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**"सभी प्यारे पाठकों को मेरा सादर प्रणाम ❤️**
**मैं आप सभी का तहे दिल से शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ जिन्होंने अब तक इस कहानी पर अपने प्यार भरे कमेंट्स किए हैं। आप सभी के कमेंट्स पढ़कर मुझे बहुत खुशी होती है और लिखने की प्रेरणा मिलती है।**
**मैं Saya, Valson, VIK88, veili Maal, Lavoni और Esha समेत उन सभी पाठकों का शुक्रिया अदा करता हूँ जिन्होंने अब तक कमेंट करके अपना प्यार दिखाया है। आप सभी का साथ ही इस कहानी की असली ताकत है।**
**ऐसे ही अपना प्यार बनाए रखें। कहानी अभी बहुत आगे जाने वाली है और आप लोग तय करेंगे कि अंजलि का सफर किस तरफ मुड़ेगा!**
**साथ ही, जो पाठक चुपचाप कहानी पढ़ रहे हैं, मैं उनसे भी निवेदन करता हूँ कि आप भी कमेंट करके अपनी राय ज़रूर दें। आपके छोटे से कमेंट से मुझे और भी बेहतर और रोमांचक लिखने की प्रेरणा मिलेगी।**
**ढेर सारा प्यार! ?✨"**
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मैंने धीरे से उनके चेहरे को ऊपर उठाया। उनकी साँसें अब उखड़ी हुई थीं। मैंने उनके माथे से लेकर उनकी आँखों तक एक गहरा चुंबन दिया और फिर धीरे से उनके होंठों के करीब जाकर फुसफुसाया, **"मम्मी... आप नहीं जानती,आपने मुझे कितनी बड़ी खुशी दी है अपनी सहमति देकर। आपकी ये रजामंदी मेरे लिए किसी वरदान से कम नहीं है।'*
मेरे इन शब्दों का उस पर गहरा असर हुआ। उसकी आँखों में जो डर था, वो अचानक गायब हो गया और उसकी जगह एक गहरी ममता और समर्पण ने ले ली। उसने एक लंबी सांस ली, जैसे उसने अपने मन का सारा बोझ उतार दिया हो। । उसने मुझे इतनी जोर से अपने आलिंगन में भर लिया कि मुझे उसकी धड़कनें अपने सीने पर महसूस हो रही थीं। वो मुझे कसकर पकड़ कर ऐसे गले लगा रही थी, जैसे वो बिना शब्दों के मुझसे कह रही हो *'हाँ बेटा, मैं तैयार हूँ। तेरी खुशी के लिए मैं सब कुछ करने को तैयार हूं।अब हमारी एक 0नई दुनिया शुरू होगी।'*
उसका वो आलिंगन सिर्फ एक माँ का प्यार नहीं था, बल्कि एक औरत का अपने सबसे गहरे राज और अपनी सबसे बड़ी खुशी को स्वीकार करने का तरीका था। उस पल मुझे महसूस हुआ कि जैसे मैंने कोई बहुत बड़ी जीत हासिल कर ली हो।""**
मैंने अपना हाथ धीरे से उनके कंधे से नीचे की ओर खिसकाया। उनकी त्वचा रेशम की तरह मुलायम और गर्म थी। जैसे ही मेरी उंगलियों ने उनके शरीर को छुआ, उनके शरीर में एक सिहरन सी दौड़ गई। उन्होंने अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं और एक हल्की सी आह उनके गले से निकल गई। यह आह उनकी एक दबी हुई स्वीकारोक्ति थी।
मैंने बहुत ही धीमे और सधे हुए अंदाज़ में उनके गले के पास अपना चेहरा ले जाकर उन्हें महसूस करना शुरू किया। मेरी हर हरकत में एक ठहराव था, जो धीरे धीरे उन्हें पूरी तरह से सुन्न कर रहा था। मैंने उनके कान के पास अपनी गर्म साँसें छोड़ीं, जिससे वे मारे उतेजना के कांप उठी।
**"मम्मी, डरिए मत... बस खुद को मुझे सौंप दीजिए,"** मैंने उनके कानों में बहुत ही धीमी और भारी आवाज़ में कहा।
मैंने उनके गले पर एक छोटा सा, कोमल चुंबन लिया और धीरे धीरे नीचे की ओर बढ़ने लगा। उनकी साँसें अब तेज़ और बेतरतीब हो चुकी थीं। उन्होंने अनजाने में ही अपने हाथ मेरे बालों में डाल दिए और मुझे अपने और करीब खींच लिया। वह स्पर्श अब सिर्फ एक स्पर्श नहीं था; बल्कि एक प्यास थी जो मेरे स्पर्श से फूटने को बेताब थी।
कमरे की मद्धम रोशनी में उनके शरीर की हर हरकत और उनके चेहरे के बदलते भावों को मैं अपनी आँखों में उतार रहा था। हम दोनों के बीच की दूरी अब खत्म हो रही थी, और हर बीतते पल के साथ वह आग और भी गहरी होती जा रही थी।मैंने उनके गले पर अपने होंठों का दबाव थोड़ा और बढ़ाया, और उनकी गर्दन की उस कोमल त्वचा को अपनी जीभ से सहलाया। उनके शरीर से निकलने वाली वह दबी हुई आह अब और भी गहरी और मदहोश करने वाली हो गई थी। मैंने महसूस किया कि उनका शरीर अब मेरे प्रति विरोध नहीं, बल्कि एक बेताब समर्पण दिखा रहा था।
मैंने उनके कानों के पास अपनी आवाज़ को और भी भारी और नशीला बनाते हुए कहा, **"मम्मी, सोचिए जब अंकल हमें इस तरह देख रहे होंगे... जब उनकी नज़रें हमारे शरीर के हर उतार चढ़ाव पर होंगी, तब आपको कैसा महसूस होगा? जब हम दोनों एक दूसरे को अपनी बाहों में भर लेंगे और अंकल बस हमें निहारते हुए अपनी उत्तेजना को महसूस करेंगे... वह नज़ारा कितना कामुक होगा ना?"**
मम्मी की साँसें अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुकी थीं। उनकी बंद आँखों के पीछे मैं उस कल्पना को देख पा रहा था जो उन्हें अंदर ही अंदर जला रही थी। उस 'थ्रीसम' के विचार ने उनके भीतर एक ऐसी आग सुलगा दी थी जिसे अब दबाना नामुमकिन था। उनके चेहरे पर जो शर्म थी, वह अब एक जंगली प्यास में बदल रही थी। वह सोच रही थीं कि कैसे अंकल की मौजूदगी उनके और मेरे बीच के इस मिलन को और भी ज्यादा रोमांचक और 'वाइल्ड' बना देगी।
मैंने धीरे से उनके ब्लाउज के बटन पर अपनी उंगलियाँ फेरीं। हर बटन के खुलने के साथ, कमरे की हवा और भी भारी होती जा रही थी। मैंने बहुत ही धीमी गति से (slow motion में) उनके कपड़ों को उनके शरीर से अलग करना शुरू किया। उनकी त्वचा पर पड़ती मेरी उंगलियों की छुअन उन्हें बिजली के झटके की तरह महसूस हो रही थी।
मैंने उनके शरीर के हर इंच को अपनी नज़रों और स्पर्श से महसूस करना शुरू किया। उनकी धड़कनें मेरे सीने से टकरा रही थीं। मैंने उनके वक्ष के पास अपना चेहरा ले जाकर एक गहरा और लंबा चुंबन लिया। उनकी एक लंबी और तेज़ 'आह' कमरे की खामोशी को चीरती हुई निकली। वह अब पूरी तरह से उस कल्पना के जाल में फँस चुकी थीं एक ऐसा अहसास जहाँ मर्यादाएँ खत्म हो चुकी थीं और सिर्फ तीन शरीरों की प्यास और वासना का खेल बाकी था।
मैंने उनके कानों में फिर से फुसफुसाया, **"मम्मी, आप बहुत खूबसूरत लग रही हैं... और जब अंकल आपको इस हालत में देखेंगे, तो वो खुद को रोक नहीं पाएंगे। हम तीनों मिलकर उस रात को एक ऐसा जुनून देंगे जिसे शायद ही हम कभी भूल पाएंगे।"**
मेरा हर स्पर्श, हर चुंबन और हर शब्द उन्हें उस चरम सुख की ओर ले जा रहा था जिसकी कल्पना मात्र से ही उनके शरीर से पसीना छलक रहा था। वह अब सिर्फ मेरी माँ नहीं थीं,, बल्कि एक ऐसी स्त्री बन चुकी थीं जो अपने भीतर दबे हुए सबसे गहरे और अनछुए रोमांच के लिए तड़प रही थीं। मैंने उनके शरीर की उस थरथराहट को महसूस किया जो अब पूरी तरह से वासना के वश में थी। मैंने धीरे से उनके कमर के घेरे को सहलाया और उन्हें मस्ती की एक नई दुनियां कीओर ले जाने लगा। हर हरकत इतनी धीमी और सधी हुई थी कि हम दोनों के बीच का तनाव और भी गहरा होता जा रहा था। उनके चेहरे पर जो 'बोल्डनेस' उभर रही थी, वह उनकी आँखों की चमक और उनके खुले हुए होंठों से साफ़ झलक रही थी। वह अब उस पल का इंतज़ार कर रही थीं जब हम तीनों एक साथ होंगे। मैंने उनके कानों के पास अपनी आवाज़ को और भी भारी करते हुए कहा, **"सोचिए मम्मी, जब अंकल हमारे बीच होंगे और हम दोनों मिलकर उन्हें अपनी इस दीवानगी में शामिल करेंगे, तो वह नज़ारा कितना बेखौफ होगा।"** उनकी आँखों में एक चमक सी कौंधी, एक ऐसी चमक जिसमें अब कोई हिचकिचाहट नहीं थी, सिर्फ एक बेबाक स्वीकारोक्ति थी। हमने एक दूसरे की नज़रों में डूबकर उस आने वाले तूफ़ान को महसूस किया जो हमें एक साथ बहा ले जाने वाला था।
