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Adultery एक रंडी की दास्तान-The story of a corporate whore
#1
गुड़गांव के चिपचिपी गर्मी में, दोपहर के तीन बज रहे थे। वाटिका रियल एस्टेट के वातानुकूलित दफ्तर में भी चैताली घोष के माथे पर पसीने की बारीक बूंदें चमक रही थीं। चालीस पार की इस महिला का शरीर उम्र के साथ ढीला पड़ गया था, खास तौर पर उसकी मम्मे , जो ब्लाउज के नीचे भी अपनी बड़ी, ढीली गांठों को छिपा नहीं पा रही थी। एक संदूक जैसी मेज़ के पीछे बैठी, वह अपने मोटे-मोटे नाखूनों से कीबोर्ड पर थपथपा रही थी, आंखों में एक खालीपन था, जो अक्सर उन चेहरों पर दिखता है जो रोज़मर्रा की नीरसता में खो जाते हैं।
 
आज का दिन भी बाकी दिनों जैसा ही था। फोन की घंटी बजती,वह बेमन से उठाती, 'वाटिका रियल एस्टेट में आपका स्वागत है, मैं चैताली घोष बोल रही हूं,' उसकी आवाज़ में एक बनावटी मिठास होती। फिर ग्राहक को सेल्स टीम से जोड़ देती। यह उसकी दिनचर्या थी। लेकिन शाम ढलते ही, यह दिनचर्या एक अलग ही रंग ले लेती।
 
घड़ी की सुई पांच पर पहुंची। चैताली ने अपने कंप्यूटर को शटडाउन किया, एक लंबी सांस ली। यह सांस सिर्फ थकान की नहीं थी, बल्कि एक उम्मीद की भी थी। उसने अपने पर्स से एक छोटा सा कॉम्पैक्ट निकाला, अपनी मोटी उंगलियों से चेहरे पर लगे पाउडर को ठीक किया। उसकी बड़ी आंखें शीशे में खुद को देखती रहीं। वह जानती थी कि वह सुंदर नहीं थी, कभी नहीं थी। लेकिन आज रात, उसे सुंदरता की नहीं, कुछ और चीज़ की ज़रूरत थी।
 
दफ्तर से बाहर निकलते ही, गर्म हवा के झोंके ने उसे घेर लिया। उसने अपनी सूती साड़ी को कसकर पकड़ा। आज उसे साड़ी में नहीं रहना था। घर जाकर उसे बदलना था।
 
एक घंटे बाद, चैताली एमजी रोड के एक कोने पर खड़ी थी। अब वह साड़ी में नहीं थी। एक छोटी, तंग स्कर्ट, जो उसके घुटनों से ठीक ऊपर खत्म होती थी, और एक ढीला-ढाला टॉप, जो उसकी भारी मम्मे को बमुश्किल ढके हुए था। उसके बाल खुले हुए थे, बिखरे हुए, जैसे अभी-अभी हवा से जूझकर आए हों। उसने अपने होठों पर गहरा लाल लिपस्टिक लगाया था, जो उसकी उम्रदराज़ त्वचा पर थोड़ा अटपटा लग रहा था।
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#2
एक ऑटो रिक्शा उसके पास आकर रुका। ड्राइवर ने अपनी गर्दन बाहर निकालकर उसे देखा। उसकी आंखें, चैताली के शरीर पर टिकीं, एक पल के लिए ठहर गईं। चैताली ने एक हल्की, बनावटी मुस्कान दी।

"कहां चलोगी, मैडम?" ड्राइवर की आवाज़ में एक अजीब सी ललक थी।

"जहां ले जाना चाहो," चैताली ने धीमे से कहा, उसकी आवाज़ में एक थकी हुई सी मिठास थी।

ड्राइवर ने अपनी मूछों पर हाथ फेरा। "आजकल धंधा मंदा है, मैडम।"

"मंदा है तो क्या हुआ? आज तो होगा ही," चैताली ने थोड़ा आगे झुककर कहा, उसकी मम्मे  टॉप के नीचे और भी स्पष्ट दिख रही थी।

ड्राइवर ने एक गहरी सांस ली। "कितने लोग हो?"

"मैं अकेली ही काफी हूं," चैताली ने अपनी उंगलियों से उसके हाथ पर हल्का सा स्पर्श किया।

ड्राइवर ने एक पल सोचा, फिर दरवाजा खोला। "बैठो। आज का धंधा तुम्हारे साथ ही कर लेंगे।"

चैताली ऑटो में बैठ गई। ऑटो ने एक सुनसान गली में प्रवेश किया, जहां रात के अंधेरे में सिर्फ इक्का-दुक्का स्ट्रीट लाइटें जल रही थीं। ऑटो एक खाली प्लॉट के पास रुका। ड्राइवर ने इंजन बंद किया।

"यहां क्यों रुके?" चैताली ने पूछा, उसकी आवाज़ में थोड़ी घबराहट थी।

"अकेली जगह है। कोई देखेगा नहीं," ड्राइवर ने कहा, उसकी आंखें चमक रही थीं।

चैताली ने एक गहरी सांस ली। यह सब उसे पता था। उसने अपनी स्कर्ट को थोड़ा ऊपर खींचा। "तो बताओ, क्या चाहिए?"

ड्राइवर ने अपने पैंट की ज़िप खोली। "बस यही।"
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#3
चैताली ने उसके चेहरे को देखा। वह एक युवा लड़का था, शायद बीस-बाइस साल का, उसके चेहरे पर अभी भी मुंहासे थे। उसे लगा, यह तो कोई कॉलेज का छात्र होगा, जो ऑटो चलाकर पैसे कमाता होगा। उसे थोड़ी दया आई, लेकिन जल्दी ही उसने इस भावना को दबा दिया।

"पैसे?" चैताली ने पूछा।

"जितना बोलोगी," लड़के ने जल्दी से कहा।

"पांच सौ।"

लड़के ने बिना कुछ कहे अपनी जेब से नोटों का एक बंडल निकाला और उसमें से पांच सौ का एक नोट चैताली की ओर बढ़ा दिया। चैताली ने नोट ले लिया और उसे अपने पर्स में रख लिया।

"जल्दी करो," चैताली ने कहा।
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#4
लड़के ने धीरे-धीरे अपनी जींस की जिप खोली, उसके हाथ थोड़े कांप रहे थे। वहां की गर्म हवा ने उसकी त्वचा को छूते हुए उसे एक अजीब सी झनझनाहट महसूस कराई। जैसे ही उसने अपने अंदरूनी कपड़ों को हटाया, उसका लंड अचानक बाहर आ गया, जो अभी तक उत्तेजना से भरा हुआ था। वह औसत लंबाई और मोटाई का था, लेकिन अब पूरी तरह से सख्त हो चुका था, जिससे उसकी नसें साफ दिख रही थीं।

