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Adultery ......काला जामुन ..... A meanie mommy
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दो दिन बाद मम्मी को किसी काम से मामा के घर जाना था. तो मैंने मम्मी से पूछा- आपके बाद हमारा खाना कौन बनाएगा?
मम्मी ने थोड़ी देर सोच कर कहा- मैं अंवतिका आंटी को बोल देती हूँ कि वो तुम्हारा खाना बना देगी.
मैंने सहमति में सर हिला दिया.
तब मम्मी ने आंटी को फोन किया और कहा- अंवतिका यार, मुझे नयन के मामा के घर जाना है, तुम नयन और उसके पापा का खाना बना देना. मुझे 2-3 दिन लग जाएंगे.
उन्होंने कहा- ठीक है, मैं खाना बना दूँगी.. आप चिंता मत करो.

मम्मी सुबह 10 बजे निकल गईं और मैं और पापा अकेला घर पर रह गया था. लगभग 12 बजे डोरबेल बजी तो मैंने दरवाजा खोला, बाहर आंटी खड़ी थीं.
आज आंटी में कुछ बात ही अलग थी.. मैं तो उन्हें देखता ही रह गया.. क्या गजब की माल लग रही थीं. उन्होंने ब्लैक कमीज़ और वाइट सलवार डाली हुई थी. उनका फिगर बहुत मस्त लग रहा था.. अंवतिका आंटी का रंग वैसे ही बहुत गोरा था.. और उनकी 38 साल की उम्र भी आज धोखा दे रही थी.

मैंने आंटी को नमस्ते की और उन्होंने भी मुस्कुरा कर रिप्लाई दिया.

मैंने आंटी को अन्दर आने के लिए कहा. वो अन्दर आ गईं. मैंने उनसे कहा- आप सोफे पर बैठिए, मैं आपके लिए पानी ले के आता हूँ.

मैंने आंटी को पानी पिलाया तो उस टाइम उनकी चुन्नी हटी हुई थी और उनके कुरते का डीप गला होने के कारण उनके चुचे साफ़ दिख रहे थे. मेरी नज़र एकदम उनके चुचों पर पड़ी, मैं तो देखता ही रह गया और मेरा लंड भी खड़ा होने लगा. तब आंटी ने पानी पिया और कुछ देर रेस्ट किया.
उसके बाद वो कहने लगीं- नयन , मैं किचन में खाना बनाने के लिए जा रही हूँ.

जब वो अन्दर जा रही थीं तो मैं उनकी मटकती हुई गांड देख रहा था. मैं भी उनके पीछे चला गया और बोला- आंटी मैं आपकी हेल्प कर देता हूँ.
वो बोली- हां आ जाओ.. मेरी मदद करो, सामान कहां कहां है, मुझे बता देना.

मैं बार-बार उनके चुचे और गांड देख रहा था और वो भी मुझे नोट कर रही थीं. काम करते हुए वो बहुत हंस हंस कर बातें कर रही थीं और बार बार मुझे देख रही थीं, जब मैं उनके चुचे ओर गांड देख रहा होता.

एक बार मैं उनके चुचे देख रहा था तो वो मुझे देख कर मुस्कुराने लगीं.
तभी मैंने बुदबुदा कर कहा- कितने मस्त हैं.
आंटी ने कहा- क्या मस्त हैं?
मैंने कहा- कुछ नहीं.. मैंने तो कुछ नहीं कहा.
मेरा लंड बिल्कुल खड़ा हो गया. हेल्प करते हुए मैं आंटी को टच कर देता, कभी उनकी गांड पे हाथ फेर देता, इससे लंड और अधिक अकड़ कर गरम हो रहा था साथ ही मेरा हौसला भी बढ़ता जा रहा था.

मैंने आंटी के पीछे आ कर हल्के से अपने लंड को उनकी गांड की घाटी में घिसा, तो आंटी ने कुछ फील नहीं किया, बस अपना काम करती रहीं.

मैंने फिर धीरे से कहा- बहुत मस्त है.
आंटी ने फिर कहा- क्या मस्त मस्त लगा रखी है.. खुल कर बोल ना, मैं जान चुकी हूँ.. तुम्हारे मन में क्या चल रहा है. तुम्हारी मम्मी को तेरी शिकायत करनी पड़ेगी.. तू तभी सुधरेगा.
फिर उन्होंने बोला तो कुछ नहीं लेकिन खाना बना दिया. मैं अब उनसे नज़रें भी नहीं मिला रहा था. मैं अपने रूम में आ गया, आंटी भी मेरे पीछे मेरे रूम में आ गईं और मेरे पास सोफे पे बैठ गईं.

थोड़ी देर टीवी देखते देखते उनका हाथ मेरी जाँघों पर आ गया और आंटी बोलीं- नयन , मैंने तो तुम्हें मज़ाक में डांट दिया था, तुम तो ऐसे ही नाराज़ हो गए.
मैंने कहा- मुझे कुछ नहीं हुआ आंटी, मैं कहां आपसे नाराज हूँ.
मैंने भी मौका संभालते हुए उनका हाथ पकड़ लिया.

वो बोलीं- तू किचन में किसको मस्त बोल रहा था?
मैंने कहा- आपको.
वो अपने मम्मे हिलाते हुए बोलीं- मुझे तो नहीं… और किसी चीज को देख कर मस्त बोल रहे थे.
मैंने छूटते ही कहा- आपकी गांड और चुचों को.
वो हंस कर बोलीं- तुझे अच्छे लगते है मेरे ये सब आइटम?
मैंने कहा- बहुत ज़्यादा.
“ नयन तू बहुत शैतान हो गया है.”
ये बोल कर वो उठीं और अपने घर जाने लगीं.

मैंने उन्हें पीछे से पकड़ लिया तो वो बोलीं- अभी नहीं नयन , बाद में करेंगे. अभी मुझे छोड़ दे.
मैंने कहा- अभी क्यों नहीं?

मैं उनके चुचे दबाने लगा और पीछे से उनकी गांड में अपना खड़ा लंड लगाने लगा.
वो बोलीं- अब मुझे घर जा कर काम करना है, खाना भी बनाना है.. ये सब फिर करेंगे.
मैंने ज़्यादा जबरदस्ती नहीं की और वो गांड ठुमकाते हुए चली गईं.


फिर वह रात को 8 बजे खाना बनाने आईं. मैंने आंटी को आँख मारी, तो वो मुस्कुराने लगीं.