बिस्तर की मखमली चादरों पर हम दोनों के प्यार के खेल के चलते कमरे की हवा में एक अजीब सी भारीपन और कामुकता घुल चुकी थी। उनकी साँसें अब काबू से बाहर थीं, और उनकी आँखों में जो चमक थी, वह अब सिर्फ शर्म नहीं बल्कि एक बेकाबू प्यास थी। मैंने उनके शरीर पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली। जैसे ही मेरा हाथ उनके शरीर के सबसे संवेदनशील हिस्सों की ओर बढ़ा, उन्होंने अपनी कमर को हल्का सा ऊपर उठाया यह उनके शरीर की एक अनकही पुकार थी।
मैंने उनके होंठों को अपने होंठों में भरकर एक ऐसा गहरा और जुनून से भरा चुंबन लिया कि उन्हें सोचने का होश ही न रहे। उनके हाथों ने मेरे कंधों को इतनी जोर से जकड़ लिया कि उनके नाखूनों के निशान मेरी खाल पर उभर आए। मैंने उनके कान के पास जाकर बहुत ही धीमी और गंदी आवाज़ में कहा, **"मम्मी... सोचिए जब अंकल कमरे में आएंगे और देखेंगे कि आप और मैं दोनों मां बेटा इस हालत में हैँ... जब वो देखेंगे कि आप मेरे नीचे इस तरह तड़प रही हैं और उनकी मौजूदगी आपको और भी ज्यादा भीगा रही है... तो वो खुद को कैसे रोक पाएंगे?"**
यह सुनते ही उनके शरीर में एक बिजली सी दौड़ गई। उनके चेहरे पर एक ऐसी 'बोल्ड' और उत्तेजित अभिव्यक्ति आई जो मैंने पहले कभी नहीं देखी थी। वह अब सिर्फ एक माँ नहीं थीं, वह एक ऐसी औरत बन चुकी थीं जो उस 'थ्रीसम' के ख्याल से ही पूरी तरह से गीली और बेताब हो रही थीं। उन्होंने मेरी आँखों में आँखें डालकर, एकदम भारी और कांपती हुई आवाज़ में कहा, **"रवि... बस और नहीं... मुझे अभी तुम्हारा लिंग चाहिए, पूरा जड़ तक... मुझे उस ख्याल से ही इतना अहसास हो रहा है कि मैं खुद को संभाल नहीं पा रही हूँ।"** उनकी आँखों में अब एक जंगलीपन था। उन्होंने मेरे कपड़ों को झटके से खींचना शुरू कर दिया, जैसे उन्हें अब किसी भी मर्यादा या ढोंग की ज़रूरत न हो। उनके हाथों की गर्मी और उनकी बेताबी ने मेरे भीतर के जानवर को पूरी तरह जगा दिया था।
मैंने उनके शरीर के ऊपर झुकते हुए उनके गले के नीचे एक गहरा निशान छोड़ा, जिससे उनके शरीर में एक ज़ोरदार झटका लगा। उनकी 'आह' अब और भी गहरी और कामुक हो चुकी थी। मैंने उनके कानों में फिर से वही गंदी और उत्तेजक बातें करना जारी रखा कैसे अंकल की मौजूदगी में हम दोनों एक दूसरे को और भी बेखौफ तरीके से इस्तेमाल करेंगे, कैसे वह हमें एक साथ देख कर पागल हो जाएंगे। उस कल्पना ने उनके शरीर के भीतर एक ज्वालामुखी सा विस्फोट कर दिया था।
उनकी कमर की लचक और उनके शरीर से निकलने वाली वह तीव्र गर्मी यह बता रही थी कि वह अब पूरी तरह से उस 'वाइल्ड सेक्स' के लिए तैयार थीं। उन्होंने मुझे अपनी ओर खींचते हुए अपने पैरों को मेरी कमर के चारों ओर लपेट लिया, जैसे वह मुझे अपने भीतर समा लेना चाहती हों। अब कमरे में सिर्फ हमारी तेज़ होती साँसों का शोर था और उस आने वाले 'थ्रीसम' की वह बेइंतहा प्यास, जो हमें एक ऐसे चरम की ओर ले जा रही थी जहाँ सिर्फ वासना का राज था।
**"तो फिर तैयार हो जाइए मम्मी... क्योंकि अब जो होने वाला है, वो आपकी रूह को झकझोर देगा।"** मैंने उनकी आँखों में झाँकते हुए कहा, मेरी आवाज़ में एक अजीब सी जंगली भूख थी। उनके शरीर की गर्मी अब असहनीय हो चुकी थी। मैंने उनके शरीर के ऊपर अपना पूरा भार डाल दिया, जिससे उनके और मेरे बीच की ज़रा सी भी जगह खत्म हो गई। उनकी त्वचा मेरी त्वचा से रगड़ खा रही थी और वह घर्षण (friction) हमें दोनों को पागल कर रहा था।
मैंने उनके होंठों पर अपना मुँह रखा और एक ऐसा गहरा, ज़बरदस्त चुंबन लिया जिसमें सिर्फ प्यार नहीं, बल्कि एक बेकाबू वासना थी। उनकी जीभ मेरी जीभ से टकरा रही थी और उनके गले से निकलने वाली आवाज़ें अब चीखों जैसी उत्तेजक हो रही थीं। मैंने उनके शरीर के हर हिस्से को अपने हाथों से ऐसे सहलाया जैसे मैं उन्हें पूरी तरह से निगल जाना चाहता हूँ। उनकी कमर की लचक और उनके शरीर का कांपना यह बता रहा था कि वह उस चरम सुख की दहलीज पर खड़ी हैं।
मैंने उनके कानों के पास फिर से फुसफुसाया, **"सोचिए मम्मी, जब अंकल कमरे में आएंगे और देखेंगे कि आप मेरी बाहों में इस तरह बेसुध पड़ी हैं... कैसे हम दोनों मिलकर उन्हें अपनी इस आग में झोंक देंगे। वह हमें एक साथ देखेंगे और उनकी वासना भी उतनी ही बेकाबू हो जाएगी जितनी हमारी है।"** यह सुनते ही उनके शरीर में एक ज़ोरदार झटका लगा और उन्होंने मेरे बालों को इतनी ज़ोर से पकड़ा कि दर्द महसूस होने लगा, लेकिन वह दर्द भी उस सुख के आगे कुछ नहीं था।
उनकी आँखों से अब आँसू नहीं, बल्कि उत्तेजना की चमक निकल रही थी। मैंने धीरे धीरे उनके कपड़ों के आखिरी हिस्से को भी हटा दिया, जिससे उनका पूरा शरीर मेरी नज़रों के सामने था एक ऐसा नज़ारा जो किसी भी पुरुष को पागल करने के लिए काफी था। उनकी त्वचा पसीने से चमक रही थी और उनकी साँसें अब इतनी तेज़ थीं कि कमरे की हवा भी भारी महसूस हो रही थी।
मैंने उनके शरीर के सबसे संवेदनशील हिस्सों पर अपनी जीभ और होंठों से जादू करना शुरू किया। हर स्पर्श के साथ वह और भी ज़ोर से छटपटा रही थीं। वह अब पूरी तरह से उस 'वाइल्ड सेक्स' के लिए तैयार थीं, जहाँ कोई नियम नहीं था, कोई शर्म नहीं थी सिर्फ एक अंतहीन प्यास थी जिसे बुझाने के लिए हम दोनों बेताब थे।
उनकी साँसें अब पूरी तरह से उखड़ी हुई थीं और उनके शरीर से निकलने वाली गर्मी कमरे के तापमान को बढ़ा रही थी। मैंने उनके शरीर के हर मोड़ को अपने होंठों से नापना शुरू किया। जब मेरी जीभ उनके संवेदनशील हिस्सों को छू रही थी, तो वह अपनी पूरी ताकत से बिस्तर की चादरों को मुट्ठियों में भींच लेती थीं। उनकी आवाज़ अब काबू में नहीं थी; वह बेतहाशा 'आह' और 'ओह' कर रही थीं, जो किसी संगीत की तरह मेरे कानों में गूँज रही थी।
मैंने उनके शरीर के ऊपर अपना पूरा भार डाल दिया और उनके कानों के पास एकदम धीमी और भारी आवाज़ में कहा, **"मम्मी, आप इस वक्त इतनी कामुक लग रही हैं कि अगर अंकल अभी आ जाएं, तो वह आपको देखते ही अपनी सुध बुध खो देंगे। वह देखेंगे कि उनकी प्रेमिका कैसे अपने बेटे के स्पर्श के लिए तड़प रही है... और फिर हम दोनों एक साथ आपको अपनी बाहों में भर लेंगे।"**
यह कल्पना उनके लिए किसी नशीले पदार्थ की तरह काम कर रही थी। उन्होंने अपनी कमर को ऊपर की ओर झटका दिया और मुझे अपने और करीब खींच लिया। उनकी आँखों में अब एक ऐसी प्यास थी जो सिर्फ और सिर्फ चरम सुख से ही बुझ सकती थी। उन्होंने मेरे कान के पास आकर हाँफते हुए कहा, **"रवि... मुझे और इंतज़ार मत कराओ... मुझे इस आग में जला दो... मुझे वह सब चाहिए जो तुमने सोचा है।"**
उनकी इस बेबाकी ने मेरे भीतर के जुनून को विस्फोट की तरह उड़ा दिया। मैंने उनके पैरों को फैलाया और उनके शरीर के बीच के उस हिस्से पर अपना ध्यान केंद्रित किया जो अब पूरी तरह से उनके आने वाले सुख के लिए तैयार था। मैंने धीरे धीरे, बहुत ही धीमी गति (slow motion) में उनके शरीर के सबसे निजी और गीले हिस्से को अपने होंठों से छुआ। वह एक ज़ोरदार चीख के साथ पीछे की ओर झुक गईं, उनकी आँखें ऊपर की ओर पलट गईं और उनका पूरा शरीर एक धनुष की तरह तन गया।
कमरे में अब सिर्फ हमारी रगड़ की आवाज़, हमारे शरीर से निकलने वाले पसीने की महक और उस आने वाले 'थ्रीसम' की वह गंदी और हसीन कल्पना का शोर था। हम दोनों उस मोड़ पर थे जहाँ से वापसी का कोई रास्ता नहीं था सिर्फ एक गहरा, जंगली और अनियंत्रित वासना का समंदर था जिसमें हम डूबने के लिए तैयार थे।
