07-05-2026, 08:21 PM
Wow... Too exciting updates...
Keep going...
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Misc. Erotica भाभी का जलवा
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08-05-2026, 12:51 PM
अब आगे .............
मैं भाभी की मनोस्थिति समझ गया था और मुझे लगने लगा था की अब दिल्ली दूर नहीं जैसे तैसे मै शाम होने का इंतज़ार करने लगा टेबल पर हम सभी खाना खा रहे की भाभी उठ कर पापाजी को दाल परोसने गयी जैसे ही वो मेरे पास से गुजरी मैंने उसकी गांड मैं एक ऊँगली घुसा दी मेरी इस हरकत से वो उछाल सी गयी और गिरने लगी तो पिताजी ने उठ कर उन्हें संभल लिया पर मैंने देखा की सँभालने के चक्कर मैं पापाजी का हाथ उनकी नंगी कमर पर आ गया और दूसरा हाथ उनके बोबे पर भाभी जैसे तैसे सम्भली और हम सब ने खाना ख़तम कर किया मैं अब सबके सोने का इंतजार करने लगा रात साढ़े दस बजे जब मुझे लगा की सब सो चुके हैं या फिर अपने अपने कमरे मैं व्यस्त हैं तो मैंने भाभी को आने का मैसेज किया वो आयी पर थोड़ी गुस्से मैं थी आते ही बोली - ललित ये क्या हरकत की तुमने आज शाम मैं - मैंने क्या किया भाभी भाभी - तुमने मेरी गाँण्ड .................. मैं - क्या भाभी भाभी - कुछ नहीं मैं - खुल कर बोलो भाभी तभी तो मजा आएगा भाभी - मैं नहीं बोलती ऐसे गंदे शब्द मैं - अच्छर भाभी उस रात तो भैया का लौड़ा लेते वक्त आप बहुत बोल रही थी - चोदो ललित अपनी रंडी भाभी को जम कर चोदो, फाड् दो मेरी चूत को और अभी क्या हो गया मेरी रंडी भाभी भाभी - शर्म से पानी पानी हो गयी मैं - यहाँ आ कर बैठो मेरी रन... ... भाभी भाभी - जबान संभल कर मैं ये सब भी सिर्फ तेरे भैया के आने तक करुँगी उसके बाद तू मुझे ब्लैकमेल नहीं करेगा यही डील हुई हैं अपनी मैं ठीक हैं भाभी पर तब तक आज के बचे हुए बीस मिनट का मजा तो लेने दो भाभी मेरे बगल मैं आ कर बैठ गयी मैं - भाभी आज तो आपको मज्जा आ गया होगा भाभी - क्यों मैं - सुबह मैं आपको गरम किया और अभी पापाजी ने आके गुदाज बोबे मसल दिए भाभी - - पापाजी ने सिर्फ मुझे संभाला था मसला नहीं था मैं - पर आपको मज्जा तो आय न भाभी - सब लोग तेरी तरह नहीं सोचते मैं - ठीक हैं, और उनके एक बोबे पर हाथ रख दिया भाभी आपको मज्जा आया या नहीं मेरी सांसे उनकी गर्दन पर थी और मेरा हाथ उनकी छाती को सहला रहा था भाभी - नहीं मुझे कोई मजा नहीं आया मैं - भाभी आप झूठ बोल रही हो मैंने ऐसे इसलिए कहा की छाती पर हाथ फेरने की वजह से उनके निप्पल कड़क होने लगे थे वो आज भी गाउन पेहेन कर आयी थी और मैं सिर्फ कपड़ो के ऊपर से ही उनको छु सकता था भाभी - नहीं मैं झूठ नहीं बोल रही ये सुन कर मैंने जैसे ही अपनी गरम साँस उनकी गार्डा पर छोड़ी उन्होंने अपना मू मेरी तरफ फेर लिया उनकी इस हरकत से उनके होठ मेरे होठ के पास आ गए उनके गुलाबी होठो को इतने नजदीक से देखने और उनके उरोज पर हाथ फेरने