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Incest MAA KO PAANE KI CHAAHAT
#1
हेलो दोस्तों कैसे हो आप सब आप सभी का प्यार मुझे बहोत मिला और आप के प्यार में ही हाज़िर हु अपनी नई स्टोरी ले कर उम्मीद है आप लोगो को पसंद आएगी ........महिलाये अपने पैंटी में हाथ डालते हुए अपनी चूत को सहलाते हुए और पुरुष अपना लण्ड हिलाते हुए ये स्टोरी पढियेगा तभी स्टोरी पढ़ने में मज़ा आएगा तो चलिए स्टोरी की तरफ चलता हु मेरे घर में मेरी माँ , पापा , और मैं रहता हु ......मेरी माँ की ऐज 40 है और पापा 42 के है और मैं 19 साल का हूँ ......और आपको बतादू की आज की तारीख में मैं और मेरी खूबसूरत माँ बिना चुदाई के रही नहीं सकते है ...तो चलिए ये सिलसिला कैसे शुरू हूँ बताता हूँ आपको मेरे पापा एक कंपनी में जॉब करते है और सुबह जल्दी निकल जाते है और रात को ही आते है और वो रात को जब भी आते है तो दारू पी के ही आते है और खाना खा के सो जाते है माँ पापा के दारु पीने से परेशान रहती है लेकिन कर भी क्या सकती है ......माँ जब भी पापा को दारू के बारे में बोलती है तो पापा डांट देते है तो माँ शांत हो जाती है .....माँ की क्वालिफिकेशन ज्यादा नहीं है लेकिन फिर भी मुझे बचपन में काफी दिनों तक पढाई है मेरी माँ का रंग गोरा है और वो किसी हेरोइन की तरह ही सुन्दर है[Image: ajq1o6.gif] माँ को देखते ही लोगो का लण्ड खड़ा हो जाता है माँ जब भी मार्किट निकलती है तो लोग उनकी सुंदरता को घूरते हुए अपना लण्ड सहलाते है [Image: 40800921.gif?validfrom=1762923600&validt...F7Eiltc%3D].....वो ज्यादातर साड़ी ही पहनती है वक़्त के साथ साथ माँ का बदन भी गदरा गया है माँ के दूध का साइज 36  है और कमर 34  है और गांड 40 है इससे आप लोग अंदाजा लगा लिए होंगे की मेरी माँ का फिगर देख के किसी का भी लण्ड खड़ा हो जाये .......मै माँ का एक लौता लड़का हूँ शायद इसीलिए माँ मुझे बहोत प्यार करती है और मैं भी उनको सबसे ज्यादा प्यार करता हूँ..........मैं भी सुबह कॉलेज निकल जाता हूँ और शाम को आता हूँ कुछ देर आराम करके कोचिंग निकल जाता हूँ ....बस मेरी बदकिस्मती यही है की मेरी कोई गर्ल फ्रेंड नहीं है और ना ही कोई मिलने के आसार है क्यों की मैं लड़कियों से बात करने में शर्माता हु 

                  इसीलिए मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है .........लेकिन इसका ये मतलब नहीं की मैंने चुदाई नहीं की .......मैंने कई औरतो को चोदा है जो पैसे लेके ये काम करती है इसीलिए मुझे औरतो से ज्यादा दिलचस्पी है क्यों की उनकी बड़ी बड़ी चूचियां और बड़े बड़े गांड दबाने में बहोत मज़ा आता है[Image: ajq1zn.gif] .......फिर मैं औरतो को बीच बीच में जाके चोद के आता था तब जाके मेरे लण्ड को थोड़ा राहत मिलती थी ......फिर मैं चुदाई का वीडियो देखने लगा और इन्सेस्ट स्टोरी पढ़ने लगा जिसमे मुझे माँ और बेटे की चुदाई की स्टोरी पढ़ने में मज़ा आने लगा .....स्टोरी पढ़ते हुए मेरा नजरिया माँ के प्रति बदलने लगा .......पहले मैं जब चुदाई का वीडियो देखता था तब माँ के लिए कभी गलत फीलिंग नहीं आई ......लेकिन जब से मैं इन्सेस्ट स्टोरी पढ़ने लगा तब से मुझे मेरी माँ मुझे दुनिया की सबसे कामुक औरत नज़र आने लगी ......माँ मुझे काफी खुली हुई थी वो मेरे सामने कई बार अपने कपडे बदलती थी और मैं बचपन से उनके ऊपर से कई बार नंगा देखता आ रहा हु और कई बार तो उनके चूतर भी देखा हु ऊऊफफफफ [Image: 24484707.gif?width=460]....लेकिन उसको लेके मेरे मन में कभी गन्दा ख्याल नहीं आया .......लेकिन जब से इन्सेस्ट स्टोरी पढ़ने लगा हु तब से मैं माँ को जब भी ऐसे देखता हु मेरा लण्ड खड़ा हो जाता है .......जो लोग मिडिल क्लास से है उनको पता होगा की उनकी भी मां उनके सामने कपडे बदलती होंगी .....और उन्हें इससे कोई परेशानी नहीं होती ......हैं न मुझे कमेंट में जरूर बताइयेगा........[Image: 17530180.gif?width=460]लेकिन मैं जब भी उनकी गोरी गोरी चूचियां देखता हु मेरा लण्ड सलामी देने लगता है उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ्फ़ मेरी तो हालत ही ख़राब होने लगती है [Image: qb_001.gif]जब से मैं इन्सेस्ट स्टोरी पढ़ना शुरू किया तब से मैं उनके नंगा देखने का मौका हाथ से नहीं जाने देता ........एक दिन तो माँ जब नहा रही थी तो मैं बाथरूम के दरार से माँ को देखता था उउउउउफफ्फफ्फ्फ़ उन्हें नंगा देख के मेरी लण्ड में आग लग जाती थी .....तब से माँ जब भी नहाती थी मैं तुरत उन्हें चुपके से देखने पहुंच जाता था और अपने लण्ड को सहलाने लगता था[Image: (m=ldpwiqacxtE_Ai)(mh=oDp1m9J3E8iwHsaV)1...PdnCfZY%3D][Image: q7u490e0hiy81.gif] ....बाथरूम में जाते ही माँ अपने साड़ी निकालती थी फिर ब्लाउज़ को निकालती थी और फिर ब्रा को जब निकालती थी तो उनकी चूचिया आज़ाद हो जाती थी और फिर पेटीकोट को निकालने के बाद वो पैंटी में ही नहाती थी और कभी कभी तो वो पैंटी भी नहीं पहनती थी उनकी गांड और चूत भी कभी कभी देख जाती थी लेकिन साफ़ नहीं दिखती थी ......उनकी चूत के ऊपर की तरफ बाल भी थे 

                               और ये देखकर मेरा लण्ड इतना टाइट हो जाता था की एकदम पत्थर हो जाता था ......इतना तो किसी औरत को चोदने में नहीं होता था जितना सिर्फ अपनी खूबसूरत माँ को देख के हो जाता था ......फिर वो अपनी नई पेटीकोट पहन लेती थी .......माँ को रोज़ इसीतरह देखने लगा और मेरे लण्ड का बुरा हाल हो जाता था ......फिर जाके मै मुठ मरता था[Image: (m=ldpwiqacxtE_Ai)(mh=ZBS7_lrrOD-7og9Q)4...MYjz5CM%3D] उसके काफी टाइम के बाद भी मेरा लण्ड खड़ा रहता था सिर्फ माँ के बारे में सोचते सोचते ..............फिर मैं माँ के निकाली हुई पैंटी को सूंघने लगा .....उसमे से माँ की चूत की खुसबू मुझे और भी पागल बना देती थी .[Image: eroticax-la-lover_001.gif]...धीरे धीरे मैं माँ के लिए पागल होने लगा मैं माँ को चोदने के लिए मरा जा रहा था फिर मैं इन्सेस्ट कहानी पढ़के उसका तरीका अपना ने लगा और मैं माँ को किसी न किसी बहाने चुने लगा और जब वो किचन में काम करती थी तो उनके पीछे से जाके पकड़ लेता था और अपना लण्ड माँ के चूतर से चिपकने लगता था
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#2
[Image: ajq3sf.gif]ऊऊफफफफफफ फिर वो मुझे अपने से दूर कर देती थी क्यों की शायद उन्हें मेरे लण्ड का एहसास होने लगता था ....फिर जब माँ सुबह मुझे जगाने आती थी तो मेरा खड़ा लण्ड देखने लगती फिर मुझे जगा के नीचे चली जाती थी .[Image: momsurprised001.gif]....माँ को मेरी चढ़ती जवानी दिखने लगी तो माँ ने मेरे लिए रिश्ता देखना शुरू कर दिया लेकिन कही बात नहीं बन रही थी ........कई महीनो तक मैं माँ के करीब आने की कोशिश करता रहा लेकिन बात आगे नहीं बढ़ रही थी ........
मेरी खूबसरत माँ का गदराया बदन मेरी दिल दिमाग में बैठ गया था मैंने सोच लिया था की मैं माँ को चोद के ही रहूँगा लेकिन कुछ समझ नहीं आ रहा था की उनको कैसे मनाऊ फिर मेरे दिमाग में कुछ आईडिया घूमने लगा और फिर अगली सुबह जब माँ मुझे जगाने आई तो मेरा लण्ड एकदम खड़ा था [Image: (m=ldpwiqacxtE_Ai)(mh=uV4JJpGiyl9xgor8)3...VVuoFVY%3D]जिसपे माँ की नज़र पड़ी लेकिन वो कुछ बोली नहीं बस देख रही थी फिर वो मुझे जगा के नीचे चली गई फिर मैं रोज़ अपना खड़ा लण्ड माँ को दिखाने लगा जिसे माँ थोड़ी देर देखती थी फिर मुझे जगा के नीचे चली जाती थी ......कई दिनों तक ऐसा चलता रहा लेकिन मुझे पता नहीं चल पा रहा था की इसका असर माँ पे हो रहा है की नहीं ........फिर मैं नीचे आजाता और माँ भी नाहा धो कर किचन में नास्ता बना रही थी और पापा भी काम पे चले गए थे ....फिर मैं भी फ्रेश होक नसता किया और धीरे से बाथरूम में जाके माँ की पैंटी अपने कमरे में छुपा आया और नीचे आगया माँ अपने कपडे हमेशा दोपहर में ही धोती है .......इसीलिए मैं जानता था की पैंटी वही पड़ी होगी ह्म्म्मम्म ......फिर माँ ने मुझे मार्किट जाने को कहा .......

माँ- अरे बेटा जरा मार्किट जाना तो मेरे लिए मैक्सी लेते आना ....
मैं - अच्छा ठीक है माँ मैक्सी कई तरह की आती है कौन सी लानी है आज कल ट्रांसपेरेंट मैक्सी भी आती है 
माँ - मेरी पीठ पे हाथ मारते हुए बोली .....बहोत बाते आने लगी है तुझे ह्म्मम्म्म्म नार्मल मैक्सी कॉटन की लानी है समझा ह्म्म्मम्म [Image: ajqbqr.gif]
मैं - हां हां माँ समझ गया लेते आऊंगा हम्म्म्म 

फिर मैं मार्किट चला गया और दो घंटे बाद जब घर आया तो माँ ने दरवाज़ा खोला तो मुझे ही देख रही रही थी ....शायद वो अपनी पैंटी ढूंढ रही थी जो उन्हें मिल नहीं रही थी लेकिन माँ मुझसे सामने से कुछ पूछ नहीं रही थी ....फिर हमने खाना खाया और मैं माँ के बेड पे बैठ के टीवी देखने लगा फिर माँ भी मेरे बगल में आके बैठ गई[Image: ajqbvx.gif] .......मेरी नज़र माँ के सेक्सी चूचियों पे थे जिसे देख के मन तो कर रहा था की दबा दू लेकिन हिम्मत नहीं हो रही थी ......फिर मैं माँ से बोला........

मैं - माँ मैं अपने रूम में लेटने जा रहा हु मुझे एक घंटे बाद जगा देना 
माँ- तू ऊपर क्यों जा रहा है यही लेट जा न ......वैसे भी तू यही आराम करता है .....
मैं- नहीं माँ मैं ऊपर जा रहा हु बस आप कुछ देर में मुझे जगा देना हम्म्म्म 

ये बोल के मै ऊपर आगया ......वैसे दोपहर में मैं माँ के पास ही सोता हु .......और कभी कभी तो माँ की पैंटी भी देखने को मिल जाती है लेकिन मेरे दिमाग में कुछ और ही चल रहा था .......मेरा लण्ड आज कुछ ज्यादा ही हार्ड हो गया था ......मैं अपने बेड पे लेट गया और माँ के आने का इंतज़ार करने लगा .......फिर एक घंटे बाद माँ ने मुझे नीचे से आवाज़ लगाई ....

माँ- उठ जा बेटा चार बजने वाला है .....

माँ की आवाज़ सुनते ही मैं अपना अंडरवियर नीचे करदिया और एक हाथ से अपना लण्ड सहलाने लगा और एक हाथसे माँ की पैंटी को नाक पे लगा के सूंघने लगा .....फिर मुझे माँ के ऊपर आने की आवाज़ सुनाई दी और फिर मैं अपना लण्ड हिलाने लगा और माँ ने दरवाज़ा खोलते हुए बोली ....[Image: (m=ldpwiqacxtE_Ai)(mh=B-9ppB9yI8KRjFr0)3...EKsPG3E%3D]

माँ- उठ जा बेटा मैं कब से आवाज़ लगा रही हु ...

फिर माँ की नज़र मुझे पर पड़ी और फिर वो खड़े लण्ड को देखने लगी और और एकदम शांत हो गई ....मैं भी चौंकने का ड्रामा करने लगा मेरी नाक पे पैंटी पड़ी हुई थी जिसे मैं धीरे से नीचे गिरा दिया और उनके सामने अपना अंडरवियर ऊपर करने लगा ....मैंने देखा की माँ की नज़र मेरे खड़े लण्ड पे थी फिर जैसे ही मैंने अपना अंडरवियर ऊपर किया ....फिर माँ ने नीचे पड़ी अपनी पैंटी उठाई और मुझे गुस्से से देखने लगी मैं उनसे नज़ारे चुराने लगा फिर वो मेरे पास आई और मुझे जोर से थप्पड़ मारा .......माँ का थप्पड़ खाके अपना एक हाथ अपने गाल पे रख के माँ को देखने लगा .....माँ गुस्से भरी आखो से देखते हुए बोली ......

माँ- ये क्या कर रहे हो तुम हां .......यही सब सीख रहे हो तुम ह्म्मम्म्म्म 

इससे पहले माँ मुझे और कुछ बोलती ....फिर मैं भी गुस्से होते हुए बोला .....

मैं - और मारो मुझे माँ एक थप्पड़ से कुछ नहीं होगा मार मार के खाल निकाल दो मेरा ह्म्मम्म्म्म 

मम्मी मेरी बात सुन के मुझे देखने लगी क्युकी गुस्सा तो उन्हें होना चाहिए था लेकिन गुस्सा मैं हो रहा हु 

मैं- एक थप्पड़ से कुछ नहीं होगा एक काम करो मुझे जान से मार दो वैसे भी मेरे जैसा इंसान का कुछ नहीं होना है ...

माँ- ये क्या बोल रहे हो तुम ......क्या हो गया है तुम्हे ....एक तो गलती करते हो ऊपर से गुस्सा दिखा रहे हो ह्म्म्मम्म्म्म 

मैं- हां माँ सारी गलती मेरी है जो इस दुनिया में पैदा हो गया हु पता नहीं क्यों मैं इस दुनिया में आया इससे अच्छा तो मैं पैदा ही न हुआ होता ......

मेरे इसी बात पे माँ ने मुझे एक और थप्पड़ मारा ..और मैं माँ को देखने लगा .और वो मुझे देखने लगी .....फिर मैं अपने कपडे पहनने लगा और नीचे जाने लगा 

माँ- रुक कहा जा रहा है मुझे तुझसे कुछ बात करनी है 

मैं- लेकिन मुझे आपसे कोई बात नहीं करनी है .....और मारना है तो लो मार लो ....

फिर माँ मुझे रोकने लगी लेकिन मैं नहीं रुका .....और दरवाजा जोर से बंद करके मैं बाहर चला गया ........मुझे यकीन नहीं हो रहा था की मैंने ये सब किया था ......लेकिन सोच के अच्छा लग रहा था .....लेकिन मुझे डर था की कही पापा को ये सब बात न बतादे .....फिर मैं रात के 9  बजे तक बाहर रहा और फिर घर पे दरवाज़ा खटखटाया माँ ने दरवाज़ा खोला और वो मुझे देख रही थी मैं भी उन्हें देख रहा था फिर मैं अंदर आके अपने रूम में कपडे निकाल के सिर्फ अंडरवियर में ही लेट गया ....पापा पहले ही खाना खा के सो गए थे इसका मतलब माँ ने पापा को कुछ नहीं बताया ह्म्मम्म्म्म वर्ण घर आते ही मेरी पिटाई शुरू हो जाती .........वैसे भी पापा और माँ की ज्यादा बनती नहीं ....वो अक्सर दारु पीके आते है और खा पी के सो जाते है और माँ मेरे आने के बाद ही मेरे साथ  खाना खाती है ....मगर आज की हरकत से माँ ने मुझसे कोई बात नहीं की ........लेकिन मुझे यकीन था की माँ मेरे पास आएगी .....और मैं बेड पे लेटे हुए मोबाइल चलाने लगा ...

और बड़े बड़े दूध और गांड वाली आंटी की रील्स देख रहा था करीब आधे घंटे बाद माँ के आने आवाज़ सुनाई दी मैं समझ गया की माँ ही मेरे पास आ रही है मेरा लण्ड अंडरवियर के अंदर तम्बू बना हुआ था जिसे मैं अपने हाथो से मसल रहा था तभी माँ ने मेरे कमरे का दरवाज़ा खोला और उनकी नज़र मेरे खड़े लण्ड पे ही थी जो अंडर वियर में उठा हुआ था ....मेरी नज़र माँ पे थी वो मैक्सी पहन के आई थी रात को माँ मैक्सी ही पहन लेती है अक्सर ......जिसमे माँ की चूचियां लटक रही थी माँ रात को ब्रा निकाल देती है .....माँ के हाथ में थाली थी .......फिर मैं बेड से उठ के खड़ा होगया जिससे मेरा लण्ड अंडर वियर में आगे से  उठ गया फिर माँ मुझे देखते हुए बोली ......


