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सुमन ने अपना सिर नीचे झुकाया — और संदीप के लंड को अपने मुँह में ले लिया।
उसके गरम, नम मुँह ने उसके लंड को अंदर खींच लिया — पूरा — उसका सिरा उसके गले के पीछे तक चला गया। संदीप की साँसें रुक गईं। उसके हाथ सुमन के बालों में जा गिरे।
"अह्ह्ह..." संदीप कराहा — एक दबी हुई, रुकी हुई कराह।
सुमन ने उसे चूसना शुरू किया — धीरे-धीरे — अपने होठों से उसके लंड को खींचते हुए, अपनी जीभ से उसके सिरे को घुमाते हुए। उसका मुँह उसके लंड के चारों तरफ लिपटा हुआ था — और वह उसे अंदर-बाहर कर रही थी, उसी लय में — जैसे कोई मुँह से कोई गीत गा रहा हो।
"अह्ह्ह... सुमन... तुम... बहुत अच्छा..." संदीप की साँसें फट रही थीं — उसके पैर काँप रहे थे — उसके हाथ सुमन के बालों को जोर से खींच रहे थे।
सुमन ने तेज़ किया। उसके होंठ और तेज़ी से उसके लंड को चूस रहे थे — उसकी जीभ उसके सिरे पर गोल-गोल घूम रही थी — उसके गले ने उसे और गहरा अंदर खींच लिया।
"मैं... मैं आ रहा हूँ..." संदीप चीखा — एक लंबी, रुकी हुई चीख — "मैं आ रहा हूँ, सुमन..."
सुमन रुकी नहीं। उसने और तेज़ किया — और उसी समय, संदीप का बीज उसके मुँह में आ गया — गरम, गाढ़ा, चिपचिपा — उसके गले के पीछे बह गया। सुमन ने उसे निगल लिया — पूरा — बिना रुके, बिना रुके।
"अह्ह्ह्ह्ह..." संदीप की चीख धीरे-धीरे शांत हुई — और वह ढीला पड़ गया — उसका शरीर थक गया था।
सुमन ने अपना मुँह संदीप के लंड से हटाया — और उसे देखा।
उसकी आँखें अब भी गीली थीं — पर अब वह उस आग में जल रही थी जो अब भी बुझी नहीं थी।
"तुम्हारा लंड," उसने कहा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी शांति थी — "बहुत बड़ा था। पर मेरी चूत अब भी प्यासी है।"
संदीप ने अपनी साँसें काबू की — और उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक आ गई।
"मैडम," उसने कहा — उसकी आवाज़ में एक गहरी, धीमी भूख थी — "मैं आपको चोदने से नहीं रोक सकता। पर मैं आपको बताना चाहता हूँ — रिजवान ने आपको जो दिया है — वह सिर्फ एक शुरुआत है। अगर आप मुझे चाहेंगी — तो मैं आपको वह दूँगा जो रिजवान नहीं दे सकता।"
सुमन की आँखों में एक अजीब सी चमक आ गई — एक ऐसी चमक जो उसने पहले कभी नहीं देखी थी — उसकी चूत की आग अब बुझी नहीं थी, बल्कि उसने संदीप के बीज को निगल लिया था — और उसके अंदर एक और आग जल रही थी।
सुमन घर पहुँची — अकेले।
उसके कपड़े गीले थे — उसकी लेगिंग, उसकी कमीज, उसके बाल — सब कुछ। उसकी चूत अब भी धड़क रही थी — और अब संदीप के बीज की गर्मी ने उसे और भी अधिक जला दिया था।
वह बिस्तर पर लेट गई — और उसके दिमाग में रिजवान, इमरान, संदीप और राज — सब एक साथ घूम रहे थे। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह किसे चाहती है — और किसे नहीं।
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20-06-2026, 12:13 AM
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achhi hai..
aage post karo
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छह महीने पहले की बात है। राज और सुमन की शादी को डेढ़ साल हो चुके थे।
राज सुमन से प्यार करता था — बहुत करता था। पर उसके अंदर कुछ और भी था — एक बेचैनी, एक संदेह, एक ऐसी चिंता जो उसे रातों-रात जगाए रखती थी।
वह सोचता था — क्या सुमन सच में मेरी है? क्या वह मुझसे प्यार करती है? या वह मुझसे शादी करके बस एक सुरक्षित जीवन चाहती थी?
यह सवाल उसे दिन-रात परेशान करता था। पर जब भी वह सुमन से पूछना चाहता, तो उसकी हिम्मत नहीं होती थी। वह डरता था — कहीं सच बहुत दर्दनाक न निकले।
एक दिन, नीशा को राज का फोन आया। नीशा — सुमन की छोटी बहन। वह कहती थी — "राज, मुझसे मिलना है। बहुत ज़रूरी है।"
राज एक कैफे में मिला। नीशा वहाँ पहले से ही बैठी थी — उसके हाथ में एक फाइल थी, और उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान।
"राज," उसने कहा — उसकी आवाज़ में एक जहर था, "तुम जानते हो सुमन कौन है? असली सुमन? वह नहीं जो तुम्हारे सामने है — वह जो तुमसे छिपी हुई है?"