उनकी साँसें अब पूरी तरह से उखड़ी हुई थीं और उनके शरीर से निकलने वाली गर्मी मुझे झुलसा रही थी। मैंने उनके दोनों हाथों को उनके सिर के ऊपर पकड़ लिया और उनकी आँखों में आँखें डालकर कहा, **"मम्मी, अब कोई पर्दा नहीं रहेगा। अब बस हम होंगे और वह बेकाबू वासना जो हम दोनों मिलकर अंकल के साथ साझा करेंगे।"**
उनकी आँखों में एक अजीब सा पागलपन था एक ऐसा पागलपन जो सिर्फ चरम उत्तेजना में ही आता है। उन्होंने अपना सिर पीछे की ओर झटका और एक गहरी, गूँजती हुई आवाज़ में कहा, **"रवि... बस करो... अब और नहीं सहा जाता... मेरे भीतर आ जाओ!"**
मैंने उनके शरीर के बीच के उस हिस्से पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित किया जो अब पूरी तरह से तर और बेताब था। जैसे ही मैंने अपने तपते हुए लिंग का संपर्क उनके सबसे संवेदनशील और गीले हिस्से से बनाया, उनके शरीर में एक ऐसा कंपन हुआ जैसे कोई बिजली का झटका लगा हो। वह चीख पड़ीं, लेकिन वह चीख दर्द की नहीं, बल्कि उस असीमित सुख की थी जिसे वह अब तक सिर्फ महसूस कर रही थीं।
मैंने धीरे धीरे, बहुत ही गहराई और तीव्रता के साथ उनके शरीर के भीतर प्रवेश करना शुरू किया। हर इंच के साथ, उनकी आवाज़ और भी ऊँची और बेकाबू होती जा रही थी। वह मेरे कंधों को अपने नाखूनों से ज़ोर से दबा रही थीं, जैसे वह मुझे अपने अंदर और गहराई तक खींच लेना चाहती हों। उनकी कमर की हर हरकत अब एक लय में थी एक ऐसी लय जो सिर्फ वासना की भाषा समझती थी।
कमरे की हवा अब भारी और कामुक गंध से भर चुकी थी। पसीने की बूंदें हमारे शरीर से टकराकर बिखर रही थीं। मैंने उनके कानों में लगातार वही गंदी बातें जारी रखीं कैसे अंकल हमें इस हालत में देखेंगे, कैसे वह हमारी इस बेताबी को देखकर खुद को रोक नहीं पाएंगे। यह सुनकर वह और भी ज़ोर से छटपटाने लगीं और उनकी 'आहें' अब पूरे कमरे में गूँज रही थीं। हम दोनों उस बिंदु पर पहुँच चुके थे जहाँ से सिर्फ एक ही रास्ता था एक ऐसा धमाका जो हमें पूरी तरह से तोड़कर रख दे।
मम्मी की आँखों में जो वासना थी, वह अब सिर्फ मेरे लिए नहीं थी। वह उस आने वाले पल की कल्पना कर रही थी जब अंकल कमरे में कदम रखेंगे। मैंने उनके कान के पास जाकर अपनी आवाज़ को और भी गंदा और भारी बनाया, "मम्मी... सोचो जब अंकल अंदर आएंगे, तो वो देखेंगे कि आप मेरे नीचे कैसे छटपटा रही हैं और कैसे आप उनके लिए भी तरस रही हैं।"
ये सुनकर मम्मी के शरीर में एक ऐसा विस्फोट हुआ कि वह बिस्तर पर ही तड़पने लगीं। उन्होंने अपनी कमर को और भी ज़्यादा ऊपर उठाया, जैसे वह मुझे अपने अंदर और भी गहराई तक खींचना चाहती हों। "रवि... उफ़्फ़... हाँ! कल्पना करो... जब तेरे अंकल देखेंगे कि उनकी दोस्त की पत्नी कितनी गंदी और कामुक हो चुकी है... वह मुझे कैसे पकड़ेंगे... वह कैसे मुझमें अपना लिंग डालेंगे..." उनकी आवाज़ अब पूरी तरह से वासना के नशे में डूबी हुई थी।
मैंने उनके दोनों पैरों को अपने कंधों पर टिका दिया और पूरी ताकत के साथ अपने लिंग को उनके सबसे गहरे और गीले हिस्से में झोंक दिया। **"आह्ह्ह्ह्ह्ह! रवि! बहुत गहरा... और तेज़ करो! मुझे ऐसा महसूस कराओ जैसे अंकल कर रहे हों!"** वह पागलों की तरह चिल्ला रही थीं। उनके शरीर का हर हिस्सा अब उस थ्रिसम के ख्यालों से कांप रहा था।
मैंने उनके स्तनों को ज़ोर से भींचते हुए और उनके चेहरे को अपने पसीने से लथपथ शरीर से रगड़ते हुए अपनी गति को और भी हिंसक बना दिया। कमरे में सिर्फ मांस के टकराने की आवाज़ और अंजलि की वह गंदी, बेकाबू आहें गूँज रही थीं। "मम्मी, आप तैयार हैं न? जब अंकल आएंगे, तो आप उनके सामने भी ऐसे ही अपनी योनि खोलकर खड़ी होंगी और उनसे कहेंगी कि वो आपको भर दें!"
यह सुनते ही मम्मी का मानसिक संतुलन पूरी तरह टूट गया। उन्होंने मेरे बालों को ज़ोर से खींचा और अपनी पूरी ताकत से मेरे शरीर से चिपक गईं। उनकी योनि की दीवारें मेरे लिंग को इतनी ज़ोर से जकड़ रही थीं कि मुझे लगा मेरा निकल जाएगा। "हाँ रवि! हाँ! मैं उनके सामने भी ऐसे ही गिड़गिड़ाऊँगी... मुझे ..उनका भी चाहिए अपने अंदर!"
मैंने उनके चेहरे को अपने हाथों में जकड़ लिया और उनकी आँखों में आँखें डालकर ज़ोर से कहा, "मम्मी, आप सिर्फ मेरे लिए नहीं तड़प रही हैं... आप उस पल के लिए तड़प रही हैं जब अंकल आपके इस गीलेपन को अपने हाथों से महसूस करेंगे। सोचिए, जब वो कमरे में कदम रखेंगे और देखेंगे कि आप मेरे नीचे इस तरह बेसुध पड़ी हैं, तो वो क्या करेंगे?"
अंजलि की साँसें अब पूरी तरह से उखड़ रही थीं। उनके शरीर से पसीने और उत्तेजना की गंध आ रही थी। उन्होंने अपनी आँखें मूँद लीं और कल्पना में डूबते हुए कहा, **"रवि... वो देखेंगे कि मैं कितनी गंदी हो गई हूँ... वो देखेंगे कि मैं कैसे तुम्हारे साथ इस तरह खेल रही हूँ... वो मुझे वहीं पकड़ लेंगे और..."** वह अपनी बात पूरी नहीं कर पाईं क्योंकि मैंने एक बहुत ही ज़ोरदार और गहरा प्रहार किया।
**"आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह! रवि! उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़!"** अंजलि की चीख इतनी तेज़ थी कि लगा जैसे पूरे घर में गूँज जाएगी। मैंने उन्हें 'डॉगगी स्टाइल' में पलट दिया। उनकी कमर अब पूरी तरह से हवा में उठी हुई थी और उनका पिछला हिस्सा मेरे सामने पूरी तरह से खुला और लाल हो चुका था। मैंने उनके कूल्हों को अपने हाथों से इतनी ज़ोर से पकड़ा कि वहाँ उंगलियों के निशान पड़ गए।
मैंने उनके कानों के पास जाकर फुसफुसाया, "मम्मी, कल्पना कीजिए... मैं पीछे से आपको भर रहा हूँ और अंकल सामने खड़े होकर आपको देख रहे हैं। वो देखेंगे कि आपकी योनि कैसे मेरे लिंग को चूस रही है। वो देखेंगे कि आप कैसे उनके लिए भी अपनी आँखें खोल रही हैं।"
यह सुनकर अंजलि का शरीर बिजली की तरह कांप उठा। उन्होंने अपने हाथ बिस्तर की चादरों में गाड़ दिए और अपनी कमर को पीछे की ओर झटकते हुए मेरे लिंग को और भी गहराई तक खींचने लगीं। **"हाँ रवि! हाँ! अंकल को देखने दो! उन्हें देखने दो कि उनकी दोस्त की पत्नी कितनी प्यासी है! मुझे उनके सामने भी ऐसे ही घुटनों के बल गिरा दो! मुझे उनके और तुम्हारे बीच में दबा दो!"**
उनकी ये गंदी और बेबाक बातें सुनकर मेरा संयम पूरी तरह टूट गया। मैंने अपनी गति को और भी हिंसक और जंगली बना दिया। मांस के टकराने की आवाज़ **'चप चप चप'** पूरे कमरे में गूँज रही थी। मैं उन्हें इतनी ज़ोर से झटक रहा था कि उनका पूरा शरीर आगे पीछे हो रहा था। अंजलि अब सिर्फ एक जानवर की तरह कराह रही थीं, उनकी आवाज़ में अब शब्द नहीं बल्कि सिर्फ शुद्ध वासना थी। "रवि... और तेज़... और ज़ोर से... मुझे खत्म कर दो! मुझे खत्म कर दो!! मुझे पूरी तरह से बर्बाद कर दो!" उनकी आवाज़ अब एक बेकाबू चीख में बदल चुकी थी। उनकी योनि का रास्ता मेरे लिंग के घर्षण से इतना गर्म और गीला हो चुका था कि हर प्रहार के साथ एक गंदा सा शोर निकल रहा था। मैंने उनके कूल्हों को अपनी मुट्ठियों में जकड़कर उन्हें अपनी तरफ खींचा और एक ऐसा झटका दिया कि उनका पूरा शरीर धनुष की तरह तन गया।
"मम्मी, अब बस होने वाला है... जब अंकल आएंगे, तो वो आपके इस गीलेपन को देखेंगे, आपके इस लाल हो चुके शरीर को देखेंगे... और वो भी आप पर टूट पड़ेंगे!" मैंने उनके कानों के पास हाँफते हुए कहा।
अंजलि ने पागलों की तरह सिर हिलाया, "हाँ! हाँ! उन्हें आने दो! मुझे उनके और तुम्हारे बीच में पिसा जाना है! मुझे दोनों के लिंगों से भर जाना है! आआआह्ह्ह्ह्ह!"