माँ- मै यहाँ खाना रख रही हु खा लेना .......

मैं - मुझे खाना नहीं खाना आप लेजाओ यहाँ से 

माँ- क्या हुआ ........तू खाना क्यों नहीं खा रहा है ....

मैं - मुझे भूख नहीं है आप लेजाओ यहाँ से ........

ये बात बोल के मैं कमरे से बाहर निकल गया और नीचे आंगन की तरफ देखने लगा ......तभी माँ मेरे पास आई और बोली ...

माँ- क्या हो गया है बेटा तुम्हे ......आज से पहले तुमने ऐसा कभी नहीं किया 
[Image: ajqcad.gif]
माँ की बात सुन के मैं समझ रहा था की वो दोपहर की बात से परेशान है तभी मैं बोला ...

मैं- माँ मुझे शाम वाली बात के लिए माफ़ करदेना .......लेकीन आप नहीं समझोगे की मेरे अंदर क्या चल रहा है .....

माँ मेरी बात सुनकर मेरे सर पे हाथ रखते हुए बोली .....

माँ- बेटा क्या हु .....तू जो ये कर रहा है .......और मुझसे जिस तरह बात कर रहा है .....क्या किसी ने तुझसे कहा है क्या ......

मैं - कौन क्या कहेगा मुझे माँ.....वैसे भी मैं अपने आप से परेशान हो गया हु .....वैसे भी मै आपकी पैंटी लेके वो सब कर रहा था और आपने मुझे देख लिया और उसके बाद भी मैं क्या कहु इससे अच्छा तो मैं मर ही जाता ........

माँ- अरे बेटा मरने की बात तुम क्यों करते हो ......मैं समझती हु की तुझपे हाथ नहीं उठाना चाहिए था ....लेकिन मैं क्या करू मैं तुमको वो सब करते देख ली तो मुझे गुस्सा आगया अगर उस बात के लिए मुझसे ऐसा बोल रहा हो  तो मुझे माफ़ कर दो बेटा ........

मैं - नहीं माँ आप माफ़ी क्यों मांग रही हो .......आप नहीं समझोगे मेरे अंदर की हालत क्या है .......अगर आपका ख्याल न होता तो मैं अपने आप को कुछ कर लेता .......

माँ मेरी बात सुन के मेरा हाथ पकड़ के कमरे में ले आई और हम दोनों बेड पे बैठ है और माँ बोली........

माँ- बेटा ऐसी कौन सी बात है जो तुझे परेशान कर रही है ....जो मैं तेरी माँ होके भी नहीं समझ पा रही हु .....

मैं - माँ .....मै  आप से ऐसी बाते नहीं कर पाऊंगा ......इससे अच्छा है की ये बात यही ख़तम करिये ...मैं ऐसे ही ठीक हु .....

माँ- नहीं बेटा तू ठीक नहीं है ........मैं आज से पहले तुझे कभी ऐसा नहीं देखा ......आज जिस तरह से तुमने मुझे जवाब दिया ......उससे पता चलता है की कुछ तो बात है जो तुम्हे परेशान कर रही है .....तुझे मेरी कसम बताओ मुझे ......वरना .......

मैं - अरे माँ आपने कसम क्यों दी ......

माँ की बात सुन के मैं अपना चेहरा नीचे किया और फिर माँ ने अपने हाथ से मेरा चेहरा ऊपर किया और बोली ......

माँ- बता न मेरे बच्चे क्या बात है जो तुझे परेशान कर रही है ह्म्म्मम्म्म्म और जिसकी वजह से तू ये सब कर रहा है ह्म्म्मम्म 

मैं- ठीक है माँ मै आपको बता रहा हु लेकिन आप ये बात पापा से मत कहना .....

माँ- अरे बेटा तुम्हारे पापा तो दारु पीने से ज्यादा मतलब है और उनको अपने काम से कहा फुर्सत है और वैसे भी हम दोनों की बात ही कितनी होती है .....तुम बताओ बेटा मैं किसी से कुछ नहीं कहूँगी ह्म्म्मम्म्म्म 
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#3
मैं - माँ आप तो जानती है मैं 25  साल का हो गया हु और अपनी जिम्मेदारी अच्छे से उठता हु ....

माँ- हां बेटा मैं जानती हु तू कम उम्र से ही अपनी जिम्मेदारी उठा रहा है और मेरा और अपने पापा का अच्छे से ख्याल रखता है
[Image: ajxgfr.gif]
मैं - माँ मेरी उम्र के सारे दोस्त की कोई न कोई लड़की दोस्त है और घूमते फिरते है एक दूसरे के साथ और वो सब करते है जो इस उम्र में एक दूसरे के साथ किया जाता है उनको देखकर मुझे भी लगता है की मेरी भी कोई लड़की दोस्त होती और मैं भी उसके साथ एन्जॉय करता लेकिन बदकिस्मती से मेरी कोई भी लड़की दोस्त नहीं है हममममम मैंने कई बार कोशिश की लेकिन कोई भी लड़की दोस्त नहीं बना पाया मैं भी इंसान हु मेरा भी वो सब करने का मन करता है लेकिन सच ये है की मुझे समझने वाला कोई नहीं है ........बल्कि मेरे दोस्त मेरा मज़ाक उड़ाते है ये सब सोच के मुझे अजीब फील होता है .......इसीलिए मुझे आपका ख्याल आता है आपके पास रहना अच्छा लगता है .......मेरा दोस्त लड़कियों से बाते करते है तो मेरे अंदर आप को लेके वो सब ख्याल आता है .....मगर मैं बदकिस्मत हु की मेरी कोई भी लड़की दोस्त नहीं है ......और जब मुझे ऐसा ख्याल आता है तो मेरे लण्ड में तनाव हो जाता है और उसमे दर्द होने लगता है ......
[Image: ajxgt4.gif]
मेरे मुँह से लण्ड की बात सुन के माँ मुझे देखने लगी .....मगर मैं भी बेशरम होने लगा था क्यों की अगर शर्माता तो ये मौका चला जाता जिसे मैं हाथ से जाने नहीं देना चाहता था ......

मैं- लेकिन माँ जब ये खड़ा हो जाता है तो मुझे इसको शांत करना होता है और पानी जब निकाल जाता है तो थोड़ा राहत मिलती है

माँ मेरी बात बड़े ध्यान से सुन रही थी और मेरा लण्ड पैंट में फुल टाइट हो चूका था जिसपे माँ की नज़र बार बार जा रही थी ...मेरा खड़ा लण्ड अंदर से झटके माँ रहा था और अंडरवियर के अंदर हिल रहा था
[Image: qb-001.gif]
मैं - पिछले कुछ टाइम से ये हो रहा है .....सुबह से लेके शाम तक ये हमेशा खड़ा रहता है लेकिन मुझसे बर्दाश नहीं होता है तो फिर मुझे इसको शांत करना पड़ता है .......और ऐसे ही एक दिन मेरा लण्ड सुबह से खड़ा था तो मैं बाथरूम में जाके इसे शांत करने लगा इसे मसल रहा था जोर से हिला रहा था लेकिन ये शांत ही नहीं हो रहा था और पानी भी नहीं निकल रहा था .......फिर मेरी नज़र आपके पैंटी पे गई जिसे आपने धुला नहीं था .......ना चाहते हुए भी मेरा धयान आपकी पैंटी के ऊपर जा रहा था..और मेरा पानी भी नहीं निकल रहा था ..फिर मैंने उसे उठा लिया और आपके चूत वाले हिस्से को अपने नाक में लगा लिया ........।

जैसे ही माँ ने चूत वाली बात सुनी उनकी आखें बड़ी हो गई और मुझे देखने लगी लेकिन इस बार उन्होंने मुझसे कुछ नहीं कहा वो बस मेरी बातों को धयान से सुन रही थी

मैं - आपकी पैंटी नाक पे लगाते ही मेरे अंदर एक जोर सी महक गई जिसे सूंघ के मैं उस दिन मदहोश होने लगा और आपकी पैंटी सूंघते हुए अपने लण्ड को मसलने लगा और कुछ देर बाद मेरा पानी निकल गया और आपके पैंटी की वजह से मेरा पानी जल्दी निकल गया था वरना हर बार मुझे काफी वक़्त लगता था ......आपके चूत की सुगंध से मेरा पानी जल्दी निकला था ........फिर उस दिन के बाद से जब भी मेरे लण्ड में दर्द होता था तो आपके पैंटी को सूंघ के अपना पानी जल्दी निकाल देता था और आज दोपहर भी वही कर रहा था जब आपने मुझे देखा था

अपनी बाते पूरी करके मैं नीचे देखने लगा फिर माँ ने मेरे चेहरे को ऊपर उठा के बोली .....

माँ- बेटा मैं जानती हु की तू बड़ा हो गया है मगर तुम जो मेरी पैंटी के साथ कर रहे हो वो सही नहीं है बेटा .......

मैं - माँ मैं जानता हु की ये सही नहीं है लेकिन आप नहीं समझोगी जब मेरे साथ ऐसा होता है तो मैं पागल हो जाता हु मेरे समझ में नहीं आता की मैं क्या करू फिर मुझे आपके चूत की खुसबू याद आजाती है ह्म्मम्म्म्म 

मेरे मुँह से चूत और लण्ड की बात सुनकर माँ को हैरानी हो रही थी लेकिन कुछ बोल नहीं रही थी .......

माँ- बेटा इस उम्र में ऐसा होता है ......और तेरी उम्र में ये सब होना आम बात है 

मैं- माँ .....आम बात तो उन लड़को के लिए है जिनके पास लड़कियां है जिससे वो दोनों अपना काम चला लेते है मैं मेरे पास तो कोई लड़की नहीं है मुझे तो ये भी नहीं पता की लड़कियों के अंदर क्या होता है और वो अंदर से कैसे दिखती है ........

मम्मी मेरी बात सुन के मुझे देखने लगी क्यों की सीधा ही मैं नंगी लड़की देखने के बारे में बोल दिया फिर माँ बोली ....

माँ- ऐसा मत बोल बेटा ......तू बिलकुल बदकिस्मत नहीं है ......तुम मेरे अच्छे बेटे हो ......मैं जल्दी ही कोई लड़की देख के तुम्हारी शादी करा दूंगी .......फिर तुमको कोई परेशानी नहीं होगी.....
[Image: ajxy33.gif]
मैं- मम्मी आप समझ नहीं रही हैं .....मेरे इसमें बहुत दर्द होता है जब भी ये खड़ा होता है ......

मम्मी मेरी बात सुन के मुझे देखने लगी और और बेड से मैं खड़ा हो गया और उनके सामने आगया और उस वक़्त मेरा लण्ड फुल टाइट था जो अंडरवियर में साफ़ दिख रहा ......तभी मैंने अपना अंडरवियर तुरंत नीचे कर दिया और मेरा खड़ा लण्ड तन तनाता हुआ बाहर आगया जो सीधा माँ की तरफ खड़ा था और और उसका मोटा सुपाड़ा भी पूरा खुला हुआ था ......
[Image: 26276982.gif?width=460]
लण्ड बाहर निकलते ही मम्मी बेड से खड़ी हो गई और मुझे देखने लगी और मैं आराम से अपना लण्ड बाहर निकाले हुए मम्मी को देखने लगा मैं अपने लण्ड को झटके दे रहा था और ऊपर नीचे हो के हिल रहा था तभी मम्मी बोली .......

मम्मी- बेटा ये तुम ये क्या कर रहे हो कोई अपने माँ के सामने ऐसा करता है क्या ......तुम अपने कपडे पहन लो बेटा........
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#4
मम्मी मुझसे कह तो रही थी लेकिन उनकी नज़र मेरे लण्ड से हट नहीं रही थी .....उनकी नज़र बार बार मेरे लण्ड के खुले हुए गुलाबी सुपाडे की तरफ जा रही थी जिसमे सफ़ेद सफ़ेद परत जमी हुई थी क्यों की कल ही मैंने मुठ मारी थी और साफ़ नहीं किया था .....फिर मैं बोला....

मैं- अब मैं क्या करू आप ही बताओ ......आप खुद ही छू के देख लीजिये ....मेरा ये कितना टाइट हो गया है ....दोपहर से ही इसने मुझे परेशान करके रक्खा है .....

अपनी बात पूरी करके मैंने मम्मी का हाथ पकड़ के अपने लण्ड पे रख दिए और जैसे ही मैंने ऐसा किया एक सेकंड के लिए उन्होंने मेरा लण्ड पकड़ा उसके बाद उन्होंने अपना हाथ मेरे लण्ड से हटा लिया और बोली.....

माँ- अरे पागलराम ये तुम क्या कर रहे हो .......कोई अपने माँ के साथ ऐसा करता है क्या ....तुमको मेरे सामने नंगा खड़े होने में शर्म नहीं आ रही है क्या ह्म्मम्म्म्म चलो जल्दी से अपना कपडा पहन लो ....

मैं - मम्मी इसीलिए मैं आप से ये बात नहीं बता रहा था .......मैं जानता था की आप नहीं समझेंगी ...अब जब मैं आपको अपनी परेशानी बता रहा हु तो आप ऐसा कह रही हैं ह्म्म्मम्म्म्म

माँ - बेटा मैं समझ गई की क्यों तुम परेशान थे लेकिन तुम मेरे सामने इस तरह नंगे खड़े हो मुझे अजीब लग रहा है .......

मैं - क्यों माँ क्यों अजीब लग रहा है आपने तो मुझे बचपन से नंगा देखा है तो फिर ........

माँ- हां बेटा बचपन से देखी हु लेकिन तब तुम बच्चे थे लेकिन अब तुम बड़े हो गए हो इसीलिए मुझे अजीब लग रहा है ह्म्म्मम्म समझा कर बेटा ....

मैं- माँ आपसे एक बात पुछु ...

माँ- हां बोल बेटा ....

मैं- जब आप सुबह नहा के नंगी मेरे सामने आती हैं और मेरे सामने कपडे बदलती है तब आपको अजीब नहीं लगता ........और मैं आपके सामने नंगा खड़ा हु तो आप को अजीब लग रहा है ह्म्म्मम्म

मेरी बात सुन के माँ एक दम शांत हो गई और मुझे देखने लगी कुछ देर एकदम शांत रही ....तभी मैं बोला ....

मैं -बताइये न मम्मी आपने मेरी बात का जवाब नहीं दिया ह्म्म्मम्म

माँ- तुम मेरे बेटे हो इसीलिए अजीब नहीं लगता है और सिर्फ ऊपर के कपडे तेरे सामने बदलती हु तेरे सामने तेरी तरह पूरी नंगी थोड़ी होती हु ......

मैं - सच कहु तो मैंने कई बार आप को नंगा देखा है ........लेकिन मुझे कभी अजीब नहीं लगा क्युकी आप मेरी प्यारी माँ हो ....मैं आपसे बहोत प्यार करता हु मम्मी ......इसीलिए शायद आपसे ऐसे खुल के बाते कर पा रहा हु ह्म्म्मम्म्म्म ..

माँ- बेटा मैं भी तुझसे बहोत प्यार करती हु ......तेरे अलावा मेरा है ही कौन ........तेरे पापा को अपने काम से ही मतलब है या दारु से बस .....उनको देस दुनिया से कोई मतलब नहीं है .......मगर आज जिस तरफ तुमने जवाब दिया था उससे तो मैं डर ही गई थी ......वादा कर आज से तुझे जो भी परेशानी होगी मुझसे जरूर बताएगा ह्म्म्मम्म्म्म

मैं - ठीक है मम्मी मैं वादा करता हु आज के बाद मैं आपसे कोई बात नहीं छुपाऊंगा ......

अपनी बात पूरा करके मैं मम्मी से लिपट गया और उन्हें जोर से गले लगा लिया ......गले लगते ही मम्मी के बड़े बड़े दूध मेरे सीने से दब गए थे जो मुझे अंदर तक महसूस हो रहे थे और और मेरा लण्ड मैक्सी के ऊपर से ही माँ के चूत के आस पास लग रहा था उस पल मम्मी ने बिलकुल परवाह नहीं की ....के मैं उनके सामने नंगा खड़ा हु या मेरा लण्ड उनके चूत के आस पास लग रहा है उस वक़्त माँ भावुक हो गयी थी और गले लग के मेरी पीठ सेहला रही थी .....फिर माँ बोली.....
[Image: ajxzev.gif]
माँ- सब ठीक हो जायेगा बेटा ....लेकिन अब तुम मेरे सामने मरने मारने की बात मत करना वरना तुम्हे और मार पड़ेगी .......

मैं - ठीक है मेरी प्यारी माँ अब नहीं कहूंगा ......लेकिन अब आप मुझे मरोगी तो नहीं न हम्म्म्म

माँ- बेटा अब नहीं मरूंगी .......मेरा हाथ गुस्से से उठ गया था अगर मुझे पता होता की तेरे दिमाग में ये सब चल रहा है तो मैं ऐसा नहीं करती ....

मैं - माँ आप मुझसे नाराज़ तो नहीं हो न ......।

माँ- अरे नहीं बेटा मैं तुमसे कैसे नाराज़ हो सकती हु ह्म्मम्म्म्म

मैं- माँ मैं आप से बहुत प्यार करता हु .....एक आप ही हो जो मुझे समझती हैं हम्म्म्म

माँ- मैं भी तुझसे बहोत प्यार करती हु मेरा बच्चा ह्म्म्मम्म

हम दोनों अभी भी गले लगे हुए थे और मेरा लण्ड माँ के चूत के आस पास ही लगा हुआ था फिर माँ मुझसे अलग हुआ .....और अलग होते ही माँ की नज़र मेरे लण्ड पे गई जो की और भी ज्यादा कड़क हो चूका था मेरा लण्ड देखने के बाद माँ ने मुझे देखा और मुझे देख के मुस्कुराने लगी तभी मैं भी माँ को देख के मुस्कुराया और फिर माँ बोली ......

