Thread Rating:
  • 14 Vote(s) - 1.79 Average
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5
Adultery Adventure of sam and neha
मैंने मुख्य गेट बाहर से बंद किया।

अंदर देखा तो नेहा एक हाथ में बोतल और दूसरे में ग्लास लिए पैग बना रही थी।

उसके जिस्म पर सिर्फ़ एक क्रीम कलर की पैंटी थी।

अगर कोई दूर से देखता तो वो भी नजर नहीं आती।

उसकी पूरी देह नंगी चमक रही थी — पसीने से, नशे से, और उत्तेजना से।

मेरे सीने में एक अलग ही जलन हो रही थी।

गुप्ता जी का वो शब्द बार-बार मेरे दिमाग में गूँज रहा था — “रंडी साली”।

मैंने कोने में खड़े गुप्ता जी को देखा।

मेरे दिमाग में घूम रहा था — कैसे और क्या बोलूँ?

क्या सीधे जाकर थप्पड़ मार दूँ और बोलूँ — “साले गुप्ता... मदरचोद... क्या बोल रहा था मेरी बीवी के बारे में?”

मेरे हाथ अपने आप मुट्ठी में बंद हो रहे थे।

मैं धीरे-धीरे उनकी तरफ़ बढ़ा।

थोड़ी देर बाद मुझे गुप्ता जी की शक्ल साफ़ दिखने लगी।

आज वो बिल्कुल अलग लग रहे थे।

जो शक्ल पहले मुझे घर के बड़े बुज़ुर्ग जैसी लगती थी, आज वो मुझे बेहद खींची हुई, घटिया और घिनौनी लग रही थी।

नशे में उनकी आँखें सूजी हुई थीं, मुँह थोड़ा खुला हुआ था, और सिगरेट पीते हुए भी उनकी नज़र हमारे घर की तरफ़ ही थी।

मैं उनके करीब पहुँच गया।

मेरे अंदर गुस्सा अभी भी उबाल खा रहा था।

सम: (सख्त आवाज़ में)

“अंकल, आपने अभी क्या कहा था?”

गुप्ता जी ने सिगरेट का कश लिया, नशे में मुस्कुराते हुए सिगरेट का डिब्बा मेरी तरफ़ बढ़ाया।

मैंने ले भी लिया।

अजीब लग रहा था — जिस आदमी ने अभी थोड़ी देर पहले मेरी बीवी को गाली दी, उसी से मैं सिगरेट ले रहा हूँ और “आप” कह रहा हूँ।

गुप्ता जी: “क्या कहा था बेटा?

सम: (आवाज़ और तेज़ करते हुए)

“‘रंडी साली’ कहा था ना? मैंने साफ़ सुना है।”

गुप्ता जी एक पल के लिए रुके, फिर मुस्कुराए। उन्होंने एक लंबा कश लिया और मेरे चेहरे पर धुआँ छोड़ते हुए बोले,

गुप्ता जी: “अरे कुछ नहीं बेटा...

नशे में अक्सर पुरानी बातें याद आ जाती हैं।

वही सोच रहा था... पता नहीं मुँह से गाली निकल गई।

आज पी भी बहुत है...”

मुझे लग रहा था कि ये आदमी कहानी बना रहा है, लेकिन मैं चुप रहा।

मैंने सिगरेट का एक कश लिया और धुआँ छोड़ते हुए थोड़ा दोस्ताना अंदाज़ में पूछा,

सम: “क्या याद आ गया अंकल?”

मैं झूठ को कुरेदना चाहता था। गुप्ता जी की आँखों में देखना चाहता था कि वो कितना और झूठ बोलता है।

गुप्ता जी ने मेरी तरफ़ देखा। नशे में उनकी आँखें लाल थीं। उन्होंने एक और कश लिया और धुआँ छोड़ते हुए बोले,

गुप्ता जी: “कुछ नहीं बेटा...

एक रंडी की याद आ गई बस।

तुझे लगेगा uncle क्या बकवास कर रहे हैं, इसलिए रहने दे।”

मैंने हल्का सा मुस्कुराते हुए कहा,

सम: “नहीं अंकल...