राज की धड़कनें बढ़ गईं।
"क्या मतलब?" उसने पूछा।
नीशा ने फाइल खोली। उसमें से कुछ तस्वीरें निकालीं — और उन्हें राज के सामने रख दिया।
फोटो में सुमन थी — पर वह सुमन नहीं थी जो राज जानता था।
उसमें सुमन एक क्लब में थी — एक अजनबी की गोद में — उसके हाथ उस आदमी की गर्दन पर थे। दूसरी फोटो में — सुमन एक होटल के कमरे में — उसके बाल बिखरे हुए — उसकी कमीज उतरी हुई — उसके स्तन दिख रहे थे। तीसरी फोटो में — सुमन एक कार में — एक आदमी के साथ — उसका हाथ उस आदमी की जांघ पर था।
"यह सब — शादी से पहले का है," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक तृप्ति थी। "सुमन जितनी सीधी दिखती है — उतनी नहीं है। उसके कई बॉयफ्रेंड थे — और ना जाने कितनों से वह चुदवा चुकी है।"
राज का चेहरा सफेद पड़ गया। उसने वह फोटो उठाई — उसकी आँखें उस पर टिक गईं — उसका हाथ काँप रहा था।
"यह... यह सब झूठ है," उसने कहा — पर उसकी आवाज़ में पूरा यकीन नहीं था।
"मैं झूठ नहीं बोल रही," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी चमक थी। "यह सच है। और मैं तुम्हें और सच बताऊँगी — अगर तुम सुनना चाहोगे।"
राज और नीशा कैफे में घंटों बैठे रहे।
नीशा ने उसे एक-एक करके सब कुछ बताया — सुमन के बॉयफ्रेंड्स के नाम, उसके क्लब जाने की आदतें, उसके रात को घर से निकल जाने के किस्से, उसके होटलों में जाने की कहानियाँ — और यह भी कि कैसे सुमन ने उसके पिछले बॉयफ्रेंड को राज से पहले मिलने के लिए कहा था।
"सुमन ने मुझसे कहा था," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी कड़वाहट थी — "राज तो बस एक अच्छा आदमी है — पर वह बहुत बोरिंग है। मैं उसे चाहती हूँ — पर मुझे उससे अच्छा सेक्स भी चाहिए।"
राज का चेहरा और भी सफेद पड़ गया। उसका दिल दुखने लगा — एक ऐसा दर्द जो उसने कभी महसूस नहीं किया था।
"यह सब तुम क्यों बता रही हो?" उसने पूछा — उसकी आवाज़ में दर्द था — "तुम उसकी बहन हो।"
"मैं उसकी बहन हूँ," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक जहर था — "पर मैं तुम्हें सच जानने का हक देती हूँ। क्योंकि तुम उसके पति हो — और तुम वह नहीं जानते जो तुम्हें जानना चाहिए।"
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राज और नीशा — फिर मिलते हैं
राज ने नीशा को फोन किया — "मिलना है।"
वे फिर उसी कैफे में मिले — इस बार राज के चेहरे पर गुस्सा था — और एक अजीब सी बेचैनी भी।
"यह कौन है?" उसने फोटो नीशा के सामने रखी — उसकी आवाज़ काँप रही थी।
नीशा ने फोटो देखी — उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान आ गई — जैसे उसे पता हो कि यह दिन आएगा।
"यह विशाल है," उसने कहा — उसकी आवाज़ में एक गहराई थी — "सुमन का पुराना बॉयफ्रेंड।"
राज की आँखें फटी रह गईं — "पुराना बॉयफ्रेंड? पर वह — वह तो — मेरे घर क्यों आता है?"
"क्योंकि," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी चमक थी — "वह अब भी सुमन के साथ है। सुमन अब भी उससे मिलती है — चुपके से — जब तुम ऑफिस जाते हो — या जब तुम सोते हो — या जब तुम घर से बाहर होते हो — तो वह आता है और वे... करते हैं जो करते हैं।"
राज का चेहरा — उस पर अब गुस्सा नहीं था — बस एक ठंडी खालीपन थी।
कैफे का वह कोना। शाम के 7 बज रहे थे। बाहर अंधेरा हो रहा था। राज और नीशा आमने-सामने बैठे थे। राज का चेहरा पहले से ही तनाव से भरा हुआ था — और अब नीशा उसे और बताने वाली थी।
नीशा ने अपनी कॉफी का एक घूँट लिया। उसकी आँखों में एक चमक थी — जैसे कोई शिकारी अपने शिकार को घेर रहा हो।
"जीजू," उसने कहा — उसकी आवाज़ में एक मिठास थी, पर उसके पीछे एक जहर छिपा था — "यह आदमी — विशाल — सुमन का पहला बॉयफ्रेंड नहीं है।"
राज की आँखें फटी रह गईं।
"तो फिर कौन है?" उसने पूछा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी बेचैनी थी।
"यह करण है," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक गहराई थी — "सुमन का पहला प्यार। और वह भी शादीशुदा है।"
राज का चेहरा और भी सफेद पड़ गया। उसके हाथ काँपने लगे।
"करण और सुमन — वे एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे," नीशा ने कहना शुरू किया — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी कड़वाहट थी — "पर वे शादी नहीं कर पाए। क्योंकि करण की शादी पहले से ही तय थी — उसके परिवार ने उसे किसी और से ब्याह दिया था। सुमन ने उसे छोड़ दिया — पर वे अब भी मिलते हैं — चुपके से — जब भी मौका मिलता है।"
राज की साँसें रुक गईं। उसने सोचा — तो यह करण — वही है जो मेरे घर आता है — जब मैं ऑफिस होता हूँ — जब मैं सोता हूँ — जब मैं बाहर होता हूँ।
"वे कहाँ मिले?" राज ने पूछा — उसकी आवाज़ में अब गुस्सा नहीं था — बस एक ठंडी खालीपन थी।
"ऑफिस में," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक चमक थी — "चार साल पहले — जब सुमन नौकरी करती थी।"
"सुमन एक बड़ी कंपनी में काम करती थी," नीशा ने कहना शुरू किया — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी शान थी — "बहुत अच्छी नौकरी थी — बहुत अच्छी सैलरी थी — उस समय उसकी सैलरी उसके बॉस के बराबर थी।"
"कैसे?" राज ने पूछा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी जिज्ञासा थी।
"क्योंकि," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक जहर था — "उसने अपने बॉस को अपना आशिक बना लिया था।"
राज का मुँह खुला रह गया।
"उसका बॉस — उसका नाम था शर्मा जी," नीशा ने कहना शुरू किया — उसकी आवाज़ में एक गहराई थी — "वह सुमन का बहुत दीवाना था। वह उसे अपने साथ ऑफिस की बिजनेस ट्रिप पर ले जाता था — और वे एक ही होटल में रुकते थे — उसी कमरे में — आप समझ रहे हैं न, जीजू?"
राज का चेहरा अब पूरी तरह सफेद पड़ चुका था। उसके हाथ काँप रहे थे — पर उसके अंदर एक अजीब सी गर्मी भी पैदा हो रही थी — शायद क्रोध — या शायद कुछ और — जो वह स्वयं समझ नहीं पा रहा था।
"सुमन ने अपने बॉस के साथ मिलकर कई बड़े-बड़े बिजनेस डील्स किए," नीशा ने कहना जारी रखा — "करोड़ों रुपये के डील्स — और वह बॉस की सबसे पसंदीदा एम्प्लॉयी बन गई थी।"
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"बॉस अपनी बिजनेस ट्रिप पर सुमन को अपने साथ ले जाता था," नीशा ने कहना जारी रखा — "वे एक ही होटल में रुकते थे — और अक्सर एक ही कमरे में। वह उसे अपने साथ क्लबों में ले जाता था — पार्टियों में — शराब पीने — और रात भर वे साथ होते थे।"
"और सुमन?" राज ने पूछा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी जिज्ञासा थी — "वह क्या करती थी?"
