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नेहा ने मेरी आँखों में देखकर पूछा —
“क्या तुम्हें पसंद है... या नहीं?”
मैंने सिर हिला दिया।
मैंने उसके बाल पकड़े... खींचकर अपने पास किया... और गहरा किस किया।
अपना लंड उसकी चूत में जोर से धकेल दिया।
जब किस खत्म हुआ... नेहा ने अंडरवियर को फिर से सूँघना शुरू कर दिया...
यहाँ तक कि उसके इंटीमेट हिस्से को चाटने लगी।
फिर बोली —
“तुम भी ट्राई करना चाहते हो?”
मैं कन्फ्यूज और उत्तेजित दोनों था।
वो मेरे लंड पर सवार थी... ऊपर-नीचे हो रही थी...
मुझे पता नहीं था क्या कहूँ।
रात... मेरे झड़ने के बाद खत्म हुई।
मैंने उसे तब तक चाटा... जब तक वो झड़ नहीं गई।
फिर हम सो गए।
लेकिन उस दिन के बाद... हमारे रोलप्ले... और गंदे हो गए।
नेहा अब... मेरे परिवार को... हमारे खेल में शामिल करना चाहती थी।
XXXXXXXXXXXXX
अगर हमारी स्टोरी एडवेंचर है तो उसमें ये सबसे ज़रूरी पड़ाव है।
अभी तक जो हमने किया — एक-दूसरे के साथ गंदी फैंटेसी, रोल प्ले — वो सब तो घर के अंदर, बंद कमरे में था।
लेकिन गोवा ट्रिप ने हमें कुछ नया एहसास करवाया।
हम सब फ्रेंड्स और फैमिली के साथ वेकेशन मनाने गोवा आए हुए थे। ज्यादातर दोस्त ऑफिस के थे। नेहा सबको अच्छे से जानती थी — उनकी फैमिली, उनकी वाइफ्स, सबको। वो उनके साथ भी अच्छी दोस्त बन चुकी थी। सब थोड़े खुले-मिले थे, साथ घूम रहे थे, बहुत
अच्छा टाइम चल रहा था।
डाइनिंग टेबल पर बैठे हुए बातें हो रही थीं।
नेहा ने अचानक कहा,
“हम एक दिन और रुकना चाहते हैं। क्या आप में से कोई और रुकना चाहता है?”
सबने एक साथ पूछा, “क्यों?”
नेहा ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया,
“मुझे स्कूबा डाइविंग करनी है गोवा के अंदर।”
सब एकदम से हँस पड़े।
विक्रम ने हँसते हुए कहा,
“अरे ये फालतू स्कूबा डाइविंग है यार! यहाँ कुछ नहीं होता। बस थोड़ा पानी में ले जाकर घुमाकर ला देते हैं। पैसे वेस्ट हैं।”
बाकी लोग भी हँस रहे थे और सहमत हो रहे थे।
नेहा ने मेरी तरफ देखा और फिर सबकी तरफ मुस्कुराकर बोली,
“मुझे तो करना है... तुम लोग मत आओ, कोई बात नहीं।”
विक्रम हँसते हुए बोला,
“अरे सब पागल बनाते हैं यार... बस थोड़े से पानी के अंदर ले जाकर घुमा देते हैं और बोलते हैं स्कूबा डाइविंग हो गई!”
बाकी लोग भी हँस रहे थे और सहमत हो रहे थे।
कोई भी इस स्कूबा डाइविंग वाले प्लान में शामिल नहीं होना चाहता था।
ऑलमोस्ट सबने एक-एक बार वो कर रखा था। सबको लगता था कि ये पैसे और टाइम दोनों का वेस्ट है।
नेहा भी अंदर से यही चाहती थी।
नेहा ने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा,
“ठीक है... कोई बात नहीं। तुम लोग मत आओ। मैं और सैम अकेले ही चले जाएँगे।”
नेहा ने मूवीज में कई बार स्कूबा डाइविंग देखी थी। उसको देखकर उसका बहुत मन था कि वो खुद भी स्कूबा डाइविंग करे।
वो बार-बार मुझे कहती थी, “सैम, मुझे स्कूबा डाइविंग करनी है... बहुत मजा आएगा।”
मुझे पानी से डर लगता था, लेकिन मैं नेहा को बहुत चाहता था।
उसकी ये छोटी-सी इच्छा पूरी करना चाहता था। इसलिए मैंने हाँ कर दी।
नेहा भी अंदर से यही चाहती थी कि बाकी सब लोग इस प्लान में शामिल न हों।
क्योंकि स्कूबा डाइविंग के लिए जो टाइट वेटसूट पहनना पड़ता है, वो उसके शरीर पर बहुत क्लोज़ फिट होता है।
उसके कर्व्स — कमर, बूब्स, जाँघें — सब कुछ साफ़ दिख जाते हैं।
नेहा नहीं चाहती थी कि मेरे दोस्त या उनकी वाइफ्स उसे उस सूट में देखें और कोई कमेंट करें।
वो हमारी प्राइवेट लाइफ को बहुत सीक्रेट रखना चाहती थी।
इसलिए जब विक्रम और बाकी लोग हँसकर मना कर रहे थे, नेहा अंदर से बहुत खुश थी।
मैंने एक ट्रैवल एजेंसी से स्कूबा डाइविंग का पैकेज बुक कर लिया।
उसमें स्कूबा डाइविंग के साथ-साथ चार-पाँच और वॉटर-बेस्ड एडवेंचर स्पोर्ट्स भी थे। गोवा में ये बहुत कॉमन था।
अगले दिन सुबह सात बजे एजेंसी की बस हमें लेने आ गई।
हम तीनों — मैं, नेहा और आर्यन — बस में चढ़ गए।
बस हमें बोट वाली जगह पर ले गई।
वहाँ से हम बोट में बैठे। बोट हमें 15-20 किलोमीटर अंदर समंदर में ले जाने वाली थी।
रास्ते में सीगल्स उड़ते दिख रहे थे, कभी-कभी डॉल्फिन्स भी पानी से बाहर कूदती दिख जाती थीं।
जब हम बोट पर चढ़े तो वहाँ पहले से ही काफी भीड़ थी।
कई कपल्स थे, कुछ कॉलेज के लड़कों का ग्रुप था, और कुछ अकेले लड़के भी थे।
एक लड़का — करीब 25-26 साल का, फेयर स्किन, अच्छी बॉडी — नेहा को बहुत घूर रहा था।
जैसे ही हम चढ़े, उसकी नज़र नेहा पर अटक गई। वो लगातार नेहा को देखे जा रहा था, नज़र हट ही नहीं रही थी।
बोट में सब सीटें टू-सीटर थीं।
मैंने अचानक फैसला किया कि मैं नेहा के साथ नहीं बैठूँगा।
मैंने नेहा को इशारा किया और उसके ठीक पीछे वाली सीट पर बैठ गया।
नेहा ने मेरी तरफ देखा।
मैंने उसे चुप रहने का इशारा किया और पीछे से बहुत धीरे से उसके कान में फुसफुसाया,
“क्या... ये खेल खेलना चाहती हो?”
नेहा ने मुस्कुराते हुए पीछे मेरी तरफ देखा और धीरे से पूछा,
“क्या?”
मैंने और करीब आकर फुसफुसाया,
“आज तुम शादीशुदा नहीं हो... देखते हैं क्या होता है।”
नेहा ने अचंभे से मेरी तरफ देखा और बोली,
“लेकिन... ये बिंदी और मंगलसूत्र... सबको पता चल जाएगा ना कि मैं शादीशुदा हूँ?”
मैंने मुस्कुराते हुए कहा,
“तो क्या हुआ? आज हम खेल रहे हैं ना...”
नेहा ने एक पल मेरी तरफ देखा, फिर आगे मुड़ गई।
उसके होंठों पर हल्की शरारती मुस्कान थी।
जब हम बोट पर चढ़े तो वहाँ पहले से ही काफी भीड़ थी।
कई कपल्स थे, कुछ कॉलेज के लड़कों का ग्रुप था, और कुछ अकेले लड़के भी थे।
एक लड़का — करीब 24 - 25 साल का, डार्क स्किन, साउथ इंडियन लुक, अच्छी हाइट और मजबूत बॉडी वाला — नेहा को बहुत घूर रहा था।
जैसे ही हम चढ़े, उसकी नज़र नेहा पर अटक गई। वो लगातार नेहा को देखे जा रहा था, नज़र हट ही नहीं रही थी।
बोट में सब सीटें टू-सीटर थीं।
मैंने अचानक फैसला किया कि मैं नेहा के साथ नहीं बैठूँगा।
मैंने नेहा को इशारा किया और उसके ठीक पीछे वाली सीट पर बैठ गया।
नेहा ने मेरी तरफ देखा।
मैंने उसे चुप रहने का इशारा किया और पीछे से बहुत धीरे से उसके कान में फुसफुसाया,
“क्या... ये खेल खेलना चाहती हो?”
नेहा ने मुस्कुराते हुए पीछे मेरी तरफ देखा और धीरे से पूछा,
“क्या?”
मैंने और करीब आकर फुसफुसाया,
“आज तुम शादीशुदा नहीं हो... देखते हैं क्या होता है।”
नेहा ने अचंभे से मेरी तरफ देखा और बोली,
“लेकिन... ये बिंदी और मंगलसूत्र... सबको पता चल जाएगा ना कि मैं शादीशुदा हूँ?”
मैंने मुस्कुराते हुए कहा,
“तो क्या हुआ? आज हम खेल रहे हैं ना...”
नेहा सीट पर बैठी हुई थी, और मैं उसके ठीक पीछे वाली सीट पर।
नेहा के पास वाली सीट खाली थी।
मैं मन ही मन सोच रहा था और दुआ कर रहा था कि वो डार्क स्किन वाला साउथ इंडियन लड़का, जो नेहा को घूर रहा था, शायद नेहा के पास आकर बैठ जाए।
और मेरी दुआ कबूल हो गई।
वो लड़का धीरे से आया और नेहा के पास वाली खाली सीट पर बैठ गया।
थोड़ी देर तो चुप रहा, फिर उसने हल्के से बात शुरू की।
मुझे पीछे से सब सुनाई दे रहा था।
लड़का: “आप कहाँ से हो?”
नेहा ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “मैं पुणे से हूँ।”
फिर नेहा ने पूछा, “तुम कहाँ से हो?”
लड़का: “मैं मैंगलोर से हूँ। मेरा नाम वेणु है। और आपका?”
नेहा: “नेहा।”
वेणु ने मुस्कुराते हुए कहा, “नेहा... बहुत सुंदर नाम है।”
नेहा ने हल्के से हँसकर कहा, “थैंक यू।”
नकी बातें धीरे-धीरे और खुलने लगीं।
नेहा ने मुस्कुराते हुए पूछा, “क्या तुम इस ग्रुप के साथ हो?”
उसने उन लड़कों का ग्रुप की तरफ इशारा किया
वेणु ने तुरंत सिर हिलाया, “नहीं-नहीं, मैं उस ग्रुप के साथ नहीं हूँ। मैं सोलो ट्रैवलर हूँ।”
नेहा ने हल्के से हँसकर कहा, “अच्छा... सोलो ट्रैवल? वेरी गुड। क्या तुम बहुत ज्यादा सोलो ट्रैवल करते हो?”
वेणु ने शर्माते हुए जवाब दिया, “नहीं... ये मेरा पहला सोलो ट्रैवल है।”
फिर उसने मुस्कुराकर आगे कहा,
“ट्रैवलिंग मेरी हॉबी नहीं है। मैं तो बस अपने पापा का बिजनेस देखता हूँ। अगले महीने मेरी शादी है, उसके बाद ये ट्रिप कहाँ हो पाएगी? तो सोचा, जिंदगी में एक बार अकेले घूमकर देख लूँ। इसलिए आ गया।”
उसने अपनी उँगली में चमकती एंगेजमेंट रिंग दिखाते हुए कहा, “मेरी सगाई हो चुकी है।”
नेहा ने हँसते हुए पूछा, “तो क्या तुम शादी से घबरा रहे हो?”
वेणु ने हल्के से सिर हिलाया और बोला,
“थोड़ा बहुत... डर तो लग रहा है।”
फिर उस लड़के (वेणु) ने नेहा की तरफ देखा और पूछा,
“आपके पति कहाँ हैं?”
उसने ये कहते हुए नेहा के गले में लटक रहे मंगलसूत्र को देखा, जो उसके बूब्स के ऊपर हल्के से झूल रहा था।
उसकी नज़र एक पल के लिए नेहा के सीने पर अटक गई।
वेणु ने मुस्कुराते हुए आगे कहा, “मैं देख रहा हूँ कि आप नई-नई शादीशुदा लग रही हैं।”
नेहा ने हल्के से मुस्कुराकर जवाब दिया,
“मेरे पति... उन्हें पानी से बहुत डर लगता है। वो इतना अंदर पानी में नहीं आना चाहते थे। स्कूबा डाइविंग तो उन्होंने सोची भी नहीं।
मैंने ट्रैवल वालों से कहा था कि कम से कम उन्हें साथ आने दें, लेकिन उन्होंने मना कर दिया... सीट्स लिमिटेड थीं।”
बोट का सफर करीब एक-डेढ़ घंटे का था।
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मैं पीछे वाली सीट पर बैठा था और सामने नेहा और वेणु दोनों बगल-बगल बैठे थे।
सीटें इतनी छोटी थीं कि दोनों के नंगे कंधे बार-बार एक-दूसरे से टच हो रहे थे।
वेणु कभी-कभी कोई जोक मारता और नेहा जोर से खिलखिलाकर हँस पड़ती। उसकी हँसी पूरी बोट में गूँज रही थी।
नेहा की जाँघें भी उसकी शॉर्ट्स के कारण वेणु की जाँघों से लगातार टच हो रही थीं।
वेणु का कद लंबा-चौड़ा था, डार्क स्किन, मजबूत बॉडी... वो नेहा के बिल्कुल करीब बैठा था।
हर बार जब बोट हिलती, दोनों के शरीर और सट जाते।
वेणु का डार्क हाथ कभी-कभी नेहा की गोरी जाँघ के पास से गुजरता।
मैं पीछे बैठा सब देख रहा था।
मेरे शरीर में गुसबम्प्स पड़ गए थे।
दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।
उस लड़के (वेणु) को अभी भी यकीन नहीं हो रहा था।
एक इतनी सुंदर, शादीशुदा लड़की उसके बगल में बैठी हुई थी और इतनी खुलकर उससे बातें कर रही थी।
वो बार-बार इधर-उधर देख रहा था — जैसे कहीं नेहा का पति आसपास बैठा हो और उसे देख न ले।
हर थोड़ी देर में उसकी नजर बोट में घूम जाती, फिर वापस नेहा पर आ जाती।
उसकी आँखों में हैरानी, खुशी और थोड़ा डर भी था।
नेहा को ये सब बहुत मज़ा आ रहा था।
वो जानबूझकर और खुलकर बातें कर रही थी, हँस रही थी, और कभी-कभी वेणु के कंधे से अपना कंधा हल्का सा टच कर लेती थी।
और यहाँ मैं ये सोच रहा था कि...
ये सब मैंने इतना जल्दी कैसे कह दिया नेहा को?
हमने तो पहले सिर्फ रोलप्ले में ही ऐसी फैंटेसी की थी — कई बार। लेकिन असल ज़िंदगी में ये मौका आएगा, ये हम दोनों को भी नहीं पता था। ये पूरी तरह अनप्लान्ड था।
बोट अब बीच समंदर में पहुँच चुकी थी, जहाँ स्कूबा डाइविंग होनी थी।
इंस्ट्रक्टर और उनके स्टाफ ने सबको इकट्ठा किया और एक-एक करके नियम समझाने लगे।
सब लोग ध्यान से सुन रहे थे। मैं भी पीछे से सुन रहा था।
नेहा ने भी एक-दो सवाल पूछे।
“ये सूट कैसे पहनेंगे?”
इंस्ट्रक्टर ने बताया, “ये वन-पीस सूट है। पैर डालिए, चेन ऊपर खींचिए, हाथ डालिए... ये आपके शरीर से पूरी तरह चिपक जाएगा। उसके बाद हेलमेट लगाएँगे और पानी में जाएँगे।”
नेहा ध्यान से सुन रही थी।
सूट काफी भारी था। इंस्ट्रक्टर ने एक-एक करके सबको सूट समझा दिया।
जो कपल्स थे, वो अपनी वाइफ को सूट पहनाने में मदद कर रहे थे। क्योंकि वो टाइट सूट था, अकेले पहनना मुश्किल था।
नेहा ने इधर-उधर देखा।
फिर उसने वेणु की तरफ मुड़कर बहुत सहजता से पूछा,
“क्या आप मेरी हेल्प करेंगे इस सूट पहनने में?”
वेणु एकदम से बहुत खुश हो गया।
उसके चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान आ गई।
सच में वो लड़का नेहा की उम्र का ही था।
दोनों एक कपल की तरह ही लग रहे थे।
वेणु ने तुरंत कहा, “हाँ... क्यों नहीं।”
नेहा ने मुस्कुराते हुए कहा, “थैंक यू।”
वेणु ने सूट उठाया और नेहा के सामने खड़ा हो गया।
नेहा ने व्हाइट कलर का टॉप और शॉर्ट स्कर्ट पहना हुआ था।
स्कूबा सूट कपड़ों के ऊपर से ही पहनना था।
वेणु ने सूट को नीचे से खोला और नेहा के पैरों के पास रख दिया।
नेहा ने एक-एक करके अपने पैर सूट में डाले।
वेणु धीरे-धीरे सूट को नेहा की जाँघों पर चढ़ाने लगा।
सूट बहुत टाइट था, इसलिए उसे नेहा की जाँघों को थोड़ा ऊपर उठाना पड़ रहा था।
उसके हाथ नेहा की गोरी जाँघों पर बार-बार लग रहे थे।
नेहा ने एक बार पीछे मेरी तरफ देखा... फिर वेणु की तरफ मुड़कर हल्के से बोली,
“ऊपर भी मदद कर दो... पीछे की चेन लगाने में दिक्कत हो रही है।”
वेणु ने नेहा को घुमाया।
अब नेहा उसकी तरफ़ पीठ करके खड़ी थी।
वेणु ने सूट को नेहा की पीठ पर चढ़ाया और पीछे वाली चेन धीरे-धीरे ऊपर खींचने लगा।
उसकी उँगलियाँ नेहा की पीठ पर घूम रही थीं
मैं सब देख रहा था।
वेणु ने झुककर सूट चढ़ाया तो उसकी नज़र नेहा की छोटी स्कर्ट के अंदर चली गई।
स्कर्ट बहुत छोटी थी। जब वो नीचे बैठा होगा, तो उसे नेहा की पैंटी भी साफ़ दिखी होगी।
एक पल के लिए वेणु का चेहरा नेहा की चूत के बहुत करीब था।
मुझे यकीन था कि उसे नेहा की गर्म, मीठी खुशबू आई होगी।
ये सब मेरे दिमाग में घूम रहा था।
सूट पहनते समय पास बैठे एक कपल ने देखा और जोर से बोला,
“अरे वाह! आपने तो सूट बहुत आसानी से पहन लिया। मेरा पति तो ये कर भी नहीं पा रहा। क्या आपके पति ने पहले भी ये सब किया हुआ है?”
नेहा मुस्कुराई और कुछ बोलने के लिए मुँह खोला।
वो शायद यही कहना चाह रही थी — “ये मेरा पति नहीं है।”
लेकिन अचानक वो रुक गई।
उसके दिमाग में तुरंत ख्याल आया —
अगर उसने ये कहा तो अगला सवाल तुरंत आएगा:
“अगर ये पति नहीं है तो आपके साथ इतना चिपककर क्यों खड़ा है? और सूट पहनाने में इतनी मदद क्यों कर रहा है? आपका पति कहाँ है?”
नेहा ने एक सेकंड में सब समझ लिया।
उसने मुस्कान को और चौड़ा किया और वेणु की तरफ इशारा करके बोली,
“हाँ... ये पहले भी कई बार कर चुका है। इसलिए आसानी से हो गया।”
आर्यन ने भी तुरंत नेहा का साथ देते हुए सिर हिला दिया।
मैं पीछे खड़ा था और सब देख रहा था।
नेहा ने झूठ बोल दिया था
और वेणु ने भी उसे कवर कर दिया था।
अब दोनों को लग रहा था कि वो एक कपल हैं।
सूट पहनकर सब लोग बारी-बारी पानी के अंदर गए।
नेहा करीब 15 मिनट पानी के नीचे रही। जब वो बाहर आई तो उसका चेहरा पूरी तरह चमक रहा था। उसकी मुस्कान बहुत बड़ी और ख़ुशी से भरी हुई थी।
मैं भी थोड़ी देर बाद बाहर निकला।
लेकिन जैसे ही नेहा बाहर आई, वो मेरे पास नहीं आई।
वो सीधे वेणु के पास गई।
वेणु पहले से ही बाहर खड़ा था। नेहा उसके सामने खड़ी हो गई और बहुत उत्साह से, थोड़ा तेज़ स्वर में बताने लगी — ताकि मैं भी सुन सकूँ।
“यार... अंदर का सीन देखने लायक था! नीला पानी, रंग-बिरंगी मछलियाँ, कोरल... बहुत ख़ूबसूरत था। मैं तो डर भी गई थी शुरू में, लेकिन एक बार नीचे गए तो सब भूल गई।”
नेहा का उस लड़के के साथ हँसते-खेलते घूमना अब मेरे लिए खेल से ज़्यादा मजबूरी बन चुका था।
एक-डेढ़ घंटे के अंदर आसपास के सब लोग नेहा और वेणु को कपल समझने लगे थे। वो दोनों इतना नैचुरली साथ घूम रहे थे कि किसी को शक भी नहीं हो रहा था।
अगर इस बीच नेहा अचानक मेरे पास आकर मुझसे बात करती, तो सबको अजीब लगता। इसलिए हम दोनों ने तय कर लिया था कि इस खेल को और आगे बढ़ाते हैं। हम देखना चाहते थे कि ये कहाँ तक जाता है।
उसके बाद कई वॉटर राइड्स हुईं।
जब पैरासेलिंग वाली राइड आई — जिसमें दो लोगों को साथ में पैराशूट से ऊपर हवा में छोड़ दिया जाता है — तो इंस्ट्रक्टर ने पूछा, “कौन-कौन जाना चाहता है?”
नेहा का उस लड़के के साथ हँसता-खेलता घूमना अब मेरे लिए खेल से ज़्यादा मजबूरी बन चुका था।
एक-डेढ़ घंटे के अंदर आसपास के सब लोग नेहा और वेणु को कपल समझने लगे थे। वो दोनों इतना नैचुरली साथ घूम रहे थे कि किसी को शक भी नहीं हो रहा था।
अगर इस बीच नेहा अचानक मेरे पास आकर मुझसे बात करती, तो सबको अजीब लगता।
इसलिए हम दोनों ने तय कर लिया था कि इस खेल को और आगे बढ़ाते हैं। हम देखना चाहते थे कि ये कहाँ तक जाता है।
उसके बाद कई वॉटर राइड्स हुईं।
जब पैरासेलिंग वाली राइड आई — जिसमें दो लोगों को साथ में पैराशूट से ऊपर हवा में छोड़ दिया जाता है — तो इंस्ट्रक्टर ने पूछा, “कौन-कौन जाना चाहता है?”