यहाँ कोई बच्चे तो हैं नहीं। सब समझते हैं।

बताओ... मैं भी थोड़े मज़े ले लूँ आपकी कहानी में।”

गुप्ता जी ने मुझे कुछ देर तक देखा। फिर उनकी नशे वाली मुस्कान और गहरी हो गई। उन्होंने सिगरेट का बट नीचे फेंका और बोले,

गुप्ता जी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा। नशे की वजह से उनका थोड़ा वजन मेरे ऊपर आ गया था।

गुप्ता जी: (नशे में भारी आवाज़ में)

“कुछ नहीं यार... तू बच्चा नहीं तो क्या... मेरे बराबर का तो नहीं ना बेटा...”

मैंने गहरी साँस ली और थोड़ा आगे बढ़कर कहा,

सम: “आप बहुत नशे में हो अंकल... शायद अभी बता दो। होश में तो नहीं बता पाओगे।”

गुप्ता जी ने सिगरेट का एक लंबा कश लिया। धुआँ छोड़ते हुए बोले,

गुप्ता जी: “कुछ नहीं... 4-5 साल पहले मेरी पोस्टिंग हैदराबाद में हुई थी। मैं अकेला ही गया था। तेरी आंटी यहीं थीं।”

उन्होंने फिर कश लिया और आगे बोले,

गुप्ता जी: “वहाँ ऑफिस में एक लड़की काम करती थी... ‘स्वीटी’। लड़की क्या थी... मादरचोद पूरी औरत ही थी। साँवली स्किन... मोटी... भारी-भारी मम्मे...”

गुप्ता जी ने एक हाथ से स्तनों का साइज़ दिखाते हुए इशारा किया।

गुप्ता जी: “पहले हफ्ते में ही पता चल गया था कि साली पूरे ऑफिस से चुद चुकी थी वो रंडी। जब कोई रात में काम करने के लिए बोलता, भेन की लौड़ी तैयार हो जाती ‘काम करने’ के लिए उसके साथ।”

मैं चुपचाप सुन रहा था।

गुप्ता जी: “मैं बॉस था... मगर मेरे कानों में भी खबर पड़ती थी कि किसने उसे रात को किस टेबल पर चोदा है। एक बार तो अकाउंट्स वाले लड़के ने उसे कन्फ्रेंस रूम की टेबल पर लिटा के...”

गुप्ता जी रुक गए और मेरी तरफ देखा। नशे में उनकी आँखें चमक रही थीं।

प्ता जी ने सिगरेट का एक और कश लिया। नशे में उनकी आवाज़ थोड़ी भारी हो गई थी।

गुप्ता जी: “अरे यार... ऑफिस में स्मोकिंग ब्रेक के दौरान जो गॉसिप सुनता था ना... वो सुनके ही समझ जाता था कि साली कितनी चुद चुकी है।”

उन्होंने मेरी तरफ देखा और आगे बढ़ाया,

गुप्ता जी: “लोग कहते थे — ‘उसने कन्फ्रेंस रूम में चुदवाया’, ‘कार में Blowjob दी’, ‘रात को ऑफिस की टेबल पर चोदा’, ‘पूरे टीम को सर्विस दे रही है’... सब यही बातें करते थे।”

मुझे शुरू में लगा था कि वो लड़की इतनी भी खास सुंदर नहीं है। हाँ, रंग साँवला था लेकिन शरीर में वो चरबी भरी हुई थी — भारी मम्मे, मोटी जाँघें, मोटी गांड़।

गुप्ता जी: “पहले हफ्ते में ही समझ में आ गया था कि साली की अर्ध salary भी कोई नहीं देगा उसे बाहर। इतनी गलतियाँ करती थी... एक-एक प्रोजेक्ट में लाखों का नुकसान कर रही थी।”

उन्होंने धुआँ छोड़ते हुए कहा,

गुप्ता जी: “इसीलिए job बचाने का उसका अपना तरीका था।

Job बचाने के लिए लड़के boss की चाट ही है... और ये तो सच में चाट रही थी।”


मैं चुपचाप सुन रहा था।

गुप्ता जी: “एक दिन उसकी गलती से एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट लगभग चला गया था। मैंने चीखकर कहा — ‘Miss Sweety... ये क्या है? इतनी मिस्टेक्स? ये सब मुझे करना पड़ेगा!’”

