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Adultery ......काला जामुन..... A meanie mommy 2
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दो दिन बाद मम्मी को किसी काम से मामा के घर जाना था. तो मैंने मम्मी से पूछा- आपके बाद हमारा खाना कौन बनाएगा?
मम्मी ने थोड़ी देर सोच कर कहा- मैं अंवतिका आंटी को बोल देती हूँ कि वो तुम्हारा खाना बना देगी.
मैंने सहमति में सर हिला दिया.
तब मम्मी ने आंटी को फोन किया और कहा- अंवतिका यार, मुझे नयन के मामा के घर जाना है, तुम नयन और उसके पापा का खाना बना देना. मुझे 2-3 दिन लग जाएंगे.
उन्होंने कहा- ठीक है, मैं खाना बना दूँगी.. आप चिंता मत करो.

मम्मी सुबह 10 बजे निकल गईं और मैं और पापा अकेला घर पर रह गया था. लगभग 12 बजे डोरबेल बजी तो मैंने दरवाजा खोला, बाहर आंटी खड़ी थीं.
आज आंटी में कुछ बात ही अलग थी.. मैं तो उन्हें देखता ही रह गया.. क्या गजब की माल लग रही थीं. उन्होंने ब्लैक कमीज़ और वाइट सलवार डाली हुई थी. उनका फिगर बहुत मस्त लग रहा था.. अंवतिका आंटी का रंग वैसे ही बहुत गोरा था.. और उनकी 38 साल की उम्र भी आज धोखा दे रही थी.

मैंने आंटी को नमस्ते की और उन्होंने भी मुस्कुरा कर रिप्लाई दिया.

मैंने आंटी को अन्दर आने के लिए कहा. वो अन्दर आ गईं. मैंने उनसे कहा- आप सोफे पर बैठिए, मैं आपके लिए पानी ले के आता हूँ.

मैंने आंटी को पानी पिलाया तो उस टाइम उनकी चुन्नी हटी हुई थी और उनके कुरते का डीप गला होने के कारण उनके चुचे साफ़ दिख रहे थे. मेरी नज़र एकदम उनके चुचों पर पड़ी, मैं तो देखता ही रह गया और मेरा लंड भी खड़ा होने लगा. तब आंटी ने पानी पिया और कुछ देर रेस्ट किया.
उसके बाद वो कहने लगीं- नयन , मैं किचन में खाना बनाने के लिए जा रही हूँ.

जब वो अन्दर जा रही थीं तो मैं उनकी मटकती हुई गांड देख रहा था. मैं भी उनके पीछे चला गया और बोला- आंटी मैं आपकी हेल्प कर देता हूँ.
वो बोली- हां आ जाओ.. मेरी मदद करो, सामान कहां कहां है, मुझे बता देना.

मैं बार-बार उनके चुचे और गांड देख रहा था और वो भी मुझे नोट कर रही थीं. काम करते हुए वो बहुत हंस हंस कर बातें कर रही थीं और बार बार मुझे देख रही थीं, जब मैं उनके चुचे ओर गांड देख रहा होता.

एक बार मैं उनके चुचे देख रहा था तो वो मुझे देख कर मुस्कुराने लगीं.
तभी मैंने बुदबुदा कर कहा- कितने मस्त हैं.
आंटी ने कहा- क्या मस्त हैं?
मैंने कहा- कुछ नहीं.. मैंने तो कुछ नहीं कहा.
मेरा लंड बिल्कुल खड़ा हो गया. हेल्प करते हुए मैं आंटी को टच कर देता, कभी उनकी गांड पे हाथ फेर देता, इससे लंड और अधिक अकड़ कर गरम हो रहा था साथ ही मेरा हौसला भी बढ़ता जा रहा था.

मैंने आंटी के पीछे आ कर हल्के से अपने लंड को उनकी गांड की घाटी में घिसा, तो आंटी ने कुछ फील नहीं किया, बस अपना काम करती रहीं.

मैंने फिर धीरे से कहा- बहुत मस्त है.
आंटी ने फिर कहा- क्या मस्त मस्त लगा रखी है.. खुल कर बोल ना, मैं जान चुकी हूँ.. तुम्हारे मन में क्या चल रहा है. तुम्हारी मम्मी को तेरी शिकायत करनी पड़ेगी.. तू तभी सुधरेगा.
फिर उन्होंने बोला तो कुछ नहीं लेकिन खाना बना दिया. मैं अब उनसे नज़रें भी नहीं मिला रहा था. मैं अपने रूम में आ गया, आंटी भी मेरे पीछे मेरे रूम में आ गईं और मेरे पास सोफे पे बैठ गईं.

थोड़ी देर टीवी देखते देखते उनका हाथ मेरी जाँघों पर आ गया और आंटी बोलीं- नयन , मैंने तो तुम्हें मज़ाक में डांट दिया था, तुम तो ऐसे ही नाराज़ हो गए.
मैंने कहा- मुझे कुछ नहीं हुआ आंटी, मैं कहां आपसे नाराज हूँ.
मैंने भी मौका संभालते हुए उनका हाथ पकड़ लिया.

वो बोलीं- तू किचन में किसको मस्त बोल रहा था?
मैंने कहा- आपको.
वो अपने मम्मे हिलाते हुए बोलीं- मुझे तो नहीं… और किसी चीज को देख कर मस्त बोल रहे थे.
मैंने छूटते ही कहा- आपकी गांड और चुचों को.
वो हंस कर बोलीं- तुझे अच्छे लगते है मेरे ये सब आइटम?
मैंने कहा- बहुत ज़्यादा.
“ नयन तू बहुत शैतान हो गया है.”
ये बोल कर वो उठीं और अपने घर जाने लगीं.

मैंने उन्हें पीछे से पकड़ लिया तो वो बोलीं- अभी नहीं नयन , बाद में करेंगे. अभी मुझे छोड़ दे.
मैंने कहा- अभी क्यों नहीं?

मैं उनके चुचे दबाने लगा और पीछे से उनकी गांड में अपना खड़ा लंड लगाने लगा.
वो बोलीं- अब मुझे घर जा कर काम करना है, खाना भी बनाना है.. ये सब फिर करेंगे.
मैंने ज़्यादा जबरदस्ती नहीं की और वो गांड ठुमकाते हुए चली गईं.


फिर वह रात को 8 बजे खाना बनाने आईं. मैंने आंटी को आँख मारी, तो वो मुस्कुराने लगीं.

फिर आंटी किचन में चली गईं. मैं भी उनके पीछे चला गया और उनको बांहों में भर लिया और उन्होंने मना किया कि तुम्हारे पापा आ जाएँगे.
मैंने कहा- नहीं आएंगे.
मैं उनके होंठों को चूसने लगा, वो पीछे जा कर दीवार से सट गईं मैंने उन्हें जकड़ लिया. अब हम दोनों दबी हुई आवाज़ में बातें कर रहे थे.
मैंने मम्मे दबाना चालू किए तो बोलीं- रुको.
अब उन्होंने अपने चुचे अपनी कमीज़ से बाहर निकाल दिए. उन्होंने ब्रा नहीं पहनी हुई थी. मैं पागलों की तरह आंटी के मम्मों को चूसने लगा. वो भी मेरे सर को अपने चुचों में दबा रही थीं. आंटी के मस्त चुचे जबरदस्त चूसने से बिल्कुल लाल हो गए थे. फिर मैंने उनकी सलवार में हाथ डाल दिया तो आंटी कहने लगीं- अभी नहीं नयन .. बाद में करेंगे. अभी ऊपर से ही कर लो.