वेणु ने तुरंत नेहा की तरफ देखा।
नेहा ने भी वेणु की तरफ देखा।
दोनों की नज़र मिली और बिना कुछ कहे दोनों ने हाथ उठा दिया।
इंस्ट्रक्टर ने मुस्कुराते हुए कहा, “पर्फेक्ट कपल! आ जाओ।”
नेहा ने मेरी तरफ एक बार देखा... फिर वेणु के साथ पैरासेलिंग वाली जगह की तरफ चल दी।
मैं वहीं खड़ा रह गया।
अब नेहा और वेणु दोनों हार्नेस में बंधने वाले थे — एक-दूसरे के बहुत करीब, कंधे से कंधा, कमर से कमर सटाकर।
नेहा आगे थी और उसके ठीक पीछे वेणु।
दोनों को हार्नेस में अच्छे से बाँध दिया गया था।
वेणु का शरीर नेहा के बहुत करीब था। उसका क्रॉच नेहा की गांड के ठीक ऊपर था और उसका सीना लगभग नेहा के कंधों के बराबर था। दोनों पूरी तरह चिपक गए थे — पीठ से छाती, गांड से क्रॉच, सब कुछ सटा हुआ था।
पैराशूट के ऊपर जाते ही हवा में दोनों और भी ज़्यादा सट गए।
वेणु के हाथ नेहा की कमर के आसपास थे। हवा के झोंके के साथ दोनों का शरीर एक-दूसरे से बार-बार रगड़ खा रहा था।
मैं नीचे से सब कुछ देख रहा था।
नेहा के चेहरे पर मुस्कान थी, लेकिन उसकी आँखें बार-बार मेरी तरफ आ रही थीं। वेणु भी बहुत एक्साइटेड दिख रहा था।
जब वो ऊपर हवा में थे, मैंने देखा कि वेणु ने अपना सिर नेहा के कंधे की तरफ झुकाया और उसके कान के पास कुछ कहा।
नेहा हँस पड़ी।
मैं नीचे खड़ा था और उन्हें देख रहा था।
नेहा की कमर पर काला बेल्ट टाइट बँधा हुआ था, जिससे उसकी कमर और भी पतली दिख रही थी। उसके बूब्स सूट के अंदर से साफ़ उभरे हुए थे। वो बहुत आकर्षक लग रही थी।
वेणु का एक हाथ नेहा के कंधे पर था।
एक पल के लिए मुझे लगा कि वेणु का हाथ नेहा के बूब्स पर चला गया — लगभग ५ सेकंड तक।
नेहा ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी — न हटाया, न कुछ कहा। वो बस हँसती रही।
दोनों ऊपर हवा में ऐसे लग रहे थे जैसे कोई हनीमून कपल हो — बहुत क्लोज़, बहुत सहज, बहुत खुश।
मेरा दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था।
जब पैराशूट नीचे आ रहा था, तो नेहा और वेणु दोनों साथ में लैंडिंग कर रहे थे।
रोप खींचकर उन्हें बोट पर उतारा जा रहा था। जैसे ही उनके पैर बोट के फ्लोर पर पड़े, नेहा का बैलेंस बिगड़ गया। उसके पैर थोड़े काँप रहे थे और वो डगमगा गई।
मेरा पहला इंस्टिंक्ट था — उसे बचाना।
मैं तुरंत उठा और आगे बढ़ा, उसका हाथ पकड़ने के लिए।
नेहा ने मुझे देखा।
हमारे हाथ एक-दूसरे से मिले।
उसने मुस्कुराकर कहा — “आई एम ओके...”
लेकिन उसी पल एक और मजबूत हाथ आया और मेरे कलाई को पकड़ लिया।
वेणु था वो।
उसका हाथ बहुत सख्त और मज़बूत था। उसने मेरे हाथ को हिलाते हुए कहा —
“आई गॉट दिस ब्रो... थैंक्स।”
फिर वो नेहा की तरफ मुड़ा, उसकी कमर पर हल्का सा हाथ रखा और शरारती मुस्कान के साथ बोला —
“हनी... आर यू ओके?”
दोनों एक साथ हँस पड़े — जैसे कोई अंदर का जोक हो।
उसने मेरी आँखों के सामने मेरी बीवी से मेरा हाथ हटा लिया।
मैं उसकी गलती नहीं मानता, क्योंकि उसे लग रहा था कि मैं कोई अनजान हूँ जिसने एक लड़की को थामा और... उसने मेरा हाथ हटाकर फिर वो दोनों कोने में बैठ गए।
मैं उन्हें देख रहा था।
वो हँस रहे थे, खेल खेला रहे थे।
वो लड़का अब बार-बार मेरी तरफ देख रहा था क्योंकि उसे लग रहा था कि मैं उन दोनों को घूर रहा हूँ।
वो सच में मुझे शक की नज़र से देख रहा था।
नेहा बीच में बैठी थी, दोनों के बीच।
आर्यन का हाथ अब भी उसके कंधे पर था और वो कुछ कहकर नेहा को हँसा रहा था।
मैं बस खड़ा था, कुछ बोल नहीं पा रहा था।
मेरा दिमाग अभी भी उसी पल पर अटका हुआ था जब उसने मेरा हाथ हटाया था।
थोड़ी देर में बोट लैंड हो गई।
सब लोग हँसते-खेलते, मस्ती करते हुए बोट से उतर गए।
सबने मिलकर एक ग्रुप फोटो ली।
फोटो के बाद लोग अपने-अपने रास्ते चल दिए।
लेकिन नेहा अभी भी उस लड़के के साथ थी।
दोनों साथ-साथ चल रहे थे। नेहा हँस रही थी, वेणु भी कुछ कहकर उसे हँसा रहा था।
वो दोनों एक-दूसरे के बहुत करीब चल रहे थे — कंधे लगभग टच होते हुए।
मैं थोड़ी दूर पीछे-पीछे चल रहा था।
मैंने देखा कि नेहा और वो लड़का (वेणु) साथ में जा रहे थे।
बीच की रेत पर धीरे-धीरे चलते हुए, सामने कुछ शैक्स बने हुए थे जहाँ बियर सर्व हो रही थी।
दोनों बातें करते हुए, हँसते हुए उसी तरफ बढ़ गए और एक शैक पर जाकर बैठ गए।
वहाँ उन्होंने कुछ ऑर्डर किया।
मैं भी उनके पीछे-पीछे धीरे-धीरे चला गया।
वो लड़का मुझे बार-बार घूर रहा था, लेकिन मैंने कोई ध्यान नहीं दिया।
मैं उनके पीछे थोड़ी दूर पर एक टेबल ले ली और बैठ गया।
अब मैं उन्हें अच्छे से सुन और देख सकता था।
वेणु अब धीरे-धीरे फिजिकल हो रहा था।
दोनों बहुत करीब बैठे थे।
मैंने देखा कि उसका हाथ नेहा की जाँघ पर था और वो धीरे-धीरे उसे रगड़ रहा था।
उसकी उँगलियाँ नेहा की जाँघ के अंदरूनी हिस्से पर घूम रही थीं।
वो सच में अपने आप को नेहा का टेम्परेरी पति समझ रहा था।
उसकी नज़रें नेहा के चेहरे, सीने और जाँघों पर बार-बार जा रही थीं।
नेहा भी उसे रोक नहीं रही थी।
वो हँस रही थी, बातें कर रही थी, और कभी-कभी वेणु के कंधे पर हाथ रख देती थी।
वेणु ने अब और थोड़ा साहस दिखाते हुए नेहा की जाँघ को हल्के से दबाया।
नेहा ने हल्के से साँस छोड़ी, लेकिन मुस्कुराती रही।
मैं थोड़ी देर तक उन दोनों को बातें करते हुए देखता रहा।
फिर थोड़ी देर बाद वेणु उठा और वॉशरूम की तरफ चला गया।
जैसे ही वो अंदर चला गया, मैं तुरंत उठा और नेहा के पास भागकर पहुँच गया।
मैंने जल्दी से पूछा, “तुम ठीक हो?”
नेहा ने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ, मैं ठीक हूँ।”
मैंने फिर पूछा, “तो अब चलें या...?”
नेहा ने मेरी शक्ल की तरफ देखा और भौंहें थोड़ी ऊपर करके पूछा,
“क्या मतलब?”
उसकी आँखों में शरारत और थोड़ी हैरानी दोनों थी।
वो मेरी तरफ देख रही थी, जैसे मेरे दिमाग को पढ़ने की कोशिश कर रही हो।
थोड़ी देर और रुको, नेहा ने मेरी तरफ देखकर बोला, “जैसा तुम कहो।”
मैंने नेहा से कहा, “थोड़ी देर और रुको।”
नेहा ने मेरी तरफ देखा और बोली, “जैसे तुम कहो। अगर तुम्हें कोई प्रॉब्लम नहीं है, तो हम थोड़ी देर और रुक सकते हैं।”
मैंने हाँ में सिर हिलाते हुए कहा, “अगर ये सब सेफ है, तो कोई दिक्कत नहीं... हम थोड़ी देर और रुक सकते हैं।”
जैसे ही ये शब्द मेरे मुँह से निकले, मैंने अपने कंधे पर एक भारी हाथ महसूस किया।
एक सख्त, मज़बूत हाथ।
मैंने पीछे मुड़कर देखा — वेणु खड़ा था।
उसने एक झटके से मेरी शर्ट का कॉलर पकड़ लिया और मुझे खींचा। उसकी आँखों में गुस्सा था।
साउथ इंडियन एक्सेंट में गरजते हुए बोला,
“साले अंकल! बहुत देर से मैं तुझे देख रहा हूँ! तू मेरी बीवी की तरफ देख रहा है! तुझे शर्म नहीं आ रही कि यहाँ खुलेआम उसको छेड़ रहा है? अभी मुक्के मारूँगा और तेरा सर फोड़ दूँगा!”
नेहा एकदम से चौंक गई। उसका चेहरा सफेद पड़ गया।
वेणु का पकड़ बहुत ज़ोर का था।
मैं वहीं खड़ा था, कॉलर पकड़ा हुआ, और वेणु मुझे घूर रहा था।
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Bhai tumhari story mst superhit hai bs long update fia kro week mai 2-3 please. ....... Or jldi update krna kl kr sko toh or badhiya
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नेहा तुरंत बीच में आ गई।
“अरे प्लीज़ छोड़ो! छोड़ो! ये मेरे हसबैंड हैं! प्लीज़ छोड़ो!”
जैसे ही वेणु ने ये सुना, उसने तुरंत मेरा कॉलर छोड़ दिया।
उसके मुँह से निकला — “सॉरी...”
वो पूरी तरह कन्फ्यूज हो गया। उसकी नज़र पहले मेरे चेहरे पर, फिर नेहा पर, फिर दोबारा मेरे पर घूमने लगी।
नेहा बहुत ज़्यादा डर गई थी। उसने तुरंत मेरे पास आकर मेरा कॉलर ठीक किया और घबराए हुए स्वर में पूछा —
“सैम... तुम ठीक हो?”
मैंने सिर हिलाते हुए कहा, “हाँ... मैं ठीक हूँ।”
मैंने अपना कॉलर ठीक करते हुए गहरी साँस ली। सच में एक पल के लिए डर गया था।
हम तीनों एक दूसरे को देख रहे थे।
सिचुएशन थोड़ी अजीब थी, लेकिन अब थोड़ी नॉर्मल हो रही थी।
मैंने अपना हाथ वेणु की तरफ बढ़ाया और कहा,
“हेलो... आई एम सैम।”
वेणु ने भी अपना हाथ बढ़ाया और थोड़ा मुस्कुराते हुए कहा,
“वेल... आई एम वेणु।”
हम दोनों ने हाथ मिलाया।
दोनों मुस्कुराए।
वेणु ने थोड़ा शर्माते हुए कहा,
“सॉरी भाई... सच में सॉरी। मैंने सोचा कोई और है।”
मैंने हल्के से सिर हिलाया और बोला,
“कोई बात नहीं यार। तुमने वही किया जो कोई भी करना चाहिए था।”
हम तीनों वहीं खड़े थे।
वेणु ने मेरी तरफ देखा, फिर नेहा की तरफ देखा, फिर नेहा को बोला,
“आह... आई थिंक मुझे अब जाना चाहिए।”
दोनों मुस्कुराए।
मैंने वेणु की तरफ देखकर कहा,
“तुम्हें जल्दी है क्या? तुम्हें कहीं जाना है?”
वेणु ने थोड़ा शर्माते हुए कहा,
“नहीं... मुझे लगता है मैं आपको दोनों को अकेला छोड़ देना चाहिए। मैंने जो किया उसके लिए सॉरी हूँ।”
मैंने मुस्कुराकर कहा,
“इट्स ओके यार। तुम्हें नहीं पता था और तुमने वही किया जो तुम्हें करना चाहिए था — एक लड़की को प्रोटेक्ट किया जो दिन भर से तुम्हारे साथ थी। कम ऑन, जॉइन अस फॉर अ ड्रिंक।”
मैंने वेटर को इशारा किया और तीन ड्रिंक्स मँगवा लिए। हमने तीन तकीला शॉट्स ऑर्डर किए।
शॉट्स आ गए। हमने ग्लास उठाए, टकराए और बोला,
“चीयर्स..."
थोड़ी देर बाद हम तीनों अच्छे से घुल-मिल गए थे। नशा भी चढ़ने लगा था।
वेणु अपनी बातें करने लगा।
“मेरे पापा का ज्वेलरी का बिजनेस है मंगलौर में। मेरी शादी अगले महीने होने वाली है।”
उसने मोबाइल निकाला और अपनी वाइफ की फोटो दिखाई। लड़की देखने में अच्छी थी।
फिर वेणु ने कहा,
“सच में... मैं आज से पहले मंगलौर से बाहर कहीं नहीं गया था। ये मेरा पहला सोलो ट्रिप है। मुझे तो लगा था पूरा टाइम बोर होऊंगा। लेकिन आज पहली बार ऐसा लगा कि ट्रिप एंजॉय हो रही है।”
थोड़ी देर बाद वेणु धीरे-धीरे हमारे बारे में पूछने लगा।
वो नेहा की तरफ देखते हुए बोला,
“तुम लोग... जब तुम दोनों पूरी बोट पर साथ में थे, तो फिर ऐसा क्यों बोला कि ये तुम्हारे हसबैंड नहीं हैं?”
नेहा की तरफ देखे बिना, नेहा थोड़ा मुस्कुराई।
उसने जवाब नहीं दिया, शायद वो शर्मा रही थी।
नेहा ने मेरी तरफ देखा।
मैंने हल्के से मुस्कुराकर कहा,
“अरे कुछ नहीं यार... ये सिर्फ हमारा एक छोटा सा गेम था। हम देखना चाहते थे कि नेहा क्या अभी भी इतनी ही अट्रैक्टिव है जैसे वो शादी से पहले थी।”
नेहा मुस्कुरा दी।
फिर नेहा ने वेणु से पूछा,
“तो क्या लगता है तुम्हें?”
वेणु ने नेहा को देखकर कहा,
“अरे तुम... अगर मैं तुम्हारे बिंदी और मंगलसूत्र नहीं देखता तो मुझे लगता कि तुम शादीशुदा नहीं हो।”
नेहा हँस पड़ी।
वेणु भी हँसा और बोला,
“सच में... तुम बहुत यंग और खूबसूरत लग रही हो।”
वेणु ने शॉट का ग्लास रखा और थोड़ा झुककर बोला,
“अह... क्या तुम लोग उस तरीके के कपल हो?”
मैंने सीधे पूछा, “किस तरीके के कपल?”
वेणु ने शर्माते हुए गर्दन खुजाई और बोला,
“अरे... लो... तुमने कहानियों में नहीं पढ़ा?
मैं एक छोटी जगह मंगलौर में एक छोटी सी कम्युनिटी से बिलॉन्ग करता हूँ। मैं वहाँ से कभी बाहर नहीं निकला।
तो मैंने... मगर मैंने बहुत सारी ऐसी स्टोरीज पढ़ी हैं जिसमें हसबैंड-वाइफ होते हैं और कोई तीसरा लड़का होता है... अह... क्या कहते हैं उन स्टोरीज को, मुझे नहीं पता.... हॉटवाइफ स्टोरीज़? हसबैंड अपनी वाइफ को किसी और के साथ...”।”
उसने वाक्य अधूरा छोड़ दिया, लेकिन उसकी नजर साफ़ थी।
वेणु ने ये कहते हुए नेहा की तरफ देखा, फिर मेरी तरफ।
उसकी आँखों में शर्म और उत्सुकता दोनों थी।
नेहा ने हँसकर पूछा,
“अच्छा लगता है... तुमने बहुत सारी ऐसी स्टोरीज पढ़ी हैं...”
वेणु शर्माता हुआ मुस्कुराया और बोला,
“हाँ... मुझे ऐसी स्टोरीज अच्छी लगती हैं... पता नहीं क्यों।”
नेहा ने फिर हँसते हुए, मजाक में पूछा,
“अच्छा... और हॉट वाइफ्स कैसे लगती हैं?”
वेणु कुछ नहीं बोला।
वो बस चुप हो गया।
फिर उसने मेरी तरफ देखा।
उसकी आँखों में उम्मीद थी — जैसे वो जवाब चाह रहा हो, इस उम्मीद में कि हम वो वाला कपल निकलें।
मैंने वेणु की तरफ देखा और धीरे से कहा,
“नहीं... हमने ये... ये सब हमारे लिए भी नया है।
हमने भी आज तक ऐसा कभी कुछ नहीं सोचा था। बस एक थॉट था।”
मैंने नेहा की तरफ देखा और आगे बोला,
“जब तुम बोट पर चढ़े तो मैंने देखा था कि तुम बार-बार नेहा की तरफ देख रहे हो।
तो मैंने नेहा से कहा कि चलो... थोड़ी मस्ती करते हैं।”
वेणु ने एक पल चुप रहकर हमें दोनों को देखा।
णु हम दोनों को देख रहा था।
उसने एक शॉट ऑफ वोडका लिया, ग्लास को टेबल पर रखा और थोड़ी देर चुप रहा। फिर धीरे-धीरे बोला,
“सच बताऊँ... मैं घर से पहली बार अकेला बाहर निकला हूँ।
“मुझे अभी भी यकीन नहीं हो रहा कि ये मेरी किस्मत है... या कुछ और।”
फिर वो थोड़ा गंभीर हो गया और बोला,
“हमारा परिवार मंगलौर में काफी जाना-पहचाना है। पुराना धनी परिवार। सोने का बिजनेस। बचपन से मुझे बहुत सावधानी से रखा गया।
मम्मी-पापा हमेशा कहते थे — किसी को भी आसानी से मत अपना दोस्त बनाना।
कोई पैसे के लिए दोस्ती कर रहा होगा, कोई फायदा उठाने के लिए।
ज्यादातर मामलों में वो सही निकलते थे।”
नेहा ने वेणु की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए कहा,
“डोंट वरी... हम यहाँ किसी का फायदा उठाने के लिए नहीं आए हैं।
इन फैक्ट, हम दोनों जॉब करते हैं। ये हमारा पहला टाइम है कि हम कुछ ऐसा खेल खेल रहे हैं।
ये बस मस्ती है... और मैं तुम्हारी कंपनी एंजॉय कर रही हूँ।”
ये कहते हुए नेहा ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और वेणु के हाथ को हल्के से छू लिया।
उसका स्पर्श बहुत नरम और जानबूझकर था।
वेणु ने नेहा की आँखों में देखा। उसके चेहरे पर एक अलग सी चमक आ गई।
नेहा ने ये कहते हुए मेरी तरफ भी एक नज़र डाली — जैसे मुझे बता रही हो कि “देखो, मैं क्या कर रही हूँ”।
वेणु ने हम दोनों को देखा और शॉट का ग्लास रखते हुए पूछा,
“तो अब... next क्या है?”
नेहा ने मेरे जवाब देने से पहले ही तेज़ी से जवाब दे दिया।
“नथिंग...”
उसने वेणु के कंधे पर हल्का-सा थप्पड़ मारा और खिलखिलाकर हँस पड़ी।
“तुम लोग बहुत समझदार कपल लगते हो। मुझे भी ऐसी समझदारी वाली शादी मिले तो अच्छा रहेगा।”
हम दोनों मुस्कुरा दिए।
फिर हम तीनों वहाँ घंटों तक बातें करते रहे।
धीरे-धीरे शाम हो गई, फिर रात हो गई।
कोई भी वहाँ से उठने का नाम नहीं ले रहा था।
वेणु हमारी बातों में पूरी तरह खो गया था। वो बार-बार हँस रहा था और अपनी कहानियाँ सुना रहा था।
मैं चुपचाप बैठा दोनों को देख रहा था।
नेहा और वेणु के बीच छोटी-छोटी चीजें हो रही थीं —
हल्का-हल्का फ्लर्ट, हाथ का स्पर्श, कंधे से कंधा लगना, आँखों में आँखें डालकर हँसना।
ये सब देखकर मुझे अजीब सा मजा आ रहा था।
वो दोनों एक-दूसरे को छू रहे थे, लेकिन बहुत naturally, बहुत cute तरीके से।
हम तीनों बैठे थे... बातें कर रहे थे।
लेकिन असल में कोई भी नहीं जानता था कि आगे क्या करना है। कोई अगला कदम तय नहीं हो पा रहा था।
मैं नेहा से कम्युनिकेट करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन वो पूरी तरह व्यस्त थी।
जब वेणु वॉशरूम गया, तो मैंने तुरंत नेहा से धीरे से पूछा,
“अब क्या करें?”
नेहा ने बहुत casual तरीके से, बिना कोई घबराहट दिखाए जवाब दिया,
“जो तुम चाहो बेबी... मैं तो मस्ती कर रही हूँ।
ये मजा मेरे लिए काफी है... लेकिन जैसा तुम कहोगे वैसा ही होगा।”
उसने ये बात इतनी सहजता से कही कि मुझे और भी कन्फ्यूजन हो गया।
कभी-कभी नेहा को समझना बहुत मुश्किल हो जाता है।
कभी वो बहुत क्लियर होती है, कभी वो सिर्फ मेरे दिमाग के साथ खेलना चाहती है।
अब फैसला मेरे ऊपर था।
बोट पर जो अचानक “चलो थोड़ी मस्ती करते हैं” कह दिया था, वो तो बस एक पल की बात थी। नेहा ने भी तुरंत साथ दे दिया था।
लेकिन अब जब सोचने का समय मिला है, तो मैं कुछ भी डिसाइड नहीं कर पा रहा था।
दिमाग में सब कुछ घूम रहा था —
अनिश्चितता, लस्ट, डर, शर्म... और जितनी शराब पी थी, वो सब और बिगाड़ रही थी।
लेकिन मैं पूरी तरह नेहा को दोष नहीं दे सकता कि वो मुझे कुछ सजेस्ट नहीं कर रही।
क्योंकि मैं खुद भी किसी और जवाब के लिए तैयार नहीं था सिवाय “जैसा तुम चाहो” के।
मेरे दिमाग में सब कुछ घूम रहा था।
अगर नेहा अचानक कह दे — “चलो आज रात थ्रीसम करते हैं”... तो मैं क्या करूँगा?
सच में तैयार हूँ क्या मैं इसके लिए?
मुझे यकीन नहीं है।
टेबल पर जो हो रहा है, वो मुझे अच्छा लग रहा है।
पूरे दिन की अच्छी यादें, हँसी-मजाक, फ्लर्ट... सब कुछ।
लेकिन मेरा चूतिया दिमाग बार-बार और माँग रहा है।
अगर मैं खुद नेहा से कह दूँ — “चलो थ्रीसम करते हैं”... तो वो क्या रिएक्ट करेगी?
क्या वो सिर्फ मुझे टेस्ट कर रही है?
मुझे पता है वो कितनी मैनिपुलेटिव हो सकती है।
मैं नेहा को देख रहा था।
वो वेणु के आने का इंतज़ार कर रही थी, उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी।
थोड़ी देर बाद वेणु वापस आ गया। उसके हाथ में एक कार्ड था।
मुझे लगा कि उसने रात का पूरा बिल सेटल कर दिया है।
वो थोड़ा लड़खड़ा रहा था — शायद शराब का असर, या फिर शैक्स की रेत।
उसने मुस्कुराते हुए कहा,
“बहुत मज़ा आया ...”
मैंने बिल की तरफ देखा और तुरंत बोला,
“भाई... तुम्हें ये करने की ज़रूरत नहीं थी। हम बिल पे करते।”
वेणु ने हम दोनों को देखा, एक पल सोचा, फिर बोला,
“नहीं यार... ये मेरी तरफ से ट्रीट है।
आज तुम लोगों ने मेरा दिन बना दिया।
शादी के बाद मैं इस दिन को हमेशा याद रखूँगा... अपनी आखिरी आज़ादी के दिन के रूप में।”
उसने नेहा की तरफ देखकर wink मारा — जैसे कोई अंदर का जोक हो।
नेहा हँस पड़ी।
दोनों एक साथ हँसने लगे।
वेणु ने अपना सामान समेटना शुरू किया, जैसे वो जाने की तैयारी कर रहा हो।
लेकिन अचानक रुक गया।
कुछ सोच रहा था।
वेणु ने हम दोनों को देखा।
उसका चेहरा थोड़ा गंभीर हो गया। वो थोड़ा झिझक रहा था, लेकिन फिर बोला,
“प्लीज़... मैं तुमसे एक बात पूछना चाहता हूँ।
अगर तुम्हें बुरा लगे तो प्लीज़ माइंड मत करना... मैं माफ़ी माँगता हूँ पहले से।
प्लीज़...”
