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Adultery Adventure of sam and neha
#61
हमारे रोल-प्ले वाले दिन अब खत्म हो चुके थे।

अब जब भी हम दोनों का मूड बनता...

मैं नेहा की पुरानी कहानियाँ सुनता।

बहुत डिटेल में।

ज्यादातर शराब पीते हुए।

और उसकी चूत चाटते हुए।

नेहा सोफे पर बैठती — जैसे कोई रानी हो।

मैं फर्श पर बैठता — जैसे उसका गुलाम।

उसे कभी मजबूर नहीं करना पड़ता।

मुझे ये तरीका बहुत पसंद था।


आज भी वही सीन था।

नेहा सोफे पर आराम से बैठी हुई थी।

उसकी टाँगें थोड़ी फैली हुई थीं।


वो सिर्फ़ एक ढीली शर्ट पहने हुए थी — नीचे कुछ नहीं।

मैं उसके पैरों के बीच फर्श पर बैठा था।

मेरा सिर उसकी जाँघों के बीच में।

मेरी जीभ धीरे-धीरे उसकी चूत को चाट रही थी।

शराब की बोतल साइड में रखी थी।

दोनों के ग्लास आधे भरे हुए थे।

नेहा ने मेरे बालों में उँगलियाँ फिराईं।

धीरे से पूछा —

“क्या मैं आगे जारी रखूँ?”

मैंने बिना सिर उठाए, उसकी चूत पर जीभ रखे हुए ही फुसफुसाया —

“हाँ... जारी रखो।”

जब वो कहानी सुनाती, मैं उसकी चूत चाटता रहता।

हर बार जब वो कोई गंदा वाकया बताती, उसकी चूत और गीली हो जाती।

मुझे हर बार नया थ्रिल मिलता।

धीरे-धीरे उसने सारी डिटेल्स बताईं।

वे लोग हर 6 महीने में एक बार ऐसा करते थे।

पहले सिर्फ अंकल और नेहा थे।

फिर बिल्लू भी शामिल हो गया।

अंकल ने बिल्लू को इसलिए शामिल किया क्योंकि रास्ते में उसका एक सुरक्षित ठिकाना था।

नेहा कहती — “मैं दिखाती थी कि मुझे बिल्लू पसंद नहीं है... लेकिन सच में मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं थी।”


उन्होंने नेहा को धीरे-धीरे सब सिखाया।

पहले बीड़ी... फिर सिगरेट... फिर बीयर।

नेहा हँसते हुए बताती — “पहली बार बीड़ी पीकर मैं बहुत खाँसी थी... लेकिन बाद में मज़ा आने लगा।”

फिर मजेदार हिस्से आए।

पहली बार जब नेहा ने दो लुंड साथ में चूसे।

वो झोपड़ी में थे।

बिल्लू खड़ा था, अंकल बैठा था।

नेहा घुटनों के बल बैठकर दोनों को बारी-बारी चूस रही थी।

“मेरा मुँह भर जाता था... दोनों के प्रीकम से... लेकिन मैं रुक नहीं रही थी।”

एक बार जब कोई उसकी चूत चाट रहा था, तब वो दूसरे का लुंड चूस रही थी।

“मेरा दिमाग उड़ गया था... एक तरफ जीभ अंदर... दूसरी तरफ लुंड मुँह में...”

एक बार दोनों ने उसकी चूत पर लुंड रगड़ा और उसके पूरे शरीर पर झड़ दिया।

“मेरा पेट, स्तन, चेहरा... सब सफेद हो गया था।”

बिल्लू दोनों में ज़्यादा क्रिएटिव था।

वो नई-नई चीजें ट्राई करता... फिर अंकल फॉलो करता।

एक बार दोनों ने नेहा की आर्मपिट (काँख) में लुंड डाला।

जैसे चूत हो।

दोनों ने काँख में चोदा... और फिर उसके स्तनों पर झड़ दिया।

नेहा ये सब सुनाते वक्त बहुत शर्माती भी थी... और बहुत गीली भी हो जाती थी।

मैं चाटता रहता... और वो कहानी आगे बढ़ाती रहती।

“कॉलेज खत्म होने के बाद मुझे जॉब मिल गई।

मैं पार्टी करने लगी... ड्रिंक, स्मोक...

लेकिन कभी भी इतना हाई नहीं हुआ जितना उन सस्ते, गंदे लड़कों के साथ हुआ।”

वो एक पल रुकी।

फिर मुस्कुराई — बहुत प्यारी, लेकिन थोड़ी शर्मीली मुस्कान।

“बिल्लू से आखिरी बार मिली थी जब मैं कॉलेज छोड़ रही थी।

वो बहुत उदास था।

मुझे बार-बार गले लगाया... अनगिनत बार किस किया।

रो रहा था...”

मैंने बिना हिचकिचाहट के कहा — “और अंकल से..."

फिर उसने अपनी उँगली दाँतों में दबाई।

थोड़ा शरमाते हुए बोली —

“और अंकल से... आखिरी बार... हमारी शादी से कुछ दिन पहले मिली थी।”


ने सिर उठाया।

उसकी आँखों में देखा।

नेहा ने मेरी तरफ देखकर पूछा —

“तुम... पक्का जानना चाहते हो?”

मैंने बिना हिचकिचाहट के कहा —

“हाँ... बताओ।”

नेहा ने गहरी साँस ली।

फिर बहुत धीरे से बोली —

“शादी से कुछ दिन पहले... हम एक मूवी हॉल में गए थे।

अंधेरा था... पिछली सीट पर।

मैंने उसे BJ दिया... वहीं... हॉल में।

वो रो रहा था...

मेरी आँखों में भी आँसू थे...

फिर भी मैं उसके लुंड को चूस रही थी।

वो मुझे खुश कर रहा था... मैं उसे।

मैंने उससे मिन्नत की — ‘होटल चलो... मुझे चोद दो...

मैं तैयार हूँ।’

लेकिन वो... जैसे कोई बड़ा भाई... समझाने लगा।

‘तुम्हें अपने पति के लिए वर्जिन रहना चाहिए।

उसका सम्मान कभी मत तोड़ना।

हमारे बारे में कभी मत बताना।’

वो मुझे समझा रहा था...

और मैं... उसके लुंड को मुँह में लिए हुए... आँसू बहा रही थी।”

नेहा की आवाज़ थोड़ी काँप गई।

मैंने अपनी जीभ को और गहराई में डाला।

वो हल्का-सा काँपी।

“वो... हमेशा मुझे अच्छी लड़की बनाए रखना चाहता था...

भले ही मैं खुद कितनी गंदी हो चुकी थी।”


वो सोफे पर बैठी थी, मेरे बालों में उँगलियाँ फिरा रही थी।


उसने गहरी साँस ली और बोली —

“हमने सब कुछ बहुत सावधानी से किया था...

लेकिन फिर भी... कुछ बातें लीक हो गईं।

कॉलेज के कुछ जलन वाले लड़के... जो मुझे कभी हासिल नहीं कर पाए...

उन्होंने अफवाहें फैला दीं।

कुछ लोगों ने उन बातों पर यकीन कर लिया... कुछ ने नहीं।

इसी वजह से... जब तुम्हें मेरी शादी का प्रस्ताव आया...

कुछ लोगों ने तुम्हें मना करने की सलाह दी होगी...

‘इस लड़की से मत शादी करना... इसके बारे में ये-ये बातें हैं...’”

वो थोड़ा रुकी।

फिर मेरे बालों को हल्का-सा खींचते हुए मुस्कुराई —

“तुमने उन बातों को कभी नहीं पूछा...

न कभी मुझे जज किया।

बस... मुझे स्वीकार कर लिया।”

मैंने सिर उठाया।

उसकी आँखों में देखा।

मेरे होंठ अभी भी उसके रस से गीले थे।

“मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता था, नेहा।

मुझे सिर्फ़ तुम चाहिए थीं...

जैसी तुम हो... वैसी।

मैंने पूछा —

“तुम्हारा गाँव तो छोटा था...

तुम्हारी शादी में आया था क्या?

क्या मैंने उसे देखा है?”

नेहा थोड़ा शरमा गई।

उसके गाल लाल हो गए।

वो मेरी तरफ देखकर हल्की-सी मुस्कुराई और शर्माते हुए बोली —

“हाँ... वो आया था।

स्टेज पर आकर हमने साथ फोटो भी खिंचवाई थी।

पापा ने तुमसे मिलवाया था...

और पापा ने कहा था — ‘ये नेगी जी हैं’।”

मैं एक पल के लिए स्तब्ध रह गया।

“नेगी जी”
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#62
Update fast super story
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#63
pls update
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#64
ज़िंदगी अब अच्छी चल रही थी।

सेक्स लाइफ अपने पीक पर थी — एरोटिक, इंटेंस, और हर रात नई।

नेहा की पुरानी कहानियाँ सुनते-सुनते हम दोनों और करीब आ गए थे।

लेकिन सोशल लाइफ भी तो थी।


एक शाम कॉलोनी का पार्टी था — सिर्फ़ मर्दों का।

हम सब क्लब में बैठे थे, ग्रुप में।

हँसी-मज़ाक, शराब, गप्पें।


मैं भी हँस रहा था, लेकिन अंदर से कुछ अजीब सा अहसास हो रहा था।

गुप्ता जी वहाँ थे।

जब से उस दिन उन्होंने मुझे दरवाज़े पर घुटनों के बल, लगभग नंगा देखा था...

मैं कभी भी उनसे अकेले नहीं मिला।

हमेशा बचता रहा।

आज पार्टी में मैंने ज़्यादा ड्रिंक कर ली।

नेहा ऑफिस टूर पर थी, तो मैंने कहा — “आज तो पी सकता हूँ, नेहा नहीं है।”

गुप्ता जी ने मुझे ध्यान से देखा।

उनकी नज़र में वो पुरानी बात साफ़ झलक रही थी।

पार्टी खत्म होने के बाद मैं घर आ गया।

10 मिनट बाद दरवाज़े की बेल बजी।

दरवाज़ा खोला तो सामने गुप्ता जी खड़े थे।

“आ सकता हूँ?”

उनकी आवाज़ में वो पुरानी मुस्कान थी।

मैं एक पल के लिए फ्रीज हो गया।

दिल ज़ोर से धड़कने लगा।

मेरा दिमाग तुरंत उस दिन पर चला गया — जब उन्होंने मुझे घुटनों के बल देखा था।

मैंने दरवाज़ा थोड़ा और खोला।

“जी... आइए।”

गुप्ता जी अंदर आए।

मैंने दरवाज़ा बंद किया।

वो सोफे पर बैठ गए।वे थोड़े नशे में थे, लेकिन संभले हुए।

मैं भी पी रखा था।

वे सोफे पर बैठ गए।

मैं उनके सामने बैठ गया।

गुप्ता जी ने सीधे पॉइंट पर आते हुए कहा —

“उस दिन... मैंने तुम्हें देख लिया था।”

मैंने बस “हम्म” कर दिया।

वे आगे बोले —

“सॉरी... तुम्हें ये देखना पड़ा... हम बस खेल रहे थे।”

गुप्ता जी मुस्कुराए।

उनकी आँखों में वो पुरानी चमक थी।

“मैं जानता हूँ तुम क्या कर रहे थे।

मैं उम्रदराज़ हूँ... अनुभव है... बहुत कुछ देखा है।”

मैंने फिर कहा —

“हम्म... लेकिन वो हमारा पर्सनल मैटर है।”

गुप्ता जी ने शराब का घूँट लिया।

“देखो बेटा... तुम्हारी बीवी बहुत अच्छी लड़की है।

खूबसूरत... सेक्सी...”


उन्होंने “सेक्सी” शब्द को पूरा करने में थोड़ा रुकावट ली, जैसे शब्द को सही से बोलने में हिचकिचा रहे हों।


“लेकिन मेरा तुम दोनों को एक सलाह है...

उसे बिगाड़ मत।

मैं जानता हूँ, जवानी में लोग ऐसे खेल खेलते हैं... सेक्स लाइफ में मसाला डालने के लिए।

लेकिन इसे ज़्यादा मत बढ़ाओ।

उसे इस तरह मत बना दो।”


वे थोड़ा रुके, फिर आगे बोले —

“हमारी बीवियाँ हमारी प्रॉपर्टी की तरह होती हैं।

प्रॉपर्टी का ख्याल रखना चाहिए।

हम उसके सिर में ऐसे आइडिया नहीं डालना चाहिए।”

फिर उन्होंने मर्दाना अंदाज़ में, थोड़े शोख स्वर में कहा —

“तुम्हें अपनी ज़िंदगी की कमान अपनी बीवी के हाथ में नहीं देनी चाहिए।

क्या पता... वो और माँगे...

क्या पता... वो और एक्सपेरिमेंट करना चाहे...

तुम समझ रहे हो ना क्या मतलब है मेरा?”


गुप्ता जी ने शराब का घूँट लिया और अपनी क्रोच को एडजस्ट किया।

उन्होंने हाथ से हल्का-हल्का रगड़ा, जैसे कुछ असहज हो।

फिर मेरी तरफ देखकर बोले —

“समझ रहे हो ना मैं क्या कह रहा हूँ?”

इस बार उनकी आवाज़ थोड़ी ऊँची और सख्त थी।

मैंने बस “हम्म” कर दिया।

वे आगे बढ़े, अब और सीधे —

“क्या पता... वो एक और मर्द ले आए... फिर क्या करोगे?

तुम जानते हो... मैंने देखा है... मेरा बेटा तुम्हारी बीवी को शॉर्ट कपड़ों में देखकर...

वो क्या कर रहा था?

हाथ हिला रहा था... जर्क कर रहा था...

तुम बेवकूफ... मैं अपने बेटे को रोक नहीं सकता... वो 19 साल का है...

लेकिन तुम... अपनी बीवी को रोक सकते हो... भैंचोद।”


उनका आखिरी शब्द “भैंचोद” इतना अचानक और कड़क आया कि मैं चौंक गया।

गुप्ता जी ने फिर अपनी क्रोच को रगड़ा।

उनकी आँखें मेरी आँखों में गड़ी हुई थीं।

गुप्ता जी की आँखें मेरी आँखों में गड़ी हुई थीं।

वे इंतज़ार कर रहे थे।

मैंने शराब का एक और घूँट लिया।

गला सूख रहा था।

मैंने धीरे से कहा —

“गुप्ता जी... वो... सिर्फ़ एक रोल-प्ले था।

हम दोनों का... प्राइवेट।


नेहा को... कभी-कभी... ऐसे खेल पसंद आ जाते हैं।

मैं... बस... उसे खुश रखने के लिए...”

गुप्ता जी ने बीच में ही हाथ उठाकर मुझे रोक दिया।

उनके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी, लेकिन आँखें सख्त थीं।

“रोल-प्ले?

अच्छा।

लेकिन बेटा... मैंने देखा था।

तुम घुटनों के बल थे... लगभग नंगे...

और नेहा खड़ी थी... जैसे कमांड दे रही हो।

ये रोल-प्ले नहीं... ये पावर शिफ्ट था।”

वे आगे झुके।

आवाज़ अब और धीमी, लेकिन और साफ़ थी —


“मैं तुम्हें कुछ नहीं बताऊँगा।

न किसी को।

लेकिन सुन लो...

अगर तुमने अपनी बीवी को ये सब सिखा दिया...

तो एक दिन वो तुमसे ज़्यादा माँगेगी।

एक और मर्द... फिर एक और...

फिर तुम क्या करोगे?

तुम्हें लगता है कि तुम कंट्रोल में हो...

लेकिन असल में... वो कंट्रोल में आ जाएगी।”

मैं चुप रहा।


गुप्ता जी ने फिर अपनी क्रोच को हल्का-सा रगड़ा और बोले —

“मैंने देखा है... कितनी सुंदर है तुम्हारी बीवी।

कितनी क्लासी लगती है।

लेकिन अगर तुमने उसे ये गंदा खेल सिखा दिया...

तो वो क्लासी बीवी... एक दिन... किसी और के सामने घुटनों के बल बैठ जाएगी।

समझे?”


मैंने गुप्ता जी को पहले कभी इस रूप में नहीं देखा था।


वे हमेशा शांत, सभ्य और एलीगेंट दिखते थे — कॉलोनी के रेस्पेक्टेड आदमी।

लेकिन आज... शराब के नशे में... वे बिल्कुल अलग लग रहे थे।

वे मेरे सामने बैठे थे, आँखें लाल, आवाज़ भारी।

उन्होंने फिर से अपनी क्रोच को रगड़ा — इस बार और ज़ोर से।

“समझ रहे हो ना...

अगर एक दिन तुम अपनी बीवी को किसी और के सामने घुटनों के बल देख लो...

क्या करोगे?

वो किसी और का लुंड चूस रही हो...

तुम क्या करोगे, सैम?”

मेरा गला सूख गया।

मैंने हल्का-सा सिर हिलाया और बोला —

“गुप्ता जी... मैं... सोच लूँगा।

और... ये सब... फिर से मत कीजिए।”

वे हँसे।

हँसी में शराब और गुस्सा दोनों थे।

“सोच लूँगा?

अच्छा।

सोच लेना।

लेकिन याद रखना...

जब वो दिन आएगा... तब सोचने का समय नहीं मिलेगा।

तुम्हारी बीवी... अभी अच्छी है... लेकिन अगर तुमने उसे ये रास्ता दिखा दिया...

तो वो रास्ता कभी खत्म नहीं होता।”

शराब का नशा उनके चेहरे पर साफ़ दिख रहा था, लेकिन उनकी आवाज़ अभी भी सख्त थी।

“एक आखिरी सलाह...

नेहा को बालकनी में प्रोवोकेटिव कपड़े पहनने के लिए मत कहना।

मेरा बेटा... पढ़ाई से ध्यान हट गया है।

वो अब ठीक से चल भी नहीं पा रहा...


सब तुम्हारी बीवी की वजह से।”

वे दरवाज़े की तरफ बढ़े।

मैं भी उनके साथ उठा।

वे थोड़े लड़खड़ा रहे थे।

मैंने अपना कंधा दिया।

“चलिए... मैं आपको आपके फ्लैट तक छोड़ देता हूँ।”

गुप्ता जी मेरे कंधे का सहारा लेकर चलने लगे।

हम दोनों धीरे-धीरे गलियारे में बढ़ रहे थे।

तभी... मैंने महसूस किया।

उनका शरीर मेरे शरीर से सटा हुआ था।

उनका... हार्ड-ऑन... मेरी कमर पर दब रहा था।

मैं चौंक गया।

लेकिन कुछ नहीं बोला।

वे नशे में थे... या जानबूझकर... पता नहीं।

गुप्ता जी ने दरवाज़े पर रुककर एक बार फिर मुड़कर मुझे देखा।

उनकी आँखें अब थोड़ी और गहरी हो गई थीं।

वे धीरे से बोले —

“और हाँ... मेरे बेटे की पढ़ाई का भी ध्यान रखना।

वो 19 साल का है... अभी 12th में है... लेकिन पिछले कुछ महीनों से उसकी पढ़ाई पूरी तरह बिगड़ गई है।

रात को देर तक जागता है... दिन में नींद में रहता है... टेस्ट में मार्क्स गिर गए हैं।”

वे एक पल रुके, फिर थोड़ा और आगे बढ़कर बोले —

“मैंने पूछा तो उसने कुछ नहीं बताया... लेकिन मैं जानता हूँ क्या चल रहा है।

वो बालकनी में तुम्हारी बीवी को देखता रहता है... जब वो शॉर्ट कपड़ों में या टाइट टॉप में होती है।

उसकी नज़रें... घंटों बालकनी की तरफ लगी रहती हैं।

पढ़ाई छूट गई... सब कुछ छूट गया।

मैं उसे डाँटता हूँ... लेकिन वो कहता है — ‘पापा, आप नहीं समझोगे।’”

गुप्ता जी ने अपनी क्रोच को फिर हल्का-सा रगड़ा और आगे कहा —

“मैं जानता हूँ... युवा लड़के हैं... हॉर्मोन चल रहे हैं।

लेकिन तुम्हारी बीवी... इतनी खूबसूरत और आकर्षक है कि वो खुद को रोक नहीं पा रहा।

तुम समझ रहे हो ना... मैं क्या कह रहा हूँ?