चैताली ने उसे देखा, फिर अपनी उंगलियों से उसे छुआ। लड़का कांप गया।

"क्या हुआ?" चैताली ने पूछा।

"कुछ नहीं," लड़के ने कहा, उसकी आवाज़ कांप रही थी।

चैताली ने एक लंबी सांस ली। उसकी आँखें बंद थीं, लेकिन उसके होंठों पर एक ऐसी थकान भरी मुस्कान थी जिसे वह अब छिपा नहीं पा रही थी। वह जानती थी कि आज फिर वही करना है जो वह रोज़ करती है। उसने अपने काले बालों को पीछे सरकाते हुए धीरे से अपने टॉप के निचले हिस्से को पकड़ा। कपड़े का मटेरियल उसकी उंगलियों के बीच से खिसकता हुआ महसूस हो रहा था। जैसे ही उसने टॉप को ऊपर उठाया, उसके भारी, ढीले मम्मे एक झटके के साथ बाहर आ गए। हवा का ठंडा स्पर्श उसके संवेदनशील निप्पलों पर चुभ गया, जो पहले से ही उभरे हुए थे। उसके गहरे भूरे निप्पल्स, जिन पर छोटे-छोटे दाने दिखाई दे रहे थे, अब पूरी तरह से खुले थे।

लड़का, जो अब तक बस देख रहा था, अचानक आगे बढ़ा। उसकी सांसें चैताली की त्वचा पर गर्माहट छोड़ रही थीं जब उसने अपना मुंह उसके बाएँ मम्मे पर टिका दिया। उसके होंठों ने निप्पल को चारों ओर से घेर लिया, और फिर एक तेज चूसने की आवाज़ के साथ उसने अपना मुँह कसकर बंद कर लिया। चैताली ने अपनी आँखें और ज़ोर से बंद कर लीं, उसकी भौंहें थोड़ी सिकुड़ गईं। यह वही पुरानी दिनचर्या थी - वह अनुभव जो उसके लिए अब मात्र एक यांत्रिक प्रक्रिया बन चुका था। पैसा। बस पैसा। वह यहाँ इसलिए नहीं थी क्योंकि उसे यह पसंद था, बल्कि इसलिए क्योंकि उसे इसकी ज़रूरत थी।

लेकिन आज... आज कुछ अलग सा लग रहा था। जब लड़के की जीभ उसके निप्पल के चारों ओर घूम रही थी, तो चैताली ने उसकी आँखों में झाँका। वहाँ एक अजीब सी मासूमियत थी - एक ऐसी भावना जिसे वह इस तरह के लोगों में कभी नहीं देखती थी। उसकी पलकें झपक रही थीं, और उसके होंठ थोड़े काँप रहे थे, जैसे कि वह पहली बार ऐसा कर रहा हो। चैताली के मन में एक विचार कौंधा - क्या यह वाकई उसका पहला अनुभव था? उसके मम्मे पर लड़के के हाथों का स्पर्श भी अजीब तरह से अनाड़ी सा था, जैसे वह नहीं जानता कि कितना दबाव डालना है। चैताली ने अपने होठों को दबाया। शायद आज का दिन उसके लिए बस पैसा कमाने से कुछ अधिक होगा।
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#5
फिर क्या हुआ?
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#6
चैताली की सांसें तेज हो रही थीं जब उसने अचानक अपना पूरा वजन लड़के के कंधों पर डाल दिया और धक्का देकर अलग कर दिया। "रुको," उसने कहा, अपनी सांसों को थोड़ा सँभालते हुए। उसकी उंगलियाँ अपने छोटे काले पर्स के अंदर तलाश करने लगीं, जब तक कि उन्हें वह चिकना, चमकदार पैकेट नहीं मिल गया जिसकी उसे तलाश थी।

"ये लो," उसने कहा, अपने दाँतों से प्लास्टिक रैपर को फाड़ते हुए, जिसकी आवाज़ ऑटो के अंदर की खामोशी में गूँज उठी। उसकी हथेली में चिकने रबर का छल्ला गर्माहट छोड़ रहा था जब उसने धीरे से लड़के के सख्त, नसों से उभरे हुए लंड को अपने हाथों में लिया। उसकी उंगलियों के नीचे उसकी धड़कन महसूस हो रही थी जब उसने कंडोम को सावधानी से रोल करते हुए नीचे की ओर खींचा, हर इंच को अपनी नर्म उंगलियों से सहलाते हुए।

चैताली ने अपनी स्कर्ट की चुन्नट को उठाते हुए एक लंबी सांस ली, जिससे उसकी नंगी जांघों की चमकती त्वचा ऑटो की डिम लाइट में झिलमिला उठी। वह ड्राइवर सीट पर पीछे की ओर लेट गई, अपने घुटनों को मोड़कर छत की तरफ उठाते हुए। "देखो मत," उसने हंसते हुए कहा जब लड़के की निगाहें उसके गीले, गुलाबी चूत की तरफ आकर्षित हो गईं, जो अब पूरी तरह से उजागर था, "बस... आओ।" उसने अपनी तर्जनी से लुभावना इशारा किया।

लड़का एक पल के लिए हिचकिचाया, उसकी आँखों में संदेह और इच्छा का मिश्रण था। "पक्का?" उसने पूछा, उसका स्वर भारी हो गया था।
"हाँ, अब और नहीं रुकना," चैताली ने जवाब दिया, अपनी एड़ियों से उसकी पीठ को खींचते हुए। जैसे ही वह निकट आया, उसने अपने हाथों से लड़के के कूल्हों को पकड़ा और उसे अपनी ओर खींचा, उसके गर्म, सख्त लंड का सिरा अपने नम चूत  के संपर्क में आते ही दोनों के होठों से एक साथ कराह निकली।

धीरे से दबाव डालते हुए, चैताली ने अपनी योनि की मांसपेशियों को आराम दिया जब लड़के का लंड धीरे-धीरे अंदर की ओर सरकने लगा। "ओह...," वह कराही, अपनी उंगलियों से उसकी पसलियों को पकड़ते हुए जब उसने पूरी तरह से अंदर प्रवेश किया।

लड़के ने शुरुआती धक्के धीरे-धीरे दिए, हर थ्रस्ट के साथ उसकी गति बढ़ाते हुए। चैताली ने अपना सिर पीछे की ओर झुकाया, उसकी लंबी, गीली चोटी ऑटो की सीट पर फैल गई। उसकी आँखें बंद हो गईं जब उसने अपने पैरों को लड़के की कमर के चारों ओर लपेट लिया, उसे और गहराई तक खींचते हुए। "और... और जोर से," वह हांफती हुई बोली, अपनी एड़ियों से उसकी पीठ को खरोंचने लगी।

लड़के के धक्कों का ताल तेज हो गया, ऑटो की सीट उनके वजन के नीचे चरमरा उठी। चैताली ने अपनी आँखें खोलीं और लड़के की पसीने से तर आँखों में देखा जब वह उसके अंदर चल रहा था। उसने अपने हाथों से उसके कंधों को पकड़ लिया, उसे और नीचे की ओर खींचते हुए जब अचानक लड़के का शरीर अकड़ गया। "मैं... मैं..." वह हांफता हुआ बोला, उसकी आँखें बंद हो गईं जब उसका वीर्य कंडोम में भरने लगा।

कुछ क्षणों के बाद, जब उसकी सांसें सामान्य होने लगीं, लड़के ने धीरे से अपना लंड बाहर निकाला, कंडोम से ढका हुआ उसका अंग अब नरम पड़ चुका था। उसने इसे बंद करते हुए एक मुड़ा हुआ गांठ बना ली और बाहर झाड़ियों में फेंक दिया।

चैताली ने बिना कुछ कहे अपनी स्कर्ट को सीधा किया, उसके हाथ थोड़ा कांप रहे थे। वह ऑटो की पिछली सीट पर सरक गई, अपने बालों को संवारते हुए। ड्राइवर ने इंजन स्टार्ट किया, और ऑटो धीरे से चल पड़ा, उनके पीछे धूल का एक बादल छोड़ता हुआ।
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#7
Nice story.

