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07-06-2026, 08:26 PM
(This post was last modified: 08-06-2026, 09:21 PM by Certified Addict. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
वह आग जो कभी बुझती नहीं
राज उस दिन पहली बार समझा था कि उसकी बीवी दुनिया की नज़रों में कैसी दिखती है।
शादी को मुश्किल से छह महीने हुए थे। वह और सुमन एक मॉल में खड़े थे — वह कॉफी की लाइन में था, वह बाहर उसका इंतज़ार कर रही थी। एक साधारण सी सलवार-कमीज़ में। बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के।
जब वह वापस लौटा, तो उसने देखा — एक आदमी सुमन को घूर रहा था।
सिर्फ घूर नहीं रहा था। निगल रहा था। उसकी नज़रें सुमन के चेहरे से उसकी छाती पर, फिर उसके कूल्हों पर, फिर उसके चेहरे पर — जैसे कोई भूखा जानवर शिकार को नाप रहा हो। उस आदमी की पत्नी उसकी बाँह खींच रही थी, लेकिन उसकी आँखें नहीं हट रही थीं।
उस रात राज ने सुमन से बेइंतहा चुदाई की। उसने उसे इतनी बार चोदा कि वह बेहोश हो गई। और पूरे समय, उसके दिमाग में वह आदमी था — वह नज़र, वह भूख, वह हावी होने की चाहत।
लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। उसने उस रात को अपने अंदर दबा लिया। दबाता गया।
राज — शादीशुदा आदमी, और उसके अंदर की उथल-पुथल
राज तीस में था। फिट, तेज दिमाग, अच्छी नौकरी। बाहर से वह एक परफेक्ट हसबैंड था — जिम्मेदार, प्यार करने वाला, थोड़ा शरारती लेकिन हद में। उसने सुमन से शादी की थी क्योंकि वह उससे प्यार करता था — गहरा, बिना शर्त, लगभग दर्द भरा प्यार।
लेकिन प्यार के साथ-साथ कुछ और भी था। कुछ जिसे वह नाम नहीं देना चाहता था।
वह चाहता था कि सुमन सिर्फ उसकी हो। बिल्कुल। पूरी तरह।
लेकिन साथ ही — वह चाहता था कि दुनिया उसे देखे। कि दूसरे उसके शरीर पर भूखी नज़र डालें। कि कोई अनजान सड़क पर उसकी चूचियों को ताकते हुए अपना लंड दबाए। कि सुमन उनकी इच्छा का ताप अपने ऊपर महसूस करे — और फिर उसे बताए।
उसे समझ नहीं आता था कि यह कैसे संभव है। दो विपरीत इच्छाएँ, एक ही दिल में।
पहली: "वह सिर्फ मेरी है।"
दूसरी: "मैं चाहता हूँ कि पूरी दुनिया जाने — क्या माल है मेरी बीवी।"
रातों-रात वह सुमन को चोदते हुए अपने दिमाग में दूसरे पुरुषों की कल्पना करने लगा। उसके कान में धीरे-धीरे कहानियाँ गढ़ने लगा — "इमेजिन कर, कोई और है... तेरे पीछे... अपना लंड तेरी गांड पर रगड़ रहा है..."
हर बार सुमन की चूत जवाब देती — पानी की तरह बहती। और हर बार राज का लंड और सख्त हो जाता।
सुमन — जो अनजान थी, लेकिन अब जाग रही थी
सुमन उससे दो साल छोटी थी। गोरी, भरी हुई, मांसल — बड़ी चूचियाँ, चौड़े कूल्हे, जांघें जो आपस में रगड़ खाती थीं। दिखने में सादा, शरीफ, "अच्छी बहू" जैसी। शादी के पहले उसने कभी किसी और को नहीं छुआ था। उसने कभी अपने शरीर को जाना ही नहीं था।
लेकिन राज ने उसे जगाया।
धीरे-धीरे। रात-रात। एक-एक कल्पना के साथ। पहले वह शर्माती थी, मना करती थी, राज की तरफ पीठ करके सोने की कोशिश करती थी। लेकिन उसकी चूत उससे ज्यादा ईमानदार थी — वह गीली हो जाती थी, बस राज के उन शब्दों से — "कोई और तुझे देख रहा है... उसका लंड तेरे लिए खड़ा है..."
और फिर एक दिन — उसने कहा — "हाँ।"
बस इतना सा "हाँ।" और वह टूट गई। अपनी ही सीमाओं को। अपने ही डर को। वह अब जानती थी — उसके अंदर भी वही आग है। बस उसे जलाने वाला कोई चाहिए था।
राज की इच्छा — सिर्फ सेक्स नहीं, उससे कहीं ज्यादा
राज किसी स्विंगर या वल्गर आदमी की तरह नहीं सोचता था। उसे सिर्फ चुदाई देखने का शौक नहीं था।
उसे देखना था — सुमन का मुक्त होना।
वह देखना चाहता था कि जब सुमन किसी और की नज़रों में अपने शरीर को महसूस करेगी, तो उसके चेहरे पर कौन सा भाव आएगा। जब कोई अनजान उँगली उसकी चूत पर रखेगा, तो उसके होंठ कैसे काँपेंगे। जब वह दो आदमियों के बीच फँसकर अपना संयम खो देगी, तो उसकी आवाज़ कैसी होगी।
वह देखना चाहता था — सुमन को एक राँड की तरह। उस शब्द का अपमान नहीं, बल्कि आज़ादी के तौर पर। जहाँ वह किसी की नहीं, सिर्फ अपनी होगी।
और सबसे बड़ी बात — वह देखना चाहता था कि आखिर में वही सुमन उसकी बाँहों में वापस आएगी। गीली, थकी हुई, अपराधबोध से भरी हुई — लेकिन पूरी तरह उसकी।
यही उसका डार्क फैंटेसी था। उसकी चाहत थी — सुमन को दूसरों के हाथों खोना, ताकि उसे हमेशा के लिए पा सके।
वह मोड़ जब कल्पना हकीकत बनने लगी
राज ने अपनी इच्छा को सुमन के सामने रखा — धीरे-धीरे, रातों-रात, कहानियों के सहारे। उसे एक नए तरह की चुदाई दी — जहाँ उसका शरीर तो राज के अंदर था, लेकिन उसका दिमाग किसी और के लंड पर झूल रहा था।
और सुमन — वह पिघल गई।
पहले कल्पना, फिर बातें, फिर ड्रेसिंग — टाइट कपड़े, डीप नेक, बिना ब्रा के। फिर बालकनी में मिश्रा अंकल के सामने खड़ा होना। फिर क्लब में दो आदमियों के बीच नाचना। फिर पार्क में रात को अजनबियों के सामने अपनी चूचियाँ निकालना।
राज देख रहा था — अपनी बीवी को एक नए रूप में। उसकी सुमन, जो कभी किसी और की निगाहों से शरमाती थी, अब खुद को अजनबियों के सामने खोल रही थी। उसकी चूत अब सिर्फ राज के लिए गीली नहीं होती थी — वह किसी अनजान की उँगली पर भी फूल जाती थी।
और राज — वह पागल हो रहा था। खुशी से। उत्तेजना से। डर से। प्यार से।
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07-06-2026, 11:29 PM
(This post was last modified: 13-06-2026, 11:06 AM by Certified Addict. Edited 2 times in total. Edited 2 times in total.)
Chapter 1
SUMAN
राज करवट बदलकर उसके सामने आ गया। उसका हाथ पहले से ही उसकी चूची पर था — बिना ब्रा के, सिर्फ नाइटी के अंदर। भारी, गर्म। उसकी उँगलियाँ अपने आप चलने लगीं।
निप्पल सख्त हो गया। कपड़े के नीचे दबकर।
"हम्म्म..." सुमन नीली रोशनी में करवट बदलते हुए बुदबुदाई। नींद और जागने के बीच की वह आवाज़ जो राज को पागल कर देती थी।
उसने पूरा हाथ रख दिया। चूची उसकी हथेली में समाने लगी। भरकर। जैसे गीली मिट्टी।
सुमन की साँस भारी हुई। उसने राज का हाथ नहीं हटाया। बस करवट और ली — अब वह उसकी तरफ पीठ करके सो रही थी, लेकिन उसके हाथ को अपनी चूचियों के बीच दबा रखा था।
राज का लंड नीचे सख्त हो चुका था। उसने अपना पेट उसकी पीठ से चिपका दिया। अपने लंड को उसकी निचली पीठ और नाइटी के बीच दबाया।
सुमन चुप थी। लेकिन उसने अपनी गांड उसकी तरफ खिसका दी।
एक इशारा। हाँ।
राज ने धीरे से नाइटी ऊपर की। सुमन ने विरोध नहीं किया। उसके कूल्हे खुले — गोरे, मांसल, गर्म। उसने अपने लंड को बिना कंडोम के उसकी चूत के बाहर रगड़ना शुरू कर दिया। नमी थी। पहले से ही।
"अंदर..." सुमन ने फुसफुसाया। "अब ज्यादा मत रगड़... डाल दे।"
राज ने डाला। एक ही बार में, पूरा। सुमन कराही। दबी हुई, जैसे डरे कि कोई सुन ले — हालाँकि घर में कोई और था नहीं।
राज ने धक्के देना शुरू किए। धीरे, लेकिन गहरे। सुमन की चूत अंदर से गीली हो चुकी थी। उसकी परतें राज के लंड को चूस रही थीं।
और तभी राज ने अपना मुंह उसके कान के पास ले जाकर कहा —
"सुन... एक स्टोरी सुना रहा हूँ तुझे।"
सुमन की साँस फटी हुई थी। "क्या... क्या स्टोरी?"