अगर तुम अपनी बीवी को बालकनी में या घर के बाहर ऐसे कपड़े पहनने के लिए कहते रहोगे...

तो मेरे बेटे जैसा और भी बहुत से लड़के... तुम्हारी बीवी को देखकर अपना भविष्य बर्बाद कर लेंगे।”

वे थोड़ा रुके, फिर आखिरी वाक्य बोले —

“मैं तुम्हें दोष नहीं दे रहा... लेकिन सोचो...

तुम्हारी बीवी की एक छोटी-सी लापरवाही... कितने घरों में तूफान ला सकती है।

अपनी बीवी को संभालो... वरना... बाद में पछताना पड़ेगा।”

गुप्ता जी ने आखिरी बार मुझे देखा।

फिर मुड़कर अपने फ्लैट में चले गए।

फिर मुड़कर अपने फ्लैट में चले गए।

मैं दरवाज़ा बंद करके सोफे पर बैठ गया।

मेरा दिमाग पूरी तरह उलझ गया था।

गुप्ता जी चले गए थे, लेकिन उनके शब्द अभी भी मेरे दिमाग में गूँज रहे थे।

मैं समझ नहीं पा रहा था कि वे असल में क्या चाहते थे।

क्या वे मुझे "समझाने" आए थे?

क्या वे मुझे "जागरूक" करना चाहते थे कि उनका बेटा नेहा को देखकर पढ़ाई छोड़ रहा है?

या... वे बस मेरी बीवी के बारे में गंदी बातें सुनना चाहते थे?

सबसे अजीब बात ये थी कि उन्होंने सारी "सलाह" देते हुए अपनी क्रोच को बार-बार रगड़ा था।

मैंने सोचा —

वे मुझे "चेतावनी" दे रहे हैं कि नेहा को बिगाड़ मत, लेकिन खुद उनका लुंड सख्त हो रहा था जब वे नेहा के बारे में बात कर रहे थे।

क्या वे खुद नेहा को देखकर उत्तेजित हो रहे हैं?

क्या वे अपने बेटे के माध्यम से नेहा के बारे में कल्पना कर रहे हैं?

या वे चाहते हैं कि मैं उन्हें और डिटेल्स बताऊँ — कि नेहा क्या-क्या करती है?

सबसे अजीब ये था कि वे "सलाह" देते समय बार-बार "भैंचोद", "किसी और के सामने घुटनों के बल बैठ जाएगी", "सेक्सी" जैसे शब्द इस्तेमाल कर रहे थे।

जो व्यक्ति "प्रॉपर्टी" और "सम्मान" की बात कर रहा हो, वो इतनी गंदी भाषा क्यों इस्तेमाल कर रहा है?

मैंने शराब का ग्लास उठाया।

एक घूँट लिया।

मैंने आँखें बंद कीं।

कल्पना में... गुप्ता जी का बेटा... बालकनी में खड़ा... नेहा को शॉर्ट कपड़ों में देख रहा है... और हाथ हिला रहा है।

मेरा लुंड... अनजाने में... हल्का-सा सख्त हो गया।

मैंने खुद को झिड़का — “क्या सोच रहा है तू...?”

लेकिन मन में एक सवाल बार-बार घूम रहा था —

“क्या नेहा को पता है कि गुप्ता जी का बेटा उसे इस तरह देखता है?”
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#65
गुप्ता जी की बातें मैंने कुछ दिनों तक अपने अंदर ही रखीं।

हर रात सोते समय, हर सुबह उठते समय, वो शब्द मेरे दिमाग में घूमते रहते —

“तुम बेवकूफ... अपनी बीवी को रोक सकते हो... भैंचोद।”

“अगर एक दिन तुम अपनी बीवी को किसी और के सामने घुटनों के बल देख लो...”

आखिरकार एक शाम मैंने फैसला कर लिया कि नेहा को बता दूँगा।

हम दोनों ड्रिंक कर रहे थे।

नेहा किचन में खड़ी थी — सिर्फ़ एक ढीली टी-शर्ट और पैंटी पहने हुए।

ताज़ा नहाई हुई थी, उसके शरीर से वो ताज़ा, एक्सोटिक खुशबू आ रही थी जो मुझे हमेशा पागल कर देती है।

मैं शॉर्ट्स में था।

मैं पीछे से उसके पास गया।

उसकी कमर से लिपट गया और गर्दन पर किस किया।

वो मुस्कुराई।

मुझे महसूस हुआ कि मेरा लुंड उसकी गांड से सट गया है — पूरी तरह सख्त।

“इतनी जल्दी तैयार हो गया?”

वो हँसते हुए बोली।

मैंने उसे और कसकर पकड़ा।

उसकी गर्दन पर किस करते हुए धीरे से बोला —

“नेहा... मुझे कुछ बताना है।”

“बोलो ना...”

वो मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखी।

मैंने थोड़ा हिचकिचाते हुए कहा —

“तुम्हें... गुप्ता जी याद हैं ना?

उस दिन... जब उन्होंने मुझे...”

नेहा ने मेरी बात बीच में ही काट दी।

वो हँसते हुए बोली —

“ओह्हो... अभी भी उस बात पर अटके हो?

मैंने बताया था ना... वो बस... मूड में आ गया था।

हीट ऑफ द मोमेंट था...”

वो हँस दी — हल्की, शरारती हँसी।

उसकी आँखों में वो पुरानी चमक थी।

“तुम अभी भी सोच रहे हो उस बारे में?

अरे... वो तो बस खेल था।

तुम इतना सीरियस क्यों हो जाते हो?”

मैं चुप रहा।

नेहा ने चम्मच रख दिया, मेरी तरफ मुड़ी और मेरे सीने पर हाथ रखकर बोली —

“सैम... सच बताऊँ?

मुझे तो मज़ा आया था...

तुम्हें नहीं आया क्या?”

वो फिर हँसी।

मैंने उसे देखा — वो बिल्कुल सहज थी, जैसे वो दिन कोई बड़ी बात ही न हो।

मैंने नेहा को कसकर गले लगाया।

फिर धीरे से उसके कान में कहा —

“नहीं... मैं अपसेट नहीं हूँ।

मुझे तुमसे कुछ बताना है।”

नेहा ने मुझे देखा।


“क्या?”

मैंने थोड़ा हिचकिचाते हुए कहा —

“प्रॉमिस करो... तुम अपसेट नहीं होओगी?”

नेहा ने हल्का-सा मुस्कुराते हुए मेरे गाल पर हाथ फेरा और बोली —

“नहीं... बताओ ना।”

मैंने गहरी साँस ली।

फिर... गुप्ता जी की सारी बातें बता दीं —

कि उन्होंने मुझे “सलाह” दी, कि नेहा को “बिगाड़ने” से बचना चाहिए, कि “बीवी प्रॉपर्टी होती है”, कि “कमान बीवी के हाथ में नहीं देनी चाहिए”, और आखिर में वो “भैंचोद” वाला शब्द भी।

बस... मैंने उनके बेटे (राहुल) वाली बात नहीं बताई — कि वो नेहा को देखकर पढ़ाई छोड़ रहा है और जर्क कर रहा है।

वो हिस्सा मैंने छुपा लिया।

नेहा पूरी बात सुनती रही।

उसका चेहरा पहले थोड़ा शर्म से लाल हुआ, फिर गंभीर हो गया।

जब मैं खत्म कर चुका, तो वो एक पल चुप रही।

फिर... अचानक ज़ोर से हँस पड़ी।

एक लंबी, खुली, जोरदार हँसी।

उसकी हँसी इतनी अनपेक्षित थी कि मैं घबरा गया।

मैंने सोचा था कि वो अपसेट हो जाएगी...

या गुस्सा करेगी...

या कहेगी कि “तुमने गुप्ता जी को क्यों नहीं रोका?”

या शायद खुद गुप्ता जी से बात करने का फैसला कर लेगी।

लेकिन वो... बस हँस रही थी।

मैं कन्फ्यूज्ड हो गया।

“क्या हुआ?”

नेहा हँसते-हँसते मेरी तरफ आई।

उसने मेरे गालों को दोनों हाथों से पकड़ा और अभी भी हँसते हुए बोली —

“सैम... तुम सच में... बहुत प्यारे हो।

गुप्ता जी ने तुम्हें पूरी लेक्चर दे दी...

और तुम... अभी भी सोच रहे हो कि मैं अपसेट हो जाऊँगी?”


नेहा हँसना बंद कर चुकी थी।

वो मेरी आँखों में देख रही थी।

फिर... उसने अपना हाथ नीचे ले जाकर मेरे हार्ड लुंड को पकड़ लिया।

“तो... यही वजह है कि ये पहले से ही इतना सख्त हो गया है...

तुम नॉटी हो...”

वो फिर हँस पड़ी।

मैंने जल्दी से कहा —

“ऑफकोर्स नहीं... ये तो तुम्हारी वजह से है...”

लेकिन नेहा ने मेरी बात बीच में ही काट दी।

वो अभी भी हँसते हुए बोली —

“तुम नॉटी हो...

और ये सोच रहे थे कि मैं सैड हो जाऊँगी?

क्यों?

मैंने थोड़ा शर्माते हुए कहा —

“शायद... क्योंकि मुझे लगा कि तुम्हें पसंद नहीं आएगा कि उन्होंने मेरे बारे में... या तुम्हारे बारे में... ऐसा कहा।”

नेहा ने मेरे लुंड को और अच्छे से पकड़ लिया।

धीरे-धीरे रगड़ते हुए बोली —

“ओह्ह डियर बेबी...

ये पुराने आदमी... सब एक जैसे होते हैं।

हम औरतें... उनकी नीयत बहुत अच्छे से जानती हैं।”

वो हँसी — एक छोटी, चुलबुली हँसी।

फिर मेरे लुंड को और तेज़ी से सहलाते हुए बोली —

“ये सोसाइटी वाले बूढ़े... स्ट्रीट डॉग्स जैसे होते हैं।

भौंकते रहते हैं... नये आदमी पर भौंकते हैं...

लेकिन अगर वही नया आदमी उन्हें कुछ बिस्किट दे दे...

तो वो पूँछ हिलाते हुए उसके पीछे-पीछे चलने लगते हैं...

जैसे पिल्ले।

समझ गए?”

नेहा ने मेरी आँखों में देखा।

उसकी मुस्कान अब और शरारती हो गई थी।

“हाँ, मैं समझ रही हूँ...

तुमने कहा कि गुप्ता जी स्ट्रीट डॉग की तरह हैं।”

फिर उसने मेरी आँखों में देखकर पूछा —

“और... बिस्किट क्या है?”

मैं कुछ नहीं बोल पाया।

मेरा मुँह सूख गया।

नेहा ने मेरे हाथ को पकड़ा और धीरे से नीचे ले गई।

उसने मेरे हाथ को अपनी चूत पर रख दिया।

फिर मेरे हाथ से ही खुद को रगड़वाने लगी।

वो मेरी आँखों में देखकर बोली —

“ये है बिस्किट, बेबी...

गुप्ता जी जानते हैं कि उन्हें ये नहीं मिल सकता...

इसलिए भौंकते रहते हैं...

सोसाइटी के ठेकेदार बन जाते हैं...

लेकिन... अगर एक बार तुम उन्हें ऑफर कर दो कि हमारे खेल में शामिल हो जाओ...

तो देखना... वो एक सेकंड भी नहीं सोचेगा।

पूँछ हिलाते हुए दौड़ पड़ेगा।”

नेहा ने मेरे हाथ को और ज़ोर से अपनी चूत पर दबाया।

उसकी आवाज़ अब और शरारती हो गई थी —

“समझ गए?

ये बूढ़े... भौंकते बहुत हैं...

लेकिन बिस्किट दिखा दो... तो सबसे वफादार कुत्ता बन जाते हैं।”

नेहा मेरी जाँघों के बीच बैठी हुई थी, लेकिन अब उसकी आवाज़ में एक अलग ही लय थी।

वो धीरे-धीरे बोली —

“तुमने देखा है ना... वो मुझे कैसे देखते हैं...

जब मैं उनके पैर छूने जाती हूँ...

तो उनकी नज़रें मेरी ब्लाउज के अंदर जाती हैं।

वे जानबूझकर हाथ को कंधे पर ज़्यादा देर रखते हैं...

और जब मैं उठती हूँ... तो उनकी आँखें मेरी कमर और गांड पर टिक जाती हैं।

“जब मैं उनके पैर छूती हूँ... तो मैं उनके शरीर में कंपन महसूस करती हूँ।

औरतें... छुअन का मतलब समझ जाती हैं।

मैं जानती हूँ... जब वो मेरे सिर पर या कंधे पर हाथ रखकर आशीर्वाद देते हैं...

देखो... गुप्ता जी जैसे बूढ़े... मैं बहुत अच्छे से जानती हूँ।

वे बाहर से बहुत शांत और रिस्पेक्टेबल दिखते हैं... लेकिन अंदर से... बहुत फ्रस्ट्रेटेड होते हैं।

तो उनका क्या मतलब होता है।”

मैंने बस “हम्म” कर दिया।

नेहा आगे बोली —

वो थोड़ा रुकी, फिर मेरी आँखों में देखकर पूछा —

“लेकिन अब... हम क्या करें?”

मैंने थोड़ा सोचते हुए कहा —

“क्या करें...?”

नेहा ने हल्का-सा मुस्कुराते हुए जवाब दिया —

“इग्नोर.”

वो मेरे बालों में उँगलियाँ फिराते हुए बोली —

“इग्नोर कर दो।

वे बूढ़े... भौंकते रहते हैं।

हम उन्हें बिस्किट नहीं देंगे... तो वो खुद-ब-खुद थक जाएँगे।”

मैं चुप रहा।

नेहा ने मेरी आँखों में देखा।

उसकी मुस्कान अब और शरारती हो गई थी।

वो धीरे से बोली —

“तो... तुम ट्राई करना चाहते हो?

तुम चाहते हो कि मैं तुम्हें दिखाऊँ कि ये बूढ़ा कितना पाखंडी है?”

मैं कंफ्यूज हो गया।

“मतलब? ... जैसे क्या?”

नेहा ने मेरे शॉर्ट्स के ऊपर से मेरे लुंड को पकड़ लिया।

धीरे-धीरे सहलाते हुए बोली —

“जैसे... अगली बार जब मैं उनसे मिलूँ...

मैं अपनी ब्लाउज के दो बटन खोल दूँ...”

वो मुस्कुराई — बहुत टीसिंग वाली मुस्कान।

“देखूँ... फिर क्या होता है।

वे ‘सलाह’ देने आएंगे... या... अपनी ‘सलाह’ भूल जाएंगे?”

मैं चुप रहा।

मेरा लुंड उसके हाथ में और सख्त हो गया।

नेहा ने मेरे कान के पास मुँह ले जाकर फुसफुसाया —

“क्या... तुम देखना चाहोगे?

कि गुप्ता जी... कितनी जल्दी अपना ‘प्रॉपर्टी’ वाला भाषण भूल जाते हैं...

जब मैं उनके सामने दो बटन खोल दूँ?”

वो हँसी।

मेरा दिमाग पूरी तरह उलझ गया था।

शर्म... उत्तेजना... डर... और एक अजीब सा रोमांच — सब एक साथ।

“नहीं...”

मैंने साफ़-साफ़ कहा।

आवाज़ में थोड़ी हिचकिचाहट थी, लेकिन फैसला पक्का था।

“मैं नहीं चाहता कि नेहा गुप्ता जी के साथ... या किसी भी परिचित व्यक्ति के साथ... ऐसा कुछ हो।

भले ही मेरा लुंड इसे मोहक समझ रहा हो...

लेकिन ये सामाजिक रूप से बहुत जोखिम भरा है।

हमारी छवि... समाज में... पूरी तरह नष्ट हो सकती है।

हमारे दोनों तरफ परिवार है... मेरी तरफ, तुम्हारी तरफ...

ऑफिस है... सोशल मीडिया है...

एक छोटी सी बात भी लीक हो गई तो सब खत्म।

मेरे दिमाग में सारे विचार एक साथ घूम रहे थे।

गुप्ता जी अगर किसी और से चर्चा कर दें...

क्या पता कल को पूरी कॉलोनी में बात फैल जाए...

“सैम की बीवी...गुप्ता जी के साथ...”

ये वाइब ही मेरा इरेक्शन भी कम होने लगा।

डर... शर्म... और समाज का भय... सब मिलकर मेरे अराउज़ल को दबा रहा था।

नेहा ने मेरे लंड को अभी भी हाथ में पकड़कर रखा था।

वो मेरी आँखों में देख रही थी।

उसकी मुस्कान अब थोड़ी कम हो गई थी, लेकिन पूरी तरह गायब नहीं हुई थी।

वो धीरे-धीरे से बोली —

“ओह्हो... मैं तो बस टीस कर रही थी...

रियल में तो मैं ऐसा कुछ नहीं करने वाली...

तुम इतना सोच क्यों रहे हो?

डर गए क्या?”

उसने मेरे सॉफ्ट लंड को हल्का-सा प्रश्नावली और मुस्कुराई।

मैंने ज़ोरदार मुस्कुराने की कोशिश की।

नेहा ने फिर कहा —

“अनिवे... गुप्ता जी के पास खुद ज़्यादा बड़ी समस्या है।

अगर उन्होंने हमें एक्सपोज़ किया...

तो मैं उनके बेटे को एक्सपोज़ कर दूँगी।”

फ़क ...
नेहा को राहुल के बारे में पता था।

मैंने दिखावा किया कि मुझे कुछ नहीं पता।

“कैसे?” मैंने पूछा।

“ये लड़का... बेबी... तुम जानते हो ना कैसे होते हैं...

जब वे जवान होते हैं... और टेस्टोस्टेरोन से भरे होते हैं...”

नेहा ने मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई।

“ये लड़का... राहुल... मुझे प्रलोभन से देखता है...

जैसे मैं कोई खाने की चीज हूँ।

मैंने देखा है... वो मेरी जाँघों को... मेरी नाभि को... मेरी क्लीवेज को... घुंघराता रहता है।

और वो अपनी क्रोच को रँगता है।

पहले वो छुपकर करता था... ये सुनिश्चित करता था कि मैं न देखूँ।

लेकिन पिछले कुछ हफ्तों से... वो खुलकर करने लगा है।

और तुम जानते हो... वो युवा है... लेकिन उसका शरीर बहुत बड़ा और मजबूत है...

जिम और सब की वजह से...

इसे न देख पाना मुश्किल है...

और कभी-कभी.....”

नेहा अचानक रुक गई।

मैंने महसूस किया कि मेरा लंड फिर से सख्त हो गया है।

नेहा ने भी इसे नोटिस कर लिया।

“और...” मैंने कहा, “जारी रखिए...”

नेहा ने मेरी आँखों में देखा और बोली —

“कुछ नहीं...”