"वह उन सब में मजा लेती थी," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक तृप्ति थी — "वह बहुत मॉडर्न थी — बहुत आज़ाद थी — वह क्लबों में जाती थी — पार्टियाँ करती थी — नाइट आउट करती थी — बिजनेस ट्रिप्स पर जाती थी — और इन सब में वह कई मर्दों से मिली — जिनमें से एक था करण।"
राज ने गहरी साँस ली। उसका दिल धड़क रहा था — पर वह रुकना नहीं चाहता था।
"करण और सुमन एक बिजनेस मीटिंग में मिले," नीशा ने कहना शुरू किया — "करण उस समय एक कंपनी में काम करता था — जो सुमन की कंपनी के साथ काम कर रही थी। वे एक प्रोजेक्ट पर एक साथ काम कर रहे थे — और उसी दौरान उनके बीच कुछ शुरू हुआ — और फिर बढ़ गया — और आखिरकार वे एक-दूसरे के प्यार में पड़ गए।"
"पर करण शादीशुदा था?" राज ने पूछा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी कड़वाहट थी।
"हाँ," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक तृप्ति थी — "पर सुमन को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था। वह चाहती थी — और उसने ले लिया।"
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राज का सवाल — "यह सब तुम्हें कैसे पता?"
राज की आँखों में एक अजीब सी चमक थी — वह चमक जो गुस्से और भूख के बीच झूल रही थी। उसका लंड अब भी पैंट में सख्त था — और उसका दिमाग अब भी सुमन के अतीत की तस्वीरों से भरा हुआ था।
उसने अपनी कॉफी का एक घूँट लिया — और फिर नीशा की तरफ देखा।
"यह सब तुम्हें कैसे पता?" उसने पूछा — उसकी आवाज़ में अब कोई गुस्सा नहीं था — बस एक ठंडी जिज्ञासा थी।
नीशा ने अपनी कॉफी रखी। उसके चेहरे पर वही मुस्कान थी — वह मुस्कान जो कह रही थी — मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी — यह सवाल आने का।
"जीजू," उसने कहना शुरू किया — उसकी आवाज़ में एक गहराई थी — "सुमन मेरी बहन है। हम साथ बड़ी हुई हैं। एक ही कमरे में सोई हैं। एक ही कॉलेज गई हैं। एक ही कॉलेज गई हैं। और जब सुमन ने नौकरी करनी शुरू की — तो मैं भी उसके साथ थी।"
राज ने अपना सिर झुकाया — वह सुन रहा था — पर उसकी आँखें नीशा पर ही थीं।
"सुमन ने जब पहली नौकरी की — तब मैं भी उसी शहर में थी," नीशा ने कहना शुरू किया — "मैं उसके साथ रहती थी। उसके साथ क्लब जाती थी। उसके साथ पार्टियाँ करती थी। उसके साथ बिजनेस ट्रिप्स पर जाती थी — हाँ, बॉस उसे अपने साथ ले जाता था — और वह मुझे भी अपने साथ ले जाती थी — क्योंकि मुझे वहाँ खाना-पीना अच्छा लगता था — और सुमन को मेरा साथ अच्छा लगता था।"
"तो तुमने सब कुछ देखा है?" राज ने पूछा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी जिज्ञासा थी।
"सब कुछ," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक गहराई थी — "मैंने उसके बॉस को उसके साथ होटल में घुसते देखा है — मैंने उसे करण के साथ क्लब में नाचते देखा है — मैंने उसे विशाल के साथ कार में चुंबन करते देखा है — मैंने उसे रात में घर से निकलते देखा है — और मैंने उसे वापस आते देखा है — सुबह — उसके कपड़े अस्त-व्यस्त — उसके बाल बिखरे हुए — उसके चेहरे पर एक अजीब सी तृप्ति।"
राज का लंड और सख्त हो गया। उसकी साँसें तेज़ हो गईं। उसने अपनी पैंट में हाथ डाला — बिना सोचे — उसे दबाया — पर उसने खुद को रोक लिया।
"तुम्हें शायद यह भी पता हो — कि मैंने कुछ फोटो खींची थीं," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक चमक थी — "जब सुमन बॉस के साथ होटल में घुस रही थी — तब मैंने उसकी फोटो खींची थी। जब वह करण के साथ क्लब से निकल रही थी — तब भी मैंने फोटो खींची थी। जब वह विशाल के साथ कार में थी — तब भी मैंने फोटो खींची थी। और जब वह रात में घर से निकल रही थी — तब भी मैंने फोटो खींची थी।"
"तो तुमने यह सब — क्यों?" राज ने पूछा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी कड़वाहट थी।
"क्योंकि," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक जहर था — "मैं चाहती थी कि सुमन का असली चेहरा किसी को पता चले — पर उससे पहले मैं खुद उसे समझना चाहती थी — कि वह क्या है — और क्या नहीं।"
राज ने अपनी आँखें बंद कर लीं — उसने सोचा — नीशा — वह सुमन की बहन है — पर वह उसे इतनी जलन से देखती है — क्यों?