राज ने उसके अंदर और गहरा धकेला। "इमेजिन कर... तू किसी और के लंड को अपनी चूत में ले रही है।"
सुमन की पूरी बॉडी जकड़ गई। उसकी चूत सिकुड़ी, फिर तुरंत ढीली हुई। उसने राज की कलाई पकड़ी। "नहीं... ऐसी बातें मत कर... क्यों बोल रहा है?"
"बस इमेजिन कर," राज ने उसकी एक टांग ऊपर उठा दी। अब वह साइड में ज्यादा खुली थी। उसका लंड और अंदर जा रहा था। "कोई और... अनजान... उसकी उँगलियाँ तेरी गांड पर... उसका लंड तेरे अंदर..."
"बंद... बंद कर, राज।" लेकिन उसकी आवाज़ काँप रही थी। और उसकी चूत — राज ने महसूस किया — वह और ज्यादा गीली हो चुकी थी। एकदम से। जैसे कोई नल खुल गया हो।
राज ने धक्के तेज़ किए। "उसकी साँसें तेरी गर्दन पर... उसके हाथ तेरे बालों में... और तू मुझे देख रही है..."
"चुप कर!" सुमन ने जोर से कहा, लेकिन उसकी गांड हवा में उठ रही थी। वह खुद राज के लंड पर पीछे आगे हो रही थी। उसके मुँह से सिर्फ "हाँ-हाँ" निकल रहा था।
राज ने अपना अंगूठा उसकी गांड पर रखा। जोर से दबाया। "और तब वह तुझे कहे — 'बोल, मैं कैसा हूँ?' और तू कहे... क्या कहेगी?"
सुमन ने अपना मुँह तकिए में दबाया। लेकिन उसकी चूत ने जवाब दे दिया — वह फट रही थी। उसके शरीर से पानी राज की जांघों पर टपक रहा था।
"रुक मत... रुक मत..." सुमन बुदबुदाई। "चोदता रह... जैसे चोद रहा है..."
राज खुश था। अंदर ही अंदर पागल। उसकी बीवी पानी छोड़ रही थी सिर्फ एक कल्पना पर। वह अपनी गांड ऊपर उठा रही थी — जितना ऊपर हो सके — ताकि उसका लंड और अंदर जाए।
"हाँ... हाँ... किसी और का..." सुमन ने खुद ही फुसफुसाया। फिर उसने लुढ़कते हुए राज को अपने ऊपर बिठा लिया। राज ऊपर था। सुमन नीचे। उसने अपनी दोनों टांगें राज के कंधों पर रख दीं। पूरी खुली। गीली। बेपनाह।
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07-06-2026, 11:31 PM
(This post was last modified: 08-06-2026, 09:26 PM by Certified Addict. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
राज ने जोर से लंड अंदर पटका। सुमन चीखी — दबी हुई, लंबी चीख।
"चोद मुझे... रुक मत... और भीतर..."
उसकी चूत काँप रही थी। राज ने उसके चेहरे की तरफ देखा — आँखें बंद, मुँह खुला, जीभ बाहर। वह अब किसी और के बारे में सोच रही थी। राज नहीं।
लेकिन राज को कोई फर्क नहीं पड़ा। वह देख रहा था। उसकी बीवी — उसकी शरीफ, सुंदर, भरी हुई बीवी — अपनी चूत फाड़े ले रही थी।
"हाँ... हाँ... वो मुझे चोद रहा है..." सुमन चिल्लाई।
और फिर वह आ गई।
एक झटके में। उसकी पूरी बॉडी सख्त हो गई, फिर ढीली पड़ गई। उसके अंदर की गर्मी ने राज के लंड को ऐसे दबाया जैसे कोई मुट्ठी भरकर छोड़ दे। पानी बह निकला — चादर पर, राज के लंड पर, बॉल्स पर।
राज अभी नहीं आया था। वह ऊपर खड़ा था, जैसे कोई जल्लाद। सुमन थकी हुई, काँपती हुई, अपने आए हुए ऑर्गैज्म के बीच उसकी तरफ देखा।
"कैसा लगा?" राज ने पूछा।
सुमन ने कोई जवाब नहीं दिया। बस उसने अपनी उँगली अपनी चूत पर फिराई — कीचड़ जैसा पानी — और फिर वह उँगली राज के होठों पर रख दी।
बस तीन हफ्ते में सुमन वो औरत बन गई थी जिसे वह खुद नहीं पहचान पा रही थी। पहले वह शर्माती थी। 'नहीं राज, ये सब बकवास है।' 'तुझे क्या हो गया है?' 'मैं ऐसा कुछ नहीं सोच सकती।'
लेकिन रातें। वो रातें।
हर रात कोई नया चेहरा। कोई नया नाम। राज उसके कान में कहानियाँ गढ़ता — कभी ऑफिस का वो सीनियर जो उसे घूरता है, कभी जिम का वो ट्रेनर जिसकी नजर हमेशा उसकी चूचियों पर रहती है, कभी कोई अनजान आदमी मेट्रो में। और हर बार सुमन की चूत ने हाँ कही।
पानी की तरह बही वह। राज के लंड पर झूलते हुए वह उन काल्पनिक लंडों के नाम चिल्लाने लगी थी। "हाँ... राहुल की चोद... हाँ... आकाश भर दे मुझे..."
शुरुआत में वह खुद से घृणा करती थी। सुबह उठकर लगता — कल रात मैंने क्या किया? मैं किसी और के बारे में सोचकर कैसे चिल्ला सकती हूँ?
लेकिन राज उसे प्यार से घेर लेता। "तेरी गलती नहीं, जान। तेरा शरीर जाग गया है। बस। इतना ही।"
और अब? अब सुमन खुद चाहने लगी थी। आज सुबह भी ऐसी ही थी। राज ने एक बड़ा सा शॉपिंग बैग उसके सामने रख दिया।
"खोल।" सुमन ने खोला। अंदर — कपड़े। लेकिन ऐसे कपड़े जो उसने अपनी पूरी जिंदगी में कभी नहीं पहने थे।
एक डीप नेक टॉप — सामने से लगभग नाभि तक खुला हुआ। उसके बड़े स्तनों के बीच की दरार को ढकने के लिए उसमें बस एक पतली सी लटकन थी।
एक स्किन-टाइट लेगिंग — काली, चमकदार, ऐसी कि पहनते ही हर कर्व, हर उभार, उसकी भरी हुई जांघें, उसकी उठी हुई गांड — सब दिख जाएगा।
एक थाई-स्लिट ड्रेस — जांघ के ठीक ऊपर तक चीरा हुआ। हर कदम पर उसकी सफेद रान दिखेगी।
एक सेमी-ट्रांसपेरेंट नाइट ड्रेस — जिसमें वह सोएगी तो उसके निप्पल, उसकी चूत के बाल, सब झाँकेंगे।
और फिर — थोंग। हॉट लैंगरी। मिनी स्कर्ट। एक छोटा सा काला टुकड़ा जिसे 'स्कर्ट' कहना भी गलत था।
सुमन की साँसें तेज़ हो गईं। "ये... ये सब किस लिए?" राज उसके पास आया। उसकी ठुड्डी पकड़ी। आँखों में देखा।
"मैं चाहता हूँ कि तू ये सब पहने। अपने सुंदर, आकर्षक शरीर को दिखाए।"
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07-06-2026, 11:32 PM
(This post was last modified: 13-06-2026, 11:57 AM by Certified Addict. Edited 2 times in total. Edited 2 times in total.)
सुमन "क्यों?"