फिर आंटी किचन में चली गईं. मैं भी उनके पीछे चला गया और उनको बांहों में भर लिया और उन्होंने मना किया कि तुम्हारे पापा आ जाएँगे.
मैंने कहा- नहीं आएंगे.
मैं उनके होंठों को चूसने लगा, वो पीछे जा कर दीवार से सट गईं मैंने उन्हें जकड़ लिया. अब हम दोनों दबी हुई आवाज़ में बातें कर रहे थे.
मैंने मम्मे दबाना चालू किए तो बोलीं- रुको.
अब उन्होंने अपने चुचे अपनी कमीज़ से बाहर निकाल दिए. उन्होंने ब्रा नहीं पहनी हुई थी. मैं पागलों की तरह आंटी के मम्मों को चूसने लगा. वो भी मेरे सर को अपने चुचों में दबा रही थीं. आंटी के मस्त चुचे जबरदस्त चूसने से बिल्कुल लाल हो गए थे. फिर मैंने उनकी सलवार में हाथ डाल दिया तो आंटी कहने लगीं- अभी नहीं नयन .. बाद में करेंगे. अभी ऊपर से ही कर लो.

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मैंने कहा- एक बार अपनी चुत दिखा दो.
वो कुछ कहतीं कि तभी पापा की आवाज़ आई- खाना नहीं बना क्या नयन ?
मैंने कहा- पापा बन रहा है.

तभी आंटी ने जल्दी से कपड़े ठीक किए और खाना बनाने लगीं.

खाना बनाते हुए भी मैं पीछे से आंटी की गांड मसल रहा था. वो बहुत खुश लग रही थीं, फिर कुछ देर बाद खाना बन गया वो मुझे चुम्मी देकर बाय कहते हुए चली गईं.

मैंने उनके जाने के बाद मुठ मारी और खाना खा कर सो गया. सुबह वो 8 बजे नाश्ता बनाने आईं. मैंने उन्हें गुड मॉर्निंग विश किया तो उन्होंने मुस्कुरा कर रिप्लाइ दिया. मैंने उनसे बोला- आंटी आज जल्दी से पापा के लिए खाना बना दीजिए.. फिर एक गेम खेलेंगे.
आंटी हंस दीं.

मैं नहाने चला गया. जब तक मैं नहा कर आया, तब तक खाना बन चुका था. मैंने पापा को खाना लगा दिया, वो खा कर चले गए.

उनके जाते ही मैंने आंटी को बांहों में ले लिया और एक दूसरे को चूसने लगे. मैंने जल्दी से आंटी के कपड़े उतार दिए और आंटी ने मेरे कपड़े उतार दिए.
आंटी ने कहा- नयन जल्दी से कर लो. मैंने घर जाकर तुम्हारे अंकल के लिए खाना बनाना है. फिर मैं 11 बजे तक आ जाऊंगी.

मैंने देर ना करते हुए आंटी को बेड पे लिटा दिया और आंटी की चुत को चूसने लगा. फिर लंड पर आंटी ने थूक लगा कर मसला.

आंटी की चुत बहुत प्यारी थी. उनकी चुत के बाल बिल्कुल साफ थे.

मैंने आंटी की टांगों को कंधे पर रख लिया और लंड को चुत पर टिका कर एक झटका मारा. मेरे लंड का टोपा आंटी की चूत के अन्दर चला गया. आंटी सिसया पड़ीं. मैंने फिर से एक जोर का झटका मारा तो पूरा का पूरा लंड आंटी की मांद में घुसता चला गया.

आंटी जोर जोर से चीखें मार रही थीं कि आह.. साले नयन , आराम से डाल.. लग रही है.

मैं उनकी बातों को अनसुना करते हुए बहुत तेज़ी से लंड को अन्दर बाहर कर रहा था. दस मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों झड़ गए. मैंने अपना माल आंटी की चुत में छोड़ दिया.

आंटी ने उठ कर कपड़े पहने, मुँह हाथ धोए और मेरे होंठों पर किस करके बोलीं- मैं 11 बजे आऊंगी.. तुम तैयार रहना.. अभी बहुत मस्ती बाकी है मेरी जान.
ऐसा बोल कर आंटी चली गईं. मैं समझ गया कि आंटी की कामवासना भी बहुत ज्यादा है.

मैं उठा, नहा कर आया और मार्केट से सामान लेने चला गया. मैंने मार्केट से बियर की बॉटल, सिगरेट, आइसक्रीम और कुछ फ्रूट लिए और घर आ गया.

इस वक्त 11 बजने वाले थे. मैंने नेट से कुछ सेक्सी वीडियो डाउनलोड की, तब तक डोरबेल बजी. मैंने भाग कर दरवाजा खोला और आंटी जल्दी से अन्दर आ गईं.
मैंने गेट बंद किया. आज आंटी ने लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी. मैं सिर्फ़ अंडरवियर में था.

आंटी ने मुझे वासना से चूमते हुए बोला- आ जा मेरी जान.. मैं अब 2 बजे तक खाली हूँ.
मैं भी उनको पकड़ कर चूमने लगा. वो भी मुझे पागलों की तरह चूमने और चूसने लगीं.

फिर मैं आंटी से अलग होकर फ्रिज से आइसक्रीम ले आया और हम सोफे पे बैठ गए. मैंने लैपटॉप सामने रख के सेक्सी वीडियो चला दी.

मैंने आंटी की साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया, जिससे उनके चुचों की लाइन साफ दिखने लगी. मैंने आइसक्रीम को आंटी के चुचों की लाइन में डाल दी और उनके रसभरे मम्मे चाटने लगा. फिर मैंने ब्लाउज उतार दिया, आंटी ने नीचे ब्लैक कलर की ब्रा डाली हुई थी.. क्या मस्त माल लग रही थीं.

मैंने उनकी ब्रा भी खोल दी और उनके जिस्म को चाटने लगा.

आंटी ने आइसक्रीम उठा कर अपने चुचों के निप्पल पर लगा दी और कहा- नयन चाटो इसे.
मैंने आंटी के चुचे को चूस कर आइसक्रीम खा ली. फिर मैं बियर की बॉटल और सिगरेट ले के आया.
आंटी हैरान रह गईं और बोलीं- ये क्या है नयन ?
मैंने कहा- आंटी, बियर और सिगरेट है.
आंटी बोलीं- नयन तू ये सब भी कर लेता है?
मैंने कहा- हां आप नहीं करतीं क्या?
वो बोलीं- मैंने कभी नहीं किया.
मैंने कहा- आज सब कुछ करेंगे मेरी जान.

