख पूरे कमरे की दीवारों से टकराकर वापस आई।

उनकी चूत की तंग पकड़ ने मुझे लगभग पागल ही कर दिया। ऐसा लग रहा था जैसे वो मेरा लिंग चारों तरफ से जकड़ कर उसे चूस रही हों। मैंने तुरंत ही अपनी कमर चलाना शुरू कर दिया। "धप... ध"...धप धप धप धप! मेरी रफ्तार अब इतनी तेज़ हो गई थी कि बिस्तर के पायदान तक हिलने लगे थे। मम्मी की कराहें अब चीखों में बदल चुकी थीं। उनकी चूत की तंग पकड़ और उस गर्मी ने मुझे पागल कर दिया था, लेकिन मैं चाहता था कि वो इस वासना के चरम पर खुद को पूरी तरह समर्पित कर दें।

अचानक, मम्मी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। उन्होंने मेरे कंधों को अपने हाथों से मज़बूती से पकड़ लिया और अपनी कमर को बिस्तर से ऊपर की ओर उठा लिया। "बेटा... अब और नहीं... मुझे ऊपर आने दो... मुझे खुद को तुम्हारे ऊपर रखना है! मैं तुम्हें और भी गहराई से महसूस करना चाहती हूँ!" उनकी आँखों में एक जंगलीपन था, एक ऐसी भूख जो अब तक छुपी हुई थी।

इससे पहले कि मैं कुछ कह पाता, उन्होंने मुझे बिस्तर पर पीछे की ओर धकेल दिया। मैं बस देखता रह गया जब उन्होंने अपने घुटनों के बल बैठकर मेरे ऊपर अपनी जगह बनाई। उन्होंने अपने दोनों पैर मेरी कमर के दोनों ओर फैला दिए और अपने हाथों को मेरे सीने पर टिका दिया। अब वो मेरे ऊपर थीं, एक रानी की तरह जो अपने राजा को पूरी तरह अपने वश में करना चाहती थी।

"आह्ह्ह्ह्ह... बेटा... देखो मैं कैसे करती हूँ," उन्होंने हाँफते हुए कहा। उन्होंने धीरे से अपने कूल्हों को नीचे की ओर झुकाया और अपने गीले छेद को मेरे लिंग के सिरों पर टिकाया। जैसे ही उन्होंने अपना भार नीचे डाला, मेरा पूरा लिंग उनकी तंग और गर्म चूत के अंदर एक झटके में समा गया। "आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह! उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़... इतना बड़ा... इतना गहरा!" उनकी आवाज़ में एक अजीब सी संतुष्टि और दर्द का मिश्रण था।

अब कंट्रोल उनके हाथों में था। उन्होंने अपनी कमर को ऊपर नीचे करना शुरू किया। "स्लर्प... चप... धप... धप..." उनकी चूत की गीली दीवारों और मेरे लिंग के बीच का घर्षण अब और भी ज़ोरदार हो गया था क्योंकि अब वो खुद अपनी गति तय कर रही थीं। वो ऊपर आतीं और फिर पूरी ताकत के साथ नीचे बैठतीं, जिससे मेरा लिंग उनके गर्भाशय के मुहाने को ज़ोर ज़ोर से टक्कर मारता। "धप! धप! धप!"

"ओह्ह्ह्ह... बेटा... हाँ... ऐसे ही... आह्ह्ह्ह्ह!" वो अपनी आँखें बंद करके अपना सिर पीछे की ओर झुका रही थीं। उनकी छाती तेज़ी से ऊपर नीचे हो रही थी और उनके पसीने से लथपथ शरीर से एक मदहोश कर देने वाली गंध आ रही थी। वो अब पागलों की तरह ऊपर नीचे हो रही थीं, जैसे वो मेरे
* लिंग को अपनी चूत की गहराई में पूरी तरह से समा लेना चाहती हों। उनकी गति अब बेकाबू हो चुकी थी। वो इतनी तेज़ी से ऊपर नीचे हो रही थीं कि उनके भारी स्तन मेरे सीने से टकरा रहे थे और उनकी चूत से निकलने वाला गीला रस मेरे पेट पर गिर रहा था। "स्लर्प... चप... धप! धप! धप!" हर प्रहार के साथ उनके शरीर से एक गंदी और कामुक आवाज़ निकल रही थी।