माँ- बेटा अब इसे अंदर कर ले कब तक अपनी माँ के सामने नंगा खड़ा रहेगा ह्म्म्मम्म

फिर मैं तुरंत अपने अंडरवियर को पकड़ के ऊपर किया और अंडरवियर के बाद भी मेरा लण्ड कड़क खड़ा था जिसे मेरी अपने हाथ से सेट करने लगा फिर मैं अंडरवियर के अंदर हाथ डाल के अपने लण्ड को सेट करने लगा ऐसा करते माँ मुझे और मेरे लण्ड को देख रही थी जिस हिसाब से मेरा लंड झटके मार रहा था की माँ नज़र मेरे लण्ड से हटने का नाम नहीं ले रही थी .......फिर माँ बोली.....

माँ - बेटा खाना रक्खा है खा लो ह्म्म्मम्म मैं चलती हु

मैं - मम्मी आप भी मेरे साथ खाओ न ....मैं जानता हु की आप भी अपनी नहीं खाई हैं ह्म्म्मम्म्म्म

माँ मेरी बात मान गई और माँ के साथ मैं नीचे चलने लगा खाना पानी लेने नीचे जाते हुए मुझे यकीन नहीं हो रहा था की माँ से इतना खुल के बाते की और मैं उन्हें अपना लण्ड भी दिखा दिया और ये मेरी और माँ के लिए ये अच्छी शुरुवात थी.........वरना मैं हर बार डर जाता था और कुछ नहीं कर पाता था मगर आज सही आईडिया से मैं इतना आगे बढ़ गया फिर मैं और माँ नीचे से खाना पानी लेके ऊपर आके बैठ गई और मेरा लण्ड अभी भी फुल टाइट था अंडरवियर में जिसे माँ बार बार देखे जा रही थी .......और फिर हम लोग खाना खाने लगे ....खाना कहते वक़्त भी मैं अपने लण्ड को अपने हाथ से सही कर रहा था जिसे माँ देख रही थी .......फिर खाना खा के मैं बेड से उठ गया और माँ भी उठ के बर्तन उठाने लगी तभी मैं माँ के हाथ से बर्तन लेके बेड पे रख दिया और बोला ......

मैं - मम्मी मुझे आपसे एक बात कहनी है हम्म्म्म

माँ- क्या बात करनी है बेटा

मैं- कैसे कहु बस समझ नहीं आ रहा है.......

माँ- बेटा अभी ही हमने इतनी सारी बाते की है ......और तुम अभी भी सोच रहे हो की कैसे कहु ......ह्म्म्मम्म ....जो बोलना है खुल के बोलो बेटा हम्म्म्म

मैं - मम्मी आप नाराज़ तो नहीं होगी न ....

माँ- अब अगर वो बात नहीं बताई तो ज़रूर नाराज़ हो जाउंगी हम्मम्मम्मम्म बता चल जल्दी हम्म

फिर मैंने गहरी सांस ली और बोला......

मैं - मम्मी आप मुझे अपनी पैंटी दे सकती है ......

मरी बात सुन के माँ चौंक गई और बोली .......

माँ- बेटा ये तुम क्या कह रहे हो ......अभी अभी मैं तुमको समझाई की ये गलत है फिर भी तुम ऐसे बात कर रहे हो ह्म्म्मम्म

मैं- मम्मी मैं क्या करू आप देख तो रहीं है न जब से आप मुझसे बात कर रही है तबसे ये खड़ा हुआ है और बैठने का नाम ही नहीं ले रहा है जिससे मुझे दर्द भी हो रहा है .....आप समझ ही नहीं रही हैं ह्म्म्मम्म

माँ- बेटा मैं समझ रही हु .....लेकिन ये सही नहीं है समझा करो जाओ बाथरूम में सुसु कर लो ठीक हो जायेगा ह्म्म्मम्म

मैं - अभी नीचे जब गया था तो सुसु किया तो था उसके बाद से तो और भी हार्ड हो गया है अगर आज दोपहर में शांत कर लेता हो ठीक हो जाता लेकिन उस वक़्त तो आपने मना कर दिया अब बताइये की मैं क्या करू ह्म्मम्म्म्म

मेरी बात सुनके माँ रोने जैसे शक्ल बनाने लगी और मुझे देखने लगी ......फिर मैं उनके पास गया और पास जाते ही मैं अपना लण्ड बाहर निकाल लिया मेरे लण्ड निकालते ही माँ मुझे देखने लगी .......

मैं - देखिये न मम्मी मेरा ये कितना पत्थर जैसा हो गया है जिससे मुझे दर्द हो रहा है आप प्लीज अपनी पैंटी दे दीजिये न जिससे मैं इसे शांत कर सकू हम्म्म्म

मम्मी- हे भगवन .......अब मैं तुझे कैसे समझाऊ की ये सब सही नहीं है मैं तुम्हारी माँ हु और तुमको मेरे सामने ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए और तुम मुझसे पैंटी मांग रहे हो हम्म्म्म

मैं - इसमें गलत क्या है ......मैं आप के साथ कुछ गलत थोड़ी किया हु मैं तो बस आपकी पैंटी मांग रहा हु जिससे मैं अपने खड़े शैतान को शांत कर सकू जैसे रोज़ मैं आपकी पैंटी सूंघ कर करता हु .....बस फर्क इतना है की मैं आपको सब बता दिया और और मैं सामने से आपकी पैंटी मांग रहा हु

माँ- बेटा मैं समझती हु की तुम की दौर से गुजर रहे हो लेकिन ये तुम जो मांग रहे हो वो ठीक नहीं है बेटा समझा करो हम्म्म्म और मुझे लगता है अब यहाँ से जाना चाहिए हम्म्म

मैं- ठीक है मम्मी आप जाओ यहाँ से छोड़ दो मुझे मेरे हाल पर .......मुझे लगता है की अभी आप मुझे समझने की बात कर रहे थे वो सब झूठ है वो सिर्फ आप मेरा दिल रखने के लिए बोल रही थी .......आप बिलकुल नहीं समझती मुझे जाइये यहाँ से ह्म्म्मम्म्म्म

मम्मी से ये बात बोल के अपना लण्ड अंडरवियर में कर लिया और घूम के दूसरी तरफ मुँह करके खड़ा हो गया और अगले ही पल माँ ने मेरे कंधे पे हाथ रक्खा और मुझे घुमा कर मेरी आखों में देखने लगी माँ रोने जैसे शक्ल बनाई हुई थी .....तभी माँ बोल......

माँ- बेटा ऐसा मत बोल की मैं तुम्हे समझती नहीं हु ........मैं तुम्हे अच्छी तरह समझती हु लेकिन जो तू कह रहा है वो ठीक नहीं है .....क्या कभी देखा है किसी माँ को अपने बेटे को पैंटी देते हुए ह्म्मम्म्म्म

मैं - अरे दुनिया में क्या चल रहा है आपको पता नहीं है आज कल आज कल माँ बेटे के बीच बहुत कुछ होता है लेकिन मुझे उससे कुछ लेना देना नहीं है मुझे सिर्फ आपकी पैंटी चाहिए ताकि मैं अपना दर्द कम कर सकू लेकिन रहने दो आप नहीं समझोगी ......

माँ- बेटा समझता क्यों नहीं पैंटी गन्दी होती है उसमे सुसु की बदबू आती है और जो पैंटी मांग रहा है तू .....वो मैं धुल के डाल दी हु ह्म्म्मम्म

मैं - मैं जानता हु की उस पैंटी को आप धुल के तार पे फैलाई हैं देखा मैंने ......

माँ- वही तो तुमसे कह रही हु .....

मैं - मुझे वो पैंटी देदो जो आप अभी पहनी हो ......

मेरी बात सुन के माँ की आखें बड़ी हो गई और मुझे घूरते हुए बोली ......

माँ- ये क्या बोल रहा है तू ........पागल तो नहीं हो गया है हम्म्म

मैं- प्लीज प्लीज प्लीज मम्मी दे दो न अपनी पैंटी प्लीज् प्लीज.........

माँ- बेटा तुम समझते क्यों नहीं मेरी पैंटी बहुत गन्दी है मैं इसे सुबह से पहनी हु .....

मैं - इसी लिए तो मांग रहा हु आपके पैंटी से जो तेज़ महक आती है न उसे सूंघते ही मेरापानी निकल जाता है और मुझे दर्द में आराम मिल जाता है प्लीज दे दीजिये न माँ हम्म्म

माँ- बेटा मेरी पैंटी से सुसु की महक आती है और तू उसे सूंघने को बोल रहा है जो पहले से ही गंदी है हम्म्म्म

मैं - मम्मी प्लीज दे दीजिये न वरना मैं आज रात सो नहीं पाउँगा ......आपको मेरी कसम प्लीज दे दीजिये न हम्म्म्म

मुझे माँ को कसम देते ही माँ अपने माथे पे हाथ रख के बैठ गई ......और मेरा लण्ड अंडर वियर के अंदर से ही उनके सामने झटके मार रहा था
मम्मी दो मिनट बिना कुछ बोले बैठी रही फिर मैं माँ के बगल में गया और उनका हाथ पकड़ा और बोला.....

मैं - मम्मी मैं जानता हु की हमारे बीच ऐसा नहीं होना चाहिए ....लेकिन आप अब मेरे बारे में सब जानती है और मैं जानता हु की आप मुझे समझती है मेरी हालत से वाक़िफ़ है ....मम्मी हमारे बीच ये जो बाते हो रही है वो हमारे बीच ही रहेगी इसके बारे में कभी किसी को पता नहीं चलेगा और वैसे भी आप तो सिर्फ मेरी मदद कर रही है जैसे हर चीज़ो में करती हैं ह्म्म्मम्म इसमें गलत क्या है .....

मेरी बात बड़े ध्यान से मम्मी सुन रही थी और मुझे देखे जा रही थी ......आज एक दिन में हमारे रिश्ते के बीच बहुत कुछ बदल चूका था ..मैं अपनी बात पूरी करके माँ को देखने लगा तभी माँ ने गहरी सांस ली और बोली .......

माँ - ठीक है बेटा ......मैं अपनी पैंटी दे देती हु तुमको .....

मैं माँ के मुँह ये बात सुन के ख़ुशी से उछल पड़ा और माँ को गले लगा लिया ....और बोला ..

मैं - थैंक्यू मम्मी मुझे समझने के लिए ह्म्म्मम्म

मम्मी- वो सब ठीक है बेटा ......लेकिन एक बात का ध्यान रखना ये बात किसी को पता नहीं चलनी चाहिए खासकर पापा को क्यों की अगर उन्हें इस बात की भनक लग गई तू वो हम दोनों की जान ले लेंगे समझे बेटा .....ह्म्म्मम्म

मैं - अरे मम्मी भरोसा रखिये .....ये बात किसी को नहीं पता चलेगी ...वैसे भी पापा अपने काम में ही बिजी रहते है और उनकी पहली बीवी तो दारु है ....आप तो दूसरी हैं ह्म्म्मम्म है की नहीं .....

माँ- हां बेटा बात तो तू सही कह रहा है .....

मम्मी अपनी बात पूरी करके मुझे देख रही रही थी और मैं माँ को देख रहा था हम दोनों के बीच ख़ामोशी छा गई थी .....मै माँ के पैंटी देने का इंतज़ार कर रहा था मगर माँ को शायद शर्म आ रही थी तभी मै बोला .....

मैं- माँ अब तो आप अपनी पैंटी देदो मुझ से अब रहा नहीं जा रहा है ...

मेरी बात को सुन के माँ शर्म से लाल हो गई और फिर माँ खड़ी हो गई और मैं भी माँ के साथ खड़ा हो गया फिर माँ ने अपने मैक्सी नीचे से उठाने लगी मैक्सी ऊपर होते ही माँ की गोरी गोरी टाँगे मेरे सामने थी जिसे देख मेरा लण्ड और भी फनफना रहा था ....और मन कर रहा था की माँ की मैक्सी में घुस जाऊ और उनके गोर गोर जांघ को चुम लू लेकिन मै जल्दी बाज़ी नहीं करना चाहता था फिर मैक्सी ऊपर होते ही माँ ने अपनी पैंटी को पकड़ी और नीचे करके निकाल दी और अपने हाथो में लेके खड़ी थी और मुझे देख रही थी फिर माँ के सामने अपना हाथ किया और माँ ने मुझे अपनी पैंटी देदी ....माँ ने काली कलर की पैंटी पहनी हुई थी ......माँ मुझे पैंटी देने के बाद शर्म से नीचे देखने लगी और मैं तुरंत माँ की पैंटी में चूत वाले हिस्से को देखने लगा ....देखा तो मेरी आखें फटी की फटी रह गई .....मम्मी के पैंटी का चूत वाला हिस्सा बिलकुल गीला था और मैं जानता था की ये सुसु का गीलापन नहीं है .....मम्मी मुझसे नज़ारे नहीं मिला पा रही थी ......फिर मैं अपना लण्ड माँ के सामने ही मसलने लगा अंडरवियर के ऊपर से ही फिर माँ की नज़र मेरे लण्ड पर पड़ी फिर माँ ने मेरे चेहरे की तरफ जैसे देखा मैंने तुरंत उनकी पैंटी नाक पे लगा के सूंघने लगा और अपना लण्ड ज़ोरो से मसलने लगा .......मम्मी के सामने मैं अपना लण्ड मसल रहा था और पैंटी को सूंघ रहा था और माँ मुझे घूर घूर के देख रही थी .....और मै अब बिना शर्म के माँ के सामने ये सब कर रहा था माँ मुझे दो मिनट तक देखती रही फिर बोली .......
[Image: ajxzl7.gif]
माँ- बेटा अब मैं चलती हु ....तुम जो कर रहे हो उसे करने के बाद पैंटी को छुपा देना कही तुम्हारे पापा न देख ले ठीक है बेटा .....

मैं - आप बेफिक्र रहो माँ पापा को इस बारे में कभी नहीं पता चलेगा ......आप भी आराम करिये और मैं भी इसे शांत करके सो जाऊंगा .....

मेरी बात सुन के माँ को हलकी सी हसीं आगई ......और मैं भी माँ को मुस्कुराते हुए देख के अपना लण्ड मसलते हुए माँ की गीली पैंटी को जोरो से सूंघ रहा था जैसे कोई गुलाब का फूल हो ह्म्मम्म्म्म
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#5
मम्मी मुझे देखने लगी और फिर कुछ देर में वो मुझे देखते देखते कमरे से बाहर चली गई और उनके जाते ही मैं बेड पे लेट गया और अपना लण्ड बाहर निकाल के मुठ मारने लगा और साथ ही माँ की पैंटी को सूंघने लगा माँ की पैंटी से चूत हो मदहोश कर देने वाली महक आ रही थी की क्या ही बताऊँ ह्म्मम्म्म्म फिर मन तो कर रहा था की अपना पानी निकाल दू लेकिन मैंने सोच लिया की अब तो मेरे लण्ड का पानी माँ अपने हाथो से निकालेगी फिर मैं माँ की पैंटी सूंघते हुए सो गया सुबह आठ बजे मेरी आँख खुली तो पापा ऑफिस जा चुके थे .......फिर मैंने माँ की पैंटी अपने मुँह पे पहन लिया और उनके चूत की खुशबू अभी तक आ रही थी

और मेरा लण्ड पहले से ही खड़ा था और माँ के चूत के महक से और भी पत्थर बन गया......... और मैं मम्मी की चुदाई के बारे में सोचने लगा और सुबह सुबह ही मम्मी के चुदाई के सपने देखने लगा ऐसे ही लेटे लेटे एक घंटा बीत गया और मुझे पता ही नहीं चला ......और फिर 9 बजे  माँ चाय लेके मेरे कमरे में आने लगी फिर मम्मी के आने से पहले अपना लण्ड अंडरवियर से थोड़ा बाहर कर दिया और मम्मी की पैंटी की  चूत वाली जगह को अपने मुँह लगा के सोने का नाटक करने लगा मम्मी कमरे के बाहर से ही मुझे आवाज़ देने लगी की 

माँ- उठ जा बेटा 9 बज गए है 

आवाज़ देते हुए वो मेरे कमरे में जैसे ही कमरे के अंदर आई उनकी आवाज़ बंद हो गई और वो मेरे मुँह की तरफ देखने लगी जहा उनकी पैंटी मेरे मुँह पे थी फिर उनकी नज़र मेरे खड़े लण्ड पे गई जो की फुल टाइट मेरे अंडरवियर के बाहर आधा [Image: ajxzmc.gif] निकला हुआ था मै नाटक करके सो रहा था दो मिनट तक वो मुझे देख ही रही थी ......उनकी नज़र कभी अपनी पैंटी पे जाती कभी मेरे लण्ड पर ऊऊफफफफफफफ फिर वो मेरे पास आई और चाय टेबल पर रख दी और मेरा कन्धा पकड़ के हिलाने लगी और बोली .......

माँ- उठ जा बेटा सुबह हो गई है 

फिर मैं तुरंत उठ गया और मै मम्मी को देखने लगा और मम्मी मुझे देख रही थी फिर मम्मी बोली ......

माँ- बेटा ये सब क्या है .....तुम मुँह पे पैंटी लगा के सो रहे हो ......पापा ने देख लिया होता तो क्या होता ह्म्मम्म्म्म चल हटा इसे ....

मम्मी की बात सुन के मैं मुँह से पैंटी हटा दी और बोला.......

मैं- मम्मी आप डरो मत ये सब तो मैंने पापा के ऑफिस जाने के बाद ही कर रहा था मेरी नींद एक घंटे पहले ही खुल गई थी तभी मैंने देखा की पापा ऑफिस के लिए निकल रहे थे तभी मेरी नज़र आपकी पैंटी पे गई और मुझसे रहा नहीं गया और मैं आपकी पैंटी फिर से सूंघने लगा और सो गया पता नहीं क्या जादू है आपके पैंटी में की जब भी इसे सूंघता हु कुछ देर बाद मेरी आँख लग जाती है ........फिर आप मुझे जगाने आई तो मेरी आँख खुली ........ये लीजिये आपकी पैंटी ......

