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शादी ने हमें धीमा नहीं किया—उसने हमें नए तरीकों से और करीब ला दिया। एक जोड़े के रूप में, हमने हर दिन एक ही दिनचर्या अपनाने के बजाय साथ-साथ ज़िंदगी को तलाशने का फैसला किया। हमने अनजानी जगहों की यात्राएँ कीं, नए जीवन-शैली के अनुभव किए, और रास्ते में मिले लोगों से बहुत कुछ सीखा।
जोखिम भी थे—संदेह, डर और अनिश्चितता के पल आए—लेकिन हमने हर स्थिति का सामना एक-दूसरे के साथ किया। हर चुनौती ने हमारे रिश्ते को और मज़बूत किया और हमें धैर्य, विश्वास और टीमवर्क का महत्व सिखाया।
इन रोमांचक अनुभवों के दौरान हमने जाना कि सबसे बड़ा इनाम वे जगहें नहीं थीं जहाँ हम गए, बल्कि वह गहरा जुड़ाव था जो हमने एक-दूसरे के साथ बनाया।
यह कहानी भविष्य की प्रदर्शनी में इन विषयों को कवर करेगी:
- वॉयरिज़्म (Voyeurism)
- ककल्ड्री (Cuckoldery)
- सॉफ्ट इनसेस्ट (Soft Incest)
- बाइ-क्यूरियस (Bi Curious)
- स्विंगिंग (Swinging)
- गुलामी (Slavery)
- समर्पण और प्रभुत्व (Submission and Domination)
- अत्यधिक अपमान (Extreme Humiliation)
- और अंत में—ढेर सारा मज़ा
यह जीवन हर किसी के लिए नहीं है। आप अभी पीछे हट सकते हैं—या फिर एक जंगली रोमांच के लिए तैयार हो जाइए।
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CHAPTER 1 : गलती
काफी समय हो गया था जब हम उससे बात कर रहे थे।
आयान।
यंग, हैंडसम, सिर्फ़ 25 साल का, और उसका कॉन्फिडेंस बिल्कुल नैचुरल लगता था—फोर्स्ड नहीं।
हमने उससे पुणे के आउटर एरिया में मिलने का डिसीजन लिया।
एक शांत जगह, भीड़ और जान-पहचान से दूर, जहाँ कोई सवाल न पूछे।
शुरू से ही वो एक ग्रीन फ़्लैग जैसा लगा।
वो ज़्यादा बोलता नहीं था, ज़्यादा सुनता था। कभी किसी चीज़ की जल्दी नहीं करता। छोटी-छोटी बातें याद रखता और बाद में उन्हें उठाता, जिससे बातें रियल लगती थीं।
फिर भी, हम नर्वस थे।
ये पहली बार था जब हम किसी ऐसे इंसान से रियल लाइफ में मिलने वाले थे।
टेक्स्ट्स सेफ होते हैं। रियलिटी नहीं।
आयान वैसे भी शांत टाइप का था।
जब माहौल थोड़ा अजीब होता, वो हल्का सा मज़ाक कर देता, लेकिन कभी लाइन क्रॉस नहीं करता। वो बार-बार पूछता कि हम कंफर्टेबल हैं या नहीं। ज़रूरत पड़ने पर स्पेस भी देता था।
तीन महीने तक हम लगभग रोज़ बात करते रहे।
लेट-नाइट चैट्स, वॉइस नोट्स, छोटी बहसें, हँसी। कुछ भी फेक नहीं लगा।
हमने सब चेक किया था।
उसकी बातें मैच करती थीं। टाइमिंग सही थी। उसका सब्र कभी नहीं टूटा।
हमें लगा था वो अच्छा इंसान है।
या कम से कम, उसने हमें यही मानने की हर वजह दी थी।
फिर भी, जिस दिन मिलने का प्लान था, दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।
कुछ रिस्क ऐसे होते हैं जो कितनी भी तैयारी कर लो, जाते नहीं।
लॉबी कुछ ज़्यादा ही परफेक्ट लग रही थी।
मार्बल का फ़्लोर, वार्म लाइट्स में चमकता हुआ।
बड़े सोफ़े, ऊँचे पौधे।
सब कुछ शांत। बहुत ज़्यादा शांत।
तभी हम अंदर भागे।
मेरा दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था।
मैंने नेहा को खींचकर एक पिलर के पीछे कर लिया, इससे पहले कि कोई हमें देख पाता।
मैं ठीक से साँस भी नहीं ले पा रहा था।
SAM : डैम… मैंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसा होगा।
नेहा डरी हुई थी।
उसके चेहरे पर वही था जो मैं सोच रहा था।
NEHA : फ़क। ये बहुत बड़ी गलती है। हमें ये नहीं करना चाहिए था।
होटल के एंट्रेंस से आवाज़ें आईं।
कोई ज़ोर से बोल रहा था।
SAM: नहीं। अभी नहीं।
मैंने एंट्रेंस की तरफ़ देखा।
कुछ लोग खड़े थे, फोन हाथ में। कैमरे ऑन थे।
वे व्लॉग बना रहे थे।
SAM: कोई होटल के दरवाज़े पर है।
नेहा ने देखा और फ्रीज़ हो गई।
NEHA: वो व्लॉगिंग कर रहे हैं।
मेरा दिमाग़ सीधा पैनिक मोड में चला गया।
SAM : अगर इन्होंने हमें रिकॉर्ड कर लिया, तो सब खत्म।
मैंने नेहा का हाथ पकड़ा।
हम दीवार से सटकर धीरे-धीरे चलने लगे।
हर कदम बहुत ज़्यादा तेज़ लग रहा था।
एक गेस्ट सूटकेस लेकर पास से गुज़रा।
मैंने तब तक साँस रोके रखी जब तक वो दूर नहीं चला गया।
मैं नेहा के क़रीब झुका।
SAM : आयान हमें नहीं देखना चाहिए।
SAM : वो हमें जानता है। पहचान लेगा।
मैंने अपनी जैकेट उलटी पहन ली। हाथ काँप रहे थे।
नेहा ने अपने बाल छुपा लिए।
हम दोनों सिर झुकाकर चल रहे थे।
हम एक सोफ़े के पीछे छिप गए।
व्लॉगर लॉबी में आ गए। उनकी आवाज़ गूँज रही थी।
VLOGGER : ये होटल क्रेज़ी है, गाइज़।
मैं बिल्कुल नहीं हिला। पलक तक नहीं झपकी।
SAM : प्लीज़ इधर मत देखो।
सेकंड बहुत लंबे लग रहे थे।
बहुत ज़्यादा लंबे।
आख़िरकार उनकी आवाज़ें दूर चली गईं।
मैंने धीरे से साँस छोड़ी।
नेहा ने मेरी तरफ़ देखा।
NEHA : चलो। अभी।
मैंने सिर हिला दिया।
हम चुपचाप साइड के एक छोटे दरवाज़े की तरफ़ गए।
उस पर लिखा था—STAFF ONLY।
मैंने दरवाज़ा खोला।
और किसी को पता चलने से पहले हम ग़ायब हो गए।
किसी तरह हम कार तक पहुँचे।
इंजन स्टार्ट करते वक्त मेरे हाथ काँप रहे थे।
मैं बहुत बेकार ड्राइव कर रहा था।
बहुत तेज़, बहुत रफ़।
बस वहाँ से निकल जाना चाहता था।
सड़क जितनी थी, उससे कहीं लंबी लग रही थी।
कुछ किलोमीटर बाद मैंने गाड़ी साइड में रोक दी।
इंजन अभी भी चालू था।
नेहा मेरी तरफ़ मुड़ी, उसके चेहरे पर साफ़ डर था।
NEHA : मुझे लगता है उसने हमें देख लिया।
SAM : नहीं। कोई चांस नहीं।
(खुद को शांत रखने की कोशिश)
लेकिन मैं अंदर से बहुत टेंशन में था।
नेहा ने सिर हिलाया।
NEHA : वो आदमी ऐसा कभी नहीं लगा था।
मैं स्टीयरिंग को कसकर पकड़े सामने देखता रहा।
SAM : मुझे पता है।
कार में सन्नाटा भर गया।
सिर्फ़ हमारी साँसें और इंजन की आवाज़।
नेहा ने फिर मेरी तरफ़ देखा, उसकी आवाज़ लो लेकिन शार्प थी।
NEHA :पक्का है?, वो व्लॉग बना रहा था।
मैंने गला साफ़ किया।
SAM
हाँ। मैंने साफ़ सुना।
वो पूरी तरह मेरी तरफ़ मुड़ी।
NEHA
क्या सुना?
मैं एक पल रुका, फिर बोला।
SAM
उसने कहा,
“आज हम उस कपल से मिलने जा रहे हैं, जिनके बारे में बात कर रहे थे।
आप लोग एक्साइटेड हो?”
एक पल की चुप्पी।
नेहा की आँखें फैल गईं।
NEHA
फ़क। फ़क। फ़क।
उसने डैशबोर्ड पर ज़ोर से हाथ मारा।
वो शब्द कार के अंदर गूँज गया।
मैंने उसकी आँखों में पानी देखा।
सिर्फ़ आँसू नहीं—शॉक, हर्ट, डिसबिलीफ़।
NEHA : वो हमारे साथ ऐसा कैसे कर सकता है?
हमने उस पर इतना भरोसा किया था।
उसकी आवाज़ काँप रही थी। मेरी भी।
SAM : मुझे पता है।
वो मेरी तरफ़ देखती रही, जैसे कोई वजह ढूँढ रही हो।
NEHA : लेकिन क्यों? वो ऐसा क्यों करेगा?
मैं सड़क को देखता रहा।
SAM : शायद वो पहले से बड़ा कंटेंट क्रिएटर हो।
और हमारी रूल याद है—हमने कभी फेस वाली पिक्चर्स शेयर नहीं की थीं।
नेहा कन्फ्यूज़ हो गई।
NEHA : लेकिन… उसे तो उससे कहीं ज़्यादा मिलने वाला था।
अगर उसने ये सब नहीं किया होता।
मैंने स्टीयरिंग और कस लिया।
SAM : व्यूज़, बेबी।
आज की जनरेशन में वही सब कुछ है।
लाइक्स, फॉलोअर्स, फेम।
नेहा धीरे-धीरे सिर हिलाने लगी।
NEHA : और वो 25 का भी नहीं लग रहा था।
मैंने कहा था न, इतना यंग मत चुनो।
हमेशा कोई मैच्योर—
उसकी आवाज़ टूट गई।
वो रो पड़ी।
बिल्कुल रॉ, बिना कंट्रोल के।
मैंने गाड़ी साइड में लगाई और उसे पकड़ लिया।
SAM : ठीक है। छोड़ो। अब सब खत्म हो गया है।
मैंने उसके माथे को चूमा।
SAM : हम सेफ हैं। चलो घर चलते हैं।
उसे शांत करने के चक्कर में, मैं बिना सोचे बोल गया।
SAM : नेक्स्ट टाइम और केयरफुल रहेंगे।
नेहा झटके से अलग हुई।
NEHA : क्या? : नेक्स्ट टाइम???
शब्द निकलते ही मुझे समझ आ गया—मैंने बहुत बड़ी गलती कर दी।
SAM: नहीं, नहीं… मेरा मतलब वो नहीं था। छोड़ो। भूल जाओ।
मैंने फिर से गाड़ी स्टार्ट की।
इंजन की हल्की आवाज़ के साथ हम आगे बढ़े।
सड़क अंधेरी थी।
और हमारे बीच की चुप्पी बहुत भारी।
कुछ गलतियों को सज़ा की ज़रूरत नहीं होती।
वे खुद ही अपना निशान छोड़ जाती हैं।
किसी तरह हम घर तक पहुँच ही जाते हैं।
ड्राइव एंडलेस लगती है,
हालाँकि असल में है नहीं।
शहर की लाइट्स बाहर से गुजरती रहती हैं,
पर हमें दिखती ही नहीं।
ना म्यूज़िक।
ना बातें।
हमारे बीच स्ट्रेस तीसरे पैसेंजर की तरह बैठा है।
दिमाग़ में बहुत कुछ दौड़ रहा है,
लेकिन मैं सबको ज़बरदस्ती दबा देता हूँ।
आयान।
वो आगे क्या कर सकता है।
वो क्या-क्या जानता है।
हमारी आइडेंटिटी।
हमारा काम।
हमारी ज़िंदगी।
बहुत कुछ दाँव पर लगा है।
अभी के लिए… बस इस पल से बचना है।
हम दरवाज़ा अनलॉक करते हैं और अंदर आते हैं।
घर जाना-पहचाना लगता है।
शांत।
सेफ।
लेकिन वो सुकून हम तक नहीं पहुँचता।
नेहा बैग गिराती है और सीधे सोफ़ा की तरफ़ जाती है।
वो उसमें धँस जाती है,
कंधे भारी,
जैसे सारा वज़न अब आकर बैठ गया हो।
वो एक सिगरेट निकालती है।
लाइटर क्लिक करता है।
एक छोटी सी फ्लेम।
वो उसे पास लाती है
और धीरे से सिगरेट जलाती है।
गहरी साँस लेती है।
रोकती है।
फिर छोड़ती है।
धुआँ हवा में घुमाव बनाता है।
गाढ़ा।
धीमा।
वो एक और ड्रैग लेती है।
इस बार लंबा।
उसके हाथ हल्के से काँप रहे हैं।
वो स्मोक कर रही है,
पर मज़े के लिए नहीं।
आदत के लिए भी नहीं।
वो स्मोक कर रही है
सिर्फ़ साँस लेने के लिए।
कुछ स्टेबल महसूस करने के लिए।
खुद को टूटने से रोकने के लिए।
मैं दरवाज़े के पास खड़ा हूँ,
खामोशी में उसे देखता हुआ।
कमरा धुएँ और अनकहे ख़यालों से भर जाता है।
कुछ कहा नहीं जाता,
पर सब समझ लिया जाता है।
हम घर पर हैं।
लेकिन ख़तरा अभी भी दिमाग़ से गया नहीं है।
मैं किचन में जाता हूँ,
कूल दिखने की कोशिश करता हूँ।
मैं कूल नहीं हूँ।
एक ग्लास निकालता हूँ।
फिर रुकता हूँ,
एक सेकंड सोचता हूँ
और तय करता हूँ —
एक ग्लास काफ़ी है।
मैं सिंगल मॉल्ट डालता हूँ।
बहुत ध्यान से।
जैसे कोई सीरियस मेडिकल सिचुएशन हो।
मैं ग्लास नेहा के पास ले जाता हूँ।
वो मुझे देखती है।
फिर ग्लास को।
फिर वापस मुझे।
बिना कुछ कहे,
वो उसे एक ही घूँट में खत्म कर देती है।
पानी की तरह।
जैसे उसे उस ग्लास पर ग़ुस्सा हो।
जब वो वापस देती है,
उसका हाथ अब भी काँप रहा है।
मैं उसके पास बैठ जाता हूँ।
सैम : रेडी हो?
वो जवाब नहीं देती।
लेकिन उसे बिल्कुल पता है
मैं क्या मतलब कह रहा हूँ।
मुझे भी।
उसकी नज़र कमरे में घूमती है
और आख़िर में लैपटॉप पर टिक जाती है।
हमने कभी आयान से फ़ोन पर चैट नहीं की।
कभी नहीं।
ना ऐप्स।
ना मैसेजेस।
ना कोई चैटबॉट
जो किसी कोने में छुपा हो।
फ़ोन डेंजरस होते हैं।
घर में कोई देख सकता है।
ऑफ़िस में कोई उठा सकता है।
एक ग़लत नज़र
और सब एक्सपोज़।
इसलिए हमने लैपटॉप यूज़ किया।
हमेशा लैपटॉप।
बहुत प्रोफ़ेशनल।
बहुत सीक्रेट-एजेंट टाइप।
लिड बंद करो
और पूफ… सब गायब।
ना ट्रेल।
ना नोटिफ़िकेशन।
ना मीटिंग के बीच
कोई एक्सिडेंटल “गुड मॉर्निंग” पॉप-अप।
कम से कम, प्लान यही था।
अब सब थोड़ा रिडिक्यूलस लग रहा है।
इतनी प्लानिंग।
इतनी डिसिप्लिन।
और फिर भी…
हम यहाँ हैं।
स्ट्रेस्ड।
साइलेंट।
थोड़े से ड्रंक।
नेहा धीरे से साँस छोड़ती है।
मैं लैपटॉप की तरफ़ देखता हूँ।
सैम : लगता है, स्पाइज़ भी कभी-कभी पैनिक कर जाते हैं।
ह्यूमर कुछ ठीक नहीं करता।
पर एक पल के लिए
साँस लेने में मदद करता है।
मैं चैटबॉट में लॉग-इन करता हूँ।
पासवर्ड टाइप करते वक्त
मेरा हाथ हल्का सा काँप रहा है।
डिंग। डिंग। डिंग।
मैसेजेस स्क्रीन पर फट पड़ते हैं।
बहुत सारे।
सब आयान से।
मैं पढ़ना शुरू करता हूँ।
“हा हा… मुझे पता है तुम लोग फ़ेक हो।”
“तुम कभी आए ही नहीं।”
“मुझे सब पता है।”
“मैं तुम्हें एक्सपोज़ कर दूँगा… मेरे पास तुम्हारी पिक्स हैं।”
“तुमने मुझे अंडरएस्टिमेट किया।”
“मैं कंप्यूटर जीनियस हूँ।”
“मैं तुम्हारी लोकेशन ट्रेस कर सकता हूँ।”
और भी बहुत कुछ।
एक पल के लिए दिल उछलता है।
फिर कुछ अनएक्सपेक्टेड होता है।
मैं मुस्कुरा देता हूँ।
एक रियल स्माइल।
रिलीफ़ ठंडे पानी की तरह मुझ पर बह जाता है।
सैम : उसे कुछ नहीं पता था।
उसने हमें कभी देखा ही नहीं।
हम उसके लिए कभी थे ही नहीं।
मैं लैपटॉप नेहा की तरफ़ घुमा देता हूँ।
सैम : देखो।
वो मैसेजेस धीरे-धीरे पढ़ती है।
फिर सिगरेट से लंबा ड्रैग लेती है
और मुझे पास कर देती है।
वो सोफ़ा में पीछे टिक जाती है।
पहली बार, रिलैक्स्ड।
कमरा अलग लगने लगता है।
हल्का।
शार्प।
हम दोनों आईटी प्रोफ़ेशनल्स हैं।
हमें ये गेम पता है।
लोकेशन ट्रेस करना?
प्योर नॉनसेंस।
बड़े शब्द।
छोटी नॉलेज।
फिर भी, एक बात मुझे परेशान करती है।
पिक्चर वाली।
मैं नेहा की तरफ़ देखता हूँ।
सैम
तुम श्योर हो
कि तुमने कभी कोई पिक्चर
या सोशल मीडिया लिंक शेयर नहीं किया?
वो मुझे शांति से देखती है।
ना शक।
ना डर।
वो कॉन्फ़िडेन्स
सब कुछ कह देता है।
मैं सिर हिला देता हूँ।
अंदर से मन करता है
उसे गालियाँ लिखूँ।
जो सोच रहा हूँ, सब टाइप कर दूँ।
उसकी फ़ेक कॉन्फ़िडेन्स तोड़ दूँ।
फिर रुक जाता हूँ।
ऐसे इंसान को क्यों प्रोवोक करना?
साइलेंस बेहतर है।
कन्फ़्यूज़न बेहतर है।
मैं सीधे सेटिंग्स में जाता हूँ।
डिलीट अकाउंट।
एक क्लिक।
ख़त्म।
अब वो बैठा रहेगा,
स्क्रीन रिफ़्रेश करता हुआ।
सोचता हुआ।
अंदाज़े लगाता हुआ।
इमैजिन करता हुआ।
मैं लैपटॉप धीरे से बंद करता हूँ।
कमरा भारी लगता है।
डेंजरस नहीं।
बस वैसा…
जैसे आग के बाद बचा हुआ धुआँ।
मैं एक और ड्रैग लेता हूँ
और पीछे टिक जाता हूँ।
सैम :
मैं दुआ करता हूँ
कि एक दिन वो ये सब
गलत इंसान के साथ करे।
कोई बहुत अमीर।
कोई जो न पैनिक करे…
और न माफ़ करे।
भगवान उसे वो सबक सिखाए
जो हमने नहीं सिखाया।
नेहा छत की तरफ़
धुएँ की लंबी लाइन छोड़ती है।
अब सिगरेट
उसकी उँगलियों के बीच
शांत जल रही है।
उसके कंधे आख़िरकार ढीले पड़ जाते हैं।
कमरे में ज़हर अब भी है।
पर उसका रंग बदल गया है।
पहले डर था।
अब ग़ुस्सा है
जो ठंडा हो रहा है।
मौजूद है।
पर अब चुभता नहीं।
हम कुछ देर खामोशी में बैठे रहते हैं।
अब डरे हुए नहीं।
बस थके हुए।
दिखावा करने से थके हुए।
सावधान रहने से थके हुए।
उन लोगों से थके हुए
जो झूठ को इंटेलिजेंस समझ लेते हैं।
मैं नेहा को देखता हूँ।
वो अब शांत है।
मज़बूत।
फिर से खुद जैसी।
आज हमने कुछ नहीं खोया।
ना आइडेंटिटी।
ना काम।
ना कंट्रोल।
सिर्फ़ इल्यूज़न्स।
मैं सिगरेट बुझा देता हूँ।
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Chapter 2 : शुरुवात
शादी के छह महीने बाद।
अब भी एक-दूसरे को समझ रहे थे।
अब भी ग़लतियाँ हो रही थीं।
रूम में पॉलिश्ड वुड और पहाड़ी हवा की स्मेल थी।
वीकेंड की साइलेंस — महँगी और फ्रैजाइल।
नेहा रूम में मूव कर रही थी, हाथ में टॉवेल, बाल बंधे हुए।
दिन का प्लान पहले से उसके दिमाग़ में था।
नेहा : क्विक शॉवर। मेरे बिना स्टार्ट मत करना।
वह स्माइल करती है।
वह बाथरूम में चली जाती है।
डोर पूरी तरह बंद नहीं होता।
मैं बालकनी में निकलता हूँ।
लाइटर फ्लिक करता हूँ। स्मोक हिल्स में डिसॉल्व हो जाता है।
फोन चेक करता हूँ — कुछ इम्पॉर्टेंट नहीं।
एक लंबा एक्सहेल।
पीछे से एक सॉफ्ट साउंड।
शायद डोरबेल।
शायद कुछ भी नहीं।
मैं पलटकर देखता हूँ।
एंट्रेंस के पास कॉफी ट्रे रखी है।
स्टीम उठ रही है।
कोई स्टाफ़ नज़र नहीं आ रहा।
फिर — मूवमेंट।
एक शैडो, जो सही नहीं लगती, धीरे-धीरे बाथरूम की तरफ़ स्लाइड करती हुई।
मेरी साँस रुक जाती है।
एक यंग होटल स्टाफ़, 20 साल के आस-पास का ,
बाथरूम डोर के पास रुक जाता है।
डोर थोड़ा-सा खुला है।
वह आगे झुकता है।
मुझे नहीं देखता।
मैं फ़्रीज़ हो जाता हूँ।
मैं किसी और को अपनी वाइफ़ को देखते हुए देख रहा हूँ।
रूम एक अजीब शांति से भर जाता है —
फ़ैन,
दूर की रोड,
और मेरे कानों में मेरी हार्टबीट।
उसकी बॉडी लैंग्वेज बदलती है।
वह बिल्कुल स्टिल हो जाता है।
जैसे वह भूल गया हो कि वह कहाँ है।
टाइम स्ट्रेच हो जाता है।
में अब क्या करू —
शुड आई शाउट?
शुड आई मूव?
नेहा को प्रोटेक्ट करू ?
या प्रिटेंड करू ये कभी हुआ ही नहीं ?
मैं कुछ नहीं करता।
दैट्स द मिस्टेक।
वह अचानक पीछे हट जाता है,
जैसे अपनी ही हिम्मत से डर गया हो।
कॉफी वहीं छूट जाती है।
आइज़ नीचे।
और वह जल्दी से निकल जाता है।
डोर के बंद होने की आवाज़ आती है।
साइलेंस रूम पर क्रैश करती है।
इंट. बाथरूम — मोमेंट्स लेटर
पानी बह रहा है।
नेहा हल्की-सी हमिंग कर रही है — कम्प्लीटली अनअवेयर।
मैं डोर को खोलता हु।
नेहा सिर्फ रेड पेंटी में थी, पानी पूरे बदन पर बाह रहा था।
बूब्स चमक रहे थे।
उसके लाइट ब्राउन कलर के निप्स जो किसी 10 रुप्पे के सिक्के के बराबर।
उसके लाइट ब्राउन कलर के निप्स जो किसी 10 रुप्पे के सिक्के के बराबर।
पूरा बदन चीख रहा हो की मुझे देखो, प्यार करो। .ऐसी बॉडी तुमने पहले कभी नहीं देखो होगी
मिरर में अपनी रिफ़्लेक्शन देखता हूँ।
मैं थोड़ा बड़ा लग रहा हूँ।
और साथ ही… थोड़ा छोटा भी।
तभी एक सच हिट करता है।
मैं ग़ुस्से में नहीं हूँ।
और यही सबसे ज़्यादा डिस्टर्बिंग है।
कॉफी ठंडी हो चुकी है।
स्मोक गायब हो चुका है।
नेहा बाहर आती है — फ्रेश, स्माइलिंग।
नेहा
रेडी?
मैं हाँ करता हूँ।
पर बाहर की हिल्स अब ज़्यादा क्लोज़ लग रही हैं।
और रूम — सीक्रेट्स के लिए बहुत छोटा।
लॉबी
होटल अब अलाइव है।
रोलिंग सूटकेसेज़। लाफ़्टर। वीकेंड क्राउड।
नेहा चेकआउट काउंटर पर फोन स्क्रॉल कर रही है — रिलैक्स्ड।
और तब —
मैं उसे फिर देखता हूँ।
वही स्टाफ़ मेंबर।
वही यूनिफ़ॉर्म।
वही पॉस्चर।
रिसेप्शन के पास पेपर्स अरेंज करने का नाटक।
उसकी नज़र उठती है।
हमारी आँखें मिलती हैं।
एक छोटी-सी स्मर्क।
क्विक। शार्प।
लाउड नहीं।
ऑब्वियस नहीं।
पर क्लियर।
जैसे वह कुछ जानता हो।
जैसे उसके पास कोई सीक्रेट हो।
उसने वो देखा है जो बस मुझे देखना अलाउड है।
फिर उसने एक नज़र नेहा पर डाली।
मेने महसूस किआ एक झटका जो उसके पेण्ट में हुआ।
मेरा जॉ टाइट हो जाता है।
मैं इमैजिन करता हूँ —
वही सीन।
मैं आगे बढ़ता हूँ।
वह स्टिफ़ हो जाता है।
एक सेकंड के लिए उसे लगता है — अब कुछ होगा।
उसके लगा में अभी मुक्का मार कर उसके दांत तोड़ दूंगा।
लोग देख रहे हैं।
मैं रुकता हूँ।
स्माइल करता हूँ।
वह कन्फ्यूज़ हो जाता है।
मैं पॉकेट से पर्स निकालता हूँ।
और एक फोल्डेड नोट।
धीरे से उसके हाथ में रख देता हूँ।
मैं : हम कुछ घंटों के लिए बाहर जा रहे हैं।
रूम का… ख़याल रखना।
वह ब्लिंक करता है।
स्टाफ़ : यस सर। ऑफ़ कोर्स।
नेहा अब मुझे देख रही है।
शक नहीं।
गुस्सा नहीं।
बस... सतर्क।
उसे पता है हम जल्दी में निकले थे।
उसे पता है उसकी चीज़ें अभी बिखरी पड़ी हैं।
उसकी यूज़्ड ब्रा बेड पर पड़ी है... कल रात की मस्ती के बाद... उसमें उसकी पूरी खुशबू और पसीना है।
उसकी पैंटी।
उसकी लिंगरी... जो उसने वीकेंड को और स्पाइसी बनाने के लिए खरीदी थी।
और उसे पता है मैं कभी ऐसा टिप नहीं देता।
हम कार की ओर चलते हैं।
पहाड़ियाँ चमकदार हैं। टूरिस्ट फोटो खींच रहे हैं। दुनिया ऐसे व्यवहार कर रही है जैसे कुछ हुआ ही न हो।
नेहा दरवाज़ा खोलती है, फिर रुकती है।
नेहा : सब ठीक है न?
मैं सिर हिलाता हूँ।
मैं हमेशा सिर हिलाता हूँ।
अंदर कुछ कुलबुलाता है।
मुझे सच समझ आता है, कड़ा और हुमिलिएटिंग :
मैंने उसे दया से टिप नहीं दिया।
डर से भी नहीं।
मैंने टिप इसलिए दिया क्योंकि जो उसने देखा, उसे अनडू नहीं कर सकता था।
मैंने टिप इसलिए दिया क्योंकि उसने मुझे वो हार्ड-ऑन दिया।
मैंने टिप इसलिए दिया क्योंकि उसने मेरे दिमाग में बंद पुरानी यादें वापस जगा दीं।
मुझे लगा था मैं उनसे ऊपर उठ चुका हूँ... लेकिन लगता है टीन्स के दिन अभी खत्म ही नहीं हुई थी... बल्कि अभी शुरू हो रही थी।
मैं इंजन स्टार्ट करता हूँ।
हम निकल पड़ते हैं।
पीछे होटल पेड़ों में सिमटता जाता है।
लेकिन वो पल बना रहता है। हमारे बीच बैठा हुआ। खामोश।
मैंने इस दिन की प्लानिंग महीनों से की थी।
व्यूपॉइंट्स। स्ट्रॉबेरी। कोहरा जो अधूरी सोचों की तरह बहता है।
मैं सही वक़्त पर मुस्कुराता हूँ।
नज़ारे की ओर इशारा करता हूँ।
सही बातें सही वक़्त पर कहता हूँ।
बाहर से मैं एंजॉय कर रहा हूँ।
नेहा मानती है। या मानना चाहती है।
अंदर मेरे दिमाग में होटल रूम नहीं निकलता।
मैं कल्पना करता हूँ—हमारे बिना कमरा।
उस लड़के को नेहा की ब्रा सूँघते हुए... उसकी खुशबू... जीभ से चाटते हुए।
उसका लंड बाहर... नेहा की पैंटी पर रगड़ते हुए।
उस टाइम फ्रेम में वो कितनी बार झड़ेगा।
क्या वो नौकरी दाँव पर लगाकर ऐसा करेगा।
और सुबह का सीन।
हर रुकावट में वही दरवाज़ा थोड़ा सा खुला।
हवा नेहा के बाल उड़ाती है। वो रेलिंग पर झुककर घाटी देख रही है।
मैं सामान्य से ज़्यादा करीब खड़ा होता हूँ।
छह महीने की शादी में कभी पब्लिक में इतना करीब नहीं हुआ।
मेरा हाथ उसकी बाँह पर जाता है। कैजुअल। पब्लिक।
जगह भीड़भरी है।
कई कपल आसपास हैं।
लेकिन कोई इतना करीब नहीं।
अंधेरा होने वाला है... सब सूर्यास्त देखने इकट्ठा हैं।
मैं देखता हूँ कुछ मर्द और कपल हमें देख रहे हैं।
नेहा की खूबसूरती हमेशा ध्यान खींचती है... लेकिन इस बार मैं लस्ट वाली नज़रें साफ़ देख पा रहा हूँ।
पहली बार वो ध्यान मुझे खतरा नहीं लगता।
बल्कि कन्फ़र्मेशन लगता है।
मालिकाना हक नहीं।
खतरा नहीं।
मौजूदगी।
मैं अपना हाथ हल्के से उसकी कमर पर रखता हूँ। पब्लिक। दिखता हुआ। बिना छुपाए।
उसकी गहरी नाभि से खेलता हूँ।
वो ऊपर देखती है, हैरान, फिर बिना पूछे मुस्कुराती है।
मेरा हाथ उसकी टैंक टॉप के अंदर उसके स्तनों की ओर बढ़ता है।
वो लगातार मुझे देख रही है, मुस्कुराते हुए।
उसका चेहरा सेटिंग सन की रोशनी में है और मैं उसके पीछे।
वो मुझे अपनी टाइट जींस के ऊपर अपनी गांड पर महसूस कर रही है।
और मैं उसे हल्के-हल्के थ्रस्ट्स दे रहा हूँ।
अब मेरे हाथ उसकी टी-शर्ट के अंदर, ब्रा के ऊपर उसके स्तनों पर।
मैं हल्के से दबाता हूँ, उसके मुँह से हल्की सी सिसकारी निकलती है।
उसका सिर मेरे कंधे पर टिक जाता है।
आँखें बंद।
वो हल्की सिसकारी पास के लोगों का ध्यान खींचने के लिए काफी है।
खासकर मर्दों का।
मैं नहीं रुकता, वो मुझे नहीं रोकती।
मैं अब अपनी बीवी के स्तनों से खेल रहा हूँ, अपनी प्रॉपर्टी से।
मेरी प्रॉपर्टी, रिवाज़ के मुताबिक।
मैं चारों तरफ़ देखता हूँ।
कुछ मर्दों और औरतों से आँखें मिलती हैं जो हमें देख रहे हैं।
अचानक वो मेरा हाथ पकड़कर खींच लेती है, जबकि मैं दूसरों को देख रहा हूँ।
सूरज पहाड़ों के नीचे डूब जाता है। अजनबियों से तालियाँ बजती हैं।
मैं उसकी परछाईं को धुंधली होती रोशनी में देखता रहता हूँ।
वो मुड़ती है, हैरान।
फिर मुस्कुराती है।
नेहा : आज तुम कुछ अलग हो।
मैं हँसकर टाल देता हूँ।
सैम : शायद ये जगह मुझे ऐसा बना रही है।
नेहा : ऐसा क्या?
सैम :एडवेंचरस।
नेहा (मुस्कुराते हुए) : एग्ज़िबिशनिस्ट शब्द ज़्यादा सही रहेगा।
सैम
अरे, कभी सोचा नहीं था।
उसे साफ़ आईडिया नहीं देता... हालांकि मुझे पता है वो पकड़ चुकी है।
हम कार से होटल वापस लौटते हैं।
रास्ते में लगभग खामोशी।
मैं बेतरह जानना चाहता हूँ कि हमारे कमरे में क्या हुआ।
हम होटल पहुँच गए।मैं रिसेप्शन डेस्क पर खड़ा था, अपनी पॉकेट्स टटोलते हुए, वॉलेट चेक करते हुए, काउंटर को स्कैन करते हुए। की देर से मिल रही थी, डेलिबरेटली लेट, और मेरी इम्पेशेंस क्लियर दिख रही थी—मेरा बॉडी गर्म हो रहा था, लाइक कोई आग सुलग रही हो, साँसें फास्ट हो गईं थीं, और इनसाइड एक कंपकंपी डाउन तक फैल रही थी, स्किन पर झनझनाहट छोड़ते हुए।
मेरी आइज़ पहले वाले उस गाय को ढूँढ रही थीं, लॉबी की डिम येलो लाइट में, जहाँ एयर-कंडीशनर की कोल्ड ब्रीज आ रही थी, मिक्स्ड परफ्यूम और कॉफी की स्मेल के साथ। ही वॉज़न्ट अराउंड। उसकी एब्सेंस मुझे प्रेजेंस से ज्यादा बॉदर कर रही थी, लाइक कोई अनफिनिश्ड थॉट चुभ रहा हो, और डिज़ायर्स और एक्साइटेड हो रही हों, हार्ट की बीट कानों में इको कर रही हो।
नेहा लॉबी के एक सोफा पर बैठी थी, मुझसे थोड़ी दूर, जहाँ लेदर की सॉफ्ट सरफेस पर उसका बॉडी सिंक हो रहा था। नियरबाय थ्री मेन थे, फिफ्टीज़ के अराउंड, प्रॉबेबली चेक-इन वेट कर रहे थे—देयर सिगरेट की फेंट स्मोक वाली ब्रेथ्स एयर में घुल रही थीं, क्लोथ्स से ओल्ड कोलोन की सेंट।
तीनों उसे घूर रहे थे, ओपनली, विदाउट शेम—देयर आइज़ उसके बॉडी पर क्रॉल कर रही थीं, स्लीवलेस टैंक टॉप से पीक करते शोल्डर्स, नेक और चेस्ट की कर्व्स पर, लाइक वे टच, किस करना चाहते हों, और मैं उनकी आइज़ में वो हंगर देख सकता था, जो मुझे भी बर्न कर रही थी।
नॉर्मली, यही वो जगह होती जहाँ नेहा स्टिफ हो जाती, खुद को श्रिंक कर लेती, मेरी तरफ ग्लांस घुमाती। आज, उसने ऐसा नहीं किया। शी लुक्ड काल्म। ऑलमोस्ट रिलैक्स्ड—बल्कि, एक लाइट स्माइल उसके लिप्स पर खेल रही थी, लाइक वो इस अटेंशन का एंजॉय ले रही हो, और उसकी आइज़ में एक स्पार्कल थी जो मुझे और हॉट कर रही थी, लाइक इलेक्ट्रिसिटी शॉक।
वो स्माइल की, उसके लिप्स की सॉफ्ट पिंक ग्लो चमक उठी। फिर सोफा पर बैक झुक गई, दोनों हैंड्स हेड के पीछे रखते हुए—उसकी फिंगर्स उसके हेयर्स में टैंगल हो रही थीं, सॉफ्ट और सिल्की—टैंक टॉप में शोल्डर्स और चेस्ट ओपन होते हुए, उसकी ब्रेथ्स अप-डाउन हो रही थीं, लाइक डेलिबरेटली अपने बॉडी को डिस्प्ले कर रही हो।
उसकी स्किन की शाइन, लाइट स्वेट जो नेक पर ग्लो कर रहा था, हर मूवमेंट मुझे टीज़ कर रही थी, और मैं इमेजिन कर रहा था कि उसकी स्किन कितनी वॉर्म और सॉफ्ट होगी मेरे टच से। डिफेंसिव नहीं। अनअवेयर नहीं। डेलिबरेट—उसकी आइज़ उन आदमियों की तरफ उठी, एक पल के लिए, और वहाँ एक स्पार्क थी, लाइक इनविटेशन, जो मेरे अंदर स्टॉर्म खड़ा कर रहा था, मेरी ब्रेथ्स और फास्ट हो गईं।
ये एक क्वाइट चैलेंज जैसे लग रहा था, लाइक वो एक्ज़ैक्टली जानती हो कि क्या कर रही है। मेबी वो उन्हें जेलस बनाना चाहती हो। मेबी वो खुद को सीन फील करना चाहती हो—और फील दैट वॉर्म्थ जो नज़रों से आती है।
मेरे अंदर कुछ मूवमेंट हुई, एक जेलसी, एक डिज़ायर जो बढ़ रही थी—मेरा हार्ट पाउंडिंग था, मसल्स टाइट हो गईं थीं, पाम्स स्वेट से वेट, और मैं इमेजिन कर रहा था कि कैसे मैं उसे उन नज़रों से स्नैच लूँ, अपनी आर्म्स में प्रेस कर लूँ, उसकी स्किन की फ्रेग्रेंस स्मेल करूँ।
और मैं वहाँ खड़ा था, अपनी ओन डिलेमा में फँसा। मैं रूम चाहता था। मैं डोर क्लोज्ड चाहता था—ताकि मैं उसे टच कर सकूँ, उस टेंशन को ब्रेक कर सकूँ जो अब एयर में फ्लोट कर रहा था, और अपनी अराउज़ल को उस पर अनलीश कर सकूँ, उसे फील करवा सकूँ कि वो सिर्फ मेरी है, उसकी साँसों की गर्मी मेरे फेस पर फील करूँ।
लेकिन मेरा एक पार्ट रिसेप्शन पर ही जमा रहा, उन तीन चेहरों के एक्सप्रेशन्स को देखते हुए—उनकी लालसा, उनकी ईर्ष्या—ये समझने की कोशिश करते हुए कि ये दृश्य मुझे क्यों नहीं रोक रहा था, बल्कि और उकसा रहा था, मेरी उत्तेजना को चरम पर पहुँचा रहा था, जैसे हर सेकंड मेरे बॉडी में आग की लहर दौड़ रही हो।
रिसेप्शन पर कोई नहीं था... इसलिए मैंने बेल को 3-4 बार बजाया, उसकी तेज़, कर्कश आवाज़ लॉबी में गूँज रही थी, जैसे मेरी अधीरता को और भड़का रही हो, मेरी उँगलियाँ बेल पर दबते हुए पसीने से चिपचिपी हो गईं थीं।
कुछ पल बाद, एक औरत जल्दी-जल्दी आई, उसके कदमों की थपथपाहट फर्श पर सुनाई दे रही थी, उसके चेहरे पर हल्की लाली और साँसें तेज़। "सॉरी सर..." उसने कहा, उसकी आवाज़ में एक हल्की सी घबराहट, फिर "ओह, आपकी चाबी..." वह डेस्क की तरफ देखी, फिर दीवार पर टँगी चाबियों की पूरी दीवार को स्कैन किया—उसकी आँखें तेज़ी से घूम रही थीं, जैसे कोई रहस्य ढूँढ रही हों।
फिर... उसने एक चाबी उठाई, मुझे मुस्कुराते हुए दी। "सर, आपका रूम अब तैयार है... ऑल क्लीन..." जिस तरह उसने 'क्लीन' कहा, उसकी आवाज़ में एक गहरा अर्थ छिपा था, और अंत में वो विंक—उसकी पलकें झपकती हुईं, जैसे कोई राज़ साझा कर रही हो, जो कहने से ज्यादा कह गया।
शायद ये वो गॉसिप है जो वे मेरी वाइफ के बारे में कर रहे हैं... क्या पूरे होटल को पता है कि मेरी वाइफ के ब्रेस्ट कैसे दिखते हैं? वो नरम उभार, वो टैंक टॉप से झलकती रेखाएँ, वो गर्माहट जो नजरों से महसूस होती है—मेरे दिमाग में वो तस्वीर उभर आई, मेरी साँसें और तेज़ हो गईं, बॉडी में एक और लहर दौड़ी।
जैसे मैं कल्पना कर रहा हूँ कि कैसे सब उन्हें देख रहे होंगे, छूने की चाहत में, और वो विचार मुझे और उत्तेजित कर रहा था, मेरी मसल्स और सख्त हो गईं, हार्ट की बीट कानों में बज रही थी।
मैं चाबी थामे खड़ा रहा, उसकी ठंडी मेटल मेरी पाम में दब रही थी, लेकिन मेरी नज़रें अभी भी नेहा पर थीं, उन तीन आदमियों की लालसा भरी निगाहों के बीच, और अब ये औरत की विंक ने सब कुछ और गहरा कर दिया था।
मैंने चाबी थाम ली और अपनी वाइफ की तरफ देखा, उसकी ठंडी धातु मेरी हथेली में दब रही थी, लेकिन मेरा ध्यान अब नेहा पर था, लॉबी की मद्धम रोशनी में उसकी मुस्कान अभी भी खेल रही थी।
मैंने देखा कि एक बूढ़ा आदमी उसे पास आ रहा था... ओ माय गॉड... आज क्या हो रहा है? पहले एक लो-लेवल होटल बॉय ने मेरी वाइफ को टॉपलेस नहाते हुए देखा, उसके बॉडी की हर रेखा, उसके गीले बाल और चेस्ट की उभारों को घूरते हुए।
और अब ये बूढ़ा आदमी, जो उसके पिता की उम्र का होगा—उसकी झुर्रियों वाली स्किन, व्हाइट हेयर्स, लेकिन आइज़ में वही हंगर जो मुझे परेशान कर रही थी, मेरी उत्तेजना को और भड़का रही थी।
वह उसके पास पहुँचा और कुछ पूछा, उसकी वॉइस धीमी, लेकिन उसका बॉडी नेहा की तरफ झुका हुआ था, जैसे वो करीब आकर उसकी खुशबू सूँघना चाहता हो।
मैं सुन नहीं सका, दूरी ज्यादा थी, लॉबी की हल्की गूँजती आवाज़ें सब कुछ धुंधला कर रही थीं—एयर-कंडीशनर की ठंडी हवा मेरी स्किन पर झनझना रही थी, लेकिन मेरी साँसें गर्म हो रही थीं, हार्ट की धड़कन तेज़।
मैंने उसके फेस पर स्माइल देखी, वो सॉफ्ट, चंचल स्माइल जो मुझे पता था कि डेलिबरेट थी, जैसे वो इस गेम का मजा ले रही हो, उसकी आइज़ चमक रही थीं।
फिर मैंने सुना, "नो नो... आई एम विद हिम," उसने कहा, उँगली से मेरी तरफ इशारा करते हुए, उसकी वॉइस में एक हल्की सी शरारत, जैसे वो इस अटेंशन से एक्साइटेड हो रही हो।
"ओह सॉरी सॉरी," वो आदमी बोला, अफसोस लेकिन आइज़ में अभी भी लालसा, "नॉट हर..." उसने अपने फ्रेंड की तरफ देखा, जैसे कोई मिस्टेक सुधार रहा हो, लेकिन मैं जानता था कि वो लाई था।
उसकी नज़रें नेहा के बॉडी पर टिकी हुई थीं, उसके टैंक टॉप से झलकते शोल्डर्स और चेस्ट पर, और वो दृश्य मेरे अंदर एक आग सुलगा रहा था, मेरी मसल्स तन गईं, मैं इमेजिन कर रहा था कि कैसे वो उसे टच करने की सोच रहा होगा, और वो थॉट मुझे और हॉट कर रहा था, जैसे मैं खुद उसे अब और ज्यादा चाहता हूँ, उसे रूम में ले जाकर उसकी हर इच्छा को पूरा करूँ।
मैं अब और इंतजार नहीं कर सका, चाबी को मुट्ठी में दबाए नेहा की तरफ बढ़ा, मेरी साँसें तेज़, बॉडी में वो टेंशन जो अब फूटने को तैयार था।
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मैंने लिफ्ट का बटन बहुत जल्दी-जल्दी दबाया, बार-बार, जैसे कोई और सेकंड बर्दाश्त न हो।मुझे वेट नहीं हो पा रहा था, इम्पेशेंटली नेहा का हाथ थामे खड़ा था, उसकी हथेली मेरी पसीने से गीली हो रही थी, लेकिन वो मुस्कुरा रही थी—एक नरम, शरारती स्माइल, जैसे वो मेरी इस बेचैनी का मजा ले रही हो।
उसने कभी मुझे इतना ईगर नहीं देखा था, उसकी आँखों में चमक थी, जैसे वो जानती हो कि मेरे अंदर क्या तूफान चल रहा है।रूम चौथी मंजिल पर था, और मैं सारे सीन से थक चुका था—लॉबी के वो घूरते चेहरे, वो गॉसिप, वो विंक—सब कुछ मेरे दिमाग में घूम रहा था, लेकिन अब सिर्फ एक ही चीज चाहिए थी: नेहा को अकेले पकड़ना।
लिफ्ट अभी भी नहीं आई, और मैं सोचने लगा—क्या इंतजार करूँ या नेहा को हाथ पकड़कर सीढ़ियों से भाग जाऊँ?मेरा दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि सीढ़ियाँ चढ़ने की थकान भी महसूस नहीं हो रही थी, बस वो इच्छा थी कि जितनी जल्दी हो सके, दरवाजा बंद करूँ और उसकी साँसों की गर्मी महसूस करूँ।
नेहा ने मेरी उँगलियों को हल्का सा दबाया, जैसे कह रही हो—“जल्दी करो, मैं भी तैयार हूँ।”मैंने फैसला कर लिया—लिफ्ट का इंतजार नहीं, सीढ़ियाँ ही सही, और नेहा का हाथ थामे मैं तेज़ कदमों से सीढ़ियों की तरफ बढ़ा .