"क्योंकि मैं चाहता हूँ कि लोग तुझे देखें। सड़क पर, मॉल में, मेट्रो में। और उनका लंड खड़ा हो जाए। उनका मुँह खुला रह जाए। सबके मन में बस यही निकले — 'क्या माल है ये।'"
सुमन नीचे देखने लगी। शर्म से नहीं — चाहत से। उसकी नज़र राज के पेंट पर पड़ी।
एक तंबू खड़ा था। सुमन मुस्कुराई। वह मुस्कान — वो मुस्कान जो अब बार-बार आती थी। शैतानी। भरी हुई।
"सबसे पहले तो ये बदमाश ही खड़ा हो गया," उसने कहा। उसका हाथ बढ़ा। राज के पेंट के ऊपर से उसने उसके लंड को सहलाया। गर्म था। सख्त। धड़क रहा था।
राज कराहा। उसने सुमन को पलटकर उसकी गांड पर हाथ रखा। जोर से दबाया। मांसल, मुलायम, गर्म। उसने गांड के बीच की दरार पर अंगूठा फेरा।
सुमन ने अपनी गांड और पीछे की। उसकी तरफ। "अब नहीं," राज फुसफुसाया। "ऑफिस जाना है।"
उसने सुमन के होठों पर एक लंबा, गीला, गहरा किस किया। उसकी जीभ अंदर घुसी, बाहर निकली।
फिर वह चल दिया। दरवाजे पर रुका। मुस्कुराया।
"और हाँ — सारे ड्रेस पहनकर मुझे सेल्फी भेजना। एक-एक करके। हर ड्रेस में। अभी। आज का तेरा टास्क है ये।"
दरवाज़ा बंद हुआ।
सुमन अकेली रह गई। बैग में हाथ डाला। उसने वो डीप नेक टॉप निकाला। कपड़े की बनावट रेशमी थी। उसने उसे अपने सीने से लगाया। फिर उतार डाली अपनी सादी सूती कुर्ती।
दर्पण के सामने खड़ी हो गई।
खुद को देखा। बड़े, भारी, लचकते स्तन। चौड़े कूल्हे। मांसल, गोरी जांघें। उठी हुई, गोल, सख्त गांड।
उसने डीप नेक टॉप पहना। स्तन ऊपर उछले। आधे से ज्यादा बाहर थे। निप्पल कपड़े को चीरते हुए दिख रहे थे।
उसने स्किन-टाइट लेगिंग पहनी। अब उसकी चूत का उभार साफ दिख रहा था। लेबिया की लकीरें लेगिंग के नीचे उभर रही थीं।
सेल्फी ली। राज को भेजी।
पाँच सेकंड में रिप्ले आया —
"बस। मेरा लंड फट गया। अगली।"
सुमन हँसी। उसकी चूत में नमी थी। लेगिंग पर एक छोटा सा गोल दाग बन गया था।
उसने थाई-स्लिट ड्रेस पहनी। उसकी पूरी रान खुली थी। गोरी, मुलायम, मोटी। अगर वह थोड़ा सा भी झुकी, तो उसकी चूत दिख जाएगी।
सेल्फी। भेजी।
राज ने लिखा — "पब्लिक में पहनकर जाएगी इसको?"
सुमन के होंठ काँपे। उसने लिखा — "तू साथ होगा तो... शायद।"
फिर उसने थोंग पहना। वो पतली सी डोरी जो उसकी गांड के बीचों-बीच धँस गई। उसकी चूत पर बस एक छोटा सा कपड़ा। उसके लेबिया उसके किनारों से बाहर झाँक रहे थे।
सेल्फी — पीछे से। उसकी दोनों गोल, भरी हुई गांड के गाल। बीच में वो काली डोरी।
राज का मैसेज — "आज रात इसी में सोना। सिर्फ इसी में।"
सुमन की साँसें और तेज़ हो गईं। उसकी चूत अब बह रही थी। गीली आवाज़ आ रही थी जब वह चली।
उसने आखिरी ड्रेस पहनी — सेमी-ट्रांसपेरेंट नाइटी। उसके निप्पल साफ दिख रहे थे। उसकी चूत के काले बाल। उसकी गांड की दरार।
सेल्फी।
राज का आखिरी मैसेज —
"तेरे लिए कोई भी आदमी अपनी बीवी, अपना घर, अपनी इज्जत छोड़ सकता है। और मैं चाहता हूँ कि छोड़े। सब। बस तुझे देखने के लिए।"
सुमन ने फोन रख दिया। दर्पण के सामने खड़ी रही। उसने अपने ही शरीर को देखा। अपनी ही चूत की गीली चमक को।
उसने सोचा — क्या मैं सच में ऐसी औरत बन गई हूँ?
और फिर उसने अपनी ही उँगली अपनी चूत पर रखी। । मुस्कुराई। हाँ।
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08-06-2026, 09:13 PM
(This post was last modified: 08-06-2026, 09:22 PM by Certified Addict. Edited 3 times in total. Edited 3 times in total.)
Chapter 2
और कुछ दिन ऐसे ही बीत गए।
सुमन अब वही पहनने लगी थी जो राज चाहता था। थाई-स्लिट ड्रेस में वह बालकनी में चाय पीती। स्किन-टाइट लेगिंग में वह दूध लाने जाती। मिनी स्कर्ट में वह राज के सामने खाना बनाती।
शर्म? वो तो पिघल चुकी थी।
अब उसे अच्छा लगता था। जब कोई रिक्शेवाला उसे घूरता, तो उसकी चूत सिकुड़ती। जब कोई पड़ोसी उसके स्तनों पर नज़र डालता, तो उसके निप्पल सख्त हो जाते।
राज देखता था। मुस्कुराता था। रात को वही देखकर उसकी चूत फाड़ता।
सोमवार था।
राज ने छुट्टी ले ली। सुबह उठते ही उसने सुमन से कहा — "आज मेरे साथ चल। घूमने। लेकिन मेरे तरीके से।"
सुमन बिस्तर पर लेटी हुई थी। उसकी नाइटी ऊपर चढ़ी हुई थी। उसकी गांड खुली थी।
"कैसे तरीके से?"
राज उसके पास आया। उसकी गांड पर हाथ रखा। जोर से दबाया। "ऑफिस टाइम की भीड़भाड़ वाली मेट्रो। तू लेगिंग पहनेगी। टाइट। और डीप नेक टॉप।"
सुमन की आँखें खुली रह गईं। उसका दिल धक-धक करने लगा।
"क्या... क्या करेंगे मेट्रो में?"
राज ने उसके कान में कहा — "मैं चाहता हूँ कि तू पराए मर्दों के बीच खड़ी हो। देखूँ वो क्या करते हैं। और हाँ — मैट्रो में हम एक-दूसरे को नहीं जानते। हम चैट पर बात करेंगे। समझी?"
सुमन ने निगल लिया। उसकी चूत में हलचल हुई। गीलापन आ गया।
"तू पागल है, राज।"
"हूँ। तेरे लिए।"
दो घंटे बाद।
सुमन ने काली, स्किन-टाइट लेगिंग पहनी। हर कर्व, हर उभार, उसकी भरी हुई जांघें, उसकी उठी हुई गांड — सब साफ दिख रहा था।
ऊपर गहरे नीले रंग का डीप नेक टॉप। उसके बड़े स्तन आधे बाहर थे। बीच की दरार में पसीना आ रहा था।
उसने खुद को दर्पण में देखा। उसकी दिल की धड़कनें तेज़ थीं। उसके निप्पल कपड़े के नीचे सख्त हो चुके थे।
राज ने पीछे से आकर उसकी गांड दबाई। "परफेक्ट। अब चल।"
मेट्रो स्टेशन।
पीक टाइम। भीड़ ऐसी थी मानो पूरा शहर इकट्ठा हो गया हो। सुमन राज के पीछे-पीछे प्लेटफॉर्म पर उतरी। लोग घूर रहे थे। एक आदमी ने उसके स्तनों पर नज़र डाली और उसकी पत्नी ने उसे ठोकर मारी।
सुमन का दिल तेज़ धड़क रहा था। उसकी चूत में नमी थी। लेगिंग पर एक छोटा सा गोल दाग बन गया था।
फोन पर राज का मैसेज आया — "डर लग रहा है?"
सुमन ने लिखा — "थोड़ा। लेकिन... अच्छा भी लग रहा है।"
राज — [b]"अभी और अच्छा लगेगा। चल। मेट्रो आ रही है।"[/b]
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08-06-2026, 09:16 PM
(This post was last modified: 13-06-2026, 11:58 AM by Certified Addict. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
मेट्रो में घुसते ही भीड़ ने उन्हें अलग कर दिया।
सुमन एक लोहे के पोल को पकड़कर खड़ी हो गई। उसके बगल में एक बुजुर्ग आदमी था। सामने एक युवक। पीछे कोई और।
राज थोड़ी दूर खड़ा था। देख रहा था। सुमन ने उसकी तरफ देखा — राज ने आँखों ही आँखों में कहा — सब्र रख।
दरवाज़ा बंद हुआ। मेट्रो चली।
शुरू के कुछ मिनट सब शांत रहा। सिर्फ मेट्रो की आवाज़। सुमन की साँसें। उसके सीने का ऊपर-नीचे होना।
फिर... उसकी गांड पर हल्का सा स्पर्श।
पहले तो उसे लगा मेट्रो के हिलने से हुआ होगा। लेकिन फिर वही स्पर्श — गांड के बाएं गाल पर। हल्का। दबाव बढ़ता हुआ।
सुमन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। उसकी धड़कनें और तेज़ हो गईं।
फोन पर राज का मैसेज — "किसी ने हाथ लगाया?"
सुमन ने काँपते हाथों से लिखा — "हाँ... गांड पर।"
राज — "अच्छा लग रहा है?"
सुमन ने लिखा — "... हाँ।"
उसने लिखा तो दिया, लेकिन उसकी चूत अंदर से फट रही थी। गीली हो चुकी थी। पीछे वाले आदमी का हाथ अब उसकी गांड पर था — जोर से। उसने उसे दबाया। छोड़ा। फिर दबाया।
सुमन चुपचाप खड़ी रही। उसने कोई विरोध नहीं किया।
और फिर — एक और हाथ।
इस बार सामने वाले युवक का। वह उसी पोल को पकड़ रहा था जिसे सुमन पकड़ रही थी। उसकी उँगलियाँ धीरे-धीरे सुमन के हाथ पर आईं। फिर उसकी कलाई पर। फिर...
