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वेटर बीयर ले जाने के लिए मुड़ा ही था कि बेकार आदमी ने मुझे देखकर कहा,
“इससे पूछ बहनचोद ... दारू है क्या? व्हिस्की... रम... इसमें मजा नहीं आ रहा।”
नेहा ने वेटर से जो कम्युनिकेशन की थी वो इंग्लिश में थी, जो उसे ज्यादा समझ में नहीं आया।
उसने मेरे थ्रू वेटर से बात करनी चाही।
मैंने वेटर से पूछा।
वेटर ने धीरे से जवाब दिया,
“सर, रम है... ओल्ड मॉन्क है?”
बेकार आदमी ने तुरंत कहा,
“तो ले आ 60 ML।”
वेटर चला गया।
जैसे ही वो थोड़ा दूर गया, नेहा के मुँह से फिर एक हल्की “आह्ह...” निकली।
मैंने देखा — उस आदमी का हाथ हिल रहा था।
नेहा की स्कर्ट थोड़ी नीचे थी, इसलिए अंदर क्या हो रहा था साफ़ नहीं दिख रहा था।
लेकिन उसकी “आह्ह” से लग रहा था कि वो मेरी बीवी की चूत को रगड़ रहा है...
और वो ये काम थोड़ी बेरहमी से कर रहा था।
नेहा की साँसें अब और तेज़ हो गई थीं।
उस आदमी ने नेहा की तरफ देखा और धीरे से बोला,
“तो कहाँ थे हम... हाँ, मेरी इकलौती खास चीज़ के बारे में...”
नेहा शर्मा रही थी।
मैं उसके चेहरे को देख रहा था — उसकी आँखें आधी बंद, होंठ हल्के से खुले, गाल गहरे लाल।
हर मूवमेंट जो उसकी स्कर्ट के अंदर चल रही थी, उसके चेहरे पर साफ़ दिख रही थी।
नेहा ने बहुत धीमी, काँपती हुई आवाज़ में कहा,
“हाँ... हाँ...”
उस आदमी ने नेहा की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए पूछा,
“तो कैसी लगी मेरी खास चीज़?”
नेहा ने मुँह से कुछ नहीं कहा।
बस दूसरे हाथ से थंब्स अप का जेस्चर कर दिया।
उसका पूरा ध्यान अपनी ही चूत पर था।
बेकार आदमी ने फिर से पूछा, इस बार थोड़ी रफ़ आवाज़ में,
“क्या बोल रही है बहन की लोड़ी... मैंने सुना नहीं... बता ना... कैसा था?”
वो टेबल के नीचे अपनी पैंट के ऊपर से अपने लंड की आउटलाइन बना रहा था।
नेहा अपना हाथ नीचे नहीं ले जा रही थी।
उसे पता था कि वेटर वापस बीयर सर्व करने आएगा।
नेहा ने काँपती हुई आवाज़ में जवाब दिया,
“बड़ा... बहुत बड़ा...”
उसने छोटा जवाब देना चुना।
वो आदमी मेरी बीवी को मेरे सामने गाली दे रहा था।
चैट पर तो अक्सर देता था, लेकिन आज सामने... शायद उसमें हिम्मत आ गई थी।
वैसे भी वो चैट पर कहता था कि मैं रोज़ इसी टाइम पर दारू पीते हुए नेहा से बात करता हूँ।
हम इमेजिन करते थे कि वो बढ़िया व्हिस्की लेते हुए चैट करता होगा।
मगर अब लग रहा था... वो देसी दारू पीकर घर आता होगा, फिर सेक्स चैट मेरी बीवी के साथ करता होगा... और फिर हिलाकर सो जाता होगा।
बेकार आदमी ने नेहा की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए बोला,
“अच्छे से बता ना मादरचोद... चैट पर तो नहीं शर्माती... अच्छे से बता अपने पति को कि कैसी लगी मेरी खास चीज़।”
वो नेहा के मुँह से अपनी लंड की तारीफ सुनना चाहता था।
नेहा ने मेरी तरफ देखा, फिर बहुत धीरे से, शर्माते हुए बोला,
“बेबी... हिस डिक इज़ ह्यूज...”
उस आदमी ने तुरंत बीच में टोका,
“हिंदी में लोड़ी...”
नेहा ने हिचकिचाहट के साथ फिर से शुरू किया,
“बहुत बड़ा है इनका लु... लंड... (थोड़ी हिचकिचाहट के साथ)... मोटा... इनकी हाथ की कलाई जितना... और थोड़ा अजीब भी...”
मैंने नेहा को देखा और पूछा,
“अजीब?”
नेहा ने उस आदमी की तरफ देखकर बोला,
“हाँ... अजीब...”
बेकार आदमी मुस्कुराते हुए बोला,
“बता ना रंडी... क्या अजीब...”
नेहा ने फिर से कहा,
“ये... पूरा गोल नहीं लग रहा... ओवल साइज़ है।”
वो आदमी हँसा।
फिर मुझे समझाने के लिए बोला,
“बचपन से ही मेरा ऐसा है।
कोई भी देखता है... ऐसे ही अचंभित होता है।”
मैंने पूछा,
“ओवल मतलब?”
नेहा सोच रही थी कि कैसे समझाए, मगर उस आदमी ने खुद कहा,
“जैसे गन्ना कैसे हो जाता है एक बार रस निकालने के बाद... वैसा।”
उसके एग्ज़ाम्पल भी गरीबों वाले थे।
नेहा ने उस आदमी को इशारा किया — थोड़ा चुप होने के लिए।
सामने से वेटर आता दिख रहा था।
वेटर भी अब हमें थोड़ा सशंकित नज़रों से देख रहा था।
एक हॉट मॉडल टाइप की लड़की, शादीशुदा, जो थोड़ी देर पहले मेरे साथ आई थी — अब वो किसी ऐसे के साथ बैठी है जो शायद होटल मेन्यू के प्राइस देख लेता तो अंदर आने की हिम्मत भी न करता।
वेटर ने सर्व किया,
“लीजिए सर, आपकी रम।”
और वो जाने लगा।
वो थोड़ी दूर ही गया होगा कि उस आदमी ने ग्लास उठाया... और एक घूँट में 60 ML बिना पानी, बिना सोडा के अंदर कर लिया।
हम दोनों उसे देख रहे थे।
ग्लास टेबल पर रखा।
फिर नेहा को देखा।
और झुक गया।
अचानक हमला।
उसके होंठ नेहा के होंठों पर।
नेहा की पीठ कुर्सी से टिक गई।
वो कुर्सी पर आधी लेटी-सी हो गई थी।
इस बार वो किस हल्के नहीं थे।
वो होंठों को चाट रहा था।
रम के पैक ने उसे हिम्मत दे दी थी।
एक हाथ नेहा की कमर पर।
दूसरा चूत पर।
इस पोजीशन में स्कर्ट ऊपर थी।
मैं अब देख सकता था — उसके हाथ चूत को रगड़ते हुए... लाल पैंटी के ऊपर से।
और दूसरा हाथ boobs तक चला गया।
मैं एक नज़र से ये सब देख रहा था और बार-बार दूसरी तरफ देख लेता था कि कहीं कोई आ न जाए।
ये बोल्ड मूव था।
नेहा भी उसे धकेल रही थी... लेकिन पूरी ताकत से नहीं।
मैं थोड़ी देर तक देखता रहा।
सीन बहुत हॉट था।
हल्का-सा आदमी पब्लिक प्लेस में मेरी बीवी पर चढ़ा हुआ।
नेहा उसे धकेलने की कोशिश कर रही थी, मगर किस में रिस्पॉन्ड भी कर रही थी।
उसकी बॉडी उसके हाथों में मूवमेंट पर काँप रही थी।
बूब्स ऊपर आते, नीचे जाते।
मगर बहुत रिस्क था।
मैंने उसकी बाजू से पकड़ा और अपनी तरफ खींचकर वापस कुर्सी पर बिठा दिया।
उसने एकदम से मुझे गुस्से से देखा।
मगर फिर शांत हो गया।
वो समझ गया था कि ये सब रिस्की है।
नेहा ने हल्की साँस ली।
उसके गाल अभी भी लाल थे।
उसने मुझे देखा — आँखों में शर्म, उत्तेजना और थोड़ी राहत का मिश्रण था।
धर-उधर देखकर उस आदमी ने नेहा का हाथ वापस पकड़ लिया और अपने लंड पर रख दिया।
उसे पता था कि अब वेटर को टाइम लगेगा और दूर से टेबल के नीचे वाली एक्टिविटी दिखेगी नहीं।
वो नेहा के कान के पास मुंह ले जाकर धीरे से बोला,
“देख... ये शेप और साइज़ जब अंदर जाएगा तो तुझे कितना मजा आएगा।”
उसे पता था टाइम कम है... लिमिटेड टाइम में जितना भी उससे मिल सकता था, वो ले रहा था।
नेहा का हाथ अब उसकी पैंट के ऊपर से उसके लंड को महसूस कर रहा था।
उसकी उँगलियाँ हल्के-हल्के दबाव डाल रही थीं।
नेहा उसका लंड ऊपर से नीचे तक छू रही थी... महसूस कर रही थी... उँगलियों से उसके शेप और मोटाई को समझ रही थी।
बेकार आदमी ने धीरे से कहा,
“बता ना रंडी... अपने पति को कितना बड़ा है मेरा लंड।”
नेहा ने उसकी तरफ देखा।
फिर अँगूठे और तर्जनी से बेस से टिप तक मापते हुए... जैसे कोई कैलकुलेशन कर रही हो... बहुत धीरे से बोली,
“आई थिंक 7... या शायद 7 एंड हाफ इंच...”
बेकार आदमी ने मुस्कुराते हुए पूछा,
“अच्छा... पहले देखा है ऐसा?”
नेहा ने शर्माते हुए मुस्कुराकर ना में सिर हिला दिया।
उस आदमी ने नेहा की तरफ देखकर पूछा,
“इस गांडू का कितना बड़ा है?”
नेहा ने मेरी तरफ देखा।
मैंने हल्का सा इशारा किया — बताने के लिए।
ये सवाल हजारों बार दिया था — पहले आयाान को, अब इस आदमी को।
मेल ईगो हमेशा इस बूस्ट से खुश होता है।
ये सुनना चाहते हैं कि इस चूत को अब तक कितनी गहराई से नापा गया है।
बताना चाहते हैं — मेरी बीवी के उन कोनों में जा सकते हैं जहाँ अभी तक पति नहीं गया।
हा ने उसका लंड सहलाते हुए, बहुत धीरे से जवाब दिया,
“4.5 इंच...”
बेकार आदमी हल्का सा हँसा और बोला,
“नुन्नू बोलते हैं उससे... मेरा मोटने के टाइम भी इससे बड़ा होता है।”
उसके हाथ सीधे नेहा के निप्पल्स पर गए।
चारों तरफ देखकर, जब उसे लगा कि कोई नहीं देख रहा, तो उसने नेहा के निप्पल को जोर से पिंच कर दिया।
“आआह्ह्ह...”
नेहा के मुँह से एक छोटी-सी चीख निकल गई।
उसका शरीर एक झटके से काँप गया।
बेकार आदमी ने नेहा की तरफ देखकर, नशे में भारी आवाज़ में बुदबुदाया,
“क्या आदमी है तेरा पति भेनचोद... तू इसके सामने मेरा लंड टटोल रही है और इसे फर्क नहीं पड़ता...”
फिर उसने नेहा की तरफ झुककर, और भी धीमी लेकिन साफ़ आवाज़ में कहा,
“किस तरह का आदमी है तू मादरचोद...
गुस्सा क्यों नहीं हो रहा?
मेरे साथ लड़ाई क्यों नहीं कर रहा?
कैसा आदमी है ये?”
नेहा ने मेरी तरफ देखा।
उसकी आँखों में शर्म, उत्तेजना और थोड़ी सी हैरानी थी।
नेहा ने थोड़ी हिम्मत जुटाकर, धीरे लेकिन साफ़ आवाज़ में कहा,
“वेल... मैंने हमेशा से ये फैंटसी की थी कि किसी अनजान आदमी के साथ सेक्स करूँ... किसी ऐसे के साथ जिसका लंड बड़ा हो... बस ये महसूस करने के लिए कि ऐसा कैसा लगता है।”
उसकी आवाज़ में शर्म थी, लेकिन साथ में एक साफ़ उत्तेजना भी थी।
वो जानती थी कि वो क्या सुनना चाहता है।
"तुम्हे तो बड़ा प्राउड फील हो रहा होना ना की में अपने पति के सामने तुम्हारा लुंड सहला रही हु
मेरा पति मेरा कुकॉल्ड है।
वो जानता है कि तुम वो हो जो मैं चाहती हूँ।
वो सिर्फ मेरी खुशी और मजा चाहता है।
मैं किसी भी मर्द के साथ सेक्स कर सकती हूँ।
वो मुझे वफादार रहेगा।
मैं उसकी इकलौती औरत हूँ...
और हमेशा रहूँगी।”
उसने ये सब एक साँस में कह दिया।
लंड को सहलाते-सहलाते।
हमारे बीच की वो अनकही बातें भी बता दीं जो हमने कभी किसी से नहीं कही थीं।
नेहा अब नशे में थी।
वो उस आदमी को सब बता रही थी।
उसे उत्तेजना दे रही थी।
मुझे नहीं लगता कि उसे “कुकॉल्ड” का मतलब भी ठीक से पता होगा।
मगर ये उसके लिए नई दुनिया ज़रूर थी।
बेकार आदमी ने पूछा,
“क्या वो गुस्सा नहीं होता? या जलन नहीं होती?”
नेहा ने हल्के से मुस्कुराते हुए जवाब दिया,
“वो गुस्सा नहीं होता... लेकिन जलन ज़रूर होती है।
जब वो देखता है कि मैं किसी और मर्द के साथ इस तरह हूँ... तो उसके मन में बहुत सारी चिंताएँ आती हैं।
इतनी ज़्यादा कि गिनती नहीं हो सकती।
मगर मैंने उसे अच्छे से ट्रेन कर रखा है।”
नेहा ये सब बोल रही थी जैसे उसने पूरा डायलॉग रटा हुआ हो।
मुझे याद आ गया — आयाान चैट पर अक्सर यही कहता था कि “तुम्हारे पति को ट्रेनिंग देनी होगी।”
बेकार आदमी ने पूछा,
“कैसे ट्रेन करते हो एक आदमी को... कि वो अपनी बीवी को किसी और से चुदवाने दे?”
नेहा ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया,
“वो तुम्हें धीरे-धीरे पता चलेगा... अभी तो बस पहली मुलाकात है।”
उस आदमी ने तुरंत पूछा,
“तो क्या हम दोबारा मिलेंगे?”
नेहा ने आँख मारते हुए कहा,
“मैं तुम्हें चैट पर बताऊँगी... रात में।”
बेकार आदमी ने फिर पूछा,
“क्या सच में ये चूतिया वो करेगा जो तुम कहोगी?”
नेहा ने मेरी तरफ देखा।
उसने मेरी आँखों में देखा।
उस आदमी के जवाब का इंतज़ार भी नहीं किया।
उसने धीरे से कहा,
“बेबी... क्या तुम फील कराना चाहोगे... इस बेकार आदमी के लंड को?”
मैं चौंक गया।
हमने सब डिस्कस किया था...
मगर ये नहीं।
ये मेरे लिए भी आउट ऑफ कोर्स था।
टेबल पर दोनों मर्द शॉक में थे।
नेहा ने कुछ ऐसा कह दिया था कि हम दोनों एक पल के लिए सन्न रह गए।
नेहा मुस्कुराई।
उसका हाथ अभी भी उस आदमी के लंड पर था।
उसने धीरे से कहा,
“आओ ना... तुम्हें अच्छा फील होगा।”
मुझे कई साल हो गए थे किसी का लंड फील किए हुए।
मैंने काँपते हाथों से आगे बढ़ाया।
आधे रास्ते में ही नेहा ने मेरा हाथ पकड़ लिया।
और जैसे पहले उस आदमी ने नेहा को फील करवाया था, वैसे ही नेहा अब मुझे उसका लंड फील करवाने लगी।
उस आदमी के मुँह से “आह्ह” निकल गई।
मैं पहली बार लंड छू रहा था... नेहा के साथ।
उसने फील किया होगा कि एक पति और पत्नी... दोनों मिलकर उसका लंड फील कर रहे थे।
मुझे भी थोड़ा अच्छा लग रहा था।
पहली बार ऐसा लग रहा था कि हम एक टीम की तरह काम कर रहे हैं।
अलग किस्म का बॉन्डिंग।
दोनों हाथ एक आदमी को प्लेजर दे रहे थे।
और दोनों हाथ नहीं हटा रहे थे।
हम खो गए थे।
हमारा खुमार उतरा जब चिट-चिट करती आवाज़ और धोने के साथ हमारा खाना आ गया।
तुरंत दोनों ने हाथ हटा लिया।
वेटर ने सर्व किया और बोला,
“सर, गेस्ट आने लग गए हैं... प्लीज़ अगर आप ये सब जल्दी करें तो...”
ये सब का मतलब खाने से था या किसी और से... मुझे समझ नहीं आया।
उसने साफ कहा था।
1 मिनट में ही कुछ बच्चे पूरे रूम में भागने लगे।
प्राइवेसी खत्म हो गई थी।
भीड़ बढ़ रही थी।
हम जल्दी-जल्दी खाना खाने लगे।
एक-दो बार मैंने देखा — वो आदमी नेहा की जाँघों को अप्रोच कर रहा था।
मगर नेहा ने हाथ झटक दिया।
ये सच में इनकार वाला झटका था।
थोड़ी देर में हम निकलने लगे।
लिफ्ट में एंटर हुए।
उस आदमी की खुशी को मैंने एक झटके में कम कर दिया — लिफ्ट में CCTV कैमरा दिखाकर।
“सोचना भी मत।”
नेहा ने पूछा,
“तुम्हारी गाड़ी कहाँ है?”
उसने इशारा किया — बाहर है।
हमारी बेसमेंट में।
पुणे की बारिश बिन मौसम बरस रही थी।
उस आदमी ने जाने से पहले आखिरी चांस लिया...