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मैंने कहा- एक बार अपनी चुत दिखा दो.
वो कुछ कहतीं कि तभी पापा की आवाज़ आई- खाना नहीं बना क्या नयन ?
मैंने कहा- पापा बन रहा है.

तभी आंटी ने जल्दी से कपड़े ठीक किए और खाना बनाने लगीं.

खाना बनाते हुए भी मैं पीछे से आंटी की गांड मसल रहा था. वो बहुत खुश लग रही थीं, फिर कुछ देर बाद खाना बन गया वो मुझे चुम्मी देकर बाय कहते हुए चली गईं.

मैंने उनके जाने के बाद मुठ मारी और खाना खा कर सो गया. सुबह वो 8 बजे नाश्ता बनाने आईं. मैंने उन्हें गुड मॉर्निंग विश किया तो उन्होंने मुस्कुरा कर रिप्लाइ दिया. मैंने उनसे बोला- आंटी आज जल्दी से पापा के लिए खाना बना दीजिए.. फिर एक गेम खेलेंगे.
आंटी हंस दीं.

मैं नहाने चला गया. जब तक मैं नहा कर आया, तब तक खाना बन चुका था. मैंने पापा को खाना लगा दिया, वो खा कर चले गए.

उनके जाते ही मैंने आंटी को बांहों में ले लिया और एक दूसरे को चूसने लगे. मैंने जल्दी से आंटी के कपड़े उतार दिए और आंटी ने मेरे कपड़े उतार दिए.
आंटी ने कहा- नयन जल्दी से कर लो. मैंने घर जाकर तुम्हारे अंकल के लिए खाना बनाना है. फिर मैं 11 बजे तक आ जाऊंगी.

मैंने देर ना करते हुए आंटी को बेड पे लिटा दिया और आंटी की चुत को चूसने लगा. फिर लंड पर आंटी ने थूक लगा कर मसला.

आंटी की चुत बहुत प्यारी थी. उनकी चुत के बाल बिल्कुल साफ थे.

मैंने आंटी की टांगों को कंधे पर रख लिया और लंड को चुत पर टिका कर एक झटका मारा. मेरे लंड का टोपा आंटी की चूत के अन्दर चला गया. आंटी सिसया पड़ीं. मैंने फिर से एक जोर का झटका मारा तो पूरा का पूरा लंड आंटी की मांद में घुसता चला गया.

आंटी जोर जोर से चीखें मार रही थीं कि आह.. साले नयन , आराम से डाल.. लग रही है.

मैं उनकी बातों को अनसुना करते हुए बहुत तेज़ी से लंड को अन्दर बाहर कर रहा था. दस मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों झड़ गए. मैंने अपना माल आंटी की चुत में छोड़ दिया.

आंटी ने उठ कर कपड़े पहने, मुँह हाथ धोए और मेरे होंठों पर किस करके बोलीं- मैं 11 बजे आऊंगी.. तुम तैयार रहना.. अभी बहुत मस्ती बाकी है मेरी जान.
ऐसा बोल कर आंटी चली गईं. मैं समझ गया कि आंटी की कामवासना भी बहुत ज्यादा है.

मैं उठा, नहा कर आया और मार्केट से सामान लेने चला गया. मैंने मार्केट से बियर की बॉटल, सिगरेट, आइसक्रीम और कुछ फ्रूट लिए और घर आ गया.

इस वक्त 11 बजने वाले थे. मैंने नेट से कुछ सेक्सी वीडियो डाउनलोड की, तब तक डोरबेल बजी. मैंने भाग कर दरवाजा खोला और आंटी जल्दी से अन्दर आ गईं.
मैंने गेट बंद किया. आज आंटी ने लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी. मैं सिर्फ़ अंडरवियर में था.

आंटी ने मुझे वासना से चूमते हुए बोला- आ जा मेरी जान.. मैं अब 2 बजे तक खाली हूँ.
मैं भी उनको पकड़ कर चूमने लगा. वो भी मुझे पागलों की तरह चूमने और चूसने लगीं.

फिर मैं आंटी से अलग होकर फ्रिज से आइसक्रीम ले आया और हम सोफे पे बैठ गए. मैंने लैपटॉप सामने रख के सेक्सी वीडियो चला दी.

मैंने आंटी की साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया, जिससे उनके चुचों की लाइन साफ दिखने लगी. मैंने आइसक्रीम को आंटी के चुचों की लाइन में डाल दी और उनके रसभरे मम्मे चाटने लगा. फिर मैंने ब्लाउज उतार दिया, आंटी ने नीचे ब्लैक कलर की ब्रा डाली हुई थी.. क्या मस्त माल लग रही थीं.

मैंने उनकी ब्रा भी खोल दी और उनके जिस्म को चाटने लगा.

आंटी ने आइसक्रीम उठा कर अपने चुचों के निप्पल पर लगा दी और कहा- नयन चाटो इसे.
मैंने आंटी के चुचे को चूस कर आइसक्रीम खा ली. फिर मैं बियर की बॉटल और सिगरेट ले के आया.
आंटी हैरान रह गईं और बोलीं- ये क्या है नयन ?
मैंने कहा- आंटी, बियर और सिगरेट है.
आंटी बोलीं- नयन तू ये सब भी कर लेता है?
मैंने कहा- हां आप नहीं करतीं क्या?
वो बोलीं- मैंने कभी नहीं किया.
मैंने कहा- आज सब कुछ करेंगे मेरी जान.

मैंने बियर का ढक्कन खोला तो आंटी ने कहा- नयन मेरे बचे हुए कपड़े भी उतार दो.
मैंने आंटी का पेटीकोट जल्दी से उतार दिया. फिर बियर की बोतल आंटी के मुँह में लगा दी. एक दो बार ज़िद करने के बाद आंटी ने थोड़ी सी बियर पी ली.. मैंने भी थोड़ी सी पी.
अब सिगरेट को आंटी के मुँह में रख के सुलगाया और आंटी को कश मारना सिखाया.

फिर मैंने एक कश लगाया और आंटी के ऊपर छोड़ दिया. ये देख कर आंटी ने कश लगाया तो उन्होंने भी मेरे ऊपर छोड़ दिया.

उसके बाद मैंने आंटी को नीचे फर्श पर बिठा दिया, उनके कंधे के ऊपर बियर डाल दी, जो बह कर नीचे तक जा रही थी, मैं उस बियर को चाट रहा था.