Waiting for next dear.
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#8
गुरुग्राम की चमचमाती वातिका रियल एस्टेट की लॉबी में दोपहर का वक्त था। चैताली घोष ने अपनी गहरी नीली साड़ी को सहजता से संभाला। साड़ी की किनारी पर सुनहरे तारों का बारीक काम था, जो उसके सांवले रंग पर खूब फब रहा था। उसकी 38-34-42 की सुडौल काया साड़ी के भीतर से भी स्पष्ट झलक रही थी, हर चाल में एक धीमी, लचकदार गति। रिसेप्शन डेस्क के पीछे बैठी वह अपने कंप्यूटर स्क्रीन पर नज़रें गड़ाए थी, लेकिन उसके मन में एक अजीब सी बेचैनी थी। बाहर की दुनिया में उसका एक दूसरा ही जीवन था, एक ऐसा जीवन जो इस वातानुकूलित दफ्तर की दीवारों के भीतर बिल्कुल छिपा हुआ था।

काँच के दरवाज़े से एक कूरियर वाला अंदर आया। उसके कंधे पर एक बड़ा सा बैग था, और हाथ में कागज़ात का एक पुलिंदा। उसकी आँखें लॉबी में घूमती हुई सीधे चैताली पर आकर टिक गईं। एक पल के लिए उसकी चाल धीमी हुई, फिर उसने एक मुस्कान दी, जिसमें कुछ ज़्यादा ही पहचान थी। चैताली ने सिर उठाया, उसकी आँखें कूरियर वाले की आँखों से मिलीं। एक ठंडी सिहरन उसकी रीढ़ की हड्डी में दौड़ गई। उस आदमी की आँखों में कुछ ऐसा था जो उसे बहुत अच्छी तरह से पता था। यह वही नज़र थी, वही पहचान जो उसे रात के अँधेरे में सड़कों पर मिलती थी।

कूरियर वाला डेस्क के पास आकर खड़ा हो गया। उसने कागज़ात आगे बढ़ाए। "मैडम, साइन कर दीजिए," उसकी आवाज़ में एक अजीब सी घुटी हुई सी पहचान थी।

चैताली ने पेन लिया, उसका हाथ हल्का सा काँपा। उसने ध्यान से कूरियर वाले के चेहरे को देखा। एक पल के लिए उसने खुद को दिलासा देने की कोशिश की कि यह उसकी कल्पना है, कि वह सिर्फ़ एक कूरियर वाला है। लेकिन उसकी आँखों में कोई शक नहीं था। वह उसे पहचान गया था।

"आपने मुझे पहचाना नहीं, मैडम?" कूरियर वाले ने अपनी आवाज़ को और धीमा किया, जैसे कोई राज़ खोल रहा हो। उसकी आँखों में एक शरारती चमक थी। "कल रात... सेक्टर चौदह की गली में। आपकी ड्रैस थोड़ी अलग थी, पर आपकी चाल... वो मैं कभी नहीं भूल सकता।"

चैताली के शरीर में खून जम सा गया। उसके कानों में गरम हवा का एक झोंका लगा, जैसे किसी ने उसके सबसे गहरे राज़ को सरेआम कर दिया हो। उसका चेहरा फीका पड़ गया। उसने पेन मेज़ पर रखा।

"आप... आप क्या कह रहे हैं?" उसकी आवाज़ फुसफुसाहट में बदल गई, इतनी धीमी कि वह खुद भी मुश्किल से सुन पाई।

कूरियर वाला थोड़ा और झुक गया, उसकी आँखों में एक भूखी चमक थी। "मैं जानता हूँ, मैडम। आप बहुत ख़ूबसूरत हैं। और आज आप साड़ी में तो और भी गज़ब ढा रही हैं।" उसने अपनी आवाज़ में एक हल्की सी फुर्ती लाई, "आज रात का इंतज़ार क्यों करना? यहाँ भी तो हो सकता है, नहीं?"
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#9
"मतलब साफ़ है, मैडम," कूरियर वाला मुस्कुराया, उसके दाँत चमक रहे थे। "मेने रात में आपका रेट पूछा था, याद है? आज मैं आपको एक ख़ास डील दे रहा हूँ। अभी, यहीं। काम के बाद, या काम के दौरान... आपकी मर्ज़ी।" उसकी नज़रें चैताली के भरे हुए वक्ष पर टिक गईं, फिर उसकी कमर पर, जो साड़ी के भीतर से भी एक आकर्षक वक्र बना रही थी।

चैताली की आँखें दहशत से फैल गईं। वह चारों ओर देखने लगी। शुक्र है कि लॉबी में कोई और नहीं था। उसकी ज़िंदगी एक ऐसे चौराहे पर खड़ी थी जहाँ से कोई वापसी नहीं थी। अगर यह आदमी हंगामा कर देता, तो उसकी नौकरी, उसकी इज़्ज़त, सब कुछ मिट्टी में मिल जाता। उसके बेटे आदित्य की पढ़ाई, घर का खर्च, सब कुछ इसी नौकरी पर टिका था। और आदित्य... वह उसका बेटा कम और उसका बिज़नेस पार्टनर ज़्यादा था। वही तो उसे रात के अँधेरे में धकेलता था, "माँ, आज कम कमाई हुई है।" उसकी आँखों में एक पल के लिए आदित्य का चेहरा घूम गया, फिर उस भयावह वास्तविकता का डर जिसने उसे जकड़ लिया था।

"यहाँ नहीं," चैताली ने फुसफुसाया, जैसे उसकी आवाज़ उसके गले में फँस गई हो। "यह दफ़्तर है।"

"तो फिर कहाँ?" कूरियर वाला अपनी जगह से नहीं हिला। उसकी आँखों में दृढ़ता थी, एक शिकारी की नज़र। "मुझे पता है यहाँ खाली कमरे होते हैं। आपको पता है, मैडम। आप तो यहाँ काम करती हैं।"

चैताली ने एक गहरी साँस ली, जैसे हवा उसके फेफड़ों में पहुँच ही नहीं रही थी। उसे पता था कि उसे क्या करना होगा। यह उसकी नियति थी। उसकी ज़िंदगी एक ऐसी दलदल बन चुकी थी जहाँ से निकलने का कोई रास्ता नहीं था। उसने अपनी पलकें झुकाईं, उसकी आँखों में एक अजीब सी हार थी।

"ठीक है," उसने कहा, उसकी आवाज़ इतनी धीमी थी कि कूरियर वाले को शायद झुकना पड़ा उसे सुनने के लिए। "लेकिन जल्दी। और किसी को पता नहीं चलना चाहिए।"

कूरियर वाले के चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान फैल गई। उसकी आँखों में विजय की चमक थी। "ज़रूर, मैडम। आप जैसा कहें।"