"तुम सोच रहे हो — मैं सुमन से जलती हूँ?" नीशा ने कहा — जैसे उसने राज का मन पढ़ लिया हो — "हाँ — मैं जलती हूँ — पर सिर्फ इसलिए नहीं कि वह मुझसे ज्यादा सुंदर है — या मुझसे ज्यादा अमीर है — या मुझसे ज्यादा सफल है। मैं जलती हूँ — क्योंकि वह वह सब करती है — और फिर भी उसे कोई पकड़ नहीं पाता — और मैं — मैं वह सब नहीं कर सकती — और मुझे हर कोई पकड़ लेता है।"
"तो तुम उसे बदनाम करना चाहती हो?" राज ने पूछा — उसकी आवाज़ में अब गुस्सा नहीं था — बस एक अजीब सी शांति थी।
"नहीं," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक गहराई थी — "मैं उसे उसकी असली जगह दिखाना चाहती हूँ — और मैं चाहती हूँ कि तुम उसे उसी रूप में देखो — जैसी वह है — बिना किसी झूठ के — बिना किसी दिखावे के — और फिर तुम फैसला करो — कि तुम उसे प्यार करते हो — या नफरत — या फिर — कुछ और।"
राज ने गहरी साँस ली — उसका लंड अब भी सख्त था — और उसका दिमाग अब भी सुमन की तस्वीरों से भरा हुआ था।
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कैफे का वह कोना। अब अंधेरा हो चुका था। बाहर रात का सन्नाटा था — और अंदर — राज और नीशा के बीच एक अलग ही सन्नाटा था।
घंटों तक वे सुमन के बारे में बात कर रहे थे — उसके अतीत के बारे में — उसके बॉयफ्रेंड्स के बारे में — उसके बॉस के बारे में — उसके करण के बारे में — उसके विशाल के बारे में — और जैसे-जैसे नीशा सुमन की चुदाई की कहानियाँ सुना रही थी — राज के अंदर की आग और भड़कती जा रही थी।
"जीजू," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में अब एक अलग ही नमी थी — "तुम्हारा लंड — तुम्हारी पैंट में — कितना सख्त हो गया है — मुझे दिख रहा है।"
राज ने नीचे देखा — उसका लंड पूरी तरह सख्त था — उसकी पैंट में एक तम्बू बना हुआ था। उसने अपनी आँखें नीशा पर उठाईं — उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी — वह चमक जो कह रही थी — 'मैं तुम्हें चाहती हूँ — और अब मैं तुम्हें लूँगी।'
"नीशा..." राज ने कहना शुरू किया — पर नीशा ने उसे रोक दिया।
"चुप रहो," उसने कहा — उसकी आवाज़ में एक आदेश था — "अब और बात नहीं — अब और कहानियाँ नहीं — अब बस महसूस करो।"
उसने अपना हाथ बढ़ाया — और राज की जांघ पर रख दिया — ऊपर — बहुत ऊपर — उसके लंड के ठीक ऊपर। उसकी उँगलियाँ उसके पैंट के कपड़े पर हल्की-हल्की दब रही थीं — ऊपर-नीचे — जैसे कोई संगीत का ताल देख रही हो।
"तुम्हारा लंड," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक गहराई थी — "बहुत सख्त है — कितनी देर से तुम सुमन के बारे में सुन रहे हो — और तुम्हारा लंड उसे सुनकर सख्त हो गया — यह मतलब तुम उसे चाहते हो — पर अब — मैं तुम्हें वह दूँगी — जो सुमन नहीं दे सकती।"
उसने राज के लंड को पकड़ लिया — पैंट के ऊपर से ही — और धीरे-धीरे — मसलना शुरू कर दिया — ऊपर-नीचे — जैसे कोई संगीत के ताल पर नाच रहा हो।
"अह्ह्ह..." राज की साँसें रुक गईं — उसकी आँखें बंद हो गईं — उसका सिर पीछे झुक गया।
"सोचो," नीशा ने कहना शुरू किया — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी धुन थी — "सोचो — सुमन — उसके बॉस के साथ — होटल के कमरे में — उसका लंड उसकी चूत में — वह उसे चोद रहा है — और वह कराह रही है — 'आह — आह — और — आह' — और वह उसके बाल खींच रही है — और उसकी चूत उसके लंड को चूस रही है — और वह कराह रहा है — 'तेरी चूत — बहुत गरम है — और' — और वह उसे और गहरा चोद रहा है — और वह चीख रही है — 'और — और — रुक मत — रुक मत — मैं आ रही हूँ'।"
राज का लंड और सख्त हो गया — इतना सख्त कि उसे दर्द हो रहा था — और नीशा के हाथ में वह धड़क रहा था।
"अब," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक आदेश था — "अपनी पैंट खोलो — और मुझे अपना लंड दिखाओ — मैं देखना चाहती हूँ — कि सुमन का पति — उसका लंड कैसा है।"
राज ने अपनी पैंट का बटन खोला — ज़िप खोली — और अपना लंड बाहर निकाला — वह बाहर आ गया — काला, मोटा, नसों से भरा हुआ — इतना सख्त कि उसकी नसें बाहर उभर आई थीं — और उसके सिरे से एक बूँद टपक रही थी — उसकी लार — या उसकी भूख — पता नहीं।
"तुम्हारा लंड," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी आश्चर्य थी — "बहुत बड़ा है — बहुत मोटा — सुमन को इसका मज़ा आता होगा — पर आज — यह मेरा है।"
उसने अपना हाथ बढ़ाया — और उसके लंड को पकड़ लिया — उसकी उँगलियाँ उसके चारों तरफ लिपट गईं — और वह धीरे-धीरे — उसे मसलना शुरू कर दिया — ऊपर-नीचे — जैसे कोई संगीत के ताल पर नाच रहा हो।
"अह्ह्ह..." राज कराहा — एक लंबी, रुकी हुई कराह — "नीशा... बहुत... बहुत अच्छा..."
"अब," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक अलग ही नमी थी — "मैं तुम्हें सुमन के बारे में और बताऊँगी — पर इसके लिए — तुम्हें मुझे और देखना होगा।"
उसने अपनी कुर्सी से खड़े होकर — राज के सामने घुटने टेक दिए — उसकी आँखें राज के लंड पर थीं — और उसके होंठ थोड़े खुले हुए थे — जैसे वह उसे अपने मुँह में लेने के लिए तैयार हो रही हो।
"सोचो," उसने कहना शुरू किया — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी धुन थी — "सुमन — जब वह अपने बॉस के सामने घुटनों पर बैठती थी — और उसका लंड चूसती थी — उसी तरह — जैसे मैं अब तुम्हारा चूसूँगी — और उसके मुँह में उसका बीज आता था — और वह उसे निगल लेती थी — और फिर वह अपने होठों को चाटती थी — और कहती थी — 'और चाहिए?' — और उसका बॉस — वह उसके बाल खींचता था — और उसे और गहरा अपने लंड पर धकेलता था।"
राज की साँसें फट गईं — उसका लंड नीशा के होंठों के ठीक सामने था — और नीशा ने अपना मुँह खोला — और उसे अंदर ले लिया।
नीशा का मुँह — गरम, नम, गीला — राज के लंड को अंदर खींच लिया — पूरा — उसका सिरा उसके गले के पीछे तक चला गया — और उसके होंठ उसके लंड के चारों तरफ लिपट गए।
"अह्ह्ह्ह..." राज चीखा — एक दबी हुई, रुकी हुई चीख — उसके हाथ नीशा के बालों में जा गिरे — और उसने उसे अपने लंड पर दबा लिया।
नीशा ने उसे चूसना शुरू किया — धीरे-धीरे — उसके होठों से उसके लंड को खींचते हुए — उसकी जीभ से उसके सिरे को घुमाते हुए — और उसका मुँह उसके लंड के चारों तरफ लिपटा हुआ था — जैसे कोई नदी के पानी को पी रहा हो।
"सोचो," नीशा ने कहा — अपने मुँह में से — उसकी आवाज़ गीली और गरम थी — "सुमन — जब वह अपने बॉस को चूसती थी — तो उसे कितना मज़ा आता था — वह उसके बाल खींचती थी — और उसका मुँह — उसके लंड पर — और वह सोचती थी — 'यह लंड — मेरा है — और मैं इसे अब चूसूंगी — और फिर — यह मुझे चोदेगा — और फिर — मैं उसे और चाहूंगी'।"
राज का लंड और सख्त हो गया — इतना सख्त कि वह नीशा के गले के पीछे तक जा रहा था — और नीशा उसे और गहरा अंदर ले रही थी — बिना रुके — बिना हिचके।
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"अब," नीशा ने कहा — उसकी आवाज़ में एक आदेश था — "उठो — और सोफे पर लेट जाओ — मैं तुम्हें और दिखाऊंगी — कि सुमन क्या करती थी — और मैं क्या कर सकती हूँ।"
राज उठा — और सोफे पर लेट गया — उसका लंड हवा में सीधा खड़ा था — उसके सिरे से बूँद टपक रही थी — और उसके अंदर एक अजीब सी बेचैनी थी — जो पूछ रही थी — 'क्या होगा अब?'
