23-05-2026, 02:22 PM
Yr big update dia kro or spice bhi bs story mai mja nhi bina kisse dare ke gupta ji ko biscuit dilwalo pr poora nhi
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Adultery Adventure of sam and neha
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23-05-2026, 02:22 PM
Yr big update dia kro or spice bhi bs story mai mja nhi bina kisse dare ke gupta ji ko biscuit dilwalo pr poora nhi
24-05-2026, 11:16 AM
मेरा दिल एक झटके से धड़क गया।
अयान। वो लड़का जिसे नेहा बहुत पसंद करती थी। हाँ, ये सब मुझे अब अच्छे से याद है। हम दोनों खास तौर पर अयान से मिलने मुंबई गए थे। नेहा उसे बहुत पसंद करती थी — वो सुसंस्कृत, हैंडसम, अच्छा बोलने वाला, जिम वाला लड़का था। लेकिन मिलने के बाद अयान अचानक गायब हो गया — महीनों तक कोई मैसेज, कोई कॉल नहीं। उसी दौरान नेहा ने “बेकार आदमी” से बात शुरू कर दी। वो अयान के बिल्कुल उलट था — रूप में, बातचीत में, स्टाइल में, संस्कार में हर मामले में inferior। बस एक ही चीज़ में मुकाबला था — उसका लंड। साइज़ और मोटाई में अयान जितना ही बड़ा और तगड़ा, लेकिन दिखने में थोड़ा गंदा और बदबूदार। फिर जो हुआ, वो सब एक छोटी-सी मुलाकात में ही हो गया। सब कुछ इतनी तेज़ी से हुआ कि मुझे खुद यकीन नहीं हुआ। हैंडजॉब, ब्लोजॉब, फिंगरिंग — जितना भी हुआ, वो बस एक घंटे-डेढ़ घंटे की मुलाकात में पूरा हो गया। मुझे कहीं न कहीं ये लगता था कि नेहा ये सब अयान को अपने दिमाग से निकालने के लिए कर रही थी। ठीक वैसे जैसे लोग ब्रेकअप या ghosting के बाद करते हैं — बिना सोचे-समझे किसी भी व्यक्ति के साथ involve हो जाते हैं, सिर्फ़ उस खालीपन को भरने के लिए। जैसे ब्रेकअप के बाद लोग बिना सोचे-समझे किसी से भी involve हो जाते हैं। और अब अयान वापस आ गया था। नेहा ने लैपटॉप खोला। उसकी आँखों में एक चमक थी। वो मैसेज पढ़ रही थी। मैं चुपचाप उसके बगल में बैठ गया। अगले कुछ दिन नेहा बेहद खुश थी। सब पहले जैसा हो गया था। हम ऑफिस से आते, बिना किसी औपचारिक बात के नेहा लैपटॉप के सामने बैठ जाती। हम खाना भी लैपटॉप के सामने ही खाते। टीवी के सामने बैठे हुए दिन हो गए थे, अब टीवी बंद ही रहता। मैं चुपचाप देखता रहता। नेहा की लंबी-लंबी बातें अयान के साथ। वो सुसंस्कृत, सुंदर, जिम जाने वाला लड़का। नेहा उसके साथ घंटों बात करती — कभी हँसती, कभी शरमाती, कभी अपनी छोटी-छोटी बातें बताती। अयान उसे “सुंदर”, “सेक्सी”, “मेरी सपनों की लड़की” कहता। नेहा का चेहरा खिल जाता। और फिर... बेकार आदमी के साथ वाली चैट। वो वाली चैट पूरी तरह गंदी होती। “कैसी है मेरी रंडी?” “आज पति ने चोदा या नहीं?” “चूत दिखा... पैंटी उतार... कभी-कभी वॉइस कॉल पर भी बात होती। बेकार आदमी उसे गालियाँ देता, नेहा हँसती और जवाब देती। मैं बगल में बैठा सब देखता। कभी-कभी मेरा लिंग खड़ा हो जाता, कभी दिल में जलन होती। पहले तो अयान ने नेहा से गुस्से में बात की — कुछ दिन तक। नेहा ने अयान से बिल्कुल ठंडी होकर बात की। भले ही वो अंदर से कितनी भी उत्साहित हो, उसने अपनी आवाज़ में कोई गर्माहट नहीं आने दी। नेहा ने लिखा, “कहाँ थे इतने दिन?” अयान ने तुरंत जवाब दिया, “सॉरी यार... मेरा एक्सीडेंट हो गया था... मैं किसी से बात नहीं कर पाया।” उसने कुछ हॉस्पिटल की फोटोज भी भेज दीं। नेहा ने बस “हम्म” लिख दिया। अयान ने फिर लिखा, “सॉरी यार... तुम मुंबई आए... मैं मिल नहीं पाया... तुम्हें बुरा लगा होगा।” नेहा ने जवाब दिया, “कोई बात नहीं... वैसे भी हमें ज्यादा समय नहीं मिला था... पूरे समय बिज़ी ही थे।” वो जताना चाहती थी कि अयान उसके लिए इतना महत्वपूर्ण नहीं है। लेकिन असलियत कुछ और थी। मैंने नेहा को मायूस देखा था। कभी-कभी रात में उसकी आँखों में आँसू भी थे। वो अयान के साथ couple जैसा बर्ताव कर रही थी — और जब वो गायब हो गया तो नेहा को सच में दर्द हुआ था। धीरे-धीरे सब शुरू होने लगा। बातें फिर से रोमांटिक हो गईं। जो आधी रात तक आते-आते बेहद सेक्सी हो जातीं। हम बिस्तर पर सेक्स करते। लैपटॉप खुला रहता। हमने कभी लाइव नहीं दिखाया, लेकिन वॉइस कॉल पर नेहा की आहें और कराहें जाती थीं। अयान सुनता और उत्तेजित हो जाता। बेकार आदमी से सिर्फ़ एक घंटे की विंडो में बात होती थी — वो भी रात 9 से 10 के बीच। लेकिन अयान के पास नेहा के लिए पूरा समय था। हम सेक्स करते। मैं थक जाता। जब मैं सोने जाता, तो नेहा को कहता, “बस 5 मिनट बात कर लो ना...” फिर वो बातें घंटों में बदल जातीं। कभी-कभी मुझे नेहा को याद दिलाना पड़ता, “कल ऑफिस भी जाना है...” नेहा मुस्कुराती, “हाँ... बस 2 मिनट और...” और फिर 2 मिनट घंटे बन जाते। मैं बिस्तर पर लेटा रहता। अंधेरे में नेहा की हँसी, उसकी फुसफुसाहट, और कभी-कभी उसकी उत्तेजित साँसें सुनता। मुझे जलन होती थी। मुझे उत्तेजना भी होती थी। उसके साथ जो नेहा गुप्ता जी के बेटे राहुल के साथ कर रही थी, वो भी जारी था। मेरी बीवी वर्चुअली ही सही, लेकिन अब 3-4 मर्दों के बीच में थी। अयान, बेकार आदमी, और अब राहुल। कभी-कभी मुझे डर लगता था कि रायता ज्यादा न फैल जाए। कहीं कोई बात बाहर न निकल जाए। कहीं गुप्ता जी को पता न चल जाए कि उसका बेटा मेरी बीवी को बालकनी में, छत पर, या चैट पर कितना देख रहा है। लेकिन राहुल के साथ मामला अभी तक “टाँक झाँक” तक ही सीमित था। नेहा बहुत होशियार थी। वो जानती थी — कितना दिखाना है, कितना छुपाना है। सुबह बालकनी में वो अपनी शॉर्ट स्कर्ट पहनकर खड़ी हो जाती, बाल खोलकर, कभी-कभी टॉप का एक बटन खोलकर। राहुल अपनी बालकनी में खड़ा उसे घूरता। नेहा जानबूझकर झुकती, ताकि उसकी गोरी जाँघें और थोड़ी नजर आएँ। कभी सिगरेट पीते हुए वो राहुल को देखकर मुस्कुराती और आँख मार देती। राहुल का हाथ अपने पजामे पर चला जाता। नेहा देखती और फिर अंदर चली जाती। ये सब उसने बहुत अच्छे से कंट्रोल में रखा था। न ज्यादा, न कम। बस उतना जितना राहुल को उत्तेजित रखे, लेकिन उसकी हिम्मत न बढ़े कि वो कुछ और माँगे। मैं सब देखता। कभी जलन होती, कभी उत्तेजना। कभी डर लगता कि ये खेल कब और कहाँ तक जाएगा। रात में जब नेहा अयान से बात करती, तो वो रोमांटिक और सेक्सी होती। बेकार आदमी से गंदी और बेशर्म। और राहुल के साथ दिन में वो “नॉटी पड़ोसन” वाली भूमिका निभाती। तीन अलग-अलग मर्द। तीन अलग-अलग स्वाद। और मेरी बीवी... इन तीनों के बीच में। रात के दो बज रहे थे। मेरी आँखें अचानक खुल गईं। बिस्तर पर नेहा नहीं थी। मैंने वॉशरूम देखा — खाली। बालकनी — खाली। फिर मैंने मुख्य दरवाज़े की तरफ़ देखा। वहाँ, थोड़े से कोने में... नेहा खड़ी थी। गुप्ता जी के साथ। दोनों अर्ध रात में। नेहा ने साधारण टी-शर्ट और पजामा पहना हुआ था। गुप्ता जी भी घरेलू कपड़ों में थे। दोनों किसी बात पर हँस रहे थे। नेहा के हाथ में सिगरेट थी — आधी जली हुई। मेरा दिल जोर से धड़कने लगा। मैं धीरे से फुसफुसाया, “नेहा... नेहा...” दोनों ने मेरी तरफ़ देखा। नेहा ने मुझे इशारा किया कि आ जाओ। मैं आँखें मलते हुए वहाँ पहुँचा। नेहा ने मुस्कुराते हुए कहा, “बेबी... मेरी सिगरेट खत्म हो गई थी। मैंने ब्लिंकिट से मँगाई थी... दरवाज़े पर खड़ी थी ताकि बेल बजने से तुम्हारी नींद न खुल जाए... फिर सामने अंकल खड़े हुए थे।” गुप्ता जी ने हल्के से हँसते हुए सिर हिलाया, “हाँ बेटा, मैं भी रात को सिगरेट पीने आया था।” मैंने दोनों को देखा। नेहा का चेहरा थोड़ा लाल था — शायद नशे या हँसी की वजह से। गुप्ता जी का हाथ अपनी जेब में था, लेकिन उनकी नज़र बार-बार नेहा की टी-शर्ट पर जा रही थी, जहाँ से उसकी छाती की आउटलाइन साफ़ दिख रही थी। मैं चुप रहा। कुछ कहने को नहीं था। नेहा ने सिगरेट गुप्ता जी को देते हुए कहा, “अंकल, आप ले लीजिए... मैं अंदर जाती हूँ।” गुप्ता जी ने सिगरेट लेते हुए नेहा की उँगलियों को थोड़ा छू लिया। नेहा ने कुछ नहीं कहा। बस हल्के से मुस्कुराई। मैं नेहा को अंदर ले आया। मैं गुप्ता जी से दो-चार और बातें करके अंदर आ गया। दरवाज़ा बंद करते समय भी मेरे दिमाग में वही सवाल घूम रहा था — जब मैं सोया था तब नेहा सिर्फ़ टी-शर्ट और पैंटी में थी। ब्रा भी नहीं पहनी थी। फिर अचानक पजामा कैसे पहन लिया? क्या नेहा डिलीवरी बॉय के इंतज़ार में पजामा पहनकर गई थी? या... सिर्फ़ पैंटी में ही दरवाज़ा खोला था? मैंने कई वीडियो देखे हैं जहाँ कपल्स “डेयर” के नाम पर ऐसी ही हरकतें करते हैं। क्या नेहा ने भी...? नेहा अंदर बिस्तर पर लेट चुकी थी। बिना कुछ कहे। जैसे कुछ हुआ ही न हो। मैं बिस्तर पर लेटा तो वो तुरंत मेरे पास सरक आई। मेरी छाती से लिपट गई। उसके नरम स्तन मेरी छाती से दब रहे थे। उसके बाल मेरे चेहरे पर फैले हुए थे। मैंने धीरे से उसके बालों में हाथ फेरा। नेहा ने कुछ नहीं कहा। बस और कस के लिपट गई। मेरे दिमाग में बार-बार वो तस्वीर आ रही थी — रात के दो बजे... नेहा और गुप्ता जी... एक ही सिगरेट पी रहे थे। दोनों के होंठ एक-एक करके उसी सिगरेट के एक ही हिस्से को छू रहे थे। नेहा की साँसें धीमी और गर्म थीं। मुझे लगा वो पहले से ही सो चुकी है। मैंने बहुत धीमी आवाज़ में पूछा, “नेहा... गुप्ता जी के साथ क्या बात हो रही थी?” नेहा ने आँखें बंद रखते हुए सिर्फ़ इतना कहा, “बस... सिगरेट... और थोड़ी सी ऑफिस वाली बात... सो जाओ ना बेबी...” उसकी आवाज़ में कोई शर्म नहीं थी। न कोई सफाई। जैसे एक सिगरेट शेयर करना, आधी रात में अकेले गुप्ता जी के साथ खड़े होना — ये सब बिल्कुल सामान्य बात हो। मैं चुप रहा। उसकी कमर पर हाथ रखकर उसे और कस के अपनी तरफ खींच लिया। लेकिन नींद मुझे बहुत देर बाद आई।
24-05-2026, 11:18 AM
क शाम खाने की टेबल पर नेहा कुछ सोचते हुए अचानक बोली,
“क्या हम अयान से मिल सकते हैं?” मैंने उसकी तरफ़ देखा। उसके चेहरे पर हल्की सी हिचकिचाहट थी, लेकिन आँखों में उम्मीद भी। मैंने कभी भी अयान से मिलने के लिए मना नहीं किया था। मुंबई में भी मैं तैयार था मिलवाने को। मैंने सहज भाव से कहा, “क्यों नहीं? कहाँ मिलना है?” नेहा थोड़ा रुकी। “वो... वो...” वो कुछ कहने की कोशिश कर रही थी लेकिन शब्द नहीं निकल रहे थे। मैंने फिर पूछा, “क्या हुआ?” नेहा ने नीचे देखते हुए धीरे से कहा, “वो यहाँ आना चाहता है।” मेरा दिल एक झटके से धड़का। “यहाँ मतलब... घर पर?” नेहा ने तुरंत सिर हिलाया, “नहीं... घर नहीं। पुणे... फिर देखते हैं।” उसने “फिर देखते हैं” कहकर बात को अधूरा छोड़ दिया। लेकिन मैं समझ गया — नेहा अयान को घर लाना चाहती थी, बस अभी सीधे कहने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी। खाने के बाद मैंने नेहा से सीधे पूछ लिया, “तुमने उससे मिलने के लिए कहा था क्या?” नेहा थोड़ा हिचकिचाई। उसने मेरी आँखों में देखा, फिर नज़रें नीचे कर लीं। कुछ सेकंड चुप रहने के बाद उसने धीरे से जवाब दिया, “मुंबई के बाद... मैंने उससे मिलने के लिए पूछना बंद कर दिया था।” मैंने उसकी तरफ़ देखा। नेहा की आवाज़ में एक अजीब सी मिश्रित भावना थी — थोड़ा गुस्सा, थोड़ा दर्द, और थोड़ी शर्म। “फिर अब अचानक वो खुद कह रहा है कि यहाँ आना चाहता है?” मैंने पूछा। नेहा ने सिर हिलाया। “हाँ... कल रात उसने खुद पूछा। बोला कि अब वो तैयार है... और मुझे मिलना चाहता है।” मैं चुप रहा। दिमाग में सारी पुरानी बातें घूम गईं — मुंबई की ट्रिप, अयान का गायब हो जाना, नेहा के आँसू, और फिर बेकार आदमी वाला rebound। नेहा मेरे पास आई, मेरी गोद में बैठ गई और मेरे सीने से लगकर बोली, “सैम... अगर तुम नहीं चाहते तो मैं मना कर दूँगी। लेकिन... वो कह रहा है कि इस बार वो सच में मिलना चाहता है।” उसकी आवाज़ में अब वो पुरानी चमक लौट आई थी। मैंने उसके बालों में हाथ फेरा और धीरे से पूछा, “तुम क्या चाहती हो?” नेहा ने मेरी आँखों में देखा। कुछ पल चुप रहने के बाद उसने बहुत धीमी, लेकिन साफ़ आवाज़ में कहा, “मैं... मिलना चाहती हूँ।” मैंने फिर नेहा से पूछा, “क्या कहा उसने ठीक-ठीक?” नेहा ने थोड़ा सा गला साफ़ करते हुए कहा, “उसने मुझे पूछा है कि क्या हम मिल सकते हैं। वो पुणे आने को तैयार है। नेक्स्ट फ्राइडे को। कहाँ मिलना है, अभी डिसाइड नहीं किया है।” मैंने गंभीर होकर कहा, “तुम्हें पता है ना... बिना मिले किसी को घर का पता दे देना ठीक नहीं होता।” नेहा तुरंत चिढ़ गई। उसने मेरी तरफ़ देखा, आँखें थोड़ी सिकुड़ी हुईं। “मैंने कब कहा कि हम उसे घर ले आएँगे?” उसकी आवाज़ में हल्का गुस्सा था। “मैंने तो बस इतना कहा कि वो पुणे आ सकता है। घर की बात ही नहीं की मैंने!” मैं चुप रहा। नेहा ने मेरी गोद से उठते हुए कहा, “तुम हर बार ऐसा क्यों सोच लेते हो? जैसे मैं बेवकूफ़ हूँ और सीधा घर बुला लूँगी।” उसने लैपटॉप उठाया और बेड पर बैठ गई। मैं समझ गया — वो नाराज़ हो गई थी। मैं उसके पास गया, उसके कंधे पर हाथ रखा और धीरे से बोला, “मैं बस सेफ्टी की बात कर रहा था बेबी। अयान को हम अभी तक सिर्फ़ ऑनलाइन जानते हैं।” नेहा ने मेरी तरफ़ देखा। उसकी नाराज़गी थोड़ी कम हुई, लेकिन वो अभी भी चिढ़ी हुई थी। “तो फिर क्या करूँ? मना कर दूँ?” नेहा ने मेरी तरफ़ देखा। उसकी आँखों में अब साफ़ नाराज़गी और थोड़ी चुनौती थी। “तुमने बेकार आदमी को तो घर आने कहा था,” उसने कहा। “तुमने खुद मुझे कहा था कि मैं उसे हाँ कह सकती हूँ।” मैंने गहरी साँस ली। “उसकी बात अलग थी नेहा। हम पहले उससे मिल चुके थे। उसके घर गए थे। उसके हालात देखे थे। तब जाकर हमने फैसला लिया था। नेहा ने मेरी तरफ़ देखा, जैसे मेरी बात को तोल रही हो। मैंने आगे कहा, “अयान सिर्फ़ हमारे लिए यहाँ आएगा। अगर उसने रुकने के लिए कहा तो... नहीं। यहाँ नहीं। उसे बोल दो कहीं बाहर मिलना है — होटल, कैफ़े, या कोई पब्लिक प्लेस। घर नहीं।” नेहा कुछ पल चुप रही। फिर उसने लैपटॉप पर उँगलियाँ चलाईं और धीरे से बोली, “ठीक है... मैं उसे यही बोल दूँगी। लेकिन उसके चेहरे पर वो असंतोष साफ़ दिख रहा था। जैसे वो चाहती हो कि अयान घर आए, मेरे सामने, हमारे बेडरूम में... मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा। “नेहा, मैं मना नहीं कर रहा हूँ। बस सेफ्टी और हमारे नियम... याद है ना?” नेहा लैपटॉप पर टाइप कर रही थी। मैं उसके पीछे खड़ा सब पढ़ रहा था। नेहा ने लिखा: “हम पुणे में नहीं मिल सकते... कहीं और मिलते हैं... पास में... मुंबई-पुणे के बीच कहीं मिलते हैं...” अयान का रिप्लाई तुरंत आया। उसकी नाराज़गी साफ़ दिख रही थी: “what the fuck नेहा बेबी.... मैंने पूरी तैयारी कर ली थी आने की.... इस टाइम पर KLPD मत कर जान” नेहा ने हल्का मुस्कुराते हुए मेरी तरफ़ देखा और फिर लिखा: “सम नहीं चाहते कि हम अभी घर या घर के आस-पास मिलें” अयान ने तुरंत जवाब दिया: “क्यों अभी भी भरोसा नहीं है क्या... सम है क्या आस-पास?” नेहा ने मेरी तरफ़ देखा। मैंने धीरे से कहा, “बोल दो कि मैं पास में नहीं हूँ।” मैं उसका रिएक्शन देखना चाहता था। नेहा ने एक पल सोचा, फिर लैपटॉप पर टाइप किया: “सम पास में नहीं है।” अयान का रिप्लाई आया — और इस बार बहुत गंदा और आक्रामक: “तेरा पति एक नंबर का चूतिया है भैंचोद.... मादरचोद को बीवी भी चुदवानी है और गांड भी फट रही है साले की... तू मारने दे उसे... तू बोल देना कि तू ऑफिस जा रही है... और मिलने आ जा ना..... फिर अपन दोनों तेरे cucky hubby को सरप्राइज़ देंगे [img=26x0]https://cdn.jsdelivr.net/joypixels/assets/7.0/png/unicode/64/1f525.png[/img]” मैं और नेहा दोनों चुपचाप पढ़ रहे थे। अयान पहले भी मुझे गालियाँ देता था, लेकिन आज कुछ अलग था। इस बार उसकी गालियों में गुस्सा, घृणा और खुली हिकारत थी। जैसे वो मुझे सच में तुच्छ समझता हो। नेहा का चेहरा लाल हो गया। उसने मेरी तरफ़ देखा। उसकी आँखों में शर्म भी थी और... एक अजीब सी उत्तेजना भी। उसने लिखा: “ओ मिस्टर... ज़बान संभाल के... वो मेरे पति हैं... मैं उनके बिना कुछ नहीं करूंगी... और आप उनकी गाली-गलौज करने की हिम्मत भी न करें।” उसकी साँसें तेज़ थीं। मैं हैरान था। नेहा ने पहली बार अयान को इस तरह रोका था। पहले वो उसकी गालियाँ चुपचाप पढ़ती थी, कभी-कभी मुस्कुरा भी देती थी। लेकिन आज... उसने मेरी तरफ़ से जवाब दिया। नेहा का मैसेज भेजने के बाद वहाँ कुछ देर तक कोई रिप्लाई नहीं आया। अयान को लग रहा था कि वो किसी साधारण, आसानी से फुसलाने वाली लड़की से डील कर रहा है। उसे नहीं पता था कि नेहा कितनी स्मार्ट है। कई बार तो मुझे भी लगता था कि मैंने नेहा को कन्विंस नहीं किया, बल्कि नेहा ने मुझे तैयार किया है ये सब करने के लिए। लगभग 6-7 मिनट बाद अयान का मैसेज आया। पहले एक "Sorry" और फिर उसके साथ उसका लंड का फोटो। बहुत साफ़, खड़ा, मोटा और नसों वाला। नीचे लिखा था: “Sorry yaar... ये आने के लिए बहुत excited था [img=26x0]https://cdn.jsdelivr.net/joypixels/assets/7.0/png/unicode/64/1f60f.png[/img]” नेहा ने फोटो देखा तो उसकी आँखें थोड़ी बड़ी हो गईं। उसने फोटो को ज़ूम करके देखा, फिर मेरी तरफ़ देखा। उसके चेहरे पर गुस्सा तो था, लेकिन साथ में एक हल्की उत्तेजना भी छुप नहीं पा रही थी। नेहा ने फोटो को कुछ सेकंड देखा, फिर मुझे दिखाते हुए बोली नेहा अभी भी गुस्से में थी। उसका चेहरा लाल था और होंठ सिकुड़े हुए थे। मैंने उसके कंधे पर हल्का से थपकी दी और धीरे से कहा, “कोई बात नहीं बेबी... शांत हो जा।” नेहा ने गहरी साँस ली। गुस्सा शांत करते हुए उसने लैपटॉप पर टाइप करना शुरू किया। “तो इसे excited रखो... मैंने कब मिलने से मना किया? लोनावला में मिलते हैं... फ्राइडे को ही... क्या प्रॉब्लम है?” मैसेज भेजते ही नेहा ने मेरी तरफ़ देखा। उसकी आँखों में अब गुस्सा कम था, लेकिन एक ठोस फैसला साफ़ दिख रहा था। कुछ देर बाद अयान का रिप्लाई आया: “अच्छा बताता हूँ” हा के जवाब ने मेरा दिल जीत लिया था। उसने अयान को सीधा जवाब दिया था — मेरे सम्मान के साथ। मुझे गर्व हुआ था। लेकिन मैं ये भी जानना चाहता था कि अगर मैं वहाँ न होता तो वो क्या कहती। मैंने धीरे से पूछा, “नेहा... अगर मैं न मानता तो तुम क्या करती?” नेहा ने मेरी तरफ़ देखा। उसकी आँखें कुछ पल के लिए मेरी आँखों में गड़ी रहीं। फिर उसने बहुत शांत लेकिन साफ़ आवाज़ में कहा, “मैं अयान से बेकार आदमी की तरह नहीं मिलना चाहती। हम बाहर मिल रहे हैं। अगर सब ठीक रहा... और कुछ होता है... तो...” मैं समझा नहीं। या शायद मेरा दिमाग समझना नहीं चाह रहा था। “मतलब?” मैंने पूछा। नेहा ने धीरे-धीरे, रुक-रुककर कहा, “मतलब... कि... शायद... ये... वो... रात... हो... जो... तुम... इतने... दिनों... से... देखना... चाहते... हो...” उसका चेहरा लाल हो गया। उसने आखिरी वाक्य इतनी धीमी आवाज़ में कहा कि मुझे पूरा यकीन हो गया। ये चुदाई की बात थी। पूर्ण सेक्स। इस बार नेहा अयान के साथ पूरी तरह जाने को तैयार थी। मुझे याद आया — बेकार आदमी के साथ पहली मुलाकात में जब उसने फुल सेक्स माँगा था, तो नेहा ने साफ़ मना कर दिया था। “नहीं... सिर्फ़ यही तक।” कहकर वो रुक गई थी। लेकिन अयान के मामले में... वो पहली बार तैयार थी। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। गला सूख गया था। मैं हकलाते हुए बोला, “तुमने तो बेकार आदमी से वादा किया था... कि फुल सेक्स नहीं करोगी...” उसकी मुस्कान में शरारत थी, थोड़ी शर्म थी और बहुत सारी हिम्मत। “वो भी देख लेंगे...” उसने धीरे से कहा। “लेकिन... अगर सब ठीक रहा तो...” उसने वाक्य अधूरा छोड़ दिया। मैंने उसे घूरा। मेरा गला सूख रहा था। कितना अजीब था सब कुछ... मैं अपनी बीवी से दूसरे मर्दों के बारे में बात कर रहा था। हम दोनों बैठकर फैसला कर रहे थे कि मेरी बीवी को किसके साथ रात बितानी है। कौन मेरी बीवी की चूत की वो गहराइयाँ नापेगा, जहाँ मैं अब तक नहीं पहुँच पाया था। मैंने धीरे से पूछा, “तो ये तुम्हारा फाइनल फैसला है... अयान?” नेहा ने आँखें मटकाते हुए, शरारत भरी मुस्कान के साथ कहा, “हाँ... मैं चाहती हूँ कि ये मेरा पहला हो।” उसने लैपटॉप की स्क्रीन की तरफ़ इशारा किया। वहाँ अयान का लंड का फोटो अभी भी खुला हुआ था — मोटा, तगड़ा, भारी, नसों वाला। जो जल्द ही नेहा के अंदर जाएगा। मैंने सोचा — उसके बाद कुछ दिनों तक नेहा को मेरा लंड हल्का-हल्का महसूस होगा। ठीक वैसे जैसे शूति की चूत मुझे महसूस हुई थी, जब मैंने अपने रूममेट के 10 मिनट बाद उसे चोदा था। (वो कहानी कभी और...) नेहा ने कहा कि अयान उसका पहला होगा। मुझे अचानक थोड़ा बुरा लगा। नेगी जी, बिल्लू, वेणु, बेकार आदमी — इन सबने नेहा के साथ जो कुछ भी किया, उसके स्तनों को छुआ, उसके शरीर को नहलाया, उसके अंदर उँगलियाँ डालीं... उसने उन सबको नहीं गिना। मगर मैं तो उसका पहला था... क्या वो मुझे भी नहीं गिन रही? नेहा ने मेरी तरफ़ देखा। जैसे मेरा दिमाग पढ़ रही हो। फिर मुस्कुराते हुए, मुझे चिढ़ाते हुए बोली, “मेरा मतलब... तुम्हारे बाद वो पहला होगा।” उसने ये कहते हुए मेरी गोद में हल्का सा हिलकर मेरे लंड पर दबाव डाला। उसकी आँखों में शरारत और प्यार दोनों थे। हम दोनों फिर से लैपटॉप देख रहे थे कि अयान के और मैसेज पॉप-अप होने लगे। अयान: “यार नेहा प्लीज... फ्राइडे का ही प्रोग्राम बना ले ना” नेहा ने तुरंत जवाब दिया: “ना बोला ना... वैसे भी हमारे ऑफिस बहुत बड़े हैं... कोई न कोई मिल सकता है।” अयान: “अरे यार ऐसे ही कोई थोड़ी मिलेगा इतने बड़े शहर में” नेहा ने कुछ सोचते हुए लिखा: “अरे तुम मुझसे ही मिलना चाहते हो तो कहीं और मिलेंगे ना... या किसी और काम से आ रहे हो यहाँ?” फिर नेहा ने शरारत करते हुए लिखा: “क्या मेरी जैसी कोई और भी पटा रखी है? सोच रहे हो दोनों को एक ही साथ एक ही ट्रिप में निपटा दोगे? [img=26x0]https://cdn.jsdelivr.net/joypixels/assets/7.0/png/unicode/64/1f60f.png[/img]” अयान: “नहीं नहीं... ऐसा कुछ नहीं है” नेहा ने मजाक वाली इमोजी के साथ लिखा: “अगर ऐसा भी हो तो तुम इस बार उससे मिल लो... हम कोई BF-GF नहीं हैं... बाद में मिल सकते हैं [img=26x0]https://cdn.jsdelivr.net/joypixels/assets/7.0/png/unicode/64/1f609.png[/img]” इस बार अयान ने हाँ कर दी। उसने लिखा कि वो लोनावला का प्लान बताएगा। मैं और नेहा दोनों चुपचाप सब पढ़ रहे थे। मुझे अब सब कुछ समझ आ रहा था। जैसा आपने चैप्टर 1 में पढ़ा था — उसकी ये सारी बातें उस वक्त नहीं, लेकिन मुलाकात के बाद सेंस बनाने लगी थीं। शायद अयान हमें expose करना चाहता था। खासकर घर के साथ। वो चाहता था कि सब कुछ हमारे घर में, हमारे बेड पर हो। हमने कई गलत फैसले लिए थे, लेकिन पुणे में उससे न मिलना... ये हमारा अब तक का सबसे सही फैसला था। स रात हमने बेहद जोश और जुनून के साथ सेक्स किया। नेहा बिल्कुल आग थी। अयान का “हाँ” मिलने के बाद वो जैसे किसी और ही लेवल पर चली गई थी। उसने मुझे बिस्तर पर धकेला, मेरी शर्ट फाड़ते हुए उतारी और मेरे ऊपर चढ़ गई। “आज मुझे ज़ोर से चोदो सैम...” उसने मेरे कान में काटते हुए कहा। उसकी चूत पहले से ही बहुत गीली थी। वो मेरे लंड पर बैठ गई और एक ही झटके में पूरा अंदर ले लिया। फिर तेज़-तेज़ कमर हिलाने लगी। उसकी आहें कमरे में गूँज रही थीं। “आह्ह... हाँ... और तेज़...” मैंने उसके स्तनों को कस के दबाया, निप्पल चूसे, लेकिन नेहा का मन कहीं और था। उसकी आँखें बंद थीं और वो बार-बार फुसफुसा रही थी — “अयान... अयान...” उस दिन जब हम निकले, तो नेहा ने अयान से दो बार कन्फर्म कर लिया था। नेहा बेहद एक्साइटेड थी। उसने लाल साड़ी पहनी थी — वो वाली जो मुझे सबसे ज्यादा पसंद थी। सिंदूर, मंगलसूत्र, चूड़ियाँ, काजल, बिंदी — सब कुछ पूरा। वो सर से पैर तक किसी की परफेक्ट, शादीशुदा बीवी लग रही थी। साड़ी का पल्लू उसकी छाती पर लिपटा हुआ था, ब्लाउज थोड़ा टाइट, जिससे उसकी गोरी कमर का हिस्सा हल्का-हल्का दिख रहा था। अयान ने खास तौर पर यही माँगा था — “मुझे तुम्हें साड़ी में देखना है, पूर्ण भारतीय बीवी वाली लुक में।” मैं गाड़ी चला रहा था। नेहा आगे वाली सीट पर बैठी थी, बार-बार आईने में खुद को देख रही थी। उसके चेहरे पर एक अनोखी चमक थी। मैंने हल्के से कहा, “लग रहा है आज कोई दूसरा आदमी अपनी बीवी को ले जा रहा है।” नेहा मुस्कुराई, मेरी जाँघ पर हाथ रखा और बोली, “हाँ... आज मैं किसी और की बीवी बनकर जा रही हूँ।” लोनावला पहुँचने तक हम दोनों चुप थे। बेकार आदमी की याद आ रही थी — उसने नेहा को हमेशा मॉडर्न कपड़ों में, शॉर्ट ड्रेस, जींस, टॉप में बुलाया था। जवान अयान नेहा को ट्रेडिशनल वाइफ के रूप में चोदना चाहता था। हर किसी की अपनी फैंटसी होती है। फिर वहाँ जो हुआ, वो हम सबने चैप्टर 1 में पढ़ा था। वो धोखा। जिसने नेहा को सच में तोड़ दिया। लोनावला के होटल की लॉबी में छिपते-छिपते, साँस रोके, स्टाफ डोर से भागते हुए जब हम कार में बैठे, तब तक नेहा का पूरा शरीर काँप रहा था। रास्ते भर वो चुप रही। घर पहुँचकर भी वो सीधे सोफे पर बैठ गई। एक सिगरेट जलाई और बिना रुके पीने लगी। मैं लैपटॉप खोलकर अयान के मैसेज पढ़ रहा था। जब मैंने नेहा को दिखाया कि अयान ने हमें देखा भी नहीं था, वो सिर्फ़ ब्लफ मार रहा था — तब नेहा का चेहरा और भी सफेद पड़ गया। उसने लैपटॉप को घूरा। फिर धीरे-धीरे उसकी आँखों में आँसू भर आए। महीनों का इमोशनल कनेक्शन, वो सारी बातें, वो विश्वास — सब एक पल में बेकार हो गया। ये वो धोखा था जिसने नेहा को अंदर तक तोड़ दिया। उसके बाद नेहा कई दिनों तक चुप रही। हँसना बंद कर दिया। मेरे साथ भी बातें कम हो गईं। वो सिर्फ़ एक बात बार-बार कहती थी: नेहा: “अब किसी पर भरोसा नहीं करना सैम... किसी पर भी।” ये था वो धोखा। जिसने नेहा को सच में तोड़ दिया।
24-05-2026, 10:49 PM
Bhai neha ka jaise smoke ka hua seen aishe he gupta ji se neha nude ya pnty mai gate khole or woh biscuit ko touch kre lick kre ya neha blow job or watchmen dkhle phir threesome ho ya neha ko blackmail kre ushe nude parking mai kre skult mai bulaaye bina panty or whi fuck kre or cigarette ko ushke chut mai lgakr kre teasee or thoda spice or pls big update ke read krne mai time lge humko or car mai nude jaaye or security officer dkhle or mje leh or on road nude fuck kre threesome kre
28-05-2026, 12:22 PM
Bhai please Update wait nhi ho rha.....????
28-05-2026, 07:42 PM
(This post was last modified: 28-05-2026, 07:43 PM by Life_is_short. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
लगभग 4 महीने बीत चुके थे उस घटना को।
नेहा अब भी पूरी तरह नॉर्मल नहीं हुई थी। वो अंदर से अभी भी शॉक में थी — ये सोचकर कि हमारे साथ क्या-क्या हो सकता था। कितना बड़ा रिस्क था, कितना बड़ा धोखा। हमने उस चैट ग्रुप में दोबारा कदम भी नहीं रखा। हम दोनों के बीच सेक्स तो लगभग खत्म ही हो गया था। बस रात को बिस्तर पर अलग-अलग करवट लेकर सो जाते। दिन भर ऑफिस और काम में व्यस्त रहते। मैंने बहुत कोशिश के बाद इंटरनेट पर अयान का यूट्यूब चैनल ढूँढ लिया था। चैनल पर वो “कपल्स को अप्रोच करने” वाले कई वीडियो डाल रहा था। कुछ ब्लर फोटोज़ थीं — नेहा की ब्रेस्ट्स की। यूट्यूब गाइडलाइन्स के हिसाब से नंगी नहीं थीं, लेकिन काफी provocative थीं। नीचे ********* लिंक दिया हुआ था — जहाँ पैसे देकर लोग चैट्स और “एक्सक्लूसिव पिक्स” खरीद सकते थे। मैंने सब देख लिया। लेकिन अच्छी बात ये थी कि हमने कभी भी फेस वाली कोई फोटो या वीडियो शेयर नहीं की थी। अयान हमें चेहरा से नहीं जानता था। उसकी अपलोड की हुई तस्वीरें किसी की भी हो सकती थीं। इंटरनेट तो boobs से भरा पड़ा है। शायद 1-2 लोगों ने उन ब्लर फोटोज़ पर मुठ मारी होगी, बस। उससे ज्यादा कुछ नहीं। फिर भी... नेहा को जब मैंने ये सब बताया, तो वो चुपचाप सुनती रही। उसके चेहरे पर कोई गुस्सा नहीं आया, न रोई। बस बहुत ठंडी आवाज़ में बोली, नेहा: “तो आखिर में वो भी बस पैसा और व्यूज़ के पीछे था... मैंने सोचा था कम से कम वो अलग होगा।” उसके बाद वो उठकर बालकनी में चली गई। एक सिगरेट जलाई और चुपचाप धुआँ उड़ाती रही। मैं दूर से उसे देखता रहा। XXXXXX इस बीच हम दोनों ज़्यादा शराब पीने लगे थे। हर शाम ऑफिस से आते ही हम व्हिस्की या वाइन की बोतल खोल लेते। हम अक्सर सोचते कि “आज इस बारे में बात नहीं करेंगे”, लेकिन बात आखिरकार वहीं जाकर खत्म होती। एक रात हम बालकनी में बैठे थे। दो-दो ग्लास व्हिस्की पी चुके थे। नेहा का चेहरा पहले से ही लाल था। अचानक वो चुप हो गई। उसकी आँखें भर आईं। वो रोने लगी — बिना आवाज़ के, सिर्फ़ आँसू बहते हुए। नेहा: (टूटी हुई आवाज़ में) “मैंने उस पर कितना भरोसा कर लिया था सैम... मैंने उसे वो सब बताया जो मैंने कभी किसी को नहीं बताया... अपनी फैंटसीज़, अपनी कमजोरियाँ, तुम्हारे साथ हमारे रिश्ते की बातें... सब कुछ।” उसने ग्लास को कसकर पकड़ा, जैसे उसे तोड़ना चाह रही हो। नेहा: “मैं कितनी बेवकूफ़ थी ना? इस पूरे घटनाक्रम के बाद नेहा से “आगे क्या करना है” इस बारे में बात करने की हिम्मत भी नहीं हो रही थी। मैं जानता था कि वो अभी भी गुस्से और शॉक में है। कोई भी बात उसे फिर से तोड़ सकती थी। इसलिए मैं चुप रहा। महीने बीत गए थे। हम दोनों के बीच सेक्स तो लगभग बंद ही था। सिर्फ़ औपचारिक बातें, खाना, ऑफिस और सो जाना। मगर हर आदमी के दो दिमाग होते हैं। एक असली, दूसरा लंड। उस दिन शाम को मैं बालकनी में सिगरेट पी रहा था। तभी राहुल अपनी बालकनी में दिखा। उसने मुझे देखा और मुस्कुराते हुए आवाज़ लगाई, राहुल: “हेलो भैया... आजकल नेहा भाभी की तबीयत ठीक नहीं है क्या? वो थोड़ी अलग-सी लग रही हैं। कई दिनों से दिखाई ही नहीं दीं।” मैंने उसे देखा। उसकी आँखों में वही पुरानी भूख थी। नेहा ने तो सब बंद कर रखा था — न कोई शॉर्ट ड्रेस, न बालकनी में फ्लर्ट, न राहुल को कोई शो। फिर भी इस झंट बराबर लड़के की हिम्मत देखो — वो मुझसे ही पूछ रहा था कि मेरी बीवी उसे क्यों नहीं दिख रही। उसकी बात सुनते ही मेरे लंड में अचानक जान आ गई। पूरा खड़ा हो गया। मैंने सिगरेट का कश लिया और हल्के से मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “हाँ... थोड़ा थकान है। काम का प्रेशर ज्यादा है। आराम कर रही है।” नेहा किचन में थी। मैं बेडरूम में गया, दरवाज़ा बंद किया, पैंट उतारी और लंड पकड़ लिया। मैंने आँखें बंद कीं और हिलाने लगा। मैं सोच रहा था — नेहा जब बेकार आदमी के साथ थी... उसकी गोरी जाँघें फैली हुई... बेकार आदमी की उँगलियाँ उसकी चूत में... नेहा की आहें... उसका गीला चेहरा... जब वो उसके मोटे, बदबूदार लंड को मुँह में ले रही थी... मेरा हाथ तेज़ हो गया। मैं सब कुछ याद कर रहा था — मैं तेज़ी से हिलाता रहा। कुछ ही मिनट में मेरा लंड फड़कने लगा और मैं झड़ गया — पूरा पेट और हाथ पर। साँसें तेज़ थीं। शरीर में एक अजीब सी राहत थी, लेकिन मन में अपराधबोध भी। मैंने नेहा को कुछ नहीं बताया। न राहुल की बात, न अपना खड़ा लंड, न ये कि मैं उसके पुराने किस्सों को याद करके हिला रहा था। मैं बस चुपचाप बाथरूम गया, साफ किया और बाहर निकल आया। नेहा अभी भी किचन में थी। XXXXXXX कुछ दिन बाद रात को जब नेहा सो गई, तो मैं चुपके से लैपटॉप खोला। मैं फिर से उसी पुराने चैटबॉट पर गया — बेकार आदमी को ढूँढने। नेहा को कुछ नहीं बताया। मुझे खुद भी नहीं पता था कि मैं क्यों ढूँढ रहा हूँ। शायद इसलिए कि अयान वाले धोखे के बाद वो एकमात्र ऐसा शख्स था जिस पर भरोसा किया जा सकता था — कम से कम वो धोखा तो नहीं देता था। गंदा था, बेहूदा था, लेकिन सच्चा था। कई दिनों की मेहनत के बाद आखिरकार मैं उसे ढूँढ ही लिया। जैसे ही मैंने मैसेज भेजा, उसका रिप्लाई कुछ मिनट बाद आया। बेकार आदमी: “अरे वाह... लौट आए भाई? कहाँ गायब हो गए थे तुम दोनों? नेहा का भी कोई मैसेज नहीं आया महीनों से। सब ठीक तो है ना?” उसकी बातों में कोई खास उम्मीद नहीं थी। न कोई शिकायत, न कोई गुस्सा, न कोई “मुझे बहुत याद आ रही थी” वाला ड्रामा। बस साधारण जिज्ञासा थी। या फिर उसने समझ लिया था कि हमारा चैप्टर बंद हो चुका है। मैंने कुछ देर सोचा और लिखा: “हाँ सब ठीक है। धीरे-धीरे मेरी और बेकार आदमी की बातें फिर से शुरू हो गईं। मैंने नेहा को कुछ नहीं बताया। मैंने उसे सब कुछ बताया — अयान वाला पूरा धोखा, नेहा का शॉक, वो रोना, तीन महीनों की चैटिंग, लोनावला वाला पैनिक, सब कुछ। वो चुपचाप सुनता रहा। एक दिन मैंने उससे कहा, “मिलते हैं कहीं?” उसने तुरंत हाँ कर दी। ऑफिस के बाद मैं उसे अपनी कार में ले गया। एसी चला दी, महंगी व्हिस्की खोली (जो मैंने खास उसके लिए ली थी)। वो कार की सीट पर फैलकर बैठ गया, जैसे राजा हो। मैं उसे ग्लास थमाता, वो पीता और मुस्कुराता। मैंने उसे सब कुछ बताया — नेहा का गोवा वाला किस्सा । मैंने उसे अपना पूरा पास्ट भी बता दिया। नेहा का पास्ट भी। सब कुछ। मुझे पुराने अविनाश वाले दिन याद आ रहे थे। बस इस बार मैं अपनी बहन के बारे में नहीं, अपनी बीवी के बारे में गंदी बातें कर रहा था। वो मेरी महंगी व्हिस्की पीता, सिगरेट फूँकता और गंदी-गंदी बातें करता। मुझे अजीब सा मजा आ रहा था। रात को घर लौटते वक्त मैं नेहा को बोल देता, “आज ऑफिस के दोस्तों के साथ हूँ, लेट हो जाएगा।” नेहा को कभी शक नहीं हुआ। क्यों शक करती? उसने खुद मुझे छूट दे रखी थी कि मैं उसे किसी और से चुदवा सकता हूँ। लेकिन उसे ये कभी नहीं पता चला कि मैं ऑफिस के पढ़े-लिखे, महंगे, “सॉफिस्टिकेटेड” दोस्तों के साथ बैठकर शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड या नेटफ्लिक्स की बातें करने के बजाय... एक मजदूर, एक बेकार आदमी के साथ कार में बैठकर महंगी व्हिस्की पीना और अपनी बीवी की