नेहा ने हल्के से हँसते हुए कहा,
“अरे dude... वेणु बोल ना।
इतनी भारी-भरकम भूमिका क्यों बना रहा है?”
“मैं तुम लोगों को एक और कहानी सुनाता हूँ...”
“मेरा एक दोस्त गोवा गया था। वहाँ उसे एक लड़की मिली, ठीक इसी तरह की सेटिंग में। बहुत सेक्सी लड़की थी। दिन भर एडवेंचर स्पोर्ट्स किए, क्लब में डांस किया, हँसी-मजाक किया...”
उसने मोबाइल निकाला और हमें कुछ फोटोज़ दिखाईं — लड़की एडवेंचर स्पोर्ट्स में, क्लब में डांस करते हुए, दोनों साथ में हँसते हुए।
वेणु आगे बोला,
“मेरा दोस्त सोच रहा था कि आज उसकी किस्मत खुल गई। रात को उसने लड़की से पूछा कि क्या वो बेडरूम तक फन एक्सटेंड करना चाहेगी।
लड़की ने सीधे कहा — ‘फन तो कर सकते हो, लेकिन वो 20 हज़ार का पड़ेगा।’
दोस्त तैयार हो गया।
पूरी रात उसने उसे चोदा।
सुबह जब उसने पूछा कि ‘तुमने पूरे दिन कोई संकेत तक नहीं दिया कि ये पैसे वाला खेल है’, तो लड़की हँसकर बोली —
‘पूरे दिन तुमने लंच, ड्रिंक्स, राइड्स... सब पे पैसे खर्च किए। मैंने सोचा दिन का बिल तुम दे रहे हो, तो रात का मजा मैं दे दूँ। रात का फन तो बस बोनस था।’”
वेणु ने गहरी साँस ली और बोला,
“मैं 100 प्रतिशत यकीन रखता हूँ कि तुम दोनों ऐसे नहीं हो...
लेकिन मेरे दिमाग में ये सवाल बार-बार घूम रहा है।
अगर मैंने ये नहीं पूछा तो मुझे हमेशा अफसोस रहेगा।
मैं जानता हूँ ये पूछना बिल्कुल भी उचित नहीं है...
फिर भी... अगर मेरे पास कोई चांस है तो मैं लेना चाहता हूँ।”
उसने नेहा को सीधे देखते हुए कहा,
“बट इफ आई हैव एनी चांस टू प्ले विद योर ब्यूटीफुल वाइफ...
तो मैं वो चांस लेना चाहता हूँ।”
वेणु ने ये बात इतनी बोल्ड तरीके से कही कि टेबल पर सन्नाटा छा गया।
उसने आगे कहा,
“तुम सोच सकते हो कि क्या सस्ता आदमी है...
लेकिन सच बोल रहा हूँ — नेहा इतनी हॉट है कि मैं कंट्रोल नहीं कर पा रहा।
अगर तुम लोग पेड फन में हो... तो मैं तैयार हूँ।
जितना भी चार्ज करो... मैं देने को तैयार हूँ।”
नेहा के चेहरे पर कोई भाव नहीं था। बिल्कुल blank।
मेरा पहला इंस्टिंक्ट गुस्सा था।
ये लड़का हमसे पैसे देकर रात बिताना चाहता है?
मेरी खूबसूरत बीवी को प्रॉस्टिट्यूट समझ रहा है?
और मुझे पिंप?
जो नये लड़कों के सामने पति बनकर प्रेटेंड करता है?
मेरे दिमाग में तस्वीर घूम गई —
ये सोच रहा होगा कि “किसी भाभी को वेकेशन पर पटाना, उसके साथ रात बिताना, उसे चोदना, फिर वो बताए कि तू उसके पति से कहीं बेहतर है।”
ये typical boys वाली फैंटसी है।
मेरा खून खौल रहा था, लेकिन मैं चुप रहा।
नेहा अभी भी कुछ नहीं बोल रही थी।
वेणु हम दोनों को देख रहा था।
उसकी आँखों में उम्मीद, डर और शर्म तीनों थे। वो हमारे जवाब और रिएक्शन का इंतज़ार कर रहा था।
मैं अंदर से उबल रहा था।
मेरा दिमाग बार-बार एक ही बात दोहरा रहा था — “इसके सिर पर मुक्का मार दूँ?”
लेकिन फिर मुझे उसकी शुरुआती बात याद आई —
“मैं 100 प्रतिशत यकीन रखता हूँ कि तुम दोनों ऐसे नहीं हो... लेकिन मेरे दिमाग में ये सवाल बार-बार घूम रहा है।”
अगर मैं उसकी जगह होता... तो शायद मैं भी यही पूछता।
ये किसी के लिए भी लाइफटाइम की स्टोरी बन सकती है।
अचानक नेहा ज़ोर से हँस पड़ी।
“नो नो नो... हम किसी भी तरह के पेड फन में नहीं हैं।”
उसने बहुत casually कहा, जैसे कोई मामूली बात हो।
वेणु ने राहत की साँस ली।
उसका चेहरा तुरंत ढीला पड़ गया। वो शर्म से बोला
“सॉरी सॉरी... प्लीज़ भूल जाओ कि मैंने ऐसा कुछ पूछा भी था।”
वेणु ने हम दोनों को आखिरी बार देखा और धीरे से बोला,
“ये रात मैं अपनी ज़िंदगी भर याद रखूँगा।”
फिर वो मुड़ा और जाने लगा।
मैं सोच रहा था — बस... रात खत्म हो गई।
लेकिन मेरा चूतिया दिमाग कुछ और ही चाह रहा था।
मैं नहीं जानता था कि वो क्या चाहता है, लेकिन ये खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था।
जब वेणु कुछ कदम आगे बढ़ गया, तो अचानक मेरे मुँह से निकल गया —
“हे... वेणु!”
वो रुक गया और मुड़कर देखा।
नेहा भी मेरी तरफ़ देख रही थी, उसकी आँखों में सवाल था — “अब क्या?”
मैं खुद नहीं जानता था कि मैंने उसे क्यों रोका।
बोट पर जब लोग उन्हें कपल समझ रहे थे, तब मुझे जलन हो रही थी।
लेकिन अब... जब वो जा रहा था, तो मुझे अचानक लगा कि मैं और कुछ पल उसके साथ नेहा को देखना चाहता हूँ।
वेणु वापस आया और थोड़ा confused होकर बोला,
“हाँ भाई... क्या हुआ?”
मैंने हिचकिचाते हुए कहा,
“थके हुए हो क्या?”
वेणु ने तुरंत उत्साह से सिर हिलाया,
“नहीं यार, बिल्कुल नहीं! अभी तो बहुत एनर्जी है।”
मैं सोच रहा था... और बोल रहा था।
दिमाग में सब कुछ एक साथ घूम रहा था।
क्या मैं तैयार हूँ?
तैयार किसके लिए?
कितनी दूर तक?
नेहा क्या सोचेगी अगर मैं हाँ कह दूँ?
या मैं खुद तैयार हूँ?
रोलप्ले में या जब मैं अकेला हाथ चलाता हूँ तब तो सब आसान लगता है...
लेकिन असल में, अपनी बीवी को किसी और के साथ देखने के लिए... क्या मैं सच में तैयार हूँ?
सब कुछ दिमाग में कैलकुलेट हो रहा था — जलन, लस्ट, डर, उत्तेजना... सब मिला हुआ।
और फिर मेरे मुँह से निकल गया,
“तुम जानते हो... हमारा होटल पास ही है।
अगर तुम्हें मर्ज़ी हो तो... हम रूम में कुछ बीयर पी सकते हैं।”
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gaya kaam se..
ab neha ise achhe se fayda uthaegi..
pls continue bro
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जैसे ही मैंने पूछा कि हम रूम में बीयर पी सकते हैं, वेणु तुरंत उत्साह से बोला,
“यस... यस... यस... हम तुम्हारे रूम जा सकते हैं!”
शायद उसने पहले कभी इतनी जल्दी कोई फैसला नहीं लिया होगा।
उसके चेहरे पर खुशी साफ़ झलक रही थी।
हमने टेबल से अपना सामान उठाया — पर्स, फोन, चश्मा — और चल पड़े।
नेहा मेरी तरफ देख रही थी।
उसकी आँखों में सवाल था — वो जानना चाहती थी कि मेरे दिमाग में क्या चल रहा है।
सच कहूँ तो मुझे खुद भी नहीं पता था कि मेरे दिमाग में क्या चल रहा है।
हम तीनों धीरे-धीरे होटल की तरफ चलने लगे।
नेहा बीच-बीच में बातें कर रही थी। वो इशारा करके बोली,
“वो बिल्डिंग देख रहे हो ना? उसके जस्ट पास में ही हमारा होटल है।”
वेणु ने हाँ में सिर हिलाया और बोला, “अच्छा... बहुत पास है तो।”
नेहा हँसते हुए बोली, “हाँ, बस दो मिनट की वॉक है।”
मैं दोनों के पीछे चल रहा था।
हम तीनों शैक से निकलकर धीरे-धीरे होटल की तरफ चल रहे थे।
रेत पर हमारे कदम धीमे थे। हम आपस में बातें कर रहे थे, लेकिन असल में हम तीनों ही सोच रहे थे कि अब क्या बात करें। माहौल थोड़ा awkward हो गया था।
अचानक नेहा ने वेणु से पूछा,
“अच्छा... तो वो जो लड़की तुम्हारे दोस्त के साथ थी, उसने कोई कॉन्टैक्ट नहीं दिया था तुम्हारे दोस्त को?
अह... वो पता तो तुम भी उसमें से मिल सकते थे।”
वेणु थोड़ा शर्मा गया। उसने गर्दन खुजाई और बोला,
“नहीं यार... उसने नंबर दिया था, लेकिन वो नंबर लग ही नहीं रहा था। शायद फेक था।”
नेहा हँस पड़ी और बोली,
“तो वो तो पूरा दिन तुम्हारे दोस्त से फ्री में मस्ती करवाकर निकल गई।”
वेणु भी हँसा और बोला,
“हाँ... बस यही तो बात है। दिन भर खाना-पीना सब वो करवा रही थी, और रात को बस एक बार... और फिर गायब।”
नेहा ने वेणु से पूछा,
“तुम गोवा में कितने दिन से हो?”
वेणु ने जवाब दिया,
“4 दिन से।”
नेहा ने मुस्कुराते हुए आगे पूछा,
“ओह... तो उस लड़की के अलावा कोई और लड़की नहीं मिली?”
वेणु ने शर्माते हुए सिर हिलाया और बोला,
“नहीं यार... मैं इस मामले में बहुत कमज़ोर हूँ।
रात को पार्टी में जाता था, कुछ लड़कियाँ ऐसी लगती थीं... तुम जानती हो, पेड वाली टाइप।
लेकिन मैं पूछने में बहुत शर्माता था। डर भी लगता था।
क्या पता वो पेड वाली न हो और मुझे प्रॉस्टिट्यूट कहकर सीन बना दे।”
मैंने बस “हम्म...” कह दिया।
वेणु आगे बोला,
“ऑनलाइन भी कुछ नंबर्स देखे थे, लेकिन सब स्कैम लग रहे थे।”
नेहा ने हल्के से हँसते हुए कहा,
“तो तुम तो बिल्कुल सेफ प्लेयर हो।”
वेणु ने नेहा की तरफ देखकर शरारती मुस्कान दी
नेहा ने वेणु की तरफ देखकर पूछा,
“तो फिर तुम सिर्फ पेड वाली लड़कियों को ही क्यों ढूंढ रहे हो?”
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वेणु ने शर्माते हुए मुस्कुराया और बोला,
“मैं कॉन्फिडेंट ही नहीं हूँ कि कुछ दिनों में किसी लड़की को अपना बना पाऊँ।
मैंने अपनी लाइफ में कभी किसी लड़की के साथ कुछ किया ही नहीं है।
न कभी गर्लफ्रेंड रही है, न कुछ।”
उसने नेहा की तरफ देखते हुए आगे कहा
“ओह... पूअर बेबी...”
फिर वो वेणु के पास गई और उसके बालों को धीरे से संवारते हुए बोली,
“बहुत अच्छे हो तुम... बहुत हैंडसम भी हो।”
वेणु ने नेहा की तरफ देखा और एकदम से शर्मा गया। उसके गाल लाल हो गए।
नेहा ने उसके बालों को और अच्छे से सेट करते हुए मुस्कुराते हुए कहा,
“इतना अच्छा लड़का है, फिर भी किसी लड़की को नहीं पटा पाया... ये तो गलत बात है।”
हम तीनों चलते-चलते होटल की तरफ बढ़ रहे थे।
नेहा ने वेणु के बालों में हाथ फेरा — ठीक वैसे जैसे कोई अपने छोटे भाई को शाबाशी देता है।
वेणु की नज़रें पूरी तरह नेहा पर टिकी हुई थीं। वो बार-बार नेहा के चेहरे को देख रहा था, कभी उसके बूब्स को, कभी कमर को, कभी नाभि को।
मैं उसे देख रहा था।
मैं समझ रहा था कि उसके दिमाग में क्या चल रहा है।
उसके दिमाग में यही घूम रहा होगा कि होटल में जाने के बाद क्या होगा।
और ये मेरे दिमाग में भी चल रहा था।
शायद नेहा भी यही सोच रही थी।
अभी हम तीनों को कुछ नहीं पता था।
हम ब्लाइंड थे।
नेहा ने अचंभे से वेणु की तरफ देखा।
“सच में तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं थी? तुम तो शायद २7 साल के हो...”
वेणु ने तुरंत करेक्ट किया,
“25...”
नेहा ने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा,
“अच्छा... तो अभी तक तुमने गर्लफ्रेंड नहीं बनाई? मतलब... अह... तुम... वर्जिन हो?”
वेणु थोड़ा सा मुस्कुराया और शर्माते हुए बोला,
“गर्लफ्रेंड नहीं रही... तो ये सब किसके साथ करूँ? ऑफकोर्स मैं वर्जिन हूँ।”
नेहा ने अचंभे से मेरी तरफ देखा।
उसकी आँखें थोड़ी बड़ी हो गई थीं।
मैं भी थोड़ा हैरान था।
हम होटल के गेट पर पहुँचने वाले थे। वेणु अभी भी अपनी बातें जारी रखे हुए था।
“मेरे दोस्तों ने मुझे बहुत डरा दिया था। वो मुझे चिढ़ाते थे कि ‘अगर तुझे पता नहीं कि ये सब कैसे करना है, तो तेरी बीवी को तू कैसे करेगा?’”
वेणु ने हल्के से हँसते हुए आगे कहा,
“उन्होंने मुझे इतना चिढ़ाया कि मैंने सोचा शादी से पहले कुछ न कुछ करके आऊँ। कम से कम ये तो जान लूँ कि होता क्या है।
कम से कम अपनी बीवी के सामने इतना शर्मिंदा ना होऊँ।”
नेहा ने उसे ध्यान से सुनते हुए कहा, “तो ये सारा गोवा ट्रिप... सिर्फ ये सीखने के लिए था?”
वेणु ने शर्माते हुए सिर हिलाया, “हाँ... कुछ तो सीख लेता।”
नेहा ने मेरी तरफ देखा, फिर वेणु की तरफ मुस्कुराते हुए बोली,
“तो तुम तो बहुत सीरियस प्लानिंग करके आए थे।”
वेणु ने हँसकर कहा, “प्लानिंग तो थी... लेकिन ये प्लान नहीं था कि मैं तुम दोनों से मिल जाऊँगा।”
हम गेट पार करके लॉबी में आ गए थे।
लिफ्ट की तरफ बढ़ते हुए वेणु ने नेहा की तरफ देखा और धीरे से कहा,
“अब तो लग रहा है कि किस्मत अच्छी थी।”
हम तीनों होटल के रूम में पहुँच गए।
नेहा ने फ्रिज से तीन ठंडी बीयर की बोतलें निकालीं।
मैं और वेणु एक बड़े सोफे पर बैठ गए थे, और नेहा सिंगल सीटर सोफे पर बैठ गई।
हमने बीयर की बोतलें खोलीं। इतनी देर वॉक करने के बाद थकान कुछ हद तक उतर गई थी।
पहली बोतल हमने एक-एक करके पीना शुरू किया।
थोड़ी देर बाद नेहा ने टीवी ऑन किया और बॉलीवुड म्यूजिक लगा दिया। धीमा, सॉफ्ट वाला म्यूजिक था — वो वाला जो डांस के लिए भी ठीक लगता है।
वेणु ने बीयर का घूँट लिया और बोला, “म्यूजिक अच्छा है।”
हमारी पहली बोतलें खत्म होने वाली थीं।
नेहा अचानक उठी, मेरे पास आई, म्यूजिक पर हल्के-हल्के थिरकते हुए मेरा हाथ पकड़ा और बोली,
“चलो... डांस करो।”
मैं उठ गया और नेहा के पास आ गया। हम दोनों धीरे-धीरे डांस करने लगे — हल्के-हल्के, अच्छे से, म्यूजिक के साथ।
वेणु सोफे पर बैठा हमें देख रहा था। उसकी नज़रें हम दोनों पर थीं।
नेहा मेरे साथ डांस करते हुए हँस रही थी, उसके हाथ मेरे कंधे पर थे। मैं उसकी कमर पर हाथ रखे हुए था।
म्यूजिक धीमा और रोमांटिक था, जिसकी वजह से हम दोनों बहुत क्लोज़ हो गए थे।
थोड़ी देर हम लोग डांस कर रहे थे, बिल्कुल चिपक-चिपक के।
नेहा मेरे सीने से सटी हुई थी, उसके हाथ मेरे कंधे पर थे, मेरे हाथ उसकी कमर पर। हम दोनों बार-बार वेणु की तरफ देखकर मुस्कुरा रहे थे।
फिर नेहा ने मुझे खींचते हुए सोफे की तरफ ले आई।
हम तीनों अब एक ही थ्री सीटर सोफे पर थे।
मैं और वेणु दोनों किनारों पर बैठे थे और नेहा हमारे बीच में बैठ गई।
थोड़ी देर डांस करने के बाद नेहा हाँफ रही थी।
उसकी साँसें तेज़ थीं। उसका सीना ऊपर-नीचे हो रहा था और उसकी आँखें थोड़ी नशे में चढ़ी हुई थीं।
अचानक नेहा ने मेरे सिर को दोनों हाथों से पकड़ लिया।
एकदम से वो मेरे मुँह के पास आ गई और मुझे जोरदार किस करने लगी।
बहुत गहरी, बहुत जोरदार किस।
उसकी जीभ मेरे मुँह में घुस गई थी और वो बिल्कुल बेसब्री से किस कर रही थी।
वो किस करते-करते लगभग मेरे ऊपर चढ़ गई थी।
उसके शरीर का वज़न मुझ पर था और वो पूरी तरह मुझे चूस रही थी।
मुझे लग रहा था कि वो वेणु को दिखाना चाहती है कि किस करते हैं।
वो जानबूझकर बहुत लाउड और गंदा किस कर रही थी।
वेणु अब थोड़ा और करीब आ चुका था।
वो सोफे पर हमारे बहुत पास बैठ गया था और हमें घूर रहा था।
नेहा पूरी तरह किस में व्यस्त थी, लेकिन मेरा ध्यान वेणु पर भी था।
अचानक मैंने देखा —
वेणु का हाथ धीरे-धीरे आगे बढ़ा और नेहा की जाँघ पर रख गया।
उसकी हथेली नेहा की जाँघ पर थी, ठीक सूट के ऊपर।
वो हल्के से दबा रहा था, लेकिन अभी कुछ ज़्यादा नहीं कर रहा था।
नेहा ने किस नहीं रोका।
वो अभी भी मेरे मुँह को चूस रही थी, लेकिन उसकी साँसें और तेज़ हो गई थीं।
मैं पूरे दिन से नोटिस कर रहा था।
वेणु की नज़र बार-बार नेहा की जाँघों पर जा रही थी।
हर बार जब नेहा चलती, बैठती, या डांस करती, उसकी आँखें नेहा की जाँघों पर अटक जाती थीं।
हर आदमी की कोई न कोई फेवरेट बॉडी पार्ट होती है।
मुझे अपने दोस्तों से पता था — कुछ लड़कियों के बूब्स पसंद करते हैं, कुछ गांड, कुछ कमर।
मेरे ग्रुप में भी मेरी बहन के बारे में बातें होती थीं। एक दोस्त तो हमेशा कहता था — “तेरी बहन की तंदूरी टाँगें... यार, पूरे दिन इन्हें चाटता रहूँ।”
आज वेणु की नज़रें ठीक उसी तरह नेहा की जाँघों पर थीं।
मैं पूरे दिन से नोटिस कर रहा था।
जब वो दोनों कपल बनकर घूम रहे थे, तब भी वेणु के हाथ बार-बार नेहा की जाँघों पर चले जाते थे।
रगड़ना, छूना, हल्के से दबाना — ये सब spontaneously हो रहा था।
लेकिन अब... रूम में, सोफे पर उसकी हथेली अब नेहा की जाँघ की पूरी लंबाई पर घूम रही थी — नीचे से ऊपर तक, धीरे-धीरे, लगातार।
वो जाँघ को अच्छे से महसूस कर रहा था, उसके नरम गोरे मांस को दबा रहा था, उँगलियों से सहला रहा था।
उसका हाथ अब खुलकर नेहा की जाँघों पर था। पहले वो हिचकिचा रहा था, लेकिन अब वो बेझिझक नेहा की सफेद दूधिया जाँघों को सहला रहा था। उँगलियाँ जाँघ के अंदरूनी हिस्से की तरफ बढ़ रही थीं, धीरे-धीरे रगड़ रही थीं।
वेणु पहले तो हिचकिचा रहा था।
जब उसे पता चला कि मैं नेहा का पति हूँ, तब उसके हाथ नेहा की जाँघ पर रुक-रुककर जा रहे थे।
लेकिन अब... अब वो सोच रहा था कि नेहा का कोई विरोध नहीं है, ये फ्री सिग्नल है।
और शायद ये सच में फ्री सिग्नल था।
हा ने किस तोड़ा।
वो हाँफ रही थी, साँसें तेज़ थीं। उसने मेरी आँखों में देखा और मुस्कुराई।
फिर उसने नीचे देखा — वेणु का हाथ उसकी सफेद दूधिया जाँघों पर था।
नेहा ने हल्के से हँसते हुए वेणु से कहा,
“तुम इतने भी शरीफ नहीं हो जितने दिखते हो...”
नेहा अभी भी मेरे ऊपर थी।
उसने अचानक अपना शरीर आगे झुकाया, वेणु के चेहरे के बहुत करीब गई और उसके बालों को दोनों हाथों से पकड़ लिया।
वेणु की साँसें रुक गईं।
मेरा दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था।
मैं पहली बार अपनी बीवी को किसी और आदमी को किस करते हुए देखने वाला था — मेरे सामने, इतने करीब।
रे सामने... अजीब सा एहसास था।
मैं देख रहा था...