मैंने पूछा —

“अरे... तुमने मुझे अपनी सारी गंदी पुरानी कहानियाँ बता खड़ी...

अब अचानक झिझक क्यों रही हो? क्यों?”

नेहा ने मेरे बालों में उँगलियाँ फिराईं और धीरे-धीरे से बोली —

“बेबी... जो हुआ सो हुआ...

लेकिन अगर मैं ये बताऊँगी... तो तुम सोचोगे कि मैं फिर वही कर रही हूँ।”

वो मेरी आँखों में देखकर मुस्कुराई।

“मैं नहीं चाहती कि तुम गलत समझो...”

मैंने उसकी जाँघ पर हाथ रखा और कहा —

“बताओ...

मैं सुनना चाहता हूँ।”

नेहा मेरे बालों में उँगलियाँ फिरा रही थी।

वो धीरे-धीरे बोली —

“कभी-कभी... मैं भी उसे तीस कर देती हूँ...

जब वो बालकनी में खड़ा होता है...

मैं जानबूझकर झुक जाती हूँ... ताकि उसे मेरी गांड का शेप दिख जाए...

या ब्लाउज का कट थोड़ा नीचे सरका दूँ... ताकि बूब्स का ग्लिम्प्स दिख जाए...

मैं उसके सामने सिगरेट भी पीती हूँ...

तुम जानते हो ना... लड़कों का फैंटसी क्या होता है...

नेबर की हॉट भाभी... या आंटी...

सेक्सी कपड़े पहने...

सिगरेट पीती हुई...

मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं भी उनमें से एक बन जाऊँगी...

लेकिन जब मुझे पता चला कि वो मुझे इस तरह देखता है...

तो मैं सोचने लगी...

अगर मैं उसे कुछ और दिखाऊँ... तो वो कैसे रिएक्ट करेगा...”

नेहा ने मेरे लुंड को हल्का-सा दबाया।

मेरा दिमाग पूरी तरह उलझ गया था।

एक तरफ गुप्ता जी की बातें घूम रही थीं — “बीवी प्रॉपर्टी है... काबू में रखो...”

दूसरी तरफ नेहा की बातें... और मेरा लंड... जो अब पूरी तरह सख्त हो चुका था।

मैं सोच रहा था —

“क्यों नहीं मैं अभी नेहा पर चिल्ला रहा हूँ?

क्यों नहीं कह रहा कि ‘ये सब बंद करो’?

गुप्ता जी ने कहा था ना... प्रॉपर्टी का ख्याल रखो।

लेकिन... अगर मैं ये कहनाल... तो नेहा हँस देगी।

क्योंकि मेरा लंड... इस सब को सुनता... और भी सख्त हो रहा है।”

मेरे मन में बहुत कुछ कहना चाहता था...

लेकिन मुँह से सिर्फ ये निकला —

“बेबी... लेकिन ख्याल रखना...

ये लड़के बातेंनी होते हैं...

वे इन बातों को दूसरे लड़कों से चर्चा करते हैं...”

नेहा ने मेरी तरफ देखा।

वो मुस्कुराई — बहुत शांत और कॉन्फिडेंट मुस्कान।

“तो क्या हुआ?

दोस्त लोग तुम्हारी बीवी पर भी जर्क करेंगे... इसमें क्या हर्ज है?

कोई बड़ा आदमी उन्हें विश्वास नहीं करेगा।

सब जानते हैं कि लड़का अपनी फैंटसी कितना बढ़ा-चढ़ाकर करते हैं।”

वो मेरे लंड को हल्का-सा दबाते हुए बोली —

“तुम चिंता मत करो।


मैं बनती हूँ... कितना आगे जाना है... और कितना नहीं।

और हाँ... अगर कभी तुम सच में असहज हो...

तो बस बोल देना।

मैं रुक जाऊँगी।”
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#66
नेहा मेरे लंड को अभी भी हाथ में पकड़े हुए थी।

वो बहुत कॉन्फिडेंट और शांत लग रही थी।

जैसे उसने हर एंगल पहले से सोच रखा हो।

वो आगे बोली —

“मर्द लोग... अपनी किस्मत पर यकीन नहीं करेंगे।

वे कहेंगे... ‘ये तो बस गप्पें मार रहा है...

इतनी खूबसूरत औरत... और उसे ऐसे दिखा रही है?

ये तो बस कल्पना कर रहा है।’”

मैंने पूछा —

“और औरतें?”

नेहा ने हल्के-सा मुस्कुराते हुए जवाब दिया —

“सबसे पहले तो... वो किसी बड़ी औरत से ये बात डिस्कस ही नहीं करेगा।

और अगर कर भी ले... तो मैं औरतों को अच्छे से डालता हूँ।

वे सिर्फ जलन पैदा करता हूँ।

हर औरत को सीक्रेटली एक एडमिरर चाहिए होता है।

वे कहेंगे... ‘ये तो बस खतरनाक औरत है...’

कोई सीरियसली नहीं लेगा।”

नेहा ने मेरे लंड को हल्का-सा डुबोया और मेरी आँखों में देखकर बोली —

“समझ गए?

कोई भी सीरियसली नहीं लेगा।

लोग सोचेंगे कि राहुल बस फैंटसी बना रहा है।

क्योंकि... कोई विश्वास नहीं करेगा कि मैं... इतनी खुलेआम... किसी को छेड़ रही हूँ।”

नेहा तब तक मेरे लुंड को शॉर्ट्स के ऊपर से ही सहला रही थी।

अब वो बात करते-करते मेरे शॉर्ट्स की ज़िप खोल दी।

उसका हाथ अंदर चला गया।

पहले मेरे अंडों को हल्का-सा सहलाया... फिर मेरे सख्त लुंड को बाहर निकाल लिया।

लुंड पहले से ही प्रीकम से गीला था।

नेहा ने मेरी आँखों में देखकर धीरे से कहा —

“तुम चिंता मत करो बेबी...

अब से मैं राहुल के साथ जो कुछ भी कर रही थी... वो सब बंद कर दूँगी।”

उसने अपना हाथ मेरे लुंड की लंबाई पर रख दिया और धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगी।

मैंने कहा —

“हाँ... हाँ... हमें बहुत सावधानी बरतनी चाहिए...

लेकिन... थोड़ा-बहुत मज़ा... तो हानिरहित है ना?”

मैंने खुद से पूछा —

“मैं ये क्यों कह रहा हूँ?

मैं तो चाहता था कि ये सब बंद हो जाए...

लेकिन अब... जो मेरे लुंड को उसके हाथ में पकड़े हुए है...

वो मुझे वही कहने पर मजबूर कर रहा है जो वो चाहती है।”

गुप्ता जी ने मुझे चेतावनी दी थी कि नेहा को बिगाड़ मत...

लेकिन कभी-कभी मुझे शक होता है कि असल में बिगाड़ कौन रहा है।

क्या मैं इस खेल का खिलौना बन गया हूँ?

दूसरी तरफ... नेहा की स्मार्टनेस देखकर मुझे गर्व भी हो रहा था।

वो कितनी चतुराई से झूठ बोल सकती है।

उसके माता-पिता बहुत सख्त थे... इसलिए उसने हमेशा बैक स्टोरी तैयार रखी होती है।

कहते हैं ना — सख्त माता-पिता सबसे अच्छे झूठे बनाते हैं।

और मेरी बीवी... उनमें से एक है।

नेहा ने मेरे लुंड को अपनी नरम उँगलियों से अच्छे से पकड़ रखा था।

वो धीरे-धीरे ऊपर-नीचे कर रही थी... बहुत आराम से... लेकिन लगातार।

वो मेरी आँखों में देखकर बोली —

“तुम लड़के हो... बताओ... मैं कुछ गलत कह रही हूँ क्या?”

मैं उत्तेजना से भर गया था।

मैंने बस कहा —


“नहीं... नहीं...”

नेहा ने मुस्कुराते हुए पूछा —

“क्या तुमने भी किया है?”

मैंने जवाब दिया —

“उस उम्र में तो सब करते हैं... जर्क ऑफ...”

नेहा ने मेरे लुंड को हल्का-सा दबाया और शरारती नज़रों से बोली —

“अरे पागल... जर्क ऑफ नहीं...

मैं पूछ रही हूँ... क्या तुमने भी किसी के बारे में फैंटसी की थी?”

मैं चौंक गया।

मेरा शरीर सख्त हो गया।

ये बात... मैं नहीं चाहता था कि यहाँ तक पहुँचे।

ये मेरे सबसे गहरे, सबसे गहरे राज़ को खोल सकती थी।

मैं चुप रहा।

नेहा ने मेरे लुंड को और अच्छे से पकड़ लिया... ऊपर-नीचे करते हुए... और धीरे से बोली —

“बोलो ना...

किसी के बारे में... फैंटसी की थी क्या?

कोई टीचर?

कोई पड़ोसन?

या... कोई और...?”

मेरा दिमाग घूम रहा था।

मैं कुछ नहीं बोल पा रहा था।

नेहा मेरे मन को पढ़ रही थी।

वो जानती थी कि मैं कुछ छुपा रहा हूँ।

मैं झूठ बोलने में उतना अच्छा नहीं हूँ जितना वो है।

वो मेरे लुंड को पकड़े हुए थी, लेकिन अब उसने अपनी पकड़ ढीली कर दी।

उसने मेरी आँखों में देखा।

उसके चेहरे पर हल्का गुस्सा था।

“मैंने तुम्हें अपनी सारी बातें बता दीं...

हर गंदी, हर शर्मनाक बात...


और तुम... अभी भी खुल नहीं रहे हो?”

उसकी आवाज़ में थोड़ा गुस्सा और थोड़ी निराशा थी।

मैं चुप रहा।

मेरा लुंड अब उसके हाथ में ढीला पड़ा था।

“नहीं... ऐसा कुछ नहीं है... सच में...”

मैंने जल्दी-जल्दी कहा, उसे कन्विंस करने की कोशिश करते हुए।

लेकिन नेहा ने मेरी बात नहीं मानी।

उसने मेरे लुंड को छोड़ दिया।

धीरे से उठी और बिना कुछ बोले किचन की तरफ चली गई।

मेरा लुंड अब अकेला, सॉफ्ट और ठंडा पड़ा रह गया।

नेहा ने पहले कभी ऐसा नहीं किया था।

वो कभी भी मुझे इस तरह अकेला नहीं छोड़ती थी।

मैं सोफे पर बैठा रहा।

मेरा दिमाग तेज़ी से चल रहा था।

“क्या बताऊँ...

क्या छुपाऊँ..."
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#67
नेहा ने मेरे लिंग को छोड़ दिया।

बिना कुछ बोले उठी और सीधे किचन चली गई।

मैं सोफे पर अकेला बैठा रह गया।

मेरा लंड अभी भी शॉर्ट्स से बाहर निकला हुआ था, धीरे-धीरे नरम पड़ रहा था।

मुझे बहुत बुरा लग रहा था।

मैंने उसे सब कुछ नहीं बताया, वो नाराज़ हो गई।


या शायद डिसअपॉइंटमेंट हो गई कि मैं अभी भी कुछ छुपा रहा हूँ।

कुछ देर बाद नेहा ने खाना तैयार कर लिया।

वो चुपचाप प्लेटें लगाने लगी।

मैं उठा और टेबल पर बैठ गया।

हम दोनों चुपचाप खाना खा रहे थे।

कोई बात नहीं हो रही थी।

नेहा का चेहरा साधारण था, लेकिन मैं जानता था कि वो अंदर से upset है।

उसकी आँखें मेरी तरफ़ नहीं आ रही थीं।

खाना खाते वक्त भी वो सिर्फ़ प्लेट देख रही थी।

मैंने बीच-बीच में उसकी तरफ़ देखा।

वो लंबी टी-शर्ट में थी, नीचे सिर्फ़ काली पैंटी।

बाल खुले हुए थे।

नॉर्मल हालात में ये सीन मुझे बहुत उत्तेजित करता, लेकिन आज माहौल भारी था।

खाना खत्म होने के बाद नेहा ने प्लेटें उठाईं और बिना कुछ कहे किचन में रख दीं।

रात के ठीक दो बजे थे।

कमरे में सिर्फ़ बेडसाइड लैंप की हल्की पीली रोशनी थी।

नेहा मेरे बगल में लेटी हुई थी।

उसकी साँसें मेरे कंधे पर गर्म-गर्म पड़ रही थीं।

मैं आँखें बंद किए लेटा था, लेकिन नींद नहीं आ रही थी।

अचानक नेहा ने अपना हाथ मेरी छाती पर रखा।

धीरे-धीरे नाखूनों से खींचा।

मैं हिल गया।

“क्या हुआ?” मैंने नींद भरी आवाज़ में पूछा।

नेहा ने मेरी ठोड़ी पकड़ी और मेरा चेहरा अपनी तरफ़ घुमा दिया।

उसकी आँखें सीधे मेरी आँखों में थीं।

ठंडी, लेकिन गहरी।

“तुम मुझसे कुछ छुपा रहे हो,” उसने धीरे से कहा।

मैं हँसने की कोशिश की। “क्या बात है, जासूस बन गई?”

नेहा ने मेरी कमर पर हाथ फेरा और धीरे-धीरे नीचे की तरफ़ ले गई।

उसकी उँगलियाँ मेरे शॉर्ट्स के अंदर घुस गईं।


मैंने गहरी साँस ली और धीरे से बोला —
“नेहा... सुनो।

कॉलेज के दिनों में... मैं बहुत मस्तरबेट करता था।

रोज़... कभी-कभी तो दिन में दो-तीन बार भी।”

“हम्म... और?”

मैंने जारी रखा, आवाज़ थोड़ी काँप रही थी —

“मेरा एक दोस्त था... अविनाश।

हम दोनों कॉलेज में एक ही रूम में रहते थे।

वो लोकल था, लेकिन घर जाने की बजाय मेरे साथ ही रहता था।

शायद वो बहुत शरारती था तो उसके पेटेंट्स उसे हॉस्टल में ही रखते थे

उन्हें लगता था की वो यंहा रहकर सुधर जाएगा

उसके पास कुछ पुरानी इरॉटिक किताबें थीं — ‘रसवंती’, , ‘ब्लैक लेडी’ जैसी...पुरानी वाली, वो जो कवर पर लड़की की तस्वीर होती थी

उस टाइम मोबाइल और पॉर्न इतना आसानी से नहीं मिलता था।

तो वो किताबें लाकर मुझे देता था।”

नेहा ने मेरे लिंग को अपनी उँगलियों से पकड़कर उसकी साँसें तेज़ हो गईं।

“फिर?” उसने पूछा, आवाज़ में गर्मी थी।

“हम दोनों रात को लाइट ऑफ करके उन किताबों को पढ़ते थे।

कभी कोई स्टोरी, कभी बस तस्वीरें।

कभी-कभी एक-दूसरे को पढ़कर सुनाते थे।

जब कोई गंदा सीन आता... तो हम दोनों चुप हो जाते।

फिर... मैं देखता कि अविनाश अपना लंड निकालकर मुठ मार रहा है।

मैं भी... शर्माते हुए अपना निकाल लेता।

हम दोनों बगल-बगल में लेटे... किताब पढ़ते हुए... एक साथ मुठ मारते।

कभी-कभी वो मुझे अपनी किताब देता और कहता — ‘सम, ये वाली पढ़... बहुत हॉट है’।”


मैंने साँस लेते हुए कहा —

“एक बार... हम एक बहुत गंदी स्टोरी पढ़ रहे थे।

वॉइस एक्स वाली किताब थी।

उसमें एक 45 साल की मिडिल एज औरत थी... नाम था ‘मालती’।

उसका पति सुबह ऑफिस चला जाता था।

फिर वो अपने चार-पाँच यंग लड़कों को घर बुलाती थी।

सब 21-22 साल के... कॉलेज के लड़के।”

उसकी साँसें तेज़ हो गईं।

“फिर?” उसने पूछा, आवाज़ में उत्सुकता थी।

नेहा अब पूरी तरह तेज़ हो चुकी थी।

उसके स्तन मेरी छाती से रगड़ खा रहे थे।

मैंने साँस लेते हुए कहानी आगे बढ़ाई —

“जब हम वो स्टोरी पढ़ रहे थे... तब हम दोनों ने आँखें बंद कर ली थीं।

किताब एक तरफ़ रख दी थी।

हम दोनों बगल-बगल में लेटे हुए थे... अपने लंड निकाले हुए... और तेज़-तेज़ मुठ मार रहे थे।

कमरे में सिर्फ़ हमारी साँसों की आवाज़ आ रही थी।

हम दोनों एज पर थे... बहुत पास थे...”

नेहा ने मेरे निप्पल को अपने दाँतों से हल्का-सा काटा और हाँफते हुए पूछा, “फिर?”


मैंने जारी रखा —

“तभी... जब हम दोनों बहुत तेज़ कर रहे थे... अचानक अविनाश के मुँह से निकला —

‘ओह.. सिमरन... हाँ... .. सिमरन...’

मैं एकदम चौंक गया।

मेरा हाथ रुक गया।

सिमरन... वो कॉलेज की एक आंटी का नाम था।

बहुत बार कॉलेज आती थीं — PTM, फंक्शन या कुछ काम से।

लंबी-चौड़ी पंजाबी औरत... काला चश्मा लगाती थीं, छोटे बाल, गोरी स्किन, भारी भरकम शरीर।

उम्र शायद 44-45 के आसपास रही होगी।

बहुत सुंदर और मटौर लगती थीं।

अविनाश की मम्मी थीं

और उस वक्त... जब वो पूरी तरह एस्केलेट कर रहा था... झड़ने के बिलकुल किनारे पर था... उसके मुँह से ‘सिमरन’ निकला।

मुझे तुरंत समझ आ गया कि वो उस स्टोरी की मालती की जगह सिमरन आंटी को इमेजिन कर रहा है।

उसकी कल्पना में वो 45 वाली औरत नहीं... बल्कि सिमरन आंटी ही चार-पाँच लड़कों के बीच नंगी पड़ी हुई थी।”

“तो... अविनाश अपनी मम्मी के बारे में सोचकर मुठ मार रहा था?

उसी को वो कल्पना में चोद रहा था?”

“हाँ... और मुझे ये जानकर बहुत शॉक लगा था।

नेहा ने मेरे बालों को कसकर पकड़ लिया और मेरी आँखों में देखकर तेज़-तेज़ हिलते हुए बोली —

“फिर क्या हुआ?


"मुझे लगा... वो उस स्टोरी की औरत को नहीं, सिमरन आंटी को इमेजिन कर रहा है। वो चार-पाँच लड़कों के बीच में... सिमरन।

उसका नाम बोलते हुए वो और तेज़ हो गया। मैंने भी... बस उसकी आवाज़ सुनकर... कल्पना कर ली।

सिमरन का चश्मा उतरता, उसके बाल खुलते, और वो हँसती हुई... सबके साथ।"

तुमने मेरे कान में फुसफुसाया, "और तुम? तुमने क्या सोचा?"

"मैंने सोचा—अगर सिमरन आंटी सच में ऐसा करती... तो क्या मैं भी वहाँ होता?

मैंने साँस लेते हुए कहानी आगे बढ़ाई —

“जब हम दोनों झड़ गए... तब कमरे में बस हमारी तेज़ साँसों की आवाज़ आ रही थी।

हम दोनों ने अपने लंड साफ़ किए और अलग-अलग बिस्तर पर लेट गए।

लाइट ऑफ थी।

कुछ मिनट तक कोई कुछ नहीं बोला।

फिर अचानक मैंने अविनाश से पूछ लिया —

‘यार... तुमने “सिमरन” का नाम क्यों लिया?