जैसे ही उन्होंने यह कहा, उनके शरीर में एक ज़ोरदार झटका लगा। उनकी योनि की मांसपेशियां मेरे लिंग को इतनी ज़ोर से भींचने लगीं कि मेरा वीर्य निकलने ही वाला था। मैंने अपनी पूरी ताकत झोंक दी और आखिरी कुछ प्रहार इतने हिंसक किए कि अंजलि की चीखें कमरे की छत से टकराकर वापस आने लगीं। अंत में, मैंने उनके सबसे गहरे हिस्से में अपना सारा गर्म वीर्य उगल दिया, और ठीक उसी पल अंजलि भी चरम सुख की लहर में डूबकर बिस्तर पर बेसुध होकर गिर पड़ीं, उनकी आँखें अभी भी उस थ्रिसम के ख्यालों में डूबी हुई थीं।
दोस्तो,**अब कहानी आपके हाथों में है! आप आगे क्या देखना चाहते हैं? नीचे कमेंट में अपना विकल्प चुनें:**
चलिए मैं आपको दोनों विकल्पों का एक छोटा सा **'Preview'** लिखकर दिखाता हूँ। इससे आप समझ पाएंगे कि कहानी किस दिशा में मुड़ सकती है। आप इनमें से जो भी पसंद करेंगे, हम उसी पर पूरी कहानी आगे बढ़ाएंगे।
### **विकल्प 1: पूर्ण तृप्ति (Complete Satisfaction)*
मम्मी की साँसें धीरे धीरे सामान्य हो रही थीं। उनके चेहरे पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं और उनकी आँखों में एक ऐसी गहरी शांति थी जो सिर्फ चरम सुख के बाद ही आती है। उन्होंने मेरा हाथ थाम लिया और अपना सिर मेरे सीने पर रख दिया। उनकी आवाज़ में अब कोई उत्तेजना नहीं थी, बस एक गहरी थकावट और संतुष्टि थी। "रवि... आज तुमने मुझे सच में पूरा कर दिया," उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा। कमरे में एक सुकून भरी खामोशी छा गई थी, जैसे दुनिया थम गई हो। वह अब बस मेरी बाहों में सिमटकर एक गहरी और मीठी नींद में खो जाना चाहती थीं।
### **विकल्प 2: अनबुझी प्यास (Unquenched Thirst)**
मम्मी का शरीर थरथरा रहा था, लेकिन यह थकावट की थरथराहट नहीं थी यह अभी भी दबी हुई वासना की तड़प थी। उन्होंने मेरी आँखों में देखा, और उनकी आँखों में वह चमक अभी भी बुझी नहीं थी। उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर अपनी गीली और गर्म योनि के ऊपर रखा और जोर से दबाया। "नहीं रवि... अभी नहीं... अभी तो सिर्फ शुरुआत हुई है," उन्होंने हाँफते हुए कहा। उनकी साँसें फिर से तेज होने लगीं और उन्होंने मेरी ओर देखते हुए एक ऐसी मांग की जिससे मेरा खून खौल उठा। "मुझे और चाहिए... मुझे उनके आने का इंतज़ार नहीं हो रहा... मुझे अभी और भी गहरा और और भी गंदा चाहिए!" उनकी आँखों में वह भूख साफ़ दिख रही थी जो किसी भी चीज़ से शांत नहीं होने वाली थी।
**अब आप बताइए:**
आपको कौन सा मोड पसंद आया? **Option 1** (सुकून वाला अंत) या **Option 2** (जुनून और भूख वाला दूसरा सेशन)?
आप जो चुनेंगे, मैं उसी के आधार पर कहानी का अगला हिस्सा और भी ** खुलेपन** के साथ लिखूँगा।
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(10-09-2026, 04:48 PM)Asli lund Wrote: Option 2
**Asli Lund bhai, बहुत बहुत शुक्रिया! ❤️ इतने दिनों बाद आपका वापस आना और अपना विकल्प चुनना देखकर बहुत अच्छा लगा। आपने तो अपना फैसला बता दिया है!**
**अब मैं देखना चाहता हूँ कि बाकी पाठक क्या सोचते हैं। आप सभी के वोटों और पसंद के आधार पर ही हम तय करेंगे कि अंजलि की कहानी किस दिशा में मुड़ेगी। तो जल्दी से अपना वोट दें! ?**
**असली लंड भाई, वैसे आपको Option 2 ही क्यों पसंद आया? क्या आप अपनी पसंद की वजह बताना चाहेंगे? मुझे आपकी राय जानकर खुशी होगी! ✨"**
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Kyuki uncle mummy ka pahla pyar he aur mumym ke liye ye bahut khushi ki bat he unka beta unhe unke pyar se mila rsha he isse bhi jyada khushi is bat ki vo bhi usme Shamil hoga sur dono mummy ko pyar karenge aur isse mumym ko jyada maza ayega mumym is bat se khudh se mujhe ek sath dono ka pyar milega isse bahut maza ayega aur mummy khudh he aur ho sakta he future me mummy ki chut per beta uncle ka l7nd pakad ke set ksre
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(10-09-2026, 05:45 PM)Asli lund Wrote: Kyuki uncle mummy ka pahla pyar he aur mumym ke liye ye bahut khushi ki bat he unka beta unhe unke pyar se mila rsha he isse bhi jyada khushi is bat ki vo bhi usme Shamil hoga sur dono mummy ko pyar karenge aur isse mumym ko jyada maza ayega mumym is bat se khudh se mujhe ek sath dono ka pyar milega isse bahut maza ayega aur mummy khudh he aur ho sakta he future me mummy ki chut per beta uncle ka l7nd pakad ke set ksre
> "Oho! आपने तो काफी आगे की सोच ली है! ? आपकी कल्पना वाकई बहुत तीव्र और रोमांचक है। आपने जिस तरह से इस सीन को इमेजिन किया है, वह काफी 'Bold' है। शुक्रिया इतनी विस्तार से अपनी पसंद बताने के लिए! ❤️
>
> सच कहूँ तो, आपने बहुत ही गहराई से और अपनी कल्पना से सोचकर यह जवाब दिया है। आपकी सोच से पता चल रहा है कि आप कहानी के किरदारों के बीच के इस रोमांचक मोड़ को लेकर कितने उत्साहित हैं। देखते हैं कि कहानी आगे किस तरफ मुड़ती है! आपकी इस 'Bold' राय के लिए बहुत बहुत शुक्रिया। ??"
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10-09-2026, 10:10 PM
(This post was last modified: 10-09-2026, 10:11 PM by Motalund14. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
(10-09-2026, 05:43 PM)Eswar P Wrote: Very nice bro
Thanks
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(10-09-2026, 07:32 PM)MARVIN Wrote: Very nice update
Thanks bro
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(10-09-2026, 11:49 PM)saya Wrote: option 2
> "Welcome back, Saya! ? आपकी पसंद हमेशा की तरह बहुत Interesting है। लगता है आपको Option 2 का बेसब्री से इंतज़ार है! देखते हैं आगे क्या होता है। ❤️✨"
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Sur please update dijiye aur option 2 hamara manna he lekin app writer he hum apko force nahi karenge app option 2 choose karw lekin sir app khud decided karke please update de
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काम की व्यस्तता की वजह से अपडेट में थोड़ा विलंब (delay) हो गया है। जल्द ही नया और और भी धमाकेदार अपडेट आने वाला है। थोड़ा धैर्य बनाए रखें! धन्यवाद।"**
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(13-09-2026, 06:13 PM)Motalund14 Wrote: काम की व्यस्तता की वजह से अपडेट में थोड़ा विलंब (delay) हो गया है। जल्द ही नया और और भी धमाकेदार अपडेट आने वाला है। थोड़ा धैर्य बनाए रखें! धन्यवाद।"**
Hame intezar h apke update ka ye app decide kare apko konsa option dena ye ham dono hi option me se jo bhi app doge use accept karenge syr pura man lagakar padenge aur hame pura bhaosha he app jald update denge
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(14-09-2026, 12:55 AM)Viraj007 Wrote: Option 2
Ok dost!
