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Adultery एक रंडी की दास्तान-The story of a corporate whore
#21
पिछली सीट पर बैठा लड़का, जिसने नीली टी-शर्ट पहनी थी, उसने बाइक धीमी करते हुए पूछा, "कितने?"

चैताली ने अपनी आवाज में हल्की सी मिठास घोलते हुए कहा, " कितने लोग हैं तुम?"

अगली सीट पर बैठा लड़का, जिसकी दाढ़ी अभी पूरी तरह से नहीं उगी थी, उसने अपने दोस्त की ओर देखा। " बस हम दो हैं ।"

चैताली ने मुस्कुराते हुए कहा, "ठीक है।"

नीली टी-शर्ट वाले लड़के ने अपने दोस्त से फुसफुसाया, "क्या बोलते हो?"

दाढ़ी वाले लड़के ने चैताली की ओर देखा। "पूरा पैकेज, क्या दोगी?"

चैताली ने अपनी पलकें झपकाते हुए कहा, "जो तुम चाहोगे, सब मिलेगा। पांच हजार, दो घंटे "

" एक हज़ार" नीली टी-शर्ट वाले ने कहा।

चैताली हँसी। "इतने में तो सिर्फ़ झाँकी मिलेगी, बाबू। पूरा खेल तो बहुत महँगा है।"

दाढ़ी वाले लड़के ने थोड़ा आगे झुककर कहा, "तो कितना चाहिए?"

"कम से कम पाँच हजार," चैताली ने बेबाकी से कहा।

दोनों लड़के एक-दूसरे को देखने लगे। "बहुत ज्यादा है यार," नीली टी-शर्ट वाले ने कहा।

"तुम्हारे लिए खास डिस्काउंट," चैताली ने अपनी आवाज में शरारत मिलाई। "तीन हजार।"

"दो हज़ार दे सकते हैं मंज़ूर है"लड़के ने कहाँ। चैताली ने हां भरते हुए अपना सर हिलाया।

दाढ़ी वाले लड़के ने सिर हिलाया। "ठीक है। लेकिन तुम्हे हमारे साथ हॉस्टल चलना होगा।"

"कहीं भी," चैताली ने कंधे उचकाए। "बस मेरा काम होना चाहिए।"

"ठीक है, बैठो," दाढ़ी वाले लड़के ने कहा।

चैताली एक्टिवा पर बैठ गई, दोनों लड़कों के बीच। उसकी देह उनके युवा शरीरों से छू रही थी। उसे एक अजीब सी उत्तेजना महसूस हुई। एक्टिवा तेजी से आगे बढ़ गई, गुरुग्राम की रात की सड़कों पर दौड़ती हुई। हवा उसके चेहरे से टकरा रही थी, उसके बालों को बिखेर रही थी। लड़कों की युवा गंध, उनके पसीने और परफ्यूम की मिली-जुली महक उसे घेर रही थी।

"तुम्हारा नाम क्या है?" नीली टी-शर्ट वाले ने पूछा।

"चैताली," उसने जवाब दिया।

"मैं रवि, और यह मेरा दोस्त अमित," दाढ़ी वाले ने कहा।

"कॉलेज के हो?" चैताली ने पूछा।

"हाँ, पास के कॉलेज में," अमित ने जवाब दिया।

"तो आज छुट्टी मना रहे हो?" चैताली ने हँसते हुए कहा।

रवि ने पीछे मुड़कर देखा। "हाँ, आज मूड है।"

चैताली ने कुछ नहीं कहा, बस मुस्कुराती रही। हॉस्टल की इमारतें दूर से दिखाई देने लगीं। एक पुरानी सी इमारत, जिसकी खिड़कियों से पीली रोशनी छनकर आ रही थी। एक्टिवा हॉस्टल के पिछले गेट पर रुकी, जहाँ अँधेरा था।

"यहाँ से," अमित ने कहा, "हमें पैदल जाना होगा।"

वे एक्टिवा से उतरे। चैताली ने अपने कपड़े ठीक किए। हॉस्टल के अंदर घुसते ही, गलियारों में अजीब सी बदबू थी – पसीने, पुराने खाने और शायद कुछ और।