मैंने बियर का ढक्कन खोला तो आंटी ने कहा- नयन मेरे बचे हुए कपड़े भी उतार दो.
मैंने आंटी का पेटीकोट जल्दी से उतार दिया. फिर बियर की बोतल आंटी के मुँह में लगा दी. एक दो बार ज़िद करने के बाद आंटी ने थोड़ी सी बियर पी ली.. मैंने भी थोड़ी सी पी.
अब सिगरेट को आंटी के मुँह में रख के सुलगाया और आंटी को कश मारना सिखाया.

फिर मैंने एक कश लगाया और आंटी के ऊपर छोड़ दिया. ये देख कर आंटी ने कश लगाया तो उन्होंने भी मेरे ऊपर छोड़ दिया.

उसके बाद मैंने आंटी को नीचे फर्श पर बिठा दिया, उनके कंधे के ऊपर बियर डाल दी, जो बह कर नीचे तक जा रही थी, मैं उस बियर को चाट रहा था.

फिर मैंने आइसक्रीम ली, उनकी काले रंग की चड्डी के अन्दर फंसी हुई चुत में डाल दी. अपनी गरम चूत पर ठंडी आइसक्रीम लगते ही आंटी मचल उठीं. मैंने उसमें बियर भी डाल दी. उन्होंने भी मेरे अंडरवियर में लंड को आइसक्रीम लगा दी और लंड को बियर से नहला दिया.
इस तरह की मस्ती से हम दोनों बहुत अधिक कामुक होने लगे थे. आंटी ने मेरा अंडरवियर उतार दिया. मैंने भी उनकी पेंटी उतार दी. मैंने आंटी की चुत को चाटा, तो उन्होंने भी मेरे लंड पर लगी आइसक्रीम खा ली. आंटी की चुत और मेरा लंड बिल्कुल लाल हो चुके थे.

मैंने उन्हें नीचे लेटा कर उनकी चुत पर आइसक्रीम डाल कर चुत में धक्का दे दिया. लंड सारा का सारा अन्दर चला गया.
आंटी बोलीं- आह नयन जोर से करो..
मैं भी जोर से लगा कर शॉट मार रहा था.

कुछ देर बाद मैं सोफे पे बैठ गया और आंटी मेरे ऊपर आ गईं. मैं अपने शॉट लगातार बढ़ा रहा था. कई मिनट की चुदाई के बाद मैं झड़ गया. इस बीच आंटी भी 2 बार झड़ चुकी थीं.

थोड़ी देर के बाद हमने फिर चुदाई की. इस बार मैंने आंटी की टाइट गांड में आइसक्रीम डाल कर गांड को फाड़ दिया. आज हमने 4 बार चुदाई की, हम बिल्कुल थक चुके थे.

आंटी ने कहा- नयन मुझे नहीं पता था कि तुम इतना मज़ा दे सकते हो.. मुझे तेरी फ्री स्टाइल चुदाई बहुत मस्त लगी.

अब इसी तरह अंवतिका आंटी और मेरे बीच संबंध चलता रहा। 

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Update........................................... हफ्ते भर की यात्रा

वो रविवार का दिन था मैं और मम्मी आस - पास बैठा चाय पी रहे थे । सुबह 10 बजे के करीब पापा का फोन आया तो मेरी मम्मी ने फोन उठाया और स्पीकर पर करके मैं और मम्मी पापा से बात करने लगें। ( पापा को मॉल के काम से बाहर गये हुए इस बार लगभग 1 महीना हो गया था। )

पापा: बेटा तेरी पढ़ाई कैसी चल रही है?

मैं: एग्जाम खत्म हो चुकी है अभी छुट्टी चल रही है।

इतने देर में मम्मी बोली: ये पूरा दिन घर में रहकर मुझे ही तंग करता रहता है।

तभी पापा बोले : तो तुम दोनों कहीं घूमने चले जाऊ।

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तभी बीच में मैं बोला-

मैं : सही कहा पापा, में सोच रहा था कि इसबार छुट्टी मनाने गुवहाटी जाने का प्लान है कैसा रहेगा।

पापा : प्लान तो बहुत अच्छा है किया तुम्हारी मम्मी तैयारी है।

मैं मम्मी की ओर देखकर बोला : चलो ना मम्मी (मैं जिद करतें हुए कहने लगा)। मेरे ज़िद करने से मम्मी मान गई।

तभी पापा ने कहा : मैं तुम दोनों के लिए ट्रेन में केबिन बुक कर देता हूं। ठंड बहुत है वहां। टिकट बुक करके बताता हूं किस दिन निकलना है। पापा फोन कट कर देते है‌।
जब शाम को मैं बाहर से आया तो मम्मी ने मुझे आवाज दी और पूछा।
मम्मी: कहां गया था? मैं तेरा इंतज़ार कर रही थी। अच्छा सुन, तेरे पापा ने हमारा 1st ए.सी. कूप केबिन बुक कर दिया है।

मैं: अच्छा, (खुश होते हुए) कब जाना है मम्मी?

मम्मी: कल शाम 7 बजे की ट्रेन है। तो 4:30 पर निकल जायेंगे।
और रात तक हमने सारी तैयारियां करके खाना खाकर सो गये। फिर अगले दिन सुबह 8 बजें मेरी आंख खुली, तो मैं जल्दी से फ्रेश होकर मम्मी से नाश्ते को कहां और उनसे बोला- मम्मी मुझे थोड़ा काम है,
मम्मी: अब कौन सा काम आ गया और इतना सामान को लाएगा?