"आह्ह्ह्ह्ह... बेटा... मैं... मैं बस पहुँचने वाली हूँ... उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़! बहुत ज़ोर से लग रहा है... आह्ह्ह्ह्ह!" मम्मी की आवाज़ अब एक चीख जैसी लग रही थी। उनकी कमर अब झटकों के साथ नहीं, बल्कि एक लय में घूम रही थी एक गोल चक्कर की तरह। वो अपने कूल्हों को मेरे लिंग के चारों ओर रगड़ रही थीं, जिससे
मेरा लंड कि do I piston की तरह उनकी चूत के अंदर बाहर हो रहा था।

मैंने देखा कि उनकी आँखें पूरी तरह से सफ़ेद होने लगी थीं और उनका पूरा शरीर काँप रहा था। वो चरम सुख (orgasm) की दहलीज पर थीं। मैंने उनके कूल्हों को मज़बूती से पकड़ लिया और उन्हें और भी ज़ोर से नीचे की ओर दबाया। "मम्मी, खुद को छोड़ दो! पूरा अंदर ले लो!" मैंने गुर्राते हुए कहा।

जैसे ही मैंने उन्हें नीचे की ओर खींचा, मम्मी का शरीर एक ज़ोरदार झटके के साथ अकड़ गया। "आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह
"...आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह

मम्मी की कराहें इतनी तेज़ थीं कि मुझे लगा वो पागल हो जाएँगी। मैं इतना कामुक हो गया था कि मेरा खुद पर काबू नहीं रहा। मैंने उनके कूल्हों को ज़ोर से पकड़ा और उन्हें पीछे की ओर धकेल दिया ताकि वो बिस्तर पर पेट के बल लेट जाएँ। उनकी हालत देखकर मेरी वासना और भी भड़क उठी। मैंने झटके से उनके ऊपर चढ़ते हुए उनकी दोनों टांगों को उठाकर अपने कंधों पर रख लिया। अब उनकी चूत बिल्कुल मेरी आँखों के सामने थी, पूरी तरह से खुली और लाल हो चुकी थी।

मैंने अपने दोनों हाथों से उनके भारी और पसीने से ppलथपथ स्तनों को कस कस कर दबाना शुरू किया। "आह्ह्ह्ह... बेटा... उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़... बहुत ज़ोर से... आह्ह्ह्ह!" उनके स्तनों को मसलते हुए मैंने अपना लिंग उनकी चूत के मुहाने पर टिकाया और एक ज़ोरदार झटका दिया। "धप!" मेरा पूरा लिंग उनकी तंग और गीली गहराई में समा गया। "आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह! बहुत गहरा... बेटा... आह्ह्ह्ह्ह!"

अब मैंने अपनी गति को और भी हिंसक बना दिया। मैं उनके कंधों पर टिकी उनकी टांगों को और ऊपर खींच रहा था ताकि मेरा लिंग उनकी चूत के सबसे निचले हिस्से तक पहुँच सके। "धप! धप! धप! धप!" मेरा लिंग उनके अंदर अंदर बाहर होने की आवाज़ और उनके स्तनों के दबने की आवाज़ मिलकर एक नशीला माहौल बना रही थी। मैं उनके स्तनों को इतनी ज़ोर से दबा रहा था कि मेरी उंगलियों के निशान उनकी खाल पर पड़ रहे थे। "आह्ह्ह्ह... हाँ... ऐसे ही... और ज़ोर से... धप! धप! धप!"