नेहा ने वेणु के चेहरे के पास अपना मुँह ले जाया।
दोनों के होंठ मिल गए।
वेणु ने पहले थोड़ा हिचकिचाते हुए किस करने की कोशिश की — अनाड़ी तरीके से, जैसे वो सच में कभी किसी को किस नहीं कर चुका हो।
किस ज्यादा prominent नहीं लग रहा था।
होंठ बस कुछ पलों के लिए मिले रहे।
फिर नेहा ने अपना चेहरा पीछे हटा लिया और हँस पड़ी।
वो हँसते हुए बोली,
“वो सही कह रहा था... उसने कभी किसी को किस नहीं किया... उसे किस करना नहीं आता।”
नेहा ने वेणु को एक बार फिर ध्यान से देखा।
इस बार उसकी नज़र पहले से ज़्यादा गहरी थी।
फिर वो मेरी तरफ मुड़ी, मेरे ऊपर झुक गई और धीरे-धीरे मुझे किस करना शुरू कर दिया।
ये किस पहले वाले से अलग था।
वो धीमा, स्लो मोशन में किस कर रही थी — जैसे वेणु को दिखा रही हो कि सही तरीके से किस कैसे करते हैं।
उसने पहले मेरे होंठों को चूमा, फिर अपनी जीभ मेरे मुँह में डाली, धीरे-धीरे घुमाई।
मैं भी उसके साथ लिपटा, अपने होंठ और जीभ से जवाब दे रहा था — लेकिन धीरे-धीरे, ताकि वेणु देख सके।
नेहा मुझे इस्तेमाल कर रही थी — जैसे मैं डमी हूँ।
वो वेणु को सिखा रही थी कि किस कैसे करना है... जो आगे जाकर मेरी ही बीवी को किस करेगा।
किस लगभग 5 मिनट तक चला।
नेहा मेरे ऊपर चढ़ी हुई थी और मुझे पैशन से किस कर रही थी।
उसके होंठ मेरे होंठों पर थे, जीभ मेरे मुँह में घूम रही थी।
मैं पहली बार अपनी बीवी के मुँह से दूसरे आदमी का स्वाद चख रहा था।
ये एहसास बहुत अजीब, बहुत गहरा और बहुत उत्तेजक था।
फिर नेहा ने किस तोड़ा।
वो हाँफ रही थी। उसने मेरी आँखों में देखा, मुस्कुराई, और फिर वेणु की तरफ मुड़ी।
इस बार उसने सिर नहीं झुकाया।
वो सीधे वेणु के ऊपर चढ़ गई — ठीक वैसे जैसे मेरे ऊपर चढ़ी थी।
उसके बूब्स वेणु की छाती से दब गए।
नेहा ने वेणु को धीरे-धीरे किस करना शुरू किया।
वो मुझे दिखा रही थी — जैसे मैं डमी हूँ।
पहले होंठों पर, फिर धीरे से जीभ, ठीक वैसी ही स्पीड और स्टाइल में जैसा मैंने उसे किस किया था।
वेणु तेज़ सीखने वाला निकला।
वो अब ठीक उसी तरह किस कर रहा था — जैसा मैंने नेहा को किया था।
वो भी धीरे-धीरे, गहराई से, जीभ का इस्तेमाल करते हुए।
ये मेरी ज़िंदगी में पहली बार था।
ये सपने जैसा लग रहा था।
मैंने कितनी बार इस पल की कल्पना की थी।
कितनी बार सोचा था कि अगर मैं अपनी बीवी को किसी और के साथ देखूँ तो क्या होगा।
लेकिन अब जब ये सच में हो रहा था, तो ये मेरी कल्पना से कहीं ज़्यादा खूबसूरत और तीव्र लग रहा था।
नेहा वेणु के ऊपर चढ़ी हुई थी।
वो उसे domination में किस कर रही थी — जैसे कोई टीचर अपने स्टूडेंट को सिखा रही हो।
उसकी जीभ वेणु के मुँह में घुस रही थी, लार इकट्ठा कर रही थी, और फिर उसे वेणु के मुँह में डाल रही थी।
दोनों के मुँह से लार का आदान-प्रदान हो रहा था।
नेहा का तरीका बहुत confident और controlling था।
मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकता कि मेरे अंदर क्या चल रहा था।
एक तरफ जलन थी, दूसरी तरफ इतनी तेज़ उत्तेजना कि मेरा पूरा शरीर काँप रहा था।
ये देखना कि मेरी बीवी किसी और को इस तरह किस कर रही है — मेरे सामने, इतने करीब — ये सपनों से भी ज़्यादा powerful था।
मैं उन्हें 15 मिनट तक किस करते देखता रहा।
कभी धीमा, कभी तेज़।
जब लगता था कि किस खत्म होने वाला है, तो उनकी गति फिर बढ़ जाती।
इंटेंसिटी बढ़ जाती।
दोनों टीनएज लवर्स की तरह किस कर रहे थे — भूखे, बेसब्र, और पूरी तरह खोए हुए।
आखिर में नेहा ने किस तोड़ा।
वो हाँफ रही थी।
वो वापस हमारे बीच में आकर बैठ गई — २ सीटर सोफे पर।
अब वो दोनों तरफ से हम दोनों को छू रही थी।
उसकी साँसें अभी भी तेज़ थीं।
उसने हाँफते हुए कहा,
“बीयर...”
उसकी बोतल खाली हो चुकी थी।
इस बार वेणु उठा और बीयर लाने गया।
नेहा ने मेरी तरफ देखा और बहुत धीरे से फुसफुसाया,
“तुम ठीक हो?”
मैंने मुस्कुराकर “हम्म” कहा।
नेहा ने मेरी शॉर्ट्स के ऊपर से मेरे लंड को पकड़ लिया और हल्के से दबाते हुए पूछा,
“मजा आ रहा है?”
मैंने फिर मुस्कुराया।
नेहा ने जल्दी से, वेणु पर एक नज़र रखते हुए (ताकि वो न सुन ले), बहुत धीरे से फुसफुसाया,
“कितनी दूर तक जाना चाहते हो?”
मैं कुछ जवाब नहीं दे पाया।
मेरे पास कोई जवाब नहीं था।
मैंने देखा कि वेणु वापस आ रहा था।
नेहा ने मेरी तरफ देखा, इंतज़ार कर रही थी कि मैं कुछ कहूँ।
नेहा ने फिर से धीरे से फुसफुसाया,
“हार्ड फन... या सॉफ्ट फन?”
मैं कुछ नहीं जानता था।
हमने कभी इस बारे में चर्चा नहीं की थी।
लेकिन मुझे तुरंत कुछ तो कहना था।
मैंने बस इतना कहा — “सॉफ्ट फन...”
जैसे ही मैंने कहा, वेणु वापस आ गया।
वेणु ने हमारे पास आकर पूछा,
“तुम लोग क्या फुसफुसा रहे थे? कुछ गड़बड़ है क्या?”
नेहा ने तुरंत मुस्कुराकर कहा,
“नहीं... कुछ नहीं।”
फिर वो उठी, वेणु के साथ खड़ी हुई और उसके कंधे पर हाथ रखकर बोली,
“चलो... डांस करते हैं।”
स्लो म्यूजिक चल रहा था।
वेणु को डांस में उतना इंटरेस्ट नहीं था।
उसकी सारी दिलचस्पी सिर्फ नेहा में थी।
उसका एक हाथ नेहा की कमर पर था, दूसरा हाथ उसकी गांड पर हल्के से रखा हुआ था — बस रखा हुआ, ज़्यादा दबाव नहीं।
वो बहुत safe खेल रहा था, लेकिन उसकी नज़रें लगातार नेहा के चेहरे पर थीं।
वो फिर से उसे किस करना चाहता था।
नेहा उसे tease कर रही थी।
जब भी वेणु अपना चेहरा उसके करीब लाता, नेहा हल्के से सिर हटा लेती और मुस्कुरा देती।
आखिरकार नेहा ने उसे इजाजत दे दी।
वेणु ने नेहा को और पास खींचा।
दोनों के होंठ फिर से मिल गए।
ये किस पहले वाले से ज़्यादा गहरा और धीमा था।
मैं सोफे पर बैठा सब देख रहा था।
मेरी बीवी... मेरी नेहा... एक अनजान लड़के के हाथों में, उसकी बाहों में।
वेणु उसे छू रहा था, उसकी जीभ से खेल रहा था, उसके होंठों को चूस रहा था।
मेरा हाथ अपने आप मेरे लंड पर चला गया।
मैंने शॉर्ट्स के ऊपर से ही उसे मसलना शुरू कर दिया — ठीक वैसे जैसे मैं अकेले में पॉर्न देखकर करता था।
लेकिन इस बार पॉर्न नहीं था।
ये लाइव था।
मेरी बीवी मेरे सामने लाइव पॉर्न बन रही थी।
मैं नेहा को उस पॉर्न में इमेजिन करके ही हाथ चलाता था।
आज वो मेरे सामने थी।
रियल।
मेरा लंड शॉर्ट्स के अंदर पूरी तरह सख्त हो चुका था।
मैं धीरे-धीरे उसे रगड़ रहा था, नज़रें नेहा और वेणु पर टिकी हुई थीं।
मुझे लग रहा था कि मुझे नेहा को ये सब करने के लिए मनाना पड़ेगा।
हज़ारों विचार मेरे दिमाग में आ रहे थे।
हज़ारों प्लानिंग।
हर बार यही डर लगता था — नेहा क्या सोचेगी?
कहीं वो मुझे छोड़ न दे, कहे कि “तुम चूतिया हो”।
दो दिन भी नहीं लगेंगे नेहा को मुझसे बेहतर, हैंडसम और बड़ा मर्द ढूंढने में।
मैं अपने दिमाग में खो गया था।
फिर मैंने फोकस किया जो सामने हो रहा था।
स्लो म्यूजिक पर डांस चल रहा था।
डीप किसिंग।
रोमांटिक।
वेणु का एक हाथ अब नेहा की गांड को मसल रहा था।
दूसरा हाथ उसकी नाभि को कुरेद रहा था।
अचानक वेणु के होंठ नेहा के होंठों से हटे और सीधे उसके कान के पास गए।
उसने कुछ कहा — मुझे सुनाई नहीं दिया।
फिर वापस होंठों पर आ गया।
नेहा ने अपने हाथ पीछे ले गए... शर्ट के अंदर से उसके बूब्स और भी उभरकर सामने आ गए।
किस करते हुए नेहा की साँसें तेज़ हो गई थीं।
मैं समझ गया — वेणु ने उसके कान में कुछ कहा होगा जो नेहा को पसंद आया।
स करते-करते वेणु के दोनों हाथ नेहा की शर्ट के बटन पर काम करने लगे।
एक... दो... तीन...
तीन बटन खोल दिए — किस करते हुए ही।
चौथे बटन तक पहुँचते-पहुँचते वो झुक गया मेरी बीवी के बूब्स पर।
उसने शर्ट के और नीचे के बटन खोलने शुरू कर दिए।
जहाँ तक बटन खुले थे, वहाँ तक वो किस कर रहा था —
पहले गर्दन पर, फिर क्लिवेज पर, रेड ब्रा के ऊपर से, फिर पेट पर, फिर नाभि पर।
वेणु घुटनों पर आ गया था ये सब करते हुए।
मुझे लगा था कि वो शर्ट तक ही रुकेगा।
लेकिन फिर मैंने देखा — उसने नेहा की शॉर्ट का बटन खोलना शुरू कर दिया।
नेहा अभी भी खड़ी थी, शर्ट आधी खुली हुई, बूब्स ब्रा में उभरे हुए, और वेणु उसके सामने घुटनों पर बैठा शॉर्ट का बटन खोल रहा था।
नेहा कभी वेणु को देख रही थी, कभी मुझे।
उसकी शॉर्ट धीरे-धीरे नीचे खिसक रही थी।
मैचिंग रेड पैंटी अब साफ़ दिख रही थी।
वेणु किस जारी रखे हुए था।
अब वो नेहा के घुटनों से ऊपर जा रहा था।
अच्छे से जाँघों पर किस करने के बाद वो ट्रायंगल पर पहुँच गया।
नेहा को देखा।
फिर उसने पैंटी के ऊपर से ही नेहा की चूत पर एक हल्का सा किस किया।
नेहा ने तुरंत उसके बालों को पकड़ लिया और उसे वापस खड़ा कर दिया।
फिर नेहा ने उसके कान के पास अपना चेहरा ले जाकर कुछ फुसफुसाया।
वेणु अचंभे में रह गया। वो समझ नहीं पा रहा था क्या हो रहा है।
उसने नेहा की तरफ से हटकर मेरी तरफ देखा और इशारे करते हुए कहा,
“क्या... क्या मैं आपकी वाइफ के बूब्स को हाथ लगा सकता हूँ?”
मैं समझ गया — नेहा ने उसे कहा है ऐसा करने के लिए।
नेहा मेरी इजाजत चाहती है।
मैंने उत्तेजना में हाँ में सिर हिला दिया और बोला,
“मगर बस ऊपर से... ब्रा के अंदर मत जाना।”
मैंने बस उसके मजे लेने के लिए कहा था।
मुझे पता था कि अब ये नहीं रुकने वाले।
मेरा एक हाथ में सिगरेट था और दूसरे हाथ में मेरा लंड आ चुका था।
मैं शॉर्ट्स के ऊपर से ही उसे मसल रहा था।
मेरी बीवी व्हाइट शर्ट को बस कंधों पर लटकाए हुए थी।
रेड ब्रा और पैंटी में वो बहुत सेक्सी लग रही थी।
मेरे हाँ बोलते ही वेणु ने ब्रा के ऊपर से नेहा के बूब्स दबाना शुरू कर दिया।
वो उन्हें अच्छे से मसल रहा था, दबा रहा था।
नेहा मुझे देख रही थी।
उसके हाथ वेणु के बालों में थे।
वेणु के शॉर्ट्स में अब तंबू बन चुका था।
वो नेहा के पीछे चला गया।
दोनों अब मुझे face करके खड़े थे।
उसके दोनों हाथों में मेरी बीवी के बूब्स थे।
स्लो म्यूजिक की रिदम में वो उन्हें दबा रहा था — ऊपर से नीचे, धीरे-धीरे मसल रहा था।
मुझे लग रहा था कि वो पीछे से नेहा की गांड पर अपना लंड रगड़ रहा है।
नेहा का एक हाथ पीछे गया।
मैंने उसके चेहरे के एक्सप्रेशन बदलते देखे — आँखें आधी बंद, होंठ थोड़े खुले, साँसें तेज़।
उसके हाथ नेहा की कमर के पीछे थे, तो मुझे नहीं पता था कि उसने क्या महसूस किया।
नेहा का मुँह खुला हुआ था, साँसें तेज़ थीं।
वेणु अब काफी आगे बढ़ चुका था।
उसने नेहा की ब्रा के दोनों कप को नीचे कर दिया था।
अब नेहा के नंगे निप्पल्स बाहर थे।
वेणु उन निप्पल्स से खेल रहा था — जैसे गैस के नॉब को ऑन-ऑफ करते हैं, वैसे ही उँगलियों से दबा रहा था, घुमा रहा था, सहला रहा था।
मैं देखना चाहता था कि नेहा के हाथ में क्या महसूस किया, लेकिन बोलने में हिचक रहा था।
नेहा शायद समझ गई।
वो वेणु के सामने से हटी, लेकिन हाथ अब भी शॉर्ट्स के ऊपर थे।
फिर उसने मुझे वेणु का लंड दबाकर दिखाया।
शॉर्ट्स के पतले कपड़े के ऊपर से लंड की आउटलाइन साफ़ दिखने लगी।
वो स्ट्रॉन्ग था।
एक पिंट की बीयर की बोतल जितना मोटा और लंबा।
नेहा उसे मुझे दिखा रही थी और साथ में रगड़ रही थी।
उसकी नाज़ुक उँगलियाँ पूरे लंड की लंबाई को रगड़ रही थीं — ऊपर से नीचे तक।
फिर अचानक वेणु ने नेहा के बालों को पकड़ लिया और उसे भूखे बच्चे की तरह किस करने लगा।
बहुत उत्तेजना में, बहुत बेसब्री से।
नेहा के हाथ अभी भी उसके लंड पर थे।
वेणु की सिसकारी निकली।
मैंने देखा कि उसका शॉर्ट आगे से गीला हो रहा था।
वो झड़ चुका था।
मैं जानता था... जब ये सब मेरे लिए इतना ज़्यादा था (जो रोज़ नेहा को नंगी देखता था), तो एक वर्जिन के लिए तो नामुमकिन था।
वेणु ने किस तोड़ा।
उसने नेहा का हाथ पकड़ लिया — शायद हटाने के लिए।
“आपका हाथ गंदा हो जाएगा... सॉरी...”
नेहा ने हाथ नहीं हटाया।
उसने उल्टा उसी जगह हाथ फेरा जहाँ सबसे ज़्यादा गीला था।
नेहा ने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा,
“कोई बात नहीं... होता है...”
वेणु शर्मिंदा लग रहा था।
लेकिन नेहा उसका हौसला बढ़ा रही थी।
थोड़ी देर बाद नेहा ने वेणु की तरफ देखा और बोली,
“सैम के शॉर्ट्स तुम्हें फिट आ जाएँगे... तुम चेंज कर लो।”
वो मेरे बैग से कुछ कपड़े निकालकर वेणु को दे दी।
फिर मेरे पास आकर बैठ गई।
रूम में शांति थी।
“बेबी... मैंने इसका पानी निकाल दिया,” नेहा ने खिलखिलाते हुए बोला — जैसे कोई आम बात हो।
जैसे मैंने आज केक बनाया है या कपड़े प्रेस कर दिए।
हम दोनों वेणु को चेंज करते हुए देख रहे थे।
उसका लंड नंगा था।
झड़ने के बाद भी वो तना हुआ था।
उसने कपड़े पहने।
कुछ सोचते हुए बोला,
“मैं बाहर से सिगरेट लेकर आता हूँ...”
“हमारे पास है,” मैंने कहा।
“मेरा ब्रांड अलग है...” कहते हुए वो जल्दबाजी में रूम से निकल गया।
नेहा ने मेरी तरफ देखा।
पहले मुझे किस किया।
फिर वो धीरे-धीरे मेरी टांगों के बीच अपना सिर ले आई।
शॉर्ट्स को नीचे करने लगी।
मैंने कहा, “रुक जाओ... वेणु को आने दो... उसे दिखाना अपना ये स्किल।”
नेहा ने लंड पर जीभ फेरते हुए कहा,
“वो नहीं आएगा।”
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नेहा ने ये बोलकर मेरा लंड मुंह में लिया और चूसने लगी।
उसकी गर्म, नम जीभ मेरे लंड के सिरे पर घूम रही थी। वो धीरे-धीरे, लेकिन गहरे में ले रही थी।
नेहा का एक हाथ अपनी चूत पर था — अपनी पैंटी के ऊपर से ही। उँगलियाँ धीरे-धीरे रगड़ रही थीं।
मेरा एक हाथ में सिगरेट था... दूसरे में नेहा के बाल।
मैं कन्फ्यूज था।
मुझे लगा शायद उसने मजाक में कहा था कि वेणु नहीं आएगा।
थोड़ी देर बाद बेल बजी।
नेहा उत्तेजना में खड़ी हो गई।
शायद उसे भी उम्मीद नहीं थी जो उसने खुद कहा था।
या वो गलत होना चाहती थी।
उसने शर्ट के कुछ बटन बंद किए — कुछ अभी भी खुले थे।
फिर गेट खोला।
सामने एक वेटर था।
मैंने भी अपने आप को अजस्ट किया — एक तकिया अपनी गोद में डालकर।
नेहा ने वेटर से कुछ कहा।
वेटर भी नेहा को इस हालत में देख रहा था — नंगी टाँगें, सिर्फ एक शर्ट में।
लेकिन गोवा में उसी होटल के पूल में लड़कियाँ बिकिनी में थीं, इसलिए उसके लिए ये कोई नई बात नहीं लग रही थी।
उसने एक नोट दिया।
नेहा ने वो पढ़ा और गेट बंद कर दिया।
फिर वो वापस मेरी टाँगों के बीच में बैठ गई।
नोट मुझे दिया।
उसमें लिखा था:
“सॉरी गाइज़... आप दोनों बहुत अच्छे इंसान हैं.... लेकिन पता नहीं कुछ अजीब लग रहा है.... मेरी शादी होने वाली है... अगर ये कोई ब्लैकमेल है तो प्लीज़... कुछ भी करने से पहले... मुझे इस ईमेल पर कॉन्टैक्ट करें... मैं किसी से भी ज़्यादा Pay कर सकता
हूँ... थैंक्स”
नेहा ने मुझे पढ़ते हुए देखा।
मुझे पता था कि वो नहीं आएगा।
नेहा मुझसे ज़्यादा चीजों को नोटिस करती थी।
मुझसे ज़्यादा समझदार थी।
मैं समझ गया था कि वेणु को ये सब “पोस्ट नट क्लैरिटी” हुई है।
वो इतनी देर से अपने लंड से सोच रहा था।
जैसे ही वो झड़ा, उसके पापा-मम्मी की वो बात — “लोग तेरा फायदा उठा सकते हैं” — उसके दिमाग में आ गई होगी।
नेहा मुझे भी झाड़ना चाहती थी, ठीक वैसे जैसे उसने वेणु को झाड़ दिया था।
उसकी गर्म, नम जीभ मेरे लंड पर तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थी।
वो पूरी लंबाई को मुंह में ले रही थी, कभी सिरे को चूसती, कभी अंडकोष को सहलाती।
मैं उत्तेजना में था।
मेरा लंड उसके मुंह में पूरी तरह सख्त था।
अचानक मैं झड़ गया — उसके मुंह में।
मेरी सारी गर्म, गाढ़ी मन निकलकर उसके मुंह में भर गई।
नेहा ने सब पी लिया।
वो धीरे से उठी, मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा।
फिर वो वॉशरूम गई, मुँह धोया और वापस मेरे पास आकर बैठ गई।
उसने मेरी आँखों में देखकर पूछा,
“कैसा लगा तुम्हें?”
मुझे पता था वो ये सवाल पूछेगी।
लेकिन उसने “पोस्ट नट क्लैरिटी” देने के बाद पूछा था — ताकि मैं लंड से नहीं, दिमाग से जवाब दूँ।
ये पल सच्चाई का था।
मेरा जवाब हमारे रिलेशन की आगे की दिशा तय करने वाला था।
आज तक जो हमने किया — वो सब हवस थी।
इतने दिनों के रोल प्ले का एक प्रैक्टिकल।
एक स्ट्रेंजर के साथ।
लेकिन इसके रिस्क... क्या हम तैयार हैं?
क्या इससे जो हासिल होने वाला है, वो रिस्क लेने लायक है?
ये सब मेरे दिमाग में घूम रहा था।
मैंने धीरे से कहा,
“बहुत अच्छा... मुझे नहीं लगा था कि ऐसा कुछ महसूस होगा जब तुम्हें कोई छुएगा।”
नेहा मेरी आँखों में देख रही थी।
“कोई जलन?”
“हाँ... लेकिन...”
मुझे शब्द नहीं मिल रहे थे।
नेहा समझ रही थी।
उसने धीरे से पूछा,
“क्या तुम ये और करना चाहोगे?”
“आज?” मैंने कहा।
“आज नहीं, यू सिली... मैं मतलब कभी और,” नेहा ने मुस्कुराते हुए कहा।
मैंने हाँ में सिर हिलाया।
नेहा ने कहा,
“तो हमें बहुत careful रहना होगा... आज की तरह नहीं।
वो लड़का कुछ भी हो सकता था... कोई चोर... या violent...
हमें बहुत safe होकर ये करना होगा।”
हर शब्द जो वो कह रही थी, वो समझ में आ रहा था।
“चलो... कुछ प्लान करते हैं... लेकिन अभी नहीं,” नेहा ने कहा।
फिर हम दोनों शांत हो गए।
दोनों ऊपर पंखे को देख रहे थे।
दोनों कुछ सोच रहे थे।
मैं सोच रहा था कि मैंने क्यों नहीं पूछा कि नेहा को कैसा लगा।
क्या सिर्फ मैं ही unsure था कि मैं अपनी बीवी को किसी और के साथ देखकर कैसे रिएक्ट करूँगा?
क्या वो हमेशा से sure थी कि वो ये आसानी से कर सकती है?
उसे पता था कि मैं कैसे behave करूँगा?
मैंने हिम्मत करके नेहा से पूछा,
“क्या तुम्हें कोई... मेरा मतलब... दिक्कत या...?”