से मेरा लौड़ा खड़ा होने लगा मैं उन्हें किस करना चाहता था और मैंने अपनी जीभ बहार निकाल कर उनके गुलाबी होठो को छेड़ दिया मेरी इस हरकत से उनका हाथ अचानक से फिसला और मेरे खड़े लौड़े पर आ गया जिसको उन्होंने मुट्ठी में भर कर भींच दिया मेरी सिसकारी निकल गयी और ऐसा लगा जैसे मेरा माल ही निकल जायेगा मेरी सिसकारी सुन कर भाभी ने अपना हाथ हटा लिया और मुझे सॉरी बोलै मैं - कोई बात नहीं भाभी मुझे तो अच्छा लगा अब ये बताओ आपको कैसा लगा भाभी - चुप कर तेरे पास बस पांच मिनट और बचे हैं मैं - भाभी, आपके साथ इस तरह गुजरा हर लम्हा मस्त हैं मैं तो ऐसे ही आपको हमेशा प्यार कर सकता हूँ और मै भाभी से लिपट गया ये पहली बार था की मैंने भाभी को सामने से गले लगाया था, उनके कड़क कड़क गुजाद मम्मे मेरी छाती पर गढ़ रहे थे उनकी सांसे मेरी गर्दन पर थी और मैं उनकी पीठ पर हाथ फेर रहा था और फिर मैंने अपने दोनों हाथ उनकी गांड पर रखे और उनकी मोटी गांड को मसलने लगा भाभी बेकाबू होने लगी थी और उनकी सांसे उखड रही थी अचानक से उन्हें पता नहीं क्या हुआ और मुझे दूर छिटक कर वो बोली - तेरा आज का समय ख़तम उनकी सांस फूल रही थी, और उनसे ज्यादा कुछ नहीं बोला जा रहा था मैंने देखा नीचे लोअर मैं तम्बू बना हुआ हैं और वो भाभी की चूत पर को रहा था इसलिए उन्होंने मुझे भक्का दे दिया और दूर हो गयी पर कोई बात नहीं आज भाभी ने मेरे लौड़े का एहसास दो बार कर लिया और मैं भी उनकी गांड दबा दी भाभी मेरे लोअर मैं बने तम्बू को देख कर चली गयी मैं उनके पीछे देखने गया की वो क्या करती हैं उधर भाभी की हालत ख़राब थी ये मुझे क्या हो गया था मेरी पैंटी कितनी गीली हो गयी उसका लौड़ा सुनील के लौड़े से ज्यादा मोटा और बड़ा हैं और यही सब सोच कर वो ऊँगली करती हुई सो गयी और मैं उनके खयालो मैं खो गया और आ कर सो गया
13-05-2026, 12:06 PM
अब आगे
अगले दो तीन दिन ज्यादा काम होने की वजह से मैं भाभी के मजे नहीं लूट पाया था पर शायद ये भी मेरे ही पक्ष मैं था सातवे दिन मैंने दिन मैं खाना खाते हुए भाभी की गांड मैं साडी के ऊपर से ही ऊँगली कर दी भाभी - चहकते हुए, आज बड़े दिन के बाद याद आयी मैं - सोचते हुए - आज ये भाभी को क्या हो गया इसने गुस्सा नहीं किया फिर कहा - अरे नहीं भाभी ऐसा कुछ नहीं हैं वो काम ज्यादा हैं न इसलिए आज रात मैं फ्री हूँ तब मिलते हैं वैसे भी तीन दिन के तीस मिनट के हिसाब से और आज के ३० मिनट मिला कर मेरे पास पूरे दो घंटे हैं भाभी - देखते हैं और मैं रात होने का इंतजार करने लगा रात को जब सब अपने कमरे मैं चले गए तो मैंने भाभी को मैसेज किया वो आयी पर आते ही ये क्या खड़े लौड़े पर चोट हो गयी भाभी के फ़ोन पर भैया का फ़ोन आ गया वो वापस जाने लगी तो मैं उनका हाथ पकड़ कर खींच लिया इस खींच तान मैं कब फ़ोन चालू हो गया पता ही नहीं चला भाभी और मैं दोनों बिस्तर पर गिर गए थे और भाभी के फ़ोन का