गुप्ता जी हँस पड़े और आगे बोले,

गुप्ता जी: “वो घबरा गई। बोली — ‘Sorry Sir...’

फिर मेरी तरफ देखकर बोली, ‘आप यहाँ ऑफिस में करेंगे या गेस्ट हाउस में जो कंपनी ने आप दिया है?’

गुप्ता जी का हाथ मेरे कंधे पर था। नशे की वजह से उनका थोड़ा वजन मेरे ऊपर आ रहा था। अब मुझे उनकी कहानी थोड़ी सच लगने लगी थी।

मैंने सिगरेट का कश लेते हुए थोड़ा मजाकिया लेकिन सीधा सवाल किया,

सम: “आपने मना कर दिया?”

मैं जानता था कि ये भोसड़ी के दीवार के छेद को ना बख्शेगा।

फिर भी मैंने मज़े लेने के लिए कहा।

गुप्ता जी मेरी तरफ देखा। उनकी आँखें नशे से लाल थीं। उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ और कस लिया और बोले,

गुप्ता जी: “अरे बेटा... मैं तुझे ये trust करके बता रहा हूँ। तेरे और मेरे बीच की बात है... बाहर न जाए। खासकर आंटी को।”

मैं हल्का सा मुस्कुराया।

सिगरेट खत्म हो चुकी थी। मैंने उसे नीचे फेंक दिया और कुचल दिया। फिर उसी हाथ से — जिस हाथ में अभी-अभी सिगरेट थी — मैंने अपने लंबे कुर्ते के ऊपर से अपना लंड मसलना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे, 30 सेकंड तक।

गुप्ता जी ने ये देख लिया, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा। बस मुस्कुरा दिए।

गुप्ता जी: “उस रात वो आई...

घर से खाना बनाकर लाई। दाल-चावल, सब्जी, रोटी... सब। पहले हमने साथ में खाना खाया। हँसी-मज़ाक किया।”

उन्होंने धुआँ छोड़ते हुए कहा,

गुप्ता जी: “खाना खत्म होने के बाद... मादरचोद उसको मैंने रात भर खाया।

पता चला कि वो इतनी पॉपुलर क्यों थी। जिस अदा से वो सब करती थी... वो अलग ही थी।”

गुप्ता जी मेरे कंधे पर हाथ रखे हुए थे। नशे में उनकी आँखें चमक रही थीं।

गुप्ता जी: “3-4 बार मैंने उसे बजाया... जैसा चाहा, वैसा।

उसने कुछ भी करने से मना नहीं किया।

मैंने उसे घुटनों पर बैठाया, मुँह में डाला... वो गले तक ले गई। बिना किसी शिकायत के।

पीछे से लिया, सामने से लिया, साइड से लिया... जो मन किया।”

वो रुककर मुस्कुराया और बोला,

गुप्ता जी: “तेरी आंटी ने तो शादी की शुरुआत में लंड को बस चूमा था।

थोड़ा-बहुत मुँह में लेने की कोशिश भी की थी... बोलती थी, ‘बहुत बड़ा है... मोटा है...’

मगर उसके गले तक कभी नहीं गया।”

गुप्ता जी ने मेरी तरफ देखा। उनकी नज़र में नशा और यादों का मिश्रण था।

गुप्ता जी: “मगर स्वीटी... वो तो गले तक ले गई।

मुझे उसके गले की मसल्स मेरे लंड के टोपे पर महसूस हुईं।

जैसे वो निगल रही हो... और वो भी बिना रुके।

उसकी आँखों में आँसू आ गए थे... मगर उसने मना नहीं किया।

बल्कि खुद आगे बढ़कर और गहरा लेने की कोशिश कर रही थी।”

गुप्ता जी: “अक्सर वो रात को आने लगी थी... मेरे बिस्तर को गर्म करने।

घर से खाना बनाकर लाती, खाना खिलाती, और फिर रात भर मेरे नीचे रहती।”

उन्होंने सिगरेट का कश लिया और मेरी तरफ देखते हुए कहा,

गुप्ता जी: “एक रात दोनों को दारू चढ़ी हुई थी। मैंने उसे सीधा सवाल किया — ‘तू ऑफिस में किस-किस से चुद चुकी है?’”