उसने अपना हाथ घुमाया। अब उसके हाथ की पीठ सुमन के स्तनों से रगड़ खा रही थी।
सुमन की साँसें फट गईं। उसके निप्पल — वो दोनों — एकदम सख्त। कपड़े के नीचे तीर की तरह खड़े हो गए।
युवक ने देखा कि सुमन ने कोई विरोध नहीं किया। तो उसकी हिम्मत बढ़ गई। उसने अपना अंगूठा सुमन के निप्पल पर रखा। हल्का — फिर जोर से — दबाया। गोल-गोल घुमाया।
सुमन के मुँह से बस एक दबी हुई "हाँ... " निकली।
फोन पर राज — "तू गीली हो गई है?"
सुमन — "बह रही हूँ। लेगिंग भीग गई है।"
राज — "और चाहिए?"
सुमन ने उस मैसेज का जवाब नहीं दिया। लेकिन उसने अपनी गांड पीछे की तरफ धकेल दी। उस आदमी के लंड पर। जो उसकी गांड से सटा हुआ था।
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अगला स्टेशन। और भीड़ बढ़ गई।
अब सुमन के पीछे वाला आदमी उससे पूरी तरह चिपक चुका था। उसका लंड — सख्त — सुमन की गांड के बीचोंबीच धँस रहा था। उसने अपने दोनों हाथों से सुमन की गांड के दोनों गाल पकड़ लिए। जोर से दबाया। मांसल, गर्म, गीली लेगिंग के ऊपर से।
सुमन की "आह..." निकल गई। जोर से। एक आदमी ने मुड़कर देखा। सुमन ने अपना मुँह झुका लिया। शर्म से नहीं — इसलिए कि वह अपनी आँखों में आ रही आग छिपा सके।
पीछे वाले ने अपना हाथ सुमन की लेगिंग के ऊपर से उसकी गांड की दरार में डाल दिया। ऊपर-नीचे करने लगा। कपड़े के ऊपर से ही उसकी चूत की नमी उसकी उँगलियों तक आ रही थी।
और तभी — सामने वाले युवक ने अपनी पूरी हथेली से सुमन की एक चूची को मुट्ठी में भर लिया।
दोनों हाथ। दोनों जगह।
सुमन कसमसा गई। उसके घुटने झुक गए। वह लोहे के पोल को इतनी जोर से पकड़ रही थी कि उसकी उँगलियाँ सफेद पड़ गई थीं।
युवक ने उसकी चूची दबाई। घुमाई। खींची। निप्पल को अंगूठे और उँगली के बीच रगड़ा।
पीछे वाले ने उसकी गांड की दरार में उँगली घुसाने की कोशिश की — लेगिंग के ऊपर से नहीं, बल्कि अंदर से। उसने लेगिंग के ऊपरी हिस्से को खींचने की कोशिश की।
सुमन की चूत का पानी अब लेगिंग को पार कर रहा था। वह अपनी जांघों पर टपकने लगा था।
फोन पर राज — "रोक दूँ?"
सुमन की आँखों में आँसू थे। चाहत के। उसने लिखा — "नहीं। और चाहिए।"
उसने फोन रख दिया। अपनी आँखें बंद कर लीं। अपना मुँह थोड़ा खोल दिया।
दोनों आदमियों ने उस पर हमला बोल दिया — एक ने उसकी चूचियाँ मसलनी शुरू कर दीं, दूसरे ने उसकी गांड पर अपना पूरा लंड रगड़ना शुरू कर दिया।
भीड़ शोर मचा रही थी। कोई नहीं देख रहा था। या देख रहा था, लेकिन आँखें फेर रहा था।
सुमन की पूरी चूत में ऐंठन होने लगी। उसका पानी बह निकला। एक धार। लेगिंग पर एक बड़ा सा गीला दाग फैल गया।
उसने अपने दाँत भींच लिए। जोर से। अपनी चीख को दबाने के लिए।
और वह आ गई।
बीच मेट्रो में। पराए हाथों में। पराए लंडों के बीच।
उसकी पूरी बॉडी सख्त हुई, फिर ढीली पड़ गई। उसके अंदर का तापमान बढ़ गया। वह काँप रही थी। उसकी साँसें रुक गईं, फिर चली गईं।
दोनों आदमी — जैसे समझ गए — धीरे-धीरे पीछे हट गए। अगले स्टेशन पर उतर गए।
सुमन अकेली रह गई। पोल को पकड़े हुए। गीली लेगिंग में। काँपती हुई।
राज धीरे-धीरे उसके पास आया। उसने किसी और आदमी की तरह उसके पास खड़े होकर कहा —
"मैडम, ठीक हो?"
सुमन ने उसकी तरफ देखा। उसकी आँखों में पानी था। होंठ काँप रहे थे।
उसने फुसफुसाकर कहा — "घर ले चल मुझे। अभी।"
राज मुस्कुराया। उसका लंड पेंट के नीचे फट रहा था।
"हाँ मैडम। आइए।"
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interesting. But add some pictures
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Chapter 3
राज की पैंट में लंड पत्थर जैसा खड़ा था। उतारो तो छूटे, न उतारो तो फटे। हर कदम पर रगड़ खा रहा था। अंडकोष सख्त हो गए थे। गर्मी ऐसे उठ रही थी जैसे आग लगी हो।
और सुमन — वह तो और भी बदतर थी।
लिफ्ट में वह उससे दूर खड़ी थी, लेकिन राज ने देखा कि वह अपनी जांघों को एक-दूसरे से कैसे दबा रही थी। उसकी आँखें बेचैन थीं। होंठ सूखे हुए। साँसें भारी।
उसने अपनी थाई-स्लिट ड्रेस के नीचे हाथ डाला — सोचा कि राज नहीं देख रहा — और अपनी चूत पर उँगली फेरी।
गीली थी।
बहुत ज्यादा गीली।
राज के लंड में झटका सा लगा। उसने अपनी पैंट की जिपर पर हाथ रखा — डर रहा था कि कहीं खुल न जाए।
"हम टैक्सी लेंगे," उसने कहा।
"नहीं," सुमन का गला सूखा था। "मेट्रो। मैं... मैं चाहती हूँ।"
राज ने उसकी तरफ देखा। आँखों में वही चमक थी जो आजकल रातों को आती थी।
मेट्रो। स्टेशन पर चढ़ते ही भीड़ थी। राज ने सुमन को कोने में खड़ा कर दिया। उसकी पीठ दीवार से लगी थी। सामने लोगों की दीवार।
उसकी थाई-स्लिट ड्रेस — हर कोई देख रहा था। उसकी गोरी, मोटी रान दिख रही थी। लगभग जांघों के बिल्कुल ऊपर तक। अगर वह थोड़ा सा भी आगे झुकी तो उसकी चूत की नमी हवा में महकने लगेगी।
राज उसके बगल में खड़ा था। उसने अपना हाथ उसकी पीठ पर रखा — नीचे, कमर पर। उँगलियाँ ड्रेस के अंदर घुस गईं।
सुमन काँपी।
एक आदमी — तीस-पैंतीस का, आँखें शराब की तरह घूर रहा था — सुमन के सीने पर टिका देख रहा था। वह डीप नेक टॉप। सुमन के स्तनों की दरार। बड़े, भरे हुए, सफेद।
उस आदमी ने अपनी पैंट की जेब में हाथ डाला। राज ने देखा — वह अपने लंड को बाहर से सहला रहा था।
सुमन ने भी देख लिया।
वह और गीली हो गई। राज ने महसूस किया — उसकी ड्रेस पर एक गोल दाग फैल रहा था।
राज ने अपना मुँह उसके कान के पास रखा।
"देखा? उसका लंड खड़ा हो गया। तुझे देखकर।"
सुमन की आँखें बंद हो गईं। उसका मुँह खुला। एक दबी हुई कराह निकली।
"चुप रह," राज फुसफुसाया। "सब सुनेंगे। तेरी आवाज़ सुनकर और खड़े हो जाएँगे।"
सुमन ने राज के लंड पर हाथ रखा — पैंट के ऊपर से। दबाया। लंड ने जवाब दिया — नसें फूल गईं।
"जल्दी घर चल," सुमन ने कहा। "अब नहीं रुका जाता।"
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घर का दरवाज़ा बंद होते ही दोनों एक-दूसरे पर टूट पड़े।
सुमन ने राज के लंड को पैंट के ऊपर से पकड़ा। कसकर। जैसे कोई चीज़ पकड़ता है जो छिन रही हो।
"अब तेरी बारी नहीं," सुमन ने कहा — आवाज़ काँप रही थी, लेकिन आँखें जंगली थीं। "अब मेरी बारी है।"
उसने बेल्ट खोली। एक हाथ से। बटन खोला। ज़िपर नीचे किया।
राज का लंड बाहर निकला। सख्त। नीली नसें फूली हुईं। सिरा लाल, चमकदार, पानी से तर।
सुमन ने बिना समय गँवाए उसे अपने मुँह में भर लिया।
पूरा।
एक बार में।
राज के घुटने काँप गए। उसने दीवार पकड़ी। सुमन का मुँह गीला था, गर्म था, उसकी जीभ लंड के नीचे की नस पर घूम रही थी।
"चूस, रंडी," राज ने कहा। पहली बार। उसके मुँह से अपने आप निकला। "चीनाल। साली। बहन की लौड़ी। पूरा चूस मेरा लोड़ा।"