हम लिफ्ट के पास खड़े रहे, मैंने सीढ़ियों का प्लान छोड़ दिया क्योंकि लिफ्ट तीसरी मंजिल पर रुकी हुई थी और अब नीचे की तरफ मूव करना शुरू कर दी थी।मैंने फैसला किया कि वेट कर लूँ, नेहा का हाथ अभी भी मेरी मुट्ठी में था, उसकी उँगलियाँ हल्के-हल्के मेरी हथेली पर खेल रही थीं, जैसे वो मेरी बेचैनी को और बढ़ा रही हो।
तभी रिसेप्शन से एक जोरदार “हायyyyy” की आवाज़ आई, इतनी तेज़ और चंचल कि मेरी नज़र खुद-ब-खुद वहाँ चली गई।एक बहुत अट्रैक्टिव यंग लड़की, करीब 25 की उम्र की, हाई हील्स में तेज़ कदमों से आ रही थी—बहुत छोटी स्कर्ट, जो हर स्टेप पर ऊपर सरक रही थी, और टाइट टैंक टॉप जो उसके कर्व्स को परफेक्टली हाइलाइट कर रहा था, उसके बाल खुले, होंठों पर ब्राइट लिपस्टिक, और वो कॉन्फिडेंस जो हवा में महसूस हो रहा था।
वो उसी बूढ़े आदमी की तरफ जा रही थी जिसने पहले नेहा से बात की थी, दोनों हाथ मिलाने वाले थे, उसकी स्माइल में कुछ शरारत थी, जैसे कोई पुराना खेल फिर शुरू होने वाला हो।मैं एक सेकंड के लिए रुक गया, वो लड़की का ग्लिम्प्स लेने की कोशिश कर रहा था—उसकी स्कर्ट का हेम, टैंक टॉप से झलकती स्किन, हाई हील्स की क्लिक-क्लिक—लेकिन तभी लिफ्ट का “टिंग” हुआ, दरवाज़ा खुल गया।
मेरा दिमाग दो हिस्सों में बँट गया—एक तरफ वो सेक्सी गर्ल का सीन देखने की इच्छा, दूसरी तरफ नेहा को रूम में ले जाकर सब कुछ अनलीश करने की जलन।मैंने नेहा का हाथ और सख्ती से पकड़ा, उसकी तरफ देखा—उसकी आँखों में वही चमक थी, जैसे वो कह रही हो “चलो, अब बस रूम ही चाहिए”—और मैंने वो ग्लिम्प्स छोड़ दिया, लिफ्ट में घुस गया।
लिफ्ट ऊपर चढ़ रही थी, मेरी साँसें अभी भी तेज़, नेहा मेरे बगल में खड़ी थी, उसकी बॉडी की गर्मी मुझे छू रही थी।चौथी मंजिल पर दरवाज़ा खुला, मैंने नेहा को अंदर खींचा, चाबी लगाई, और दरवाज़ा बंद करते ही वो सारी दुनिया बाहर रह गई—अब सिर्फ हम दोनों, और वो तनाव जो अब फूटने को तैयार था।
रूम में घुसते ही मैंने चारों तरफ नज़र दौड़ाई, हर कोने को स्कैन करते हुए—क्या कोई ट्रेस है?वेटर ने क्या किया होगा? नेहा की यूज़्ड ब्रा और पैंटी कहाँ रखी होगी? शायद छिपाकर, या खेल-खेल में कुछ किया होगा... लेकिन सब कुछ परफेक्टली नीट एंड क्लीन था, जैसे हम पहली बार किसी फ्रेश रूम में एंटर कर रहे हों।
बेडशीट्स क्रिस्प, तौलिए फोल्डेड, फ्लोर स्पॉटलेस—कुछ भी सस्पिशियस नहीं, कोई गंध नहीं, कोई निशान नहीं।मुझे रिलीव्ड होना चाहिए था, खुश होना चाहिए था... लेकिन इसके बजाय एक हल्की सी डिसअपॉइंटमेंट महसूस हुई, जैसे कोई उम्मीद टूट गई हो।
मैं इतना ईगर था रूम में आने का—नेहा के कपड़े फाड़कर उतारने का, आज लव नहीं, हार्ड फक करने का प्लान था, रफ, इंटेंस, बिना रुकावट के।लेकिन अब वो सारी एक्साइटमेंट जैसे हवा में उड़ गई, बॉडी में वो आग ठंडी पड़ रही थी, साँसें अभी भी तेज़ लेकिन वो जलन कम हो गई।
नेहा ने दरवाज़ा बंद किया, मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा, उसकी आँखों में अभी भी वही चमक थी।मैं बिस्तर पर बैठ गया, हाथों में सिर थामे—क्या हुआ? वो सारे सीन, वो घूरती नज़रें, वो गॉसिप... सब कुछ बाहर रह गया, और अब ये खाली, परफेक्ट रूम मुझे और खाली सा लगा।
फिर भी, नेहा मेरे पास आई, उसने मेरी कमर पर हाथ रखा, धीरे से मेरे कान में फुसफुसाई—“क्या हुआ? अभी भी उतना ही गर्म हो?”उसकी साँस मेरे गले पर लगी
नेहा ने धीरे से अपना हाथ मेरे क्रॉच एरिया पर रखा, उँगलियाँ हल्के से दबाकर मेरे लुंड की हार्डनेस चेक करने लगी... लेकिन वो सॉफ्ट था, पूरी तरह ढीला।उसने मुझे हैरानी से देखा, आँखें थोड़ी बड़ी हो गईं, जैसे कोई अनजाना सवाल उसके मन में आ गया हो।
"ये तो पब्लिक में इतना हार्ड था... लोग देख भी सकते थे... इतना टाइट... कार में भी, लॉबी में भी... अब क्या हो गया?"उसकी आवाज़ में मिक्स्ड सरप्राइज और थोड़ी चिंता थी, लेकिन आँखों में अभी भी वो शरारती चमक बाकी थी।
मैंने कुछ नहीं कहा, बस चुपचाप कंधे उचकाए, चेहरा बनाया जैसे मुझे खुद नहीं पता क्या हुआ।दिमाग में वो सारे सीन घूम रहे थे—घूरती नज़रें, गॉसिप, वो विंक—लेकिन अब वो आग कहीं ठंडी पड़ गई थी, जैसे सब कुछ बाहर ही रह गया।
नेहा ने हल्के से मुस्कुराया, फिर कहा, "इट्स ओके... मैं इसे फिर से हार्ड कर दूँगी।"उसने पहले मेरी जींस का बटन खोला, ज़िप नीचे की, और एक झटके में जींस और अंडरवियर दोनों को नीचे सरका दिया—मेरा लुंड हवा में बाहर आ गया, एवरेज साइज़, एवरेज मोटाई का, नॉर्मल, जैसा मैं जानता हूँ कि बहुत से लड़कों के पास इम्प्रेसिव साइज़ होते हैं, लेकिन मेरा बस एवरेज है, जैसा मैंने रियल लाइफ में देखा है।
वो मेरे सामने घुटनों पर बैठ गई, उसकी साँसें मेरे लुंड पर लग रही थीं, गर्म और नरम।उसने धीरे से हाथ में लिया, हल्के से सहलाया, जैसे कह रही हो—अभी सब ठीक हो जाएगा, बस थोड़ा टाइम दो।
मैं बेड पर बैठा था, पीठ तकिए से टिकी हुई, और नेहा मेरे सामने घुटनों पर थी—उसने धीरे से अपना टॉप उतारा, एक झटके में ऊपर से निकाला और ज़मीन पर फेंक दिया।वो लाल ब्रा में खड़ी थी, जैसे कोई देवी—उसकी स्किन की चमक, ब्रा के लेस से झलकते उभार, और वो कॉन्फिडेंट लुक जो मुझे हमेशा पागल कर देता था।
मैंने कॉलेज में कुछ अफेयर्स किए थे, लेकिन नेहा जैसी औरत कभी नहीं देखी—वो कभी हिचकिचाती नहीं, ब्लोजॉब देने में बिल्कुल नेचुरल, जैसे ये उसकी आदत हो।पहली बार से ही, वो वर्जिन थी या नहीं, मैं नहीं जानता, लेकिन उसने कभी नहीं बताया कि इतना अच्छा कैसे सक्शन करती है—बस करती रहती है, और मैं बस देखता रह जाता हूँ।
उसने मेरे लुंड को हाथ में लिया, पहले नाक से पास ले जाकर सूँघा, गहरी साँस खींची।"आह्ह... मैं तुम्हारी ये खुशबू बहुत पसंद करती हूँ," उसने कहा, आँखें बंद करके, "सिगरेट जला ... बस लेट जाओ और किंग की तरह एंजॉय करो।"
उसकी साँसें मेरे लुंड पर गर्म-गर्म लग रही थीं, वो धीरे-धीरे जीभ से टिप को छू रही थी, हल्के-हल्के चाटते हुए।मेरा लुंड अब फिर से सख्त होने लगा, वो सॉफ्टनेस धीरे-धीरे गायब हो रही थी—नेहा की आवाज़, उसकी खुशबू, उसका टच सब कुछ वापस जगा रहा था।
उत्तेजना में मेरा लुंड उसके मुँह में गहराई तक चला गया, एक झटके में, जैसे कोई रोक-टोक न हो।एक हाथ में लाइट सिगरेट थी, धुआँ हवा में घुल रहा था, और दूसरे हाथ से मैंने उसके बाल पकड़कर सख्ती से खींचे, उसे और गहराई तक धकेलते हुए—डीप, और डीप, बिना सोचे कि वो कितनी असहज हो रही होगी।
ये पहली बार था... मैं इतना सेल्फिश था, शादी के इस छोटे से समय में पहली बार।मैंने उसकी असुविधा पर ध्यान नहीं दिया, बस अपना प्लेजर, अपना कंट्रोल—उसे फोर्स कर रहा था, जैसे वो मेरी प्रॉपर्टी हो।
लेकिन नेहा ने कोई हिचक नहीं दिखाई, कोई विरोध नहीं।वो रियल स्लेव की तरह एक्ट कर रही थी—आँखें बंद, मुँह पूरी तरह भरा हुआ, मेरी हर पुश को बिना रुके सहन करते हुए, जैसे ये उसकी ड्यूटी हो।
मेरा लुंड उसके गले तक पहुँच गया था, उसकी नाक मेरे लोअर एब्डोमेन को छू रही थी, साँसें तेज़ और गर्म।मैंने नीचे देखा—उसके चेहरे पर वो एक्सप्रेशन, वो सरेंडर—और अचानक बोला, "आँखें खोलो... और मुझे देखो।"
ये मेरे लिए भी शॉक था।हम कभी सेक्स के दौरान इतने वोकल नहीं थे, कभी कमांड नहीं दी, कभी ऑर्डर नहीं—लेकिन आज कुछ अलग था, जैसे वो सारी रोक-टोक टूट गई हो।
नेहा ने धीरे से आँखें खोलीं, उसकी पुतलियाँ मेरी तरफ उठीं—वो नज़रें, वो वेटिंग, वो सबमिशन।उसकी आँखों में आँसू थे, लेकिन कोई शिकायत नहीं—बस एक गहरा, साइलेंट "आई एम युअर्स"।
मैंने सिगरेट का एक कश लिया, धुआँ उसके चेहरे पर छोड़ा, और फिर बाल खींचकर उसे और गहराई में धकेला।वो चोक हुई, लेकिन रुकी नहीं—बस मेरी आँखों में देखती रही, जैसे कह रही हो कि जितना चाहो, उतना कर लो।
अब वो पुरानी वाली आग फिर से भड़क रही थी, और ज्यादा इंटेंस, ज्यादा रफ।मैं जानता था कि आज रात ये सिर्फ शुरुआत है—बाकी सब कुछ और गहरा, और ज्यादा वाइल्ड होने वाला था।
जब मैंने उसे छोड़ा, तो नेहा गहरी-गहरी साँसें ले रही थी, खाँसते हुए, गले से वो कर्कश आवाज़ निकल रही थी।मैंने उसके बाल नहीं छोड़े, अभी भी मुट्ठी में जकड़े हुए थे—उसकी साँसें तेज़, चेहरा लाल, आँखें नम।
30 सेकंड में वो फिर से होश में आई, धीरे से सिर उठाया और मेरी आँखों में देखने लगी—वो नज़रें, वो सरेंडर, वो गहराई।मैंने सिगरेट उसके होंठों के पास ले जाकर रखी, वो कभी-कभी स्मोक करती थी, लेकिन हमेशा असहज लगती थी, जैसे मजबूरी में।
मुझे नहीं पता स्मोकिंग से औरतें और अट्रैक्टिव क्यों लगती हैं, लेकिन मैं कभी-कभी उसे फोर्स करता था एक-दो ड्रैग लेने को—वो ले लेती, लेकिन कभी कम्फर्टेबल नहीं दिखती।इस बार उसने बिना कुछ कहे सिगरेट ले ली, आँखें मेरी हीं में टिकी हुईं—एक गहरी कश ली, धुआँ फेफड़ों में भरकर धीरे-धीरे बाहर छोड़ा।
इस बार वो इतनी नेचुरल, इतनी कम्फर्टेबल लग रही थी—जैसे पहले वो बस एक्टिंग कर रही थी, और अब असली वाली नेहा सामने है।उसका चेहरा, होंठों पर धुएँ की हल्की सी लेयर, वो सेक्सी लुक—दमदार, गॉडडैम सेक्सी।
उसने फिर मेरे लुंड की तरफ देखा—वो अब पूरी तरह गीला था, उसके थूक से कोटेड, टिप से लेकर बॉल्स तक चमक रहा था।वो और पास आई, नाक मेरे लुंड की बेस पर छू गई, और फिर जीभ से मेरी बॉल्स को क्लीन करने लगी—धीरे-धीरे, चाटते हुए, जैसे वो उनका स्वाद ले रही हो।
मैं स्वर्ग में था—उसकी गर्म जीभ, वो गीली सनसनी, उसके बाल अभी भी मेरे हाथ में, सिगरेट का धुआँ हवा में तैर रहा था।हर टच, हर चाट मेरी बॉडी में बिजली दौड़ा रही थी—अब वो पुरानी आग फिर से भड़क चुकी थी, और ज्यादा तेज़, ज्यादा डीप।
नेहा ने एक बार ऊपर देखा, आँखों में वो चमक, होंठों पर हल्की स्माइल—जैसे कह रही हो, “अभी तो बस शुरुआत है।”मैंने उसके बाल और सख्ती से पकड़े, और उसे फिर से ऊपर खींचा—रात अभी लंबी थी, और मैं जानता था कि आज सब कुछ और वाइल्ड होने वाला है।
ओह्ह... नेहा मुझे ऐसे थ्रिल्स दे रही थी जो उसने कभी नहीं दिए थे।
मैं बस उसकी आँखों में देखता रहा, जबकि वो मेरी बॉल्स को चाट रही थी—धीरे-धीरे, जीभ से हर हिस्से को साफ करते हुए, जैसे कोई बिच अपनी मालिक की खुशबू सूँघ रही हो और चाट रही हो।
उसकी आँखें मेरी तरफ उठी हुई थीं, पूरी तरह सरेंडर, पूरी तरह सबमिसिव—वो नज़रें कह रही थीं कि वो मेरी है, सिर्फ मेरी, और जितना चाहूँ उतना यूज़ कर सकता हूँ।
उसकी जीभ गीली, गर्म, मेरी स्किन पर स्लाइड कर रही थी, थूक से चमकते हुए, और हर लिक के साथ मेरी बॉडी में बिजली दौड़ रही थी।
"आआह्ह... इसे अच्छे से क्लीन करो," मैंने उत्तेजना में चिल्लाकर कहा, आवाज़ भारी हो गई थी।
मैंने उसके बाल और सख्ती से पकड़े, सिर को थोड़ा नीचे दबाया—वो और गहराई में चली गई, नाक मेरे बेस पर दब गई, जीभ बॉल्स के नीचे से ऊपर तक घुमा रही थी, जैसे वो हर ड्रॉप को सोख लेना चाहती हो।
उसकी साँसें तेज़ हो गईं, लेकिन वो रुकी नहीं—बस चाटती रही, सूँघती रही, मेरी हर कमांड का पालन करती हुई।
मैंने सिगरेट का एक और कश लिया, धुआँ उसके चेहरे पर फेंका, और देखता रहा—वो कितनी सेक्सी लग रही थी, कितनी वाइल्ड, कितनी मेरी।
अब मेरा लुंड फिर से पूरी तरह हार्ड हो चुका था, पल्स कर रहा था, तैयार था अगले लेवल के लिए।
नेहा ने एक बार ऊपर देखा, होंठ गीले, आँखें चमकती हुईं—जैसे कह रही हो, “अभी और चाहिए? जितना चाहो, उतना लो।”
मैंने उसके बालों को और जोर से पकड़ा, जैसे कोई रस्सी हो जिसे खींचकर मैं उसे कंट्रोल कर रहा हूँ।
नेहा की सिर ऊपर-नीचे होने की रफ्तार बढ़ गई—तेज, गीली, गर्म आवाजें कमरे में गूंज रही थीं।
मेरा लुंड अब पूरी तरह फड़क रहा था, टिप से प्रीकम लगातार टपक रहा था।
हर बार जब वो नीचे जाती, उसका माथा मेरे पेट से टकराता, और प्रीकम की बूंदें उसके गालों पर, नाक के नीचे, आँखों के ठीक नीचे गिर रही थीं।
वो बूंदें चमक रही थीं, जैसे कोई हीरे की तरह उसके चेहरे पर सजा हो।
उसकी डार्क ब्राउन आँखें मेरी तरफ टिकी हुई थीं—पूरी तरह खुली, पूरी तरह भूखी, पूरी तरह मेरी।
मैंने कभी उसे इतना एक्साइटेड नहीं देखा था।
उसकी पुतलियाँ फैली हुई थीं, साँसें तेज, होंठ सूजे हुए और गीले।
वो बस देखती रही, बिना पलक झपकाए, जैसे मेरी आँखों में ही उसकी सारी दुनिया सिमटी हो।
"आह्ह... नेहा... तू आज कितनी गंदी हो गई है..." मैंने भारी आवाज में कहा, और एक और कश सिगरेट का लिया।
धुआँ उसके चेहरे पर फेंका—वो थोड़ा सा सिकुड़ गई, लेकिन रुकी नहीं।
बल्कि और जोश से मेरी बॉल्स को चाटने लगी, जीभ नीचे से ऊपर तक घुमाती हुई, जैसे हर इंच को अपना बना रही हो।
मेरा क्लाइमेक्स अब कंट्रोल से बाहर होने वाला था।
सुबह तो मैंने सोचा था कि आज लंबा खेलूँगा, उसे घंटों तक तड़पाऊँगा... लेकिन ये नेहा... आज कुछ और ही थी।
उसकी आँखें, उसकी जीभ, उसका सरेंडर—सब कुछ मुझे पागल कर रहा था।
मैंने उसका सिर और तेजी से ऊपर-नीचे किया।
"और तेज... हाँ... ऐसे ही... अपनी जीभ निकालकर पूरा साफ कर..."
वो गुर्राई जैसी आवाज निकाल रही थी—नाक से, गले से—लेकिन मेरी हर बात मान रही थी।
मेरा लुंड अब उसके मुंह में आधा घुस चुका था, टिप उसके गले को छू रही थी, और प्रीकम उसकी जीभ पर फैल रहा था।
अचानक मैंने उसके बाल छोड़े, दोनों हाथों से उसके गाल पकड़े।
उसका चेहरा ऊपर उठाया—उसकी आँखें फिर मेरी आँखों में।
प्रीकम उसकी आँखों के नीचे चमक रहा था, होंठ लाल, गाल गीले।
"देख... कितनी सेक्सी लग रही है तू..." मैंने फुसफुसाते हुए कहा।
नेहा ने अचानक मेरी आँखों में देखा—उसकी डार्क ब्राउन आँखें अब और भी गहरी, और भी भूखी लग रही थीं।
वो धीरे से बोली, आवाज़ में एक अलग सी मिठास और कमांड मिली हुई,
"टी-शर्ट उतारो ।"
मैंने बिना सोचे एक सेकंड भी नहीं लगाया। टी-शर्ट उतारी और फेंक दी।
मेरा चेस्ट हेयरलेस था—साफ, चिकना, और हल्के से मैन बूब्स जैसा थोड़ा उभरा हुआ।
नेहा ने मुझे देखा, होंठों पर हल्की सी मुस्कान आई, जैसे कोई नया खिलौना मिल गया हो।
वो मेरे पास आई, दोनों हाथ मेरी कमर पर रखे, और सीधे मेरे निप्पल्स पर झुक गई।
उसकी जीभ पहले दाएँ निप्पल को छुई—धीरे से चक्कर लगाया, फिर हल्का सा काटा।
"आह्ह..." मेरी मुंह से निकल गई आवाज़।
आज सब कुछ नया लग रहा था—उसकी जीभ गीली, गर्म, और इतनी सॉफ्ट कि मेरी बॉडी में कंपकंपी दौड़ गई।
वो बारी-बारी दोनों निप्पल्स को चूसने लगी, जैसे कोई औरत को चूस रही हो।
एक हाथ से वो मेरे लुंड को सहला रही थी—धीरे-धीरे ऊपर-नीचे, दूसरा हाथ बॉल्स को मसल रहा था, हल्के से दबा रही थी।
मैं बस सिर पीछे करके, आँखें बंद करके महसूस कर रहा था।
उसकी साँसें मेरे चेस्ट पर पड़ रही थीं, गर्म, तेज।
वो अच्छे 4-5 मिनट तक यहीं रुकी रही—एक निप्पल को चूसती, दूसरा उँगलियों से खेलती, फिर स्विच।
मेरा लुंड अब इतना हार्ड था कि दर्द होने लगा था, प्रीकम लगातार टपक रहा था उसके हाथ पर।
फिर वो रुकी, ऊपर उठी, मेरी आँखों में देखा।
मैंने सिगरेट उसके होंठों के पास ले जाकर रखी।
उसने गहरा कश लिया—धुआँ अंदर खींचा, गाल अंदर धँस गए, फिर मेरे कान के पास आई।
धुआँ मेरे कान में छोड़ते हुए फुसफुसाई,
"कहाँ झड़ना चाहते हो...?"
मेरा दिल धड़क गया।
मैंने पहले भी कई बार उसके मुँह में लिया था, लेकिन ज्यादातर हम सेक्स करते थे और मैं उसके अंदर ही झड़ जाता था।
या फिर आखिरी पल में निकालकर फर्श पर... लेकिन ये... ये सवाल, ये तरीका...
ये कभी नहीं हुआ था।
वो मुझे चॉइस दे रही थी—और वो भी इतनी कैजुअली, इतनी सेक्सी तरीके से।
मैंने उसकी कमर पकड़ी, उसे और करीब खींचा।
उसकी साँसें अभी भी धुएँ से भरी थीं, होंठ गीले।
मैंने भारी आवाज में कहा,
"पहले तो मैं सोच रहा था... तेरे मुँह में... लेकिन अब..."
नेहा ने हल्के से हँसी, फिर मेरे होंठ चूमे—धीरे, गहराई से।
फिर कान में फिर से फुसफुसाई,
"बताओ ना... मैं सब कुछ करूँगी... आज सिर्फ तुम्हारी मर्ज़ी।"
मेरा दिमाग घूम रहा था।
कहाँ झड़ूँ? उसके मुँह में? उसके चेहरे पर? उसके चेस्ट पर? या कहीं और?
उसकी आँखें इंतज़ार कर रही थीं—पूरी तरह मेरी, पूरी तरह तैयार।
मैंने उसकी आँखों में देखते हुए, भारी साँसों के बीच कहा,
"मैं तेरे मुँह में झड़ना चाहता हूँ... सब कुछ... अंदर।"
नेहा ने बस मुस्कुराई—एक गहरी, सेक्सी, विजयी वाली मुस्कान।
फिर धीरे-धीरे नीचे सरकी, मेरे बदन को हर इंच पर किस करते हुए।
पेट पर, नाभि के पास, फिर नीचे... मेरे लुंड की जड़ तक।
हर किस गीली, गर्म, और इतनी धीमी कि मेरी बॉडी काँप रही थी।
अंत में वो फिर से मेरे लुंड के सामने थी।
मैंने उसके बाल फिर से सख्ती से पकड़े—इस बार जैसे वो मेरा खिलौना हो, मेरी पसंद की गुड़िया।
उसका चेहरा अब मेरे कंट्रोल में था।
मैंने उसे गहराई तक धकेला—एक झटके में, पूरा लुंड उसके गले तक।
"घोक... घोक... घोक..."
कमरा सिर्फ इसी आवाज़ से भर गया।
वो भाग नहीं रही थी—बल्कि हिस्सा ले रही थी।
उसकी जीभ मेरे नीचे घूम रही थी, गले से दबाव दे रही थी, जैसे मुझे और गहरा खींच रही हो।
मैं अपनी कमर ऊपर उठा रहा था, रिदम मैच करने के लिए—हर थ्रस्ट में और जोर, और गहराई।
उसकी आँखें चौड़ी हो गई थीं—पानी से भरी, लेकिन बंद नहीं।
वो अभी भी मुझे देख रही थी, जैसे कह रही हो, "और दो... सब कुछ दो।"
मेरा क्लाइमेक्स अब बिल्कुल किनारे पर था।
दिल की धड़कन कान में गूंज रही थी।
अचानक मैंने ग्रिप ढीली की।
खड़ा हो गया।
नेहा घुटनों पर थी, नीचे ज़मीन पर, मुँह पूरी तरह खुला, जीभ थोड़ी बाहर, इंतज़ार में।
उसकी आँखें ऊपर मेरी तरफ—भूखी, तैयार, मेरी।
3... 2... 1...
मैंने झटका दिया।
पहली फुहार—जोर से निकली, आधी उसके चेहरे पर गिरी (गालों पर, होंठों के किनारे), आधी सीधे उसके मुँह में।
फिर बाकी सब—परफेक्टली टारगेटेड, उसके खुले मुँह में।
एक के बाद एक, गाढ़ी, गर्म धारें।
वो सब सोख रही थी—बिना एक बूंद गिराए, जीभ से सब चाटते हुए।
मैं साँसें लेते हुए नीचे देख रहा था।
उसका चेहरा—प्रीकम और अब मेरा कम से चमकता हुआ।
होंठ सूजे, आँखें अभी भी मेरी तरफ।
जैसे ही आखिरी फुहार निकली, मैंने जोर से चिल्लाया—आवाज़ काँप रही थी, लेकिन साफ और कमांडिंग,
"स्वॉलो मत करना... पहले मुझे दिखा... रुक जा!"
नेहा ने तुरंत मान लिया।
वो एकदम स्टैच्यू की तरह फ्रीज हो गई—घुटनों पर बैठी, सिर थोड़ा पीछे, ठोड़ी ऊपर उठाई हुई, मुँह पूरी तरह खुला।
उसकी आँखें मेरी तरफ टिकी हुईं—बड़ी, चमकती, आज्ञाकारी।
मैं नीचे झुका, करीब से देखा।
उसके मुँह में सफेद, गाढ़ा तरल भरा हुआ था—मेरा सब कुछ, अभी-अभी निकला हुआ।
वो हिल नहीं रही थी, साँसें धीमी, लेकिन कंट्रोल में।
जीभ थोड़ी सी बाहर, जैसे वो मुझे दिखा रही हो कि सब कितना है, कितना गाढ़ा, कितना गर्म।
कुछ बूंदें उसके होंठों के किनारे से नीचे सरक रही थीं, लेकिन वो उन्हें चाट नहीं रही थी—बस इंतज़ार कर रही थी।
मैंने हाथ बढ़ाकर उसके गाल पर हल्के से थपकी दी, जैसे कोई अच्छी लड़की को इनाम दे रहा हो।
"बहुत अच्छी... देख कितना भर लिया तूने।"
मैंने अपनी उँगली उसके होंठ के पास ले जाकर एक बूंद उठाई, फिर उसे अपने होंठों पर लगाया—स्वाद लिया।
नेहा अभी भी वैसी ही थी—मुँह खुला, ठोड़ी ऊपर, आँखें मेरी आँखों में।
उसकी साँसें अब और गर्म लग रही थीं, नाक से हल्की-हल्की फड़फड़ाहट।
वो बिना बोले कह रही थी—अब क्या? क्या करूँ?
मैंने धीरे से कहा, आवाज़ अब थोड़ी नरम, लेकिन अभी भी मालिक वाली,
"अब... धीरे-धीरे घूँट ले... मुझे दिखाते हुए।"
उसने पलकें झपकाई—एक बार, जैसे हामी भरी।
फिर धीरे-धीरे गला हिलाया।
मैंने देखा—वो तरल उसके गले से नीचे उतर रहा था, एक-एक बूंद।
उसके होंठ हिल रहे थे, जीभ अंदर-बाहर हो रही थी, जैसे वो हर स्वाद को एंजॉय कर रही हो।
आखिरी घूँट के साथ उसने होंठ चाटे, फिर जीभ निकालकर दिखाया—साफ, चमकती।
"सब... अंदर चला गया," वो फुसफुसाई, आवाज़ रसीली, थकी हुई, लेकिन खुश।
फिर मुस्कुराई—एक छोटी, शरारती सी मुस्कान।
"अब... और कुछ चाहिए?"
मैं बस उसकी तरफ देखता रहा—पसीने से तर, चेहरा अभी भी मेरे निशानों से चमकता हुआ।
कमरा अब शांत था, सिर्फ हमारी साँसें और हल्की-हल्की खुशबू।
मैं बस उसे देखता रहा—घुटनों पर बैठी हुई नेहा, चेहरा अभी भी मेरे निशानों से चमकता हुआ, होंठ सूजे हुए, आँखें डार्क ब्राउन और इतनी गहरी कि उनमें डूब जाने का मन कर रहा था।
वो कभी इतनी एक्सी, इतनी इरोटिक नहीं लगी थी जितनी आज लग रही थी।
उसका पूरा बदन पसीने से तर, बाल बिखरे हुए, साँसें अभी भी तेज़—लेकिन उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी, जैसे वो अभी-अभी कोई बड़ा काम पूरा करके बहुत संतुष्ट हो।
वो फिर से मुँह खोला—धीरे से, ठोड़ी ऊपर करके।
अंदर सब साफ था, कोई बूंद नहीं बची।
उसने जीभ निकालकर दिखाया—चमकती, गीली, साफ।
फिर एक छोटी, शरारती सी मुस्कान दी—जैसे कह रही हो, "देखो... सब खत्म कर दिया... तुम्हारा सब कुछ अंदर।"
फिर उसकी नज़र नीचे गई—मेरे लुंड पर, जो अब थोड़ा सॉफ्ट हो रहा था, लेकिन टिप पर अभी भी कुछ बूंदें चमक रही थीं।
बिना एक सेकंड भी वेस्ट किए, वो आगे बढ़ी।
उसकी जीभ पहले टिप को छुई—धीरे से, जैसे कोई कीमती चीज़ को साफ कर रही हो।
फिर पूरी तरह लपेट लिया—जीभ से चारों तरफ घुमाकर, हर बूंद को चाट लिया।
वो साफ-साफ कर रही थी, जैसे ये उसका फाइनल रिचुअल हो।
हर लिक के साथ हल्की-हल्की सक्शन, जैसे आखिरी स्वाद को भी एंजॉय करना चाहती हो।
मैंने सिर पीछे करके आह भरी—"आह्ह... नेहा... तू आज क्या कर रही है..."
मेरा हाथ उसके बालों में फिर से चला गया, लेकिन इस बार सॉफ्टली, बस सहलाते हुए।
वो जारी रही—धीरे-धीरे, प्यार से, मेरे लुंड को पूरी तरह क्लीन करती हुई।
टिप से लेकर बेस तक, बॉल्स तक—सब कुछ।
उसकी जीभ गर्म, नरम, और इतनी स्किलफुल कि मेरी बॉडी में फिर से हल्की कंपकंपी दौड़ने लगी।
आखिर में वो रुकी, ऊपर देखा—होंठ गीले, चेहरा अब और भी ग्लो कर रहा था।
"सब क्लीन... अब बिल्कुल तैयार," वो फुसफुसाई, आवाज़ में एक अलग सी मिठास।
फिर मेरे पेट पर एक हल्का किस किया, जैसे थैंक यू कह रही हो।
मैंने उसे ऊपर खींचा—अपनी बाहों में लिया, दोनों एक-दूसरे से चिपक गए।
उसका बदन गर्म, नरम, और अभी भी काँप रहा था।
मैंने उसके कान में कहा,
"तू आज कुछ और ही लग रही है... जैसे पहली बार हो।"
नेहा ने मेरी छाती पर सिर रखा, हल्के से हँसी।
"शायद... आज मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ... पूरी तरह।"
कमरा अब शांत था—सिर्फ हमारी साँसें, और हल्की-हल्की खुशबू।
लेकिन मैं जानता था... ये अभी खत्म नहीं हुआ।
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नेहा ने क्लीनिंग का काम खत्म किया, धीरे से उठी—टॉपलेस, बदन पसीने से चमकता हुआ, स्तन अभी भी भारी-भरकम साँसों के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे।
उसकी आँखें मेरी तरफ—वो आज पावरहाउस थी, जैसे कोई आग लगी हो अंदर।
मैं बस उसे देखता रहा—1.5 घंटे बीत चुके थे, 7:30 से 9 बज गए, और हमारा ये "शो" अभी भी चल रहा था।
आमतौर पर तो आधे घंटे में खत्म हो जाता था—पहले ड्रिंक, फिर कम्फर्टेबल होकर सीधे सेक्स।
लेकिन आज कुछ और था।
मैं जानता था मैं क्यों इतना एक्साइटेड था—लेकिन नेहा? वो आज अलग लेवल पर थी।
मैंने खुद को रोक नहीं पाया।
उसके पास गया, दोनों हाथों से उसके चेहरे को पकड़ा और गहरा किस किया।
हमारी जीभें मिलीं—तेज़, भूखी, लड़ती हुई।
मैं अपने ही कम का स्वाद महसूस कर रहा था उसके मुँह में—नमकीन, गाढ़ा, गर्म—लेकिन मुझे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था।
बल्कि और जोश आ रहा था।
एक हाथ उसकी गांड पर—कसकर दबाया, मसलता हुआ, दूसरा हाथ उसकी जींस के क्रॉच पर गया।
उँगलियाँ बाहर से ही रगड़ने लगीं—धीरे-धीरे, फिर जोर से।
उसकी जींस गीली हो चुकी थी वहाँ, गर्माहट महसूस हो रही थी।
मैंने जींस का बटन खोलने की कोशिश की—उँगलियाँ अंदर डालकर ज़िप नीचे करने लगा।
तभी नेहा ने किस तोड़ा।
पीछे हटी, मेरी आँखों में देखा—होंठ सूजे, साँसें तेज़।
"बेबी... वेट..." वो फुसफुसाई, आवाज़ में थकान और मुस्कान दोनों।
"मैं भूखी हूँ... और कुछ बियर चाहिए।"
मैंने हल्के से हँसा,
लेकिन अंदर से सोच रहा था—अब मेरी बारी है।
उसने मुझे इतना दिया है, अब मुझे उसे ऑर्गेज़्म देना है।
उसे तड़पाना है, चिल्लाना है, मेरे नाम से पुकारना है।
नेहा ने मेरी सोच पढ़ ली जैसे।
वो मुस्कुराई, मेरे सीने पर हाथ रखा, और बोली,
"मैं अभी-अभी तुम्हें ब्लो करके खत्म कर चुकी हूँ... अब मुझे रिलैक्स होने दे।"
फिर मेरी कमर में हाथ डाला, मुझे बेड की तरफ खींचा।
"बियर लाओ... साथ में कुछ खाने को।
फिर... जो करना है, वो धीरे-धीरे करेंगे।
आज रात अभी लंबी है।"
मैंने उसे देखा—वो अभी भी टॉपलेस थी, जींस का बटन खुला हुआ, आँखों में वही भूख।
मैंने रिसेप्शन पर कॉल किया और ऑर्डर दे दिया—कुछ स्नैक्स, दो कोल्ड बियर
15 मिनट बाद दरवाज़े पर नॉक हुई।
मैं अभी भी बेड के पास खड़ा था, नेहा बेड पर लेटी हुई—टॉपलेस, स्तन अभी भी हल्के से ऊपर-नीचे हो रहे थे, चेहरा पसीने और मेरे निशानों से चमकता हुआ।
सब कुछ फिर से फ्लैश हो गया मेरे दिमाग में—सुबह वाला वेटर, जो नेहा को देखकर थोड़ा अटपटा हो गया था।
क्या वही आएगा?
मेरा दिल धड़कने लगा।
मैंने नेहा की तरफ देखा, घबराते हुए कहा,
"कोई दरवाज़े पर है... कुछ पहन ले ना!"
नेहा ने बस मुस्कुराई—एक शरारती, तेज़ मुस्कान।
उठकर बैठ गई, दोनों हाथ पीछे करके बेड पर टिकाए, स्तन और भी उभर आए।
"बेबी... मैं ऐसे ही दरवाज़ा खोल सकती हूँ... क्या प्रॉब्लम है?"
फिर आँख मारकर, टॉन्ग बाहर निकालकर चाटते हुए बोली, "देखना चाहता है क्या वो कैसे रिएक्ट करता है?"
मेरा लिम्प डिक एकदम जाग गया—फिर से हल्का सा खड़ा होने लगा।
वो उठी, धीरे-धीरे दरवाज़े की तरफ बढ़ने लगी—टॉपलेस, जींस का बटन अभी भी खुला हुआ, कमर नंगी।
हर कदम के साथ उसके स्तन हिल रहे थे, और मेरी साँसें रुक रही थीं।
क्या ये सच में हो रहा है?
मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था—एक्साइटमेंट, डर, और जोश का मिक्स।
तभी नेहा रुकी, मुड़ी, मुझे देखकर हँसी—एक पूरी तरह मास्टर वाली हँसी।
फिर तेज़ी से बाथरूम की तरफ दौड़ी, दरवाज़ा बंद करते हुए आखिरी शब्द बोले,
"जा... खोल दे बेबी!"
दरवाज़ा बंद हो गया।
मैं अकेला खड़ा था—नंगा, दिल धड़कता हुआ, और डिक फिर से हल्का सा पल्स कर रहा था।
दरवाज़े पर फिर नॉक हुई—"साब... ऑर्डर..."
मैंने जल्दी से एक टॉवल लपेटा कमर पर, साँसें संभालीं, और दरवाज़ा खोला।
वही वेटर था—सुबह वाला।
उसने ट्रे आगे बढ़ाई, लेकिन नज़रें मेरे पीछे कमरे में घूम रही थीं—शायद नेहा को ढूँढ रहा था।
मैंने ट्रे ली, टिप दी, और जल्दी से दरवाज़ा बंद कर दिया।
अंदर मुड़ा तो बाथरूम का दरवाज़ा खुला था।
नेहा बाहर आई—अभी भी टॉपलेस, लेकिन अब एक छोटा सा टॉवल लपेटा कमर पर।
वो हँसते हुए मेरे पास आई, ट्रे से बियर की बोतल उठाई, और मेरे होंठों पर चूम लिया।
"डर गए थे ना?" वो फुसफुसाई, "लेकिन देखा... मैं कितनी शरारती हूँ आज।"
मैंने उसे बाहों में खींचा, बियर की बोतल उसके हाथ से छीनी, और कहा,
"तू आज पागल कर रही है मुझे... लेकिन अब बारी मेरी है।
बियर पी... खा... क्योंकि उसके बाद तुझे चिल्लाने का मौका मिलेगा।"
नेहा ने बियर का एक घूँट लिया, ठंडक महसूस करते हुए आँखें बंद कीं।
फिर मेरी तरफ देखा—आँखों में वही भूख।
"तो आओ... शुरू करो।
मैं तैयार हूँ... पूरी तरह।"
हम दोनों अब टॉवल में लिपटे हुए थे—मैंने कमर पर एक, नेहा ने भी छोटा सा टॉवल लपेटा हुआ था, जो मुश्किल से उसकी जांघों तक ढक रहा था।
टीवी ऑन था—कोई सॉफ्ट म्यूजिक चल रहा था, लाइट्स डिम, कमरा अभी भी हमारी गर्मी और बियर की ठंडक से भरा हुआ।
मैंने बेड पर बैठकर बियर की बोतल उठाई, एक घूँट लिया, ठंडक गले से नीचे उतरी।
नेहा मेरे बगल में बैठ गई, अपनी बोतल मेरे होंठों पर रखी—मैंने पीया, फिर उसने।
हम दोनों हँसते हुए एक-दूसरे को देख रहे थे।
फिर बिना कुछ कहे, मैंने उसे खींचकर किस करना शुरू किया।
धीरे-धीरे, गहराई से—हमारी जीभें फिर से लड़ने लगीं, बियर का स्वाद मिला हुआ।
मेरा एक हाथ उसके टॉवल के ऊपर से उसके स्तनों पर गया—नरम, गर्म, अभी भी थोड़े सूजे हुए।
मैंने हल्के से मसला, निप्पल्स को उँगलियों से घुमाया।
नेहा ने आह भरी, सिर पीछे करके—उसकी साँसें तेज़ हो गईं।
अचानक वो शरारत से हँसी, बोतल उठाई, और थोड़ा सा बियर अपने स्तनों पर डाल दिया।
ठंडी बूंदें उसके निप्पल्स से नीचे सरकने लगीं—चमकती हुई, सेक्सी।
वो मेरी तरफ देखकर बोली,
"क्या कर सकते हो... चाटोगे?"
मैंने बिना जवाब दिए झुक गया।
जीभ से पहले निप्पल को छुआ—ठंडा बियर और उसकी गर्म स्किन का मिक्स।
फिर पूरी तरह चाटने लगा—एक स्तन से दूसरा, बूंद-बूंद चाटते हुए।
नेहा की हँसी अब आहों में बदल गई—वो मेरे बालों में उँगलियाँ फेर रही थी, सिर दबा रही थी।
मैं नीचे सरकता गया—बियर की बूंदें उसके पेट तक पहुँच गई थीं।
उसकी नाभि गहरी थी—मैंने जीभ डालकर वहाँ से पी लिया, जैसे कोई कीमती शराब हो।
नेहा हँस पड़ी—प्लेफुल, शरारती हँसी।
"और नीचे... देखो क्या हो रहा है।"
उसने फिर बोतल उठाई, थोड़ा और बियर डाला—इस बार सीधे अपने पेट से नीचे, टॉवल के किनारे तक।
बूंदें उसकी जांघों पर सरक रही थीं, और अब उसकी पुसी तक पहुँच रही थीं—गीली, चमकती।
मैं नीचे झुका, टॉवल थोड़ा सा हटाया।
उसकी पुसी पहले से ही गीली थी—बियर की बूंदों से और भी चमक रही थी।
मैंने जीभ से चाटना शुरू किया—धीरे से, बियर का स्वाद, उसकी अपनी खुशबू का मिक्स।
नेहा अब जोर से हँस रही थी—प्लेफुल, लेकिन एक्साइटेड।
"आह्ह... बेबी... ऐसे ही... चाटो... सब पी लो..."
वो एक हाथ से सिगरेट जला रही थी—एक कश लिया, धुआँ ऊपर फेंका, दूसरा हाथ मेरे सिर पर।
दूसरी तरफ से वो उठाकर खा रही थी—मुँह में डालती, चबाती, और बीच-बीच में आहें भरती।
स्मोकिंग, ड्रिंकिंग, ईटिंग—और मैं उसके नीचे, उसकी पुसी को चाटता हुआ।
मेरा लुंड अब पूरी तरह हार्ड हो चुका था—टॉवल के नीचे फड़क रहा था।
नेहा ने नीचे देखा, मुस्कुराई।
" फिर तैयार हो गया... लेकिन पहले मुझे... मुझे जीभ से ही ..."