गुप्ता जी रुककर हँसे, लेकिन उनकी हँसी में गुस्सा भी था।

गुप्ता जी: “मादरचोद... उसने जो जवाब दिया, उससे मुझे गुस्सा आ गया।

ऑफिस स्टाफ के अलावा... ये भेन की लौड़ी ऑफिस के पीऑन से भी चुद चुकी थी।”

मैंने गुप्ता जी को देखा।

गुप्ता जी: “ऑफिस में एक 55 साल का बूढ़ा पीऑन था... नाम था रघु। कभी-कभी वो नहीं आता था तो अपने बेटे को भेज देता था।

और ये साली... दोनों के सामने अपनी टाँगें खोल चुकी थी।

बाप के सामने भी और बेटे के सामने भी।”

गुप्ता जी फिर से बोलने लगे।

इस बार उनकी पकड़ मेरे कंधे से हटकर मेरी पीठ पर चली गई और फिर धीरे-धीरे मेरी गर्दन पर आ गई। उनकी उँगलियाँ अब मेरी गर्दन को थोड़ा दबा रही थीं।

गुप्ता जी: (नशे में भारी और कड़वे स्वर में)

“तब मुझे लगा था कि ये साली मज़े के लिए चुदवाती है...

मगर जो मुँह उसने नौकर बाप के मुँह में डाला, तो बेटे के और मेरे मुँह में क्यों डाला?”

अचानक उनकी बात में कड़वाहट बढ़ गई।

गर्दन पर उनकी पकड़ और मजबूत हो गई।

गुप्ता जी: (आवाज़ में गुस्सा और जलन)

“बता ना... क्या जरूरत थी?

बेटे के साथ... मादरचोद बता...

तुम शाहर में चुदवा रहे हो... मगर मेरे बेटे के पीछे क्यों पड़ी है... रंडी साली...”

आखिर वो शब्द फिर से उनकी जुबान पर आ ही गया।

“रंडी साली”

गुप्ता जी की गर्दन वाली पकड़ और “रंडी साली” वाली गाली अब समझ में आ गई थी।

वो असल में राहुल को रोकना चाहते थे।

पता नहीं क्यों, मुझे लगा कि वो थोड़ा jealous भी थे।

गुप्ता जी ने मेरे कंधे पर हाथ रखे हुए ही बोलना जारी रखा। उनकी आवाज़ अब और भारी और कड़वी हो गई थी।

गुप्ता जी: “आज मैंने उस पर हाथ उठाया...

आज के बाद वो नेहा... और वो लड़की... सब खत्म।

इसको IIT जाना है।

और ये अभी से चूतों के चक्कर में लग गया है।”

मैं चुपचाप सुन रहा था।

“एक बार पढ़ाई कर ले... IIT चला जा... अच्छा पैसा कमा...”

“भेंचोद... फिर देखना...

नेहा जैसी चूतों की लाइन लग जाएगी बेटे के पीछे!

पैसा होगा तो सब रंडियाँ अपने आप आ जाएँगी...”

उनकी बात सुनकर मेरे मुंह से निकला

मेरा दिमाग “नेहा जैसी चूतों” वाले शब्द पर अटक गया था।

जैसे वो नेहा को किसी प्रकार की चीज बना रहे हों — एक टाइप, एक कैटेगरी।

उसे मोटी स्वीटी से कंपेयर कर रहे हों।

मुझे गुस्सा आ गया।

सम: (गुस्से में, आवाज़ कड़क कर)

“ओये भेंचोद... अभी मैं इज्जत दे रहा हूँ तो तू सिर पर चढ़ा जा रहा है?