फिर मैंने आइसक्रीम ली, उनकी काले रंग की चड्डी के अन्दर फंसी हुई चुत में डाल दी. अपनी गरम चूत पर ठंडी आइसक्रीम लगते ही आंटी मचल उठीं. मैंने उसमें बियर भी डाल दी. उन्होंने भी मेरे अंडरवियर में लंड को आइसक्रीम लगा दी और लंड को बियर से नहला दिया.
इस तरह की मस्ती से हम दोनों बहुत अधिक कामुक होने लगे थे. आंटी ने मेरा अंडरवियर उतार दिया. मैंने भी उनकी पेंटी उतार दी. मैंने आंटी की चुत को चाटा, तो उन्होंने भी मेरे लंड पर लगी आइसक्रीम खा ली. आंटी की चुत और मेरा लंड बिल्कुल लाल हो चुके थे.

मैंने उन्हें नीचे लेटा कर उनकी चुत पर आइसक्रीम डाल कर चुत में धक्का दे दिया. लंड सारा का सारा अन्दर चला गया.
आंटी बोलीं- आह नयन जोर से करो..
मैं भी जोर से लगा कर शॉट मार रहा था.

कुछ देर बाद मैं सोफे पे बैठ गया और आंटी मेरे ऊपर आ गईं. मैं अपने शॉट लगातार बढ़ा रहा था. कई मिनट की चुदाई के बाद मैं झड़ गया. इस बीच आंटी भी 2 बार झड़ चुकी थीं.

थोड़ी देर के बाद हमने फिर चुदाई की. इस बार मैंने आंटी की टाइट गांड में आइसक्रीम डाल कर गांड को फाड़ दिया. आज हमने 4 बार चुदाई की, हम बिल्कुल थक चुके थे.

आंटी ने कहा- नयन मुझे नहीं पता था कि तुम इतना मज़ा दे सकते हो.. मुझे तेरी फ्री स्टाइल चुदाई बहुत मस्त लगी.

अब इसी तरह अंवतिका आंटी और मेरे बीच संबंध चलता रहा। 

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Update........................................... हफ्ते भर की यात्रा

वो रविवार का दिन था मैं और मम्मी आस - पास बैठा चाय पी रहे थे । सुबह 10 बजे के करीब पापा का फोन आया तो मेरी मम्मी ने फोन उठाया और स्पीकर पर करके मैं और मम्मी पापा से बात करने लगें। ( पापा को मॉल के काम से बाहर गये हुए इस बार लगभग 1 महीना हो गया था। )

पापा: बेटा तेरी पढ़ाई कैसी चल रही है?

मैं: एग्जाम खत्म हो चुकी है अभी छुट्टी चल रही है।

इतने देर में मम्मी बोली: ये पूरा दिन घर में रहकर मुझे ही तंग करता रहता है।

तभी पापा बोले : तो तुम दोनों कहीं घूमने चले जाऊ।

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तभी बीच में मैं बोला-

मैं : सही कहा पापा, में सोच रहा था कि इसबार छुट्टी मनाने गुवहाटी जाने का प्लान है कैसा रहेगा।

पापा : प्लान तो बहुत अच्छा है किया तुम्हारी मम्मी तैयारी है।

मैं मम्मी की ओर देखकर बोला : चलो ना मम्मी (मैं जिद करतें हुए कहने लगा)। मेरे ज़िद करने से मम्मी मान गई।

तभी पापा ने कहा : मैं तुम दोनों के लिए ट्रेन में केबिन बुक कर देता हूं। ठंड बहुत है वहां। टिकट बुक करके बताता हूं किस दिन निकलना है। पापा फोन कट कर देते है‌।
जब शाम को मैं बाहर से आया तो मम्मी ने मुझे आवाज दी और पूछा।
मम्मी: कहां गया था? मैं तेरा इंतज़ार कर रही थी। अच्छा सुन, तेरे पापा ने हमारा 1st ए.सी. कूप केबिन बुक कर दिया है।

मैं: अच्छा, (खुश होते हुए) कब जाना है मम्मी?

मम्मी: कल शाम 7 बजे की ट्रेन है। तो 4:30 पर निकल जायेंगे।
और रात तक हमने सारी तैयारियां करके खाना खाकर सो गये। फिर अगले दिन सुबह 8 बजें मेरी आंख खुली, तो मैं जल्दी से फ्रेश होकर मम्मी से नाश्ते को कहां और उनसे बोला- मम्मी मुझे थोड़ा काम है,
मम्मी: अब कौन सा काम आ गया और इतना सामान को लाएगा?

मैं: मेरा कालेज का प्रोजेक्ट है फिर मैंने नाश्ता किया और वहां से 9:30 बजे निकल गया। और शाम 5:30 बजे करीब में घर आया। फिर हम लोग तैयार होकर स्टेशन के लिए निकल पड़े हम साढ़े छः बजे तक स्टेशन पहुंचे और ट्रेन का इंतजार करने लगे। वहीं साइड की बेंच पर एक 27-28 साल का लड़का मम्मी को बार-बार घूर रहा था। तो कभी दोनों की नज़र मिल रही थी। मैं ये सब चुप-चाप देख रहा था। मुझे उस लड़के पर थोड़ा गुस्सा आने लगा, क्योंकि वो मेरी मम्मी को ग़लत नज़र से देख रहा था। मोबाइल चलाने के बहाने से कभी मम्मी की छाती, तो कभी होंठों के देख कर अपने होंठों पर जीभ फिराता। मम्मी भी शायद ये सब नोटिस कर रही थी, और वो भी उसे बीच में देख रही थी। तभी वो लड़का मम्मी के थोड़े पास आया और बोला-

लड़का: हैलो आंटी।

मम्मी : हैलो।

लड़का: ये धनबाद होकर जो ट्रेन गुवहाटी जाती है, वो कब तक आयेगी?

मम्मी : हम भी उसी का इंतजार कर रहे हैं। 15 मिनट में आती होगी।

लड़का: अच्छा, वैसे आप भी गुवहाटी जा रहे हो?

मम्मी : हां , हम गुवहाटी जायेंगे, आप कहां जाओगे?

लड़का: में भी गुवहाटी जा रहा हूं । और फिर मम्मी की आंखों में आंखें डाल कर देखने लगा और मम्मी भी उसे देखने लगी। अब वह लड़का भी डर नहीं रहा था। इतने में मैं उस लड़के को जलाने के लिए बोला, “आपके के साथ वो कौन भाभी है क्या तुम्हारी?”

लड़का: वो दीदी है मेरी, उन्हें ही घर छोड़ने जा रहा हूं।

मैं: बड़ी खूबसूरत है। वैसे आपकी सीट कोन से कम्पार्टमेन्ट में है?