चैताली अपनी कुर्सी से उठी। उसकी साड़ी की सिलवटें उसके शरीर पर हल्की सी सरसराहट पैदा कर रही थीं। उसने अपने बालों को पीछे धकेला, उसके हाथ हल्के से काँप रहे थे। उसने अपने कंप्यूटर को स्लीप मोड पर डाला, जैसे यह सिर्फ़ एक सामान्य विराम था। उसने लिफ़्ट की ओर इशारा किया।

"अंदर आओ," उसने कहा, उसकी आवाज़ अब थोड़ी स्थिर थी, लेकिन उसमें एक अजीब सी कठोरता थी, जैसे वह खुद को किसी चीज़ के लिए तैयार कर रही थी।

कूरियर वाला उसके पीछे-पीछे चला। लिफ़्ट के भीतर की चुप्पी असहनीय थी। चैताली ने अपनी नज़रें लिफ़्ट के दरवाज़े पर टिका दीं, जैसे वह किसी और दुनिया में जाने वाली हो। उसकी साँसें अभी भी तेज़ थीं, लेकिन उसने खुद को शांत करने की कोशिश की। यह सब उसके लिए नया नहीं था, बस जगह और समय गलत थे।

लिफ़्ट छठी मंज़िल पर रुकी। दरवाज़े खुले, और चैताली बाहर निकली। यह मंज़िल आमतौर पर खाली रहती थी, क्योंकि यहाँ नए एक्सटेंशन के लिए जगह बनाई गई थी। गलियारा शांत और अँधेरा था, केवल इमरजेंसी लाइट्स की हल्की रोशनी थी। हवा में पेंट और नए फ़र्नीचर की हल्की गंध थी।

"इधर आओ," चैताली ने फुसफुसाया, एक कोने की ओर इशारा करते हुए जहाँ एक दरवाज़ा था। उस दरवाज़े पर 'प्रोजेक्ट फ़्यूचर' का साइन लगा था, लेकिन भीतर कोई काम नहीं चल रहा था। यह एक एक्सेस-कंट्रोल्ड कमरा था, जिसका कार्ड उसके पास था।

उसने अपना एक्सेस कार्ड निकाला और दरवाज़े पर स्वाइप किया। एक हल्की बीप हुई और दरवाज़ा खुला। भीतर एक बड़ा, खाली कमरा था। बीच में एक बड़ी, साफ़ मेज़ रखी थी, जिस पर अभी कोई कंप्यूटर या कागज़ात नहीं थे। कमरे में हल्की सी रोशनी थी, जो खिड़की से छनकर आ रही थी। हवा ठंडी थी, और एक अजीब सी खामोशी थी जो चैताली के दिल की धड़कनों को और तेज़ कर रही थी।

कूरियर वाला कमरे में दाखिल हुआ, उसकी आँखें चमक रही थीं। उसने दरवाज़ा बंद कर दिया, जिससे एक हल्की सी क्लिक की आवाज़ आई, जो चैताली के कानों में हथौड़े की तरह गूँजी।

"वाह," उसने कहा, उसकी आवाज़ में एक अजीब सी उत्तेजना थी। "यह तो ख़ास जगह है। कोई नहीं आएगा यहाँ।"

चैताली ने अपनी साड़ी के पल्लू को कसकर पकड़ा। उसकी आँखों में एक पल के लिए डर, फिर एक अजीब सी बेबसी दिखाई दी। उसने अपनी नज़रें मेज़ पर डालीं, जो इतनी साफ़ थी, इतनी निर्दोष। उस पर अब एक दाग़ लगने वाला था।
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#10
"जल्दी," उसने कहा, उसकी आवाज़ में एक आदेश था, लेकिन भीतर से वह काँप रही थी।

कूरियर वाला मुस्कुराया। उसने अपना कूरियर बैग ज़मीन पर पटका। उसकी आँखों में अब कोई शर्म नहीं थी, बस एक भूखी वासना थी। वह चैताली की ओर बढ़ा।

"तो मैडम, शुरू करें?" उसने चैताली के पास आकर उसके कंधे पर हाथ रखा। चैताली के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई, लेकिन उसने खुद को पीछे नहीं खींचा। यह उसका काम था, उसकी मजबूरी।

कूरियर वाले ने चैताली के कंधे पर हाथ फेरा, फिर धीरे से उसकी साड़ी के पल्लू को एक तरफ़ किया। चैताली ने अपनी पलकें झुकाईं। उसने अपनी नज़रें ज़मीन पर गड़ा दीं, जैसे वह इस पल को जी ही नहीं रही थी।

कूरियर वाला उसकी साड़ी के पल्लू को धीरे-धीरे उसके शरीर से हटाता गया। चैताली ने अपने हाथों को कसकर बाँध लिया, जैसे वह अपनी इज़्ज़त को बचाने की कोशिश कर रही हो, जो पहले ही नीलाम हो चुकी थी। साड़ी का पल्लू उसके वक्ष से सरका, फिर उसकी कमर से। उसका ब्लाउज़ और पेटीकोट अब स्पष्ट दिख रहे थे। कूरियर वाले की आँखें उसकी भरी हुई छाती पर टिक गईं।

"क्या माल है, मैडम," उसने फुसफुसाया, उसकी आवाज़ में एक गहरी इच्छा थी। चैताली के शरीर में एक अजीब सी गर्मी दौड़ गई, जो डर और वासना का एक मिला-जुला एहसास था।

उसने चैताली को अपनी ओर खींचा। चैताली ने कोई विरोध नहीं किया। उसकी साँसें तेज़ हो गईं। कूरियर वाले ने उसके होठों पर अपने होठ रख दिए। एक तेज़, चुंबन। चैताली ने अपनी आँखें बंद कर लीं। उसके मुँह में कूरियर वाले की साँसों की गर्मी महसूस हुई, उसके होठों का खुरदुरापन।

उसने अपना मुँह चैताली के मुँह से हटाया, उसकी साँसें तेज़ थीं। उसने चैताली की साड़ी को उसकी कमर से नीचे सरकाना शुरू किया। रेशमी कपड़ा ज़मीन पर ढेर हो गया। चैताली अब सिर्फ़ ब्लाउज़ और पेटीकोट में थी। उसकी साँसें अनियमित हो गईं।

कूरियर वाला अपनी पैंट की ज़िप खोलने लगा। उसकी आँखें चैताली के शरीर पर टिकी थीं, हर वक्र को निहार रही थीं। उसने अपनी पैंट नीचे की। उसका कड़ा, मोटा लन्ड बाहर निकला, गुलाबी और उत्तेजित। चैताली ने एक पल के लिए उस पर नज़र डाली, फिर अपनी नज़रें हटा लीं। उसे यह सब देखना पड़ता था, हर रात।

कूरियर वाला लड़का धीरे-धीरे चैताली के करीब आया। उसने अपने बड़े हाथों से चैताली के ब्लाउज़ के हुकों को खोलना शुरू किया। उसकी उंगलियाँ बड़ी ही कुशलता से काम कर रही थीं, एक के बाद एक हुक आवाज़ करते हुए खुलते गए। जैसे ही आखिरी हुक खुला, चैताली का ब्लाउज़ धीरे से खुल गया, और उसकी लेस वाली ब्रा का नज़ारा सामने आया।