नेहा की गांड को हल्के से दबाकर बोला,
“तू पक्का मिलेगी ना दोबारा?”
नेहा ने “हम्म” में जवाब दिया।
और हम अलग हो गए।
हम अपनी कार में बैठे।
बारिश हो रही थी।
अभी हम दोनों चुप थे।
दोनों के हाथ में उस आदमी के लंड की गर्माहट अभी तक थी।
मैं ड्राइव करते हुए आगे बढ़ा।
हम रोड पर थे।
बारिश।
हमने एक बस स्टॉप क्रॉस किया।
नेहा ने अचानक कहा,
“सैम... वो आदमी... वो वहाँ खड़ा था... बस स्टॉप पर... बारिश में।”
हम आगे निकल चुके थे।
मगर मैंने गाड़ी साइड में लगा दी।
“शायद वो बस से ही आया होगा... और बस का इंतज़ार कर रहा होगा।”
मैंने कहा।
नेहा ने दाँतों में उँगली दबाकर कहा,
“क्या हम उसे घर तक छोड़ सकते हैं?”
मैंने कुछ सोचा।
“तुम्हें पता है ना... एक बार वो कार में आ गया तो रोक पाना मुश्किल होगा...
मगर मैं ये फैसला तुम पर छोड़ता हूँ।
तुम चाहो तो मैं गाड़ी घुमा सकता हूँ।”
बोलते हुए मैं नेहा को देख रहा था।
नेहा कुछ सोच रही थी।
और मैं सोच रहा था कि नेहा का एडवेंचर से मन नहीं भरा।
मैं जवाब का इंतज़ार कर रहा था।
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Please rate the story
thanks
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Mst yr osm ...... But we want big update. ....... Pls bhai
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Superb update please update next part as soon as possible
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मैंने नेहा की तरफ देखा।
बारिश की बूँदें कार की विंडशील्ड पर तेज़ी से गिर रही थीं।
वाइपर चल रहे थे।
सड़क पर पानी बह रहा था।
नेहा कुछ पल सोचती रही।
फिर धीरे से बोली,
“हाँ... छोड़ देते हैं।
बारिश में खड़ा है बेचारा।”
मैंने कुछ नहीं कहा।
बस गाड़ी घुमाई और बस स्टॉप की तरफ ले गया।
वो आदमी अभी भी वहीं खड़ा था।
भीग रहा था।
पुरानी शर्ट और पैंट पानी से चिपक गई थी।
उसका पतला शरीर और भी छोटा लग रहा था।
मैंने कार उसके पास रोकी।
नेहा ने विंडो नीचे की और धीरे से बोला,
“आ जाओ... हम तुम्हें घर छोड़ देते हैं।”
बेकार आदमी एक पल के लिए हैरान रह गया।
फिर जल्दी से कार के पिछले दरवाज़े की तरफ भागा और अंदर बैठ गया।
कार में अब हम तीन थे।
बारिश की आवाज़, एसी की हल्की गुनगुनाहट और उस आदमी की तेज़ साँसें।
मैं और नेहा आगे वाली सीट पर थे।
वो पीछे वाली सीट पर बैठा था।
बारिश में भीगकर उसकी पुरानी शर्ट और पैंट शरीर से चिपक गई थी।
नशा उसके चेहरे पर साफ़ दिख रहा था।
डैशबोर्ड पर सिगरेट का पैकेट देखकर उसने हिचकिचाते हुए कहा,
“भाई... एक सिगरेट मिलेगी?”
मैंने पैकेट पीछे की तरफ बढ़ा दिया।
उसने एक सिगरेट निकाली, जलाई और पहला कश लेकर बोला
वो हल्के-हल्के कश मार रहा था।
सिगरेट की लाल चिंगारी बारिश की बूँदों में चमक रही थी।
नेहा पीछे मुड़कर उसे देख रही थी।
मैं ड्राइव कर रहा था।
उसकी नज़रें नेहा से ज़्यादा कार को देख रही थीं।
जब मेरे पास कोई बड़ी गाड़ी भी नहीं थी।
भीगने की वजह से उसकी पैंट अब लंड से चिपक गई थी।
टाइट तो वो अभी भी था... लेकिन जाँघ से लटक जा रहा था।
मुझे लग रहा था कि उसके बदन की कमजोरी उसके भारी लंड का वजन नहीं उठा पा रही थी।
इसलिए तनने की बजाय वो लटक जा रहा था।
नेहा ने पीछे मुड़कर पूछा,
“तुम्हारा घर कहाँ है?”
बेकार आदमी सिगरेट पीते हुए, खुद को आराम से सेट करते हुए बोला,
“यहीं पास ही मेरा घर है।”
वो धीरे-धीरे सिगरेट का कश ले रहा था।
कार में धुआँ फैल रहा था।
मुझे लगा था कि जैसे ही वो कार में बैठेगा, मेरी बीवी पर टूट पड़ेगा।
लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
शायद उसके दिमाग में अभी भी हिचक लग रही थी।
जैसे वो सोच रहा हो — रेस्टोरेंट में जो गेम खेलकर आया था, वो वही से शुरू कर सकता है या नहीं।
जैसे वीडियो गेम में पॉज करके आए हो और अब रिज्यूम करना हो।
हम दोनों आगे वाली सीट पर थे।
नेहा उसकी हर बात पर खिलखिला रही थी।
मैं नेहा के चेहरे को देखकर बता सकता था — वो तैयार थी।
क्यों नेहा इतनी जल्दी तैयार हो गई?
वो कभी किसी को इतनी आसानी से भाव नहीं देती थी।
फिर भी आज उसने गाड़ी घुमाने को कहा।
अभी भी उसके चेहरे पर वो चमक थी — जैसे वो पूरी तरह तैयार है।
उसकी लिमिट मुझे नहीं पता, लेकिन एक बात साफ़ थी —
जहाँ तक बेकार आदमी ने गेम पॉज किया था, वहाँ तक वो बिना किसी आपत्ति के खेलने देगी।
कुछ लोग सोच सकते हैं कि नेहा अजीब है।
मगर मुझे पता है — उसे अजीब सिचुएशन में मजा आने लगा है।
उसके अनयूजुअल किंक्स ज्यादातर उन पोर्न से आए हैं जो हम साथ देखते हैं।
एक्सपोज़र , हुमिलिएशन, रिस्की सीटुएशन्स ...
अब वो खुद को ऐसे ही सिचुएशन में देखकर एक्साइट होती है।
रोलप्ले में वो अक्सर खुद को नहीं, मुझे ऐसे पोजीशन में डालती है।
जैसे मेरे मम्मी-पापा अगले कमरे में हों और वो मेरे पापा के बारे में रोलप्ले करे।
जब वो अगले कमरे में होते हैं, तब भी वो मुझे ऐसी स्थिति में डाल देती है।
मुझे लगता है कि वो खुद से ज़्यादा मुझे इन पोजीशन्स में डालने में मजा लेती है।
नेहा अभी भी पीछे मुड़कर बेकार आदमी से बात कर रही थी।
उसकी आवाज़ में हल्की शरारत थी।
5 मिनट हो गए थे।
न कोई डायरेक्शन, बस चल रही थी।
हमें लगा था कि जैसे ही वो गाड़ी में बैठेगा, नेहा पर टूट पड़ेगा।
मगर वो चुपचाप पीछे बैठा, सीट पर पीठ टिकाकर सिगरेट एंजॉय कर रहा था।
शायद उसे अंदाज़ा ही नहीं था कि कार में क्या-क्या हो सकता है।
मैंने नेहा की तरफ देखा।
एक इशारा किया।
नेहा मुस्कुराई और खिलखिलाती हुई आवाज़ में पीछे मुड़कर पूछा,
“तो कितना टाइम लगता है आपके घर जाने में?”
बेकार आदमी ने सिगरेट का कश लेते हुए कहा,
“30 मिनट।”
“अच्छा... और घर पर तो अभी सब लोग होंगे?”
“हाँ।”
नेहा ने फिर हँसते हुए पूछा,
“तो आज तो रेस्टोरेंट में हुआ... उसके बाद भी आप चैट ही करेंगे या... या आज भाभी को तंग करोगे?”
उसने नेहा की बीवी को “भाभी” बोल दिया — जैसे कोई रिश्ता हो।
बेकार आदमी ने नेहा की तरफ देखा और मायूसी से बोला,
“आप नहीं समझ सकते... वो भी काम करके आती है।
1 कमरे का मकान और छत...
मैं दारू पीता हूँ... आजकल तुमसे बात करता हूँ... छत पर...
खाना खाने के लिए नीचे आता हूँ, तब तक वो सो जाती है।”
उसने थोड़ी मायूसी से कहा,
“हमारे बीच बस एक-दूसरे की केयर है।
बाकी कुछ नहीं।
कई सालों से।”
नेहा ने गंभीरता से पूछा,
“इतने सालों से?”
“याद नहीं... 4-5 शायद।”
हम दोनों ने एक-दूसरे को देखा।
ये बात मैं अक्सर नेहा से कहता था — कि अगर स्पाइस नहीं तो सेक्स लाइफ खत्म हो जाती है।
नेहा उसकी बातों में गौर कर रही थी।
बातें कर रही थी।
एक आदर्श पति को ये सब अच्छा लगना चाहिए था।
मगर मैं चूतिया हूँ।
मैं सोच रहा था कि कब ये नेहा को छूने लगेगा।
नेहा शायद ये सोच रही थी कि क्या इशारा दे उसे।
उसकी पीठ कुर्सी से टिकी हुई थी।
जानबूझकर boobs आगे।
स्कर्ट जाँघें दिखाती हुई।
बस बोलने की देर थी — “आ जाओ... थोड़ा और एंजॉय करो मेरी बॉडी को।”
मगर डायरेक्ट कहने में वो हिचकिचा रही थी।
पीछे के दरवाज़े पर खटखट हुई।
मेरा ध्यान ड्राइव पर था।
उसकी आवाज़ आई,
“ये कहाँ फेंकू?”
सिगरेट खत्म हो गई थी।
उसे विंडो नीचे करना नहीं आया।
मैंने नीचे की।
थोड़ी बूँदें अंदर आईं।
उसने सिगरेट फेंक दी।
फिर पीठ उठाकर वो अब आगे की तरफ झुक गया।
उसका चेहरा हम दोनों के बीच में आ गया।
उसका एक हाथ सीधे नेहा के नंगे कंधों पर गया।
धीरे से सहलाते हुए।
“तो क्या बोल रही थी रंडी... कि मैं अपनी बीवी को चुदवाऊँगा घर जाकर?”
उसकी टोन अचानक बदल गई थी।
शायद वो तब तक गाड़ी में सिर्फ सिगरेट एंजॉय कर रहा था।
मेरी गाड़ी में मेरा सिगरेट।
अब शायद उसे अहसास हुआ कि मेरी गाड़ी में मेरी बीवी भी तो है।
नेहा चुप थी।
वो मेरी बीवी के कंधों को अच्छे से सहला रहा था, देल कर रहा था।
मगर जैसे ही कोई गाड़ी पास से गुजरती, वो सहज हो जाता।
हाथ हटा लेता।
उसे लग रहा था कि कहीं कोई देख लेगा।
ये अच्छा था कि उसे इज्जत का तो डर था।
इस बार नेहा ने पहल करके कहा,
“चलती गाड़ी में कुछ नहीं दिखेगा... आप छू सकते हैं।”
थोड़ा शर्म से।
मेरा ध्यान ड्राइव और उसके हाथ पर था।
“आआईईई...”
नेहा की आवाज़ आई।
मैंने देखा — उस आदमी ने नेहा के कंधे पर पिंच कर दिया।
प्लेफुल पिंच।
“बहुत चालू आइटम है तू साली... पति के सामने बोल रही है कि छू सकते हो।”
नेहा ने कुछ नहीं कहा।
उस आदमी ने फिर बोला,
“तेरी जैसी बीवी होती ना मेरी तो साली को रोज़ रात बस छत का पंखा दिखाता...
अब वो बस शरीर है... थका हुआ... काली बॉडी से पता नहीं किस केमिकल की बदबू आती है...
तुम जैसी मेमसाहब थोड़ी है वो।”
उस आदमी ने मेरी तरफ देखा।
फिर बोला,
“तुम जैसी जिंदगी... तुम जैसी कार... तेरी जैसी बीवी...
साला ये जिंदगी है भेनचोद...
मगर मादरचोद तू यहाँ अपनी बीवी चुदवाने के लिए बैठा है...
चलो जी को जिसमे मजा मिले।”
उसके अंदर ज्ञान खत्म ही नहीं हो रहा था।
या तो नेहा, या शायद सिचुएशन, या मेरी चूतिया शक्ल...
उसे बार-बार मजबूर कर रही थी वो बातें बोलने के लिए, जिसमें उसी का नुकसान हो सकता था।
ये वो इतना पागल नहीं था जितना हम सोच रहे थे।
उसे पता था कि हम क्या सुनना चाहते हैं।
मैं क्या सुनना चाहता हूँ।
वो वही बोल रहा था।
फिर उसने नेहा की तरफ देखकर बोला,
“तूने कहा गाड़ी में छू सकते हैं... कोई नहीं देखेगा...
तो बता रांड... कहाँ छू सकते हैं?”
नेहा ने सीट का बटन दबाया।
पीछे वाली सीट थोड़ी नीचे झुक गई।
अब वो थोड़ी लेटी हुई थी।
उसकी स्कर्ट पहले से ही ऊपर चढ़ी हुई थी।
गोरी जाँघें डिम लाइट में चमक रही थीं।
बेकार आदमी ने नेहा की तरफ देखा।
उसकी आँखों में अब पहले वाली घबराहट नहीं थी।
एक भूख थी।
नेहा ने हल्के से गिगल किया ।
मैं देख रहा था।
उसने मुझे पकड़ लिया और हल्के से डाँटते हुए बोली,
“तुम अपनी नज़रें सड़क पर रखो ।”
डीप नेक टॉप में आधी लेटी हुई मेरी बीवी।
मैं सोच सकता था कि उस आदमी को क्या नज़ारा मिल रहा होगा।
वो आदमी अब नेहा की सीट के बिल्कुल पीछे चला गया था।
उसके दोनों हाथ अब सीट के दोनों तरफ से आ रहे थे।
मैं बीच-बीच में देख रहा था — उसके दोनों हाथ नेहा की जाँघों पर थे।
स्कर्ट ऊपर उठ चुकी थी।
पैंटी दिख रही थी।
मगर उसके हाथ नेहा की बॉडी को फील करते हुए आगे बढ़ रहे थे।
नेहा की साँसें तेज़ हो गई थीं।
उसने अपनी टांगें थोड़ी और फैला दीं।
मैं गाड़ी चला रहा था।
बारिश में।
जब मैंने अगली बार देखा तो उसके दोनों हाथ अब नेहा के बूब्स पर थे।
शायद उसने नेहा की कमर को भी थोड़ा काम किया होगा, मगर उस समय मेरा ध्यान रोड पर था।
वो उसे मसल रहा था।
रेस्तरां में टेबल के ऊपर वाली एक्टिविटी के लिए उसे अच्छे से मौका नहीं मिला था।
इसलिए वो मेरी परफेक्ट साइज़ वाली बीवी के बूब्स को पूरी तरह चेक कर रहा था।
उसके शेप, साइज़... दोनों बूब्स के नीचे हाथ डालकर... दोनों का वजन कर रहा था।
नेहा बस खिलखिला रही थी।
उसके मुँह से एक “आह्ह...” भी निकली थी, मगर वो उस आदमी की वजह से नहीं।
मैंने देखा — नेहा का एक हाथ अपनी चूत पर था।
वो खुद उसे पैंटी के ऊपर से रगड़ रही थी।
इससे पता चलता है कि वो कितनी एक्साइटेड थी अभी।
ट्रैफिक वाली जगह पर मेरा पूरा ध्यान रोड पर था।
हालाँकि स्पीड स्लो थी।
ऑटोमैटिक गाड़ी को एक ही स्पीड में चलाना थोड़ा आसान होता है।
मेरा ध्यान वापस उस पर गया जब मैंने आवाज़ सुनी,
“क्या इसे थोड़ा नीचे कर सकते हैं?”
मैंने नेहा को देखा।
उसकी ड्रेस की जिन पतली डोरियों की वजह से कंधों पर टिकी हुई थी, वो अब नीचे हो चुके थे।
उस आदमी के हाथ ऊपर बूब्स पर थे।
और वो मेरी बीवी से पूछ रहा था कि क्या थोड़ा नीचे कर सकते हैं।
नेहा ने शरारती हँसी के साथ कहा,
“तुम बहुत बुरे हो। तो क्या तुम चाहते हो कि मैं पूरी नंगी सड़क पर चलूँ?”
नेहा के दोनों हाथ उस आदमी के हाथ के करीब नहीं थे।
कोई विरोध नहीं।
यहाँ तक कि नेहा का जो हाथ फ्री था, उसने उससे मेरे हाथ को पकड़ लिया।
उसने नेहा का जवाब भी नहीं सुना और ड्रेस को नीचे खिसका दिया।
नेहा के बूब्स अब नंगे हो गए थे।
एक अनजान आदमी के सामने।
“कमाल है तू रंडी...”