लड़का: first ए.सी.।

मैं : अच्छा हमारा भी फर्स्ट ए.सी. में है।

मम्मी और वो लड़का अब भी दोनों आपस में नज़र मिला रहे थें। जबकि उस लड़के की बहन हमसे पांच कदम की दूरी पर थी। तभी मैं पानी पीने का बोल कर वहां से पानी पीने चला गया और मैं वहां से उनसे छुप कर उन्हें देखने लगा। वो लड़का और मम्मी अब भी बात कर रहे थे। तभी उस लड़के ने कुछ कहा और मम्मी अपना मुंह घुमा कर हल्की सी हंसी।

फिर उस लड़के ने कुछ कहा और मम्मी का मोबाइल उनके हाथों से लिया और कुछ टाइप करनें लगा। तो मैं जल्दी से वहां जाने लगा, क्योंकि मुझे लगा वो मम्मी का मोबाइल नंबर ले रहा होगा। तभी उसका मोबाइल बजा तो उसने मम्मी का फोन दे दिया और मुझे आता देख मम्मी को कुछ कहा और वहां से जाकर अपनी दीदी के पास जाकर बैठ गया। मैंने मम्मी से कहां-

मैं : क्या हुआ मम्मी, वो आपके फोन में क्या कर रहा था?

मम्मी: हड़बड़ाते हुए, वो फोन थोड़ा हैंग हो गया था, बस उसे देख रहा था।

मै: क्या मम्मी , किसी अनजान को ऐसे फोन नहीं देते!

मम्मी : अरे कुछ नहीं अच्छा लड़का है।

फिर मैं चुप हो गया और मुझे मम्मी पर तब से शक होने लगा व गुस्सा भी आ रहा था। पर क्या करता, वो मेरी मम्मी थी। पर मम्मी का ये रूप देख कर मैं दंग था और मम्मी को देख कर मेरे मन मैं उल्टे-सीधे ख्याल आने लगे जिससे मेरा लंड अकड़ने लगता। इसी उधेड़-बुन में 7 बज गये और ट्रेन आ गयी हम ट्रेन में चढ़े तो हमारा केबिन B था तभी वो लड़का और उसकी दीदी भी आयी तो वो बोला- आंटी आपका ये कूप है?

मम्मी: हां और तुम्हारा?

लड़का: ये G हमारा है।

तभी उसकी दीदी ने आवाज लगाई और फिर वो आगे चले गये। और मैंने सामान रखा और मम्मी को भी अन्दर बुलाया। फिर हम अपनी‌ सीट पर बैठ गये। तभी मम्मी बोली, “चल 7 बज गये है तो खाना भी खा लेते‌ है।” क्योंकि मम्मी घर से खाना पैक करके लेकर आयी थी तो हम खाना खाने बैठ गये। खाते वक्त बार-बार मम्मी के फोन पर मैसेज टोन बजती, तो मुझे शक हुआ कहीं उस लड़के ने पक्का मम्मी का नम्बर तो नहीं ले लिया। तभी मैंने कहा-

मैं : मम्मी आपका फोन बार-बार रिंग क्यों कर रहा है।

मम्मी (मम्मी बात को टालते हुए): अरे बेटा छोड़ना, व्हाट्सएप ग्रुप पर कोई मैसेज आया होगा।

फिर हम खाना खाकर अपने कपड़े पहनें। मैंने सिर्फ कच्छा पहना और मम्मी ने नाइटी पहन ली थी। फिर हम अपनी-अपनी सीट पर लेट गये। मैं ऊपर वाली बर्थ पर और मम्मी नीचे वाली बर्थ पर लेट कर अपने मोबाइल को चला रही थी। मुझे मम्मी पर शक था‌‌ कि वो उस लड़के से ही चैट कर रहीं थी। और सोच कर अचंभित भी था। मेरी मम्मी जो इतनी संस्कारी थी, वो अपने बेटे की उम्र के लड़के से पट गयी थी। मुझे अब चैक करना था मम्मी किससे बात कर रही थी, तो मैंने अपना दिमाग लगाया और मम्मी को आवाज लगाई।
मम्मी: क्या हुआ?

मैं: मम्मी वो फोन चार्ज करना है।

मम्मी: ठीक है लगा दे और लेट जा, ठंड हो रही है।

मुझे नींद नहीं आ रही थी मेरे दिमाग में बस ये ही घूम रहा था कि मम्मी एक जवान लड़के से पट गयी। क्या वो‌ उससे चुदाई करना चाहती है?

मम्मी वैसे खुबसूरत और कसावटी बदन की महिला है जो किसी भी लड़के और बूढ़े आदमी का लंड खड़ा कर दे। उनकी गांड चोड़ी और चूंचियां अभी भी तनी हुई है। शायद वो लड़का भी इसी वजह से फिदा हुआ होगा। क्योंकि मम्मी के बारे में सोच कर जब सगे बेटे का लंबा लंड खड़ा हो जाये, तो वो लड़का फिर भी अनजान था।

फोन को चार्जिंग पर लगायें 20 मिनट से ज्यादा हो गये थे। तो मैं अपना फोन लेने के लिए जब नीचे आया तो मम्मी अब भी फोन चला रही थी, पर मुझे देख कर फिर से फोन में कुछ और खोल दिया। मैंने भी जल्दी से फोन को चार्जिंग से हटाया और अपनी सीट पर आकर लेट कर रिकॉर्डिंग देखने लगा। उसमें कुछ साफ तो नहीं दिखाई दिया बल्कि थोडा जब मैंने विडियो रोक कर देखा तो उसमें कुछ चैट दिखी।

लड़का: तुम बहुत हाट हो।

मम्मी: अच्छा, अब तो मेरी उम्र हो गयी है। मैं तुमसे बड़ी भी हूं।

लड़का: उम्र कहां छोड़ो, तुमसे मुझे पहली नजर में प्यार हो गया है।

फिर थोड़ी और देखने पर मुझे एक जगह फिर चैट दिखी-

मम्मी: अभी बेटा जगा है, कैसे मिलोगे?

लड़का: आप बाथरूम में आ जाओ, ज्यादातर सब सो चुके हैं।

मम्मी: अभी नहीं, थोड़ा रूको।

लड़का: कितना टाइम? तुमसे नजदीक से मिलना है।

मम्मी: 9:30 के करीब तब तक नयन भी सो जायेगा, और नजदीक से का क्या मतलब?

फिर मैंने जल्दी से टाइम देखा तो 9:30 बजने‌ में 15 मिनट ही बचे थे। फिर मैंने सोने की एक्टिंग के लिए कम्बल ढक लिया । मेरे दिमाग में बार-बार यहीं आ रहा था कि मम्मी एक अनजान लड़के से अकेले में बाथरूम में मिलने को मान कैसे गयी? क्या उन्हें पता है वो लड़का बाथरूम में मम्मी को पेल भी सकता है? क्या पेलने के लिए ही बुला रहा था। मैंने भी सोच लिया में ये नहीं होने दूंगा।

तभी मम्मी उठीं मेरी ओर देख कर चुप-चाप बाहर जाने लगी। मैं भी थोड़ी देर बाद चुप-चाप उठा और अपने कूप से बाहर देखा तो मम्मी जा रही थी। आगे वो लड़का खड़ा था।

मम्मी जैसी ही उस लड़के के पास पहुंची, उसने मम्मी को एक-दम अपनी बाहों में ले लिया और वहीं पर चूमने की कोशिश कर ही रहा था, कि मम्मी ने उसे रोका और उसकी बाहों से बाहर हुई तो वो लड़का मम्मी को बाथरूम की तरफ ले जाने लगा। तो मैं भी थोड़ी देर बाद चुप-चाप उनसे छुपकर आगे बढ़ा।