सुमन ने ऊपर देखा। राज के बाल पकड़े। उसके मुँह में लंड था, फिर भी वह मुस्कुरा रही थी।
फिर उसने और तेज़ चूसना शुरू कर दिया। उसका सिर ऊपर-नीचे हो रहा था। लार टपक रही थी। उसके मुँह की आवाज़ — चट-चट-चट — पूरे हॉल में गूँज रही थी।
राज ने उसके बाल पकड़े। उसका मुँह चोदना शुरू कर दिया। लंड उसके गले के अंदर तक जा रहा था। सुमन की आँखों से पानी आ गया — लेकिन उसने रोका नहीं। वह और जोर से चूस रही थी।
राज ने उसे उठाया। उसके कपड़े फाड़ने लगे — ड्रेस ऊपर खिसकाई, नीचे थोंग थी। उसने थोंग को एक झटके में साइड कर दिया। सुमन की चूत खुली — गीली, गर्म, लाल।
उसने अपनी दोनों हथेलियों से सुमन की चूचियाँ दबाईं। मसलनी शुरू कर दीं। निप्पल सख्त हो गए — उसके अंगूठों के नीचे।
"रंडी," राज ने फिर कहा। "आज तेरी चूत का भोसड़ा बनाऊँगा।"
"बना दे," सुमन ने कराहते हुए कहा। "बना दे, साले। पहले ही बन चुका है तेरी वजह से।"
उसने राज का लंड फिर पकड़ा। अपनी चूत पर रखा। बिना रुके, बिना पूछे — बैठ गई।
एक ही झटके में पूरा अंदर।
दोनों चीखे।
राज ने सुमन को गोद में उठा लिया। उसकी जांघें राज की कमर पर। उसकी गांड राज के हाथों में। लंड उसके अंदर गहरा — बहुत गहरा — धँसा हुआ।
राज बेडरूम की तरफ चलने लगा। हर कदम पर लंड उसकी चूत के अंदर हिल रहा था। सुमन राज की गर्दन पर दाँत गड़ा रही थी। चूस रही थी। खून नहीं, निशान छोड़ रही थी।
बेड पर पहुँचते ही राज ने उसे फेंक दिया।
सुमन पीठ के बल गिरी। उसकी टांगें खुल गईं। उसकी चूत — पूरी तरह खिली हुई, लबालब, पानी से चमकती हुई।
राज उसके बीच में घुटनों के बल बैठ गया। उसने अपना मुँह सुमन की चूत पर रख दिया।
जीभ अंदर। गर्मी। नमकीन। खट्टा-मीठा।
सुमन की पीठ झटके से उठी। उसने राज के बाल पकड़े — उसका मुँह और जोर से अपनी चूत पर दबाया।
राज ने उसकी चूत को चाटा — अंदर से बाहर, ऊपर से नीचे। उसकी जीभ उसके अंदर घूम रही थी, उसकी चूत के होंठ चूस रही थी, उसकी लेबिया को दाँतों से दबा रहा था।
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एक मिनट भी नहीं हुआ था।
सुमन का पूरा शरीर अकड़ गया। उसकी जांघें राज के सिर को दबोचने लगीं। उसकी चूत ने राज की जीभ को ऐसे पकड़ा जैसे कोई मुँह के अंदर उँगली दबा ले।
और वह आ गई।
पानी बह निकला — राज के मुँह में, उसकी ठुड्डी पर, चादर पर। सुमन चिल्लाई — दबी हुई, लंबी, जानवरों वाली आवाज़।
राज उसके ऊपर चढ़ गया। लंड अभी भी सख्त था। उसने सुमन के बालों को अपनी मुट्ठी में लपेटा। उसकी आँखों में देखा।
"बता। मेट्रो में कैसा लगा?"
सुमन की साँसें अभी ठीक नहीं हुई थीं। "क्या... क्या बताऊँ?"
"वो आदमी। जो तुझे घूर रहा था। उसने अपने लंड को हाथ लगाया। तूने देखा।"
सुमन ने आँखें बंद कर लीं। उसके होंठ काँप रहे थे।
"देखा," उसने कहा। "और मेरी चूत ने... उसकी कल्पना की। कैसे वो मुझे दीवार से लगाकर... मेरी ड्रेस ऊपर करेगा... अपना लंड निकालेगा... और भीड़ के सामने... सब देखते रहें... और वो मुझे चोदेगा..."
राज का लंड और सख्त हो गया। सुमन ने महसूस किया।
"और तू?" राज ने पूछा। "तू क्या करेगी?"
सुमन खुद ऊपर आ गई। राज को नीचे धकेल दिया। वह उसके लंड पर बैठ गई। घोड़ी की तरह। अपनी चूत में लंड लेकर।
"मैं चिल्लाऊंगी," सुमन ने राज की छाती पर हाथ रखा। गति तेज़ कर दी। उसकी चूत ऊपर-नीचे हो रही थी, उसकी चूचियाँ उछल रही थीं। "चिल्लाऊंगी — चोद मुझे, रंडी के जैसे चोद। सब सुनें। सब देखें। फिर उनके लंड भी खड़े हो जाएँ। और मैं..."
वह रुकी। झुकी। राज के कान में बोली।
"और मैं सबकी चूत चाटूंगी।"
राज पागल हो गया। उसने सुमन की गांड पर हाथ मारा — जोर से। थप्पड़ की आवाज़। फिर दूसरा। फिर तीसरा। सुमन चिल्लाती हुई और तेज़ हो गई।
"चोद मुझे! रंडी के जैसे चोद! और बोल! बोल मुझे!"
"रंडी," राज ने कहा। "साली रंडी। अपनी चूत फाड़ दे मेरे लंड पर।"
दोनों चिल्लाते रहे। कमरा गर्म हो गया था। पसीना, लार, चूत का पानी — सब मिल रहा था।
पहला राउंड। दूसरा राउंड। तीसरा राउंड।
एक बार राज ने सुमन को पेट के बल लिटाकर गांद में लंड डालने की कोशिश की — सुमन ने मना किया। "अभी नहीं। आज चूत काफी है। गांद का दिन भी आएगा।"
राज ने उसकी जांघों के बीच लंड दबाकर अपना माल छोड़ा। सुमन के पेट पर, चूचियों पर, चेहरे पर।
सुमन ने अपनी उँगली पर माल लिया। चाटा। मुस्कुराई।
"तेरा स्वाद आता है," उसने कहा। "अच्छा लगता है।"
तीन बजे थे। दोनों नंगे थे। लिपटे हुए। सुमन राज की छाती पर सिर रखे लेटी थी। उसकी चूत अभी भी गीली थी। राज का लंड अभी भी आधा सख्त।
बिना बात किए दोनों सो गए।
गीली चादर पर। अपनी ही आवाज़ों के निशानों के बीच।
शाम के सात बज रहे थे। राज बेडरूम के दरवाजे पर खड़ा था।
"तैयार हो जाओ।"
अंदर से सरसराहट की आवाज़। कपड़े बदलने की। ज़िप खुलने और बंद होने की।
फिर दरवाज़ा खुला।
राज की साँसें रुक गईं।
सुमन — उसी काले थाई-स्लिट ड्रेस में जो आज सुबह उसने सेल्फी भेजी थी। गोरे कंधे खुले। बिना ब्रा के। ड्रेस के अंदर उसके स्तन स्वतंत्र थे — लचकते, उछलते, भारी।
ड्रेस का नेकलाइन उसके निप्पल तक जाता हुआ। उसकी चूचियाँ ड्रेस के कपड़े को आगे की तरफ धक्का दे रही थीं। हर साँस के साथ वह ऊपर नीचे हो रही थीं।
नीचे — सिर्फ एक ब्लैक थोंग। ड्रेस के नीचे से उसकी गांड के दो गोल गाल साफ दिख रहे थे।
राज का लंड फट गया। पेंट में तंबू खड़ा हो गया।
"ये... ये ब्रा और चड्डी निकाल दे," राज ने घुर्र कर कहा। "अपनी चूचियों को हिलने दे। अपनी चाल के साथ।"
सुमन शरमा गई। उसने ड्रेस के अंदर हाथ डाला। ब्रा के हुक खोले। बिना चड्डी वह पहले से ही थी — थोंग पहने हुए। ब्रा बाहर निकाली, राज के हाथ पर रख दी।
गरम थी। उसके शरीर की गर्मी से तपी हुई।
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pls continue.
Awesome story
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13-06-2026, 01:04 AM
(This post was last modified: 13-06-2026, 11:54 AM by Certified Addict. Edited 3 times in total. Edited 3 times in total.)
Chapter 4 क्लब की वह रात
राज से रहा नहीं गया।
उसने सुमन को पकड़ा। ड्रेस का नेकलाइन नीचे खींचा। एक चूची बाहर आई — गोरी, बड़ी, निप्पल सख्त। उसने अपना मुँह उस पर रख दिया।
जोर से चूसा। पूरा भरके मुँह में लिया।
"अह्ह्ह..." सुमन की पीठ कमान की तरह झुक गई।
राज ने निप्पल को दाँतों से दबाया। फिर चूसा। फिर चूसा। दूध पी रहा हो जैसे। जीभ से घुमाया।
"अह्ह मेरी राँड... मेरी जानेमन..."