और ‘नेहा जैसी चूतों’ से तेरा क्या मतलब है?”

गुप्ता जी मुस्कुराए।

एक हाथ अभी भी मेरी गर्दन पर था, अब थोड़ा और कस गया।

दूसरा हाथ उन्होंने मेरे चेहरे के पास लाया।

उनकी उँगलियों में अभी भी सिगरेट जल रही थी।

गुप्ता जी: (धीमी, लेकिन जहरीली आवाज़ में)

“मुझे सब पता है... तू अपनी बीवी को शहर में चुदवा रहा है।”

सम: (गुस्से में)

“आपको हमारे बारे में कुछ नहीं पता।”

गुप्ता जी फिर मुस्कुराए। उनकी आँखों में नशा और घिनौना मजा दोनों थे।

गुप्ता जी: “मैंने देखे थे उस दिन... उसके स्तनों पर, कंधों पर, गर्दन पर काटने के निशान... ताज़ा निशान।

तुम बाहर से आए थे... बता, किस होटल में गए थे?”

(वो उस दिन की बात कर रहे थे जब हम “बेकार आदमी” से मिलकर आए थे। उसने नेहा को जंगली जानवर की तरह काटा और नोचा था। और घर आते समय नेहा ने गुप्ता जी के पैर छुए थे।)

गुप्ता जी: “क्या हुआ बेटा?

चुप क्यों हो गया?

स्वीटी तो सिर्फ ऑफिस वालों और पीऑन तक सीमित थी...

तेरी बीवी तो सीधे शहर में बाहर जाकर चुदवा रही है...

और तू... तू बैठा देख रहा है।”

उनकी आवाज़ में घिन और जलन दोनों थी।

गुप्ता जी की बात जितनी भी गलत तरीके से कह रहे थे, लेकिन बात वो सच कह रहे थे।

ये बात मेरे दिमाग में चुभ गई थी।
Like Reply
Do not mention / post any under age /rape content. If found Please use REPORT button.
मैंने खुद को कंट्रोल किया और उन्हें हल्का सा धक्का दिया।

नशे में उन्हें वो धक्का ज्यादा लगा। वो लगभग गिरने वाले थे कि मैंने उनका हाथ पकड़ लिया।

मैंने गहरी साँस ली।

थोड़ा सिचुएशन पर सोचने लगा — गुप्ता जी ने कई बार हमारी मदद की थी। हालाँकि दोनों घर पास थे, फिर भी ऊपर-नीचे लोग हो सकते थे।

अगर अभी झगड़ा हुआ तो इस नशे में गुप्ता जी एक मिनट भी नहीं लगाएँगे। राहुल वाली बात, ये उस शाम वाली बात को करने में।

सम: (ठंडे लेकिन सख्त स्वर में)

“अंकल, आपने सच में बहुत पी रखी है।

आपको घर जाकर सोना चाहिए।”

गुप्ता जी: (नशे में चीखते हुए)

“अच्छा... साले बाप को मत सिखा क्या करना चाहिए...

और तू क्या करेगा?”

उन्होंने कमर आगे-पीछे करके चुदाई का बेहद घटिया एक्शन किया और बोले

गुप्ता जी: “तेरी बीवी को चोदेगा ना?

मेरा गुस्सा अब शांत हो चुका था।

एक तो मुझे लग रहा था कि तमाशा नहीं करना चाहिए।

दूसरा — गुप्ता जी के गुस्से की वजह मुझे जायज भी लग रही थी।

वो पूरा पैसा पका रहे हैं अपने बेटे की पढ़ाई में, और बेटा girlfriend के साथ ऐश कर रहा है।

ऊपर से नेहा ने आज राहुल को इतना बढ़ावा दे दिया — डांस फ्लोर पर चिपककर नाचना, हँसना, छेड़खानी...