वो दोनों जैसें बाथरूम के अन्दर गये मैंने बाथरूम का दरवाजा खटखटाया और बिना सोर किये भागता हुआ अपने कूप में आकर लेट गया। जब मम्मी कुप में आई तो मुझे सोता देखकर वह भी कम्बल ओढ़ कर चुप-चाप हो गई।

करीब 9 बजे सुबह हम दोनों गुवहाटी पहुंच गए, सुबह को हमने होटल ले लिया , तो रिसेप्शन वाले ने बोला: आप और आपकी वाइफ इस होटल में आराम से रहे सकते है। हम कपल्स को 33% डिस्काउंट देते है। और मुझे और मम्मी को एक कमरा दे दिया।
मेरी मम्मी ये सुनकर थोड़ा शरमा गई। लेकिन अंदर ही अंदर वोह जवानी को फील कर रही थी। वो मुझे देखकर मुस्कुराई और मैं भी मुस्कुराया। फिर हम दोनों रूम में गए।

मैं: हाहा, उस आदमी ने तो हमें पति-पत्नी समझ लिया। आप इतनी खूबसूरत और यंग को लगती हो।

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हम दोनों कमरे के अंदर आ चुके थे । रात को सोते समय मेरे साथ एक समस्या होती है जब मैं घर पर रहता हूं तो रात को मुझे कमरे में  नंगा सोने की आदत है। मैं अपने कमरे में कभी दूसरों के साथ नहीं सोया था। मुझे लगा कि शायद मेरे लिए एक अलग कमरा होगा लेकिन दुर्भाग्य से नहीं था।

मेरा मन विचलित था। हम कमरे में चले गए और हमारे पास दो तकियों और एक कंबल के साथ एक बड़े आकार का बिस्तर था। अब मैं अपनी आदत को लेकर तनाव में था।

कमरे में आने के बाद मेरी मम्मी ने मुझसे कहा- क्या तुमको कमरा पसंद है?
मैं- हाँ मम्मी ! लेकिन, मुझे लगता है कि पिताजी ने 2 कमरे बुक किए थे। नहीं?
मम्मी - हाँ … लेकिन, उन्होंने एक कमरे को रद्द कर दिया क्योंकि वह हमारे साथ नहीं आये।
मैं- ओह!

मम्मी - क्या हुआ… सब ठीक है?
मैं- हाँ मम्मी । मैं बहुत खुश हूँ।

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मम्मी ने कहा- ठीक है, फ्रेश हो जाओ और रात के खाने के लिए तैयार हो जाओ।

जैसा कि मैने आपको बताया कि मैं अपनी मम्मी के साथ अपने कमरे को साझा करने के लिए तैयार नहीं था। तो हमेशा की तरह मैंने अपने किसी भी नाइट पैंट और शॉर्ट्स को पैक नहीं किया था।

मैं वॉशरूम के अंदर गया और मैंने अपना तौलिया उतारा, मैंने स्नान किया और अपने तौलिया को अपनी कमर पर लपेटकर बाहर आ गया।

मम्मी - नयन हो गया तुम्हारा … ठीक है. अब मैं भी नहा कर आती हूँ।
मम्मी बाथरूम के अंदर चली गई । मैंने अपना तौलिया निकाल दिया और कुछ पार्टी के कपड़े पहन लिए।

कुछ देर बाद मम्मी अपने शरीर पर एक बाथरोब और अपने सिर के चारों ओर तौलिया लगाए हुए बाहर आईं।
उन्होंने अपना तौलिया अपने सिर से हटा दिया और अपने गीले बालों को सुखाने लगी।

मैं उनके बूब्स को उनके बाथरोब के अंदर उछलते हुए देख सकता था।

मम्मी का बाथरोब उनको घुटनों तक ढके हुए था। उनके कड़क बूब्स ने मुझे थोड़ा सा कामुक कर दिया था। मम्मी काफी सुंदर और हॉट लग रही थी। तभी मम्मी ने कुछ कहा :-

मम्मी - नयन , क्या तुम थोड़ी देर के लिए पीछे घूम सकते हो? मैं दो मिनट के भीतर तैयार हो जाऊंगी।
मैं- प्लीज़ मम्मी आप चालू रखिये, मैं बाहर इंतजार करूँगा आपका!

मम्मी - कोई ज़रूरत नहीं नयन , तुम यहाँ ठहर सकते हो. बस अपनी आँखें बंद कर लो या पीछे मुड़ जाओ।
तो मैंने कहा- ठीक है मम्मी।

मैं पीछे घूम गया।

लेकिन मैं मेरे सामने लगी खिड़की के शीशे से देख सकता था। उन्होंने अपना बाथरोब उतार दिया था।

मम्मी ने अपनी ब्रा और पैंटी पहन रखी थी। वे बहुत सेक्सी थी।

उनके सेक्सी शरीर ने मुझे उत्तेजित कर दिया और अचानक मेरे दिमाग में कई शरारती विचार आने लगे।
लेकिन वह मेरी मम्मी है और मैंने उनके बारे में सोचना बंद कर दिया।

पर मैं अपनी आँखें बंद नहीं कर सकता था क्योंकि वह अपनी ब्रा और पैंटी में बहुत सेक्सी लग रही थी।

अब मम्मी ने अपनी जींस और एक टी-शर्ट ली और उन्हें पहन लिया। यह सब देखकर मेरा लण्ड खड़ा हो गया था।
मम्मी ने मुझसे पूछा- तुमने पार्टीवियर क्यों पहने हैं? तुम रात के खाने के लिए कुछ और कपड़े भी पहन सकते थे। पर मैं चुप रह गया । हम दोनों रात के खाने के लिए गए। डिनर करके हम वापस अपने कमरे में चले आए।

मेरी मम्मी ने मुझे वॉशरूम जाने के लिए कहा ताकि वह अपनी ड्रेस बदल सके। मैं बाथरूम के अंदर गया और दो मिनट के बाद उन्होंने मुझे बाहर बुला लिया।

मम्मी ने अपनी ट्रैक पैंट और वही टी-शर्ट पहनी हुई थी।

मम्मी - ठीक है अब मैं वाशरूम के अंदर जाती हूँ तुम अपनी ड्रेस बदल लो और फिर मुझे बुला लेना।

मैं- नहीं मम्मी , मैं इस ड्रेस में ही ठीक हूँ मैं इसी में सो जाऊंगा।
मम्मी - हा हा! क्या बात कर रहे हो नयन ? ये पार्टी वाले कपड़े हैं अब अपने नाईटड्रेस लो और उन्हें पहन कर आओ।

मैं- नहीं, मम्मी , मैं ठीक हूँ।
मम्मी - तुम्हें कोई परेशानी क्या?
उन्होंने मेरा बैग लिया और मेरी नाईटड्रेस तलाशने लगी।
मम्मी - नयन , तुम अपने साथ कोई नाइटड्रेस क्यों नहीं लाये हो?