कूरियर वाले की सांसें तेज़ हो गईं जब उसने देखा कि चैताली के भरे हुए मम्मे ब्रा के कपड़े से बाहर निकलने को बेताब हैं। उसने धीरे से ब्रा के कपड़े को नीचे खिसकाया, और चैताली के बोबा पूरी तरह से बाहर आ गए। उसकी गहरे भूरे रंग की निपल्स पहले से ही कड़क हो चुकी थीं, मानो वे इस पल का बेसब्री से इंतज़ार कर रही हों।

कूरियर वाले ने अपनी उंगलियों को धीरे-धीरे चैताली के निपल्स पर घुमाया, पहले एक पर, फिर दूसरे पर। फिर अचानक उसने अपने दोनों हाथों से उसके स्तनों को जोर से भर लिया, उन्हें अपनी मुट्ठियों में नचाते हुए। चैताली की एक हल्की सी कराह निकल गई जब उसने महसूस किया कि कूरियर वाला कितनी मजबूती से उसे पकड़े हुए है।

"आह..." चैताली के मुँह से एक धीमी आवाज़ निकली। यह दर्द या सुख, कुछ भी हो सकता था।
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#11
कूरियर वाला उसे मेज़ की ओर ले गया। चैताली ने मेज़ पर सहारा लिया। उसकी कमर मेज़ के किनारे से टकराई। कूरियर वाले ने उसे धीरे से मेज़ पर धकेला। चैताली मेज़ पर लेट गई, उसकी साड़ी ज़मीन पर फैली हुई थी, एक नीले रंग का बादल।

कूरियर वाला उसके ऊपर आ गया। उसके शरीर का वज़न चैताली पर पड़ा। चैताली ने अपनी आँखें बंद कर लीं। उसने अपने हाथ मेज़ के किनारों पर टिका दिए। कूरियर वाले ने उसके पेटीकोट की डोरी खोली और उसे नीचे सरका दिया। चैताली अब पूरी तरह नग्न थी, सिर्फ़ उसकी ब्रा उसके मम्मो पर टिकी थी।

कूरियर वाला अचानक आगे बढ़ा, उसकी उंगलियाँ चैताली के कंधे से होते हुए उसकी पीठ तक पहुँच गईं। एक तेज़ झटके के साथ उसने ब्रा का फास्टनर खोल दिया, जिससे कपड़ा ढीला होकर उसके शरीर से सरकने लगा। उसके हाथों ने तेज़ी से काम किया - एक हाथ से उसने ब्रा को नीचे खींचा जबकि दूसरे हाथ ने चैताली के कंधों को पकड़कर उसे अपनी ओर खींच लिया। ब्रा के कपड़े और तनाव के बीच की खींचतान में, अचानक ही कपड़ा फिसलकर उसके शरीर से अलग हो गया।

चैताली के मम्मे अब पूरी तरह से खुले हुए थे, जो हवा के हल्के झोंकों से संवेदनशील हो रहे थे। कूरियर वाले ने तुरंत अपना मुँह आगे बढ़ाया, उसने एक हाथ से चैताली के पीछे से उसे अपनी ओर दबाया जबकि दूसरे हाथ ने उसके मम्मे को पकड़ लिया। उसने चैताली के निप्पल को अपने मुँह में भर लिया, जैसे कोई भूखा शिशु अपनी माँ का दूध पीने के लिए लालायित होता है। उसकी जीभ ने निप्पल के चारों ओर चक्कर काटा, फिर उसे अपने दाँतों के बीच हल्का सा दबाया जिससे चैताली के शरीर में एक तीखी सिहरन दौड़ गई। उसके पेट के निचले हिस्से में एक अजीब सी गर्माहट फैलने लगी, मानो कोई अदृश्य रस्सी उसके भीतर खींची जा रही हो।

कूरियर वाला उसके पेट पर आया, फिर उसकी जाँघों पर। उसकी उंगलियाँ चैताली की चूत पर फिलीं। चैताली की चूत पहले से ही गीली थी, डर और उत्तेजना के कारण। कूरियर वाले ने अपनी उंगली उसकी चूत के भीतर डाली, फिर बाहर निकाली। चैताली के मुँह से एक धीमी कराह निकली।

"कितनी गीली हो तुम, मैडम," कूरियर वाले ने फुसफुसाया, उसकी आवाज़ में एक अजीब सी जीत थी।

उसने अपनी लंबी, पतली उंगलियों को चैताली की गर्म व नम चूत के भीतर धीरे-धीरे घुसाया, फिर बाहर निकाला, यह क्रम वह बार-बार दोहरा रहा था। हर बार जब उसकी उंगलियाँ अंदर जातीं, चैताली के संवेदनशील गुलाबी होंठों पर एक सिहरन दौड़ जाती, जिससे उसके नाजुक अंग काँप उठते। वह अपनी दूसरी हथेली से चैताली की जांघों को सहलाता हुआ ऊपर की ओर बढ़ा, उसके कोमल योनि-होंठों को अपने अंगूठे से हल्के से दबाते हुए।

चैताली के शरीर में एक अजीब सी गर्म लहर फैल रही थी, जो धीरे-धीरे उसके पेट के निचले हिस्से से शुरू होकर उसके सीने तक पहुँच गई। वह इस अनुभूति को रोकना चाहती थी, परंतु उसका शरीर उसके नियंत्रण से बाहर होता जा रहा था। उसकी आँखें तंग बंद थीं, पलकें तेजी से फड़फड़ा रही थीं, और उसके होंठ हल्के से खुले हुए थे, जिससे अनियंत्रित साँसों की आवाज़ निकल रही थी।

तभी उस कूरियर वाले ने, जो अब तक केवल एक उंगली का प्रयोग कर रहा था, अचानक अपनी दूसरी उंगली को भी चैताली की तंग चूत के भीतर धकेल दिया। दोनों उंगलियाँ अब उसकी गर्म, नम गुफा में गहराई तक घुस चुकी थीं, जैसे कोई अन्वेषक किसी गुप्त मार्ग की खोज में हो। वह अपनी उंगलियों को भीतर घुमाता, मरोड़ता, कभी धीरे से तो कभी जोरदार ढंग से, जिससे चैताली के भीतर एक विचित्र सी खुजली उत्पन्न हो रही थी।

अचानक, जब उसकी उंगलियों ने चैताली के भीतर किसी विशेष बिंदु को छुआ, तो उसके पूरे शरीर में एक तीव्र झटका लगा। चैताली की पीठ अकड़कर धनुष के समान हो गई, और वह मेज़ पर थोड़ा ऊपर उठ आई, जैसे कोई अदृश्य रस्सी उसे खींच रही हो। उसके हाथों ने मेज़ के किनारे को जकड़ लिया, और उसके पैरों की उंगलियाँ तन गईं, मानो वह इस तीव्र आनंद की लहर से खुद को बचाने की कोशिश कर रही हो।

"आह... उम्म..." चैताली के मुँह से आवाज़ें निकल रही थीं, जो अब दर्द से ज़्यादा सुख की थीं।

