तो वो मुझे देखने लगी. मम्मी के चेहरे और आंखों में एक अलग ही शांति और सुकून था। जो मैंने तब भी नहीं देखा था. जब मैं हाथ और मुँह से उनकी तसल्ली करता था। मम्मी मुझे प्यार भारी नज़रों से देख रही थी।
मम्मी के ऊपर से उठ के जब मैंने अपना लंड उनकी चूत से निकाला। तो मेरा लंड निकलता ही मम्मी की चूत से मेरा पानी निकल के बाहर आने लगा। अपना पानी बाहर निकलते देख कर मैंने अपना कच्चा उठाया। और उसे मम्मी की चूत के नीचे रख दिया।
मेरे ऐसे कहते हाय मम्मी मेरे कच्चे से खुद की चूत साफ करने लगी। और मैं उनके सामने बैठा अपना लंड आगे पीछे करने लगा। जो अभी भी पूरी तरह से ढीला नहीं हुआ था। मेरा हाथ मेरे ही पानी से गीला हो चुका था।
जो मेरे लंड पर लगा हुआ था. मैंने अपना हाथ वही चादर में पूछ दिया। फिर मैं मम्मी के बगल में आ गया। और उनके दूध पर हाथ रख कर चिपक कर लेट गया। मम्मी ने भी मेरी गर्दन में हाथ डाल के मुझे खुद से चिपका लिया।
कमरे में पूरी तरह से सन्नाटा छाया हुआ था। आज तो मुझे भी समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या बात करूं? तभी मम्मी खुद बोल पड़ी.
मम्मी- क्या हुआ बेटा? तू एक दम शांत क्यों हो गया?
मैं- क्या बात करूं मम्मी? बस यही सोच रहा था.
मम्मी – अब तुझे मुझसे बात करने के लिए सोचना पड़ता है क्या?
मैं- मम्मी, हमारे बीच अभी भी जो हुआ है. बस उसी के बारे में सोच रहा हूं कि हम दोनों खुद को रोक नहीं पाएंगे।
मम्मी- बेटा इस में हम दोनो का ही कसूर नहीं है। हमारे बीच जो खेल इतने वक्त से चल रहा था। उसका आखिरी अंजाम यहीं होना था।
मम्मी की बात सुनके मैं उठ के उनको देखने लगा। और मम्मी मुझे स्माइल करते हुए देखने लगी।
मैं- मम्मी, क्या आपको बिल्कुल भी बुरा नहीं लगेगा? मैंने अभी भी आपको अपने लंड से चोदा है। क्या आप भी यही चाहती थी?
मम्मी ने एक गहरी सांस ली. फिर वो मुझे देखते हुए बोली.
मम्मी- बिलकुल भी बुरा नहीं लगेगा बेटा. क्योंकि कहीं ना कहीं मेरी तरह तू भी यहीं करना चाहता था।
मम्मी की बात सुनके मैंने अपना सर नीचे कर लिया। और मन ही मन खुश होने लगा। मगर मैं ये मम्मी को नहीं दिखा रहा था। फ़िर मम्मी ने मेरा मुँह ऊपर किया और बोली।
मम्मी – सच सच बता बेटा. क्या तू मेरे साथ ये सब नहीं करना चाहता था?
मैं-चाहता था मम्मी. मगर मैं सोचता था कि अगर मैंने ऐसा कुछ किया। तो आप नाराज हो जाओगे. इसलिए मैं कभी आगे नहीं बढ़ूंगा।
मम्मी- बेटा जो डर तेरे अंदर था. वही डर मेरे अंदर भी था. मैं भी हमेशा यही सोचती थी कि अगर मैं अपने बेटे को अपने मन की इच्छा बता देती हूं। तो कहीं वो मुझे एक बुरी औरत ना समझे लगे।
इसलिए मैंने तुझे कभी ये बात नहीं कही। जैसा तूने मुझे ये बात कभी नहीं कही। और शायद हम दोनों ये बात कभी एक दूसरे से नहीं कहते। मगर जब आज तेरा लंड मेरे अंदर चला गया। तो मैं खुद को रोक नहीं पाई. फिर हमारे बीच जो कुछ हुआ. उससे हमारा अधूरा रिश्ता पूरा हो गया।
मम्मी की बात सुनके मैं उनके ऊपर आ गया। फिर हम दोनो एक दूसरे के होठों को चूसने लगे। मम्मी मेरी पीठ को सहलाते हुए मेरे होठों को चूस रही थी। और मैं मम्मी की जंघो को सहला रहा था। कुछ देर हम दोनो एक दूसरे के होठों को चूसते रहे। फ़िर मैं बोला
मैं – मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ मम्मी। बहुत प्यार करता हूँ.
मम्मी – मैं तुझे बहुत प्यार करती हूँ मेरे बच्चे।
मैं- मुझे तो लगा था मम्मी. जोश जोश में हम दोनों ने चुदाई का मजा ले लिया है। मगर सब कुछ शांत होने के बाद आप हमारा रिश्ता भी ख़त्म कर दोगे।
मम्मी- बेटा हमारे बीच जो हुआ है. वो हमारी मर्जी से हुआ है. और हम दोनो हाय ये चाहते थे। बस हम दोनों ये बात एक दूसरे से कह नहीं रहे थे।
मैं- मम्मी, क्या आप शुरू से मेरे लंड से चुदवाना चाहती थीं.