"हट बदमाश," सुमन ने उसे धक्का दिया। लेकिन हँस रही थी। उसकी चूची पर लार चमक रही थी। "चल अब। रात आठ बजे हैं।"
सड़क पर निकले।
रात का तापमान गर्म था। या फिर सुमन के शरीर की गर्मी थी — राज को फर्क नहीं पड़ता था।
सुमन दो कदम आगे चल रही थी। राज उसके पीछे।
हर कदम के साथ — सुमन की चूचियाँ उछलतीं। ऊपर नीचे। जैसे दो रसीले फल हवा में झूल रहे हों।
उसकी गांड — वह ड्रेस के अंदर बायीं तरफ खिसकती, दायीं तरफ खिसकती। थोंग की डोरी बीच में धंसी हुई, दोनों गाल बाहर नंगे।
अगल-बगल से गुजरते लोगों की नज़रें सुमन पर टिक गईं।
एक चाय वाले ने चम्मच गिरा दिया। उठाने का नाटक करते हुए उसने सुमन की जांघों को घूरा।
एक युवक — शायद कॉलेज का छात्र — ने अपना मुँह खोल दिया। उसकी नज़र सुमन के स्तनों और उसकी खुली जांघ के बीच फँस गई। उसने अपने पेंट के ऊपर से अपना लंड खुजाया।
एक बुज़ुर्ग आदमी सुमन को देखकर ठिठक गया। उसकी पत्नी उसे घसीटते हुए ले गई।
राज का लंड पेंट में धक्के मार रहा था। वह मुस्कुरा रहा था। सुमन भी मुस्कुरा रही थी — आगे चलते हुए, जानती थी कि सब उसे देख रहे हैं, और उसे फर्क नहीं पड़ता था।
कुछ दूर चलने के बाद — टैक्सी स्टैंड। टैक्सी पकड़ी।
"नाइट क्लब," राज ने ड्राइवर से कहा।
क्लब का नाम था 'नाइटशेड'। अंदर अंधेरा था। लाल बत्तियाँ। भीड़। शराब की बोतलें। संगीत इतना तेज़ था कि दिल की धड़कनें गीत में खो गई थीं।
सुमन अंदर घुसी तो हर आँख उस पर थी।
वह काली थी — सच में काली। बाकी सब रंगीन कपड़ों में थे, सोने-चाँदी की चमक में। वह सादी काली थी। पर वह काली इतनी गहरी थी कि सारी रोशनी उसी पर आकर रुक गई।
उसकी जांघें — उन पर वह स्लिट। हर कदम पर वह स्लिट खुलता। उसकी जांघ का ऊपरी हिस्सा — मोटा, गोरा, चिकना — झलक जाता। फिर बंद हो जाता। फिर खुलता।
उसके स्तन — बिना ब्रा के — हर थिरकन पर हिलते। ड्रेस का कपड़ा उनके पीछे पीछे जाता। उसके निप्पल कड़े थे — और साफ दिख रहे थे। कपड़े के नीचे से दो काली बूँदों की तरह।
उसके पीछे राज था। उसका हाथ उसकी कमर पर। उसकी उँगलियाँ ड्रेस के पतले कपड़े के ऊपर से उसकी नंगी चूत के ऊपर थी। एक इंच। बस एक इंच नीचे — और वह उसे छू लेता।
पर उसने छुआ नहीं। अभी नहीं।
बार पर बैठे। दो शॉट्स। फिर दो और।
सुमन के गाल गुलाबी हो गए। उसकी आँखें नम। वह अपनी सीट पर संगीत के साथ डोलने लगी — उसकी चूचियाँ डोलीं, उसकी गांड सीट पर रगड़ खाने लगी।
रात के ग्यारह बजे थे। डांस फ्लोर पैक था। डीजे ने एक धीमा, भारी, कामुक गाना बजाया — जो शरीरों को हिलने पर मजबूर कर दे।
राज ने सुमन का हाथ पकड़ा। उसे डांस फ्लोर के बीचोंबीच ले गया।
**"आज सिर्फ तुम। डांस करो। मैं देखूंगा।"**
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सुमन के मुँह ने कुछ नहीं कहा। उसके शरीर ने कह दिया।
गाना शुरू हुआ। बास भारी थी — कंपन की तरह। रोशनी लाल थी। और सुमन ने आँखें बंद कर लीं।
उसने अपनी गर्दन घुमाई। बाल चेहरे से हटाए। हाथ ऊपर उठाए। उँगलियाँ खुली। और वह आगे बढ़ी — धीरे से — जैसे कोई लहर उठ रही हो।
उसके स्तन पहले हिले। वे भारी थे — और ड्रेस के अंदर बिना किसी रोक के। वह उसकी हरकतों के पीछे एक सेकंड लेट जाते थे। पहले उसका शरीर हिलता, फिर उसके स्तन। उसके निप्पल ड्रेस के कपड़े को रगड़ रहे थे — अंदर से।
संगीत तेज़ हुआ। सुमन की आँखें खुल गईं। वह देखना चाहती थी — कौन देख रहा है।
हर कोई देख रहा था।
उसने अपनी कमर घुमाई। गोल-गोल। ऐसे जैसे कोई साँप रेंग रहा हो। उसकी कमर ड्रेस के अंदर अलग थी — पतली, लचीली, तेज़। उसकी गांड उसके पीछे घूम रही थी — बड़ी, गोल, उछलती हुई। ड्रेस का स्लिट खुल गया। उसकी पूरी जांघ नंगी दिख गई — कूल्हे से लेकर घुटने तक। वहाँ पसीना था। चमक रहा था।
एक आदमी — अजनबी — उसके पीछे आकर खड़ा हो गया। उसका नाम था विक्रांत। मोटा। शराबी। उसकी आँखें सुमन के गांड पर थीं। उसने अपने हाथ बढ़ाए। छूने के लिए।
राज ने देखा। पर वह आगे नहीं बढ़ा। वह जानता था — सुमन खुद संभाल लेगी।
सुमन ने उसे देखा। एक पल के लिए। फिर वह और नीचे झुकी। उसने अपनी गांड को पीछे धकेल दिया — सीधे उसके हाथों की तरफ।
**विक्रांत का हाथ उसकी गांड पर आ गया।**
वह सिहर उठा। उसकी उँगलियाँ ड्रेस के पतले कपड़े के ऊपर से उसकी गांड के गोलाई पर दब गईं। उसने थपथपाया नहीं — दबाया। मसला।
सुमन की साँस फट गई। उसके मुँह से एक "आह" निकली — पर संगीत में वह खो गई। उसने अपना सिर पीछे झुका दिया। उसकी गर्दन खुल गई। विक्रांत ने उसकी गर्दन को देखा — पसीने से तर, धड़कती हुई। उसने अपना दूसरा हाथ उसकी कमर पर रखा।
अब उसके दोनों हाथ सुमन पर थे। एक गांड पर। एक कमर पर।
सुमन ने डांस करना जारी रखा। वह उसकी उँगलियों के साथ हिल रही थी। उसकी गांड उसकी हथेली में घूम रही थी।
सुमन ने करवट बदली। अब वह विक्रांत की तरफ थी — उससे एक फुट दूर। उसकी आँखें उसकी आँखों में। उसके हाथ अब उसकी छाती पर आ गए। उसने अपने हाथ ड्रेस के ऊपर रखे — अपने ही स्तनों पर।
वह खुद को सहला रही थी। डांस करते हुए।
विक्रांत के हाथ उसकी कमर पर लौट आए। उसने उसे करीब खींचा। सुमन का शरीर उससे चिपक गया। उसके स्तन उसकी छाती पर दब गए। उसके निप्पल उसकी कमीज के कपड़े को छेदते हुए उसकी त्वचा को छू रहे थे।
विक्रांत की साँसों में शराब थी — और कुछ और भी। लंड की महक।
उसने अपनी जांघ सुमन की जांघों के बीच डाल दी। उसकी जांघ सुमन की नंगी चूत के ठीक नीचे आकर रुकी। ड्रेस का कपड़ा पतला था — बहुत पतला। वह महसूस कर सकता था। उसकी गर्मी। उसकी नमी। उसका उभार।
सुमन की चूत ने जवाब दिया। वह और गीली हो गई। उसने अपनी कमर को उसकी जांघ पर रगड़ा। एक बार। धीरे से। पर काफी था।
विक्रांत का लंड अब पूरी तरह सख्त था। वह उसे सुमन के शरीर पर दबा रहा था — अपनी जींस के अंदर।
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तभी कोई और उसके पीछे आकर खड़ा हो गया। दूसरा आदमी। जवान। पतला। उसके हाथ सुमन के कंधों पर आ गए। उसने उसे पीछे की तरफ खींच लिया — विक्रांत से दूर।
अब सुमन दो आदमियों के बीच थी। सामने विक्रांत। पीछे वह जवान — उसका नाम था अरुण।
अरुण के हाथ उसकी गांड पर थे। उसने दोनों हाथों से उसकी गांड को पकड़ लिया। बिना पूछे। बिना रुके। उसकी उँगलियाँ उसकी गांड की दरार में धंसने लगीं। ड्रेस का कपड़ा उसके नीचे फँस गया था।
सुमन ने अपना सिर पीछे झुका दिया — उसके कंधे पर।
**"बहुत मुलायम हो,"** अरुण ने उसके कान में कहा। उसकी जीभ उसके कान को छू गई।
सुमन ने कोई जवाब नहीं दिया। उसने अपने हाथ बढ़ा दिए — विक्रांत की छाती पर। उसने उसकी कमीज पकड़ी। उसे करीब खींचा।
अब वह बीच में थी। दो शरीरों के बीच। सामने लंड का उभार। पीछे भी।
अरुण के हाथ अब उसकी गांड पर नहीं — उसकी चूत पर थे। उसने ड्रेस के कपड़े के ऊपर से उसकी चूत को दबाया। वह गीली थी। गरम। उसकी उँगलियाँ उसके होंठों की दरार में फँस गईं। उसने वहीँ दबाया — एक उँगली से। फिर दो उँगलियों से।
सुमन कराह उठी। यह कराह संगीत से भी ऊँची थी।
विक्रांत ने अपनी जांघ को और ऊपर उठा लिया। अब उसकी जांघ सीधे उसकी चूत पर थी। उसने अपनी जांघ घुमाई — गोल-गोल — उसकी चूत पर। सुमन उसकी जांघ पर सवार हो गई। वह उस पर झूल रही थी। अपनी गीली चूत को उसकी जांघ पर रगड़ रही थी।
अरुण ने अपना हाथ ड्रेस के अंदर डाल दिया। उसने उसकी नंगी चूत को छुआ। सीधे। बिना कपड़े के।
**तुरंत — उसकी उँगलियाँ उसकी चूत के अंदर चली गईं।**
सुमन की आँखें बंद हो गईं। उसका मुँह खुल गया। उसके स्तन काँप रहे थे। उसके निप्पल पत्थर जैसे। उसकी चूत — वह अरुण की उँगलियों को चूस रही थी। उसने उसकी उँगलियों को अपने अंदर खींच लिया। गीला। गरम। तंग।
अरुण ने अपनी दो उँगलियाँ उसके अंदर डाल दीं। उसने उन्हें घुमाया। उसकी चूत ने चारों तरफ से उन्हें दबा लिया।
**"आह... रुक मत..."** सुमन के मुँह से निकल गया।
अब विक्रांत ने अपना लंड निकाल लिया था। उसने अपनी जींस का बटन खोला। ज़िप खोली। उसका लंड बाहर आ गया — काला, मोटा, नसों से भरा हुआ। उसका सिरा लाल था — बैंगनी की तरह। पसीने से चमक रहा था।
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13-06-2026, 01:08 AM
(This post was last modified: 13-06-2026, 01:10 AM by Certified Addict. Edited 2 times in total. Edited 2 times in total.)