कूरियर वाले ने धीरे-धीरे अपनी उँगलियों को बाहर निकाला। उसकी लम्बी, पतली उँगलियाँ हवा में थोड़ी काँप रही थीं, और उन पर चैताली का गाढ़ा, चमकदार स्राव चिपचिपा होकर लटक रहा था। उसने अपनी हथेली को घुमाया, सूरज की रोशनी में उस चिकने पदार्थ को देखते हुए, फिर अचानक अपनी उँगलियों को अपने चेहरे के पास ले आया। उसकी नाक के छिद्र फैल गए जैसे ही उसने एक लम्बी, गहरी साँस खींची - साँस इतनी गहरी कि उसका पूरा छाती फूल गया।

उसकी आँखें, जो पलक झपकाने से पहले तक सामान्य लग रही थीं, अचानक एक अजीब सी जानवरों वाली चमक से भर गईं। उसके पुतलियाँ फैल गईं, और उसके होठों के कोने एक अजीब सी मुस्कान में खिंच गए।

"यह... यह बहुत ही अच्छी गंध है," उसने धीमी, थरथराती आवाज़ में फुसफुसाया, जैसे किसी पवित्र रहस्य को उजागर कर रहा हो। उसकी आवाज़ में एक अजीब सी लालसा और पागलपन का मिश्रण था, जैसे वह इस गंध से पूरी तरह मंत्रमुग्ध हो चुका हो।
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#12
फिर उसने अपना मोटा, गर्म लन्ड धीरे से चैताली की नम चूत के प्रवेश द्वार पर टिका दिया। उसके लन्ड की नसें फड़क रही थीं, और चैताली की चूत के होंठों को महसूस करते ही उसका शरीर एक अजीब सी बेचैनी से भर गया। चैताली की चूत के गुलाबी होंठ उसके लन्ड को चूम रहे थे, जैसे उसे अंदर बुला रहे हों। चैताली का शरीर एक अजीब सी उत्तेजना से भर रहा था - वह चाहती थी कि वह उसे भीतर डाले, पर साथ ही उसके मन में एक डर भी था कि कहीं यह ज्यादा दर्दनाक न हो जाए।

अचानक कूरियर वाले ने एक गहरा, मजबूत धक्का दिया। उसका मोटा लन्ड चैताली की चूत की तंग गुफा में सरक गया, जैसे कोई तलवार मांस में घुस रही हो। चैताली के मुँह से एक हल्की सी चीख निकली - उसका शरीर इस अचानक आक्रमण के लिए तैयार नहीं था। उसकी चूत की मांसपेशियाँ तन गईं, और उसका लन्ड चैताली के भीतर कसकर फँस गया, जैसे कोई चट्टानी गुफा अपने भीतर घुसे शिकार को जकड़ ले। चैताली ने अपने दाँत भींच लिए।

फिर कूरियर वाले ने धीरे-धीरे अपने धक्के शुरू किए। हर धक्के के साथ, चैताली के शरीर में एक अजीब सी गर्मी फैल रही थी, जैसे कोई गर्म तेल उसकी नसों में बह रहा हो। उसका मोटा लन्ड चैताली की चूत की कोमल दीवारों को रगड़ रहा था, हर आगे-पीछे के साथ एक नई उत्तेजना पैदा कर रहा था। चैताली का शरीर अब उस रुकावट को स्वीकार करने लगा था, और हर धक्के के साथ उसकी चूत की मांसपेशियाँ थोड़ी और ढीली हो रही थीं। उसके नितंबों से पसीना बह रहा था, और उसकी साँसें तेज हो चुकी थीं - उसका शरीर अब इस आक्रमण का आनंद लेने लगा था।

"अहह... उहह..." चैताली के मुँह से आवाज़ें निकल रही थीं।

कूरियर वाले ने अपनी गति बढ़ाई। उसके धक्के तेज़ और गहरे होते गए। चैताली के मम्मे उछल रहे थे, और उसके बाल मेज़ पर फैले हुए थे। उसकी आँखें बंद थीं, और उसके होंठ खुले हुए थे।

"और तेज़... आह..." चैताली की आवाज़ में एक अजीब सी बेबसी थी।

कूरियर वाले ने उसकी बात सुनी, और उसने अपनी गति और तेज़ कर दी। उसके धक्के इतने तेज़ थे कि मेज़ हल्की सी हिल रही थी। चैताली के शरीर में एक अजीब सी ऐंठन हो रही थी, और उसे लगा जैसे वह किसी और दुनिया में जा रही हो।

"आहहह... हाँ... हाँ..." चैताली के मुँह से आवाज़ें निकल रही थीं, जो अब बेकाबू थीं।

कूरियर वाले ने एक गहरा धक्का दिया, और उसका शरीर चैताली के शरीर पर गिर गया। उसके लन्ड ने चैताली की चूत के भीतर एक अजीब सी गर्माहट फैलाई। चैताली के शरीर में एक तेज़ झटका लगा, और उसके शरीर से एक गाढ़ा, चिपचिपा द्रव निकला। वह थरथरा गई, और उसके शरीर में एक अजीब सी शांति फैल गई।

कूरियर वाला चैताली के ऊपर लेटा रहा, उसकी साँसें तेज़ थीं। चैताली ने अपनी आँखें खोलीं, और उसने कूरियर वाले के चेहरे को देखा। उसकी आँखों में एक अजीब सी संतुष्टि थी।

"वाह, मैडम," उसने फुसफुसाया। "आप तो कमाल की हैं।"
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#13
फिर क्या हुआ?
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#14
hot story.. please update soon
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#15
चैताली ने कोई जवाब नहीं दिया। वह अभी भी अपनी साँसों को सामान्य करने की कोशिश कर रही थी। उसका शरीर थक गया था, लेकिन उसके मन में एक अजीब सी शांति थी।

कूरियर वाला धीरे से अपना वजन उठाता हुआ चैताली के ऊपर से पीछे हटा। उसके मांसल शरीर से टपकता पसीना चैताली की नग्न देह पर गिर रहा था। उसने अपना गर्म, सूजा हुआ लंड धीरे से चैताली की तंग चूत से बाहर खींचा, जिससे एक हवा का झोंका दोनों के बीच से गुजरा। चैताली की गुलाबी चूत से एक चमकदार, चिपचिपा द्रव धीरे-धीरे बाहर निकल रहा था, जो उसकी जांघों पर फैलता जा रहा था।

कूरियर वाले का मोटा लंड अभी भी कड़ा और सूजा हुआ था, जिस पर चैताली के अंदरूनी तरल पदार्थ की एक चमकदार परत जमी हुई थी। उसने अपनी उंगलियों से धीरे से अपने लंड को साफ किया, जबकि चैताली की तेज सांसें अभी भी कम नहीं हुई थीं।

चैताली अभी भी मेज पर फैली हुई थी, उसका पूरा शरीर नग्न और चमकदार पसीने से भीगा हुआ था। उसके पेट और जांघों पर कूरियर वाले के गाढ़े वीर्य की परतें सूख रही थीं, जिसकी तीखी गंध कमरे में फैल रही थी। उसके भारी मम्मे अभी भी उसकी तेज सांसों के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे।

"एक और बार, मैडम?" कूरियर वाले ने धीमी, पर गहरी आवाज में पूछा, जबकि उसकी भूरी आंखों में अभी भी बुझने का नाम न लेने वाली वासना साफ झलक रही थी। उसने अपना अभी भी गीला लंड अपनी हथेली में लपेट लिया, जिससे यह स्पष्ट हो रहा था कि वह दोबारा शुरू करने के लिए तैयार है।