ऐसा क्यों किया तुमने?’

अविनाश पहले तो चुप रहा।

फिर उसने हल्की-सी हँसी मारी और बोला —

‘बस... यार... वो स्टोरी पढ़ते हुए... अचानक मम्मी का चेहरा आ गया दिमाग में।

“मैंने अविनाश से पूछा —

‘यार... वो तो तुम्हारी मम्मी है ना?

तुम उसके बारे में ऐसा कैसे सोच सकते हो?’

अविनाश ने मेरी तरफ़ देखा और मुस्कुरा दिया।

एक शरारती, लेकिन थोड़ी शर्मीली स्माइल।

फिर बोला —

‘अरे यार... हम कुछ असली में तो कर थोड़ी रहे हैं।

हम तो सिर्फ इमेजिन कर रहे हैं ना।

इमेजिनेशन में तो कुछ भी हो सकता है।

सच बताऊँ... मुझे खुद नहीं पता क्यों, लेकिन जब भी मैं किसी नई मिडिल एज महिला की स्टोरी पढ़ता हूँ... तो मेरे दिमाग में सबसे पहले मम्मी का चेहरा आ जाता है।

वो मेरे लिए सबसे सुंदर, सबसे हॉट और सबसे सेक्सी औरत हैं।

फिर मैं उनके बारे में सोचता हूँ... उनकी भारी गांड, बड़े स्तन, और मैं बहुत ज्यादा हार्ड हो जाता हूँ।

मुठ मारने में भी तब बहुत ज्यादा मज़ा आता है।’”

नेहा ने हाँफते हुए पूछा —

“तो... अविनाश अपनी मम्मी को... अपनी फैंटसी की क्वीन बना चुका था?

फिर बोला —

“धीरे-धीरे हम दोनों इस स्टोरी पढ़ने के तरीके को बदलने लगे।

जब भी कोई नई इरॉटिक स्टोरी पढ़ते... तो अविनाश शुरू से ही उस औरत का नाम ‘सिमरन’ रख देता।

जैसे... ‘सिमरन ने उस लड़के का लंड हाथ में पकड़ा और उसे अच्छे से सहलाया...’

‘सिमरन का पति अभी ऑफिस में था, इसलिए वो यंग लड़के के साथ खेल रही थी...’

‘सिमरन अपने पति के सामने बैठी हुई थी और एक यंग लड़के का लंड चूस रही थी...’

शुरू-शुरू में वो सिर्फ़ पढ़ते-पढ़ते नाम बदल देता था।

धीरे-धीरे वो खुल गया।

अब वो खुलकर बोलता था — ‘सिमरन ने उस लड़के को चोदा...’, ‘सिमरन आंटी की गांड में लंड घुसा दिया...’

एक दिन मैंने भी झिझकते हुए नाम रिप्लेस किया।

मैंने कहा — ‘सिमरन आंटी... चार लड़कों के बीच नंगी पड़ी हुई है... और सब उसके शरीर पर अपना माल छोड़ रहे हैं...’

मैंने अविनाश का रिएक्शन देखना चाहा था।

लेकिन उसने कोई खास रिएक्शन नहीं दिया।

बल्कि और ज़्यादा इरोटिक फील करने लगा।

उसने अपना लंड और जोर से रगड़ना शुरू कर दिया और बोला —

‘हाँ यार... मम्मी बहुत हॉट हैं... कल्पना करो... वो चार-पाँच लड़कों के बीच...’


“धीरे-धीरे हमने स्टोरी पढ़ने के साथ-साथ एरॉटिक पिक्चर्स भी देखना शुरू कर दिया।

अविनाश कुछ पुरानी मैगज़ीन लाता था — जिसमें बहुत सारी सुंदर, नंगी लड़कियाँ होती थीं।

बड़े-बड़े स्तन, मोटी गांड, अलग-अलग पोज़ में... पूरी तरह नंगी।

हम उन पिक्चर्स को देखते और स्टोरी पढ़ते।
फिर हम दोनों का नाम बदल देते — हर औरत को ‘सिमरन आंटी’ बना देते।

‘देख यार... सिमरन आंटी इस पोज़ में कितनी हॉट लग रही हैं...’

‘सिमरन आंटी का लंड मुँह में ले रही हैं...’

ये नाम बदलने से हमें और भी ज़्यादा मज़ा आने लगा था।”

नेहा ने पूछा —

“और तुम दोनों... जब मुठ मारते थे... तो क्या करते थे?”

मैंने शर्माते हुए लेकिन सच बताया —

“हम दोनों बगल-बगल में लेटे रहते थे।

हमारी बॉडी एक-दूसरे को छूती रहती थी — कंधा, जाँघ, कभी-कभी हाथ भी।

हम एक-दूसरे को देखते हुए मुठ मारते थे।

मैं गे नहीं हूँ... ये बात मैं अभी भी स्पष्ट करना चाहता हूँ... लेकिन उस वक्त... जब हम साथ मुठ मारते थे... मुझे अच्छा लगता था।

खासकर जब अविनाश सिमरन आंटी का नाम लेता था... तो मुझे बहुत ज़्यादा उत्तेजना होती थी।

धीरे-धीरे हम दोनों खुल गए और जब भी मुठ मारते... तो ‘सिमरन आंटी’ का नाम लेकर बोलते —

‘सिमरन आंटी... तुम्हारी गांड बहुत मोटी है...’

“हम दोनों ने एक-दूसरे का लंड भी देखा हुआ था।

अविनाश मुझसे बहुत बेहतर था साइज़ में।

मेरा पतला और साढ़े चार इंच का था... जबकि अविनाश का सात इंच का, बहुत मोटा और तगड़ा था।

उस उम्र में भी वो बहुत बड़ा था।

मुझे कई बार जलन होती थी कि भगवान ने उसे इतना बड़ा क्यों दिया।

लेकिन फिर भी... जब हम साथ मुठ मारते... मुझे अच्छा लगता था।”

“एक दिन हम बहुत ही इरॉटिक स्टोरी पढ़ रहे थे।

उसमें 45-50 साल की एक औरत थी, जो दो जवान लड़कों के साथ खेल रही थी।

स्टोरी में वो धीरे-धीरे अपने कपड़े उतार रही थी... उन दोनों के सामने।

फिर हँसी-मजाक में बोली — ‘तुम दोनों एक-दूसरे का लंड हाथ में लो और मेरे लिए हिलाओ...’

हम दोनों स्टोरी पढ़ते हुए कल्पना करने लगे कि ये सब सिमरन आंटी कह रही हैं।

हमने एक-दूसरे की तरफ देखा।

पहली बार हमें ऐसा लगा कि शायद हमें एक-दूसरे को टच करना चाहिए।

मैंने थोड़ा झिझकते हुए अपना हाथ बढ़ाया।

मेरा हाथ अविनाश के लंड की तरफ गया।

जब मैंने उसे हाथ में थामा... तो मुझे बहुत अजीब सा लगा।

बहुत मोटा, बहुत गरम... और भारी।

मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था।

मैंने हिम्मत करके उसे धीरे-धीरे हिलाना शुरू कर दिया।”

नेहा ने मेरे लंड को अपनी चूत में और गहराई तक लेते हुए हाँफते हुए पूछा —

“फिर... अविनाश ने क्या किया?”

मैंने जारी रखा —

“अविनाश पहले तो चौंक गया।

फिर उसने मेरी तरफ देखा और बोला — ‘अरे हिला ना भाई... जैसे तू अपना हिलाता है...’

उसने भी अपना हाथ बढ़ाया और मेरे लंड को पकड़ लिया।

उसका हाथ मुझसे ज़्यादा मोटा और मजबूत था।

वो मुझे धीरे-धीरे हिलाने लगा।



जैसे ही मैंने ये बात कही कि मैंने अविनाश का लंड हाथ में लिया था, उसका शरीर एकदम सख्त हो गया।

उसकी आँखें चौड़ी हो गईं।

वो shock में थी — साफ़ दिख रहा था उसके चेहरे पर।

उसका हाथ मेरे लंड पर और कस गया।

वो मेरे लंड को बहुत टाइट पकड़े हुए थी।

मैं महसूस कर रहा था कि वो अंदर से प्रोसेस कर रही है — कि मैंने किसी दूसरे लड़के का लंड हाथ में पकड़ा था।

कुछ सेकंड तक वो चुप रही।

फिर धीरे से, थोड़ी भारी आवाज़ में बोली —


“कंटिन्यू करो...

बताओ आगे क्या हुआ।”

मैंने साँस लेते हुए आगे बताया —

“जैसे-जैसे कहानी और इरॉटिक होती गई... वैसे-वैसे मैं अविनाश के लंड को हिलाता रहा।

वो बहुत कड़क और मोटा था।

मुझे उसे हिलाने में बहुत अजीब सा, लेकिन अलग तरह का मज़ा आ रहा था।

अंदर से गर्मी हो रही थी।

मैंने उसे अच्छे से हिलाया — ऊपर से नीचे, धीरे-धीरे फिर तेज़।

बीच-बीच में अविनाश भी मुँह से निकाल रहा था — ‘और तेज़... हाँ... ऐसे...’

वो भी बहुत एंजॉय कर रहा था।

उसकी साँसें तेज़ हो गई थीं।


अब मैं दोनों हाथों से उसे हिला रहा था — एक हाथ से अपना लंड, दूसरे हाथ से अविनाश का।

दोनों को एक ही रिदम में... ऊपर-नीचे...

“हमारा वो रिदम तीन-चार महीने तक लगातार चलता रहा।

हर रात स्टोरी पढ़ते समय हम एक-दूसरे का लंड हाथ में पकड़कर हिलाते।

मैं जब अविनाश का लंड हाथ में लेता... तो अंदर से बहुत गर्मी होती थी।

कई बार तो मैं उसकी मम्मी — सिमरन आंटी — को याद करके और तेज़ हिलाता।

फिर हमारी छुट्टियाँ हो गईं।

एक-डेढ़ महीने बाद जब हम वापस मिले... मेरी फॅमिली मुझे छोड़ने आया था।

मेरी कार में मेरी बड़ी सिस्टर गार्गी भी थी।"

हम तीन भाई बहन है। .. में सांसे छोटा। .. फिर मेरा भाई। .. और सबसे बड़ी मेरी बहन। .. हम में 8 साल गैप है

और... अविनाश — सिमरन आंटी भी साथ में आई हुई थीं।


जैसे ही मैंने सिमरन आंटी को देखा... मेरा दिल जोर से धड़कने लगा।

आज वो बहुत सुंदर लग रही थीं — हल्का मेकअप, साड़ी में उनकी भारी छाती और मोटी कमर साफ़ दिख रही थी।

मैंने अविनाश की तरफ़ देखा।

उसने भी गार्गी की तरफ़ देखकर कुछ सोचा, लेकिन मुझे कुछ नहीं बताया।


रात को हम वापस होस्टल पहुँचे।

मैं पूरे दिन से रात का इंतज़ार कर रहा था।
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#68
मुझे पता था कि आज कुछ धमाका होने वाला है।

रात में अविनाश ने अपने बैग से कुछ नई किताबें निकालीं — जो वो छुपाकर होस्टल लाया था।

मैं बहुत उत्सुक था।


फिर अचानक उसने बैग से कुछ और निकाला...

एक पिंक कलर की ब्रा और पैंटी।

बहुत सुंदर, सॉफ्ट लेस वाली।

उसने मेरी तरफ़ देखा और आँख मारी।

मैं हैरान हो गया।

वो मेरी बातें ध्यान से सुन रही थी, लेकिन उसका हाथ अब भी मेरे लंड पर कसा हुआ था।

मैंने हाँफते हुए आगे बताया —

“जब अविनाश ने वो पिंक ब्रा और पैंटी निकाली... तो मैं एकदम कंफ्यूज हो गया।

मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि वो किसी औरत की असली अंडरगारमेंट लाकर होस्टल में रखेगा।

मैंने हैरानी से पूछा —

‘ये... किसकी है?’

अविनाश ने ब्रा को अपनी नाक पर रखकर गहरी साँस ली और मुस्कुराते हुए बोला —

‘क्या लगता है?’

मुझे अंदाज़ा तो हो गया था, लेकिन मैं कन्फर्म करना चाहता था।

मैंने फिर पूछा —

‘प्लीज बता ना... ये किसकी है?’

अविनाश ने ब्रा को अपनी नाक से हटाया नहीं।

वो पिंक पैंटी को अपने लंड पर रगड़ते हुए बोला —

‘पहले तू अपना हाथ मेरे लंड पर रख...

फिर मैं बताता हूँ।’

पहली बार मुझे लगा कि ये रिक्वेस्ट नहीं... बल्कि ऑर्डर था।

उसकी आवाज़ में एक अजीब सा अधिकार था।

वो खड़ा हो गया।

मैंने उसके पजामा का नाड़ा खोला और धीरे से नीचे सरका दिया।

उसका सात इंच का मोटा, कड़क लंड मेरे सामने था।

सिर पर पहले से ही चमकदार प्रीकम लगा हुआ था।

मैंने अपना हाथ बढ़ाया और उसे पकड़ लिया।

मेरा हाथ उसकी मोटाई पर मुश्किल से बंद हो पा रहा था।

फिर मैंने धीरे-धीरे उसे हिलाना शुरू कर दिया — ऊपर से नीचे, पूरी लंबाई तक।

अविनाश ने आँखें बंद कर लीं।

वो सिमरन आंटी की ब्रा को अपनी नाक पर रखकर बहुत जोर से सूँघ रहा था — जैसे कोई कुत्ता किसी औरत की खुशबू सूँघ रहा हो।

उसके मुँह से हल्की-हल्की सिसकारियाँ निकल रही थीं — ‘अ ahhh... सिमरन

मैं उसके लंड को लगातार हिला रहा था।

मेरे हाथ में उसकी गर्मी और मोटाई साफ़ महसूस हो रही थी।

और सबसे अजीब बात...

जब अविनाश ब्रा सूँघ रहा था, तो ब्रा की खुशबू मेरी नाक तक भी पहुँच रही थी।

वो बहुत तेज़, बहुत निजी खुशबू थी — औरत के शरीर की, पसीने की, और थोड़ी सी चिपचिपी गंध।

मुझे लग रहा था कि ये ब्रा शायद कई दिनों से नहीं धुली थी।

सिमरन आंटी की असली, इस्तेमाल की हुई ब्रा।”

हा मेरी बातें ध्यान से सुन रही थी।



उसका हाथ अभी भी मेरे लंड पर धीरे-धीरे चल रहा था — जैसे वो सहला रही हो, लेकिन सोच में डूबी हुई।



उसकी आँखें मेरी तरफ़ थीं, अचंभे से भरी हुईं।



जैसे वो कुछ पूछना चाहती हो, लेकिन शब्द नहीं निकल रहे हों।



मैंने उसकी आँखों में देखा और धीरे से बोला —



“पूछो... जो पूछना चाहती हो।



मुझे पता है ये सब सुनना तुम्हारे लिए आसान नहीं होगा।



इसलिए ही मैंने तुमसे छुपाया था।”



नेहा ने मेरी आँखों में देखा।



फिर धीरे से मुस्कुराई — वो मुस्कान जो थोड़ी राहत वाली थी।



“नहीं... ऐसा कुछ नहीं है।



आदमी का एक पास्ट होता है।



मैंने तुम्हें अपना पास्ट अच्छे से बताया था।



मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।



बल्कि... मुझे और अच्छा लगा कि तुमने खुलकर बताया।



मैं एक बात पूछना चाहती हूँ।”



मैंने सिर हिलाया — “पूछो।”



नेहा ने मेरे लंड को थोड़ा और कसकर पकड़ा और पूछा —



“तुम... बायसेक्शुअल हो?”



मैंने हल्का-सा हँसकर जवाब दिया —



“नहीं।



क्या तुम किसी आदमी को देखकर अट्रैक्टिव होते हो?”



नेहा ने सिर हिलाया — “नहीं।



और तुम?”



मैंने गहरी साँस ली और कहा —



“ऐसा नहीं है।



उस टाइम भी जो अट्रैक्टिव था... वो सिमरन आंटी के बारे में सोचकर था।



बस वो सिचुएशन — एक-दूसरे का लंड हिलाना, गंदी स्टोरी, सिमरन आंटी की ब्रा...



ये सब मुझे नया फील दे रहा था।



मज़ा आ रहा था।



लेकिन कभी भी किसी आदमी को सोचकर ऐसा नहीं किया।



हमेशा एक औरत इन्वॉल्व होती थी — सिमरन आंटी, या कोई स्टोरी की औरत।



वो ही मुझे उत्तेजित करती थी।”



नेहा ने मेरे लंड को धीरे से रगड़ते हुए बोला —



“तो... तुम्हें वो मज़ा इसलिए आया क्योंकि वो सब गंदा और नया था?



न कि क्योंकि तुम अविनाश के लंड को पसंद कर रहे थे?”



मैंने सिर हिलाया — “हाँ।



अगर सिमरन आंटी की जगह कोई और औरत होती... तो भी वैसा ही होता।



मुझे बस वो फीलिंग अच्छी लगी — गुप्त, गंदी, लेकिन सुरक्षित।”



नेहा ने मेरे लंड को एक बार कसकर दबाया और धीरे से बोली —



“अच्छा... तो अब बताओ... उस रात क्या हुआ?



अविनाश ने ब्रा सूँघी... तुमने उसका लंड हिलाया... फिर?”



मैंने आगे बढ़ाया —



“जब मैं अविनाश का लंड हिला रहा था... उसके दूसरे हाथ में सिमरन आंटी की पैंटी थी।



वो उसे अपनी उँगलियों से रगड़ रहा था, जैसे वो उसकी खुशबू में डूब रहा हो।



मुझे वो देखकर बहुत गर्मी हो रही थी।



मैंने सोचा... अरे यार, मुझे भी थोड़ा स्मेल करने दे।



कैसी खुशबू है, कितनी गंदी, कितनी गरम...



मैंने धीरे से कहा —



‘यार... मुझे भी थोड़ा स्मेल करने दे ना...’



अविनाश ने मुझे देखा।



उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी।



मैंने आगे कहा —



“जब मैंने अविनाश से कहा कि मुझे भी थोड़ा स्मेल करने दे... तो उसने ब्रा-पैंटी को अपनी तरफ़ खींच लिया और बोला —



‘ये मेरी मम्मी की है... ये सिर्फ़ मेरी।’



फिर वो मुस्कुराया और बोला —



‘तूने आज तक मेरे लिए कुछ भी नहीं किया।



हमेशा मम्मी के बारे में सोचा... सारी कहानियाँ, सारी फैंटसी...



कभी तूने अपनी घर की औरतो का यूज़ नहीं किया।’



मैंने कहा —



‘अरे भाई... मैं कैसे घर की औरतो को यूज़ कर सकता हूँ?



मेरी मम्मी तो बहुत बूढ़ी है... और दिखने में भी इतनी सुंदर नहीं जितनी सिमरन आंटी है।’



उसके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान फैल गई।



वो धीरे से बोला —



"मैं तुम्हारी मम्मी की बात नहीं कर रहा।



मैं गार्गी की बात कर रहा हूँ।’



जैसे ही गार्गी का नाम सुना... मेरे दिमाग में आग लग गई।



गार्गी — मेरी बहन ।



उसके नाम से... किसी गंदी फैंटसी में?