मम्मी – नहीं बेटा शुरू में तो मैंने ये सोचा भी नहीं था कि तेरी मदद करने से शुरू हुआ ये रिश्ता इस मुकाम पर आ जाएगा।
मैं- तो मम्मी आप कब से मेरा लंड लेने के बारे में सोचने लगीं.
मम्मी – शुरू में मैं तेरी मदद करके खुश थी बेटा। मेरे मन में ऐसा कोई ख्याल नहीं था. मगर फिर तू बार बार मुझे अपना लंड दिखाने लगा। तेरे लंड को देख देख के मेरा मन बहकने लगा. मगर मैं अपने मन को समझती थी।
कि हम दोनों माँ बेटे हैं। और मैं सिर्फ तेरी मदद कर रही हूं। मगर सच तो ये है कि मैं खुद से ही झूठ बोल रही थी। फिर तू रोज रोज मेरे दूध को चूसने लगा। तेरी बढ़ती हुई हर हरकत को मैं रोकना चाहती थी। मगर तेरा मासूम चेरा और तेरी ज़रूरतों को देख कर मैंने तुझे रोका नहीं।
फिर पता नहीं कब मैं खुद भी इन सब हरकतों का मजा लेने लगी। मुझे पता ही नहीं चला. जब जब तू मुझसे छूटा था. तो मुझे भी बहुत अच्छा लगता है. फिर उस दिन तूने मेरा हाथ अपने लंड पर रख दिया।
जिंदगी में पहली बार तेरे पापा के अलावा मैं किसी दूसरे लंड को छू रही थी। और उस दिन पहली बार तेरे लंड को छू के मुझे इस्तेमाल किया आपने अंदर लेने का मन हुआ। मगर मैंने खुद को समझा लिया कि ये सही नहीं है।
मगर तेरे लंड का ख्याल मेरे दिलो दिमाग से जा ही नहीं रहा था. तेरे कमरे से आने के बाद भी जब भी मैं आंखें बंद करती थी। तो मुझे तेरा लंड ही दिखेगा. मगर जैसा तैसे मैं खुद को संभाल लेती थी। मगर फिर अगली ही सुबह तेरा खड़ा लंड फिर से मुझे दिखायी देता था।
कभी घर पर कभी दुकान में हर जगह तेरा खड़ा लंड देख कर। मेरा मन बहक रहा था. तुझे जो मेरी पैंटी में गीलापन मिलता था। वो तेरे लंड की वजह से ही होता था. फिर तूने अपने हाथों से और मुँह से मुझे वो सुख दिया। जिसके लिए मैं भी तरस रही थी।
और तेरे मुंह और हाथों से सुख को लेने के बाद मैं समझ गई थी कि अब हमारा रिश्ता काफी आगे बढ़ गया है। फिर हर दिन तू मुझे अपने मुँह से चरमसुख का आनंद देने लगा।
मगर उस आनंद को लेने के बाद भी मैं यही सोचती थी कि काश तेरा ये मोटा लंबा लंड मेरे अंदर होता। तेरे लंड को लेने की इच्छा हर दिन बढ़ती जा रही थी। तू मेरे नीचे चाट के मेरी तसल्ली तो कर देता था।
मगर एक औरत को लम्बा मोटा लंड दिखा के अगर उसकी तसल्ली मुँह से करवाई जाए। तो उसकी तसल्ली हो जरूर जाती है. मगर वो तसल्ली वैसी नहीं होती है. जो एक लंड से मिलती है. तू और मैं हर रोज़ आगे बढ़ रहे हैं।
तूने मुझे पूरा नंगा करना शुरू कर दिया था। फ़िर जब तू मेरे ऊपर लेट गया। तो तेरा खड़ा लंड मेरे नीचे रगड़ता था. और तब मैं यही सोचती थी कि काश तेरा लंड मेरे अंदर चला जाये।
फ़िर जब आज भी तू मेरे ऊपर लेटा। तो मैं आंखे बंद करके यहीं सोच रही थी कि काश आज तेरा लंड मेरे अंदर चला जाए। फ़िर तो जैसे कमाल ही हो गया। मेरे सोचते ही तेरा गरम मोटा लंड मेरे अंदर घुस गया
जिस लंड को लेने के बारे में मैं हर रोज सोचती थी। आज वो पूरा लंड मेरे अंदर था. हमें एहसास को मैं कभी भूल नहीं सकती बेटा। जो तूने मुझे आज दिया है. ऐसा सुख मुझे तब भी नहीं मिला था। जब मैं जवान थी.
मम्मी की बाते सुन के मैं मन ही मन खुश होने लगा। मम्मी को लग रहा था कि जो भी हमारे बीच हुआ है। वो सब एक घाटना है
मम्मी के ऊपर लेता लेता मैं बोला.
मैं- मम्मी, आपको खुश होना है.
मम्मी- हा मेरे बच्चे. मैं बहुत खुश हूं. ऐसा एहसास आज से पहले मैंने कभी महसूस नहीं किया है। मधु सच ही कहती है कि जिस दिन मेरी तसल्ली एक दमदार लंड से होगी उस दिन मुझे पता चलेगा कि औरत के लिए एक सही मर्द का होना कितना जरूरी है। जो उसे हमेशा ऐसे ही प्यार करे।