"तुम्हारा कमरा कहाँ है?" चैताली ने पूछा।

"ऊपर, तीसरी मंजिल पर," रवि ने कहा।

वे सीढ़ियाँ चढ़ने लगे। चैताली की साँसें थोड़ी तेज हो रही थीं। उसके दिल की धड़कन बढ़ रही थी। यह सिर्फ़ काम नहीं था, यह एक अनुभव था, हर बार नया।

कमरे का दरवाजा खुला। अंदर दो और लड़के बैठे थे, ताश खेल रहे थे। जैसे ही उन्होंने चैताली को देखा, उनकी आँखें चमक उठीं।

"अरे वाह!" एक लड़के ने कहा, जिसका नाम करण था। उसने अपनी ताश की गड्डी नीचे रख दी।

"कौन है यह?" दूसरे लड़के ने पूछा, जिसका नाम विशाल था।

रवि ने हँसते हुए कहा, "चैताली, हमारी नई दोस्त।"

चैताली ने कमरे का जायजा लिया। एक छोटा सा कमरा, दो बिस्तर, एक मेज और कुछ किताबें। दीवारों पर फिल्म सितारों के पोस्टर लगे थे। हवा में सिगरेट और सस्ते परफ्यूम की गंध थी।

"नमस्ते," चैताली ने मुस्कुराते हुए कहा।

करण ने तुरंत उठकर एक कुर्सी चैताली की ओर खिसकाई। "बैठो, बैठो।"

चैताली कुर्सी पर बैठ गई। उसने अपने चारों ओर देखा। चारों लड़के उसे ऐसे घूर रहे थे, जैसे उसने कभी कोई औरत नहीं देखी हो।

अमित ने कहा, "यह भी हमारे साथ है।"

चैताली ने अपनी भौंहें उठाईं। "तो सौदा चार का है?"

रवि ने सिर हिलाया। "हाँ, आज पार्टी है।"

"तो कीमत बढ़ेगी," चैताली ने सीधे कहा।

करण ने हँसते हुए कहा, "कितनी?"

"चार हजार," चैताली ने कहा। "दो घंटे, चार लड़के।"

चारों लड़के एक-दूसरे को देखने लगे। "ठीक है," अमित ने कहा। "लेकिन पहले दिखाओ।"

चैताली ने अपनी आँखें सिकोड़ीं। "पहले पैसे।"

रवि ने अपने वॉलेट से नोट निकाले और चैताली की ओर बढ़ा दिए। चैताली ने नोट गिने, चार हजार पूरे थे। उसने पैसे अपने पर्स में रखे।

"तो, शुरू करें?" चैताली ने अपनी आवाज़ में एक अलग तरह की कामुकता घोलते हुए कहा।

करण ने कमरे का दरवाजा बंद किया। कमरे में एक अजीब सी गर्मी बढ़ गई। चैताली खड़ी हुई, उसने अपनी तंग जींस और टॉप उतारना शुरू किया। लड़कों की आँखें उस पर गड़ी थीं, उनकी साँसें तेज हो रही थीं।

उसने पहले अपना टॉप उतारा, फिर जींस। उसके काले रंग की ब्रा और पैंटी उसके शरीर पर कसकर फिट थे, उसकी सुडौल वक्रों को उजागर कर रहे थे। चारों लड़के उसकी ओर ऐसे देख रहे थे, जैसे उन्होंने कभी कोई औरत नहीं देखी हो।
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#22
Pishab pilao gaand chatvao
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#23
"वाह!" विशाल फुसफुसाया।

चैताली ने अपनी ब्रा की पट्टियाँ खोलीं, उसके बूब्स आज़ाद हो गए। 38 नंबर के बूब्स, थोड़े ढीले, लेकिन अभी भी सुडौल और आकर्षक। उनके निप्पल और उठे हुए थे। लड़कों की आँखें उन पर टिकी थीं।

अमित ने आगे बढ़कर चैताली के एक बूब्स को अपने हाथ में लिया। उसकी उंगलियाँ निप्पल पर फिरने लगीं। चैताली ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसे अच्छा लग रहा था।