चुदाई की कहानियाँ सुनना ज्यादा पसंद कर रहा था। ये मेरा नया गुप्त नशा बन गया था। पहली एक-दो मुलाकातों में वो अभी भी अपनी भावनाएँ पैंट के ऊपर से छुपा रहा था। जब मैं बात कर रहा होता, तो वो चुपचाप सुनता और कभी-कभी जाँघ पर हाथ फेर लेता। लेकिन कुछ नहीं बोलता। लेकिन तीसरी-चौथी मीटिंग के बाद उसका संकोच टूट गया। उस दिन मैं गर्गी के बारे में बता रहा था। उसकी फोटो फोन पर दिखा रहा था — गोरा रंग, भारी स्तन, पतली कमर। वो फोटो देखते ही उसकी आँखें चमक उठीं। “ओह भैंचोद... तेरे घर सब ही माल है यार! यकीन नहीं होता... इसकी दो बच्चे भी हैं?” उसने बिना कोई हिचकिचाहट के अपनी zip खोल दी। कार की सीट पर आराम से फैल गया और बोला, “अब तुझे क्या शर्माना? तू तो पहले ही सब hilaya hua है...” मैं बोलता जाता, वो मेरी महंगी व्हिस्की पीता जाता। कभी-कभी नेहा या गर्गी की फोटो देखकर अपने लंड को जोर-जोर से हिलाने लगता। कार में सिर्फ़ मेरी आवाज़, उसकी हाँफती साँसें और लंड हिलाने की गीली-गीली आवाज़ भर गई थी। जब वो झड़ने वाला था, मैंने चुपचाप उसे टिश्यू पेपर थमा दिया। उसने समझ लिया। मेरी महंगी गाड़ी खराब नहीं करनी थी। उसने टिश्यू को अपने लंड पर लगा लिया और ज़ोर से हिलाते हुए झड़ गया। बहुत सारा गाढ़ा वीर्य टिश्यू में भर गया। वो हाँफ रहा था। माथे पर पसीना था। मैं चुपचाप बैठा उसे देख रहा था। मुझे इस सब में मजा आ रहा था। बहुत गहरा, बहुत गंदा मजा। मैं अपने दिमाग को समझ नहीं पा रहा था। एक तरफ नेहा अभी भी उस धोखे के सदमे में थी, हमारे बीच सब कुछ ठंडा पड़ गया था। दूसरी तरफ मैं... अपनी बीवी की पुरानी चुदाई की कहानियाँ सुनाकर, किसी और आदमी को अपनी कार में बैठाकर, उसकी महंगी शराब पिलाकर, अपनी बीवी की फोटोज़ दिखाकर... उसका लंड हिलवाकर मजा ले रहा था। मुझे एहसास हो गया था — मुझे नेहा के साथ वो “feeling” addict हो गई थी। वो उत्तेजना। वो जलन। वो गंदापन। लेकिन अब नेहा इसमें शामिल नहीं थी। फिर भी मुझे वो feeling चाहिए थी। इसलिए मैं ये सब कर रहा था। बेकार आदमी ने टिश्यू को मोड़ा, खिड़की से बाहर फेंका और मुस्कुराते हुए बोला, “साली... तेरी बीवी की कहानी सुनकर आज बहुत तेज़ झड़ा यार। अब बता... कब फिर मिलेगी वो मेरे लंड से?” मैंने कुछ नहीं कहा। बस गाड़ी स्टार्ट कर दी। XXXXXXXXXXX आखिरी बार जब मैं बेकार आदमी से मिला, उसने बताया कि उसकी शिफ्ट बदलने वाली है। अब शाम को मिलना मुश्किल हो जाएगा। बेकार आदमी: “मादरचोद... मेरी शिफ्ट बदल रहे हैं। अब दिन में ही ड्यूटी लगेगी।” उस दिन हमने काफी ज्यादा पी ली थी। मेरी महंगी व्हिस्की की बोतल आधी से ज्यादा खाली हो चुकी थी। नशे में मैंने उसे वो फोटोज़ दिखानी शुरू कर दीं — जो हमारी शादी के कुछ ही दिन बाद ली थीं। नेहा को मैंने विक्टोरिया सीक्रेट की ब्लैक नाइटी गिफ्ट की थी। वो बहुत ट्रांसपेरेंट और सेक्सी थी। नेहा की गोरी त्वचा उसमें और भी चमक रही थी। जैसे ही उसने फोटो देखी, उसकी आँखें फैल गईं। “ओहह भैंचोद... क्या माल है यार!” उसका लंड तुरंत पैंट के अंदर सख्त हो गया। उसने zip खोली और अपना मोटा, काला लंड बाहर निकाल लिया। पूरी तरह खड़ा और नसों से भरा हुआ। वो फोटो देखता, बार-बार ज़ूम करता, और अपना लंड हिलाता। कभी लंड पकड़ता, कभी हाथ हटाकर फोटो को और अच्छे से देखता। जैसे नेहा के हर अंग को अपनी आँखों से चोद रहा हो। मैं नशे में था। मुझे खुद नहीं पता चला कब मुँह से निकल गया, “दिक्कत हो रही है तो... मैं हिला दूँ? तू नेहा को enjoy कर...” उसने मेरी तरफ़ देखा। एक पल के लिए चुप रहा, फिर मुस्कुराया। मैंने बिना कुछ सोचे अपना हाथ बढ़ाया और उसका गर्म, मोटा लंड पकड़ लिया। पहली बार किसी और आदमी का लंड अपने हाथ में लिया था। बहुत मोटा, भारी और गर्म था। मैंने धीरे-धीरे हिलाना शुरू कर दिया। वो नेहा की फोटोज़ देखता रहा — उसके स्तन, उसकी जाँघें, उसकी कमर, उसके होंठ। वो नेहा की ब्लैक नाइटी वाली फोटो को बार-बार ज़ूम करके देख रहा था। उसकी साँसें भारी हो चुकी थीं। “धीरे... हाँ... धीरे हिला... अब तेज़... और तेज़ यार...” मैं उसके इशारों के हिसाब से हाथ की रफ्तार बदल रहा था। कभी धीमा, कभी तेज़। उसने अचानक मेरे हाथ को देखकर कहा, “भैंचोद... तेरे हाथ कितने सॉफ्ट हैं... किसी लड़की जैसे...” फिर उसने अपना वही गंदा, खुरदुरा हाथ मेरे चेहरे पर रगड़ दिया। जो हाथ थोड़ी देर पहले अपने लंड पर था। मैंने उसकी खुशबू सूँघी — नमकीन, पसीने और व्हिस्की की मिली-जुली। मेरा हाथ अपने आप तेज़ हो गया। वो और भी कामुक हो गया। उसकी गर्दन पीछे झुक गई, आँखें बंद। “बाबू... वो कागज़ निकाल ले... मैं झड़ने वाला हूँ... (हाँफते हुए) ” मैंने दूसरे हाथ से टिश्यू ढूँढा, लेकिन एक हाथ से उसके लंड को हिलाना नहीं छोड़ा। जैसे ही मैंने टिश्यू निकाला, उसने जोर से कराहा। “आआह्ह्ह... ले...” उसके लंड ने फड़कते हुए गर्म-गर्म गोले दाग दिए। कुछ टिश्यू पर, ज़्यादातर मेरी कार के डैशबोर्ड पर। मोटे, सफेद धब्बे डैशबोर्ड पर बिखर गए। वो कुछ सेकंड तक हाँफता रहा, आँखें बंद किए। सके जाने के बाद मैंने टिश्यू से अपना डैशबोर्ड साफ किया। उसके वीर्य की गंध अभी भी कार में फैली हुई थी। अजीब सी feeling थी — न शर्म, न पछतावा। बल्कि एक गहरा, गंदा संतोष। मुझे अभी भी ये सब गलत नहीं लग रहा था। घर पहुँचा तो नेहा शॉर्ट्स और टैंक टॉप में थी। बहुत दिनों बाद उसका ये रूप देख रहा था — गोरी जाँघें, बिना ब्रा के निप्पल टैंक टॉप से हल्के से उभरे हुए। मैं लेट था, लेकिन उसने पहले ही बोतल खोल रखी थी। मेरा पैग भी तैयार था। नेहा: (मुस्कुराते हुए) “आ जा बेबी...” वो मेरी गोद में बैठ गई। कस के चिपक गई। एक हाथ से मेरे लंड को पकड़ लिया और हल्का-हल्का दबाने लगी। महीनों बाद उसकी ऐसी closeness और छुअन महसूस हो रही थी। मैंने उसे कस के पकड़ लिया। तभी उसने अचानक पूछा, नेहा: “वो तुम्हारा दोस्त था ना... कॉलेज वाला... क्या नाम था उसका?” सम: “अविनाश।” नेहा: “हाँ... अविनाश। तुमने मुझे बताया था कि तुम उसे मेरी पिक्स ईमेल कर सकते हो... दीदी के...” मैं एकदम से सतर्क हो गया। नशा एक पल में उतरने लगा। नेहा: (धीरे से, लेकिन सीधे मेरी आँखों में देखते हुए) “मुझे वो ईमेल देखना है।” कमरे में सन्नाटा छा गया। मेरी गोद में बैठी हुई नेहा मेरे लंड को अभी भी हल्का-हल्का सहला रही थी, लेकिन उसकी आँखों में अब एक अलग तरह की चमक थी। न शर्म, न शरारत — बस एक ठंडी, जिज्ञासु नज़र। मैं कुछ बोल नहीं पाया।
28-05-2026, 07:45 PM
मेरे दिमाग में बहुत सारी बातें एक साथ घूम रही थीं।
वो ईमेल 10 - 12 साल पुराना था। तब फेसबुक-इंस्टा कुछ नहीं था। सब याहू मेल पर होता था। मैं और अविनाश दोनों बहुत गंदी चैट करते थे — फोटोज़ शेयर करते, कहानियाँ लिखते। अब Gmail पर शिफ्ट हो चुके थे, जैसे ही कोई “कांड” हो जाता, मैं पूरा चैट डिलीट कर देता। लेकिन पुरानी याहू आईडी थी। सही कहूँ तो शादी के बाद से मैंने उसे २-३ साल में शायद ही एक-दो बार खोला हो। वो पुरानी याद की तरह कहीं खोया हुआ था। नेहा मेरी गोद में बैठी हुई थी, मेरे लंड को हल्का-हल्का सहला रही थी और मेरी आँखों में देख रही थी। मैं हिचकिचाते हुए, थोड़ा रुक-रुककर बोला, सम: “वो... वो ईमेल तो अब पता नहीं... वो याहू का था ना... बहुत पुराना है... शायद डिलीट हो गया होगा...” नेहा ने मेरी आँखों से नज़र नहीं हटाई। उसके होंठों पर एक हल्की मुस्कान आई, लेकिन आँखें गंभीर थीं। नेहा: “पुराना होने से क्या हुआ? तुम्हें तो याद होगा ना... उसके होंठों पर एक हल्की, लेकिन बहुत अर्थपूर्ण मुस्कान आ गई। हम दोनों IT में थे, इसलिए नेहा को भी अच्छे से पता था कि पुराना याहू ईमेल पासवर्ड रिकवर करना कोई बड़ी बात नहीं है। मेरे दिमाग में दो हिस्से लड़ रहे थे। एक हिस्सा चिल्ला रहा था — “मत दिखा... मत ले जा उस तरफ।” क्योंकि मुझे खुद नहीं पता था कि उस पुराने याहू ईमेल में क्या-क्या लिखा था। क्या मैंने गर्गी की कोई बहुत गंदी फोटो भेजी थी? क्या मैंने अविनाश को गर्गी के बारे में कुछ ऐसा लिखा था जो नेहा को कभी नहीं बताना चाहिए? मैं काफी नशे में था — बेकार आदमी के साथ पी हुई व्हिस्की अभी भी सिर में घूम रही थी। नेहा सिर्फ़ एक पैग पीकर थी, इसलिए वो अभी भी हल्का-हल्का नशे थी। दूसरा हिस्सा, जो मेरे लंड के साथ था, वो कह रहा था — “ये मौका है सैम... पिछले कई महीनों बाद नेहा आज इस mood में है। तेरी गोद में बैठी है, चिपकी हुई है, किस कर रही है, लंड सहला रही है। ये Ayan वाले धोखे से बाहर निकलने का पहला कदम हो सकता है। अगर इस कदम के लिए पुरानी ईमेल वाली कुर्बानी देनी पड़े तो... दे दे।” नेहा मेरे बहुत करीब थी। उसके गर्म होंठों से मेरे मुँह पर हल्की-हल्की गर्म हवा पड़ रही थी। बीच-बीच में वो मुझे हल्का-हल्का किस कर रही थी — होंठों पर, गाल पर, गर्दन पर। उसकी छाती मेरी छाती से दब रही थी। मेरा लंड अब पूरी तरह खड़ा था। मुझे एहसास हो रहा था कि आज शायद बहुत दिनों बाद हम सेक्स कर सकते हैं। ये मौका मैं खोना नहीं चाहता था। नेहा ने मेरी शर्ट के दो बटन खोल दिए। उसकी नरम, गर्म उँगलियाँ मेरे सीने पर घूम रही थीं। फिर वो धीरे-धीरे झुकी और मेरे सीने पर हल्के-हल्के किस करने लगी। हर किस के साथ उसकी गर्म साँस मेरी त्वचा पर पड़ रही थी। हम दोनों सोफे पर थे। वो मेरी गोद में बैठी हुई थी, मेरे लंड को अभी भी हल्का-हल्का सहला रही थी। मैं कुछ बोलने वाला था, लेकिन वो मेरी आँखों में देखकर पहले ही बोल पड़ी, नेहा: “बोलो ना... वो ईमेल खुल सकता है ना?” मैंने थोड़ा हिचकिचाते हुए कहा, सम: “बेबी... वो मैंने बहुत दिनों से यूज़ नहीं किया है। हो सकता है उसमें कुछ ऐसा हो... जो तुम्हें पसंद न आए...” नेहा ने तुरंत अपनी उँगली मेरे होंठों पर रख दी। नेहा: “श्श्श...” फिर वो मेरी आँखों में गहरी नज़र डालकर बोली, नेहा: “हम दोनों के बीच ऐसा कुछ नहीं होगा। वैसे भी मैंने बहुत सोच लिया है। मैंने decide कर लिया है कि अब मैं बाहर किसी के साथ कुछ नहीं करूँगी। किसी के भी साथ।” उसने मेरे सीने पर एक और किस किया, फिर मेरे कान में धीरे से कहा, नेहा: “तुमने मुझे कभी force नहीं किया... और आगे भी मत करना। मैं जानती हूँ। लेकिन जो अयान के साथ हुआ... उससे हमारी सेक्स लाइफ खराब नहीं होनी चाहिए। हम वो सब कर सकते हैं... बस उस एक्साइटमेंट को जारी रखने के लिए मैंने पूछा था। वरना कोई force नहीं है।” नेहा ने मेरी शर्ट का एक और बटन खोला। उसकी गर्म, नरम जीभ की नोक मेरे nipple पर घूम रही थी — बहुत धीरे-धीरे, गीला करते हुए। हर बार जब वो चूसती, मेरे शरीर में झनझनाहट दौड़ जाती। मैं हाँफते हुए बोला, सम: “चलो... देखते हैं वो ईमेल खुलता है या नहीं...” जैसे ही मैंने ये कहा, नेहा की आँखों में एक झटका सा उत्तेजना भरी चमक आई। वो तुरंत मेरी गोद से उठी, हिलती-डुलती हुई लैपटॉप ले आने गई। उसकी शॉर्ट्स में उसकी गोरी जाँघें और टैंक टॉप में उसके स्तन हिल रहे थे। मैं लैपटॉप खोलकर पुरानी याहू आईडी में लॉगिन करने की कोशिश करने लगा। नेहा पीछे खड़ी मेरे कंधे पर हाथ रखे हुए देख रही थी। 15-20 मिनट की मेहनत के बाद आखिरकार वो पुराना अकाउंट खुल गया। हजारों ईमेल्स एक साथ सामने आ गए। नेहा ने झट से लैपटॉप मेरे हाथ से ले लिया। वो सोफे पर बैठ गई और स्क्रोल करने लगी — बहुत पीछे, शुरुआत की तरफ़। जैसे वो सब कुछ, एक-एक करके देखना चाहती हो। उसका चेहरा स्क्रीन की रोशनी में चमक रहा था। उसकी साँसें थोड़ी तेज़ हो गई थीं। नेहा: (बिना मेरी तरफ़ देखे, स्क्रोल करते हुए) “ये... 12 साल पुराना है... यहाँ से शुरू करते हैं...” वो स्क्रोल करती जा रही थी। हर पुरानी डेट पर रुक रही थी। मैं उसके बगल में बैठा था, मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। कुछ पुरानी चैट्स खुलने लगीं — अविनाश और मेरी बातें... गर्गी की फोटोज़... उसके बारे में लिखी गई गंदी-गंदी लाइन्स... नेहा चुपचाप पढ़ रही थी। उसका चेहरा भावहीन था, लेकिन उसकी गर्दन पर नसें उभर आई थीं। मैं चुपचाप बैठा था। नशा अभी भी था, लेकिन अब डर भी साथ में था। नेहा ने एक पुरानी ईमेल खोली। उसमें गर्गी की वो फोटो थी — टाइट ब्लैक टॉप में, जिसमें उसके स्तन बहुत उभरे हुए दिख रहे थे। नेहा ने फोटो को ज़ूम किया और धीरे से बोली, नेहा: “ये... दीदी है ना?” (वो गर्गी को हमेशा “दीदी” ही बोलती थी) मैंने चुपचाप हाँ में सिर हिला दिया। अभी तक जितने भी ईमेल खुल रहे थे, उनमें मेरी तरफ से ज़्यादातर फोटोज़ थीं — गर्गी की। अविनाश के रिप्लाई में सिर्फ़ गंदी-गंदी टिप्पणियाँ। फिर एक ईमेल खुला जिसमें अविनाश ने अपना लंड की फोटो भेजी थी। पुरानी कैमरे की फोटो थी, क्वालिटी खराब, लेकिन साइज़ और शेप साफ़ दिख रहा था। उसके बाद कुछ और फोटोज़ — उसके निकले हुए वीर्य की। किसी कपड़े पर, किसी ब्रा पर... नेहा ने एक फोटो को ज़ूम किया — सफेद वीर्य एक ब्रा के कप पर फैला हुआ था। नेहा: (धीमी लेकिन sharp आवाज़ में) “क्या ये... दीदी की ब्रा है?” मैंने फिर चुपचाप हाँ में सिर हिला दिया। नेहा कुछ पल तक स्क्रीन को घूरती रही। फिर उसने अगला ईमेल खोला। इस बार अविनाश ने लिखा था — “यार तेरी बहन की गांड तो फाड़नी है... इतनी टाइट लग रही है... तू इजाजत दे तो मैं इसे अपना बना लूँ...” नेहा ने ईमेल पढ़ा, फिर मेरी तरफ़ मुड़ी। उसकी आँखें लाल हो रही थीं, लेकिन गुस्सा नहीं — एक अजीब सी उत्तेजना और हैरानी का मिश्रण था। नेहा: “तो तुम अपनी बहन की फोटोज़ भेजकर... अपने दोस्त से उसकी चुदाई की बातें कर रहे थे?” मैंने कुछ नहीं कहा। मेरा गला सूख रहा था। नेहा ने लैपटॉप को थोड़ा और करीब खींचा और स्क्रोल करती रही। हर ईमेल के साथ उसकी साँसें तेज़ हो रही थीं। वो मेरे बगल में बैठी थी, लेकिन अब उसका शरीर मेरे से थोड़ा अलग हो गया था। नेहा सब जानती थी। मैंने पहले ही उसे अविनाश वाली बातें, गर्गी वाली फोटोज़ और चैट्स के बारे में बता रखा था। लेकिन आज वो सब कुछ दोबारा देख रही थी। खुद पढ़ रही थी। खुद महसूस कर रही थी। मैं ईमेल नहीं देख रहा था। मैं नेहा को देख रहा था। उसके चेहरे की चमक, उसकी साँसों की रफ्तार, उसकी आँखों में आ रही लालिमा — सब कुछ। जब कोई खास ईमेल या फोटो आती, तो वो मेरी तरफ़ देखती। कभी हल्का सा मुक्का मेरे कंधे पर मारती, कभी शर्म से होंठ काटती, तो कभी अपनी जाँघें कस के दबा लेती और चूत को हल्का-हल्का रगड़ने लगती। एक ईमेल में वो फोटो थी — गर्गी सो रही थी। उसकी स्कर्ट ऊपर चढ़ी हुई थी। काली पैंटी साफ़ दिख रही थी। गर्गी की मोटी, गोरी जाँघें और पैंटी में उसके नितंबों की आउटलाइन। नेहा ने फोटो को ज़ूम किया। काफी देर तक देखती रही। फिर मेरी तरफ़ मुड़ी। उसकी साँसें तेज़ थीं। नेहा काफी देर तक स्क्रीन को घूरती रही। उसकी साँसें तेज़ हो चुकी थीं। फिर अचानक उसने लैपटॉप को साइड में रख दिया और मेरी तरफ़ मुड़ी। उसने मेरे बालों को कस के पकड़ लिया — बहुत ज़ोर से। बहुत दिनों बाद उसकी इस वाली पकड़ महसूस हो रही थी। वो मुझे अपने होंठों के पास ले आई। मैंने सोचा वो किस करेगी, लेकिन वो सिर्फ़ १० सेकंड के लिए मेरे होंठों को अपने होंठों से छूकर हट गई। फिर दाँतों से मेरे निचले होंठ को काटा — हल्का-सा, लेकिन कामुक तरीके से। नेहा: (बहुत धीमी, भारी आवाज़ में) “भैंचोद...” उसकी आँखों में पुरानी वाली शरारत और भूख दोनों लौट आई थी। फिर उसने मेरे सिर पर दबाव डाला और मुझे नीचे खींच लिया — अपनी चूत की तरफ़। वो मेरे चेहरे को अपनी शॉर्ट्स के ऊपर से रगड़ने लगी। ज़ोर-ज़ोर से। ऊपर-नीचे, आगे-पीछे। उसकी गर्मी और नमी दोनों शॉर्ट्स के पतले कपड़े के ऊपर से साफ़ महसूस हो रही थी। मेरे बालों की जड़ों में तेज़ दर्द हो रहा था, लेकिन मैं कुछ नहीं बोला। बहुत दिनों बाद नेहा का ये रूप वापस आया था — वो पुरानी, भूखी, dominant नेहा। मैं सब सहने को तैयार था। नेहा ने अपनी जाँघें मेरे गालों के दोनों तरफ़ कस लीं और मेरे मुँह पर और ज़ोर से रगड़ने लगी। उसकी साँसें अब हाँफने जैसी हो गई थीं। उसकी शॉर्ट्स अब पूरी तरह भीग चुकी थीं। मैं जीभ निकालकर शॉर्ट्स के ऊपर से ही उसकी चूत को चाटने लगा। नेहा और ज़ोर से कराह उठी। नेहा ने अचानक लैपटॉप फिर से उठा लिया और स्क्रोल करना शुरू कर दिया। वो और पुरानी ईमेल्स देख रही थी। मैंने इंतज़ार नहीं किया। मैंने उसके शॉर्ट्स का वेस्टबैंड पकड़ा और एक झटके में नीचे खींच दिया। नेहा ने हल्का सा कूल्हा उठाकर मदद कर दी। अब वो सोफे पर आधी लेटी, आधी बैठी हुई थी। एक पैर ज़मीन पर, दूसरा सोफे पर फैला हुआ। उसकी प्यारी, गुलाबी चूत मेरे सामने पूरी तरह खुली हुई थी — पूरी तरह भीगी, चमकती हुई, रस से लथपथ। मुझे महीनों बाद उसकी चूत की गंध आई — वो मीठी-नमकीन, उत्तेजक गंध। मैंने बिना एक सेकंड वेस्ट किए अपना मुँह आगे बढ़ाया और अपनी जीभ उसकी चूत