मैं- मम्मी वास्तव में, मैं उन्हें अपने साथ नहीं ले जाता। क्योंकि आठ सालों से मैने किसी के साथ कमरा शेयर नहीं किया तो मुझे नग्न सोने की आदत है। मुझे नहीं पता था कि हम यहां इस कमरे को शेयर करेगे … लेकिन मैं ठीक हूँ. मैं इसी में सो सकता हूं।

मम्मी - नयन ! क्या तुम सच कह रहे हो? तुमने मुझे इस बारे में पहले क्यों नहीं बताया। अब तुम अपने पार्टीवियर के साथ कैसे सोओगे? जबकि तुमको तो नग्न सोने की आदत है। अच्छा ऐसा करो … अपने कपड़े उतारो और कंबल के अंदर हो जाओ।

उनकी बात ने मुझे चौंका दिया- मम्मी! आप कुछ भी बोल रही हो? ये कपड़े पूरी तरह से ठीक है और मैं इनमें भी आराम से सो सकता हूँ।

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मम्मी - नयन … यह सब ठीक है। मैं तुम्हारी मम्मी हूँ मुझसे शर्म करने की जरूरत नहीं है। नग्न होकर सोने में कुछ भी गलत नहीं है और कुछ अलग भी नहीं है। तुम नग्न होकर सो सकते हो … फील फ्री बेबी।
मैं- मम्मी, मैं आपके सामने कैसे नंगा हो सकता हूँ? और जब आप भी मेरे पास हो तो मैं बिना कपड़ों के कैसे सो सकता हूं?

मम्मी - नयन … यह ठीक है। मुझे कोई समस्या नहीं है कि तुम मेरे बगल में नग्न सो रहे हो। एक मम्मी के लिए अपने बच्चे को नग्न देखना सामान्य बात है। चुपचाप मेरी बात मानो।

उनकी बातों ने मुझे काफी सहज बना दिया था।
लेकिन मुझे शर्मिंदगी भी महसूस हो रही थी। मुझे पता था कि मैं अपने पार्टीवियर के साथ नहीं सो सकता हूं।

धीरे-धीरे मैंने अपनी शर्ट उतार दी। जब मैं अपनी पैंट खोल रहा था तो मेरे हाथ कांप रहे थे पर फिर भी मैंने अपनी पैंट उतार दी।
मैं अब सिर्फ अंडरवियर में ही खड़ा था।

मेरी मम्मी पानी पी रही थीं और फिर उन्होंने मेरी तरफ देखा।

मम्मी - हम्म, चलो, अपनी अंडरवियर भी उतारो और बिस्तर पर आ जाओ।

मेरा अंडरवियर टाइट था। धीरे-धीरे मैंने उसे उतारा और पूरी तरह से नंगा खड़ा हो गया। मेरा छह इंच का लंड मेरी मम्मी की तरफ इशारा कर रहा था।

मैंने अपनी मम्मी के चेहरे को धीरे से देखा … वो मुझे ही देख रही थी और मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी।

उन्होंने कहा- मेरा प्यारे बेटे, यह सब ठीक है। तुम हमेशा मेरे प्यारे बेटे हो। अपनी मम्मी के साथ बिल्कुल फ्री रहो. ये लो, पानी पी लो और बिस्तर पर आ जाओ।

मम्मी ने मुझे पानी की बोतल दी।
मैंने पानी पिया और शरमाते हुए बिस्तर पर लेट गया।
बाद में उन्होंने लाइट बंद कर दी और बेड लैंप चालू कर दिया। अब वो बिस्तर पर आई और मेरे बगल में लेट गई।

उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखा और कहा- नयन  … मेरे साथ तुम्हारा पूरा कम्फर्ट ज़ोन होगा। मेरे लिए बिल्कुल ठीक है कि तुम नग्न रह सकते हो और तुम भी अपनी मम्मी के साथ सहज महसूस कर सकते हो।
मैं- ठीक है मम्मी ।

जैसा कि मौसम बहुत गर्म था पर एसी की ठंडक भी बहुत थी। मैंने मम्मी को कंबल दिया और मैं उनके बगल में पूरी तरह से नंगा लेट गया।

हमने कुछ देर तक काफी बातें की और मेरी मम्मी ने मेरी शर्म को कब कम्फर्ट में बदल दिया पता ही नहीं चला।
कुछ समय के बाद में उत्तेजित होने लगा और मेरा लण्ड खड़ा होने लगा जो कि छत की ओर मुंह करके खड़ा था।

मैंने देखा कि मेरी मम्मी ने कुछ सेकंड के लिए मुझे ऐसी अवस्था मे देख लिया था।
मैं शर्मिंदा हो गया और विपरीत दिशा में करवट लेकर लेट गया. मेरे नितम्ब मम्मी के सामने थे।

कुछ देर बाद मम्मी सो गई और कुछ मिनट बाद मैं भी सो गया।

अगले दिन जब मैंने अपनी आँखें खोलीं तो मैंने देखा कि मेरी मम्मी मेरे पास बैठी थी और पापा से फोन पर बात कर रही थी।
उनकी मधुर आवाज ने मेरी सुबह को और अधिक सुखद बना दिया।

मैं बिस्तर पर उनके बगल में पूरा नंगा लेटा हुआ था और वह मेरे पास थी।
जिससे मैं थोड़ा असहज हो गया।

कुछ देर बाद उन्होंने फोन रख दिया और अपना तौलिया लिया और बाथरूम में चली गई।
मैं अभी भी गहरी नींद में सोने का नाटक कर रहा था।

कुछ समय बाद वह बाथरूम से बाहर निकली, उनका सुंदर शरीर चारों तरफ से तौलिये से ढका हुआ था।
मैंने अपनी आँखें थोड़ी और खोली और उन्हें देखने लगा।

मैं कल रात के बारे में सोच रहा था जब मैंने उन्हें खिड़की के कांच में उनकी ब्रा और पैंटी के साथ देखा था और अब मेरे लिए उन्हें सच में ब्रा पैंटी के साथ देखने का समय आ गया था।

मम्मी ने अपने बैग से एक जोड़ी कपड़े निकाले और अपना तौलिया हटा लिया।

हे भगवान! मैं चौंक गया। मुझे उम्मीद से ज्यादा कुछ दिखाई दे रहा था।
मम्मी ने अपनी ब्रा नहीं पहनी हुई थी।

उनके स्तन आज़ाद होते देख मैं चौंक गया।
मैं उनके गोल और दूधिया स्तन साफ तौर पर देख सकता था।

यह सब मुझे पागल कर रहा था, मुझे अपनी अपने दिल की धड़कन तक सुनाई दे रही थी।

मेरा लण्ड खड़ा होने लगा था ओर कमरे की छत की ओर इशारा कर रहा था। मैं मम्मी के नँगे जिस्म से अपनी नज़र नहीं हटा पा रहा था।

मम्मी की सेक्सी पैंटी उनकी आधी गांड को ही कवर कर रही थी। उनके नितम्ब मुलायम और गोल थे। मैं उनके बूब्स को उछलते हुए देख सकता था जब वो हिल रही थी.