नीशा उसके ऊपर चढ़ गई — उसकी स्कर्ट ऊपर चढ़ गई थी — उसकी जाँघें नंगी थीं — और वह राज के लंड के ठीक ऊपर बैठी थी — पर अभी अंदर नहीं लिया था — बस ऊपर — बाहर — उसके लंड के सिरे को अपनी चूत के ऊपरी होंठों से छू रही थी — और वह गीली थी — बहुत गीली — उसका पानी राज के लंड पर टपक रहा था।
"देखो," उसने कहना शुरू किया — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी धुन थी — "जब सुमन अपने बॉस के ऊपर बैठती थी — तो वह ऐसे ही बैठती थी — उसके लंड को अपनी चूत के बाहर रगड़ती थी — और फिर — धीरे-धीरे — उसे अंदर लेती थी — और वह कराहती थी — 'आह — आह — और — आह' — और वह उसके स्तनों को दबाती थी — और उसके निप्पल को दाँतों से दबाती थी — और फिर — वह झूलना शुरू कर देती थी — जैसे कोई नाव समुद्र में — और वह चीखती थी — 'और — और — रुक मत — मैं आ रही हूँ'।"
नीशा ने अपनी कमर नीचे की — और धीरे-धीरे — राज का लंड उसकी चूत के अंदर चला गया — पूरा — एक बार में — उसकी चूत उसे चूस लिया — उसके अंदर की गर्मी ने राज के लंड को जला दिया — और नीशा की आँखें बंद हो गईं — उसका मुँह खुला — और उससे एक लंबी कराह निकली —
"अह्ह्ह्ह..."
राज की साँसें रुक गईं — उसका लंड नीशा की चूत के अंदर था — और वह उसे दबा रही थी — ऊपर-नीचे — जैसे कोई संगीत के ताल पर नाच रही हो — और उसके स्तन राज के चेहरे पर झूल रहे थे — और राज ने उन्हें पकड़ लिया — उन्हें दबाया — उसके निप्पल कड़े थे — और राज ने उन्हें अपने मुँह में ले लिया — चूसा — जोर से — और नीशा चीखी —**
"अह्ह्ह... राज... बहुत... बहुत अच्छा..."
"अब मैं चोदूँगा तुम्हें," राज ने कहा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी गहराई थी — "जैसे सुमन का बॉस उसे चोदता था — वैसे ही — और तुम — तुम सोचो — कि तुम सुमन हो — और मैं तुम्हारा बॉस हूँ — और मैं तुम्हें चोद रहा हूँ — और तुम कराह रही हो — 'मुझे चोदो — और — और — रुक मत — मैं आ रही हूँ'।"
उसने नीशा को पलटा — उसे सोफे पर लिटाया — और उसके ऊपर चढ़ गया — उसका लंड नीशा की चूत के अंदर था — और वह उसे और गहरा चोद रहा था — जोर से — तेज़ — बिना रुके — जैसे कोई पागल घोड़ा दौड़ रहा हो — और नीशा चीख रही थी — उसकी आवाज़ कैफे के कोने में गूँज रही थी —
"आह — आह — और — और — रुक मत — रुक मत — मैं आ रही हूँ — मैं आ रही हूँ —"
राज और नीशा — दोनों एक साथ चरम पर पहुँचे — उनके शरीर एक साथ काँपे — उनके मुँह से एक साथ चीख निकली — उनका बीज एक साथ बहा — राज का बीज नीशा की चूत के अंदर — और नीशा का पानी राज के लंड पर — और वे दोनों — वहाँ — उस कैफे के कोने में — एक साथ फट गए।
"अह्ह्ह्ह्ह..."
कुछ पलों के बाद — वे दोनों चुप हो गए — उनकी साँसें धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं — उनके शरीर एक दूसरे से चिपके हुए थे — और नीशा ने राज के कान में फुसफुसाया —
"अब तुम मेरे हो, राज — और मैं तुम्हारी हूँ — और हम दोनों मिलकर — सुमन को वह देंगे — जो वह चाहती है — और उससे भी अधिक — जो वह नहीं चाहती।"
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रिजवान अपने घर में अकेला बैठा था। उसके हाथ में मोबाइल था — और उसके दिमाग में सुमन थी।
वह सोच रहा था — राज — वह कहाँ है? वह क्या कर रहा है? क्या वह सच में बैंगलोर गया है? या वह कहीं और है?
रिजवान ने सुमन से पूछा था — "राज कहाँ है?"
सुमन ने बताया था — "बैंगलोर। ऑफिस का काम है। तीन दिन के लिए गया है।"
पर रिजवान को यकीन नहीं था। उसने सोचा — अगर राज सच में बैंगलोर गया है — तो वह किसके साथ है? क्या वह अकेला है? या किसी और के साथ?