वो पैर फैलाकर लेट गई—बियर की बोतल साइड में, सिगरेट होंठों पर, आँखें मेरी तरफ।
नेहा के पैरों को और फैलाया, उसकी पुसी अब पूरी तरह मेरे सामने—गीली, गर्म, बियर की बूंदों और अपनी एक्साइटमेंट से चमकती हुई।
मैंने पहले जीभ से शुरू किया—क्लिटोरिस पर हल्के सर्कल बनाते हुए, धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई।
नेहा की बॉडी तुरंत रिएक्ट कर गई, कमर ऊपर उठी।
"आह्ह... सैम... हाँ... ऐसे ही..." वो मॉन करने लगी, मेरा नाम लेते हुए—सैम।
उसकी आवाज़ में हमेशा वाली इज्ज़त थी—कभी "तू" नहीं, हमेशा "तुम" या "आप"।
मैंने जीभ को और गहरा किया, लेकिन अब एक उँगली भी जोड़ी—धीरे से अंदर डाली।
उसकी पुसी इतनी गीली थी कि उँगली आसानी से सरक गई।
मैंने अंदर-बाहर करना शुरू किया—धीरे, लेकिन उँगली को कर्व करके उस स्पॉट को टच करते हुए।
नेहा ने तुरंत महसूस किया।
"सैम... हाँ... थोड़ा दायें... स्लाइट राइट... ओह्ह... येस... वो स्पॉट... ठीक वही..."
मैंने उसकी बात मानी—उँगली को थोड़ा दायें शिफ्ट किया, प्रेशर बढ़ाया।
जीभ अभी भी क्लिट पर काम कर रही थी—तेज़ फ्लिक्स, सर्कल्स, और कभी-कभी हल्का सक्शन।
नेहा के मॉन्स अब और जोरदार हो गए।
"सैम... अब दो उँगलियाँ... प्लीज़... दो... गू डीप..."
मैंने दूसरी उँगली भी डाली—दोनों साथ में, धीरे से अंदर-बाहर।
उसकी पुसी ने उन्हें टाइटली पकड़ लिया, गर्म और गीली।
मैंने स्पीड बढ़ाई—उँगलियाँ अब तेज़ी से मूव कर रही थीं, कर्व्ड करके G-स्पॉट को बार-बार हिट करते हुए।
जीभ क्लिट पर फिक्स—तेज़, कंसिस्टेंट।
नेहा अब बिस्तर की चादर पकड़कर चिल्ला रही थी—मेरा नाम जोर-जोर से, लेकिन इज्ज़त से।
"सैम... ओह्ह फक... सैम... गू डीप... हाँ... येस... ठीक वैसा ही... मत रुकना... फास्टर... सैम... मैं... आ रही हूँ..."
उसकी कमर अब पूरी तरह ऊपर उठ चुकी थी, पैर काँप रहे थे।
मैंने उँगलियों की स्पीड और प्रेशर और बढ़ाया—दोनों उँगलियाँ अंदर तक, बाहर निकालते हुए क्लिट को जीभ से साथ में।
नेहा की साँसें रुक गईं, बॉडी टाइट हो गई।
"सैम... येस... येस... सैम... आह्ह्ह्ह...!"
वो जोर से झड़ गई—इंटेंस, लंबा ऑर्गेज़्म।
उसकी पुसी मेरी उँगलियों पर पल्स कर रही थी, गर्म तरल निकल रहा था—मैंने उँगलियाँ अंदर रखीं, धीरे-धीरे मूव करते हुए उसे पूरा एक्सपीरियंस देने के लिए।
जीभ अभी भी हल्के से क्लिट को छू रही थी, ओवरसेंसिटिव लेकिन एक्स्ट्रा प्लेज़र के लिए।
नेहा की बॉडी हिल रही थी, आँखें बंद, मुँह खुला, साँसें तेज़-तेज़।
कई सेकंड बाद वो धीरे-धीरे नीचे आई।
आँखें खोलीं—पानी से भरी, चमकती हुई।
मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई, आवाज़ काँपती हुई लेकिन खुश।
"सैम... आपने... मुझे आज तोड़ दिया... इतना इंटेंस... दो उँगलियाँ... जीभ... सब कुछ... परफेक्ट..."
नेहा मुझे ऊपर खींचकर चूम रही थी, उसकी जीभ मेरी जीभ से लड़ रही थी—गहरा, गीला किस।
मैं उसके ऊपर लेटा हुआ था, टॉवल अभी भी कमर पर लिपटा हुआ, लेकिन मेरा लुंड अब पूरी तरह हार्ड, उसके पेट से टकरा रहा था।
उसने मेरे कान में फुसफुसाया, आवाज़ में वही इज्ज़त और शरारत मिली हुई,
"सैम... आप बताइए... अब क्या करना चाहते हैं? मैं तैयार हूँ... पूरी तरह आपकी।"
मैंने उसके होंठ फिर से चूमे, लेकिन दिमाग में एक विचार बार-बार आ रहा था—वो वेटर।
सुबह वाला वही लड़का, जो दरवाज़ा खोलते ही नेहा को टॉपलेस देखकर थोड़ा हक्का-बक्का हो गया था।
अब अगर वो बाहर खड़ा हो... अगर वो किसी तरह झाँक रहा हो... या कल्पना कर रहा हो कि अंदर क्या हो रहा है...
ये विचार मेरे अंदर एक अलग ही आग लगा रहा था।
क्या होगा अगर वो सुन रहा हो? हमारी आहें, नेहा का मेरा नाम पुकारना...
ये सोचते ही मेरा लुंड और सख्त हो गया, और मैंने नेहा को और जोर से दबाया।
"नेहा... अगर वो वेटर अभी भी बाहर हो... और सोच रहा हो कि हम क्या कर रहे हैं..." मैंने उसके कान में कहा, आवाज़ भारी।
नेहा ने हल्के से हँसी, आँखें चमकती हुईं।
"सैम... आप भी ना... वो सोचे तो सोचे... इससे क्या फर्क पड़ता है? बल्कि... इससे और मज़ा आएगा ना?"
वो मेरी कमर पर पैर लपेटकर मुझे और करीब खींच रही थी।
मैंने टॉवल हटाया—दोनों के।
अब हम दोनों पूरी तरह नंगे, एक-दूसरे से चिपके।
मैंने अपना लुंड उसके पुसी के ऊपर रखा—धीरे से रगड़ा, लेकिन अंदर नहीं डाला अभी।
नेहा की साँसें तेज़ हो गईं।
"सैम... प्लीज़... अंदर डालिए..."
मैंने धीरे से धक्का दिया—पहला इंच अंदर गया, वो टाइट, गर्म, गीली।
नेहा ने आह भरी—"आह्ह... सैम... हाँ... धीरे..."
मैंने और गहराई तक धकेला—पूरा अंदर।
हम दोनों एक साथ आह भरे।
फिर मैंने मूवमेंट शुरू किया—धीरे-धीरे, लेकिन गहराई से।
हर थ्रस्ट के साथ दिमाग में वही विचार—अगर वो वेटर बाहर हो... अगर वो सुन रहा हो...
ये सोच मेरे जोश को दोगुना कर रही थी।
मैं तेज़ हो गया—जोर-जोर से, नेहा की कमर पकड़कर।
नेहा अब मॉन कर रही थी—"सैम... ओह्ह... सैम... और जोर से... हाँ..."
मैंने उसके स्तनों को मसलते हुए कहा,
"नेहा... सोचो... अगर वो देख रहा हो... हम दोनों को... ऐसे..."
नेहा ने आँखें बंद कीं, मुस्कुराई—"तो देखने दो... इससे मुझे और अच्छा लग रहा है... सैम... आप और तेज़..."
मैंने स्पीड बढ़ाई—कमरा सिर्फ हमारी साँसों, थप्पड़ जैसी आवाज़ों, और नेहा के मॉन्स से भर गया।
वो विचार—वेटर का सोचना—मुझे और एक्साइटेड कर रहा था, और नेहा को और ज़्यादा प्लेज़र दे रहा था।
मैंने नेहा के बालों को धीरे से, लेकिन मजबूती से पकड़ा—सॉफ्टली, जैसे कोई प्यार भरी कमांड हो।
वो मेरी तरफ देख रही थी—आँखों में सवाल था, लेकिन विरोध बिल्कुल नहीं।
उसने बस हल्के से मुस्कुराई, जैसे कह रही हो, "जो आप चाहें, सैम... मैं आपकी हूँ।"
मैंने उसे खींचकर दरवाज़े की तरफ ले गया—दोनों पूरी तरह नंगे, कमरे की डिम लाइट में हमारी बॉडीज़ चमक रही थीं।
उसके कदम मेरे साथ चल रहे थे, बिना किसी रुकावट के।
दरवाज़े के ठीक सामने पहुँचकर मैंने उसे झुकाया—उसके गाल ठंडे दरवाज़े से रगड़ रहे थे, साँसें तेज़ हो गईं।
मैंने उसके बालों को अपनी मुट्ठी में और सख्त किया, लेकिन दर्द नहीं—बस कंट्रोल।
मैंने अपना लुंड उसके पुसी पर टच किया—वो पहले से ही गीली, गर्म।
नेहा ने खुद अपने पैर थोड़े फैलाए—बिना कुछ कहे, बस मुझे इनवाइट करने के लिए।
एक झटके में मैंने पूरा अंदर डाल दिया।
"आआआह्ह्ह..."
हम दोनों की एक साथ आह निकली—उसकी आवाज़ ऊँची, मेरी भारी।
उसकी पुसी ने मुझे टाइटली पकड़ लिया, जैसे कभी छोड़ना ही न हो।
फिर रिदम शुरू हुआ—धीरे-धीरे, लेकिन गहराई से।
हर थ्रस्ट के साथ उसका सिर हल्का-हल्का दरवाज़े से टकरा रहा था—नरम, लेकिन रिदम में।
"आह्ह... सैम... ओह्ह..." वो मॉन कर रही थी, नाम लेते हुए, इज्ज़त से।
"आप... और गहरा... प्लीज़..."
मैं तेज़ हो गया—जोर-जोर से धक्के, कमर पकड़कर।
दरवाज़ा हल्का-हल्का हिल रहा था, बाहर से सुनाई दे रहा होगा।
मेरा दिमाग फिर उसी विचार में चला गया—वो वेटर... या कोई और... बाहर खड़ा हो... सुन रहा हो हमारी हर आवाज़।
नेहा की आहें, मेरी साँसें, थप्पड़ जैसी आवाज़ जब मेरा लुंड अंदर-बाहर हो रहा था।
क्या वो कल्पना कर रहा होगा कि हम दोनों यहाँ... ऐसे... दरवाज़े के ठीक पीछे?
ये सोचते ही मेरा जोश दोगुना हो गया।
मैंने उसके बाल और सख्त पकड़े, सिर थोड़ा पीछे खींचा—उसकी गर्दन एक्सपोज़ हो गई।
मैंने उसके कान में फुसफुसाया,
"नेहा... सोचो... अगर कोई बाहर हो... सुन रहा हो... हम दोनों को..."
नेहा ने आँखें बंद कीं, होंठ काटे, फिर मुस्कुराई—आवाज़ काँपती हुई,
"सैम... तो सुनने दीजिए... इससे मुझे और अच्छा लग रहा है... आप और जोर से... प्लीज़..."
मैंने स्पीड बढ़ाई—अब हर थ्रस्ट में पूरा बल।
उसका गाल दरवाज़े से रगड़ रहा था, सिर हल्का-हल्का टकरा रहा था, आहें अब और ऊँची।
"सैम... आह्ह... सैम... हाँ... ऐसे ही... मत रुकिए..."
मैं बाहर की तरफ सोच रहा था—अगर कोई सच में सुन रहा है... तो सुन ले... ये हमारा पल है।
ये विचार मुझे और एक्साइटेड कर रहा था—और नेहा को भी।
उसकी पुसी अब और टाइट हो रही थी, जैसे ऑर्गेज़्म की तरफ बढ़ रही हो।
मैंने एक हाथ उसके क्लिट पर रखा—उँगलियों से रगड़ते हुए, जबकि लुंड अंदर-बाहर।
नेहा चिल्लाई—"सैम... ओह्ह... मैं... फिर से... आ रही हूँ..."
हम दोनों तेज़ी से क्लाइमेक्स की तरफ बढ़ रहे थे—दरवाज़े के ठीक पीछे, पूरी तरह एक्सपोज़्ड फीलिंग के साथ।
XXXXXX
दूसरी बार, सिर्फ़ पिछले 2 घंटों में... मैंने इतनी जल्दी दोबारा झड़ना कभी नहीं देखा था।
पहले तो कभी-कभी घंटों लग जाते थे रिकवर होने में, लेकिन आज... नेहा की वो खूबसूरती, उसकी हरकतें, वो सरेंडर, वो दरवाज़े के पास वाली पोज़िशन—सब कुछ मिलकर मुझे पागल कर रहा था।
या शायद वो वेटर का विचार... वो सोच कि कोई बाहर खड़ा सुन रहा है, कल्पना कर रहा है कि हम क्या कर रहे हैं... वो एक्साइटमेंट मेरे अंदर आग की तरह फैल रहा था।
मैं नहीं जानता क्या था असली वजह—नेहा की खूबसूरती, उसकी आज की वाइल्डनेस, या वो फैंटसी कि कोई और हमारी प्राइवेसी में झाँक रहा है।
लेकिन जो भी था, वो कमाल का था।
अब घड़ी में 11 बज चुके थे।
नेहा फ्रेश होकर आई—बाथरूम से निकलकर, हल्के से गीले बाल, बॉडी पर सिर्फ़ एक पतला टॉवल लपेटा हुआ, जो मुश्किल से ढक रहा था।
वो बेड पर आई, मेरे पास लेट गई, मुझे टाइटली हग किया।
उसकी साँसें मेरी गर्दन पर पड़ीं—गर्म, थकी हुई, लेकिन संतुष्ट।
उसने गहरी साँस ली और फुसफुसाई,
"आई लव इट, बेबी... आज सब कुछ... परफेक्ट था।"
कुछ ही मिनटों में उसकी साँसें गहरी और रेगुलर हो गईं।
वो गहरी नींद में सो गई—चेहरा शांत, होंठ हल्के खुले, एक हाथ मेरी छाती पर।
लेकिन मेरी आँखों से नींद दूर थी।
मैं छत की तरफ देखता रहा, दिमाग में वही विचार घूम रहे थे।
वो वेटर...
जब हम बाहर गए थे, या जब नेहा शावर ले रही थी... क्या वो कमरे में अकेला था?
क्या उसने नेहा के अंडरगारमेंट्स को छुआ?
उसकी ब्रा, पैंटी—जो बेड पर पड़ी थीं, गंध लेने के लिए, या शायद और कुछ...
कितनी बार उसने हाथ में लिया होगा, कितनी बार उसने खुद को सहलाया होगा, नेहा की ब्रा को सूँघते हुए, या कल्पना करते हुए कि वो नेहा के स्तनों को छू रहा है।
उसकी वो डार्क ब्राउन आँखें, वो गाल, वो होंठ... क्या वो सोच रहा होगा कि नेहा के निप्पल्स कितने सॉफ्ट होंगे?
और कितने लोगों को बताया होगा उसने?
अपने दोस्तों को, या रिसेप्शन पर बैठे दूसरे स्टाफ को—
"यार, आज एक जोड़ा आया... औरत की बॉडी... उफ्फ... उसके बूब्स... इतने परफेक्ट..."
शायद वो हँसते हुए डिटेल्स दे रहा हो—नेहा का टॉपलेस होना
शायद वो कल्पना कर रहा हो कि नेहा उसके सामने घुटनों पर बैठी हो, या दरवाज़े के पीछे हमारी हर आवाज़ सुनकर वो खुद को छू रहा हो।
ये सब सोचते-सोचते मेरा लुंड फिर से हल्का सा पल्स करने लगा।
नींद नहीं आ रही थी—बल्कि एक अजीब सा जोश था।
नेहा सो रही थी, लेकिन मेरा दिमाग अभी भी उस फैंटसी में डूबा हुआ था।
क्या कल सुबह वो वेटर फिर आएगा?
क्या वो नेहा को देखकर मुस्कुराएगा, या शरमाएगा?
या शायद वो कुछ और प्लान कर रहा हो...
मैंने नेहा को और करीब खींचा—उसकी गर्म बॉडी मेरे से चिपकी हुई।
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अब रात के 12 बज चुके थे।
मैं आधी नींद में था—दिमाग में वही विचार घूम रहे थे: वेटर, नेहा के अंडरगारमेंट्स, उसकी ब्रा की खुशबू, और वो सब कल्पनाएँ जो मुझे सोने नहीं दे रही थीं।
अचानक एक जोरदार म्यूजिक की आवाज़ आई—बेस हेवी, पार्टी वाला।
शायद बगल वाले कमरे से... या ऊपर से।
वीकेंड था, और ऐसे रिसॉर्ट में लोग गेटअवे के लिए आते हैं—पार्टी, ड्रिंक्स, लेट नाइट।
मैं तो सोचता हूँ कि अगर कोई डिस्टर्ब हो रहा है तो क्या फर्क पड़ता है... हम खुद भी तो अभी-अभी सोए हैं, लेकिन ये म्यूजिक ने मुझे पूरी तरह जगा दिया।
मैंने धीरे से नेहा को अपने से अलग किया—वो गहरी नींद में थी, सिर मेरी छाती पर टिका हुआ, एक हाथ मेरी कमर पर।
मैं नहीं चाहता था कि वो जागे।
धीरे-धीरे बिस्तर से उतरा, अभी भी नंगा।
वॉशरूम गया, एक लूज नाइट गाउन पहना—वो पतला वाला, जो मुश्किल से ढकता है।
सिगरेट का पैकेट उठाया और बालकनी की तरफ चला गया।
बाहर ठंडी हवा चल रही थी—रात की साइलेंस, सड़क पर बहुत कम गाड़ियाँ।
कूल ब्रिज़ ने मेरे चेहरे को छुआ, अच्छा लगा।
मैंने सिगरेट जलाई, एक गहरा कश लिया, धुआँ ऊपर की तरफ छोड़ा।
म्यूजिक अब और तेज़ लग रहा था—साफ-साफ सुनाई दे रहा था कि सोर्स कहाँ से आ रहा है।
बगल वाली बालकनी से।
उनका दरवाज़ा खुला हुआ था—लाइट्स ऑन, और अंदर से म्यूजिक और हँसी की आवाज़ें।
मैंने झुककर देखा।
वो आदमी वहाँ खड़ा था—वही, जो रिसेप्शन पर नेहा से बात करने की कोशिश कर रहा था।
लंबा, डार्क स्किन, सफेद बाल, लेट 50s में।
एक हाथ में ड्रिंक का ग्लास, दूसरे में सिगरेट।
वो बालकनी की रेलिंग पर टिका हुआ था, अकेला लग रहा था, लेकिन म्यूजिक उसके कमरे से आ रहा था—शायद अंदर कोई और भी हों।
वो मेरी तरफ देखा—एक सेकंड के लिए आँखें मिलीं।
उसने हल्के से सिर हिलाया, जैसे "हैलो" कह रहा हो, या शायद पहचान गया हो।
मैंने सिगरेट का एक और कश लिया, धुआँ उसके कमरे की तरफ फेंका।
दिमाग में फिर वही विचार घूमने लगा—ये आदमी... रिसेप्शन पर नेहा को देखकर कितनी देर तक घूर रहा था।
उसकी आँखें नेहा के चेहरे से नीचे सरक रही थीं—स्तनों पर, कमर पर।
शायद वो सोच रहा होगा कि नेहा जैसी औरत उसके साथ होती तो क्या होता।
या शायद वो अब भी कल्पना कर रहा हो—हमारे कमरे की आवाज़ें सुनकर, या नेहा के बारे में सोचकर।
मैंने सोचा—अगर वो जानता कि अभी कुछ घंटे पहले नेहा मेरे लुंड को चाट रही थी, मुँह में ले रही थी, दरवाज़े के पास झुककर मुझे अंदर ले रही थी... तो क्या करता?
शायद वो भी सिगरेट पीते हुए सोच रहा हो—नेहा की वो डार्क ब्राउन आँखें, वो होंठ, वो बॉडी।
वो आदमी अभी भी वहाँ था—अब उसने ग्लास उठाकर मेरी तरफ देखा, जैसे टोस्ट कर रहा हो।
मैंने बस मुस्कुरा दिया—एक छोटी सी, लेकिन मतलब वाली मुस्कान।
"हाउ आर यू, यंग मैन?" उसने कहा, आवाज़ में वो पुरानी वाली दोस्ताना लेकिन थोड़ी शरारती टोन।
हमारी बालकनियाँ अडजॉइनिंग थीं, लेकिन इतनी करीब नहीं—4th फ्लोर पर, बीच में एक छोटी सी गैप, हवा में ठंडी हवा बह रही थी।
मैंने सिगरेट का एक और कश लिया, धुआँ ऊपर फेंका, और मुस्कुराकर जवाब दिया,
"गुड... गुड।"
"सो व्हेयर आर यू फ्रॉम?"
"पुणे।"
"यू?"
"नागपुर।"
"गुड... एंजॉयिंग विद फ्रेंड्स?"
मैं जानता था वो अकेला नहीं था—रिसेप्शन पर मैंने देखा था, उसके साथ दो और आदमी थे। शायद अंदर बैठे होंगे, म्यूजिक सुनते हुए।
"यस," मैंने हल्के से कहा।
"व्हेयर आर योर ड्रिंक्स, यंग मैन?"
"ओवर हो गई... मैं सोने वाला था।"
"टू सून... दैट्स नॉट फेयर।"
उसने एक झटके में ग्लास उठाया, फिर मेरी तरफ देखकर विंक किया—बिना किसी शर्म के, बिल्कुल अपोलोजेटिक।
"यू हैव ब्यूटीफुल कंपनी... आई वुड हैव बीन अप ऑल नाइट अगर मैं तुम्हारी जगह होता।"
उसकी बात सुनकर मेरे अंदर एक अजीब सा जोश आया।
मैं रूड नहीं होना चाहता था किसी स्ट्रेंजर से, लेकिन एक तरफ से मुझे अच्छा लग रहा था—जब लोग नेहा को देखकर जलते हैं, उसकी खूबसूरती पर जलन महसूस करते हैं, और वो जलन उनके चेहरे पर साफ दिखती है।
ये मुझे पावरफुल फील कराता है।
नेहा मेरी है, और वो सब बस देख सकते हैं।
"व्हाट टू डू... बार क्लोज़्ड है, और ड्रिंक ओवर," मैंने कहा।
"व्हाट यू वर हैविंग?"
"बीयर।"
वो हँसा—एक गहरी, थकी हुई लेकिन खुश वाली हँसी।
"वेट..."
वो अंदर चला गया।
मैं बालकनी पर टिका रहा, सिगरेट खत्म करते हुए।
कुछ सेकंड बाद वो वापस आया—हाथ में एक फ्रेश कोल्ड बियर की बोतल।
उसने उसे मेरी तरफ बढ़ाया।
"हैव इट, यंग मैन।"
"नो, इट्स ओके..."
"नो नो... हैव इट।"
उसने फिर हँसा, "वी हैव गोडाउन," और जोर से हँसा—जैसे वो खुद को बहुत कूल फील कर रहा हो।
मैंने बोतल ली—ठंडी, ओस से भरी हुई।
हम दोनों ने बोतलें हवा में उठाईं—"चियर्स!"
मैंने एक घूँट लिया, ठंडी बीयर गले से नीचे उतरी।
वो भी पीया, फिर मुस्कुराकर बोला,
"आई एम अलोक, बाय द वे।"
"सैम," मैंने कहा।
"व्हाट यू डू, सैम?"
"आई एम इन आईटी।"
"ओह्ह... सो वीकेंड गेटअवे विद योर ब्यूटीफुल वाइफ।"
"यस," मैंने हल्के से कहा, मुस्कुराते हुए।
उसकी बातें बार-बार नेहा पर आ रही थीं—कैजुअली, बिना किसी डिसरिस्पेक्ट के।
जैसे कोई सामान्य बात कर रहा हो, लेकिन आँखों में वो चमक थी जो कह रही थी कि वो नेहा को अच्छे से नोटिस कर चुका है।
मुझे अच्छा लग रहा था—एक अजीब सा पावर फील, कि कोई और मेरी वाइफ की तारीफ कर रहा है, जल रहा है, लेकिन मुझे छू नहीं सकता।
"व्हाट यू गाइज़ डूइंग हियर?" मैंने पूछा, बात को आगे बढ़ाते हुए।
अलोक ने हँसा—एक गहरी, थकी हुई लेकिन मजेदार हँसी।
"हेहे... व्हाट ओल्ड गाइज़ डू विद फ्रेंड्स... दारू, बिरयानी एंड लड़की," उसने कैजुअली कहा, जैसे ये सबसे नॉर्मल बात हो।
उसके शब्द सुनते ही मेरे दिमाग में वो सीन फ्लैश हो गया—जो मैंने पहले नोटिस किया था लेकिन इग्नोर कर दिया था।
रिसेप्शन पर वो "Hiii" वाली आवाज़—यंग, अट्रैक्टिव, थोड़ी प्लेफुल।
मैंने सोचा था शायद कोई होटल स्टाफ है, या कोई और गेस्ट।
लेकिन अब... अलोक की बात सुनकर क्यूरियॉसिटी बढ़ गई।
क्या उसके साथ कोई लड़की है?
कितनी यंग? कितनी अट्रैक्टिव?
और वो "लड़की" का मतलब क्या है—कोई फ्रेंड, या कुछ और?
मैंने बीयर का एक और घूँट लिया, बालकनी की रेलिंग पर टिका रहा।
"सो... वो लड़की... तुम्हारे साथ है?" मैंने कैजुअली पूछा, जैसे बस बात चल रही हो।
अलोक ने ग्लास घुमाया, मुस्कुराया—एक शरारती वाली मुस्कान।
अलोक ने ग्लास घुमाते हुए कहा,
"यस... वो लड़की हमारे साथ है। बर्थडे प्रेजेंट है मेरे फ्रेंड्स ने दिया।"
"बर्थडे प्रेजेंट?" मैंने थोड़ा कन्फ्यूज होकर पूछा।
उसने खुद की तरफ इशारा किया—एक शरारती मुस्कान के साथ।
मैं समझ गया।
"ओह्ह... हैप्पी बर्थडे!" मैंने हँसते हुए कहा।
हम दोनों ने बोतलें उठाईं—बॉटम्स अप।
ठंडी बीयर गले से नीचे उतरी, और वो ठंडक अब मेरे दिमाग में भी फैल रही थी।
"सो... हाउ ओल्ड आर यू?" मैंने पूछा।
"58," उसने कैजुअली कहा, जैसे कोई बड़ी बात नहीं।
मैंने मन ही मन सोचा—ये तो मेरे पापा की उम्र के आसपास है।
लेकिन उसके चेहरे पर कोई थकान नहीं—बल्कि एक एनर्जी थी, वो जो पार्टी और ड्रिंक्स से आती है।
"थैंक्स फॉर द बियर," मैंने कहा, बोतल खत्म करते हुए।
अलोक ने फिर मुस्कुराया—वो वाली मुस्कान जो कुछ छुपा रही हो।
"यू कैन कम टू आवर रूम फॉर मोर बियर... द नाइट इज स्टिल यंग।"
"हम्म... लेकिन मेरी वाइफ सो गई है," मैंने कहा।
उसने कंधे उचकाए, फिर विंक किया—बिना किसी शर्म के।
"तो क्या हुआ... मैं तो उसे बुला नहीं रहा। वैसे भी हमारे कमरे में जो चल रहा है, वो किसी अच्छी-खासी औरत के देखने लायक नहीं है।"
उसकी ये बात सुनकर मेरी उत्सुकता और बढ़ गई।
अंदर क्या हो रहा होगा?
वो लड़की कौन है?
क्या सच में कुछ गर्मागर्म चल रहा है?
मेरा दिमाग अब तेज़ी से सोचने लगा।कितनी यंग? क्या वो सच में "प्रेजेंट" जैसी है—जैसे कोई एस्कॉर्ट, या कोई फ्रेंड जो पार्टी में एक्स्ट्रा मज़ा दे रही हो?
और "नॉट अप्रोप्रिएट फॉर डीसेंट लेडी"—मतलब क्या?
डांस? स्ट्रिप? या कुछ और... इंटेंस?
मेरा दिमाग अब तेज़ी से चल रहा था।
नेहा सो रही थी—शांत, अनजान।
मैं बालकनी पर खड़ा था, दिमाग में दो आवाज़ें लड़ रही थीं।
एक तरफ ब्रेन चिल्ला रहा था—ये गलत है, नेहा जाग गई तो क्या सोचेगी? कहाँ गया ये आदमी रात के 12 बजे? मैं कह दूँगा कि नींद नहीं आ रही थी, बाहर टहलने गया था... या बार में... या कुछ भी। लेकिन नेहा को शक हो सकता है।
दूसरी तरफ... मेरा लुंड।
तीसरी बार रात में हार्ड हो रहा था—ये मेरे लिए खुद का वर्ल्ड रिकॉर्ड था।
आज रात तक जो भी मज़ा मिला है—नेहा के साथ वो सब—वो मेरे दिमाग की वजह से नहीं, मेरे लुंड की वजह से मिला।
दिमाग तो वेटर को पीट-पीटकर वीकेंड खराब कर देता, लेकिन लुंड... लुंड जानता है कि मज़ा कहाँ है।
अलोक अभी भी बालकनी पर खड़ा था, मेरे जवाब का इंतज़ार कर रहा था।
उसकी आँखों में वो चमक थी—जैसे वो पहले से जानता हो कि मैं क्या सोच रहा हूँ।
मैंने साँस ली, और बोल दिया,
"ओके... तुम्हारा रूम नंबर क्या है?"
"411," उसने मुस्कुराकर कहा।
"ओके... वेट, मैं 15 मिनट में आता हूँ।"
मैं कमरे में वापस आया।
नेहा गहरी नींद में थी—नंगी, चादर थोड़ी सरकी हुई, स्तन हल्के से ऊपर-नीचे हो रहे थे साँसों के साथ।
मैंने धीरे से चादर ठीक की, उसे अच्छे से कवर किया ताकि वो कोज़ी रहे।
उसके माथे पर हल्का किस किया—वो सोते हुए भी हल्का सा मुस्कुराई।
फिर धीरे-धीरे मैंने मेन डोर खोला।
हाथ काँप रहे थे।
दरवाज़ा बंद किया, कॉरिडोर में निकला।
रात का सन्नाटा, सिर्फ़ एसी की हल्की आवाज़।
411 का दरवाज़ा ठीक बगल में था।
मैंने शेकिंग हैंड से डोरबेल दबाई।
अलोक ने तुरंत दरवाज़ा खोला।
अंदर से जोरदार म्यूजिक आ रहा था—धब चिक... धब चिक... बेस इतना हेवी कि सीने में महसूस हो रहा था।
और उसके साथ... लाउड मॉन्स।
एक औरत की आवाज़—ऊँची, रसीली, "आह्ह... हाँ... और जोर से..."
मेरा लुंड तुरंत ट्विच कर गया—एकदम सख्त।
अलोक ने मुझे अंदर आने का इशारा किया, मुस्कुराकर।
"आ गए यंग मैन... कम इन।"
मैं कदम रखा।
दरवाज़ा बंद हुआ।
और जैसे ही मैंने अंदर देखा... मेरी आँखें चौड़ी हो गईं।
शॉक में साँस रुक गई।
कमरे में ब्राइट लाइट थी—कोई डिम नहीं, फुल ऑन लाइट्स।
जैसे कोई स्टेज हो, और सब कुछ साफ-साफ दिख रहा हो।
बेड पर वो लड़की—बहुत यंग, बहुत अट्रैक्टिव, पूरी तरह नंगी।
वो चारों हाथ-पैरों पर थी—ऑन हर फोर्स।
उसके पीछे एक ब्राउन स्किन वाला पतला लड़का—शायद 45-46 का—जोर-जोर से धक्के दे रहा था।
हर थ्रस्ट के साथ उसकी बॉडी हिल रही थी, आहें निकल रही थीं।
सामने एक छोटा कद का आदमी—पेट बहुत बड़ा, पॉट जैसा—खड़ा था।
उसका लुंड हार्ड था, वो बस उसे लड़की के क्यूट फेस पर टैप कर रहा था—टिप से प्रीकम निकल रहा था, उसके गालों, होंठों पर फैला रहा था।
उसके हाथ में व्हिस्की का ग्लास था।
और पीछे वाला लड़का—जिसका लुंड अंदर था—उसने अपना व्हिस्की ग्लास लड़की की गांड पर रख दिया था।
ग्लास बैलेंस हो रहा था उसके मूवमेंट्स के साथ, जैसे कोई ट्रिक हो।
मैं अंदर घुसा।
सबने मुझे देखा।
आँखें मिलीं।
लेकिन कोई शॉक नहीं, कोई शर्म नहीं।
जैसे वो लोग सिर्फ़ कॉफी पी रहे हों, या टीवी देख रहे हों—न कि किसी लड़की को चोद रहे हों, जो उम्र में उनकी बेटी जितनी हो सकती है।
पीछे वाला लड़का—जिसका लुंड अंदर था—उसने ग्लास उठाया, मेरी तरफ देखकर बोला,
"दैट्स विशाल," और ग्लास फिर से लड़की की गांड पर रख दिया।
सामने वाला—पॉट वाला—मुझे देखकर बस भौंहें उठाईं, जैसे "हाय" कह रहा हो।
उसका फोकस लड़की के चेहरे पर था—अपने प्रीकम से उसके होंठों को पेंट कर रहा था।
फिर अलोक ने लड़की की तरफ देखकर कहा,
"और ये... क्या नाम बताया था Bhenchod इसने?"
विशाल ने हँसते हुए कहा,
"सैंडी... हेहे।"
"हाँ सैंडी... पता नहीं असली नाम है या आज रात का," अलोक ने कहा।
तब तक मुझे समझ आ गया—ये लड़की प्रॉस्टिट्यूट है।
पेड, पार्टी के लिए बुलाई गई।
बर्थडे गिफ्ट।
अलोक के फ्रेंड्स ने उसे दिया होगा—या शायद ग्रुप में शेयर कर रहे हैं।
सैंडी ने मुझे देखा—आँखें मिलीं।
उसकी आँखें थकी हुई लेकिन प्रोफेशनल थीं—कोई शर्म नहीं, बस काम कर रही थी।
वो मुस्कुराई हल्के से, जैसे कह रही हो "जॉइन कर लो"।
मेरा लुंड अब दर्द कर रहा था—तीसरी बार, और अब ये सब देखकर और भी सख्त।
दिमाग में नेहा का विचार आया—वो सो रही है, अनजान।
लेकिन यहाँ... यहाँ कुछ और चल रहा था।
अलोक ने मेरे कंधे पर हाथ रखा।
"बीयर ले लो, सैम। बैठो। एंजॉय करो।"
मैं बेड के पास वाली टेबल तक पहुँचा—जहाँ सारी बीयर की बोतलें रखी हुई थीं।
लेकिन मेरी आँखें एक सेकंड के लिए भी उस लड़की से हट नहीं रही थीं।
वो इतनी सेक्सी थी... इतनी... परफेक्ट।
फुल प्रोपोर्शनेट जिम बॉडी—कमर पतली, हिप्स चौड़े, लेकिन सब बैलेंस्ड।
वो चारों हाथ-पैरों पर थी, इसलिए उसके स्तन नीचे लटक रहे थे—भारी, गोल, निप्पल्स हार्ड और गुलाबी।
मिल्की व्हाइट स्किन—जैसे दूध में डूबी हो, लेकिन अब पूरी तरह रेड मार्क्स से भरी हुई।
हिक्कीज़—गले पर, कंधों पर, स्तनों के ऊपर—लाल-नीले निशान।
कंधों और गर्दन पर दाँतों के निशान—किसी ने जोर से काटा था।
उसका मेकअप पूरी तरह बिगड़ चुका था—काजल आँखों से बहकर गालों पर काली लाइनें बना रहा था, जो उसे और भी वाइल्ड और अट्रैक्टिव बना रहा था।
चेहरे पर कम के ट्रेस—सफेद लाइनें, कुछ सूख चुकी थीं, कुछ अभी गीली।
गालों पर, होंठों के किनारे, ठोड़ी पर—सब जगह फैली हुई।
वो पोज़िशन मेंटेन करना मुश्किल था—पीछे से धक्के, सामने से लुंड फेस पर टैप—लेकिन वो बैलेंस कर रही थी।
दोनों तरफ से दो लुंड—एक अंदर, एक मुँह के पास।
विशाल (पीछे वाला) ने फिर धक्का दिया—जोर से।
सैंडी की बॉडी हिली, स्तन लटके हुए हिले, एक आह निकली—"आह्ह... हाँ... फाड़ दो..."
डेविड (पॉट वाला) ने अपना लुंड उसके होंठों पर रगड़ा, प्रीकम फैलाते हुए।
"ओपन कर... और चूस।"
"ले लो, सैम। बैठ जाओ। अच्छा शो चल रहा है ना?"
मैंने बोतल ली, लेकिन बैठा नहीं।
बस खड़ा रहा—आँखें सैंडी पर।
उसकी स्किन पर पसीना चमक रहा था, बाल बिखरे हुए, साँसें तेज़।
वो मुझे देख रही थी—आँखें मिलीं, एक सेकंड के लिए।
उसकी आँखों में कोई शर्म नहीं—बस काम, और शायद थोड़ा सा प्लेज़र।
मेरा लुंड अब दर्द कर रहा था—नाइट गाउन के नीचे फड़क रहा था।
तीसरी बार...
विशाल ने ग्लास फिर से उसकी गांड पर रखा—बैलेंस करते हुए धक्के जारी।
मैं बीयर की बोतल हाथ में लेकर सोफे की तरफ चला गया।
अलोक मेरे साथ था—अब वो सिर्फ़ अंडरवियर में था।
उसका टेंट बहुत बड़ा था—बाहर से ही साफ़ दिख रहा था कि वो पूरी तरह हार्ड है।
मैंने सोफे पर होकर बीयर का एक घूँट लिया।
फिर बोतल को अपने पेल्विस पर रख दिया—जैसे ठंडक महसूस हो रही हो।
अचानक अलोक का हाथ मेरी क्रॉच की तरफ बढ़ा।
मैं एकदम अलर्ट हो गया—दिल धड़कने लगा।
लेकिन अगले ही सेकंड राहत हुई—उसने मेरी बीयर पकड़ ली।
"सैम... ये ठंडी नहीं रही... छोड़ दे," उसने कहा।
मैं इतना सैंडी को देखने में खोया हुआ था कि बीयर की टेम्परेचर का तो मुझे कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था।
"इट्स ओके... चलो शॉट्स लेते हैं," मैंने कहा।
"नो नो... मैंने आज काफी पी ली है," मैंने मना किया।
"नहीं यार... ये मेरा बर्थडे है... मैं इंसिस्ट करता हूँ," अलोक ने कहा।
मैंने कुछ नहीं कहा—ना हाँ, ना ना।
बस चुप रहा।
"सैंडी... हमारे लिए कुछ शॉट्स बना!" अलोक ने जोर से चिल्लाया।
सैंडी तुरंत अलर्ट हो गई—वो अभी भी चारों हाथ-पैरों पर थी।
"अरे यार... मत कर... मैं तो मज़े में था bhenchod," डेविड ने शिकायत की।
"अरे यार... पूरी रात तेरी है... अगर तुझे पसंद आए तो मैं कल पूरे दिन के लिए उसे अकेले बुक कर दूँगा," अलोक ने कहा।
डेविड ने निराशा से सैंडी को छोड़ा—उसका लुंड अभी भी हार्ड, प्रीकम टपक रहा था।
वो और विशाल दोनों सोफे की तरफ आए।
सैंडी उठी—नंगी, बॉडी पर सारे निशान, चेहरा मेकअप से बिगड़ा हुआ, काजल बहा हुआ।
वो मिनी बार की तरफ गई।
इस बार मैंने उनके लुंड्स को अच्छे से नोटिस किया।
विशाल का—ब्राउन, अच्छा साइज़ लेकिन पतला, उसके बॉडी टाइप जैसा।
डेविड का—डार्क ब्लैक, पर्पल हेड वाला, मोटा और भारी, दोनों से प्रीकम लीक हो रहा था।
दोनों 2-सीटर सोफे पर बैठ गए—मेरे ठीक सामने।
मैं और अलोक दूसरे सोफे पर थे।
अचानक वो मेरे ठीक सामने आ खड़ी हुई—पूरी तरह नंगी।
मैं सोफे पर बैठा था, वो खड़ी—इसलिए उसकी चूत मेरे चेहरे के ठीक सामने, इतनी करीब कि उसकी गंध सीधे मेरी नाक में आ रही थी। गर्म, नमकीन, औरत की वो खास खुशबू—जो आज रात की मेहनत से और भी तेज़ हो गई थी।
इससे पहले मैंने ज़िंदगी में सिर्फ़ दो चूतें रियल लाइफ में देखी थीं—पहली अपनी कॉलेज गर्लफ्रेंड की, और दूसरी नेहा की।
दोनों के लिए मुझे बहुत स्ट्रगल करना पड़ा था—घंटों कोर्टिंग, इमोशनल गेम, प्यार का नाटक, और फिर भी बहुत मेहनत के बाद ही वो पल आया था।
लेकिन सैंडी की चूत... ये तो बस शीयर लक थी।
कोई मेहनत नहीं, कोई स्ट्रगल नहीं।
बस कमरे में घुसा, और वो मेरे सामने—नंगी, तैयार, खुशबू फैलाती हुई।
जैसे कोई गिफ्ट मिल गया हो—बिना किसी कोशिश के।
मैं बस उसे देखता रहा—यंग, हेयरलेस, गुलाबी, अभी भी गीली और चमकती हुई।
क्लिट थोड़ा बाहर निकला हुआ, जैसे अभी-अभी बहुत काम हुआ हो।
मेरा लुंड नाइट गाउन के नीचे फड़क रहा था—दर्द करने लगा था।
"सर... शॉट्स," उसने फिर धीरे से कहा।
मैंने ऊपर देखा—उसका सपाट पेट, पतली कमर, 36 साइज़ के भारी स्तन लटकते हुए, निप्पल्स हार्ड।
चेहरा—मुस्कान के साथ, लेकिन काजल बहा हुआ, होंठ सूजे, कम के निशान।
वो चेहरा... कहीं जाना-पहचाना लग रहा था, लेकिन नशे में याद नहीं आ रहा था।
मैं ट्रे की तरफ हाथ बढ़ाने ही वाला था कि पीछे से ज़ोरदार थप्पड़—फट्ट! सैंडी की गांड पर।
"ये तरीका है गेस्ट को ऑफर करने का? लेमन कहाँ है?" अलोक ने कहा।
"सॉरी... सॉरी," वो जल्दी से बोली।
ट्रे टेबल पर रखी, लेमन लेने बार एरिया गई।
उसकी गांड हिलती हुई—रेड मार्क्स से भरी, डांस करती हुई।
वो जल्दी लौटी, लेमन हाथ में।
उसने ग्लास उठाया।
मैंने हाथ बढ़ाया, लेकिन वो बोली,
"नो नो सर... जस्ट रिलैक्स।"
वो झुकी—स्तन मेरे चेहरे के सामने लटक आए।
ग्लास मेरे होंठों पर—शॉट गले में गया, जलन हुई।
फिर लेमन उसके मुँह में।
वो और झुकी—होंठ मेरे होंठों से मिले।
लेमन दबाया—खट्टा रस मेरे मुँह में।
और फिर गहरा किस।
हमारी जीभें लड़ रही थीं—लेमन के रस के साथ, उसके होंठों का स्वाद, कम का नमकीन।
मैंने उसके होंठ चूसे, जीभ अंदर डाली—जैसे लड़ रहे हों।
किस खत्म हुआ।
वो पीछे हटी, मुस्कुराई।
"अच्छा लगा सर?"
अलोक हँसा,
"देखा... सैंडी अच्छी सर्विस देती है।"
विशाल और डेविड भी हँसे।
सैंडी अब सामने खड़ी—इंतज़ार में।
मेरा लुंड अब फटने को तैयार।
नेहा कमरे में सो रही है...
और मैं यहाँ...