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आप पढ़ चुके हैं कि कैसे मैंने मम्मी को थ्रिसम के लिए मनाया और फिर उस थ्रिसम के नशे में उन्हें उकसाते हुए उनकी चूत में अपना गरम लिंग उतार दिया। थ्रिसम के उस खौफनाक ख्याल ने मम्मी को इतना मदहोश कर दिया था कि वो अपनी ही चूत की गीली आग में जल रही थीं। लेकिन अभी तो रात जवान हुई थी और असली खेल तो अभी शुरू होना बाकी था। थ्रिसम की वो तड़प और मेरे लिंग की वो बेताबी अभी बुझी नहीं थी... अब आगे क्या हुआ, उस बेकाबू और जंगली रात का क्या मंजर था... चलिए देखते हैं।"
मम्मी का शरीर थरथरा रहा था, लेकिन यह थकावट की थरथराहट नहीं थी यह अभी भी दबी हुई वासना की तड़प थी। उन्होंने मेरी आँखों में देखा, और उनकी आँखों में वह चमक अभी भी बुझी नहीं थी। उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर अपनी गीली और गर्म योनि के ऊपर रखा और जोर से दबाया। "हाँ रवि... मूझे अभी और करना ह मुझे अभी और चोदो," उन्होंने हाँफते हुए कहा। उनकी साँसें फिर से तेज होने लगीं और उन्होंने मेरी ओर देखते हुए एक ऐसी मांग की थी जिससे मेरा खून खौल उठा। " हाँ मुझे और चोदो... मुझे उनके आने का इंतज़ार नहीं हो रहा... मुझे अभी और भी गहरा और और भी गंदा चाहिए!" उनकी आँखों में वह भूख साफ़ दिख रही थी जो किसी भी चीज़ से शांत नहीं होने वाली थी।
जैसे ही मम्मी ने मेरा हाथ अपनी उस दहकती हुई, गीली गहराई पर टिकाया, मेरे पूरे शरीर में बिजली सी दौड़ गई। उनकी योनि की गर्मी और वहाँ की धड़कन मेरी उंगलियों के जरिए सीधे मेरे दिमाग पर वार कर रही थी। मम्मी की आँखों में अब कोई शर्म नहीं थी, बस एक जंगली भूख थी जो मुझे अंदर से जला रही थी। "मम्मी... आप पागल हो गई हैं क्या?" मैंने लड़खड़ाती आवाज़ में कहा, लेकिन मेरा हाथ खुद ब खुद उस गीलेपन को और गहराई से महसूस करने लगा।
मम्मी ने मेरा चेहरा अपने हाथों में लिया और मुझे अपनी ओर खींच लिया। उनकी गरम साँसें मेरे चेहरे पर लग रही थीं। उन्होंने मेरे कान के पास आकर एक ऐसी बात फुसफुसायी जिससे मेरा खून खौल उठा। "पागल तो मैं तब होऊंगी रवि, जब तू मुझे पूरी रात चोदेगा... देख मेरी हालत, मेरा शरीर कैसे आग की तरह जल रहा है।"
तभी उनकी आँखों में एक ऐसी चमक आई जिसने मुझे हिला कर रख दिया। उन्होंने मुझे थोड़ा पीछे धकेला और बड़ी बेबाकी से मेरी आँखों में देखते हुए कहा, **"क्यों रवि? तू सोच रहा है कि मैं सिर्फ तेरे लिए तड़प रही हूँ? मुझे तो प्रदीप भाई साहब के साथ मिलकर ये सब करना है... मैं चाहती हूँ कि वो और तू, दोनों मिलकर मुझे इस कदर चोदो कि मैं होश ही खो दूँ!"**
प्रदीप अंकल का नाम सुनते ही मेरे अंदर एक अजीब सी हलचल मच गई। उनकी बात सुनकर मेरी उत्तेजना अपने चरम पर पहुँच गई थी। लेकिन मम्मी अभी रुकी नहीं थीं। उन्होंने मेरा हाथ फिर से पकड़ा और उसे अपनी जांघों के बीच और जोर से दबा दिया। उनकी आवाज़ में अब एक आदेश था और एक बेकाबू तड़प भी।
**"अरे छोड़ न प्रदीप भाई साहब की बात बाद में... पहले तू ही अपनी माँ को जी भर के चोद! मुझे अभी इसी वक्त चाहिए... मुझे अपनी इस प्यास को तेरी मर्दानगी से बुझाना है। आ और मुझे अपनी इस गीली आग में डुबो दे!"**
उनकी ये बेबाक मांग सुनकर मेरा सारा संयम टूट गया। उनकी आँखों की वो भूख और उनके शरीर की वो थरथराहट मुझे अपनी ओर खींच रही थी। मुझे अब और इंतज़ार नहीं करना था।
***उनकी ये गंदी और कामुक मांग सुनकर मैंने अपनी पैंट की ज़िप खोली और अपना उत्तेजित और कड़ा हुआ अंग बाहर निकाला। मम्मी की नज़रें जैसे ही मेरे उस भारी और गर्म अंग पर पड़ीं, उनकी आँखें फैल गईं और उनके मुँह से एक लंबी, थ्रिलिंग आह निकली। "ओह गॉड... रवि... तू तो सच में एक मर्द बन गया है... आ... अब और इंतज़ार मत कर बेटा... अभी के अभी अपने hard और गर्म लंड से फाड़ दे अपनी माँ की चुत! मुझे अभी इसी वक्त चोद डाल!" उन्होंने अपनी आँखें बंद कर लीं और अपना चेहरा पीछे की ओर झुका दिया।
इससे पहले कि मैं लंड उनकी चूत में डालता, मैंने अपना एक हाथ उनकी गीली और तड़पती हुई योनि के मुहाने पर रखा। जैसे ही मेरी उंगलियाँ उनकी उस गर्म और चिपचिपी गहराई को छू रही थीं, मम्मी का शरीर थरथराने लगा। मैंने अपनी उंगलियों को धीरे धीरे उनके अंदर धंसाना शुरू किया। "आह्ह्ह्ह... हाँ रवि... और गहरा... और गंदा कर मुझे... उफ़्फ़!" उनकी आवाज़ में अब सिर्फ और सिर्फ वासना थी। मैंने अपनी उंगलियों को उनके अंदर तेज़ी से ऊपर नीचे करना शुरू किया, जिससे उनके अंदर से निकलने वाला वो गंदा और चिकना तरल (fluid) मेरी उंगलियों पर लिपट गया। उनकी वो गीली और तड़पती हुई गहराई मेरी उंगलियों को इतनी ज़ोर से जकड़ रही थी कि मुझे समझ आ गया कि वो अंदर से कितनी बेकाबू हो चुकी हैं।
मैंने अपनी उंगलियाँ बाहर निकालीं और बिना एक पल गँवाए उनका शरीर अपनी ओर खींचा और अपना वो तप्त और कड़ा अंग उनकी उस गीली और तड़पती हुई गहराई के मुहाने पर टिका दिया। जैसे ही मैंने हल्का सा दबाव डाला, मम्मी के मुँह से एक ऐसी गंदी और गहरी कराह निकली जो कमरे की खामोशी को चीर गई। "हाँ... हाँ रवि... वहीं... बिल्कुल वहीं... मार मुझे!" उन्होंने अपनी जांघों को और कसकर मेरी कमर के चारों ओर जकड़ लिया, जैसे वो मुझे अपने अंदर समा लेना चाहती हों।
मैंने एक झटके के साथ अपना पूरा लंड उनके उस तंग और गर्म छेद के अंदर उतार दिया। मम्मी का शरीर एक भयानक और सुखद झटके के साथ काँप उठा। "आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह! रवि... तूने मुझे मार डाला... कितना गहरा... कितना गंदा है ये!" वो पागलों की तरह चिल्लाने लगीं। उनकी उंगलियाँ मेरी पीठ में अपने नाखून गड़ा रही थीं, जैसे वो दर्द और मज़े के बीच के उस महीन धागे को पकड़ने की कोशिश कर रही हों। उनकी वो गीली और गर्म दीवारें मेरे अंग को इतनी ज़ोर से जकड़ रही थीं कि मुझे लगा मेरा फटना तय है।
मैंने उनके शरीर को पूरी तरह से अपने वश में कर लिया था। मैंने अपनी कमर को पीछे खींचकर एक ज़ोरदार झटका दिया और फिर पूरी ताकत के साथ उनके अंदर गहराई तक उतर गया। "आह्ह्ह... उफ़्फ़... रवि... और तेज़... और गंदा मार मुझे!" मम्मी की आवाज़ अब एक जानवर की तरह कराह रही थी। उनकी आँखों में अब सिर्फ और सिर्फ वासना का समंदर था।
मैंने अपनी गति बढ़ा दी। हर झटके के साथ उनके शरीर से निकलने वाली वो 'छप छप' की गीली आवाज़ कमरे में गूँज रही थी। उनकी योनि से निकलने वाला वो गाढ़ा और चिकना तरल अब मेरे अंग और उनकी जांघों के बीच फैलकर एक गंदी फिसलन पैदा कर रहा था। "हाँ... ऐसे ही... बिल्कुल ऐसे ही... आ... आह्ह्ह्ह!" वो अपनी आँखें मूँदकर पागलों की तरह सिर हिला रही थीं।
उनकी हर साँस में अब सिर्फ मेरा नाम और प्रदीप अंकल का ज़िक्र था, जो इस माहौल को और भी ज़्यादा गंदा और रोमांचक बना रहा था। "रवि... तू बिल्कुल प्रदीप जैसा कर रहा है... बस और ज़ोर से... मुझे तोड़ दे आज!" उनकी ये बात सुनकर मेरा खून और भी ज़्यादा खौल उठा। मैंने उनकी दोनों टांगों को अपने कंधों पर उठा लिया ताकि मैं और भी गहराई तक पहुँच सकूँ। अब मैं बिना रुके, एक जंगली जानवर की तरह उन पर वार कर रहा था। उनकी तंग और गर्म गहराई मेरे हर झटके को सोख रही थी, और मैं बस उस चरम सुख की ओर बढ़ रहा था जहाँ सब कुछ खत्म हो जाने वाला था।