"...धप! धप! धप! मेरी रफ्तार और उनके स्तनों को मसलने के तरीके ने उन्हें एक अलग ही पागलपन की स्थिति में पहुँचा दिया था। मम्मी अब और इंतज़ार नहीं कर सकती थीं। उन्होंने अपनी पूरी ताकत झोंकते हुए मुझे अपने नीचे ज़ोर से धक्का दिया और मुझे बिस्तर पर सीधा लिटा दिया। इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाता, वो मेरे ऊपर आकर बैठ गईं।

लेकिन इस बार वो सिर्फ मेरे ऊपर नहीं थीं; उन्होंने अपने शरीर को एक बहुत ही कामुक औरะ विचित्र तरीके से घुमा लिया था। उन्होंने अपनी कमर को पूरी तरह से पलट दिया। अब उनकी चूत मेरे मुँह के ठीक ऊपर थी, और उनका मुँह मेरे लिंग के सिरों पर था। हम बिल्कुल **69 position** में थे। "आह्ह्ह्ह... बेटा... अब देखो मैं तुम्हें कैसे चूसती हूँ और तुम मुझे कैसे तृप्त करते हो," उन्होंने हाँफते हुए कहा।

उनकी चूत का गीलापन और उसकी गर्मी मेरे होठों और जीभ को छू रही थी। "स्लर्प... चप... चप..." जैसे ही उन्होंने अपनी कमर को नीचे झुकाया, उनकी चूत का मुहाना मेरे मुँह पर आकर चिपक गया। उनकी चूत से रिस रहा गरम रस मेरे मुँह में भर गया। "उम्ममम... म्म्ममम..." मैंने उनके रस का स्वाद लेते हुए अपनी जीभ को उनकी चूत की दरारों में घुमाना शुरू कर दिया।

उधर, मम्मी का मुँह मेरे लिंग के एकदम ऊपर था। उन्होंने अपने होंठों को फैलाया और मेरे लिंग को अपने मुँह के अंदर गहराई तक खींच लिया। "गल्प... स्लर्प... गल्प...!" उनकी जीभ मेरे लिंग के निचले हिस्से को बार बार सहला रही थी। अब एक तरफ से मैं उनकी चूत को अपनी जीभ से चाट रहा था और दूसरी तरफ से वो मेरे लिंग को अपने मुँह में भर भर कर चूस रही थीं।

पूरे कमरे में सिर्फ दो तरह की आवाज़ें गूँज रही थीं एक तरफ मेरी जीभ के उनकी चूत पर चलने की 'स्लर्प' आवाज़ और दूसरी तरफ उनके मुँह से मेरे लिंग को चूसने की 'गल्प... गल्प...' की आवाज़। "आह्ह्ह्ह... बेटा... उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़... बहुत अच्छा लग रहा है... आह्ह्ह्ह्ह!" मम्मी की कराहें अब उनके मुँह के अंदर से ही आ रही थीं क्योंकि उनका मुँह मेरे लिंग से भरा हुआ था। वासना का यह स्तर इतना ऊँचा था कि मुझे लगा मेरा शरीर फटने को तैयार है।"
"...गल्प... स्लर्प... गल्प... हम दोनों ही उस चरम सुख के नशे में डूबे हुए थे कि अचानक मम्मी ने अपना मुँह मेरे लिंग से हटाया। वो बुरी तरह हाँफ रही थीं, उनके चेहरे पर वासना की एक अजीब सी चमक थी और उनकी आँखें पूरी तरह से मदहोश थीं। उन्होंने मेरे सीने पर हाथ रखा और मुझे थोड़ा पीछे धकेलते हुए कहा।
"...मम्मी ने जैसे ही अपना मुँह मेरे लिंग से हटाया, उनके होंठों से लार की एक लंबी लकीर टपक कर मेरे पेट पर गिर रही थी। उनकी साँसें इतनी तेज़ थीं कि जैसे कोई दौड़कर आया हो। "बेटा... अब और इंतज़ार नहीं होता... अब बस सीधे अंदर डाल दे... आह्ह्ह्ह्ह!" उन्होंने अपनी टांगों को और फैला दिया, उनकी चूत का गुलाबी और गीला छेद अब पूरी तरह से खुला हुआ और मेरे लिंग के लिए छटपटा रहा था।