रिजवान ने अपने कॉन्टैक्ट्स को खंगालना शुरू किया — उसके देश में बहुत कॉन्टैक्ट्स थे — पुराने दोस्त — नए दोस्त — जान-पहचान वाले — और उन सब में से — एक था — शाहिद।
शाहिद बैंगलोर के एक पाँच सितारा होटल में काम करता था — वह होटल के सिक्योरिटी और रिसेप्शन विभाग में था — उसके पास होटल की हर जानकारी थी — कौन कब आता है — कौन कब जाता है — किसके साथ कौन है — और किसके कमरे में क्या हो रहा है — वह सब जानता था।
रिजवान ने शाहिद को फोन किया — रात के 10 बज रहे थे — पर शाहिद ने उठा लिया।
"कौन?" शाहिद ने पूछा — उसकी आवाज़ में नींद थी।
"मैं, रिजवान," उसने कहा — उसकी आवाज़ में एक गंभीरता थी — "एक काम है — बहुत ज़रूरी — अगर तूने कर दिया — तो मैं तुझे एक ऐसी चीज़ दूँगा — जो तूने कभी सोची नहीं होगी।"
"क्या चीज़?" शाहिद ने पूछा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी जिज्ञासा थी।
रिजवान ने अपने फोन से सुमन की एक फोटो भेजी — वह फोटो — जो उसने दुकान पर ली थी — जब सुमन काउंटर पर झुकी हुई थी — उसकी गांड बाहर — उसकी चूत का उभार — और उसका चेहरा — आधा दिख रहा था — पर उसके शरीर का पूरा आकर्षण — साफ दिख रहा था।
शाहिद ने फोटो देखी — उसकी आँखें फटी रह गईं — उसका लंड तुरंत सख्त हो गया — उसने अपनी पैंट में हाथ डाला — उसे दबाया — और फोन पर बोला —
"यह... यह कौन है?" उसने पूछा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी लालच थी।
"यह सुमन है," रिजवान ने कहा — उसकी आवाज़ में एक मुस्कान थी — "मेरी... दोस्त — और अगर तूने मेरा काम कर दिया — तो मैं तुझे इसकी चूत दिलवाऊँगा — इसी होटल में — तेरे होटल में — जब तू चाहे — जैसे तू चाहे — और जितनी बार तू चाहे।"
"सच?" शाहिद ने पूछा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी उत्तेजना थी — "यह सच है?"
"सच," रिजवान ने कहा — उसकी आवाज़ में एक गहराई थी — "बस तू मेरा काम कर दे — बाकी मैं देख लूँगा।"
"क्या काम?" शाहिद ने पूछा — उसकी आवाज़ में अब कोई नींद नहीं थी।
"राज," रिजवान ने कहा — उसकी आवाज़ में एक कठोरता थी — "राज नाम का एक आदमी तेरे होटल में है — पता कर — वह किसके साथ है — किस कमरे में है — और वह क्या कर रहा है — और सब कुछ — मुझे बता — हर एक चीज़ — चाहे वह कितनी भी छोटी क्यों न हो — मुझे बता।"
शाहिद ने फोन रखा — और वह अपने काम में जुट गया — उसके पास होटल के सारे रिकॉर्ड थे — वह कंप्यूटर पर गया — और राज का नाम सर्च किया —
राज कुमार — चेक-इन — आज सुबह — कमरा नंबर 412 — और उसके साथ — एक और नाम — नीशा — नीशा शर्मा — उसी कमरे में — एक ही बुकिंग — एक ही एंट्री — और वे दोनों — एक साथ — आज सुबह — होटल में आए थे — और तब से — अभी तक — वे बाहर नहीं आए हैं।
शाहिद ने रिजवान को फोन किया —
"रिजवान," उसने कहा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी चमक थी — "राज कमरे नंबर 412 में है — और उसके साथ एक औरत है — नीशा नाम — वे एक साथ आए हैं — और वे अभी तक बाहर नहीं आए हैं — क्या मुझे — कुछ और जानना है?"
"हाँ," रिजवान ने कहा — उसकी आवाज़ में एक अजीब सी मुस्कान थी — "मुझे बता — वे क्या कर रहे हैं — अंदर — क्या सुनाई देता है — क्या आवाज़ें आ रही हैं — उनके कमरे से — मुझे सब बता — हर एक आवाज़ — हर एक कराह — हर एक चीख — मुझे सब चाहिए — क्योंकि — यही तो मेरा खेल है।"
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शाहिद होटल के 412 नंबर कमरे के बाहर गया वह वहाँ खड़ा हो गया अपना कान दरवाज़े पर रखा और सुनने लगा
पहले तो कुछ नहीं फिर एक कराह औरत की नीशा की "अह्ह्ह... राज... और... और..." और फिर राज की आवाज़ "चुप रहो और कराहो जैसे सुमन कराहती है वैसे ही और सोचो कि मैं सुमन को चोद रहा हूँ और तुम सुमन हो और तुम कराह रही हो 'मुझे चोदो और और रुक मत' और मैं तुम्हें चोद रहा हूँ और तुम्हारी चूत मेरे लंड पर और तुम फट रही हो और मैं मैं भी और और "
शाहिद की साँसें तेज़ हो गईं उसका लंड सख्त हो गया और उसने रिजवान को फोन किया
"रिजवान," उसने कहा उसकी आवाज़ में एक अजीब सी उत्तेजना थी "वे... वे चोद रहे हैं राज और वह औरत नीशा वे एक-दूसरे को चोद रहे हैं और राज वह उसे सुमन बना कर चोद रहा है और वह कराह रही है और वह चीख रहा है और वे दोनों एक साथ चरम पर पहुँच रहे हैं और मैं मैं यह सब सुन रहा हूँ और मेरा मेरा लंड सख्त हो गया है और मैं मैं क्या करूँ?"