मैंने उनकी टांगों को अपने कंधों पर और भी ऊपर खींच लिया, जिससे उनकी वो तंग और गीली गहराई अब पूरी तरह से मेरे सामने खुली हुई थी। अब मैं उनके शरीर के एकदम करीब था, और हर झटके के साथ हमारा मांस आपस में टकराकर एक गंदी और कामुक 'चटाक चटाक' की आवाज़ कर रहा था। मम्मी का पूरा शरीर पसीने से तर बतर हो चुका था और उनकी छातियाँ उत्तेजना के मारे तेज़ी से ऊपर नीचे हो रही थीं।
"आह्ह्ह्ह! रवि... रुक मत बेटा... और ज़ोर से! मुझे पूरी तरह से मसल दे!" वो पागलों की तरह चिल्ला रही थीं। उनकी आवाज़ में अब कोई शर्म नहीं बची थी, सिर्फ एक भूखी और प्यासी औरत की तड़प थी। मैंने अपनी कमर की रफ़्तार और बढ़ा दी। अब मैं रुक नहीं रहा था, मैं बस उन पर वार कर रहा था। मेरी हर धक्के से लिंग उनके गर्भाशय के मुहाने से टकरा रहा था, जिससे उनके मुँह से बेकाबू कराहें निकल रही थीं।
"ओह गॉड... रवि... तू बहुत गंदा है... बिल्कुल प्रदीप भाई की तरह... आ... आह्ह्ह्ह!" उन्होंने मेरा नाम पुकारते हुए अपनी कमर को ऊपर की ओर झटका दिया ताकि मैं और भी गहराई तक जा सकूँ। उनकी वो गीली दीवारें मेरे अंग को इतनी ज़ोर से भींच रही थीं कि मुझे महसूस हो रहा था कि मेरा वीर्य बस निकलने ही वाला है। उनकी योनि से निकलने वाला वो गर्म और चिकना तरल अब मेरे अंडकोष और उनकी जांघों के बीच एक गंदी फिसलन पैदा कर रहा था।
मैंने उनके दोनों हाथों को पकड़कर उनके सिर के ऊपर दीवार से सटा दिया और अब मैं एक जंगली जानवर की तरह उन पर टूट पड़ा था। "मम्मी... आप बहुत ज़्यादा गीली हैं... आप कितनी गंदी और कामुक हैं!" मैंने उनके कान के पास फुसफुसाते हुए कहा, जिससे उनकी उत्तेजना और भी बढ़ गई।
"हाँ... मैं बहुत गंदी हूँ... मुझे और गंदा कर दे रवि... मुझे अभी के अभी अपने अंदर तेरा गरम वीर्य अंदर चाहिए!" उनकी ये मांग सुनकर मेरा संयम टूट गया। मैंने अपनी रफ़्तार को अपनी चरम सीमा तक पहुँचा दिया। हर झटके के साथ मैं उनके अंदर और गहराई तक धँस रहा था। कमरे में सिर्फ हमारी भारी साँसों की आवाज़ और हमारे अंगों के टकराने की वो गंदी आवाज़ गूँज रही थी। मैं बस उस पल का इंतज़ार कर रहा था जब मैं उनके उस तंग और गर्म मांस के अंदर अपना सारा गर्म वीर्य उगल दूँगा।लंड के अंदर और बाहर आने जाने की गति अब इतनी तेज़ हो चुकी थी कि मुझे अपनी आँखों के सामने अंधेरा सा दिखने लगा था। मम्मी का शरीर अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुका था; वो बिस्तर पर पागलों की तरह छटपटा रही थीं और उनकी कमर हर झटके के साथ मेरी तरफ ऊपर उठ रही थी, जैसे वो मुझे अपने अंदर और भी गहराई तक खींचना चाहती हों। "रवि... आ... आ... मैं आने वाली हूँ! मैं बस टूटने वाली हूँ! आह्ह्ह्ह्ह्ह!" उनकी आवाज़ एक चीख में बदल गई।
उनकी योनि की दीवारें अब मेरे अंग को इतनी ज़ोर से भींच रही थीं कि मुझे महसूस हुआ जैसे वो मुझे निचोड़ देंगी। उनकी उत्तेजना का चरम अब सामने था। मैंने उनके दोनों पैरों को और ज़ोर से अपने कंधों पर टिकाया और आखिरी कुछ झटके पूरी ताकत और पागलपन के साथ दिए। "मम्मी... मैं भी... मैं भी बस निकलने वाला हूँ!" मैंने उनके कान के पास गुर्राते हुए कहा।
तभी मम्मी का पूरा शरीर एक ज़ोरदार झटके के साथ अकड़ गया। उनकी आँखें पीछे की ओर पलट गईं और उनके मुँह से एक लंबी, थरथराती हुई कराह निकली। "आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह
की वो लंबी कराह अभी खत्म भी नहीं हुई थी कि मम्मी का पूरा शरीर किसी बिजली के झटके की तरह काँप उठा। उनकी योनि के अंदर की मांसपेशियाँ इतनी ज़ोर से मेरे अंग को जकड़ रही थीं कि मुझे लगा मेरा दम निकल जाएगा। वो चरम सुख (orgasm) के उस भयंकर दौर में थीं जहाँ उन्हें होश ही नहीं था कि वो कहाँ हैं। "आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह! रवि...उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्
...रवि! मुझे मार डाल! आ... आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह!" उनकी आवाज़ कमरे की दीवारों से टकराकर गूँज रही थी। उनके शरीर से पसीने की बूंदें टपक रही थीं और उनकी साँसें इतनी तेज़ थीं कि जैसे वो अभी दम तोड़ देंगी। उनके चरम सुख की वो तड़प इतनी तीव्र थी कि उनके पूरे शरीर में कंपन होने लगा।
उसी पल, मेरा भी सब्र का बांध टूट गया। मैंने अपनी कमर को एक आखिरी और सबसे गहरा झटका दिया, जैसे मैं उनके गर्भाशय के बिल्कुल मुहाने तक पहुँच जाना चाहता हूँ। "मम्मी... मैं... मैं आ गया! आआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह!" मैंने चिल्लाते हुए अपना सारा ज़ोर लगा दिया।
मेरे अंग के अंदर से गर्म, गाढ़ा और उबलता हुआ वीर्य एक थपेड़े की तरह उनके अंदर फूट पड़ा। मैं महसूस कर सकता था कि मेरा सारा रस उनके उस तंग और गर्म मांस के अंदर कितनी गहराई तक जा रहा है। जैसे ही मेरा वीर्य उनके अंदर उगलना शुरू हुआ, मम्मी ने भी एक आखिरी बार अपने शरीर को ऐंठ लिया और उनके शरीर से एक ऐसी आवाज़ निकली जो दर्द और असीम सुख का मिश्रण थी।
हम दोनों ही पसीने से लथपथ, हाँफते हुए एक दूसरे के ऊपर गिर पड़े। कमरे में एक अजीब सी भारी और कामुक शांति छा गई थी, जिसे सिर्फ हमारी तेज़ चलती साँसों की आवाज़ तोड़ रही थी। मम्मी का शरीर अभी भी हल्के हल्के काँप रहा था और उनका चेहरा पूरी तरह से सुध बुध खो चुका था। उन्होंने धीरे से अपनी आँखें खोलीं और मेरी तरफ देखा उनकी आँखों में अब भी वही वासना और एक अजीब सी संतुष्टि थी। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और अपने भीगे हुए चेहरे के पास ले गईं, "रवि... तूने तो सच में मुझे तोड़ दिया..."
हम दोनों पसीने से लथपथ, बिस्तर पर एक दूसरे से चिपके हुए पड़े थे। कमरे में अब भी उस कामुकता की भारी गंध फैली हुई थी। मम्मी का शरीर पूरी तरह ढीला पड़ चुका था, जैसे उनकी सारी ऊर्जा मैंने निचोड़ ली हो। उनकी आँखें आधी खुली थीं और साँसें अब धीरे धीरे सामान्य हो रही थीं, लेकिन उनके चेहरे पर जो सुकून था, वो बता रहा था कि उन्होंने अभी अभी स्वर्ग का अनुभव किया है।
मैंने उनके माथे से पसीने की एक लट हटाई और उनके चेहरे को प्यार से निहारा। तभी मम्मी ने धीरे से अपनी आँखें खोलीं और एक लंबी, थकी हुई आह भरी। उन्होंने अपनी एक हाथ से अपने बिखरे हुए बालों को पीछे किया और बहुत ही शरारती लेकिन थकी हुई मुस्कान के साथ मेरी तरफ देखा।
उन्होंने अपनी कांपती हुई आवाज़ में, जो अभी भी उत्तेजना से भारी थी, धीरे से कहा, "रवि... तू सच में बहुत खराब है... बिल्कुल जंगली जानवर की तरह टूट पड़ा था मुझ पर।" उन्होंने अपना एक हाथ धीरे से अपने पेट पर फेरा और फिर मेरी तरफ इशारा करते हुए अपनी बिखरी हुई हालत और लाल पड़ चुकी त्वचा को दिखाया। "देख... देख मेरी क्या हालत कर दी तूने! मैं तो हिल भी नहीं पा रही हूँ... मेरी तो पूरी जान ही निकल गई है।"
कहते हुए उन्होंने एक हल्की सी मुस्कान दी और अपनी आँखें मूँद लीं, जैसे वो अपनी इस 'शिकायत' का आनंद ले रही हों। उनकी आवाज़ में कोई गुस्सा नहीं था, बल्कि एक ऐसी शरारत थी जो कह रही थी कि उन्हें यह 'बुरा व्यवहार' बहुत पसंद आया। उन्होंने अपना सिर मेरे सीने पर रख दिया और धीरे से फुसफुसायीं, "इतनी ताकत कहाँ से लाता है तू? थोड़ा रहम भी कर लिया कर..."