मैं: मेरा कालेज का प्रोजेक्ट है फिर मैंने नाश्ता किया और वहां से 9:30 बजे निकल गया। और शाम 5:30 बजे करीब में घर आया। फिर हम लोग तैयार होकर स्टेशन के लिए निकल पड़े हम साढ़े छः बजे तक स्टेशन पहुंचे और ट्रेन का इंतजार करने लगे। वहीं साइड की बेंच पर एक 27-28 साल का लड़का मम्मी को बार-बार घूर रहा था। तो कभी दोनों की नज़र मिल रही थी। मैं ये सब चुप-चाप देख रहा था। मुझे उस लड़के पर थोड़ा गुस्सा आने लगा, क्योंकि वो मेरी मम्मी को ग़लत नज़र से देख रहा था। मोबाइल चलाने के बहाने से कभी मम्मी की छाती, तो कभी होंठों के देख कर अपने होंठों पर जीभ फिराता। मम्मी भी शायद ये सब नोटिस कर रही थी, और वो भी उसे बीच में देख रही थी। तभी वो लड़का मम्मी के थोड़े पास आया और बोला-

लड़का: हैलो आंटी।

मम्मी : हैलो।

लड़का: ये धनबाद होकर जो ट्रेन गुवहाटी जाती है, वो कब तक आयेगी?

मम्मी : हम भी उसी का इंतजार कर रहे हैं। 15 मिनट में आती होगी।

लड़का: अच्छा, वैसे आप भी गुवहाटी जा रहे हो?

मम्मी : हां , हम गुवहाटी जायेंगे, आप कहां जाओगे?

लड़का: में भी गुवहाटी जा रहा हूं । और फिर मम्मी की आंखों में आंखें डाल कर देखने लगा और मम्मी भी उसे देखने लगी। अब वह लड़का भी डर नहीं रहा था। इतने में मैं उस लड़के को जलाने के लिए बोला, “आपके के साथ वो कौन भाभी है क्या तुम्हारी?”

लड़का: वो दीदी है मेरी, उन्हें ही घर छोड़ने जा रहा हूं।

मैं: बड़ी खूबसूरत है। वैसे आपकी सीट कोन से कम्पार्टमेन्ट में है?

लड़का: first ए.सी.।

मैं : अच्छा हमारा भी फर्स्ट ए.सी. में है।

मम्मी और वो लड़का अब भी दोनों आपस में नज़र मिला रहे थें। जबकि उस लड़के की बहन हमसे पांच कदम की दूरी पर थी। तभी मैं पानी पीने का बोल कर वहां से पानी पीने चला गया और मैं वहां से उनसे छुप कर उन्हें देखने लगा। वो लड़का और मम्मी अब भी बात कर रहे थे। तभी उस लड़के ने कुछ कहा और मम्मी अपना मुंह घुमा कर हल्की सी हंसी।

फिर उस लड़के ने कुछ कहा और मम्मी का मोबाइल उनके हाथों से लिया और कुछ टाइप करनें लगा। तो मैं जल्दी से वहां जाने लगा, क्योंकि मुझे लगा वो मम्मी का मोबाइल नंबर ले रहा होगा। तभी उसका मोबाइल बजा तो उसने मम्मी का फोन दे दिया और मुझे आता देख मम्मी को कुछ कहा और वहां से जाकर अपनी दीदी के पास जाकर बैठ गया। मैंने मम्मी से कहां-

मैं : क्या हुआ मम्मी, वो आपके फोन में क्या कर रहा था?

मम्मी: हड़बड़ाते हुए, वो फोन थोड़ा हैंग हो गया था, बस उसे देख रहा था।

मै: क्या मम्मी , किसी अनजान को ऐसे फोन नहीं देते!

मम्मी : अरे कुछ नहीं अच्छा लड़का है।

फिर मैं चुप हो गया और मुझे मम्मी पर तब से शक होने लगा व गुस्सा भी आ रहा था। पर क्या करता, वो मेरी मम्मी थी। पर मम्मी का ये रूप देख कर मैं दंग था और मम्मी को देख कर मेरे मन मैं उल्टे-सीधे ख्याल आने लगे जिससे मेरा लंड अकड़ने लगता। इसी उधेड़-बुन में 7 बज गये और ट्रेन आ गयी हम ट्रेन में चढ़े तो हमारा केबिन B था तभी वो लड़का और उसकी दीदी भी आयी तो वो बोला- आंटी आपका ये कूप है?

मम्मी: हां और तुम्हारा?

लड़का: ये G हमारा है।

तभी उसकी दीदी ने आवाज लगाई और फिर वो आगे चले गये। और मैंने सामान रखा और मम्मी को भी अन्दर बुलाया। फिर हम अपनी‌ सीट पर बैठ गये। तभी मम्मी बोली, “चल 7 बज गये है तो खाना भी खा लेते‌ है।” क्योंकि मम्मी घर से खाना पैक करके लेकर आयी थी तो हम खाना खाने बैठ गये। खाते वक्त बार-बार मम्मी के फोन पर मैसेज टोन बजती, तो मुझे शक हुआ कहीं उस लड़के ने पक्का मम्मी का नम्बर तो नहीं ले लिया। तभी मैंने कहा-

मैं : मम्मी आपका फोन बार-बार रिंग क्यों कर रहा है।

मम्मी (मम्मी बात को टालते हुए): अरे बेटा छोड़ना, व्हाट्सएप ग्रुप पर कोई मैसेज आया होगा।

फिर हम खाना खाकर अपने कपड़े पहनें। मैंने सिर्फ कच्छा पहना और मम्मी ने नाइटी पहन ली थी। फिर हम अपनी-अपनी सीट पर लेट गये। मैं ऊपर वाली बर्थ पर और मम्मी नीचे वाली बर्थ पर लेट कर अपने मोबाइल को चला रही थी। मुझे मम्मी पर शक था‌‌ कि वो उस लड़के से ही चैट कर रहीं थी। और सोच कर अचंभित भी था। मेरी मम्मी जो इतनी संस्कारी थी, वो अपने बेटे की उम्र के लड़के से पट गयी थी। मुझे अब चैक करना था मम्मी किससे बात कर रही थी, तो मैंने अपना दिमाग लगाया और मम्मी को आवाज लगाई।
मम्मी: क्या हुआ?

मैं: मम्मी वो फोन चार्ज करना है।

मम्मी: ठीक है लगा दे और लेट जा, ठंड हो रही है।

मुझे नींद नहीं आ रही थी मेरे दिमाग में बस ये ही घूम रहा था कि मम्मी एक जवान लड़के से पट गयी। क्या वो‌ उससे चुदाई करना चाहती है?