उसके मुँह से निकला।
फिर उसकी उँगलियाँ नेहा के हल्के निप्पल को छूने लगीं।
यहाँ नेहा ने मेरा हाथ पकड़कर अपनी चूत पर रख दिया।
टांगें थोड़ी और फैला दीं।
मैंने चेक किया।
वो बहुत गीली थी।
“You are so wet,” मैंने कहा।
नेहा ने सिर सीट पर टिकाया और फील करने लगी — चार हाथ।
एक अपना, एक मेरा, और दो अनजान आदमी के।
आँखें आधी खुली, आधी बंद।
मेरा लंड अब सेमी हार्ड से फुल हार्ड हो चुका था।
मेरा हाथ अब उसकी पैंटी के अंदर चला गया।
मैं उसकी स्लिट को स्ट्रोक कर रहा था, अपनी उँगलियों से उसके लेबिया को अलग कर रहा था।
और वो आदमी उसके बूब्स को टेस्ट करना चाहता था।
उसका सिर पिछली सीट से आगे आने की कोशिश कर रहा था।
उसने नेहा का एक फ्री हाथ उठाकर अपने कंधे पर रख दिया।
नेहा ने खुद को थोड़ा दाईं तरफ झुका दिया — ताकि उसका सिर उसके बूब्स तक पहुँच सके।
आखिरकार वो सफल हो गया।
उसका सिर मेरे कंधे को टच कर रहा था।
मुझे दिख तो नहीं पा रहा था, मगर उसकी मूवमेंट... पूच-पूच की आवाज़... बीच-बीच में नेहा की “आह्ह” से लग रहा था कि वो अच्छे से चूस पा रहा है मेरी बीवी के निप्पल को।
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गाड़ी अब बहुत धीरे चल रही थी।
सड़क खाली थी, इसलिए मैंने स्पीड और भी कम कर दी थी।
मेरा पूरा ध्यान अब सीट पर था।
नेहा लेटी हुई थी।
उसकी ड्रेस कमर तक सरक चुकी थी।
दोनों बूब्स पूरी तरह नंगे थे।
उस आदमी का मुँह एक बूब पर चिपका हुआ था।
वो जोर-जोर से चूस रहा था, बीच-बीच में हल्के से काट भी रहा था।
नेहा का एक हाथ अपने आप ही उसके बालों में था और वो उसके सिर को अपने बूब्स पर और जोर से दबा रही थी।
इस पोजीशन में वो सिर्फ एक बूब को ही अच्छे से खा पा रहा था। दूसरे बूब तक उसका मुँह आसानी से नहीं पहुँच पा रहा था।
इसलिए उसने अपना दूसरा हाथ सीट के पीछे से ले जाकर दूसरे बूब को मसलना शुरू कर दिया।
मैं उसका वो हाथ अच्छे से देख पा रहा था।
उसकी उँगलियाँ नेहा के दूसरे बूब को दबा रही थीं, निप्पल को हल्का-हल्का घुमा रही थीं।
नेहा की साँसें अब बहुत तेज़ और भारी हो चुकी थीं।
बार-बार उसके मुँह से लंबी “आह्ह...” निकल रही थी।
नेहा की आँखें आधी खुली हुई थीं।
मगर वो शायद अभी पूरी तरह उसी में खोई हुई थी।
उसका चेहरा लाल हो चुका था, होंठ हल्के से खुले थे, और हर बार जब वो आदमी उसके निप्पल को जोर से चूसता, नेहा की पलकें फड़क जातीं।
उसका एक हाथ ऊपर था — उस आदमी के सिर पर।
वो उसके हल्के, पतले बालों को सहला रही थी।
कहीं-कहीं उसके स्कैल्प के हल्के सफेद बाल दिख रहे थे।
मुझे नेहा के बूब्स से ज़्यादा उसका चेहरा और वो स्कैल्प दिखाई दे रहा था।
उसका सिर बार-बार मेरे कंधे से रगड़ खा रहा था।
हर बार जब वो आदमी उसके बूब को मुंह में भरकर चूसता, नेहा का सिर हल्का सा आगे-पीछे हिलता और मेरे कंधे को छू जाता।
मैं देख रहा था कि नेहा कितनी खोई हुई है।
उसके चेहरे पर शर्म कम, और नशा ज़्यादा था।
पाँच मिनट तक अच्छे से नेहा के बूब्स को चूसने के बाद उस आदमी ने अपना मुँह हटाया।
वो नेहा की तरफ देखा, फिर मेरी तरफ देखा।
मैंने नेहा को देखा, फिर उसके बूब्स को देखा।
नेहा की साँसें तेज़ थीं।
जब उसने मुँह हटाया तो मैंने देखा कि नेहा का एक बूब पूरी तरह गीला हो चुका था।
उसका थूक चारों तरफ फैला हुआ था।
उसने नेहा के बूब्स पर अच्छे से काम किया था — एक भी कोना नहीं छोड़ा था। पूरा बूब उसकी लार से सना हुआ था।
नेहा का हाथ अभी भी उस आदमी के सिर पर था, उसके हल्के बालों को सहला रहा था।
फिर नेहा ने पहल की।
उसने उस आदमी के चेहरे को अपने चेहरे के करीब खींच लिया।
और अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए।
मैं फिर से देख रहा था — अपनी बीवी किसी और को किस कर रही है।
पिछली बार उस आदमी ने पहल की थी।
मगर इस बार नेहा ने खुद आगे बढ़कर उसे किस करना शुरू कर दिया।
नेहा ने अपने होंठ खोले और उस आदमी के होंठों को खोलकर अपनी जीभ अंदर डाल दी।
ये शायद उस आदमी के लिए पहला अनुभव था।
वो एक पल के लिए सख्त हो गया, फिर नेहा की जीभ को अपने मुँह में ले लिया।
दोनों अब गहरे किस में खो गए थे।
नेहा की जीभ उसकी जीभ से खेल रही थी।
उस आदमी के हाथ अभी भी नेहा के नंगे बूब्स को दबा रहे थे।
लंबी देर तक गहरे किस करने के बाद अचानक नेहा के मुँह से एक अजीब सी आवाज़ निकली।
“mmmhhh... uhhhh...!”
ऐसी आवाज़ जैसे उसे दर्द हो रहा हो, या बहुत ज़्यादा उत्तेजना से वो चीखना चाह रही हो, लेकिन होंठों के जुड़े होने की वजह से आवाज़ बाहर नहीं आ पा रही हो।
नेहा उस आदमी के कंधे पर हल्के-हल्के थप्पड़ मार रही थी।
जैसे कह रही हो — “रुक जाओ... या और तेज़ करो...”
मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था।
इस पोजीशन में मैं कुछ ठीक से देख भी नहीं पा रहा था।
केवल नेहा का चेहरा और उस आदमी का सिर दिख रहा था।
नेहा की आँखें अब पूरी तरह बंद थीं, भौंहें सिकुड़ी हुई थीं।
उसका चेहरा लाल हो चुका था।
थोड़ी देर बाद नेहा ने उसके मुँह से अपना मुँह हटाया।
फिर उसने उसके कंधे पर हल्का-सा, लेकिन थोड़ा भारी टैप किया और बोली,
“जंगली... ऐसे कौन करता है? तुम मेरी जीभ को काट रहे थे।”
तब मुझे समझ में आया।
जब नेहा की जीभ उसके मुँह में थी, तो उसने थोड़ी देर चूसने के बाद उसे अपने दोनों दाँतों के बीच में पकड़ लिया था।
और हल्के-हल्के, शायद थोड़ा तेज़ भी, काट रहा था।
नेहा इसी से विचलित हो रही थी।
उस आदमी ने शर्माते हुए कहा,
“अरे सॉरी... मुझे नहीं पता ये कैसे होता है। मुझे लगा शायद ये भी उसका पार्ट हो।”
नेहा ने फिर मुस्कुराकर पूछा,
“क्यों, तुमने अपनी बीवी के साथ ये सब नहीं किया?”
उसने मायूसी से जवाब दिया,
“अरे, ये सब हमारे यहाँ नहीं होता।
हम तो बस बच्चा पैदा करने के लिए सेक्स करते हैं।
मगर तुम्हारा अंदाज़ बहुत ही अलग है नेहा।”
फिर वो बोला,
“इस बार मैं नहीं काटूँगा।”
ये कहकर वो वापस नेहा के चेहरे के ऊपर झुक गया।
इस बार किस और भी ज़्यादा इंटेंस था।
नेहा की लंबी गर्दन पर नीली नसें हर किस के साथ टेंस हो रही थीं, फिर रिलैक्स हो जाती थीं।
किस खत्म होने के बाद दोनों एक-दूसरे को देखने लगे — जैसे प्यार में डूबे लवर देखते हैं।
फिर उस आदमी का ध्यान मुझ पर गया।
वो देखना चाहता था कि मैंने देखा या नहीं।
उसने मुझे देखा, मुस्कुराया।
फिर उसकी नज़र नीचे गई — मेरे हाथ पर, जो नेहा की चूत पर था।
उसने कहा,
“अरे... नीचे ये क्या हो रहा है?”
उसने मेरा हाथ देखा, जो नेहा की जाँघों के बीच में था।
नेहा की पैंटी आधी खिसकी हुई थी।
उस आदमी ने अपना हाथ बढ़ाया — इस बार सीधे नेहा की चूत की तरफ।
पहले उसने नेहा की जाँघों को कसकर पकड़ा — अपने पतले, हल्के दिखने वाले हाथों से।
फिर उसने नेहा की टांगों को थोड़ा और खोल दिया।
ये पहला मौका था जब मैं किसी और आदमी को अपनी बीवी की नंगी चूत की तरफ बढ़ते हुए देख रहा था।
मैं कभी उसकी उँगलियों को फील करता, कभी नेहा की चूत को।
कभी उसके हाथ को देखता, कभी नेहा के चेहरे को।
नेहा के चेहरे पर कोई खास भाव नहीं था।
वो बस देख रही थी कि ये सब क्या हो रहा है।
वो फील कर रही थी — दो मर्दों के हाथ अपनी चूत पर।
हमारी उँगलियाँ उसकी चूत पर अलग-अलग जगह जा रही थीं।
एक तरह की फ्रेंडली लड़ाई चल रही थी।
एक पति और एक नए lover की उँगलियों की फ्रेंडली लड़ाई।
मेरा एक हाथ स्टीयरिंग पर था और गाड़ी धीरे-धीरे चल रही थी।
दूसरा हाथ वहाँ।
नेहा बिल्कुल स्टैचू की तरह आधी लेटी हुई थी।
वो हम दोनों को देख रही थी।
एक अजीब तरह की मस्ती दोनों मर्दों के बीच चल रही थी, जो नेहा को नई उत्तेजना दे रही थी।
फिर मैंने कुछ ऐसा किया जिससे नेहा अचंभित होकर मेरी तरफ देखने लगी।
मैंने अपनी उँगलियों से नेहा की चूत की लेबिया को हल्के से खोल दिया — उस आदमी के लिए।
उसकी उँगली अब नेहा के clit (दाने) को छेड़ने लगी, कुरेदने लगी।
ये देखकर नेहा की कोई पुरानी फैंटसी पूरी हुई लग रही थी।
उसने जोरदार “आआआह्ह्ह्ह...” की आवाज़ के साथ अपना पहला ऑर्गेज्म announce किया।
एक क्यूट सी “आह्ह...” के साथ।
हम दोनों मर्दों ने वो फील किया — उसकी बॉडी काँप रही थी और एक गर्म, चिपचिपा द्रव्य उसकी चूत से निकल रहा था।
नेहा की साँसें और तेज़ हो चुकी थीं।
जाँघें गीली।
सीट भी गीली हो चुकी थी।
अब उसने हम दोनों को देखा। थोड़ी देर तक।
गाड़ी अभी भी चल रही थी।
शाम से ही नेहा के लिए ऑर्गेज्म बिल्ड हो रहा था। वो बहुत ज़्यादा हॉर्नी फील कर रही थी।
पर नेहा के साथ ये खास बात थी कि मुझे पता था — ये उसका पहला ऑर्गेज्म नहीं था इस शाम।
वो और मैनेज कर सकती है। यही उसकी खास बात थी।
मगर अभी इस टाइम पर तो वो बस लेटी हुई थी।
दोनों हाथ अभी भी अपनी चूत पर थे।
वो बस वही फील कर रही थी।
लंबी-लंबी साँसें ले रही थी।
अक्सर ऐसी सिचुएशन में जब कोई ऑर्गेज्म अचीव कर लेता है, तो उसे आसपास की सिचुएशन का अंदाज़ा होने लगता है।
ये अक्सर मेरे साथ होता था।
मगर नेहा अभी भी उसी एक पोज़ में रहना चाह रही थी।
नेहा ने सबसे पहले मेरी तरफ देखा।
बहुत धीरे से, सिर्फ मुझे सुनाई देने वाली आवाज़ में फुसफुसाकर बोली,
“सैम... ये बहुत शानदार था... तुम मेरी ज़िंदगी में हो, इसके लिए थैंक यू...
मैंने पहले कभी ऐसा कुछ महसूस नहीं किया।”
उसने ये सब इंग्लिश में कहा था, लेकिन मैं समझ गया कि वो सिर्फ मुझसे बात करना चाहती थी।
फिर साँसें संभालते हुए उसने उस आदमी की तरफ देखा... लेकिन कुछ नहीं बोली।
थोड़ी देर शांति रहने के बाद उस आदमी ने मुस्कुराते हुए कहा,
“झड़ गई कुतिया... बस उँगलियों से।
सोच जब मेरा लंड अंदर जाएगा तो फिर क्या होगा।”
नेहा उसे बस शांत भाव से देख रही थी।
शायद वो उससे कुछ और गहरी, भावनात्मक बात सुनना चाहती थी, लेकिन उस आदमी के मुँह से वही वाली बात निकली।
खिर उसी की इन बातों की वजह से वो मेरी बीवी के उन हिस्सों को छू, चूम और चूस पाया था, जिन्हें बस देखने भर से लोगों की पैंट में टेंट बन जाता है।
तो वो और कुछ बोलने का ट्राई भी करता।
फिर नेहा हल्के से मुस्कुराई।
नेहा मुस्कुराई।
धीरे से बोली,
“कहाँ है?”
वो नहीं समझा,
“क्या?”
नेहा ने शरारत भरी आवाज़ में कहा,
“अरे च... बुद्दू... वो कहाँ है जिससे तुम मुझे ज़्यादा मजा दोगे?”
वो साफ़-साफ़ उसके लंड की बात कर रही थी।
नेहा अब आगे की तरफ देख रही थी — सड़क की तरफ।
अब थोड़ा ट्रैफिक शुरू हो गया था। पास-पास गाड़ियाँ चल रही थीं।
उसने ऊपर की ड्रेस थोड़ी ठीक कर ली थी, जिससे उसके बूब्स ढक गए थे।
मगर ड्रेस की पतली डोरियाँ अभी भी कंधों पर नहीं चढ़ी थीं।
कंधे अभी भी नंगे थे।
फिर नेहा ने अपना दायाँ हाथ पीछे किया — बिना देखे।
हवा में एक gesture किया, जैसे वो कुछ पकड़ना चाहती हो।
ये उस आदमी के लिए साफ़ इशारा था।
वो तुरंत आगे आ गया।
उसकी दोनों कोहनियाँ हमारे हेडरेस्ट पर टिक गईं।
उसकी गांड हवा में थी।
पूरी तरह अनकम्फर्टेबल पोजीशन में था, लेकिन उसका टारगेट क्लियर था।
नेहा का हाथ अब उसके लंड की तरफ बढ़ गया।
मैंने रियर व्यू मिरर में देखा —
नेहा का हाथ उस आदमी की पैंट के ऊपर से उसके लंड को पकड़ रहा था।
वो धीरे-धीरे उसे सहला रही थी।
उस आदमी के दोनों हाथ ऊपर थे, इसलिए अब जो करना था, सब नेहा के हाथ में था।
नेहा ने पहले धीरे-धीरे उसकी लंबाई पता की।
वो अपनी उँगलियों से पैंट के ऊपर से ही उसके लंड की लंबाई नाप रही थी।
मैं बार-बार रियर व्यू मिरर की तरफ देख रहा था।
फिर सड़क पर किसी को पास करने का मौका आया।
और ठीक उसी पल पीछे से मुझे आवाज़ आई — ज़िप खुलने की।
मेरा दिल ज़ोर से धड़क गया।
नेहा उसका लंड बाहर निकालने वाली थी।
ये पहला मौका था जब वो किसी और का नंगा लंड अपने हाथ में लेने वाली थी।
गोवा में मैं ये पल मिस कर चुका था।
इस बार मैं अच्छे से देखना चाहता था।
मैंने तुरंत नेहा से कहा,
“वेट...”
नेहा ने धीरे से जवाब दिया,
“ओके।”
उस आदमी को कुछ समझ नहीं आया।
ज़िप तो खुल गई थी, लेकिन नेहा का हाथ अंदर नहीं गया।
उसने हैरान होकर पूछा,
“क्या हुआ?”
मैंने शांत स्वर में कहा,
“गाड़ी थोड़ा साइड में ले लेने दो।”
उस आदमी ने हल्का सा हँस दिया और बोला,
“भेनचोद... ठीक है।”
नेहा भी थोड़ा मुस्कुराई।
जैसे ही मैंने गाड़ी साइड में लगा दी, मैंने तुरंत पीछे मुड़कर देखा।
नेहा शायद मुझे देख रही थी।
जब मैंने देखा, तो ठीक उसी पल उसका हाथ उस आदमी की खुली हुई ज़िप के अंदर जा रहा था।
उसका हाथ धीरे-धीरे अंदर घुसा।
नेहा की पतली, गोरी उँगलियाँ उस आदमी की पैंट की खुली ज़िप के अंदर जा रही थीं।
ये नज़ारा बहुत अजीब और उत्तेजक था — जैसे कोई साँप के बिल में हाथ डाल रहा हो।
उसके हाथ अंदर घुसते ही उस आदमी के मुँह से निकला,
“भेनचोद...!”
नेहा खिलखिलाकर बोली,
“और काटोगे जीभ?”
लग रहा था कि नेहा ने उसके अंड को पकड़ लिया है — हल्का-सा दबाव देते हुए।
जैसे जीभ काटने की सज़ा दे रही हो।
उस आदमी की साँस अटक गई।
वो हल्का सा कराहा, लेकिन हँस भी रहा था।
नेहा का चेहरा मेरे बहुत करीब था।
उसकी साँस मेरे गाल पर महसूस हो रही थी।
नेहा का हाथ सच में किसी बिल की तरफ आधा अंदर चला गया था।
साफ़ देख सकता था — उसका गोरा, पतला हाथ उस आदमी की पैंट के अंदर था, लगभग उसकी आधी जाँघ तक।
वहाँ उसका सख्त, भारी लंड लटका हुआ था।
नेहा उसे उँगलियों से पकड़कर बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी।
मगर हर बार जब वो लंड को ऊपर खींचती, साथ में उसकी पैंट भी ऊपर चढ़ जाती।
लंड बहुत मोटा और भारी था, इसलिए आसानी से बाहर नहीं आ रहा था।
नेहा ने थोड़ा और झुककर कोशिश की।
2-3 बार वैसी कोशिश करने के बाद नेहा ने हल्के से frustration के साथ कहा,
“Ohho... Help करो ना...”