माँ- अच्छा ठीक है बेटा अब चल उठजा फ्रेश होकर नास्ता करले ह्म्मम्म्म्म 

मम्मी की बात सुन के मैं बेड से उठ गया और मम्मी के सामने अपने लण्ड को हाथ से पकड़ सेट करने लगा तभी मैंने देखा की मम्मी की नज़र मेरे लण्ड पे ही थी वो उसे देखे जा रही थी फिर मैंने माँ को देखा वो मुझे आखे बड़ी करके देखे जा रही थी फिर मैंने माँ को देख के मुस्कुराया और फिर मम्मी भी मुझे देख के मुस्कुराई और फिर मैं कमरे से बाहर चला गया फिर रुक गया और दरवाजे के कोने से देखने लगा मम्मी अपने पैंटी को ध्यान से देख रही थी जिसको मैं चूत वाले हिस्से को मैं चाट चाट के गीला कर दिया था तभी मैं एकदम से अंदर आगया तो मम्मी ने अपने हाथ में ली हुई पैंटी पीछे छुपा ली और बोली .......

माँ - क्या हुआ बेटा ......

मैं- कुछ नहीं मम्मी बस अपने मोबाइल को चार्जर पे लगाने आया था .....

माँ- चल बेटा मुँह हाथ धोले ह्म्म्मम्म ......

मम्मी के कहने पर मै फ्रेश होने चला गया फ्रेश होक आया तो मम्मी नहाने चली गई फिर मैं तुरंत बाथरूम के पास चला गया और माँ को देखने लगा माँ ऊपर से पूरी नंगी थी और बैठ के नहा रही थी कुछ देर बाद जब मम्मी खड़ी हुई तो उनके चूतर पे उनका गीला पेटीकोट चिपका हुआ था जिसे देख कर मेरी हालत ख़राब हो रही थी ....फिर मम्मी पलट गई तो मेरे सामने माँ की सेक्सी दोनों चूचियां थी जिस पर पानी की बूंदे चमक रही थी ह्म्म्मम्म्म्म और पानी की बूंदे माँ के नाभि से होते हुए माँ के पेटीकोट में चूत की तरफ जा रही थी जिसे देख में मेरा हाथ मेरे लण्ड पे चला गया और मसलने लगा ऊऊफफफफफफ फिर माँ नया पेटीकोट पहनने लगी तो उनकी सेक्सी गांड मुझे दिखाई दी ......फिर वो बाहर निकलने वाली थी उससे पहले मै उनके कमरे में जाके बैठ गया .......और मुझे पता था की बाकी कपडे वो रूम में आके पहनती है .....फिर मैं मम्मी के आने का इंतज़ार करने लगा और फिर माँ जैसे ही कमरे में आई तो मैंने देखा की ब्लाउज़ और पेटीकोट पहन कर कमरे में आई है ऐसा पहली बार हुआ है .....कमरे में आके मम्मी मुझे देखने लगी मैं समझ गया की कल रात वाली बात से माँ ने ऐसा किया है क्युकी उससे पहले माँ कमरे में ही ब्रा और ब्लाउज़ पहनती थी ......वो साड़ी छोड़ के बाकी कपडे पहन कर आई थी फिर कपडे पहन कर बोली ....

माँ- बेटा मैं पूजा कर लू फिर नास्ता देती हु हम्म्म्म 

मैं - ठीक है मम्मी .....

फिर माँ पूजा करने लगी और फिर उन्होंने मुझे नास्ता दिया और नास्ता करके मैं कालेज निकल गया और फिर माँ अपने काम में लग गई  फिर मैं दोपहर में घर आया तो मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया और मैं सोफे पे अपना लण्ड पकड़ के बैठ गया .....तो माँ ने मुझे देखा ...और बोली .

माँ- क्या हुआ बेटा ऐसे क्यों बैठा है पेट में दर्द है क्या ..ह्म्म्मम्म 

मैं - नहीं माँ पेट में नहीं उसमे दर्द है आअह्ह्ह 

मेरी बात सुन के मम्मी की नज़र मेरे लण्ड पे गई जिसे मैं दबा रहा था ......तो माँ बोली ....

माँ- अरे बेटा तुझे दिन में भी चैन नहीं है ह्म्मम्म्म्म 

माँ - क्या करू माँ मेरा लण्ड मेरे बस में ही नहीं है जब देखो खड़ा हो जाता है अह्ह्ह्हह 

मेरे मुँह से लण्ड शब्द सुनकर माँ मुझे घूर के देखने लगी फिर मैं बोला ....

मैं- मम्मी आप मुझे ऐसे क्यों देख रही हैं...लण्ड बोल दिया इसीलिए ....

मम्मी मेरी बात सुन के कोई जवाब नहीं दी ....बस मुझे देखे जा रही थी ...

मैं-  मम्मी आज कल सभी लोग ऐसे ही बोलते है .......मेरे दोस्त भी इसको यही बोलते है इसीलिए मेरे मुँह से निकल गया आप मुझसे नाराज़ हो क्या 

मम्मी- नहीं बेटा नाराज नहीं हु ......जो बातें हमारे बीच कल राज हुई थी उसके बाद हमारे बीच रह ही क्या गया है .....

मैं- मम्मी आप सच में नाराज़ नहीं हो न ....

मम्मी- नहीं बेटा नाराज़ नहीं हु ...बस ऐसे बातें थोड़ा अजीब लगती है 

मैं- मम्मी ...जैसे मैं खुल के बोलता हु लण्ड को इस बात से आपको कोई ऐतराज़ तो नहीं है न 

मम्मी मेरी बातें सुन के चुप हो गई और मैं मम्मी को देख के अपने लण्ड को मसलने लगा .....

मैं- मम्मी आपने जवाब नहीं दिया बताइये न .....आपसे ऐसे खुल के बाते कर सकते हु न जैसे अपने दोस्तों से खुल के बाते करते हु ह्म्मम्म्म्म 

मम्मी- बेटा कल रात हमारे बीच जिस तरह की बाते हुई उसके बाद हमारे बीच रह ही क्या गया है ह्म्म्मम्म की अब मुझे शर्म आएगी .......मगर ध्यान रखें इस तरह की बाते अकेले में ही करना जब सिर्फ हम दोनों हो ......किसी के सामने मत बोल देना ह्म्म्मम्म 

मैं - अरे माँ मै पागल थोड़ी हु की किसी के सामने ऐसे बातें करूँगा हम्म्म वैसे मम्मी कल रात जब आप मुझे समझा रहे थे और आपने मुझे अपनी पैंटी दी उससे लगा की सच में आप मेरी दोस्त हो ह्म्मम्म्म्म मम्मी कल रात पहली बार आपसे बात करने में डर नहीं लगा वरना थप्पड़ खा के तो मेरी हालत ही ख़राब हो गई थी .....

मम्मी- बेटा मैं तुम्हारी माँ हु ......तेरी परेशानी मैं नहीं समझूंगी तो कौन समझेगा ह्म्मम्म्म्म और वो थप्पड़ तो मैंने गुस्से में मार दिया था अब मुझे पता नहीं था की तुम्हारे अंदर ये सब चल रहा है ह्म्म्मम्म 

मैं - मैं समझता हु मम्मी आप ने मुझे पहले कभी वो सब करते नहीं देखा था और आपकी जगह कोई और होता तो ऐसे ही करता मगर मैं क्या करू माँ मेरा लण्ड हमेशा खड़ा हो जाता है ......और जब तक पानी न निकालू तब तक ऐसे ही टाइट रहता है ......कल रात मैंने दो बार पानी निकाला तब जाके सो पाया ....और सुबह फिर से खड़ा हो गया ......

मम्मी- मैं समझ सकती हु बेटा ......लेकिन बार बार ऐसे करना ठीक नहीं है इससे सेहत पे असर पड़ता है हम्म्म्म 

मैं - लेकिन माँ जब मैं अपना पानी नहीं निकलता तो ये रात को अपने आप ही निकल जाता था .....आपको याद है मैं सुबह उठते ही नहा लेता था क्युकी मेरा अंडरवियर मेरे पानी से गीला हो जाता था इसी लिए मैं नहा लेता था 

मम्मी मेरी बात बड़े ध्यान से सुन रही थी और मैं मम्मी को देख के अपने लण्ड को मसल रहा था और मम्मी की नज़र मेरे खड़े लण्ड पे ही थी जिसे बड़े गौर से देखे जा रही थी जो की लोअर से बाहर आने को बेताब था ........

मैं - अब आप ही बताओ मैं ऐसा न करू तो क्या करू .....देखो न ये कैसे खड़ा हुआ है अभी भी हम्म्म्म 

मम्मी से ये बात बोलते हुए मैं अपना लोअर थोड़ा नीचे किया जिससे मेरे लण्ड बाहर आके उछल गया .....और मेरे लण्ड को देखते ही मम्मी चौंक गई और इधर उधर देखने लगी .....
[Image: 38906231.gif?validfrom=1762923600&validt...DQS%2Bs%3D]
माँ- बेटा तू पागल हो गया है क्या ......दिन दहाड़े ऐसा कोई करता है क्या कोई घर में आजाये तो .......

फिर मैं मम्मी की बात सुन के लोअर पहन लिया और माँ मुझे गौर से देख रही थी
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#6
मैं - मम्मी आप डर क्यों रहीं हैं ह्म्मम्म्म्म घर पे आपके और मेरे अलावा कोई नहीं है .....

माँ- बेटा लेकिन कोई भी आ सकता है न अभी जैसे काम वाली या कोई पोस्टमैन या कोई रिस्तेदार......समझा इसीलिए दिन में नहीं .....वैसे तूने अंडरवियर नहीं पहनी है क्या .....

मैं - मम्मी पहना था कालेज से आके निकाल दिया था

मम्मी- क्यों निकाल क्यों दिए थे हम्म्म

मैं - अरे माँ मेरा लण्ड इतना टाइट था की उसका सूपड़ा अपने अपने अंडरवियर के बाहर निकलने लगा था फिर वो कच्छे में दब के रगड़ने लगता है इसीलिए परेशानी होती है और ऊपर से लोअर भी पहनना पड़ता है तो और परेशानी होती है इसी लिए निकाल दिया था .......

मम्मी- बेटा तू धारी दार कच्छा पहना कर जैसे तेरे पापा पहनते है वो ढीला भी होता है और हल्का भी होता है उससे तुझे परेशानी नहीं होगी ......

मैं- नहीं माँ वो नाड़े वाला कच्छा मुझे नहीं पसंद है उसका नाडा ही फस जाता है ....आपने एक बार देखा तो की पापा का नाडा फस गया था तो वो उसे काट दिए थे .....

मेरी बात सुन के माँ हसने लगी और मै भी हसने लगा हां हां हां ......

मैं- मम्मी क्या मुझे बीमारी तो नहीं होगी न ......की मेरा लण्ड बार बार खड़ा हो जाता है ....एक बार डॉक्टर को दिखा लू क्या ह्म्मम्म्म्म

मम्मी- नहीं बेटा तुझे कोई बीमारी नहीं है तू डॉक्टर के पास जायेगा तो वो कुछ न कुछ बता के तुझसे पैसे ले लेंगे जो ठीक नहीं है ......

मै- तो मां ये हमेशा क्या खड़ा रहता है हां........

माँ- बेटा तू बड़ा हो गया है और तेरी उम्र में ये सब होना आम बात है इसीलिए हमारे ज़माने में लड़को की जल्दी शादी कर देते थे ताकि उन्हें हर तरह का सुख मिले हम्म्म्म अगर तू उस ज़माने का होता तो दो बच्चो का बाप होता ......

मैं- हां मम्मी अब ज़माना बदल गया है लड़किया आपने पसंद से शादी कर रही है .......और शादी भी अब थोड़ी उम्र के बाद ही होती है तभी लड़किया गर्लफ्रेंड बनके अपना काम चलाती है .......मगर मेरी ऐसी किस्मत कहा ..मैंने तो आज तक किसी लड़की को नंगा भी नहीं देखा हु आप के अलावा ........

माँ मेरी बात सुन के मुझे देखने लगी .....तभी डोरबेल बजी और कोई माँ की दोस्त आई थी फिर वो लोग बाते करने लगे और मैं आपने कमरे में चला गया और रात का खाना खाके वो मम्मी की दोस्त चली गई .....लेकिन मेरा लण्ड था की शांत ही नहीं हो रहा था फिर 10 बजने का इंतज़ार करने लगा क्यों की पापा 10  बजे तक सो जाते है फिर मैं धीरे से माँ के पास गया और उनसे पानी की बोतल लाने को बोला फिर मैं अपने रूम में आगया थोड़ी देर में माँ भी मेरे रूम में आगई तो देखी की मेरा लण्ड अंडरवियर में फुदक रहा है ये देखते हुए पानी की बोतल टेबल पे रख के जाने लगी की तभी मैं माँ के सामने आगया और ....

मैं- माँ आप कहा जा रही हो .......इसी देखो न कितना बुरा हाल है इसका बैठने का नाम ही नहीं ले रहा है ......

माँ- हां बेटा इसे तो मैं सुबह से देख रही हु लेकिन कर भी क्या सकती हु जैसे तैसे शांत करके सो जा .......

मैं - माँ आपके आने से पहले यही कर रहा था लेकिन शांत नहीं हो रहा है .......

माँ- अरे बेटा अब मैं क्या करू ........बोल ......

मैं - आप अपनी पैंटी देदो न .......ताकि मैं इसे शांत करलु ....

माँ- तू पागल हो गया है क्या बेटा .....ये गलत बात है बेटा तुझे मैं कैसे समझाऊं अब ह्म्म्मम्म

मैं- क्यों माँ कल तो आप अपनी पैंटी देदी थी फिर आज क्यों ......

माँ- बेटा कल तेरी ज़िद से देदी थी लेकिन अब मैं रोज़ रोज़ नहीं दे पाऊँगी समझा कर बेटा मै तेरी माँ हु माँ ह्म्म्मम्म

मैं - आप ही बताओ अब मैं क्या करू कैसे शांत करू अपने लण्ड को इसमें मुझे इतना दर्द हो रहा है की आप को क्या बताऊ आप पैंटी दे दोगी तो मैं अपने लण्ड को शांत कर लूंगा और इससे मेरा दर्द भी काम हो जायेगा ........प्लीज माँ देदो न ह्म्मम्म्म्म

फिर मेरी ज़िद से माँ ने अपने पैंटी निकाल दी और मेरे हाथ में देदी फिर मैं उसे सूंघने लगा और अपने लण्ड को मसलने लगा जिसे माँ बड़े ध्यान से देख रही थी और दो मिनट बाद चली गई .......फिर मैं अक्सर दो तीन दिन में माँ की पैंटी मांग लेता और उनकी चूत की खुसबू से मदहोश हो जाता था ........
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#7
Notted
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#8
Need read
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#9
फिर मैंने अचानक माँ से पैंटी मांगना बंद कर दिया जान बुझ कर दो तीन दिन ऐसे ही गुजर गए और मैंने माँ से ज्यादा बात भी नहीं कर रहा था बस नार्मल बाते होती थी फिर दो दिन तक तो उन्होंने भी ज्यादा ध्यान नहीं दिया लेकिन जब तीन दिन बीत गए तो वो मुझे देखने लगी ध्यान से लेकिन मैंने इगनोर कर दिया फिर रात को जब पापा खा पी के सो गए तो वो मेरे कमरे में आई और उस वक़्त मैं सिर्फ अंडरवियर में लेटा था और मेरा लण्ड उसमे फुल टाइट था और वो मेरे लण्ड को घूरते हुए मेरे पास आई और मेरे बेड पे आके बैठ गई फिर मैं बोला.........

मैं - क्या हुआ मम्मी आप अभी तक सोइ नहीं ....

माँ - नहीं बेटा नींद नहीं आ रही थी तो सोची तुझसे बाते करलू......

मैं- मुझसे क्या बात करनी है मम्मी ह्म्म्मम्म ......

मैं - बेटा मैं दो तीन दिन से देख रही हु तू चुप चुप सा रहने लगा है और ना ही तू मुझसे बाते कर रहा है और ना ही रात को वो मुझसे मांगता है क्या हुआ बेटा सब ठीक है न .......

मैं- मम्मी मुझसे लगता है आप को सारी बाते बता के गलती कर दी मुझे आप को नहीं बताना चाहिए था ....

माँ- बेटा ये तू कैसी बाते कर रहा है .....आगरा तुझे कोई परेशानी होगी तो मुझे तो पता होना चाहिए न ह्म्म्मम्म

मैं- मेरी परेशानी तो आप जान गई हो लेकिन पिछले कुछ दिनों से आप मुझसे शर्मिंदा होने लगी हैं .......

माँ- बेटा तुम ऐसा क्यों कह रहे हो ........मैं तुमसे बिलकुल शर्मिंदा नहीं हूँ .........और तुम्हे ऐसा क्यों लग रहा है की मैं तुमसे शर्मिंदा हूँ ह्म्म्मम्म

मैं - मम्मी मैं बचपन से देखते आ रहा हूँ आप मुझसे बिलकुल नहीं शर्माती थी आप मेरे सामने ही अपने कपड़े बदलती थी लेकिन जब से ऐसी बाते हुई है .....तब से आप मुझसे हर रोज़ शर्माती हैं और बाथरूम से अपने कपड़े पहन के आती हैं ताकि मैं कुछ देख ना लू ह्म्मम्म्म्म

माँ- तुम इसी वजह से मुझसे बात नहीं कर रहे हो ह्म्म्मम्म

मैं - हां मम्मी मुझे लगा आप मुझसे शर्मिंदा हो रही हैं तो इसी लिए मैंने सोचा की आप से बात करना बंद कर देता हूँ ताकि आप को शर्मिंदा ना होना पड़े .......
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#10
Nice, next update please
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#11
Golpota valoii hoche , next update gulo taratari din
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#12
मम्मी- बेटा, ऐसा कुछ नहीं है. तू गलत समझ रहा है.



मैं – मम्मी, अगर ऐसा नहीं है तो जब मैं आपसे अपनी पैंटी मांगता था तो आप हर बार न नुकर क्यों करते थे? जबकी आप पहले भी मुझे अपनी पैंटी दे चुके हों। इसलिए मैंने आपसे पैंटी मंगाना भी बंद कर दी।



मम्मी- बेटा, मैं तेरी माँ हूँ। मेरे लिए ये सब इतना भी आसान नहीं है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं कभी अपने बेटे की इस तरह से मदद करूंगी। मुझे भी इन हालातों को समझने में थोड़ा वक्त लगा।



और मैं हर बार थोड़ा ना नुकर करने के बाद अपनी पैंटी दे तो देती थी। ताकि तू भी रात को चैन से सो सके.