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सैंडी ने मुझे देखा—मेरी आँखें आधी बंद, आधी खुली।
उसके होंठों का स्वाद अभी भी मेरे मुँह में था—नया स्वाद, नया टच, नई एनर्जी।
मैं हाई फील कर रहा था... शायद वो शॉट बहुत स्ट्रॉन्ग था, शायद ये कमरे का माहौल, या शायद दोनों।
एक सेकंड के लिए लगा—ये सच नहीं हो सकता।
मैं सपना देख रहा हूँ।
मैंने खुद को चुटकी काटी—दर्द हुआ।
सब मुझे देख रहे थे।
अलोक ने मेरे कंधे पर थपकी दी।
"यू आर नॉट ड्रीमिंग, यंग मैन," वो हँसते हुए बोला।
विशाल और डेविड—अभी भी हँस रहे थे, अपने लुंड हाथ में पकड़े हुए, जैसे कोई कॉमन जोक हो।
सैंडी अब मेरे पास से हट गई।
मुझे लगा जैसे मेरा फेवरेट खिलौना बस मेरे हाथ से दूर जा रहा है।
मुझे नहीं पता था कि मेरा उस पर कितना अधिकार है... या बिल्कुल भी है कि नहीं।
सब कुछ इतनी अचानक हो रहा था—एक पल पहले वो मेरे होंठों पर थी, लेमन का रस मेरे मुँह में छोड़कर, और अब वो अलोक की तरफ जा रही थी।
मैं बस देखता रहा।
कम से कम... मैंने सोचा... अगर वो थोड़ा और रुकती तो मैं उसके 36 साइज़ के परफेक्ट स्तनों को छू लेता।
उसकी स्किन इतनी सॉफ्ट, इतनी गर्म, इतनी चिकनी लग रही थी—बस एक बार टच करके महसूस कर लेता कि सच में वैसी ही है जैसी दिख रही है।
उसके निप्पल्स हार्ड थे, गुलाबी, जैसे अभी-अभी किसी ने उन्हें चूसा हो।
वो अलोक के सामने चली गई।
एक शॉट हाथ में लिया।
फिर धीरे से सोफे पर घुटनों के बल बैठ गई—अपनी मजबूत जांघें सोफे पर रखकर, बैलेंस बनाते हुए।
पहले अलोक को शॉट दिया—उसके होंठों पर ग्लास टिल्ट किया।
फिर लेमन उसके मुँह में रखा।
फिर किस—गहरा, लंबा।
लेकिन अब सैंडी का हाथ अलोक के अंडरवियर के अंदर सरक गया।
उसने धीरे से लुंड बाहर निकाला—हार्ड, गर्म, हवा में खड़ा।
उसने स्ट्रोक करना शुरू किया—धीरे-धीरे, ऊपर-नीचे।
और अलोक के दो उँगलियाँ उसकी चूत में गायब हो गईं।
मैं देख रहा था—उसकी चूत गर्म, गीली, उँगलियाँ अंदर-बाहर हो रही थीं।
वो महसूस कर रहा था—उसकी आँखें बंद, सिर पीछे।
किस 5 मिनट तक चला—लंबा, गहरा।
सैंडी का हाथ स्ट्रोक कर रहा था, अलोक की उँगलियाँ फिंगरिंग कर रही थीं।
गीली आवाज़ें—चप... चप...
फिर विशाल बोला,
"माय टर्न... माय टर्न!"
किस टूटा।
सैंडी उठी।
अलोक ने उँगलियाँ बाहर निकालीं—चमकती हुई, गीली।
उसने मुझे दिखाया—उँगलियाँ पर सैंडी का रस चमक रहा था।
फिर उसी उँगली को सैंडी की तरफ दिखाया।
सैंडी समझ गई।
वो झुकी, उँगली मुँह में ली।
चाटी, साफ की—जीभ से हर बूंद सोखते हुए।
फिर अलोक ने वही गीली उँगली उसके स्तनों पर रगड़ी—जैसे कोई टॉवल हो।
सैंडी खुशी से कर रही थी—स्तन आगे करके, जैसे एंजॉय कर रही हो।
मैं बस देखता रहा।
सैंडी अब विशाल के सामने चली गई।
दोनों सोफे पर घुटनों के बल बैठे—वो उसके सामने, जैसे पहले अलोक के साथ किया था।
शॉट पहले—विशाल के होंठों पर ग्लास टिल्ट किया।
फिर लेमन उसके मुँह में रखा।
फिर किस—गहरा, लंबा, जीभें लड़ती हुई।
हर बार ये सीन एक जैसा लगता था, लेकिन हर बार नया महसूस होता था।
सैंडी की गिगलिंग—वो हल्की, प्लेफुल हँसी—हर बार अलग लगती थी।
जैसे वो सच में एंजॉय कर रही हो।
कोई फीलिंग नहीं आ रही थी कि ये सिर्फ़ पैसे के लिए है, जैसे "कस्टमर को खुश करना है"।
नहीं... वो इस जॉब को लव करती लग रही थी।
उसकी आँखों में, उसके होंठों की मुस्कान में, उसके हाथों की मूवमेंट में—सबमें एक तरह की खुशी थी।
इस बार विशाल ने उँगली नहीं इस्तेमाल की।
उसने अपना लुंड—पतला लेकिन लंबा, ब्राउन—सीधे उसकी चूत पर रखा।
एक झटके में, बिना ऊपर-नीचे किए, बिना फकिंग जैसा कुछ—बस पूरा अंदर।
एक स्विफ्ट मोशन में, जैसे अंदर का टेम्परेचर चेक कर रहा हो।
सैंडी की आँखें एक सेकंड के लिए बंद हुईं, फिर खुलीं—एक छोटी सी आह निकली, लेकिन वो किस जारी रख रही थी।
वो दोनों किस कर रहे थे—जीभें मिली हुईं, लेमन का रस अभी भी मिक्स हो रहा था।
विशाल का लुंड अंदर गहरा, स्टिल—बस महसूस कर रहा था उसकी गर्मी, उसकी टाइटनेस।
सैंडी का हाथ उसके कंधे पर, दूसरे से उसकी कमर पकड़ी हुई।
मैं बिना पलक झपकाए देख रहा था।
हर डिटेल—उसकी चूत में लुंड का अंदर जाना, उसके स्तनों का हल्का हिलना, उसके गालों पर बहता काजल, उसके होंठों पर लेमन का रस।
अलोक ने मुझे देखकर पूछा,
"हाउ इज इट? हाउ इज योर किस, बॉय?"
मैं जैसे होश में आया।
"गुड... इट्स गुड," मैंने धीरे से कहा।
अब दिमाग में एक ही सवाल घूम रहा था—"व्हाय मी?"
ये सब इतना अच्छा लग रहा था कि "टू गुड टू बी ट्रू" वाली फीलिंग आ गई।
क्या मैं सच में यहाँ हूँ?
क्या ये सब हो रहा है?
मैंने अलोक की तरफ देखा, और बोल दिया—जैसे कुछ और जानना चाहता हूँ,
"सर... आप सच में अच्छी चॉइस वाली औरतें चुनते हैं।"
अलोक ने जोर से हँसा।
"हाहा... ये औरतें नहीं हैं... ये टॉयज़ हैं।"
मैंने एक साँस ली, और एक साँस में बोल दिया,
"तो फिर आप बहुत अमीर होंगे... इतने अच्छे टॉयज़ लेने के लिए... और इतने हम्बल भी कि फ्रेंड्स और स्ट्रेंजर के साथ शेयर कर रहे हैं।"
अलोक ने मेरी तरफ देखा, शॉट का ग्लास हाथ में घुमाते हुए, और पूछा,
"डू यू नो द मीनिंग ऑफ 'अडल्ट मनी बॉय'?"
अब वो मुझे "यंग मैन" की जगह "बॉय" कहने लगा था।
शायद वो किस के बाद से उसे लगने लगा कि उसका कुछ अथॉरिटी है मुझ पर।
या शायद ये मेरी कल्पना थी—नशे में सब कुछ बड़ा लगता है।
मैंने सिर हिलाकर "नो" में जवाब दिया—धीरे से, बिना कुछ बोले।
मेरा सिर भारी था।
आज बहुत पी ली थी—मेरी कैपेसिटी से ज्यादा।
सुबह से नेहा के साथ जो मेहनत की थी—वो थकान अभी भी बॉडी में थी।
शाम को वो पहाड़ी चढ़ी थी सनसेट देखने के लिए—पैरों में हल्का दर्द, सिर में हल्की घूम।
हैलुसिनेशन जैसा फील हो रहा था—कभी लगता सब सच है, कभी लगता ये सपना है।
अलोक ने ग्लास टेबल पर रखा, फिर मेरी तरफ देखकर बोला—आवाज़ में अब वो पुरानी वाली दोस्ताना टोन नहीं थी, बल्कि एक तरह की गहराई थी, जैसे वो अपनी ज़िंदगी की कोई पुरानी बात बता रहा हो।
"अडल्ट मनी बॉय... मतलब वो पैसा जो तुम्हें तब मिलता है जब तुम मेच्योर हो जाते हो।"
वो रुका, एक लंबी साँस ली।
"जब तुम यंग थे... कॉलेज में, 20-25 की उम्र में... तब पैसा नहीं था।
फ्यूचर बनाने में बिज़ी थे—पढ़ाई, जॉब, करियर, EMI, फैमिली।
टाइम भी नहीं था, और पैसा भी नहीं था अपनी हर ख्वाहिश पूरी करने का।
'दिल चाहता है' वाली उम्र में—गोवा ट्रिप, लड़कियाँ, पार्टी, फ्रीडम—सब सपने थे, लेकिन पॉकेट खाली।
फिर साल बीतते गए... 30, 35, 40... मेहनत की, कमाया, लेकिन तब तक ज़िंदगी ने ढेर सारे रोल्स दे दिए—शादी, बच्चे, रिस्पॉन्सिबिलिटी।
और अब... 50 के आसपास... अचानक पैसा आ गया।
अडल्ट मनी।
वो पैसा जो अब 'अफोर्डेबल' लगता है।
अब जो चाहो खरीद सकते हो—ट्रिप्स, टॉयज़, एक्सपीरियंस।
इसलिए 50 साल के लोग गोवा जाते हैं—क्योंकि वो 'दिल चाहता है' वाली उम्र में नहीं जा सके थे।
इसलिए 50 साल के लोग प्लेस्टेशन खरीदते हैं—क्योंकि बचपन में नहीं खरीद पाए थे।
और मैं... मैं लकी हूँ।
मुझे इतना पैसा मिला कि अब 'अनलिमिटेड सप्लाई' जैसा फील होता है।
तो मैं टॉयज़ ले सकता हूँ... जैसे सैंडी।"
उसने सैंडी की तरफ देखा—वो अभी भी मुस्कुरा रही थी, जैसे ये सब उसकी रोज़ की बात हो।
"ये टॉय नहीं हैं... ये एक्सपीरियंस हैं।
जो मैं यंग में नहीं कर पाया... अब कर रहा हूँ।
और शेयर कर रहा हूँ—फ्रेंड्स के साथ, स्ट्रेंजर्स के साथ... क्योंकि अब पैसा है, टाइम है, और सबसे ज़रूरी—कोई रोक-टोक नहीं।"
वो फिर हँसा—एक थकी लेकिन संतुष्ट वाली हँसी।
अलोक की बातें सुनकर मुझे लगा जैसे कोई फिलॉसफी हो रही है—एक तरह की ज़िंदगी की सच्चाई, जो 50 साल की उम्र में ही समझ आती है।
वो बातें इतनी गहरी लग रही थीं कि मेरी आँखें उस पर टिक गईं।
वो सच में अमीर लग रहा था—न सिर्फ़ पैसों से, बल्कि उसकी बात करने के तरीके से।
आवाज़ में कॉन्फिडेंस, शब्दों में वो आराम जो सिर्फ़ वो लोग बोलते हैं जिन्हें अब कुछ साबित करने की ज़रूरत नहीं रहती।
मैंने उसकी कलाई पर नज़र डाली—वो घड़ी... शायद रोलैक्स या ओमेगा, ब्लैक डायल, गोल्ड बेज़ल, जो लाइट में चमक रही थी।
ऐसी घड़ी जो लाखों में आती है, और वो इसे कैजुअली पहने हुए था जैसे कोई 500 की कैसियो हो।
फिर मेरी नज़र नीचे गई।
उसका लुंड... अभी भी बाहर था, हवा में खड़ा।
मैंने पहले नोटिस नहीं किया था—नशे में, सैंडी के किस में, सब कुछ धुंधला था।
लेकिन अब... वो मासिव था।
मोटा, लंबा, नसों से भरा, हेड गहरा गुलाबी।
अभी भी हल्का सा पल्स कर रहा था, जैसे अभी-अभी इस्तेमाल हुआ हो।
और वो सब कुछ इतने कैजुअली बैठा था—जैसे कपड़े उतारना या लुंड बाहर रखना कोई बड़ी बात नहीं।
मैंने खुद को रोका नहीं—एक "वाह..." मेरे होंठों से निकल गया।
बस एक छोटी सी आवाज़, लेकिन वो इतनी सच्ची थी कि सबने सुन ली।
विशाल और डेविड हँस पड़े।
सैंडी ने मुस्कुराकर मुझे देखा—जैसे कह रही हो "देखा ना?"
अलोक ने मेरी तरफ देखा, फिर हल्के से हँसा।
"क्या हुआ बॉय? इम्प्रेस हो गया?"
मैंने शर्म से सिर झुका लिया, लेकिन मुस्कान नहीं रोक पाया।
"सॉरी... बस... वो... अच्छा है," मैंने बड़बड़ाया।
अलोक ने कंधे उचकाए।
"अरे कोई बात नहीं।
ये भी तो 'अडल्ट मनी' का हिस्सा है—जो चाहो, वो दिखा सकते हो, बिना किसी शर्म के।
अलोक ने फिर से बात शुरू की—इस बार उसकी आवाज़ में कोई शो-ऑफ नहीं था, बस एक पुरानी याद जैसी सादगी।
वो सोफे पर पीछे टिका हुआ था, ग्लास हाथ में घुमाते हुए, जैसे कोई पुरानी किताब खोल रहा हो।
"मैंने जवानी में बहुत मेहनत की थी... लेबर वाला काम।
कंस्ट्रक्शन साइट्स पर, धूप में, बारिश में।
हाथ देख..."
उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया—कठोर, रफ, उंगलियों पर पुराने घावों के निशान, पाम पर मोटी-मोटी चमड़ी।
"ये हाथ कभी-कभी बस में औरतों के नाक बंद करने का कारण बनते थे।
मेरा पसीने की बदबू... वो दूर से ही साफ़ महसूस हो जाती थी।
कोई पास नहीं आना चाहता था।"
वो रुका, एक लंबी साँस ली।
"फिर शादी हुई।
पर वो जो मैं चाहता था... वो कभी नहीं मिला।
मेरी बीवी... गरीबी में पली-बढ़ी थी, वो भी थकी हुई लगती थी।
बच्चों को जन्म दिया, घर चलाया, लेकिन वो 'प्लेज़र' वाला हिस्सा... बस ड्यूटी जैसा रह गया।
मैंने भी बच्चों को पाला, घर चलाया, लेकिन ज़िंदगी का वो मज़ा... लगभग भूल ही गया था।"
उसकी आँखें दूर कहीं टिक गईं।
"फिर 25 साल की मेहनत के बाद... रियल एस्टेट से पैसा आया।
अचानक बहुत।
बच्चे विदेश चले गए—अमेरिका, कनाडा।
बीवी... अब भगवान के पास।
अब मैं फ्री था।
एक दिन विदेश में... मैं एक स्ट्रिप क्लब के सामने से गुज़रा।
बस देखने के लिए गया—क्या होता है अंदर।
एक रशियन औरत ने मेरा लुंड देखा और बोली... 'इट्स स्टिल स्ट्रॉन्ग एंड प्लेज़रेबल।'
मैंने पहली बार महसूस किया—सच में?
मेरी बीवी के साथ कभी इतना नहीं हुआ था।
धीरे-धीरे मैं उन प्रीमियम क्लब्स में घुसा—जहाँ ऐसी 'टॉयज़' मिलती हैं जो कुछ भी करने को तैयार रहती हैं।
कोई रोक-टोक नहीं, कोई जजमेंट नहीं।
बस... जो मैं जवानी में नहीं कर पाया... अब कर रहा हूँ।"
सैंडी अब डेविड के पास चली गई—वो ब्लैक बियर जैसा, बड़ा पेट वाला, पूरी तरह नंगा, पसीने से तर।
वो तीनों में सबसे रफ था—कोई नरमी नहीं, कोई कोमलता नहीं।
वो सैंडी को अपनी गोद में खींच लिया।
उसके हाथों ने तुरंत उसके निप्पल्स पकड़े—जोर से पिंच किया, इतना जोर से कि सैंडी की बॉडी झटकी।
उसकी आहें अब पहले से भी कम, गहरी और दबी हुई निकल रही थीं—जैसे दर्द और प्लेज़र का मिक्स।
"आह्ह... डेविड... हाँ..."
डेविड किस नहीं कर रहा था।
वो उसके होंठ काट रहा था—सच में काट रहा था।
नीचे होंठ को दाँतों से दबाया, खींचा, फिर ऊपर वाले को।
सैंडी की आँखें बंद हो गईं, लेकिन वो विरोध नहीं कर रही थी—बल्कि उसकी जांघें और फैल रही थीं, जैसे वो ये रफनेस एंजॉय कर रही हो।
मैं सोफे पर बैठा था, बीयर हाथ में, लेकिन आँखें सैंडी पर टिकी हुईं।
अलोक की फिलॉसफी वाली बातें मेरे कान में अभी भी गूंज रही थीं—हर शब्द ध्यान से सुन रहा था, "अडल्ट मनी", "टॉयज़", "जवानी में नहीं मिला"।
लेकिन सामने का सीन... वो डिस्ट्रैक्ट कर रहा था।
सैंडी की चूत अब डेविड के लुंड से भरी हुई—वो मोटा, ब्लैक, पर्पल हेड वाला लुंड अंदर-बाहर हो रहा था, जोरदार थ्रस्ट्स में।
हर धक्के के साथ सैंडी की बॉडी हिल रही थी, स्तन उछल रहे थे, और उसके निप्पल्स अब लाल हो चुके थे—पिंच से।
डेविड ने एक हाथ से उसकी गर्दन पकड़ी—जोर से नहीं, लेकिन कंट्रोल में।
दूसरे हाथ से उसकी गांड मसल रहा था, उँगलियाँ अंदर सरकाती हुई।
सैंडी की आहें अब और गहरी—"उफ्फ... हाँ... और जोर से..."
मैं बिना पलक झपकाए देख रहा था।
अलोक ने मेरी तरफ देखा, मुस्कुराकर कहा,
"देख रहा है बॉय? डेविड रफ है... लेकिन सैंडी को पसंद है।
अलोक ने ग्लास साइड में रखा, फिर मेरी तरफ देखकर धीरे से बोला—आवाज़ में अब एक पुरानी, थकी हुई लेकिन सच्ची वाली टोन थी।
"औरतें रफ पसंद करती हैं... लेकिन सिर्फ़ यंग वाली।"
वो रुका, सैंडी की तरफ देखा—जो अभी भी डेविड के साथ थी, उसकी आहें अब और गहरी, दबी हुई।
डेविड उसे रफ तरीके से पकड़े हुए था—निप्पल्स पिंच कर रहा था, होंठ काट रहा था, धक्के जोरदार लेकिन कंट्रोल्ड।
"यंग बटरफ्लाई... वो फ्रेशनेस, वो एनर्जी, वो टाइटनेस... वो सब कुछ नया लगता है।
उनकी स्किन पर वो ग्लो, वो खुशबू जो अभी-अभी खिली हो।
रफनेस उन्हें एक्साइट करती है क्योंकि वो अभी एक्सप्लोर कर रही होती हैं—दर्द और प्लेज़र का मिक्स उन्हें नया लगता है।
लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है... वो फ्रेशनेस ख़त्म हो जाती है।
फिर वो नरमी चाहती हैं, प्यार, केयर... वो रफनेस अब दर्द लगने लगती है।"
अलोक ने फिर से ग्लास उठाया, एक घूँट लिया, और मेरी तरफ देखकर बोला—इस बार उसकी आवाज़ में एक अलग ही गहराई थी, जैसे वो कोई राज़ खोलने वाला हो।
"मेरे कॉन्टैक्ट्स हमेशा मुझे इसी तरह की औरतें देते हैं—यंग, फ्रेश, बटरफ्लाई जैसी।
मैं इन्हें कुतिया की तरह ट्रीट करता हूँ... लेकिन वो कुतिया जो यंग लड़के डेट करना चाहते हैं।
मैं उन्हें स्पेशल फील करवाता हूँ—ऐसा स्पेशल कि वो उन सॉफ्ट, रोमांटिक लड़कों के पास कभी वापस नहीं जाना चाहतीं।
मैं उन्हें बताता हूँ—तुम्हें अब 'बॉय' नहीं चाहिए, तुम्हें मर्द चाहिए।
मर्द वो जो तुम्हें पकड़े, तुम्हें कंट्रोल करे, तुम्हें रफ तरीके से इस्तेमाल करे... और तुम्हें वो प्लेज़र दे जो तुमने कभी सोचा भी नहीं था।
ये सॉफ्ट बॉयज... वो शादी कर लेंगे, घर बसाएंगे, लेकिन रात में जब वो अकेली होंगी... उन्हें याद आएगा कि असली मर्द के साथ क्या होता है।
वो सेटल तो हो जाएंगी... लेकिन दिल में हमेशा वो खालीपन रहेगा—क्योंकि वो जानती हैं कि असली मर्द क्या होता है।"
वो मुस्कुराया, फिर मेरी तरफ झुका और आँख मारकर बोला,
"लेकिन मैं तुम्हें एक बात बताना चाहता हूँ... अगर तुम ऑफेंड नहीं होगे।"
मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।
क्या कहना चाहता है ये?
क्या नेहा के बारे में कुछ? या मेरे बारे में?
मैंने सिर हिलाया—हाँ में।
"बताओ..."
अलोक ने एक लंबी साँस ली, फिर मुस्कुराकर बोला,
"तुम जानते हो... हर चीज़ पैसे से नहीं खरीदी जा सकती।
जैसे ज़िंदगी... जैसे तुम्हारे पास जो है।
तुम्हें 'अडल्ट मनी' की ज़रूरत नहीं पड़ेगी प्लेज़र के लिए... लेट इन लाइफ।
क्योंकि तुम्हारे पास पहले से ही वो है—तुम्हारी बीवी।
यंग, खूबसूरत तितली।"
मैं चुप रहा।
दिल अभी भी तेज़ धड़क रहा था।
उसकी बातें सही लग रही थीं—बहुत सही।
नेहा मेरी तितली है।
तभी सामने का सीन बदल गया।
सैंडी अब पीठ के बल लेटी हुई थी—बेड पर।
उसका सिर विशाल की गोद में था।
विशाल बैठा हुआ था, उसके लुंड को उसके गाल से रगड़ रहा था—धीरे-धीरे, ब्रशिंग करते हुए।
उसके बालों में उँगलियाँ फेर रहा था, कभी-कभी उँगली उसके मुँह में डालकर चूसवा रहा था।
डेविड ने उसके पैर फैलाए—जोर से।
फिर अपना मोटा, काला लुंड अंदर डाला—वाइल्ड तरीके से।
जोर-जोर से धक्के दे रहा था, हर थ्रस्ट में सैंडी की बॉडी हिल रही थी।
उसकी आहें अब ऊँची और तेज़—"आह्ह... डेविड... और... फाड़ दो..."
विशाल उसके चेहरे पर अपना लुंड रगड़ रहा था—गालों पर, होंठों पर।
उसकी उँगली उसके मुँह में अंदर-बाहर हो रही थी।
अलोक ने मेरी आँखों में देखा, फिर धीरे से मुस्कुराकर बोला—जैसे कोई पुराना राज़ खोल रहा हो।
"मैं तुम्हें एक बात बताऊँ... अगर तुम्हें बुरा न लगे।"
मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।
क्या कहने वाला है ये?
क्या नेहा के बारे में कुछ?
मैंने सिर हिलाया—हाँ में।
"बताओ..."
वो थोड़ा आगे झुका, आवाज़ और नीची कर ली।
"सुबह जब हम रिसेप्शन पर थे... और नेहा वहाँ खड़ी थी...
मैंने उसे देखा तो सबसे पहले यही लगा कि एजेंसी ने हमें यही भेजा है।
तुम नहीं जानते... कितनी खुशी हुई थी मुझे।
मैं हमेशा यंग मैरिड वाली को पसंद करता हूँ।
मैंने उसकी पायल देखी, चूड़ियाँ देखीं, मंगलसूत्र... सब कुछ।
दिल में एक अलग ही एक्साइटमेंट हो गया।
इसलिए मैंने उससे पूछा था—'क्या आप एजेंसी से आई हैं?'"
"फक... फक... फक..."
मेरा दिमाग एकदम घूम गया।
सुबह वाला सीन फ्लैश हो गया—अलोक नेहा के पास गया था, बात करने की कोशिश की थी, और नेहा ने बस मुस्कुराकर इग्नोर किया था।
अब सब क्लियर हो गया।
ये बूढ़ा आदमी... नेहा को... प्रॉस्टिट्यूट समझ रहा था।
एक नाइट का टॉय।
एक कुतिया जो पैसे के लिए सब कुछ करे।
यंग मैरिड, मंगलसूत्र वाली... लेकिन एजेंसी की लड़की।
मेरा दिमाग तुरंत इमेजिन करने लगा।
सैंडी की जगह नेहा।
नेहा विशाल की गोद में—उसका लुंड उसके गाल पर रगड़ रहा हो।
डेविड उसके पैर फैलाकर रफ तरीके से चोद रहा हो—जोर-जोर से धक्के, निप्पल्स पिंच कर रहा हो, होंठ काट रहा हो।
उसके बदन पर सारे बाइट मार्क्स, हिक्कीज़, दाँतों के निशान।
शॉट उसके मुँह में... लेमन उसके होंठों से... किस... सब कुछ।
बिना सोचे मेरा हाथ अपने लुंड पर चला गया।
वो रॉक हार्ड था—फड़क रहा था, दर्द कर रहा था।
मुझे गुस्सा आना चाहिए था।
बहुत गुस्सा।
इस बूढ़े को मारना चाहिए था।
उसे नेहा के बारे में ऐसा सोचने के लिए... उसे नेहा को कुतिया समझने के लिए...
लेकिन...
मेरा लुंड...
मेरा शरीर...
क्यों एक्साइट हो रहा था?
क्या हो रहा है मुझे?
क्यों ये इमेजिनेशन... मुझे और हार्ड कर रहा है?
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मैं नशे में था... बहुत ज्यादा।
सिर घूम रहा था, आँखें धुंधली, बॉडी गर्म, और लुंड इतना हार्ड कि दर्द हो रहा था।
हैलुसिनेशन जैसा फील हो रहा था—सब कुछ असली और नकली के बीच झूल रहा था।
मैंने सामने देखा... और सैंडी की जगह नेहा दिखी।
बेड पर पीठ के बल लेटी हुई—मेरी नेहा।
उसके पैर फैले हुए, डेविड—वो काला, बदसूरत, बड़ा पेट वाला आदमी—उसके ऊपर था।
उसका मोटा, काला, मजबूत लुंड नेहा की चूत में जोर-जोर से धंस रहा था—रफ, बेरहम, हर थ्रस्ट में नेहा की बॉडी हिल रही थी।
उसके स्तन उछल रहे थे, निप्पल्स लाल, बदन पर पसीना चमक रहा था।
नेहा का सिर एक तरफ टेढ़ा हो गया था—विशाल की गोद में।
विशाल बैठा हुआ था, उसका लुंड नेहा के गाल से टकरा रहा था।
नेहा ने सिर्फ़ उसका सुपारा मुँह में लिया था—पोज़िशन ऐसी थी कि ज्यादा अंदर नहीं जा सकता था।
लेकिन वो चूस रही थी... धीरे-धीरे, जीभ घुमाकर।
फकिंग अब और रफ हो गई थी।
डेविड ने नेहा की कमर पकड़ी, जोर से धक्का दिया—हर थ्रस्ट में नेहा की आह निकल रही थी।
"आह्ह... हाँ... और जोर से..."
उसकी आवाज़ ऊँची, टूटी हुई, लेकिन भूखी।
बाइट मार्क्स उसके गले पर, कंधों पर, स्तनों पर—लाल, नीले।
हिक्कीज़ फैली हुई।
मैं बस देखता रहा।
मेरा दिमाग चीख रहा था—"ये नेहा है... मेरी नेहा... मेरी इज्ज़तदार, सम्मानित बीवी।"
और उसी समय... एक और आवाज़ कह रही थी—"अगर नेहा ये सब कर सकती है... तो क्या वो दो मर्दों को एक साथ मैनेज कर सकती है?"
मेरा हाथ अपने आप पजामा के ऊपर से लुंड पर चला गया।
मैंने स्ट्रोक करना शुरू किया—धीरे-धीरे, लेकिन जोर से।
लुंड फड़क रहा था, गर्म, सख्त।
गुस्सा आ रहा था—बहुत गुस्सा।
लेकिन वो गुस्सा... एक अजीब से जोश में बदल रहा था।
अलोक ने मेरी तरफ देखा, उसकी आँखों में एक चिंता सी झलक रही थी, लेकिन मुस्कान अभी भी थी।
"बॉय... कुछ तो बोलो... मैंने कुछ ऐसा कहा क्या जो तुम्हें बुरा लगा?
सॉरी अगर मैंने कुछ ऐसा बोल दिया जो तुम नहीं सुनना चाहते थे।"
मैंने उसकी तरफ देखा... फिर धीरे से उसकी लंड की तरफ नज़र गई।
वो अभी भी बाहर था, हवा में खड़ा, और अब और भी सख्त, मोटा, नसों से भरा लग रहा था।
जैसे वो मेरी बातों से... मेरी नेहा की बातों से... और ज्यादा एक्साइट हो गया हो।
उसकी लंड की नसें फूली हुईं, हेड गहरा लाल, जैसे वो मेरी बातों का मज़ा ले रहा हो।
मैं जानता हूँ ये फीलिंग।
मैं खुद जानता हूँ कि आदमी कैसे एंजॉय करता है जब किसी और की औरत की बात की जाती है।
मेरी पूरी भूली-बिसरी जवानी मेरे सामने फ्लैश हो गई
अब वही सब मेरे साथ हो रहा था।
मैंने हल्की, झुकी हुई आवाज़ में कहा,
"नो... नो... इट्स ओके।"
मैंने खुद को झुकाकर रखा—जैसे कोई छोटा लड़का बात कर रहा हो।
क्योंकि सच में... वो मेरी बीवी को उसके दोस्तों के साथ कुतिया की तरह इस्तेमाल करने की बात कर रहा था।
वो उसे टॉय समझ रहा था।
नाइट का मज़ा।
पैसे की चीज़।
फिर भी... मेरा लुंड फड़क रहा था।
मैं गुस्से में होना चाहिए था
अलोक ने फिर मेरी तरफ देखा।
इस बार उसकी नज़र मेरे पजामा के ऊपर से मेरे लुंड पर टिक गई—जहाँ मेरा हाथ स्ट्रोक कर रहा था, धीरे-धीरे लेकिन लगातार।
उसकी आँखों में एक चमक आई, मुस्कान फैल गई।
"ओह्ह... तो तुम्हें मेरी बातों से बुरा नहीं लगा... बल्कि इंटरेस्टिंग लग रहा है।"
उसकी आवाज़ में कोई जजमेंट नहीं था—बस एक तरह का संतुष्टि का एहसास, जैसे वो पहले से जानता हो कि ये होने वाला था।
मैंने कुछ नहीं कहा।
बस स्ट्रोक जारी रखा—धीमा, लेकिन तेज़ होता जा रहा था।
मेरा लुंड पजामा के कपड़े से दब रहा था, गर्म, फड़कता हुआ।
दिमाग में गुस्सा, जलन, शर्म... सब कुछ था।
लेकिन शरीर... शरीर सिर्फ़ एक चीज़ चाह रहा था।
बेड पर अब सब कुछ तेज़ हो चुका था।
डेविड का स्पीड अब पहले से कहीं ज्यादा था—जोर-जोर से, बेरहम धक्के।
उसका मोटा काला लुंड सैंडी की चूत में पूरी तरह डूब-उतर रहा था, हर थ्रस्ट में गीली आवाज़ें निकल रही थीं।
सैंडी अब ऑर्गेज़्म के कगार पर थी—उसकी बॉडी काँप रही थी, पैर फैले हुए, कमर ऊपर उठी हुई।
"येस... येस... यीएसएसएसएस... ओह गॉड...!"
उसकी आवाज़ कमरे में गूंज गई—ऊँची, टूटी हुई, पूरी तरह सरेंडर।
उसका सिर विशाल की गोद से हट गया, आँखें बंद, मुँह खुला, साँसें रुक-रुक कर आ रही थीं।
विशाल ने अपना लुंड उसके गाल पर और तेज़ी से रगड़ना शुरू किया—उसका हाथ बालों में, उँगलियाँ कसकर पकड़े हुए।
वो भी अब किनारे पर था—उसका लुंड फड़क रहा था, प्रीकम फैल रहा था उसके चेहरे पर।
अलोक ने मेरी आँखों में सीधे देखा, फिर धीरे से, लेकिन साफ़-साफ़ बोला—आवाज़ में एक मीठी-कड़वी चुभन थी।
"बॉय... बताओ ना... क्या तुम अपनी बीवी को ऐसे देखना चाहोगे... किसी और के साथ?"
वो रुका, मेरे पजामा पर मेरे हाथ की मूवमेंट को देखा—जो अब तेज़ हो चुकी थी, लगभग अनकंट्रोल।
"कैसी है वो बेड पर?
मैं दाँव लगा सकता हूँ... वो सैंडी से भी बेहतर लेगी।
पूरी रात... हम तीनों को... और वो भी खुशी-खुशी।
उसकी हर बात मेरे सीने में चाकू की तरह उतर रही थी।
मैं जानता था वो मुझे प्रोवोक कर रहा है।
वो मेरे लुंड की स्ट्रोकिंग की स्पीड देखकर सब समझ रहा था।
वो जान रहा था कि मैं तीन बार झड़ चुका हूँ आज... फिर भी रुक नहीं पा रहा।
अगर मैंने इतनी मेहनत न की होती नेहा के साथ... तो अब तक पजामा में ही झड़ चुका होता।
लेकिन अब... सब कुछ बेड पर फोकस हो गया था।
डेविड का स्पीड अब पहले से कहीं ज्यादा था—जानवर जैसा।
उसका मोटा काला लुंड सैंडी की चूत में पूरी ताकत से धंस-उतर रहा था।
हर थ्रस्ट में सैंडी की बॉडी उछल रही थी—स्तन हिल रहे थे, पसीना उड़ रहा था, चादर गीली हो चुकी थी।
उसकी आहें अब चीख में बदल गई थीं—टूटी हुई, गले से निकलती हुई।
"आह्ह्ह... येस... येस... और जोर से... फाड़ दो मुझे... ओह गॉड... मैं... आ रही हूँ...!"
सैंडी का ऑर्गेज़्म अब पीक पर था।
उसकी चूत डेविड के लुंड को कसकर पकड़ रही थी—पल्स कर रही थी, गर्म तरल बह रहा था।
उसकी बॉडी पूरी तरह काँप रही थी—पैर फैले, कमर ऊपर उठी, आँखें पीछे की तरफ, मुँह खुला।
एक लंबी, गहरी चीख निकली—"आआआआह्ह्ह्ह्ह... येस... यीएसएसएसएस...!"
डेविड ने एक आखिरी, जानवर जैसा धक्का दिया।
उसका लुंड बाहर निकला—फड़कता हुआ, और गाढ़ा कम उसके पेट पर, स्तनों पर गिरा।
सैंडी अभी भी काँप रही थी—ऑर्गेज़्म की लहरें अभी भी उसके बदन में दौड़ रही थीं।
वो सिर विशाल की गोद से हटा, लेकिन विशाल ने उसके बाल पकड़े।
उसने अपना लुंड उसके मुँह पर रगड़ा—तेज़ी से।
"चूस... सब ले..."
सैंडी ने मुँह खोला—विशाल का लुंड अंदर गया, गला तक।
वो चूस रही थी—अभी भी काँपती हुई, आँसू आँखों से बह रहे थे, लेकिन वो रुकी नहीं।
विशाल का भी अब क्लाइमेक्स आ रहा था—उसका लुंड फड़क रहा था, हाथ उसके बालों में कसकर।
"आह्ह... ले... सब ले..."
विशाल ने झड़ दिया—गाढ़ा, गर्म कम उसके मुँह में।
सैंडी ने सब सोख लिया—एक बूंद भी बाहर नहीं गिरने दी।
फिर धीरे से जीभ निकालकर चाटा—जैसे आखिरी स्वाद ले रही हो।
कमरा अब पूरी तरह से तीन लोगों की तेज़-तेज़ साँसों से भर गया था।
डेविड, विशाल और सैंडी—बेड पर बिखरे हुए, पसीने से तर, बॉडीज़ अभी भी हल्के-हल्के काँप रही थीं।
स्टॉर्म के बाद की शांति—धीरे-धीरे साँसें धीमी हो रही थीं, आवाज़ें कम हो रही थीं, और साइलेंस धीरे-धीरे कमरे पर छा रही थी।
सैंडी सबसे पहले होश में आई।
वो धीरे से उठी—बेड से उतरी, खड़ी हो गई।
कुछ सेकंड के लिए बस खड़ी रही—जैसे हमें कुछ दिखा रही हो।
उसका चेहरा पसीने से चमक रहा था, सिल्की बाल चेहरे पर चिपके हुए—शायद पसीने से, शायद चिपचिपे कम से।
उसकी चूत से कम लीक हो रहा था—गाढ़ा, सफेद, धीरे-धीरे उसकी जांघों पर बह रहा था।
वो अभी भी नंगी थी—परफेक्ट बॉडी, रेड मार्क्स, हिक्कीज़, दाँतों के निशान—सब कुछ चमक रहा था।
वो अलोक की तरफ देखी।
"क्या मैं बाथरूम जा सकती हूँ?" उसने पूछा—उसी क्यूट, क्लासी आवाज़ में।
जैसे कोई बच्ची माँ से परमिशन माँग रही हो।
अलोक के पास इतना कंट्रोल था—सैंडी पर, इस पल पर, सब पर।
अलोक ने बस "हम्म..." कहा—एक छोटी सी आवाज़, लेकिन कमांड वाली।
सैंडी मुड़ी।
उसकी परफेक्ट गांड हिलती हुई बाथरूम की तरफ गई—हर कदम के साथ जांघों पर कम की बूंदें गिर रही थीं, बाल हिल रहे थे, बॉडी अभी भी थकी हुई लेकिन ग्रेसफुल।
बाथरूम का दरवाज़ा बंद हुआ—क्लिक की आवाज़ आई।
और जैसे ही वो आवाज़ आई—कमरा क्रुअल हँसी से भर गया।
डेविड ने जोर से हँसा—गहरी, जानवर जैसी हँसी।
विशाल ने भी साथ दिया—हाथ से लुंड पकड़े हुए, अभी भी हल्का सा फड़क रहा था।
अलोक ने पीछे टेक लगाई, सिगरेट जलाई, एक कश लिया और धुआँ छोड़ा।
विशाल ने बेड से उठते हुए कहा, आवाज़ में एक गंदी हँसी मिली हुई,
"साले मोटे... भेन के लोड़े... कहीं ये कांड कर देगा एक दिन।"
डेविड ने जोर से हँसा—उसकी हँसी कमरे में गूंज गई, जैसे कोई जानवर गुर्रा रहा हो।
"कुछ नहीं होता... वो और ले लेगी... बहुत लेगी।"
दोनों बेड से उठे, नंगे-धड़ंगे सोफे की तरफ आए।
सिगरेट जलाईं—एक साथ तीनों ने।
धुआँ कमरे में फैल गया, मिक्स हो गया पसीने, कम और सैंडी की खुशबू के साथ।
डेविड ने सिगरेट का एक कश लिया, धुआँ छोड़ते हुए बोला,
"ये वाली पिछले वाली से कहीं बेहतर है... बहुत ज़्यादा।"
मैंने नोटिस किया—उन दोनों की आवाज़ में वो देसी एक्सेंट था, भारी, गँवार वाला।
अलोक की तरह नहीं—अलोक की बातें क्लास्ड, इंग्लिश मिक्स, अमीर वाली।
ये दोनों... जैसे कोई लोकल, रफ लड़के हों—जो पैसे से नहीं, बल्कि दोस्ती और मज़े से यहाँ हैं।
विशाल ने सिगरेट पीते हुए कहा,
"अलोक भाई ने इस बार डबल पे किया है पिछले से।"
डेविड ने हँसा,
"हाँ... क्योंकि ये वाला माल पहले से ही टूटने को तैयार था।"
दोनों फिर हँसे—एक क्रुअल, दोस्तों वाली हँसी।
जैसे ये सब उनके लिए रेगुलर अफेयर हो—हर हफ्ते या हर महीने एक नई लड़की, एक नया मज़ा।
पैसे अलोक देता है, वो लोग एंजॉय करते हैं, और लड़की... बस जाती है।
अलोक चुपचाप सिगरेट पी रहा था, धुआँ ऊपर फेंक रहा था।
उसकी आँखें मेरी तरफ उठीं—एक छोटी सी मुस्कान।
जैसे वो सब पढ़ रहा हो मेरे चेहरे पर।
15 मिनट की बेकार चिटचैट के बाद—सिगरेट के कश, हल्की हँसी, पुरानी बातें—मेरा लुंड अब धीरे-धीरे सॉफ्ट हो रहा था।
वो जोश, वो आग... अब ठंडी पड़ रही थी।
थकान साफ़ महसूस हो रही थी—शरीर भारी, सिर भारी, पजामा अंदर से चिपचिपा और गीला।
मैंने सोचा—अब बस।
इन लोगों के साथ मैं दोस्त नहीं हूँ।
विशाल और डेविड की तरह नहीं—जो अलोक के साथ सालों से ऐसे ही मज़े लेते हैं, लड़कियों को शेयर करते हैं, हँसते हैं।
मैं तो बस एक स्ट्रेंजर हूँ—एक रात का मेहमान।
मुझे कोई अथॉरिटी नहीं है कि मैं कहूँ—"भाई, सैंडी को एक बार फिर छूने दो... उसके स्तन दबाने दो... एक किस और ले लूँ..."
मुझे पता भी नहीं कि वो उसे कितना पे कर रहे हैं, क्या प्रॉमिस किया है, क्या कंट्रोल है।
वो सिर्फ़ अलोक की तरफ देखती है—परमिशन के लिए।
मेरा "बनिया दिमाग" अब पूरी तरह जाग चुका था।
नशा उतर रहा था, थकान साफ़ महसूस हो रही थी, लेकिन ये हिसाब-किताब वाला दिमाग रुक ही नहीं रहा था।
मैं सोच रहा था—ये तीनों... अलोक, विशाल, डेविड... ये सब मिलकर सैंडी को कितना पे कर रहे होंगे?
अलोक ने डबल पे किया है, ये तो सुना।
लेकिन क्या ये तीनों अलग-अलग चिप इन कर रहे हैं?
या अलोक अकेला सब कवर कर रहा है, और बाकी दो बस मुफ्त में एंजॉय कर रहे हैं?
या फिर... अगर मैंने अलोक से कहा—"भाई, सैंडी को एक बार फिर छूने दो"—तो क्या वो कहेगा—"ठीक है... लेकिन टिप दे दे... या अगली बार तेरी वाली को शेयर कर देना।"
विशाल और डेविड अब पूरी तरह रिलैक्स हो चुके थे—सोफे पर लेटे, सिगरेट पीते हुए, जैसे कोई आम बातचीत हो रही हो।
उनकी आवाज़ें देसी, गँवार वाली—कोई क्लास नहीं, बस रफ और गंदी।
विशाल ने सिगरेट का कश लिया, धुआँ छोड़ते हुए बोला,
"यार... इस वाली की चूत... उफ्फ... क्या टाइट थी।
जैसे कभी किसी ने इस्तेमाल ही न किया हो।
और वो गीली... गर्म... जैसे कोई भट्टी हो।
पिछली वाली तो ढीली पड़ गई थी... लेकिन ये... ये तो अभी भी कस रही थी।"
डेविड ने जोर से हँसा, अपना मोटा पेट हिलाते हुए।
"और वो बूब्स... भाई... कितने परफेक्ट।
दबाने पर उछलते हैं... निप्पल्स इतने सख्त... जैसे कोई बटन हो।
मैंने पिंच किया तो वो कराह दी... लेकिन रुकी नहीं।
ऐसी औरतें ही चाहिए—जो दर्द भी एंजॉय करें।
टेक्नीक बस एक है—जोर से पकड़ो, जोर से चोदो... और उन्हें पता चले कि मर्द कौन है।"
वो दोनों ऐसे बात कर रहे थे जैसे कोई रेसिपी बता रहे हों—कोई शर्म नहीं, कोई झिझक नहीं।
बस मज़े लेते हुए डिस्क्राइब कर रहे थे—चूत की टाइटनेस, बूब्स का उछाल, कैसे पिंच करना, कैसे काटना, कैसे धक्का देना।
मैं सुन रहा था—बिना कुछ बोले।
आँखें बार-बार बाथरूम के दरवाज़े पर टिक रही थीं।
सैंडी अंदर थी—शायद साफ़ हो रही थी, पानी की आवाज़ आ रही थी।
मैं सोच रहा था—बस एक बार फिर देख लूँ... उसकी बॉडी... उसकी चूत से बहता कम... उसके स्तन... एक बार फिर छू लूँ... या बस देख लूँ।
ये दोनों "चूतिया" बस बकबक कर रहे थे—अलोक चुप था।
वो सिगरेट पी रहा था, धुआँ ऊपर फेंक रहा था, जैसे सब सुन रहा हो लेकिन उसकी कोई परवाह नहीं।
उसकी क्लास अलग थी—वो बोलता कम था, लेकिन जब बोलता था तो बात सीधे दिल में उतर जाती थी।
बाथरूम का दरवाज़ा खुला।
सैंडी बाहर आई—नहाकर, साफ़-सुथरी, बाल गीले, पानी की बूंदें अभी भी उसकी स्किन पर चमक रही थीं।
कमर पर सिर्फ़ एक छोटा सा टॉवल लपेटा हुआ था—जो मुश्किल से ढक रहा था।
उसके स्तन पूरी तरह खुले थे—भारी, गोल, निप्पल्स अभी भी हल्के लाल, लेकिन अब साफ़ और चमकते हुए।
वो धीरे से खड़ी हुई, हमें देखकर मुस्कुराई—एक प्यारी, क्लासी मुस्कान, जैसे कुछ हुआ ही न हो।
उसने अलोक की तरफ देखा, अंगूठा ऊपर करके दिखाया—थम्स अप।
जैसे कह रही हो—"सब ठीक है... तैयार हूँ।"
अलोक ने सिगरेट का कश लिया, धुआँ छोड़ा।
"ड्रिंक्स बना... रिलैक्स हो जा।
और खुद के लिए भी बना ले... तुझे भी चाहिए होगा।"
सैंडी ने हल्के से सिर हिलाया—कोई विरोध नहीं।
वो बार की तरफ बढ़ी—टॉवल अभी भी कमर पर, स्तन हिलते हुए, गांड हल्की सी हिल रही थी।
मैंने घड़ी देखी—लगभग 2 बज चुके थे।
थकान अब हड्डियों तक उतर आई थी।
"नो... नो... मुझे अब जाना चाहिए।
बहुत लेट हो गया।"
अलोक ने मेरी तरफ देखा—उसकी आँखें मेरी आँखों में।
"बॉय... रुक जा।
एक ड्रिंक और।
मैं जानता हूँ... तेरे पास अपनी सैंडी है...