किसी का भी गुस्सा फूट ही पड़ता।

सम: “हाँ... मैं वो सब करूँगा... मेरी बीवी है वो।

आप घर जाइए।”

लेकिन फिर मेरे मुँह से वो निकल गया जो मुझे बिल्कुल नहीं बोलना चाहिए था। आधी बोतल मैंने भी पी रखी थी,

सम: “और आपको अकेले में टाइम मिले तो हिला कर सो जाइए।”

जैसे ही ये शब्द निकले, मुझे तुरंत एहसास हुआ कि मैंने गलती कर दी।

मैंने गुप्ता जी को गंदी बात करने का मौका दे दिया।

गुप्ता जी मुस्कुराए। उनकी मुस्कान में नशा, घिन और एक अजीब सी विजय थी।

गुप्ता जी: “मुझे पता था...

तुझे अच्छा लगता है ना जब कोई तेरी बीवी को देखे...

उसे सोचकर हिलाए... है ना मादरचोद?”

मैं चुप हो गया।

समझ गया था कि इस बूढ़े के पास बहुत टाइम है।

और बात नेहा की है तो ये साला रात भर मुझे रोककर बात कर सकता है।

मगर बहुत हो चुका था।

मैं थक चुका था।

नेहा अंदर इंतज़ार कर रही थी।

उसका और नीना का डांस अभी भी मेरी आँखों के सामने घूम रहा था।

उसने कुछ पक्का नया सोचा होगा।

और मैं इस बूढ़े से उलझा हुआ था।

उनका पूरा बदन झूल रहा था।

मैंने आगे बढ़कर उनके कुर्ते का कॉलर पकड़ लिया।

कान के पास मुँह ले जाकर, आँखों में आँखें डालकर गर्व के साथ बोला,

सम: “हाँ... मुझे पसंद है।

क्योंकि वो मेरी है।

जो लोग इस सोसाइटी में अपनी महँगी कार, महँगी घड़ी दिखाते हैं ना...

वो भी आज बस नेहा को देख रहे थे।

वो बस नेहा को देख सकते हैं...

उसे सोचकर आज रात हिला सकते हैं...

सोच सकते हैं कि उसकी बॉडी नंगी कैसे दिखती होगी...

मगर मैं अकेला हूँ जो देखेगा... उसके साथ खेलेगा... उसे जैसे चाहूँ, वैसा करूँगा।”

मैंने पहली बार अपने आप को गुप्ता जी से हावी महसूस किया।

नेहा मेरी ताकत थी।

गुप्ता जी थोड़ी देर तक सोचते रहे। फिर बोले,

गुप्ता जी: “कैसे इस्तेमाल करेगा?”

मैंने कहा, “जाओ ना अंकल...”

लेकिन गुप्ता जी ने मेरी बात बीच में ही काट दी।

। उन्होंने मेरे कान के पास मुँह लाकर धीमी, गंदी आवाज़ में कहा,

गुप्ता जी: “मैं बताऊँ... मैं कैसे इस्तेमाल करता नेहा को आज रात?”

मैं कुछ नहीं बोला। बस उनकी आँखों में देखता रहा।

गुप्ता जी मुस्कुराए और बोले,“पहले तो मैं उसे घुटनों पर बैठाता...

तेरे सामने ही।

तेरी बीवी को... जो आज इतना नाच रही थी।

उसके बाल पकड़कर उसके मुँह को खोलता...

और अपना मोटा, काला लंड उसके होंठों पर रगड़ता...”

“वो हिचकिचाती... लेकिन मैं बाल खींचकर उसका सिर पीछे करता...

और एक झटके में पूरा लंड उसके गले तक धकेल देता।

उसकी आँखों में आँसू आ जाते... गला फूल जाता...

मगर मैं रुकता नहीं।

दोनों हाथों से उसके सिर को पकड़कर जोर-जोर से मुँह चोदता...

गले तक... गले तक... बार-बार...”

“उसका मुँह लार से भर जाता...

थूक, आँसू, मेरे लंड का पानी... सब मिल जाता।

मैं उसे रंडी की तरह गाली देते हुए चोदता...

‘ले साली... ले मेरी बीवी... आज तुझे सिखाता हूँ असली मर्द क्या होता है...’

तेरा देखता रहता हूँ... तू बस बैठा देख रहा है... लंड हिला रहा है...”