चैताली ने अपनी आँखें बंद कर लीं। उसे पता था कि उसे मना नहीं करना चाहिए। यह उसकी मजबूरी थी। उसने धीरे से सिर हिलाया।
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#16
दुबारा किया या नहीं?
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#17
कूरियर बॉय की आँखों में एक अजीब सी चमक तब दिखाई दी जब उसने दूसरे राउंड के लिए चैताली के साथ डॉगी स्टाइल में सेक्स करने की योजना बनाई। उसकी आँखों की यह चमक सिर्फ कामुकता नहीं थी, बल्कि एक प्रकार का जुनून था जो उसे पहले से ही उत्तेजित कर रहा था। उसके दिमाग में पहले से ही तस्वीरें चल रही थीं - कैसे वह चैताली के मुलायम शरीर को अपने नीचे दबाएगा, कैसे उसकी गोलाईयों को अपने हाथों से पकड़कर जमकर धकेलेगा, और कैसे उसकी तंग चूत में अपना कड़ा लंड डालकर दोनों को एक साथ मज़ा आएगा।

जैसे ही कूरियर वाला मुस्कुराया, उसके होंठों पर एक दुष्ट भाव आया जो उसके मन में चल रही गंदी कल्पनाओं को स्पष्ट कर देता था। उसने चैताली को एक फुर्तीले हरकत में, अपने मजबूत हाथों से उसे पलट दिया। चैताली का शरीर मेज़ पर गिरा, और अब वह पेट के बल लेटी हुई थी, उसका पूरा शरीर मेज़ से चिपका हुआ था। उसकी कमर ऊपर की तरफ उठी हुई थी, जैसे कोई शिकारी अपने शिकार पर कूदने से पहले पूरी तरह से तैयार होता है - सटीक, नियंत्रित, और पूरी तरह से आत्मविश्वास से भरा हुआ।

कूरियर वाले के पिछले राउंड के वीर्य की गंध अभी भी चैताली की पीठ पर मौजूद थी, एक मीठी-सी गंध जो उनकी पिछली मस्ती की याद दिला रही थी। यह गंध उन दोनों के लिए एक प्रकार का उत्तेजक बन चुका था। उसने अपने मजबूत हाथों से चैताली की कमर को पकड़ा, और धीरे से उसे और ऊपर की तरफ खींचा, जिससे चैताली के गोल-मटोल चुत्तड़ और भी ऊपर उठ गए। उसकी तंग चूत पूरी तरह से खुली हुई और दिखाई दे रही थी, जैसे उसने खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया हो - एक आमंत्रण जिसे कूरियर वाला नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता था।

कूरियर वाले की साँसें तेज हो गईं जब उसने चैताली के उस हिस्से को देखा जो अब पूरी तरह उसके कब्ज़े में था। उसकी उँगलियाँ चैताली के नितंबों पर नाचने लगीं, हर स्पर्श के साथ उत्तेजना बढ़ती जा रही थी। उसकी उंगलियों के निशान चैताली की त्वचा पर पड़ रहे थे, और हर छूआना उनके बीच की गर्मी को और बढ़ा रहा था। उसने अपने दूसरे हाथ से चैताली के बालों को पकड़ा, उसे थोड़ा पीछे की तरफ खींचा, जिससे उसकी पीठ का आर्च और भी गहरा हो गया - एक सही मुद्रा जिससे वह उसे और गहराई से ले सके।

"आज तुम मेरी कुतिया हो," कूरियर वाला फुसफुसाया।

चैताली ने कोई जवाब नहीं दिया। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं, और अपने दाँत भींच लिए।
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#18
कूरियर वाले ने अपना लन्ड चैताली की चूत के प्रवेश द्वार पर रखा। उसका लन्ड चैताली की चूत के होंठों को सहला रहा था, और चैताली के शरीर में एक अजीब सी बेचैनी फैल गई।

कूरियर वाले ने एक धक्का दिया। उसका लन्ड चैताली की चूत के भीतर सरक गया। इस बार, चैताली को उतनी पीड़ा नहीं हुई, क्योंकि उसकी चूत पहले से ही गीली थी। उसका लन्ड चैताली के भीतर कसकर फँस गया।

कूरियर वाले ने धीरे-धीरे अपने धक्के शुरू किए। हर धक्के के साथ, चैताली के शरीर में एक अजीब सी गर्मी फैल रही थी। उसका लन्ड चैताली की चूत की दीवारों को रगड़ रहा था, और चैताली के शरीर में एक अजीब सी उत्तेजना फैल रही थी।

"अहह... उहह..." चैताली के मुँह से आवाज़ें निकल रही थीं, जो अब दर्द से ज़्यादा सुख की थीं।

कूरियर वाले ने अपनी गति बढ़ाई। उसके धक्के तेज़ और गहरे होते गए। चैताली के चुत्तड़ हिल रहे थे, और उसके बाल मेज़ पर फैले हुए थे। उसकी आँखें बंद थीं, और उसके होंठ खुले हुए थे।

"और तेज़... आह..." चैताली की आवाज़ में एक अजीब सी बेबसी थी।

कूरियर वाले ने अपनी गति और तेज़ कर दी। उसके धक्के इतने तेज़ थे कि मेज़ हल्की सी हिल रही थी। चैताली के शरीर में एक अजीब सी ऐंठन हो रही थी, और उसे लगा जैसे वह किसी और दुनिया में जा रही हो।

"आहहह... हाँ... हाँ..." चैताली के मुँह से आवाज़ें निकल रही थीं, जो अब बेकाबू थीं।

कूरियर वाले ने एक गहरा धक्का दिया, और उसका शरीर चैताली के शरीर पर गिर गया। उसके लन्ड ने चैताली की चूत के भीतर दोबारा अपना पानी छोड़ दिया। चैताली थरथरा गई, और उसके शरीर में एक अजीब सी शांति फैल गई।

"वाह, मैडम," उसने फुसफुसाया। "आप तो कमाल की हैं।"

चैताली ने कोई जवाब नहीं दिया। वह अभी भी अपनी साँसों को सामान्य करने की कोशिश कर रही थी। उसका शरीर थक गया था, लेकिन उसके मन में एक अजीब सी शांति थी।

कूरियर वाला धीरे से चैताली के ऊपर से हटा। उसने अपने लन्ड को चैताली की चूत से बाहर निकाला।

कूरियर वाले ने अपने लन्ड को चैताली के ब्लाउज से साफ़ किया, फिर उसने अपनी पैंट ऊपर की। कूरियर वाले ने अपनी शर्ट पहनी, और फिर अपना कूरियर बैग उठाया। उसने एक बार फिर चैताली की ओर देखा।

"अगली बार, मैडम," उसने मुस्कुराया। "मैं आपको एक और डील दूँगा।"

चैताली ने कोई जवाब नहीं दिया। पेट के बल लेटी हुई थी, उसकी गांड हवा में थी, उसकी आँखें बंद थीं। कूरियर वाला कमरे से बाहर निकल गया, और दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ आई।