"क्या शानदार है," अमित ने कहा।

चैताली ने अपनी पैंटी भी उतार दी। उसकी मोटी जंघाएँ, उसका पेट, और नीचे उसका साफ़-सुथरा प्राइवेट पार्ट, सब लड़कों के सामने उजागर हो गया। लड़कों की साँसें तेज़ हो गईं।

"आओ," चैताली ने अपने हाथों से इशारा किया।

करण सबसे पहले आगे बढ़ा। उसने चैताली को अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। चैताली ने भी उसका जवाब दिया, उसकी जीभ करण की जीभ से उलझ गई। उनके मुँह में लार का आदान-प्रदान हो रहा था, एक मीठी और नमकीन गंध फैल रही थी। करण के हाथ चैताली की कमर पर कस गए, वह उसे अपने करीब खींच रहा था।

रवि और अमित ने चैताली के बूब्स को अपने हाथों में ले लिया, उन्हें सहलाने लगे। विशाल चैताली के पीछे खड़ा था, उसकी गांड को अपने हाथों से सहला रहा था।

करण ने चैताली को बिस्तर पर धकेल दिया। चैताली बिस्तर पर पीठ के बल लेट गई। चारों लड़के उसके चारों ओर खड़े थे, अपनी पैंट उतार रहे थे। उनके लंड, जो अब पूरी तरह से खड़े हो चुके थे, उनके अंडरवियर से झाँक रहे थे।

"कौन पहले?" अमित ने पूछा।

"मैं" करण ने कहा। उसने अपना अंडरवियर उतारा और अपना लंबा, मोटा लंड चैताली के मुँह के पास ले आया। चैताली ने बिना किसी हिचकिचाहट के उसे अपने मुँह में ले लिया। उसकी जीभ करण के लंड के सिरे पर फिरने लगी, उसे चाटने लगी। करण की आँखें बंद थीं, उसके मुँह से गहरी साँसें निकल रही थीं।

रवि और अमित ने चैताली के बूब्स को बारी-बारी से चूसा, उनके निप्पलों को अपनी जीभ से सहलाया। विशाल चैताली के पैरों के पास बैठ गया, उसकी गांड को अपने हाथों से सहला रहा था।

चैताली ने करण के लंड को अपने मुँह में अंदर-बाहर करना शुरू किया, उसकी जीभ से उसे उत्तेजित कर रही थी। करण की साँसें और तेज़ हो गईं, वह चैताली के सिर को अपने हाथों से पकड़कर अपने लंड को उसके मुँह में और गहरा धकेल रहा था। चैताली का गला भर गया, लेकिन उसने विरोध नहीं किया।

कुछ देर बाद, करण ने अपना लंड चैताली के मुँह से निकाला। उसके लंड पर चैताली की लार चमक रही थी।
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#24
Hot story
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#25
चौतरफा दीवारों वाले उस घुटन भरे हॉस्टल के कमरे में हवा भारी थी। सिगरेट के धुएं और पसीने की गंध ने माहौल को और भी उत्तेजक बना दिया था। चैताली घोष, जो दिन में वाटिका रियल एस्टेट की एक गंभीर और प्रभावशाली एग्जीक्यूटिव थी, इस वक्त फर्श पर घुटनों के बल बैठी थी। उसके शरीर की परिपक्वता, उसके 38-32-40 के उभार, और उसकी उम्र का तजुर्बा उन चारों लड़कों के लिए किसी नशे से कम नहीं था। उसने अभी-अभी करण के लंड को अपने मुंह से आजाद किया था। उसके होंठों के कोनों से लार की एक पतली लकीर टपक रही थी और उसकी सांसें तेज थीं।

करण ने एक लंबी सांस ली और पीछे हटते हुए अपनी पैंट ऊपर की, हालांकि उसकी उत्तेजना अभी भी चरम पर थी। उसने चैताली के चेहरे पर एक तिरस्कार भरी लेकिन कामुक मुस्कान डाली।

"वाह रंडी, तेरा मुंह तो वाकई जादू है। पर अब सिर्फ मुंह से काम नहीं चलेगा," करण ने कहा।