मम्मी वैसे खुबसूरत और कसावटी बदन की महिला है जो किसी भी लड़के और बूढ़े आदमी का लंड खड़ा कर दे। उनकी गांड चोड़ी और चूंचियां अभी भी तनी हुई है। शायद वो लड़का भी इसी वजह से फिदा हुआ होगा। क्योंकि मम्मी के बारे में सोच कर जब सगे बेटे का लंबा लंड खड़ा हो जाये, तो वो लड़का फिर भी अनजान था।

फोन को चार्जिंग पर लगायें 20 मिनट से ज्यादा हो गये थे। तो मैं अपना फोन लेने के लिए जब नीचे आया तो मम्मी अब भी फोन चला रही थी, पर मुझे देख कर फिर से फोन में कुछ और खोल दिया। मैंने भी जल्दी से फोन को चार्जिंग से हटाया और अपनी सीट पर आकर लेट कर रिकॉर्डिंग देखने लगा। उसमें कुछ साफ तो नहीं दिखाई दिया बल्कि थोडा जब मैंने विडियो रोक कर देखा तो उसमें कुछ चैट दिखी।

लड़का: तुम बहुत हाट हो।

मम्मी: अच्छा, अब तो मेरी उम्र हो गयी है। मैं तुमसे बड़ी भी हूं।

लड़का: उम्र कहां छोड़ो, तुमसे मुझे पहली नजर में प्यार हो गया है।

फिर थोड़ी और देखने पर मुझे एक जगह फिर चैट दिखी-

मम्मी: अभी बेटा जगा है, कैसे मिलोगे?

लड़का: आप बाथरूम में आ जाओ, ज्यादातर सब सो चुके हैं।

मम्मी: अभी नहीं, थोड़ा रूको।

लड़का: कितना टाइम? तुमसे नजदीक से मिलना है।

मम्मी: 9:30 के करीब तब तक नयन भी सो जायेगा, और नजदीक से का क्या मतलब?

फिर मैंने जल्दी से टाइम देखा तो 9:30 बजने‌ में 15 मिनट ही बचे थे। फिर मैंने सोने की एक्टिंग के लिए कम्बल ढक लिया । मेरे दिमाग में बार-बार यहीं आ रहा था कि मम्मी एक अनजान लड़के से अकेले में बाथरूम में मिलने को मान कैसे गयी? क्या उन्हें पता है वो लड़का बाथरूम में मम्मी को पेल भी सकता है? क्या पेलने के लिए ही बुला रहा था। मैंने भी सोच लिया में ये नहीं होने दूंगा।

तभी मम्मी उठीं मेरी ओर देख कर चुप-चाप बाहर जाने लगी। मैं भी थोड़ी देर बाद चुप-चाप उठा और अपने कूप से बाहर देखा तो मम्मी जा रही थी। आगे वो लड़का खड़ा था।

मम्मी जैसी ही उस लड़के के पास पहुंची, उसने मम्मी को एक-दम अपनी बाहों में ले लिया और वहीं पर चूमने की कोशिश कर ही रहा था, कि मम्मी ने उसे रोका और उसकी बाहों से बाहर हुई तो वो लड़का मम्मी को बाथरूम की तरफ ले जाने लगा। तो मैं भी थोड़ी देर बाद चुप-चाप उनसे छुपकर आगे बढ़ा।

वो दोनों जैसें बाथरूम के अन्दर गये मैंने बाथरूम का दरवाजा खटखटाया और बिना सोर किये भागता हुआ अपने कूप में आकर लेट गया। जब मम्मी कुप में आई तो मुझे सोता देखकर वह भी कम्बल ओढ़ कर चुप-चाप हो गई।

करीब 9 बजे सुबह हम दोनों गुवहाटी पहुंच गए, सुबह को हमने होटल ले लिया , तो रिसेप्शन वाले ने बोला: आप और आपकी वाइफ इस होटल में आराम से रहे सकते है। हम कपल्स को 33% डिस्काउंट देते है। और मुझे और मम्मी को एक कमरा दे दिया।
मेरी मम्मी ये सुनकर थोड़ा शरमा गई। लेकिन अंदर ही अंदर वोह जवानी को फील कर रही थी। वो मुझे देखकर मुस्कुराई और मैं भी मुस्कुराया। फिर हम दोनों रूम में गए।

मैं: हाहा, उस आदमी ने तो हमें पति-पत्नी समझ लिया। आप इतनी खूबसूरत और यंग को लगती हो।

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हम दोनों कमरे के अंदर आ चुके थे । रात को सोते समय मेरे साथ एक समस्या होती है जब मैं घर पर रहता हूं तो रात को मुझे कमरे में  नंगा सोने की आदत है। मैं अपने कमरे में कभी दूसरों के साथ नहीं सोया था। मुझे लगा कि शायद मेरे लिए एक अलग कमरा होगा लेकिन दुर्भाग्य से नहीं था।

मेरा मन विचलित था। हम कमरे में चले गए और हमारे पास दो तकियों और एक कंबल के साथ एक बड़े आकार का बिस्तर था। अब मैं अपनी आदत को लेकर तनाव में था।

कमरे में आने के बाद मेरी मम्मी ने मुझसे कहा- क्या तुमको कमरा पसंद है?
मैं- हाँ मम्मी ! लेकिन, मुझे लगता है कि पिताजी ने 2 कमरे बुक किए थे। नहीं?
मम्मी - हाँ … लेकिन, उन्होंने एक कमरे को रद्द कर दिया क्योंकि वह हमारे साथ नहीं आये।
मैं- ओह!

मम्मी - क्या हुआ… सब ठीक है?
मैं- हाँ मम्मी । मैं बहुत खुश हूँ।

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मम्मी ने कहा- ठीक है, फ्रेश हो जाओ और रात के खाने के लिए तैयार हो जाओ।

जैसा कि मैने आपको बताया कि मैं अपनी मम्मी के साथ अपने कमरे को साझा करने के लिए तैयार नहीं था। तो हमेशा की तरह मैंने अपने किसी भी नाइट पैंट और शॉर्ट्स को पैक नहीं किया था।

मैं वॉशरूम के अंदर गया और मैंने अपना तौलिया उतारा, मैंने स्नान किया और अपने तौलिया को अपनी कमर पर लपेटकर बाहर आ गया।

मम्मी - नयन हो गया तुम्हारा … ठीक है. अब मैं भी नहा कर आती हूँ।
मम्मी बाथरूम के अंदर चली गई । मैंने अपना तौलिया निकाल दिया और कुछ पार्टी के कपड़े पहन लिए।

कुछ देर बाद मम्मी अपने शरीर पर एक बाथरोब और अपने सिर के चारों ओर तौलिया लगाए हुए बाहर आईं।
उन्होंने अपना तौलिया अपने सिर से हटा दिया और अपने गीले बालों को सुखाने लगी।

मैं उनके बूब्स को उनके बाथरोब के अंदर उछलते हुए देख सकता था।

मम्मी का बाथरोब उनको घुटनों तक ढके हुए था। उनके कड़क बूब्स ने मुझे थोड़ा सा कामुक कर दिया था। मम्मी काफी सुंदर और हॉट लग रही थी। तभी मम्मी ने कुछ कहा :-

मम्मी - नयन , क्या तुम थोड़ी देर के लिए पीछे घूम सकते हो? मैं दो मिनट के भीतर तैयार हो जाऊंगी।
मैं- प्लीज़ मम्मी आप चालू रखिये, मैं बाहर इंतजार करूँगा आपका!