"कुछ मत कर," रिजवान ने कहा उसकी आवाज़ में एक अजीब सी शांति थी "बस सुन और याद रख हर एक आवाज़ हर एक कराह हर एक चीख और फिर मुझे बता कि क्या सुनाई दिया और फिर हम इस बात का इस्तेमाल करेंगे सुमन को राज से दूर करने के लिए और उसे हमारा बनाने के लिए।"
रात के 11 बज रहे थे। होटल की गलियारे में सन्नाटा था सिर्फ दीवारों पर लगी मंद रोशनी जल रही थी। शाहिद 412 नंबर कमरे के बाहर खड़ा था। उसके हाथ में मोबाइल था पर उसकी आँखें कीहोल पर टिकी हुई थीं और उसके अंदर एक अजीब सी बेचैनी थी वह बेचैनी जो उसे कुछ ऐसा दिखाने को मजबूर कर रही थी जो उसे नहीं देखना चाहिए था।
उसने अपनी आँख कीहोल में लगाई और उसने देखा राज और नीशा उस कमरे के अंदर और उसका दिल तेज़ धड़कने लगा उसके हाथ काँपने लगे और उसका लंड उसकी पैंट में सख्त होने लगा धीरे-धीरे जैसे कोई जाग रहा हो।
कमरे के अंदर मंद रोशनी थी बेडसाइड लैंप की पीली रोशनी जो नीशा के शरीर पर पड़ रही थी और उसे सुनहरा बना रही थी।
राज कमरे के बीचोंबीच खड़ा था पूरी तरह नंगा। उसका शरीर मजबूत और भरा हुआ था। उसकी छाती पर काले बाल थे और उसके पेट पर मांसपेशियों की रेखाएँ थीं जो उसकी हर साँस के साथ उभर रही थीं। उसका लंड वह हवा में सीधा खड़ा था काला, मोटा, नसों से भरा हुआ उसके सिरे से एक बूँद चमक रही थी उसकी लार या उसकी भूख पता नहीं पर वह वहाँ थी टपकने को तैयार।
नीशा बिस्तर के किनारे बैठी थी उसका नाइट गाउन काला, पतला, लेस वाला उसके शरीर पर लिपटा हुआ था। नाइट गाउन के अंदर उसके स्तन स्वतंत्र थे उनका भार उसके कपड़े को नीचे खींच रहा था और उसके निप्पल वे कड़े हो गए थे कपड़े के नीचे से दो काली बूँदों की तरह। उसकी जांघें नंगी थीं और उनके बीच उसकी चूत नाइट गाउन के नीचे अधखुली गीली चमकती हुई उसके लेबिया फूले हुए और उनके बीच एक गुलाबी रंग जो मंद रोशनी में चमक रहा था। उसकी आँखें राज पर थीं उसकी आँखों में भूख थी वह भूख जो कह रही थी 'आओ मुझे लो मुझे चोदो मुझे तोड़ो।'
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"आओ," राज ने कहा उसकी आवाज़ में एक गहराई थी एक ऐसी गहराई जो शाहिद की रूह तक पहुँच गई "आओ और मेरे सामने घुटनों पर बैठो जैसे सुमन अपने बॉस के सामने बैठती थी वैसे ही और मुझे दिखाओ कि तुम क्या कर सकती हो।"
नीशा खड़ी हुई धीरे-धीरे अपने नाइट गाउन को सहलाती हुई वह राज के सामने आई और उसके सामने घुटनों पर बैठ गई उसकी आँखें राज के लंड पर थीं उसके होंठ थोड़े खुले हुए थे और उसकी जीभ उसने उसे बाहर निकाला और उसके लंड के सिरे को छुआ हल्का सा बिना दबाव के और फिर वह रुक गई बस एक पल के लिए जैसे वह उस पल का स्वाद लेना चाहती थी और फिर उसने उसे अपने मुँह में ले लिया पूरा एक बार में और उसके होंठ उसके लंड के चारों तरफ लिपट गए और वह चूसना शुरू कर दिया धीरे-धीरे जैसे कोई अमृत पी रहा हो।
शाहिद की साँसें तेज़ हो गईं उसकी पैंट में उसका लंड इतना सख्त हो गया था कि उसे दर्द हो रहा था उसने अपनी पैंट का बटन खोला धीरे-धीरे और अपना लंड बाहर निकाला और उसे पकड़ लिया और वह देखता रहा कीहोल के उस पार उस दृश्य को जो उसे पागल कर रहा था।
नीशा का मुँह राज के लंड पर था उसके होंठ उसके चारों तरफ लिपटे हुए थे उसकी जीभ उसके सिरे पर गोल-गोल घूम रही थी उसके हाथ उसके लंड के निचले हिस्से को पकड़े हुए थे और वह उसे अंदर-बाहर कर रही थी धीरे-धीरे जैसे कोई संगीत के ताल पर नाच रहा हो।
"ग्लप... ग्लप... ग्लप..." उसके मुँह से गीली आवाज़ें आ रही थीं जो कमरे में गूँज रही थीं उसका सिर आगे-पीछे हो रहा था और उसके स्तन वे उसके नाइट गाउन के अंदर झूल रहे थे उसके निप्पल कड़े हो गए थे और उसके बाल वे उसके चेहरे पर बिखर गए थे और वह पसीने से चमक रही थी उसका मुँह राज के लंड पर और उसकी आँखें बंद थीं जैसे वह उस एहसास में पूरी तरह खो रही हो और राज वह उसके बाल पकड़े हुए था और उसे अपने लंड पर दबा रहा था जोर से और उसके मुँह से एक लंबी कराह निकल रही थी "अह्ह्ह्ह...
"और," राज ने कहा उसकी आवाज़ में एक अजीब सी शक्ति थी "और रुक मत और गहरा और और "
नीशा ने और तेज़ किया उसके होंठ और तेज़ी से उसके लंड को चूस रहे थे उसकी जीभ उसके सिरे पर और तेज़ी से घूम रही थी उसके हाथ उसके अंडकोषों को दबा रहे थे और उसकी आँखें उसने उन्हें खोला और राज को देखा उसकी आँखों में भूख थी और राज ने अपना सिर पीछे झुका लिया और उसकी साँसें तेज़ हो गईं और वह कराह रहा था "मैं आ रहा हूँ मैं आ रहा हूँ " और उसने नीशा का सिर और गहरा दबा दिया और उसका बीज उसके मुँह में आ गया गरम गाढ़ा चिपचिपा और नीशा ने उसे निगल लिया पूरा बिना रुके बिना रुके और फिर उसने अपने होठों को चाटा और राज को देखा और कहा "और चाहिए?
शाहिद वह दरवाज़े के बाहर उसे देख रहा था और उसका लंड उसके हाथ में और सख्त हो गया था और वह उसे और तेज़ी से मसल रहा था उसकी साँसें तेज़ हो गई थीं उसके मुँह से "आह आह आह" निकल रहा था और उसके दिमाग में बस एक ही ख्याल था 'यह यह कमाल है यह नीशा वह सुमन से भी बेहतर है या शायद वह सुमन की तरह ही है पर राज वह उसे सुमन बना कर चोद रहा है और वह वह उसकी बात मान रही है और मैं मैं यह सब देख रहा हूँ और मेरा लंड उसकी पैंट में फटने को है और मैं मैं क्या करूँ?