रवि, जो अब तक किनारे खड़ा होकर इस नजारे का लुत्फ उठा रहा था, आगे बढ़ा। उसकी आंखों में भूख थी। उसने अपनी जेब से एक कंडोम निकाला और उसे अपने सख्त लंड पर चढ़ाते हुए चैताली की ओर देखा।

"अब मेरी बारी है। चल, इस बेड पर लेट जा, मोटी," रवि ने आदेश दिया।

चैताली ने एक धीमी आह भरी। वह धीरे से उठी, उसके भारी बूब्स बिना किसी सहारे के झूल रहे थे। उसने बेड की चादर को अपने हाथों से जकड़ा और अपनी पीठ के बल लेट गई। उसके चौड़े कूल्हे गद्दे में धंस गए, जिससे उसकी कमर और भी गहरी और आकर्षक लग रही थी।

रवि उसके ऊपर चढ़ा और उसके पैरों को फैला दिया। उसने चैताली की जांघों के बीच अपनी उंगलियां घुमाईं, जहाँ वह पहले से ही गीली हो चुकी थी।

"कितनी गीली है तू, कुतिया। लगता है तुझे लड़कों के साथ रहने की आदत हो गई है," रवि ने गंदी हंसी हंसते हुए कहा।

उसने बिना किसी देरी के अपना कंडोम चढ़ा हुआ लंड उसकी तंग चूत में धकेल दिया। चैताली के मुंह से एक तेज चीख निकली, जो दर्द और सुख का मिला-जुला मिश्रण थी।

"आह! धीरे... रवि," चैताली ने कराहते हुए कहा।

"चुप रह! तू यहाँ मेरी बातें सुनने नहीं, मेरी प्यास बुझाने आई है," रवि ने उसकी कमर को कसकर पकड़ा और जोर-जोर से धक्का देना शुरू किया।

चुदाई की आवाजें कमरे में गूंजने लगीं। मांस से मांस के टकराने की वह 'चप-चप' की आवाज और कंडोम के घर्षण ने माहौल को और भी कामुक बना दिया। रवि की हर धमक के साथ चैताली के 38 इंच के भारी  बूब्स ऊपर-नीचे उछल रहे थे। वह अपनी आंखें बंद कर चुकी थी, उसकी उंगलियां चादर को फाड़ने की हद तक भींच रही थीं। रवि ने अपनी गति बढ़ाई, उसकी सांसें तेज हो गईं।

"तेरी ये चर्बी... उफ़, बहुत सही है तू," रवि ने उसके बूब्स को जोर से दबाते हुए कहा।

रवि ने पहली बार अपनी चरम सीमा तक पहुँचने के बाद उसे छोड़ दिया। लेकिन खेल अभी शुरू हुआ था। उसने उसे पलटने का इशारा किया।

"अब घुटनों के बल आ जा। मुझे तेरी ये बड़ी गांड़ देखनी है," रवि ने आदेश दिया।

चैताली ने आज्ञा का पालन किया। वह डॉगी स्टाइल में आ गई, उसकी पीठ नीचे की ओर झुकी हुई थी और उसके भारी कूल्हे हवा में उठे हुए थे। रवि पीछे से आया और एक बार फिर उसके भीतर समा गया। इस बार गहराई ज्यादा थी।

"ओह गॉड... रवि, बहुत गहरा है," चैताली की आवाज अब और भी भारी हो गई थी।

"गहरा होना चाहिए, तभी तो तुझे पता चलेगा कि असली मर्द क्या होता है," रवि ने उसके कूल्हों को जोर से थप्पड़ मारा, जिससे उसकी त्वचा लाल हो गई।

रवि ने उसे बुरी तरह पटका। हर धक्का चैताली के शरीर को आगे की ओर धकेल रहा था। वह अपनी कोहनियों के बल टिकी हुई थी, उसका चेहरा गद्दे में दबा था। कमरे में केवल उनकी भारी सांसों और शरीर के टकराने की आवाजें थीं। रवि ने तीसरी बार के लिए उसे अपनी गोद में बिठाया।

चैताली अब उसके ऊपर थी, उसका चेहरा रवि के चेहरे के सामने था। उसने अपनी कमर को गोल-गोल घुमाना शुरू किया।