मुझे लगा सब कुछ गलत हो गया।



मैंने अपना हाथ उसके बॉल्स पर रखा... और जोर से दबा दिया।



वो जोर से चिल्लाया — ‘आह'



दर्द से उसका चेहरा लाल हो गया।



मैंने उसे छोड़ा... फिर उसके चेहरे पर दो-तीन थप्पड़ मारे।



‘ये क्या बोल रहा है तू?’



फिर मैं उठा और कमरा छोड़ दिया।



उस रात के बाद... मैंने अविनाश से महीने भर बात नहीं की।



होस्टल में हम एक ही रूम में थे, लेकिन जैसे कोई अदृश्य दीवार खड़ी हो गई हो।



सुबह उठता, चुपचाप तैयार होता, क्लास जाता।



रात को लौटता, बिस्तर पर लेट जाता — बिना एक शब्द।



अविनाश भी चुप रहता।



एक महीने बाद... वो रात आई।



अविनाश दूसरे बेड पर लेटा था, किताब पढ़ रहा था।



लाइट कम थी, सिर्फ़ टेबल लैंप की पीली रोशनी।



मैंने देखा — उसका हाथ धीरे-धीरे नीचे जा रहा था।



वो चुपके से अपना लंड हिला रहा था... किताब में नाम लेते हुए।



मुझे साफ़ दिख रहा था — उसकी साँसें तेज़, आँखें बंद।



फिर उसने ब्रा-पैंटी निकाली... और सूँघने लगा।



वो पैंटी अपनी नाक पर रखकर... धीरे-धीरे मुठ मार रहा था।



मेरा मन करता था... उसके पास जाऊँ।



उसकी पैंटी छू लूँ, सूँघ लूँ।



मुझे पता था वो मुझे रोकता नहीं।



लेकिन मेरा ईगो... वो मुझे रोक रहा था।



मैं सोचता — "अगर मैं गया... तो वो फिर से कंट्रोल ले लेगा।



फिर वो गार्गी का नाम लेगा... और मैं फिर गुस्सा करूँगा।"



रात के 2 बजे... अविनाश सो गया।



किताब उसके हाथ से गिर गई।



मैं चुपके से उठा... उसके बेड के पास गया।



किताब उठाई।



पन्ने पलटे... और देखा।



स्टोरी थी — एक जवान लड़का और लड़की, अंडर-कंस्ट्रक्शन बिल्डिंग में।



रंग-बिरंगी दीवारों के बीच... वो दोनों नंगे होकर खेल रहे थे।



मेरा दिल धड़कने लगा।



मैंने कल्पना की — गार्गी... बहन... उस लड़की के रूप में।



अविनाश उस लड़के के रूप में... उसकी कमर पकड़कर... उसे चोद रहा है।



गार्गी की साँसें तेज़... उसकी आँखें बंद... अविनाश का मोटा लंड अंदर-बाहर।



मैंने किताब बंद की... लेकिन मेरा लंड पहले ही खड़ा हो चुका था।



बहुत कड़क।



मुझे गुस्सा भी आया... लेकिन उत्तेजना ज़्यादा थी।



मैंने सोचा — "ये क्या हो रहा है?



मैं गार्गी को... ऐसे सोच रहा हूँ?"



मैंने किताब वापस रखी... और अपने बेड पर लेट गया।



अपना लंड निकाला... और धीरे-धीरे हिलाने लगा।



कल्पना में गार्गी थी... और अविनाश।



मैं झड़ गया... चुपचाप।



लेकिन अंदर से... अब वो गुस्सा नहीं... एक नई तरह की भूख थी।



अगले दिन सुबह... अविनाश मेरे सिरहाने पर रखी किताब देखकर समझ गया।



वो चुपके से मुस्कुराया — वो मुस्कान जो कह रही थी "मैं जानता हूँ तूने पढ़ी है"।



उसने धीरे से कहा —



“तुम चाहो तो ये किताब ले सकते हो।



मेरे पास और भी किताबें हैं... नई कहानियाँ, नए फोटोग्राफ्स... और भी सुंदर लड़कियाँ वाली।



सब तुम्हारा है।



मगर तुम्हें पता है... मुझे क्या चाहिए उसके अंदर।”



मैंने हल्का सा सिर झुकाया।



“नहीं... ये मुझसे नहीं हो पाएगा।



तुम समझ रहे हो... मैंने कभी इस तरीके से गार्गी को नहीं देखा।”



अविनाश ने बिस्तर पर बैठते हुए कहा —



“अरे... ये तो सिर्फ़ स्टोरी है।



ये सिर्फ़ कल्पना है।







और वैसे भी... अगर तुम चाहते हो तो तुम उस लड़की की जगह अपने आप को इमेजिन कभी मत करो।



सिर्फ़ लड़के की जगह किसी और को यूज़ करो।



तब तुम्हें ये थोड़ी सी कम होगी।



तुम हमेशा से थर्ड पार्टी की तरह इसे देखोगे... जैसे एक दर्शक।



तुम बस देखोगे कि गार्गी किसी और के साथ है।



फाइनली... कभी ना कभी उसकी शादी होगी।



तुम्हें पता है वो ये सब करेगी।



तुम्हें पता है कि वो अपनी सुहाग रात के दिन सब करेगी।



तब तो तुम सब करने दोगे... हो सकता है उस दिन तुम उसे इमेजिन भी करो।



मगर अभी इमेजिन करने में क्या बुराई है?



तुम मेरे साथ उसे इमेजिन कर सकते हो।



कहानी में बस नाम ही तो रिप्लेस करने हैं।”







रात जब मैं रूम में घुसा... तो अंदर से एक अजीब सी कश्मकश थी।



दिन भर दिमाग में घूम रही थी — आज रात क्या होगा?



क्या वो फिर वही खेल शुरू करेगा?



या... अब सब कुछ नॉर्मल रहेगा?



अविनाश बेड पर लेटा था।



उसके हाथ में एक नई किताब — कवर पर दो लड़कियाँ, बहुत सुंदर, एक-दूसरे को किस कर रही थीं।



वो मुस्कुराया और बोला —



“ये देख... नई किताब है।



बहुत अच्छी कहानी है।



मेरे साथ बैठ, पढ़... मजा आएगा तुझे।”



मैंने थोड़ा सोचा।



फिर उसके पास जाकर बैठ गया।



वो पढ़ने लगा — एक लेस्बियन स्टोरी।



एक शादीशुदा महिला... और एक जवान लड़की, जिसकी शादी होने वाली थी।



बड़ी वाला उसे सिखा रही थी — सुहाग रात क्या करना है, कैसे छूना है, कैसे चूमना है।



और इसी बहाने... वो उसे छू रही थी, सहला रही थी।



उसने पहले से ही शादीशुदा महिला का नाम सिमरन रख दिया।



लेकिन दूसरी लड़की का नाम... वो झिझक रहा था।



उसने मेरी तरफ़ देखा — जैसे कोई फेवर मांग रहा हो।



मैंने हल्का सा मुस्कुराया... और आह भरी।



मुझे पता था वो क्या चाहता है।



अगर वो कोई और नाम भी लेता... तो भी उसके दिमाग में वही चल रहा था।



जैसे ही मैंने हाँ में सिर हिलाया... वो मुस्कुराया।



फिर झट से बोला —



“और ये लड़की... गार्गी।”



मेरा दिल एक बार फिर धड़का।



लेकिन इस बार... गुस्सा नहीं आया।



बस... एक गर्मी।



स्टोरी में सिमरन गार्गी को सब सिखा रही थी —



“सुहाग रात में ऐसे चूमना... ऐसे छूना... ऐसे चाटना...”



दोनों नंगी हो गईं... एक-दूसरे के स्तन दबा रही थीं... चूत पर उँगलियाँ फेर रही थीं...



सिमरन गार्गी को चाट रही थी... और गार्गी सिसकारियाँ ले रही थी।


हम दोनों चुप थे।
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#69
किताब पढ़ते हुए... हमारा लंड खड़ा हो गया।

हमने एक-दूसरे की तरफ़ नहीं देखा... बस... किताब पर नजर।

लेकिन दोनों के हाथ नीचे जा रहे थे... धीरे-धीरे...

अविनाश ने धीरे से कहा —

“देख... कितना अच्छा लग रहा है...

सिमरन आंटी गार्गी को चोद रही है...

तुझे कैसा लग रहा है?”

मैंने कुछ नहीं कहा।

बस... अपना लंड हिलाने लगा।

नेहा ने मेरी बात सुनकर मेरे लंड को कसकर पकड़ लिया।

उसकी साँसें तेज़ हो गईं।

“तो... तुमने फिर से... दीदी का नाम सुनकर... उत्तेजित हो गए?

नेहा गार्गी को दीदी कहकर बुलाती थी ।

मैंने आगे कहा —

“अविनाश अक्सर गार्गी का नाम लेने लगा था।

मेरी कज़िन का नाम... मेरे सामने... गंदी-गंदी स्टोरियों के बीच में।

शुरू में बुरा लगता था... लेकिन धीरे-धीरे... बुरा नहीं लगता था।

वो स्टोरी पढ़ता और बोलता — ‘हिला... तेज़ हिला... मे गार्गी की चूत चाट रहा हूँ ...’

और मैं... वही करता।

हमने हर रात वही किया।

धीरे-धीरे... मुझे इसकी आदत पड़ गई।

अब मज़ा आने लगा था।

सिमरन आंटी की बातें कहीं दूर हो चुकी थीं।

अब जो नई उत्तेजना मिलती थी... वो गार्गी के नाम में मिलती थी।

मगर मैंने कभी स्टोरी में खुद को इमेजिन नहीं किया।

कभी नहीं सोचा कि मैं कुछ कर रहा हूँ... या मैं किस कर रहा हूँ।

मैं हमेशा किसी और को इमेजिन करता — गार्गी के साथ।

जैसे... कोई अनजान लड़का... या कोई दोस्त... या कोई अनजान आदमी... गार्गी को चोद रहा हो।

मैं बस देखता... और हिलाता।

बस... दर्शक।

और वो... बहुत मज़ेदार लगने लगा।”

नेहा मेरी तरफ़ लगातार देख रही थी।

उसकी आँखें मेरी आँखों में गड़ी हुई थीं।

उसके चेहरे पर कोई जजमेंट नहीं था — न गुस्सा, न घृणा, न शर्म।

बस... एक गहरी, शांत नजर।

जैसे वो मेरे अंदर कुछ ढूँढ रही हो।

मैं जानता था वो क्या सोच रही होगी।

"ये कितना परवर्ट है...

अपनी खुद की बहन को... किसी और के साथ... कल्पना में चुदते हुए देखकर मुठ मारता था?"

"कैसे सोच सकता है वो अपने परिवार की लड़की के बारे में ऐसा?"

लेकिन मैं चाहता था कि वो सब जान ले।

खासकर इसलिए... क्योंकि वो खुद मुझे अपना पूरा पास्ट बता चुकी थी।

अब मेरी बारी थी।

मैंने गहरी साँस ली और बोला —

“नेहा...

मैं जानता हूँ तुम क्या सोच रही हो।

कि मैं कितना गंदा हूँ...

अपनी कज़िन के बारे में... ऐसे सोचना...न कभी उसे छूने की सोची... न कभी उसे अपनी फैंटसी में खुद के साथ रखा।

हमेशा... किसी और के साथ।

मैं बस... देखता था।

जैसे कोई फिल्म देख रहा हो।

दर्शक।

और... वो दृश्य... मुझे उत्तेजित कर देता था।

मुझे नहीं पता क्यों... लेकिन वो आदत पड़ गई।

हर रात... गार्गी का नाम सुनकर... मेरा लंड खड़ा हो जाता।

और मैं... हिलाता रहता।”
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#70
रात के 3 बजे थे।

नेहा अचानक बिस्तर से उठ गई।

बिना कुछ बोले वो कमरे से बाहर चली गई।

मैं भी उठकर बैठ गया — ध्यान से।

कुछ मिनट बाद वो वापस आई... फोन लेकर।

वो मेरे पास बैठ गई और फोन स्क्रॉल करने लगी।

उसने हमारी शादी की एक ग्रुप फोटो खोली।

फिर उँगली से एक आदमी की तरफ़ इशारा किया और पूछा —

“ये अविनाश कौन है इस फोटो में?”

मैंने उँगली बढ़ाकर एक अच्छे कद-काठी वाले पंजाबी लड़के की तरफ़ इशारा किया —

तुरबन बाँधे, दाढ़ी, मजबूत शरीर।

नेहा ने फोटो ज़ूम की।

कुछ देर तक उसे ध्यान से देखा।

फिर पूछा —

“अब वो कहाँ है?”

“कनाडा में,” मैंने जवाब दिया।

“अभी भी contact में हो?”

“हाँ... सोशल मीडिया पर।”

नेहा ने मेरी तरफ़ हाथ बढ़ाया।

“अपना फोन दो।”

मैंने फोन उसे दे दिया — इंस्टा पहले से ओपन था।

वो अविनाश के प्रोफाइल पर गई।


पहले उसकी फैमिली फोटोज़ देखीं।

एक फोटो में उसकी माँ थीं — अब थोड़ी बूढ़ी दिख रही थीं, लेकिन अभी भी सुंदर।

फिर उसकी पत्नी अमाया की फोटोज़ — गोरी, लंबे बाल, फिट बॉडी।

एक फोटो में अविनाश और अमाया फ्लोरिडा बीच पर थे।

अविनाश शर्टलेस — 6 पैक एब्स, अच्छी बॉडी।

अमाया शॉर्ट्स और बिकिनी टॉप में।

नेहा ने फोटो ज़ूम की — सबसे पहले अमाया के बड़े स्तनों पर।

फिर... अनजाने में... अविनाश के क्रॉच एरिया पर ज़ूम कर दिया।

वो एक पल के लिए रुकी।

फिर मेरी तरफ़ मुड़ी... हल्की-सी शरारती मुस्कान के साथ बोली —

“ओप्स...”

उसकी आँखों में अब एक अलग चमक थी।

वो फोन अभी भी हाथ में था, लेकिन नजर मेरी तरफ़ थी।

“तुमने अविनाश के साथ ये सब... कितने समय तक किया?”

मैंने साँस ली और जवाब दिया —

“जब तक हम होस्टल में थे... लगभग आखिरी साल तक।

उसके बाद... हमने वो सब बंद कर दिया।”

नेहा ने मेरी आँखों में देखा और अगला सवाल पूछा —

“क्या उसने तुम्हें जबरदस्ती हैंडजॉब करने को मजबूर किया था?”

मैंने सिर हिलाया।

“नहीं... जबरदस्ती नहीं।

लेकिन वो... डोमिनेंट बनना पसंद करता था।

वो मुझे ऑर्डर देता था...

मुझे भी वो फीलिंग अच्छी लगती थी।

मैं खुद से नहीं रोक पाता था।”

नेहा ने “हम्म...” कहा।

उसकी आवाज़ में अब कुछ और था — जैसे वो मेरे बारे में कुछ सोच रही हो।

उसकी नजर मेरे चेहरे पर घूम रही थी, जैसे वो मेरी सबमिशन को, मेरे बेड पर वाले व्यवहार को समझने की कोशिश कर रही हो।

नेहा धीरे से बोली —

“सच बताओ... क्या उसने कभी...?”

वो वाक्य अधूरा छोड़ दिया।

लेकिन मुझे समझ आ गया कि वो क्या पूछना चाहती है।

मैंने उसकी आँखों में देखकर कहा —

“तुम्हारा मतलब... एनल? या ब्लोजॉब... है ना?”

नेहा ने बस “हम्म...” कहा।

उसकी आवाज़ में अब एक अजीब सी उत्सुकता थी — जैसे वो मेरे दिमाग को पढ़ रही हो।

मैंने सिर हिलाया।

“नहीं... उसने कभी-कभी ऑर्डर दिया था।

‘मुँह में ले’, ‘चूस’... ऐसे बोलता था।

लेकिन मैंने कभी नहीं किया।

मैं बस उसका लंड हाथ से हिलाता था।

बाकी कुछ नहीं।

मैंने कभी मुँह नहीं लगाया... और एनल की तो बात ही नहीं हुई।”

नेहा कुछ देर चुप रही।

नेहा अभी भी फोन की स्क्रीन पर नजरें गड़ाए हुए थी।

वो अविनाश की तस्वीरें स्क्रॉल कर रही थी — बीच-बीच में ज़ूम करके देख रही थी।

उसकी आँखें फोन पर थीं, लेकिन सवाल मेरी तरफ़ थे।

“तो... सिर्फ़ उसका लंड ही तुमने छुआ था?”

मैंने सिर हिलाया — “नहीं।”

नेहा ने फोन से नजर हटाकर मेरी तरफ़ देखा।

उसके चेहरे पर हैरानी थी।

“फिर... किसका?

कितने...?”

मैंने उसकी आँखों में नहीं देखा।

शर्म से मेरी गर्दन झुक गई।

आवाज़ में खुद पर दया और शर्म का मिश्रण था —

“क्या तुम सच में जानना चाहती हो कि तुम्हारे नाकारा पति ने कितने लंड छुए हैं?”

“हाँ... अगर तुम कम्फर्टेबल हो तो बताओ।

लेकिन मैं तुम्हें पहले बता दूँ — ये कुछ भी हमारे बीच नहीं बदलेगा।

हमारा बॉन्ड हमारे पास्ट से कहीं ज़्यादा बड़ा है।”

मैंने गहरी साँस ली और बोला —

“अविनाश के बाद... मैं कई और लड़कों से मिला।

घर के आसपास रहने वाले... पड़ोस के, कॉलेज के, कॉलेज के।

उन्होंने मुझसे सिर्फ़ इसलिए दोस्ती की... क्योंकि मैं गार्गी का भाई था।

मुझे पहले से पता था — उनकी नजर गार्गी पर थी।

गंदी नजर।

फिर भी... मैंने उन लोगों को दोस्त बनाया।

मुझे एक अजीब सी आदत पड़ गई थी।

अगर कोई गार्गी के बारे में गंदी बातें करता था

तभी मुझे वो एरोटिकनेस महसूस होती थी।

ये जानते हुए कि ये गलत है... मैंने उनको दोस्त बनाया।

और उनके साथ... वही सब किया जो अविनाश के साथ किया।

नेहा ने पूछा —

“तो... कितने लोग थे?”

मैंने सिर हिलाया, शर्म से आवाज़ कम हो गई —

“मुझे ठीक से याद नहीं... मगर चार-पाँच से ज़्यादा तो रहे होंगे।”

हा अभी भी फोन में अविनाश की तस्वीर देख रही थी।

उसने ज़ूम किया — उसकी छाती, बाँहें, फिर नीचे...

फिर मेरी तरफ़ मुड़ी —

“उन सबकी कद-काठी अविनाश जैसी ही थी?”

मैंने सिर हिलाया —

“सबकी तो नहीं... कुछ अविनाश जैसे थे — मोटे, मजबूत, लंबे।

कुछ पतले-दुबले भी थे... मगर...”

नेहा ने फोन साइड रखा और पूछा —

“मगर क्या?”

मैंने गहरी साँस ली... और बोला —

“मगर उन सबमें एक बात थी...

उन सबका लंड... कम से कम मुझसे तो बड़ा ही था।

अविनाश जितना नहीं... तो अविनाश से थोड़ा कम...

मगर मुझसे ज़्यादा बड़ा।

“पता नहीं... उन्होंने मुझे कैसे ढूँढ लिया।

पहले एक से मिला... फिर दूसरे से... फिर दो से... फिर चार से।

शायद मैं उन ग्रुप में मशहूर हो गया था —

'वो लड़का जिसका नाम है... जो हाथ से लंड हिलाता है...