मम्मी - कोई ज़रूरत नहीं नयन , तुम यहाँ ठहर सकते हो. बस अपनी आँखें बंद कर लो या पीछे मुड़ जाओ।
तो मैंने कहा- ठीक है मम्मी।

मैं पीछे घूम गया।

लेकिन मैं मेरे सामने लगी खिड़की के शीशे से देख सकता था। उन्होंने अपना बाथरोब उतार दिया था।

मम्मी ने अपनी ब्रा और पैंटी पहन रखी थी। वे बहुत सेक्सी थी।

उनके सेक्सी शरीर ने मुझे उत्तेजित कर दिया और अचानक मेरे दिमाग में कई शरारती विचार आने लगे।
लेकिन वह मेरी मम्मी है और मैंने उनके बारे में सोचना बंद कर दिया।

पर मैं अपनी आँखें बंद नहीं कर सकता था क्योंकि वह अपनी ब्रा और पैंटी में बहुत सेक्सी लग रही थी।

अब मम्मी ने अपनी जींस और एक टी-शर्ट ली और उन्हें पहन लिया। यह सब देखकर मेरा लण्ड खड़ा हो गया था।
मम्मी ने मुझसे पूछा- तुमने पार्टीवियर क्यों पहने हैं? तुम रात के खाने के लिए कुछ और कपड़े भी पहन सकते थे। पर मैं चुप रह गया । हम दोनों रात के खाने के लिए गए। डिनर करके हम वापस अपने कमरे में चले आए।

मेरी मम्मी ने मुझे वॉशरूम जाने के लिए कहा ताकि वह अपनी ड्रेस बदल सके। मैं बाथरूम के अंदर गया और दो मिनट के बाद उन्होंने मुझे बाहर बुला लिया।

मम्मी ने अपनी ट्रैक पैंट और वही टी-शर्ट पहनी हुई थी।

मम्मी - ठीक है अब मैं वाशरूम के अंदर जाती हूँ तुम अपनी ड्रेस बदल लो और फिर मुझे बुला लेना।

मैं- नहीं मम्मी , मैं इस ड्रेस में ही ठीक हूँ मैं इसी में सो जाऊंगा।
मम्मी - हा हा! क्या बात कर रहे हो नयन ? ये पार्टी वाले कपड़े हैं अब अपने नाईटड्रेस लो और उन्हें पहन कर आओ।

मैं- नहीं, मम्मी , मैं ठीक हूँ।
मम्मी - तुम्हें कोई परेशानी क्या?
उन्होंने मेरा बैग लिया और मेरी नाईटड्रेस तलाशने लगी।
मम्मी - नयन , तुम अपने साथ कोई नाइटड्रेस क्यों नहीं लाये हो?

मैं- मम्मी वास्तव में, मैं उन्हें अपने साथ नहीं ले जाता। क्योंकि आठ सालों से मैने किसी के साथ कमरा शेयर नहीं किया तो मुझे नग्न सोने की आदत है। मुझे नहीं पता था कि हम यहां इस कमरे को शेयर करेगे … लेकिन मैं ठीक हूँ. मैं इसी में सो सकता हूं।

मम्मी - नयन ! क्या तुम सच कह रहे हो? तुमने मुझे इस बारे में पहले क्यों नहीं बताया। अब तुम अपने पार्टीवियर के साथ कैसे सोओगे? जबकि तुमको तो नग्न सोने की आदत है। अच्छा ऐसा करो … अपने कपड़े उतारो और कंबल के अंदर हो जाओ।

उनकी बात ने मुझे चौंका दिया- मम्मी! आप कुछ भी बोल रही हो? ये कपड़े पूरी तरह से ठीक है और मैं इनमें भी आराम से सो सकता हूँ।

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मम्मी - नयन … यह सब ठीक है। मैं तुम्हारी मम्मी हूँ मुझसे शर्म करने की जरूरत नहीं है। नग्न होकर सोने में कुछ भी गलत नहीं है और कुछ अलग भी नहीं है। तुम नग्न होकर सो सकते हो … फील फ्री बेबी।
मैं- मम्मी, मैं आपके सामने कैसे नंगा हो सकता हूँ? और जब आप भी मेरे पास हो तो मैं बिना कपड़ों के कैसे सो सकता हूं?

मम्मी - नयन … यह ठीक है। मुझे कोई समस्या नहीं है कि तुम मेरे बगल में नग्न सो रहे हो। एक मम्मी के लिए अपने बच्चे को नग्न देखना सामान्य बात है। चुपचाप मेरी बात मानो।

उनकी बातों ने मुझे काफी सहज बना दिया था।
लेकिन मुझे शर्मिंदगी भी महसूस हो रही थी। मुझे पता था कि मैं अपने पार्टीवियर के साथ नहीं सो सकता हूं।

धीरे-धीरे मैंने अपनी शर्ट उतार दी। जब मैं अपनी पैंट खोल रहा था तो मेरे हाथ कांप रहे थे पर फिर भी मैंने अपनी पैंट उतार दी।
मैं अब सिर्फ अंडरवियर में ही खड़ा था।

मेरी मम्मी पानी पी रही थीं और फिर उन्होंने मेरी तरफ देखा।

मम्मी - हम्म, चलो, अपनी अंडरवियर भी उतारो और बिस्तर पर आ जाओ।

मेरा अंडरवियर टाइट था। धीरे-धीरे मैंने उसे उतारा और पूरी तरह से नंगा खड़ा हो गया। मेरा छह इंच का लंड मेरी मम्मी की तरफ इशारा कर रहा था।