पर फेर दी। नेहा ने एक लंबी आह भरी। नेहा: “आह्ह्ह... हाँ...” वो लैपटॉप को एक हाथ में थामे हुए थी, दूसरा हाथ मेरे बालों में। मैंने अपनी जीभ से उसकी पूरी चूत चाटनी शुरू कर दी — नीचे से ऊपर तक, क्लिट पर घुमाते हुए, फिर अंदर डालने की कोशिश करते हुए। नेहा की जाँघें काँप रही थीं। वो स्क्रीन पर ईमेल पढ़ रही थी, लेकिन उसकी साँसें अब पूरी तरह अनियंत्रित हो चुकी थीं। मैंने दोनों हाथों से उसकी जाँघें फैलाईं और अपना मुँह और गहराई में लगा दिया। उसका गाढ़ा, गर्म रस मेरी जीभ पर, मेरे होंठों पर फैल रहा था। मैं चूस रहा था, चाट रहा था, जीभ अंदर डाल रहा था। नेहा ने लैपटॉप को थोड़ा और करीब खींचा, लेकिन उसकी आँखें बार-बार बंद हो रही थीं। उसने मेरे बालों को और कस के पकड़ लिया और अपनी चूत को मेरे मुँह पर और ज़ोर से रगड़ने लगी। मैं नेहा की चूत को वैसा चाट रहा था, जैसे कोई आदमी अपने सबसे पसंदीदा खाने को बहुत दिनों बाद मिला हो। भूखा, लालची और बिना रुके। मेरी जीभ उसकी पूरी चूत पर घूम रही थी — क्लिट को चूसता, अंदर डालता, फिर नीचे तक चाटता। नेहा बीच-बीच में लैपटॉप मुझे दिखा रही थी। कभी दीदी की फोटो, कभी अविनाश की गंदी टिप्पणी। जितना आगे वो स्क्रोल करती, फोटोज़ उतनी साफ़ होती जा रही थीं। एक ईमेल में मैंने दीदी की फेस्टिवल वाली फोटोज़ भेजी थीं — वो तैयार होकर खड़ी थी। अविनाश ने रिप्लाई में लिखा था — “साली को मैं स्टेप बाय स्टेप नंगी करूँगा... पहले ब्लाउज, फिर पेटticoat... तेरे घर के ही एक कमरे में ले जाकर चोदूँगा... तेरा पूरा परिवार बाहर बैठा रहेगा... दीदी की चुदाई की चीखें पूरे घर में गूँजेंगी... तेरा भाई बोलेगा भी कि रोकना चाहिए... लेकिन दीदी चुदवाती रहेगी...” नेहा ये पढ़कर काँप उठी। उसकी जाँघें मेरे चेहरे को दबाने लगीं। सका शरीर अचानक सख्त हो गया। वो मेरे बालों को कस के खींचने लगी और अपनी चूत को मेरे मुँह पर ज़ोर-ज़ोर से रगड़ने लगी। एक जोरदार झटके के साथ वो झड़ गई। बहुत सारा गर्म, गाढ़ा रस मेरे मुँह में, मेरी जीभ पर, मेरी ठोड़ी पर बहने लगा। मैंने सब चाट लिया — बिना एक बूँद गिराए। थोड़ी देर बाद जब वो शांत हुई, तो मैं उठने लगा। लेकिन नेहा ने अपने पैरों से मेरे कंधों को पकड़ लिया और मुझे ज़ोर से नीचे दबाया। वो अभी भी आधी लेटी, आधी बैठी हुई थी। नेहा: (भारी, कामुक आवाज़ में) “कहाँ जा रहा है? आज तू बस चूत चाटेगा... बैठ जा ज़मीन पर...” मैं ज़मीन पर बैठ गया। नेहा ने अपने दोनों पैर मेरे कंधों पर रख दिए। उसकी चूत अब मेरे मुँह के बिल्कुल सामने थी — पूरी तरह खुली, लाल और रस से चमकती हुई। नेहा: (मेरे बालों को फिर से पकड़ते हुए, मुस्कुराते हुए) “भैंचोद..." आज मेरा दिल बहुत खुश था। पहले तो बेकार आदमी के साथ जो कुछ हुआ — वो गंदा, गुप्त और उत्तेजक सिलसिला। फिर आज... बहुत दिनों बाद मेरी पुरानी dominating नेहा वापस लौट आई थी। वो वाली नेहा, जो मेरे बाल खींचती है, मुझे अपनी चूत पर रगड़ती है और मुझे अपना गुलाम बना लेती है। उस रात मैंने उसे 2-3 बार झड़वाया। नेहा लैपटॉप को एक हाथ में थामे हुए थी। भले ही उसकी जाँघें काँप रही थीं, साँसें हाँफ रही थीं, शरीर पसीने से तर था — वो लैपटॉप हाथ से जाने नहीं दे रही थी।
01-06-2026, 11:39 AM
अगले कुछ हफ्ते हम इसी मस्ती में रहे।
मैं ऑफिस से आता, और चाय-कॉफी पूछने की बजाय नेहा सीधे मुझे बेडरूम में खींच ले जाती। कभी वो मेरे ऊपर चढ़ जाती, कभी मेरे मुँह पर बैठ जाती। और फिर शुरू होती पुरानी ईमेल्स की चर्चा। नेहा: “आज देखो... तुमने दीदी की शादी के प्रपोजल वाली फोटो भेजी थी अविनाश को... उसने लिखा है — ‘यार ये तो रात भर चुदवाएगी...’” नेहा: “ये वाली देखो... तुमने अपनी पुरानी गर्लफ्रेंड के बारे में बताया था... और ये... तुम्हारे भाई राजीव और भाभी प्रीति की फोटो... भाभी के बूब्स ... 38 से भी बड़े... अविनाश ने लिखा — ‘ये तेरे भाई से कैसे सेटिस्फाई होगी? इसके बूब्स पहाड़ने के लिए तो 4 हाथ चाहिए...’” वो लैपटॉप एक तरफ रखकर मेरे ऊपर चढ़ जाती और धीरे-धीरे हिलने लगती। जब वो अविनाश की कनाडा वाली फोटोज़ देखती — जहाँ वो किसी रेड लाइट क्लब में दो लड़कियों के बीच अपना लंड दिखा रहा था, कैप्शन में लिखा था “Enjoy कर रहा हूँ लेकिन दिमाग में तेरी बहन और भाभी है” — तो नेहा और भी उत्तेजित हो जाती। कभी-कभी वो स्क्रीन को चूम लेती। कभी अविनाश के लंड की तारीफ़ करने लगती नेहा: “देखो... कितना मोटा और काला है इसका... तेरा तो इससे कहीं छोटा है...” फिर मुस्कुराते हुए मेरे कान में फुसफुसाती, “लेकिन तेरा छोटा वाला ही मुझे सबसे ज्यादा पसंद है...” उसमें एक नया जोश आ गया था। वो पहले से कहीं ज़्यादा खुल गई थी। सेक्स के दौरान वो पुरानी चैट्स पढ़ती, गंदी-गंदी बातें करती, और मुझे चोदने देती। मैं सोच रहा था — ये मेरा समय है। अब मैं उसे बेकार आदमी के बारे में फिर से बात कर सकता हूँ। लेकिन मैं फूँक-फूँक कर कदम रख रहा था। अभी भी डर था कि कहीं फिर से वो बंद न हो जाए। नेहा मेरे ऊपर चढ़ी हुई थी, मेरे लंड को अपनी चूत में लेकर धीरे-धीरे हिल रही थी। उसने मेरे कान में फुसफुसाते हुए पूछा, नेहा: “श्रुति की क्या कहानी थी?” मैंने गहरी साँस ली और शुरू किया। सम: “श्रुति मेरी कॉलेज की गर्लफ्रेंड थी। मेरी पहली चूत। बहुत innocent और शर्मीली थी। हमारा रूममेट था — रोहन। हम तीनों अक्सर पार्टी करते, बहुत पीते। धीरे-धीरे मुझे शक होने लगा कि श्रुति और रोहन के बीच कुछ चल रहा है।” नेहा मेरी छाती पर झुक गई, मेरी आँखों में देखते हुए सुन रही थी। सम: “एक रात मैंने नाटक किया कि मैं बेहोश हूँ। मैंने देखा... रोहन श्रुति को कुत्ते की तरह चोद रहा था। श्रुति चीख रही थी — ‘और ज़ोर से... हाँ... फाड़ दो...’ जो उसने मेरे साथ कभी नहीं कहा था। वो चीजें कर रही थी जो मेरे साथ कभी नहीं करती थी — गंदी गालियाँ देना, गांड हिलाना, रोहन को ‘मेरा मालिक’ बोलना। मैं चुपचाप रोता रहा और सारा सीन अविनाश को लिख दिया।” नेहा की चूत मेरे लंड पर और कस गई। सम: “फिर... मैंने खुद को मजबूर किया कि मैं देखूँ। हर बार जब वो तीनों पीते, मैं नाटक करता कि मैं सो गया हूँ। और देखता रहता कि रोहन श्रुति को कैसे चोदता है। कभी-कभी तो वो मेरे बगल वाले बेड पर ही...” नेहा अब तेज़ी से हिलने लगी थी। उसकी साँसें भारी हो गई थीं। Avinash का क्या रिप्लाई था भाई सैम... रो मत यार [img=26x0]https://cdn.jsdelivr.net/joypixels/assets/7.0/png/unicode/64/1f602.png[/img] तेरी श्रुति अब रोहन के लंड पर चीख रही है?? बहुत मस्त है। अब तू enjoy कर... अगली बार देखते समय अपना लंड निकाल के हिला... मुझे फोटो भेजना। मुझे तेरी गर्लफ्रेंड की चुदाई देखने का मन कर रहा है।’” नेहा मेरे ऊपर और तेज़ हिलने लगी। उसकी चूत मेरे लंड को पूरी तरह निचोड़ रही थी। नेहा मेरे ऊपर चढ़ी हुई थी। उसकी चूत मेरे लंड को पूरी तरह निगल रही थी। वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे हो रही थी, अपनी आँखें मेरी आँखों में गाड़े हुए। नेहा: (हाँफते हुए, सेक्सी आवाज़ में) “तुम्हें क्यों लगता है... श्रुति ने ऐसा क्यों किया?” मैं जानता था वो जवाब पहले से जानती है, फिर भी सुनना चाहती थी। सम: “क्योंकि... रोहन बिस्तर पर मुझे से बेहतर था। श्रुति मुझे प्यार करती थी... लेकिन रोहन उसे बिस्तर पर वो feeling दे रहा था जो मैं नहीं दे पा रहा था।” नेहा ने अपनी कमर को घुमाया, मेरे लंड को अंदर और गहराई तक लेते हुए पूछा, नेहा: “अच्छा... उसका कितना बड़ा था?” सम: “बड़ा... बहुत बड़ा। मुझसे ज़्यादा मोटा और लंबा।” नेहा की साँसें और तेज़ हो गईं। वो अब थोड़ा तेज़ हिलने लगी। नेहा: “क्या तुमने उसके बाद भी श्रुति के साथ सेक्स किया?” सम: “हाँ... कई बार। कभी-कभी तो 1 - 2 घंटे के अंतराल पर।” नेहा: (मेरी छाती पर हाथ रखकर) “कैसा feel हुआ?” सम: “खाली... जैसे वो पहले से ही खुल चुकी हो। मुझे अंदर कुछ महसूस नहीं हो रहा था। जैसे कोई गर्म, गीली, लेकिन ढीली सुरंग...” नेहा ने मेरे बाल पकड़ लिए और मेरी आँखों में देखते हुए बोली, नेहा: “फिर तो मेरी भी feel नहीं होगी... अगर मुझे किसी और ने चोदा तो? क्या तुम्हें बुरा लगेगा?” मैंने बिना सोचे जवाब दिया, सम: “नहीं... कभी नहीं।” जैसे ही ये शब्द मेरे मुँह से निकले, नेहा की चूत मेरे लंड पर ज़ोर से कसी। मुझे लगा जैसे बात अब उसी दिशा में जा रही है। मेरा दिमाग पूरी तरह उत्तेजित हो गया। मैंने नेहा की कमर पकड़ी और नीचे से ज़ोर-ज़ोर से ठोकना शुरू कर दिया। सम: “आह्ह्ह... नेहा...” कुछ ही सेकंड में मैं उसके अंदर फट पड़ा। बहुत ज़ोर से, गर्म-गर्म। मेरा पूरा वीर्य उसकी चूत में भर गया। नेहा मेरे ऊपर से उठी। उसकी चूत से मेरा वीर्य उसकी जाँघों पर बह रहा था। वो बिना कुछ कहे washroom चली गई। मैं बिस्तर पर लेटा रहा, थका हुआ और नशे में। कुछ देर बाद वो वापस आई — नंगी, सिर्फ़ बाल खुले हुए। सीधे लैपटॉप के पास गई और बैठ गई। मैं आँखें आधी बंद किए उसे देख रहा था। स्क्रीन की हल्की नीली रोशनी उसके नंगे शरीर पर पड़ रही थी। उसकी एक उँगली धीरे-धीरे अपनी चूत पर घूम रही थी, जबकि दूसरा हाथ माउस पर था। वो पुरानी ईमेल्स पढ़ रही थी कभी-कभी वो हल्का सा कराहती, कभी अपनी उँगली अंदर डाल लेती। उसका चेहरा स्क्रीन की रोशनी में चमक रहा था — जिज्ञासा, उत्तेजना और थोड़ा गुस्सा, सब मिला हुआ। मुझे लगा — शायद मैंने उसे भी वैसा ही प्यासा छोड़ दिया है, जैसा श्रुति को छोड़ दिया था। पर अब मेरी आँखें भारी हो रही थीं। शरीर थक चुका था। धीरे-धीरे मैं सो गया। हमारी वो मस्ती ऐसे ही चल रही थी। हर शाम घर आते ही नेहा को कुछ न कुछ नया मिल जाता। नई कहानी, नया नशा, नया गंदापन। वो लैपटॉप खोलती, पुरानी ईमेल्स खंगालती और मुझे बिस्तर पर घसीट लाती। एक रात वो मेरे ऊपर चढ़ी हुई थी, मेरे लंड को अपनी चूत में लेकर धीरे-धीरे हिल रही थी। अचानक उसने स्क्रीन पर कुछ पढ़ा और हँस पड़ी। नेहा: “अच्छा जी... तो भाभी पर भी बुरी नज़र थी तुम्हारी?” उसने लैपटॉप को थोड़ा नीचे किया और पढ़कर सुनाया, नेहा: “‘...प्रिटी भाभी के बूब्स के बीच मेरा लंड रखकर चोदना चाहता हूँ... उनको देवर की लंड चूसते हुए देखना चाहता हूँ...’” नेहा जोर से हँसी। फिर मेरी तरफ़ झुककर बोली, नेहा: “चोटू सा लंड... इतने बड़े बूब्स में कैसे फिट होगा?” फिर उसने अपना स्वर बदल दिया — नखराली, शरमाती, लेकिन कामुक। वो मेरी भाभी प्रीति बन गई। नेहा (प्रीति भाभी बनकर): “देवर जी... क्या कर रहे हो? अरे... शर्म नहीं आती? मैं तुम्हारी भाभी हूँ... और तुम मेरे बूब्स के बीच अपना छोटा सा लंड डालना चाहते हो?” उसने मेरे लंड को अपनी चूत में और गहराई तक ले लिया और तेज़ी से हिलने लगी। नेहा: “देवर जी... तुम्हारा लंड तो बहुत छोटा है... मेरे पति का तो इससे कहीं बड़ा है... फिर भी... आज भाभी तुम्हें मौका दे रही है... चूसो भाभी के बूब्स...” वो मेरे मुँह पर अपने स्तन रखकर रगड़ने लगी। मैं चूसता रहा। वो बार-बार “देवर जी... देवर जी...” कहकर मुझे नीचा दिखा रही थी, गालियाँ दे रही थी, और खुद भी पूरी तरह भीग रही थी। उस रात वो मेरी भाभी बनी रही। मुझे “छोटे लंड वाले देवर” कहकर चिढ़ाती रही। मजेदार तो बहुत था... लेकिन अंदर कहीं एक डर भी था। क्योंकि ईमेल्स अब खत्म होने वाले थे। जब सारी पुरानी कहानियाँ खत्म हो जाएँगी... तब क्या होगा? क्या नेहा फिर से ठंडी हो जाएगी? एक शाम मैं ऑफिस से लौटा ही था। हम दोनों कॉफी पी रहे थे। थोड़ी देर इधर-उधर की बातें करने के बाद नेहा ने अचानक मग नीचे रखा और मेरी तरफ देखा। नेहा: “क्या तुमने स्विंगिंग के बारे में कभी सोचा है?” मैं चौंक गया। सम: “ये क्या सवाल है? मतलब... कहाँ से आया ये?” नेहा ने कुछ नहीं कहा। उसने लैपटॉप खोला, कुछ देर स्क्रोल किया और फिर मेरी तरफ घुमा दिया। अविनाश का पुराना ईमेल था। उसमें कनाडा के एक स्विंगर्स क्लब की फोटोज़ और डिटेल थी। नेहा: “पढ़ो...” मैंने पढ़ना शुरू किया। “यार सैम, कल मैं अपनी सेक्सी वाइफ के साथ कनाडा के एक स्विंग क्लब गया था — ‘Velvet Exchange’। अंदर घुसते ही माहौल देखकर होश उड़ गए। हल्की लाल रोशनी, सॉफ्ट म्यूजिक, और चारों तरफ आधी नंगी बॉडीज। वहाँ अलग-अलग रूम थे, यहाँ कपल्स खुलेआम सेक्स कर रहे थे। एक औरत दो आदमियों के साथ थी — एक उसकी चूत चोद रहा था, दूसरा मुँह में लंड दे रहा था। यहाँ पत्नी स्वैपिंग हो रही थी। एक खूबसूरत औरत दूसरे के पति के लंड पर बैठकर चुद रही थी, जबकि उसका पति बगल में बैठकर देख रहा था। शीशे की दीवार के पीछे से लोग अंदर हो रही चुदाई देख सकते थे। अलग रूम अंदर बिल्कुल अंधेरा था। सिर्फ कराहने की आवाज़ें और शरीर की रगड़ सुनाई दे रही थी। कुछ भी हो सकता था। मेरी वाइफ तो सिर्फ देखकर ही भीग गई थी। हमने कुछ नहीं किया, बस देखा। लेकिन यार, माहौल इतना हॉट था कि मन कर रहा था नेहा मेरे सीने से सटी हुई थी। उसने मेरी छाती पर उँगली फेरते हुए धीरे से पूछा, नेहा: “ऐसा कुछ भारत में भी होता है?” मैंने एक पल सोचा, फिर बोला, सम: “सुना तो बहुत है... होटल की चाबी वाली पार्टी वाली कहानियाँ। एक जगह चाबियाँ रखी होती हैं, कोई भी किसी भी कमरे की चाबी उठा लेता है। उस कमरे में जो भी बीवी हो — रात भर मजा। लेकिन असल में... मैंने कभी किसी ऐसे ग्रुप से संपर्क नहीं किया।” नेहा ने मेरी तरफ़ देखा। नेहा: “क्यों?” सम: “मुझे नहीं लगता कि यहाँ इतनी सेफ्टी और ऑर्गनाइजेशन के साथ ये सब होता होगा। सिक्युरिटी, गुंडे, ब्लैकमेल... पता नहीं क्या-क्या हो सकता है। और जो वीडियो मैंने देखे हैं ना... उनमें ज्यादातर मोटे-मोटे अंकल-आंटी, बदसूरत लोग... देखकर ही सेक्स का विश्वास उठ जाता है।” नेहा हल्के से हँसी। उसने मेरी छाती पर चुम्बन किया और बोली, नेहा: “तो तुम्हें लगता है... भारत में ये सब सिर्फ़ कहानियाँ ही हैं? या सच में कहीं चलता भी होगा?” मैंने उसके बालों में हाथ फेरा और ईमानदारी से कहा, सम: “चलता होगा... लेकिन बहुत छुपकर। बहुत अमीर, बहुत powerful लोग। जिनके पास पैसे और कनेक्शन हैं। हम जैसे नॉर्मल लोग... शायद कभी नहीं पहुँच पाएँगे। और सच्चाई ये है कि... मैंने कभी इतनी हिम्मत भी नहीं की कि ढूँढने की कोशिश करूँ।” नेहा कुछ देर चुप रही। फिर मेरी आँखों में देखकर धीरे से बोली, नेहा: “अगर... कहीं कोई safe और अच्छा ऑप्शन मिले... तो तुम जाना चाहोगे?” उसका स्वर बहुत शांत था, लेकिन उसकी उँगलियाँ मेरी जाँघ पर हल्के से दब रही थीं। मैंने उसकी तरफ़ देखा। उसकी आँखों में जिज्ञासा और थोड़ी उत्तेजना दोनों थी। सम: “तुम जाना चाहोगी?” नेहा ने जवाब नहीं दिया। बस मेरी छाती पर अपना सिर रख दिया और धीरे से बोली, नेहा: “सोच रही हूँ...” कमरे में सन्नाटा छा गया। सिर्फ हम दोनों की साँसें सुनाई दे रही थीं। मैं सोच रहा था कि नेहा की हिम्मत बढ़ रही है... लेकिन गलत दिशा में। उस रात मैंने एक बहुत बुरा सपना देखा। सपने में नेहा किसी सिक्युरिटी थाने की ठंडी, गंदी ज़मीन पर बैठी हुई थी। उसका मुँह काला कपड़ा बाँधकर ढका हुआ था। उसके हाथ पीछे बंधे हुए थे। उसकी साड़ी फटी हुई थी, ब्लाउज के कई बटन टूट चुके थे, एक स्तन आधा बाहर निकला हुआ था। एक मोटी, काली लेडी कांस्टेबल उसके सामने खड़ी थी। वो नेहा को जोर-जोर से थप्पड़ मार रही थी। लेडी कांस्टेबल: “साली रंडी... बोल! कितने मर्दों से चुदवा रही थी? स्विंग क्लब? पार्टी? नाम बता सबके!” नेहा रो रही थी। उसके आँसू कपड़े पर भीग रहे थे। वो बार-बार रो-रोकर कह रही थी, नेहा: “मुझे छोड़ दो... मैंने कुछ नहीं किया... प्लीज... मेरे पति को मत बताना...” लेडी कांस्टेबल ने नेहा के बाल खींचे और उसका सिर ऊपर किया। लेडी कांस्टेबल: “तेरा पति बाहर बैठा है... सब देख रहा है। अब बोल... कितने लंड घुसाए थे अपनी चूत में? सब वीडियो हमारे पास हैं... वायरल कर देंगे!” मैं सपने में चीख रहा था, लेकिन मेरी आवाज़ नहीं निकल रही थी। मैं दौड़कर जाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन मेरे पैर ज़मीन से चिपके हुए थे। मेरी रूह काँप गई। अचानक मेरी आँख खुल गई। मैं पसीने से तर था। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। ईमेल्स लगभग खत्म हो चुके थे। अब वही पुरानी बातें बार-बार दोहराई जा रही थीं। नेहा का ध्यान भी कम होने लगा था। रातों की मस्ती भी धीरे-धीरे कम हो रही थी। मैं महसूस कर रहा था कि हम धीरे-धीरे ढलान पर जा रहे हैं। एक रात हम बेड पर लेटे थे। नेहा अचानक बोली, “मैंने एक स्विंग क्लब की वेबसाइट देखी है।” “अच्छा? कौन सी?” मैंने सोचा कि शायद कोई भारतीय क्लब या छुपा हुआ ग्रुप होगा। नेहा ने लैपटॉप उठाया, कुछ देर स्क्रोल किया और मुझे दिखाया। वो कनाडा के उसी क्लब की वेबसाइट थी — ‘Velvet Exchange’ — जिसके बारे में अविनाश ने पुराने ईमेल में लिखा था। वेबसाइट बहुत प्रोफेशनल और हाई-एंड थी। कपल्स की तस्वीरें, आने वाले इवेंट्स, प्राइवेसी पॉलिसी, रूल्स — सब कुछ साफ़ लिखा हुआ था। मैं नेहा की तरफ देखा, हल्के से मुस्कुराया और बोला, सम: “कनाडा?” नेहा का चेहरा तुरंत बदल गया। “तुम्हें पता है ना तुम्हारे पासपोर्ट का क्या हाल है? गाड़ी चलाना सीखते समय साइकिल वाले पर चढ़ गई थी... गलत साइड में... F I R हुई... केस अभी भी चल रहा है। जब तक केस खत्म नहीं होता, तुम कहीं बाहर नहीं जा सकती।” नेहा ने तुरंत मुँह बनाया और झुंझलाकर बोली, “पता है... पता है... मुझे वापस याद मत दिलाओ वो वाली बात। हर बार यही सुनाते हो।” फिर उसने लैपटॉप थोड़ा और करीब किया और उत्साह से बोली, “देखो... इसमें फीचर है कि क्लब में आप ऑनलाइन भी कपल्स से बात कर सकते हो। $50 की फीस है। हम बोल देंगे कि हम कनाडा से ही हैं। उन्हें हमारे असली नाम और लोकेशन की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। वो हमें कपल्स के प्रोफाइल भेजेंगे, आने वाले इवेंट्स बताएंगे, हम उनसे चैट भी कर सकते हैं...” उसकी आँखें चमक रही थीं। “सब कुछ exciting है ना? बिना घर छोड़े... बिना रिस्क लिए... बस ऑनलाइन से शुरू करेंगे। फिर देखेंगे आगे क्या होता है।” वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई, लेकिन उस मुस्कान में उम्मीद भी थी और थोड़ी बेचैनी भी। मैं चुपचाप उसे देखता रहा। मेरा दिमाग दो हिस्सों में बंटा हुआ था — एक हिस्सा कह रहा था “ये खतरनाक है”, दूसरा हिस्सा कह रहा था “ये तो वही एक्साइटमेंट है जो हम ढूँढ रहे थे”।