"हाँ, ऐसे ही घुमा इसे। तू तो पूरी प्रोफेशनल है," रवि ने उसके चेहरे पर थूकते हुए कहा।

चैताली ने अपनी कमर की गति और तेज कर दी। वह अपनी ही कामुकता में खो गई थी। जब रवि ने तीसरी बार अपना काम पूरा किया, तो वह पसीने से तर-बतर था। उसने चैताली को बिस्तर पर धक्का दिया और अमित की ओर इशारा किया।
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#26
स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

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#27
अमित, जो अब तक अपनी बारी का इंतजार कर रहा था, उत्तेजना से कांप रहा था। उसने अपना कंडोम पहना और चैताली के पास आया।

"मेरा नंबर आ गया। अब देख मैं इस मिलफ के साथ क्या करता हूँ," अमित ने गंदी भाषा में कहा।

अमित ने चैताली को करवट दिलाकर लेटाया। उसने उसके एक पैर को अपने कंधे पर रखा और धीरे-धीरे अंदर घुसा। चैताली ने एक लंबी आह भरी। अमित की शैली रवि से अलग थी; वह धीरे-धीरे और गहराई से वार कर रहा था।

"तेरी चूत इतनी गर्म है, जैसे आग लगी हो," अमित ने उसके कान में कहा।

चैताली ने अपनी कमर को ऊपर उठाया, जिससे अमित को और गहराई तक जाने का मौका मिला। अमित ने उसके स्तनों को अपने हाथों में लिया और उन्हें जोर-जोर से मरोड़ने लगा।

"आह! अमित... रुक जाओ... बहुत जोर से है," चैताली ने कराहते हुए कहा।

"रुकना क्यों है? तूने पैसे लिए हैं न? तो अब भुगत, बेहेन की लौड़ी " अमित ने बेरहमी से कहा और अपनी गति बढ़ा दी।

चुदाई  की आवाजें तेज हो गईं क्योंकि चैताली का प्राकृतिक लुब्रिकेशन और कंडोम का घर्षण मिलकर एक अजीब सा संगीत पैदा कर रहे थे। अमित ने दूसरी बार के लिए उसे दीवार के सहारे खड़ा किया। उसने चैताली के दोनों पैर ऊपर उठा लिए और उसे दीवार से चिपका दिया।

"देख, तू कितनी बेबस लग रही है। देखने में तो तू किसी अच्छे घर की हाउसवाइफ लगती है, बल बच्चे दर, पर  यहाँ हॉस्टल के कमरे में चार लड़कों के लिए खुली पड़ी है," अमित ने उसका मजाक उड़ाते हुए कहा।

उसने वार करना शुरू किया। चैताली की पीठ दीवार से रगड़ रही थी, और अमित के हर धक्के से वह दीवार पर टकरा रही थी। उसकी सांसें उखड़ रही थीं, लेकिन उसके शरीर की प्रतिक्रिया बता रही थी कि उसे यह सब पसंद आ रहा था। अमित ने तीसरी बार के लिए उसे फिर से बेड पर लेटाया और उसके दोनों पैरों को उसके सिर के पास मोड़ दिया।

"अब देख असली मजा," अमित ने कहा और पूरी ताकत से अंदर घुसा।

चैताली की चीखें अब कमरे की दीवारों से टकरा रही थीं। वह पूरी तरह से समर्पित हो चुकी थी। अमित ने उसे तब तक पटका जब तक कि वह पूरी तरह से निढाल नहीं हो गई। अमित ने अपना कंडोम उतारा और उसे किनारे फेंक दिया।
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#28
अब बारी करण की थी। वह लड़का, जिसे चैताली ने अभी-अभी मुंह से सुख दिया था। वह सबसे ज्यादा आक्रामक था।

"अब मेरा बदला लेने का वक्त है," करण ने कहा और कंडोम पहनकर चैताली के ऊपर कूद पड़ा।

उसने उसे 'स्पूनिंग' पोजीशन में लिया। दोनों एक ही दिशा में लेटे हुए थे। करण ने पीछे से उसकी चूत में प्रवेश किया।