स्पीकर ऑन हो गया और फ़ोन से भैया की आवाज़ आने लगी भैया - क्या हुआ जानेमाने कहा चली गयी भाभी - फ़ोन हाथ मैं लेते हुए - मैं तो यही थी आप ही गायब हो गए इतने दिनों बाद फोन किया आपने भैया - अरे वो कुछ काम की व्यवस्तता थी आज फ्री हुआ हूँ भाभी - तो आप कल आ रहे हो भैया - अभी कहा , अभी थोड़ा टाइम और लगेगा मैं - राहत की सास लेते हुए भैया - और वैसे भी तुम तो वह मजे ले रही हो भाभी - कैसे मजे आप तो वहां हो भैया - अरे तो क्या हुआ, ललित तो वहां हैं, तुम्हारा लाडला देवर, वो तुम्हारा ध्यान नहीं रखता मैं - अब भैया और भाभी की बातें गौर से सुनने लगा भाभी - तो क्या हुआ वो आपकी कमी तो पूरी नहीं कर सकता भैया - करवालो कमी पूरी, मुझे कोई ऐतराज नहीं भाभी पलंग पर आराम से बैठते हुए कैसे करवालो भाभी की पीठ पलंग के सिरहाने पर थी और वो पैर फोल्ड करके बैठ गयी उनके पैर थोड़े चौड़े थे उन्होंने गाउन पहना था जो घुटनो के थोड़ा ही नीचे था और इस तरह बैठने से उनकी केले के तने जैसी चिकनी और गोरी जाँघे आराम से दिखाई दे रही थी ये नज़ारा देखा कर मेरा तो लौड़ा उफान मरने लगा और मैं थोड़ा आगे सरक गया जिस से मैं भाभी के नज़दीक आ गया था इस वक्त मैं भाभी की लाल चड्डी आराम से देख सकता था भैया - क्यों क्या हुआ - उसे अपने मोटेऔर गोल गोल पपीते दिखा देती वो अपने आप ही तेरा पानी निकल देता भाभी - धत कैसे बातें करते हो मैं - दोनों की बातें सुन कर हैरान था और मेरा हाथ भाभी की जांघो पर फेरने लगा भैया - अरे सुन न चल कुछ सेक्सी बात कर न, आज बहुत मन कर रहा हैं हिलाने का भाभी - तुम तो हिला लोगे, और मैं क्या करूंगी भैया - तू भी ललित से मालिश करवा लेने, और मालिश के बाद .............. भाभी - गहरी सांस लेते हुए - मालिश के बाद भैया - मालिश के बाद अपने पपीते का रस पीला देना मेरा हाथ भाभी की पैंटी को छू रहा था और मुझे वहां कुछ गिला गिला लग रहा था मैं समझ गया की भाभी गरम हो रही हैं वो अपने पति से बात कर रही थी और देवर का लौड़ा लेने की सोच रही थी मैं भाभी के थोड़ा और करीब आया और उनकी पैंटी को अच्छे से छूने लगा वो और गरम होने लगी भैया से बात करती हुई बोली देखो न ललित को कैसे मेरी जांघो पर हाथ लगा रहा हैं मैं डर गया उधर से भैया बोले - तो उसको बोल न की हाथ से मसल दे ये सुन कर मैंने भाभी की जांघो को मसल दिया भाभी की सिसकारी निकल गयी जिसे भैया ने सुन लिया भैया - क्या हुआ भाभी - ललित ने मेरी जाँघे मसल दी भैया अच्छा भाभी - हाँ पर मेरी निप्पल्स कड़क हो रही हैं आपने कई दिनों से इनको भी तो नहीं मसला भैया - तो वो भी ललित ही मसल देगा मैंने अपना हाथ उनकी जांघो से हटा कर उनके गुदाज़ बोबो पर रख दिए मैं सिर्फ उन्हें फील कर रहा था तभी भाभी ने कहा - इसको मन करो न ये मेरे बोबे दबा रहा हैं भैया - अरे तो मसलने दे रंडी तुझे क्या फरक पड़ता हैं वैसे भी तुझे लौड़ा नहीं मिला तो तू बहार