चैताली धीरे से मेज़ से उतरी। उसका शरीर दर्द कर रहा था, लेकिन उसके मन में एक अजीब सी शांति थी। उसने अपनी साड़ी उठाई, और उसे पहनने लगी। उसके शरीर पर कूरियर वाले के वीर्य की गंध थी, और उसके होंठों पर उसके चुंबन का स्वाद।

उसने अपने कपड़े पहने, और फिर उसने अपने बालों को सँवारा। उसने एक बार फिर कमरे को देखा। मेज़ पर अभी भी उसके शरीर के निशान थे, और हवा में एक अजीब सी गंध थी।

चैताली कमरे से बाहर निकली, और उसने दरवाज़ा बंद कर दिया। वह लिफ़्ट की ओर बढ़ी, और फिर नीचे उतर गई। लॉबी में पहुँचकर, उसने अपनी डेस्क पर बैठी। उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे, लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सी उदासी थी।

उसने अपने कंप्यूटर को उठाया, और फिर अपने काम में लग गई। उसके मन में अभी भी कूरियर वाले की आवाज़ गूँज रही थी, "आप तो कमाल की हैं।"

चैताली ने एक गहरी साँस ली, और फिर उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। उसे पता था कि यह उसकी ज़िंदगी का एक हिस्सा था, और उसे इसे स्वीकार करना होगा। वह एक वेश्या थी, और उसे इसे स्वीकार करना होगा।
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#19
वाटिका रियल एस्टेट के विशाल, वातानुकूलित कार्यालय में, चैताली घोष अपने डेस्क पर झुकी हुई थी। उसकी उंगलियाँ कीबोर्ड पर तेजी से नाच रही थीं, एक्सेल शीट्स पर अंक उछल रहे थे। दोपहर के तीन बज रहे थे, और सूरज की तेज किरणें खिड़की से छनकर आ रही थीं, लेकिन चैताली का ध्यान सिर्फ़ मॉनिटर पर था। उसकी सांवली रंगत पसीने की हल्की-हल्की बूंदों से चमक रही थी, जो वातानुकूलन के बावजूद उसके माथे पर उभर आई थीं। आज का दिन विशेष रूप से व्यस्त था, एक नई परियोजना के लिए सीआरएम रिपोर्ट तैयार करनी थी।

अश्वेत रंग की साड़ी उसके शरीर पर कसकर लिपटी थी, जो उसकी 38-34-40 की सुडौल काया को स्पष्ट रूप से दर्शा रही थी। उसकी आँखें, जो आमतौर पर कुछ थकी हुई और बेजान लगती थीं, अब काम के बोझ से लाल थीं। उसने एक गहरी साँस ली, कुर्सी पर पीछे झुकते हुए अपनी कमर सीधी की।

"चैताली, रिपोर्ट तैयार है?" एक तेज आवाज कमरे में गूँजी। यह उसके बॉस, मिस्टर वर्मा थे, जो अपने चेहरे पर हमेशा एक सख्त भाव लिए रहते थे।

चैताली ने तुरंत सीधा होकर जवाब दिया, "बस पाँच मिनट सर, अंतिम आंकड़े दर्ज कर रही हूँ।"

मिस्टर वर्मा ने अपने चश्मे को ठीक किया। "हमें यह शाम तक बोर्ड को दिखानी है।"

"हो जाएगी सर," चैताली ने आत्मविश्वास से कहा, हालाँकि उसके अंदर एक अजीब सी घबराहट महसूस हो रही थी। यह घबराहट काम की नहीं थी, बल्कि उसके बाद की रात की थी।

शाम के छह बजे। चैताली ने कंप्यूटर बंद किया, अपनी साड़ी का पल्लू ठीक किया और अपने पर्स में हाथ डाला। उसके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान थी, जो दिन भर की थकान के बावजूद चमकी। सहकर्मी एक-एक करके बाहर निकल रहे थे, कुछ हँसते-बोलते, कुछ अपने परिवार की कहानियाँ सुनाते हुए। चैताली ने किसी से कुछ नहीं कहा, बस एक सामान्य अलविदा कहकर लिफ्ट की ओर बढ़ गई।

लिफ्ट में नीचे उतरते हुए, उसने अपनी छवि शीशे में देखी। एक चालीस वर्षीया विधवा, जो समाज की नजरों में एक सम्मानित सीआरएम थी, लेकिन रात के अँधेरे में उसकी पहचान बदल जाती थी। उसके भीतर का द्वंद्व उसे हर पल कचोटता था, फिर भी एक अजीब सी भूख, एक अनकही प्यास उसे इस रास्ते पर खींच लाती थी।

कार्यालय से बाहर कदम रखते ही, गुरुग्राम की शाम की भीड़भाड़ और शोर ने उसे घेर लिया। ऑटो रिक्शा, बाइकें, कारें, सब एक साथ हॉर्न बजा रहे थे। हवा में धूल और पेट्रोल की मिली-जुली गंध थी। चैताली ने एक ऑटो रिक्शा पकड़ा और अपने किराए के छोटे से कमरे की ओर चल दी।

कमरे में पहुँचकर, उसने सबसे पहले अपनी साड़ी उतारी। फिर वह शीशे के सामने खड़ी हुई। उसने अपने बैग से एक छोटा सा मेकअप किट निकाला। पहले उसने अपने चेहरे पर फाउंडेशन लगाया, फिर आँखों में काजल और लाइनर खींचा। होंठों पर गहरा लाल रंग चढ़ाते हुए, उसकी उंगलियाँ काँप रही थीं। यह सिर्फ़ मेकअप नहीं था, यह एक मुखौटा था जो उसे उसकी दूसरी दुनिया के लिए तैयार करता था।

उसने अपनी अलमारी से एक चमकीला टॉप और एक जींस निकाली। यह उसके काम का पोशाक था। कपड़े बदलते हुए, उसकी नजरें अपने शरीर पर ठहरीं। अभी भी कसा हुआ, अभी भी आकर्षक, लेकिन अब वह सिर्फ़ एक शरीर नहीं था, एक उत्पाद था।

रात के आठ बज चुके थे। चैताली ने अपने पर्स में कुछ पैसे और कंडोम के पैकेट रखे। बाहर निकलकर, उसने एक और ऑटो पकड़ा और अपने "कार्यस्थल" की ओर चल दी – गुरुग्राम के एक व्यस्त चौराहे का कोना।

चौराहे पर पहुँचते ही, चैताली ने अपने कंधे उचकाए। ठंडी हवा उसके खुले बालों से खेल रही थी। उसने अपनी जगह ली, एक पुरानी दीवार के पास जहाँ थोड़ी रोशनी थी, लेकिन इतनी नहीं कि हर कोई उसे स्पष्ट रूप से देख सके। लोग आते-जाते रहे, कुछ ने उसे देखा, कुछ ने अनदेखा कर दिया। उसकी निगाहें सड़कों पर दौड़ रही थीं, हर गुजरती गाड़ी को स्कैन कर रही थीं। उसके अंदर एक अजीब सी शांति थी, एक स्वीकार्यता कि यह उसकी नियति थी।

तभी, एक होंडा एक्टिवा उसके पास आकर धीमी हुई। उस पर दो लड़के बैठे थे, बीस साल के आसपास। उनके चेहरे पर अभी भी कॉलेज का भोलापन था, लेकिन उनकी आँखों में एक अलग तरह की चमक थी।
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#20
NICE STORY
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