"तेरी ये चर्बी वाली बॉडी... सच में कमाल है। तू तो बिल्कुल असली रंडी लगती है," करण ने गालियां देते हुए कहा।

चैताली ने अपनी आंखें मूँद लीं। वह केवल शारीरिक सुख और उस मानसिक दबाव को महसूस कर रही थी जो ये लड़के उस पर डाल रहे थे। करण ने उसे जोर-जोर से हिलाना शुरू किया। वह उसकी कमर को इतनी जोर से पकड़ रहा था कि वहां उंगलियों के निशान पड़ रहे थे।

"बोल, तुझे कैसा लग रहा है? बोल कि तू हमारी गुलाम है!" करण ने चिल्लाकर कहा।

"मैं... मैं आपकी गुलाम हूँ... आह! और तेज करो," चैताली ने अपनी कामुकता में बहते हुए जवाब दिया।

करण ने दूसरी बार के लिए उसे 'प्रोन बोन' पोजीशन में डाला। चैताली पेट के बल पूरी तरह सपाट लेट गई। करण उसके ऊपर चढ़ा और अपने पूरे वजन के साथ अंदर घुसा। चैताली का चेहरा गद्दे में दबा हुआ था, और वह केवल घुटनों के बल टिककर अपनी कमर को ऊपर उठा रही थी।

"ये देख, कैसे हिल रही है ये मोटी," करण ने बाकी लड़कों की ओर देखते हुए कहा।

बाकी लड़के हंस रहे थे और अपनी उत्तेजना को देख रहे थे। करण ने उसे बुरी तरह पटका। हर धक्के के साथ चैताली का शरीर आगे-पीछे हो रहा था। कंडोम के कारण होने वाला घर्षण अब और भी तीव्र हो गया था।

"तुम रुकना मत," करण ने हांफते हुए कहा, उसकी उंगलियां चैताली की जांघों पर मजबूती से जमी थीं, जैसे वह उसे अपनी ओर खींच रहा हो।

कमरे की हवा भारी थी, जिसमें पसीने और उत्तेजना की मिली-जुली गंध घुली हुई थी। यह उनकी इस रात की तीसरी कोशिश थी, लेकिन इस बार वे एक अलग लय की तलाश में थे। करण ने धीरे से उसे ऊपर उठाया और अपनी जांघों के बीच, 'रिवर्स काउगर्ल' पोजीशन में बिठाया। चैताली अब उसकी तरफ मुंह करके बैठी थी, उसकी नजरें सीधे करण की आंखों में थीं, जिनमें बेतहाशा चाहत और कामवासना का मिश्रण था।

चैताली ने अपने हाथों को करण के सीने पर टिका दिया ताकि वह अपना संतुलन बना सके। उसकी सांसें तेज थीं, और वह धीरे-धीरे अपनी कमर को एक लयबद्ध तरीके से ऊपर-नीचे करना शुरू किया। यह गति धीमी थी, लेकिन असर गहरा था। जैसे-जैसे वह नीचे झुकती, उसका पूरा वजन करण के उत्तेजित लन्ड  पर पड़ता, जिससे वह दबाव और भी तीव्र हो जाता। वह महसूस कर सकती थी कि कैसे वह उसे गहराई तक दबा रही थी, और करण के चेहरे पर दर्द और आनंद का एक अजीब सा संगम था।

हर बार जब वह ऊपर उठती, तो एक पल के लिए दोनों के बीच एक खालीपन आता, और फिर वह पूरी ताकत से नीचे आती, जिससे वह दबाव और भी ज्यादा महसूस होता। करण की कमर बिस्तर की चादर में धंसी हुई थी, और वह बस चैताली के इस खेल को महसूस कर रहा था, जो अपनी मर्जी से इस तीव्रता को नियंत्रित कर रही थी। उनकी सांसों की आवाज अब कमरे के सन्नाटे को चीर रही थी, और यह सिलसिला इस तरह आगे बढ़ा जैसे समय रुक गया हो। "हाँ, ऐसे ही। अपनी पूरी चर्बी का इस्तेमाल कर," करण ने उसके कूल्हों को पकड़कर नीचे खींचते हुए कहा।