मैंने अपनी मम्मी के चेहरे को धीरे से देखा … वो मुझे ही देख रही थी और मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी।

उन्होंने कहा- मेरा प्यारे बेटे, यह सब ठीक है। तुम हमेशा मेरे प्यारे बेटे हो। अपनी मम्मी के साथ बिल्कुल फ्री रहो. ये लो, पानी पी लो और बिस्तर पर आ जाओ।

मम्मी ने मुझे पानी की बोतल दी।
मैंने पानी पिया और शरमाते हुए बिस्तर पर लेट गया।
बाद में उन्होंने लाइट बंद कर दी और बेड लैंप चालू कर दिया। अब वो बिस्तर पर आई और मेरे बगल में लेट गई।

उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखा और कहा- नयन  … मेरे साथ तुम्हारा पूरा कम्फर्ट ज़ोन होगा। मेरे लिए बिल्कुल ठीक है कि तुम नग्न रह सकते हो और तुम भी अपनी मम्मी के साथ सहज महसूस कर सकते हो।
मैं- ठीक है मम्मी ।

जैसा कि मौसम बहुत गर्म था पर एसी की ठंडक भी बहुत थी। मैंने मम्मी को कंबल दिया और मैं उनके बगल में पूरी तरह से नंगा लेट गया।

हमने कुछ देर तक काफी बातें की और मेरी मम्मी ने मेरी शर्म को कब कम्फर्ट में बदल दिया पता ही नहीं चला।
कुछ समय के बाद में उत्तेजित होने लगा और मेरा लण्ड खड़ा होने लगा जो कि छत की ओर मुंह करके खड़ा था।

मैंने देखा कि मेरी मम्मी ने कुछ सेकंड के लिए मुझे ऐसी अवस्था मे देख लिया था।
मैं शर्मिंदा हो गया और विपरीत दिशा में करवट लेकर लेट गया. मेरे नितम्ब मम्मी के सामने थे।

कुछ देर बाद मम्मी सो गई और कुछ मिनट बाद मैं भी सो गया।

अगले दिन जब मैंने अपनी आँखें खोलीं तो मैंने देखा कि मेरी मम्मी मेरे पास बैठी थी और पापा से फोन पर बात कर रही थी।
उनकी मधुर आवाज ने मेरी सुबह को और अधिक सुखद बना दिया।

मैं बिस्तर पर उनके बगल में पूरा नंगा लेटा हुआ था और वह मेरे पास थी।
जिससे मैं थोड़ा असहज हो गया।

कुछ देर बाद उन्होंने फोन रख दिया और अपना तौलिया लिया और बाथरूम में चली गई।
मैं अभी भी गहरी नींद में सोने का नाटक कर रहा था।

कुछ समय बाद वह बाथरूम से बाहर निकली, उनका सुंदर शरीर चारों तरफ से तौलिये से ढका हुआ था।
मैंने अपनी आँखें थोड़ी और खोली और उन्हें देखने लगा।

मैं कल रात के बारे में सोच रहा था जब मैंने उन्हें खिड़की के कांच में उनकी ब्रा और पैंटी के साथ देखा था और अब मेरे लिए उन्हें सच में ब्रा पैंटी के साथ देखने का समय आ गया था।

मम्मी ने अपने बैग से एक जोड़ी कपड़े निकाले और अपना तौलिया हटा लिया।

हे भगवान! मैं चौंक गया। मुझे उम्मीद से ज्यादा कुछ दिखाई दे रहा था।
मम्मी ने अपनी ब्रा नहीं पहनी हुई थी।

उनके स्तन आज़ाद होते देख मैं चौंक गया।
मैं उनके गोल और दूधिया स्तन साफ तौर पर देख सकता था।

यह सब मुझे पागल कर रहा था, मुझे अपनी अपने दिल की धड़कन तक सुनाई दे रही थी।

मेरा लण्ड खड़ा होने लगा था ओर कमरे की छत की ओर इशारा कर रहा था। मैं मम्मी के नँगे जिस्म से अपनी नज़र नहीं हटा पा रहा था।

मम्मी की सेक्सी पैंटी उनकी आधी गांड को ही कवर कर रही थी। उनके नितम्ब मुलायम और गोल थे। मैं उनके बूब्स को उछलते हुए देख सकता था जब वो हिल रही थी.

ये सब मुझे पागल कर रहा था। मैं अपने खड़े लण्ड को छत की तरफ इशारा करते हुए नहीं रोक पा रहा था।
मुझे टेंशन थी कि वह मेरे इरेक्शन को नोटिस ना कर ले।

उन्होंने बैग से अपनी ब्रा निकाली और पहन ली और फिर वह कपड़े पहनने लगी।
फिर भी मेरा लण्ड पूरी तरह से खड़ा था। मैं वहाँ बिलकुल असहाय पड़ा था।

मम्मी तैयार हो गई थी.

और तभी अचानक दरवाजे की घंटी बजी। मम्मी ने अपना सिर मेरी तरफ घुमाया और मेरे शरीर को कंबल से ढक दिया और फिर उन्होंने दरवाजा खोला।

सामने एक सर्विस बॉय था जो नाश्ता ले कर खड़ा था।
मम्मी ने उसे कमरे में बुलाया।

उसने वहाँ नाश्ता छोड़ दिया और कमरे से बाहर चला गया.

फिर मम्मी ने दरवाजा बंद कर दिया।

वह धीरे से मेरी ओर आई और कुर्सी खींच कर मेरे पास बैठ गई। वो मेरे सीने पर हाथ फेरते हुए मुझे पुकारने लगी।
मैंने धीरे से अपनी आँखें खोली जैसे मैं अभी ही जागा हूं।

मम्मी - नयन , गुड मॉर्निंग, उम्मीद है तुम आराम से सोये होंगे।

मैं- मॉर्निंग, मॉम! हां, अच्छे से।

मम्मी - ओके स्वीटहार्ट, फ्रेश हो जाओ। हमें शहर को देखने और बाहर जाने की जरूरत है। गुवहाटी में कई घूमने लायक जगह हैं।

मैं बिस्तर से उठ कर उनके पास खड़ा हो गया और साथ ही मेरा लण्ड भी उनकी तरफ इशारा करते हुए खड़ा था।