उनकी ये बात सुनकर मुझे और भी ज़्यादा उन्हें अपनी बाहों में भींच लेने का मन करने लगा। उनकी ये थकी हुई और शरारती अदा मुझे और भी ज़्यादा उत्तेजित कर रही थी।
उनकी उस शरारती शिकायत ने मेरे अंदर की आग को फिर से भड़का दिया। मम्मी का वो थका हुआ लेकिन कामुक अंदाज़ मुझे और भी ज़्यादा उकसा रहा था। मैंने उनके चेहरे को अपने हाथों में लिया और उनके माथे को चूमते हुए उनके कान के पास झुक गया। "मम्मी... अगर आपको ये हालत पसंद आई है, तो अगली बार मैं और भी ज़्यादा खराब बनूँगा," मैंने बहुत ही धीमी और गहरी आवाज़ में फुसफुसाते हुए कहा।
उनकी साँसें एक बार फिर तेज़ होने लगीं। उन्होंने अपनी आँखें खोलीं और मुझे एक ऐसी नज़र से देखा जिसमें शिकायत कम और फिर से वही पुरानी प्यास ज़्यादा थी। "तू फिर से शुरू हो गया?" उन्होंने नकली गुस्से के साथ कहा, लेकिन उनके हाथ मेरे बालों में उलझ गए और उन्होंने मुझे अपनी तरफ और खींच लिया। "अभी तो मैं हिल भी नहीं पा रही हूँ, और तुझे फिर से वही सब करना है?"
मैंने मुस्कुराते हुए उनके गले पर अपने होंठ रख दिए। "हिलने की ज़रूरत ही क्या है? बस लेटे रहो और मुझे अपना काम करने दो।" मैंने धीरे से अपना हाथ उनके पसीने से भीगे हुए शरीर पर फेरा। उनकी त्वचा अभी भी गर्म थी और मेरे स्पर्श से वो हल्की सी सिहरन महसूस कर रही थीं। मैंने धीरे से उनके कान के नीचे अपनी जीभ से एक हल्का सा स्पर्श किया, जिससे उनके मुँह से एक दबी हुई कराह निकल पड़ी। "आह्ह्ह्ह... रवि... तू रुकता क्यों नहीं है?"
मैंने उनके शरीर के निचले हिस्से की तरफ हाथ बढ़ाया। जहाँ अभी कुछ देर पहले तक हम दोनों एक दूसरे में खोए हुए थे, वहाँ अब भी एक अजीब सी नमी और गर्माहट महसूस हो रही थी। मैंने महसूस किया कि उनकी योनि की दीवारें अभी भी धीरे धीरे स्पंदित (pulsating) हो रही थीं। "मम्मी, आपकी ये हालत बता रही है कि आप अभी थकी नहीं हैं... आप तो अभी भी मेरे लिए तरस रही हैं," मैंने उनकी आँखों में आँखें डालकर कहा।
उन्होंने अपनी पलकें झुका लीं और एक शरारती मुस्कान के साथ बोलीं, "शायद तू सही कह रहा है... तू इतना गंदा है कि मुझे अब आदत सी हो गई है।" उन्होंने अपनी जांघों को थोड़ा और फैला दिया, जैसे वो मुझे फिर से आमंत्रित कर रही हों। "देख... देख मेरी ये हालत... अब इसे ठीक भी तो कर दे।" उनकी आँखों में अब वो थकावट नहीं, बल्कि एक नई और तीव्र वासना चमक रही थी।
मम्मी की वो शरारती शिकायत और उनकी थकी हुई आवाज़ ने मेरे अंदर की आग को फिर से सुलगा दिया। उनकी बातों में जो इशारा था, उसने मेरे दिमाग में बिजली सी दौड़ा दी। मैंने उनके शरीर को और करीब खींच लिया, जिससे हमारा पसीने से भीगा हुआ मांस एक दूसरे से रगड़ खाने लगा। "मम्मी... अगर आपको लग रहा है कि मैंने आपको थका दिया है, तो आप गलत हैं। अभी तो खेल शुरू हुआ है," मैंने उनके कान के पास जाकर बहुत ही गहरी और भारी आवाज़ में कहा।
मम्मी ने मेरी आँखों में देखा। उनकी आँखों में एक पल के लिए डर था, लेकिन अगले ही पल वही पुरानी भूखी वासना चमक उठी। उन्होंने एक शरारती मुस्कान के साथ अपनी उंगलियाँ मेरे सीने पर फेरते हुए कहा, "अच्छा? तो क्या तू मुझे फिर से बदमाशी करेगा?"
मैंने कोई जवाब नहीं दिया, बस उनके होंठों को अपने होंठों के नीचे दबा लिया। इस बार चुंबन धीमा नहीं था; यह एक भूखे शिकारी का हमला था। उनकी थकी हुई जीभ ने भी हार नहीं मानी और उसने मेरी जीभ का स्वागत किया। उनके शरीर में फिर से एक लहर दौड़ गई। मैंने महसूस किया कि उनकी योनि के पास का हिस्सा अब भी मेरे वीर्य और उनके अपने गीलेपन से पूरी तरह तर था।
मैंने धीरे से अपना हाथ उनके नीचे ले जाकर उनकी जांघों के बीच उस गीली जगह को छुआ। "आह्ह्ह्ह! रवि... नहीं... अभी नहीं..." वो कराह उठीं, लेकिन उन्होंने अपने पैर नहीं हटाए, बल्कि अपनी जांघों को और चौड़ा कर लिया ताकि मैं और गहराई तक पहुँच सकूँ। "तू सच में बहुत बदतमीज़ है... रुक जा..." उनकी आवाज़ में अब भी शिकायत थी, लेकिन उनका शरीर मुझे और पाने के लिए तड़प रहा था।
मैंने उनके कान के पास फुसफुसाया, "मम्मी, आप कह रही थीं कि मैं बहुत खराब हूँ... तो क्यों न मैं आज अपनी इस खराबी को और बढ़ा दूँ?" मैंने उनके शरीर को पलट दिया और अब मैं उनके ऊपर था। उनकी आँखें छत की ओर ताक रही थीं और उनकी साँसें फिर से तेज़ होने लगी थीं। मैंने उनके दोनों हाथों को पकड़कर उनके सिर के पास बिस्तर में गाड़ दिया। "आज मैं आपको चैन से सोने नहीं दूँगा। आज आप बस मेरी बन कर रहोगी।"
मम्मी की आँखों में वासना की ऐसी आग थी जो किसी को भी पागल कर दे। उन्होंने अपनी कमर को मेरी तरफ झटका दिया और मेरे कान के पास आकर एकदम गंदी और भारी आवाज़ में फुसफुसाते हुए कहा, **"तो फिर देर किस बात की है? रुक क्यों गया? चुपचाप घुस जा अपनी इस मां के भोसड़े में! जहाँ से तू निकला है, वहीं अपनी पूरी ताकत लगा दे! दिखा दे मुझे कि तू अपनी माँ को कितना खराब बना सकता है... हाँ, मार मुझे! पूरी तरह से अंदर घुस जा!"**
उनकी ये गंदी चुनौती सुनकर मेरा सब्र जवाब दे गया। मैंने अपने भारी और गरम अंग को उनके तंग और गीले भोसड़े के मुहाने पर टिकाया। जैसे ही मैंने एक ज़ोरदार झटका दिया, मेरा पूरा अंग उनके अंदर गहराई तक धंस गया।
**"आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह!"** मम्मी के मुँह से एक ऐसी चीख निकली जो दर्द और चरम सुख का मिला जुला अहसास थी। उनके शरीर में एक ज़ोर का झटका लगा और उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं। उनके अंदर की तंगी इतनी ज़्यादा थी कि मुझे लगा जैसे मेरा मांस उनके अंदर पिघल रहा हो।
मैंने उनके चेहरे को जकड़ा और उनकी आँखों में देखते हुए गुर्राया, **"मम्मी, आपने ही तो कहा था घुसने के लिए... अब देखो कैसे मारता हु तुम्हारी भोसड़ी!"**
अब मैंने अपनी कमर के वारों की रफ़्तार बढ़ानी शुरू की। अब कमरे में सिर्फ हमारे शरीर के टकराने की 'चप चप' की आवाज़ और मम्मी की वो गंदी, बेकाबू चीखें गूँज रही थीं। "आह्ह्ह्ह... हाँ रवि! बिल्कुल वहीं! अपनी माँ का भोसड़ा फाड़ दे! और ज़ोर से!