और वो भी अपनी बहन को सोचकर।'

मैंने आगे कहा —

“उनकी एक जगह थी... जैसे कोई अड्डा।

एक पुराना, खाली कमरा... जहाँ कोई नहीं आता था।

वो सब वहाँ बैठते थे — चार-पाँच लड़के।

मुझे भी बुलाते थे।

वहाँ वो बीयर पीते, माल फूकते...

फिर अपनी-अपनी कल्पनाओं में खो जाते।

मैं भी... अपनी कल्पना में खो जाता।

मेरे पास सिर्फ़ एक ही ड्यूटी थी।

मैं एक-एक के पास जाता...

उनका लंड निकालता... खड़ा करता... और हिलाता।

और वो... मेरे कान में फुसफुसाते...

जो वो गार्गी के साथ कल्पना में कर रहे थे।

बहुत गंदी-गंदी बातें...

बहुत शर्मनाक...

‘गार्गी की चूत कितनी टाइट होगी...’

‘मैं गार्गी को दीवार से लगाकर चोदूँगा...’

‘गार्गी मेरे लंड को चूसते हुए रोएगी...’

मुझे गुस्सा आना चाहिए था...

लेकिन मुझे... और मज़ा आता था।

मैं अच्छे से उनका लंड रगड़ता था...

जोर से... तेज़...

जब तक वो झड़ न जाए।

“उस समय तक मोबाइल आ चुके थे।

मेरे पास नोकिया 6600 था — वो छोटा सा, ब्लैक एंड व्हाइट वाला।

वो लड़के मुझे बोलते — 'गार्गी की तस्वीर ला... दिखा...'

मैं कभी वो तस्वीर दिखाता जो मैंने खुद गार्गी को बताकर खींची थी — वो मुस्कुराती हुई, घर में नॉर्मल कपड़ों में।

कभी-कभी... मैं वो तस्वीर लेके आता...

जिसमें वो सो रही होती थी।

उसके कपड़े अस्त-व्यस्त... टॉप थोड़ा ऊपर सरका हुआ...

पैर फैले हुए...

मैं उस टाइम पर चुपके से खींच लेता था।

फिर उन लड़कों के पास ले जाता।

वो तस्वीर देखकर... सब आहें भरते।


'देख... गार्गी कितनी सुंदर सो रही है...

उसकी चूत कितनी टाइट लग रही होगी...

मैं तो इसे ऐसे ही चोद दूँगा...'

“वही तस्वीरें... मैं ईमेल करके अविनाश को भी भेजता था।

उस टाइम हम याहू पर चैट करते थे।

मैं उसे गार्गी की फोटोज़ भेजता — सोती हुई, कपड़े अस्त-व्यस्त वाली, या मुस्कुराती हुई।

वो मुझे रिप्लाई करता —

‘गार्गी बहुत सुंदर है यार...

एक दिन मैं उससे शादी करूँगा।

और जब मैं उसे चोदगा, तो तुझे देखने दूँगा सब कुछ।

तुम देखना... मैं गार्गी को कैसे चोदता हूँ...’

धीरे-धीरे... सबकी चाहत सिर्फ़ सेक्स से बहुत आगे बढ़ गई थी।
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#71
“कई बार वो गार्गी के अंडरगारमेंट्स भी माँगते थे।

ये मैं पहले भी कई बार कर चुका था।

अविनाश के लिए... या उन लड़कों के लिए... जब वो पूछते... तो मैं गार्गी की यूज़्ड ब्रा और पैंटी लेके जाता।

वो उसे सूँघते... बहुत गहरी साँस लेकर...

फिर गंदी-गंदी बातें शुरू कर देते —

‘गार्गी की चूत की खुशबू... कितनी मीठी होगी...’

‘मैं गार्गी को पूरी रात अपने बॉल्स चटवाऊँगा...’

‘मैं उसके मुँह में थूकना चाहता हूँ...’

‘मैं उसके बूब्स पर थूककर चोदूँगा...’


‘गार्गी को नंगी करके... उसके चेहरे पर वीर्य डालूँगा... और फिर उसे चाटने को कहूँगा...’

मैं... बस बैठा सुनता रहता।"

नेहा मेरी बात सुनकर साँस रोककर बैठी थी।

मैंने आगे कहा —

“भैया, मम्मी-पापा सब एक शादी में गए हुए थे।

घर अकेला था।

मैंने उन सबको बुलाया — चार-पाँच पुराने लड़के, और कुछ नए चेहरे भी।

सब आए... मेरे घर पर।

हमने डोर लॉक किया, पर्दे बंद किए।

फिर टीवी ऑन किया।

एक पॉर्न लगाई — गैंगबैंग वाली।

एक लड़की... बहुत सारे लड़कों के साथ...

वो सीडी वो खुद ही लेके आए थे।

हमने डीवीडी में डाल दिया।

“माल भी, बॉस सिगरेट्स भी...

तीन-चार लोग लगातार एक साथ घर में सिगरेट पी रहे थे।

पूरे घर में धुआँ-धुआँ सा हो रहा था — जैसे कोई धुंध छा गई हो।

बीच-बीच में मैं किचन से खाने के लिए कुछ लेके आता — चिप्स, कोल्ड ड्रिंक...

तभी मैंने महसूस किया... शायद एक-दो लोग... पहले वाले ग्रुप से नहीं हैं।

मैंने इधर-उधर देखा।

गेट की तरफ़ देखा — बाहर गए होंगे?

मगर गेट लॉक था।

फिर थोड़ा अंदर जाने के बाद... मैंने देखा।

वो गार्गी के रूम में घुस चुके थे।

उसकी अलमारी खोलकर... उसके कपड़ों को सूँघ रहे थे।

उसके टॉप को नाक पर रखकर... गहरी साँस ले रहे थे।

उसकी ब्रा को... अपने लंड से रगड़ रहे थे।

एक ने ब्रा को नाक पर रखा... और दूसरा... उसकी पैंटी को हाथ में लेकर... हिलाने लगा।

“उनमें से हर चीज़ से खरे थे।

गार्गी की हर चीज़ को सूँघ रहे थे — उसकी ब्रा, पैंटी, टॉप, साड़ी का ब्लाउज...

अलमारी के हर कोने में घुस रहे थे।

एक ने गार्गी की पुरानी स्लीपर उठाई... उसे नाक पर रखा... और बोला —

‘यार... गार्गी के पैरों की खुशबू... मैं इसे चाटूँगा...’

फिर वो सबने अपना लंड निकाला।

एक ने गार्गी की ब्रा को अपने लंड पर लपेट लिया...

जोर-जोर से हिलाने लगा...

‘देख... गार्गी की ब्रा पर मेरा प्रीकम... जैसे वो मेरे लंड को चूम रही हो...’

फिर... एक लड़का गार्गी के बिस्तर पर चढ़ गया।

घुटनों के बल बैठा... लंड हाथ में पकड़ा...

जोर-जोर से हिलाने लगा।

उसकी साँसें तेज़... आँखें बंद...

‘गार्गी... तेरे बिस्तर पर... मैं तुझे चोद रहा हूँ...’

और फिर... सारा पानी बिस्तर पर छोड़ दिया।

सफेद-गाढ़ा... गार्गी के तकिए पर... चादर पर...

उसने झटके में झड़ते हुए ताली बजाई —

‘देखो यार... गार्गी के बिस्तर पर मेरी झड़ाई...

अब ये बिस्तर हमेशा मेरी याद रखेगा!’

“वो बड़े खट्टे करने लगे थे।

एक ही कपड़ा बार-बार उठाते... सूँघते... फिर रख देते।

फिर अचानक कुछ कपड़े अलग करने लगे — जैसे कोई खजाना मिल गया हो।

ज्यादातर... गार्गी के इनर।"

फिर वो सब इकट्ठे किए — जैसे कोई ट्रॉफी हो।

रूम से बाहर निकल गए।

शायद... सोफे पर बैठे बाकी लड़कों को दिखाना चाहते थे।

जो पॉर्न देख रहे थे... और माल फूक रहे थे।

मैंने देखा... वो बाहर आकर सबको दिखाने लगे।

“उनमें से एक — वो जो सबसे ज़्यादा बोलता था — ने गार्गी की पिंक ब्रा उठाई।

उसने ब्रा के कप को अपनी नाक पर दबाया... गहरी साँस ली... फिर जीभ निकालकर कप को चाटा।

‘यार... गार्गी के बूब्स की खुशबू... जैसे दूध की... मैं इसे चूसूँगा...’

दूसरा लड़का उसकी ब्लैक पैंटी लेके आया।

उसने पैंटी को अपनी मुट्ठी में कसकर दबाया... फिर लंड पर लपेट लिया।

जोर-जोर से हिलाने लगा — पैंटी का कप उसके लंड के सिर पर रगड़ रहा था।

‘देख... गार्गी की पैंटी मेरे लंड को चूम रही है...

अगर वो ये पहनेगी... तो उसकी चूत भी मेरे प्रीकम से भरी होगी।’

“रूम में मैंने देखा... अचानक सबने गार्गी के कपड़े देखे और एकदम खुश हो गए।

बीयर की बोतलें खुल गईं — सब चिल्ला रहे थे, हँस रहे थे।

“मैंने उन सबको देखा... गार्गी के कपड़ों के साथ।

फिर अचानक नोटिस किया — वो लड़का जो अभी-अभी बिस्तर पर झड़ा था... वो अभी तक रूम में ही था।

थोड़ी देर बाद वो भी बाहर आया... मेरे साथ खड़ा हो गया।

उसका लंड अभी मुरझाया हुआ था — गीला, लाल, चिपचिपा।

मुझे लगा... वो अभी भी मुझसे बड़ा है।

उसने मेरे कंधे पर हाथ रखा।

मेरे हाथ की तरफ़ देखकर बोला —

‘भाई... जल्दी उसको खड़ा करो... वापस से।

मैं अभी-अभी तेरी बहन के बिस्तर पर गीला करके आया हूँ..."

मैंने उस लड़के का लंड हाथ में लिया —

धीरे-धीरे सहलाने लगा... उँगलियाँ उसके सिर पर घुमाती हुई...

वो जोर से आह भरी और बोला —

“बहन... चोद...

जब भाई का हाथ इतना अच्छा है... तो जब बहन हिलाएगी... तो कितना मज़ा आएगा...”

उसकी बात सुनते ही... कमरे में जो लोग गार्गी के कपड़ों में खोए हुए थे...

सबका ध्यान हमारी तरफ़ हो गया।

सब एक पल को मेरी तरफ़ देखे — आँखें चौड़ी, मुँह खुला।

दो सेकंड की पूरी शांति।

फिर... ठहाके।

जोर-जोर से हँसने लगे — जैसे कोई बहुत बड़ा जोक सुन लिया हो।

हँसी इतनी ज़ोर की कि कमरा गूँज उठा।

फिर एक ने कहा —
“अरे भाई को बीच में आने दो..."


वो लड़का — जिसका लंड अभी भी मेरे हाथ में था — ने मेरे कंधे पकड़ा।

मुझे खींचकर बीच में ले आया।

सब सोफे पर बैठे... मुझे घूर रहे थे।

कुछ के हाथ में गार्गी के कपड़े थे — ब्रा, पैंटी — वो उन्हें हवा में लहरा रहे थे।

उनकी आँखें मुझे चुभ रही थीं — जैसे मैं कोई शो का हिस्सा हूँ।

फिर एक ने बोला, हँसते हुए —

“यार... इसका तो पूरा परिवार ही सुंदर है।”

वो कमरे की दीवार पर लगी फैमिली फोटो की तरफ़ इशारा किया।

मम्मी-पापा, गार्गी, मैं... सब मुस्कुरा रहे थे।

उसने आगे कहा —

“देखो... आंटी भी जवानी में कितनी हॉट लगती होंगी।


सही में... आंटी ने तो कमाल किया — एक तो गार्गी जैसी सुंदर लड़की पैदा की...

और एक ये सैम जैसा... चूतिया लड़का।

जिसे मजा आता है अपनी बहन के बारे में सुनके।”

कमरे में अब सबकी आवाज़ें गूँज रही थीं।

किसी ने "भैंसोद" कहा, किसी ने "चूतिया", किसी ने "कांडू"...


शब्द हवा में उड़ रहे थे, जैसे कोई गंदी धुंध।

फिर एक ने पूछा —

“मगर भाई... ऐसे लड़के कौन होते हैं?

ऐसा लड़का कोई क्यों करेगा?

क्यों अपनी बहन के बारे में ये सब सुनना चाहता है?”


दूसरे ने हँसते हुए जवाब दिया —

“हाँ, हम तो नहीं सुनना चाहते।

अगर कोई हमारी फैमिली वुमन के बारे में कुछ गलत बोले... तो हम तो उसे मार देंगे।

मगर ये... अलग किस्म का लड़का है।

पता है क्यों?”

उसने उस लड़के की तरफ़ इशारा किया — जो अभी भी मेरे साथ खड़ा था, जिसका लंड मेरे हाथ में था।

उसने मेरे पजामे में एक उंगली फंसाई... और धीरे से नीचे खींच दिया।

मेरा लंड — साढ़े चार इंच का, सख्त लेकिन छोटा — सबके सामने आ गया।

सब एक पल को चुप... फिर ठहाके।

जोर-जोर से हँसने लगे।

“देखो यार... इतना छोटा!”

“भाई, ये तो पेनिस नहीं... पेंसिल है!”

फिर वो बोला —

“इसलिए... इसलिए ये ऐसा है।

क्योंकि ये चूतिया है।

इसका लंड बहुत छोटा है।

इसे पता है कि ये किसी को चोदेगा तो कभी सैटिस्फाई नहीं कर पाएगा।

इसलिए ये ऐसी सोचता है... नई-नई चीजें...

गार्गी को चोदते हुए कल्पना करता है...

क्योंकि असल में वो कभी किसी को चोद नहीं पाएगा।”

उनमें से एक ने गार्गी की ब्रा हवा में उछाली।

मैंने रिफ्लेक्स में कैच कर ली — वो पिंक वाली, लेस वाली... अभी भी उसकी खुशबू से भरी हुई।

फिर वो बोला —

“चल... पहन के दिखा।”

मैं उनकी तरफ़ देखता रहा — जैसे वो क्या कह रहे हों।

मेरा मन चीख रहा था... लेकिन कमरा मेरे घर का था... और कंट्रोल उनके पास था।

मैं कुछ कहने वाला था कि एक ने हँसते हुए बोला —

“अरे बहन... जोत पहन के दिखा।

ये ब्रा कैसे दिखती है तेरे ऊपर?

आज तू सैम नहीं... आज तू गार्गी है।”


सब फिर ठहाके मारकर हँसे।

एक ने मेरे कंधे पर हाथ रखा — दबाव दिया।

दूसरा बोला —

“पहन... पहन... देखते हैं तेरी बहन जैसी बॉडी कैसे लगती है।

तेरा छोटा लंड तो छुपा रहेगा..."

सबकी नजरें मेरी तरफ़ थीं — अति उत्तेजक, जैसे कोई शिकार का खेल चल रहा हो।

मुझे वो एक झुंड की तरह लग रहे थे... भूखे, हिंसक...

अगर चाहते तो मुझे कुचल सकते थे।

मैं थोड़ा डर गया था — दिल तेज़ धड़क रहा था।

पर... मैं जानता था, मैं ये सब रोक सकता था।

बस एक चिल्लाहट, एक धक्का... और सब खत्म।

मगर... मैं रोकना नहीं चाहता था।

मैं जानना चाहता था — मैं कहाँ तक जा सकता हूँ।

मैंने धीरे से अपनी शर्ट ऊपर की...

और ब्रा को छाती पर लगाया।

वो थोड़ी ढीली थी — मेरे छोटे बूब्स पर लटक रही थी।

सब देखकर हँसने लगे — जोर-जोर से।

एक ने बोला —

“कोई बात नहीं... जब तू उस एज में जाएगा तो तेरे भी बड़े हो जाएंगे।

बस किसी को चूसने पड़ेंगे... फिर देखना, कितने फूलेंगे!”

मेरी पैंट तो पहले से नीचे थी — लंड बाहर, सख्त, छोटा।

किसी ने मुझे पैंट ही पहना दी — गार्गी की पैंटी।

फिर एक ने कहा — “ओ गार्गी, बहन की लोड़ी!”

“चल, अब झुक जा और कुतिया बनके दिखा।”

वो मुझे जमीन पर... हाथ-पाँव के बल...

अपने लिए बोल रहे थे।

मैंने देखा — सबकी आँखें जल रही थीं।

किसी ने मेरे बाल पकड़े, कस के दबाया —

“बहन चुप गार्गी... चल कुतिया की तरह भौंक के दिखा!”


मुझे लगा... शायद मजाक है।

मगर बालों में दर्द... और उनकी नजरें...

मैंने कोशिश की — “भौ... भौ...”

आवाज़ काँपती हुई, छोटी।

सब ठहाके मारकर हँसे।

“हाहा... गार्गी की भौंक!”

“अब पूँछ हिला... कुतिया!”

मुझे पता नहीं था... उन्हें क्या मज़ा आ रहा था।

और मुझे... क्या मज़ा आ रहा था ये सब होने देना।

शर्म... डर... उत्तेजना... सब मिलकर...

मैं बस देखता रहा कि आगे क्या होगा।

फिर एक-एक ने मुझे पास बुलाया।

अपना लंड मेरे हाथ में थमा दिया।

“हिला... गार्गी के नाम पर हिला...”

“कल्पना कर... तेरी बहन को चोद रहा हूँ...”

मैं हिलाता... तेज़...

वे झड़ते — मेरे हाथ में... गाढ़ा, गर्म।

फिर मैं बार-बार वॉशबेसिन में जाता... हाथ धोकर आता...

फिर अगले को... फिर अगले को।

सबने एक-एक करके... पॉर्न देखते हुए...

गार्गी के बारे में गंदी बातें करते हुए...

मेरे हाथ से झड़ लिया।

सब... एक बार झड़ चुके थे।

ब कमरा पूरी तरह महक गया था — दारू की तेज़ गंध, सिगरेट का धुंआ, माल की मीठी-कड़वी खुशबू, और अह... कम की गंध... पसीने की, लंड की, सब मिलकर एक भारी, गर्म हवा बन गई थी।

सब लोग अब कंप्लीटली नंगे थे — छाती पर घने बाल, पसीना टपकता हुआ, लंड लटकते हुए या सख्त... सब कुछ दिख रहा था।

मैं कोने में खड़ा था — जैसे कोई कुत्ता, जिसे उन्होंने वहाँ ऑर्डर किया था।

वो आपस में बातें करने लगे — धीमी, गुप्त आवाज़ों में।

मुझे सुनाई नहीं दे रहा था... शायद प्लानिंग कर रहे थे... अगला स्टेप क्या होगा।

मैं बस खड़ा रहा, पसीना मेरी पीठ पर बह रहा था।

फिर एक ने अचानक बोला —

“तुझे मज़ा आया?”