चैताली की सांसें अब बहुत तेज हो गई थीं। उसका पूरा शरीर पसीने से चमक रहा था। उसके बूब्स उसके पेट से रगड़ रहे थे। जब करण ने अपना काम पूरा किया, तो वह बुरी तरह हांफ रहा था।
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#29
Nice story
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#30
अंत में विशाल की बारी आई। विशाल सबसे छोटा था लेकिन सबसे ज्यादा उत्सुक। उसने अपना कंडोम पहना और चैताली की ओर देखा, जो अब लगभग बेहोशी की हालत में थी।

"अब मेरी बारी। मैं इसे पूरी तरह खत्म करूँगा," विशाल ने कहा।

उसने चैताली को खड़ा किया। उसने उसे बेड के किनारे पर बिठाया और उसके पैरों को अपने कंधों पर रख लिया। विशाल ने एक झटके में प्रवेश किया।

"ओह! विशाल... तुम बहुत सख्त हो," चैताली ने कराहते हुए कहा।

"सख्त तो होना ही पड़ेगा, आखिर मैं जवान हूँ," विशाल ने हंसते हुए कहा और तेजी से धक्का देना शुरू किया।

कमरे में फिर से वही 'श्लिक-श्लिक' की आवाजें गूंजने लगीं। विशाल ने उसे बेड के किनारे पर इस तरह टिकाया की उसका ऊपरी हिस्सा लटका हुआ था। उसने उसके स्तनों को जोर-जोर से थपथपाया, जिससे वे हवा में लहरों की तरह हिल रहे थे।

"देख कैसे तेरे मम्मे हिल रहे है " विशाल ने उत्तेजित होकर कहा।

दूसरी बार के लिए, उसने उसे फिर से फर्श पर लिटाया और एक पैर को ऊपर उठाकर उसके बीच में समा गया। वह बहुत तेजी से वार कर रहा था। चैताली की सांसें अब केवल छोटी-छोटी सिसकियों में बदल गई थीं। वह पूरी तरह से उनके नियंत्रण में थी।

तीसरी बार, विशाल के दिमाग में एक जटिल और उत्तेजक योजना थी। उसने चैताली को धीरे से अपने ऊपर लेटाया, लेकिन इस बार वह उसे सामान्य तरीके से नहीं चाहता था।

उसने बड़ी कुशलता से चैताली के शरीर को घुमाया और उसे अपनी पोजीशन के बिल्कुल विपरीत दिशा में सेट किया। वह उसे '69' की उस जादुई स्थिति में लाना चाहता था, जहाँ उनके शरीर एक पहेली की तरह एक-दूसरे में फिट हो जाएं। इस स्थिति का मतलब था कि उनके बीच कोई दूरी नहीं रहेगी—उनका ऊपरी हिस्सा नीचे के हिस्से से जुड़ा होगा। विशाल चाहता था कि वह एक ही समय में चैताली के भीतर गहराई तक समाया रहे और साथ ही उसकी अपनी प्यास चैताली के होंठों से बुझाई जाए।

जब वह पूरी तरह सेट हो गए, तो विशाल ने अपनी भारी और मर्दाना आवाज़ में आदेश दिया, "चूस इसे, चैताली... ठीक वैसे ही जैसे तुम्हें पसंद है, जबकि मैं तुझे अंदर से पूरी तरह भर रहा हूँ। मुझे महसूस कराओ कि तुम मेरी हो।"

यह आदेश चैताली के लिए किसी चिंगारी की तरह था। उसने बिना एक पल गँवाए विशाल के लन्ड को अपने मुंह में ले लिया। जैसे ही उसने उसे चूसना शुरू किया, उसे अपने शरीर के निचले हिस्से में विशाल की धमकें और उसकी गहराई महसूस हुई। यह एक ऐसा अहसास था जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल था—एक साथ दो अलग-अलग दिशाओं से मिल रहा सुख। ऊपर से वह उसे तृप्त कर रही थी, और नीचे से वह उसके द्वारा पूरी तरह से भरा जा रहा था।