और वो इससे भी बेहतर है।
यंग, मैरिड
लेकिन एक ड्रिंक... बस एक।
फिर जा।"
वो मुस्कुराया—एक गहरी, मतलब वाली मुस्कान।
"रिलैक्स हो जा... कोई जल्दी नहीं।
रात अभी बाकी है... और तूने आज बहुत कुछ देखा।
एक ड्रिंक पी... फिर सोच लेना।"
सैंडी अब ड्रिंक्स बना रही थी—ग्लासेस में बर्फ डाल रही थी, बॉटल खोल रही थी।
उसके स्तन हर मूवमेंट के साथ हिल रहे थे—खुले, चमकते हुए।
वो मुझे देखकर फिर मुस्कुराई—एक छोटी सी, न्योता वाली मुस्कान।
मैं खड़ा था—पैर भारी, दिमाग घूमता हुआ।
सैंडी ड्रिंक्स लेकर वापस आई—चार ग्लास, बर्फ चमकती हुई, अम्बर कलर की लिक्विड।
वो पहले मेरे सामने आई, मुस्कुराकर एक ग्लास मेरे हाथ में थमाया।
"सर... ये लीजिए।"
फिर बाकी तीनों को दी—अलोक, विशाल, डेविड।
आखिर में खुद के लिए एक ग्लास लिया।
फिर बिना कुछ कहे मेरे और अलोक के बीच सोफे पर बैठ गई।
उसका कंधा मेरे कंधे से सटा।
उसकी जांघ मेरी जांघ से छू गई—गर्म, नरम, अभी भी नहाने के बाद थोड़ी गीली।
मेरा कोहनी हल्के से उसके स्तन से टकराई—वो भारी, गोल, बिना ब्रा के, अभी भी हल्के से हिल रहे थे।
मैंने साँस रोकी।
उसकी खुशबू—साबुन की, लेकिन अभी भी उसकी अपनी, औरत वाली—मेरी नाक में घुस गई।
एक सेकंड भी नहीं बीता कि अलोक ने धीरे से कहा,
"नहीं... यहाँ नहीं।"
सैंडी तुरंत समझ गई।
कोई सवाल नहीं, कोई झिझक नहीं।
वो उठी—टॉवल अभी भी कमर पर।
फिर धीरे से ज़मीन पर झुकी—चारों हाथ-पैरों पर।
कुत्ती की तरह।
सिर अलोक की गोद की तरफ।
उसकी क्रॉच के ठीक बीच में मुँह ले गई।
अलोक ने पैर थोड़े फैलाए।
सैंडी ने जीभ निकाली—धीरे से उसकी जांघों के जोड़ पर चाटना शुरू किया।
फिर नीचे—बॉल्स पर जीभ घुमाई, हल्के से चूसा।
अलोक की साँसें तेज़ हो गईं।
उसने अपना ग्लास उठाया—सैंडी का ग्लास मेरे और उसके बीच सोफे पर रखा था।
वो झुका, ग्लास से एक घूँट लिया।
फिर सैंडी की तरफ झुका—उसके मुँह में ग्लास ले जाकर थोड़ा सा ड्रिंक डाला।
सैंडी ने पी लिया—जीभ बाहर निकालकर चाटते हुए, आँखें अलोक की तरफ।
फिर फिर से चाटना शुरू—अब और गहराई से।
मैं बस देखता रहा।
उसकी बॉडी हर मूवमेंट के साथ हिल रही थी—स्तन लटक रहे थे, गांड ऊपर उठी हुई।
विशाल और डेविड सोफे पर लेटे थे—सिगरेट पीते हुए, हँसते हुए, लेकिन आँखें सैंडी पर।
विशाल सोफे से उठ खड़ा हुआ।
उसका लुंड अभी भी हल्का सा लटक रहा था, पसीने से चमकता हुआ।
डेविड ने जोशीली आवाज़ में पूछा,
"कहाँ जा रहा है साले?"
विशाल ने हँसते हुए कहा,
"साले मूते जा रहा हूँ!"
वो बाथरूम की तरफ बढ़ा।
बेड को क्रॉस करते हुए उसने नीचे देखा—चादर पर पसीना, कम, गीले धब्बे—सब फैला हुआ था।
उसने रुककर डेविड की तरफ देखा और बोला,
"डेविड... भेन के लोड़े... देख क्या गंदगी मचा रखी है!
अब कहाँ सोएँगे हम?"
डेविड ने जोर से हँसा—उसकी हँसी कमरे में गूंज गई।
उसने अपना मोटा लुंड हाथ में पकड़ा, हल्के से रगड़ा—जैसे उसे फिर से जगाना चाहता हो।
"कौन सोना चाहता है साले?
मैं तो अभी खत्म भी नहीं हुआ... अभी तो शुरूआत है!"
वो जोर से हँसा, लुंड को और जोर से मसलते हुए।
"ये अभी फिर तैयार हो जाएगा... देखना।
सैंडी अब पूरी तरह डिटर्माइंड थी—जैसे कोई ऑर्डर पूरा करने का मिशन हो।
वो अलोक की गेंदों को चाट रही थी—धीरे-धीरे, जीभ घुमाकर, जैसे कोई मीठी चीज़ हो।
उसकी जीभ गर्म, गीली, और बहुत स्किलफुल—अलोक की साँसें तेज़ हो रही थीं, लेकिन वो कंट्रोल में था।
तभी मैंने महसूस किया—सैंडी का हाथ मेरी जांघ पर आ गया।
हल्का सा, लेकिन फर्म।
उसकी उँगलियाँ मेरी जांघ के अंदरूनी हिस्से पर सरक रही थीं—धीरे-धीरे, लेकिन जानबूझकर।
मेरा लुंड तुरंत हार्ड हो गया—एक झटके में।
पजामा के कपड़े से दब रहा था, फड़क रहा था।
मैं साँस रोककर बैठा रहा—जैसे कोई स्टैच्यू।
उसने सैंडी के बालों में उँगलियाँ फेरी—जैसे कोई पालतू कुतिया को सहला रहा हो।
फिर मुझे देखकर आँख मारी—विंक।
जैसे कह रहा हो—"देख... ये सब तेरे लिए है... बस एंजॉय कर।"
सैंडी ने अलोक को छोड़ा।
फिर धीरे से, कुतिया की तरह क्रॉल करते हुए मेरी तरफ आई।
उसकी आँखें मेरी आँखों में—भूखी, लेकिन कंट्रोल्ड।
वो मेरे पैरों के बीच आ गई—घुटनों पर।
मेरा पजामा अभी भी पहना हुआ था—गीला, चिपचिपा।
वो अपना सिर मेरे पजामा के ऊपर लुंड वाली जगह पर रख दिया।
धीरे-धीरे रगड़ने लगी—चेहरे से, गालों से, होंठों से।
फिर नाक से सूँघा—गहरी साँस ली, जैसे मेरी खुशबू ले रही हो।
उसकी साँसें गर्म थीं—पजामा के कपड़े से मेरे लुंड तक पहुँच रही थीं।
फिर उसने दाँतों से मेरे लुंड को पकड़ा—पजामा के ऊपर से।
हल्का सा दबाया—न काटा, न दर्द हुआ, बस एक कंट्रोल्ड ग्रिप।
उसने ऊपर देखा—मेरी आँखों में देखकर विंक किया।
मेरा हाथ अब उसके स्तनों पर चला गया।
धीरे से दबाया—नरम, गर्म, भारी।
उँगलियों से सहलाया, फिर निप्पल्स को हल्के से पिंच किया—बहुत सॉफ्टली, जैसे कोई कीमती चीज़ हो।
"आह्ह..." उसकी मुँह से एक छोटी सी आह निकली—मीठी, दबी हुई।
उसकी आँखें मेरी आँखों में टिकीं—भूखी, लेकिन खुश।
वो अभी भी कमर पर टॉवल लपेटे हुए थी, लेकिन वो टॉवल अब ज्यादा देर नहीं टिकने वाला था।
तभी विशाल बाथरूम से लौटा।
वो सीधे सैंडी के पीछे गया—प्लेफुल तरीके से टॉवल को एक झटके में खींच लिया।
फिर ज़ोर से उसकी गांड पर थप्पड़ मारा—फट्ट!
सैंडी थोड़ा सा झटकी, लेकिन मुड़ी और देखा कि कौन था।
विशाल जोर से हँसा।
सैंडी ने पीछे मुड़कर उसे देखा, फिर मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई—एक शरारती, सेक्सी मुस्कान।
फिर धीरे से ऊपर आई—अब पूरी तरह नंगी।
उसने मेरे पजामा के किनारे को दाँतों से पकड़ा।
बिना हाथ इस्तेमाल किए—धीरे-धीरे नीचे खींचने लगी।
मैंने अपनी गांड थोड़ी ऊपर उठाई—उसे मदद करने के लिए।
पजामा नीचे सरका।
मेरा लुंड बाहर आ गया—खुला, हवा में।
न ज्यादा सख्त, न ज्यादा बड़ा या मोटा।
बस... नॉर्मल।
मैं अंदर से शर्मिंदा था।
हमेशा शर्म आती थी—इन बूढ़े आदमियों के सामने इसे दिखाने में।
मैं नहीं चाहता था कि अलोक, विशाल, डेविड इसे देखें।
मैं हमेशा सोचता था—मेरा ये छोटा-सा लुंड... ये इन सबके सामने क्या करेगा?
लेकिन सैंडी ने इसे देखा—और उसके चेहरे पर एक तरह की राहत आई।
जैसे कह रही हो—"ये तो कुछ नहीं... जो मैंने अभी तक झेला, उसके सामने ये तो छोटी बात है।"
उसने बाकी लोगों की तरफ देखा—उनकी आँखों में हल्की हँसी थी, लेकिन कोई डायरेक्ट इंसल्ट नहीं।
वो सिर्फ़ देख रहे थे।
फिर सैंडी ने मेरी तरफ देखा।
उसकी जीभ बाहर निकली—धीरे से मेरी गेंदों पर टच किया।
गर्म, नम, नरम जीभ।
एक गहरी, गर्म साँस मेरी स्किन पर लगी।
मैं सिहर गया।
मेरा लुंड तुरंत फिर से हार्ड हो गया—फड़क उठा।
वो जीभ से मेरी गेंदों को चाट रही थी—धीरे-धीरे, प्यार से, लेकिन भूख के साथ।
उसकी आँखें मेरी आँखों में—विंक किया।
जैसे कह रही हो—"देखो... ये छोटा सा भी कितना पावरफुल है।"
अलोक ने मेरी तरफ सिगरेट का पैकेट बढ़ाया।
मैंने एक सिगरेट निकाली, होंठों पर रखी।
उसने लाइटर जलाकर आगे किया—मैंने गहरा कश लिया।
धुआँ फेफड़ों में गया, सिर में एक हल्की चक्कर सी आई।
मैंने आँखें बंद कर लीं।
सैंडी की जीभ अब मेरी गेंदों पर थी—गर्म, गीली, धीरे-धीरे चक्कर काट रही थी।
उसकी साँसें मेरी स्किन पर पड़ रही थीं—गर्म, तेज़।
मेरा लुंड अब पूरी तरह हार्ड हो चुका था—पजामा के कपड़े से ऊपर उठा हुआ, फड़क रहा था।
"ओओओओह्ह्ह्ह... सैंडी..."
ये शब्द मेरे होंठों से अनजाने में निकल गए—एक लंबी, दबी हुई आह।
मैंने आँखें बंद रखीं, सिर्फ़ महसूस कर रहा था—उसकी जीभ का हर टच, उसकी साँसों की गर्मी, उसकी मुस्कान जो मैं महसूस कर सकता था।
और तभी—
धड़ाम धड़ाम धड़ाम!
मेन गेट पर ज़ोर-ज़ोर से दस्तक हुई।
मेरा दिल एकदम रुक गया।
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दरवाज़े पर इतनी जोर से दस्तक हुई कि मेरी रूह काँप गई।
एक सेकंड में सारा नशा, सारा जोश उड़ गया।
मैंने झटके से पजामा ऊपर खींच लिया—जल्दी-जल्दी, हाथ काँप रहे थे।
टॉप अभी भी पहना हुआ था, लेकिन नीचे सब गड़बड़।
"क्या नेहा है?"
ये सवाल दिमाग में चमक गया।
शायद वो जाग गई होगी।
मुझे ढूँढ रही होगी।
कमरे में नहीं मिली तो बाहर निकल आई होगी।
रात के 2:30 बजे... होटल के कॉरिडोर में... हर दरवाज़े पर दस्तक दे रही होगी।
"सैम... सैम कहाँ हो?"
या... शायद मेरी आहें... "ओह्ह सैंडी..." वाली आवाज़... बाहर तक पहुँच गई होंगी।
लेकिन पिछले 15 मिनट से मैंने तो एक शब्द भी नहीं बोला था।
फिर भी... क्या पता।
सैंडी भी तुरंत खड़ी हो गई।
टॉवल जल्दी से कमर पर लपेट लिया।
एक हाथ से स्तन ढके, दूसरे से चूत—दीवार से सटकर खड़ी हो गई, जैसे छुप रही हो।
उसकी आँखें सबके चेहरों पर घूम रही थीं—टेंशन में, लेकिन कंट्रोल्ड।
अलोक, विशाल, डेविड—सब नॉर्मल लग रहे थे।
कोई घबराहट नहीं।
जैसे ये उनके लिए रोज़ का सीन हो।
शायद सिक्युरिटी हो... या होटल स्टाफ... या कोई और गेस्ट।
लेकिन इन तीनों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था।
मेरा दिमाग अब पूरी तरह पैनिक मोड में था।
एक मिनट बीत चुका था दस्तक के बाद—कोई और आवाज़ नहीं।
लेकिन मेरे दिमाग में हर न्यूज़ चैनल का फेस दिख रहा था—मेरा चेहरा, मेरी नेहा का नाम, "होटल में अवैध एक्टिविटी"।
"मैरिड मैन विद प्रॉस्टिट्यूट्स"।
फोटो... वीडियो... सब कुछ।
ये गलती थी।
मुझे इस कमरे में नहीं आना चाहिए था।
"इट्स ओके... मैंने रूम बॉय को बोल दिया है चादर बदलने के लिए," विशाल ने कैजुअली कहा, जैसे ये कोई आम बात हो।
"कम इन!" उसने जोर से चिल्लाया।
मेरा दिल एकदम मुंह में आ गया।
मैं इतना मज़े में डूबा हुआ था—सैंडी की जीभ, वो सब—कि बाहर की दुनिया भूल ही गया था।
विशाल जब टॉयलेट गया था, तभी उसने रूम सर्विस को कॉल कर दिया था।
और मैं... मैंने कुछ नोटिस ही नहीं किया।
दरवाज़ा खुला।
वही वेटर।
सुबह वाला।
जिसने नेहा को देखा था।
उसकी आँखें थोड़ी बड़ी हो गईं—लेकिन ज्यादा नहीं।
होटल स्टाफ हैं, ऐसे सीन देखते रहते हैं।
उसके हाथ में नई चादरें थीं—फोल्डेड, साफ।
कमरे का सीन उसके सामने था—
चार आदमी।
तीन लगभग नंगे—अलोक, विशाल, डेविड—लुंड बाहर, पसीने से तर, सिगरेट हाथ में।
एक ड्रेस्ड—मैं—पजामा ऊपर खींचा हुआ, लेकिन गीला, चिपचिपा।
और एक हॉट लड़की—सैंडी—दीवार से सटी खड़ी, टॉवल सिर्फ़ कमर पर लिपटा हुआ।
टॉवल इतना छोटा कि स्तन आधे दिख रहे थे, निप्पल्स हल्के से छुपे हुए, और नीचे चूत भी मुश्किल से ढकी हुई।
अगर वो अब बाथरूम जाना भी चाहे... तो पीठ पूरी खुली, गांड हिलती हुई दिखेगी।
वेटर ने कमरे में एक नज़र डाली—चार आदमी, तीन लगभग नंगे, एक ड्रेस्ड (मैं), और सैंडी दीवार से सटी खड़ी, टॉवल से मुश्किल से ढकी हुई।
उसकी आँखें सबसे पहले मुझ पर टिकीं।
"सर... आप यहाँ?"
उसने बस इतना कहा—एक छोटा सा सवाल, लेकिन आँखों में कोई हैरानी नहीं, कोई जजमेंट नहीं।
मैंने कुछ कहने की कोशिश की, लेकिन वो मेरे जवाब का इंतज़ार भी नहीं किया।
नज़रें तुरंत अलोक की तरफ मुड़ गईं।
उसके चेहरे पर एक मुस्कान फैल गई—एक तरह की चालाक, जानकार वाली मुस्कान।
अलोक ने सिर हिलाया, आवाज़ में वही क्लास वाली हल्की विनम्रता।
"सॉरी... इतनी रात को डिस्टर्ब कर दिया।"
वेटर ने कंधे उचकाए, जैसे ये कोई बड़ी बात नहीं।
"इट्स ओके सर... ये हमारा ड्यूटी है।"
फिर उसने सैंडी की तरफ देखा—धीरे से, लेकिन लंबे समय तक।
उसकी नंगी बॉडी पर नज़रें घूमीं—स्तनों से लेकर जांघों तक, कमर पर लिपटा टॉवल तक।
हर इंच साफ़ दिख रहा था—पसीना, हिक्कीज़, दाँतों के निशान, चूत से अभी भी लीक होता कम।
वेटर की आँखों में लस्ट साफ़ झलक रहा था—भूखी, लेकिन कंट्रोल्ड।
"और आप जानते हैं ना सर... जब भी आप आते हैं... होटल में हमारी सट्टेबाज़ी लगती है कि रात में कौन सर्व करेगा।"
उसने हल्के से हँसा।
"और आज मेरी लकी डे है।"
उसकी नज़र फिर सैंडी पर टिकी—जैसे वो उसे नाप रहा हो, कल्पना कर रहा हो।
"कभी-कभी... लकी डे में कुछ ज़्यादा ही मिल जाता है।"
टर ने बेड की तरफ देखा—चादर पर फैले धब्बे, पसीना, कम के निशान—सब कुछ साफ़ दिख रहा था।
वो हल्के से हँसा—एक कैजुअल, जानकार वाली हँसी।
"ओह्ह... लगता है बेड ने बहुत कुछ झेल लिया।
कितने राउंड हुए डेविड सर?"
डेविड ने जोर से हँसा—उसकी हँसी कमरे में गूंज गई।
"चार... पाँच... गिनती कौन करता है भाई।
बस मज़ा ले रहे थे।"
वेटर ने कंधे उचकाए, जैसे ये कोई रोज़ की बात हो।
फिर पुरानी चादरें उठाईं, नई बिछानी शुरू कर दी—तेज़ी से, प्रोफेशनल तरीके से।
कोई शर्म नहीं, कोई सवाल नहीं।
बस काम कर रहा था—जैसे ऐसे सीन वो रोज़ देखता हो।
सैंडी ने अलोक की तरफ देखा—हाथ से इशारा किया, जैसे पूछ रही हो "बाथरूम जा सकती हूँ?"
अलोक ने हाथ उठाकर इशारा किया—रुक जा, यहीं रह।
सैंडी रुक गई—दीवार से सटी, टॉवल से ढकी हुई।
उसकी आँखें वेटर पर टिकीं—वो काम करता रहा, लेकिन बीच-बीच में उसकी तरफ देखता रहा।
उसकी नज़रें सैंडी के नंगे स्तनों पर, कमर पर, जांघों पर घूम रही थीं—भूखी, लेकिन कंट्रोल्ड।
वेटर ने चादर बिछाई, किनारे टक किए।
फिर पुरानी चादरें उठाईं—गंध आ रही थी, गीली थीं।
उसने सैंडी की तरफ देखा, फिर अलोक की तरफ।
अलोक ने उसे देखा, मुस्कुराया—एक जानकार, शरारती मुस्कान।
"क्या चाहिए तुझे?"
वेटर ने हल्के से सिर झुकाया, लेकिन आँखें सैंडी पर टिकी हुईं।
"सर... सिर्फ़ एक बार... प्लीज़..."
अलोक ने जोर से हँसा—मज़ाकिया अंदाज़ में।
"अरे... अब तुम लोग लिमिट क्रॉस कर रहे हो।"
मैं बस देखता रहा—मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था।
क्या चल रहा है?
क्या ये कोई रिचुअल है?
या रोज़ का सीन?
वेटर की आँखों में वो भूख साफ़ दिख रही थी—सैंडी को देखकर, उसके नंगे बदन को, टॉवल से छुपे हुए हिस्सों को।
अलोक ने फिर कहा,
"पहले ड्रिंक्स बना... फिर देखते हैं।"
वो रुका, मेरी तरफ मुड़ा।
"तेरा दरवाज़े का धक्का मारना... मेरे गेस्ट को होश में ला दिया।"
वो हँसा—एक गहरी, मतलब वाली हँसी।
वेटर ने सिर हिलाया, मुस्कुराया।
फिर बार की तरफ बढ़ा—ड्रिंक्स बनाने लगा।
सैंडी अब भी दीवार से सटी खड़ी थी—टॉवल से ढकी, लेकिन उसकी आँखें वेटर पर।
वेटर ड्रिंक्स बनाने लगा—बर्फ डालता, बॉटल खोलता, ग्लास में अम्बर लिक्विड डालता।
उसकी आँखें बार-बार सैंडी पर जा रही थीं—उसकी नंगी बॉडी पर, टॉवल से छुपे हुए हिस्सों पर।
वो बोला—आवाज़ में एक मिन्नत वाली, भूखी टोन।
"सर... लास्ट टाइम आपने मेरे साथी की ज़िंदगी बना दी थी... प्लीज़ सर... सिर्फ़ एक बार... स्पेशली आज... आपका टॉय... आज तो सपने जैसी लग रही है... पहले से ही मेरा लकी डे है... प्लीज़... इसे और स्पेशल बना दीजिए।"
वो बात करते हुए मेरी तरफ देख रहा था—सीधे आँखों में।
मैंने कुछ नहीं कहा।
बस ग्लास में बचा हुआ ड्रिंक एक घूँट में पी गया—गले में जलन हुई, लेकिन दिमाग अभी भी घूम रहा था।
अलोक ने भौंहें उठाईं।
"ओह्ह... स्पेशल? क्यों?"
वेटर ने हल्के से हँसा—एक शरारती हँसी।
"ओह्ह सर... आज वो आई है... जब वो आई... पूरी स्टाफ ने फिर से... उसके इंस्टा देखकर... सबने फिर से झड़ लिया।"
मैंने नोटिस किया—उसने "फिर से" कहा।
मतलब... पहले भी हुआ था।
सैंडी की इंस्टा... सब देखते हैं।
सैंडी अब भी दीवार से सटी खड़ी थी—टॉवल से ढकी, लेकिन उसकी आँखें वेटर पर टिकीं।
वो सुन रही थी—चुपचाप, मुस्कुराती हुई।
अलोक ने पूछा,
"क्या इंस्टा? वो फेमस है क्या?"
वेटर ने ट्रे टेबल पर रखी—सबको ड्रिंक्स सर्व किए।
फिर अपना फोन निकाला।
कुछ टाइप किया।
एक प्रोफाइल खोली।
"देखिए सर... ये है वो।"
स्क्रीन पर सैंडी—या जो भी उसका नाम था।
फोटोज़—लंदन में, जापान में, बीच पर बिकिनी में, शो में, पार्टी में।
वीडियोज़—डांस, ट्रैवल, लाइफस्टाइल।
उसका हैंडल—"belaqir"।
सैंडी नहीं।
बेलाकिर।
अलोक स्क्रॉल करता रहा।
कभी-कभी रुककर सैंडी की तरफ देखता—जैसे कंपेयर कर रहा हो।
सैंडी अब थोड़ी असहज लग रही थी—मुस्कुरा रही थी, लेकिन आँखें नीचे।
वेटर ने फोन अलोक को थमाया।
"सर... देखिए... कितनी हॉट है।
और आज... वो यहाँ... आपके साथ।
प्लीज़ सर... सिर्फ़ एक बार..."
वेटर ने फोन अलोक को थमाया था, लेकिन अलोक ने स्क्रॉल करते-करते एक रील पर रुक गया।
स्क्रीन पर एक रील चल रही थी—कैमरा शूट जैसा लग रहा था।
एक लड़की इंडियन अटायर में—साड़ी पहने, ब्राइडल लुक, सिंदूर, मंगलसूत्र, चूड़ियाँ, पायल—सब कुछ।
बैकग्राउंड में कोई नया घर, "हमारा नया घर" लिखा हुआ जिंगल बज रहा था।
एक तरह का रियल एस्टेट या होम डेकोर ऐड जैसा लग रहा था, लेकिन लड़की की साड़ी थोड़ी ट्रांसपेरेंट, ब्लाउज़ टाइट, और वो कैमरे की तरफ मुस्कुराते हुए पोज़ दे रही थी—सेक्सी लेकिन "ट्रेडिशनल" तरीके से।
अलोक ने रील को पॉज किया।
फिर मेरी तरफ देखा—एक गहरी मुस्कान के साथ।
फिर सैंडी की तरफ मुड़ा।
"एजेंसी ने मुझे ये वीडियो भेजा था... जब मैंने तुम्हें सिलेक्ट किया था।"
सैंडी ने हल्के से सिर झुकाया—मुस्कुराई, लेकिन आँखें नीचे।
अलोक ने फोन आगे बढ़ाया—रील फिर चलने लगी।
लड़की साड़ी में घूम रही थी, कैमरा उसके कर्व्स पर ज़ूम कर रहा था, जिंगल बज रहा था—"हमारा नया घर... नई शुरुआत..."
मैंने ग्लास में बचा हुआ ड्रिंक एक घूँट में पी लिया—गला जला, लेकिन दिमाग अभी भी घूम रहा था।
फिर एक और घूँट—तेज़ी से।
वेटर अब भी खड़ा था—ट्रे हाथ में, लेकिन आँखें फोन पर।
उसने सैंडी की तरफ देखा—फिर अलोक की तरफ।
"सर... स्पेशल रिक्वेस्ट... सिर्फ़ एक बार..."
मैंने भी सोचा था कि सैंडी को कहीं देखा है... लेकिन वो सोच बस एक पल के लिए आई थी और फिर गायब हो गई थी।
अब ये रील देखकर सब क्लियर हो गया।
वो ऐड... मैंने भी कई बार टीवी पर देखा था।
"हमारा नया घर" वाला।
फिगर वही था—वही कमर, वही कर्व्स, वही हाइट।
लेकिन उस ऐड में वो फुल मेकअप में थी—परफेक्ट लिपस्टिक, काजल, ब्लश, सब कुछ ट्रेडिशनल ब्राइडल ग्लो के साथ।
एकदम "परफेक्ट बहू" वाली इमेज।
और अब... सामने खड़ी सैंडी (या बेलाकिर)।
कम से कम तीन आदमियों के कम से तर-बतर।
चेहरा पसीने और कम से चिपचिपा, काजल बहा हुआ, होंठ सूजे हुए, बदन पर बाइट मार्क्स, हिक्कीज़, लाल निशान।
बाल बिखरे, टॉवल कमर पर लिपटा हुआ, स्तन खुले
वो "परफेक्ट बहू" वाली लड़की अब एकदम अलग लग रही थी—रॉ, इस्तेमाल की हुई, लेकिन अभी भी हॉट, अभी भी मुस्कुराती हुई।
वेटर अभी भी खड़ा था—फोन स्क्रीन पर रील पॉज करके।
उसकी आँखें सैंडी पर टिकीं—भूखी, लेकिन इंतज़ार में।
"सर... प्लीज़... सिर्फ़ एक बार..."
अलोक ने वेटर की तरफ देखा, सिगरेट का एक और कश लिया, धुआँ छोड़ते हुए बोला—आवाज़ में वही कंट्रोल, वही मालिक वाली टोन।
"ओके... कर ले... लेकिन लिमिट में।"
वो रुका, फिर हल्के से हँसते हुए बोला,
डेविड "भेन के लोड़े... सिर्फ़ ऊपर... नीचे जाने का सोचना भी मत।"
वेटर की आँखें चमक उठीं।
"येस सर!" उसने खुशी से कहा—आवाज़ में एक बच्चे जैसी एक्साइटमेंट।
वो ट्रे हाथ में लिए सैंडी की तरफ बढ़ा—ट्रे पर आखिरी ड्रिंक का ग्लास।
सैंडी अभी भी दीवार से सटी खड़ी थी—टॉवल को दोनों हाथों से कसकर पकड़े हुए, स्तन और चूत ढके हुए।
वो ग्लास लेने के लिए हाथ आगे नहीं बढ़ा रही थी—टॉवल छोड़ने का डर था।
वेटर अब सैंडी के इतने करीब खड़ा था कि उसकी साँसें सैंडी के चेहरे पर पड़ रही थीं।
उसकी आँखें सैंडी के बदन पर टिकी हुईं—स्तनों पर, कमर पर, टॉवल के नीचे छुपी चूत पर।
ट्रे अभी भी हाथ में थी, लेकिन उसकी पूरी अटेंशन सैंडी पर।
सैंडी स्टैच्यू की तरह खड़ी थी—नज़रें नीचे, टॉवल को दोनों हाथों से कसकर पकड़े हुए।
वो ग्लास लेने के लिए हाथ नहीं बढ़ा रही थी—जैसे डर रही हो, या इंतज़ार कर रही हो कि अलोक क्या कहेगा।
वेटर ने फिर अलोक की तरफ देखा—आवाज़ में मिन्नत, लेकिन भूख साफ़ झलक रही थी।
"सर... प्लीज़... सिर्फ़ एक बार... मैं बस देखना चाहता हूँ... मैम कितनी ब्यूटीफुल हैं... प्लीज़..."
सैंडी ने आखिरकार आवाज़ निकाली—धीमी, लेकिन साफ़।
"ये सब...?"
वो रुकी, जैसे कहना चाह रही हो कि ये बहुत हो रहा है।
फिर अलोक की तरफ देखा।
"वेटर... प्लीज़... नो..."
मैंने देखा—कुछ मिनट पहले वो मेरी गेंदों को चाट रही थी—बिना किसी हिचकिचाहट के, बिना किसी रोक-टोक के।
अब एक "लो लेवल" वेटर के सामने वो टॉवल नहीं छोड़ रही थी।
उसकी आँखों में एक अलग सी लाइन थी—शायद क्लास, शायद प्राइड, शायद बस कंट्रोल।
वेटर ने फिर मिन्नत की—आवाज़ काँपती हुई, लेकिन भूखी।
"ओह्ह मैम... प्लीज़... आप बहुत ब्यूटीफुल हैं... मैं बस देखना चाहता हूँ... नंगी... प्लीज़... बस एक बार... मदद कर दीजिए..."
वो बार-बार रिपीट कर रहा था—"प्लीज़... प्लीज़..."—आँखें सैंडी के बदन पर, लस्ट से भरी हुईं।
जब सैंडी ने "वेटर... प्लीज़... नो..." कहा, तो अलोक के चेहरे पर एक पल के लिए कुछ बदल गया।
उसकी आँखें सिकुड़ गईं, होंठों की मुस्कान गायब हो गई।
जैसे कोई पुराना घाव फिर से खुल गया हो।
वो एक सेकंड के लिए कहीं दूर चला गया—शायद उन दिनों में, जब वो गरीब था, जब लोग उसे "वेटर" या "कम वाला" कहकर तिरस्कार करते थे।
उसकी साँसें एक पल के लिए रुक गईं।
फिर अचानक वो जोर से हँसा—एक तेज़, कड़वी हँसी।
"हाहाहा... वेटर??"
उसने सैंडी की तरफ देखा—आँखें अब फिर से चमक रही थीं, लेकिन अब उसमें कोई नरमी नहीं थी।
"तुझे पता है डेविड और विशाल कौन हैं?"
वो रुका, सिगरेट का एक लंबा कश लिया।
धुआँ सैंडी के चेहरे पर फेंका।
"मैंने तुझे जो डबल पे किया... वो इसलिए किया क्योंकि मैं 'नो' नहीं सुनना चाहता।
और ये... ये बस देखना चाहता है?
बस देखना?"
उसने डेविड की तरफ इशारा किया।
"तू जानती है... तेरे बदन पर जो भी निशान हैं—बाइट, हिक्की, लाल मार्क्स—सब डेविड ने दिए हैं।
और डेविड... मेरा ड्राइवर है।"
फिर विशाल की तरफ देखा।
"और विशाल... मेरा बॉडीगार्ड है।"
सैंडी ने ट्रे से ग्लास उठाया—धीरे से, जैसे कोई रस्म निभा रही हो।
उसके हाथ टॉवल से हटे।
टॉवल अब सिर्फ़ निप्पल्स पर अटका हुआ था—जैसे दो छोटे हुक हों, जो उसे गिरने से रोक रहे हों।
वो ग्लास होंठों पर ले गई, एक घूँट लिया।
ग्लास नीचे रखा।
वेटर की आँखें उस पर टिकी हुईं—भूखी, लेकिन इंतज़ार में।
वो सुबह से ये पल देखना चाहता था।
अब मौका था।
सैंडी ने हल्का सा कंधा हिलाया।
टॉवल सरका।
धीरे-धीरे।
पहले एक स्तन पूरी तरह खुला—गोल, भारी, निप्पल अभी भी हल्का लाल, पसीने से चमकता हुआ।
फिर दूसरा।
वेटर की साँस रुक गई।
उसकी आँखें फैल गईं।
वो बस देखता रहा—जैसे कोई सपना सच हो रहा हो।
"मैम... वाह..."
वेटर अब सैंडी के इतने करीब खड़ा था कि उसकी साँसें सैंडी के बदन पर पड़ रही थीं।
उसकी आँखें हर इंच को गौर से देख रही थीं—जैसे कोई कीमती चीज़ को नाप रहा हो।
वो धीरे से आगे बढ़ा।
सैंडी ने टॉवल को और ढीला किया।
टॉवल धीरे-धीरे सरका—पहले कमर से नीचे, फिर पूरी तरह गिर गया।
वेटर की साँसें रुक गईं।
उसका सिर धीरे-धीरे नीचे गया—सैंडी के गले से, स्तनों से, फिर पेट पर।
उसकी आँखें सैंडी की गहरी नाभि पर टिक गईं।
वो बस देखता रहा—नाभि की गहराई, उसके चारों तरफ की स्किन की चमक, पसीने की बूंदें जो अभी भी वहाँ जमा थीं।
उसकी साँसें तेज़ हो गईं—नाक से गर्म हवा सैंडी की स्किन पर लग रही थी।
सैंडी चुप खड़ी थी—आँखें नीचे, लेकिन बॉडी में हल्की कंपकंपी।
वेटर ने धीरे से हाथ बढ़ाया—नाभि के पास, लेकिन टच नहीं किया।
बस इतना करीब कि महसूस हो रहा था।
वेटर अब सैंडी के और करीब आ गया था—उसका सिर धीरे-धीरे नीचे जा रहा था।
सैंडी ने पैर क्रॉस कर लिए थे—जांघें सटी हुईं, चूत पूरी तरह छुपी हुई।
वेटर को ज्यादा कुछ दिख नहीं रहा था—बस एक हल्की सी झलक, गहराई में छुपी हुई।
वो घुटनों पर बैठ गया—लगभग ज़मीन पर, सैंडी के पैरों के सामने।
उसका चेहरा अब सैंडी की जांघों के ठीक सामने था।
वो हर एंगल से देख रहा था—बाएँ से, दाएँ से, नीचे से।
उसकी साँसें तेज़ थीं—गर्म हवा सैंडी की स्किन पर लग रही थी।
फिर उसने सैंडी के चेहरे की तरफ देखा।
उसकी आँखें अब मिन्नत कर रही थीं—एक साइलेंट रिक्वेस्ट।
"बस... थोड़ा और..."
सैंडी ने उसकी आँखों में देखा।
एक पल के लिए रुकी।
फिर मुस्कुराई—एक छोटी, शरारती मुस्कान।
वो धीरे से पैर फैलाए—धीरे-धीरे, लेकिन जानबूझकर।
जांघें और खुलीं।
चूत अब पूरी तरह दिख रही थी—गीली, चमकती हुई
क्लिट हल्का सा बाहर निकला हुआ
सैंडी अब भी नंगी खड़ी थी—टॉवल ज़मीन पर गिर चुका था।
वेटर घुटनों पर बैठा हुआ था, उसका चेहरा सैंडी की चूत के ठीक सामने।
वो धीरे-धीरे अपना नाक और करीब ले आया।
सैंडी की चूत से अभी भी गाढ़ा कम लीक हो रहा था—तीन आदमियों का मिला-जुला।
वेटर ने नाक से सूँघा—गहरी, लंबी साँस ली।
जैसे कोई दुर्लभ खुशबू को महसूस करना चाहता हो।
उसकी आँखें बंद हो गईं—मज़े में।
फिर खुलीं—हर इंच को गौर से देखने लगा।
क्लिटोरिस की हल्की सूजन, लिप्स की लालिमा, अंदर से बहता सफेद रस—सब कुछ।
जैसे वो सोच रहा हो—ये सेलिब्रिटी की चूत... ये कैसी दिखती है... कैसी सूँघती है... कैसी लगती है।
वो समय ले रहा था—जैसे हर डिटेल को याद करके ले जाना चाहता हो।
फिर उसने सैंडी के चेहरे की तरफ देखा—आँखों में मिन्नत।
"अलोक सर... सर... प्लीज़... क्या मैं टच कर सकता हूँ मैम को... सिर्फ़ एक बार... एक रिक्वेस्ट है..."
उसकी आवाज़ में अब वो चालाकी नहीं थी—बस एक सच्ची, बच्चे जैसी मिन्नत।
वो अब "क्यूट" लग रहा था—भूखी आँखों वाला, लेकिन इंसान।
अलोक ने सिगरेट का कश लिया।
फिर सैंडी की तरफ देखा—इस बार उसकी आँखों में सवाल था।
"तू क्या कहती है?"
सैंडी ने वेटर की तरफ देखा।
उसकी आँखें डेविड की तरफ गईं—वो काला, रफ, बेरहम।
फिर वेटर की तरफ—जो अब "क्यूट" लग रहा था, मिन्नत कर रहा था।
वो मुस्कुराई—एक हल्की, शरारती मुस्कान।
जैसे सोच रही हो—ये वाला तो डेविड से बेहतर है... कम से कम ये मिन्नत कर रहा है।
और शायद... अमीर भी होगा।
सैंडी ने धीरे से सिर हिलाया—हाँ में।
सैंडी मुस्कुराई—एक गहरी, थकी लेकिन सेक्सी मुस्कान।
वो अपना ग्लास उठाया।
एक घूँट में पूरा खत्म कर दिया—गले से जलन हुई, लेकिन चेहरा नहीं बदला।
ग्लास वेटर की तरफ बढ़ाया।
वेटर ने जल्दी से ट्रे पर रखा—हाथ काँप रहे थे।
सैंडी अब भी दीवार से सटी खड़ी थी।
धीरे से दोनों हाथ सिर के पीछे ले गई।
ये मूवमेंट से उसके स्तन और ऊपर उठे—और भी शेपली, गोल, भारी।
निप्पल्स हार्ड, लाल, हवा में खड़े।
उसकी बॉडी अब पूरी तरह एक्सपोज़्ड—पसीना, कम के निशान, हिक्कीज़, सब चमक रहे थे।
वेटर अब और करीब आया।
उसके हाथ सैंडी की कमर पर रखे—गर्म, हल्के से काँपते हुए।
फिर धीरे से उसकी गर्दन पर होंठ रखे—किस करने लगा।
धीरे-धीरे, गीले, गर्म।
सैंडी की साँसें तेज़ हो गईं।
वो सबको देख रही थी—अलोक, विशाल, डेविड, और मुझे—मुस्कुराती हुई।
जैसे कह रही हो—"देखो... ये सब मेरे लिए है।"
वेटर के हाथ अब उसके बदन पर घूम रहे थे—कमर से ऊपर, स्तनों के नीचे, फिर बगल में।
वो उसकी बगल में नाक लगाकर सूँघा—गहरी साँस ली।
फिर जीभ निकालकर चाटा—धीरे से, लंबे स्ट्रोक में।
सैंडी की बॉडी सिहर गई—"आह्ह..."
फिर वो नीचे आया—स्तनों पर।
एक निप्पल मुँह में लिया—चूसा, जीभ घुमाई।
दूसरे को हाथ से मसला।
सैंडी की साँसें अब और तेज़—"उफ्फ..."
फिर वो और नीचे—उसकी गहरी नाभि पर।
जीभ अंदर डाली—चाटा, घुमाया, जैसे कोई खजाना मिल गया हो।
सैंडी की कमर हल्की सी काँपी।
वो नीचे नहीं गया—चूत पर नहीं।
उसे पता था—वो फॉरबिडन फ्रूट है।
अलोक की लिमिट।
उसने सैंडी के पूरे बदन को चाटा—गर्दन से नाभि तक, बगल से स्तनों तक।
उसकी लार से सैंडी की स्किन अब चमक रही थी—गीली, ग्लिसनिंग।
फिर वो सीधा हुआ।
सैंडी के चेहरे के बहुत करीब आया।
उसकी आँखों में देखा—एक पल के लिए।
फिर होंठ उसके होंठों पर रख दिए।
सैंडी ने विरोध नहीं किया।
वो किस में शामिल हो गई—जीभ मिली, गहराई से।
वेटर का हाथ अब उसकी कमर पर था—उसे और करीब खींच रहा था।
वो ड्राई हंपिंग करने लगा—उसका लुंड पैंट के ऊपर से सैंडी की जांघों पर रगड़ रहा था।
तेज़, भूखा।
सैंडी ने अचानक कहा—आवाज़ में कंट्रोल, लेकिन सख्त।
"स्टॉप।"
वेटर तुरंत रुक गया।
पीछे हटा।
उसकी साँसें तेज़ थीं—चेहरे पर खुशी, संतुष्टि।
उसे मिल गया था—जो उसने सोचा भी नहीं था।
वो ज़्यादा खुश था जितना उम्मीद थी।
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सैंडी अभी भी दीवार से सटी खड़ी थी—नंगी, टॉवल ज़मीन पर पड़ा हुआ, बदन पर वेटर की लार की चमक अभी भी बाकी थी।
वो चुप थी।
आँखें नीचे, साँसें धीमी लेकिन गहरी।
उसका चेहरा शांत था—कोई गुस्सा नहीं, कोई शर्म नहीं, बस एक तरह की खामोशी।
मेरा दिमाग अब पूरी तरह उस पर अटक गया था।
वो बेलाकिर है।
इंस्टा पर मिलियंस फॉलोअर्स।
लंदन, पेरिस, दुबई—महंगे होटल्स, लग्ज़री कार्स, प्राइवेट पार्टियाँ।
रिच किड्स उसे DM करते होंगे—फ्लर्ट, ऑफर, "चलो मिलते हैं"।
कई को रिप्लाई भी मिलता होगा।
कई को मिलने का मौका भी।
वो उनके लिए सपना है—एक हाई-क्लास, सेक्सी, अनअटेनेबल लड़की।
फिर परिवार की फोटोज़—माँ-बाप के साथ, बहन-भाई के साथ, त्योहारों में।
एक दिन वो किसी से सेटल होगी।
ग्रैंड वेडिंग—साड़ी में, सिंदूर लगाकर, मंगलसूत्र पहनकर।
उसका पति बहुत खुश होगा—सोचेगा "मैंने बेलाकिर को पाया"।
लेकिन आज... वो यहाँ है।
एक सस्ते होटल के कमरे में।
एक वेटर ने उसकी चूत सूँघी।
ड्राइवर ने उसे रफ तरीके से चोदा—बाइट मार्क्स दिए।
बॉडीगार्ड ने उसके मुँह में डाला।
और अलोक... अलोक ने सब डिसाइड किया।
वो उसकी प्रॉपर्टी है।
वो कहेगा तो सैंडी "हाँ" कहेगी।
वो कहेगा तो "नो" नहीं कह सकती।
मैं उसे देखता रहा।
वो चुप थी।
शायद वो भी यही सोच रही हो।
"एक दिन मैं किसी अमीर लड़के से शादी करूँगी... घर बसाऊँगी... बच्चे होंगे... लेकिन आज... आज मैं यहाँ हूँ।
एक वेटर के सामने नंगी खड़ी हूँ।
एक ड्राइवर और बॉडीगार्ड के कम से सनी हुई हूँ।
और अलोक भाई जो कहेंगे... वो करूँगी।
कमरे में एक गहरी खामोशी छा गई थी—सिर्फ़ साँसों की हल्की आवाज़ और सिगरेट का धुआँ ऊपर उठता हुआ।
फिर विशाल ने अचानक जोर से हँसा—एक गंदी, जानवर जैसी हँसी।
"साले वेटर... तू तो आज सपना देख रहा है!"
डेविड ने भी साथ दिया—उसकी हँसी और ऊँची।
"हाँ भाई... तूने देख लिया... अब जा, घर जा... कल सुबह ड्यूटी पर आ जाना।"
अलोक ने भी हल्के से हँसा—लेकिन उसकी हँसी अलग थी।
मैं चुप रहा—चेहरा सख्त, सीधा।
सैंडी ने भी सिर्फ़ मुस्कुराया—एक हल्की, थकी हुई मुस्कान, लेकिन कोई हँसी नहीं।
उसकी आँखें नीचे थीं।
फिर वो धीरे से टेबल की तरफ बढ़ी।
हर कदम के साथ उसका बदन हिल रहा था—नंगी जांघें, स्तन हल्के से उछलते हुए, गांड की मूवमेंट।
वो बिना रुके वोदका की बॉटल उठाई।
बोतल मुँह में लगाई।
गटक... गटक... गटक...