04-06-2026, 11:32 AM
मैंने रात में थोड़ा और रिसर्च किया।
क्लब की वेबसाइट, उनके सोशल मीडिया पेजेस, रिव्यूज़, ओनर्स की डिटेल — सब कुछ देखा। सच कहूँ तो क्लब काफी प्रोफेशनल और सुरक्षित लग रहा था। बहुत सारे रूल्स थे, बैकग्राउंड चेक, कंसेंट फॉर्म, प्राइवेसी पॉलिसी — सब लिखा हुआ था। लेकिन फिर भी... सम: “नेहा, क्लब तो ठीक-ठाक लग रहा है। सोशल मीडिया पर भी अच्छे रिव्यूज़ हैं। लेकिन...” नेहा मेरी तरफ़ मुड़ी। उसका चेहरा गंभीर था। नेहा: “मैंने पहले ही साफ़ कर दिया है ना? मुझे किसी से मिलना नहीं है। अभी नहीं। कभी भी नहीं। बस ऑनलाइन देखना, चैट करना, समझना — बस इतना ही। अगर तुम्हें लगता है कि मैं किसी से मिलने वाली हूँ, तो भूल जाओ।” उसकी आवाज़ में कोई झिझक नहीं थी। मैं चुप हो गया। मुझे बेकार आदमी की बात उठानी थी, लेकिन अब लग रहा था कि ये बिल्कुल गलत समय है। नेहा अभी स्विंगिंग क्लब की ऑनलाइन दुनिया में उतरना चाहती है, लेकिन फिजिकल मीटिंग से बहुत दूर है। अगर मैंने अचानक बेकार आदमी का नाम लिया, तो शायद वो फिर से बंद हो जाए। ता नहीं हर पति-पत्नी ये करते होंगे या नहीं। करते भी होंगे तो शायद हमारी तरह चुपके-चुपके ही करते होंगे। मुझे लगता था कि बात करके करना कम पाप है, बिना बताए करने से। हम जिस शहर में रहते हैं, यहाँ सबसे ज्यादा एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर्स होते हैं। मेरी टीम में ही 2-4 लोग ऐसे हैं जिनके बारे में सब जानते हैं। फिर भी.. रजिस्ट्रेशन के बाद प्रोसेस शुरू हुआ। सबसे पहले उन्होंने हमारी बेसिक जानकारी ली — नाम (फेक - राहुल और रिया ), उम्र, लोकेशन (कनाडा), रिलेशनशिप स्टेटस (Married Couple)। फिर पेमेंट — $50। हमने क्रेडिट कार्ड से कर दिया। उसके बाद एक डिटेल्ड फॉर्म आया जिसमें हमारी सेक्शुअल प्रेफरेंस, फैंटसीज़, लिमिट्स, क्या हम फुल स्वैप चाहते हैं या सिर्फ सॉफ्ट स्वैप, वॉय्योर हैं या नहीं — सब कुछ पूछा गया। हम दोनों मिलकर फॉर्म भर रहे थे। नेहा बहुत ध्यान से पढ़ रही थी। फिर उन्होंने हमें कुछ इंट्रोडक्टरी वीडियो देखने को कहा। पहला वीडियो क्लब का ही था — जब क्लब खाली था। वीडियो में क्लब का पूरा टूर दिखाया गया। बहुत सुंदर, हाई-एंड जगह। बड़े प्ले रूम, शीशे की दीवारें, सॉफ्ट लाइटिंग, कम्फर्टेबल बेड्स, बार एरिया, लॉकर रूम, शावर एरिया — सब कुछ बहुत क्लीन और प्रोफेशनल लग रहा था। वीडियो के अंत में एक स्टाफ मेंबर मुस्कुराते हुए कह रही थी: यहाँ हर सदस्य सम्मानित और सुरक्षित महसूस करे, यही हमारा उद्देश्य है।” वीडियो खत्म होने के बाद नेहा ने लैपटॉप को थोड़ा साइड किया। वो कुछ पल चुप रही, फिर मेरी तरफ़ मुड़ी। यहाँ तक सब कुछ ठीक चल रहा था। पेमेंट हो गया, फॉर्म भर दिए, इंट्रोडक्टरी वीडियो भी देख लिए। लेकिन फिर लफड़ा हो गया। क्लब ने हमें एक और स्टेप में बताया कि वे कन्फर्म करना चाहते हैं कि हम असली कपल हैं। इसके लिए उन्होंने कहा कि हमें अपने में से किसी एक का सोशल मीडिया प्रोफाइल (Instagram/Facebook) शेयर करना होगा, ताकि वे वेरिफाई कर सकें। साथ ही एक ऑनलाइन इंटरव्यू भी होगा। नेहा का चेहरा पढ़ते ही बदल गया। उसकी आँखों में वो चमक एक पल में गायब हो गई। जैसे कोई सपना बीच में ही टूट गया हो। नेहा: (धीमी, उदास आवाज़ में) “अब क्या?” मैंने कुछ सेकंड सोचा और बोला, सम: “देखते हैं...” हम दोनों कुछ देर चुप रहे। फिर बिना कुछ कहे बेड पर आ गए। लेकिन उस रात सेक्स की कोई बात ही नहीं थी। हम दोनों चुपचाप लेटे थे। दिमाग में वही वीडियो चल रहे थे — क्लब के खाली रूम, प्ले एरिया, शीशे की दीवारें, कपल्स की तस्वीरें... सुबह ब्रेकफास्ट टेबल पर हम दोनों तैयार हो रहे थे। मैंने नेहा की तरफ देखा तो उसके चेहरे पर एक अलग सी मुस्कान थी। वो वाली मुस्कान जो पिछले कई महीनों में गायब हो गई थी। सम: “क्या हुआ? आज चेहरा कुछ अलग क्यों है?” नेहा ने चाय का घूँट लिया, हल्के से मुस्कुराई और बोली, नेहा: “कुछ नहीं।” सम: “कुछ तो है... बोल ना।” नेहा ने एक पल मेरी तरफ देखा, फिर लैपटॉप उठाकर मेरी तरफ घुमा दिया। नेहा: “देखो... हम फेक प्रोफाइल बनाएँगे। कनाडा वाले।” स्क्रीन पर प्रोफाइल तैयार थीं। “राहुल और रिया शर्मा” — टोरंटो, कनाडा। उनकी तस्वीरें इतनी स्वाभाविक लग रही थीं कि देखने वाला यकीन ही नहीं कर पाता। कनाडा के बर्फीले पार्क में दोनों हाथों में हाथ डाले खड़े हैं, नीचे टोरंटो की आसमान की रेखा दिख रही है। एक तस्वीर में रिया राहुल के कंधे पर सिर टिकाए मुस्कुरा रही है, बाल हवा में उड़ रहे हैं। दूसरी में दोनों कॉफ़ी के कप लिए झील किनारे बैठे हैं, सुनहरी घड़ी की रोशनी उनके चेहरे पर बिखरी हुई है। आलिंगन वाली फोटो में राहुल ने रिया को पीछे से गले लगाया हुआ है, दोनों की आँखें बंद हैं, मुस्कान बिलकुल स्वाभाविक। चेहरे एआई से इतने अच्छे से मिलाए गए थे कि कोई भी कह नहीं सकता कि ये बनाई हुई हैं। सम स्क्रीन को घूर रहा था। सम: “ये… एआई से बनाया है?” रात को हमने प्रोफाइल पूरी कर ली — नाम, उम्र, लोकेशन, फोटोज़, छोटी-छोटी स्टोरीज़, सब कुछ। आखिर में “सबमिट” बटन दबाया। कुछ मिनट बाद ही मैसेज आया: “[img=26x0]https://cdn.jsdelivr.net/joypixels/assets/7.0/png/unicode/64/1f44d.png[/img] आपकी प्रोफाइल स्वीकृत हो गई है!” हम दोनों ने राहत की साँस ली। नेहा मेरी गोद में कूद पड़ी और मुझे जोर से किस किया। लेकिन खुशी ज्यादा देर नहीं टिकी। दूसरा मैसेज आया: “आपकी वेब मीटिंग ‘जिग्स एंड जिंक्स’ नाम के मॉडरेटर के साथ शनिवार शाम 7 बजे तय हो गई है।” हमारे पास सिर्फ़ दो दिन थे। नेहा मेरी तरफ़ देखी। उसकी आँखों में उत्साह के साथ हल्का तनाव भी था। नेहा: “कैमरा ऑन नहीं करेंगे ना? जो भी होगा, देखा जाएगा।” सम: “हाँ... कैमरा ऑफ रखेंगे। बस बात करेंगे।” आखिरकार वो दिन आ गया। शनिवार शाम ठीक 7 बजे हम दोनों लैपटॉप के सामने बैठे थे। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। नेहा मेरे बगल में सटी हुई थी, उसका एक हाथ मेरी जाँघ पर था। सात बजते ही वेबसाइट से इनकमिंग वीडियो कॉल आया। हमने पहले ही कैमरा ऑफ कर रखा था। कॉल कनेक्ट होते ही स्क्रीन पर एक mature कपल दिखाई दिया। आदमी शायद पचास के ऊपर का था, लेकिन बहुत फिट और सुव्यवस्थित। सफेद लिनन शर्ट पहने हुए था, जिससे उसकी मांसपेशियाँ और छाती पर सफेद बाल साफ़ दिख रहे थे। गोरी त्वचा, दाढ़ी में हल्की सफेदी, लेकिन आँखों में एक आत्मविश्वासपूर्ण चमक। और औरत... काले घने बाल जो ठीक गर्दन तक आ रहे थे। भारी, पूर्ण शरीर वाली औरत। उसके भारी स्तन ब्लाउज में साफ़ उभरे हुए थे। चेहरा आकर्षक, थोड़ा परिपक्व लेकिन बहुत सेक्सी। वे दोनों मुस्कुरा रहे थे। जिग्स (आदमी): “हेलो राहुल और रिया! वेलवेट एक्सचेंज में आपका स्वागत है। मैं जिग्स हूँ और ये मेरी वाइफ जिंक्स। आप दोनों कैसे हैं?” नेहा ने मेरी जाँघ दबाई। मैंने माइक ऑन करके जवाब दिया, “हेलो... हम ठीक हैं। थैंक यू।” जिंक्स (औरत): (मुस्कुराते हुए) “आप लोग कैमरा ऑफ रखना चाहते हैं? कोई बात नहीं। पहली मीटिंग में कई कपल ऐसा ही करते हैं। आराम से बात करें।” दोनों ने वाइन कलर के स्टाइलिश मास्क पहने हुए थे, जो बस उनकी नाक तक आ रहे थे। उनकी आँखें और माथा साफ़ दिख रहा था, लेकिन बाकी चेहरा छुपा हुआ था। सब कुछ जेम्स बॉन्ड की मूवी जैसा लग रहा था — हल्की रोशनी, प्रोफेशनल बैकग्राउंड जिग्स: (मुस्कुराते हुए) “आराम से बैठिए। हम यहाँ किसी को जज करने नहीं आए हैं। बस जानना चाहते हैं कि आप दोनों इस लाइफस्टाइल में क्यों इंटरेस्टेड हैं।” दोनों बहुत अच्छी अंग्रेजी में बात कर रहे थे, अमेरिकन एक्सेंट में। जिग्स: (आत्मविश्वास भरे स्वर में) “तो आप लोग स्ट्रेट हैं?” सम: “हाँ।” जिग्स का आत्मविश्वास मुझे बहुत प्रभावित कर रहा था। वो इतने सहज और प्रोफेशनल तरीके से पूछ रहा था, जैसे कोई आम सवाल हो। मेरी नजर बार-बार जिंक्स की तरफ जा रही थी। वो डी कप ब्रेस्ट वाली गहरी नेक वाली ड्रेस पहने हुए थी। उसके भारी, गोरे स्तन आधे बाहर निकले हुए थे। वो मुस्कुराते हुए हमें देख रही थी। जिंक्स: (थोड़ा flirtatious अंदाज में) “आप लोग ये पहले कभी कर चुके हैं?” हम दोनों एक-दूसरे को देखते रहे। कुछ पल के लिए शांत रहे। क्या बोलना है, समझ नहीं आ रहा था। नेहा ने हिचकिचाते हुए कहा, नेहा: “हमने स्विंगिंग नहीं किया है... लेकिन...” वो रुक गई। जिंक्स: (मुस्कुराते हुए, बहुत सहज स्वर में) “आप बता सकते हैं... आपने ऐसा कुछ नहीं किया होगा जो हमने पहले न सुना हो। हम क्लब के सबसे पुराने मेंबर्स में से हैं।” वो थोड़ा सा हँसी। नेहा ने मेरी जाँघ को और ज़ोर से पकड़ लिया। नेहा ने मेरी जाँघ को और ज़ोर से पकड़ लिया। मैंने गला साफ़ किया और बोला, “हमने कुछ चीजें एक्सप्लोर की हैं... लेकिन फुल स्विंगिंग नहीं। हम उत्सुक हैं... लेकिन बहुत सतर्क भी।” जिंक्स ने सिर हिलाया और मुस्कुराई, जिंक्स: “ये बिल्कुल ठीक है। ज्यादातर कपल ठीक इसी तरह शुरू करते हैं।” हम दोनों बहुत घबराए हुए थे। थैंक गॉड कि कैमरा बंद था, वो हमें देख नहीं पा रहे थे। मैंने नेहा की तरफ देखा और इशारे में कहा — “तुम बता सकती हो... मुझे बुरा नहीं लगेगा।” नेहा ने गहरी साँस ली। उसकी आवाज़ थोड़ी काँप रही थी। नेहा: “वेल... मेरे हस्बैंड को मुझे देखना बहुत पसंद है... तो हमने कुछ लोगों के साथ...” नेहा यहाँ रुक गई। जिग्स ने धीरे से मुस्कुराते हुए कहा, जिग्स: “पहले तो मैं आपकी आवाज़ बहुत पसंद करता हूँ रिया... मुझे शर्मीली भारतीय औरतें बहुत अच्छी लगती हैं। ये ठीक है... आपका मतलब है कि आपके हस्बैंड एक cuck हैं?” वाक्य सुनते ही नेहा का पूरा शरीर सख्त हो गया। मैं भी एक पल के लिए रुक गया। जिंक्स ने हल्के से हँसते हुए जोड़ा, जिंक्स: “कोई बात नहीं... यहाँ हम सब कुछ सुन चुके हैं। आप बेझिझक बता सकती हैं।” नेहा ने मेरी जाँघ को कस के पकड़ लिया। उसकी हथेली पसीने से गीली थी। वो मेरी तरफ़ देख रही थी, जैसे पूछ रही हो — “अब क्या कहूँ?” मैंने उसे इशारे में हाँ कर दिया। नेहा ने बहुत छोटे से “हाँ” में जवाब दिया। इस बार जिग्स ने सीधे मुझसे पूछा, जिग्स: “तो बॉय... तुम ककॉल्ड हो?” उसका सवाल इतना डायरेक्ट था कि मेरे मुँह से शब्द नहीं निकले। मैंने हिचकिचाते हुए जवाब दिया, सम: “सर... मैं अभी एक्सप्लोर कर रहा हूँ।” जिग्स ने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा, जिग्स: “डरो मत... यहाँ ज़्यादातर कपल्स की शुरुआत इसी से होती है। खासकर भारतीय कपल्स की। हमारे क्लब में बहुत सारे सिंगल मैन हैं जो तुम्हें अच्छा शो दे सकते हैं... जैसे तुम रिया को देखना चाहते हो।” मैंने पूछा, सम: “इंडियन मतलब?” जिग्स हँसा। जिग्स: “अरे बॉय... मैं ये नहीं कह रहा कि भारतीय किसी चीज़ में कम हैं। बल्कि शायद भारत में ये सब बहुत बड़ा टैबू है। लोग छुप-छुपकर करते हैं। और इस क्लब में हम वही करने आते हैं — अपनी फैंटसी पूरी करने। बिना किसी शर्म के, बिना किसी डर के।” जिंक्स ने आगे बढ़कर नरम स्वर में कहा, जिंक्स: “बहुत से भारतीय कपल्स यहाँ आते हैं। पहले सिर्फ देखते हैं, फिर धीरे-धीरे पार्टिसिपेट करते हैं। तुम लोग जितना कम्फर्टेबल हो, उतना ही। कोई जल्दी नहीं है।” जिंक्स बीच में बोल पड़ी, जिंक्स: “प्लीज शर्माओ मत... क्योंकि तुम ककॉल्ड हो... तुम जानते हो ये तो बस शुरुआत है... सबसे आम फैंटसी। 2001 में जब ये क्लब बना था... हमने भी ये क्लब जॉइन किया था... तब हम सामान्य स्विंगिंग फैंटसी से आए थे... और अब... लोग बहुत जल्दी बोर हो जाते हैं।” नेहा बहुत देर बाद बोली। अभी तक वो पूरी तरह चुप थी। उसकी आवाज़ थोड़ी काँप रही थी, नेहा: “और अब?” जिग्स ने मुस्कुराते हुए कहा, जिग्स: “ये समझाना थोड़ा मुश्किल होगा...” नेहा ने जिज्ञासा से तुरंत पूछा, नेहा: “प्लीज... थोड़ा बताइए?” जिग्स ने जिंक्स की तरफ देखा, दोनों ने एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराया। जिग्स: “इसकी आवाज़ बहुत पसंद है... मुझे इस आवाज़ में उसकी कराहटें सुनने में बहुत मज़ा आएगा...” उसने मेरी बीवी की आवाज़ में कराहने की बात मेरे सामने की। मैं चुपचाप सुन रहा था। जिग्स ने फिर मुस्कुराते हुए आगे कहा, जिग्स: “हमारी प्रेफरेंस बदलती रहती है... लेकिन काफी दिनों से हम दोनों बस ‘यूनिकॉर्न’ की तलाश में रहते हैं।” नेहा ने मेरी जाँघ दबाई और जिज्ञासा से पूछा, नेहा: “यूनिकॉर्न मतलब?” जिग्स और जिंक्स दोनों हँस पड़े। जिग्स: “तुमने ये पहले नहीं सुना? तुम लोगों को बहुत कुछ सीखना है।” नेहा ने शरमाते हुए कहा, नेहा: “प्लीज... बताइए ना।” जिंक्स ने प्यार से, धीरे-धीरे समझाने की कोशिश की, जिंक्स: “तुम बेसिक टर्म्स तो जानती हो ना... जैसे डोमिनेशन, स्लेवरी... सही?” नेहा: “हम्म...” जिंक्स: “यूनिकॉर्न बस इन सबका मिश्रण है... एक युवा, परिपक्व बायसेक्सुअल लड़की... जो एक mature कपल के पास आती है। कपल — पति और पत्नी दोनों — उस लड़की के साथ खेलते हैं। वो लड़की उनके सामने पूरी तरह समर्पित (सबमिसिव) होती है। वो हमारे लिए एक living sex doll की तरह होती है... जिसे हम जैसा चाहें, वैसा इस्तेमाल कर सकें।” नेहा मेरी जाँघ को कस के पकड़े हुए सुन रही थी। उसका शरीर थोड़ा सख्त हो गया था। जिंक्स: (मुस्कुराते हुए) “बहुत से कपल्स यूनिकॉर्न की तलाश में रहते हैं... क्योंकि वो fresh, young और पूरी तरह समर्पित होती हैं। हम भी पिछले कुछ महीनों से एक अच्छी यूनिकॉर्न ढूँढ रहे हैं।” नेहा सब कुछ बहुत ध्यान से सुन रही थी, जैसे कोई एग्जाम की तैयारी कर रही हो। उसकी आँखें स्क्रीन पर जमी हुई थीं, लेकिन उसका शरीर बिल्कुल अलग भाषा बोल रहा था। मेरा हाथ उसकी जाँघ पर था। धीरे-धीरे मैंने उसे ऊपर सरकाया... उसकी शॉर्ट्स के अंदर। उसकी चूत पहले से ही बहुत गीली थी। गर्मी और नमी दूर से ही महसूस हो रही थी। जैसे-जैसे जिंक्स यूनिकॉर्न की बात कर रही थी, नेहा की चूत और ज़्यादा भीगती जा रही थी। जिंक्स: “...वो लड़की हमारे लिए सब कुछ करती है। हम उसे जितना चाहें, उतना use कर सकते हैं...” जिग्स ने मुस्कुराते हुए कहा, जिग्स: “वैसे मैंने तुम्हारी प्रोफाइल देखी है... तुम्हारी वाइफ बहुत यंग है... शायद...” जिंक्स ने तुरंत उसकी बात काट दी और उसके कंधे पर हल्का सा थप्पड़ मारते हुए बोली, जिंक्स: “तुमने देख भी ली... और मुझे नहीं दिखाई? बदतमीज़...” जिग्स ने मोबाइल उठाया, कुछ टाइप किया। हम दोनों उन्हें कैमरे में देख रहे थे। जिंक्स ने शायद हमारी प्रोफाइल स्क्रॉल की। उसके मुँह से अचानक “वाओ” निकला। फिर उसका चेहरा बदल गया। और अगले ही पल जिग्स के मुँह से निकला, जिग्स: “भैंचोद... इसी लिए मुझे ये ब्लडी इंडियंस पसंद नहीं हैं।” ये सारे फ्रॉड होते हैं। जिंक्स ने कहा: “कूल बेबी, कोई बात नहीं।” अभी तक पूरी बातचीत अंग्रेजी में चल रही थी... लेकिन ये वाक्य अचानक हिंदी में निकला। और तुरंत कैमरा ऑफ हो गया। स्क्रीन ब्लैक हो गई। हम दोनों एक पल के लिए स्तब्ध रह गए। हमने कुछ क्लिक किए। थोड़ी देर बाद एक मैसेज स्क्रीन पर आया: “सॉरी, आप हमारे क्लब में शामिल होने के लिए अनुमोदित नहीं हैं। आपके पैसे 7 दिनों में वापस कर दिए जाएंगे।”
06-06-2026, 12:54 PM
badhiya ja rahe ho..