इस दोहरे सुख ने चैताली के दिमाग को सुन्न कर दिया था। वह पागलपन की हद तक उत्तेजित हो चुकी थी। उसकी इंद्रियां इस तीव्र संवेदनशीलता को संभाल नहीं पा रही थीं। उत्तेजना इतनी अधिक थी कि उसके मुंह से लार की बूंदें टपक कर नीचे गिरने लगी थीं, और नीचे का हिस्सा पूरी तरह से रसभरा और गीला हो चुका था। वह एक ऐसी लहर में बह रही थी जहाँ केवल विशाल की धमकें और उसकी अपनी सिसकियाँ थीं। वह पूरी तरह से समर्पित थी, इस अद्भुत और जटिल शारीरिक मिलन के जादू में खोई हुई।

जब विशाल ने अपना काम पूरा किया, तो चारों लड़के चैताली के चारों ओर खड़े हो गए। वह फर्श पर नंगी पड़ी थी, उसके बाल बिखरे हुए थे और उसकी त्वचा लाल हो चुकी थी। वह पूरी तरह से टूट चुकी थी, लेकिन उसके चेहरे पर एक अजीब सी संतुष्टि थी।

"अब आखिरी चीज बची है," रवि ने एक शरारती मुस्कान के साथ कहा।

चैताली ने घबराकर ऊपर देखा। "क्या... क्या मतलब?"

"मतलब ये कि अब हम तुझे नहलाएंगे। पर पानी से नहीं," अमित ने हंसते हुए कहा।

चारों लड़कों ने एक साथ चैताली के ऊपर खड़े होकर अपना मूत्र विसर्जन करना शुरू कर दिया। गर्म, पीला तरल चैताली के चेहरे, उसके स्तनों, उसके पेट और उसके कूल्हों पर गिरने लगा।

"आह... यह... यह क्या है," चैताली ने अपनी आंखें बंद करते हुए कहा।

"यह हमारा इनाम है, रंडी। इसे पी और इसे महसूस कर," करण ने चिल्लाकर कहा।

गर्म पेशाब की धारें उसके शरीर पर गिर रही थीं, जिससे एक तीखी गंध पूरे कमरे में फैल गई। वह तरल उसके शरीर की सिलवटों में जमा हो रहा था, उसके बूब्स  के बीच से बहकर नीचे जा रहा था। चैताली ने खुद को बचाने की कोशिश नहीं की; वह बस वहीं पड़ी रही, उस अपमान और सुख के मिश्रण को सहती रही।

जब वे चारों रुक गए, तो चैताली का पूरा शरीर पेशाब से लथपथ था। वह चिपचिपी और गंदी दिख रही थी, लेकिन उसकी आंखों में एक अजीब सा खालीपन था।

"चलो, अब निकल यहाँ से। तेरा काम खत्म हुआ," रवि ने उसे धक्का देते हुए कहा।

चैताली ने धीरे से अपनी आंखें खोलीं। उसने अपने बिखरे हुए बालों को पीछे किया और धीरे-धीरे उठी। उसने अपने कपड़े उठाए, जो कमरे के कोने में पड़े थे। उसने अपने शरीर को पोंछने की कोशिश नहीं की; उसने बस अपने कपड़े पहन लिए।

उसकी चाल में अब एक भारीपन था। उसने अपना पर्स उठाया और लड़कों की ओर देखा, जो अब आपस में हंस रहे थे और सिगरेट पी रहे थे।
"अगली बार और बेहतर सर्विस देना," अमित ने मजाक उड़ाया।

चैताली ने एक आखिरी बार उन चारों की ओर देखा और कमरे से बाहर निकल गई। जैसे ही वह हॉस्टल की गलियारे में पहुंची, उसने एक गहरी सांस ली। बाहर की ठंडी हवा उसके पसीने और पेशाब से भीगे शरीर को छू रही थी।

वह वापस अपनी उस दुनिया में जा रही थी जहाँ वह 'मिसेज घोष' थी, एक सम्मानित एग्जीक्यूटिव। लेकिन उसके शरीर पर मौजूद वे निशान और वह गंध उसे याद दिलाती रहेगी कि वह असल में कौन है और उसे क्या पसंद है। वह मुस्कुराई और अंधेरी रात में ओझल हो गई, अपने साथ उस रात की यादें और कुछ नोट लेकर।
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