सीधे बोतल से, नीट।
कोई ग्लास नहीं।
जैसे वो कुछ भूलना चाहती हो—जल्दी से, बहुत जल्दी।
या शायद... हिम्मत जुटाना चाहती हो।
मुझे नहीं पता।
वो बोतल नीचे रखी।
फिर धीरे से सबकी तरफ मुड़ी—अलोक, विशाल, डेविड, वेटर... और मुझे।
उसकी आँखें मेरी आँखों से मिलीं—एक पल के लिए।
फिर वो सबके बीच में आई।
वेटर अभी भी रास्ते में खड़ा था।
सैंडी उसके सामने से गुज़री—उसका नंगा बदन वेटर के ठीक सामने।
वेटर की साँसें रुक गईं—आँखें उसके स्तनों पर, फिर नीचे।
लेकिन वो हिला नहीं।
बस देखता रहा।
जैसे ही सैंडी उसके पास से गुज़री, वो रुकी।
एक सेकंड के लिए।
फिर झुकी—उसके होंठ वेटर के होंठों पर रख दिए।
एक छोटा सा, हल्का सा किस—बस 1 सेकंड का।
नरम, गर्म ।
फिर उसका हाथ नीचे गया—वेटर के पैंट के ऊपर से उसके बुल्ज पर।
एक हल्का सा कप—जैसे क्यूरियॉसिटी से चेक कर रही हो—"ये कितना है?"
वेटर की साँस रुक गई।
उसकी आँखें बंद हो गईं—मज़े में।
सैंडी ने मुस्कुराकर उसे देखा।
फिर बिना कुछ कहे आगे बढ़ी—वेटर के पास से गुज़रकर, सीधे मेरी तरफ।
वो मेरे ठीक सामने आई।
ग्रेसफुल तरीके से घुटनों पर बैठ गई।
दोनों हाथ सिर के पीछे ले गई—बाल अरेंज करने लगी।
उसके स्तन अब और ऊपर उठे—चमकते हुए, वेटर की लार से गीले, निप्पल्स हार्ड।
मैं बस देखता रहा—उसकी आँखें मेरी आँखों में।
उसकी मुस्कान—एक छोटी, शरारती, लेकिन थकी हुई।
मैं जानता था वो क्या करने वाली है।
वो पहले वाली जगह पर वापस आना चाहती थी—जो हम कर रहे थे, जब वेटर ने दस्तक दी थी।
वो धीरे से मेरे पैरों के बीच आई।
उसके हाथ मेरी जांघों पर रखे—गर्म, नरम।
उसकी साँसें मेरे पजामा पर लग रही थीं।
मेरा लुंड फिर से हार्ड हो रहा था तेज़ी से।
वो ऊपर देखी—मेरी आँखों में।
फिर धीरे से पजामा के किनारे पर हाथ रखा।
एक झटके में—पूरा नीचे खींच दिया।
मेरा लुंड फिर से बाहर आ गया—खुला, हवा में, अभी भी हार्ड लेकिन थोड़ा सा थका हुआ।
वेटर अभी भी रास्ते में खड़ा था—ट्रे हाथ में, आँखें मेरी तरफ।
उसने देखा।
एक पल के लिए उसकी आँखें मेरे लुंड पर टिकीं।
मुझे लगा... जैसे वो पिटी वाली मुस्कान दे रहा हो।
एक छोटी सी, छुपी हुई मुस्कान—जैसे सोच रहा हो,
"ये क्या है.. छोटआ सआ ?
ये सोच मेरे दिमाग में आई—और मेरा लुंड और सख्त हो गया।
एक अजीब सा जोश—गुस्सा, शर्म, और एक्साइटमेंट सब मिलकर।
सैंडी अब मेरे लुंड के हेड पर सीधी पहुँच गई।
कोई गेंदें नहीं चाटी इस बार।
सीधे हेड—जीभ से टच किया, होंठों से लपेटा।
उसकी जीभ गोल-गोल घूम रही थी—धीरे, लेकिन टेक्नीक से।
बिना हाथ के—सिर्फ़ मुँह।
कभी हेड को मुँह में लिया—हल्का सक्शन, जीभ से खेलती हुई।
कभी बाहर निकालकर पूरा शाफ्ट चाटा—नीचे से ऊपर, लंबे स्ट्रोक में।
कभी हेड को होंठों से दबाया—धीरे-धीरे।
फिर हेड बॉबिंग शुरू हुई—ऊपर-नीचे, गहराई तक।
उसका मुँह गर्म, गीला, टाइट।
हर बार नीचे जाते हुए हल्की सी गैगिंग की आवाज़—लेकिन वो रुकी नहीं।
उसकी आँखें मेरी आँखों में—विंक किया।
मैं बस देखता रहा।
मेरा सिर पीछे गिर गया।
एक गहरी आह निकली—"आह्ह... सैंडी..."
मेरा दिमाग अब सिर्फ़ एक चीज़ पर फोकस था—मेरा लुंड।
आँखें बंद थे।
सैंडी की जीभ... उसके होंठ... उसका मुँह... सब कुछ महसूस हो रहा था।
वो अब और तेज़ी से कर रही थी—हेड बॉबिंग, जीभ घुमाकर, कभी पूरा अंदर लेकर, कभी सिर्फ़ हेड चूसकर।
उसकी साँसें मेरे पेट पर लग रही थीं—गर्म, तेज़।
उसके बाल मेरी जांघों पर गिर रहे थे।
मुझे लग रहा था वो जल्दी से काम खत्म करना चाहती है।
शायद इसलिए कि अलोक ने इस बार कोई ऑर्डर नहीं दिया था—वो खुद से कर रही थी।
या शायद इसलिए कि मैं ही एकमात्र ऐसा था जिसने अभी तक उसे "प्ले" नहीं किया था।
या शायद... इसलिए कि मैंने उससे कभी रफ़ बात नहीं की, कभी "कुतिया" नहीं कहा, कभी जोर से नहीं पकड़ा।
मैंने हमेशा "प्लीज़" कहा, "थैंक्यू" कहा।
शायद वो मुझे "पॉलिट" फील कर रही थी।
मैंने आँखें खोलीं।
एक हल्की सी कुड़कुड़ी के साथ—जैसे कोई सपना टूट रहा हो।
फिर नज़र गई—वेटर पर।
उसके हाथ में ट्रे नहीं थी।
ट्रे टेबल पर रखी हुई थी।
उसका लुंड बाहर था—पैंट से निकालकर हाथ में पकड़ा हुआ।
वो पीछे खड़ा था—सैंडी से दूर, लेकिन साफ़ दिख रहा था।
उसका लुंड मेरा से बड़ा था—मोटा, काला, नसों से भरा।
वो बस देख रहा था—सैंडी को, उसके मुँह को मेरे लुंड पर, उसके स्तनों को हिलते हुए।
और अपना लुंड रगड़ रहा था—धीरे-धीरे, लेकिन लगातार।
पाँचवाँ लुंड कमरे में।
और पाँचवाँ... मुझसे बड़ा।
सैंडी को कुछ पता नहीं था—उसका मुँह मेरे लुंड पर था, आँखें बंद, फोकस सिर्फ़ मुझे कम करने पर।
वो नहीं जानती थी कि वेटर पीछे खड़ा है—उसका लुंड हाथ में, उसे देखकर रगड़ रहा है।
सैंडी अब पूरी डेडिकेशन से काम कर रही थी—उसकी जीभ मेरे लुंड के हेड पर घूम रही थी, होंठों से हल्का सक्शन दे रही थी, कभी पूरा अंदर लेकर, कभी सिर्फ़ टिप चूसकर।
उसकी आँखें मेरी आँखों में टिकी हुईं—भूखी, लेकिन कंट्रोल्ड।
वो जानती थी कि मुझे जल्दी खत्म करना है।
अलोक अभी भी सोफे पर बैठा था—मेरे बगल में।
उसने वेटर की तरफ देखा, जो अब ट्रे टेबल पर रखकर दूर खड़ा था, अपना लुंड हाथ में पकड़े हुए, धीरे-धीरे रगड़ रहा था।
अलोक ने सिगरेट का कश लिया, धुआँ छोड़ते हुए पूछा,
"तो तेरी जॉब मज़ेदार है... क्या तुझे ऐसे सीन अक्सर देखने को मिलते हैं?"
वेटर ने हल्के से हँसा—आवाज़ में खुशी और शर्म दोनों।
"नहीं सर... अक्सर नहीं... लेकिन आज तो मेरा लकी डे है।"
उसने अपना लुंड और जोर से रगड़ा।
अलोक ने मुस्कुराकर पूछा,
"क्यों? मेरी कुतिया की वजह से?"
वेटर ने सिर हिलाया—आँखें सैंडी पर।
"येस सर... और दूसरी कुतिया..."
वो बीच में रुक गया—जैसे बोलते-बोलते डर गया हो।
डेविड ने बीच में कूद पड़ा—उसकी आवाज़ में उत्सुकता और गंदी हँसी।
"बोल ना भेन के लोड़े... आज और कौन-कौन सी कुतिया देखी है तूने?"
वेटर ने एक पल के लिए रुका।
मेरा दिल एक पल के लिए रुक गया।
वेटर की आँखें मेरी आँखों में टिकी हुई थीं—एक सेकंड के लिए सब कुछ साइलेंट हो गया।
कमरे में सिर्फ़ सैंडी की साँसें सुनाई दे रही थीं—मेरे लुंड पर उसके मुँह की गर्मी अभी भी महसूस हो रही थी, लेकिन अब वो भी रुक गई थी।
उसकी आँखें ऊपर उठीं—मेरी तरफ देख रही थीं, जैसे पूछ रही हो "क्या करूँ?"
उसका मुँह अभी भी मेरा लुंड लिए हुए था, लेकिन वो हिल नहीं रही थी।
वेटर ने धीरे से पूछा—आवाज़ में उत्सुकता और डर दोनों।
"क्या मैं बोलूँ...?"
मैंने तुरंत सिर हिलाया—ना में।
बहुत तेज़ी से, लेकिन बहुत हल्के से—जैसे कोई देख न ले।
मैंने सोचा शायद कोई नोटिस नहीं करेगा।
लेकिन कमरे में सबकी आँखें मुझ पर थीं।
अलोक।
विशाल।
डेविड।
और सैंडी—मेरा लुंड मुँह में लिए हुए, ऊपर देख रही थी।
सब देख रहे थे।
वेटर ने मेरी "ना" देखी।
वो रुक गया।
उसकी आँखें नीचे झुक गईं—जैसे कोई बच्चा डाँट खा गया हो।
लेकिन वो रुका नहीं—अपना लुंड अभी भी हाथ में पकड़े हुए था, धीरे-धीरे रगड़ रहा था।
डेविड ने बीच में कूदने की कोशिश की—उसकी आवाज़ में उत्सुकता।
"अरे बोल ना साले... क्या राज़ है?"
लेकिन कोई और कुछ नहीं बोला।
अलोक ने सिगरेट का कश लिया।
धुआँ ऊपर फेंका।
फिर धीरे से कहा—आवाज़ में वही कंट्रोल, वही मालिक वाली टोन।
"बस... जो नहीं कहना चाहता... वो मत बोल।
गेस्ट है।
रिस्पेक्ट करो।"
डेविड और विशाल चुप हो गए।
कोई ज़ोर नहीं दिया।
कोई चिल्लाया नहीं।
अलोक ने उन्हें अच्छे से सिखा रखा था—गेस्ट के सामने कैसे बिहेव करना है।
पैसे वाले आदमी की बात—सब मानते हैं।
सैंडी ने धीरे से मुँह हटाया।
मेरा लुंड बाहर आया—गीला, चमकता हुआ।
उठी—ग्रेसफुल तरीके से, जैसे कोई नाच रही हो।
मैंने सोचा—अब खत्म।
बस... अब जा सकता हूँ।
लेकिन वो मेरी गोद में आ गई।
मेरी जांघों पर बैठ गई—नंगी, गर्म, हल्की सी काँपती हुई।
उसके हाथ मेरे बालों में गए—उँगलियाँ धीरे से सहलाने लगीं।
फिर झुकी—उसके होंठ मेरे होंठों पर।
गहरा किस।
बहुत गहरा।
उसकी जीभ मेरी जीभ से मिली—धीरे-धीरे, लेकिन भूख के साथ।
उसके स्तन मेरी छाती से दब रहे थे—गर्म, नरम, अभी भी वेटर की लार से गीले।
मैंने जवाब दिया—बिना सोचे, हाथ उसकी कमर पर रख दिए।
किस खत्म हुआ।
वो पीछे हटी—थोड़ा सा।
फिर मेरे सिर को अपनी गर्दन पर गाइड किया।
मैंने किस करना शुरू किया—गर्दन पर, हल्के से चाटा।
उसकी स्किन गर्म थी—पसीने और लार की खुशबू।
वो हल्का सा कराही—"आह्ह..."
फिर वो सीना ऊपर किया।
एक स्तन मेरे मुँह के सामने लाया।
मैंने लिया—चूसा, जीभ घुमाई, हल्का सा काटा।
दूसरा स्तन—वही।
उसकी आहें अब और गहरी—"उफ्फ... सैम..."
वो मेरे नाम को फुसफुसा रही थी—धीरे से, लेकिन बहुत सेक्सी।
मैं पागल हो रहा था।
उसके स्तन... इतने परफेक्ट, इतने गर्म... मैं चाट रहा था, चूस रहा था, खेल रहा था।
उसकी आहें मेरे कान में गूंज रही थीं—मुझे और क्रेजी बना रही थीं।
फिर वो मेरे कान के पास आई—होंठ मेरे कान से लगे।
फुसफुसाई—बहुत धीरे, बहुत गर्म।
"मुझे जानना है... क्या हुआ?"
मैं रुक गया।
उसकी आँखें मेरी आँखों में—भूखी, उत्सुक।
मैंने वेटर की तरफ देखा।
वो अभी भी खड़ा था—दूर से, लेकिन आँखें हम पर।
उसने पलक झपकाई—एक छोटी सी, हाँ वाली।
जैसे कह रहा हो—"बोल दो... मैंने देखा है... सब जानता हूँ।"
मेरा दिमाग घूम गया।
सैंडी... ये सब... ये किस... ये स्तन... ये आहें...
ये सब... एक तरह की रिश्वत लग रही थी।
वो मुझे "खरीद" रही थी—जानकारी के लिए।
जानना चाहती थी कि वेटर क्या कहने वाला था।
सैंडी अब मेरी गर्दन पर किस कर रही थी—धीरे-धीरे, गर्म होंठों से, जीभ हल्की सी छूती हुई।
उसकी साँसें मेरी स्किन पर गर्म लग रही थीं।
तभी वेटर ने एक साँस में बोल दिया—जैसे रुक नहीं पा रहा हो।
"मैंने सर की बीवी को सुबह देखा था... नंगी... सिर्फ़ लाल पैंटी में।"
कमरा एकदम सन्नाटे में डूब गया।
सैंडी रुक गई—उसके होंठ मेरी गर्दन पर जम गए।
उसकी साँसें भी रुक गईं।
सबकी नज़रें वेटर पर टिक गईं।
अलोक, विशाल, डेविड—तीनों की आँखें फैल गईं।
उनके लुंड हाथ में थे—सब हार्ड, फड़कते हुए।
अलोक ने सिगरेट नीचे रखा।
आवाज़ सख्त, लेकिन उत्सुक।
"बताओ... डिटेल्स?"
वेटर ने गले की हल्की खराश ली।
फिर बोलने लगा—आवाज़ में एक अजीब सा जोश।
"सुबह कॉफी देने गया था... कमरे का दरवाज़ा थोड़ा खुला था।
अंदर बाथरूम का दरवाज़ा भी खुला था।
वो... सर की बीवी... शावर ले रही थीं।
सिर्फ़ लाल पैंटी में।
ऊपर से कुछ नहीं।
उसके बूब्स... पूरी तरह खुले थे।
गोल, भारी, निप्पल्स गुलाबी... पानी से चमक रहे थे।
वो बाल धो रही थीं... हाथ ऊपर... बूब्स और ऊपर उठे हुए।
मैं बस खड़ा देखता रहा... 10 सेकंड... 15 सेकंड...
अलोक ने सिगरेट का एक लंबा कश लिया, धुआँ ऊपर फेंका और धीरे से बोला—आवाज़ में एक अजीब सा मज़ाक और जलन मिला हुआ।
"तो फिर तू आज हमसे ज़्यादा लकी है... मैं तो बस सोच रहा हूँ... काश मैं भी उसे ऐसे देख पाता... जैसे तूने देखा।"
सबकी नज़रें वेटर पर थीं—विशाल और डेविड ने "हम्म..." किया, जैसे याद कर रहे हों।
सुबह रिसेप्शन पर नेहा—मंगलसूत्र चमकता हुआ, चूड़ियाँ हिलती हुई।
उनके दिमाग में वही इमेज घूम रही थी—और अब वो इमेज "नंगी, सिर्फ़ लाल पैंटी में" के साथ मिक्स हो गई थी।
सबके चेहरों पर एक ही एक्सप्रेशन—भूख, जलन, और एक काला मज़ा।
सबके लुंड फिर से हाथ में थे—धीरे-धीरे रगड़ रहे थे।
सैंडी अब फिर घुटनों पर बैठ गई।
मेरा लुंड उसके मुँह में फिर से ले लिया।
उसकी आँखें मेरी आँखों में—नॉटी, शरारती मुस्कान।
जैसे कह रही हो—"देख... टेबल टर्न हो गया।
तुम्हारी फैमिली वुमन अब बात का विषय है... कैसा लग रहा है?"
मैं अब भी रफ खेलना नहीं चाहता था सैंडी के साथ।
लेकिन आज रात का सब कुछ—वेटर की बातें, नेहा का नाम, वो इमेजिनेशन, वो जलन—सब कुछ मेरे अंदर एक आग बना रहा था।
गुस्सा... शर्म... सब मिलकर मुझे कंट्रोल से बाहर कर रहे थे।
मैंने पहली बार उसका सिर पकड़ा—दोनों हाथों से, बालों में उँगलियाँ फंसाकर।
सख्ती से।
नहीं बहुत ज़ोर से
फिर एक झटके में—मेरा लुंड उसके मुँह में पूरा धकेल दिया।
गहराई तक।
उसकी नाक मेरे निचले पेट से दब गई।
उसकी साँसें रुक गईं—नाक से हल्की सी आवाज़ आई, लेकिन वो विरोध नहीं कर रही थी।
मैं धक्के देता रहा।
धीरे-धीरे नहीं—जोर से, गुस्से में।
30 सेकंड... 45 सेकंड... 60 सेकंड...
उसका गला भरा हुआ था—मैं महसूस कर रहा था उसकी गर्मी, उसकी जीभ, उसकी साँसों की कोशिश।
उसकी आँखें पानी से भर गईं—काजल बह रहा था, लेकिन वो रुकी नहीं।
उसके हाथ मेरी जांघों पर थे—कभी कसकर पकड़ते, कभी हल्के से थपथपाते।
फिर उसने मेरी जांघों पर थपकी दी—यूनिवर्सल सिग्नल।
"बस... छोड़ दो।"
मैंने तुरंत छोड़ा।
उसका सिर पीछे हटा।
वो जोर-जोर से साँस ले रही थी—मुँह से लार बह रही थी, आँखें लाल, लेकिन मुस्कुरा रही थी।
सैंडी अब ज़मीन पर थी—डॉगी स्टाइल में।
घुटनों और हाथों के बल, कमर थोड़ी झुकी हुई, गांड ऊपर उठी हुई।
वो मेरी तरफ देख रही थी—आँखें चमकती हुईं, होंठ हल्के खुले।
फिर धीरे से गर्दन घुमाई—सबकी तरफ देखा।
अलोक, विशाल, डेविड, वेटर—सब पर नज़र घुमाई।
फिर धीरे से पैर थोड़े फैलाए—जांघों में गैप बनाया।
चूत अब थोड़ी दिख रही थी—गीली, सूजी हुई, अभी भी कम से चमकती हुई।
फिर एक हाथ पीछे ले गई—अपनी ही गांड पर जोर से थप्पड़ मारा।
फट्ट!
आवाज़ कमरे में गूंज गई।
उसकी गांड हिली—लाल निशान बन गया।
ये सिग्नल था।
वो हीट में थी।
भूखी थी।
किसी को चाहिए था—अब।
डेविड तुरंत खड़ा हो गया—लुंड हाथ में पकड़े, आँखें भूखी।
उसने एक कदम आगे बढ़ाया।
लेकिन अलोक ने उँगली उठाई—एक छोटा सा इशारा।
"मेरी बारी है अब।"
डेविड रुक गया—हँसा, लेकिन पीछे हट गया।
अलोक ने धीरे से मेरी तरफ देखा।
"बॉय... तू तैयार है?"
मैंने कुछ नहीं कहा।
बस अपनी गांड को सोफे के किनारे पर शिफ्ट किया।
सैंडी मेरे सामने थी—डॉगी में, गांड ऊपर
उसने अपना लुंड पकड़ा—मोटा, सख्त, तैयार।
धीरे से सैंडी की चूत पर रखा।
एक झटके में—पूरा अंदर।
सैंडी की आह निकली—"आह्ह्ह..."
उसका बदन झटका खा गया।
अलोक ने धक्का देना शुरू किया—जोर से, गहराई से।
हर थ्रस्ट में सैंडी का सिर मेरी तरफ झुकता—उसके होंठ मेरे लुंड के पास।
मैंने उसके बाल और सख्त पकड़े।
उसका मुँह फिर से मेरे लुंड पर आ गया।
वो चूसने लगी—अलोक के धक्कों के साथ रिदम में।
कमरा फिर से आवाज़ों से भर गया—गीली आवाज़ें, आहें, थप्पड़, साँसें।
विशाल और डेविड देख रहे थे—लुंड हाथ में, मुस्कुराते हुए।
वेटर दूर खड़ा था अपना लुंड फिर से रगड़ रहा था।
सैंडी अब बीच में थी—दोनों तरफ से।
अलोक पीछे से, मैं सामने से।
उसकी आहें अब लगातार—"आह्ह... हाँ... और... और..."
•
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वाह! अगले भाग की प्रतीक्षा रहेगी.
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अलोक बहुत रफ था।
जो कुछ मिनट पहले शांत, बातें समझाने वाला लग रहा था... वो अब पूरी तरह बदल चुका था।
उसने सैंडी के बालों को मुट्ठी में कसकर पकड़ लिया—जोर से, इतना कि उसके सिर का पिछला हिस्सा पीछे खिंच गया।
उसकी गर्दन पूरी तरह एक्सपोज़ हो गई—नसें उभरी हुईं, साँसें तेज़।
उसने एक झटके में अपना लुंड उसकी चूत से निकाला—फिर एक और झटके में पूरा धकेल दिया।
सैंडी की बॉडी झटके से हिल गई—"आह्ह्ह!"
उसकी आहें अब लगातार थीं—टूटी हुई, गहरी, लेकिन भूखी।
अलोक ने मुझे देखा—आँखों में एक क्रूर चमक।
"देख बॉय... ये है असली मर्द।"
फिर उसने सैंडी का सिर मेरी तरफ खींचा।
उसका चेहरा मेरे लुंड के ठीक सामने—आँखें पानी से भरी, मुँह खुला, होंठ सूजे हुए।
अलोक ने उसके बाल और सख्त खींचे—उसका चेहरा पीछे की तरफ गया, फिर जोर से मेरे लुंड पर धकेला।
"देख... कितना गहरा ले सकती है।"
मेरा लुंड उसके गले तक चला गया—उसकी नाक मेरे पेट से दब गई।
वो गैग कर रही थी—आवाज़ें निकल रही थीं—लेकिन अलोक ने नहीं छोड़ा।
उसने 5-6 सेकंड तक दबाए रखा।
फिर छोड़ा।
सैंडी ने जोर से साँस ली—लार उसके मुँह से बह रही थी, आँखें लाल।
लेकिन वो मुस्कुरा रही थी
अलोक का दूसरा हाथ अब उसकी गांड पर था।
जोर-जोर से थप्पड़ मार रहा था—फट्ट... फट्ट... फट्ट...
हर थप्पड़ के साथ सैंडी की गांड लाल हो रही थी, हिल रही थी।
फिर उसने एक हाथ उसके स्तनों पर ले जाकर निप्पल्स को पिंच किया—जोर से।
सैंडी की चीख निकली—"आआह्ह!"
लेकिन वो पीछे नहीं हटी।
मैं भी अब पूरी तरह इन्वेस्टेड था।
मेरा लुंड उसके गले में था।
मैं भी अब हिप्स हिला रहा था—हवा में, उसके मुँह के रिदम से मैच करने के लिए।
हर धक्का गहरा, तेज़।
मैं देख रहा था—ये सब रियल में हो रहा था।
सैंडी की आहें अब हमें और उकसा रही थीं—"हाँ... और जोर से..."
उसकी आवाज़ में दर्द था... लेकिन प्लेज़र ज़्यादा।
वो नहीं चाहती थी रुकना।
और मैं... मैं भी।
लेकिन कमरे में दूसरी तरफ बातें भी चल रही थीं।
वेटर अब थोड़ा करीब आ गया था—अपना लुंड हाथ में पकड़े, धीरे-धीरे रगड़ रहा था।
वो डेविड और विशाल से बात कर रहा था—धीमी आवाज़ में, लेकिन साफ़ सुनाई दे रही थी।
"डेविड सर... उसकी बूब्स... सुबह कितनी परफेक्ट लग रही थीं... पानी से चमक रही थीं... निप्पल्स गुलाबी... हल्के से सख्त..."
डेविड ने हँसा—उसका लुंड हाथ में और जोर से रगड़ा।
"बोल ना साले... और डिटेल्स दे... वो कैसे खड़ी थी?"
वेटर ने और उत्साह से कहा,
"शावर में... बाल धो रही थी... हाथ ऊपर... बूब्स और ऊपर उठे हुए... पानी बह रहा था... मैं बस खड़ा देखता रहा..."
विशाल ने जोर से हँसा।
सैंडी ने अचानक मेरी तरफ देखा—पहली बार उसकी आवाज़ में वो ग्रेस नहीं था, वो क्लासी टोन नहीं था।
वो मेरी आँखों में देखकर बोली—सीधे, बिना हिचकिचाहट के, लेकिन गहरी भूख के साथ—
"फक माय फेस... मुझे अपनी रंडी बना दो।"
ये शब्द मेरे सीने में बिजली की तरह उतरे।
एक झटके में—थ्रिल, गुस्सा, जोश—सब एक साथ।
मेरा लुंड और सख्त हो गया।
मैंने उसके सिर को दोनों तरफ से पकड़ा—दोनों गालों पर हाथ, उँगलियाँ कसकर।
उसे अपनी तरफ खींचा।
हमारे होंठ मिले—जोर से, गहराई से।
मैंने उसके होंठ काटे—जैसे डेविड पहले कर रहा था।
दाँतों से दबाया, खींचा।
वो दर्द में कराही—"आह्ह..."—लेकिन उसकी आँखों में दर्द नहीं, मज़ा था।
वो इसे एंजॉय कर रही थी।
पीछे से अलोक का धक्का अभी भी जारी था—जोरदार, तेज़।
उसकी चूत में लुंड पूरी तरह डूब-उतर रहा था।
सैंडी की आहें अब मिक्स हो रही थीं—दर्द और प्लेज़र की।
कभी गिगल, कभी कराह—लेकिन सब कुछ नेचुरल लग रहा था।
जैसे वो पैसे के लिए नहीं... बल्कि सच में एंजॉय कर रही हो।
दूसरी तरफ—कमरे में बातें चल रही थीं।
डेविड ने वेटर से पूछा,
"फिर क्या किया तूने?"
वेटर ने हल्के से हँसा—आवाज़ में अभी भी उत्साह।
"हमने उसकी पैंटी और ब्रा के साथ खेला... जब वो बाहर थीं।
हम पाँच थे... सब स्टाफ... ओह्ह... उसकी पैंटी की खुशबू... अभी भी याद है।
सेक्सी... बहुत सेक्सी।"
सबकी साँसें तेज़ हो गईं।
विशाल ने अपना लुंड और जोर से रगड़ा।
डेविड ने हँसा।
"भाई... कल सुबह देखकर मज़ा आएगा।"
सैंडी की आहें अब और ऊँची हो रही थीं—"हाँ... और जोर से... फाड़ दो..."
उसकी बॉडी काँप रही थी—दोनों तरफ से भरी हुई।
अलोक ने पूछा—आवाज़ भारी, लेकिन साफ़।
"तैयार है?"
सैंडी ने तुरंत जवाब दिया—आवाज़ में भूख, सरेंडर।
"येस... येस... येस..."
अलोक ने उसके थाइज़ को कसकर पकड़ा।
एक झटके में—उसे पलटा दिया।
अब सैंडी फ्लोर पर पीठ के बल थी—पूरी तरह नंगी, पैर फैले हुए।
सब आदमी—मैं, अलोक, विशाल, डेविड—उसके चारों तरफ घुटनों पर आ गए।
लुंड हाथ में, फड़कते हुए।
वेटर दूर खड़ा था—अभी भी अपना लुंड रगड़ रहा था, लेकिन पास नहीं आया।
सैंडी नीचे लेटी थी—हँस रही थी, मुस्कुरा रही थी।
उसके हाथ ऊपर उठे—विशाल और डेविड के बॉल्स को छू रही थी, बारी-बारी।
अलोक उसके पैरों के बीच था
विशाल और डेविड उसके स्तनों की तरफ—लुंड हिलाते हुए।
और मैं... उसके चेहरे के ठीक ऊपर—लुंड उसके मुँह के सामने।
सैंडी ने मुस्कुराकर देखा—सबकी तरफ।
फिर जीभ निकाली—मेरे लुंड के हेड पर।
10 मिनट के अंदर सब खत्म हो गया।
हम चारों ने उसे एक-एक करके पेंट कर दिया—हमारा कम उसके बदन पर।
अलोक ने सबसे पहले शुरू किया।
उसने सैंडी की कमर पकड़ी, और एक झटके में उसके नाभि के ठीक ऊपर शूट किया।
गाढ़ा, गरम, सफेद धार—सीधा उसकी गहरी नाभि में गिरा।
बहुत था।
उम्र के बावजूद अलोक का कम इतना ज्यादा था कि नाभि भर गई, फिर ऊपर से बहकर उसकी कमर पर फैल गया।
सैंडी की साँसें रुक गईं—उसकी आँखें बंद हो गईं, मुँह से एक लंबी, गहरी आह निकली—"आह्ह्ह... सर..."
उसकी उँगलियाँ अपनी नाभि पर गईं—कम को छुआ, फिर जीभ निकालकर चाटा।
फिर विशाल और डेविड ने आगे बढ़े।
दोनों उसके स्तनों के ऊपर थे।
विशाल ने बाएँ स्तन पर शूट किया—गाढ़ा धार, निप्पल से होकर बहता हुआ।
डेविड ने दाएँ पर—और भी ज़्यादा।
उसके स्तन अब पूरी तरह कवर हो चुके थे—सफेद, चिपचिपा, चमकता हुआ।
सैंडी ने दोनों हाथ ऊपर उठाए—स्तनों को मसला, कम को फैलाया।
उसकी आँखें बंद, होंठ काटे हुए, एक मुस्कान के साथ।
"हाँ... और... सब दो..."
और फिर... मैं।
मैं उसके चेहरे के ठीक ऊपर था।
उसकी आँखें मेरी आँखों में—भूखी, सरेंडर, लेकिन अभी भी वो नॉटी चमक।
मैंने उसके बाल पकड़े—हल्के से, लेकिन कसकर।
उसका चेहरा ऊपर की तरफ खींचा।
फिर... मैंने झड़ दिया।
पहला धार उसके गाल पर गिरा।
दूसरा उसके होंठों पर।
तीसरा उसकी ठोड़ी पर।
चौथा उसकी आँखों के नीचे—काजल के साथ मिलकर बह गया।
उसका पूरा चेहरा अब मेरे कम से चमक रहा था—गालों पर सफेद लाइनें, होंठों पर चिपचिपा, ठोड़ी से नीचे बहता हुआ।
उसने जीभ निकाली—मेरे कम को चाटा।
फिर होंठ चाटे—सब सोख लिया।
उसकी आँखें अभी भी मेरी आँखों में—एक गहरी, संतुष्ट मुस्कान।
"थैंक्यू... सर..."
कमरा अब सिर्फ़ हमारी साँसों से भर गया था।
उसका पूरा चेहरा अब चमक रहा था—एक सेक्सी, गंदा, लेकिन बहुत सुंदर नज़ारा।
वो हमें देख रही थी—आँखें आधी बंद, होंठ हल्के खुले, साँसें तेज़ लेकिन धीमी होती हुईं।
उसके बदन पर पसीना और कम मिलकर चमक रहा था—जैसे कोई ज्वेलरी पहनी हो।
वो सबसे खूबसूरत औरत लग रही थी—इस पल में, इस कमरे में, इस दुनिया में।
हम चारों की साँसें अभी भी तेज़ थीं—कमरे में सिर्फ़ वो आवाज़ें थीं।
फिर अचानक... थोड़ी दूर से एक कराह सुनाई दी।
"आह्ह... आह्ह... आह्ह..."
वेटर।
वो अब भी कमरे में था—दरवाज़े के पास, लेकिन थोड़ा सा दूर।
उसके हाथ में कुछ नीला था—एक थॉन्ग पैंटी।
सैंडी की।
वो उस पैंटी को अपने लुंड पर रगड़ रहा था—जोर-जोर से।
उसकी आँखें बंद, मुँह से कराहें निकल रही थीं।
फिर... एक झटके में।
वो झड़ गया—पैंटी के अंदर।
गाढ़ा, सफेद कम—पैंटी को भिगो दिया।
शायद वो फर्श गंदा नहीं करना चाहता था।
या शायद... वो इसे रखना चाहता था।
हम सब देखते रहे।
सैंडी भी—फर्श पर लेटी हुई, सिर थोड़ा ऊपर करके।
फिर सब हँस पड़े—एक गहरी, क्रुअल हँसी।
सैंडी ने भी हँसा—थकी, लेकिन खुश।
वेटर ने जल्दी से सब पैक किया।
पैंट ज़िप की।
पैंटी—कम से भरी हुई—अपनी जेब में डाल ली।
स्माइल के साथ।
फिर जाते-जाते मेरी तरफ मुड़ा।
"सर... आप अपना लॉन्ड्री बैग चेक कर लीजिएगा... अपने कमरे में।"
वो मुस्कुराया।
फिर बाहर निकल गया।
दरवाज़ा बंद हुआ।
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वेटर चला गया था।
दरवाज़ा बंद हो चुका था।
कमरा अब सिर्फ़ हमारी साँसों से भर गया था—चार आदमी, और सैंडी बीच में।
हम सब फर्श पर थे—सैंडी हमारे चारों तरफ घिरी हुई, पीठ के बल लेटी, बदन पर हमारा कम चमक रहा था।
वो अभी भी मुस्कुरा रही थी।
हल्की-हल्की गिगल कर रही थी—जैसे कोई बच्ची मज़ाक के बाद हँस रही हो।
उसकी उँगलियाँ धीरे-धीरे उसके बदन पर घूम रही थीं—नाभि में भरा अलोक का कम, स्तनों पर फैला विशाल और डेविड का, चेहरे पर मेरा।
वो उँगली से कम उठाती, फिर उसे जीभ पर रखकर चाटती।
हर बार अलग स्वाद चखती हुई—जैसे किसी रेयर वाइन को टेस्ट कर रही हो।
कभी वो अपनी उँगली को होंठों पर रखकर चूसती, कभी जीभ से चाटती।
फिर हँस पड़ती—एक छोटी, शरारती हँसी।
"हम्म... सबका अलग-अलग स्वाद है..."
वो हँसती रही।
हम देखते रहे।
एक यंग लड़की—परफेक्ट बॉडी, टीवी कमर्शियल मॉडल, किसी की बेटी, किसी की बहन, किसी की होने वाली बीवी या माँ।
और अब... फर्श पर लेटी हुई, चार आदमियों के कम से ढकी हुई।
उसकी उँगलियाँ अभी भी घूम रही थीं—नाभि से स्तनों तक, चेहरे तक।
फिर वो उँगली मुँह में डालकर चूसती।
फिर फिर हँसती।
"अलोक सर का... सबसे ज़्यादा... गाढ़ा और गरम..."
वो हँसी।
"विशाल का... थोड़ा मीठा..."
फिर डेविड की तरफ देखकर हँसी।
"और डेविड सर का... बहुत तेज़..."
फिर मेरी तरफ देखी—उसकी आँखें मेरी आँखों में।
उसने उँगली से मेरे कम को चेहरा से उठाया।
जीभ पर रखा।
चाटा।
फिर मुस्कुराई—बहुत गहरी मुस्कान।
"सबसे... अलग।
अलोक सबसे पहले फर्श से उठा।
धीरे से सोफे पर बैठ गया।
एक नई सिगरेट जलाई।
गहरा कश लिया।
धुआँ छोड़ा—धीरे-धीरे, जैसे सब कुछ कंट्रोल में हो।
फिर उसने डेविड और विशाल की तरफ देखा।
आवाज़ में वही मालिक वाली टोन—शांत लेकिन कमांड वाली।
"उसे बाथरूम ले जाओ... साफ़ करो... और अगले राउंड के लिए तैयार करो।"
डेविड ने हँसा—उसकी हँसी में जानवर जैसा जोश।
वो तुरंत खड़ा हो गया।
सैंडी को उठाया—एक हाथ से उसकी कमर पकड़ी, दूसरे से जांघें।
उसने उसे अपने कंधे पर लाद लिया—जैसे कोई फूल उठा रहा हो।
डेविड छोटे कद का था, पेट बड़ा था, लेकिन ताकत बहुत थी।
सैंडी हल्की सी चीखी—"ओह्ह..."—फिर गिगल कर दी।
उसके बदन पर लगा हमारा कम अब डेविड की स्किन से चिपक रहा था—चिपचिपा, गर्म।
लेकिन डेविड को कोई फर्क नहीं पड़ा।
वो हँसता हुआ बाथरूम की तरफ बढ़ा।
विशाल उसके पीछे-पीछे चला—लुंड अभी भी हाथ में, मुस्कुराता हुआ।
बाथरूम का दरवाज़ा थोड़ा सा खुला छूट गया।
अंदर से शावर की आवाज़ आई—पानी तेज़ी से बहने लगा।
फिर हँसी।
गिगल।
"ओह्ह... उफ्फ..."
"रंडी... "
"भेनचोद..."
थप्पड़ की आवाज़ें—फट्ट... फट्ट...
सैंडी की गिगल और कराहें मिक्स हो रही थीं।
पहली बार... मुझे जलन हुई।
डेविड और विशाल की वजह से।
एक ड्राइवर... एक बॉडीगार्ड...
लो लेवल के लोग...
और वो सैंडी के साथ बाथरूम में थे।
शावर के नीचे।
उसे साफ़ कर रहे थे।
उसे छू रहे थे।
उसे हँसा रहे थे।
मैं सोचने लगा—काश मैं अलोक का हेल्पर होता।
काश वो मुझे ऑर्डर देता—"जा... उसे साफ़ कर के ला।"
मैं उसके साथ बाथरूम में जाता।
उसे शावर के नीचे ले जाता।
उसके बदन पर लगा कम धोता।
उसे फिर से छूता।
उसे और देखता।
उसकी बॉडी... और करीब से।
लेकिन मैं... मैं बस सोफे पर बैठा था।
अलोक सिगरेट पी रहा था।
मैंने ग्लास उठाया—बचा हुआ ड्रिंक एक घूँट में पी लिया।
अलोक ने अपनी सिगरेट का पैकेट मेरी तरफ बढ़ाया।
मैंने एक ली, होंठों पर रखी।
उसने लाइटर जलाकर आगे किया।
मैंने गहरा कश लिया—धुआँ फेफड़ों में भर गया, फिर धीरे से बाहर छोड़ा।
सिर में हल्की चक्कर सी आई, लेकिन अब नशा उतर रहा था।
"पार्टी कैसी लगी?" अलोक ने पूछा, आवाज़ में वही पुरानी वाली मुस्कान।
मैंने धीरे से कहा—आवाज़ थकी हुई, लेकिन सच्ची।
"ओह्ह... कभी ऐसा कुछ देखा ही नहीं... सर, आप कितनी बार करते हैं ये सब?"
अलोक ने हँसा—एक गहरी, थकी हुई हँसी।
"पता नहीं बॉय... ये माल पर डिपेंड करता है।"
उसने "माल" शब्द पर ज़ोर दिया—जैसे कोई आम चीज़ हो।
"ओह..."
"मॉडल्स, एयरहोस्टेस, फिल्म वालियाँ... गिनती ही नहीं पता।
कभी-कभी हफ्ते में दो-तीन... कभी महीने में एक।
बस... जब मन करे।"
मैं चुप रहा।
मेरी आँखें बाथरूम के दरवाज़े पर टिकी हुई थीं।
अंदर से अभी भी हल्की गिगल और पानी की आवाज़ आ रही थी।
मैं एक बार फिर सैंडी को नंगी देखना चाहता था—उसकी बॉडी, उसके स्तन, उसकी चूत... बस एक आखिरी बार।
लेकिन वो लोग अभी भी अंदर थे—डेविड और विशाल।
हँसी, थप्पड़, कराहें—सब सुनाई दे रहा था।
मैंने ग्लास रखा।
"अब... मुझे जाना चाहिए।
बहुत लेट हो गया।
नेहा जाग गई तो परेशान हो जाएगी।"
अलोक ने सिर हिलाया।
"ठीक है... लेकिन पक्का है ना?
तू चाहे तो अभी भी रुक सकता है... नेहा को सोने दे।"
मैंने हल्के से मुस्कुराया।
"नहीं सर... मैं जाना चाहता हूँ।"
फिर एक पल रुका।
"और... हैप्पी बर्थडे फिर से।
थैंक्यू... इस रात के लिए।
मैं कभी नहीं भूलूँगा।"
अलोक ने मुस्कुराकर कहा,
"गिफ्ट कहाँ है मेरा?"
मैंने हल्के से हँसा।
"जो चाहें... बोलिए।"
उसने मेरी आँखों में देखा।
फिर एक साँस में बोला,
"कल सुबह नेहा से मिलवाओ।"
मेरा दिल धड़क गया।
"वो... वो ऐसी नहीं है... वो सैंडी जैसी नहीं है।"
अलोक ने जोर से हँसा।
"पता है बॉय... वो सैंडी से कहीं बेहतर है।
मैंने सब देखा है—मॉडल्स, एयरहोस्टेस, फिल्म वाली... लेकिन नेहा... वो अलग है।
बेड पर भी... वो सब कुछ बेहतर करेगी।
मैं जानता हूँ।
मैं सिर्फ़ मिलना चाहता हूँ... प्लेटोनिक।
हैलो... बस।
कुछ और नहीं।"
मैं चुप रहा।
उसकी पायल... मंगलसूत्र... उसकी मुस्कान।
मैंने कहा,
"ठीक है... कल ब्रेकफास्ट पर।"
अलोक ने सिर हिलाया।
"गुड बॉय।"
मैं उठा।
बाथरूम से अभी भी हँसी और पानी की आवाज़ आ रही थी।
सैंडी अभी भी अंदर थी—नंगी, शावर के नीचे।
मैं एक बार फिर देखना चाहता था... लेकिन नहीं।
मैंने दरवाज़ा खोला।
बाहर निकल गया।
कमरे में नेहा सो रही थी।
मैंने दरवाज़ा बंद किया।
चाबी लगाई।
उसके पास लेट गया।
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मैं जैसे ही बिस्तर पर गिरा, नींद ने मुझे इतनी जोर से पकड़ लिया कि कुछ समझ नहीं आया।
नेहा मेरी बाहों में थी—नंगी, गर्म, मेरी छाती से चिपकी हुई।
उसकी साँसें मेरी स्किन पर धीरे-धीरे पड़ रही थीं।
मैं पूरी तरह थक चुका था—शराब का नशा, रात भर की मेहनत, वो सब कुछ मिलकर बॉडी को भारी बना चुका था।
आँखें बंद हुईं और मैं सो गया... गहरी, बिना किसी सपने वाली नींद में।
अगली बात जो मुझे याद आई—पर्दे की सरसराहट।
सुबह की धूप कमरे में आ रही थी।
नेहा की आवाज़ आई—नरम, प्यार भरी, लेकिन थोड़ी जल्दी वाली।
"वेक अप बेबी..."
मैंने आँखें खोलीं।
"कॉफी तैयार है। और आज चेकआउट भी है... 1 बजे तक।"
मैंने फोन उठाया—9 बज रहे थे।
सिर्फ़ 3 घंटे की नींद मिली थी... वो भी टूटी-फूटी।
नेहा पर्दे के पास खड़ी थी।
लंबी टी-शर्ट पहने हुए—बस ऊपरी जांघों तक आ रही थी।
नीचे से कुछ नहीं दिख रहा था।
ब्रालेस थी—टी-शर्ट के नीचे उसके स्तन साफ़ उभरे हुए थे, निप्पल्स हल्के से प्रिंट हो रहे थे कपड़े पर।
पैंटी है या नहीं... पता नहीं था।
शायद नहीं।
पहला विचार जो दिमाग में आया—कॉफी यहाँ है।
कप टेबल पर रखा था—धुआँ अभी भी उठ रहा था, गर्म लग रही थी।
कौन लाया ये कॉफी?