pls post more... bekar aadmi ke sath thoda exhibition type bhi karwa sakte ho...
09-06-2026, 09:06 PM
स्क्रीन पर मैसेज आया — “आपके पैसे वापस कर दिए जाएंगे।”
बस इतना पढ़ते ही हमें समझ आ गया कि हमारी चाल पकड़ ली गई है। हमारा पूरा नाटक, फेक प्रोफाइल, सब उजागर हो गया। हम जानते थे कि फोटो काफी सच जैसी लग रही थीं, लेकिन आसानी से पकड़ी जा सकती थीं। मैंने नेहा को एक साल रुकने का सुझाव भी दिया था, लेकिन ये ऐसा मामला था जिसमें हम कुछ नहीं कर सकते थे। हमने सारे फोटो एक ही दिन अपलोड कर दिए थे। जितनी कोशिश हम सच दिखने की करते, अगर किसी ने ध्यान दिया तो हम पकड़े ही जाते। कुछ दिन बाद... रात के करीब 11:15 बजे हम बेड पर लेटे हुए थे। नेहा मेरी छाती पर सिर रखकर फोन देख रही थी। अचानक उसका फोन vibrate हुआ। नेहा: “सैम... Velvet Exchange से फिर ईमेल आया है।” मैंने फोन लिया और पढ़ना शुरू किया। ईमेल काफी लंबा और ठंडा था: विषय: अंतिम चेतावनी और स्पष्टीकरण का अवसर प्रिय राहुल और रिया, हमारी पिछली मीटिंग का रिकॉर्डिंग देखने के बाद, हमने आपके प्रोफाइल में गंभीर अनियमितताएँ पाई हैं। हमारी मॉडरेशन टीम को मजबूत कारण हैं कि आपके द्वारा दी गई जानकारी और तस्वीरें असली नहीं हैं। यह हमारे क्लब की सख्त नीतियों का सीधा उल्लंघन है। हम इस तरह की बातों को हल्के में नहीं लेते। हालाँकि, चूँकि आप भारत से नए रजिस्ट्रेशन हैं, इसलिए हम आपको एक अंतिम मौका दे रहे हैं कि आप अगले 48 घंटों के अंदर स्पष्ट रूप से स्पष्टीकरण दें। अगर आपका स्पष्टीकरण संतोषजनक रहा, तो हम आपकी सदस्यता पर पुनर्विचार कर सकते हैं। अगर नहीं, तो आपका अकाउंट स्थायी रूप से बंद कर दिया जाएगा और रजिस्ट्रेशन फीस वापस नहीं की जाएगी। हम आपके जवाब में पूरी ईमानदारी की उम्मीद करते हैं। इस मौके को बर्बाद न करें। प्रबंधन वेल्वेट एक्सचेंज हमने क्रेडिट कार्ड से पेमेंट कर दिया। प्रक्रिया फिर से शुरू हो गई। पहले पैसे जमा करवाए गए, फिर विस्तृत फॉर्म भरा गया। सोशल मीडिया प्रोफाइल की जाँच, फेक अकाउंट की वेरिफिकेशन — सब कुछ दोबारा हुआ। कुछ दिनों बाद फिर एक ईमेल आया: विषय: आपका इंटरव्यू तय “प्रिय राहुल और रिया, आपका प्रोफाइल अब फाइनल रिव्यू के लिए तैयार है। आपका इंटरव्यू जिग्स और जिंक्स के साथ कल शाम 7 बजे IST तय किया गया है। कृपया समय पर उपलब्ध रहें।” कॉल आया। स्क्रीन पर जिग्स और जिंक्स दिखे। जिग्स ने इस बार नीला चश्मा पहन रखा था। जिंक्स ने मास्क तो पहना था, लेकिन उसकी टॉप और भी डीप थी, जिससे उसके भारी स्तन और ज्यादा दिख रहे थे। जिग्स: (थोड़े ऊबे हुए स्वर में) जिग्स: “मेरे पास इस सब के लिए वापस समय नहीं है।” ये कहते हुए वो अपनी कुर्सी से उठ गया। शायद हमारी स्क्रीन ब्लैक देखकर वो निराश हो गया था। उसे लगा होगा कि दूसरे मौके पर हम कैमरा ऑन करके कुछ अलग करेंगे। वो उठा और जाने लगा। जैसे ही वो खड़ा हुआ, नेहा ने अचानक मेरी जाँघ दबाई। मैंने भी देखा — उसके क्रॉच में साफ़ टेंट दिख रहा था। उसका लंड पैंट के अंदर खड़ा हो चुका था। जिग्स स्क्रीन से बाहर चला गया। अब सिर्फ जिंक्स रह गई थी। वो अकेली स्क्रीन पर बैठी मुस्कुरा रही थी। उसकी डीप नेक वाली ड्रेस में उसके भारी स्तन और भी ज्यादा आकर्षक लग रहे थे। जिग्स उठते वक्त जिंक्स को कुछ कहकर चला गया। हमने सुना नहीं कि क्या कहा। अब स्क्रीन पर सिर्फ जिंक्स रह गई थी। वो कुछ पल चुप रही, फिर धीरे से मुस्कुराई और बोली, जिंक्स: “तुम लोगों को पता है ना कि हमने तुम्हें पिछली बार क्यों ब्लॉक किया था?” नेहा डरी हुई आवाज़ में बोली, नेहा: “हाँ...” जिंक्स: “फिर आज वही प्रोफाइल और वही सब क्यों इस्तेमाल किया?” मैंने गला साफ़ करके जवाब दिया, सम: “मुझे बहुत अफसोस है... लेकिन हम अपने असली सोशल आईडी जमा करने से डरते हैं। उसमें फैमिली की जानकारी होती है... जहाँ हम काम करते हैं, वहाँ की डिटेल्स होती हैं...” जिंक्स ने हल्के से मुस्कुराया। जिंक्स: “कम से कम तुमने सच तो बोला।” वो थोड़ा आगे झुकी, अपनी गहरी नेक वाली ड्रेस में स्तन और साफ़ दिखाते हुए बोली, जिंक्स: “तो एक और सच बताओ — क्या प्रोफाइल में तुम दोनों ही हो? क्योंकि तस्वीरें थोड़ी अलग लग रही हैं... थोड़ी कम natural।” नेहा मेरी जाँघ को और कस के पकड़ लेती है। उसकी साँसें तेज़ हो गई थीं। जिंक्स की नज़र अब बहुत तीखी थी। वो हमें घूर रही थी, जैसे स्क्रीन के पीछे से हमारे चेहरे को पढ़ने की कोशिश कर रही हो। इस बार मैंने सच बोल दिया। सम: “मैम... पता नहीं क्यों, लेकिन मैं सच बता रहा हूँ। हम 90% असली हैं। लेकिन लोकेशन AI से बनाया हुआ है। हम दोनों भारत में ही हैं। हम दोनों IT में जॉब करते हैं। जो आप लोग कर रहे हैं, वो हमें बहुत आकर्षित करता है। भारत में ऐसा कुछ नहीं है... सब फ्रॉड, ब्लैकमेल, खतरा। इससे पहले कि हम कोई गलती कर बैठें, हमने सोचा कि किसी experienced couple से बात करें... जो हमें बता सके कि क्या और कैसे करना चाहिए... किस पर भरोसा करना चाहिए या नहीं।” जिंक्स ने मेरी बात सुनकर हल्के से हँसी। जिंक्स: “तुम खुद फ्रॉड कर रहे हो और बाकी सब को फ्रॉड बता रहे हो... तुम लोग सच में cute लग रहे हो...” फिर उसका चेहरा थोड़ा serious हो गया। जिंक्स: “मगर मैं ये इंटरव्यू क्लब की तरफ से कर रही हूँ। आई एम सॉरी... लेकिन मुझे तुम्हें वापस ब्लॉक करना होगा। यहाँ पार्टिसिपेट करने के लिए तुम्हें यहाँ रहना ज़रूरी है।” जिंक्स जा रही थी, तभी नेहा ने अचानक कहा, नेहा: “मुझे कुछ पूछना है प्लीज...” जिंक्स रुकी और मुस्कुराते हुए बोली, जिंक्स: “क्या? पूछो?” नेहा ने एक पल सोचा, फिर बोली, नेहा: “आपके पति उस दिन हिंदी में हमें गाली दे रहे थे... कैमरा ऑफ होने के बाद... वो आप थे या और लोग भी ये इंटरव्यू देख रहे थे?” मैंने नेहा की बात में जोड़ दिया, सम: “या आपने अपने पड़ोसियों से सीख ली?” जिंक्स पहले तो हँसी, फिर थोड़ा रुकी। अभी तक पूरी बातचीत अंग्रेजी में हो रही थी, लेकिन अचानक जिंक्स की तरफ से आवाज आई, जिंक्स: “हुं तने अंग्रेज लागू छु?” (उसने गुजराती में कहा — “क्या मैं तुम्हें अंग्रेज लगती हूँ?”) हम दोनों एक-दूसरे की तरफ़ हैरान होकर देखने लगे। फिर जिंक्स हिंदी में बोलने लगी, जिंक्स: “हम पटेल हैं... तीन जेनरेशन से यहाँ रह रहे हैं।” उसने अपने ब्लॉन्ड-भूरे बालों को हाथ में लेकर कहा, जिंक्स: “ये dye किए हुए हैं।” वो हँसते हुए बोल रही थी। जिंक्स: “मेरा पूरा नाम जिंकल पटेल है। और हस्बैंड जिग्नेश।” मैंने हिंदी में ही कहा, सम: “आप दोनों को देखकर नहीं लगता...” जिंक्स ने मस्ती में कहा, जिंक्स: “शायद... नीचे का कलर देखकर पहचान जाते...” हम तीनों को समझ में आ रहा था कि वो अपनी भारतीय चूत के बारे में इशारा कर रही थी। नेहा ने थोड़ा प्यार भरे टोन में कहा, नेहा: “क्या कुछ नहीं हो सकता... हमें इस क्लब में लाने के लिए?” जिंकल ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, जिंकल: “ये भारत नहीं है... यहाँ रिश्वत से काम नहीं चलेगा।” हम दोनों थोड़ा दुखी हँसे। जिंकल फिर बोली, जिंकल: “ये सबकी सेफ्टी का सवाल है... अगर तुम इस क्लब में होते और मैं तुम्हारी सेफ्टी किसी और के हाथ में दे देती तो क्या होता?” हमें बात समझ में आ रही थी। मैंने कहा, सम: “ठीक है... आपसे मिलकर बहुत अच्छा लगा।” जिंकल ने कहा, जिंकल: “हम क्लब की टूर पर तो नहीं, लेकिन पर्सनल टच में रह सकते हैं। मुझे जिग्नेश से बात करनी होगी। हम यंग कपल्स बहुत पसंद करते हैं। और जिग्नेश को भारतीय लड़कियाँ बहुत भाती हैं। शायद वो तुम्हें एक और मौका दे। अगर वो हाँ करेगा तो देखते हैं।” फिर वो थोड़ा रुकी और बोली, जिंकल: “अभी के लिए बाय... और सॉरी, तुम्हारे ये वाले पैसे वापस नहीं आएंगे।” मैंने मन ही मन सोचा — “वैसे भी किसे पड़ी थी 4000 की...” जिंकल ने हाथ हिलाया और स्क्रीन ब्लैक हो गई। उनकी टाइमिंग हमसे 12 घंटे पीछे थी। अभी वहाँ सुबह होने वाली थी और यहाँ रात। हम मिक्स भावनाओं में थे। मगर उस रात हमने सेक्स किया। नेहा का मूड कुछ अलग था। वो ज़मीन पर शीशे के सामने घोड़ी बनकर बैठ गई थी। सिर ऊपर, कमर नीचे, नंगी पीठ और गोल नितंब मेरे सामने। शीशे में उसका पूरा नंगा बदन दिख रहा था — भारी स्तन लटके हुए, कमर का निचला हिस्सा, और चूत की गीली लकीर। नेहा: (धीमी, समर्पित आवाज़ में) “आज तुम राजा... मुझे अपनी रानी नहीं, अपनी रंडी समझकर चोदो।” मैंने उसके बालों को कस के पकड़ लिया। इतना कस के कि उसकी गर्दन की नसें उभर आईं। वो “आह्ह...” करके काँप उठी। मैंने लंड उसके चूत पर सेट किया और एक ज़ोरदार धक्का मारा। नेहा का पूरा शरीर आगे झटका खा गया। नेहा: (कराहते हुए) “हाँ... और ज़ोर से...” मैंने उसके बाल और कस के खींचे और तेज़-तेज़ ठोकने लगा। हर धक्के पर उसके भारी स्तन शीशे में हिल रहे थे। वो बार-बार शीशे में खुद को देख रही थी। ने उसके बाल खींचे, गाल पर थप्पड़ मारा और तेज़ी से चोदता रहा। सम: “कहाँ निकालूँ?” नेहा: (हाँफते हुए) “मुझे अभी टाइम लगेगा..." मैंने आखिरी कुछ धक्के और तेज़ मारे और अपना पूरा वीर्य उसकी नंगी, गोरी पीठ पर निकाल दिया। गर्म-गर्म धारें उसकी कमर पर फैल गईं। नेहा उसी घोड़ी वाली मुद्रा में रही। पीछे मुड़कर देखा, फिर शीशे में खुद को देखा। उसके चेहरे पर संतोष और भूख दोनों थे। मैंने अपनी उँगलियाँ उसकी चूत पर रख दीं और धीरे-धीरे सहलाने लगा। थोड़ी देर उँगलियों से खेलने के बाद मैंने अपना मुँह अंदर डाल दिया। मैं किसी इमली के दाने की तरह उसकी चूत चाट रहा था — धीरे, गहरे और भूखेपन से। उसका रस बह रहा था, गाढ़ा और मीठा। मेरी उँगलियों ने शायद वो कमाल कर दिया था जो लंड नहीं कर पाया था। वो धीरे-धीरे बह रही थी। आँखें नशीली, आधे बंद। वो शीशे में खुद को घूर रही थी। ये मैं उसमें पहली बार देख रहा था। अक्सर जब वो ऑर्गेज़्म के करीब होती, तो आँखें बंद कर लेती थी। अक्सर जब वो मेरे चूसने से झड़ती, तो कम से कम ये ज़रूर बोलती — “तुम इस काम में सबसे अच्छे हो...” मगर आज नहीं। आज वो अपने बदन को देख रही थी। हर हरकत, हर झटका, हर बार जब उसके स्तन हिलते, जब उसकी कमर काँपती, जब उसकी चूत मेरे मुँह पर रगड़ती। जैसे वो खुद को एक औरत की नज़र से देख रही हो। क्यों लोग उसे पसंद करते हैं। क्यों उसे चोदना चाहते हैं। क्या वो देख रही थी — अपनी नंगी देह की खूबसूरती, अपनी चूत की भूख, अपनी आहों की गहराई। उसकी चूत मेरी जीभ पर और ज़्यादा भीग रही थी। वो धीरे-धीरे काँप रही थी, लेकिन आँखें शीशे से नहीं हटा रही थी। उस रात सेक्स के बाद हम दोनों शांत थे। नेहा मेरी छाती पर सिर रखे लेटी हुई थी। उसकी साँसें धीमी थीं, लेकिन मुझे पता था कि वो सोई नहीं है। मुझे नहीं पता था कि उसके दिमाग में क्या चल रहा है। वो कुछ बोल नहीं रही थी। मेरे दिमाग में लग रहा था कि एक और किस्सा खत्म हो गया है। अब आगे क्या होगा? आज रात का सेक्स एक उम्मीद दे रहा था, लेकिन मुझे पता था कि हमारा बॉन्ड अब सेक्स से कहीं ऊपर जा चुका है। ये अब सिर्फ़ शरीर की भूख नहीं थी। ये कुछ और था — गहरी, जटिल, और थोड़ी खतरनाक चाहत। जैसा मैंने सोचा था, कुछ दिन ऐसे ही बीते। नेहा पता नहीं क्यों, लेकिन सबमिसिव बिहेव कर रही थी। वो मेरे साथ वैसा काम ही करती थी। मगर वो भी हफ्ते भर में फीका पड़ने लगा। शायद मैं उसका पार्ट प्ले अच्छे से नहीं कर पा रहा था। वो कई बार बोलती, “मुझे थप्पड़ मारो... सेक्स में नहीं... बस ऐसे ही...” एक शाम डाइनिंग टेबल पर बैठे-बैठे अचानक वो बोली और अपना गोरा सुंदर चेहरा आगे कर के मुस्कुराई। मैंने पूछा, “पक्का?” उसने हामी में सिर हिला दिया। मैंने हल्के हाथों से उसके गाल पर मारा। नेहा: “और ज़ोर से...” मैंने थोड़ा और दम लगाया। दूसरा थप्पड़ ज़ोर से पड़ा। उसका गोरा चेहरा तुरंत लाल हो गया। मुझे अच्छा नहीं लग रहा था। मैं नहीं चाहता था कि उसके चेहरे पर मेरा हाथ का निशान रहे। नेहा ने मेरी तरफ़ देखा। उसकी आँखों में हल्की निराशा थी। फिर वो चुपचाप खाना खाने लगी। ये incident आपको पढ़ने में जितना अजीब लग रहा है, मुझे उतना ही अजीब महसूस हो रहा था। मुझे नेहा की मनोस्थिति समझ में नहीं आ रही थी। कभी वो पूरी तरह समर्पित बन जाती, कभी अचानक ठंडी हो जाती। अभी भी अयान वाला गुस्सा उसके अंदर से गया नहीं था। कभी गुप्ता जी दिख जाते तो नेहा बस हल्के से मुस्कुरा देती। न कोई नजर, न कोई इशारा, न कोई पुरानी वाली शरारत। बस एक ठंडी, खोखली मुस्कान। एक दिन शाम को मैंने बालकनी में खड़े होकर कहा, सम: “राहुल बालकनी में है...” नेहा ने सिगरेट का कश लिया, धुआँ छोड़ा और आँख मारते हुए बोली, नेहा: “Sorry baby... मुझे पता है... बिल्कुल मन नहीं है...” उसकी आवाज़ में न गुस्सा था, न उत्तेजना — बस एक थकान भरी उदासी। मुझे दिल में बहुत दर्द हुआ। वो जलन, वो अपमान की चाहत, वो पुरानी वाली उत्तेजना — सब मेरे अंदर अभी भी जिंदा थी। मैं चाहता था कि नेहा मुझे फिर से वही feeling दे — मुझे नीचा दिखाए, मुझे चिढ़ाए । लेकिन वो मुझे वो सब नहीं दे रही थी। मुझे लगा कि शायद अब यही हमारी जिंदगी है। एक शांत, ठंडी, औपचारिक जिंदगी — जिसमें सेक्स होता है, लेकिन वो पुराना जोश, वो गंदापन, वो नशा... सब खत्म हो चुका है। XXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXX आज रात नेहा कुछ अलग दिख रही थी। उसके चेहरे पर एक अजीब सी चमक थी, जो पिछले कई हफ्तों में गायब हो गई थी। हम लैपटॉप के सामने बैठे थे। स्क्रीन पर एक लगभग 50 साल का आदमी दिख रहा था — जिग्नेश। पहली बार वो हमें बिना किसी फेस हाइड के देख रहा था। ये सब तब शुरू हुआ जब हम उम्मीद खो बैठे थे। अचानक एक ईमेल आया — “Patel Couples” के नाम से। जिंकल ने लिखा था: “हम तुम दोनों को एक मौका दे सकते हैं। तुमने कहा था कि तुम्हारी वाइफ रिया 90 % अपनी AI इमेज की तरह दिखती है। जिग्नेश को इस उम्र की भारतीय शादीशुदा लड़कियाँ बहुत पसंद हैं। हम बात कर सकते हैं... मगर तुम्हें सब सच कहना होगा। ये Video Call से शुरू होगा। अगर तुम लोगों को मंजूर है तो हम आगे बात कर सकते हैं।” उस रात बहुत दिनों बाद हमारा ज़ोरदार झगड़ा हुआ। नेहा पूरी तरह तैयार थी। उसने कहा, नेहा: “तुमने देखा ना... वो लोग कितने अमीर हैं, कितने बड़े ग्रुप में हैं। उन्होंने मेरी जैसी कितनी लड़कियों को देखा होगा? और हम कौन से नंगे होने वाले हैं? बस चैट... बात... वो भी ऑनलाइन...” वो बिना सोचे-समझे बोलती जा रही थी। मैं मना कर रहा था। हालाँकि मैंने अयान वाली बात बीच में नहीं लाई, लेकिन नेहा को समझ नहीं पा रहा था। उसने पिछले 5-6 महीने इसी डर में निकाले थे, और अब वो फिर से खतरा लेना चाहती थी — वो भी सिर्फ़ चैट के लिए। हमने शराब पी। एक-दूसरे पर चिल्लाए भी। फिर थककर सो गए। सुबह जब मेरी आँख खुली, तो कमरे में रोशनी भर गई थी। बालकनी का गेट खुला हुआ था। मैं उठा और बाहर देखा। सुबह के करीब 9 बज रहे थे। नेहा बालकनी में खड़ी थी। बहुत छोटी शॉर्ट्स पहनी हुई थी। रेलिंग पर झुकी हुई, पीठ मेरी तरफ़। एक सिगरेट पी रही थी। उसकी गोरी जाँघें, टाइट शॉर्ट्स में उसके नितंब — सब कुछ सुबह की धूप में चमक रहा था। मेरा लंड पैंट में तुरंत जाग गया। खटर-पटर की आवाज़ सुनकर नेहा को लगा कि मैं जाग गया हूँ। वो पीछे मुड़ी। मैं देखकर हैरान रह गया। पीछे से वो बस एक खुली शर्ट पहने हुए थी। सामने के सारे बटन खुले हुए थे। उसके भारी स्तन ब्रा में कैद थे। सुबह की धूप में उसका गोरा बदन चमक रहा था। उसने मुझे सिगरेट दिखाकर इशारा किया — जैसे पूछ रही हो, “चाहिए?” जैसे कल रात का झगड़ा हुआ ही न हो। मैं बिना कुछ सोचे उसकी तरफ़ बढ़ा। बालकनी में आते ही नेहा ने मुझे ज़ोर से खींच लिया। होंठों से होंठ मिल गए। एक गहरा, लंबा किस। रात के झगड़े के बाद भी वो मुझे इस तरह किस कर रही थी। किस करते-करते उसका हाथ मेरे पजामे के ऊपर से मेरे लंड पर गया। वो उसे मसलने लगी। खुले में। उसने जिस हाथ में सिगरेट थी, उससे मेरे सिर को अपनी गर्दन की तरफ़ दबाया। मैं समझ गया। मैंने उसकी गर्दन पर किस करना शुरू कर दिया। नेहा ने दूसरे हाथ से मेरे लंड को मसलते हुए, सिगरेट का एक कश लिया और धुएँ के साथ मेरे कान में फुसफुसाया, नेहा: “हमें कोई देख रहा है...” मैं भूल गया था कि हम खुले में हैं। मैंने गर्दन ऊपर करके देखने की कोशिश की, लेकिन नेहा ने मेरी गर्दन और दबा दी। नेहा: “sssss... उससे पता मत लगने दो...” मगर जिज्ञासा बनी रही। कौन देख रहा है? थोड़ी देर बाद यकीन हो गया — राहुल ही था। थोड़ा दूर, अपनी बालकनी में। वो बिना किसी फिक्र के अपना लंड रगड़ रहा था। शायद बहुत दिनों बाद उसे ये नज़ारा देखने को मिला था। नेहा भी उसे पूरा शो दे रही थी। उसने अपनी शर्ट को और खोल दिया था। नेहा ने मेरे कान में फुसफुसाया, नेहा: “कैसा लग रहा है?” मैंने उसकी गर्दन पर हल्की सी बाइट देकर हामी भरी। सम: “बस यही तो करना है... ये लड़का देख ले... ये दूर देख में बैठा वो कपल भी देख लेगा...” मेरे मुँह से बस “हाँ” निकला। नेहा ने कितनी चालाकी से मुझे मना लिया था।
11-06-2026, 10:25 PM
next pls
13-06-2026, 12:42 PM
सम: “तो ये थ्रीसम किस तरह का होगा?”