उसने अपने लंड को पकड़ा। और सुमन के क्लीवेज के ठीक ऊपर रगड़ना शुरू कर दिया। उसके स्तनों के बीच की गहरी दरार में। उसका लंड उसकी चूचियों को छू रहा था — बाईं तरफ, दाईं तरफ। उसके निप्पल उसके लंड की गर्मी से और कड़े हो गए।
सुमन ने नीचे देखा। उसने उसका लंड देखा। उसने उसे अपने स्तनों पर रगड़ते देखा। उसने अपने दोनों हाथों से अपने स्तनों को उठाया — और उसके लंड को उनके बीच दबा दिया।
विक्रांत कराह उठा। इतनी जोर से कि लोग मुड़कर देखने लगे।
अरुण की उँगलियाँ अब भी उसकी चूत के अंदर थीं। वह उन्हें तेज़ी से अंदर-बाहर कर रहा था। उसकी चूत उन पर चटक रही थी — पानी छोड़ रही थी। वह पानी उसके हाथ पर, उसकी जांघ पर, ड्रेस पर टपक रहा था।
सुमन का शरीर अब पूरी तरह उनके हाथों में था। वह हिल नहीं सकती थी। वह सिर्फ कराह सकती थी। उसके मुँह से शब्द निकल रहे थे — बेहोशी के।
**"चोदो मुझे... रुको मत... मैं पागल हो रही हूँ..."**
---
### राज — दूर से देखता हुआ
राज बार के कोने में खड़ा था। उसके हाथ में शराब का गिलास था। पर उसकी आँखें सुमन पर थीं। उसकी पैंट के अंदर उसका लंड दर्द कर रहा था — वह इतना सख्त था।
वह देख रहा था। दूसरे आदमी उसकी बीवी को छू रहे थे। उसकी बीवी का लंड के बीच दबा रहे थे। उसकी बीवी की चूत में उँगलियाँ डाली जा रही थीं।
पर वह रुका नहीं। वह गया नहीं। क्योंकि वह देख रहा था — सुमन का चेहरा।
वह चेहरा — जो दर्द और सुख के बीच झूल रहा था। वह चेहरा — जो पहली बार पूरी तरह आज़ाद था।
राज ने अपना गिलास नीचे रखा। अपने लंड को पकड़ा — पैंट के ऊपर से ही। वह हिलने लगा। देखते हुए। सुमन को। अपनी सुमन को।
अरुण ने अपनी तीसरी उँगली डाल दी। तीन उँगलियाँ। उसकी तंग चूत के अंदर। वह उन्हें घुमा रहा था — भीतर ही भीतर। उसकी चूत उन्हें दबा रही थी — जैसे कोई लंड को चूस रहा हो।
विक्रांत उसके स्तनों के बीच अपने लंड को रगड़ रहा था — तेज़, पागलों की तरह। उसके स्तन उसके लंड के चारों तरफ लिपटे हुए थे। उसका लंड उसके निप्पल के बीच से निकल रहा था और उसके मुँह को छू रहा था।
सुमन ने अपनी जीभ निकाली। उसने उसके लंड की नोक को छुआ — बस एक बार। हल्के से। उसकी जीभ गर्म थी। नम।
विक्रांत चीख उठा। उसका लंड फड़कने लगा। उसका बीज उसके स्तनों पर, उसके क्लीवेज में, उसकी गर्दन पर गिरने लगा। गरम। चिपचिपा। सफेद। उसके स्तनों पर बूँदें लग गईं। कुछ उसके मुँह तक आ गए।
उसी समय — अरुण ने अपनी उँगलियाँ बाहर निकाल लीं। और अपनी पैंट खोल ली। उसका लंड बाहर आ गया — पतला, लंबा, सीधा। उसने उसे अपने हाथ में लिया। उसे रगड़ना शुरू किया। और सुमन की गीली, खुली चूत के ठीक बाहर — उसी हवा में — वह फट गया।
उसका बीज उसकी चूत के ऊपर गिरा। ड्रेस पर। उसकी जांघ पर। उसके पेट पर। वह गरम था — उसकी त्वचा को जला रहा था।
सुमन के शरीर में एक लहर उठी। वह काँपी। थरथराई। उसकी चूत ने हवा में भी चूसने की कोशिश की। उसके स्तन झूल गए। उसकी आँखें खुली थीं — पर वह कुछ नहीं देख रही थी।
वह अपने ही सुख में खो गई थी। बिना उतरे। बिना भरे। बस छुई गई। रगड़ी गई। चूसी गई।
संगीत बदल गया। रोशनी हरी हो गई। लोग हंस रहे थे, पी रहे थे, बातें कर रहे थे। किसी ने कुछ देखा था। किसी ने कुछ नहीं देखा।
सुमन ने अपने स्तन पोंछे। अपनी जांघ पोंछी। अपनी चूत के ऊपर से सूखे कपड़े से बीज हटाया। उसने अपनी ड्रेस ठीक की। अपने बाल संभाले। और राज की तरफ देखा।
राज आया। उसने उसका हाथ पकड़ा।
**"चलो घर,"** उसने कहा। उसकी आवाज़ में बस दो चीज़ें थीं — प्यार और लंड।
सुमन ने सिर हिलाया। वह काँप रही थी। उसकी चूत अब भी गीली थी। उसके स्तन अब भी उन लंडों की गर्मी महसूस कर रहे थे।
वह बाहर निकली। उसने पीछे मुड़कर देखा। विक्रांत और अरुण अब भी वहीं खड़े थे। अपने लंड पैंट में डालते हुए। उनकी आँखें उस पर थीं।
सुमन मुस्कुराई। एक मुस्कान जिसका मतलब था — *शुक्रिया।*
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रात के दो बज चुके थे।
क्लब के बाहर ठंडी हवा। सुमन ने राज का हाथ पकड़ लिया। उसके नाखून उसकी कलाई पर गड़ रहे थे।
दोनों की आँखों में सिर्फ सेक्स था। साफ दिख रहा था। सुमन की पुतलियाँ फैली हुई थीं। राज के होंठ सूख रहे थे।
राज ने टैक्सी बुक की। पाँच मिनट में एक सफेद इनोवा आ गई।
ड्राइवर — मिडिल एज, मोटा-ठिगना, मूंछें, शर्ट के ऊपर स्वेटर। नाम की प्लेट में 'संदीप' लिखा था।
पिछली सीट पर बैठे। राज और सुमन — दोनों एक दूसरे की बाहों में। सुमन की जांघ राज की जांघ पर। राज का हाथ सुमन की कमर पर।
टैक्सी चलने लगी।
राज की नज़र ड्राइवर की साइड में लगे शीशे पर पड़ी।
संदीप पीछे देख रहा था। उसकी आँखें सुमन के क्लीवेज पर टिकी हुई थीं। ड्रेस की नेकलाइन से सुमन की चूचियाँ उभर रही थीं — गोरी, बड़ी, आधी बाहर।
राज को शरारत सूझी।
उसने सुमन को बिना कुछ बताए अपना हाथ बढ़ाया। सुमन की चूची पर रखा। ड्रेस के ऊपर से दबाया।
सुमन ने राज की तरफ देखा। मुस्कुराई।
राज ने उसकी टांगें फैला दीं। ड्रेस का थाई-स्लिट खुल गया। सुमन की पूरी जांघ नंगी — गोरी, चिकनी, मोटी। क्लब में सूखी थी, लेकिन अब फिर गीली हो रही थी।
सुमन को नहीं पता था कि ड्राइवर देख रहा है। उसकी नज़रें राज पर थीं।
उसने राज के लंड को पेंट के ऊपर से सहलाना शुरू कर दिया। उसकी उँगलियाँ ज़िप पर घूम रही थीं।
राज ने सुमन का मुँह अपनी तरफ घुमाया। दोबारा किस करने लगे।
अब ड्राइवर की नज़र सुमन की नंगी जांघ पर थी। फिर उसके हाथ पर जो राज के लंड पर था। फिर दोबारा क्लीवेज पर।
उसके पेंट में तंबू खड़ा हो गया। साफ दिख रहा था।
उसने एक हाथ से स्टीयरिंग पकड़ रखा था। दूसरा हाथ — उसने अपने लंड पर रख दिया। ऊपर से मसलने लगा।
राज ने यह सब देखा। उसका अपना लंड अब पेंट फाड़ रहा था।
सुमन किस करते हुए बोली — "क्या हुआ? तू और सख्त हो गया?"