मैं- मम्मी, आप सच में मुझसे शर्मिंदा नहीं हो ना। अगर आपको ऐसा कुछ लगता है तो एपी मुझे बता दो।



मम्मी- नहीं बेटा ऐसा कुछ नहीं है. तूने इतने दिन मुझसे ठीक से बात नहीं की, तो मैं तो घबरा गई थी।

मैं- मम्मी, जब आप अपने कपड़े बाथरूम से पहनेंगे तो मुझे लगेगा। आपको मेरे सामने शर्म आने लगी है। इसलिए मैं आपसे ना बात कर रहा था। और ना ही आपकी पैंटी मांग रहा है।



मम्मी – बेटा, ऐसा मैं तेरी लिए ही कर रही थी। एक तो तू पहले से इन सब चीज़ों से परेशान है। और ऊपर से मुझे वैसे देखकर तेरा ही हाल और ज्यादा बुरा हो जाता है।



मैं- नहीं मम्मी मेरा हाल बुरा नहीं होता है. क्योंकि मैं बचपन से आपको ऐसा देख रहा हूं। आप शुरू से मेरे सामने अपने कपड़े बदलती हैं। यहां तक कि काई बार नहाते हुए भी आपने मुझे अपनी पीठ रगड़ने के लिए बुलाया है। और तब भी ऊपर से नंगी होती थी।



सच कहूँ मम्मी तो आपके अलावा मैंने किसी औरत को ऐसा देखा ही नहीं है। आपको ही ऐसा देखकर। मुझे पता चला कि एक खूबसूरत औरत अंदर से कैसी दिखती है। अगर फिर भी आपको मेरे सामने शर्म लगती है तो अब आप मेरे सामने कपड़े मत बदलना।



मम्मी- नहीं बेटा ऐसा कुछ नहीं है. जब शुरू से शर्म नहीं करनी तो अब क्यों शर्म करना। वो तो बस मैं तेरे इसकी वजह से वैसा कर रही थी।



मम्मी ने मेरे लंड की तरफ इशारा किया। और उनके इशारे करते ही मैंने अपना लंड अंडरवियर के ऊपर से मसल दिया। और मेरे लंड मसलते हाय मम्मी मुझे देखने लगी।



मैं- मैं क्या करूँ मम्मी? ये हमेशा ऐसा ही रहता है. और अंडरवियर के अंदर मुझे परेशान करता है। ये तो अच्छा हुआ आप अभी कमरे में आ गई। अगर थोड़े बुरे कमरे में अति तो ये आपको बाहर ही मिलेगा।



मम्मी- हां बेटा वो तो मैं जानती हूं. चल अब मैं चलती हूं. और तू भी तो जा. सुबह दुकान पर भी जाना है.



मैं- मम्मी, आज मुझे भी अच्छे से नींद आएगी. ये जानकर कि आप मुझसे शर्मिंदा नहीं हो। वर्ना 3-4 दिन से मैं सही से सो नहीं पा रहा था।



मम्मी- बेटा, मैं भी तेरे लिए परेशान थी। क्योंकि तू मुझसे सही से बात नहीं कर रहा था। बेटा अब हम दोनों काफी खुल के बात कर लेते हैं। अगर तुझे कोई भी परेशान करे तो तू बिना किसी झिझक के मुझे बोल दिया कर।



मैं- ठीक है मम्मी. अब मैं आपको सब कुछ बताऊंगा।



ये बात बोलके मैंने मम्मी को गले लगा लिया। फ़िर मम्मी और मुख्य बिस्तर से उठ गईं। बिस्तर से उतरते ही मेरा लंड अंडरवियर में तंबू बनके खड़ा हो गया। और मम्मी उसे देखकर मुस्कुराने लगी। तभी स्माइल करते हुए मम्मी बोली।

[Image: aqg4os.gif]

मम्मी- बेटा, इसका थोड़ा ध्यान रख कर। खास कर अपने पापा के सामने, अगर उन्हें ऐसे देख लिया तो वो तुम्हें बहुत सुनाएंगे।



मैं- मम्मी, ये शांत होने के बाद भी ढीला पड़ता है। वरना तो ये ऐसा ही खड़ा रहता है।



मेरी ये बात सुनते ही मम्मी नीचे झुकी और अपनी मेक्सी उठा के उन्होंने अपनी पैंटी को पकड़ लिया। और एक झटके में उन्हें अपनी पैंटी निकाल के मेरे हाथों में दे दी। मम्मी की हरे रंग की पैंटी देखकर मैं खुश हो गया। और मुझे खुश देखकर मम्मी मुस्कुराने लगी।

[Image: aqg4zs.gif]


मम्मी – बेटा, अपने इसे शांत करने के लिए बुरा इसे छुपा देना। कहीं ये तेरे पापा ना देख ले. मैं ये सुबह वापस ले जाऊंगी.



मैं- ठीक है मम्मी. अब आप भी जाके सो जाओ.



मम्मी से ये बात बोलते ही मैंने उनकी पैंटी अपनी नाक से लगा ली। और मम्मी के सामने ही मैं उनकी पैंटी सुनने लगा। मम्मी मुझे मुडके देख रही थी. और मैं अपना लंड मसलते हुए उनकी पैंटी सुंघने में लगा हुआ था।



फ़िर मम्मी मेरे कमरे में से निकल गयी। और मुख्य बिस्तर पर एके मम्मी की पैंटी देखने लगा। और आज भी मुझे उनकी पैंटी उम्र से थोड़ी सी गीली मिली। मम्मी की गीली पैंटी देखकर मुझे इतना तो यकीन हो गया था।



कि मेरी इन बातों का असर उन पर भी हो रहा था। और अब तो वो भी मुझसे थोड़ी खुल के बात कर रही थी। मम्मी की पैंटी की खुशबू और उसका थोड़ा सा गीलापन देखकर। मेरे मुँह में पानी आ रहा था। मैं बिस्तर पर लेटकर मम्मी की पैंटी चाटने लगा।



मैंने चैट चैट के मम्मी की पैंटी गीली कर दी। फिर मैं भी सो गया. सुबह फिर से वही हुआ. पापा के जाते ही मैं मम्मी की चुदाई की कल्पना करने लगा। और उनकी पैंटी सुनने लगा. जिसका मेरा लंड खड़ा होके सलामी देने लगा.



मैंने मम्मी की पैंटी तकिया के नीचे रख दी। फिर ठीक 8 बजे मम्मी मेरे कमरे में आई। और कमरे में सिर्फ उनकी नजर सिर्फ अंडरवियर पर गई। जहां मेरे खड़े लंड का उभार दिख रहा था. मेरे उबर को देखते हुए मम्मी मेरे पास आ गई।



और मेरे पास एते ही बड़े प्यार से मेरे माथे पर हाथ फेरते हुए बोली।



मम्मी- बेटा, उठ जा बेटा, देख 8 बज रहे हैं।



मम्मी की आवाज सुनते ही मैंने आंखें खोल के मम्मी को देखा। और मुझे देखकर वो मुस्कुराने लगी।



मम्मी- चल अब उठ जा बेटा. कब तक सोता रहेगा.



मम्मी की बात सुनते ही मैं उठ गया। और बिस्तर से नीचे उतार के खड़ा हो गया। नीचे खड़े होते ही पहले मैंने अपना लंड ठीक किया। और मम्मी मुझे ऐसा करते देखने लगी। लंड ठीक करने के बाद मैंने ताकिया के नीचे से पैंटी निकाली। और मम्मी को दे दी.



अपनी पैंटी देखकर मम्मी मुझे देखने लगी। फ़िर मम्मी पलट के मेरा बिस्तर ठीक करने लगी। और जैसी ही मम्मी पलटी. तभी मैंने उनके कमर में हाथ डालके उन्हें जोर से पकड़ लिया। मेरा हाथ मम्मी के ठीक दूध के नीचे था।



जिनके बड़े बड़े दूध थोड़े थोड़े दब रहे थे। और मेरा खड़ा हुआ लंड मम्मी की मेक्सी के ऊपर से ही उनकी गांड में लग रहा था। मम्मी को पकड़ते ही मैं बोला.



[Image: aqg5sz.gif]

मैं- मम्मी, कल रात के लिए धन्यवाद. कल रात आपसे बात करके काई दिनो बुरा मुझे बहुत अच्छी नींद आई।



मम्मी – बेटा, जब मन में उलझन होती है तो नींद अपनी आप उड़ जाती है। और बात करने से जब मन शांत हो जाता है तो नींद अच्छी ही आती है। जैसा कल रात तुझे और मुझे आई थी।



मैं- आप ठीक कह रहे हो मम्मी. आज के बाद मैं आपसे कुछ नहीं छुपाऊंगा।



मम्मी- बेटा, माँ से कुछ छुपाना भी नहीं चाहिए।

मैं- नहीं छुपूंगा मम्मी. और हा आपकी इस पेंटी के लिए भी धन्यवाद। कल रात इसने भी मुझे बहुत आराम दिया है।



मेरी बात सुनते ही मम्मी हंसने लगी। और उन्हें जल्दबाजी हुए देख मैं भी हँसने लगा।



मम्मी- तू बहुत शैतान है. हमेशा वही बटे करता रहता है. चल अब छोड़ मुझे और जा के मुँह हाथ धो ले।
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#13
फ़िर मम्मी की बात सुनके मैं फ्रेश होने चला गया। आज सच में मेरे लिए बहुत अच्छा दिन था। आज मम्मी मुझसे काफ़ी हद तक खुल के बात कर रहे थे। और सबसे अच्छा ये था कि वो ये बाते करते हुए कोई मुँह भी नहीं बना रहे थे।



ताज़ा होने के बाद मैं नहाने चला गया। और मेरे नहाने के बाद मम्मी भी नहाने चली गई। आज भी मैंने मम्मी को नहाते देखा। और उनको देख देख के अपना लंड भी मसला. फिर जैसे ही मम्मी का बहना बंद हुआ। मैं तुरंट मम्मी के कमरे में आ गया।



मुख्य बिस्तर पर बैठा बैठा यही सोच रहा था कि क्या आज भी मम्मी बाथरूम से कपड़े पहनेंगी। हां वो मेरे सामने ही कपडे पहनेगी। मैं बनियान और अंडरवियर में बैठा यहीं सोच रहा था कि तभी मम्मी कमरे में आई।



और मम्मी को देखकर मेरा लंड और ज्यादा टाइट हो गया। क्योंकि आज मम्मी सिर्फ पेटीकोट पहने कमरे में आई थी। और उनका पेटीकोट उनके दूध के ऊपर बंधा हुआ था। कमरे में एते हाय मम्मी मुझे देख कर मुस्कुराने लगी।



और मैं भी उन्हें देखकर मुस्कुराने लगा। मम्मी को देखकर मैं बिस्तर से उठ गया। और जैसे ही मैं कमरे के बाहर जाने लगा। तभी मम्मी बोली.



मम्मी- क्या हुआ बेटा? कह जा रहा है तू.



मैं – मम्मी, मैं बाहर निकल जाता हूँ। तब तक आप कपडे पहन लो।



मम्मी- बेटा, मैंने कल तुझे बताया था कि मैं तुझसे शर्मिंदा नहीं हूं तो तू फिर वही सब बता क्यों कर रहा है? चल यही चुप चाप बेथ. मैं पूजा करके नास्ता देती हूं।
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#14
मम्मी की बात सुनके मैं वही बैठ गया। फिर मम्मी ने अपने दूध पर बंधा पेटीकोट खोल दिया। और उसे नीचे करके अपने कमर में बंद कर लिया। दूध से पेटीकोट के हट ते हाय मम्मी के बड़े बड़े दूध मेरे सामने आ गए।



मम्मी के बड़े-बड़े दूध देखकर मेरे मुँह में पानी आ गया। मम्मी के दूध देखकर मेरा मन कर रहा था कि अभी उन्हें पकड़ के चूस लू। मगर मैं जल्दीबाज़ी नहीं कर सकता था। मैं बैठा बेटा मम्मी के दूध को देख रहा था।



तभी मम्मी ने अपनी सफ़ेद रंग की ब्रा उठाई। और अपने कमर में दाल के सामने से हुक लगाने लगी। और हुक लगाने के बुरी मम्मी ने अपनी ब्रा को पीछे घुमा दिया। फिर मम्मी ने अपनी ब्रा अपने दूध पर चढ़ा ली।



दूध पर ब्रा पहनते ही मम्मी के दूध फाड़ की तरह तन गए। और मम्मी अपनी ब्रा में हाथ डाल के अपने दूध को ब्रा में सही करने लगी। मैं मम्मी को ही देख रहा था। और मम्मी सुरक्षित ब्रा और

पेटीकोट में कयामत लग रही थी।



मम्मी का गदराया बदन मुझे पागल कर रहा था। तभी मम्मी बोली.



मम्मी- क्या हुआ बेटा? ऐसा क्या देख रहा है?



मम्मी कि ये बात सुनते ही मैं खड़ा हो गया। फ़िर मैंने जाके मम्मी को अपनी बाहों में भर लिया। मेरे डोनो हाथ मम्मी की नंगी पीठ पर थे। और उनके ताने हुए दूध मेरे सीने में दब रहे थे।

[Image: aqgesz.gif]

मैं- थैंक यू मम्मी मुझसे शर्मिंदगी ना होने के लिए. आज कई दिनों बाद मैं आपको ऐसा देख रहा हूं। वरना मुझे तो लगना था कि अब आप मुझे शर्मिंदा होने लगें।



मम्मी- बेटा, कभी-कभी इंसान से गलती होती है। जिसकी वजह से वो सामने वाले को गलत समझ आता है। मुझसे भी वही गलती हुई थी. जिसकी वजह से मैं ऐसा सोचने लगी थी। मगर शुक्र है हम दोनों ने बात करके एक दूसरे को समझ लिया।



मैं - हां मम्मी वरना मेरी लिए शर्म की बात होती है कि अब आपके अपने खुद के बेटे से शर्म आ रही है।



मम्मी- बेटा, जो हो गया सो हो गया। अब ऐसा कुछ नहीं होगा.



मैं मम्मी को गले लगा लिया खड़ा हुआ था। और मेरा लंड खड़ा होके अंडरवियर के अंदर से मम्मी के पेट पर लग रहा था। तभी मम्मी बोली.



मम्मी – चल बेटा अब छोड़ भी दे मुझे. मैं कब तक ऐसी आधी नंगी खड़ी रहूंगी।



मम्मी की बात सुनके मैंने उन्हें छोड़ दिया। फ़िर मैं बोला.



मैं- मम्मी, आप नंगी कहां हो. ब्रा और पेटीकोट पहन तो रखा है अपने। कहीं आपको फिर से शर्म तो नहीं लग रही है।



मम्मी- अरे नहीं बेटा ऐसी बात नहीं है. मगर कपडे तो पहने ही है।

[Image: aqgfc7.gif]

मम्मी की नज़र सिर्फ अंडरवियर पर गयी। जो सामने से उठा हुआ था. और मम्मी उसे देखकर मुस्कुराने लगी। फिर मम्मी अपना ब्लाउज पहनने लगी। और मैं अपने सामान वाले बैग से वही वी शेप वाली एक काली पैंटी निकाल के ले आया। मेरे हाथ में पैंटी देख के मम्मी बोली.



मम्मी- बेटा, तू क्यों निकल लाया तू?



मैं- मम्मी, आज इसे पहनो ना. ये आपके ऊपर और जयादा अच्छी लगेगी। और आपको काफी आराम भी मिलेगा।



मम्मी- बेटा, मैंने पैंटी पहनी है। इसे रहने दे.



मैं- मम्मी, पहननी है तो उतार दो ना. वैसे भी कोसा ज्यादा टाइम लगता है। जैसे कल रात जल्दी से उतार के मुझे अपनी पैंटी दी थी। वैसे हू उतार दो. और आज ये पैंटी पहन के देखो.



मम्मी- बेटा, तू इतना ज़िद्दी क्यों है? मेरी पहचान हुई पैंटी उतरवा रही है.



मैं – मम्मी, आज इसे पहन के देखो. ताकि उम्र से आप इसे आसान बना सकें। आप पहचानोगे तो एपी दूसरो को भी बता पाओगे कि ये कितनी अराम धायक है। और ऊपर से एपी दुकान की मालकिन हो। आप तो कम से कम अच्छी पैंटी पहचान करो।



मम्मी- तू नहीं मानेगा बेटा.



मैं- नहीं मम्मी नहीं मानूंगा. प्लीज मम्मी मेरे लिए. और वैसे भी चूहे को ये पैंटी एपी मुझे ही देने वाले हो।



मम्मी- हट बदमाश.



मेरी बात सुनते ही मम्मी ने अपनी पैंटी निकाल दी। आज मम्मी ने क्रीम कलर की पैंटी पहनी थी। पेंटी निकल के मम्मी ने बेड पर डाल दी। फिर मैंने मम्मी को काली पैंटी अपने हाथों से दे दी। मम्मी मेरे सामने पैंटी पहनने लगे।



और पैंटी पहनने के बाद वो मुझे स्माइल करते हुए देखने लगे। फ़िर मैं बोला.



मैं- कैसी लग रही है मम्मी पैंटी. साइज़ तो ठीक है ना.



मम्मी- साइज़ ठीक है बेटा. और कपड़ा भी सही लग रहा है।

मैं- ये अच्छी वाली पैंटी है मम्मी. इसे बड़े बड़े घरो की औरतें पहचानती हैं। जिसे पूरे दिन आराम मिलता रहे।



मम्मी- हां बेटा अच्छी तो लग रही है. मगर महँगी भी तो है.