वो मदद चाह रही थी कि कोई पैंट को नीचे पकड़ ले, ताकि वो लंड आसानी से बाहर निकाल सके।
उस आदमी ने तो दोनों हाथों से खुद को हवा में टिका रखा था।
मतलब नेहा मुझे बोल रही थी।
इतनी आसानी से अपने पति से मदद माँग रही थी — जैसे कह रही हो, “अरे कपड़े सुखाने में मदद कर दो ना।”
मैंने उसकी तरफ देखा।
उसकी स्ट्रगल को मैं समझ गया।
मैंने अपना दायाँ हाथ पीछे ले जाकर उसकी पैंट को घुटनों की तरफ से पकड़ लिया और नीचे की तरफ खींच दिया।
पैंट अब अच्छे से नीचे हो गई।
नेहा ने तुरंत मौका पकड़ा।
उसने उस आदमी के मोटे, भारी लंड को पकड़ा और धीरे-धीरे बाहर निकाल लिया।
लंड धीरे-धीरे बाहर निकल रहा था।
नेहा ने उसे बेस से अच्छे से पकड़ रखा था।
वो उसे निकाल रही थी — जैसे मिशन पर हो।
मुड़-मुड़कर, जितना भी जोर लगे, चाहे उस आदमी को दर्द ही क्यों न हो जाए।
नेहा पूरी तरह फोकस में थी।
आखिरकार सफलता मिल गई।
बिल से साँप बाहर आ गया।
भारी।
पतले शरीर में लटका हुआ।
इतना ज़्यादा बड़ा नहीं जितना पोर्न में काले लोगों का दिखाते हैं, लेकिन अजीब ज़रूर था।
आईसक्रीम कैंडी जैसा।
मोटा... चौड़ा... लंबा... चपटा।
हेड थोड़ा नुकीला, जैसे आइसक्रीम कैंडी का सिरा।
लंड पर काली खाल, लेकिन टोपा हल्का गुलाबी-रानी कलर का।
जैसे ही वो पूरा बाहर निकला, नेहा ने कुछ पल तक बस उसे देखा।
नेहा ने अपना चेहरा मेरे गाल के और करीब ले आया।
हम दोनों के चेहरे आगे वाली सीटों के गैप में थे, और हम दोनों उसी भारी लंड को देख रहे थे।
उसने अपना पतला, गोरा हाथ लंड के बेस पर रखा — पूरी मुट्ठी में भर लिया।
उसकी नसें हल्की नीली दिख रही थीं।
फिर बहुत धीरे-धीरे, लगभग सहलाते हुए, अपना हाथ नीचे की तरफ सरकाने लगी... लंड के हेड तक।
लंड का सिर पहले से ही चिपचिपा और गीला था — प्रीकम की एक चमकदार परत चढ़ी हुई थी।
ये सब करते हुए नेहा मेरे गाल पर हल्के-हल्के, नरम-नरम किस कर रही थी।
हर किस के साथ उसकी गर्म, तेज़ साँस मेरे गाल पर पड़ रही थी।
जब उसका हाथ लंड के हेड तक पहुँचा, तो उसने उसे ऊपर उठा दिया — ठीक 90 डिग्री एंगल पर।
अब वो मोटा, चपटा, गीला लंड मेरे चेहरे के बिल्कुल सामने था।
गाड़ी में हल्का सा झटका भी लगता, तो वो मेरी ठोड़ी को छू जाता।
मैं जादू की तरह देख रहा था — नेहा की पतली, नाजुक, नीली नसों वाली उँगलियाँ उस भारी लंड पर काम कर रही थीं।
उसने लंड को धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करना शुरू किया।
बहुत ही slow, sensual तरीके से।
हर स्ट्रोक के साथ उसकी उँगलियाँ लंड की पूरी लंबाई को नाप रही थीं।
हेड पर पहुँचकर वो हल्का सा दबाव देती, फिर नीचे की तरफ सरकाती।
प्रीकम की वजह से पूरा लंड चमक रहा था।
उसकी उँगलियाँ गीली हो चुकी थीं।
उसका लंड का टोपा अब मेरी आँखों के बिल्कुल सामने था।
नेहा की हर हल्की-हल्की ऊपर-नीचे हरकत के साथ वो छोटा-सा छेद हल्का सा खुलता और एक चिपचिपी, पारदर्शी प्रीकम की बूँद बाहर आ जाती।
मैं उसे घूर रहा था।
तभी अचानक एक तेज़ हॉर्न की आवाज़ आई।
हम अभी भी रोड के किनारे खड़े थे। बारिश हो रही थी। विजिबिलिटी बहुत कम थी। किसी गाड़ी के हमें टकराने का खतरा था।
उस आदमी ने हाँफते हुए कहा,
“बाबू... यहाँ गाड़ी खड़े रखना ठीक नहीं...
गाड़ी चलाते रहो...
और नेहा तू लगे रह... अच्छा कर रही है तू रंडी।”
नेहा ने मेरी तरफ देखा।
उसके होंठ हल्के से खुले हुए थे।
उसका हाथ अभी भी उस भारी लंड को धीरे-धीरे सहला रहा था।
मैंने गाड़ी स्टार्ट की और धीरे-धीरे आगे बढ़ा दी।
नेहा ने बिना रुके अपना काम जारी रखा।
उसका हाथ अब थोड़ा तेज़ हो गया था।
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Yr mja nhi aaya story ko lamba mt kheecho thoda erotic seen laao jaise neha nude ho car mai or security officer rok le ya road pr car rukke front seat se back seat pr door open krke nude jaaye ya barish mai nude sex ya koi dkhle
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story is very good to read..
pls include some exhibitionism too..
road par nanga kar do neha ho.. thodi sharm bhahar aane do... let someone else also see her nude..
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मैंने गाड़ी स्टार्ट कर दी और धीरे-धीरे आगे बढ़ा दी।
सड़क अब थोड़ी खाली थी, लेकिन मैं स्पीड बहुत कम रखे हुए था।
नेहा का हाथ अभी भी उस आदमी के लंड को हिला रहा था।
वो अपनी उँगलियों की पूरी कला दिखा रही थी —
कभी पूरी मुट्ठी से लंबे-लंबे स्ट्रोक देती,
कभी सिर्फ अँगूठे और तर्जनी से हेड को घुमाती,
कभी हथेली से पूरा लंड सहलाती,
कभी टोपा को हल्का-हल्का दबाकर प्रीकम निकालती।
हर बार जब वो हाथ ऊपर ले जाती, लंड का गीला टोपा मेरे रियर व्यू मिरर में साफ़ दिख जाता।
थोड़ी-थोड़ी दूर चले ही थे कि पीछे से उस आदमी की आवाज़ आई,
“अरे... क्या नाम है तुम्हारा? जो भी हो बाबू, गाड़ी थोड़ा साइड में रोको।”
नेहा का हाथ अभी भी उसके लंड पर था, लेकिन उसकी गति थोड़ी धीमी हो गई।
मैंने रियर व्यू मिरर में देखा।
“यहाँ पास में एक तालू का ठेका है।
तुम चाहो तो मैं वहाँ से थोड़ी सी दारू लेकर आ सकता हूँ।
मेरे घर के आसपास कोई ठेका नहीं है और बारिश भी बहुत हो रही है।
बस दो मिनट लगेंगे... मैं भागकर जाता हूँ और भागकर ले आता हूँ।”
उस आदमी की बात सुनकर हम दोनों कुछ पल चुप रहे।
नेहा ने मेरी तरफ देखा और थोड़ा शर्माते हुए बोली,
“सैम... क्या तुम लेकर आ सकते हो?
गाड़ी के टिक्की में छाता रखा हुआ है।
मिनट-दो मिनट में तुम आ जाओगे ना?”
उसकी आवाज़ में एक अजीब सी रिक्वेस्ट थी।
जैसे वो मुझे गाड़ी से बाहर भेजना चाहती हो।
नेहा की ये रिक्वेस्ट सुनकर मेरा दिल एकदम से धड़कने लगा।
वो मुझे गाड़ी से बाहर भेजना चाहती थी — उस आदमी के साथ अकेली छोड़कर। ये बात मुझे अजीब लग रही थी, लेकिन नेहा ने मुझे रिक्वेस्ट की थी।
तभी उस आदमी ने कहा, “रुको।”
मैंने सोचा शायद उसे ये पसंद नहीं आया। लेकिन उसका इरादा कुछ और था।
उसने नेहा की तरफ देखकर बोला, “नेहा, मेरी जेब में हाथ डालो।”
नेहा ने थोड़ा मुस्कुराते हुए उसकी पैंट की जेब में हाथ डाला। लंड तो पहले से बाहर था, इसलिए जेब में हाथ डालते ही नेहा की कल्लियाँ एकदम हिलने लगीं।
उसकी जेब में से आधी बीड़ी का बंडल निकला
नेहा ने हैरानी से कहा, “ये क्या है?”
उस आदमी ने हँसते हुए कहा, “इस वाली जेब में नहीं, दूसरी वाली जेब में हाथ डालो।”
नेहा ने दूसरी जेब में हाथ डाला और एक 500 का नोट बाहर निकाला।
उस आदमी ने नोट नेहा को देते हुए कहा, “ये ले जाओ, 8:00 पीएम ले आना।”मुझे देखकर उसकी हँसी भी आई और थोड़ा गुस्सा भी आया। मन में सोचा — होटल में 5000 रुपये का बिल भर चुका हूँ, और ये साला 500 रुपये की दारू के लिए ये सब कर रहा है।
मैंने शांत स्वर में कहा,
“नो थैंक यू... मैं ले आऊँगा।
हम अपने लिए भी कुछ बीयर ले आएँगे।”
मैं जल्दी से गाड़ी से उतरा और डिक्की की तरफ गया। बारिश तेज़ थी। जैसे ही मैंने डिक्की का दरवाज़ा खोला, छाता निकालने के लिए, मेरी नज़र पीछे गई।
मैंने देखा कि वो आदमी, जिसने दोनों हाथ सीट बेल्ट पर टिका रखे थे, अब एक हाथ हटाकर नेहा के बाल पकड़ चुका था।
और वो दोनों पहले से ही जोर-जोर से किस कर रहे थे।
मेरे गाड़ी से उतरने का इंतज़ार भी नहीं किया।
जैसे ही मैंने दरवाज़ा खोला, उस आदमी ने नेहा के बाल खींचकर उसे अपने मुँह से चिपका लिया था।
नेहा भी पूरी तरह उस किस में खो गई थी।
दोनों ने मेरी तरफ ज़रा भी ध्यान नहीं दिया।
मुझे लगा था कि शायद नेहा कोई बात करेगी — “आराम से जाना”, “बारिश में सावधानी से”, “जल्दी आना”... कुछ भी।
लेकिन नेहा तो बस उस आदमी के साथ किस में डूब गई थी।
मैं डिक्की के सामने खड़ा था, बारिश में भीगता हुआ, और पीछे मेरी बीवी किसी और के साथ गहरे किस में व्यस्त थी।
मैंने छाता निकाला और धीरे से डिक्की बंद की।
जैसे ही मैं छाता लेकर ठेके के अंदर घुसा, बारिश और तेज़ हो गई।
मैंने तुरंत पीछे मुड़कर गाड़ी की तरफ देखा।
बारिश इतनी तेज़ थी कि गाड़ी के अंदर का कुछ भी साफ़ दिखाई नहीं दे रहा था। सिर्फ गाड़ी की आउटलाइन दिख रही थी।
मैंने मन ही मन सोचा — अच्छा ही है।
बाहर से अब कुछ भी दिखने वाला नहीं है।
गाड़ी ठेके से काफी दूर खड़ी थी, और बारिश की वजह से विजिबिलिटी इतनी कम थी कि कोई भी जानबूझकर देखे बिना कुछ समझ नहीं सकता था।
मैं ठेके के काउंटर पर पहुँचा।
अंदर से एक आवाज़ आई, “क्या चाहिए भाई?”
ठेके से सामान लेकर मैं वापस लौटने लगा।
एक व्हिस्की की बोतल उसके लिए, 4 बीयर मेरे और नेहा के लिए। प्लास्टिक के बैग में सब रखकर मैं बारिश में छाता खोले धीरे-धीरे गाड़ी की तरफ बढ़ने लगा
मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।
हर कदम के साथ एक ही सवाल दिमाग में घूम रहा था — अंदर जाकर क्या देखने को मिलेगा?
जैसे ही मैंने ड्राइवर सीट का दरवाज़ा खोला, मैं देखते ही अचंभित हो गया।
पास वाली सीट पर नेहा नहीं थी।
जैसे ही मैं गाड़ी में बैठा और पास वाली सीट पर अपनी सारी दारू की बोतलें रखीं, मैंने पीछे की तरफ देखा।
पीछे का नज़ारा देखकर मैं एक पल के लिए स्तब्ध रह गया।
नेहा पीछे वाली सीट पर जा चुकी थी।
पीछे वाली सीट पर...
नेहा घुटनों के बल बैठी हुई थी।
उसके हील वाले सैंडल ऊपर थे।
उसके हील वाले सैंडल ऊपर थे।
उसकी परफेक्ट शेप वाली, गोल और भरी हुई गांड हील्स पर टिकी हुई थी।
उसका सिर पीछे झुका हुआ था — गाड़ी की छत को छू रहा था।
बाल थोड़े गीले और बिखरे हुए थे।
शायद बारिश में बाहर जाने की वजह से।
दोनों बूब्स फिर से बाहर थे।
उस आदमी का मुँह अब नेहा के लेफ्ट बूब पर था — ठीक वही कर रहा था जो थोड़ी देर पहले राइट बूब पर कर रहा था।
जोर-जोर से चूस रहा था, निप्पल को मुँह में लेकर खींच रहा था।
नेहा के दोनों हाथ उस आदमी के बालों में थे।
उस आदमी के दोनों हाथ नेहा की जाँघों पर थे, उन्हें फैलाए हुए।
नेहा ने मेरी तरफ देखा।
बिना किसी शर्म के, सीधे मेरी आँखों में देखते हुए बोली,
“बेबी... ये बोल रहे थे कि मैंने तुम्हारे दूसरे बूब्स का स्वाद तो चखा ही नहीं...
सीट पर बैठे-बैठे बहुत मुश्किल हो रही थी... तो मैं पीछे आ गई...
सही किया ना मैंने बेबी?”
नेहा मेरी तरफ देख रही थी, मेरे भाव समझने की कोशिश कर रही थी।
मेरे चेहरे पर इतने सारे इमोशन्स के कारण कोई खास एक्सप्रेशन नहीं था।
मगर उस आदमी को ये पसंद नहीं आया कि नेहा का ध्यान मेरी तरफ रहे।
वो नेहा को अपने जादू में रखना चाहता था।
उसने नेहा के निप्पल को चूसते हुए ही पूछा,
“ये उससे ज़्यादा tasty है?”
नेहा हँसी।
जैसे वो पहले भी इस पर बात कर चुकी हो।
“बुद्दू... ऐसा थोड़ी होता है...
सैम के एक बूब्स दूसरे से अलग taste करेंगे?
ये भी ना... कुछ भी बोल रहे हो।”
मैं कुछ नहीं बोल पाया।
उस समय उस आदमी ने बूब्स चूसना छोड़कर मेरी तरफ देखा।
वो मेरे एक्सप्रेशन पढ़ना चाहता था।
मैंने बस “हम्म...” में जवाब दिया।
उस आदमी के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान थी — वो मुस्कान जो कह रही थी,
“भले ही ज़िंदगी के हर मामले में तू मुझसे आगे है, लेकिन इस पल... मैंने तुझसे जीत लिया है।”
फिर वो फिर से नेहा के बूब्स पर लग गया।
अब वो लेफ्ट बूब को वही ट्रीटमेंट दे रहा था जो थोड़ी देर पहले राइट बूब को दे रहा था — जोर-जोर से चूसना, निप्पल को मुँह में लेकर खींचना।
मैंने गाड़ी चलाते हुए एक बीयर की कैन खोल ली।
गला सूख रहा था। जो कुछ मैं देख रहा था और सुन रहा था, उससे मेरा गला पूरी तरह सूख चुका था।
मेरी पास वाली सीट पर अब नेहा नहीं थी।
वहाँ बोतलें और आधा बीड़ी का बंडल पड़ा था।
मैंने सोचा — नेहा ने उस बीड़ी पीने वाले आदमी का स्वाद लिया।
मुझे पता था उसका स्वाद कैसा होता है।
हॉस्टल के दिनों में जब पैसे खत्म हो जाते थे, मजबूरी में मैं भी बीड़ी पी चुका था।
मुँह कड़वा हो जाता था।
और नेहा ने बिना हिचकिचाहट के अपना मुँह उसके मुँह में डाल दिया।
मैं अपनी ही बीवी को समझ नहीं पा रहा था।
वो हर एडवेंचर के लिए तैयार लग रही थी।
हमने नियम बनाया था — आज सिर्फ मिलना है।
मौका मिला तो कुछ-कुछ हो सकता है।
लेकिन आज चुदाई का दिन नहीं था।
हम दोनों सहमत थे।
नेहा ने हँसते हुए कहा था कि रेस्टोरेंट में क्या ही हो पाएगा।
वैसे भी उसे हमारा पहला एक्सपीरियंस किसी अच्छे होटल के गद्देदार बिस्तर पर चाहिए था।
मगर अब मुझे लग रहा था कि उसकी ये हाई-क्लास बीवी चुदाई कि कहीं मेरी कार की पिछली सीट पर ही तो नहीं होने वाली।
“मुझे भी...” नेहा ने कहा।
मैंने समझा वो बीयर माँग रही है।
मैंने अपना ही कैन पीछे की तरफ बढ़ा दिया।
मगर रियर व्यू मिरर में मुझे सिर्फ नेहा के बूब्स दिख रहे थे।
वो आदमी वहाँ नहीं था।
मैंने मिरर को थोड़ा नीचे एडजस्ट किया।
अब साफ़ दिख रहा था।
नेहा ने अपनी टांगें असहज तरीके से फैला रखी थीं।
उस आदमी का सिर नेहा की जाँघों के बीच में था।
वो बारी-बारी से दोनों जाँघों को चाट रहा था।
उसकी उँगलियाँ नेहा की चूत में थीं — धीरे-धीरे अंदर-बाहर हो रही थीं।
नेहा की साँसें तेज़ थीं।
उसका एक हाथ उस आदमी के सिर पर था, उसे और नीचे दबा रही थी।
मुझे समझ नहीं आ रहा था कि कार में ये सब कैसे हो पा रहा है।
लेकिन थरक जब सिर चढ़ जाती है, तो आदमी कुछ भी कर लेता है।
अब धीरे-धीरे आबादी वाला इलाका शुरू हो गया था। रोशनी बढ़ गई थी, लोग दिखने लगे थे।
मैंने थोड़ा अलर्ट होकर पीछे कहा,
“तुम्हारा घर कहाँ है?”