जा कर मुँह कला करवा लेगी इस से अच्छा हैं की ललित ही तेरी प्यास बुझा दे भाभी - मैं तो ललित से अपनी प्यास बुझवा लुंगी फिर तू क्या करे भेन के लौड़े भैया - ज्यादा मत बोल रंडी नहीं तो ललित को बोल कर तेरी चूचिया मसलवा दो क्या ये सुन कर मैंने भाभी की दोनों चूचियों को मसल दिया और उनकी कड़क निप्पल को अपनी अंगुली और अंगूठे के बीच ले कर मसलने लगा मुझे दोनों की बातें सुनने मैं बहुत मजा आ रहा था और कब आधा घंटा पूरा हो गया पता ही नहीं चला पर मेरी इस हरकत से भाभी की चीख निकल गयी उधर भैया को हमारी हरकत का पता नहीं था भैया - साली रंडी ऐसे चीख रही हैं जैसे सच मैं ललित ने इसकी निप्पल मसल दी हो भाभी - साले कुत्ते अभी बीवी को अपने भाई के सामने परोस रहा है भड़वा हैं क्या भैया - अच्छा और जब तू तेरे जीजा अनिल को इन संतरोका रस पीला रही थी तब तू नहीं बनी रंडी मुझे पता हैं अनिल ने ही तेरे संतरो को पपीता बनाया हैं भाभी - हाँ तो तेरे भरोसे रहती तो अभी तक ये नीबू ही होते वो तो भला हो जीजा का जिनकी नज़र इन पर पड़ गयी और उन्होंने इनको पहले संतरा और फिर पपीता बना दिया भैया - तो जा न रंडी चुदवा ले अनिल से और अभी वो नहीं मिले तो ललित का लौड़ा ले ले रंडी भाभी - हाँ चुदवा लूंगी, अब तू देखा कैसे मैं ललित को अपने पीते का रस पिलाती हूँ और ये कह कर भाभी ने मेरा हाथ उनके एक बोबे पर दबा दिया मैं तो जैसे जन्नत की सैर करने लगा था मुझे समझ आ गया था की तीन चार दिन दूर रहने और उस से पहले तीन दिन भाभी को गरम करने का नतीजा हैं ये सब और आज मुझे सब्र का फल मिलने वाला हैं मैंने भी मौके नहीं गवाया अरे दोनों हटो से भाभी के बोबो को मसलने लगा भाभी कि सिसकारियां निकलने लगी जिसे भैया आराम से सुन रहे थे भैया - वाह तू तो आनद के सागर मैं गोते लगा रही हैं चल अब लेत को अपना एक बोबा पीला दे और तब तक पीला जब तक वो सारा रस न निचोड़ ले भाभी - अच्छा आजा ललित मेरे लाडले देवर आज तुझे तेरी भाभी का बोबा पीला दू और ये कह कर भाभी ने अपना एक बोबा नाईट गाउन से बहार निकल दिया मैंने भी बिना वक्त गवाए उनके बोबे को अपने मुँह मे ले लिया और बच्चे जैसे पीने लगा मुझे बहुत मजा आ रहा था में तो चाह रहा था की भैया और भाभी की बात ख़त्म न हो और मै ऐसे ही मजे लेता रहूँ दूध पीने के साथ साथ मैं उनका निप्पल भी काट रहा था और उनके दुसरे बोबे को मसल भी रहा था उधर भैया ने शायद अपना लंड बहार निकल लिया था और हिला रहे थे भाभी को शायद समझ आ गया था भाभी - भैया से, निकल लिया न तूने तेरा लौड़ा लोअर से बहार , हिला ले चल जब तक ललित मेरा बोबा खाली करता हैं तब तक हिला ले और ये सुन कर मैं उनके बोबे पर अपने दांत लगा दिए भाभी की चीख निकल गयी भैया ने पुछा क्या हुआ तो वो बोली - ये ललित न मेरे बोबे पर काट रहा हैं भैया - अच्छा, बहुत शरारती हो गया भाभी - हाँ, तुम हिलाओ न मुझे भी चूत मैं ऊँगली करनी हैं