मैं स्क्रीन के सामने बैठे आदमी — जिग्नेश — से सीधे पूछ बैठा, जिग्नेश आज बिना किसी मास्क के था। बहुत आकर्षक चेहरा, गोरी त्वचा, भूरी आँखें, चौड़ा सीना — जिस पर एक भी बाल काला नहीं था। चौड़ी कलाइयाँ और तगड़ा शरीर। नेहा मेरी तरफ़ देखकर हल्के से मुस्कुराई... जैसे मेरे मासूम सवाल पर हँस रही हो। मैंने फिर से कहा, शायद उसे लगा कि वो मेरी बात समझ नहीं पाया, सम: “मेरा मतलब... ये थ्रीसम किस तरह का होगा? जिसमें एक लड़का और दो लड़कियाँ होती हैं?” जिग्नेश ने मेरी तरफ़ देखा। उसके होंठों पर एक हल्की मुस्कान आई। नेहा अब भी मुस्कुरा रही थी। वो जानती थी कि मैं हमेशा वो वाली पोर्न पसंद करता हूँ जिसमें दो लड़के और एक लड़की होती है। जिग्नेश हँसते हुए बोला, जिग्नेश: “नहीं बॉय... ये बिल्कुल अलग है। थ्रीसम पोर्न में सब एक-दूसरे को शेयर कर रहे होते हैं... मगर यहाँ एक कपल एक लड़की को अपना करता है। वो पूरी तरह उस कपल की होती है।” मैं कुछ-कुछ समझ रहा था। वैसे ये हमारी पहली ऑनलाइन चैट थी। करीब आधा घंटा हो चुका था। और उसमें से पहले 15 मिनट तो बस जिग्नेश ने नेहा की तारीफ़ ही की। नेहा को देखते ही उसके चेहरे पर अलग ही चमक आ गई थी। ये हमारे लिए बहुत हिम्मत की बात थी... मगर नेहा ने मुझे मना लिया था। जिग्नेश ने नेहा को देखा और अपनी गहरी, आत्मविश्वास भरी आवाज़ में कमांड्स देना शुरू किया। जिग्नेश: “रिया... अपने दोनों हाथों को अपने चेहरे के पास ले आओ। हाथों की उँगलियाँ चेहरे के दोनों तरफ़ रखो... जैसे तुम शर्मा रही हो। अच्छा... अब धीरे से अपने होंठों को छुओ। हाँ... ऐसे ही। अब मुस्कुराओ... थोड़ा शरमाते हुए।” नेहा ने बिना किसी विरोध के वो सब किया। उसके हाथ उसके चेहरे के दोनों तरफ़ थे, उँगलियाँ होंठों को हल्के से छू रही थीं। जिग्नेश: “बहुत अच्छा... अब अपना दायाँ हाथ आगे बढ़ाओ... और उस पर अपना नाम का शुरुआती अक्षर लिखो... धीरे-धीरे लिखो... ताकि मैं देख सकूँ।” नेहा ने अपनी उँगली से हाथ पर “N” लिखा। जिग्नेश ने स्क्रीन के करीब झुककर देखा और मुस्कुराया। नेहा ने सब कुछ वैसा ही किया। उसका शरीर अब पूरी तरह जिग्नेश की कमांड्स का पालन कर रहा था। मैं चुपचाप बैठा सब देख रहा था। नेहा की साँसें तेज़ हो रही थीं। जिग्नेश ने मुस्कुराते हुए कहा, जिग्नेश: “तुमने अपना नाम रिया बताया था... लेकिन ठीक है। जब सब कुछ झूठ था तो ठीक है। वैसे भी इस सुंदरता के लिए इतना चल जाता है। लेकिन मैं सही था... ज़्यादातर समय मैं आवाज़ से ही पहचान जाता हूँ। लेकिन तुम मेरी उम्मीदों से कहीं ज्यादा खूबसूरत हो।” नेहा एक स्लीवलेस टॉप में थी — बहुत टाइट, जिसमें उसका फिगर अच्छे से दिख रहा था। जिग्नेश मेरे सवाल सुन रहा था, लेकिन उसका पूरा ध्यान नेहा पर था। उसकी हर हरकत पर। मैंने पूछा, सम: “तो तुम ये करते हो... मेरा मतलब कितनी बार?” जैसे ही मैं ये पूछ रहा था, मुझे खुद लगा कि ये बकवास सवाल है। मगर न नेहा कुछ बोल रही थी, न जिग्नेश। जिग्नेश मुस्कुराया। उसने एक लिंक भेज दिया — इंस्टाग्राम का प्राइवेट अकाउंट। हमने रिक्वेस्ट भेजी, उसने तुरंत एक्सेप्ट कर ली। फिर शुरू हुआ अनगिनत स्क्रॉल होने वाले फोटोज़। नंगे नहीं थे, लेकिन बहुत उत्तेजक थे। पटेल कपल — जिग्नेश और जिंक्स — अलग-अलग लड़कियों के साथ। गोरी, काली, एशियन... लेटेस्ट फोटो में एक बहुत युवा लड़की थी — 19-20 साल की, नाम पेनी, इंग्लैंड से। नेहा अभी तक चुप थी। उसने फोटो को ज़ूम किया और धीरे से बोली, नेहा: “ये बहुत खूबसूरत है... क्या तुमने इसे ?” जिग्नेश ने भारी आवाज़ में कहा, जिग्नेश: “बोलो... क्या बोल रही थी?” नेहा ने फिर पूछा, नेहा: “क्या तुमने इस लड़की को पैसे दिए?” जिग्नेश मुस्कुराया और बोला, जिग्नेश: “कभी ज़रूरत ही नहीं पड़ी... वो अपनी मर्ज़ी से हमारे साथ है।” नेहा ने थोड़ा हिचकिचाते हुए पूछा, नेहा: “फिर वो सब... मतलब... कैसे...?” मैं नहीं समझा कि नेहा क्या पूछना चाह रही है। मगर जिग्नेश समझ गया। जिग्नेश: “सब अपनी मर्ज़ी से... कोई फोर्स नहीं। इवन हम फेमस हैं... ऐसी लड़कियों को ट्रेन करने के लिए। कई लोग हमें रेकमेंड करते हैं।” नेहा ने फिर पूछा, नेहा: “मगर वो सब... मेरा मतलब... हर बात मानना... पेन... वो सब कैसे... इतना सबमिशन?” मैं अभी तक बिना समझे उनकी बातें सुन रहा था। जिग्नेश ने नेहा को देखा और धीरे से पूछा, जिग्नेश: “तुमने ये किया है?” नेहा: “मैंने पढ़ा है... और मैंने ट्राई भी किया... मगर... इसमें कोई उत्तेजना नहीं लगी।” जिग्नेश: “किसके साथ?” नेहा ने मेरी तरफ़ इशारा किया। जिग्नेश हँसा। जिग्नेश: “ये खुद बिच है... इससे नहीं होगा। मैं शक्ल देखकर बता सकता हूँ... तुम्हें अच्छी ट्रेनिंग की ज़रूरत है। मुझे पता है तुममें वो है।” जिग्नेश नेहा को घूर रहा था। मुझे अब समझ में आ रहा था कि पिछले हफ्तों से नेहा का बिहेवियर क्यों था। क्यों वो मुझे थप्पड़ मारने को कह रही थी। क्यों वो सबमिसिव होने की कोशिश कर रही थी। नेहा ने फिर पूछा, नेहा: “फिर कोई क्यों चाहेगा... कि उसे... जिसको वो अच्छे से जानती तक नहीं... उससे बेइज्जती करे... थप्पड़ मारे... और वो खुशी-खुशी सहे... ये मुझे समझ नहीं आ रहा...” जिग्नेश नेहा की बात सुनकर थोड़ा रुका। कुछ सोचने लगा। शायद वो अपना जवाब तैयार कर रहा था। जिग्नेश ने थोड़ा रुक कर, नेहा को सीधे आँखों में देखते हुए कहा, जिग्नेश: “तुम्हें पता है... सबसे हल्की सी भी मिर्च जीभ जला देती है। तुम्हारी जीभ तुम्हें चीख-चीख कर बता रही होती है कि ‘ये मत खाओ’... मगर दिमाग? उसे ये जलन पसंद है। कुछ लोग हल्की वाली मिर्च खाते हैं। कुछ लोग थोड़ी तेज़। लेकिन कुछ लोग... दुनिया की सबसे तेज़, सबसे जलाने वाली मिर्च भी ट्राई करते हैं। क्यों? क्योंकि उन्हें वो जलन चाहिए। वो दर्द चाहिए। वो नशा चाहिए जो दर्द और स्वाद को मिला दे। जो उन्हें बताए कि उनकी लिमिट कहाँ है... और वो लिमिट को पार करने का मज़ा।” हम दोनों उसकी बात समझ रहे थे। जिग्नेश: “ये कंट्रोल किसी के हाथ में देना होता है। सोचो... तुम्हारे प्लेजर की चाबी किसी और के हाथ में। अब तुम्हें उसी में प्लेजर मिलता है, जिसमें उसे मिले। तुम हँसोगी जब वो चाहेगा। रोओगी जब वो चाहेगा। चीखोगी जब वो चाहेगा। कुछ लड़कियों को कंट्रोल छोड़ने में मज़ा आता है। जो रोज़ दुनिया में स्ट्रॉन्ग बनकर रहती हैं, उन्हें कभी-कभी पूरी तरह कमज़ोर होने का नशा चाहिए। जिसमें उन्हें पता हो कि अब वो कुछ नहीं कंट्रोल कर रही... कोई और उन्हें कंट्रोल कर रहा है। उसकी इज्जत, उसकी बॉडी, उसकी इच्छा — सब। ये सबमिशन का नशा है... जो पेन और प्लेजर को एक कर देता है।” नेहा की साँसें अब और तेज़ हो गई थीं। उसके गाल लाल हो रहे थे। जिग्नेश की लंबी बात के बाद हम तीनों थोड़ी देर तक पूरी तरह चुप रहे। मेरा दिमाग उसकी बातों को बार-बार प्रोसेस कर रहा था। नेहा के चेहरे के भाव बदलते जा रहे थे — कभी सोचती हुई, कभी शर्माती हुई, कभी कुछ और ही। वो उसकी इंटेलेक्चुअल वाली बातें सुन रही थी जैसे कोई बहुत गहरी बात हो। हालाँकि जिग्नेश की कुछ बातें चपटरी भी लग रही थीं, लेकिन नेहा उन्हें भी ध्यान से सुन रही थी। जिग्नेश ने एक अलग तरह की स्माइल दी। थोड़ा सा हँसा और बोला, जिग्नेश: “क्या कुछ ज्यादा ग्यान हो गया?” नेहा ने ना में धीरे से सिर हिलाया। नेहा: “नहीं... लोग आपको रिकमंड करते हैं... फिर आप यहाँ... ” जिग्नेश मुस्कुराया। उसकी आँखों में एक चमक थी। जिग्नेश: “तुम अपनी तारीफ सुनाना चाहती हो क्या?” नेहा का चेहरा शर्म से लाल हो गया। उसने झिझकते हुए कहा, नेहा: “नहीं... मेरा मतलब... मतलब आपने टाइम दिया जब आपने हमें देखा भी नहीं था.. इसीलिए पूछा।” जिग्नेश ने कुर्सी पर थोड़ा पीछे टेक लगाई और सहज लेकिन कॉंफिडेंट स्वर में बोला, जिग्नेश: “क्योंकि तुम इंडियन हो... और मुझे इंडियन औरते बहुत पसंद हैं। खासकर शादीशुदा। वैसे तो कई जवान इंडियन औरते मेरे पास आई हैं... लेकिन तुम खास हो। तुममें वो भूख़ दिख रहा है जो ज्यादातर लड़कियों में नहीं होता। नेहा ने कुछ कहने की कोशिश की लेकिन शब्द नहीं निकले। उसने बस अपनी होठों को काट लिया। नेहा ने जिग्नेश की आँखों में देखते हुए पूछा, नेहा: “मगर इंडियन क्यों? हमने आपके प्रोफाइल में देखी लड़कियाँ... जो मुझसे बहुत सुंदर हैं। आधा इंडियन लड़के तो ऐसी लड़कियों को देखकर रात में हिलाते हैं। और आप तो ऐसी लड़कियों को ऑलरेडी अपना स्लेव बना चुके हो... फिर इंडियन... क्यों?” जिग्नेश फिर से कुछ पल चुप रहा। वो सोच रहा था। मैं और नेहा दोनों यही सोच रहे थे कि अब वो क्या कहने वाला है। उसकी मिर्च वाली गहरी बातों का हमारे पास कोई जवाब नहीं था। थोड़ी देर बाद जिग्नेश ने मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा। जिग्नेश: “राहुल ... या जो भी तुम्हारा नाम है?” मैं: “सेम ।” (मैंने अपना असली नाम बता दिया। नेहा ने भी तुरंत कहा — “नेहा ”) जिग्नेश मुस्कुराया। जिग्नेश: “सेम ... क्या तुमने अपनी बहन या मदर को कभी बिकिनी में देखा है? मुझे माफ करना अगर मैं कुछ गलत बोल रहा हूँ... लेकिन ये बस एक सवाल है।” मुझे अपनी बहन वाली फैंटसी का पता नहीं था, इसलिए मैंने सीधा जवाब दिया। मैं: “नहीं।” जिग्नेश: “एक्जैक्टली।” यहाँ बीच पर जाना, पूल पार्टी, परिवार के सामने बिकिनी पहनना आम बात है। मेरी बेटी भी 18 साल की है... मेरे सामने बिकिनी में घूमती है, जो बेसिकली ब्रा और पैंटी ही है। उसमें कोई शर्म नहीं। म यहाँ की लड़कियों को स्लेव या यूनिकॉर्न बनाते हैं, तो कपड़े उतारने में कोई शर्म नहीं होती। कोई ह्यूमिलिएशन का असली भाव नहीं होता। कई बार तो लगता है कि वो हमसे ज़्यादा मज़ा ले रही है। उस फीलिंग — कि ‘कुछ गलत कर रही हूँ’ — वो आती ही नहीं। कभी-कभी तो लगता है कि हम उसके साथ नहीं, वो हमारे साथ खेल रही है।” जिग्नेश ने नेहा को गहरी नज़र से देखा और बोला, जिग्नेश: “लेकिन इंडियन वुमन... खासकर शादीशुदा... उसमें वो शेम, वो गिल्ट, वो टैबू बहुत गहरा होता है। जब वो पहली बार कपड़े उतारती है, जब वो पहली बार किसी अजनबी के सामने घुटनों पर बैठती है, जब उसे थप्पड़ पड़ता है... उस वक्त उसका चेहरा जो लाल होता है ना, वो डर और उत्तेजना का मिश्रण... वो फीलिंग मुझे सबसे ज़्यादा पसंद है।” हमने चार साल पहले एक Indian औरत के साथ खेला था... वो शायद 35 के आसपास थी। उसके साथ जो मजा आया, वो आज तक जवान western लड़कियों के साथ नहीं आया। जिग्नेश ने नेहा को ऊपर से नीचे तक देखा, जिग्नेश: “औरत तुम से भी 10% नहीं है... जिग्नेश ने अपनी जगह पर थोड़ा आगे झुकते हुए, अब सीधे नेहा को देखते हुए कहा, जिग्नेश: “ये तो बात रही इंडियन लड़कियों की... अब बात तुम्हारी, नेहा।” उसकी आवाज़ अब और गहरी और कॉन्फिडेंट हो गई थी। जिग्नेश: “हम पिछले 20 साल से इस क्लब में हैं। मुझे याद नहीं कितनी लड़कियाँ मैंने चोदा है... ये तो दूर की बात है, मुझे कल रात किस-किस के बूब्स चूसे, ये भी याद नहीं रहता। लेकिन तुम्हारी आवाज़... तुम्हारा चेहरा... तुम्हारी बॉडी लैंग्वेज... इतना अनुभव है मेरा कि जैसे एक कुत्ता सूँघ कर बता सकता है कि कुतिया को क्या चाहिए, वैसे मैं बता सकता हूँ कि तुममें कितनी आग है।” नेहा की साँस अटक गई। उसने नज़रें झुका लीं, लेकिन जिग्नेश रुका नहीं। जिग्नेश: “तुम हमारा अब तक का बेस्ट एक्सपीरियंस हो सकती हो। और तुम्हें देखने के बाद ये पक्का हो गया। तुममें वो बात है। तुम्हें एक मास्टर की गाइडेंस चाहिए। सच्ची गाइडेंस। न कि कोई अमेच्योर जो सिर्फ थप्पड़ मारने और ‘येस मिस्ट्रेस’ बोलने में लगा रहे।” मैं स्क्रीन पर साफ़ महसूस कर सकता था कि अब दोनों का पूरा ध्यान एक-दूसरे पर था। जिग्नेश की वो शैतानी मुस्कान — जिसमें कॉन्फिडेंस और हंगर दोनों थे। नेहा की घबराहट — उसका माथा एसी के बावजूद हल्के पसीने से चमक रहा था। उसकी गर्दन लाल, उँगलियाँ आपस में सिकुड़ी हुईं। मेरी तरफ़ किसी का ध्यान ही नहीं था। जैसे मैं कमरे में था ही नहीं। कुछ देर तक भारी, गहरी चुप्पी छाई रही। कोई नहीं बोल रहा था। आखिरकार नेहा ने वो शांति तोड़ने के लिए कुछ कहा। उसकी आवाज़ थोड़ी काँप रही थी, नेहा: “मगर... कुछ लीगल रीज़न्स से हम इंडिया नहीं छोड़ सकते...” वो स्पष्ट रूप से घबराहट में बोल रही थी। शायद वो इस पूरे कन्वर्सेशन को यहीं खत्म करना चाहती थी। अभी भी उसके मन में ये था कि हम बस मज़े के लिए बात कर रहे हैं, एक्चुअल मीटिंग के लिए नहीं। जिग्नेश ने एक पल को नेहा को देखा, फिर धीरे-धीरे मुस्कुराया। जिग्नेश: “तुम लोग नहीं आ सकते तो क्या? हम बस 16 घंटे दूर हैं... गोवा में हमारा फार्महाउस है। तुम्हें बस ‘हाँ’ कहना है, नेहा।”
13-06-2026, 12:45 PM
जिग्नेश ने आखिरी बार नेहा को देखा और शांत लेकिन घमंड भरे अंदाज़ में बोला,