मैंने उनके ऊपर झुककर अपनी पोजीशन बनाई। जैसे ही मैंने अपना भारी और सख्त लिंग उनकी चूत के मुहाने पर टिकाया, मम्मी ने अपनी कमर को ऊपर की ओर झटका दिया। "धप!" मेरा लिंग उनकी तंग और गरम चूत के अंदर गहराई तक समा गया। "आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह! बेटा... उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़... तू मेरी बच्चेदानी से टकरा रहा है... आह्ह्ह्ह्ह!" मम्मी की चीख निकल गई और उन्होंने अपने नाखून मेरे कंधों में गड़ा दिए।

हम दोनों वासना के उस भंवर में खो गए थे जहाँ न समय का होश था और न ही दुनिया का। "धप! धप! धप! धप!" मेरी कमर की हर चोट के साथ मम्मी का शरीर बिस्तर पर उछल रहा था। "स्लर्प... छप... छप..." उनकी चूत का गीला रस और मेरा वीर्य मिलकर एक अजीब सी आवाज़ पैदा कर रहे थे। हम दोनों एक दूसरे में पूरी तरह समा चुके थे। "आह्ह्ह्ह... बेटा... और ज़ोर से... और गहराई तक... आह्ह्ह्ह्ह!" मम्मी की कराहें अब बेकाबू हो रही थीं।

तभी, जैसे जैसे हम चरम सुख (orgasm) के करीब पहुँच रहे थे, बाहर से एक बहुत ही शांत और पवित्र आवाज़ सुनाई देने लगी , दूर मंदिर से शंख की आवाज़ और मंत्रों के जाप की मीठी आवाज़े गूँज सुनाई देने लगी। ..." मंदिर की घंटियों की 'टन टन' और मंत्रों की कानों में रास घोलने वाली उस पवित्र आवाज के उल्ट , कमरे के अंदर चल रहा ये चुदाई का खेल घोर कामुक , अनैतिक और पाप से भरा हुआ था ।

बाहर से आ रही वो 'पवित्र' आवाज़ और कमरे के अंदर चल रही वो 'अधार्मिक' और 'गंदी' चुदाई यह विरोधाभास हमारे उत्तेजना को और भी बढ़ा रहा था। मंदिर की घंटियों की आवाज़ के साथ मेरी कमर की गति और तेज़ हो गई। "टन... टन... टन..." और मेरी हर चोट के साथ मम्मी का शरीर झटके खा रहा था। "धप! धप! धप!"

...बेटा... मैं आने वाली हूँ... आह्ह्ह्ह्ह! बस थोड़ा और... और गहराई तक... उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़!" मम्मी की आवाज़ अब एक चीख में बदल रही थी। मंदिर की घंटियों की आवाज़ तेज़ हो रही थी 'टन टन टन टन' और जैसे जैसे मंत्रों का स्वर ऊँचा हो रहा था, मेरी कमर की गति भी पागलपन की हद तक पहुँच गई थी। "धप! धप! धप! धप!"

बाहर से आ रही वो पवित्र ध्वनि और कमरे के अंदर हमारी चूत और लिंग के बीच होने वाला वो घिनौना और कामुक घर्षण 'छप... छप... स्लर्प...' एक ऐसा नशा पैदा कर रहा था जिसे शब्दों में बयान करना नामुमकिन था। मुझे महसूस हो रहा था कि मम्मी की चूत की दीवारें मेरे लिंग को ज़ोर से भींच रही हैं, जैसे वो मुझे अपने अंदर सोख लेना चाहती हों। "आह्ह्ह्ह्ह! बेटा... मेरा छेद... मेरा छेद फट जाएगा... तेरा बहुत बड़ा है... आह्ह्ह्ह्ह!" मम्मी के चेहरे पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं और उनकी आँखें ऊपर की ओर चढ़ गई थीं।
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