उन्होंने मेरी आँखों में देखा और मुस्कुराते हुए आगे बोले,

गुप्ता जी: “जब मैं झड़ने वाला होता... तो उसके गले के अंदर ही झड़ता...

पूरी तरह... एक बूँद भी बाहर नहीं आने देता।

फिर उसके बाल पकड़कर उठाता... और बोलता —

‘अब जा... अपने बेकार पति के पास जा... और उसे बता कि असली मर्द का स्वाद कैसा होता है।’”

गुप्ता जी: (हँसते हुए)

“कैसा लगा बेटा?

ये है असली इस्तेमाल...

तेरी नेहा जैसी रंडी का।”शुरू में तो मैं गुप्ता जी को रोकना चाहता था, लेकिन जैसे ही उन्होंने ये सब बकवास शुरू किया, मैं रोक नहीं पाया।

वो मुझे बताते हुए अपने हाथों के इशारों से भी दिखा रहे थे — कैसे नेहा के सिर को पकड़ेंगे, बाल खींचेंगे, मुँह में ठूँसेंगे।

मेरा लंड अब पूरा तंबू बना चुका था।

एक तरफ़ दिमाग घिन कर रहा था, दूसरी तरफ़ उत्तेजना भी बढ़ रही थी।

आखिरकार मेरा अच्छा दिमाग takeover कर गया।

मैंने उन्हें हल्का सा धक्का दिया और बोला,

सम: “छी छी... कितनी गंदी सोच है आपकी...

उसे सामने बेटी कहते हो और यहाँ... बहुत घटिया इंसान हो आप।”

गुप्ता जी ने मेरी बात सुनी तो मुस्कुराए।

गुप्ता जी: “अच्छा... मेरी सोच घटिया?

और बेटी यहाँ मेरे बेटे का फ्यूचर दाँव पर लगा रही है... वो कुछ नहीं?”

मैं चुप रह गया।

मैंने फिर से सिगरेट जलाई, दो उँगलियों से इशारा किया और बोला,

सम: “जा... अपनी घटिया लाइफ और पुरानी बीवी के पास।”

गुप्ता जी लड़खड़ाते हुए अपने फ्लैट की तरफ़ जाने लगे।

मैं धीरे-धीरे उन्हें जाते हुए देख रहा था।

वो हमारे दरवाज़े के सामने से गुजर रहे थे।

अचानक वो रुक गए।

मेरे दरवाज़े की तरफ़ मुड़े।

मुझे लगा वो बस मुझे डरा रहे हैं। इतनी हिम्मत नहीं कि अंदर जाएँ।

मगर उन्होंने दरवाज़े का नॉब पकड़ा...

और एक “क्लिक” की आवाज़ के साथ उसे खोल दिया।

मैंने गुप्ता जी का चेहरा देखा —

एकदम से उस पर ताज़गी आ गई थी। नशा अभी भी था, लेकिन आँखों में एक नई चमक थी।

गुप्ता जी की आँखें एकदम बड़ी हो गई थीं।

मैं वो नज़ारा नहीं देख पा रहा था जो गुप्ता जी देख रहे थे।

जब मैं नेहा को कमरे में छोड़कर बाहर गया था, तब वो सिर्फ़ क्रीम कलर की पैंटी में थी। अब भी वही हालत थी — नंगी छातियाँ, पसीने से चमकता शरीर, पैंटी का पतला कपड़ा उसकी चूत पर चिपका हुआ।

मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।

गुप्ता जी ने मेरी तरफ़ देखा, फिर एक शैतानी आँखें मारी और नेहा की तरफ़ देखकर बोले,

गुप्ता जी: “बेटी... क्या एक पेग मिलेगा?

मेरी व्हिस्की तो खत्म हो गई है।”
Like Reply
Osm yr pr jb story mai mja aata hai story end ho jaati hai nxt update pls big or jldi update krna friday night ke baad 10 days mai out of network area rhunga toh aaj kl mai update krdena as a viewer request to u????
Like Reply
Please update.......... Bhai
Like Reply




Users browsing this thread: 1 Guest(s)