उस आदमी ने हँसते हुए जवाब दिया,
“अरे यार... मजा आ रहा है भेनचोद... तू दारू तो खत्म कर... मुझे भी दे एक... फिर चलते हैं घर।”
मैंने शांत लेकिन साफ़ स्वर में कहा,
“अभी ऐसे नहीं... यहाँ देख सकते हैं लोग। पहले तुम ठीक से बैठो।”
मैं जलन में नहीं बोल रहा था — सच बोल रहा था। बाहर भीड़ थी, गाड़ियों की आवाज़ें आ रही थीं।
उस आदमी ने फिर कहा,
“अरे गाड़ी लेफ्ट में ले... मैं ले चलता हूँ... अपने अड्डे...
वहाँ कोई नहीं आता... मैं वहाँ अक्सर दारू पीता हूँ...
वहाँ चैन से बैठकर पी सकते हैं, कोई टेंशन नहीं।”
दोनों अब सीधे बैठ गए थे। बाहर से देखने वाला कोई भी सोचता कि पीछे दो लोग आराम से बैठे हैं और ड्राइवर गाड़ी चला रहा है।
मगर नीचे... नेहा का हाथ अभी भी उस आदमी के नंगे लंड को धीरे-धीरे सहला रहा था।
वे दोनों बातें कर रहे थे, जैसे सब कुछ नॉर्मल हो। दोनों के हाथ में ठंडी बीयर की कैन थी।
उस आदमी ने फिर कहा,
“चुदेगी?”
नेहा ने हल्के से मुस्कुराते हुए जवाब दिया,
“नहीं... आज नहीं।”
“फिर कब?”
“नेक्स्ट टाइम।”
“कहाँ?”
“कोई न कोई जगह मिल ही जाएगी... सेफ जगह, जहाँ सब खुलकर कर सकें... मगर यहाँ नहीं।”
उस आदमी ने थोड़ा और आगे झुककर कहा,
“मैं तुझे तेरे घर में चोदना चाहता हूँ... तेरे बिस्तर पर... इस चूतिये के सामने।”
ये सब वो बोल रहा था जो मैं पोर्न में बुल के मुँह से सुनता था। लग रहा था कि उसने भी बहुत पोर्न देखी है।
वैसे भी लोग चैट तक तब पहुँचते हैं जब पोर्न से बोर हो जाते हैं।
नेहा खिलखिलाकर हँसी।
“अच्छा ठीक है।”
उस आदमी ने फिर पूछा,
“गांड में लेती है?”
नेहा ने तुरंत सिर हिलाया,
“नहीं... और ये तो बिल्कुल नहीं।”
उसने उस आदमी के लंड को देखकर कहा।
हमने एक बार ट्राई किया था, लेकिन नेहा को एनल सेक्स बहुत घिनौना लगता था। वो कभी तैयार नहीं हुई थी।
उस आदमी ने बीच-बीच में मेरे कंधे पर हल्का-हल्का थपकी मारकर रास्ता बताना शुरू कर दिया।
“सीधे... हाँ... अब बाईं तरफ... नहीं, और आगे...”
कुछ देर बाद हम एक जगह पहुँच गए।
दोनों तरफ पुराने-पुराने घर थे, ज्यादातर ताले लगे हुए।
सामने एक ऊँची दीवार।
दाईं तरफ एक पतली-सी गली।
उस आदमी ने धीरे से कहा,
“बस... यहीं।
अब पीछे देखते रहना... कोई आता दिखे तो राइट में मुड़कर सीधे हाईवे की तरफ...
वैसे यहाँ कोई नहीं आता।”
गाड़ी अब बहुत ही सुनसान जगह पर थी।
बारिश की वजह से आसपास का माहौल और भी अंधेरा और गीला लग रहा था।
बीच-बीच में उनकी बातें चल रही थीं।
उस आदमी ने पूछा,
“और मुँह में?”
नेहा थोड़ा शर्मा गई।
“ये... क्या पूछ रहे हो?”
उस आदमी ने हँसते हुए कहा,
“लेती है न... आजकल की सारी लड़कियाँ लेती हैं।”
नेहा ने कुछ जवाब नहीं दिया।
उस आदमी ने फिर कहा,
“मेरा तो किसी ने मुँह में लिया ही नहीं आज तक।”
उसने जैसे अपनी बीवी और घर की हालत बताई थी, उसके बाद ये सुनना कुछ भी अचंभित नहीं किया... मगर इस बारे में मैंने सोचा भी नहीं था।
नेहा ने cute अंदाज़ में कहा,
“अच्छा...”
फिर वो झुकी।
अब सब कुछ मेरे देखने के लिए आसान हो गया था।
मुझे सिर्फ पीछे नज़र रखनी थी — सारा कांड पीछे ही चल रहा था।
मेरी बीवी... एक हल्के-फुल्के आदमी के ऊपर चढ़ी हुई थी।
दोनों एक-दूसरे को गहरे किस कर रहे थे।
उसके हाथ उस आदमी के लंड पर ऊपर से नीचे जा रहे थे।
2 मिनट के लंबे किस के बाद नेहा ने उस आदमी के सीने पर हाथ रखकर उसे कार की सीट के कोने में धकेल दिया।
उसकी पैंट अब पूरी तरह गायब थी।
एक पाँव मेरी आगे वाली सीट पर, दूसरा नीचे।
टांगें खुली हुई थीं।
नेहा... मेरी हाई-क्लास बीवी...
उसकी आँखों में देखते हुए उस आदमी की जाँघों को सहला रही थी।
फिर वो नीचे झुकी।
धीरे-धीरे उस आदमी की जाँघों पर हल्के-हल्के किस करने लगी।
और आगे बढ़ती गई।
जब वो उसके लंड के बहुत करीब पहुँची — उसके चेहरे के बिल्कुल सामने —
नेहा ने धीरे से पूछा,
“सच में... किसी ने इसे मुँह में नहीं लिया?”
उस आदमी ने नेहा के बाल सहलाते हुए ना में सिर हिलाया।
नेहा का चेहरा उस आदमी के लंड के बिल्कुल सामने था।
उसकी साँसें उसके लंड को छू रही थीं।
उसके लंड वाले हिस्से को अच्छे से देखने के बाद लग रहा था कि वो किसी खास उम्मीद से नहीं आया था।
हम लड़कों को थोड़ी भी उम्मीद होती है तो कम से कम अपनी झाड़ी साफ़ कर लेते हैं।
मगर वहाँ घने, काले बाल थे... बीच-बीच में कुछ सफेद भी।
फिर नेहा ने धीरे से उससे कहा,
“अपनी गांड ऊपर करो मेरे लिए।”
उस आदमी ने अपनी कमर एडजस्ट करके निचला हिस्सा आगे बढ़ा दिया।
नेहा ने उसके लंड को मज़बूती से पकड़ लिया और बोली,
“अब बेहतर है।”
उसने अपनी बीयर की कैन से एक घूँट लिया।
ठंडी बीयर अभी भी उसके मुँह में थी।
फिर वो झुकी... और उस आदमी के लंड का टोपा अपने मुँह में ले लिया।
ठंडी बीयर की वजह से उस आदमी के शरीर में एक झटका सा लगा।
उसके मुँह से निकला,
“आह्ह्ह...!”
मेरे मुँह से भी अनायास ही कुछ निकल गया।
मैं अपनी बीवी को अपने सामने किसी और का लंड मुँह में लेते हुए देख रहा था...
और वो भी इस अदा से।
नेहा का मुँह झुका हुआ था।
उसके होंठों के कोनों से ठंडी बीयर धीरे-धीरे बह रही थी, जो पूरे लंड को गीला कर रही थी।
वो कभी-कभी बीयर को अपने मुँह में घुमाती, फिर लंड को चूसती।
ठंडी बीयर और गर्म लंड का मेल...
ये उसने मेरे साथ कभी नहीं किया था।
मैं बस देखता रह गया।
उस आदमी को ये नया फील बहुत अच्छा लग रहा था।
मेरी बीवी का गर्म मुँह और ठंडी बीयर की ठंडक — दोनों का मेल उसके चेहरे पर साफ़ दिख रहा था।
नेहा ने उसके लंड को मुँह में भर लिया — जितना हो सके।
फिर धीरे-धीरे, बहुत मीठे और sensual अंदाज़ में चूसने लगी।
वो उसे चूस रही थी जैसे कोई स्वादिष्ट, कीमती चीज़ हो।
कभी जोर से चूसती, कभी हल्का-हल्का ऊपर-नीचे करती, कभी सिर्फ टोपा को मुँह में लेकर चाटती।
एक बार उसने सिर पीछे खींचा और लंड को मुँह से बाहर निकाल दिया।
उस आदमी के चेहरे पर एक पल के लिए निराशा झलक गई।
लेकिन नेहा ने ऊपर देखकर मुस्कुराते हुए, अपनी जीभ से पूरे लंड को ऊपर से नीचे तक चाटा — जानबूझकर उसे tease करते हुए।
फिर सेक्सी, भरी हुई आवाज़ में बोली,
“आइस पसंद आया?”
उस आदमी ने बस हाँ में सिर हिलाया, साँसें तेज़ हो चुकी थीं।
नेहा ने फिर से लंड को मुँह में ले लिया — इस बार और गहरे, और धीरे।
उसके होंठों के कोनों से ठंडी बीयर की कुछ बूँदें बह रही थीं, जो लंड को और चमका रही थीं।
“बहुत ” उस आदमी ने जल्दी से जवाब दिया, “और चूसो...”
नेहा अब पूरी तरह सीट पर चढ़ गई थी।
दोनों घुटनों के बल, झुकी हुई।
उस आदमी ने अपना हाथ उसके पेट के नीचे से ले जाकर फिर से उसकी चूत पर रख दिया।
अब वो पहले से भी ज़्यादा गीली थी — एक बड़ी बूँद उसकी चूत से टपककर सीट पर गिर गई।
नेहा उसे चूस रही थी और साथ-साथ अपनी कमर हिला रही थी, उसकी उँगलियों पर अपनी चूत रगड़ रही थी।
सब कुछ चल रहा था, तभी उस आदमी की नज़र मेरी नज़र से टकराई।
उसने एक भौंह हल्का सा ऊपर उठाकर पूछा, जैसे कह रहा हो — “सब ठीक है ना?”
मैं कुछ नहीं बोला।
मैं तो बस उस सीन में पूरी तरह डूबा हुआ था।
ये मेरे सालों की मेहनत थी — नेहा को इस हाल में देखना।
मैं हर हल्की हरकत देख रहा था।
नेहा बार-बार कोशिश कर रही थी कि पूरा लंड मुँह में ले ले, लेकिन सिर्फ़ आधा ही जा पा रहा था।
मेरा तो पूरा अंदर चला जाता था, लेकिन उसका शेप और साइज़ अलग था।
फिर भी वो जबरदस्ती पूरा लेने की कोशिश नहीं कर रही थी।
उसे पता था कार में क्या हो सकता है।
कभी-कभी वो जीभ निकालकर लंड पर लगी बीयर को चाट लेती।
बीयर उसके अंडकोष तक चली गई थी।
नेहा को कोई आपत्ति नहीं थी।
वो उसके घने बालों वाले अंडकोष को भी चाट रही थी।
बीच-बीच में रुककर जीभ पर चिपके बालों को उँगलियों से निकालती और फिर लग जाती।
मेरे लिए ये सब बहुत ज़्यादा हॉट था।
अगर नेहा मेरे साथ करती तो शायद मैं अब तक झड़ चुका होता।
मगर उस आदमी में अभी झड़ने के कोई संकेत नहीं थे।
नेहा को समय का अंदाज़ा था, इसलिए अब वो चूसते हुए एक हाथ से उसकी लंड की खाल को ऊपर-नीचे करने लगी।
वो भी चाहती थी कि वो जल्दी झड़ जाए। कार में सब कुछ uncomfortable था।
थोड़ी देर बाद नेहा ने लंड को मुँह से निकालकर हाँफते हुए पूछा,
“रोक क्यों रखा है अपने आप को... बहाने दो... कोई बात नहीं, कार खराब हो जाएगी तो हम साफ़ करवा लेंगे?”
मेरी भोली बीवी को अभी भी लग रहा था कि मुझे अपनी कार गंदी होने से फर्क पड़ेगा।
उस आदमी ने हँसते हुए कहा,
“ऐसे नहीं होगा... मैंने बहुत मुठ मारी है ...”
नेहा ने मुस्कुराते हुए पूछा,
“अच्छा... तो फिर कैसे होगा?”
“ऐसा कर... तू अब लेट जा सीट पर...”
नेहा लेट गई।
टांगें खुलीं।
मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा।
उस आदमी ने नेहा की सीट के बिल्कुल किनारे पर घुटनों के बल बैठकर अपना लंड नेहा की चूत पर रगड़ा।
नेहा काँप गई।
उसने पूछा,
“डाल दूँ?”
नेहा ने शांत भाव से कहा,
“क्यों... वापस नहीं मिलना?”
जैसे उन्होंने मेरे बीयर लेने जाने के दौरान पहले ही इस पर बात कर ली थी। नेहा जानती थी — आज चुदाई का दिन नहीं था।
उस आदमी ने हल्का सा हँसा।
खिसकते हुए थोड़ा ऊपर आया।
एक टाँग ज़मीन पर, दूसरी नेहा और सीट के बीच में।
धीरे-धीरे ऊपर गया।
उसने अपना लंड नेहा के निप्पल पर रगड़ा।
थोड़ा और ऊपर गया।
नेहा ने मुँह खोल दिया।
उस आदमी का मोटा, गीला, चिपचिपा लंड धीरे-धीरे उसके मुँह में प्रवेश कर गया।
नेहा की आँखें आधी बंद हो गईं।
उसने होंठों को कसकर लंड के चारों तरफ लपेट लिया और चूसना शुरू कर दिया।
अब वो नेहा के चेहरे को चोद रहा था।
“घोक... घोक... घोक...” की गहरी, गीली, चिपचिपाती आवाज़ें कार के अंदर भर गई थीं।
हर बार जब नेहा सिर आगे ले जाती, लंड उसके मुँह में और गहरा चला जाता।
उसके गाल हल्के-हल्के फूल जाते, फिर सामान्य हो जाते।
उस आदमी ने हल्का दबाव डाला — लंड को और अंदर ले जाने की कोशिश की।
मगर पूरा अंदर उतारने का उसका इरादा नहीं था।
वो जानबूझकर नेहा की गहराई को टेस्ट कर रहा था, उसे tease कर रहा था।
शायद वो नेक्स्ट टाइम नेहा की पूरी क्षमता देखना चाहता था।
नेहा की साँसें नाक से तेज़ और भारी हो रही थीं।
उसकी लंबी गर्दन हर गहरे स्ट्रोक के साथ थोड़ी तन जाती।
कभी-कभी वो लंड को गले तक ले जाती, फिर थोड़ा पीछे खींच लेती।
उसके होंठों के कोनों से लार और बीयर का मिश्रण बह रहा था।
थोड़ी देर बाद उसने मुँह से निकाला।
थोड़ा पीछे हटा।
हाथ में लंड पकड़ा और हिलाने लगा।
“कहाँ?” नेहा ने पूछा।
“तेरे इस खूबसूरत चेहरे को खराब करना चाहता हूँ,” उसने बिना सोचे कहा।
जैसे ये उसने पहले से ही सोच रखा था कि उसे ये एक दिन करना ही है।
मगर इस पोजीशन में बैलेंस नहीं बन पा रहा था। लंड बार-बार इधर-उधर खिसक जा रहा था।
नेहा उसे देख रही थी।
उसकी इस दशा पर उसे थोड़ी हँसी आ रही थी।
सोच रही होगी — बेचारा झड़ना चाहता है पर पोजीशन नहीं बन पा रही।
नेहा ने solution देते हुए कहा,
“तुम आगे वाली सीट का सहारा ले लो।”
“तो फिर हिलाऊँगा कैसे?”
नेहा ने मेरी तरफ देखकर बहुत casually कहा,
“बेबी... तुम हिला दो ना... पकड़कर...
ये रिलीज होना चाहता है?”
मैं 30 सेकंड तक स्तब्ध रह गया।
नेहा ने फिर से साफ़ किया,
“अरे... jerk him off baby... please।”
मेरे हाथ काँप रहे थे।
मैंने बहुत धीरे से, जैसे कोई सपना देख रहा हो, अपना दायाँ हाथ पीछे बढ़ाया।
जैसे ही मेरी उँगलियाँ उस आदमी के लंड को छुईं, एक झटका सा लगा।
वो बहुत गर्म था... सख्त... नसें फूली हुईं... pulse तेज़-तेज़ धड़क रहा था।
मैंने पहली बार किसी और आदमी का लंड अपने हाथ में लिया था अपनी बीवी के सामने
मेरा दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था कि लग रहा था बाहर निकल आएगा।
जलन, शर्म, उत्तेजना — तीनों एक साथ मेरे अंदर घूम रहे थे।
मैंने grip ली।
उसकी मोटाई, उसकी गर्मी, उसकी नब्ज... सब मेरी हथेली में महसूस हो रहा था।
फिर मैंने धीरे-धीरे आगे-पीछे करना शुरू कर दिया।
उस आदमी ने सिर पीछे टिकाते हुए आह भरी,
“आह्ह... और तेज़ से... बस होने वाला है...