जैसे ही मेरा मोटा और गरम अंग उनके अंदर पूरी तरह धँसा, मम्मी का पूरा शरीर धनुष की तरह तन गया। उनके गले से एक ऐसी दबी हुई आह निकली जो किसी जानवर की पुकार जैसी लग रही थी। मैंने रुकने का नाम नहीं लिया; मैंने अपनी कमर को पीछे खींचा और फिर पूरी ताकत के साथ एक गहरा वार किया। **"चप... चप... चप..."** हमारे शरीर के टकराने की आवाज़ अब पूरे कमरे में गूँज रही थी।
मम्मी का सिर बिस्तर पर बार बार टकरा रहा था, लेकिन उन्हें दर्द की नहीं, बल्कि उस बेहिसाब सुख की लत लग चुकी थी। उन्होंने अपने पैर मेरी कमर के चारों ओर कस लिए और अपने नाखूनों को मेरी पीठ में गाड़ दिया। वे पागलों की तरह चिल्ला रही थीं, **"आह्ह्ह्ह... हाँ रवि! मार मुझे! फाड़ दे मुझे! तेरा ये लौड़ा कितना बड़ा है... उफ़्फ़्फ़! अपनी माँ को अंदर से चीर दे!"**
उनकी ये गंदी बातें सुनकर मेरा खून उबलने लगा। मैंने उनकी कमर को अपने हाथों से इतनी ज़ोर से जकड़ा कि शायद वहां नीले निशान पड़ जाएं। मैंने अपनी रफ़्तार को और भी हिंसक कर दिया। अब मैं सिर्फ सेक्स नहीं कर रहा था, मैं उन्हें रौंद रहा था। हर वार के साथ मेरा अंग उनके गर्भाशय के मुहाने से टकरा रहा था, जिससे मम्मी की आँखें ऊपर चढ़ रही थीं और उनके मुँह से लार टपक रही थी।
मैंने उनके कान के पास झुककर गुर्राते हुए कहा, **"मम्मी, देखिये आपका बेटा कैसे आपके अंदर समा रहा है! आपका ये भोसड़ा कितना गरम और तंग है, ऐसा लग रहा है जैसे ये मुझे निगल जाएगा! क्या आपको मज़ा आ रहा है अपनी औलाद के इस गरम लौड़े से?"**
मम्मी ने बदहवास होकर जवाब दिया, **"हाँ... हाँ रवि! मुझे पागल कर दे! अपनी माँ का भोसड़ा बर्बाद कर दे! और ज़ोर से... और गहराई तक... आह्ह्ह्ह्ह!"**
कमरे की हवा में पसीने, वासना और उनके गीलेपन की गंध भर गई थी। मैं अब अपनी चरम सीमा के बहुत करीब था। मेरी कमर की हर चोट अब और भी तेज़ और बेकाबू होती जा रही थी। मुझे महसूस हो रहा था कि उनका भोसड़ा अब मेरे हर वार के साथ और भी ज़्यादा छटपटा रहा है और मुझे अंदर खींचने की कोशिश कर रहा है।
मैंने उनके पैरों को और भी ऊपर खींच लिया और उनके भोसड़े के एकदम मुहाने पर अपना भारी अंग टिकाकर एक ज़ोरदार झटका दिया। मम्मी का शरीर बिस्तर पर बुरी तरह उछला और उनकी आँखों से आँसू निकल आए, लेकिन उनकी आवाज़ में सिर्फ नशा और गालियाँ थीं। उन्होंने मेरे बालों को जकड़ लिया और चीखते हुए बोलीं, **"आह्ह्ह्ह! fuck... रवि! क्यों रुक रहा है? बेहनचोद... चोद दे अपनी माँ की भोसड़ी को! तेरी माँ की भोसड़ी मारूँ... हाँ! अपनी माँ की चूत को ऐसे ही रौंद दे! मार मुझे... अपनी इस माँ को अपना गुलाम बना ले! आज अपनी माँ की चूत को फाड़ के रख दे!"**
उनकी ये गंदी और बेबाक गालियाँ सुनकर मेरा मर्दाना जोश पागलपन की हद तक पहुँच गया। मैंने उनके चेहरे को अपने हाथों में जकड़ा और उनकी आँखों में देखते हुए एकदम हिंसक अंदाज़ में गुर्राया, **"मम्मी, आप तो पूरी तरह से एक नंबर की रंडी बन गई हैं! आपकी ये चूत... उफ़्फ़्फ़! आज मैं आपकी इस रंडी माँ की चूत को इतना मारूँगा कि आप कल तक चल भी नहीं पाएँगी! ले... ले मेरी रंडी माँ! ले ले अपने बेटे का ये अमर्यादित लौड़ा! आज बन जा मेरे बच्चे की माँ! अपनी इस चूत को मेरे इस भोसड़े के लिए समर्पित कर दे! आज मैं तुझे तेरी औकात दिखा दूँगा!"**
मैंने अपनी कमर की रफ़्तार को इतना बढ़ा दिया कि अब वारों के बीच में हवा भी नहीं जा पा रही थी। **'चप चप चप चप'** की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। मैं लंड को पागलों की तरह चूत के अंदर बाहर कर रहा था। मम्मी का पूरा शरीर अब बेकाबू होकर झटक रहा था। वे पागलों की तरह चिल्ला रही थीं, **"हाँ... हाँ रवि! मार मुझे! अपनी माँ की चूत को अपने मोटे लंड से बर्बाद कर दे! हाँ... बिल्कुल ऐसे ही! अपनी रंडी माँ को और ज़ोर से मार! उफ़्फ़्फ़... तेरा लौड़ा मेरी चूत को चीर रहा है! आह्ह्ह्ह्ह!"**
मैंने उनके कान के पास जाकर एकदम गंदी और भारी आवाज़ में फुसफुसाया, **"मम्मी, आज आपकी ये चूत सिर्फ मेरे लिए है।आज मैं आपकी इस रंडी चूत के अंदर अपना सारा गरम और गाढ़ा वीर्य इस तरह भर दूँगा कि आपकी चूत से बाहर बहता रहेगा! **"आह्ह्ह्ह्ह... उफ़्फ़्फ़!"** मम्मी ने एक ज़ोरदार चीख मारी जब मैंने उनके गर्भाशय के मुहाने पर एक बहुत ही गहरा और हिंसक प्रहार किया। उनकी आँखें पूरी तरह से ऊपर चढ़ गईं और शरीर में एक भयानक कंपन हुआ। मैंने अपनी कमर को पीछे खींचकर एक बार फिर पूरी ताकत के साथ उन्हें अंदर तक धँसा दिया। **"चप! चप! चप! चप!"** मांस के टकराने की आवाज़ अब और भी तेज़ और गंदी हो गई थी। मम्मी का गला बैठ चुका था, वे बस बेतहाशा चिल्ला रही थीं, **"हाँ रवि! मार मुझे! अपनी माँ की चूत को पूरी तरह से तहस नहस कर दे! हाँ... अपनी रंडी माँ को अपने लौड़े से भर दे! उफ़्फ़्फ़... मैं मर जाऊँगी... मुझे मार डाल मुझे!"** मैंने उनकी कमर को अपने पैरों से जकड़ लिया ताकि वे हिल भी न सकें और मैं उन्हें अपनी मर्दानगी से कुचल सकूँ। मैंने उनके कान को अपने दाँतों से काटते हुए गुर्राया, **"मारूँगा तुम्हे नही मम्मी,तुम्हारी चूत को मरूँगा ,आज मैं आपकी चूत को इतना खोल दूँगा कि आप हमेशा के लिए मेरे लौड़े गुलाम बन जाओगी! ले... ले मेरा ये लौड़ा चूत में समा ले!"** मेरा शरीर अब फटने को तैयार था। मेरी नसों में खून नहीं, बल्कि शुद्ध वासना दौड़ रही थी। मैंने अपनी रफ़्तार को एक पागल जानवर की तरह बढ़ा दिया। अब मैं सिर्फ सेक्स नहीं कर रहा था, मैं उनके शरीर के अंदर एक तबाही मचा रहा था। मम्मी का पूरा निचला हिस्सा मेरे वारों से बुरी तरह झटक रहा था और उनके भोसड़े से निकलने वाला गीलापन अब मेरे अंडकोषों को भी भिगो रहा था। **"आह्ह्ह्ह्ह... रवि... मैं आने वाली हूँ... मैं चरम पर हूँ... अपनी माँ की चूत में सब कुछ उंडेल दे! आह्ह्ह्ह्ह्ह!"**
और अपनी पूरी ताकत से उनके गर्भाशय के मुहाने पर अपना गरम और गाढ़ा वीर्य उंडेल दिया। मम्मी का पूरा शरीर धनुष की तरह तन गया और वे बेतहाशा कांपने लगीं। हम दोनों ही चरम सुख की उस लहर में इस कदर डूब गए थे कि हमें दुनिया की सुध बुध नहीं रही। हम दोनों चोदने और चोदे जाने के उस पागलपन में इतने मगन थे कि हमें समय का बिलकुल भी पता ही नहीं चला।
जब मैं अपने आखिरी और सबसे हिंसक झटकों के साथ उनकी रंडी चूत को फाड़ रहा था, तभी पास के मंदिर के स्पीकर से आरती की गूँजती हुई आवाज़ सुनाई दी। उन पवित्र भजनों की आवाज़ और मेरे लौड़े के उन गंदे और रसीले झटकों के बीच का वो विरोधाभास हमें एक अलग ही दुनिया में ले गया। उस आवाज़ ने जैसे हमारे कानों में ये बता दिया कि सुबह के 4 बज चुके हैं और हम पूरी रात एक दूसरे के मांस में डूबे रहे।
क्लाइमेक्स के उस भारी सन्नाटे के बाद, मम्मी ने लंबी और गहरी साँस ली। उनके चेहरे पर थकान तो थी, लेकिन आँखों में एक अजीब सी चमक थी। उन्होंने मेरी तरफ देखा और शरारत भरे लहजे में मुस्कुराते हुए कहा, **"आज फिर तुमने सुबह कर दी! कहाँ से आती है तुझमें इतनी है कामुकता? बिल्कुल जंगली जानवर की तरह टूट पड़ते हो मुझ पर।"** उनके बोलने के अंदाज़ में कोई शिकायत नहीं थी, बल्कि उनकी नज़रों में एक गहरी शरारत और प्यार था, जैसे वो मज़ाक कर रही हो ।
मैंने भी उन्हें उसी गहरी और मदहोश कर देने वाली नज़रों से देखा। मेरी आँखों में एक मूक सवाल था, जैसे मैं कह रहा हूँ *"बहुत चालाक हो आप, सारा इल्ज़ाम मुझ पर लगा रही हो, जबकि असली मज़ा तो आप ले रही थीं।"* लेकिन मैंने कुछ कहा नहीं। मैं बस उनके और करीब आया और उनकी आँखों में आँखें डालकर बहुत ही प्यार से कहा, **"I love you, mummy."** इतना कहकर मैंने उन्हें अपनी बाहों में भर लिया और एक गहरी और सुकून भरी आलिंगन में ले लिया। मम्मी ने भी मुस्कुराते हुए मेरे गाल पर एक कोमल चूमा दिया और धीरे से कहा, **"I love you too, beta."** वे पूरी तरह से मेरे सीने से चिपक गईं। हम दोनों धीरे धीरे अपनी भारी और तेज़ चलती साँसों को व्यवस्थित करने लगे, फिर हम दोनो बिना किसी कपड़े के, एक दूसरे के नग्न शरीर की गर्माहट को महसूस करते हुए, उसी बिस्तर पर एक दूसरे में सिमट कर सो गए
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(14-09-2026, 07:35 PM)Bulldozer Wrote: Awesome and lusty update
Thanks bro
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