मैंने उनकी तरफ़ देखा... कोई जवाब नहीं दिया।

वो हँसा —

“मज़ा आया होगा तभी तो अभी तक तूने हमें अपने घर से बाहर नहीं निकाला।

देख... पूरा घर अस्त-व्यस्त कर दिया है।

सफाई में तुझे दो दिन लगेंगे... और तू अभी भी हमें रोक रहा है।

क्यों? क्योंकि तुझे ये सब... पसंद है।”

मैंने फिर कोई जवाब नहीं दिया।

मन में लगा... शायद वो सच बोल रहा है।

उसने मेरी तरफ़ देखा, मुस्कुराकर बोला —

“चल, कोई नहीं... तुझे मज़ा आया तो बढ़िया है।

अब बैठ जा, अभी कोई डर नहीं है। हम कुछ नहीं करेंगे।”

उसने एक सीट खींची — सिंगल सीटर सोफा, कमरे के कोने में।

मुझे वहाँ बिठा दिया।

सब अब दो सोफों पर फैल गए थे — एक पर तीन, दूसरे पर दो।

मैं अकेला... बीच में... जैसे कोई स्टेज पर हो।

मेरा लंड अभी भी सख्त... ब्रा और पैंटी पहनी हुई...

शर्ट आधी खुली।

एक ने ग्लास में बीयर पलटी — ठंडी, झाग वाली।

मुझे थमाया।

मैं इतना घबराया था कि एक घूँट में पी गया — गले से नीचे उतरा, जलन हुई।

जैसे ही खत्म किया... उसने दूसरी भर दी।

झे उस टाइम पता नहीं था... शायद वो मुझे नशे में करना चाहते हैं।

बीयर... सिगरेट... माल... सब मिलकर दिमाग धुंधला हो रहा था।

मुझे लगा... अब उन्होंने जो करना था... वो कर लिया।

अब बस... मज़ा ले रहे हैं।

मुझे लगा अब सब खत्म हो चुका है।

सब लोग अब सोफे पर फैलकर बैठे थे — नंगे, पसीने से तर, बीयर के ग्लास हाथ में।

गप्पें मार रहे थे — कोई क्रिकेट की बात, कोई बॉलीवुड की, कोई पॉर्न की।

पॉर्न... वही था, लेकिन अब स्क्रीन पर लड़की चेंज हो गई थी।

एक रशियन — गोल्डन बाल, लंबे, चमकदार... गोरी चमड़ी, नीली आँखें।

वो एक झुंड काले लड़कों के बीच में थी — बेरहमी से चोद रहे थे।

एक उसके मुँह में... एक उसके चूत में... एक उसके गांड में...

वो चीख रही थी, लेकिन चेहरा... खुश... सैटिस्फाइड।

लोग बोल रहे थे —

“अरे ये तो बहुत सुंदर है... क्यों ऐसे काम करती है?”

दूसरा हँसा — “देख इसका चेहरा... कितनी सैटिस्फाइड लग रही है।

एक जना तो सैटिस्फाई नहीं कर सकता... इसलिए ये झुंड चुनती है।”

फिर किसी ने दीवार पर लगी गार्गी की तस्वीर की तरफ़ देखा — वो मुस्कुराती हुई फैमिली फोटो।

बोला — “देख... गार्गी का चेहरा...

शायद उसका भी ऐसा ही है।

एक जना सैटिस्फाई नहीं कर पाएगा।

शायद उसे भी झुंड चाहिए... अपने जैसा झुंड... जो उसके साथ ये सब करे।”

सब हँसे... फिर मेरी तरफ़ देखा।

मैं... सिंगल सीटर पर... ब्रा-पैंटी में...

बीयर का ग्लास हाथ में... नशा चढ़ रहा था।

उनका सारा कन्वर्सेशन अब फिर से गार्गी पर आ चुका था।

एक ने बीयर का घूँट लिया और बोला —

“यार... वैसे तो मेरी कम्युनिटी से ही हो तुम लोग...

क्या मैं गार्गी से शादी कर लूँ?”

सब हँसे।

वो जारी रखा —

“अगर मैं गार्गी से शादी कर लूँगा... तो स्वागत वाले दिन तुम सबको बुलाऊँगा...

और इस चूतिये को भी बुलाऊँगा।

ये चूतिया देखेगा... और गार्गी हम सबसे चुदेगी।

पता है... मुझे लगता है कि वो दोबारा... एक बार चुदने के बाद फिर सबके लिए लाइन खड़ा करेगी...

चूस-चूस के... और फिर उसके बाद वो वापस चुदेगी...

क्योंकि वो एक से सैटिस्फाई नहीं हो सकती।”

दूसरा हँसा, ग्लास उठाकर बोला —

“मैं तो उससे कुतिया बना के पूरे होटल में घूमूँगा...

जहाँ हम लोग हनीमून मनाएंगे...

उसे पूरी नंगी कराऊँगा...


उसकी चूत में लंड डालकर... घसीटता हुआ...

सब देखेंगे... और वो भौंकती रहेगी...

मैंने देखा... सबके लंड बापिस से खड़े हो रहे थे।

एक लड़का मेरे पास आया — धीरे से।
उसने मेरी ब्रा को थोड़ा नीचे खींचा... मेरी निप्पल बाहर आ गई।


उसने हाथ रखा... मसलने लगा... धीरे-धीरे...

देखता हुआ बोला —

“गार्गी के भी इसी कलर के होंगे...

ये दोनों भाई-बहन एक ही चूत से निकले हैं...”

सब ठहाके मारकर हँसे।

फिर उसने अपना मुँह बढ़ाया —

“क्या कोई नहीं... बहन नहीं तो भाई सही।”

और उसने मेरी निप्पल अपने मुँह में ले ली... चूसने लगा।

जोर से... गीला... गर्म...

उसके हाथ मेरे लिंग पर... रगड़ते हुए... जैसे कोई चूत रगड़ रहा हो।

नेहा अब मेरी बात सुनकर पूरी तरह सिसक रही थी — आँखें नम।

वो सबने मुझे घेर लिया।

हाथ फैलाए...

कोई निप्पल पिंच करता... कोई कमर दबाता...


कोई लंड हिलाता... जैसे मैं कोई खिलौना हूँ।

मैं बोलना चाहता था — ‘रुक जाओ... ये ज्यादा हो रहा है...’

मगर आवाज़ नहीं निकल रही थी।

फिर एक ने दीवार से वो फैमिली फोटो उतारी

मैंने चिल्लाया — ‘ये मत करो!’

मगर वो सुना नहीं।

फोटो सामने लाया... और सबने लंड रगड़ना शुरू कर दिया।

कोई गार्गी के चेहरे पर... कोई पूरी फैमिली पर...

आधे लोग मेरे शरीर पर झड़ गए — हाथ, मुँह, लंड... सब जगह।

आधे फोटो पर... झड़ते हुए।

एक ने बोला — “सॉरी भाई... थोड़ा ज्यादा हो गया...”

एक चिल्लाया —"अपनी बहन के बारे में सुनने के लिए... तो ये सब भी सहे!”

फिर सब नशे में थे।

एक-एक करके चले गए — कपड़े पहनकर... हँसते हुए...

मैं... रूम में अकेला... सोफे पर।

चारों तरफ़ गंदगी — बीयर की बोतलें, सिगरेट के टुकड़े, कम की गंध...

फोटो पर... पूरा गीला... सफेद-गाढ़ा...

मुझे लगा — कल पूरे दिन सफाई करनी पड़ेगी।

मगर नशा इतना चढ़ा था... मैं सोफे पर लेट गया...

सोचते-सोचते... सो गया।

नेहा ने मेरी आँखों में आँसू देखे।

उसने धीरे से मेरी ठोड़ी उठाई... अपनी उँगलियाँ मेरे गाल पर फेरती हुई।

“ओवर बेबी... तुम्हें ये सब सहना पड़ा।

तुम्हारा मन... कितना टूटा होगा।

मैं... मैं समझ सकती हूँ।"

वो आखिरी टाइम था जब में उन सब से मिला।

में उस हादसे के बाद टूट गया था।

कभी कभी कोई बिल जाता तो में इग्नोर केर देता।

कई बार सॉरी बोलने की कोशिश की उन्होंने।

और फिर में इंजीनियरिंग के लिए शहर छोड़ दिआ।
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#72
Super twist in story, mujhe lagta hai jald hi Neha Gupta ji ke samne ghutno ke bal baith ke unka mota lund chusegi aur baad mein Gupta ji Neha ko jamkar chodenge aur Sam chupke se Neha ki chudai Dekhega, please update next part as soon as possible waiting
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#73
good one. pls continue
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#74
Bhai please update or aaj big update kue ke phir out of station rhunga so 1 month read nhi kr paunga so bhai please aaj update post krdo
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#75
उस रात सब खत्म हो गया।

हम दोनों थोड़े अजीब हो गए थे अपने रिलेशनशिप में।

15-20 दिन निकल चुके थे, ये कहानी सुनाए हुए नेहा को।

हम बात कर रहे थे, खाना खा रहे थे, सेक्स भी कर रहे थे...


मगर एक अलग सा, अजीब सा साइलेंस था हमारे बीच।

एक ऑकवर्डनेस... एक अजीब सी हलचल।

मुझे नहीं पता था कि नेहा मेरे बारे में क्या सोच रही है।

क्या मुझे ये स्टोरी उसे बतानी चाहिए थी... या नहीं बतानी चाहिए थी।

फिर एक रात... 20-25 दिन बाद...

हम बिस्तर पर थे।

नेहा ने मेरी तरफ़ देखा और धीरे से बोला —

“जैसे अविनाश तुम्हें डोमिनेट करना चाहता था...

क्या तुम भी उसे डोमिनेट करना चाहते हो?”


मैंने सोचा... नेहा क्या बोल रही है।

मैंने उसके चेहरे की तरफ़ देखा।

मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि ये बात कहाँ जा रही है।

मेरा दिल धड़कने लगा।


क्या वो मुझे टेस्ट कर रही है?

क्या वो जानना चाहती है कि मैं अब भी... उस पुरानी भूख को...

डोमिनेशन की... या सबमिशन की...

मैंने हल्के से पूछा —

“तुम्हारा मतलब... क्या है?”

नेहा ने मेरी आँखों में देखा... फिर स्माइल की — वो वाली स्माइल जो मुझे हमेशा हिला देती है।

उसने फोन उठाया... स्क्रीन पर अविनाश की वाइफ की तस्वीर दिखाई — वो भी सुंदर,

फिर धीरे से बोली —

“देखो... आज की रात... मैं अविनाश की बीवी हूँ।

तुम जो करोगे... वो कर सकते हो मेरे साथ।

जितना गंदा... जितना नीचा... जितना डोमिनेट... सब करो।

मैं... तुम्हारी... कुतिया हूँ।”

उसने इतनी तेज़ी से कपड़े उतारे — ब्रा, पैंटी, सब एक झटके में...

जैसे कोई रोलप्ले पहले से रिहर्सल किया हो।

फिर जमीन पर घुटनों के बल... कुतिया बन गई।

गांड ऊपर... सर नीचे... बाल बिखरे...

और बोली —

“अरे अविनाश के दोस्त... सैम... आओ... मुझे छू लो।

मुझे... नीचा दिखाओ...

जैसे तुमने वो रात में सहा...

अब... तुम करो।”

उसकी आँखों में वो चमक — दर्द और मज़ा का मिक्स।

“आओ सैम... कर लो... पूरा अपना आरमान।

अविनाश ने तुम्हें बहुत डॉमिनेट किया... आज उसका बदला... मेरे शरीर से ले लो।”

मैंने आगे बढ़ा... एक जोरदार थप्पड़ उसकी गांड पर मारा।

पटाक!

आवाज़ कमरे में गूँजी।

नेहा का मुँह दर्द से मुँह मढ़ाया... फिर एक पल बाद स्माइल... और आँख मारी।


“करो... मैं रेडी हूँ... बोलो उसका नाम... गाली दो...”

मैंने गुस्से में कहा —

“अनाया... बहन की लोड़ी... माधवचोद...

तेरे हसबंड ने मेरे साथ बहुत अपना लंड हिलवाया है...

अब तू मेरी कुतिया है!

एक और थप्पड़... इस बार उसके चेहरे पर।

उसकी गोरी गाल लाल हो गई।

मैंने उसके बाल पकड़े — नेहा के बाल, जो आज अनाया के थे —

जोर से पीछे खींचा।

उसकी चूत में लंड डाला... एक झटके में पूरा।

फिर जोर-जोर से... धक्के मारने लगा।

हर धक्के में वो चीखी — “आ... आ... सैम... आ...

इतना अच्छा... अविनाश ने भी कभी नहीं छूआ...

तुम... मुझे... चोद रहे हो... जैसे मैं... तेरी हो...”

नेहा — या अनाया — अभी भी कुतिया बनी, मेरे लंड पर चढ़ी हुई... हाँफती हुई।

मैंने उसे चोदते-चोदते रुकने का नाम नहीं लिया।

जोर से धक्के... उसके बाल कसकर पकड़े...

फिर उसने बीच में कहा —

“आह... सैम... मुझे एक बात बताओ...”

मैंने चोदते-चोदते पूछा — “क्या?”

“कौन पूछ रहा ह ?"

.“मैं... नेहा पूछ रही हूँ।

बोलो... मैं अनाया नहीं... नेहा हूँ... अगर तुम सैम नहीं... अविनाश हो .. तो?”

उसकी बात सुनते ही... मेरे दिमाग में करंट दौड़ गया।

अविनाश...

एक सेकंड में सब घुस गया।

मैंने स्पीड बढ़ा दी — और तेज़... और गहरा।

उसके बालों को और कसकर खींचा — इतना कसकर कि वो हड़बड़ा गई।

“आह... अविनाश... आह...”

मैंने एक और थप्पड़ मारा — इस बार इतना जोर से कि उसकी गोरी गाल पर लाल निशान पड़ गया।

नेहा चीखी — “हाँ... अविनाश... चोद... और जोर से...

मैंने बाल और खींचे... धक्के और तेज़...

उसकी चूत ने मुझे निचोड़ा...

और मैं... झड़ गया — गाढ़ा... गर्म... उसके अंदर।

वो भी झड़ गई — “आह... अविनाश... आह...”

नेहा चूत में झड़के... आखिरी धक्का... और उसके ऊपर लेट गया।

हम दोनों... पसीने से तर... गर्म साँसें... एक-दूसरे के चेहरे पर।

नेहा — या अनाया — मेरे नीचे थी... उसकी आँखें मेरी तरफ़...

मैं समझ गया... मैंने गलती कर दी।

उसे पता चल गया था... कि मैं सैम और अनाया के रोल में इतना जल्दी, इतनी गहराई से नहीं छू पाया...


जितनी गहराई से अविनाश और नेहा के रोल में चला गया।

वो मेरे मनोविज्ञान को पढ़ रही थी... धीरे-धीरे...

जैसे कोई किताब खोल रही हो।

मुझे किस बात में मज़ा आता है... वो समझने लगी थी।

शायद... वो समझ गई कि मेरे अंदर... डोमिनेशन नहीं... बल्कि... सबमिशन की भूख है।

मैं... खुद को नीचा दिखाने में... उत्तेजित होता हूँ।

न कि किसी को नीचा दिखाने में।
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#76
नॉर्मल सेक्स... अब हम दोनों को बोरिंग लगने लगा था।

रोलप्ले... हम दोनों के बीच... ऐसे ही रहे।

हर बार... कुछ नया

हम अपने आसपास के लोगों को यूज़ करने लगे।

जैसे कोई गेम... कोई नया खिलौना।

एक हाउस पार्टी में... नेहा ने एक लड़के को देख आँख मारी।

मुझे पता चल गया — आज वो क्या रोलप्ले करेगी।

उसने मुझे कान में कहा — “वो लड़का... आज मेरा बॉयफ्रेंड है।

तुम... उसका दोस्त... जो देखता रहेगा।”

कभी कैब ड्राइवर... जो हमें घर छोड़ता था।

कार में.... नेहा की स्कर्ट ऊपर... लंड निकाला...

उसने नेहा को चोदा... जैसे कोई जानवर...

फिर... हमारी बिल्डिंग का वॉचमैन।

एक दिन... मैंने उसे मैसेज किया — “किचन का नल तैयार करवाना है।”

वो आया... मैडम की नाभी देख रहा था.

सने बोला — “मैडम... ये किचन का नल में तो थोड़ा टाइम लगेगा...

मगर आपकी ये गहरी नाभी... मैं अभी सही कर सकता हूँ।”

मैंने नेहा की तरफ़ देखा... वो मुस्कुराई।

“मेरा पति बाहर गया है... हमारे पास एक घंटा है।

आओ... अपनी हसरत पूरी कर लो।”

हम जानते हैं कि डायलॉग सस्ते हैं... जैसे किसी 'C-ग्रेड' फ़िल्म के राइटर ने लिखे हों।

लेकिन ज़्यादातर समय, हमारे लिए यह काम कर जाता है।

वो जानवर की तरह टूट पड़ा।

नेहा को काउंटर पर झुकाया... कंडोम लगाया...

जोर-जोर से चोदा... नाभी में उंगली डालता...

नेहा चीखती — “आह... वॉचमैन... और जोर से...

मेरे पति को पता चलेगा... तो भी... चोदो...”

बाहर की दुनिया में... नेहा पूरी तरह ग्रेसफुल और रेस्पेक्टफुल थी।

कोई नहीं जानता था कि हमारे घर के अंदर... दरवाज़ा बंद होने के बाद... क्या हो रहा है।

वो कभी किसी के सामने मिसबिहेव नहीं करती थी।

हमेशा मुस्कुराती... नमस्ते करती... बातें करती...

सब उसे बहुत अच्छी, शरीफ, काइंड बीवी मानते थे।

हम दोनों... बाहर... बिल्कुल नॉर्मल कपल लगते थे।

लेकिन अंदर... जब दरवाज़ा बंद होता...

तो सब बदल जाता।

हम दोनों... वो सब खेलते... जो बाहर कोई सोच भी नहीं सकता।

प्ता जी के साथ नेहा का व्यवहार अब पूरी तरह बदल गया था।

उस रात... जब गुप्ता जी ने दारू पीकर वो प्रॉपर्टी वाली बात कही थी

उसके बाद... नेहा उनके साथ थोड़ी और सहज हो गई थी, लेकिन वो सहजता... एक ठंडी, दूर वाली सहजता थी।

पहले जैसा खिलखिलाना हँसना... वो अब नहीं होता।

जब गुप्ता जी आते... नेहा नमस्ते कहती... लेकिन हाथ नहीं छूती।

पाँव नहीं छूती।

उनके हाथों को स्पर्श नहीं करती।

बातें भी छोटी-छोटी... औपचारिक...

जैसे कोई पड़ोसी से बात कर रही हो।

ये शायद नेहा का गुस्सा था... या फिर... ये उसका तरीका था गुप्ता जी को टीस करने का।

कुछ दिन बाद गुप्ता जी मेरे पास आए।

उस दिन वो नशे में नहीं थे — आँखें साफ़, चेहरा गंभीर।

दरवाज़े पर खड़े होकर बोले —

“सैम... अह... सॉरी यार।

उस रात... मैं बहुत नशे में था।

पता नहीं क्या-क्या बकवास बोली...

मुझे याद भी नहीं... मगर... जो भी बोला... वो गलत था।”

मैंने मुस्कुराकर जवाब दिया —

“कोई बात नहीं... भूल जाओ।

मगर नेहा... अब कूल हो गई है मेरे लिए।

वो नमस्ते का जवाब नहीं देती...

पहले जैसा हँसना-खिलखिलाना नहीं...