नेहा ने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराते हुए कहा,
“जैसे तुम चाहो... आई एम ऑल यॉर्स।”
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ये रविवार था।
सुबह के ठीक 5 बजे।
मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि कल रात की इतनी लंबी और गहरी मस्ती के बाद नेहा सुबह की वॉक पर निकलेगी।
लेकिन वो निकल गई।
उसके शरीर में अभी भी कल रात की उत्तेजना बाकी थी।
उसकी चाल में एक धीमी, कामुक लहर थी — जैसे वो अभी भी आधा सपना देख रही हो।
मैं आँखें आधी बंद करके लेटा था, लेकिन उसे अच्छे से देख रहा था।
उसे पता नहीं था कि मैं जाग रहा हूँ और उसे देख रहा हूँ।
पिछले कुछ हफ्तों से मैं ये नोटिस कर रहा था कि वो सुबह अकेले वॉक पर जाती है।
आज मैंने फैसला कर लिया — मैं उसका पीछा करूँगा।
मैंने करीब 50 मीटर की दूरी रखते हुए उसे फॉलो किया।
रास्ते में हर गुजरने वाला आदमी उसकी तरफ मुड़-मुड़कर देख रहा था।
नेहा ने आज बहुत छोटी शॉर्ट्स और टाइट टैंक टॉप पहना हुआ था।
उसकी गोरी जाँघें, पतली कमर और उभरे हुए बूब्स सब कुछ साफ़ दिख रहा था।
रास्ते भर लोगों की नज़रें उस पर टिकी रही — कई तो रुककर भी देख रहे थे।
पार्क पहुँचते-पहुँचते नेहा ने कई सारे हार्ड-ऑन दे दिए थे।
पार्क में पहुँचकर उसने एक थोड़ी सुनसान जगह ढूँढी और एक पेड़ के नीचे ध्यान की मुद्रा में बैठ गई।
लगभग तुरंत ही एक आवाज आई —
“Hello Neha, good morning…”
नेहा ने चौंककर ऊपर देखा।
गुप्ता जी थे — पचास साल के, थोड़े मोटे, जॉगिंग सूट में।
वो काफी समय से नेहा के शरीर पर ललचाई नज़रों से देख रहे थे।
नेहा का शरीर भी उनके उस गर्म लुक से थोड़ा सख्त हो गया।
वो चुप रही।
गुप्ता जी ने बिना पूछे नेहा के बिल्कुल पास, सिर्फ कुछ इंच की दूरी पर, पेड़ के नीचे बैठ गए।
गुप्ता जी ने मुस्कुराते हुए, बिना किसी औपचारिकता के कहा,
“मैं देख रहा हूँ कि तुम्हारे पति ने तुम्हें अकेला छोड़ दिया है प्रकृति के साथ।”
नेहा ने हल्के से कहा, “हाँ…”
और बस इतने में उसने गुप्ता जी का मजबूत और खुरदुरा हाथ अपनी कंधे पर महसूस किया।
उसकी गर्म छुअन ने नेहा की योनि को तुरंत गीला कर दिया।
कल रात की उत्तेजना अभी भी उसके शरीर में थी, इसलिए उसका शरीर अपने आप प्रतिक्रिया दे रहा था।
गुप्ता जी ने कहा,
“इतनी सुंदरता बर्बाद हो रही है, ये तो अफसोस की बात है।
चलो, मैं तुम्हें वहाँ नई वैरायटी के गुलाब दिखाता हूँ।”
उन्होंने ये कहते हुए नेहा की कमर पर हाथ रख लिया — जैसे उसे सहारा दे रहे हों।
नेहा खुद भी हैरान थी कि कितनी आसानी से वो उठ खड़ी हुई और गुप्ता जी के साथ उस और भी सुनसान जगह की तरफ चल पड़ी।
उनकी गर्म पकड़ उसके पूरे शरीर को गर्म कर रही थी।
वो खुद को सुबह की हॉर्नीनेस का बहाना दे रही थी, लेकिन अंदर से वो बुजुर्ग आदमी की तरक्की को रोक नहीं पा रही थी।
उसके दिमाग में होली और अन्य कम्युनिटी फेस्टिवल के दौरान गुप्ता जी की स्टील जैसी पकड़ याद आ रही थी — उनकी उँगलियाँ उसकी कमर, कूल्हों और गांड पर कितनी मजबूती से दबती थीं।
अब वो दोनों और भी सुनसान जगह की तरफ बढ़ रहे थे।
मैं कुछ दूरी से छुपकर देख रहा था।
ये पहली बार नहीं लग रहा था।
नेहा का बॉडी लैंग्वेज बिल्कुल रिलैक्स था — कोई विरोध नहीं, कोई हिचकिचाहट नहीं।
दोनों आराम से बातें कर रहे थे — किसी फंक्शन की, किसी की अपीरियंस की। मैं ठीक से सुन नहीं पा रहा था कौन सा फंक्शन।
नेहा हमेशा अच्छे और सेक्सी कपड़े पहनकर जाती थी।
तभी नेहा ने धीरे से कहा,
“होली में तो आपने ही शुरू की थी। वरना बाकी लोग मुझे छूने की हिम्मत भी नहीं करते।”
गुप्ता जी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया,
“मुझे यकीन है कि तुम्हें कोई अफसोस नहीं है नेहा। तुमने खुद को बहुत सारे प्रशंसक बना लिया।”
नेहा हँसकर बोली,
“आपका मतलब कामुक प्रशंसक से है ना?”
उसने ये कहते हुए गुप्ता जी की उभरा हुआ क्रॉच की तरफ देखा।
जैसा उसका हमेशा का स्वभाव था — वो खुद कुछ नहीं करती, बस उनका इनिशिएटिव आने का इंतज़ार करती है।
गुप्ता जी ने भारी आवाज में कहा,
“होली के बाद से ये लंड ढीला ही नहीं हुआ है नेहा…”
और उन्होंने अपना लंड निकालकर नेहा के हाथ में थमा दिया।
मैं हैरान रह गया।
मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि गुप्ता जी इतने डायरेक्ट होंगे मेरी बीवी के साथ।
नेहा ने हाथ नहीं हटाया।
वो अभी भी शांत बैठी थी।
ये देखकर मुझे और भी यकीन हो गया — ये पहली बार नहीं है।
गुप्ता जी पहले भी इस तरह फ्लर्ट कर चुके हैं मेरी बीवी के साथ।
मेरा दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था।
शरीर में गर्मी और ठंड दोनों एक साथ हो रही थी।
नेहा उसकी अचानक की हरकत और लंड की मोटाई देखकर स्तब्ध रह गई।
उसका हाथ अच्छे से उसके मोटे लंड को घेर लेता था।
स्टील जैसा सख्त मांस उसके हाथ में उत्सुकता से उछल रहा था।
नेहा के मुँह से एक हल्की सी कराह निकली और वो धीरे-धीरे उसे हाथ से हिलाने लगी।
उसका शरीर अब पूरी तरह गर्म हो चुका था और उसकी चूत से रस निकलकर उसकी मोटी जाँघों पर बहने लगा था।
गुप्ता जी कम बोलने वाले और ज्यादा एक्शन वाले आदमी लग रहे थे, जो नेहा को बहुत सूट कर रहा था।
उन्होंने नेहा को पेड़ के नीचे घास पर लिटा दिया, इस बात का ध्यान रखते हुए कि वो अच्छे से छुपे हुए हों।
नेहा ने उनके खुरदुरे और मजबूत हाथों को अपना शरीर हैंडल करने दिया।
वो जमीन पर सपाट लेट गई और ऊपर उम्मीद भरी नज़रों से गुप्ता जी को देखने लगी।
एक ही झटके में गुप्ता जी ने नेहा की व्हाइट शॉर्ट को उसके गोरे और क्रीमी जाँघों के नीचे सरका दिया और उसकी रसीली चूत को पकड़ लिया।
नेहा ने जोर से साँस खींची और थोड़ी ज़ोर से कराह पड़ी।
उसकी चूत की गीलीपन और गर्मी ने गुप्ता जी की लस्ट को और बढ़ा दिया।
उन्होंने झुककर अपना मोटा लंड तुरंत नेहा की भीगी चूत में ठेल दिया।
फिर उन्होंने जोर-जोर से पंपिंग शुरू कर दी — पहले तेज़-तेज़ झटके, फिर धीमे-धीमे लेकिन गहरे।
उनके हाथ आगे बढ़े और नेहा के दर्द भरे बूब्स को जोर से पकड़ लिया, जिससे मांस काँपने लगा।
नेहा उनके हमले के नीचे तड़प रही थी।
उसकी कामुकता बढ़ती जा रही थी, इसलिए वो अपने कूल्हे ऊपर उठाकर हर झटके का जवाब दे रही थी।
उसके लंड के चूत में घुसने-निकलने की चिकनी आवाज़ें शांत हवा में भर गई थीं।
उस हालत में भी नेहा को ये डर था कि कहीं कोई सुन न ले।
लेकिन उसे ये नहीं पता था कि उसका पति (मैं) कुछ दूरी से छुपकर सब देख और सुन रहा था — बेहद उत्तेजित और एक्साइटेड हालत में।
अचानक मेरे कंधे पर एक हाथ रख गया।
मैं चौंककर मुड़ा।
वो एक जवान लड़का था — गुप्ता जी का बेटा।
वो मेरे बगल में खड़ा था और मेरे साथ-साथ सब देख रहा था... मेरी बीवी को अपने बाप के साथ।
उसने मेरा हाथ पकड़ा और सीधा अपने पजामे के ऊपर अपने लंड पर रख दिया।
ठीक वैसे ही जैसे मेरे दोस्त पहले किया करते थे।
उसने धीरे से कहा,
“ओह अंकल... नेहा आंटी... कल मैंने इनको अपनी कार में चोदा था... पापा बाहर थे...
बोल रही थीं कि क्या उनके पास टाइम है मेरे लंड को चूसने के लिए...”
सब कुछ मुझे बहुत अजीब लग रहा था।
अचानक एक और हाथ आया... इस बार एक उम्रदराज औरत का।
उसने कहा,
“ये चिनाल मेरे घर के सारे मर्दों को खा जाएगी...”
और अब हम तीन — मैं, गुप्ता जी का बेटा और वो औरत — चुपचाप खड़े होकर चुदाई देख रहे थे।
मैं अपना लंड मसल रहा था... लेकिन इस पॉइंट तक मुझे लग गया था कि ये हकीकत नहीं है।
मैंने झटके से आँखें खोलीं।
मैं नींद में था।
नेहा पास में नहीं थी।
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मैंने मोबाइल में टाइम देखा — रात के 2 बज रहे थे।
नेहा साइड टेबल-चेयर पर बैठकर लैपटॉप पर कुछ कर रही थी।
उसकी आँखें स्क्रीन पर टिकी हुई थीं।
मैं पसीने से तर था।
दिल अभी भी बहुत तेज़ धड़क रहा था।
ये सब... सिर्फ सपना था।
लेकिन इतना जीवंत, इतना रियल... कि अभी भी मेरे शरीर में वही उत्तेजना और डर बना हुआ था।
रात के दो बज रहे थे।
मैं चुपचाप उठा और नेहा के पास गया।
सिर्फ "क्लिक... क्लिक... क्लिक..." की आवाज़ आ रही थी।
नेहा लैपटॉप पर किसी से चैट कर रही थी।
मैं पीछे खड़ा होकर उसकी स्क्रीन देखने लगा।
वो किसी लड़के से बात कर रही थी।
गोवा से लौटे तीन-चार हफ्ते हो गए थे।
उसके बाद से हमारा एक बहुत बड़ा डिस्कशन हुआ था। हमने बहुत डिटेल में बात की थी — कि अगर कोई लड़का हो, जिसके साथ नेहा रेगुलर रह सके, मिल सके और सब कुछ कर सके।
मुझे बिल्कुल क्लियर था कि मुझे कोई आपत्ति नहीं होगी।
उस रात नेहा ने मुझसे पूछा था,
“और तुम? क्या तुम्हें कोई लड़की चाहिए जिसके साथ रहना चाहते हो?”
मैंने मुस्कुराकर कहा था,
“नहीं। अभी मेरा पूरा फोकस सिर्फ तुम्हारे लिए किसी अच्छे लड़के को ढूँढने में है।”
मैं नेहा की दाईं तरफ खड़ा था, सिर्फ शॉर्ट्स पहने हुए।
मेरा लंड शॉर्ट्स के अंदर पूरी तरह खड़ा हो चुका था, साफ़ टेंट बना हुआ था।
नेहा का पूरा ध्यान स्क्रीन पर था।
फिर भी उसने एक हाथ पीछे बढ़ाया और मेरे बोलर पर रख दिया।
जैसे ही उसकी उँगलियाँ मेरे लंड पर पड़ीं, उसे तुरंत पता चल गया कि मैं हार्ड हूँ।
नेहा ने मुड़कर मेरी तरफ देखा और हल्के से मुस्कुराते हुए पूछा,
“सोए नहीं?”
मैंने कहा, “नहीं।”
उसने मेरे लंड को शॉर्ट्स के ऊपर से हल्के से दबाते हुए कहा,
“क्या फिर से सपना देखा? ये हाल ही में तीन-चार बार हो चुका है तुम्हारे साथ।”
फिर उसने शरारत भरी नज़रों से मुझे देखा और पूछा,
“कौन था इस बार सपने में? अविनाश? कोई पुराना दोस्त? या फिर वो लड़का जो गोवा से आया था?”
मैंने उसे देखा, मुस्कुरा दिया और बोला,
“नहीं।”
नेहा ने मेरे लंड को और अच्छे से पकड़ लिया, हल्के से सहलाते हुए मुस्कुराई और पूछा,
“तो फिर कौन था?”
मैंने कुछ जवाब नहीं दिया।
नेहा ने फिर से मेरी तरफ देखा और बोली,
“ओहो... फिर से गुप्ता जी? यार तुम्हें गुप्ता जी का क्या ऑब्सेशन है? हमने डिस्कस कर लिया था ना कि किसी भी जान-पहचान वाले के साथ नहीं करेंगे।”
मैंने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा,
“सपने पर तो किसी का कंट्रोल नहीं होता ना...”
नेहा हँस पड़ी।
फिर उसने मेरे शॉर्ट्स के अंदर हाथ डाला और बहुत धीरे-धीरे मेरे लंड को सहलाने लगी।
मेरा ध्यान स्क्रीन पर था।
स्क्रीन पर अयान का नाम लिखा था।
वही अयान — चैप्टर 1 वन वाला।
वो कुछ मैसेज टाइप कर रहा था और नेहा मुस्कुराते हुए उसका जवाब दे रही थी।
नेहा का हाथ मेरे लंड पर लगातार धीरे-धीरे ऊपर-नीचे हो रहा था, जबकि उसकी नज़रें स्क्रीन पर थीं।
वो बहुत कसुअलि मेरे लंड को सहला रही थी, जैसे कोई सामान्य काम कर रही हो।
मैं चुपचाप खड़ा था और दोनों चीजें देख रहा था — नेहा का हाथ अपने लंड पर और अयान से उसकी चैट।
हमने तय किया था कि इंटरनेट से ही कोई लड़का ढूँढेंगे। कोई जान-पहचान वाला नहीं
और उसके बाद हमने बहुत सारी सर्च की, चैटरूम्स जॉइन किए।
अभी मैं दो लोगों से रेगुलर चैट कर रही हूँ। एक है अयान... और दूसरा जिसका रियल नाम मुझे अभी तक पता नहीं है।
क है अयान — बहुत यंग है, शायद 22-23 साल का होगा। बहुत फ्लर्टी है, लेकिन तरीका बहुत विवेकी है। बात करने में मज़ा आता है। उसके मैसेज पढ़कर हँसी भी आती है और उत्तेजना भी।
दूसरा... जिसका रियल नाम मुझे अभी तक पता नहीं। स्क्रीन नेम है — ‘बेकार आदमी’।
नेहा हँस पड़ी।
“नाम सुनके हँसी आती है ना? लेकिन आदमी बिल्कुल फनी नहीं है। थोड़ा देसी टाइप का है, करीब ३२-३५ साल का लगता है। और बात करता है सीधे-सीधे गालियों में। बहुत रफ़ है। कोई शर्म-हया नहीं।”
इसके अलावा हमने बहुत सारे लोगों से बात की थी। दो हफ्ते लगे थे। बहुत से लोग तो पहले ही लाइन से बाहर निकल गए। कुछ तो सीधे फोटो मांगते, कुछ ऑडियो कॉल पर बात करना चाहते, कुछ फोन नंबर मांगते और कुछ तो पैसे भी ऑफर करने लगे थे — जैसे मैं कोई
प्रॉस्टिट्यूट हूँ।
इसीलिए हमने पहले से तय किया था कि पर्सनल कुछ भी नहीं शेयर करेंगे। बस कुछ फोटो शेयर किए थे — जिनमें चेहरा छुपा था।
स्क्रीन पर अयान का एक नया मैसेज आया था।
उसने अपना लोअर बॉडी का फोटो भेजा था — शॉर्ट्स पहने हुए, लेकिन शॉर्ट्स में साफ़ तंबू बना हुआ था।
देखते ही अंदाज़ा हो जाता था कि उसके पास अच्छी साइज़ और स्ट्रेंथ है।
नेहा ने मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई।
मैंने धीरे से कहा, “उससे बोलो कि शॉर्ट्स उतार दे।”
नेहा ने तुरंत टाइप किया:
“इस शॉर्ट्स को उतार दो और अपने ऑर्गन को हवा लेने दो [img=26x0]https://cdn.jsdelivr.net/joypixels/assets/7.0/png/unicode/64/1f609.png[/img]”
अयान का रिप्लाई आया:
“अगर मुझे उतारना है तो तुम्हें भी कुछ दिखाना पड़ेगा।”
नेहा ने तुरंत लिखा:
“Stop it. मैं कुछ नहीं दिखाने वाली।”
अयान ने फिर लिखा:
“अरे मान जाओ ना। सिर्फ गले से नीचे का। चेहरा नहीं दिखेगा। बस अपना लोअर बॉडी दिखा दो — कपड़ों के अंदर भी चलेगा। मुझे बस तुम्हें देखना है। मेरा लंड तुम्हारी प्रेजेंस फील कर सके।”
नेहा ने मेरी तरफ देखा।
उसने हल्के से पूछा,
“अब क्या बोलूँ?”
नेहा अभी भी मेरी तरफ देख रही थी, इंतज़ार कर रही थी कि मैं क्या कहता हूँ।
मैंने धीरे से कहा,
“देखो... आजकल इंटरनेट पर कोई भी फोटो भेज सकता है। अगर हम उसे कुछ भी नहीं दिखाएंगे तो उसे लगेगा कि हम टाइम पास कर रहे हैं।”
मैंने थोड़ा रुककर आगे कहा,
“अगर हम उसे एक सिचुएशनल फोटो दिखा दें, जिसमें वो समझ सके कि सामने सच में कोई कपल है जो ये सब करना चाहता है, तो शायद उसे यकीन हो।”
नेहा ने मेरी तरफ देखते हुए हल्के से पूछा,
“तो... क्या दिखाऊँ उसे?”
मैंने नेहा को धीरे से कहा,
“उसी से पूछ लो कि वो क्या देखना चाहता है।
जो वो खुद माँगेगा, उसे ज़्यादा यकीन होगा।”
नेहा ने मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई और बोली, “ओके...”
फिर उसने टाइप करना शुरू किया।
नेहा ने टाइप किया:
“तुम क्या देखना चाहते हो अयान? किस तरीके का फोटो चाहिए तुम्हें?”
अयान ने थोड़ी देर बाद जवाब दिया:
“पहले ये तो बताओ, तुम अकेली हो या तुम्हारा हसबैंड भी साथ में है?”
नेहा ने लिखा: “हसबैंड भी मेरे साथ बैठा है।”
अयान: “अच्छा, तो तुम लोग अभी क्या कर रहे हो?”
नेहा ने हँसी वाली इमोजी भेजते हुए लिखा: “बस तुमसे बैठ के बातें कर रहे हैं।”
अयान: “आज सेक्स नहीं किया क्या?”
नेहा ने हँसते हुए लिखा: “वो सब तो हो चुका है [img=26x0]https://cdn.jsdelivr.net/joypixels/assets/7.0/png/unicode/64/1f609.png[/img] रात के २ बज रहे हैं, अभी बस तुमसे बात कर रहे हैं।”
फिर अयान का मैसेज आया:
“तो क्या तुम मुझे एक फोटो भेज सकती हो जिसमें तुम्हारे हसबैंड का हाथ तुम्हारे बूब्स के ऊपर हो?”
नेहा ने मैसेज पढ़ा और तुरंत मेरी तरफ मुड़ी।
उसने मेरे लंड को सहलाते हुए मुस्कुराकर पूछा,
“अब क्या बोलूँ? हाँ बोलूँ या मना कर दूँ?”
नेहा ने लिखा:
“तुम बहुत नॉटी हो अयान, मैं ऐसा कुछ नहीं करने वाली।”
अयान ने तुरंत कई बार “प्लीज़ प्लीज़ प्लीज़ प्लीज़” लिख दिया और बहुत सारी रोने वाली इमोजी भेज दी।
नेहा ने स्क्रीन देखकर हँसते हुए मेरी तरफ देखा और बोली,
“ये सच में बच्चा ही है यार... बहुत यंग लगता है। कॉलेज के बच्चे भी ऐसे ही करते हैं।”
मैंने नेहा को देखा और धीरे से बोला,
“चलो... एक फोटो भेज देते हैं।”
मैं नेहा के ठीक पीछे चला गया।
मेरा हाथ उसके बूब्स के बेस पर था, उन्हें नीचे से कसकर कप कर रहा था, जिससे बूब्स और भी शेप्ड और उभरे हुए दिख रहे थे।
नेहा ने फोटो देखी और हल्के से मुस्कुराई।
“पहली बार मैं किसी को अपनी बूब्स की फोटो भेज रही हूँ,” उसने धीरे से कहा।
मैं चुप रहा।
वो नहीं जानती थी कि मैं पहले भी कुछ फोटोज़ अपने रूममेट अविनाश को भेज चुका हूँ। वो बात मैंने उसे अभी तक नहीं बताई थी। (वो कहानी कभी और...)
नेहा जो टी-शर्ट पहने हुए थी, वो पहले से ही काफी ऊपर चढ़ी हुई थी, जिससे उसकी कमर और नाभि साफ़ दिख रही थी।
फोटो में मेरे लंड का सिर्फ एक छोटा सा ग्लिम्प्स दिख रहा था — गर्दन और कंधे के बीच में। लेकिन अयान को आइडिया ज़रूर हो जाएगा।
नेहा ने फोटो देखकर मेरी तरफ देखा।
उसकी आँखों में थोड़ी शरारत और थोड़ी घबराहट दोनों थी।
उसने “Send” बटन पर उँगली रखी, लेकिन भेजने से पहले एक बार फिर मेरी तरफ देखा।
मैंने हल्के से सिर हिला दिया।
नेहा ने फोटो भेज दी।
अब हम दोनों स्क्रीन पर लगे थे, अयान का रिप्लाई आने का इंतज़ार कर रहे थे।
मैं खड़े-खड़े नेहा के बूब्स को टी-शर्ट के ऊपर से ही धीरे-धीरे दबा और सहला रहा था।
मेरा लंड उसके गर्दन और कंधे के बीच में रगड़ खा रहा था।
कुछ सेकंड बाद अयान का रिप्लाई आया।
स्क्रीन पर मैसेज पॉप हुआ:
“वाह, नेहा!... [img=26x0]https://cdn.jsdelivr.net/joypixels/assets/7.0/png/unicode/64/1f633.png[/img]
ये फोटो... सच में तुम हो?
तुम्हारे हसबैंड का हाथ... बहुत अच्छा लग रहा है।
तुम्हारे बूब्स बहुत शेप्ड और सुंदर दिख रहे हैं।
मुझे यकीन नहीं हो रहा कि तुमने भेज दिया।
मेरा लंड अभी और सख्त हो गया है...”
फिर तुरंत दूसरा मैसेज आया:
“अगर मुमकिन हो तो... एक और फोटो भेज सकती हो?
इस बार शायद तुम्हारा हाथ मेरे लंड की जगह तुम्हारे हसबैंड के लंड पर हो...
बस थोड़ा सा और क्लियर... प्लीज़ [img=26x0]https://cdn.jsdelivr.net/joypixels/assets/7.0/png/unicode/64/1f97a.png[/img]”
नेहा ने मैसेज पढ़ा और मेरी तरफ देखकर हल्के से हँसी।
नेहा ने कैमरा थोड़ा ऊपर किया।
अब फोटो में उसकी गर्दन, मेरे लंड का अच्छा हिस्सा और उसकी दो उँगलियाँ मेरे लंड की स्किन पकड़े हुए साफ़ दिख रही थीं।
उसने फोटो भेज दी।
कुछ सेकंड बाद अयान का रिप्लाई आया:
“ओह... तो इसी वजह से तुम male partner ढूंढ रही हो?”
नेहा ने तुरंत पूछा, “मतलब?”