मैंने धीरे से पूछा—आवाज़ भारी, नींद से कर्कश।
"ये कॉफी... किसने लाई?"
नेहा मुड़ी, मुस्कुराई—वो प्यारी, शांत मुस्कान।
"रूम सर्विस वाला आया था, सैम।
आप सो रहे थे तो मैंने ही ले लिया।"
मेरा दिल एक पल के लिए धड़क गया।
"तुम... इन कपड़ों में?"
नेहा ने हल्के से कंधे उचकाए, जैसे कोई बड़ी बात नहीं।
"हाँ... लंबी टी-शर्ट है ना... सब ठीक था।
वो भी तो स्टाफ है... रोज़ ऐसे ही देखते होंगे।"
वो मेरे पास आई—बेड पर बैठ गई।
उसकी जांघ मेरी जांघ से छू गई—गर्म, नरम।
उसने कॉफी का कप मेरे हाथ में थमाया।
नेहा ने मेरे हाथ में पजामा थमाया—वो लाइट ग्रे वाला, जो मैंने कल पहना था।
"बेबी फास्ट... कॉफी खत्म करो... बफे ब्रेकफास्ट तैयार है।"
उसकी आवाज़ में वही प्यार था—नरम, लेकिन थोड़ी जल्दी वाली।
मैंने पजामा लिया, लेकिन अभी भी बिस्तर पर ही लेटा रहा।
कॉफी का कप हाथ में था—गर्माहट अब भी महसूस हो रही थी।
ब्रेकफास्ट इंक्लूडेड था—और हम मिडिल क्लास वाले कभी नहीं छोड़ते ऐसे ब्रेकफास्ट को।
ये वो छोटी-छोटी खुशियाँ हैं जो ट्रिप को यादगार बनाती हैं—फ्री बफे, ढेर सारे ऑप्शन्स, और वो फीलिंग कि "सब कुछ मिल रहा है बिना एक्स्ट्रा पैसे के"।
मैं कॉफी की चुस्कियाँ ले रहा था—धीरे-धीरे।
कड़वी गर्माहट गले से नीचे उतर रही थी, लेकिन दिमाग अभी भी रात में अटका हुआ था।
फिर अचानक याद आया—कल रात का वो वादा।
अलोक से किया हुआ।
"कल सुबह नेहा से मिलवाओ।"
नेहा ने पजामा निकालकर रख दिया था, लेकिन फिर वो लंबा वाला पजामा पहनने लगी।
उसकी भूख साफ़ झलक रही थी—कल रात हमने ठीक से कुछ खाया ही नहीं था।
बस बीयर और कुछ स्टार्टर्स—भूख लगी होगी उसको भी।
मैंने उसे देखा।
धीरे से कहा,
"ये लंबा पजामा मत पहनो... कुछ छोटा पहनो।"
नेहा ने मेरी तरफ देखा—एक पल के लिए।
कोई सवाल नहीं किया।
बस मुस्कुराई, अलमारी खोली और एक छोटा सा शॉर्ट निकाल लिया।
पहन लिया—वो टाइट वाला, ऊपर से जांघों के बीच तक।
फिर टी-शर्ट उतारी—ब्रालेस थी।
उसने ब्रा की तरफ हाथ बढ़ाया।
मैंने फिर कहा,
"ब्रा मत पहनो... तुम ऐसे ही परफेक्ट लग रही हो।"
नेहा ने हल्के से मुंह बनाया।
फिर टी-शर्ट के नीचे से अपने निप्पल्स की तरफ इशारा किया—कपड़े पर साफ़ उभरे हुए थे।
जैसे कह रही हो—"फिर ये तो दिख रहे हैं।"
मैंने मुस्कुराकर कहा,
"बाल आगे कर लो... कोई नोटिस नहीं करेगा।"
नेहा ने हँसी—वो प्यारी, शरमाती हुई हँसी।
फिर बाल आगे कर लिए—कंधों पर लटका दिए।
अब निप्पल्स थोड़े छुप गए थे।
वो मेरी तरफ देखकर बोली,
"आप जो कहें... सैम।"
मैंने नेहा को देखा।
वो अभी भी टी-शर्ट और शॉर्ट में खड़ी थी—बाल आगे लटके हुए, निप्पल्स कपड़े पर हल्के से उभरे हुए, लेकिन छुपे हुए।
उसने कोई सवाल नहीं किया।
न "क्यों ब्रा नहीं पहनूँ?" पूछा।
न "क्यों आप चाहते हैं कि मैं ऐसे दिखूँ?"
बस मुस्कुराई और जो मैंने कहा, वही कर दिया।
बाल आगे कर लिए।
शॉर्ट पहन लिया।
ब्रा नहीं पहनी।
मैं अंदर से काँप रहा था।
मुझे पता नहीं था कि अगर वो पूछती—"सैम... आज क्या हुआ है आपको?
क्यों चाहते हैं कि आपकी बीवी थोड़ी डिस्प्ले में रहे?"
तो मैं क्या जवाब देता।
क्योंकि सच तो ये था कि मेरे दिमाग में सिर्फ़ एक ही चेहरा था—अलोक।
वो ब्रेकफास्ट हॉल में होगा।
उसके साथ शायद विशाल और डेविड भी।
शायद सैंडी भी—अपने हॉट कपड़ों में, वो वाली टाइट ड्रेस में जो उसकी बॉडी को और हाइलाइट करती है।
मैं चाहता था कि वो सब देखें।
देखें कि मेरे पास क्या है।
सैंडी से बेहतर।
जो सिर्फ़ मेरी है।
मैं चाहता था कि अलोक की आँखें नेहा पर टिकें।
उसकी वो मुस्कान... वो जलन... वो भूख...
मैं चाहता था कि वो समझे—तुमने मुझे सैंडी दी थी, लेकिन मेरे पास पहले से ही कुछ ऐसा है जो तुम कभी नहीं पा सकते।
मैं चाहता था कि विशाल और डेविड भी देखें—तुम्हारा बॉस ने मुझे कोई एहसान नहीं किया सैंडी देकर।
मेरे पास अपनी रंडी है... अपनी कुतिया... और वो सैंडी से कहीं बेहतर है।
और सैंडी... वो भी वहाँ होगी।
अपने सेक्सी कपड़ों में, सबकी नज़रें खींचती हुई।
मैं नहीं चाहता था कि सारी अटेंशन उसी पर जाए।
मैं चाहता था कि नेहा को भी उसका हिस्सा मिले।
मर्दों की नज़रें उस पर भी टिकें।
उसकी टी-शर्ट के नीचे उभरे हुए निप्पल्स को देखें।
उसकी जांघों को देखें।
उसकी पायल को सुनें।
और जलें।
हम कमरे से बाहर निकले।
नेहा मेरे बगल में चल रही थी—टी-शर्ट में, शॉर्ट में, बाल आगे लटके हुए।
उसकी पायल हर कदम पर हल्की सी बज रही थी।
मैंने उसका हाथ पकड़ा—थोड़ा सख्ती से, जैसे कह रहा हूँ "तुम मेरे साथ हो"।
जैसे ही हम कॉरिडोर में निकले, असर दिखना शुरू हो गया।
एक कपल चेक-इन कर रहा था—शायद नए आए होंगे।
लड़के की नज़र नेहा पर पड़ी।
वो एक सेकंड के लिए भूल गया कि मुँह बंद करना है।
उसकी आँखें फैल गईं—नेहा की टी-शर्ट के नीचे उभरे हुए निप्पल्स, शॉर्ट से निकलती जांघें, उसकी चाल... सब कुछ।
उसकी बीवी ने उसे कोहनी मारी, लेकिन वो अभी भी देख रहा था।
मैंने मुस्कुराया—अंदर से एक अजीब सा गर्व और जलन दोनों महसूस हो रहा था।
नेहा 25-26 की लग रही थी—फ्रेश, जवान, परफेक्ट।
और मैं... 35-36 का।
ये एज गैप लोगों को हमेशा अट्रैक्ट करता है—खासकर मर्दों को।
लॉबी में और कुछ लोग थे।
कुछ मर्दों की नज़रें नेहा पर टिक गईं।
एक ने तो सीधे उसके स्तनों की तरफ देखा—फिर जल्दी से नज़र हटाई।
नेहा ने खुद को चेक किया—बार-बार अपनी टी-शर्ट की तरफ देखा, जैसे देख रही हो कि निप्पल्स तो नहीं दिख रहे।
उसने बाल और आगे कर लिए—लेकिन वो उभार अभी भी थोड़ा सा दिख रहा था।
हम लिफ्ट में गए।
लिफ्ट खुली।
हम ब्रेकफास्ट हॉल की तरफ बढ़े।
मैं और नेहा ब्रेकफास्ट हॉल में एंट्री लेते ही वो नया वेटर हमें देखकर रुक गया।
ट्रे हाथ में थी, लेकिन उसकी आँखें हमें स्कैन कर रही थीं—खासकर नेहा को।
उसने धीरे से बगल वाले दूसरे वेटर के कान में कुछ फुसफुसाया।
दोनों ने एक साथ हमें देखा, फिर एक-दूसरे की तरफ मुड़कर मुस्कुराए—वो मुस्कान... वो रहस्य वाली मुस्कान, जो कह रही थी "ये वही है"।
मेरा दिल एक बार फिर धड़क गया।
कल रात वाला वेटर नहीं था ये, लेकिन उसकी बात याद आ गई—
"हम पाँच थे... सब स्टाफ... उसकी पैंटी के साथ खेला..."
क्या ये लोग भी उनमें से हैं?
क्या ये वही पाँच में से कोई हैं?
क्या कल रात के बाद ये लोग नेहा की पैंटी के बारे में बात कर रहे हैं?
या... शायद आज सुबह नेहा को टी-शर्ट में देखकर फिर से वही "खेल" याद आ रहा है?
मेरा लुंड... जो कल रात ने इतना परफॉर्म किया था—शेप और साइज़ के बावजूद—अब फिर से हल्का सा फड़क उठा।
शर्मिंदगी थी, जलन थी, लेकिन साथ ही एक अजीब सा गर्व भी।
शेप छोटा था, साइज़ एवरेज था, लेकिन परफॉर्मेंस... वो मेरी थी।
मैं और नेहा बफे काउंटर की तरफ बढ़े।
मेरी आँखें अब हर तरफ घूम रही थीं—अलोक को ढूँढ रही थीं, विशाल और डेविड को, सबसे ज़्यादा सैंडी को।
मैं चाहता था कि वो दिखे—उसकी ड्रेस, उसकी चाल, वो हॉट लुक जो कल रात था।
मैं चाहता था कि नेहा की तरफ देखकर वो सब जलें—कि मेरे पास जो है, वो सैंडी से बेहतर है।
लेकिन... कोई नहीं दिखा।
न अलोक की टेबल पर वो मुस्कान।
न विशाल-डेविड की हँसी।
न सैंडी की वो सेक्सी ड्रेस।
हॉल में बस नॉर्मल फैमिलीज़, कपल्स, कुछ टूरिस्ट्स।
मैंने ट्रे उठाई।
नेहा मेरे साथ थी—उसकी पायल हर कदम पर बज रही थी।
हम काउंटर पर गए।
पहले कॉफी—दो कप।
फिर पास्ता—थोड़ा सा, रेड सॉस वाला।
फिर पोहा—हल्का मसालेदार।
मिसल पाव—थोड़ा सा, चटनी के साथ।
फिर डोसा—प्लेन, सांभर और चटनी के साथ।
हम दोनों ने छोटे-छोटे पोर्शन लिए—जैसे बच्चे हों, सब कुछ ट्राई करना हो।
हम ब्रेकफास्ट हॉल में एक टेबल पर बैठ गए—विंडो वाली, बाहर का व्यू दिख रहा था।
नेहा ने ट्रे रखी, मेरे सामने बैठ गई।
उसकी टी-शर्ट अभी भी थोड़ी टाइट थी—बाल आगे लटके हुए थे, लेकिन जब वो झुकी तो निप्पल्स का उभार और साफ़ हो गया।
वो खुद को चेक करती रही—हाथ से टी-शर्ट को हल्का सा खींचती, जैसे डर रही हो कि कहीं ज़्यादा न दिख जाए।
मैंने प्लेट में से पोहा उठाया, लेकिन खाने का मन नहीं था।
मेरा चेहरा थोड़ा उदास हो गया था—आपने देख लिया होगा।
दिमाग दो हिस्सों में बँटा हुआ था, जैसे कोई युद्ध चल रहा हो।
एक हिस्सा डर रहा था।
बहुत डर रहा था।
क्या होगा अगर सैंडी यहाँ आ गई?
अगर वो दौड़कर मेरे पास आई और गले लग गई?
"सैम... लास्ट नाइट अमेजिंग था... क्यों चले गए? मैं चाहती थी कि तुम्हारा लुंड मेरी चूत में हो..."
या फिर वो सबके सामने खुलकर कह दे—"कल रात के बाद हमने कितना मज़ा किया... तुम्हारे जाने के बाद..."
मेरा दिल धड़क रहा था।
मैंने नेहा की तरफ देखा—वो पोहा खा रही थी, मुस्कुरा रही थी।
वो कुछ नहीं जानती थी।
दूसरा हिस्सा... वो ठंडा, लॉजिकल हिस्सा... कह रहा था—
"ये प्रोफेशनल हैं।
अलोक जानता है कैसे बिहेव करना है।
सैंडी जानती है लिमिट्स।
वो कभी ऐसा नहीं करेंगे।
वो सबके सामने एक्ट करेंगे जैसे मुझे पहली बार देख रहे हैं।
कोई स्कैंडल नहीं... कोई ड्रामा नहीं।
बस... हाय-हैलो... और बस।"
नेहा ने मेरी तरफ देखकर मुस्कुराते हुए कहा,
"बेबी... चटनी ला देंगे ना?
दोसे के साथ भूल गई थी।"
मैंने हल्के से मुस्कुराया।
"जी... अभी लाता हूँ।"
उठा, ट्रे पर प्लेट रखी, और काउंटर की तरफ बढ़ा।
दोसे वाले काउंटर पर हमेशा लाइन लगी रहती है—आज भी वैसा ही था।
5 मिनट लग गए—लाइन धीमी थी, लोग ज्यादा थे।
मैंने पीछे मुड़कर अपनी टेबल की तरफ देखा।
नेहा अब अकेली नहीं थी।
उसके सामने अलोक बैठा था।
वो हँस रही थी—हल्के से, लेकिन सच्ची हँसी।
अलोक कुछ जोक सुना रहा था—उसकी मुस्कान वैसी ही थी, वही कंट्रोल्ड, वही जानकार वाली।
नेहा ने बाल कंधे पर डाले हुए थे, लेकिन जब हँसी तो टी-शर्ट थोड़ी सी सरकी—निप्पल्स का उभार और साफ़ हो गया।
अलोक की नज़र वहाँ गई—एक सेकंड के लिए।
फिर वो फिर से हँसा—जैसे कुछ हुआ ही न हो।
मेरा दिल एक बार फिर धड़क गया।
लाइन में खड़े-खड़े भी मेरी आँखें उन पर टिकी रही।
वो हँस रही थी।
उसकी पूरी बॉडी हिल रही थी—कंधे, कमर, स्तन—सब कुछ।
टी-शर्ट के नीचे उसके छोटे लेकिन परफेक्ट शेप के स्तन हिल रहे थे, ब्रा नहीं होने की वजह से वो हर हँसी के साथ ऊपर-नीचे उछल रहे थे।
जब वो हँसती, तो वो उछलते—एक बार ऊपर, एक बार नीचे।
अलोक की आँखें वहाँ टिकी हुई थीं—एक सेकंड के लिए
लेकिन मैं जानता था—वो देख रहा था।
उसकी वो नज़र... वो वाली नज़र जो "माल" को नापती है।
अलोक... वो बस मुस्कुरा रहा था।
वो वाला आदमी जो हर औरत को "माल" समझता है।
जो मानता है कि औरतें खेलने के लिए हैं—कुतिया की तरह।
जो कल रात सैंडी को रंडी की तरह इस्तेमाल कर रहा था।
और अब... मेरी नेहा उसके सामने हँस रही थी।
मेरा दिमाग
एक तरफ वो आवाज़ थी जो मुझे हमेशा से जानती थी — वो आवाज़ जो कह रही थी:
“सैम, ये गलत है।
तुम अलोक जैसे आदमी को अपनी औरत के सामने नहीं लाते।
तुम उसे बचाते हो।
तुम्हारा काम है नेहा को उन नज़रों से दूर रखना जो उसे ‘माल’ समझती हैं।
तुमने खुद देखा है कि अलोक क्या सोचता है औरतों के बारे में।
वो सैंडी को भी सिर्फ़ एक खिलौना समझता है।
अगर तुम नेहा को उसके सामने ले गए तो तुम खुद उसे ख़तरे में डाल रहे हो।
तुम उसकी रक्षा करने वाले हो, न कि उसका शोकेस।”
लेकिन मेरी नज़रें बार-बार अलोक की टेबल की तरफ जा रही थीं।
मैं खुद से पूछ रहा था — “सैम, तुझे क्या हो रहा है?”
कल रात जब अलोक सैंडी को रफ तरीके से चोद रहा था, मेरे दिमाग में बार-बार नेहा आ रही थी।
उसके बाल खींचे हुए, उसकी गांड पर थप्पड़ मारते हुए, उसकी चूत में जोर-जोर से धकेलते हुए।
नेहा की आहें... “आह्ह... और जोर से...”
उसके छोटे-छोटे स्तन हिल रहे हैं, निप्पल्स सख्त, चेहरा पसीने से तर, आँखें आधी बंद।
ये कल्पना मुझे इतना थ्रिल दे रही थी कि मेरा लुंड फिर से हार्ड हो गया था।
वो पुराना वाला थ्रिल.... वो फिर से जाग उठा था।
मैं नहीं समझ पा रहा था कि ये क्यों हो रहा है।
मैं चटनी लेकर जल्दी-जल्दी टेबल की तरफ बढ़ा।
दिमाग में अभी भी वो सवाल घूम रहा था—अलोक वहाँ क्यों बैठा है?
क्यों नेहा उसके साथ हँस रही है?
क्यों वो इतनी सहज लग रही है?
जैसे ही मैं पास पहुँचा, आवाज़ें और साफ़ सुनाई दीं।
"ओह्ह... स्टॉप इट..."
नेहा की आवाज़ थी—हँसी मिक्स कराह वाली।
उसने अलोक के हाथ को टेबल पर हल्का सा थप्पड़ मारा।
लेकिन उसकी आँखें चमक रही थीं।
वो खुश थी।
बहुत खुश।
अलोक मुस्कुरा रहा था—वो वाली मुस्कान, जो कल रात सैंडी को देखते हुए था।
60 साल का आदमी... लेकिन उसकी आँखों में वही भूख।
वही क्रूर चमक।
नेहा को वो "हानलेस" लग रहा था शायद... उम्र की वजह से।
लेकिन मैं जानता था—वो हानलेस नहीं है।
वो ख़तरनाक है।
मैं टेबल पर पहुँचा।
ट्रे हाथ में थी।
नेहा ने मुझे देखा।
"बेबी... ये..."
वो नाम याद करने की कोशिश कर रही थी।
अलोक ने बीच में ही बात काट दी।
"मैंने अभी तक अपना नाम नहीं बताया था।"
टेबल 4-सीटर सोफा वाली थी—दो इस तरफ, दो उस तरफ, आमने-सामने।
मेज बीच में।
मैंने नेहा की तरफ देखा।
उसे इशारा किया कि थोड़ा सा शिफ्ट हो जाए ताकि मैं उसके बगल में बैठ सकूँ।
नेहा ने तुरंत अपनी गांड थोड़ी साइड की।
मैं बैठ गया।
लेकिन जैसे ही मैं बैठा... मेरी गांड नेहा की लंबी टी-शर्ट पर
टी-शर्ट पीछे खिंच गई।
कपड़ा तान गया।
उसके स्तन अब और साफ़ उभर आए—टी-शर्ट के पतले कपड़े पर निप्पल्स पूरी तरह दिखाई दे रहे थे।
गोल, सख्त, हल्के से उभरे हुए।
अलोक की नज़रें वहाँ टिक गईं—एक सेकंड के लिए।
फिर वो फिर से मुस्कुराया—जैसे कुछ हुआ ही न हो।
नेहा ने खुद को थोड़ा एडजस्ट किया।
शर्म से टी-शर्ट को आगे खींच लिया—कपड़ा अब थोड़ा ढीला हो गया, निप्पल्स का उभार कम दिखने लगा।
वो बालों को और आगे कर रही थी, जैसे और छुपाना चाहती हो।
मैंने ट्रे टेबल पर रखी।
चटनी नेहा के सामने सरकाई।
फिर बैठ गया—उसके बगल में।
मैंने अलोक की तरफ देखा।
धीरे से मुस्कुराकर कहा,
"बाय द वे... मैं सैम।"
अलोक ने कॉफी का घूँट लिया।
फिर हाथ बढ़ाया—फर्म, लेकिन दोस्ताना।
"अलोक।"
नेहा ने हल्के से हँसकर कहा,
"नेहा।"
अलोक ने हमें दोनों को देखा—एक गहरी, संतुष्ट मुस्कान के साथ।
"बहुत क्यूट कपल हो तुम दोनों।
मैं अभी नेहा से कह रहा था... कल रिसेप्शन पर मुझे लगा था कि वो एजेंसी से हैं।"
मैंने तुरंत स्नैप किया—आवाज़ में थोड़ा तेज़ी आ गई।
"एजेंसी?"
नेहा ने मेरी तरफ देखा—उसकी आँखें अभी भी हँसी से चमक रही थीं।
वो थोड़ा आगे झुकी, आवाज़ में वही मासूमियत।
"बेबी... मैंने आपको बताया था ना कल... एक अंकल आए थे, पूछ रहे थे कि क्या मैं एजेंसी से हूँ।
याद है?"
नहीं।
उसने मुझे बताया ही नहीं था।
शायद इसलिए कि उसके लिए ये कोई बड़ी बात नहीं थी।
मैंने धीरे से कहा—आवाज़ में थोड़ी सी हल्की सी काँप।
"नहीं... तुमने बताया नहीं था।"
नेहा की आँखें थोड़ी चौड़ी हो गईं।
"अरे... सच में?
मुझे लगा था मैंने आपको बता दिया था।
अलोक मुस्कुरा रहा था।
उसकी वो मुस्कान—वही पुरानी वाली, जो कल रात सैंडी को देखते हुए थी।
लेकिन अब वो मुस्कान मेरी तरफ थी।
और उसमें एक अलग सा मज़ा था।
जैसे वो सोच रहा हो—“देख... तेरी बीवी कितनी मासूम है।
उसे पता ही नहीं कि 'एजेंसी' से हम क्या मतलब ले रहे हैं।
वो खुश है... हँस रही है... और सोच रही है कि ये बस एक मज़ाक था।”
उसने मेरी तरफ देखा और बोली,
"बेबी... अलोक सर कह रहे थे कि वो पास में ही एक नया होटल लॉन्च कर रहे हैं।
और उसके लिए कमर्शियल शूट हो रहा है... तो एजेंसी ने कुछ सुपरमॉडल भेजे हैं।
और वो सोच रहे थे कि मैं भी उनमें से हूँ!"
अलोक ने हल्के से मुंह बनाया—एक मासूम, लेकिन जानबूझकर वाली मुस्कान।
"रियली... तुम सच में एक लगती हो।"
उसकी आवाज़ में कोई शरारत नहीं थी—बस एक ईमानदार गलती की तरह।
लेकिन मैं जानता था—वो जानबूझकर कह रहा था।
वो जानता था कि नेहा क्या समझेगी।
और नेहा ने ठीक वैसा ही समझा।
वो हँसी—खुशी से, बिना किसी शक के।
"ओह्ह... आप तो बड़े फ्लर्ट रहे होंगे जवानी में!"
उसने फिर से अलोक के हाथ पर हल्का सा थप्पड़ मारा।
उसका हाथ अलोक के हाथ से छू गया—बस एक सेकंड के लिए।
लेकिन मेरे लुंड ने तुरंत रिएक्ट किया।
एक झटका लगा—जैसे बिजली का करंट।
मेरा लुंड पैंट के अंदर फड़क उठा।
हम दोनों अब पूरी तरह से अजनबी की तरह बिहेव कर रहे थे—जैसे कल रात कभी हुआ ही न हो।
मैंने हॉल में नज़रें घुमाईं—विशाल, डेविड, सैंडी... कोई नहीं था।
बस अलोक अकेला बैठा था—कॉफी का कप हाथ में, वही मुस्कान।
नेहा ने मुझे कोहनी से हल्का सा धक्का दिया।
"सैम... थोड़ा शिफ्ट हो जाइए ना... मुझे कुछ और लेना है बफे से।"
उसकी आवाज़ में वही प्यार था—नरम, लेकिन थोड़ी जल्दी वाली।
मैंने हल्के से सिर हिलाया।
उठा—उसके लिए जगह बनाई।
मैंने नेहा को देखा—वो अब बफे काउंटर की तरफ जा रही थी।
उसकी चाल... धीमी, लेकिन ग्रेसफुल।
उसकी गांड हल्के से हिल रही थी—शॉर्ट के नीचे से उसकी जांघें चमक रही थीं
अलोक देखता रहा... और मेरे लुंड में फिर से वो हल्का सा फड़क उठा।
अलोक ने मेरी तरफ देखा।
उसकी मुस्कान अब पहले से ज़्यादा गहरी थी।
वो धीरे से बोला—आवाज़ में अब वो पुरानी वाली दोस्ताना टोन नहीं थी।
अब उसमें एक तरह की अथॉरिटी थी—जैसे वो मालिक हो, और मैं उसका छोटा-सा साथी।
"तो बॉय... थोड़ी नींद आई?"
मैंने सिर हिलाया।
"येस... थोड़ी।"
उसकी आवाज़ में अब वो "बॉय" शब्द था—जो कल रात से ही चल रहा था।
कल रात तो मैंने इसे इग्नोर कर दिया था... लेकिन अब... अब ये शब्द मेरे सीने में चुभ रहा था।
अलोक ने कॉफी का कप टेबल पर रखा।
उसकी मुस्कान अब और गहरी हो गई थी—वो वाली मुस्कान जो कल रात सैंडी को देखते हुए थी।
वो धीरे से बोला, आवाज़ में एक थकी लेकिन संतुष्ट टोन।
"हम तो एक पल भी नहीं सोए... पूरी रात खेलते रहे।"
उसने आँख मारी—एक छोटी, शरारती विंक।
मैंने हल्के से सिर हिलाया।
"सब कहाँ हैं?"
मेरा सवाल सीधा था।
लेकिन असल में... मैं सिर्फ़ एक ही चेहरे को ढूँढ रहा था।
सैंडी।
उसकी ड्रेस... उसकी चाल... उसकी वो हँसी... उसकी वो बॉडी जो कल रात कम से चमक रही थी।
डेविड और विशाल?
उनको देखने की कोई ख्वाहिश नहीं थी।
उनको देखकर क्या फायदा?
अलोक ने कॉफी का आखिरी घूँट लिया और धीरे से बोला—आवाज़ में थकी लेकिन संतुष्ट वाली टोन।
"वो तीनों सो रहे हैं... नाप ले रहे हैं... एक लगभग गीली, गंदी बेड पर।"
मैंने एक पल के लिए रुक गया।
गंदी बेड?
कल रात... जब मैं गया था... तो वेटर ने नई चादरें बिछाई थीं।
फ्रेश, सफेद, क्रिस्प।
फिर कैसे गंदी हो गई?
कैसे गीली हो गई?
फिर सब साफ़ हो गया।
मैंने कल्पना की—सैंडी... वो परफेक्ट बॉडी वाली मॉडल... टीवी पर "हमारा नया घर" वाली ब्राइड... वो अब एक गंदी, गीली चादर पर लेटी हुई है।
उसके दोनों तरफ दो पुराने, गंदे आदमी—शायद डेविड और विशाल।
उनका पसीना, उनका कम, उनकी साँसें... सब उसकी स्किन पर चिपका हुआ।
उसकी जांघें उनके जांघों से सटी हुईं।
उसके स्तन उनके सीने से दबे हुए।
उसकी कमर पर उनका हाथ—भारी, गंदा, मालिक वाला।
अलोक ने कॉफी का आखिरी घूँट लिया और धीरे से कप टेबल पर रखा।
उसकी आँखें अभी भी नेहा की तरफ थीं—वो बफे काउंटर पर थी, फ्रूट्स ले रही थी, उसकी चाल में वही ग्रेस, पायल की हल्की आवाज़।
अलोक ने मेरी तरफ देखा, मुस्कान अब और गहरी हो गई।
"मैं भी सोना चाहता हूँ... एक और रूम बुक कर रखा है होटल में... लेकिन पता है ना... तुमने वादा किया था।
तो मैंने सोचा... कॉफी पी लूँ... और थोड़ा तुम्हें देख लूँ।"
वो रुका, फिर धीरे से बोला—आवाज़ में एक थकी लेकिन संतुष्ट टोन।
"लेकिन वर्थ था... बहुत वर्थ था।"
फिर उसने मेरी आँखों में देखा—सीधे, बिना झिझक।
"बॉय... वो परफेक्ट है।
उसका फिगर... उम्र... बात करने का तरीका... चलने का अंदाज़... सब कुछ परफेक्ट।
काश... वो भी खरीदी जा सकती।"
उसने हल्के से हँसा—एक गहरी, कड़वी हँसी।
मैंने तुरंत चारों तरफ देखा—नेहा काउंटर पर थी, अभी भी दूर।
वो नहीं सुन रही थी।
मेरा दिल धड़क रहा था।
गुस्सा... शर्म... जलन... सब एक साथ।
मैं उसकी "रक्षक" हूँ—उसकी बीवी का।
और ये आदमी... ये 60 साल का "अंकल"... मेरे सामने बैठा मेरी बीवी को "खरीदा जा सकता" कह रहा है।
अलोक की आवाज़ अब पहले से अलग थी।
कल रात तक वो "बॉय" कहकर भी बात करता था—दोस्ताना, थोड़ा मज़ाकिया, लेकिन सम्मान के साथ।
लेकिन अब... अब उसकी आवाज़ में एक कड़वाहट थी।
एक हल्की सी तीखी धार।
वो कॉफी का कप टेबल पर रखकर मेरी तरफ झुका—आँखों में थोड़ा सा लालपन, थकान, और शायद... थोड़ी सी जलन।
"इस तरह की औरतें रेयर ब्रीड होती हैं, बॉय...
शादी के लिए नहीं बनी होतीं।
तुम उनकी कैलिबर को वेस्ट कर रहे हो... मज़े के लिए।
और वो भी... तुम्हारे एवरेज टूल से।"
पहली बार।
पहली बार उसने मुझे डाउन किया।
कल रात तक वो मुझे "लकी" कह रहा था।
कल रात तक वो नेहा को "परफेक्ट" कह रहा था।
लेकिन अब... "एवरेज टूल"।
ये शब्द सीधे मेरे लुंड पर चोट कर गया।
मैंने कल रात महसूस किया था—मेरा लुंड छोटा था, साइज़ एवरेज था, लेकिन परफॉर्मेंस... वो मेरी थी।
और अब... ये आदमी... ये 60 साल का "अंकल"... मुझे "एवरेज" कह रहा था।
मैं चुप रहा।
मेरा चेहरा सख्त हो गया।
मेरा लुंड... अभी भी हार्ड था।
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हम ब्रेकफास्ट हॉल से निकले।
नेहा मेरे साथ चल रही थी—उसका हाथ मेरे हाथ में
वो बात कर रही थी—जैसे हमेशा करती है।
"सैम... कॉफी कैसी थी?
"और दोसा?
वो वाला मसालेदार वाला... बहुत अच्छा था ना?
मैंने हल्के से "हम्म..." कहा।
मुझे तो चटनी सबसे अच्छी लगी।"
मैंने फिर "हाँ..." कहा।
मेरा दिमाग कहीं और था।
मैं उसके साथ था... लेकिन नहीं था।
वो मेरे साथ चल रही थी.... लेकिन मैं... मैं अभी भी कल रात के कमरे में था।
सैंडी की आहें... अलोक... वेटर ... और वो "सूट नंबर 502"।
हम कमरे में पहुँचे।
मैंने दरवाज़ा खोला।
वो मेरी तरफ मुड़ी, मुस्कुराई।
"सैम... आप आज बहुत चुप हैं।
कुछ हुआ है क्या?"
मैंने कहा,
"नहीं... बस... थकान है।
मैं वॉशरूम जा रहा हूँ... फ्रेश होकर आता हूँ।"
मैंने वॉशरूम में 10-15 मिनट लगा दिए।
ठंडा पानी मुंह पर मारा, चेहरा पोंछा, बालों को सुलझाया
दरवाज़ा खुलते ही नेहा बालकनी के दरवाज़े पर खड़ी दिखी।
वो अंदर आ रही थी—हाथ से इशारा कर रही थी—उँगली होंठों पर, बार-बार "श्श्श..." का जेस्चर।
उसकी आँखें चमक रही थीं—एक्साइटमेंट से।
वो छोटे-छोटे स्टेप्स ले रही थी, हाथ हवा में नाचते हुए, जैसे कोई बच्ची कोई राज़ छुपा रही हो।
उसकी टी-शर्ट अभी भी वैसी ही थी—थोड़ी तनी हुई, बाल आगे लटके हुए।
वो मेरे पास आई।
फिर से उँगली होंठों पर।
"श्श्श..."
फिर हाथ से इशारा—बालकनी की तरफ।
फुसफुसाई—बहुत धीरे, लेकिन एक्साइटमेंट से भरी।
"सैम... पास वाले बालकनी में... एक सेलिब्रिटी है।"
मैंने भौंहें उठाईं।
"कौन?"
वो फिर से उँगली होंठों पर।
फिर पर्दा थोड़ा सा सरकाया—बस इतना कि हम दोनों देख सकें।
बालकनी माउंटेन फेसिंग थी—सामने पहाड़, दूर एक सड़क, और बीच में हवा।
दूसरी बालकनी थोड़ी दूर थी—लेकिन खिड़की से साफ़ दिख रही थी।
वो फुसफुसाई,
"देखिए... वो... वो लड़की... वो मॉडल
मैंने देखा।
सैंडी बालकनी में खड़ी थी।
उसने सिर्फ़ एक पुरुष वाली शर्ट पहनी हुई थी—बड़ी, ढीली, शायद अलोक की या डेविड की।
बटन सिर्फ़ 3-4 लगे थे—ऊपर से खुली हुई, नीचे से भी हवा में लहरा रही थी।
उसके बाल हवा में उड़ रहे थे—कुछ चेहरे पर चिपक रहे थे, कुछ हवा में नाच रहे थे।
वो फ्रेश लग रही थी—जैसे अभी नहाकर निकली हो।
सिगरेट होंठों पर थी—धीरे-धीरे कश ले रही थी, धुआँ हवा में उड़ता हुआ।
हवा का एक झोंका आया।
शर्ट पीछे उड़ गई।
उसके स्तन आधे दिख गए—गोल, भारी
उसकी गुलाबी पैंटी साफ़ दिख गई—टाइट, पतली, जांघों के बीच में चिपकी हुई।
उसकी जांघें—लंबी, चिकनी, अभी भी थोड़ी लाल, शायद कल रात के थप्पड़ों से।
वो कुछ भी नहीं लग रही थी जैसी मैंने कल रात देखी थी।
कल रात वो एक रंडी थी—कम से ढकी हुई, आहें भरती हुई, चारों तरफ से भरी हुई।
आज... वो एक डिसइरेबल औरत थी।
एक ऐसी औरत जिसे कोई भी देखकर चाहे।
एक ऐसी औरत जिसे देखकर मन करता है कि वो मेरी हो।
मैं नेहा के ठीक पीछे खड़ा था।
मैंने धीरे से उसके कान में पूछा,
"तुम जानती हो उसे?
कौन है ये?
नेहा ने पीछे मुड़कर मुझे देखा—उसकी आँखें चमक रही थीं।
फुसफुसाई,
"अरे... वो फेमस है... नाम नहीं पता... लेकिन मेरे इंस्टा फीड पर बार-बार आती है।
कई बार स्क्रॉल करते हुए रुक जाती हूँ उसकी फोटोज़ पर।"
"रियली...?"
मैंने फिर सैंडी की तरफ देखा।
वो अब रेलिंग पर झुक रही थी—शर्ट पीछे उड़ गई, पैंटी पूरी दिख रही थी।
उसकी जांघें चमक रही थीं।
वो कुछ नहीं जानती थी कि हम उसे देख रहे हैं।
वो बस खुश थी।
नेहा ने पीछे मुड़कर मुझे देखा।
उसकी गांड पर मेरा हार्ड लुंड महसूस करके वो मुस्कुराई—एक छोटी, शरारती मुस्कान।
हम दोनों की शादी को अभी छह महीने ही हुए थे।
और इन छह महीनों में एक बात कभी नहीं हुई—जलन।
न मैं कभी नेहा से जलता था, न वो मुझसे।
हम दोनों एक-दूसरे को पूरी आज़ादी देते थे।
मॉल में घूमते हुए अगर कोई लड़की अच्छी लगती, वो मुझे कोहनी मारकर फुसफुसाती,
"देखो ना... तुम्हारे दाएँ तरफ... वो रेड वाली... कितनी अच्छी लग रही है ना?"
वो मुस्कुराती, मेरे हाथ में हाथ डालती और हम आगे बढ़ जाते।
कभी कोई लड़ाई नहीं।
कभी कोई "तुम उसे क्यों देख रहे थे?" नहीं।
हम दोनों एक-दूसरे पर भरोसा करते थे—पूरा, बिना किसी शक के।
हम दोनों कभी भी फोन पर कुछ इरोटिक देखने से शर्माते नहीं थे।
शादी के छह महीने में ये हमारा छोटा-मोटा रूटीन बन चुका था—रात को लाइट्स ऑफ, बेड पर लेटे हुए, नेहा मेरे सीने से चिपकी हुई, फोन मेरे हाथ में।
कभी कोई वीडियो हम साथ देखते।
कभी-कभी हम हँसते भी थे।
"अरे ये क्या... वॉशिंग मशीन में इतनी देर तक ये कैसे अटकी रह सकती है, और इससे पता नहीं चला की इसका स्टेप सन इसकी पीछे से ले गया ! "
फिर वो धीरे से मेरी कमर पर हाथ रखती, और हम दोनों... बस... शुरू हो जाते।
पॉर्न सिर्फ़ बैकग्राउंड बन जाता—हमारा अपना मज़ा ज़्यादा हॉट होता।
तो जब सैंडी मेरे सामने इस तरह खड़ी थी—बालकनी में, लगा जैसे कोई सॉफ्ट पॉर्न चल रहा हो।
हम दोनों बालकनी की खिड़की से सैंडी को देखते रहे।
5 मिनट हो चुके थे।
नेहा मेरे ठीक पीछे खड़ी थी—उसका बदन मेरे बदन से सटा हुआ, उसकी साँसें मेरी गर्दन पर गर्म लग रही थीं।
वो बार-बार फुसफुसा रही थी—एक्साइटमेंट से भरी, लेकिन बहुत धीमी आवाज़ में।
"अरे... वो वाली टीवी कमर्शियल वाली... याद है ना?
'हमारा नया घर' वाला... सिंदूर लगाकर साड़ी में मुस्कुराती हुई।
और इंस्टा रील्स पर भी आती है... ट्रैवल वाली... बीच पर बिकिनी में..."
मैं सुन रहा था... लेकिन मेरा पूरा ध्यान सैंडी पर था।
मेरा लुंड... पहले से ही हार्ड था।
अब मैंने धीरे-धीरे अपनी कमर हिलानी शुरू की।
मेरा लुंड उसकी गांड पर रगड़ रहा था—धीमे, गहरे स्ट्रोक्स।
पैंट के ऊपर से... लेकिन दबाव बहुत था।
नेहा ने महसूस किया।
तभी सैंडी पलटी।
अब उसकी पीठ बालकनी की रेलिंग पर थी।
वो कोहनियों के बल झुकी हुई थी—शर्ट पीछे सरक गई, स्तन आधे से ज़्यादा खुले।
हवा का झोंका आया—शर्ट और ऊपर उड़ गई।
उसकी गुलाबी पैंटी अब पूरी दिख रही थी—टाइट, पतली, और... ट्रायंगल थोड़ा सूजा हुआ था।
क्लिट की हल्की सी उभार
उसकी जांघें फैली हुईं—चमकती हुई, थोड़ी लाल, शायद कल रात के निशान।
वो अब और परफेक्ट दिख रही थी
हम दोनों खिड़की से सैंडी को देखते रहे।
कोई शब्द नहीं।
बस साँसें—हमारी तेज़, गर्म।
मेरा कमर धीरे-धीरे हिल रहा था—मेरा लुंड उसकी गांड पर रगड़ रहा था, पैंट के ऊपर से, लेकिन गहराई से।
मेरी दाहिनी उँगलियाँ नेहा के शॉर्ट के बटन पर गईं।
एक हल्का सा क्लिक।
बटन खुल गया।
मैंने धीरे से शॉर्ट को नीचे सरकाया—उसकी जांघों से, घुटनों तक।
वो खुद थोड़ा सा ऊपर उठी—शॉर्ट नीचे सरक गया।
अब सिर्फ़ पैंटी।
उसकी पैंटी—सफेद, थोड़ी गीली।
मेरी उँगलियाँ सीधे उसकी क्रॉच पर गईं।
पैंटी के ऊपर से रगड़ना शुरू किया—धीमे, गोल-गोल।
उसकी क्लिट पर हल्का सा दबाव।
उसकी साँसें रुक गईं।
फिर तेज़ हो गईं।
मैंने नेहा की गर्दन पर होंठ रख दिए।
धीरे से किस करना शुरू किया
सब कुछ इतना इरोटिक था कि लग रहा था जैसे कोई सॉफ्ट पॉर्न चल रहा हो—सिर्फ़ हम दोनों के लिए।
बालकनी से सैंडी की वो लहराती शर्ट, उसकी गुलाबी पैंटी का झलकना, हवा में उसके बालों का नाचना... सब कुछ एक लाइव शो की तरह।
मैं अक्सर मजाक करता था—
"चलो कभी स्ट्रिप क्लब चलें... कंट्री लीगल वाले... देखेंगे असली मज़ा।"
नेहा हर बार हँसकर टाल देती।
"अरे... क्या मज़ा... सब तो टीवी और इंटरनेट पर देख सकते हैं।
क्या फर्क पड़ता है?"
मैं कहता—"रियल अलग होता है... वो थ्रिल... वो स्मेल... वो एनर्जी..."
वो हँसकर कहती—"नॉट इंटरेस्टेड।"
लेकिन आज... आज वो देख रही थी।
रियल।
लाइव।
वो महसूस कर रही थी कि रियल में कितना फर्क है।
उसकी साँसें तेज़ हो रही थीं।
उसकी गांड मेरे लुंड पर और दब रही थी।
तभी... अचानक... सैंडी की हँसी की आवाज़ आई।
जोरदार।
हँसी नहीं... हँसी का धमाका।
वो हँस रही थी—जैसे कोई बहुत हास्यास्पद बात हुई हो।
उसकी हँसी इतनी तेज़ थी कि हम दोनों चौंक गए।
हमने देखा।
सैंडी अब रेलिंग पर पीठ टिकाए खड़ी थी।
जोर-जोर से, पेट पकड़कर।
फिर... एक पल में... हम समझ गए।
एक आदमी बालकनी में आया—छोटे से अंडरवियर में।
पेट बड़ा, बालों से भरा हुआ—जैसे कोई भालू।
उसने एक फैंसी गॉगल पहन रखा था—महिला वाला, शायद सैंडी का ही।
वो पोज़ बना रहा था—हाथ कमर पर, छाती फुलाकर, गॉगल पर हाथ फेरते हुए।
"कैसा लग रहा हूँ?" वाला जेस्चर।
सैंडी हँसते-हँसते झुक गई।
उसकी हँसी रुक नहीं रही थी।
मैंने तुरंत पहचान लिया।
डेविड।
वही डेविड—जो कल रात सैंडी को रफ तरीके से चोद रहा था।
वही डेविड—जो "भेनचोद" कहकर थप्पड़ मार रहा था।
वही डेविड—जो अब अंडरवियर में, भालू जैसा, महिला गॉगल पहनकर पोज़ बना रहा था।
नेहा ने मेरी तरफ देखा—उसकी आँखें बड़ी-बड़ी, कन्फ्यूज़।
फुसफुसाई,
"ये... ये कौन है?
क्या हो रहा है?"
उसकी आवाज़ में उत्सुकता थी ।
मैंने एक फेस बनाया—कंधे उचकाए, होंठों को थोड़ा सा सिकोड़ा, जैसे कह रहा हूँ "पता नहीं... देखते हैं क्या होता है"।
मैं खुद भी नहीं जानता था कि क्या जवाब दूँ।
क्या कहता—"वो डेविड है... कल रात वाला... जो सैंडी को रफ तरीके से चोद रहा था"?