बस... दूरी रखती है।

या ये सब... मगर बस... वो दिल से सॉरी बोलना चाहता था।”

गुप्ता जी ने सिर झुकाया।

“हाँ... मैं समझ गया।

जो मैंने कहा... वो बहुत गलत था।

नेहा... बहुत अच्छी लड़की है।

बालकनी वाला खेल... राहुल (गुप्ता जी का बेटा) के साथ... अभी भी जारी था।


लेकिन अब... बहुत सावधानी से।

नेहा पहले चारों तरफ़ देख लेती — कोई देख तो नहीं रहा।

फिर... वो बालकनी में जाती... छोटा टॉप, शॉर्ट्स... या कभी सिर्फ़ लंबी टी-शर्ट।

वो राहुल को दिखाती —

धीरे से टॉप ऊपर खींचकर... नाभी... ब्रा की लाइन...

कभी झुककर... गांड की शेप...

कभी बाल पीछे फेंककर... गर्दन...

फिर मुस्कुराती... आँख मारती...

कभी सिगरेट पीते हुए... धुआँ उसके तरफ़ फेंकती...

राहुल... अपनी बालकनी में... पजामा में...

हाथ अंदर रखकर... खुद को छूता... टेंट बनाता...

नेहा कभी-कभी फोन निकालती... सेल्फी का बहाना बनाती...

लेकिन असल में... राहुल की फोटो खींच लेती।

उसकी पैंट में टेंट... साफ़ दिखता।

फिर रात में... मुझे दिखाती —

“देख... राहुल का टेंट...

कितना बड़ा..."

मुझे... जलन भी होती... लेकिन मज़ा भी आता।

मैं हर बिट एंजॉय करता —

एक शाम... नेहा बालकनी में गई।

राहुल वहाँ था।

नेहा ने टॉप थोड़ा और ऊपर किया... निप्पल की आउटलाइन दिखाई।

एक शाम... नेहा बालकनी में गई।

राहुल वहाँ था।

नेहा ने टॉप थोड़ा और ऊपर किया... निप्पल की आउटलाइन साफ़ दिखाई।

मैंने देखा... और सोचा — ये बहुत bold step है।

पहली बार मुझे लगा... शायद वो boundary escalate कर रही है।

रात में मैंने उसे रोकने की कोशिश की —

“नेहा... ये... थोड़ा ज्यादा हो रहा है...

राहुल... गुप्ता जी का बेटा है...

अगर कुछ गड़बड़ हुई...”

नेहा ने मुस्कुराकर मेरी तरफ़ देखा।

“सम... मैं कंट्रोल में हूँ।

डोंट वरी।

मैं जानती हूँ... कहाँ रुकना है।

ये... बस... टीस है।

वो जलता रहे...

और तुम... देखते रहो।”

उस रात... नेहा ने मुझे कहा —

“आज... तुम गुप्ता जी के बेटे राहुल हो।

नॉट टू फक मी... नॉट टू टच मी।

बस... सोफे पर बैठकर... हिलाओ।

मैं... सेक्सी साड़ी में... तुम्हारे सामने...

मूव्स दिखाऊँगी...

क्लिवेज... गांड...

और तुम... ‘आंटी... आंटी...’ कहकर... झड़ोगे।”

नेहा ने लाल सेक्सी साड़ी पहनी — ब्लाउज़ बहुत टाइट... गहरी नेक...

पल्लू थोड़ा सरका हुआ... नाभी दिखती...

वो मेरे सामने आई... धीरे-धीरे घूमी।

पहले क्लिवेज दिखाया... ब्लाउज़ के अंदर ब्रा की लाइन...

फिर मुड़ी... गांड दिखाई... साड़ी का पल्लू सरकाकर।

मैं सोफे पर बैठा... लंड निकाला... हिलाने लगा।

“आंटी... आंटी... बहुत हॉट...”

नेहा मुस्कुराई... और आगे बढ़ी।

पल्लू और सरकाया... नाभी दिखाई...

“राहुल... आंटी की नाभी...

चूमोगे?”

मैं तेज़ हिलाता... “आंटी... आंटी... मैं... झड़ रहा हूँ...”

नेहा ने साड़ी का पल्लू पूरी तरह सरका दिया... ब्रा दिखाई।


“राहुल... आंटी के बूब्स...

देख... हिलाओ... तेज़...”

मैं झड़ गया — “आंटी... आंटी... आह...”

XXXXXXXXXXXXXX

लाइफ में और भी चीजें चल रही थीं।

एक वीकेंड मम्मी-पापा आए हुए थे।

मैं सबसे छोटा बेटा था, इसलिए वो दोनों काफी बूढ़े हो चुके थे।


नेहा ने उनकी बहुत मन से सेवा की — चाय, नाश्ता, खाना, पैर दबाना... सब कुछ।

वो हमेशा की तरह ग्रेसफुल और काइंड थी।

मम्मी-पापा बहुत खुश थे।

एक दिन जब मैं ऑफिस से आया... तो पापा के साथ गुप्ता जी भी बैठे थे।

दोनों चाय पी रहे थे।

नेहा चाय बना रही थी...

“नमस्ते अंकल... कैसे हैं?”

गुप्ता जी ने मुस्कुराकर जवाब दिया —

“ठीक हूँ बेटा... तुम्हारे मम्मी-पापा से मिलने आया था।”

हम तीनों चिटचैट करने लगे — मौसम, सोसायटी, मेरी नौकरी...

लेकिन मैं देख रहा था — गुप्ता जी की नजर बार-बार किचन की तरफ़ जा रही थी।

वो नेहा को ढूँढ रहे थे।

जब भी नेहा का कोई आवाज़ आती या बर्तन की खनक... उनकी आँखें उठ जातीं।

गुप्ता जी ने मम्मी-पापा की तारीफ़ की —

“आपका बेटा और बहू दोनों बहुत अच्छे हैं।

प्रकृति भी अच्छी... व्यवहार भी।

आजकल ऐसे बच्चे कम मिलते हैं।”

मम्मी-पापा खुश हो गए।

मैं मुस्कुराया... लेकिन अंदर से जानता था — गुप्ता जी की तारीफ़... आधी सच्ची... आधी बहाना।

वो असल में नेहा को देखना चाहते थे।

तभी नेहा ने मुझे किचन में बुलाया।

उसने ट्रे में चाय के कप रखे और मुझे थमा दिए।

“ये ले जाओ... मैं किचन में हूँ।”

वो बाहर नहीं आई।

गुप्ता जी को देखने भी नहीं गई।

मैं ट्रे लेकर बाहर आया... गुप्ता जी की नजर किचन की तरफ़ थी।

जब उन्होंने देखा कि नेहा नहीं आई... उनका चेहरा थोड़ा निराश हो गया।

वो मुस्कुराने की कोशिश कर रहे थे... लेकिन आँखों में disappointment साफ़ था।

उस रात नेहा के चेहरे पर एक गर्व भरी मुस्कान थी।

वो जानती थी कि उसने क्या किया है।

मैंने धीरे से पूछा —

“तुम गुप्ता जी से बहुत नाराज हो क्या?”

नेहा हँसी... हल्के से।

“हाहा... ऐसा कुछ नहीं है।

बस... उन्हें बता रही हूँ कि अब मैं सिर्फ अपने पति की प्रॉपर्टी हूँ।

किसी और की नहीं।”

मैंने कहा —

“इतना ठंडा व्यवहार मत करो उनसे...

वो बूढ़े आदमी हैं...

बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे।”

नेहा ने मेरी तरफ देखा... अभी भी वो गर्व भरी मुस्कान।

“सम...

मैं ठंडी नहीं हूँ।

बस... दूरी रख रही हूँ।

जो उन्होंने कहा था... वो शब्द... ‘प्रॉपर्टी’...

वो मेरे गले में अटक गए थे।

अब... मैं उन्हें दिखा रही हूँ... कि मैं कोई प्रॉपर्टी नहीं हूँ।

मैं... सिर्फ तुम्हारी हूँ।

बस।”

मैं कुछ कहना चाहता था... लेकिन रुक गया।

कभी-कभी मुझे अपने ही विचारों से डर लगता है।

फिर मैंने धीरे से कहा —

“ठीक है... थोड़ा दोस्ताना व्यवहार कर लेना...

उसने तो सॉरी भी बोल दी है।”

नेहा उस समय नाइट ड्रेस बदल रही थी।

उसने शॉर्ट्स और एक आरामदायक टी-शर्ट पहनी — लंबी टी-शर्ट, जो उसके ऊपर तक पहुँच रही थी।

वो मेरी तरफ मुड़ी... हल्के से मुस्कुराई...

“सम...

मैं जानती हूँ तुम क्या सोच रहे हो।

मैं नेहा से कह रहा था कि गुप्ता जी से थोड़ा दोस्ताना व्यवहार कर ले —

“उसने सॉरी बोल दी है...

थोड़ा फ्रेंडली हो जाना...

वो बूढ़ा आदमी है...”

लेकिन अंदर से मैं खुद को समझ नहीं पा रहा था।

मैं उसी आदमी से कह रहा था कि उसके साथ फ्रेंडली हो...

जिसने मुझे उस रात शराब पीकर कहा था कि नेहा उसकी प्रॉपर्टी है...

जिसने कल्पना की थी कि नेहा उसके और उसके दोस्तों के बीच घुटनों के बल बैठी हुई है।

मैंने हल्के से मुस्कुराकर कहा —

“पिता को भी वो चीज deserve करती है... जो बेटा पा रहा है।”

नेहा ने सीधे मेरी आँखों में देखा — बिना मुस्कान के।

“क्या तुम चाहते हो कि मैं उसे भी वो दिखाऊँ... जो मैं उसके बेटे को दिखाती हूँ?”

मैं एक पल के लिए पीछे हट गया।

“मैं... मतलब... सॉरी...”

नेहा हँस पड़ी — जोर से।

“हाहा... प्यारे बेबी... मुझसे डरो मत...

मैं बस कह रही हूँ कि मुझे युवा गुप्ता ज़्यादा पसंद है... पुराने से।”

वो हँसती हुई मेरे पास आई।

मैं बिस्तर पर लेटा हुआ था।

उसने मेरे बीच में घुटनों के बल बैठ गई... मेरी तरफ़ मुँह करके।

नेहा मेरे कान के पास झुकी।

उसकी गर्म साँस मेरे कान में पड़ी।

धीरे से फुसफुसाई —

“क्यों खड़ा है... भैंचोद...”

मैं समझ गया।

वो मूड में है।

जब वो मूड में होती है... तब गालियाँ देने लगती है।

और ये... कई दिनों से रुका हुआ था।

मम्मी-पापा घर पर थे... छोटा अपार्टमेंट... पतली दीवारें...

हम दोनों... बस चुपचाप... बिना कुछ किए... सो जाते थे।

अब... मम्मी-पापा सो चुके थे।

नेहा मेरे ऊपर झुक गई... उसकी उँगलियाँ मेरे लंड पर...

धीरे-धीरे सहलाती हुई।

मैंने उसके साथ खेलना शुरू कर दिया।

थोड़ा और टीस करने के लिए बोला —

“क्यों युवा गुप्ता...

मुझे तो लगा था तुम्हें बूढ़े आदमी पसंद हैं...

जैसे नेगी जी...”

नेहा मुस्कुराई... लेकिन कुछ नहीं बोली।

उसकी उँगलियाँ मेरे लंड पर अभी भी धीरे-धीरे चल रही थीं।

मैंने फिर टीस किया —

“क्या तुम्हें फिर से बूढ़े आदमी को महसूस करना अच्छा नहीं लगेगा...

अपने एक्स लवर जैसे.... कुतिया की तरह?”

नेहा मेरे कान के पास झुकी हुई थी।

उसकी गर्म साँस मेरे कान में पड़ रही थी।

मैंने उसे टीस किया था... लेकिन उसका जवाब...


“हाँ... मुझे बूढ़े आदमी पसंद हैं...

लेकिन हमारे घर में गुप्ता जी से भी ज्यादा lovable कोई है...”

मैं एक पल के लिए फ्रीज हो गया।

मेरा दिमाग घूम गया।

पापा।

वो मेरे पापा की बात कर रही थी।

मेरे अपने पिता... जो अभी घर पर हैं... मम्मी के साथ।

नेहा... मेरी बीवी... मेरे पापा को... “lovable” बता रही थी।
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#77
मैंने उसे देखा — उसकी आँखों में वो शरारती चमक...

वो जानती थी कि ये बात मुझे शॉक देगी।

वो मुस्कुराई... और धीरे से बोली —

“क्यों... शॉक हो गए?

तुम तो मुझे टीस कर रहे थे...

अब... मैंने तुम्हें टीस कर दिया।

वो धीरे से, seductive आवाज़ में बोली —

“मैं जानती हूँ... अपने बेबी को कैसे ऑन करना है...”

मेरा लंड... उसके हाथ में... अब पूरी तरह रॉक हार्ड हो चुका था।

मैं सोच रहा था... ये सब आइडिया उसे कहाँ से मिलते हैं...

कैसे वो मुझे इस तरह फँसाती है...

मैं बस “हम्म...” कर पाया।

मुझे पता नहीं था क्या जवाब दूँ... या क्या उम्मीद करूँ।

नेहा ने मेरे लंड को धीरे से रगड़ते हुए पूछा —

“क्यों... तुम्हें इतनी उत्तेजना हो रही है बेबी?

मुझे तो लगा था... तुम इसे अप्रीशिएट नहीं करोगे...”

मैं जान गया था... अब मैं खेल में पूरी तरह आ चुका हूँ।

और मुझे ये खेल... एक्ट करना... अच्छा लग रहा था।

हम दोनों फुसफुसा रहे थे... आवाज़ बहुत धीमी... ताकि मम्मी-पापा न सुन लें।

मैंने उसके कान में कहा —

“आह... रंडी... कुतिया... तुम इतनी हॉर्नी बिच हो...

ये मत करो... ये अच्छा नहीं है...”

मैं कह तो रहा था कि रुक जा... लेकिन मेरा हाथ... उसके निप्पल को जोर से पिंच कर रहा था।

मेरा लंड... उसके हाथ में... और सख्त हो रहा था।

मेरी हरकतें... बिल्कुल उल्टी कह रही थीं — “मत रुको...”

मैंने फिर फुसफुसाया —

“तुम रंडी... क्या करना चाहती हो भैंचोद...”

नेहा ने मेरे कान में फुसफुसाया —

“मैं सोच रही हूँ... पापा का लंड कैसा होगा...

क्या वो तुम्हारे जैसा है?”

मैं नेहा को रफ तरीके से हैंडल कर रहा था... कई दिनों बाद।

हाल के दिनों में मैं सिर्फ सबमिसिव खेल रहा था... लेकिन आज उसकी बातें... मुझे कुछ और करने पर मजबूर कर रही थीं।

मैंने उसे पलट दिया... उसके गांड के चीक्स पर काटने लगा।

जोर से... दाँत गड़ाकर...

नेहा ने “आआआह...” की आवाज़ की — जानबूझकर लाउड।

अपार्टमेंट छोटा था... दीवारें साउंडप्रूफ नहीं...

वो मुझे और उत्तेजित कर रही थी... कि मम्मी-पापा सुन लें।

“आराम से यार... सुन लेंगे...”

नेहा ने मेरी आँखों में देखकर शरारती मुस्कान के साथ कहा —

“क्यों... फट गई तेरी?”


वो मुझे टीस कर रही थी।

मैंने कहा —

“अरे आवाज मत निकाल... बस... जो बोलना है... मुझे बोल...”

नेहा समझ गई।

उसने अपनी आवाज़ और धीमी कर दी... लेकिन टीस जारी रखी।

“मेरा एक्स... पापा जी की उम्र का ही था...

मैच्योर लोग... बहुत अच्छे से प्यार करते हैं...

जब उन्हें युवा लड़की मिल जाती है...

वो मेरे मुँह को रोज चोदता था...

तुम्हारी तरह नहीं... जो हफ्ते में एक बार चोदता है...”

उसके हर शब्द... मुझे या तो थप्पड़ मारने को मजबूर कर रहे थे... या उसे जंगली तरीके से चोदने को।

नेहा ने मेरे कान में और फुसफुसाया —

“तो... पापा जी को बता लूँ...

वो भी... जैसे नेगी जी सुबह-सुबह मेरा फायदा उठाते थे...

वैसे ही उठा लेंगे...

मम्मी टेम्पल जाती हैं... और तुम ऑफिस...”

उसकी बात सुनकर मेरा दिमाग घूम गया।

मैं जानता था कि वो ऐसी कोई चीज असल में नहीं करेगी... फिर भी मैं उत्सुक था।

मैंने उसके गांड के चीक्स फैलाए... और उसकी चूत को चाटने लगा।

वो डॉगी स्टाइल में थी... मैं पीछे से... जोर-जोर से चाट रहा था।

नेहा ने अपना चेहरा घुमाया... मेरी तरफ देखा...

“बेबी... तुम्हें मज़ा आ रहा है?

या... मैं रुक जाऊँ?”

मैंने कोई जवाब नहीं दिया... बस चाटता रहा।

वो फिर बोली —

“क्या तुम्हें कुछ और चाहिए?”

मैंने जवाब में उसके गांड पर एक जोरदार थप्पड़ मारा।

पटाक!

नेहा ने “आह...” की आवाज़ की... लेकिन मुस्कुराई।

मैं सोच रहा था — “आह रंडी... अब क्या करेगी?”

नेहा ने कहा — “तो वेट...”

वो जल्दी से नाइट गाउन पहनकर कमरे से बाहर निकल गई।

मैं बिस्तर पर बैठा... पैर फैलाए... इंतज़ार कर रहा था।

कुछ ही पलों में वो वापस आई।

“आँखें बंद करो,” उसने कहा।

मैंने आँखें बंद कर लीं।

उसने मेरे पजामा को नीचे सरका दिया...

मेरे बीच में घुटनों के बल बैठ गई...

और मेरे लंड को चाटना शुरू कर दिया।

“आह...” मैंने फुसफुसाकर सिसकारी ली।

मैंने आँखें खोलीं।

मेरा हाथ उसके बालों में था... लेकिन मैं अभी भी ये देख रहा था कि बाहर जाने के बाद उसने क्या किया।

नेहा मेरी आँखों में देख रही थी।

उसने पजामा की जेब से एक कपड़ा निकाला... और मुझे दिखाया।

“तुम जानते हो ये क्या है?”

वो पापा की अंडरवियर थी।

नेहा ने उसे अपने चेहरे के पास लाया... कुत्ते की तरह सूँघा...

मेरी तरफ़ देखते हुए... मेरे छोटे लंड को देखते हुए... जो अब पागलों की तरह throbbing कर रहा था।

वो अंडरवियर को अपने चेहरे पर रगड़ने लगी... नाक पर... गालों पर... होंठों पर...

“आह... क्या स्मेल है तेरे बाप की... भैंचोद... स्ट्रॉन्ग है...”

उसमें पसीने और पेशाब की तेज़ गंध थी... लेकिन नेहा... और उत्तेजित हो रही थी।

वो उसे बार-बार सूँघ रही थी... अपनी जीभ से चाट रही थी...

“तेरे बाप की... ये गंध... मुझे पागल कर रही है...

कल्पना कर... अगर पापा जी... मुझे... अपनी कुतिया बना लें...”

मैं बस उसकी तरफ़ देख रहा था... बोल नहीं पा रहा था।

ये... मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी।

नेहा ने शरारती मुस्कान के साथ पापा की अंडरवियर को मेरे लंड पर रगड़ना शुरू कर दिया।

मैं कन्फ्यूज हो गया... गंभीरता से पूछा —

“क्या हो गया आज तुम्हें?”
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#78
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#79
Hi bro
Yaar tum to har baar naya twist dal deto ho story mein super duper hit story hai keep it up. Waiting for next update
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#80
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