अयान ने सीधा लिखा:
“ये upto mark नहीं है।”
वो मेरे लंड की बात कर रहा था।
उसे पता था कि मैं वहाँ हूँ, लेकिन उसने बिना हिचकिचाहट के कह दिया।
नेहा ने हँसती हुई इमोजी भेज दी।
फिर मेरी तरफ देखा।
मैंने मुस्कुराने की कोशिश की, लेकिन अंदर से जलन और उत्तेजना दोनों हो रही थी।
मैंने अपनी बेइज्जती को चेहरा पर नहीं आने दिया।
नेहा ने लिखा:
“अच्छा... तो क्या upto mark है? बताओ।”
अयान ने जवाब दिया:
“मैं बता नहीं सकता, लेकिन दिखा सकता हूँ।”
और उसके साथ एक फोटो भेज दी।
शॉर्ट्स अब गायब था।
उसका लंड खुला हुआ था।
बहुत बड़ा, गुलाबी सिर वाला, मोटा और लंबा।
मैंने देखा कि नेहा का चेहरा बदल गया।
उसकी आँखें थोड़ी बड़ी हो गईं।
वो अपनी जीभ से होंठ गीले कर रही थी।
नेहा ने मेरी तरफ देखा।
उसका हाथ मेरे लंड से हट गया और वो टाइप करने लगी।
उसने लिखा:
“ये तो बहुत बड़ा है।”
अयान ने तुरंत जवाब दिया:
“ये उन जगहों तक जा सकता है जहाँ तुम्हारा cucky कभी नहीं पहुँच सकता।”
ये शब्द पढ़कर मेरे शरीर में एक झटका सा लगा।
पहली बार मेरी बीवी के सामने मुझे “cucky” कहा गया था।
हम जानते थे कि “cuck” का मतलब क्या होता है, लेकिन हमने अपनी चैट में इस शब्द को कभी इस्तेमाल नहीं किया था।
नेहा ने मेरी तरफ देखा, लेकिन कुछ नहीं कहा।
उसका हाथ अब मेरे लंड पर नहीं था।
मैंने खुद अपना लंड पकड़ लिया और रगड़ने लगा।
हम आधे घंटे तक और चैट करते रहे।
आखिर में अयान ने अपना लंड हाथ पर झाड़ा और फोटो भेजी।
कैप्शन था: “ये तुम्हारी वजह से हुआ है।”
और मैंने भी नेहा के कंधे पर झाड़ दिया।
हमने वो फोटो भी अयान को भेज दी।
मैं चुपचाप बैठा था, लेकिन अंदर से तूफान चल रहा था।
वो शब्द सुनते ही मेरे शरीर में एक अजीब सा कंपन हुआ।
पहली बार किसी ने मेरी बीवी के सामने मुझे “cucky” कहा था।
ये सिर्फ एक शब्द नहीं था। ये मेरी पूरी मर्दानगी पर एक चोट थी — गहरी।
हम दोनों बिस्तर पर लेट गए।
रूम में सन्नाटा था। सिर्फ पंखे की हल्की आवाज़ आ रही थी।
मैं चुपचाप लेटा था और इंतज़ार कर रहा था।
मुझे पता था कि नेहा इतनी आसानी से इस बात को छोड़ने वाली नहीं है।
वो कुछ न कुछ पूछेगी। बस ये देखना था कि वो किस तरीके से अप्रोच करती है।
नेहा ने गहरी साँस ली। फिर बहुत धीरे से, लगभग हिचकिचाते हुए बोली,
“सैम... मैं तुमसे एक बात पूछ सकती हूँ?”
मैंने उसके सिर को चूमते हुए कहा, “हाँ बेबी, कुछ भी। तुम जानती हो ना।”
नेहा एक पल रुकी, फिर बहुत धीमी आवाज़ में बोली,
“आज मैंने तुम्हारा चेहरा देखा था। तुम बहुत उत्तेजित लग रहे थे। सच में... बहुत ज़्यादा। सामान्य से कहीं ज़्यादा।”
वो रुकी। मुझे पता था वो कहाँ जा रही है।
नेहा एक पल के लिए रुकी।
फिर उसने बहुत धीरे, लगभग निर्दोष स्वर में पूछा,
“cuckold... क्या होता है?”
मैं जानता था कि वो निर्दोष नहीं है।
वो पूरी तरह जानती है कि cuckold का मतलब क्या है।
लेकिन वो जानबूझकर ये सवाल पूछ रही थी — मुझे असहज करने के लिए।
उसकी आँखों में एक छिपी हुई शरारत थी।
वो गहरे में मेरी इस बेचैनी का मज़ा ले रही थी।
और वो ये भी जानती थी कि मैं भी इस बेचैनी का मज़ा ले रहा हूँ।
मैंने गहरी साँस ली।
मेरा लंड अभी भी उसके हाथ में था, और वो हल्के-हल्के उसे सहला रही थी।मैंने नेहा को और आसान भाषा में समझाया:
“देखो नेहा... सरल शब्दों में कहूँ तो...
ककॉल्ड वो पति होता है जिसे अपनी बीवी जब किसी और मर्द के साथ सेक्स करती है, तो उसे बहुत उत्तेजना मिलती है।
ये सिर्फ देखना या शेयर करना नहीं है।
इसमें पति को अक्सर अपमान का भी मज़ा आता है। जैसे ये एहसास कि ‘मेरी बीवी को कोई दूसरा मर्द ज़्यादा अच्छा दे रहा है’।”
नेहा ध्यान से सुन रही थी।
नेहा ने एक पल सोचा, फिर धीरे से पूछा:
“और बीवी... क्या वो सेक्स के दौरान अपने पति को ‘कक’ या ‘मेरा छोटा ककॉल्ड’ कहती है?”
मैंने सिर हिलाया और बोला,
“हाँ, बहुत सी बीवियाँ कहती हैं। ये पति की फैंटसी का हिस्सा होता है।”
नेहा का हाथ धीरे-धीरे मेरे पेट पर नीचे सरका और मेरे लंड पर आकर रुक गया।
वो पहले से ही सख्त हो रहा था।
नेहा ने उसे बहुत धीरे से सहलाते हुए अगला सवाल पूछा:
“तो... अगर हम अयान के साथ ये करें... तो क्या तुम चाहोगे कि मैं भी थोड़ा tease करूँ?
जैसे... तुम्हें चिढ़ाऊँ कि अयान मुझे तुमसे बेहतर दे रहा है या उसका लंड तुमसे मोटा है?”
मैंने गला साफ़ किया
नेहा ने मेरे लंड को धीरे-धीरे सहलाते हुए और पूछा:
“और अगर मुझे सच में ये सब पसंद आने लगे?
अगर मैं तुम्हें कुर्सी पर बैठाकर देखने को कहूँ और खुद को छूने भी न दूँ, जबकि अयान मुझे चोद रहा हो... तो क्या वो ठीक रहेगा?”
उसकी उँगलियाँ अभी भी मेरे लंड पर धीमी गति से चल रही थीं।
उसकी आँखें मेरी आँखों में गड़ी हुई थीं, और उसके चेहरे पर एक हल्की, शरारती मुस्कान थी।
इस बार मैंने सवाल किया।
“तो तुम अयान को चोदना चाहती हो... मैं तो सोच रहा था कि हम अभी सिर्फ पानी में पैर डाल रहे हैं... क्या तुमने पहले ही फैसला कर लिया है?”
मुझे पता था वो क्या कहना चाह रही है, लेकिन मैं उसे चिढ़ाना चाहता था।
नेहा ने मेरी छाती पर हल्का-सा थप्पड़ मारा और हँसते हुए बोली,
“तुम बहुत शरारती हो...
मैं मतलब अगर सब ठीक रहा... तो मैं पहले उसे मिलना चाहती हूँ... फिर...”
मैंने पूछा, “फिर क्या?”
नेहा ने शरारत से मुस्कुराते हुए कहा,
“फिर देखते हैं...”
मैंने फिर पूछा,
“अगर हम उससे मिलने वाले हैं... तो वो सिर्फ देखने के लिए नहीं आएगा। उसे कुछ चाहिए होगा।”
नेहा ने मेरी आँखों में देखा और बोली,
“कुछ जैसे...?”
मैंने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा,
“तुम जानती हो मैं क्या बात कर रहा हूँ...”
नेहा ने मेरे लंड को हल्के से दबाया और शरारती नज़रों से बोली,
“हाँ... जानती हूँ।”
मैंने नेहा की तरफ देखा और धीरे से कहा,
“तुम जानती हो तो तुम्हें पहले सोचना होगा... मिलने से पहले... तय करना होगा।”
नेहा ने भौंहें उठाकर पूछा,
“क्या तय करना है?”
मैंने मुस्कुराते हुए कहा,
“अरे भो मत बनो... अयान हो या बेकार आदमी...
चाहिए तो इनको बिस्कुट ही है।”
हम अपने फन में नेहा की चूत को “बिस्कुट” कहते थे — “कुत्ते का बिस्कुट”।
मैंने ये कहते हुए अपनी उँगली उसके पैंटी के ऊपर से उसकी चूत पर दबाई।
वो पहले से ही बहुत गीली हो चुकी थी — सारी चैट की वजह से।
नेहा हल्के से कराहते हुए बोली,
“बेकार आदमी का पता नहीं... वो मजेदार तो है, लेकिन अभी शायद किसी पब्लिक जगह पर मिल सकती हूँ... अकेले में नहीं।
उसे तो देखा भी नहीं है।
लेकिन अयान से शायद प्राइवेटली मिल सकते हैं।”
लग रहा था कि उसने इस बारे में पहले से ही सोच रखा था।
मैंने सीधे पूछा,
“ओके... तो प्राइवेटली मिलने पर क्या?
क्या तुम उसे चोदना चाहती हो?”
नेहा ने मेरी छाती पर हल्का-सा थप्पड़ मारा और शरारत से बोली,
“नहीं तुम बेवकूफ... शायद सिर्फ किस।”
हम दोनों बहुत अनजाने एक आदमी को किस करने की बात कर रहे थे।
जैसे कोई रोज़मर्रा की बात हो।
मैंने धीरे से पूछा,
“वो किस से नहीं मानेगा... तुम्हें कुछ और भी देना पड़ेगा...?”
नेहा ने खुशी से कहा,
“तो मैं अगली बार चैट में उसी से पूछ लूँगी।”
मैं हँसते हुए बोला,
“हाहा... वो तुम्हारा बिस्कुट माँगेगा ही बेबी।”
नेहा ने शरारत से पूछा,
“तो फिर मैं क्या करूँ?”
मैंने उसकी चूत को और अच्छे से रगड़ते हुए आँख मारकर कहा,
“अपनी ऑफिस वाली नेगोशिएशन ट्रेनिंग यहाँ लगा दो।
शुरुआत किस से करो... और सेटलमेंट हैंडजॉब या ब्लोजॉब पर कर लो।”
नेहा ने मेरी छाती पर हल्का थप्पड़ मारा और हँसते हुए बोली,
“तुम कितने गंदे हो... अपनी बीवी को कौन ऐसा करने देता है, you cucky!”
ये पहली बार था कि उसने मजाक में मुझे “cucky” कहा।
उसके बाद उसने पूछा,
“तो तुम क्या करोगे?”
मैंने कहा,
“मैं देखूँगा?”
नेहा ने नकली गुस्से वाला चेहरा बनाते हुए बोली,
“अच्छा... सारी मेहनत मेरी और तुम एंजॉय करोगे?”
फिर उसने, जैसे कोई मामूली बात हो, कहा,
“अगर मैं हैंडजॉब दूँ... तो तुम भी जॉइन कर सकते हो।
ये ऐसा नहीं है कि तुमने पहले कभी छुआ नहीं है।”
मैं “हम्म...” करके रह गया।
मुझे खुद नहीं पता था कि ये हाँ है या नहीं।
नेहा अब मेरी तरफ देख रही थी, इंतज़ार कर रही थी कि मैं क्या कहता हूँ।
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09-05-2026, 11:22 AM
(This post was last modified: 09-05-2026, 11:23 AM by Life_is_short. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
दिन अच्छे निकल रहे थे...
लेकिन रातें कुछ अलग हो गई थीं।
नेहा की ज़िंदगी में मेरे अलावा अब दो और मर्द आ गए थे — इंटरनेट पर ही सही, लेकिन वो उनसे जुड़ी हुई थी।
अयान से तो थोड़ा ज़्यादा।
वो कहती थी,
“अगर मैं अभी 22-23 साल की होती तो शायद अयान जैसे हैंडसम लड़के मुझे देखते भी नहीं।”
नेहा अयान के तरीके से बहुत प्रभावित थी —
उसकी बात करने का स्टाइल, उसका अटिट्यूड, जिम में बनाया हुआ बॉडी... और उसका लंड।
अब अयान लंबे-लंबे वीडियो भेजने लगा था — खुद को हस्तमैथुन करते हुए।
नेहा कभी भी कोई सेकंड नहीं छोड़ती।
वो हर बिट एंजॉय करती —
लंड का सिरा, उसकी नसें, हर छोटी डिटेल।
जैसे कोई क्विज़ होने वाला हो और उसे लंड पर सब याद करना हो।
धीरे-धीरे अयान के बारे में थोड़ा-बहुत पता चलने लगा था।
वो मुंबई में रहता था, मास कम्युनिकेशन का कोर्स कर रहा था।
उसकी गर्लफ्रेंड थी।
उसकी उम्र में ही 2 - 3 लड़कियों के साथ एक्सपीरियंस था।
अयान अब मिलने की बात करने लगा था।
नेहा हमेशा यही कहती,
“देखते हैं... जब हम दोनों तैयार होंगे तब।”
मैं चुपचाप सुनता रहता।
हर रात नेहा अयान के वीडियो देखती, कभी-कभी मुझे भी दिखाती, और फिर हम दोनों चुपचाप सो जाते।
लेकिन अब बातें धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थीं।
नेहा अब कभी भी अयान की बातें करने लग जाती।
डाइनिंग टेबल पर, खाना खाते-खाते, अचानक मुस्कुरा देती और मुझे बताती,
“आज अयान ने क्या कहा...”
कभी-कभी मुझे लगता था कि वो जानबूझकर ये सब कर रही है — मुझे jealous करने के लिए, मेरा रिएक्शन देखने के लिए।
लेकिन मेरे लिए ये सब सपने जैसा था।
जैसे बचपन से जिस चीज़ की कल्पना की थी, वो अब सच होते हुए दिख रही थी।
गार्गी (बहन) के साथ नहीं तो नेहा के साथ।
मैं ईर्ष्या मैं होता था — बहुत।
लेकिन ये अनुभूति उस जलन को हरा देती थी।
ये उत्तेजना इतनी तेज़ थी कि जलन को पीछे छोड़ देती थी।
हर बार जब नेहा अयान की कोई बात बताती, मेरे शरीर में एक गर्म लहर दौड़ जाती।
मैं चुपचाप सुनता रहता, मुस्कुराता रहता, लेकिन अंदर से जल रहा होता।
फिर रात को जब हम बिस्तर पर होते, नेहा मुझे छूती और धीरे से पूछती,
“आज फिर ईर्ष्या हुए?”
मैं जवाब नहीं देता, बस उसे और कसकर पकड़ लेता।
शायद ये भी हो सकता है...
कि जो नेगी जी से नेहा को मिला, वो उसकी तरफ से बिल्कुल हवस थी।
नेहा उनसे प्यार में थी, लेकिन कभी भी उसे ऐसे स्मार्ट, यंग लड़के से इतना अटेंशन नहीं मिला था।
तो अयान से वो वो सब फ्लर्ट ले रही थी जो उसने अपनी कॉलेज लाइफ में मिस कर दिया था।
मैं देखता था — जब वो स्क्रीन पर अयान का मैसेज पढ़ती, उसके गाल लाल हो जाते थे।
रोज़ सुबह अयान का मैसेज आता:
“Good morning... world की सबसे सुंदर लड़की [img=26x0]https://cdn.jsdelivr.net/joypixels/assets/7.0/png/unicode/64/2764.png[/img]”
और नेहा पूरे दिन ख़ुश रहती।
उसकी मुस्कान में एक अलग सी चमक आ जाती।
वो छोटी-छोटी बातों पर भी हँस पड़ती, जैसे कोई नई लड़की हो।
मैं चुपचाप देखता रहता।
कभी-कभी जलन होती, लेकिन ज़्यादातर उत्तेजना होती।
देखना कि मेरी बीवी किसी और लड़के के एक साधारण मैसेज पर इतनी खुश हो रही है, वो एहसास बहुत गहरा था।
रात को जब हम बिस्तर पर होते, नेहा अक्सर अयान की बातें करती।
कभी उसके फ्लर्ट की, कभी उसके बॉडी की, कभी उसके मैसेज की।
और मैं बस सुनता रहता... और अंदर से जलता और उत्तेजित भी होता।
नेहा ने कभी अपना चेहरा नहीं दिखाया।
हम दोनों इस मामले में बहुत क्लियर थे।
मैंने शुरू से ही कहा था,
“जो चीज़ एक बार इंटरनेट पर चली गई, वो कभी नहीं मिट सकती।
भले ही अयान कितना भी safe हो, लेकिन चैट रूम्स के सर्वर, डेटा स्टोरेज... मुझे बिल्कुल भरोसा नहीं है।”
हम दोनों IT से थे, इसलिए हमें अच्छे से पता था कि पर्सनल डेटा का क्या हो सकता है।
एक बार फोटो या वीडियो किसी सर्वर पर चला गया तो वो हमेशा के लिए रह सकता है — भले ही हम डिलीट कर दें।
हम अपना चेहरा कभी नहीं दिखा रहे थे, लेकिन फोटोज की इंटेंसिटी धीरे-धीरे बढ़ती जा रही थी।
अयान अब नेहा के नंगे बूब्स देख चुका था।
उसके सेक्सी, गोरे बूब्स... उसके निप्पल्स... सब कुछ।
हर रात वो एक नया टास्क देता।
और हम उत्तेजना में उसकी हर रिक्वेस्ट पूरी कर देते।
कभी वो लिखता:
“नेहा, आज मैं तुम्हें सिर्फ ब्लैक पैंटी में देखना चाहता हूँ।”
कभी:
“नेहा, आज तुम्हारे चूतिये पति का छोटा लंड तुम्हारे निप्पल को छू रहा था।”
कभी:
“आज मेरे नाम से अपने बूब्स पर लिखो।”
और हम... उत्तेजना में उसकी हर बात मान लेते।
नेहा फोटो खींचती, कभी मैं उसकी मदद करता, कभी वो अकेले।
हर फोटो में चेहरा छुपा रहता, लेकिन बॉडी की इंटेंसिटी बढ़ती जा रही थी।
रातें अब पहले से कहीं ज़्यादा गर्म हो गई थीं।
नेहा हर रात अयान के टास्क पूरा करती और मुझे दिखाती।
अयान लेट नाइट तक जागता था... और हमें भी जगाए रखता था।
इसलिए हमने अपने ऊपर एक सख्त boundary लगा रखी थी — हम सिर्फ वीकेंड पर ही लेट तक जागेंगे।
वरना पूरे दिन ऑफिस में काम नहीं होता था।
मगर फिर भी, अयान को जब भी नेहा ने “hello” भेजा — दिन के किसी भी समय — उसका रिप्लाई तुरंत आ जाता था।
दूसरी तरफ था “बेकार आदमी” नाम का ID।
असली नाम नहीं पता।
वो खुद को पुणे से बताता था, बिजनेसमैन, 40-42 साल का।
कहता था कि वो बहुत busy रहता है।
उसका आना फिक्स टाइम पर होता था — रात ९ से ११ के बीच।
आते ही गंदी, रफ बातें शुरू:
“कैसी है भेन की लोड़ी... आज खाने में क्या बनाया है मादरचोद?”
नेहा उसे एक मस्कुलर, देसी, बिजनेसमैन के रूप में इमेजिन करती थी।
उससे भी इमोशनल कनेक्शन था, लेकिन वो उसके साथ इतनी आगे नहीं बढ़ी थी जितनी अयान के साथ।
अयान को नेहा ऊपर से नीचे तक देख चुकी थी — चेहरा तक।
लेकिन “बेकार आदमी” ने कभी फोटो की बात इनिशिएट नहीं की।
न नेहा ने उससे माँगा, न उसने नेहा से।
बस फिक्स टाइम पर आता, गंदी बातें करता, और चला जाता — जैसे कोई ऑनलाइन रोल प्ले हो।
नेहा दोनों से अलग-अलग मज़ा ले रही थी।
एक तरफ अयान — यंग, स्मार्ट, फ्लर्टी और सुंदर।
दूसरी तरफ बेकार आदमी — रफ, गंदा, देसी और straight-forward।
एक दिन मुझे ऑफिस के काम से मुंबई जाना था।
मैं बहुत एक्साइटेड था नेहा को बताने के लिए।
नेहा भी ऑफिस से छुट्टी ले सकती थी।
ये हमारा अच्छा चांस हो सकता था अयान से मिलने का।
रात में चैट पर हमने अयान को बताया:
“हम मुंबई आ रहे हैं।”
अयान: “कब?”
“2 दिन में।”
अयान: “अच्छा...”
उसकी बात में साफ़ एक्साइटमेंट था।
फिर उसने सीधे लिखा:
“तो क्या मैं होटल में तुमसे मिलने आ जाऊँ?”
नेहा ने मैसेज पढ़ा और मेरी तरफ देखा।
उसकी आँखों में एक मिश्रित भाव था — थोड़ी घबराहट, थोड़ी उत्तेजना।
वो मेरे पास बैठी थी, लैपटॉप पर हाथ रखे हुए।
मैंने उसकी तरफ देखा और धीरे से पूछा,
“क्या जवाब दोगी?”
नेहा ने होटल वाली बात पढ़ी और तुरंत जवाब दिया:
“No you silly... पहली बार कहीं और मिलते हैं... कैफे में।”
मुझे नेहा की समझदारी अच्छी लगी।
कम से कम वो हवस में बहकर कोई गलती नहीं कर रही थी।
अयान का जवाब आया: “OK”
जवाब थोड़ा मायूस लग रहा था।
हम दोनों को लगा था कि वो कुछ तो बोलेगा — जैसे “पहली बार मिलने के बाद होटल रूम में आऊँगा”, “बस एक किस करूँगा”... लेकिन कुछ नहीं।
बस “OK”।
उस रात अयान ने कहा कि उसे कुछ काम है और चैट बंद कर दी।
हम मुंबई गए।
वहाँ से नेहा ने उसे “हेलो” भेजा।
पहली बार उसका कोई रिप्लाई नहीं आया।
मैं अपने ऑफिस के काम पर गया जिसके लिए कंपनी ने भेजा था।
नेहा होटल में रही।
पूरे दिन वो अयान के “हेलो” का रिप्लाई आने का इंतज़ार करती रही।
शाम को हम घूमने गए — मॉल, बीच।
लेकिन नेहा का मन वहीं अटका हुआ था।
अयान का रिप्लाई नहीं आया।
हम वापस आ गए।
उसके बाद के दो दिन मैंने नेहा को उदास देखा।
अयान का कोई रिप्लाई नहीं आया।
उसने नेहा को सोशल मीडिया टर्म में ghost कर दिया था — एकदम से गायब हो जाना।
नेहा चुपचाप रहने लगी।
वो स्क्रीन देखती, फिर मोबाइल रख देती।
कभी-कभी मुझे देखकर हल्के से मुस्कुरा देती, लेकिन वो मुस्कान पहले जैसी नहीं थी।
मैं चुपचाप देखता रहता।
अंदर से मुझे थोड़ी राहत भी हो रही थी, लेकिन नेहा के उदास चेहरे को देखकर दुख भी हो रहा था।
मुंबई से आने के बाद भी अयान का कोई मैसेज नहीं आया।
हमारे दिन ऐसे ही निकल रहे थे।
नेहा और मेरे बीच बस किस से ज़्यादा कुछ नहीं हो रहा था।
पहले नई जगह, नया होटल देखकर हमारा मन करता था कि वहाँ नई गंदी यादें बना लें।
लेकिन अब वो उत्साह कम हो गया था।
इन दिनों “बेकार आदमी” से नेहा की बातें बढ़ रही थीं।
दूसरी तरफ जो भी था, वो थोड़ा समझदार लग रहा था मुझे।
क्योंकि वो नेहा को समझ रहा था — ठीक वैसे जैसे मैं समझाता हूँ।
नेहा ने उसे अयान के बारे में बता दिया था।
फिर भी उसने ये नहीं कहा कि “तुमने मुझसे मिलने के लिए क्यों नहीं कहा?”
जबकि वो खुद को पुणे का लोकल बताता था।
15 दिन हो गए।
अयान को कोई मैसेज नहीं।
नेहा जैसे किसी ब्रेकअप से निकल रही हो।
उदास, चुप, और थोड़ी खोई हुई।
फिर एक दिन “बेकार आदमी” से बात करते हुए नेहा ने टाइप किया:
“अरे सच में... मेरा पति साथ में है.... मैंने उसका लंड पकड़ा हुआ है।”
हम बहुत दिनों बाद ऐसा कुछ कर रहे थे।
सका जवाब आया:
“चल झूठी रंडी... तेरी गांड में इतना दम नहीं कि तू तेरे पति के सामने मुझसे बात करे।”
नेहा ने तुरंत लिखा:
“फोटो भेजूँ?”