इस रंडी के चेहरे पर पॉइंट करना मादरचोद... आह्ह्ह... आह्ह्ह... आह्ह्ह्ह...”
उसकी आवाज़ में desperation थी।
मैं तेज़ी से हिलाने लगा।
मेरा हाथ अब पूरी तरह उसके लंड पर था।
हर स्ट्रोक के साथ वो और सख्त हो रहा था।
मेरे दिमाग में सिर्फ एक ही बात घूम रही थी —
ये मेरी बीवी के लिए है।
ये लंड मेरी बीवी के चेहरे पर झड़ने वाला है।
और मैं खुद इसे हिला रहा हूँ।
मुझे अपनी ही हरकत पर शर्म भी आ रही थी, लेकिन उत्तेजना इतनी ज़्यादा थी कि मैं रुक नहीं पा रहा था।
अचानक उस आदमी का शरीर तन गया।
“आह्ह्ह्ह... आ रहा है...!”
और वो झड़ गया।
पहला फव्वारा नेहा के चेहरे पर पड़ा — गर्म, मोटा और बहुत सारा।
दूसरा उसके गले पर।
तीसरा उसके बूब्स के बीच में।
नेहा आँखें बंद किए, मुँह थोड़ा खोले, सब ले रही थी।
मैं अभी भी उसका लंड पकड़े हुए था, और वो अंतिम बूँदें मेरी उँगलियों पर गिर रही थीं।
उस आदमी ने हाँफते हुए मुझे कहा,
“दबा... निचोड़ दे आखिरी बूंद तक...”
मैंने उसका लंड मज़बूती से दबाया।
आखिरी कुछ बूँदें नेहा के लाइट ब्राउन निप्पल पर गिर गईं।
फिर वो कुछ पल तक नेहा को देखता रहा।
उसके अपने वीर्य में नेहा का चेहरा, गला और बूब्स पूरी तरह सने हुए थे।
नेहा सच में बहुत खूबसूरत लग रही थी।
उसका चेहरा लाल हो चुका था, होंठ सूजे हुए थे, आँखें नम थीं।
उसके चेहरे पर, गले पर और बूब्स के बीच में वो गाढ़ा, सफेद तरल चमक रहा था।
नेहा ने धीरे से, नरम आवाज़ में मुझसे कहा,
“टिश्यू से मुझे साफ़ कर दो...”
मैंने डैशबोर्ड से वेट टिश्यू निकाला और अपनी बीवी की बॉडी से किसी और के वीर्य को साफ़ करने लगा।
ये बहुत अजीब feeling थी।
मेरी उँगलियाँ नेहा के गाल, ठोड़ी, गले और बूब्स पर घूम रही थीं, लेकिन मैं किसी और का cum पोंछ रहा था।
नेहा मेरी तरफ देख रही थी।
उसकी आँखों में शर्म, संतोष और थोड़ी नम्रता थी।
मैं चुपचाप उसे साफ़ करता रहा।
दोनों अब सीधे बैठ चुके थे।
नेहा अपनी ड्रेस को ठीक कर रही थी — डोरियाँ कंधों पर चढ़ा रही थी, स्कर्ट नीचे खींच रही थी।
जैसे ही नेहा ने आगे वाली सीट का गेट खोलकर बाहर जाने की कोशिश की, उस आदमी ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“थोड़ी देर और बैठो मेरे पास... मेरा घर बस पास में ही है।”
उसने मुझे इशारा किया — “चलो” — जैसे ड्राइवर को करते हैं।
मैंने गाड़ी स्टार्ट की।
कुछ देर बाद हम एक बड़े बंगले के पास पहुँचे।
उसने रुकने को कहा।
मैंने अचंभे में पूछा,
“ये तुम्हारा घर है?”
वो हँसा और बोला,
“मेरा इतना बड़ा घर होता तो मैं तेरी जैसी रंडी से शादी करता... और खुद चोदता... तेरी तरह नहीं।”
फिर थोड़ा गंभीर होकर बोला,
“मालिक बाहर रहता है।
हम servant quarter में रहते हैं।
किराया नहीं देना पड़ता, बस देखभाल करनी पड़ती है।”
फिर उसने नेहा की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए पूछा,
“अंदर चलेंगी? चाय पिलवाता हूँ...”
उसकी बीवी अंदर थी।
मुझे नेहा का जवाब पहले से पता था।
वो “नहीं” कहने वाली थी।
मगर नेहा ने हल्के से मुस्कुराकर कहा,
“हाँ... क्यों नहीं।”
मैंने सोचा — ये क्या है?
नेहा आज कुछ अलग ही मूड में थी।
उसे शायद ये uncomfortable, risky situation पसंद आ रही थी।
उस आदमी की बीवी से मिलना... जिसके पति का वीर्य अभी भी नेहा के बूब्स, गले और चेहरे पर चिपका हुआ था।
मैं चुपचाप गाड़ी खड़ी करके बैठा रहा।
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Yr Good bhut acchi story hai pr pls jldi update dia kro or long bhi ....... Love u yr writing skills bhai........update jldi kro
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Please update dear friend
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हम उस बंगले की तरफ बढ़े।
आस-पास कुछ लोग सड़क पर थे।
उन्होंने नेहा पर एक नज़र डाली — उसकी छोटी ब्लैक ड्रेस, नंगे कंधे और जाँघें देखकर उनकी नज़रें थोड़ी देर अटकी रहीं।
हम गेट के अंदर घुसे।
बंगले का साइज़ देखकर हम पीछे की तरफ गए।
वहाँ एक छोटा-सा कमरा बना हुआ था — servant quarter।
उस आदमी की बीवी बाहर बैठी कपड़े धो रही थी।
वो सच में वैसी ही थी जैसी उसने बताया था — या उससे भी ज़्यादा बदसूरत और कुपोषित।
बहुत कमज़ोर, पीली त्वचा, सूखे बाल।
एक पुरानी साड़ी पहने हुए थी।
जैसे ही हम पास गए, उसके शरीर से एक अजीब-सी पसीने और गंदगी की बदबू आई।
वो उठी।
उसने देखा — उसके पति के साथ दो लोग।
एक जवान लड़की छोटी ब्लैक ड्रेस में, नंगे कंधे और टाँगें।
वो चुपचाप नमस्ते करने लगी।
उसकी आवाज़ इतनी धीमी थी कि जैसे गले में आवाज़ ही न हो।
थोड़ी देर हम उसके कमरे में बैठे।
उसके दोनों लड़कों से मिले।
दोनों लड़के थे।
बड़ा वाला उम्र में छोटा था मगर हाइट में मुझसे भी लंबा।
वो 10th में पढ़ता था।
मैंने सोचा — मैं तो 8th में हिलाना शुरू कर चुका था।
उसकी नज़रें बार-बार नेहा की टाँगों पर जा रही थीं।
फिर उस आदमी ने कहा,
“साहब, ऊपर चलते हैं।”
उसने दो उँगलियों से इशारा किया — स्मोक करने का।
नेहा वहीं बैठी रही, उसकी बीवी से बात करने लगी — बहुत respect से।
मैं उसके साथ ऊपर गया।
वो मुझे एक पुरानी चारपाई दिखाते हुए आँख मारकर बोला,
“यहाँ लेटकर ...
मैं तुम्हारी बीवी से नीचे बात करता हूँ।”
हम नीचे आए तो नेहा भी तैयार खड़ी थी घर जाने के लिए।
उसकी बीवी ने जिद की, “आप लोग खाना खाकर जाइए।”
हमने मना कर दिया।
जब हम वापस जाने लगे तो वो आदमी और दोनों बच्चे गेट तक छोड़ने आए।
उसकी बीवी को हमने मना कर दिया कि वो अपना काम करती रहे।
अभी हमारे दिमाग में वो बिल्कुल नहीं था जो थोड़ी देर पहले कार में हुआ था।
सब कुछ सपना सा लग रहा था।
नेहा ने बंगले की तरफ देखकर पूछा,
“ये लोग कहाँ रहते हैं?”
उस आदमी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया,
“मालिक मुंबई में रहता है... आते-जाते रहते हैं।
ये servant quarter है।”
“अच्छा... बढ़िया घर बनाया है... काफी अमीर लगते हैं?”
उसने हल्की मुस्कान के साथ जवाब दिया,
“अंदर से भी बहुत खूबसूरत है।”
हम गेट तक पहुँचे।
दोनों बच्चे कार देखकर बहुत एक्साइटेड हो गए थे।
छोटा बच्चा बोला, “अंकल, ये आपकी कार है?”
मैंने हाँ में सिर हिलाया।
नेहा ने बच्चे के चेहरे के भाव पढ़े और बोली,
“तुम्हें राइड करनी है?”
एक पल के लिए मैंने नेहा को देखा।
सोचा — कितना सोचती है ये। सबका ख्याल रखती है।
मगर अगली ही लाइन में मेरे सारे भाव बदल गए जब उस आदमी ने कहा,
“साहब, क्या बच्चों को गाड़ी में एक राउंड करवा सकते हैं?
मैं तब तक मेमसाहब को अंदर से बंगला दिखा देता हूँ।”
मेरा दिल फिर एक बार धड़का।
मुझे लगा — कितना बड़ा चूतिया हूँ मैं... फिर से बातों में आ गया।
क्या ये दोनों का प्लान था?
मगर बच्चों को देखकर लग रहा था कि वो प्लान में शामिल नहीं हो सकते।
मैं कुछ कहता, उससे पहले दोनों बच्चे चिल्लाने लगे।
नेहा ने मुस्कुराते हुए कहा,
“Thank you baby... कितने अच्छे हो तुम।”
अभी तक मैंने हाँ या ना भी नहीं कहा था।
बच्चे जल्दी से कार में बैठ गए।
मैं फिर से ड्राइविंग सीट पर।
उस आदमी की बीवी दूर-दूर तक नहीं दिख रही थी।
वे दोनों बंगले देखने के लिए मुड़ चुके थे।
मैंने देखा — उस आदमी का हाथ हवा में था, जो नेहा की कमर या गांड की तरफ बढ़ रहा था।
और मैं सड़क पर निकल गया।
बच्चे चिल्ला रहे थे।
कभी सीट पर कूदते, कभी गाड़ी के शीशे ऊपर-नीचे करते।
मुझे नहीं पता था कि मैं उन्हें छोटा राउंड में ले आऊँ या नेहा को टाइम दूँ।
मगर आज चुदाई का दिन नहीं था।
नेहा ने उस आदमी को भी क्लियर किया था।
मगर कुछ भी हो सकता था।
वो मेरे बिना थी।
मुझे नहीं लगता था कि वो आदमी जबरदस्ती कर सकता था।
और उसकी बीवी भी ज़्यादा दूर नहीं थी।
मैं जल्दी चाह रहा था कि कम से कम 10 मिनट तो दूँ उनको।
मगर 10 मिनट भी बहुत लंबे लग रहे थे।
बच्चे ही मुझे रास्ता बता रहे थे गलियों का —
“अंकल राइट... यहाँ से लेफ्ट।”
अपने बाप की तरह।
बस बाप का गियर नेहा के हाथ में था तब।
अचानक हम घूमकर घर के सामने आ गए।
बच्चों ने मेरी एक्सपेक्टेशन से कम समय लिया।
अगर बच्चे कार से उतरते तो शायद सीधे बंगले में भागते।
मैंने दो बार हॉर्न बजाया और भगवान से चाहा कि नेहा ये इशारा समझ ले।
बच्चे अंदर भाग चुके थे।
मैं लास्ट गेट में एंटर हुआ।
वहाँ नेहा और वो आदमी दरवाजे पर थे।
बच्चे कार के बारे में बता रहे थे।
नेहा सुन रही थी।
मैंने हाथ हिलाया।
नेहा ने जाते-जाते दोनों बच्चों को कुछ पैसे दिए।
दोनों ने नेहा के पैर छुए।
मैंने देखा — बड़े वाले को स्कर्ट के अंदर झाँकते हुए।
आज रात कम से कम दो लोग तो नेहा को इमेजिन करके हिलाएँगे।
बाप छत पर और बेटे को कहाँ मौका मिलेगा।
वैसे वो इस बॉडी के साथ अपने पापा की तरह gifted हुआ तो फ्यूचर में ज़्यादा मुश्किल नहीं होगी नेहा जैसी कोई ढूँढने में।
नेहा मुस्कुराकर कार में बैठी।
मैं बैठते ही पूछा,
“कैसा था अंदर से बंगला?”
नेहा मुस्कुराई।
मेरी तरफ देखकर बोली,
“पता नहीं... मैं पहले कमरे की पहले दीवार तक ही देख पाई।”
उसने बेशर्मी से मेरी तरफ देखकर wink किया और कहा,
“चलो।”
जाते-जाते मैंने उस आदमी की स्माइल देखी।
उस मुस्कान में कुछ तो था जो मैं समझ नहीं पाया।
जीत थी, घमंड था, और एक अजीब सी दया भी — जैसी कोई अमीर किसी भिखारी को देता है।
जैसे कह रहा हो — “तुम्हारी बीवी तो मेरे पास थी, अब तुम ले जाओ।”
मेरा दिल अंदर से कसक रहा था।
मैं चाहता था कि नेहा मुझे सब कुछ बताए — क्या हुआ, कितना हुआ, कैसा लगा।
मगर नेहा शांत थी।
बस हल्के से मुस्कुरा रही थी।
नज़र आगे सड़क पर, लेकिन दिमाग कहीं और।
वापस जाते समय हमने वही ठेका देखा — शराब का।
अब बारिश रुक चुकी थी।
नेहा ने मेरी तरफ देखकर धीरे से कहा,
“मुझे कुछ और चाहिए।”
उस आदमी के घर पर चाय पीने से सब उतर गया था।
अब नेहा से कुछ उगलवाना था तो हमें पीना पड़ेगा।
मैंने नेहा को देखा।
उसकी आँखों में अभी भी वो नशा बाकी था।
वो मेरी तरफ देख रही थी, लेकिन उसकी नज़र में एक अलग सी चुप्पी थी।
मैंने गाड़ी ठेके के पास रोकी।
नेहा ने सिगरेट निकाली और धीरे से सुलगाई।
खिड़की थोड़ी खुली हुई थी।
बारिश रुक चुकी थी, अब गाड़ी सड़क के किनारे थी।
लोग आसानी से देख सकते थे — एक खूबसूरत लड़की कार में बैठी धुआँ उड़ा रही है।
पुणे में ये दृश्य आम था, लेकिन फिर भी...
हर गाड़ी धीमी पड़ जाती थी।
लोग नेहा को घूरकर देखते हुए निकल रहे थे।
नेहा बिल्कुल बेफिक्र थी।
सिगरेट को होंठों पर लगाए, धीरे-धीरे कश ले रही थी।
उसके बाल अभी भी थोड़े बिखरे हुए थे, ड्रेस ठीक की हुई थी, लेकिन चेहरे पर वो नशा अभी भी बाकी था।
मैं जानता था कि अब नेहा को नशा चाहिए।
बीयर से होने वाला नहीं था।
उसे अब व्हिस्की चाहिए थी।
“व्हिस्की चाहिए?”
नेहा ने सिगरेट का कश लिया, धुआँ बाहर छोड़ा और मेरी तरफ देखकर सिर्फ सिर हिला दिया।
मैं इस बात में खुद को lucky मान रहा था।
मेरी बीवी — जो व्हिस्की पीती है, सिगरेट पीती है, पोर्न देखती है, और सबसे ज़्यादा... hot दिखती है।
जब वो व्हिस्की पी लेती है, तो उसका अंदर का जानवर बाहर आ जाता है।
उसकी शर्म, उसकी हिचकिचाहट, सब गायब हो जाती है।
फिर वो जो चाहती है, वो लेती है — बिना सोचे, बिना रुके।
मैंने साइड में देखा।
नेहा अब भी सिगरेट पी रही थी।
उसकी आँखें थोड़ी नींद भरी हुई थीं, लेकिन चेहरा अभी भी गर्म था।
उसकी आँखों में अब वो चमक थी जो मुझे हमेशा डराती और उत्तेजित करती थी।
मैंने व्हिस्की की बोतल खोली और दो प्लास्टिक के ग्लास में peg बनाए।
बर्फ डाली, थोड़ा पानी मिलाया।
एक नेहा को दिया, दूसरा खुद रख लिया।
गाड़ी चालू की और धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा।
मैं इंतज़ार कर रहा था।
इंतज़ार कर रहा था कि नशा चढ़े, नेहा खुलकर बोले।
क्या हुआ जब वो उस आदमी के साथ अकेली थी।
कितना हुआ।
कैसा लगा।
लेकिन peg खत्म होते-होते मेरा सब्र टूट गया।
मैंने थोड़ा impatient होकर पूछा,
“बताओ ना... क्या हुआ?”
नेहा ने सिगरेट का आखिरी कश लिया, खिड़की से बाहर फेंका और हल्के से मुस्कुराई।
“तुमने कुछ करने को कहा था... तुम 5 मिनट में आ गए।”
उसकी आवाज़ में हल्का blame था — जैसे मैंने जल्दी आकर उसका मजा खराब कर दिया।
मैंने थोड़ा गुस्से में कहा,
“बच्चे ही मुझे घुमा-घुमा कर ले आए। मैं क्या करता?
मैं तो सोच रहा था कम से कम 10 मिनट तो दूँ तुम्हें...”
नेहा ने मेरी तरफ देखा।
फिर हल्के से हँसी और बोली,
“फिर भी... जो भी हुआ, बताओ ना।”
मैंने गाड़ी को थोड़ा और स्लो कर दिया।
मेरा गला सूख रहा था।
नेहा ने अपने ग्लास से एक घूँट लिया, सिर सीट पर टिकाया और आँखें बंद कर लीं।
कुछ पल चुप रही।
नेहा ने अपना ग्लास डोर की साइड वाली पॉकेट में रख दिया।
फिर बिना किसी हिचक के अपना हाथ सीधे मेरे लंड पर रख दिया।
उसने हल्के से दबाया और मेरे कान के पास फुसफुसाते हुए कहा,
“जो कार में हुआ था, उससे ज़्यादा कुछ नहीं हुआ...