ये सुन कर मैंने अपना एक हाथ उनकी पैंटी पर रखा और एक फिंगर उनकी चूत मैं डालने लगा भाभी नीचे से पूरी गीली थी उनकी चूत बहुत रस छोड़ रही थी मैंने उनके बोबे को छोड़ा और अपना मुँह उनकी पैंटी पर लगा दिया उधर भैया लौड़ा हिला रहे थे और इधर मैं भाभी का रस उनकी पैंटी पर से चाट रहा था थोड़ी देर मैं भाभी का शरीर अकड़ने लगा और दोनों शांत हो गए भैया ने फ़ोन काट दिया भाभी की हालत ख़राब थी उनसे उठा भी नहीं जा रहा था मैंने भाभी को सीधा पलंग पर लेटाया और उनके बोबो से खेलने लगा साथ ही साथ मैं उनके होठो का रस भी चूस रहा था मेरे होठो पर उनकी चूत का रस था पहले तो भाभी थोड़ी कसमसाई फिर मेरा साथ देने लगी मैं उनको वापस गरम कर रहा था आज हमारे बीच की सारी दीवार गिर गयी थी मैं उनका एक बोबा नंगा देख चूका था और उनकी पैंटी चाट चूका था उनकी गुदाज जाँघे ने मेरा मन मोह लिया था मैंने अपना एक हाथ नीचे ले जाते हुए उनके गाउन को कमर तक उठाया और उनकी पैंटी मैं हाथ डाल दिया ये आज पहली बार था की मैंने उनकी नंगी चूत को हाथ लगाया था मैं उनकी गीली चूत से खेलने लगा और उसमे एक एक कर दो उंगलिया डाल दी अब भाभी की बारी थी उन्होंने मेरा लौड़ा हाथ मैं पकड़ लिए पर शायद लोअर पहने होने की वजह से वो सही से पकड़ नहीं पा रही थी वो मेरे से अपने होठ अलग करते हुए बोली ये तोह दिखा मुझे मैं - भाभी अब ये तो आपका ही हैं जैसे चाहो देख लो भाभी उठी और उन्होंने मेरा लोअर निकल दिया जैसे ही मेरा लौड़ा बहार आया भाभी बोली - तेरा तो सुनील से बड़ा हैं मैं - मुझे क्या पता भाभी उनका छोटा हैं क्या भाभी - अरे इतना छोटा नहीं बस तेरे से थोड़ा छोटा हैं पर चोदता मस्त हैं मैं - भाभी मुझे भी सीखा दो चुदाई करना भाभी - अरे तुझे तो मैं बिलकुल परफेक्ट बना दूँगी और ये कह कर भाभी ने लौड़ा मूह मे ले लिया मैंने भी भाभी को पलटा और अपना मूह भाभी की चूत पर लगा दिया अब उन्होंने पैंटी उतरने मैं मेरी मदद की और हम दोनों एक दुसरे को मुँह से चुदाई का सुख दे रहे थे उन्होंने मुझे फिर अपनी जीभ का इस्तेमाल उनकी चूत पर करने को कहा और धीरे धीरे मैं उनके कहे अनुसार चूत चाटना सीख गया भाभी लौड़ा चूसने मैं पारंगत थी मैंने पुछा भाभी आपने ये भैया से सीखा या अपने जीजा से वो बोली दोनों से ये तीसरा लौड़ा हैं मैं - वाह भाभी, कमल का माल हो आप तो और दोनों ने एक दुसरे को चूस चाट कर माल निकल दिया मैंने भी भाभी का नमकीन पानी पूरा पी लिया और भाभी ने भी लौड़े का पानी जाया नहीं जाने दिया थोड़ी देर हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे। अब तक काफी समय जा चूका था भाभी ने देखा तो घडी मैं रात के दो बज रहे थे वो उठी और बोली बाकी कल मैंने भी कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई और भाभी को जाने दिया थोड़ी देर बाद मुझे नींद आ गयी |
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