“तेरी मर्जी।”
नेहा ने मुझे खड़ा किया, ताकि मैं फ्रेम में आ सकूँ।
मेरा लंड बाहर था।
उसने अपनी टी-शर्ट ऊपर चढ़ाई, ताकि उसकी रेड ब्रा दिख सके।
फिर उसने फोटो क्लिक की और भेज दी।
मैं समझ रहा था कि वो क्या कर रही है।
वो रीक्रिएट कर रही थी वो जो उसने अयान के साथ किया था।
वो थ्रिल, वो एक्साइटमेंट... सब कुछ।
ये पहला फोटो था जो नेहा ने “बेकार आदमी” को भेजा।
वो भी उसने नहीं माँगा था।
उसने जवाब में नेहा की तारीफ में गंदी बातें कीं, गालियाँ दीं।
मगर हम सेंस कर सकते थे कि उसकी बातों में अयान वाली एक्साइटमेंट नहीं थी।
उस रात हमने कुछ किया, लेकिन अयान के मुकाबले वो एक्साइटमेंट बस नाम मात्र का था।
नेहा अब भी अयान के बारे में सोचती थी।
कहीं उसे कुछ हो तो नहीं गया?
क्या हुआ होगा कि उसने कोई जवाब नहीं दिया?
वो कभी-कभी रात में उठकर लैपटॉप चेक करती थी।
क्योंकि हम ये चैट्स फोन से नहीं करते थे।
XXXXXXXXXXXX
[size=undefined]एक रात नेहा कुछ सोच रही थी।
उसका चेहरा थोड़ा गंभीर था।
मैंने आराम से पूछा,
“दिमाग में क्या चल रहा है?”
नेहा ने अचानक कहा,
“मैं बेकार आदमी से मिलना चाहती हूँ।”
मैंने पूछा, “क्या उसने बोला? तुमने...”
“नहीं... वो नहीं बोलता। फिर भी मैं मिलना चाहती हूँ।
मैं देखना चाहती हूँ कि ये सब सच भी है या नहीं... या ये भी अयान की तरह बस एक धोखा है।”
मैं समझ रहा था कि उसके दिमाग में क्या चल रहा है।
अयान के ghost हो जाने के बाद नेहा को एक तरह का खालीपन हो गया था।
वो ये जानना चाहती थी कि दूसरा वाला भी वैसा ही है या सच में कुछ है।
मैंने धीरे से कहा,
“हम्म... मुझे प्रॉब्लम नहीं है... मगर...”
नेहा ने तुरंत समझ लिया और बोली,
“हाँ... safe सेटअप। मैं समझ सकती हूँ कि तुम क्या बोलना चाह रहे हो।”
उसने मेरी तरफ देखा और बोली,
“मैं कल उससे बात करूँगी।”
अगले दिन जब “बेकार आदमी” ऑनलाइन आया, तो नेहा ने सीधे लिखा:
“तुम मिलना चाहोगे मुझसे?”
(ये नेहा ने अपने नंगे बूब्स की फोटो भेजने के बाद लिखा था — जैसे कोई रिश्वत दे रही हो।)
बेकार आदमी का जवाब तुरंत आया:
“आहhhh रंडी.... क्या गुब्बारे हैं तेरे.... मादरचोद चढ़ा कर दिया लंड...”
नेहा ने फिर लिखा:
“बोलो ना... मिलोगे?”
उसने जवाब दिया:
“हाँ रंडी... बता कहाँ मिलेगी... वहीं तुम्हें कुतिया बना कर चोदूँगा।”
नेहा ने बहुत शांत और समझदारी से लिखा:
“अरे अभी बस मिलना है... बाकी वहीं तय करेंगे कि मुझे क्या बनाओगे।”
बेकार आदमी ने फिर लिखा:
“ठीक है मदरचोद... तू बोल कहाँ और कब। मैं आ जाऊँगा।"
नेहा ने मैसेज पढ़ा और मेरी तरफ देखा।
उसके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान थी, लेकिन आँखों में थोड़ी घबराहट भी।
उसने मेरी तरफ देखकर धीरे से पूछा,
“अब क्या लिखूँ? जगह और टाइम...?”
नेहा ने बहुत शांत स्वर में लिखा:
“ठीक है... तुम कहाँ रहते हो?”
बेकार आदमी ने तुरंत जवाब दिया:
“मैं पिंपरी”
मैं पास में बैठा था। मैंने फोन उठाया और तुरंत “पिंपरी” सर्च कर लिया। नेहा को स्क्रीन दिखाया। उसने देखा और फिर टाइप किया:
“तुम्हारे वहाँ होटल है ना... इटालियन... 5 स्टार... वहाँ मिलते हैं।”
उसका जवाब आया:
“क्या स्टार? अच्छा रंडी... सीधे होटल बुला रही है।”
नेहा ने तुरंत स्पष्ट किया:
“अरे नहीं... उसके रेस्टोरेंट में मिलेंगे।”
“ओके... कब... कितने बजे?”
नेहा ने लिखा:
“फ्राइडे को...?”
“नहीं... संडे... दिन में मिलते हैं... 7 बजे?”
ये समय थोड़ा अजीब था, लेकिन नेहा ने सहमति जताई।
“क्या पहनकर आओगी?”
नेहा ने मुस्कुराते हुए लिखा:
“तुम्हें मैं कैसी पसंद हूँ?”
“मुझे तो नंगी आ जा...” फिर उसने तुरंत जोड़ा, “बढ़िया मॉडर्न कपड़े पहनकर आ ना... मॉडल जैसी।”
नेहा ने मैसेज पढ़ा और मेरी तरफ देखा। उसकी आँखों में एक मिश्रित भाव था — थोड़ी शरारत, थोड़ी घबराहट, और थोड़ी उत्तेजना।
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शाम के सात बजे हम “ला विटा” में बैठे थे।
नेहा मेरे सामने थी। उसका ब्लैक ड्रेस हल्का-हल्का चमक रहा था। वो टेबल क्लॉथ को उँगलियों से कसकर पकड़े हुए थी।
नेहा मेरे सामने बैठी थी। उसने एक सिंपल लेकिन बहुत खूबसूरत ब्लैक ड्रेस पहनी थी — घुटनों से थोड़ा ऊपर,
कंधों पर पतली स्ट्रैप्स, और गले में हल्का सा V-कट। उसके बाल खुले थे, हल्का मेकअप, और होंठों पर हल्का गुलाबी लिपस्टिक।
वो बहुत खूबसूरत लग रही थी... लेकिन उसका चेहरा थोड़ा तनावग्रस्त था।
“सैम... ये सही है ना?” उसने बहुत धीरे से पूछा। “मैं थोड़ा डर रही हूँ।”
मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और हल्का दबाया।
“रिलैक्स बेबी। हम सिर्फ मिल रहे हैं। बात करेंगे। पसंद आया तो आगे, नहीं आया तो कॉफ़ी पीकर निकल जाएँगे। कोई ज़ोर नहीं है।”
नेहा ने हल्का सिर हिलाया, लेकिन उसकी उँगलियाँ अभी भी टेबल क्लॉथ को पकड़े हुए थीं।
ठीक सात बजकर दस मिनट पर दरवाज़ा खुला।
मैंने उसे अच्छे से देखा।
बहुत पतला... बहुत ही पतला।
चेहरे पर हड्डियाँ साफ़ नज़र आ रही थीं। हाथ-पैर इतने दुबले कि लग रहा था जैसे शरीर में खून ही नहीं है। कंधे झुके हुए, कमर पतली। बाल थोड़े सफ़ेद मिश्रित, चेहरा थका हुआ।
बिल्कुल उस मुकेश की तरह लग रहा था — जो हर फिल्म में पहले ही मर जाता है। या सिगरेट के पुराने विज्ञापनों में वो पतला-दुबला आदमी जो सिगरेट पीते हुए दिखाया जाता था।
नेहा भी उसे देख रही थी। उसकी आँखों में एक पल के लिए हैरानी थी, लेकिन वो तुरंत संभल गई।
बेकार आदमी ने पहले मेरी तरफ देखा, फिर नेहा की तरफ।
आदमी हमारी टेबल की तरफ बढ़ा।
उसने नेहा को ऊपर से नीचे तक देखा। फिर नेहा की तरफ इशारा करके थोड़ी हिचकिचाती हुई आवाज़ में बोला,
“नेहा...?”
नेहा ने हल्का सा सिर हिलाया।
“हाँ... मैं नेहा हूँ।”
वो आदमी एक पल के लिए रुक गया। उसके चेहरे पर हैरानी साफ़ दिख रही थी। शायद उसे उम्मीद नहीं थी कि हम सच में आएँगे। उसे लग रहा था कि ये इंटरनेट का कोई मज़ाक है। उसकी आँखें थोड़ी फड़क रही थीं।
वो धीरे-धीरे कुर्सी पर बैठ गया।
उसकी आवाज़ काँप रही थी।
“अरे यार... तुम तो बहुत खूबसूरत हो।”
उसने नेहा को फिर से देखा, जैसे अभी भी यकीन नहीं हो रहा हो।
“तुम ये सब क्यों कर रही हो? मुझे लगा था या तो कोई आएगा नहीं... या आएगा तो बहुत बदसूरत होगा।”
उसकी आवाज़ में अभी भी थोड़ी कंपकंपी थी। जैसे वो डर रहा हो कि कहीं ये सब सच न हो जाए।
“बहनचोद... तू क्यों अपनी बीवी के साथ ये सब करने दे रहा है?”
वो इतनी जल्दी और पतली आवाज़ में बोल रहा था कि कुछ शब्द तो गड़बड़ हो रहे थे। लेकिन गाली साफ़ सुनाई दी।
नेहा मेरी तरफ देखने लगी। उसके चेहरे पर थोड़ी हैरानी थी।
मैं चुपचाप बैठा रहा।
बेकार आदमी अभी भी अपनी पतली, काँपती हुई आवाज़ में कुछ बोल रहा था, लेकिन अब हम उसकी बातें ठीक से सुन भी नहीं रहे थे।
नेहा भी मेरी तरफ देख रही थी।
उसकी आँखों में एक ही बात साफ़ लिखी थी — “यहाँ से निकल जाएँ।”
मुझे भी वैसा ही लग रहा था।
ये आदमी कीबोर्ड पर तो बहुत बोलता था, गालियाँ देता था, रफ़ बातें करता था... लेकिन सामने बैठकर देखने पर बिल्कुल फीका लग रहा था।
आवाज़ पतली, काँपती हुई।
न कोई कमांडिंग टोन, न कोई डॉमिनेंट फील।
बस एक दुबला-पतला, घबराया हुआ आदमी जो खुद को संभाल नहीं पा रहा था।
हम दोनों मन ही मन सोच रहे थे कि थोड़ी बहुत बात करके यहाँ से निकल जाएँ।
निकल जाएँ।
बेकार आदमी ने अचानक नेहा की तरफ देखा और पतली आवाज़ में पूछा,
“आज खाने में क्या बनाया है?”
नेहा एक पल के लिए रुक गई।
फिर उसके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान आ गई।
मुझे लगा वो सोच रही होगी — “ये वही है... जिससे मैं रोज़ घंटों बात करती हूँ।”
भले ही उसके दिमाग में उसका चेहरा कुछ और था, लेकिन ये वही आदमी था। जिसके साथ वो दिन के कई घंटे बिताती थी। उसकी बातों में एक मोह था। उसी मोह की वजह से आज वो यहाँ मिलने आई थी।
हालाँकि जैसा उसने सोचा था, वो बिल्कुल वैसा नहीं था।
नेहा ने धीरे से जवाब दिया,
“आज तो बाहर आए हैं... खाने का प्लान यहीं का है।”
वो आदमी ने हल्का सिर हिलाया।
“अच्छा...”
फिर थोड़ी देर चुप रहा।
उसकी उँगलियाँ टेबल पर हल्के-हल्के काँप रही थीं।
नेहा ने उसे देखा और पूछा,
“तुम ठीक हो?”
उसने हाँ में सिर हिलाया और बोला,
“हाँ... बस... थोड़ा अजीब लग रहा है।
तुम... फोटो में जैसी लग रही थीं... उससे भी ज्यादा अच्छी हो।”
नेहा ने हल्का मुस्कुराया।
मैं चुपचाप बैठा देख रहा था।
ये वही आदमी था जिससे नेहा महीनों से चैट करती थी।
रोज़ घंटों बातें।
रोज़ गंदी-गंदी बातें।
नेहा चैट पर बात करती थी और मैं नीचे बैठकर उसकी चूत चाटता था।
वो उन बातों से इतनी नशे में हो जाती थी कि उसका पूरा शरीर काँपने लगता था।
बेकार आदमी बहुत साधारण कपड़ों में था।
पुरानी चेक वाली शर्ट, जो कहीं-कहीं फीकी पड़ चुकी थी, और साधारण पैंट।
ऐसे कपड़े आजकल कोई मॉडर्न अपर मिडिल क्लास आदमी नहीं पहनता।
उसने अपनी उम्र बताई — 46 साल।
बोला कि शादी हो चुकी है, बच्चे भी हैं।
मुझे लगा वो फाइनेंशियली भी ज्यादा अच्छा नहीं है।
चेहरे पर थकान साफ़ दिख रही थी, जैसे रोज़ की मेहनत और टेंशन का बोझ हो।
नेहा उसे देख रही थी।
उसकी आँखों में एक अजीब सा भाव था — जैसे वो अभी भी चैट वाला “बेकार आदमी” ढूँढ रही हो, लेकिन सामने बैठा इंसान उससे काफी अलग था।
वो आदमी ने फिर नेहा की तरफ देखा और पतली आवाज़ में बोला,
“तुम... सच में बहुत खूबसूरत हो।
मुझे लगा था शायद फोटो एडिटेड होंगी... लेकिन नहीं... तुम वाकई में वैसी ही हो।”
नेहा ने हल्का मुस्कुराते हुए कहा,
“थैंक यू।”
नेहा ने बेकार आदमी की तरफ देखकर धीरे से कहा,
“तुम वैसे नहीं लग रहे जैसे मैंने सोचा था।”
वो आदमी ने हल्का सा मुस्कुराया। फिर उसकी पतली, थोड़ी काँपती हुई आवाज़ में बोला,
“मुझे नहीं लगा था कि वहाँ सामने कोई लड़की होगी।
हमने कभी ऑडियो पर बात नहीं की। मुझे हमेशा लगता था कि शायद कोई लड़का है... जो 45 साल के एक आदमी के साथ मज़े कर रहा है।
मुझे बातों में मज़ा आता था। वो डर्टी टॉक अच्छी लगती थी।
पर मुझे एक प्रतिशत भी चांस नहीं था कि सामने तुम जैसी कोई खूबसूरत लड़की होगी।
मुझे लगता था कि शायद लड़की हो सकती है, मगर वो बहुत गंदी और मोटी टाइप की होगी।
मुझे नहीं पता था... और ये मेरे लिए अच्छा ही काम किया।
अब ये मुझे पता होता कि सामने तुम जैसी खूबसूरत लड़की है और ये सब सच में है... एक पति-पत्नी, एक कपल के साथ ये सब करना चाहता हूँ... तो शायद मुझमें वो कॉन्फिडेंस ही नहीं आता तुमसे बात करने का।
मैं ऑलरेडी 46 साल का हूँ।
मुझे शाम के दो-तीन घंटे रात में मिलते थे। मैं उसमें तुमसे बात किया करता था।
ये तो बस मैंने चांस लिया यहाँ मिलने के लिए।”
उसकी आवाज़ में शर्म, हैरानी और थोड़ी सी खुशी सब मिली हुई थी।
नेहा ने धीरे से उसकी तरफ देखा और बोली,
“क्या हुआ? इतना घबरा क्यों रहे हो?”
वो बस सिर हिला और बहुत धीमी आवाज़ में बोला,
“पहली बार... किसी खूबसूरत लड़की के सामने बैठा हूँ... वो भी जिसके साथ दो महीने से रोज़ गंदी-गंदी बातें करता था।”
नेहा मुस्कुराई।
उसके अंदर फिर वही वाली गर्मी उठने लगी थी।
हम तीनों चुपचाप बैठे थे।
इधर-उधर की बातें हो रही थीं — मौसम, गोवा, खाना, ट्रैफिक... लेकिन जिस काम के लिए हम मिले थे, वो बात बिल्कुल भी नहीं हो पा रही थी।
न वो कुछ बोल पा रहा था, न हम।
हमने उसकी फैमिली के बारे में पूछा।
उसने धीरे से बताया,
“मैं बहुत साधारण फैमिली से हूँ। मेरी एक बीवी है, दो बच्चे हैं। एक दसवीं में पढ़ता है, दूसरा सातवीं में।”
फिर वो अपने परिवार के बारे में बताने लगा।
मैं और नेहा चुपचाप सुन रहे थे।
धीरे-धीरे चीज़ें क्लियर होती जा रही थीं।
अब मुझे याद आ रहा था कि हम जब भी उससे इंग्लिश में कुछ पूछते थे, वो कभी इंग्लिश में जवाब नहीं देता था। हमेशा हिंदी में, अपनी रफ़ लैंग्वेज में, गाली-गलौज के साथ जवाब देता था — जैसे कोई एक्ट कर रहा हो।
अब लग रहा था कि शायद उसे इंग्लिश आती ही नहीं थी।
या वो उस स्टेटस से बिलॉन्ग नहीं करता था जिस स्टेटस से हम बिलॉन्ग करते थे।
उसने बताया कि वो एक छोटी सी फैक्ट्री में काम करता है। सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे तक। घर पर बीवी और बच्चे इंतज़ार करते रहते हैं।
नेहा ने उसे ध्यान से देखा।
उसकी आँखों में अब न तो वो पुरानी चैट वाली उत्तेजना थी, न कोई खास भाव।
वो बस एक साधारण, मेहनतकश, 46 साल का आदमी था — जो चैट पर तो बहुत बोलता था, लेकिन सामने बैठकर घबरा रहा था।
मुझे अब साफ़ दिख रहा था — वो शायद कोई ब्लू कॉलर जॉब करता था। कोई फैक्ट्री या छोटी दुकान वाला काम।
अब हमारे दिमाग में बिल्कुल कहीं भी कोई एक्साइटमेंट नहीं बचा था।
जब हमने उसे इस फाइव-स्टार होटल में मिलने के लिए कहा, तो वो उस टाइम भी हिचकिचाया था।
“ये तो बहुत दूर है मेरी जगह से... हम कहीं छोटी जगह पे मिलते हैं ना, जैसे कोई साधारण रेस्टोरेंट या मैकडॉनल्ड्स वगैरह पे।”
नेहा ने धीरे से कहा,
“वहाँ आराम से बातें नहीं हो पाएगी।”
वो थोड़ा और हिचकिचाया, लेकिन आखिरकार मान गया।
शायद उसके दिमाग में ये डर था कि कहीं बिल उसे पे करना पड़े। पता नहीं कितने पैसे लगेंगे।
थोड़ी देर बाद वेटर आया।
हमने उसे बोला,
“दो बीयर ले आओ।”
फिर हमने उसकी तरफ देखा।
उसने हल्का सा सिर हिलाया।
नेहा ने मुस्कुराते हुए कहा,
“चलो, तीन ले आओ।”
वेटर चला गया।
हम थोड़ी देर और बैठे रहे।
तीन बीयर आ चुकी थीं।
नेहा और मुझे एकदम से उठकर जाना अजीब लग रहा था।
उसने एफर्ट लिया था हमसे मिलने का।
कर्टेसी बनती थी कि उसके साथ थोड़ी देर तो बैठें।
दो महीने से नेहा उसके साथ चैट करती थी, इमोशनल कनेक्शन भी था।
हमने सोचा — चलो, बीयर पीते हैं, इधर-उधर की बातें करते हैं।
उसे अच्छा लगेगा।
धीरे-धीरे हम तीनों को हल्का-हल्का नशा चढ़ने लगा था।
फिर दारू के बाद शायद उसमें थोड़ी हिम्मत आई।
उसने नेहा की तरफ देखा और थोड़ी काँपती हुई आवाज़ में पूछा,
“क्या तुम सच में वो सब करना चाहते हो... जो तुम नेट पर करते थे?”
नेहा ने एक पल के लिए मेरी तरफ देखा।
नेहा चुप थी।
उसने मेरी तरफ देखा। उसकी आँखों में एक सवाल था — जैसे वो चाहती थी कि मैं जवाब दूँ।
मैंने हल्का सा गला साफ़ किया और बोला,
“हमारा ड्रीम तो यही था कि हम किसी के साथ ये सब करना चाहते हैं।”
बेकार आदमी ने अचम्भे से हम दोनों को देखा।
उसकी पतली आवाज़ में हैरानी साफ़ झलक रही थी,
“मगर क्यों?
ये तो इतनी खूबसूरत है... और तुम पैसे वाले भी लगते हो।
मुझे नहीं लगता कि तुम पैसे के लिए ये सब करना चाहते हो।”
वो बोलते हुए बार-बार नेहा को देख रहा था।
मैंने हल्के से मुस्कुराकर कहा,
“पैसे की बात नहीं है। हम बस... नया कुछ ट्राई करना चाहते थे। कुछ अलग।”
मैंने हल्के से कंधे उचकाए और आगे बोला,
“क्योंकि हम दोनों को ये एक्साइटमेंट पसंद है। एक नया आदमी... नई बातें... नया माहौल। नेहा बहुत खूबसूरत है, ये सच है। लेकिन हमें बस... इस तरह के रिस्क और थ्रिल की आदत हो गई है।”
बेकार आदमी ने हमें ध्यान से देखा। उसकी पतली आँखें थोड़ी और चौड़ी हो गईं।
फिर उसने अगला सवाल किया,
“क्या तुमने ये पहले भी कभी किया है... किसी के साथ?”
मैंने हल्का सा सिर हिलाया और सीधे जवाब दिया,
“पहली बार हमने ऐसा किया है।”
हम एक इटालियन रेस्टोरेंट में थे।
जैज़ म्यूजिक हल्के से बज रहा था।
हमने जानबूझकर कॉर्नर वाली टेबल चुनी थी, ताकि आराम से बात हो सके।
लाइट्स मद्धिम थीं।
हम तीनों जानते थे कि आज की मीटिंग सिर्फ मिलने के लिए नहीं थी।
नेहा को भी पता था।
उसे भी लग रहा था कि शायद आज इससे ज़्यादा कुछ नहीं होने वाला।
मगर उसे ये भी लगता था कि शायद आज मिलने के बाद हम उसे दूसरा चांस नहीं देंगे।
क्योंकि उसकी कद-काठी उसे खुद पता थी।
ना वो हैंडसम था, ना डॉमिनेटिंग टाइप।
ना उसका शरीर ऐसा था कि किसी को इम्प्रेस कर सके।
वो बस चुपचाप बैठा था।
बार-बार नेहा को देखता, फिर नज़रें झुका लेता।
उसकी उँगलियाँ बीयर के ग्लास को कसकर पकड़े हुए थीं।
उसकी बातें खत्म ही नहीं हो रही थीं।
ऐसा लग रहा था कि ये उसका आखिरी चांस है — अपने से हाई सोसाइटी में बैठने का।
आते-जाते वेटर की नज़रें हम महसूस कर रहे थे।
वे उसे नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे।
मगर वहाँ लोग कम ही थे, इसलिए वेटर भी तब आ रहे थे जब हम कुछ मंगवा रहे थे।
बेकार आदमी ने अचानक मेरी तरफ देखा और थोड़ी हिचकिचाती हुई आवाज़ में पूछा,
“क्या मैं नेहा को और करीब से देख सकता हूँ?”
हमने ये एक्सपेक्ट नहीं किया था।
मैंने एक पल सोचा।
फिर अपनी कुर्सी से उठा और बोला,
“मैं वॉशरूम जा के आता हूँ।”
ये एक इशारा था।
मैं वहाँ से थोड़ी देर के लिए चला गया।
अपनी बीवी को उस आदमी की कंपनी में छोड़कर... जिसे वो चैट पर “रंडी” नाम से बुलाता था।
मैं सोच रहा था — जब मैं वापस आऊँगा तो क्या होगा?
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Park mai gupta ji walla bdhiya tha kuch aisha he aage seen laao gupta ji ke saath biscuit walla ..... Or woh seen jb negi chut lick kr rha tha neha nangi dono leg kholkr gaadi waala kuch unexpected seen laao or big update. ..... I love ur writing skills
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achha hai.. kuchh naya bhi.. not like other stories.
waiting for further update.