फिर भी इस नुन्नू को क्यों जानना है?”
वो मुझे चिढ़ा रही थी।
उसे अच्छे से पता था कि मुझे ये चिढ़ना पसंद है।
मैंने कुछ नहीं कहा। बस इंतज़ार कर रहा था।
नेहा ने मेरे गाल पर हल्का किस किया और धीरे-धीरे बताना शुरू किया,
“जब तुम गाड़ी लेकर गए, तो हम भी बंगले की तरफ बढ़े।
आस-पास कोई नहीं था। उसने अपना हाथ मेरी कमर पर रख दिया और मुझे चुपके से अपनी तरफ खींच लिया।
दरवाज़े पर पहुँचते ही उसने जेब से चाबी निकालकर मुझे दे दी।
बोला — ‘खोलो’।
लेकिन उसके दोनों हाथ मेरी कमर से हट ही नहीं रहे थे।
मैंने झुककर ताला खोला।
वो मेरे पीछे चला गया।
नेहा ने आगे कहा, उसकी आवाज़ अब और धीमी, और नशे वाली हो गई थी,
“जब वो ये कर रहा था... मुझे बहुत गुदगुदी हो रही थी।
मैं ताला खोलने में पूरा ध्यान नहीं दे पा रही थी।
वैसे भी 2-3 चाबियाँ थीं...
मगर वो मेरे पीछे लगे हुए था।
जैसे-तैसे मैंने दरवाज़ा खोला...”
नेहा ने एक पल रुककर साँस ली, फिर जारी रखा,
“अंदर... एक आलीशान हॉल था।
लेविश सोफे, बड़ी वाली TV, झूमर...
बहुत सुंदर था।
जब तक मैं अंदर देख पाती, उसने मुझे मजबूती से पकड़ लिया और दीवार से चिपका दिया।”
नेहा बोलती रही, उसकी आवाज़ अब धीमी और भरी हुई थी,
“वो मेरी गर्दन तक पहुँच रहा था...
एक बार उसने कोशिश की मेरे होंठों तक पहुँचने की, मगर फिर वापस मेरी गर्दन को चाटने लगा।
ड्रेस नीचे खींच दी... दोनों बूब्स सामने थे।
वो प्यार से नहीं... किसी जंगली की तरह काट रहा था।
गंदी-गंदी गालियाँ दे रहा था...
‘रंडी... किसी दिन यहीं चोदूँगा तुझे...’
मेरा सिर ऊपर था, हाथ उसके बालों में...
उसका दूसरा हाथ स्कर्ट के अंदर था...
मेरी चूत को बहुत गंदे तरीके से रगड़ रहा था।
थोड़ी देर ये चलता रहा...
फिर तुम्हारे हॉर्न की आवाज़ आई।
उसने कहा, ‘मादरचोद... इतनी जल्दी आ गया...’
ये बोलते हुए उसने मेरी जाँघ पर जोर से पिंच कर दिया।
बहुत हार्ड पिंच।
मेरे मुँह से ‘आह्ह...’ निकल गई।
मगर वो मेरे बूब्स को काटता ही रहा।
फिर उसने जल्दी से मेरे कपड़े ठीक किए...
और हम बाहर आ गए।”
नेहा ने ये कहते हुए अपनी स्कर्ट थोड़ी ऊपर की और मुझे वो निशान दिखाया —
जहाँ उस आदमी ने पिंच किया था।
वहाँ एक गहरा नीला निशान बन चुका था।
नेहा के उस नीले निशान को देखते ही मेरे अंदर एकदम से गुस्सा भड़क उठा।
“तुमने वहाँ कुछ क्यों नहीं कहा?
भोसड़ी के को वहीं बता देती... तुम्हें पता है ये ठीक नहीं है!”
मेरा स्वर तेज़ हो गया था।
नेहा ने शांत नज़रों से मेरी तरफ देखा।
उसका हाथ अभी भी मेरे लंड पर था।
उसने बहुत धीरे से कहा,
“नहीं... मुझे अच्छा लगा।”
ये बोलते हुए उसने अपना टॉप और नीचे खींच दिया।
दोनों बूब्स पर अब और भी ज़्यादा निशान थे — दाँतों के गहरे निशान, नीले-लाल धब्बे।
एक जगह तो दाँतों का पूरा आकार बन गया था।
मैं चुप हो गया।
गुस्सा अचानक शांत हो गया।
नेहा मेरी तरफ देख रही थी।
उसकी आँखों में न कोई शर्म थी, न पछतावा।
बल्कि एक अजीब सी संतुष्टि थी।
मुझे अब नेहा की लिमिट का थोड़ा-थोड़ा अंदाज़ा हो रहा था।
वो pain enjoy कर रही थी।
कितनी हद तक enjoy कर सकती है, ये मुझे अभी समझ आ रहा था।
जैसे मैं अपने कॉलेज के दिनों में enjoy करता था — जब कुछ लड़के मुझे humiliate करने के चक्कर में थप्पड़ मार देते थे।
मुझे लगता था कि अब नहीं जाऊँगा...
मगर अगली बार बुलाने पर फिर चला जाता था।
नेहा भी शायद उसी रास्ते पर थी।
हम घर पहुँचने वाले थे।
आधी बोतल खत्म हो चुकी थी।
मैं गाड़ी बहुत धीरे चला रहा था, फिर भी सब कुछ धुँधला दिखने लगा था।
मैंने नेहा से पूछा,
“क्या... बेकार आदमी से दोबारा मिलना चाहोगी?”
नेहा ने नशे वाली आँखों से मेरी तरफ देखा।
थोड़ी देर चुप रही, फिर धीरे से बोली,
“घर पर बताऊँगी।”
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हम बिल्डिंग पहुँच गए।
गाड़ी पार्क की।
नेहा और मैं दोनों लहराते हुए, नशे में नीचे उतरे।
रात काफी हो चुकी थी।
लिफ्ट से हम अपने फ्लोर पर पहुँचे।
लॉबी में जैसे ही हम निकले, सामने गुप्ता जी खड़े दिखे।
मैंने तुरंत नेहा से धीरे से कहा,
“प्लीज़... सही से चलो... गुप्ता जी वहाँ खड़े हैं।”
नेहा ने हल्का सिर हिलाया, लेकिन उसकी चाल अभी भी लड़खड़ा रही थी।
उसके बाल बिखरे हुए थे, ड्रेस थोड़ी अस्त-व्यस्त, और चेहरे पर अभी भी वो नशा साफ़ दिख रहा था।
नेहा ने हल्के से कहा, “अच्छा...”
उसकी आँखों में शरारत झलक रही थी।
गुप्ता जी लॉबी में सिगरेट पी रहे थे। उनकी पीठ हमारी तरफ थी।
मैंने देखा — नेहा ने तेज़ी से लड़खड़ाते हुए गुप्ता जी की तरफ कदम बढ़ाया।
जानबूझकर उसने गुप्ता जी के कंधे से टकरा दिया।
“ओह्ह... अंकल आप... sorry!”
नेहा ने नशे वाली, मीठी आवाज़ में कहा।
गुप्ता जी चौंककर मुड़े।
उनकी नज़र पहले नेहा के चेहरे पर, फिर उसकी थोड़ी अस्त-व्यस्त ड्रेस पर, फिर नंगी टाँगों पर अटक गई।
नेहा ने लड़खड़ाते हुए खुद को संभाला और हँसते हुए बोली,
“माफ़ करना अंकल... थोड़ा नशा हो गया है...”
गुप्ता जी जानते थे कि नेहा पीती है।
आस-पास के लगभग सभी लोग जानते थे।
पुणे में ये आम बात थी।
सोशलली भी नेहा ने गुप्ता जी के सामने पहले पी रखी थी।
लेकिन आज नेहा बहुत ज़्यादा नशे में थी।
वो अब गुप्ता जी के सामने खड़ी थी।
लड़खड़ाते हुए, नशे वाली आँखों से उन्हें देखते हुए।
मैं गुप्ता जी के थोड़ा पीछे खड़ा था।
नेहा ने शर्माते हुए, लेकिन नशे वाली मीठी आवाज़ में कहा,
“Sorry uncle... वो गलती से... मैंने थोड़ा ज़्यादा पी लिया है।”
ये बोलते हुए उसकी पूरी बॉडी हिल रही थी।
फिर नेहा ने वो किया जो वो अंकल के साथ हमेशा करती थी —
उनके आशीर्वाद के लिए पैर छूने लगी।
जानबूझकर या नशे में, पता नहीं।
जैसे ही वो झुकी, मैं और गुप्ता जी दोनों को एक ही नज़ारा दिखाई दिया।
नेहा की छोटी ब्लैक ड्रेस ऊपर चढ़ गई।
उसकी गोरी, गोल, नंगी टाँगें पूरी तरह दिख रही थीं।
पैंटी का किनारा भी साफ़ नज़र आ रहा था।
गुप्ता जी के होश उड़ गए थे।
जैसे ही नेहा झुकी, उनकी नज़र ऊपर वाली बॉडी पर गई।
नेहा की ब्रा तो कार में ही कहीं खो चुकी थी — वो रेस्टोरेंट जाते समय ही उतार चुकी थी।
स्लीवलेस ड्रेस में जब वो झुकी, तो दोनों गोरे, भरे हुए बूब्स पूरी तरह लटकते हुए दिख गए।
पूरी शेप साफ़ दिख रही थी।
दोनों बूब्स पर दाँतों के नीले-लाल निशान बने हुए थे।
मुझे तो साफ़ दिख रहे थे।
गुप्ता जी तो और भी आगे थे — शायद उन्हें लाइट ब्राउन निप्पल भी दिख गए होंगे।
नेहा थोड़ी देर वैसी ही झुकी रही।
जैसे जानबूझकर समय ले रही हो।
फिर वो थोड़ा लड़खड़ाई।
गुप्ता जी ने तुरंत आगे बढ़कर उसे दोनों नंगी बाहों से पकड़ लिया।
दोनों हाथ उसकी नंगी बाहों पर थे।
उन्होंने उसे सहारा दिया ताकि वो न गिरे।
मैं भी आगे बढ़ा, लेकिन गुप्ता जी ने तुरंत कहा,
“मैंने संभाल लिया है... डोंट वरी।”
उनकी आवाज़ में एक अजीब सा अधिकार था।
उनकी उँगलियाँ नेहा की नंगी बाहों पर कस गई थीं।
नेहा अब उनकी बाहों में टिकी हुई थी।
उसकी ड्रेस अभी भी नीचे खिसकी हुई थी।
गुप्ता जी ने नेहा को सीधा किया।
अब नेहा उनके बहुत करीब थी — लगभग उनसे लिपटी हुई।
उनके हाथ अभी भी नेहा की नंगी बाहों पर थे।
गुप्ता जी ने नेहा को सहारा देते हुए मेरी तरफ घुमाया।
मैंने आगे बढ़कर नेहा को पूरी तरह अपने सहारे में ले लिया।
उसका पूरा वजन अब मेरे ऊपर था।
गुप्ता जी ने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा,
“ध्यान रखो बेटी का...
I know कभी-कभी wild party चलती है।”
मुझे समझ नहीं आ रहा था — ये बात शराब के लिए थी या नेहा के बूब्स पर बने दाँतों के निशानों के लिए।
मैं नेहा को सहारा देते हुए अपने फ्लैट की तरफ बढ़ा।
जैसे ही हम थोड़ा आगे बढ़े, नेहा ने अपना मुँह मेरे कान के पास ले जाकर बहुत धीरे से, नशे वाली गर्म साँसों के साथ फुसफुसाया,
“मज्जा आया?”
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बहोत मज्जा आया, जल्दी जल्दी अगला पार्ट देदो
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Super update please update next part as soon as possible
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Sry bhai but ish update mai bilkul bhi mja nhi aaya sry......
Thoda mja laooh jaise neha ke dress poore nikal deta or ushka beta dkhleta ya koi servant ya neha nangi car mai wapas aati or gupta ushe bed sheet se cover krke utha kr room mai phuchata or jb theeke pr drink ke time neha ke dress ko nikaldeta ...... Kuch erotic seen laoo or pls week mai 2 updte hum bhi working hai yr hr baar pgone haath mai lete he aapke story chk krte hai khi bhi ho office metro ya washroom hr jgh
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maza aaya
thoda aur spicy banao...
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मैंने जैसे-तैसे गेट खोला।
नेहा खिलखिला रही थी।
नशे में थोड़ा झूल भी रही थी।
उसकी चाल लड़खड़ाती हुई थी, लेकिन वो मुस्कुरा रही थी — वो मुस्कान जो कह रही थी कि आज उसने कुछ बहुत बड़ा कर दिखाया है।
ये सब असली था या गुप्ता जी को दिखाने के लिए एक्टिंग... ये तो रूम में जाने के बाद पता चलेगा।
हम रूम में पहुँचे।
नेहा सीधे हल्के-हल्के झूमते कदमों से किचन में चली गई।
टॉप शेल्फ खोली — जहाँ हम दारू रखते थे।
उसे और दारू चाहिए थी।
मैं सोच रहा था कि आज वो लिमिट से काफी ऊपर निकल चुकी है।
मैंने अपनी बीवी को इतनी दारू की प्यास पहले कभी नहीं देखी थी।
शायद आज जो हुआ... वो पहले कभी नहीं हुआ था।
गोवा में जो हुआ था वो अचानक था, unplanned था।
मगर आज... आज सब कुछ deliberate लग रहा था।
जैसे नेहा ने खुद को पूरी तरह खोल दिया हो।
वो शेल्फ से व्हिस्की की बोतल निकाल रही थी।
उसके बाल बिखरे हुए थे, ड्रेस अभी भी थोड़ी अस्त-व्यस्त थी, और चेहरे पर वो नशा था जो अब और गहरा हो रहा था।
फिर उसने एक बोतल निकाली।
मुझे दूर से नहीं पता चला कौन सी थी।
उसने ग्लास में डाली।
मैंने थोड़ा concern दिखाते हुए कहा,
“आराम से...
तुमने आज बहुत पी ली है...
तुम चाहो तो अवॉइड कर सकते हो।”
वहाँ से तेज़ी से उसकी आवाज़ आई,
“चुप भेनचोद... मुझे मत सिखा!”
नेहा ने घूरकर मेरी तरफ देखा।
उसकी आँखों में नशा था, लेकिन साथ में गुस्सा और एक अजीब सी आज़ादी भी थी।
वो ग्लास में और डाल रही थी।
मैं चुप हो गया।
कुछ बोलने की हिम्मत नहीं हुई।
नेहा मेरी तरफ मुड़ी।
उसके हाथ में ग्लास था — आधा व्हिस्की से भरा, नीट।
उसने एक घूँट लिया।
चेहरा अजीब सा बन गया — वो नीट नहीं पीती थी, इसलिए स्वाद से मुँह बिगड़ गया।
फिर उसका दूसरा हाथ सीधे अपनी पैंटी पर गया।
धीरे-धीरे उसे नीचे खींचने लगी।
पैंटी जाँघों तक सरक गई।
नेहा ने मुझे घूरते हुए, नशे वाली भरी हुई आवाज़ में कहा,
“कपड़े उतार नुन्नू...”
उसे बार-बार “नुन्नू” कहने में मजा आ रहा था।
हर बार वो शब्द बोलते हुए उसकी आँखों में शरारत चमक जाती।
वो अब सिर्फ ऊपर वाली ड्रेस में खड़ी थी।
नीचे कुछ नहीं।
जाँघें नंगी, चूत अभी भी थोड़ी गीली और सूजी हुई दिख रही थी।
नेहा ने एक और घूँट लिया और बोली,
“क्या हुआ? जल्दी उतार...
उसकी आवाज़ में अब नशा, घमंड और एक ज़बरदस्त भूख थी।
मैं चुपचाप उसे देख रहा था।
मेरा लंड पहले से ही सख्त हो चुका था।
नेहा मेरे ऊपर चढ़ी, लेकिन लंड पर नहीं बैठी।
धीरे-धीरे वो आगे बढ़ती गई और अपने दोनों घुटनों को मेरे कानों के दोनों तरफ रखकर मेरे चेहरे के ठीक ऊपर आ गई।
अब उसकी नंगी चूत मेरे मुँह के बिल्कुल ऊपर थी।
बहुत करीब।
उसकी गर्मी मेरे चेहरे पर पड़ रही थी।
मैंने ऊपर देखा।
नेहा दोनों हाथों से सोफे के बैकरेस्ट को पकड़े हुए थी।
उसके बाल आगे को झूल रहे थे, नशे वाली आँखें नीचे मेरी तरफ देख रही थीं।
उसकी चूत थोड़ी सूजी हुई थी और अभी भी थोड़ी गीली दिख रही थी।
नेहा ने धीमी, भारी आवाज़ में कहा,
“चाट...”
मैंने जैसे ही जीभ निकाली, नेहा ने अपने कूल्हे नीचे कर दिए।
अब उसकी पूरी चूत मेरे मुँह पर बैठ गई थी।
उसने हल्का सा कराहते हुए कहा,
“हाँ... इसी तरह...
ज़ोर से चूस।”
मैंने सच में इसकी उम्मीद नहीं की थी।
मेरा लंड बहुत ज़ोर से फड़क रहा था, मुझे भी सेक्स की बहुत ज़रूरत थी। मगर नेहा ने मुझे चूसने या चोदने का एक भी मौका नहीं दिया।
वो सीधे मेरे चेहरे पर बैठ गई।
एक हाथ में व्हिस्की का गिलास था, दूसरा हाथ उसने मेरे बालों में पकड़ रखा था।
वो हल्का-हल्का बाल खींच रही थी — इतना कि दर्द हो, लेकिन बहुत ज़्यादा नहीं।
नेहा ने मेरी तरफ नीचे देखा और भारी, नशे वाली आवाज़ में कहा,
“चाट...