राज ने जवाब नहीं दिया। बस सुमन के निप्पल को दबाता रहा।
तभी — ड्राइवर की आवाज़ आई।
"आपका स्टॉप आ गया।"
राज और सुमन एक दूसरे से अलग हुए। सुमन ने अपनी जांघें ढक लीं। राज ने अपना हाथ उसकी चूची से हटाया।
राज ने अपनी जेब से पाँच सौ का नोट निकाला। सुमन के हाथ में रखा।
"ड्राइवर को दे दे," राज ने कहा।
सुमन कार से उतरी। राज अंदर ही बैठा रहा — उसका लंड अभी भी खड़ा था, इसलिए वह उठ नहीं सकता था।
सुमन ड्राइवर की तरफ गई। विंडो खटखटाई।
संदीप ने विंडो नीचे की।
सुमन उसकी खिड़की पर झुकी। पैसे देने के लिए।
लेकिन वह ड्रेस — डीप नेकलाइन — जब वह झुकी तो उसकी दोनों चूचियाँ पूरी तरह बाहर आ गईं। निप्पल तक। संदीप की आँखों के ठीक सामने।
गोरी, भारी, बड़ी चूचियाँ। बिना ब्रा के। निप्पल सख्त।
संदीप की साँसें रुक गईं। उसकी आँखें फट गईं। उसका लंड — वह अब अपने आप मसल रहा था। सुमन के सामने ही। पेंट के ऊपर से उसका हाथ तेजी से ऊपर-नीचे हो रहा था।
सुमन को तब पता चला। उसने देखा ड्राइवर का हाथ। देखा उसके पेंट का तंबू।
लेकिन वह मुस्कुराई। पैसे बढ़ा दिए।
"कीप द चेंज।"
संदीप ने नोट लिया। उसकी आवाज़ फटी हुई थी — "थैंक यू, मैडम।"
सुमन सीधी हुई। जाने लगी।
"मैडम!" संदीप चिल्लाया।
उसने एक पर्ची सुमन की तरफ बढ़ाई।
"ये लो मेरा नंबर। कभी टैक्सी चाहिए हो तो मुझे कॉल करना। मैं आ जाऊँगा।"
सुमन ने पर्ची ली। मुस्कुराई। "नाम क्या तुम्हारा?"
"संदीप।"
"संदीप," सुमन ने दोहराया। उसने वह नाम अपने मुँह में चखा जैसे कोई मिठाई हो। "ओके संदीप।"
वह घूमी। चल दी। उसकी गांड ड्रेस के अंदर एक तरफ से दूसरी तरफ खिसक रही थी।
संदीप ने उसकी गांड घूरी। फिर कार भगा ली।
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घर के अंदर।
दरवाज़ा बंद होते ही दोनों एक दूसरे पर टूट पड़े।
कोई बात नहीं हुई। सिर्फ साँसें। हाथ। होंठ।
राज ने सुमन की ड्रेस ऊपर की — उतारी नहीं, बस ऊपर चढ़ा दी। सुमन की चूचियाँ बाहर आ गईं। थोंग पहले से ही गीली थी — क्लब से, डांस से, उस आदमी की उँगलियों से, टैक्सी से, सबसे।
सुमन ने राज की शर्ट के बटन तोड़ दिए। लाकर फाड़े नहीं, लेकिन जल्दी में इतनी ताकत लगाई कि दो बटन उड़ गए।
राज ने अपना पेंट नीचे उतारा। उसका लंड बाहर आया — सख्त, नीला पड़ चुका था इतनी देर खड़े रहने से।
सुमन ने उसे देखा। उसके मुँह से "वाह" निकला।
लेकिन राज ने सुमन को लेटा दिया। वह उसके ऊपर गया।
"69," राज ने कहा।
सुमन ने बिना कुछ कहे करवट बदली। वह राज के ऊपर आ गई। अपना सिर उसके लंड की तरफ किया। अपनी चूत राज के मुँह के सामने रख दी।
राज ने सुमन की चूत देखी। थोंग पहले से ही एक तरफ खिसक चुकी थी। उसकी लेबिया सूजी हुई थीं। लाल। गीली। बाल छोटे कटे हुए थे — कल ही ट्रिम की थी।
उसने अपनी जीभ बढ़ाई। चूत के ऊपरी हिस्से पर रखी। चाटा।
"अह्ह्ह..." सुमन के मुँह में राज का लंड था। उसने उसे अंदर ले लिया। पूरा नहीं — आधा — क्योंकि राज का लंड मोटा था।
राज ने अपनी जीभ सुमन की चूत की तरफ घुमाई। उसकी लेबिया को अलग किया। अंदर गुलाबी था। गीला। चमक रहा था।
उसने अपनी जीभ अंदर डाल दी।
"उह्ह्ह्ह —" सुमन कराही। उसके मुँह में राज का लंड था, इसलिए आवाज़ धुंधली आ रही थी।
वह भी चूसने लगी। उसकी जीभ राज के लंड के निचले हिस्से पर घूम रही थी। फिर सिरे पर। फिर पूरे को अंदर लेने की कोशिश।
राज ने सुमन की चूत से पानी पीना शुरू कर दिया। वह बह रहा था। नीचे से उसके मुँह में आ रहा था। खट्टा। नमकीन। गरम।
उसने अपनी उँगली सुमन की चूत के अंदर डाली। बाहर निकाली। चूत ने उसे चूसा। अंदर खींचा।
फिर उसने अपनी जीभ सुमन की गांड की तरफ ले गई। उसकी गांड का छेद — साफ था। छोटा। उसने अपनी जीभ की नोक वहाँ रखी।
सुमन की पूरी बॉडी काँप गई। उसने राज के लंड को जोर से चूसा। उसकी जीभ तेज हो गई।
राज ने उसकी गांड चाटना जारी रखा। फिर वापस चूत पर आया। फिर गांड पर। फिर चूत पर।
दोनों एक दूसरे को मुँह से संत कर रहे थे।
धीरे-धीरे सुमन की साँसें गहरी होने लगीं। राज की भी। उनके शरीर ढीले पड़ने लगे।
सुमन ने राज के लंड को अपने मुँह से बाहर निकाला। उसके होठों पर लार और राज के प्री-कम का मिश्रण था।
"बस... अब सो जाते हैं," वह फुसफुसाई।
राज ने कुछ नहीं कहा। उसने अपने मुँह से सुमन की चूत छोड़ी। उसकी गांड छोड़ी।
दोनों ने करवट बदली। वैसे ही 69 पोजीशन में — सुमन राज के ऊपर, राज नीचे — लेकिन अब चूस नहीं रहे थे। बस एक दूसरे के शरीर की गर्मी महसूस कर रहे थे।
सुमन ने राज के लंड को अपने गाल से सहलाया। राज ने सुमन की चूत पर अपना गाल रख दिया।
दोनों की साँसें धीरे-धीरे सामान्य हुईं।
लंड — सख्त से नरम हो गया।
चूत — गीली से सूखती हुई।
दोनों उसी पोजीशन में सो गए। राज का चेहरा सुमन की चूत और गांड के बीच दबा हुआ। सुमन का चेहरा राज के लंड और बॉल्स के बीच।
कमरे में सिर्फ पंखे की आवाज़। और उनकी गहरी हो चुकी साँसें।
फिर आँखें बंद हो गईं।
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Bahot hi hot and erotic story he aapki, bahot maja aaya padhke, please kuch our gif and hot pics add kijiye club wale episode me and sane wale episode me to bahot maja aayega
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