मैं- मम्मी, आपका बेटा ब्रा पैंटी की पूरी दुकान चलाता है। मैं कम से कम इतना तो अच्छा काम करता ही हूं कि आपको अच्छी ब्रा पैंटी पहननी चाहिए।



मम्मी – चल बेटा मैं पूजा कर लू. फ़िर तुझे नास्ता देती हूँ। आज ये ब्रा पैंटी की बातों में इतना टाइम निकल गया।



मम्मी की बात सुनके हम दोनों हंसने लगे। फिर मम्मी पूजा करने लगी. पूजा करने के बाद हम दोनों ने साथ में नास्ता किया। फ़िर मैं दुकान पर आ गया। और दुकान पर एते ही पीछे वाले काउंटर के पीछे जाके मैंने अपना अंडरवियर निकाल दिया।



और अब मैं सिर्फ एक ढीले ढाले कच्चे में आ गया। जिसका अंदर झूलता मेरा लंड साफ साफ दिख रहा था। मैं दुकान खोल के बैठ गया. फिर कुछ कस्टमर आ गए. जिनके साथ मैं व्यस्त हो गया।



फिर ठीक 11 बजे मम्मी भी दुकान पर आ गई।



फिर जैसे ही मम्मी दुकान के अंदर आई। उनकी पहली नज़र मेरे खड़े लंड पर गयी। जिसे मैंने मसल मसल के खड़ा कर रखा था। मेरे खड़े लंड को देखने के बुरी मम्मी मुझे देखने लगी। फ़िर वो मेरे सामने स्टूल पर बैठ गई।



मैं जानकर अपनी टांग फेला के बैठा था। जिसे मेरा लंड मम्मी को भी जयादा दिखायी दे। और हुआ भी वैसा ही मम्मी की नज़र बार बार मेरे लंड पर जा रही थी। तभी मम्मी ने कस्टमर की बात कर दी।



मम्मी- बेटा, अभी तक बोनी हुई या नहीं।



मैं- हो गई मम्मी. आये थे 2-3 लोग सामान लेने.



मम्मी बैट तो कस्टमर की कर रही थी। मगर उनकी नज़र बार बार मेरे लंड पर जा रही थी। फिर मैं और मम्मी काफी देर तक नॉर्मल बातें करते रहे। मैं जान कर नॉर्मल बात कर रहा था। ताकी मम्मी को ये ना लगे कि मैं हमेशा अपने लंड की ही बात करता हूँ।



मैं मम्मी से बात किये जा रहा था। और उनकी नज़र बार बार मेरे लंड पर जा रही थी। फिर कुछ देर नॉर्मल बात करने के बाद मैं एक दम से बोल पड़ा।



मैं- मम्मी, एपी बार बार मेरे कच्चे की तरफ क्यों देख रहे हो?



मम्मी- नहीं बेटा ऐसा नहीं है.



मैं – मम्मी, मैं जानता हूं मेरे कच्चे के अंदर ये खड़ा पड़ा है। इसलिए आपकी नज़र बार-बार नीचे मेरे कच्चे पर जा रही है।



मम्मी- बेटा, अब इसमें क्या कर सकते हो. तू ऐसा जानकर थोड़ी कर रहा है।



मैं- हा मम्मी जानकर तो नहीं कर रहा हूं. मगर मेरा ये है कि मानता ही नहीं है। अबे बेथ जा सेल. जब देखो तो खड़ा होके परेशान होने लगता है।



मेरी बात सुनके मम्मी जोर जोर से लगी।

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मैं- हस्स लो मम्मी हस्स लो. हां आपका बेटा इसकी वजह से परेशान है। और आपको हंसी आ रही है।



मम्मी- अरे बेटा ऐसा नहीं है. तू एक दम से ऐसा बोला तो मुझे हंसी आ गई।



मैं- मम्मी, मैं क्या करूँ इसका? जब देखो ये ऐसा ही खड़ा हो जाता है। इसे कितना शांत कर लो. मगर ये ऐसा ही रहता है. मम्मी ये ऐसा क्यों रहता है? क्या मेरी उमर के हर लड़के के साथ ऐसा होता है।
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#15
मम्मी – हा, बेटा. तुम्हारी उमर के हर लड़के के साथ होता है। जैसे जैसे लड़के जवान होने लगते हैं। उनके साथ ऐसा होने लगता है। मगर जिस तरह से ये तेरे साथ हो रहा है। वो सब सबके साथ नहीं होता है.



मैं – मगर मम्मी ये मेरे साथ ही क्यों हो रहा है? मेरे काई दोस्त है. उनके साथ ऐसा कभी-कभी होता है। मगर मेरा लंड तो हमेशा खड़ा ही रहता है। ऐसा मेरे साथ ही क्यों है?



मम्मी- बेटा, कुछ लड़कों के अंदर गर्मी ज़्यादा होती है। इसलिए उन्हें ये परेशानी होती है. तेरे साथ भी शायद यही दिक्कत है.



मैं – मम्मी, मैं हर 2-3 में अपनी गर्मी निकाल तो देता हूँ। मगर फिर भी ये बेथता ही नहीं है. अब आप ही बताइये मैं क्या करू? काई बार तो मैं भी परेशान हो जाता हूं।



मम्मी- बेटा, अगर सही वक्त पर तेरी शादी हो गयी होगी। तो तुझे इस परेशानी से ना उलझना पड़ेगा। तेरी बीवी तेरी हर जरूरी का ख्याल रखती।



मैं- मम्मी, बीवी का तो अभी पता नहीं है. और शायद इस काली कलूटी शकल को देखकर कोई बीवी बनेगी भी नहीं।



मम्मी- बेटा, तू ऐसा क्यों कह रहा है? हर किसी के लिए जीवन में एक साथी होता है। जब सही वक्त आता है. तब शादी हो ही जाती है.



मैं- हा मम्मी वो तो मैं जानता हूं. मगर तब तक इसका क्या करू?



मम्मी- बेटा, अगर तेरा हाल ज्यादा ही बुरा है। तो तू दूसरे तारिके से काम चला सकता है।



मैं- किस तारीख से मम्मी?



मम्मी जैसी ही आपकी बात पूरी करने वाली थी तभी कॉलेज की सारी लड़कियाँ आ गयीं। मम्मी और मैं उनके साथ बिजी हो गई। फिर कोई ना कोई आता ही रहा. मम्मी और मुझसे बात करने का मौका नहीं मिला। फ़िर मम्मी डॉफ़र होते ही घर चली गई।



मुख्य दुकान में बैठा बेटा अपना लंड मसलने लगा। मम्मी के साथ सेक्स की बात करने में मजा आ रहा था। मम्मी भी खुल के मुझसे बात कर रही थी। मैं बस 2 बजे का इंतजार कर रहा था।



जैसे ही 2 बजे और मैं घर जाके वो काम करु जो मैंने सोचा है



फिर जैसा तैसे टाइम काट के मैं ठीक 2 बजे घर पहुंच गया। जैसा ही मैंने गेट खट खटाया. तो कुछ देर बाद मम्मी ने गेट खोला।



तब मम्मी सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी। मम्मी के ब्लाउज में उनके दूध की घुंडिया साफ साफ दिख रही थी। मम्मी ने घर आके अपनी ब्रा निकल दी थी। जैसे की जयदाता और दोपेहर के टाइम करती है।



मम्मी का गदराया और कामुक बदन देखकर मेरा लंड टूट गया। फिर मैं अंदर आ गया. और बाथरूम जाके सबसे पहले मैंने अपना अंडरवियर उतार दिया।



और सिर्फ ढीला ढाला कच्चा पहन के हाथ मुँह धो के वापस आ गया। फिर कुछ देर बाद मम्मी खाना लेके आई। और हम दोनो बेथ के खाना खाने लगे। मम्मी टीवी देख रही थी। मैं उनकी दूध की लाइन देख रहा था।

वो ब्लाउज में से साफ साफ दिख रही थी। फिर खाना खाने के बाद मैं वही मम्मी के बिस्तर पर लेट गया। और अपना लंड खड़े करके कच्चे के साइड में लगा दिया।



तभी कुछ देर बाद मम्मी भी आ गई। और अंदर आते ही मम्मी ने एक नज़र मेरे लंड पर डाली। फिर वो मेरे बगल में आके लेट गई। मैं और मम्मी बिलकुल पास लेते हुए थे। फिर टीवी देखते हुए मैं उनसे सामान्य बात करने लगा।



मम्मी भी मुझसे बात करने जा रही थी। कुछ देर हम दोनो टीवी देखते रहे। और बातें करते रहे. फ़िर मैं बोला.



मैं- मम्मी, आप दुकान पर क्या कह रहे हो?



मम्मी – मैं क्या कह रही थी बेटा?



मैं- क्या मम्मी आप भूल गईं क्या? आप कह रहे हैं कि अगर मेरा लंड मुझे ज़्यादा परेशान करता है। तो मैं किसी और तारीख से काम चला सकता हूं। तो आप किस तारीख की बात कर रहे हैं। देखो ना ये अभी भी खड़ा हुआ है।



मम्मी मेरी बात सुनके मेरे कच्चे की तरफ देखने लगी। मैं कच्चे के अंदर से अपने लंड को झटके देने लगा। जिसे वो कच्चे को ऊपर नीचे करने लगा।



मैं- बताओ ना मम्मी ऐसा कौन सा तरीका है। जिसे ये ठीक हो सकता है।



मम्मी – बेटा, ये ठीक ही है किसी के साथ ये समस्या ज़्यादा होती है। तो वो बाहर जाके किसी के साथ अपना काम चलाते हैं।



मैं- मम्मी, आप उन महिलाओं की बात कर रही हो. जो पैसे लेके मर्दों की गर्मी शांत करती है।



मम्मी – हा, बेटा. वही मगर वो सही नहीं होता है।



मैं- मम्मी, वो सही नहीं होता है. मगर आप फिर भी उनकी बात कर रहे हो। मम्मी आप जानती हो वो पूरे दिन में 10 से 12 लंड अपनी चूत में लेती है। और उनसे बिमारी भी हो सकती है।



मम्मी मेरी बात सुनके मुझे देखने लगी। मैं उनकी आंखों में देखता हूं बोले जा रहा था।



मैं- वही मैं कहू मम्मी. ऐसा कौन सा तरीका है. जो मुझे नहीं मालूम है. सच कहु मम्मी आपने लंड की वजह से मैंने काई बार सोचा था। मैं उन लोगों के पास चला जाता हूं। यहां तक ​​कि मैं एक औरत के पास चला भी गया था।



मेरी ये बात सुनके मम्मी चौंक गई।



मम्मी- ये क्या कह रहा है बेटा? तू उन महिलाओं के पास गया था.



मैं – हा मम्मी एक दिन मैं बहुत परेशान था। मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था। तो मेरे एक दोस्त ने एक औरत का नंबर दिया था। मैं उससे मिलने भी गया था। मगर उसके पास जाके मुझे सही नहीं लगेगा। वो बड़ी अजीब तरह से बात कर रही थी।

मैं- और मुझे उससे कुछ करने का मन नहीं हो रहा था। इसलिए मैं बिना कुछ किए वापस आ गया। जिस तरह की वो औरत थी. मुझे वैसी औरतें पसंद नहीं हैं। मुझे तो घेरलू किस्मत की औरत पसंद है। बिलकुल आप जैसा.



मम्मी- अच्छा किया बेटा. जो तू लौट आया. वो औरत अच्छी नहीं होती है. मैने सुना है काई औरते तो जवान लड़के को फ़सा भी लेती है।



मैं- हां मम्मी इसीलिये मैंने कुछ नहीं किया. फिर ऐसा कुछ समय बाद मुझे आपकी पैंटी की आदत लग गई। जिसे मुझसे अच्छा लगने लगा। और अब तो आपको भी अपनी पैंटी देने में कोई दिक्कत नहीं होती है।



मम्मी – हा, बेटा. वो काम से कम उन औरतों से तो सही है। जो वो काम करती है.



मैं- वैसे मम्मी जो पैंटी आज आपने पहनी है. वो कैसे लग रही है. उसे कोई दिक्कत तो नहीं है.



मम्मी- नहीं बेटा कोई दिक्कत नहीं है. काफ़ी अच्छी और आराम दायक है।



मैं- क्या मम्मी अभी आपको पता है दुकान पर क्या हुआ?



मम्मी – क्या हुआ बेटा?



मैं – अभी आपके घर आने के बाद मैं दुकान पर अकेला था। तो एक लड़का आया. ज्यादा उमर का नहीं था. लगभाग 18 या 19 साल का होगा। पहले तो दुकान पर आके खड़ा हो गया। मैंने पूछा क्या चाहिए? तो बोला भैया एक अच्छी ब्रा दिखा दो।



मैं- मैंने पूछा नंबर की ब्रा दे दूं। तो वो बोला भैया नंबर तो पता नहीं है। मैने कहा भाई ऐसे कितने नंबर की ब्रा दू। कम से कम साइज तो बताओ. मम्मी जैसा मैंने उसे साइज बताने को कहा। तो हमें आपने दोनो हाथ उठाये। और बोला भैया इतने बड़े हैं।



जैसे ही ये बात मैंने मम्मी को बताई तो मैं और मम्मी जोर जोर से हंसने लगे। कुछ देर मैं और मम्मी जल्दबाजी कर रहे हैं। फ़िर मम्मी बोली.



मम्मी- आज कल के बच्चे भी ना. क्या क्या बातें करते हैं. वैसे फिर वो ब्रा लेके गया या नहीं।



मैं- अरे कहा मम्मी उसकी बात सुनते ही मुझे हंसी आ गई। और वो लड़का दुकान से उतर के जल्दी से भाग गया। मुख्य उपयोग बुलाता रहा. मगर वो रुका ही नहीं.



मेरी बात सुनके मम्मी फिर से हंसने लगे। फ़िर मैं बोला.



मैं - देख लो मम्मी ये बिट बिटे भर के लड़के अपनी गर्लफ्रेंड और भाभियों को पता के उनके लिए ब्रा खरीद रहे हैं।

[Image: aqhle2.gif]

मम्मी- बेटा, दुनिया बहुत बदल गई है। आज कल ये सब बहुत आम बात हो गई है।



मैं- हा मम्मी मैं जानता हूं. बस कभी-कभी मुझे बुरा लगने लगता है। ये छोटे छोटे जवान लड़के वो सब कर चुके हैं। जो मैंने आज तक देखा भी नहीं है।



मम्मी- बेटा, तू हर बार परेशान क्यों हो जाता है? सब अपने वक्त के साथ हो जायेंगे।



मैं- मम्मी, अगर आप बुरा ना मानो. तो मैं एक बात काहू.



मम्मी- बोल ना बेटा क्या बात है? मैं बुरा नहीं मानूंगी.



मैं – मम्मी, क्या मैं आपके दूध को देख सकता हूँ?



मेरी बात सुनते ही मम्मी पलट के मेरी साइड हो गई। और वो मुझे देखने लगी. मम्मी जिस तरह से मुझे देख रही थी। मुझे लगा था. मेरे थप्पड़ पड़ने वाला है. तभी मैं बोला.



मैं- मम्मी, आपने कहा था. आप नाराज नहीं होंगे.



मम्मी – मैं नाराज़ नहीं हूँ बेटा. बस मैंने सोचा नहीं था कि तू ये बात करने वाला है। इसलिए मैं चौंक गई.



मैं- बस मम्मी आपको दूध चुनने का मन कर रहा था। इसीलिये ऐसा बोल दिया. क्या मैं इन्हे चू के देख सकता हूँ?



मम्मी मेरी बात के बारे में सोचने लगी। मैं उन्हें ही देख रहा हूं. इसे पहले मम्मी कुछ बोलती। मैं बोल पड़ा.



मैं- मम्मी, आप इतना क्यों सोच रही हो? जब आप मुझे अपनी पैंटी दे सकते हैं। तो इसमें क्या दिक्कत है? बचपन में भी तो मैं इनसे ही खेलता था।



मम्मी- बेटा, बचपन की बात अलग थी। तब तू छोटा था.



मैं – मम्मी, मैं तब भी आपका बेटा था। और अब भी आपका बेटा है. बस फर्क सिर्फ इतना है कि अब मैं इन सब चीजों को समझता हूं। मगर फिर भी मैं आपका बेटा ही हूं। जिसे आप अब खुल के बात कर लेती हैं। और तो और अब आप मुझे अपनी पैंटी भी दे दो।



मम्मी मेरी बात सुनके सोच में पड़ गई। और वो इधर उधर देखने लगे। तभी मैं बोला.



मैं- मम्मी, अगर आपको सही नहीं लग रहा है. तो आप रहने दो. बस आप मुझसे नाराज मत होना।



मम्मी- नहीं बेटा. मैं नाराज नहीं हूं.



मैं- मम्मी, तो क्या मैं आपके दूध को छू लूं?



मम्मी- ठीक है बेटा चू ले.



मम्मी की बात सुनते ही मैं खुश हो गया। मैंने तुरेंट अपना हाथ मम्मी के दूध पर रख दिया। मम्मी के दूध पर हाथ रखते ही ऐसा लगा। जैसी मुझे दुनिया की सबसे कीमती चीज मिल गई हो।

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मगर वो मेरी जिंदगी का सबसे खुशी का पल था। मम्मी आराम से लेती हुई थी. मैं उनके बगल में लेट कर, बड़े प्यार से उनके दूध को हल्के हल्के दबा रहा था।



मम्मी मुझे ही देख रही थी. मैं उनके दूध को दबाते हुए मुस्कुरा रहा था। मम्मी भी मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी। तभी मैं बोला.



मैं- मम्मी, सुबह तो आपने ब्रा पहन ली थी. वो क्यों उतार दी?



मम्मी- बेटा, गर्मी बहुत हो रही थी। इसीलिये उतार दी.



मैं - वही तो मैं सोच रहा हूं मम्मी आपके दूध इतने मुलायम मुलायम लग रहे हैं। अगर आप ब्रा पहनेंगी. तो ये टाइट हो जाते हैं.



मेरी बात सुनके मम्मी हंसने लगी. मैं उनके दूध को दबाने में लगा हुआ था।

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मैं- मम्मी, आपका दूध कितना बड़ा है. ये तो मेरे हाथ में भी नहीं रह रहे हैं. सब औरत के दूध इतने बड़े नहीं होते हैं। जैसा आपके है.



मम्मी- बेटा, हर औरत का अलग-अलग होता है। सबके एक जैसा नहीं होता है.



मैं- मम्मी, क्या इसमें अभी भी दूध आता है. जैसे जब मैं छोटा था. तब आता था.