तुम आज मुझे चाटो। अच्छे से चाटो।”
फिर उसने अपने कूल्हे और नीचे किए और अपनी पूरी गीली चूत मेरे मुँह पर दबा दी।
मेरी नाक और मुँह दोनों उसके अंदर दब गए।
उसकी चूत का गर्म, थोड़ा नमकीन स्वाद मेरी ज़ुबान पर फैल गया।
नेहा ने बाल खींचते हुए धीरे-धीरे अपनी कमर हिलानी शुरू कर दी।
“हाँ... यही... ज़ोर से चूस...
आज पूरा दिन किसी और ने मुझे छुआ...
अब तू मुझे चाट...”
उसकी साँसें तेज़ हो रही थीं।
वो हर हिलने के साथ और ज़ोर से मेरे मुँह पर दबा रही थी।
मेरा लंड अभी भी खड़ा था और हवा में फड़क रहा था, लेकिन नेहा उसे छूने का नाम भी नहीं ले रही थी।
वो बस मेरे चेहरे पर सवार थी और मुझे चाटने पर मजबूर कर रही थी।
मैंने अपना एक हाथ नीचे ले जाकर अपने लंड को पकड़ लिया और धीरे-धीरे हिलाने लगा।
नेहा मेरे चेहरे पर बैठी हुई थी और अपनी चूत को मेरे पूरे मुँह पर रगड़ रही थी।
उसकी चूत से रस टपक रहा था — मेरा पूरा चेहरा, नाक, होंठ, ठोड़ी सब उससे गीला हो चुका था।
वो नशे में ऊपर से मुझे देख रही थी और बीच-बीच में गंदी-गंदी बातें कर रही थी।
“जीभ निकाल...
ज़ोर से निकाल बहनचोद...
अंदर डाल अपनी जीभ... हाँ... इसी तरह...”
कभी वो कहती, “चाट... पूरी चूत चाट...
ज़ोर से चूस मेरी चूत को...”
उसकी कमर तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थी।
मेरा पूरा चेहरा उसकी चूत के रस में नहा चुका था।
नेहा ने एक हाथ से मेरे बाल और ज़ोर से खींचे और बोली,
“और तेज़...
चूस मेरी चूत को...
फिर अचानक एक पल को नेहा रुक गई।
वो थोड़ा सा खिसक कर मेरे सीने पर बैठ गई। उसकी चूत अब मेरी छाती पर थी। मेरे चेहरे पर उसका पूरा रस लगा हुआ था — होंठ, नाक, गाल सब गीले थे।
नेहा ने मेरी तरफ झुककर कुछ पल तक सिर्फ मुझे देखा। उसकी आँखों में नशा था, लेकिन साथ में एक अजीब सी तीखी चमक भी थी।
फिर उसने बहुत धीरे, लेकिन साफ़-साफ़ कहा,
“तुझे शर्म नहीं आई? हाँ... उसका लंड तूने अपने हाथों में लेकर हिलाया... और अब मेरे ऊपर चढ़ा दिया। तुझे एक पल भी शर्म नहीं आई... क्यों?”
उसकी आवाज़ में नशा तो था, लेकिन उसमें एक अलग तरह का गुस्सा और तीखापन भी था।
नेहा मेरी छाती पर बैठी हुई थी, मेरे चेहरे को घूर रही थी। उसके बाल मेरे चेहरे पर गिर रहे थे।
वो एक पल चुप रही, फिर फिर से बोली — इस बार और धीमी आवाज़ में, लेकिन और ज़्यादा कड़वी,
“बोल ना... क्यों नहीं शर्म आई तुझे?”
उसकी आँखें अब मेरी आँखों में गड़ी हुई थीं। जवाब का इंतज़ार कर रही थी।
मैं कुछ बोल नहीं पाया।
बस उसे देखता रह गया।
बोल ना...
क्यों किया तूने ऐसा?
क्यों मुझे उस अनजान के सामने खोल दिया?
क्यों तू देखता रहा जब वो मेरी चूत में उँगलियाँ डाल रहा था?”
उसका गुस्सा अब साफ़ दिख रहा था। नशा था, लेकिन ये सिर्फ़ नशा नहीं था। ये वो गुस्सा था जो अंदर कहीं बहुत गहरे से निकल रहा था।
मैं चुप रहा। मेरे पास कोई तैयार जवाब नहीं था।
नेहा ने मेरे बालों को और ज़ोर से खींचा।
“तुझे शर्म नहीं आती? एक अनजान आदमी के साथ तूने आज मुझे बाँट दिया... और तेरा लंड खड़ा था! मुझे अच्छे से याद है!”
उसकी आँखों में आँसू थे। नशा, गुस्सा, ठेस — सब मिला हुआ था।
“हमने कितनी बार ये खेल खेला है... मैंने तुझे कितनी बार थप्पड़ मारे हैं... तुझे ‘नन्नू’ कहा है, ‘चूतिया’ कहा है... लेकिन आज... आज कुछ अलग था। आज मैं खेल नहीं खेल रही थी सैम। मैं सही में जानना चाहती हूँ... क्यों तूने मुझे उस आदमी के साथ
शेयर किया?
उसकी आवाज़ अब काँप रही थी।
“बोल... तुझे मजा आ रहा था? देखने में? अपनी बीवी को किसी और के हाथों में देखने में?”
मैंने आँखें नीचे कर लीं। मेरा गला सूख रहा था।
नेहा ने मेरे गाल पर एक और थप्पड़ मारा — इस बार और तेज़।
“देख मेरी तरफ! मुझे जवाब चाहिए... आज... अभी।”
उसकी साँसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थीं। उसकी चूत अभी भी मेरी छाती पर गीली और गर्म थी।
मैंने बहुत धीमी, काँपती हुई आवाज़ में कहा,
“...हाँ। मुझे मजा आ रहा था। देखने में। तुझे... दूसरे के साथ देखने में।”
नेहा ने मेरी आँखों में गहरी नज़र डाली। उसकी साँसें और तेज़ हो गईं।
“तो तू सच में... चाहता है ना? कि मैं किसी और से चुदूँ?”
नेहा ने अपना हाथ अपनी कमर के पीछे ले जाकर मेरे लंड को कस के पकड़ लिया। उसकी उँगलियाँ ठंडी थीं, लेकिन जकड़ बहुत मज़बूत थी।
“देखा... ये नूनू अभी भी बहुत टाइट है,” उसने मेरे कान में फुसफुसाते हुए कहा। “तुझे मज़ा आ रहा था ना? बहुत मज़ा आ रहा था... जब वो मेरा मुँह चूस रहा था... जब उसकी उँगलियाँ मेरी चूत में घुस रही थीं... तब भी तेरा लंड खड़ा था।”
उसकी आवाज़ में गुस्सा था, लेकिन उस गुस्से के साथ एक गहरी उत्तेजना भी थी। वो मेरे लंड को धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगी। हर बार जब वो नीचे जाती, तो अपनी हथेली से मेरे अंडकोश को दबा देती।
मैं कराह उठा।
मेरा पूरा शरीर काँप रहा था।
नेहा ने मेरी आँखों में देखा।
उसकी साँसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थीं।
“बोल...
तुझे सच में मज़ा आ रहा था?
अपनी बीवी को किसी और के हाथों में देखकर?
जब वो मेरे निप्पल चूस रहा था... तब भी?”
मैंने कुछ नहीं कहा।
बस मेरी साँसें तेज़ हो गईं।
नेहा ने मेरे लंड को और ज़ोर से पकड़ा और तेज़ी से हिलाने लगी।
“चूतिया...
तू मेरा पति है... और तू मुझे किसी और के लिए खोल रहा था।
और तेरा छोटा लंड खड़ा हो गया था।”
नेहा को देखकर मैं समझ गया था कि अब वो कुछ नहीं सुनने वाली। वो मेरे जवाब का इंतज़ार भी नहीं कर रही थी। वो सिर्फ़ नशे में बड़बड़ा रही थी और शायद मेरा खड़ा लंड देखकर उसको और गुस्सा आ गया था।
मैं बस चुपचाप रहा।
उसके बाद उसने वापस से वो मेरे ऊपर चढ़ गई। इस बार और भी कस के वो मेरे चेहरे के ऊपर चढ़ चुकी थी। अपनी चूत पूरी रगड़ने लगी मेरे पूरे चेहरे पर। अपनी कमर हिला-हिला के जैसे कोई गोते खा रहा हो, वैसे वो रगड़ना चालू कर रही थी।
मैं जीभ निकाल के बस उसे चाट रहा था। वो अपनी कमर हिला रही थी। धीरे-धीरे मुझे लग रहा था कि उसकी जाँघें काँप रही हैं। मुझे लग रहा था कि वो ऑर्गेज़्म होने वाला है।
फिर थोड़ी देर बाद उसने ज़ोर से चिल्लाया।
“येस... येस... येस बेबी... येस... येस... येस्स्स्स... आआआह्ह्ह...”
उसने मेरे बालों को कस कर पकड़ा। एक हाथ में व्हिस्की का ग्लास अभी भी था। और वो झड़ गई मेरे मुँह के ऊपर।
बहुत सा गहरा, गर्म पानी मेरे पूरे चेहरे पर, मेरी आँखों में, मेरे नाक में, मेरे मुँह के अंदर बहने लगा। मैं चाटता रहा — उसका पूरा रस पीता रहा। उसकी जाँघें मेरे सिर को दबाए हुए थीं। वो जोर-जोर से काँप रही थी।
“आह्ह्ह... फक... येस...”
उसकी आह बहुत ज़ोर से निकली। मुझे लगा कि शायद बाहर कोई सुन लेगा।
नेहा कुछ सेकंड तक मेरे चेहरे पर ही बैठी रही। उसकी साँसें बहुत तेज़ थीं। उसका पूरा शरीर थर-थर कर रहा था।
फिर उसने धीरे से मेरे बाल छोड़े। उसने मेरी आँखों में देखा। उसकी आँखें नशीली, लाल और पूरी तरह संतुष्ट थीं।
“तुम... अच्छे हो... चूत चाटने में...”
उसने मेरे चेहरे पर हाथ फेरा, अपना रस फैलाते हुए।
जब नेहा मेरे मुँह पर झड़ रही थी, उसकी जाँघें मेरे सिर को कसकर दबाए हुए थीं, तब मैंने अपना हाथ नीचे ले जाकर अपने लंड को पकड़ लिया।
मेरा लंड पहले से ही बहुत टाइट और गीला था। मैंने तेज़ी से हिलाना शुरू कर दिया।
मैंने आँखें बंद कर लीं। मेरा पूरा शरीर तन गया।
“आआह्ह...”
मैं भी झड़ गया। मेरे लंड से मोटी-मोटी धारें निकलीं और मेरे पेट पर गिरने लगीं।
थोड़ी देर मैंने नेहा के चेहरे को देखा। वो लाल हो चुका था। उसकी नाक एकदम लाल, बहुत ही सुंदर लग रही थी। उसका पूरा गोरा, दूध सा सफेद चेहरा — उसपर हल्का-हल्का लालपन और नशीली आँखें।
उसने मेरी तरफ देखा, फिर बिना कुछ कहे सोफे से उतरने का फैसला किया। व्हिस्की का ग्लास आधा भरा हुआ था, शायद दो-तीन घूँट ही पिए थे। वो लड़खड़ाते हुए टेबल पर ग्लास रखा। मेरी तरफ देखा भी नहीं।
धीरे-धीरे, लड़खड़ाते कदमों से वो बेडरूम की तरफ चली गई। मुझे एक धम-सी आवाज़ आई। मुझे लगा कहीं गिर न गई हो।
मैं तुरंत उठा और बेडरूम में गया। नेहा बेड पर लेटी हुई थी। पूरी तरह कपड़े पहने, लेकिन स्कर्ट ऊपर चढ़ी हुई, टॉप का एक स्ट्रैप कंधे से नीचे सरका हुआ। उसकी साँसें भारी और धीमी थीं।
वो सही में सो गई थी।
नशे की वजह से... और आज पूरे दिन जो कुछ हुआ — उसकी वजह से भी। वो थक चुकी थी।
मैंने कुछ देर उसे देखा। उसका चेहरा अभी भी लाल था। गले पर हल्के निशान थे। मैंने चादर खींचकर उसे ढक दिया।
फिर मैं हॉल में वापस आया। टेबल पर आधी भरी व्हिस्की का ग्लास रखा था। मैं सोफे पर बैठ गया और उसे खत्म करने लगा।
मेरा दिमाग बहुत कुछ सोच रहा था। आज जो हुआ... वो सब। रेस्टोरेंट में, गाड़ी में, और अब... गुप्ता जी ने नेहा को कितनी बार देखा होगा? कितनी बार उसकी नंगी छाती देखी होगी?
मुझे अजीब सा डर लग रहा था। कहीं बाहर कोई खड़ा तो नहीं था? कहीं गुप्ता जी ने कुछ सुन तो नहीं लिया?
मैंने ग्लास खत्म किया। शरीर थका हुआ था, लेकिन दिमाग जाग रहा था। नेहा के चेहरे पर वो आखिरी आह... उसके शरीर का काँपना... और उस आदमी का हाथ उसकी चूत पर...
मैं सोफे पर लेटा हुआ था। एक पैर सोफे पर, दूसरा लटका हुआ। बीच में मेरा लंड मुरझाया पड़ा था। मुँह में अभी भी मेरी बीवी का स्वाद था — नमकीन, गाढ़ा, थोड़ा शराबी।
दिन भर की तस्वीरें आँखें बंद करते ही घूमने लगीं। रेस्टोरेंट... गाड़ी... उस आदमी के हाथ... नेहा की आहें... सब कुछ इतना ताज़ा था कि नींद भी कच्ची ही आई।
मुझे सपना आया।
सपने में भी वही आदमी था। पतली-दुबली बॉडी, लेकिन नेहा को उसने आसानी से उठा रखा था — उल्टा। नेहा की पीठ उसके सीने से सटी हुई। उसने नेहा की जाँघों को पकड़कर खोल रखा था। नेहा की चूत बिल्कुल सामने। और उसके ठीक सामने उसका बेटा —
घुटनों पर बैठा, अपना मुँह नेहा की चूत में दबाए हुए चाट रहा था।
आदमी हँस रहा था। “चाटें साहब की... अच्छे से चाटो...”
मैं वहाँ खड़ा था। अकेला नहीं। गुप्ता जी भी मेरे बगल में खड़े थे। दोनों देख रहे थे।
मेरा लंड खड़ा था। मुझे लगा कोई उसे चाट रहा है। मैंने नीचे देखा — उस आदमी की बीवी मेरे सामने घुटनों पर बैठी, मेरे लंड को चूस रही थी।
मैं हड़बड़ा कर जाग गया।
साँसें तेज़ थीं।
मैंने महसूस किया कि मेरे लंड पर वो नरमी अच्छे से महसूस हो रही थी।
नीचे देखा तो सच में कोई लंड चाट रहा था।
मेरी बीवी।
सुबह के 9 बज रहे थे।
मुझे पता ही नहीं चला कि इतना समय हो गया।
नेहा ज़मीन पर घुटनों के बल बैठी हुई थी।
वो अपनी जीभ से मेरे अंडकोश को चाट रही थी — धीरे-धीरे, प्यार से, लेकिन गहराई से।
जैसे कोई प्यासी औरत पानी पी रही हो।
मैंने देखा तो उसने हल्की सी मुस्कान दी।
आँख मारी।
फिर बिना कुछ कहे अपने काम पर लग गई।
वो खुश लग रही थी।
शायद उसे रात याद आ गई होगी — वो सब जो उसने नशे में मेरे साथ किया था।
अब वो शिद्दत से मुझे ब्लोजॉब दे रही थी।
बिना हाथ इस्तेमाल किए।
मुँह में पूरा ले कर।
उसका चेहरा मेरे लंड पर ऊपर-नीचे जाते हुए बहुत खूबसूरत लग रहा था।
उसकी आँखें कभी-कभी ऊपर उठकर मेरी आँखों से मिल जातीं।
जैसे कह रही हो — “ये सब तुम्हारे लिए है... और मेरे लिए भी।”
मेरा लंड उसके गले तक जा रहा था।
वो गला भर-भर के चूस रही थी।
कभी-कभी उसकी जीभ मेरे टॉपे पर घूम जाती, कभी गहरी तक चली जाती।
उसके मुँह से निकलती गीली-गीली आवाज़ें कमरे में भर रही थीं।
मैंने अपना हाथ उसके बालों में डाला।
धीरे से सहलाया।
नेहा ने अपना काम बखूबी किया।
बिना रुके, बिना थके, पूरी शिद्दत से।
जब तक मैं कुछ नहीं बोला, जब तक मैं झड़ा नहीं — वो लगातार चूसती रही।
उसके मुँह की गर्मी, जीभ की नरमी, और गले की गहराई... सब कुछ एक साथ।
जब मैं झड़ा, तो वो मेरे लंड को मुँह में ही रखे रही।
मेरा सारा पानी उसने निगल लिया — आखिरी बूँद तक।
फिर उसने धीरे से मुँह उठाया।
उसके होंठ चमक रहे थे।
उसके चेहरे पर एक अलग तरह की ख़ुशी थी।
मगर जो पछतावा मैं देखना चाहता था — रात का वो पछतावा — वो उसके चेहरे पर बिल्कुल नहीं था।
नेहा मेरी तरफ बढ़ी।
मुझे एक लंबा, गहरा किस किया।
उसके मुँह में अभी भी मेरा स्वाद था।
“सॉरी बेबी...” उसने मेरे होंठों से हटते हुए धीरे से कहा,
“मैंने रात में कुछ किया तो नहीं... मैं बहुत नशे में थी...”
क्या वो सब भूल चुकी थी?
या नाटक कर रही थी?
मैं कुछ नहीं बोला।
बस उसे देखता रहा।
फिर उसने मुस्कुराते हुए कहा,
“पता है आज सुबह क्या हुआ?”
मेरे दिमाग में कई बातें एक साथ घूम गईं —
उस पतले आदमी की उँगलियाँ...
गुप्ता जी की नज़र...
रात की वो सारी घटनाएँ...
मैंने जवाब नहीं दिया।
नेहा ने लैपटॉप की तरफ इशारा करते हुए कहा,
“अयान का मैसेज आया है।”
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