जिग्नेश: “हम तुमसे सिर्फ सोलह घंटे की दूरी पर हैं।” वो मुस्कुराया — वो शैतानी और आत्मविश्वास भरी मुस्कान — और बोला, जिग्नेश: “बाय।” फिर उसने कॉल डिस्कनेक्ट कर दी। स्क्रीन काली हो गई। कुछ देर बाद पटेल्स कपल आईडी से एक ईमेल आया। ईमेल: ये हमारी अंतिम बात है। किसी को मनाना, उसके सामने गिड़गिड़ाना या भीख माँगना — ये हमारा स्टाइल नहीं है। और न ही हमारे पावर डायनामिक के लिए सही है। हमें पता है नेहा हमारी फैंटसी में परफेक्टली फिट होती है। मगर आज नहीं तो कल हमें ऐसा कोई और मिल जाएगा। हम एक सीधी-सादी, परफेक्ट वाइफ टाइप सबमिशन चाहते हैं। अगर भविष्य में तुम लोग तैयार हो, तो संपर्क करो अपनी छुट्टी की योजना के साथ। हम देख लेंगे क्या हो सकता है। अगर हमारी बातों में कोई शंका है, तो भी ये हमारी तरफ से अंतिम संदेश है। — जिग्नेश ईमेल पढ़ते ही कमरे में भारी सन्नाटा छा गया। जिग्नेश की भाषा में अहंकार और घमंड साफ़ झलक रहा था। वो बिल्कुल सहज था, जैसे नेहा उसके लिए कोई ज़रूरत नहीं, बल्कि सिर्फ एक विकल्प थी। नेहा अभी भी स्क्रीन को घूर रही थी। उसका चेहरा लाल था, साँसें भारी थीं। माथे पर पसीना था। वो कुछ बोल नहीं पा रही थी। मैं चुपचाप बैठा था। नेहा ने उस कॉल और ईमेल के बाद कुछ नहीं कहा। हफ्तों तक कुछ नहीं। जैसे उसकी कुछ टूट गई हो। वो रोज़ की दिनचर्या करती रही — खाना बनाती, काम पर जाती, मुस्कुराती भी... लेकिन वो मुस्कान पहले जैसी नहीं थी। उसकी आँखों में हमेशा कुछ चलता रहता। कुछ सोचती रहती, दूर-दूर लगती। हमने दो-तीन बार आपस में उस बातचीत पर चर्चा भी की। मैंने हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा कि “कितना एक्साइटिंग होता... जिग्नेश जैसा मैन... गोवा... सब कुछ।” नेहा बस हल्का सा मुस्कुरा कर कह देती, “हाँ... बहुत एक्साइटिंग होता...” बस इतना ही। कोई हिन्ट नहीं दिया कि वो ये करना चाहती है। न “हाँ” कहा, न “नहीं”। मैंने उससे कभी सीधे नहीं पूछा कि उसके दिमाग में क्या चल रहा है। हिम्मत नहीं हो रही थी। शायद डर लगता था कि सच सुनकर मेरा दिल टूट जाएगा। मेरे पास उसके इस कन्फ्यूजन का एक ही समाधान था — कि वो अच्छे से चुद सके। जोरों से, बिना रुके, किसी ताकतवर आदमी से। बस यही सोचता रहता था। एक रात हम बिस्तर पर थे। नेहा की टाँगें पूरी तरह खुली हुई थीं। मैं उसके ऊपर हल्के-हल्के स्ट्रोक लगा रहा था — धीरे-धीरे, गहरे नहीं। उसका एक हाथ ऊपर था, जिसमें सिगरेट जल रही थी। उसकी आँखें आधी बंद थीं। मुँह से धुआँ निकल रहा था — धीरे-धीरे, लंबा। कमरे में सिर्फ सिगरेट का धुआँ और हमारी हल्की साँसों की आवाज़ थी। जैसा कि आप जानते हैं, हम सेक्स करते वक्त अक्सर रोलप्ले करते थे। लेकिन आज हमने कुछ तय नहीं किया था। कोई स्क्रिप्ट नहीं, कोई किरदार नहीं। नेहा ने सिगरेट का एक लंबा कश लिया। धुआँ छोड़ते हुए उसने आँखें आधी बंद करके धीरे से कहा, नेहा: “और जोर से... बेकार... और जोर से...” वो मुस्कुराई। वो अच्छी तरह जानती थी कि मुझे क्या सबसे ज्यादा उत्तेजित करता है। फिर उसने अपनी कमर के नीचे वाले हिस्से को ऊपर-नीचे करना शुरू कर दिया। बिल्कुल मेरे धक्कों से मैच करते हुए — तेज़, गहरा और लय में। उसकी चूत मेरे लिंग को कसकर चूस रही थी। मेरे दोनों हाथ नेहा के सिर के दोनों तरफ थे, सीधे तकिए पर। उन्होंने मुझे उस पर चढ़ाई करने में पूरा सहारा दे रखा था। मैंने उसे नीचे दबाया। सारा वजन उसके ऊपर डाल दिया। हम इतने चिपक गए थे कि मेरा लंड उसकी चूत के अंदर पूरी तरह धँसा हुआ था। दोनों के सीने एक-दूसरे से चिपके हुए थे। गर्दन से गर्दन मिली हुई थी। नेहा अब भी अपनी गांड़ को रिदम में ऊपर-नीचे उछाल रही थी, मेरे हर धक्के का जवाब दे रही थी। मैंने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा, सम: “तुम बेकार आदमी के बारे में सोच रही हो ना? मुझे लगा शायद तुम जिग्नेश के बारे में सोच रही हो...” मैंने ये बात मजाक में कही थी। मगर जैसे ही ये शब्द मेरे मुँह से निकले, नेहा का पूरा शरीर बिल्कुल शांत हो गया। जैसे कोई मूर्ति बन गई हो। उसकी गांड़ उछालना बंद हो गया। उसकी चूत ने मेरे लंड को एकदम ढीला छोड़ दिया। वो कुछ पल तक मेरे सारे वजन को अपने शरीर पर सहती रही। फिर उसने दोनों हथेलियाँ मेरे कंधों पर रखकर मुझे जोर से धक्का दिया। मैंने भी हट लिया और बिल्कुल उसके बगल में लेट गया। नेहा के हाथ में अभी भी सिगरेट थी। उसने एक लंबा कश लिया, धुआँ छोड़ा और ठंडी, थोड़ी नाराज़ आवाज़ में बोली, नेहा: “क्या प्रॉब्लम है तुम्हें?” उसकी आँखों में नाराज़गी थी, शर्म थी और कुछ और भी — जो मैं ठीक से समझ नहीं पाया। वो अब मेरी तरफ देख भी नहीं रही थी। सिर्फ छत को घूर रही थी। मैं नेहा का सवाल समझ नहीं पा रहा था। प्रॉब्लम मुझे? मैंने तो ऐसा कुछ नहीं कहा था। ये तो बस नॉर्मल बात थी। कई बार तो वो मेरे पापा का नाम भी ले लेती थी सेक्स के दौरान, और तब हम दोनों एंजॉय ही करते थे। मगर अचानक जिग्नेश का नाम लेते ही वो इतनी नाराज़ हो गई? मैंने थोड़ा हड़बड़ाते हुए कहा, सम: “प्रॉब्लम??... मुझे क्या प्रॉब्लम होगी... आई मीन मैं तो बस मजाक में बोल रहा था...” नेहा ने सिगरेट का कश लिया, धुआँ छोड़ा और अब थोड़ी तेज़ आवाज़ में बोली, नेहा: “मैं अभी की बात नहीं कर रही हूँ... मैं देख रही हूँ... जब से हमने उनसे बात की है, तब से तुम कुछ पूछना चाहते हो... मगर चुप रहते हो। तुम्हें लगता है कि मैं तुम्हारे फैंटसी के गेम में तुम्हारा साथ नहीं दे रही हूँ... मगर तुमने कभी मुझसे समझना चाहा ही नहीं कि मेरे दिमाग में क्या चल रहा है।” उसकी आवाज़ में नाराज़गी के साथ दर्द भी था। वो अब भी छत की तरफ देख रही थी, मेरी तरफ मुड़ी तक नहीं। उसके स्तन अभी भी तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रहे थे, लेकिन अब वो उत्तेजना की वजह से नहीं, बल्कि भावनाओं की वजह से। सम: “नहीं... ऐसा कुछ नहीं है। वैसे भी बेबी... तुम्हें पता है... ये तुम्हारा शरीर है और तुम्हारी चॉइस। मैं ये नहीं कहूँगा कि मुझे नेहा को किसी और से एक्सपीरियंस करवाने में मजा नहीं आएगा... मगर तुम्हारी मर्जी के बिना नहीं... तुम्हारी चॉइस के बिना बिल्कुल नहीं...” नेहा ने मेरी तरफ देखा। उसकी आँखों में गहरी निगाह डाली, जैसे मेरी आत्मा तक देख रही हो। नेहा: “ये ही तो प्रॉब्लम है सम... मेरी मर्जी... और वो चाह रहे हैं... उसमें उन्हें मेरी तुम्हारी मर्जी और इनकार के बीच का कुछ चाहिए...” मैं कुछ समझ नहीं पाया। उसकी बात मेरे दिमाग से ऊपर जा रही थी। सम: “मैं कुछ समझा नहीं...” नेहा ने एक पल मुझे देखा, फिर चुपचाप नंगी ही बिस्तर से उठ गई। उसके नंगे शरीर पर कमरे की हल्की रोशनी पड़ रही थी। नेहा: “मेरे साथ आओ।” मैं भी उठा और उसके पीछे-पीछे टेबल की तरफ गया, जहाँ लैपटॉप रखा था। हम दोनों कुर्सियों पर नंगे ही बैठ गए। नेहा ने लैपटॉप खोला और सीधे एक पोर्न वेबसाइट पर चली गई। वो कुछ खास सर्च कर रही थी, जैसे उसे पहले से पता हो कि कौन सा वीडियो देखना है। दो मिनट बाद स्क्रीन पर एक चेक पोर्न वीडियो खुल गया। वीडियो की लंबाई दो घंटे से भी ज्यादा थी। रात के एक बज चुके थे और कल ऑफिस भी जाना था, लेकिन नेहा की उत्सुकता देखकर मैं कुछ नहीं बोला। वीडियो शुरू हुआ। एक सड़क पर रात का समय। एक जवान लड़की अकेली खड़ी है। एक कपल उससे अप्रोच करता है। भाषा चेक थी, लेकिन इंग्लिश सबटाइटल से सब समझ आ रहा था। ये कोई प्रोफेशनल पोर्न नहीं लग रहा था — मोबाइल से शूट की हुई रियल लगने वाली कहानी थी। वे बातें कर रहे थे — “तुमने पहले कभी ऐसा कुछ किया है?” “क्या तुम बाईसेक्शुअल हो?” “क्या तुम वर्जिन हो?” “जब तक तुम चाहो हमारे साथ रह सकती हो... हम तुम्हारी कॉलेज फीस भी दे देंगे।” फिर लड़की उनकी कार में बैठ जाती है और उनके आलीशान घर चली जाती है। थोड़ी देर इधर-उधर की बातें... फिर वो आदमी (जो उसके पापा जितना उम्र का था) उसके साथ सेक्स शुरू करता है। फिर उसकी पत्नी भी शामिल हो जाती है। धीरे-धीरे सेक्स से ऊपर चीजें बढ़ने लगीं — वे उसे अलग-अलग काम देते, वो मना करती, लेकिन अंत में करती जाती। बहुत ही इंटरेस्टिंग और स्लो-बर्न वीडियो था। मुझे लग रहा था रात में इतना लंबा वीडियो कौन देखता है, लेकिन नेहा पूरी तरह खोई हुई थी। हमने पूरा वीडियो देखा। नेहा का दाहिना हाथ पूरे समय मेरे लंड पर था। जैसे-जैसे वीडियो में लड़की की सबमिशन बढ़ती, नेहा का हाथ तेज़ होता जाता। मैं दो बार उसके हाथों से झड़ गया। पहली बार सारा पानी मैंने ज़मीन पर निकाल दिया, लेकिन नेहा ने लंड नहीं छोड़ा। बल्कि वीडियो देखते-देखते उसे फिर से सख्त कर दिया। उसका हाथ अभी भी मेरे लंड पर ऊपर-नीचे हो रहा था। उसकी आँखें स्क्रीन पर जमी हुई थीं। वीडियो खत्म होने के बाद नेहा मेरी तरफ मुड़ी। उसकी आँखें अभी भी स्क्रीन की रोशनी से चमक रही थीं। नेहा: “क्या समझे?” मैं वीडियो में इतना खोया हुआ था कि भूल ही गया था कि मुझे इस वीडियो से कुछ सीखना भी है। मैंने थोड़ा हड़बड़ाते हुए कहा, सम: “मतलब... सही था... आई लाइक द वीडियो।” नेहा ने एक पल मुझे देखा, फिर हल्के से मुस्कुराते हुए बोली, नेहा: “बुद्दू... इसमें दो चीजें सीखने की हैं।” नेहा मेरी गोद में बैठी हुई थी। उसका नंगा शरीर मेरे से चिपका हुआ था। उसने मेरी आँखों में देखते हुए कहा, नेहा: “पहली चीज़ तो शर्म, इनकार, डर और कंट्रोल... सबमिशन। तुमने देखा ना वीडियो वाली लड़की ने वो सब कैसे किया? हिचकिचाते हुए... थोड़ी शर्म... थोड़ी डोमिनेशन... सब कुछ था।” मैं बीच में बोल पड़ा, सम: “तुम ये नहीं कर पाओगी?” नेहा हल्के से मुस्कुराई। उसकी मुस्कान में थोड़ी शर्म और थोड़ी चुनौती थी। नेहा: “जिग्नेश को इंडियन शर्माती हुई लड़की चाहिए... जैसी हमने रेस्टोरेंट में पहले आधे घंटे में गंध मचा दी थी। अगर मैं वो शर्म नहीं ला पाई जो उन्हें चाहिए... मैं बस टाँगें फैला कर तैयार हो गई... जैसे बेकार आदमी के साथ .... ” उसने एक पल रुककर मेरी आँखों में देखा और आगे बोली, नेहा: “वीडियो में वो लड़की हिचकिचा रही थी... पहले थप्पड़ पड़ने पर उसकी आँखों में आँसू भी आ गए थे... नाराज़गी भी थी। मैं वो भाव ला ही नहीं पाई... और वहाँ तुम भी होंगे... मुझे समझ नहीं आ रहा कि हम उन्हें अच्छे से वो दे पाएँगे जो उन्हें चाहिए।” जब मैंने पूछा, “और दूसरी बात?”, तो नेहा ने बड़ी-बड़ी आँखों से मेरी तरफ देखा। नेहा: “ये तो तुम्हें समझ में आ ही गई होगी...” मुझे लगा जैसे कोई एग्ज़ाम चल रहा हो और मेरे दिमाग में बिल्कुल जवाब नहीं था। मैं चुपचाप उसका चेहरा देखता रहा। नेहा ने थोड़ी देर तक मेरे चेहरे को देखा, फिर खुद ही जवाब दे दिया, नेहा: “दूसरी बात... वो लड़की अकेली नहीं थी। वो कपल था — पति और पत्नी। दोनों मिलकर उसे कंट्रोल कर रहे थे। पति उसे चोद रहा था, पत्नी उसे चूम रही थी, थप्पड़ मार रही थी, उसे नीचा दिखा रही थी। दोनों का एक साथ होना... वो लड़की को और ज़्यादा helpless बना रहा था।” मैंने उसे फिर से देखा। मेरे दिमाग में ये समस्या अब तक आई ही नहीं थी। सब लोगों की तरह मैं मानकर बैठा था कि एक महिला दूसरी महिला को प्यार करती है तो वो lesbian होती है। नेहा ने मेरा भ्रम तोड़ दिया। नेहा: “मुझे चिकने लड़के बिल्कुल पसंद नहीं। तुमने मेरी मर्दों की चॉइस में देखा होगा ना... मुझे वो मर्द चाहिए जो असली लगे। जिनके सीने पर बाल हों, आवाज़ में दम हो... ना कि चिकने छुटिये... तुम्हारी तरह।” ये बोलते हुए वो थोड़ा हँसी। मैंने थोड़ा हड़बड़ाकर पूछा, सम: “मतलब... तुम ये सब किसी लड़की के साथ करने में comfortable नहीं हो?” नेहा इस बार ज़ोर से हँस पड़ी। हा इस बार ज़ोर से हँस पड़ी। उसकी हँसी में शर्म के साथ मज़ाक भी था। उसकी नंगी देह मेरी गोद में हिल रही थी। नेहा: “अरे मेरे भोले बलम... पत्नी को चुदवाने की इतनी जल्दी के भूल गए कि पत्नी lesbian नहीं है?” वो हँसते हुए मेरी छाती पर हल्का सा थप्पड़ मारती हुई बोली, नेहा: “मेरे सामने वो पोर्न का सीन... देखा था ना? जब वो mature महिला उस कॉलेज वाली लड़की के मुँह पर अपनी चूत रगड़ रही थी... उसे humiliate कर रही थी... बाल पकड़कर जबरदस्ती चाटवा रही थी... वो domination... वो power...” नेहा ने मेरी आँखों में देखा। उसकी आवाज़ अब थोड़ी भारी और उत्तेजित हो गई थी। नेहा: “सोचो... एक कपल ने मुझे नहीं... तुम्हें hire किया as a slave।... क्या तुम? क्या तुम उनके सामने घुटनों पर बैठकर उनकी पत्नी की चूत चाटोगे? और बीच में वो आदमी भी अपना लंड तुम्हारे चेहरे के सामने ले आया? तुम्हें पता है तुम्हें क्या करना है... क्या कर पाओगे?” मैं समझ गया कि नेहा क्या समझा रही है। मैं कुछ नहीं बोला। नेहा ने मेरे लंड को हल्का दबाते हुए मुस्कुराकर कहा, नेहा: “वैसे भी तुमने तो बहुत लंड का जूस हाथ से निकाला है... मगर वो तुम्हारे पीछे चला गया... फिर?? क्या करोगे तब?” इस बार मेरे मुँह से डायरेक्ट “नहीं” निकला। नेहा: “जब तुम gay नहीं हो तो मैं lesbian कैसे, बुद्दू?” वो जोर से हँसी। उसकी हँसी में शर्म, मज़ाक और गहरी उत्तेजना तीनों थे। उसने मेरी गर्दन में चुम्मा लिया और कान में फुसफुसाया नेहा: “ये आइडिया सुनने में बहुत अच्छा लगता है... फील करने में भी। मगर क्या मैं उनके एक्सपेक्टेशन जितना प्लेज़र दे पाऊँगी? क्या मैं उस डर और शर्म में सच में feel कर पाऊँगी? लेस्बियन... मैंने कभी सोचा भी नहीं था। किसी लड़की को किस करने के बारे में भी नहीं सोचा। और अगर उस पर किसी ने मुझे थप्पड़ मारा... तो क्या मैं पलटकर उसे थप्पड़ नहीं मार दूँगी? और तुम... तुम्हारा रिएक्शन कैसा होगा जब तुम्हारी बीवी को कोई थप्पड़ मारेगा? हम तो अभी बंद कमरे में इस फैंटसी में हैं... मगर मैंने देखा है तुम्हें लड़ते हुए लड़कों से, जब क्लब में किसी ने मुझे गलत तरीके से टच किया था। वहाँ न जाने क्या होगा...” नेहा ने गहरी साँस ली। उसकी आँखें मेरी आँखों से मिली हुई थीं। नेहा: “इसीलिए मुझे लगता है कि हमें ये प्रपोज़ल नहीं मानना चाहिए। तो प्लीज... मुझे उस नज़र से मत देखा करो कि मैं तुम्हारा मजा खराब कर रही हूँ। हालाँकि तुमने कभी बोला नहीं... मगर तुम्हारी आँखें... इसीलिए मैं आज ये क्लियर करना चाहती थी।” नेहा ने ये कहते हुए मेरी छाती पर सिर रख दिया। उसका नंगा शरीर अब पहले जितना उत्तेजित नहीं, बल्कि थोड़ा काँपता हुआ और भावुक लगा। कमरे में सन्नाटा छा गया। मैं उसके बालों में हाथ फेरता रहा। उसकी बातों में डर था, लेकिन फैंटसी की भूख भी अभी पूरी तरह मरी नहीं थी।
14-06-2026, 10:20 AM
good going
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