तो मैंने बस "देखते हैं" वाला फेस बनाया।
हम दोनों फिर से खिड़की से झाँकने लगे—पर्दा थोड़ा सरका हुआ, बस इतना कि हम देख सकें, लेकिन कोई हमें न देख ले।
बालकनी का माहौल अब पूरी तरह प्लेफुल हो चुका था।
सैंडी अब रेलिंग पर पीठ टिकाए खड़ी थी
डेविड उसके सामने था
वो पोज़ बना रहा था—हाथ कमर पर, छाती फुलाकर, गॉगल पर हाथ फेरते हुए, जैसे कोई मॉडल हो।
सैंडी ने उसकी तरफ देखा।
उसने हाथ से एक सर्कल बनाया
फिर होंठों से बिना आवाज़ के बोला—बहुत साफ़, बहुत शरारती:
"वेरी हैंडसम।"
फिर वो फिर से हँस पड़ी—जोर-जोर से, पेट पकड़कर।
उसकी हँसी इतनी तेज़ थी कि बालकनी में गूंज गई।
उसकी शर्ट और ऊपर उड़ गई—स्तन आधे से ज़्यादा खुले।
वो हँसते-हँसते झुक गई—जैसे हँसी रुक नहीं रही हो।
तभी डेविड उसके बहुत करीब आ गया।
वो छोटे कद का था—मोटा पेट
सैंडी बालकनी की रेलिंग पर पीठ टिकाए झुकी हुई थी—इसलिए उसकी हाइट डेविड के पेट से मैच कर गई।
उसका पेट सैंडी के पेट से छू गया—हल्का सा, लेकिन साफ़।
डेविड ने फेक गुस्से से उसकी गाल पर थप्पड़ मारा—दो बार, हल्के से।
"नॉटी गर्ल... नॉटी गर्ल।"
अगर मैं ये सब किसी पब्लिक प्लेस में देखता—एक छोटे कद का, मोटा आदमी, अंडरवियर में, महिला गॉगल पहने
बहुत हँसता।
ये कॉमेडी थी। प्योर सिलीनेस।
लेकिन यहाँ... हमारी हँसी कहीं नहीं थी। मेरा चेहरा सख्त था।
नेहा का भी—उसकी आँखें बड़ी-बड़ी, लेकिन मुस्कान गायब।
वो अब समझ रही थी—ये कोई नॉर्मल नहीं है।
ये कुछ स्पेशल है।
मैंने कुछ नहीं कहा।
मेरा लुंड... अब रगड़ना भूल गया था।
लेकिन मेरी उँगलियाँ अभी भी नेहा की पैंटी पर थीं—धीमे, गोल-गोल।
उसकी चूत गीली थी—पैंटी पर साफ़ महसूस हो रहा था।
तभी डेविड ने सैंडी पर और ज़ोर से दबाव डाला।
वो पहले से ही रेलिंग पर पीठ टिकाए झुकी हुई थी—कोई पीछे जाने की जगह नहीं।
डेविड का बड़ा, बालों से भरा पेट सैंडी के पेट से पूरी तरह दब गया।
उसकी नंगी जांघें सैंडी की नंगी जांघों से सटी हुईं ।
दोनों आमने-सामने थे, फेस टू फेस।
मगर पेट की वजह से क्रोच एरिया मिल नहीं आ रहे थे दोनों आमने-सामने थे, फेस टू फेस।
डेविड का लुंड (अभी भी अंडरवियर में) सैंडी की जांघों के बीच दब रहा था, लेकिन पूरी तरह नहीं।
वो बस दबाव डाल रहा था—जोर से, खेल-खेल में।
सैंडी की आह निकली—प्लेफुल, लेकिन थोड़ी सी सच्ची।
"आआई... मैं गिर जाऊँगी!"
डेविड ने सैंडी की जांघों के बीच दबाने की कोशिश की, लेकिन क्रॉच एरिया नहीं मिल रहा था।
दोनों के बीच सिर्फ़ कपड़े थे—उसका छोटा अंडरवियर और सैंडी की गुलाबी पैंटी।
सैंडी की पीठ रेलिंग से और दब गई—कोई पीछे जाने की जगह नहीं।
फिर डेविड रुका।
वो पीछे हटा—बहुत थोड़ा, लेकिन इतना कि दोनों की साँसें अभी भी एक-दूसरे के चेहरे पर पड़ रही थीं।
गर्म, तेज़, भारी।
उसकी आँखें सैंडी की आँखों में टिकी हुईं।
वो धीरे से सैंडी के हाथ की तरफ बढ़ा—जिस हाथ में सिगरेट थी।
उसने सैंडी की उँगलियों से सिगरेट छीन ली।
एक गहरा कश लिया—धुआँ फेफड़ों में भर गया।
फिर सैंडी के चेहरे की तरफ झुका।
सारा धुआँ उसके चेहरे पर फूंक दिया—धीरे से, जानबूझकर।
धुआँ उसके होंठों से होकर गुज़रा, उसकी आँखों में गया, उसके बालों में उलझ गया।
सैंडी ने आँखें बंद कीं।
फिर धीरे से मुस्कुराई—एक छोटी, शरारती मुस्कान।
उसने धुआँ साँस में खींचा।
सैंडी ने डेविड की तरफ देखा।
उसकी मुस्कान अब और गहरी हो गई—एक शरारती, भूखी मुस्कान।
उसने अपने होंठों को हल्के से दाँतों से काटा—धीरे से, जानबूझकर।
फिर आँख मारी—एक छोटी, लेकिन बहुत गहरी विंक।
डेविड ने सिगरेट उसके होंठों की तरफ बढ़ाई।
सैंडी ने बिना झिझक के होंठ खोले।
डेविड ने सिगरेट उसके होंठों पर रख दी।
सैंडी ने एक गहरा कश लिया—बिना पलक झपकाए।
उसकी आँखें डेविड की आँखों में टिकी हुईं—सीधे, बिना डगमगाए।
धुआँ उसके फेफड़ों में भर गया।
उसकी छाती ऊपर उठी।
उसकी शर्ट और ऊपर सरकी—स्तन आधे से ज़्यादा खुले
वो कश खत्म हुआ।
सैंडी ने धीरे से होंठ डेविड के होंठों की तरफ बढ़ाए।
डेविड ने आगे झुका।
उनके होंठ छू गए—बहुत हल्के से, लेकिन बहुत करीब।
सैंडी ने धुआँ धीरे से उसके मुँह में छोड़ा।
डेविड ने साँस खींची—सैंडी के होंठों से।
धुआँ दोनों के चेहरों के चारों तरफ फैल गया
उनके चेहरे धुएँ में ढक गए—आँखें अभी भी एक-दूसरे में टिकी हुईं।
तभी नेहा की जांघें काँप गईं।
एक हल्का सा, लेकिन साफ़ झटका।
उसकी साँसें रुक गईं।
फिर एक गहरी, लंबी साँस।
उसकी चूत मेरी उँगलियों पर और गीली हो गई।
पैंटी पर एक गर्म लहर।
वो थरथराई—बहुत हल्के से, लेकिन मैंने महसूस किया।
एक मिनी ऑर्गेज़्म।
बस... एक छोटा सा
मैंने उसके कान में फुसफुसाया—बहुत धीरे, लेकिन चिंता से।
"आर यू ऑल राइट बेबी?"
नेहा ने मेरी तरफ नहीं देखा।
उसकी आँखें अभी भी सैंडी और डेविड पर टिकी हुईं।
उसने बस "हम्म्म..." कहा—एक लंबा, गहरा "हम्म्म..."।
मेरा एक हाथ अब नेहा की टी-शर्ट के नीचे चला गया।
ब्रालेस।
उसकी स्किन गर्म, नरम, थोड़ी सी पसीने से चिपचिपी।
मैंने धीरे से उसका एक स्तन पकड़ा—गोल, भारी, लेकिन फिट।
अंगूठे से निप्पल को हल्का सा रगड़ा—वो पहले से ही सख्त था।
नेहा की साँस रुक गई।
उसकी पीठ मेरी छाती से और दब गई।
उसकी गांड मेरे लुंड पर और गहराई से रगड़ रही थी—धीमे, लेकिन लगातार।
हम दोनों की आँखें अभी भी बालकनी पर टिकी हुई थीं।
सैंडी और डेविड...
एक 25 साल की इन्फ्लुएंसर—परफेक्ट बॉडी, टीवी कमर्शियल वाली हॉट लड़की।
और एक मोटा, बदसूरत, बालों से भरा आदमी—छोटे अंडरवियर में, पेट बाहर लटका हुआ।
फिर भी... वो दोनों ऐसे खेल रहे थे जैसे कोई क्यूट टीनएज लवर्स हों।
मैंने नेहा की पैंटी की इलास्टिक पर हाथ सरकाया।
धीरे से
उँगलियाँ कपड़े के नीचे दाखिल हुईं—स्किन गर्म, चिपचिपी।
एक हल्का सा टच... और मैं समझ गया।
वो पूरी तरह गीली थी।
सिर्फ़ गीली नहीं—जैसे पानी बह रहा हो।
उँगलियाँ चिकनी, गर्म, लिक्विड से भरी हुईं।
नेहा... मेरी नेहा... इस सब को देखकर... इतनी गीली हो गई थी।
मैंने उसकी क्लिट को पकड़ा ।
अंगूठे से हल्के से रगड़ा—गोल-गोल, धीमे लेकिन लगातार।
नेहा की साँसें रुक गईं।
उसकी जांघें काँपीं।
उसकी गांड मेरे लुंड पर और दब गई—जानबूझकर, गहरे।
मैंने उँगली नीचे ले जाने की कोशिश की—उसकी छेद की तरफ।
लेकिन इस पोज़िशन में मुश्किल था।
हम दोनों खड़े थे—मैं पीछे से, वो मेरे सामने बालकनी की तरफ देख रही थी।
तभी... बालकनी में एक और आदमी आया।
विशाल।
टी-शर्ट में, तौलिया कमर पर लिपटा हुआ।
बाल गीले—जैसे अभी नहाकर निकला हो।
उसकी टी-शर्ट तनी हुई थी—सीना चौड़ा, कंधे भारी।
वो सैंडी के दाएँ तरफ आया—बहुत करीब।
उसका कंधा सैंडी के कंधे से छू गया।
डेविड अभी भी उसके सामने था—पेट दबा हुआ, साँसें मिल रही थीं।
अब तीनों थे—सैंडी बीच में, डेविड सामने, विशाल दाएँ तरफ।
सैंडी रेलिंग पर पीठ टिकाए झुकी हुई थी—कोई पीछे जाने की जगह नहीं।
वो तीनों इतने करीब थे कि उनकी साँसें एक-दूसरे के चेहरे पर पड़ रही थीं।
शर्ट हवा में लहरा रही थी—स्तन आधे से ज़्यादा खुले।
पैंटी पूरी दिख रही थी
मुझे लग रहा था जैसे वो सब अभी फिर से तैयार हो रहे हैं।
सैंडी को।
अलोक के लिए।
अलोक ने जाते-जाते कहा था—"मैं सोने जा रहा था ... लेकिन तुम्हारी बीवी की वजह से सैंडी को आराम नहीं मिलेगा।"
अब लग रहा था वो सच था।
वो तीनों अभी भी खेल रहे थे
विशाल ने सैंडी के कंधे पर हाथ रखा—हल्का सा, लेकिन फर्म।
डेविड ने फिर से सिगरेट सैंडी के होंठों पर रखी।
सैंडी ने कश लिया—गहरा, बिना पलक झपकाए।
फिर वो विशाल की तरफ मुड़ी।
उसने सिर थोड़ा टिल्ट किया।
धुआँ धीरे से विशाल के मुँह में छोड़ा।
विशाल ने साँस खींची—सैंडी के होंठों से।
धुआँ दोनों के चेहरों के चारों तरफ फैल गया।
फिर विशाल ने हँसा—एक गहरी, भारी हँसी।
नेहा की साँसें अब बहुत तेज़ हो गईं।
उसकी चूत मेरी उँगलियों पर और गीली हो गई।
मिनी ऑर्गेज़्म के बाद भी वो अभी भी देख रही थी, बिना रुके।
बालकनी में सैंडी और विशाल का सीन अब और इंटेंस हो गया था।
विशाल ने सैंडी के होंठ पकड़ लिए—दाँतों से।
सैंडी ने धुआँ उसके मुँह में छोड़ा था, लेकिन विशाल ने उसके होंठ छोड़े नहीं।
उसने सैंडी के निचले होंठ को हल्के से काटा—नहीं बहुत ज़ोर से, लेकिन इतना कि सैंडी की आह निकल गई।
सैंडी ने पीछे हटने की कोशिश की—उसके हाथ विशाल के कंधे पर गए, हल्का सा धक्का दिया।
लेकिन विशाल ने छोड़ा नहीं।
उसकी आँखें सैंडी की आँखों में टिकी हुईं—भूखी, खेलते हुए।
धुआँ अभी भी दोनों के चेहरों के चारों तरफ लहरा रहा था
इसी बीच डेविड ने सैंडी का हाथ पकड़ा।
उस हाथ को धीरे से नीचे ले गया—अपनी क्रॉच की तरफ।
अंडरवियर के ऊपर से।
सैंडी की उँगलियाँ उसके लुंड पर रख दी गईं—हार्ड, मोटा, कपड़े के नीचे फड़कता हुआ।
डेविड ने उसका हाथ और दबाया—धीमे, लेकिन लगातार।
सैंडी ने विशाल के कंधे पर थपकी दी—"छोड़ दो"।
शाल ने छोड़ा।
सैंडी ने पीछे हटकर साँस ली
फिर डेविड की तरफ देखा।
फिर चारों तरफ—जैसे चेक कर रही हो कि कोई देख तो नहीं रहा।
फुसफुसाई—बहुत धीरे, लेकिन हमने सुन लिया।
"इट्स रिस्की..."
डेविड ने चारों तरफ देखा।
फिर हँसा—एक गहरी, भारी हँसी।
"नोबडी इज़ हियर... हमने यहाँ कई बार किया है।"
उसने सैंडी का हाथ नहीं छोड़ा।
उसका हाथ अभी भी उसके लुंड पर था—अंडरवियर के ऊपर से।
धीमे-धीमे रगड़ रहा था।
सैंडी ने फिर हँसी—हल्की, शरारती।
लेकिन उसने हाथ नहीं हटाया।
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Very very erotic story please update more waiting for next part
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दो खूबसूरत औरतें मेरे सामने थीं। दोनों स्पेशल ।
एक मेरे साथ थी—मेरी नेहा।
उसकी टी-शर्ट में स्तन हल्के से सहला रहा था , निप्पल्स सख्त, उसकी पैंटी मेरी उँगलियों से भीग रही थी।
वो देख रही थी—बालकनी की तरफ
उसकी आँखें बड़ी-बड़ी, चमकती हुईं।
वो एक पल के लिए भी नहीं हिचकिचाई।
न रुकी।
न शरमाई।
न कहा—"सैम... ये क्या कर रहे हो?
एक औरत को ऐसे देख रहे हो मेरे सामने?"
वो बस देख रही थी।
जैसे हम पॉर्न देखते हैं।
बस... ये पॉर्न लाइव था।
असली।
और ज़्यादा इंटेंस।
ज़्यादा करीब।
ज़्यादा खतरनाक।
वो मेरे लुंड को महसूस कर रही थी—उसकी गांड पर दबाव, उसकी चूत पर मेरी उँगलियाँ।
वो मेरे साथ थी—पूरी तरह।
उसने एक पल के लिए भी नहीं सोचा कि ये गलत है।
वो बस... क्यूरियस थी।
क्या हो रहा है।
क्यों हो रहा है।
कैसे हो रहा है।
दूसरी औरत बालकनी में थी—सैंडी।
एक 25 साल की इन्फ्लुएंसर, फेमस, परफेक्ट बॉडी वाली।
शर्ट में, हवा में लहराती हुई।
उसकी शर्ट के बटन खुले थे—स्तन आधे से ज़्यादा खुले, निप्पल्स हवा से सख्त।
गुलाबी पैंटी, ट्रायंगल ।
वो डेविड और विशाल के बीच में थी—तीनों इतने करीब कि उनकी साँसें एक-दूसरे के चेहरे पर पड़ रही थीं।
वो खेल रही थी—हँस रही थी, धक्का मार रही थी, सिगरेट शेयर कर रही थी।
उसकी हँसी में कोई शर्म नहीं थी।
कोई डर नहीं था।
सैंडी की सबसे दिलचस्प बात यही है—वो "नो" नहीं कहती।
खासकर जब ऑर्डर अलोक, डेविड या विशाल की तरफ से आता है।
मैंने देखा—डेविड ने उसका हाथ पकड़ा, धीरे से नीचे ले गया।
अपनी क्रॉच की तरफ।
छोटे अंडरवियर के ऊपर।
सैंडी की उँगलियाँ उसके लुंड पर रख दी गईं।
एक सेकंड के लिए वो हिचकिचाई—हाथ हल्का सा पीछे खींचने लगा।
शायद रिस्क का ख्याल आया।
शायद सोचा—क्या कोई देख रहा है?
शायद सोचा—ये बहुत ज़्यादा हो रहा है।
लेकिन डेविड ने उसे यकीन दिलाया।
उसने चारों तरफ देखा—कोई नहीं।
फिर उसने सैंडी की आँखों में देखा—एक छोटी, भरोसे वाली नज़र।
"सेफ है... कोई नहीं है।"
सैंडी ने हाथ नहीं खींचा।
फिर... वो रगड़ने लगी।
धीमे-धीमे।
उँगलियाँ अंडरवियर के ऊपर से लुंड पर सरक रही थीं—लंबाई, मोटाई, फड़कन—सब महसूस कर रही थी।
उसका हाथ जादू कर रहा था।
फिर सैंडी ने विशाल की तरफ मुड़ी।
उसने फिर वही स्मोक रूटीन दोहराया—सिगरेट उसके होंठों पर रखी।
विशाल ने कश लिया—गहरा, लंबा।
फिर सैंडी आगे झुकी।
उसने धुआँ विशाल के मुँह में छोड़ा—धीरे से, होंठों से होंठ छूते हुए।
विशाल ने साँस खींची—सैंडी के होंठों से।
धुआँ दोनों के चेहरों के चारों तरफ फैल गया।
शायद विशाल को थोड़ा जलन हुई थी—क्योंकि 5 मिनट लेट हो गया था।
अब वो मेकअप कर रहा था
वो जल्दी में था—अपना हिस्सा लेने के लिए।
मेंने सोचा अलग में विशाल की जगह होता तो शायद में भी यही करता। .. ये सोचते हुए मेने नेहा स्तन के जोर से दबा दिए।
हमारा एंगल से सैंडी और डेविड साफ़ दिख रहे थे—विशाल उनके पीछे था
डेविड और सैंडी अब बहुत करीब थे—उनकी साँसें एक-दूसरे के चेहरे पर पड़ रही थीं।
डेविड के दोनों हाथ सैंडी की कमर पर थे—नंगी स्किन पर।
उसकी उँगलियाँ धीरे-धीरे ऊपर सरक रही थीं—शर्ट को ऊपर धकेलते हुए।
शर्ट का निचला हिस्सा अब उठ चुका था—सैंडी की कमर पूरी नंगी।
उसकी गुलाबी पैंटी अब पूरी तरह दिख रही थी
सैंडी का एक हाथ अब डेविड के बॉल्स पर था—अंडरवियर के ऊपर से।
डेविड के छोटे अंडरवियर से उसका लुंड का सिर बाहर झाँक रहा था।
पर्पल, गोल, मशरूम जैसा।
शर्ट का निचला हिस्सा उठता जा रहा था—धीमे, लेकिन लगातार।
सैंडी की कमर पूरी नंगी हो चुकी थी, फिर पेट का निचला हिस्सा, फिर... नीचे से स्तनों का निचला कर्व दिखने लगा।
सैंडी ने सिर हिलाया—न में।
उसके होंठ मुस्कुरा रहे थे।
डेविड ने नहीं रोका।
उसके हाथ और ऊपर सरके—शर्ट अब इतनी ऊपर थी कि नीचे से उसके स्तनों का निचला हिस्सा साफ़ दिख रहा था।
गोल, भारी, अभी भी कल रात के निशानों से हल्के लाल।
निप्पल्स अभी छुपे हुए थे—बस थोड़ा सा और ऊपर...
तभी सैंडी ने डेविड के कान में कुछ फुसफुसाया।
बहुत धीरे—हमने नहीं सुना।
लेकिन डेविड ने सुना।
उसका हाथ रुक गया।
फिर वो पीछे हटा—बहुत थोड़ा।
उसने सैंडी की ठोड़ी पकड़ी—हल्के से, लेकिन प्यार से।
फिर उसके गाल पर दो हल्के थप्पड़ मारे—प्लेफुल, लेकिन थोड़े से डरावने।
"स्मार्ट गर्ल... स्मार्ट गर्ल।"
डेविड ने सैंडी की शर्ट को छोड़ दिया—अब वो खुद ही आगे बढ़ रहा था।
उसकी उँगलियाँ शर्ट के सामने वाले बटनों पर गईं।
एक... दो... तीन...
वो बटन जल्दी-जल्दी खोल रहा था—कोई हिचकिचाहट नहीं।
सैंडी ने हल्के से सिर हिलाया—जैसे कह रही हो "धीरे से"।
शायद वो कह रही थी—"अगर पूरी टॉपलेस हो गई तो कवर करना मुश्किल हो जाएगा।"
लेकिन डेविड रुका नहीं।
बटन खुलते गए—एक के बाद एक।
शर्ट अब पूरी तरह खुल चुकी थी—बस कंधों पर लटकी हुई।
सैंडी की पीठ सड़क की तरफ थी—रेलिंग से सटी हुई।
जो कोई भी सड़क से देखता... वो सिर्फ़ उसकी पीठ देखता।
कोई नहीं समझ पाता कि सामने क्या हो रहा है।
सैंडी के दोनों हाथ अब काम कर रहे थे।
एक हाथ डेविड के अं लुंड पर
उसकी उँगलियाँ कपड़े के ऊपर से लुंड को पकड़े हुए—सख्त, मोटा, फड़कता हुआ।
डेविड की साँसें भारी हो गईं—उसका पेट ऊपर-नीचे होने लगा।
दूसरा हाथ... विशाल की तरफ।
विशाल का तौलिया अब फर्श पर गिर चुका था—उसका लुंड बाहर, हार्ड, सैंडी की उँगलियों में।
वो भी रगड़ रही थी—एक ही रिदम में, दोनों हाथ एक साथ।
दोनों पुराने, बदसूरत, मोटे आदमी—एक तरफ डेविड, दूसरी तरफ विशाल।
सैंडी बीच में—युवा, हॉट, परफेक्ट बॉडी वाली।
उसकी शर्ट अब पूरी खुल चुकी थी—स्तन खुले, हवा में हिल रहे, निप्पल्स सख्त।
डेविड के हाथ अब उसके स्तनों पर थे—नरम, धीमे मसल रहा था।
उँगलियाँ निप्पल्स पर घुमाता हुआ
नेहा की साँसें अभी भी तेज़ थीं।
उसकी आँखें बालकनी की तरफ टिकी हुई थीं—सैंडी के खुले स्तनों पर, डेविड के हाथों पर
वो सब देख रही थी—चुपचाप, लेकिन बहुत ध्यान से
तभी... नेहा ने खुद ही अपनी टी-शर्ट के किनारे पकड़े।
धीरे से, उसने टी-शर्ट को ऊपर सरकाया—पेट से, फिर कमर से, फिर छाती से।
उसके स्तन बाहर आ गए—छोटे, गोल, परफेक्ट शेप के।
वो पूरी तरह से सिर्फ़ पैंटी में थी—अब कमरे में।
नेहा ने मेरी तरफ देखा।
वो जानती थी कि सैंडी की तरह उसके भी स्तन हैं—शायद छोटे, लेकिन उतने ही हॉट, उतने ही परफेक्ट।
शायद बेहतर।
सैंडी दोनों हाथ रिदम में चल रहे थे—एक डेविड पर, एक विशाल पर।
तभी विशाल का एक हाथ पीछे गया।
सैंडी की गांड पर।
उसने धीरे से मसलना शुरू किया—गोल-गोल, फर्म दबाव के साथ।
सैंडी ने डेविड की तरफ देखा।
फिर मुस्कुराई—एक छोटी, शरारती मुस्कान।
उसने अपना एक हाथ डेविड के अंडरवियर के किनारे पर ले जाकर अंदर डाला।
एक उँगली—धीरे से
सैंडी ने फिर आँख मारी—विंक।
फिर धीरे से अंडरवियर को नीचे सरकाया।
डेविड का लुंड बाहर आया—मोटा, लंबा, पर्पल हेड, फड़कता हुआ।
डेविड ने मुस्कुराया।
क्यों रोकता?
वो तो चाह रहा था।
नेहा जैसे कोई कॉम्पिटिशन में नेहा जैसे कोई कॉम्पिटिशन में अपना हाथ पीछे ले गई। . मेरे लंड पर
मेरी पैंट का बटन पहले ही खुला था—लुंड बाहर निकल चुका था, हार्ड, फड़कता हुआ।
वो उसे पकड़ लिया
नेहा अभी भी खिड़की से सैंडी को देख रही थी।
उसकी आँखें सैंडी के हाथ पर टिकी हुई थीं—वो हाथ जो डेविड के लुंड को पकड़े हुए था।
धीमे-धीमे ऊपर-नीचे कर रही थी।
उँगलियाँ लुंड की लंबाई पर सरक रही थीं
सैंडी का ग्रिप फर्म था—पाम पूरी तरह लपेटे हुए
वो धीरे-धीरे शेक कर रही थी
वो सब कॉपी कर रही थी
वो सैंडी की तरह ग्रिप बनाने की कोशिश कर रही थी।
पाम पूरी तरह लपेटने की कोशिश।
लेकिन... मेरे लुंड की मोटाई कम थी।
उसकी हथेली पूरी तरह नहीं लपेट पा रही थी।
ग्रिप ढीली पड़ रही थी—सैंडी की तरह टाइट नहीं बन पा रही थी।
डेविड का लुंड... बड़ा, मजबूत, भारी।
पर्पल हेड—चमकता हुआ, बिना फोरस्किन के, साफ़, गोल, मशरूम जैसा।
नेहा की उँगलियाँ मेरे लुंड पर थीं।
वो कोशिश कर रही थी—सैंडी की तरह।
पाम लपेटने की कोशिश।
धीमे-धीमे शेक करने की कोशिश।
वो महसूस कर रही थी—फर्क।
लेकिन... उसने एक पल के लिए भी मुझे इन्फीरियर महसूस नहीं होने दिया।
वो कोशिश कर रही थी।
बार-बार।
सैंडी की तरह।
नेहा भी मेरे लुंड को दोनों हाथों से पकड़ने की कोशिश कर रही थी।
एक हाथ से ऊपर-नीचे, दूसरे से बॉल्स को हल्का सा दबाते हुए।
मुझे लग रहा था—वो सोच रही है।
कैसे होगा... इतने मोटे लुंड को पकड़ना।
कैसे होगा... इतने भारी बॉल्स को हाथ में लेना।
कैसे होगा... वो पर्पल हेड को जीभ से छूना।
कैसे होगा... वो मोटाई को अंदर लेना।
उसकी आँखें सैंडी के हाथ पर थीं—कैसे वो सफेद उँगलियाँ काले लुंड पर इतनी खूबसूरत लग रही थीं।
कंट्रास्ट।
ब्लैक एंड व्हाइट।
परफेक्ट।
डेविड के हाथ अब सैंडी के स्तनों पर पूरी तरह कब्ज़ा कर चुके थे।
वो दोनों स्तनों को मसल रहा था—नरम लेकिन फर्म दबाव के साथ।
उँगलियाँ निप्पल्स पर गईं—पहले हल्के से घुमाईं, फिर धीरे-धीरे पिंच किया।
सैंडी की आह निकली—"आआह्ह..."
एक छोटी, गहरी, लेकिन मज़े वाली आह।
निप्पल्स पिंच होते ही उसकी आँखें बंद हो गईं—लेकिन मुस्कान नहीं गई।
जब उसने मुँह खोला—"आह्ह..."—विशाल ने तुरंत मौका देखा।
उसने अपना दो उँगलियाँ सैंडी के मुँह में डाल दीं।
वो उँगलियाँ... गंदी, रफ़, मज़दूर वाली।
बड़े-बड़े, मोटे, नाखून थोड़े बढ़े हुए, स्किन पर मेहनत की काली लकीरें।
सैंडी ने एक पल भी हिचकिचाई नहीं।
उसने दोनों उँगलियाँ मुँह में ले लीं—गहरे तक।
जीभ से चाटा, होंठों से चूसा।
फिर सिर आगे-पीछे करने लगी—जैसे वो कोई लुंड हो।
उसकी आँखें विशाल की आँखों में टिकी हुईं।
विंक किया।
मुस्कुराई—बिना किसी हिचकिचाहट के।
उसने उँगलियाँ और अंदर धकेलीं—सैंडी ने गले तक ले लिया।
फिर बाहर निकालीं—धीरे से, जीभ से चाटते हुए।
मैंने देखा—ये लोग थक नहीं रहे।
कल रात सैंडी को रूम में चोदा।
आज सुबह बालकनी में खेल रहे हैं।
शायद शाम को लिफ्ट में।
शायद रात को पूल साइड।
शायद हर कोने में।
शायद हर जगह।
क्योंकि ये लोग—डेविड और विशाल—नए "माल" के आदी हैं।
अलोक की कृपा से हर बार नया माल मिलता है।
इतने कुतिए चोद चुके हैं कि अब एक ही औरत को एक ही जगह पर चोदने में मज़ा नहीं आता।
अब वो नया थ्रिल चाहते हैं।
नई जगह।
नया कोना।
नया रिस्क।
नया एंगल।
नया खेल।
सैंडी उनके लिए परफेक्ट "माल" है।
जो "नो" नहीं कहती।
जो ऑर्डर पर सब करती है।
जो हँसती है।
जो खेलती है।
जो हर कोने में, हर जगह, हर तरीके से तैयार रहती है।
नेहा अभी भी खिड़की से पूरी तरह टिकी हुई थी—उसकी आँखें पलक झपकाए बिना बालकनी पर।
उसका हाथ मेरे लुंड पर था—धीमे, लगातार ऊपर-नीचे
मेरा एक हाथ उसके स्तनों को मसल रहा था, निप्पल्स को अंगूठे से हल्के से खींच रहा था।
दूसरा हाथ उसकी पैंटी के नीचे—उसकी चूत पर उँगलियाँ गोल-गोल
विशाल अब
गीली उँगलियाँ—सैंडी के मुँह से निकाली हुईं, उसकी थूक से चमकती हुईं—धीरे से सैंडी के चेहरे पर सरकाईं।
गाल पर, होंठों पर, ठोड़ी पर।
सैंडी का चेहरा अब चमक रहा था—उसकी अपनी थूक से।
मैंने धीरे से अपनी उँगलियाँ उसकी पैंटी से बाहर निकालीं।
दो उँगलियाँ—पूरी तरह गीली, चमकती हुईं।
उसकी चूत का रस उन पर चिपका हुआ था—साफ़, गाढ़ा, गर्म।
मैंने उँगलियाँ उसके सामने लाईं—बिल्कुल वैसी ही तरह जैसे विशाल ने सैंडी के मुँह से उँगलियाँ निकालकर उसके चेहरे पर लगाई थीं।
मैंने कुछ नहीं कहा।
बस उँगलियाँ उसके होंठों के पास ले गया—धीरे से, बिना दबाव डाले।
उसकी साँसें मेरी उँगलियों पर लगीं—गर्म, तेज़।
नेहा समझ गई।
वो जानती थी कि मैं क्या चाहता हूँ।
वो जानती थी कि मैं उसे टेस्ट कर रहा हूँ—उसी तरह जैसे सैंडी ने किया।
एक पल की साइलेंस।
फिर... नेहा ने होंठ खोले।
उसने मेरी उँगलियाँ मुँह में ले लीं—धीरे से, लेकिन पूरी तरह।
उसकी जीभ मेरी उँगलियों पर सरकी—अपना ही रस चाट रही थी।
ये पहली बार था—हमारी छह महीने की शादी में।
उसने अपना रस पहले भी चखा होगा—मेरे लुंड से, जब वो मुझे मुँह देती थी, पोज़िशन बदलते-बदलते, बीच में चूसते हुए।
लेकिन उँगली से... कभी नहीं।
आज... आज उसने किया।
बिना पूछे।
बिना हिचकिचाहट के।
बस... हीट ऑफ द मोमेंट में।
सब कुछ चल रहा था, लेकिन नेहा का ध्यान एक सेकंड के लिए भी नहीं हटा।
वो बालकनी की हर छोटी हरकत को देख रही थी—जैसे कोई लाइव शो हो
डेविड का लुंड अब पूरी तरह बाहर था
सैंडी के हाथ में था—धीमे-धीमे शेक कर रही थी।
क्योंकि दोनों इतने करीब थे—डेविड का पेट सैंडी के पेट से दबा हुआ—उसका लुंड का सिर बार-बार सैंडी की जांघों से छू जा रहा था।
हर बार छूने पर एक छोटी सी चमकदार लाइन—प्रीकम का।
सैंडी की परफेक्ट, गोरी, चिकनी जांघों पर वो चमक फैल रही थी।
हर बार जब लुंड का सिर थोड़ा दूर होता, एक पतली, चिपचिपी धागा जैसी लाइन दिखती—प्रीकम की।
सैंडी की जांघें अब गीली चमक रही थीं
विशाल ने अपना हाथ नीचे ले जाकर सैंडी की पैंटी पर रख दिया।
उसकी उँगलियाँ पैंटी के ऊपर से चूत पर रगड़ने लगीं
नेहा की वो पहली आवाज़—लंबे समय के बाद—कमरे में गूंजी।
"हम्म्म... 4 हैंड्स..."
वो बस इतना बोली।
फिर चुप।
वो कुछ कहना चाह रही थी।
मैं जानता था।
उसकी साँसें रुक-रुक कर चल रही थीं।
उसकी चूत मेरी उँगलियों पर और गीली हो रही थी।
उसकी जांघें हल्की-हल्की काँप रही थीं।
वो सोच रही थी—4 हाथ।
एक साथ।
दो स्तनों पर—मसलते हुए, निप्पल्स पिंच करते हुए।
दो नीचे—गांड मसलते हुए, चूत रगड़ते हुए।
और दो लुंड—उसके हाथों में।
वो कभी दो हाथों से आगे नहीं गई थी।
मेरे।
मेरे दो हाथ—उसके स्तनों पर, उसकी चूत पर।
लेकिन 4... एक साथ...
वो कल्पना कर रही थी।
कैसे लगेगा... इतने हाथ।
इतना स्पर्श।
इतना दबाव।
इतना मज़ा।
और मैं... मैं भी सोच रहा था।
कल रात सैंडी ने 10 हाथ महसूस किए थे।
मेरे भी।
अलोक के, विशाल के, डेविड के, वेटर के।
10 हाथ—उसके बदन पर, उसके स्तनों पर, उसकी चूत पर, उसकी गांड पर, उसके मुँह में।
वो सब कुछ सह रही थी—और मज़े ले रही थी।
विशाल ने अब सैंडी की पैंटी के किनारे पर उँगलियाँ डाल दीं।
धीरे से, लेकिन बिना हिचकिचाहट के।
उसकी मोटी, रफ़ उँगलियाँ पैंटी के नीचे सरक गईं—सैंडी की चूत पर।
वो अंदर काम कर रहा था—धीमे गोल-गोल, क्लिट पर दबाव, फिर नीचे की तरफ।
हल्की सी आह।
फिर उसने खुद को एडजस्ट किया—जांघें थोड़ी और चौड़ी कर लीं।
पैंटी अब और तन गई—कपड़ा इतना खिंचा कि लग रहा था फट जाएगा।
विशाल की उँगली अब और गहराई से अंदर जा रही थी—छेद की तरफ।
पैंटी का इलास्टिक खिंचकर चीख रहा था
लेकिन सैंडी ने खुद को और चौड़ा किया—उसकी जांघें अब पूरी फैली हुईं।
विशाल ने उसके कान में कुछ फुसफुसाया—बहुत करीब, होंठ उसके कान से छूते हुए।
"कितनी गीली हो गई है तू... रंडी..."
शायद यही कहा होगा।
सैंडी ने हल्के से सिर हिलाया—मुस्कुराई, आँखें बंद।
विशाल की उँगलियाँ अब पूरी तरह सैंडी की पैंटी के नीचे थीं—अंदर काम कर रही थीं।
वो जोर-जोर से कोशिश कर रहा था—उँगलियाँ छेद की तरफ धकेल रहा था
डेविड ने अब अपना लुंड का सिर पकड़ा।
उसकी उँगलियाँ प्रीकम से भरी हुईं—सैंडी की जांघों पर फैला हुआ प्रीकम इकट्ठा कर रहा था।
दो उँगलियाँ—चमकती हुईं, चिपचिपी, गाढ़ी।
वो दोनों ने अपनी उँगलियाँ सैंडी के चेहरे के सामने लाईं।
विशाल की उँगलियाँ—सैंडी की चूत के रस से भरी हुईं, गीली, चमकती हुईं।
डेविड की उँगलियाँ—उसके प्रीकम से भरी हुईं, गाढ़ी, सफेद।
दोनों ने सैंडी की तरफ देखा।
फिर एक-दूसरे की तरफ।
फिर सैंडी की तरफ।
"कौन पहले?" डेविड ने हँसते हुए कहा—आवाज़ में मज़ाक और गंदगी।
"भेनचोद... तू पहले अपनी गंदी उँगलियाँ चटवा ले।" विशाल ने जवाब दिया—दोस्ताना गाली
"अरे रंडी... तू तो पहले से ही गीली हो रही है... मेरी उँगलियाँ चाट... या पहले डेविड की?"
सैंडी मुस्कुरा रही थी—उसकी आँखें दोनों की तरफ।
वो दोनों के लुंड अभी भी उसके हाथों में थे—दोनों सख्त, फड़कते हुए।
सैंडी ने अचानक दोनों लुंड छोड़ दिए।
उसके दोनों हाथ अब सामने थे—दोनों हाथों में दो-दो उँगलियाँ फैली हुईं।
विशाल की उँगलियाँ उसकी चूत के रस से चमक रही थीं—गीली, चिपचिपी।
डेविड की उँगलियाँ उसके प्रीकम से भरी हुईं—गाढ़ी, सफेद, चमकदार।
वो मुस्कुराई—एक मुस्कान।
उसने दोनों हाथो को कलाई से पकड़ लिआ
फिर बारी-बारी से एक हाथ मुँह के पास लाई।
पहले विशाल की उँगलियाँ—अपनी ही चूत का स्वाद।
उसने मुँह खोला।
दो उँगलियाँ अंदर ले लीं—गहरे तक।
जीभ से चाटा, चूसा।
फिर बाहर निकालीं—साफ़, लेकिन अब उसके होंठों पर चमक।
फिर डेविड की उँगलियाँ—उसके प्रीकम का स्वाद।
उसने फिर मुँह खोला।
दो उँगलियाँ अंदर ले लीं—चाटी, चूसी।
फिर बाहर निकालीं—अब दोनों हाथ साफ़।
वो फिर पहले वाली तरफ लौटी—विशाल की उँगलियाँ।
फिर डेविड की।
बारी-बारी।
हर बार थोड़ा और गहरा।
हर बार थोड़ा और चूसते हुए।
उसकी आँखें दोनों की आँखों में टिकी हुईं—बारी-बारी।
वो मुस्कुरा रही थी।
हल्के-हल्के गुदगुदी वाली हँसी निकाल रही थी।
डेविड ऑफ़ विशाल ने अपना दूसरा हाथ सैंडी के कंधे पर रखा
हल्का सा दवाब
फिर... वो धीरे से नीचे झुकी।
शरीर को थोड़ा और नीचे किया।
घुटनों पर बैठ गई—बालकनी में, पूरी तरह खुली हवा में।
अब दोनों लुंड साफ़ दिख रहे थे—डेविड का मोटा, पर्पल हेड वाला, विशाल का भी सख्त, फड़कता हुआ।
सैंडी घुटनों पर थी—उसकी शर्ट कंधों पर लटकी हुई, स्तन खुले, निप्पल्स हवा से सख्त।
सैंडी अब दोनों की तरफ देख रही थी—उसकी आँखों में नकली शिकायत, होंठों पर मुस्कान।
"बहुत काम करवाते हो..."
वो फुसफुसाई—आवाज़ में शरारत, लेकिन इतनी प्यारी कि दोनों हँस पड़े।
डेविड और विशाल की हँसी भारी, गहरी—जैसे कोई पुराना जोक सुना हो।
फिर दोनों और करीब आए।
सैंडी का चेहरा अब ऊपर की तरफ—ठोड़ी उठी हुई, होंठ हल्के से खुले।
उसकी आँखें दोनों की आँखों में बारी-बारी टिकी हुईं—बिना डर, बिना शर्म, बस एक शांत, ग्रेसफुल मुस्कान।
डेविड ने अपना लुंड पहले उठाया।
मोटा, भारी, पर्पल हेड चमकता हुआ।
उसने हल्के से सैंडी के गाल पर टैप किया—एक छोटा, प्लेफुल थप्पड़।
फिर विशाल ने भी—उसका लुंड भी सख्त, फड़कता हुआ।
दोनों लुंड अब सैंडी के चेहरे पर एक साथ टैप कर रहे थे—एक गाल पर, दूसरा दूसरे गाल पर।
हल्के, लेकिन वजनदार।
हर टैप पर सैंडी की आँखें हल्के से बंद होतीं—फिर खुलतीं, मुस्कुरातीं।
वो सब कुछ ग्रेस से ले रही थी—जैसे ये कोई खेल हो, कोई प्यार भरा रिवाज़।
उसकी साँसें तेज़ थीं, लेकिन चेहरा शांत, होंठों पर वही मुस्कान।
नेहा की साँसें अब रुक-रुक कर चल रही थीं।
उसकी जांघें काँप रही थीं—एक हल्का सा, लेकिन साफ़ झटका।
उसकी टाँगें कमज़ोर पड़ रही थीं—जैसे वो किसी भी पल गिर सकती हो।
उसकी चूत मेरी उँगलियों पर पूरी तरह भिगो चुकी थी—एक गर्म लहर।
सैंडी अब हँस रही थी—एक हल्की, गुदगुदी वाली हँसी, जैसे कोई उसे गुदगुदी कर रहा हो।
डेविड और विशाल दोनों उसके चेहरे के बहुत करीब थे।
डेविड का लुंड अब सैंडी के गाल से छू रहा था—हर टैप के साथ एक छोटी सी बूँद प्रीकम निकल रही थी।
वो बूँदें उसके गाल पर गिर रही थीं—छोटी-छोटी, चमकदार, गाढ़ी।
एक बूँद उसके होंठ के कोने पर लगी।
दूसरी उसकी ठोड़ी पर।
तीसरी उसकी नाक के पास।
डेविड हर टैप के साथ थोड़ा और प्रीकम फैला रहा था—जैसे वो उसके चेहरे पर छोटे-छोटे ड्रॉप्स से पेंटिंग कर रहा हो।
विशाल भी पीछे से हँस रहा था।
डेविड अब और प्लेफुल हो गया था।
वो अपना लुंड सैंडी के नाक पर रगड़ रहा था
ठंडी हवा में उसकी नाक पहले से ही लाल हो चुकी थी, अब और लाल हो गई।
फिर डेविड ने लुंड को उसके कान की तरफ ले जाया।
कान के किनारे पर हल्के से टच किया—जैसे गुदगुदी कर रहा हो।
सैंडी ने हँसी—एक छोटी, काँपती हुई हँसी।
उसने सिर हिलाया—"स्टॉप... गुदगुदी हो रही है..."
सैंडी की हँसी अभी भी हवा में गूंज रही थी—हल्की, गुदगुदी वाली, जैसे कोई उसे छूकर छेड़ रहा हो।
"भेनचोद... तुम लोग यहाँ हो... मैं दो बार रूम चेक करके वापस चला गया..."
आवाज़ भारी थी, गुस्से से भरी
अलोक।
डेविड और विशाल एकदम अलग हो गए।
"मादरचोद... तुमको तैयार करने के लिए बोला था... और तुम... यहाँ... बालकनी में... ओपन में... चूतियों, कोई वीडियो बना लेगा तो लोडे लग जाएँगे।"
अलोक का गुस्सा अब सैंडी पर उतरा।
वो सैंडी की तरफ मुड़ा—आँखें सिकुड़ी हुईं, आवाज़ में वो ही कड़वाहट।
"ये दोनों को तो कौन जानता है... तुझे नहीं कोई टेंशन?"
"अरे... बस... मज़ाक कर रहे थे...और .... आपने ' ना ' कहने से मन किआ था "
अलोक ने उसे घूरा।
"मज़ाक?
यहाँ ओपन में?
किसी ने देख लिया तो?
डेविड ने कंधे उचकाए—।
"अरे... कोई नहीं देख रहा... हमने चेक किया था..."
अलोक का गुस्सा अब सैंडी पर उतरा।
वो सैंडी की तरफ मुड़ा—आँखें सिकुड़ी हुईं, आवाज़ में वो ही कड़वाहट।
"ये दोनों को तो कौन जानता है... तुझे नहीं कोई टेंशन?"
सैंडी अभी भी घुटनों पर थी—उसकी शर्ट कंधों पर लटकी हुई
विशाल ने उसके ऊपरी हाथ पकड़े—मोटे, भारी हाथ।
उसने धीरे से खींचा—सैंडी को उठाने में मदद की।
सैंडी उठी—धीमे,
उसकी जांघें अभी भी हल्की सी काँप रही थीं—शायद ठंड से, शायद मज़े से।
उसने शर्ट को ठीक किया—बटन लगाए, लेकिन पूरी तरह नहीं।
वो आगे बढ़ा—उसने सैंडी की कलाई पकड़ी।
फर्म, लेकिन जल्दबाज़ी में।
"चल... अंदर।
उसकी आवाज़ में अभी भी गुस्सा था
सैंडी ने हल्के से हँसी—एक छोटी, लहराती हँसी।
वो अलोक के साथ चली—जैसे कोई फूल हवा में लहरा रहा हो।
हम दोनों खड़े थे—जैसे मूर्ति।
नेहा की साँसें धीमी हो चुकी थीं।
उसकी जांघें अब स्थिर थीं—लेकिन अभी भी हल्की सी काँप रही थीं।
कमरे में सन्नाटा।
फिर... नेहा के मुँह से सिर्फ़ एक शब्द निकला।
"ये... अलोक जी हैं..."
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