मम्मी- धत्त पागल! जब बच्चा छोटा है. तब ही माँ को दूध आता. उसके बाद आना बंद हो जाता है। तुझे भी 4 साल दूध पिलाया है मैंने।



मैं- मम्मी, मैंने 4 साल तक दूध पिया है आपका।



मम्मी – हा, बेटा. तू दूसरा दूध पीता ही नहीं था. जब देखो तो मुझसे ही चिपका रहता था।



मैं- मम्मी, मैं तो अभी भी आपसे चिपका हुआ हूं। बस फर्क इतना सा है कि अब आप मुझे दूध नहीं पिलाते हो।



मम्मी – हट बदमाश, कैसे बात करता है. इतने साल तूने मेरा दूध पे तो लिया। अब इस बंजर धरती में कुछ नहीं है।



मम्मी की बात सुनके हम दोनों हंसने लगे। मम्मी अब मुझसे खुल के बात कर रही थी। और इधर मैं मम्मी के दोनो दूध को हल्के हल्के दबाये जा रहा था। मम्मी आराम से लेती हुई थी. तभी मैं मम्मी से बोला।



मैं- मम्मी, एक बात काहू.



मम्मी – हम्म हम्म बोल.



मैं- मम्मी, क्या मैं आपको दूध बाहर निकाल के देख लूं।



मम्मी- बेटा, ये क्या है? अभी तू इन्हें चुनने को कह रहा था। अब तू इन्हें बाहर निकल के देखना चाहता है।



मैं- मम्मी, बस इन्हें एक बार इन्हें बाहर निकाल के देखने का मन कर रहा था। जैसे सुबह आपको कपडे पहने देखा था।



मम्मी- नहीं, नहीं बेटा ये ठीक नहीं है। तू मेरे दूध चुनना चाहता था. वो मैंने चुन लिया. मगर ये ठीक नहीं है.



मैं- मम्मी, इसमें क्या दिक्कत है? हर सुबह तो मैं आपका दूध बिना ब्लाउज के ही देखता हूँ। तो अब क्या हो गया?



मेरी बात सुनते ही मम्मी सोच में पड़ गई। उनको समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या कहे?



मैं- मम्मी, देखने दो ना. वैसे भी यहाँ आपके और मेरे अलावा कौन है। जिससे आपको शर्म लग रही है।



मम्मी- तू बिल्कुल पागल है बेटा. पता नहीं मुझसे क्या करवा रहा है?



मैं- मम्मी, सिर्फ आप ही तो हो. जिसे मैं कुछ भी कह सकता हूं। और आप मुझे और मेरी परेशानी को अच्छे से समझते हो।

अपनी बात बोलते ही मैंने मासूम सा मुँह बना लिया। मम्मी मुझे देखकर नरम पड़ने लगी।



मम्मी- तू इतना ज़िद्दी क्यों है बेटा? जब तुझे मना करो. तो ऐसे मासूम की शकल बना के खड़ा हो जाता है।



मम्मी मुझे देखे जा रहे थे. मैं एक दम शांत होके उन्हें ही देख रहा था। फिर 2 मिनट बाद हाय वो बोली.



मम्मी- चल ठीक है देख ले. मगर सिर्फ थोड़ी देर के लिए।



मम्मी की बात सुनते ही मैं उछल के बैठ गया। और बोला.



मैं- धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद. आप दुनिया की सबसे अच्छी मम्मी हो।



मम्मी मेरी मासूमियत देखकर मुस्कुराने लगी। मगर उन्हें क्या पता था. मेरी मासूमियत के पीछे कितने सालो और महिनो की मेहनत थी। जैसे ही मम्मी ने हा बोला. मैं तुरंट उनके ब्लाउज के हुक खोलने लगा। मुझे ब्लाउज के हुक खोलते देख मम्मी तुरंट उठ के बैठ गई। और बोली.



मम्मी – क्या कर रहा है बेटा? सारे हुक क्यू खुल रहा है?

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मैं- मम्मी खोलूंगा नहीं तो आपका दूध बाहर कैसे आएगा।



मम्मी- तू रुक मैं निकलती हूं.



मैं मम्मी के 3 हुक खोल चूका था। फिर अनहोने अपना ब्लाउज पकड़ा. और अपना एक दूध बहार निकाल दिया। मम्मी का दूध बाहर आते ही लटक गया। मैने तुरेंट यूज़ पकड़ लिया। मम्मी मुझे आपने दूध दबते हुए देख रही थी।



तभी मैंने मम्मी के ब्लाउज में हाथ डाला। और उनका दूसरा दूध भी बाहर निकल लिया। मम्मी मुझे देखती रही. मगर उन्हें मुझे कुछ कहा नहीं। अब मैं मम्मी के दोनों दूध को पकड़ के दबा रहा था। उनको हल्के हल्के मसल रहा था.



मम्मी अपनी आंखे बीच बीच में बंद कर रही थी। मम्मी के दोनों दूध की घुंडिया खड़ी हुई थी। जिन्हे देखकर साफ साफ पता चल रहा था कि मम्मी अंदर से गरम हो रही थी।


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#16
मैं- मम्मी, इन्हें ऐसे देखकर बचपन याद आ गया। मुझे याद है मैं बचपन में इनसे ऐसा ही खेलता था।



मम्मी – हम्म्म बेटा मुझे याद है. अब तो तू खुश है. देख लीजिये मेरी दूध. अब बस.



मैं- मम्मी, बस थोड़ी देर इनसे और खेल लू। फिर मैं कुछ नहीं कहूँगा।



मम्मी- ठीक है बस थोड़ी देर.



मम्मी की बात सुनके मैं उनकी घुंडियों को चुनने लगा। मैं जानता था. औरत के दूध की घुंडिया बहुत नाज़ुक होती है। अगर उन्हें अपने हाथ से छेड़ा जाए. और हल्के हल्के मसला जाये। तो औरतों को ज्यादा मजा आता है.

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मैं मम्मी के दूध की घुंडियों को उंगलियों से छेड़ जा रहा था। मम्मी अपनी आंखे बीच बीच में बंद कर रही थी। फिर जैसे ही अगली बार मम्मी ने अपनी आंखें बंद की, मैंने उनको दोनों दूध को पकड़ लिया।



और तुरेंट एक दूध को अपने मुँह में ले लिया। जैसा ही मेरी गरम जीभ का स्पर्श मम्मी के दूध पर हुआ। मम्मी ने अपनी आँखे खोल ली। और आँखे खोलते ही मम्मी बोलने लगी।



मम्मी- ये क्या कर रहा है बेटा? ऐसा मत कर.



मम्मी की बात मैंने पहली बार में ही सुन ली थी। मगर मैं आँखे बंद किये। उनके दूध को चूसने में लगा हुआ था। मम्मी के दूध चूसने में बहुत मजा आ रहा था। हलाकि उसमें से दूध नहीं निकल रहा था। मगर यूज़ चुस्टे टाइम ऐसा लग रहा था।

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जैसे उसके अंदर से दूध आ रहा हो। कुछ देर दूध चूसते ही मम्मी ने मेरा सिर पकड़ के आपने दूध से हटा दिया। और मुझे ऐसा लगा. जैसे किसी ने मेरी सबसे पसंदीदा चीज़ को मेरे मुँह से निकाल लिया हो।



मम्मी – ये क्या कर रहा था तू?



मैं – सॉरी मम्मी वो मैंने पहली बार आपके दूध इतने पास से देखे। तो मुझसे रहा नहीं गया. मुझे माफ़ कर दो.



मम्मी- बेटा, तू अब बड़ा हो गया। तू बच्चा थोड़ी है. जो ये सब करेगा. ये सब ठीक नहीं लगता.



मैं- मम्मी, आप नाराज़ तो नहीं हो ना. मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था. सॉरी मम्मी.



मम्मी- कोई बात नहीं बेटा. मैं नाराज़ नहीं हूं. बस आगे से ध्यान रखना.



मैं- वो मम्मी मेरे कई दोस्त बताते हैं कि औरत के दूध पीने में बहुत मजा आता है। मम्मी उनके पास तो कोई ना कोई औरत है। जिनका वो दूध पीते हैं. और मुझे जब भी मिलता है. तो यही सब बातें कर के मुझे जलाते हैं।



इसीलिये जब आज आपके दूध सामने से देखेंगे। तो मुझसे रहा नहीं गया. इसलिए मैंने आपके दूध मुंह में डाल लिया।



मम्मी- बेटा, वो लोग जो ऐसा करते हैं। वो बहार की कोई औरत के साथ करती है। मगर मैं तेरी माँ हूँ।



मैं – मम्मी, इसलिए मैं बिना किसी डर के आपके दूध को चूस रहा था। वरना मैं तो इतनी बदकिस्मत हूं कि मुझे ये सुख मिल ही नहीं सकता। मेरे दोस्त तो हमेशा कहते हैं कि मेरी शक्ल पर तो कोई लड़की थकेगी भी नहीं। ये सुख मिलना तो डर की बात है.



मम्मी मेरी बात सुनके मेरे हाथ पर हाथ रख कर सहलाने लगी।



मैं- मम्मी, मैं ऐसा नहीं करता. मगर मैंने सोचा अब आप मुझसे खुल के बात कर लेते हो। और तो और मुझे अपनी पैंटी देके. मेरी मदद करते हो. तो अगर मैं आपके दूध को चूस भी लेता हूँ।



तो आप नाराज नहीं होंगे. क्योंकि आप तो मेरी मम्मी हो। मैंने बचपन में भी आपके दूध को पिया है। मगर मुझे मालूम नहीं था कि आप नाराज़ हो जाओगे।



मम्मी- नहीं बेटा मैं नाराज़ नहीं हूँ। बस तूने एक दम से ऐसा किया। तो मुझे कुछ समझ नहीं आया.



मैं- मम्मी, एक आप ही तो हो. जिसे अब मैं अपनी परेशानी बता सकता हूं। वर्ना तो पहले मैं अपने आप में ही रहता था।
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#17
मम्मी- मैं समझती हूं मेरे बच्चे. चल अब भूल जा ये सब. ये देख आज टाइम कहां निकल गया. पता भी नहीं चला.



मम्मी की बात सुनके मैंने टाइम देखा। 4 बजे तक 20 मिनट तक.



मैं- अरे हा मम्मी. आज तो समय का पता ही नहीं चला। शायद आज मैं आपके दूध से खेल रहा था। इसलिए आपको और मुझे टाइम का ख्याल ही नहीं आ रहा। आज मैं फिर से बच्चा जो बन गया था।



मेरी बात सुनके मम्मी हंसने लगी. फिर वो थोड़ी देर बात करने के बाद चाय बनाने चली गई। फिर मैं चाय पीके दुकान पर चला गया।



आज तो मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था।



ऐसा लग रहा था. जैसे मैं आसमान में उड़ रहा हूं। दिल में एक अजीब सी ख़ुशी थी. फिर साढ़े चार बजे तक मम्मी भी दुकान पर आ गई। और दुकान पर आते ही हम दोनों व्यस्त हो गए। क्यूकी शाम के समय ग्राहक जयादा आते हैं।



मम्मी और मैं एक दूसरे को देख कर स्माइल कर रहे थे। मम्मी को देखकर ये कभी नहीं लग रहा था कि वो मुझसे नाराज़ है।



मम्मी को सिर्फ प्यार से अपना बनाया जा सकता है।



जैसे इतने वक्त की मेहनत के बाद मम्मी मुझसे इतना खुल गई थी। फिर साढ़े 6 बजे हाय मम्मी घर चली गई। मैं दुकान पर ही बैठा रहा। फ़िर मेरे दोस्त आ गये। और हम लोग बातें करने लगे। फिर 9 बजे मैं भी घर पहुंच गया।



पापा तो पहले ही पीके आये थे। जब मैं पूछा तो तब तक वो खाना खाके टीवी देख रहे थे। फिर मैंने और मम्मी ने भी खाना खा लिया। फिर मैं अपने कमरे में आ गया। कमरे में आते ही मैं कच्चे में आ गया।



फिर मैं मोबाइल चलाने लगा. और ठीक साढ़े 10 बजे मम्मी आपने सीरियल देखने के बाद मेरे कमरे में आई। मम्मी के आने से पहले ही मेरा लंड खड़ा हुआ था। मम्मी कमरे के अंदर आते ही बिस्तर पर बैठ गई। मम्मी और मैं एक दूसरे को देखने लगे।



मम्मी के बिस्तर पर बैठे ही मैं उनकी गोद में सर रख कर लेट गया। और मेरे लेट ते हाय मम्मी मेरे बालों में हाथ फिराने लगी। तभी मैं बोला.



मैं- पापा तो गये मम्मी.



मम्मी – हा, बेटा. वो तो कब के सो गए.



मैं- मम्मी, आज भी पीके ही आओगे.



मम्मी – बेटा, ये भी कोई पूछने की बात है. तू तो जनता ही है. रात को वो बिना पिए कहा आता है।



मैं- मम्मी, सच सच बताओ. आपने पापा से कैसे शादी कर ली। रोज तो पीक आते हैं. आप पर ध्यान भी नहीं देते. आपको कैसा पसंद आ गया पापा.



मम्मी – बेटा, हमारे ज़माने में घर के लोग शादी का फैसला करते थे। बस इसीलिये मेरी भी शादी हो गयी।



मैं- वैसे मम्मी आज दोपहर वाली बात से आप नाराज़ तो नहीं हो ना।



मम्मी- अरे बेटा नाराज़ नहीं हो.

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मैं – मम्मी, आज जब मैं आपका दूध चूस रहा था। फ़िर आपने जिस तरह मुझे हटा दिया था। तब तो मुझे लगा कि आज आप फिर से मेरे थप्पड़ मारने वाले हो। मगर आपने ऐसा किया नहीं।



मम्मी – बेटा, बचपन में तो तू मुझे बहुत पिता है। मगर मैं प्यार भी तुझसे बहुत करती हूं। तुझे कुछ समय पहले एक थप्पड़ मारा था। तब तू मुझसे नाराज़ हो गया था। अब मैं वैसा नहीं कर सकती. वैसे भी अब हमारे बीच काफी कुछ बातें खुल के होने लगीं। तो अब मुझे ज़्यादा फर्क नहीं पड़ता है।



मैं – मैं भी आपसे बहुत प्यार करता हूँ मम्मी। इसलिए तो आपको अपनी परेशानी और दिल की बात बता देता हूं।



मम्मी – बेटा, मुझे भी तुझसे बात करके अच्छा लगता है। वरना पहले तो मैं सिर्फ टीवी देखकर अपना मन बहला लिया करती थी। मगर अब तुझसे बात करके टाइम आचे से निकल जाता है।



मैं- वैसे मम्मी क्या मैं फिर से आपके दूध को छू लूं?
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#18
मम्मी- बेटा, तू फिर से शुरू हो गया। मैंने एक बार आपने दूध छूने के लिए हा बोल दिया। तो अब क्या तू बार-बार यहीं छूटेगा।



मैं- तो क्या हुआ मम्मी? बचपन में भी तो मैं ऐसे ही लेट कर खेलता था।



मम्मी – तब तू बच्चा था बेटा. अब तू इतना बड़ा धींगदा हो गया है। और अब भी तू इनसे खेलना चाहता है।



मैं- मम्मी, मैं चाहे जितना बड़ा हो जाऊं। रहूंगा तो आपका बेटा हाय। वैसे आज दोपहर में आपके दूध के चू के मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। इसलिए फिर से चुनने का मन कर रहा है।



आपनी बात पूरी करते ही मैंने मम्मी के दूध मैक्सी के ऊपर से पकड़ ली। मैं बड़े प्यार से उनके दूध को दबाने लगा। मम्मी मुझे देख रही थी. मैं उनके दूध को मसलने जा रहा था। मैं बार-बार मम्मी के दूध की घुंडियों को छेड़ रहा था।

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मम्मी अपना मुँह दूसरी साइड करके अपने होठों को अपने मुँह में दबा रही थी। अभी 2-3 मिनट हाय ह्यू थे कि तभी मम्मी बोल पड़ी।



मम्मी- अब बस भी कर बेटा कितना मेरा दूध के साथ खेलेगा।



मैं- मम्मी, इन्हें चू के बहुत अच्छा लगता है. इसलिए मेरे दोस्त कहते हैं कि औरत के दूध से खेलना बहुत किस्मत वाले मर्दों को मिलता है।



मम्मी- बेटा, मैं तेरी माँ हूँ। और तू अपनी बीवी के नहीं, बल्कि अपनी माँ के दूध से खेल रहा है। मैं जल्दी ही तेरी शादी कर दूंगी। तब अपनी बीवी के दूध से खेलना.



मैं- मम्मी, एक बात काहू.



मम्मी- हम्म हम्म.



मैं- मम्मी, आप ने मुझे 3 लड़कियां दिखाईं। सच कहूँ तो मुझे तीनो में से एक भी लड़की अच्छी नहीं लगी।



मम्मी- ऐसा क्यों कह रहा बेटा? तीनो लडकिया सही थी. गोरी भी थी.



मैं- मम्मी, मुझे काले गोरे से ज़्यादा फ़र्क नहीं पड़ता है।



मम्मी- बेटा, तो तुझे कैसी लड़की पसंद है।



मैं- मम्मी, अब जो लड़की आप देखना. वो भले गोरी ना हो. मगर वो थोड़े भरे बदन वाली हो। बिल्कुल आप के जैसा. मुझे पतली लड़की बिल्कुल पसंद नहीं है।



मम्मी अपनी तारीफ सुनके शरमाने लगी। मैंने फिर से उनको दूध दबा दिया। मेरी इस हरकत पर मम्मी ने अपने माथे पर हाथ मारा। और बोली.



मम्मी- अरे बागवान, क्या करू मैं तेरा? मेरा बेटा बिल्कुल पागल हो गया है।



मम्मी की बात सुनके मैं मुस्कुराने लगा। और फिर 2-4 बार मम्मी के दूध दबाने के बाद मम्मी बोली।



मम्मी- चल बेटा अब मैं चलती हूं. तू भी तो जा. सुबह दुकान पर भी जाना है.



मैं- ठीक है मम्मी. मगर आप पैंटी तो दे जाओ.



मम्मी- बेटा, अगर तू रोज-रोज ऐसा करेगा। तो तुझे कामजोरी आ जायेगी.