राज ने नीशा को उठाया धीरे से उसे बिस्तर पर लिटाया और उसके नाइट गाउन को ऊपर उठाया और उसकी चूत को देखा वहाँ कोई और नहीं था सिर्फ उसकी चूत फूली हुई गीली चमकती हुई उसके लेबिया खुले हुए थे और अंदर एक गुलाबी रंग जो पसीने से चमक रहा था और उसके बाल उसके आसपास अस्त-व्यस्त थे और वहाँ से एक गंध चूत और पसीने और औरत की जो शाहिद तक पहुँच रही थी और वह उसे सूँघ रहा था अपने दिमाग में जैसे कोई भूखा शेर अपने शिकार को सूँघ रहा हो।
राज ने अपना लंड उसकी चूत के ऊपरी होंठों पर रखा और धीरे-धीरे उसे अंदर धकेल दिया पूरा एक बार में और नीशा उसकी आँखें बंद हो गईं उसका मुँह खुल गया और उससे एक लंबी कराह निकली "अह्ह्ह्ह..." एक ऐसी कराह जो शाहिद की रूह तक पहुँच गई और राज उसने अपना लंड और गहरा अंदर धकेला और फिर धीरे-धीरे उसे बाहर निकाला और फिर अंदर बाहर अंदर बाहर जैसे कोई संगीत के ताल पर नाच रहा हो और नीशा उसके हाथ राज की पीठ पर और उसके पैर राज की कमर पर और वह कराह रही थी "और और रुक मत रुक मत मैं आ रही हूँ
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राज ने उसके स्तनों को पकड़ लिया उन्हें मसला उसके निप्पल को दाँतों से दबाया और नीशा चीखी "अह्ह्ह्ह... राज... बहुत... बहुत अच्छा..." और राज उसने और तेज़ी से उसे चोदना शुरू कर दिया जैसे कोई पागल घोड़ा दौड़ रहा हो उसके अंडकोष उसकी चूत पर थप-थप की आवाज़ और उसका बीज उसकी चूत के अंदर जा रहा था और बाहर और अंदर और बाहर और नीशा का शरीर काँप रहा था और उसकी साँसें फट रही थीं और वह चीख रही थी "मैं आ रही हूँ मैं आ रही हूँ मैं आ रही हूँ " और उसी समय राज भी चरम पर पहुँच गया उसका बीज नीशा की चूत के अंदर बह गया और वे दोनों एक साथ फट गए और उनके शरीर एक दूसरे से चिपक गए और वे चुप हो गए उनकी साँसें धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं और उनके दिल धड़क रहे थे एक साथ उसी लय में जैसे कोई गीत अपने चरम पर पहुँच गया हो और अब शांत हो रहा हो धीरे-धीरे गहरा और भीतर।
शाहिद वह दरवाज़े के बाहर उसके शरीर पर काबू नहीं था उसका लंड उसके हाथ में और सख्त हो गया था और वह उसे और तेज़ी से मसल रहा था उसकी साँसें तेज़ हो गई थीं उसके मुँह से "आह आह आह" निकल रहा था और उसके दिमाग में बस एक ही ख्याल था 'यह यह राज है और यह नीशा है और वे एक-दूसरे को चोद रहे हैं और मैं मैं यह सब देख रहा हूँ और मेरा लंड इस दृश्य से सख्त हो गया है और मैं मैं इसका इस्तेमाल करूँगा रिजवान के लिए और सुमन के लिए और मैं मैं सुमन को चाहता हूँ और अब मुझे पता है कि राज क्या कर रहा है और नीशा क्या कर रही है और मैं मैं रिजवान को सब बताऊँगा और वह वह सुमन को मेरे पास लाएगा और मैं मैं उसे चोदूँगा जैसे राज ने नीशा को चोदा और जैसे सुमन का बॉस उसे चोदता था और तब मैं मैं सब कुछ करूँगा जो रिजवान कहे बस सुमन को मेरे पास दिलवा दो और मैं मैं आपका हर आदेश मानूँगा।'
उसकी साँसें और तेज़ हो गईं उसकी आँखें बंद हो गईं और वह फट गया उसका बीज उसके हाथ पर और उसकी पैंट पर बह गया गरम गाढ़ा चिपचिपा और उसकी साँसें धीरे-धीरे शांत हो गईं और उसने अपनी आँखें खोलीं और कीहोल से हटाया
रिजवान ने शाहिद को फोन किया उसकी आवाज़ में एक अजीब सी शांति थी वह शांति जो कह रही थी 'अब खेल शुरू होता है।'
"शाहिद," रिजवान ने कहा उसकी आवाज़ में एक गहराई थी "अब तूने देख लिया राज और नीशा को उनकी चुदाई उनकी कराह उनकी चीख अब तू और करेगा अब तू उनकी फोटो खींचेगा जब भी वे होटल से बाहर निकलें या अंदर आएँ साथ-साथ उनकी फोटो हर एक कदम की हर एक मुस्कान की हर एक नज़र की मुझे चाहिए सब कुछ ताकि मैं सुमन को दिखा सकूँ कि उसका पति क्या कर रहा है और किसके साथ और कैसे और फिर वह मेरे पास आएगी और मैं मैं उसे अपना बनाऊँगा पूरी तरह और तू तू उसकी चूत चखेगा जैसा मैंने वादा किया था वैसा ही।"
शाहिद ने फोन रखा उसके हाथ काँप रहे थे पर उसके अंदर एक अजीब सी उत्तेजना थी वह उत्तेजना जो उसे और अधिक करने को मजबूर कर रही थी और उसने अपना काम शुरू कर दिया वह होटल के लॉबी में गया और वहाँ बैठ गया जहाँ से पूरा प्रवेश द्वार दिखता था और वह इंतज़ार करने लगा राज और नीशा के बाहर आने का या अंदर आने का और उसके हाथ में उसका मोबाइल था कैमरा ऑन और वह तैयार था हर एक पल को कैद करने के लिए हर एक हरकत को हर एक नज़र को हर एक मुस्कान को और जब वे आएँगे तो वह उनकी फोटो खींचेगा और रिजवान को भेजेगा और रिजवान वह उन फोटो का इस्तेमाल करेगा सुमन को तोड़ने के लिए और उसे अपना बनाने के लिए और यही यही रिजवान का खेल था और अब शाहिद भी उस खेल का हिस्सा था और वह खेल अब और आगे बढ़ेगा और कोई नहीं रुकेगा जब तक सुमन पूरी तरह रिजवान की न हो जाए और राज वह सिर्फ एक नाम रह जाए और नीशा वह सिर्फ एक साजिश और शाहिद वह सिर्फ एक साक्षी और रिजवान वह विजेता।
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