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Please Rate the story please
it give me motivaton to rate more
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मैं वॉशरूम के बाहर खड़ा था।
दरवाज़े के शीशे में अपना चेहरा देख रहा था।
दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था।
मैं सोच रहा था — जब मैं वापस आऊँगा तो क्या होगा?
क्या वो अभी भी बस बातें कर रहे होंगे?
या नेहा की ड्रेस का कोई बटन खुल गया होगा?
या उसका हाथ नेहा की जाँघ पर होगा?
या नेहा खुद उसकी तरफ झुककर कुछ फुसफुसा रही होगी?
मैंने जानबूझकर वॉशरूम में थोड़ा टाइम लगाया।
दरवाज़े के शीशे में अपना चेहरा देखा।
दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था।
हाथ हल्के से काँप रहे थे।
मुझे पता नहीं था कि मैं वापस जाकर क्या देखने वाला हूँ।
क्या बेकार आदमी ने मेरे वॉशरूम जाने के इशारे को समझ लिया होगा?
क्या नेहा उसे कुछ और करीब आने देगी?
क्या वो सिर्फ बातें कर रहे होंगे... या उसका हाथ अब नेहा की जाँघ पर होगा?
मैंने सोचा —
कम से कम नेहा को इतना फ्री टाइम तो देना चाहिए।
उसने उसके साथ घंटों बात की थी।
चाहे वो आदमी कितना भी साधारण, पतला और harmless क्यों न लग रहा हो...
अगर वो नेहा को थोड़ा क़रीब से देखना चाहता है...
शायद छूना भी चाहता हो... तो शायद आज वो मौका मिल जाए।
मैंने एक गहरी साँस ली और वॉशरूम का दरवाज़ा खोला।
मैं धीरे-धीरे टेबल की तरफ बढ़ा।
वॉशरूम से निकलते ही मुझे नेहा की हल्की-हल्की खिलखिलाती हँसी सुनाई दी।
बहुत नरम, बहुत हल्की।
शायद उस आदमी ने कोई बात कही थी, या नेहा बस दया में हँस रही थी।
डिम लाइट की वजह से मुझे पहले अच्छे से देखना पड़ा।
जब मैं पास पहुँचा तो साफ़ दिखा —
मेरा इशारा वो समझ गए थे।
बेकार आदमी अब वहीं बैठा था जहाँ मैं पहले बैठा हुआ था — नेहा के बिल्कुल पास।
कुर्सियाँ थोड़ी करीब हो गई थीं।
उसकी चेक शर्ट का कंधा नेहा के स्लीवलेस ड्रेस वाले कंधे से हल्का-हल्का टच हो रहा था।
मैं आगे बढ़कर उनके सामने वाली कुर्सी पर बैठ गया।
नेहा अभी भी किसी बात पर मुस्कुरा रही थी।
उसने मेरी तरफ देखा और हल्के से बोली,
“आ गया मूत कर ? बहुत टाइम लगा।”
मैंने उसकी तरफ देखा और हल्का सा मुस्कुराया।
“मैं तेरी जगह बैठ गया था... तुझे बैठना है क्या यहाँ?”
नेहा ने तुरंत सिर हिलाया,
“नहीं... ठीक है। तुम बैठो।”
उसके ग्लास खाली थे।
मैंने वेटर की तरफ इशारा किया और दोबारा बीयर का ऑर्डर रिपीट कर दिया।
बेकार आदमी चुपचाप बैठा था।
उसकी आँखें नेहा पर टिकी हुई थीं।
फिर से टेबल पर शांति छा गई।
पहले तो बातें चल रही थीं, लेकिन अब अचानक सब कुछ रुक सा गया।
मैंने हल्का सा मुस्कुराते हुए कहा,
“अरे शांत क्यों हो गए... बात करो... या मैं वापस जा दूँ?”
पहली बार मुझे लगा कि मैं थर्ड पर्सन हूँ।
एक नए मिले जोड़े के बीच में... वो जिसके सामने बात करने में उन्हें असहज हो रहा है।
अजीब सी फीलिंग थी।
बेकार आदमी ने नेहा की तरफ देखा और धीरे से बोला,
“बोलो... जो तुम बोल रही थी।”
नेहा ने हल्का सा सिर हिलाया।
उसकी उँगलियाँ अभी भी ग्लास को घुमा रही थीं।
वो मेरी तरफ एक नज़र डालकर फिर उस आदमी की तरफ मुड़ी और बात जारी रखने की कोशिश करने लगी।
नेहा ने बहुत शर्माते हुए, धीरे से और हिचकिचाते हुए बोला,
“मैं इनसे ये बात कर रही थी कि... जब हम चैट पर बातें करते थे... तो आपसे ये बोलते थे कि... मुझे गोद में उठाकर... you know... वो करेंगे...”
नेहा “चोदना” बोलने में शर्मा रही थी।
उसकी बातों में अचानक उस आदमी के लिए एक रेस्पेक्ट की भावना आ गई थी — शायद उसकी उम्र की वजह से।
बेकार आदमी ने उसका वाक्य पूरा किया। अब वो कम शर्मा रहा था।
दारू आदमी को थोड़ा साहसी तो बना ही देती है।
वो बोला,
“हाँ... मैं चोद सकता हूँ... तुझे गोद में उठाकर... बिना किसी सपोर्ट के।”
उसकी आवाज़ अब पहले से थोड़ी मोटी और कॉन्फिडेंट लग रही थी।
नेहा ने मेरी तरफ एक नज़र डाली।
उसके गाल हल्के लाल हो गए थे।
मैं चुपचाप बैठा दोनों को देख रहा था।
उसकी ये बात सुनकर मुझे भी हल्की-हल्की हँसी आ रही थी।
एक तो उसकी पतली, काँपती हुई आवाज़...
दूसरे, वो खुद इतना पतला-दुबला था कि लगता था कोई अच्छी-खासी वजन की चीज़ भी नहीं उठा सकता।
और वो मेरी 5'4" लंबी, लगभग 60 किलो की बीवी को गोद में उठाकर हवा में चोदने की बात कर रहा था।
मैंने खुद को रोकने की कोशिश की, लेकिन होंठों पर हँसी आ ही गई।
नेहा ने भी मेरी तरफ देखा। उसके चेहरे पर शर्म के साथ हल्की मुस्कान थी। वो भी समझ रही थी कि ये कितना अनरियल लग रहा है।
बेकार आदमी ने हम दोनों को देखा और थोड़ा शर्माया। फिर बोला,
“क्या... हँस क्यों रहे हो?
मैं सच कह रहा हूँ... उठा लूँगा...”
अभी उसकी किसी भी बात पर हम बहस नहीं कर रहे थे।
मुझे लग रहा था कि आज के बाद हम कभी भी नहीं मिलेंगे।
ये बस एक जिंदगी के छोटे से हिस्से को एंड देना था।
हम एन्जॉय कर रहे थे।
धीरे-धीरे उस आदमी के हाथ नेहा के हाथों को छू रहे थे।
वो बोला,
“मैं सच में उठा सकता हूँ... 50 किलो की बोरी मैं रोज़ उठा लेता हूँ।”
म दोनों — सोफिस्टिकेटेड आई टी प्रोफेशनल — आधी सच्ची आधी झूठी हँसी दे रहे थे।
उसे थोड़ा महत्वपूर्ण दिखा रहे थे।
नेहा ने कहा,
“हाँ क्यों नहीं...”
उसने उसके शर्ट के ऊपर से ऊपरी आर्म के मसल फील करते हुए कहा।
वो हँसने लगा।
नेहा और उस आदमी के चेहरे अब काफी करीब थे।
दोनों एक-दूसरे के मुँह की हवा महसूस कर रहे थे।
फिर उसने अपना मुँह नेहा के कान के पास ले गया... और कुछ कहा।
नेहा थोड़ी सी हँसी।
मेरी तरफ देखा।
“सैम... थोड़ा आँखें बंद करो।”
मेरा दिल धड़क गया।
मुझे पता था क्या होने वाला है।
नेहा का एक हाथ अभी भी उसकी बाजू पर था।
एक हाथ टेबल पर।
उस आदमी का एक हाथ नेहा के उसी हाथ को पकड़े हुए था।
वो उसकी पतली नाजुक उँगलियाँ छू रहा था।
दूसरा हाथ टेबल के नीचे... मुझे पता नहीं कहाँ था।
मैंने आस-पास देखा।
नेहा के उस हाथ को थामा जो टेबल पर था।
धीरे से बोला,
“बे केयरफुल।”
हमने ये सिनेरियो पहले डिस्कस किया था।
हमें लगा था ये हो सकता है... मगर तब हमने बेकार आदमी को कुछ और ही इमेजिन किया था।
वो आदमी शायद व्हिस्पर कर रहा था।
सिर्फ उसे पता था उसने नेहा के कान में क्या कहा।
मैंने बस अपनी आँखें बंद करने का नाटक किया।
वो दोनों भी ये जानते थे।
नेहा ने एक बार चारों तरफ देखा...
शुरू करने की कि कोई देख तो नहीं रहा।
फिर उसने चेहरा उस आदमी की तरफ घुमाया।
पिंक लिपस्टिक वाले उसके होंठ उसके सामने थे।
वो उसके चेहरे से ज्यादा दूर नहीं थे।
वो झुका।
उसके खुरदुरे होंठ नेहा के होंठों पर...
वो हल्के-हल्के किस कर रहा था।
स्मूच जैसा नहीं... बस किस।
मुझे एक बार को लगा — उसे अच्छे से किस करना भी नहीं आता।
किस खत्म हुआ तो नेहा ने धीरे से अपना चेहरा पीछे खींच लिया।
उसके गाल अब और भी लाल हो गए थे।
होंठ थोड़े से खुले हुए थे, जैसे अभी भी उसकी साँस ठीक से नहीं आई हो।
उसकी आँखें आधी बंद थीं।
मैं देख रहा था।
नेहा की साँसें थोड़ी तेज़ हो गई थीं।
उसके चेहरे पर एक अजीब सा मिश्रण था — शर्म, उत्तेजना, और थोड़ी सी हैरानी।
जैसे वो खुद को समझ नहीं पा रही हो कि उसने अभी क्या किया।
बेकार आदमी भी चुप था।
उसकी पतली गर्दन हल्की-हल्की काँप रही थी।
उसकी आँखें नेहा के होंठों पर टिकी हुई थीं।
लग रहा था जैसे वो अभी भी उस किस को महसूस कर रहा हो।
टेबल पर अचानक बहुत शांति हो गई।
नेहा ने धीरे से मेरी तरफ देखा।
उसकी आँखों में एक सवाल था... और साथ ही एक छोटी सी मुस्कान।
मुझे लगा —
ये किस छोटा था, लेकिन नेहा के अंदर कुछ हिल गया था।
शायद वो खुद भी समझ नहीं पा रही थी कि उसे अच्छा लगा या सिर्फ नया लगा।
नेहा का हाथ मेरे हाथ में था, जब वो आदमी उसे किस कर रहा था।
मैंने महसूस किया कि नेहा की बॉडी हल्की-हल्की काँप रही थी।
जब उसके खुरदुरे होंठ नेहा के नरम होंठों को छू रहे थे, तब नेहा की उँगलियाँ मेरे हाथ को और कसकर पकड़ रही थीं।
जब वो हटा, तो मेरा पूरा फोकस नेहा के चेहरे पर था।
उसकी आँखें बंद थीं।
होंठों पर हल्की-सी मुस्कान।
5 सेकंड तक वो वैसी ही रही... जैसे अभी भी उस kiss को महसूस कर रही हो।
फिर उसने आँखें खोलीं।
सबसे पहले चारों तरफ देखा... कहीं कोई देख तो नहीं रहा।
फिर मेरी तरफ देखा।
चेहरे पर भाव छुपाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसकी आँखों में excitement साफ़ झलक रहा था।
गाल हल्के लाल, साँसें थोड़ी तेज़।
नेहा ने मेरे हाथ को और कसकर दबाया।
बेकार आदमी भी चुप था। उसकी नज़रें अभी भी नेहा के होंठों पर टिकी हुई थीं।
बेकार आदमी और नेहा का एक-एक हाथ टेबल के नीचे था।
मुझे कुछ नहीं दिख रहा था, लेकिन नेहा के चेहरे से साफ़ लग रहा था कि कुछ चल रहा है।
उसकी साँसें थोड़ी-थोड़ी तेज़ हो रही थीं।
कभी-कभी वो हल्के से काँप जाती और तुरंत खुद को संभाल लेती।
मैंने अपनी घड़ी की तरफ देखा।
ये एक इशारा था नेहा के लिए — कि क्या हमें अब चलना चाहिए?
नेहा ने तुरंत मेरे हाथ को हल्का सा दबाया।
यानी — “अभी नहीं... मुझे और थोड़ा टाइम दो।”
मैंने हल्का मुस्कुराकर सिर हिला दिया।
वो बार-बार नीचे देख रही थी, फिर मेरी तरफ, फिर बेकार आदमी की तरफ।
मुझे अजीब सा लग रहा था।
कार आदमी अब और करीब आ चुका था।
उसकी कोहनी नेहा के बूब्स को हल्के-हल्के छू रही थी।
वो बार-बार इधर-उधर से टच कर रहा था, जैसे जानबूझकर छू रहा हो।
नेहा कुछ नहीं बोल रही थी।
पिछले 15 मिनट से टेबल पर पूरी तरह सन्नाटा छाया हुआ था।
कोई कुछ बोल नहीं रहा था।
मैं टेबल के सामने बैठा था।
टेबल के नीचे क्या हो रहा था, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था।
नेहा मेरी शक्ल की तरफ देख रही थी।
उसकी आँखों में एक शरारती चमक थी।
वो जानती थी कि मैं क्या मिस कर रहा हूँ।
वो जानती थी कि मैं जानना चाहता हूँ।
आखिर ये हम दोनों का खेल था।
नेहा ने अचानक कहा,
“इस चेयर पर आ जाओ।”
अभी तक मैं उनके सामने बैठा हुआ था।
मैं अपनी कुर्सी से उठा और नेहा के इशारे से साइड वाली कुर्सी पर जा बैठा।
अब वो आदमी नेहा के और करीब हो गया था।
फिर नेहा ने कुछ नहीं कहा।
उस आदमी ने अपना ग्लास उठाकर एक घूँट पिया और मुस्कुराया।
अब मुझे साफ़ दिख रहा था...
उसका हाथ नेहा की नंगी जाँघ पर था।
धीरे-धीरे ऊपर की तरफ सरक रहा था।
नेहा का एक हाथ उसकी जाँघ पर रखा हुआ था... जैसे उसे रोक भी रही हो और जाने भी दे रही हो।
मैं चुपचाप बैठा देख रहा था।
नेहा ने कल ही अपने लेग्स वैक्स करवाए थे।
उसकी गोरी टांगें डिम लाइट में भी हल्की-हल्की चमक रही थीं।
बेकार आदमी का हाथ धीरे-धीरे उन टांगों पर घूम रहा था।
वो बहुत हल्के-हल्के उन्हें सहला रहा था, जैसे कोई नाजुक चीज को छू रहा हो।
मैंने उसे देखते हुए गला साफ किया।
मेरा लंड भी खड़ा हो चुका था।
नेहा ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा,
“ये ‘बेकार आदमी’ क्या नाम हुआ? क्या ये तुम्हारा असली नाम है?”
वो आदमी नेहा की तरफ देखकर बोला,
“नहीं... बस ये तो चैट वाली वेबसाइट ने कहा कि कोई नाम रखो... तो मैंने रख लिया।
वरना ऐसा नाम कौन रखता है...”
नेहा ने फिर पूछा,
“तुमने ये नाम क्यों चुना?”
उसने थोड़ी मायूसी के साथ जवाब दिया,
“क्योंकि मैं बेकार हूँ... मैं मानता हूँ।
न पैसा कमा पाया... न परिवार को कुछ दे पाया...
न कोई इज्जत... न कोई खासियत...
सिवाय एक चीज के।”
नेहा ने हल्का सा मुस्कुराते हुए पूछा,
“क्या चीज?”
बेकार आदमी की उँगलियाँ अब नेहा की अंदरूनी जाँघों पर सरक चुकी थीं। बस एक इंच और आगे बढ़तीं तो वो नेहा की पैंटी के किनारे तक पहुँच जातीं।
नेहा ने उसका हाथ पकड़ रखा था, लेकिन उसकी पकड़ ढीली थी।
उँगलियाँ उसकी कलाई पर थीं, फिर भी उसने हाथ को पीछे नहीं खींचा।
उसकी जाँघें भी थोड़ी और खुल गई थीं।
मुझे अभी भी समझ नहीं आ रहा था कि वो उसे रोक रही है या खुद को और खोल रही है।
नेहा की साँसें तेज़ थीं। वो मेरी तरफ देख रही थी, लेकिन उसकी नज़रें बार-बार बेकार आदमी की उँगलियों की तरफ जा रही थीं।
मेरे दिमाग में बस यही बात घूम रही थी —
इतना आसान है नेहा के साथ करना?
मेरे दिमाग में बार-बार यही बात घूम रही थी —
क्या ये सब इतना आसान है मेरी बीवी के साथ?
आधे घंटे पहले नेहा मुझे बार-बार इशारा कर रही थी — “चलो, निकलते हैं।”
फिर थोड़ी देर बाद उसका मूड बदल गया।
थोड़ी इमोशनल बातें हुईं, थोड़ी तारीफें हुईं...
और अब... उसने अपनी हल्की सी टांगें खोल दी हैं।
बेकार आदमी की उँगलियाँ अब नेहा की जाँघों के सबसे अंदरूनी हिस्से पर थीं।
नेहा की साँसें तेज़ हो चुकी थीं।
उसका एक हाथ अभी भी मेरे हाथ में था, लेकिन दबाव बहुत ज़्यादा था।
मैं चुपचाप देख रहा था।
जलन हो रही थी।
उत्तेजना भी हो रही थी।
और सबसे बड़ा सवाल —
क्या नेहा को भी ये सब इतना आसान लग रहा है?
क्या उससे लोग ऑफिस में भी वैसे ही पटा लेते होंगे?
क्या कोई कहता होगा “मेरी सगाई टूट गई”... “मेरा ब्रेकअप हो गया”...
जैसे मैं अपनी एक्स गर्लफ्रेंड के साथ करता था।
क्या पेपर सही नहीं हुआ... फिर किस... फिर ब्लोजॉब...
क्या उसने भी ऑफिस के वॉशरूम में किसी-किसी का चूसा होगा?
दूसरा हिस्सा... उत्तेजना से काँप रहा था।
कैसे वो ये सब करने दे रही है... एक अनजान के साथ?
जिसे वो बस दो महीने की चैट से जानती है।
उसके हाथ उसकी जाँघों के बीच में हैं... और वो रोक नहीं रही।
वो जगह... जो सिर्फ़ मेरा हक था... सिर्फ़ मेरे पति का अधिकार था..
मेरा दूसरा हिस्सा बार-बार यही बात दोहरा रहा था —
"अरे, नेहा जो कुछ भी कर रही है, वो तेरे लिए कर रही है।
तूने ही उसे ये सब करने के लिए उकसाया है।
वो जानती है कि तू ये देखना चाहता था।
ये सब तुझे शो देने के लिए कर रही है।"
फिर भी मेरी छाती में जलन का एक तेज़ दर्द उठ रहा था।
मैं खुद से पूछ रहा था —
अगर ये सब मेरी ही इच्छा थी, अगर नेहा मेरे लिए ही ये सब कर रही है...
तो फिर मुझे इतनी जलन क्यों हो रही है?
क्यों मेरा दिल इतना ज़ोर से धड़क रहा है?
क्यों मुझे लग रहा है कि मेरी बीवी किसी और के हाथों में जा रही है?
नेहा अब पूरी तरह उस बात में खो चुकी थी।
नेहा ने हल्की-सी, भरी हुई साँस में, बहुत इरोटिक अंदाज़ में उसकी तरफ देखते हुए पूछा,
“क्या खास है तुममें?”
उसकी आवाज़ में अब शर्म नहीं थी।
सिर्फ़ गहरी उत्तेजना थी।
बेकार आदमी ने धीरे से मुस्कुराया।
उस आदमी ने नेहा की आँखों में गहरे देखते हुए पूछा,
“क्या सच में जानना चाहती हो... मैं मुझमें क्या खास है?”
नेहा ने इस बार उसकी आँखों में देखकर, बिना शर्माए, सीधे जवाब दिया,
“हाँ... मैं जानना चाहती हूँ।”
उसकी आवाज़ में अब कोई हिचकिचाहट नहीं थी।
साफ़, भरी हुई और थोड़ी सी नशे वाली।
उसने नेहा का हाथ अपने हाथों में ले लिया।
दूसरा हाथ... नेहा का एक हाथ अभी भी उसके एक हाथ के ऊपर था, जो उसकी जाँघों में बहुत ऊपर था। शायद नेहा की चूत की गर्मी महसूस कर रहा था, इस ठंडी एसी में भी।
उस आदमी ने खाकी रंग की ढीली पैंट पहनी हुई थी — जींस नहीं, पुरानी टाइप की पैंट, जैसी अंकल पहनते हैं। उसमें कोई तंबू नहीं बना हुआ था... लेकिन जब नेहा ने हाथ लगाया तो साफ़ महसूस हुआ कि उसका लंड दाईं तरफ लेटा हुआ है, बहुत मोटा और कड़ा।
लगभग आधी जाँघ तक फैला हुआ था।
नेहा ने हल्के से हाथ लगाया... दबाकर उसकी चौड़ाई फील की... पैंट के ऊपर से।
धीरे-धीरे नीचे की तरफ सरकाती हुई... वो देखना चाह रही थी कि वो कहाँ खत्म होता है।
मैं देख रहा था।
नेहा का मुँह खुला का खुला रह गया।
उसके चेहरे पर एक झटका सा आया।
उस आदमी के हाथ-पाँव बहुत पतले थे... लगता था उसका सारा खाना यहीं लग रहा था।
अब उसने नेहा का हाथ छोड़ दिया।
मगर नेहा ने हाथ नहीं हटाया।
वो अभी भी उसे छू रही थी... फील कर रही थी... आउटलाइन बनाकर मुझे दिखा रही थी।
उस आदमी ने कभी नेहा को, कभी मुझे देखा।
नेहा का पूरा फोकस वहाँ था, तो शायद उसने मौके का फायदा उठाया।
दूसरा हाथ और अंदर... पैंटी के ऊपर से चूत पर...
उसने दबाव दिया।
नेहा के मुँह से हल्की-सी “आह्ह...” निकल गई।
तभी हम दोनों होश में आए।
उधर से वेटर आता नज़र आया।
नेहा ने तुरंत हाथ हटाया और अपनी स्कर्ट नीचे की।
मगर उस आदमी ने हाथ नहीं हटाया।
वो अभी भी नेहा की जाँघ पर ही था।
वेटर पास आकर खड़ा हो गया।
वो टेबल के नीचे क्या हो रहा है, ये नहीं देख सकता था।
उसके कुछ बोलने से पहले ही बेकार आदमी ने सामान्य चिटचैट की तरह कहा,
“मैंने कहा था ना कि मैं बस एक चीज़ में बेकार नहीं हूँ।”
वेटर को कुछ अंदाज़ा भी नहीं था कि वो मेरी बीवी को अपने लंड के शेप और साइज़ की बात कर रहा है।
नेहा बस “हाँ... हाँ...” बोल पाई।
वेटर के वहाँ खड़े होने की वजह से या उसने कुछ किया, पता नहीं... लेकिन नेहा की स्कर्ट के नीचे उसका हाथ अभी भी था।
वेटर ने कहा,
“सर, एक प्राइवेट पार्टी की वजह से आधे घंटे में गेस्ट आना शुरू होंगे... तो क्या मैं आपका बिल ले आऊँ? या कोई लास्ट ऑर्डर है?”
नेहा ने मेरी तरफ बिना देखे ही कहा,
“3 बीयर प्लीज़... और एक सिज़लर।”
मतलब वो थोड़ा और टाइम चाहती थी।
उसे पता था कि सिज़लर एक ऐसी डिश है जिसे बनाने में टाइम लगता है।
ये थोड़ी देर और वेटर को दूर रख सकता है।
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Bhai please update big waala raha nhi ja rha yr ...... Jldi kl morning mai ek update yr
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