ये सब मुझे पागल कर रहा था। मैं अपने खड़े लण्ड को छत की तरफ इशारा करते हुए नहीं रोक पा रहा था।
मुझे टेंशन थी कि वह मेरे इरेक्शन को नोटिस ना कर ले।

उन्होंने बैग से अपनी ब्रा निकाली और पहन ली और फिर वह कपड़े पहनने लगी।
फिर भी मेरा लण्ड पूरी तरह से खड़ा था। मैं वहाँ बिलकुल असहाय पड़ा था।

मम्मी तैयार हो गई थी.

और तभी अचानक दरवाजे की घंटी बजी। मम्मी ने अपना सिर मेरी तरफ घुमाया और मेरे शरीर को कंबल से ढक दिया और फिर उन्होंने दरवाजा खोला।

सामने एक सर्विस बॉय था जो नाश्ता ले कर खड़ा था।
मम्मी ने उसे कमरे में बुलाया।

उसने वहाँ नाश्ता छोड़ दिया और कमरे से बाहर चला गया.

फिर मम्मी ने दरवाजा बंद कर दिया।

वह धीरे से मेरी ओर आई और कुर्सी खींच कर मेरे पास बैठ गई। वो मेरे सीने पर हाथ फेरते हुए मुझे पुकारने लगी।
मैंने धीरे से अपनी आँखें खोली जैसे मैं अभी ही जागा हूं।

मम्मी - नयन , गुड मॉर्निंग, उम्मीद है तुम आराम से सोये होंगे।

मैं- मॉर्निंग, मॉम! हां, अच्छे से।

मम्मी - ओके स्वीटहार्ट, फ्रेश हो जाओ। हमें शहर को देखने और बाहर जाने की जरूरत है। गुवहाटी में कई घूमने लायक जगह हैं।

मैं बिस्तर से उठ कर उनके पास खड़ा हो गया और साथ ही मेरा लण्ड भी उनकी तरफ इशारा करते हुए खड़ा था।

मैंने अपने शरीर को एक तौलिया से ढक लिया और वाशरूम में चला गया।

मैं मम्मी के सेक्सी शरीर और सुंदर स्तन के बारे में सोचना बंद नहीं कर पा रहा था। वे किसी ताजे रसदार खरबूजे की तरह थे जिन्होंने मुझे सुबह सुबह ही गर्म कर दिया था।

लेकिन कहीं न कहीं मुझे शर्मिंदगी भी महसूस हो रही थी कि इस तरह अपनी मां के बारे में सोचना बहुत बुरा है।

मैंने अपना दैनिक काम खत्म किया और नहाकर तौलिया पहन कर बाथरूम से बाहर निकल आया।

मम्मी टीवी न्यूज़ देख रही थी।

मैंने बैग में से कपड़े लिए और अपना तौलिया हटा दिया। मैं उन्ही के सामने तैयार नंगा होकर कपड़े पहन रहा था।

फिर उन्होंने मुझे नाश्ता परोसा और खाकर हम शहर को घूमने के लिए निकल गए।

उस दिन हमने खूब मस्ती की, मैंने अपनी मम्मी के साथ बहुत ही अच्छा समय बिताया था।

शाम को 7:30 बजे हम होटल के कमरे में वापस आ गए थे। गर्म मौसम के कारण हम थके हुए थे और पूरी तरह से पसीने से तर थे तो हम दोनों ने नहाने का फैसला किया।

सबसे पहले, मेरी मम्मी अपने तौलिया और ब्रा पैंटी की जोड़ी के साथ बाथरूम के अंदर गई. और कुछ समय बाद वह अपने शरीर के चारों ओर तौलिया लपेटकर बाहर आ गयी।

उन्होंने मुझे भी शॉवर लेने के लिए कहा।
मैंने भी अपना तौलिया लिया और अंदर चला गया।

मैं अपनी मम्मी के बारे में सोच रहा था कि वह बाहर अपने कपड़े बदल रही होगी।

मैंने शावर लिया और अपनी टावल अपनी कमर के चारों ओर लपेटकर बाहर आ गया।
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आया तो देखा एक महिला ( बॉडी मसाजर) जोकि मम्मी की बॉडी मसाज कर रही थी। मेरी मम्मी बिस्तर पर अधनंगी पड़ी हुई थी‌। उनके शरीर पर केवल पेटीकोट था। मम्मी उल्टी लेटी हुई थी। उनके पेटिकोट का नाड़ा भी शायद खुला था। बॉडी मसाजर बड़ी तन्मयता से उनके शरीर की मालिश कर रही थी। वह अपने हाथों को उनके कमर से होते हुए पेटीकोट के अंदर उनके नितंबों तक लाती, फिर पीठ से होते हुए दोनों किनारों से उनके बूब्स को दबाती।

इससे मुझे बार-बार मम्मी के नितम्बों का कटी प्रदेश दिखता। मैं काफी देर वहां खड़े होकर यह नजारा देखता रहा, कि काश पेटीकोट पूरा उतर जाए और मुझे चूत दर्शन हो जाए। पर यह नहीं हुआ, उलटे बॉडी मसाजर ने मुझे देख लिया। मुझे जैसे ही इस बात का अहसास हुआ, मैं बाथरूम में चला गया। मेरा छोटा नुनु वीर बहादुर बनकर तना हुआ था। अब मुझे अपने लौड़े के लिए भी कुछ करना था।

मैं अपने टावल को नीचे सरकाया लौड़ा तनकर खड़ा था। उसकी टोपी चमक रही थी, और एक चिकना पदार्थ रिस रहा था। मैं आंखे बंद करके अपने लंड को रगड़ने लगा। आंखें खुली तो सामने बॉडी मसाजर मेरे दोनों पैरो के बीच बैठी मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी।

उसने बड़ी अदा से मुझे धक्का देकर वेस्टर्न टॉयलेट बैठाया । वह शायद मेरी जवानी भोगने के मूड में थी। उसने मेरे लंड को मुंह में भर लिया, और जोर-जोर से चूसने लगी। मैं आंखे बंद कर बस आनंद ले रहा था।

इतने में दरवाजा खुला। मैंने आंख खोली तो सामने मम्मी पेटीकोट और ब्लाउज पहने खड़ी थी। मम्मी को देख कर बॉडी मसाजर ने मेरा लंड मुंह से निकाल कर अपने हाथों में थाम लिया और उसे मुठियाते हुआ मम्मी से बोली, “बहन मैं तो इसकी देखभाल कर रही थी, जैसे आपकी करती हूं”।

मम्मी : छोड़ इसे, मैं इसकी देखभाल कर लूंगी।

मम्मी का गुस्सा भांपते हुए उसने मुझे अधूरा छोड़ दिया। मैं झड़ने के बहुत करीब था‌ मेरी आंखे बंद हो रही थी, पैर कांप रहे थे, और सांसे तेज चल रही थी। तभी दरवाजा पटकते हुए बॉडी मसाजर चली गई। मेरा ऊपर उठता हुआ वीर्य वापस अंडकोष में चला गया। मुझे समझ नही आया मैं क्या बोलूं? मैं अपनी गर्दन झुकाए बेड पर बैठा रहा। शायद मम्मी को भी उस वक्त बात करना सही नहीं लगा ।