मैं- मम्मी, रोज-रोज कहा करता हूं. 2-3 दिन में एक बार करता हूं. और अगर आज नहीं करा. तो ये रात में खुद निकल जाएगा. मम्मी ये देखो कच्चे में कितना टाइट हो गया है।



मम्मी मेरे कच्चे को देखने लगी. और फिर उन्हें अपनी मैक्सी उठानी पड़ी. मैं मम्मी की मसल जंघो को देखने लगा। मुझे मम्मी की पहचान हुई पैंटी का थोड़ा सा हिस्सा दिखा। मगर क्या बताउ दोस्तो. मम्मी के ऊपर वी शेप पैंटी बहुत अच्छी लग रही थी।



मम्मी ने एक झटके में अपनी पैंटी उतार के मुझे दे दी। मैने तुरंट मम्मी की पैंटी उनके सामने ही उनकी चूत वाले को देखने लगा। मम्मी मुझे ऐसा करता देख रही थी। मगर अब हमारे बीच काफी कुछ बदल चुका था।



इसलिए वो मुझे कुछ कह नहीं रही थी। और जैसा ही मैंने मम्मी की पैंटी का चूत वाला हिस्सा देखा। तो वो आज पहले के मुकाबले ज्यादा गीला था। मम्मी की पैंटी देखते ही मैं मम्मी को देखकर मुस्कुराने लगा।
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#19
मम्मी ने शर्म के कारण अपना चेरा नीचे कर लिया। मम्मी का चेरा शरम से लाल हो गया था। और फिर मैं बोला.



मैं- मम्मी, लगता है आज पापा आपको इस पैंटी में देखकर ज्यादा ही खुश होंगे। तभी आज उन्हें जिबर के साथ प्यार किया है।



मेरी बात सुनते ही मम्मी मुझे देखने लगी। क्योंकि आज मैं उनकी दुखती रग को छेड़ रहा था। क्योंकि मैं जनता था. पापा मम्मी की चुदाई ना के बराबर करते हैं। और अगर करते भी हैं. तो उनकी तसल्ली नहीं करा पाते.



मैं इतना आगे बढ़ गया था कि अब सही समय था। मम्मी के दर्द के बारे में बात करने का, ताकि मम्मी मुझसे और ज्यादा खुल जाये।



और आज रात मैं उसी की शुरुआत कर रहा था। मम्मी मुझे देखे जा रही थी। फ़िर मैं बोला.



मैं- मम्मी, आप ऐसे क्या देख रही हो? मैं सच ही तो बोल रहा हूँ। आप तो शादी शुदा हो. पापा तो आपको रोज प्यार करते होंगे। तभी तो आपकी पैंटी अंदर से ऐसी गीली रहती है।



मम्मी- बेटा, ये तेरे पापा और मेरे बीच की बात है। तुझे हमसे पैदा होने की जरूरत नहीं है। तू अपने काम से काम रख.



मम्मी ने ये बात थोड़े गुस्से में कही थी। क्योंकि आज मैंने उनकी दुखती रग को छेड़ा था। मम्मी अपनी बात बोलके कमरे में से निकल गई। मैं वही बिस्तर पर बैठ गया।



और हुआ भी वैसा ही, मम्मी थोड़ी गुस्से में निकल गई। और फिर मैं भी मम्मी पैंटी चाट के और सुन कर लेट गया। और फिर अगली सुबह मैं जल्दी उठ गया। मम्मी के कमरे में आते ही मैं कमरे के बाहर निकल गया।



आज मैंने मम्मी से कोई बात नहीं की थी। और फिर जल्दी से नहा धोके मैं दुकान की चाबी लेके दुकान चला गया। मम्मी तब चाय बना रही थी। आज मैंने दुकान जल्दी खोल दी। और फिर मैं दुकान पर बैठ गया।



मैं दुकान पर आराम से बैठा हुआ था। और तभी साढ़े 10 बजे मम्मी दुकान पर आ गई। मम्मी के हाथ में खाने का डब्बा था। और दुकान पर आते ही मम्मी मुझे देखने लगी। मैंने मम्मी को एक बार देखा।



और फिर अपनी नजर घुमा ली. मुझे ऐसे देखकर मम्मी दुकान के अंदर आ गई। और अंदर आते ही वो बोली.



मम्मी- तू आज नाश्ता करके क्यों नहीं आया? मैं तुझे आवाज भी दे रही थी।



मैं- मुझे भूख नहीं थी. इसीलिये जल्दी दुकान पर आ गया।



मम्मी- चल ले मैं नास्ता लेके आई हूं. यहीं खा ले.



मैं- मुझे भूख नहीं मम्मी. इसे रहने दो.



मम्मी- ये क्या है बेटा? तू ड्रामा क्यों दिखा रहा है?



मैं- मैं कहां ड्रामा दिखा रहा हूं मम्मी? कल रात आप ही मुझे सुनाने गई थी कि मुझे अपने काम से काम रखना चाहिए।



मम्मी- अरे बेटा वो कल रात गुस्से में निकल गया था। तू अभी तक नाराज़ है क्या?

मैं- मम्मी, मैं और आप इतने टाइम से खुल के बात कर रही हैं। हम दोनों एक दूसरे को समझते हैं। इसीलिये कल रात आपकी गीली पैंटी देखकर मैंने बोल दिया था। मगर आप तो छोटी सी बात पर गुस्सा हो गए।



मम्मी – बेटा, कुछ बाते पत्नी पत्नी के बीच की होती है। जो सबको नहीं बताती जाति है.



मैं- मम्मी, ये बात मैं समझता हूं. मैंने तो ऐसे ही पूछ लिया था. मगर जिस तरह आपने मुझे जवाब दिया था। उसे मुझसे जुड़ने लगा है कि आपके और पापा के बीच सब ठीक नहीं है। ऐसा है क्या?



मम्मी- बेटा, तू वो सब छोड़. चल पहले नास्ता कर ले.



मैं- मम्मी, आप हमेशा मेरी परेशानी को समझो। और हमेशा मेरी मदद भी करते हो। सच सच बताओ मम्मी. क्या पापा आपको प्यार भी करते हैं या नहीं। आपको मेरे सर की कसम.



मम्मी- बेटा, ये क्या है? तू बार बार मुझे अपनी कसम क्यों देता है?



मैं- मम्मी, आप और मैं एक दूसरे की झूठी कसम कभी नहीं खा सकते। क्योंकि हम दोनों ही एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं। इसीलिये जब आपको भी मुझसे कुछ जानना होता है। तो आप मुझे अपनी कसम देते हो।



अब सच-सच बताओ मम्मी की सच क्या है? जिसकी वजह से मैं रात में भी सही से सो नहीं पाया हूं। क्या पापा आपको प्यार करते हैं या नहीं?



मम्मी- करता है बेटा. मगर उमर के साथ-साथ प्यार कम होता जाता है।



मैं- मम्मी, प्यार से उमर क्या लेना देना है। जब इंसान को प्यार की जरुरत है. उपयोग करने के लिए टैब प्यार मिलना ही चाहिए। और आपकी उमर इतनी भी नहीं हुई है कि आपको प्यार की ज़रूरत नहीं है। सच तो ये है कि पापा को सिर्फ डरू पीने की पड़ी रहती है। और वो डररू में ही डूबे रहते हैं।



मेरी बात सुनके मम्मी मुझे घुर के देखने लगी। क्योंकि आज मैं मम्मी के अधूरी इच्छा की बात कर रहा था।



मैं- मम्मी, भले ही मेरी शादी नहीं हुई है. और ना मेरे पास प्यार करने के लिए कोई औरत है। मगर मैं इतना तो जनता ही हूं कि जैसे एक मर्द को प्यार करने के लिए एक औरत की जरूरत होती है। जिसे वो अपनी गर्मी निकाल सके।



वैसे ही एक औरत को भी एक मर्द की ज़रूरत होती है। जिसे वो सारी जिस्मानी ख़ुशी हासिल कर सके। जिसे उसको ख़ुशी मिलती है। वैसे मम्मी सच सच बताना. पापा आपको माहीने में कितनी बार प्यार करते हैं।



मम्मी- बेटा, ये क्या है? तू इस बात को भूल क्यों नहीं जाता?



मैं- मम्मी, मैंने आपको अपनी कसम दी है। आप सच सच बताइये.



मम्मी- 1 या 2 बार बस.



मैं- मैं जानता था मम्मी. पापा को बस अपनी डरू की चिंता है। उन्हें आपकी जरा सी भी परवाह नहीं है.

मम्मी – बेटा, छोड़ ये बाते. तू पहले नास्ता कर ले. सुबह से भूखा है तू.



मम्मी की बात पूरी होती ही मैंने अपने गाल पर खुद एक जोर से थप्पड़ मारा। और जैसा ही मैंने ऐसा किया। मम्मी चोक गई. और फिर एक और थप्पड़ दूसरे गाल पर मारा। तभी मम्मी ने मेरे हाथ को पकड़ लिया। और वो बोली.



मम्मी- ये क्या कर रहा है बेटा? खुद को क्यू मर रहा है?



मैं- मम्मी, लांट है मुझसे. मैं रोज आपसे अपनी परेशानी के बारे में बात करता हूं। और आप मेरी मदद भी करते हो। मगर मैंने आज तक आपसे आपकी परेशानी नहीं पूछी कितना नालायक बेटा हुआ।



मम्मी – बेटा, ऐसा मत बोल. तू बहुत अच्छा बेटा. इतनी सी उमर में सारा घर संभालता है। मेरा और अपने पापा का ख्याल रखता है। मेरी इतनी परवा करता है. ऐसा मत बोल बेटा ऐसा मत बोल।



मैं- मम्मी, पहले हमारे बीच ये सब बातें नहीं होती थीं। तब तक तो ये सब ठीक था। मगर अब तो हम दोनों सारी बातें करते हैं। काम से काम अब तो मुझे आपसे पूछना चाहिए था। हर रोज आपकी गीली पैंटी देखकर मैं सोचता था।



कि पापा आपसे हर रात प्यार करके सोते हैं। मगर मुझे मालूम नहीं था कि आपको वो सुख मिल ही नहीं रहा है। जो हर औरत की जरुरत होती है.



मम्मी- बेटा, इसमें तू क्या कर सकता है?



मैं – मम्मी, आपस में खुल के बात करके आपका थोड़ा दर्द तो कम ही हो सकता है। मगर मुझे तो सिर्फ अपनी सुख की पड़ी थी। मैंने आप पर ध्यान ही नहीं दिया।



मम्मी- बेटा, तू मेरे लिए जितना करता है। वो हाय बहुत है. चल अब नास्ता कर ले. सुबह से भूखा है तू.
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#20
मैं- मम्मी, आप भी मेरे साथ खा लो. मैं जानता हूं आप ने भी कुछ नहीं खाया है।



मम्मी मुझे देखकर मुस्कुराने लगी। और फिर हम दोनो ने नास्ता कर लिया। मैं मम्मी से नॉर्मली बात करने लगा। और बीच बीच में मज़ाक भी करने लगा। जिसकी मम्मी का सारा मूड ठीक हो गया।



मम्मी से नॉर्मल बातें करने से उन्हें ये नहीं लगता था कि मैं हमेशा सेक्स की बात ही करता हूं। और नॉर्मल बातें करने से हम दोनों के बीच का रिश्ता और ज्यादा अच्छा हो रहा था। 1 बजे तक हम दोनो बाते करते रहे। और ग्राहक भी देखते रहे.



फिर मम्मी घर चली गई. और ठीक 2 बजे मैं भी घर पहुंच गया। और आज भी मम्मी ब्लाउज और पेटीकोट में थी। और फिर घर आके हम दोनो खाना खाने लगे। मैं आज भी सिर्फ कच्चे में मम्मी के बिस्तर पर लेटा था।



और फिर कुछ देर बाद मम्मी भी आ गई। और वो भी मेरे बगल में लेट गई। मम्मी के लेट ते ही मैं उनके खंडे पर सर रख कर लेट गया। मम्मी मेरे बाल को सहलाने लगी. जैसी हाय मम्मी मेरे बाल सहलाने लगी। तभी मैंने उनको दूध पर हाथ रख दिया।



मम्मी के दूध दबाने और सहलाने लगा। और फिर मम्मी स्माइल करते हुए बोली।



मम्मी- ये क्या कर रहा है तू?



मैं- क्या कर रहा हूँ मम्मी? आपके दूध से खेल रहा हूँ।



मम्मी- बेटा, अब तो तू रोज ही ऐसा करने लगा है।



मैं- क्या करूं मम्मी. मुझे आपके दूध से खेलना अच्छा लगता है। इसलिए अब रोज हाथ अपने आप दूध पर चला जाता है। वैसे आपको कोई दिक्कत नहीं है।



मम्मी – तुझसे क्यू दिक्कत होगी? तू मेरा बेटा है?



मैं- मम्मी, आपसे एक बात पूछू. आप कल की तरह नाराज तो नहीं होंगे।



मम्मी – बेटा, क्या ये बात है तेरे पापा और मेरे नंगे में हैं?



मैं – हा मम्मी मैं कुछ जानना चाहता हूँ।



मम्मी- बेटा, तू वो बात भूल क्यों नहीं जाता?



मैं- मम्मी, बात आपकी ख़ुशी से जुड़ी है। इसलिए मैं भूल नहीं पा रहा हूं। और इसलिए मैं ये बात जानना चाहता हूं। प्लीज मम्मी.



मम्मी मेरी बात के बारे में सोचने लगी। मैं उनके दूध की घुंडियों को मसले जा रहा था। और फिर 1 मिनट सोचने के बाद मम्मी बोली।

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मम्मी – क्या पूछना चाहता है बेटा?



मैं- मम्मी, क्या अब भी आपका मन करता है कि आपको भी वही जिस्मानी सुख मिले। जो हर औरत के लिए ज़रूरी है। सच सच बताना मम्मी.



मम्मी- हा बेटा करता है. भला ऐसी कौन सी औरत होगी. जो इस सुख के लिए तड़पती ना हो.



मैं- मम्मी, तो आप ये बात पापा से क्यों नहीं कहती हो? कि आपको भी ये सुख चाहिए. आप तो शादी शुदा हो. आप तो हक से ये बात बोल सकते हैं।



मम्मी- बेटा, जिस समाज में हम लोग रहते हैं। वाह औरते खुल के ये बात कभी नहीं कहती है। वरना ऐसी औरत को उसका खुद का पति गिरी हुई समझ है। और वैसे भी बेटा उमर होने के साथ-साथ सब बदल जाता है। और ये घर घर की कहानी है।



मैं- मम्मी, आपकी बात सुनने लगती है. आपकी और मेरी हालत एक जैसी है। आप शादी शुदा होके भी तड़प रही हो। मैं बिना शादी के तड़प रहा हूं। मम्मी क्या शादी करने के बाद भी ऐसा ही रहना पड़ता है?



मम्मी- बेटा, शादी के कुछ साल तक ये सब बहुत ज़्यादा होता है। फिर बच्चे होने के बाद सब काम होने लगता है। और फिर मेरी उमर में आते आते हैं. ना के बराबर होता है.



मैं- मम्मी, इसीलिए आज कल लड़के की शादी से पहले ही चुदाई का भरपूर मजा ले लेते थे।



मम्मी मेरे मुँह से चुदाई शब्द सुनके मुझे देखने लगी।



मैं – मम्मी, मैं सच कह रहा हूँ। यहां तक ​​कि आप जिस लड़की से मेरी शादी करोगे। वो भी पहले से ये सब कर चुकी होगी।



मम्मी- बेटा, सारी लड़कियां एक जैसी नहीं होती हैं।



मैं- मम्मी, आज कल जयदाता लड़की ऐसे ही है. जैसी ही उनकी चूत से पानी निकलने लगता है। वो किसी को पकड़ के अपनी चूत की गर्मी शांत करवा लेती है। इसीलिये जब आपकी पैंटी मैंने गीली देखी।



तब मुझे थोड़ा अंदाज़ा हो गया था कि आपको भी वो सुख नहीं मिलता है। जो हर औरत को चाहिए होता है।



मम्मी मेरी बात के बारे में सोचने लगी। और कमरे में एक दम सन्नाटा छा गया। थोड़ी देर हम दोनो शांत रहे। फ़िर मम्मी बोली.



मम्मी- बेटा, मैं तुझसे एक बात पूछू। सच सच बताइयेगा.



मैं- हा हा मम्मी पुच्चू.



मम्मी – बेटा, जब मैं तुझे पैंटी देती हूँ। तब वो रोज सुबह मुझे गीली मिलती है। क्या तू मेरी पैंटी में वो सब करता है?



मुझे लगा नहीं था कि मम्मी मुझसे ये सवाल पूछेगी। मगर उन्हें ये सवाल पूछ के मुझे एक और मौका दे दिया था।



मैं- अरे नहीं मम्मी वो तो मैं चाटूंगा...



मैं जानकर अपनी बात पूरी करते-करते रुक गया। जिसे मम्मी समझ गई कि मैं उनकी पैंटी को चाटता हूं। अपनी बात पूरी ना करते हुए मैं नीचे देखने लगा। फ़िर मम्मी ने मेरा चेरा ऊपर किया और बोली।

मम्मी- बेटा, तू मेरी पैंटी को चाटता है ना।



मैं- हा मम्मी आपको जो पैंटी गीली मिलती है. मैं चाट के गीला करता हूं का उपयोग करें।



मम्मी – मुझे लगा ही था. मगर तुझसे पूछना सही नहीं लग रहा था। इसलिए मैं तुझसे पूछ नहीं रही थी। बेटा तू जानता है. मेरी पैंटी कितनी गंदी होती है. मुख्य उपयोग पहन के सुसु जाती हूं

मेरी दिन भर की सुसु उसमें लगी होती है। और तू उसे ही चाटता है.



मैं- मैं क्या करूँ मम्मी? आपकी पैंटी से जो तेज महक आती है। सुंघकर मुझे कुछ होश ही नहीं रहता है। पहले मैं सिर्फ आपकी पैंटी को चुनता था। मगर फिर मुझे आपकी पैंटी में गीलापन दिखने लगा। मम्मी मैंने कहीं पढ़ा था.



और मेरे दोस्त भी यही कहते हैं कि अगर कोई मर्द किसी औरत की चूत से निकला हुआ कामरस पीता है। इस्तेमाल करने के लिए एक अलग ही जोश आ जाता है। मेरे पास तो कोई औरत थी ही नहीं, इसीलिये जब मैंने आपकी पैंटी में वो कामरस देखा। तो मैं खुद को रोक नहीं पाया.

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