मैं बेड पर बैठा सोचता रहा मम्मी को कैसे समझाऊं। कुछ दस मिनट बाद मैं दबे पांव से मम्मी के पास बाथरूम में गया , तांकि सॉरी बोल सकूं। पर वहां नजारा कुछ और ही था।

मम्मी आईने के सामने खड़े हो कर कपड़े बदल रही थी। उन्होंने अपना ब्लाउज खोल कर बेड पर रख दिया था, और पेटीकोट का नाड़ा खोल रही थी। मेरे पांव वहीं दरवाजे के बाहर थम गए। लंड फिर से खड़ा हो गया। आंखे चमक उठी। इतने में मम्मी का पेटिकोट उनके पैरो में गिर गया। उनका नंगा जिस्म मुझे अपनी ओर बुलाने लगा। उनकी गांड की गोलाई और मोटी जांघों ने फिर से मेरे वीर्य को लंड के मुहाने पर ला खड़ा किया।

मेरी नंगी मम्मी पेटीकोट उठाने के लिए झुकी, तो मेरे लिए जैसे वक्त वहीं रुक गया। मम्मी की गदराई गांड मेरे सामने उभर के आ गई। अभी-अभी हुई उनकी मालिश से उनकी गांड चमक रही थी। भरी हुई गांड और छोटी-छोटी काली झांटे उनकी चूत वाली जगह से झांक रही थी। इतने में उन्हें टेबल के नीचे गिरा झुमका नज़र आया, जिसे उठाने को वह घुटनों को जमीन पर टिका कर टेबल के नीचे आगे की ओर झुकी।

दोस्तों मैं यह सिचुएशन आप पर छोड़ता हूं कल्पना करो। मम्मी कैटवॉक करती हुई दो-तीन कदम आगे बढ़ी। बस दोस्तों यह मेरी चरम सीमा थी। मैं पैंट में ही झड़ने लगा। शरीर झटके खा रहा था, और खड़ा रहना भी मुश्किल हो गया। पैर कांप रहे थे। संभालने के लिए दरवाजा पकड़ा कि तभी मम्मी उसी हालत में गर्दन घुमा कर मुझे देखने लगी। मेरा कांपता जिस्म उन्हें मेरी हालत बयां कर रहा था।

मम्मी आई और धड़ाम की आवाज के साथ दरवाजा बंद हुआ। मैं आत्मग्लानि के साथ में वापस लौट आया। बिस्तर पर बैठ कर अपनी पेंट खोली और नीचे की ओर सरका दी। लंड सिकुड़ कर झूल रहा था। मेरा वीर्य मेरे लंड, आंड, और जांघो पर फैला पड़ा था। उसी हालत में लेट गया। आंखें बंद करते ही फिर से वहीं दृश्य सामने आ गया। लंड ने एक बार फिर सिर उठाया। इस बार बड़ी बेदर्दी से मैंने लंड को अपने पंजों में पकड़ा और मुठ मरने लगा।

वीर्य से सना गीला लंड आसानी से हाथों में फिसलने लगा। आवेग ऐसा था कि हाथ रुकते तो कमर से ऊपर की ओर धक्के मारने लगता। मैं दोनो हाथों से लंड को पकड़े झटके मार रहा था। पर इस बार आसान नहीं था झड़ना। मैंने तकिए को बगल में रखा, और उस पर लंड टिकाए लेट गया। मानों मम्मी की गांड पर लेटा था। झटके मारते-मारते झड़ गया और गहरी नींद में चला गया।

कुछ घंटों के बाद कमरे में हलचल हुई तो नींद खुली। मम्मी ने मुझे चादर ओढ़ा दी थी। जाते-जाते उन्होंने कहा, “रात हो गई है, बाहर आकर खाना खा लो”। मैं उठ कर कमरे में अटैच बाथरूम में गया तो पाया, मेरी वीर्य से सनी पेंट, और तकिए का कवर बाथरूम में पड़ा था। शायद मम्मी ने रखा था।

मैं फ्रेश हुआ और कमरे से बाहर आकर खाने के टेबल पर बैठ गया। मम्मी वहीं बैठी मेरा इंतजार कर रही थी।

मैने बड़ी ही मासूमियत से बोला: सॉरी मम्मी , आपने मुझे इस तरह से देखा। वो बॉडी मसाजर खुद ही वो सब कर रही थी। मैं सेल्फ सेटिस्फेक्शन के लिए कभी-कभी करता हूं। पर वो अचानक बाथरूम में आई, और वो सब करने लगी। मैंने उसे ऐसा करने को नहीं कहा था।

मम्मी : ठीक है मैं तुमसे बाद में बात करूंगी इस बारे में अभी खाना खा लो।

मैं मन में सोचा कि मम्मी शायद सेक्स के टॉपिक पर मुझसे कोई भी बात नहीं करना चाहती थी। खास कर मैंने जो उन्हें बिना कपड़ो के देख लिया था।

करीब रात के 12 बजे मुझे पियास लगी और मैं जागा । जब मेरी आंख खुली मेरी नजर मम्मी पर पड़ी। मम्मी लाल नाइटी मैं सो रही थी और उसकी नाइटी ऊपर उठी थी और आधे स्तन भी दिख रहे थे। मेरे दिल की धड़कन बढ़ने लगी और मैंने आहिस्ता आहिस्ता मम्मी के स्तन हाथ रखा।

वाह क्या मुलायम स्तन थे और फिर मैंने स्तनों को हल्का सा दबाया। फिर मैंने मम्मी की नाइटी थोड़ी ऊपर उठाई तो मुझे मम्मी की पैंटी दिखने लगी जो गुलाबी रंग की पैंटी थी। मैंने हिम्मत करके पैंटी पर हाथ रखा तो देखा कि मम्मी की चूत बहुत गर्म थी। और फिर मैंने अपना एक हाथ लंड पर रखा तो वह पूरी तरह खड़ा हो गया था।

मैं हिम्मत करके एक हाथ मम्मी की पैंटी पर फेर रहा था और दूसरे हाथ से लंड हिला रहा था। करीब आधे घंटे के बाद मैं बिस्तर पर ही झड़ गया मेरा सारा वीर्य बिस्तर पर ही गिर गया और उसके बाद मैं सो गया।

सुबह मेरा जल्दी आंखों खुली तो देखा मैं मम्मी से चिपककर सो रहा था तभी मम्मी मेरी तरफ मुड़ी आज वह बहुत प्यारी लग रही थी उनके स्तन हर सांस के साथ ऊपर नीचे हो रहे थे यह देखकर मेरा लंड खड़ा होने लगा तभी उन्होंने अपने आंख खोले और उनकी नजर मुझपर पड़ी उसने मुझे अपनी बाहों में भरकर मेरे होंठों पर किस किया और उठकर बाथरूम चली गई।


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