मैंने अपने शरीर को एक तौलिया से ढक लिया और वाशरूम में चला गया।

मैं मम्मी के सेक्सी शरीर और सुंदर स्तन के बारे में सोचना बंद नहीं कर पा रहा था। वे किसी ताजे रसदार खरबूजे की तरह थे जिन्होंने मुझे सुबह सुबह ही गर्म कर दिया था।

लेकिन कहीं न कहीं मुझे शर्मिंदगी भी महसूस हो रही थी कि इस तरह अपनी मां के बारे में सोचना बहुत बुरा है।

मैंने अपना दैनिक काम खत्म किया और नहाकर तौलिया पहन कर बाथरूम से बाहर निकल आया।

मम्मी टीवी न्यूज़ देख रही थी।

मैंने बैग में से कपड़े लिए और अपना तौलिया हटा दिया। मैं उन्ही के सामने तैयार नंगा होकर कपड़े पहन रहा था।

फिर उन्होंने मुझे नाश्ता परोसा और खाकर हम शहर को घूमने के लिए निकल गए।

उस दिन हमने खूब मस्ती की, मैंने अपनी मम्मी के साथ बहुत ही अच्छा समय बिताया था।

शाम को 7:30 बजे हम होटल के कमरे में वापस आ गए थे। गर्म मौसम के कारण हम थके हुए थे और पूरी तरह से पसीने से तर थे तो हम दोनों ने नहाने का फैसला किया।

सबसे पहले, मेरी मम्मी अपने तौलिया और ब्रा पैंटी की जोड़ी के साथ बाथरूम के अंदर गई. और कुछ समय बाद वह अपने शरीर के चारों ओर तौलिया लपेटकर बाहर आ गयी।

उन्होंने मुझे भी शॉवर लेने के लिए कहा।
मैंने भी अपना तौलिया लिया और अंदर चला गया।

मैं अपनी मम्मी के बारे में सोच रहा था कि वह बाहर अपने कपड़े बदल रही होगी।

मैंने शावर लिया और अपनी टावल अपनी कमर के चारों ओर लपेटकर बाहर आ गया।
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आया तो देखा एक महिला ( बॉडी मसाजर) जोकि मम्मी की बॉडी मसाज कर रही थी। मेरी मम्मी बिस्तर पर अधनंगी पड़ी हुई थी‌। उनके शरीर पर केवल पेटीकोट था। मम्मी उल्टी लेटी हुई थी। उनके पेटिकोट का नाड़ा भी शायद खुला था। बॉडी मसाजर बड़ी तन्मयता से उनके शरीर की मालिश कर रही थी। वह अपने हाथों को उनके कमर से होते हुए पेटीकोट के अंदर उनके नितंबों तक लाती, फिर पीठ से होते हुए दोनों किनारों से उनके बूब्स को दबाती।

इससे मुझे बार-बार मम्मी के नितम्बों का कटी प्रदेश दिखता। मैं काफी देर वहां खड़े होकर यह नजारा देखता रहा, कि काश पेटीकोट पूरा उतर जाए और मुझे चूत दर्शन हो जाए। पर यह नहीं हुआ, उलटे बॉडी मसाजर ने मुझे देख लिया। मुझे जैसे ही इस बात का अहसास हुआ, मैं बाथरूम में चला गया। मेरा छोटा नुनु वीर बहादुर बनकर तना हुआ था। अब मुझे अपने लौड़े के लिए भी कुछ करना था।

मैं अपने टावल को नीचे सरकाया लौड़ा तनकर खड़ा था। उसकी टोपी चमक रही थी, और एक चिकना पदार्थ रिस रहा था। मैं आंखे बंद करके अपने लंड को रगड़ने लगा। आंखें खुली तो सामने बॉडी मसाजर मेरे दोनों पैरो के बीच बैठी मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी।

उसने बड़ी अदा से मुझे धक्का देकर वेस्टर्न टॉयलेट बैठाया । वह शायद मेरी जवानी भोगने के मूड में थी। उसने मेरे लंड को मुंह में भर लिया, और जोर-जोर से चूसने लगी। मैं आंखे बंद कर बस आनंद ले रहा था।

इतने में दरवाजा खुला। मैंने आंख खोली तो सामने मम्मी पेटीकोट और ब्लाउज पहने खड़ी थी। मम्मी को देख कर बॉडी मसाजर ने मेरा लंड मुंह से निकाल कर अपने हाथों में थाम लिया और उसे मुठियाते हुआ मम्मी से बोली, “बहन मैं तो इसकी देखभाल कर रही थी, जैसे आपकी करती हूं”।

मम्मी : छोड़ इसे, मैं इसकी देखभाल कर लूंगी।

मम्मी का गुस्सा भांपते हुए उसने मुझे अधूरा छोड़ दिया। मैं झड़ने के बहुत करीब था‌ मेरी आंखे बंद हो रही थी, पैर कांप रहे थे, और सांसे तेज चल रही थी। तभी दरवाजा पटकते हुए बॉडी मसाजर चली गई। मेरा ऊपर उठता हुआ वीर्य वापस अंडकोष में चला गया। मुझे समझ नही आया मैं क्या बोलूं? मैं अपनी गर्दन झुकाए बेड पर बैठा रहा। शायद मम्मी को भी उस वक्त बात करना सही नहीं लगा ।

मैं बेड पर बैठा सोचता रहा मम्मी को कैसे समझाऊं। कुछ दस मिनट बाद मैं दबे पांव से मम्मी के पास बाथरूम में गया , तांकि सॉरी बोल सकूं। पर वहां नजारा कुछ और ही था।

मम्मी आईने के सामने खड़े हो कर कपड़े बदल रही थी। उन्होंने अपना ब्लाउज खोल कर बेड पर रख दिया था, और पेटीकोट का नाड़ा खोल रही थी। मेरे पांव वहीं दरवाजे के बाहर थम गए। लंड फिर से खड़ा हो गया। आंखे चमक उठी। इतने में मम्मी का पेटिकोट उनके पैरो में गिर गया। उनका नंगा जिस्म मुझे अपनी ओर बुलाने लगा। उनकी गांड की गोलाई और मोटी जांघों ने फिर से मेरे वीर्य को लंड के मुहाने पर ला खड़ा किया।

मेरी नंगी मम्मी पेटीकोट उठाने के लिए झुकी, तो मेरे लिए जैसे वक्त वहीं रुक गया। मम्मी की गदराई गांड मेरे सामने उभर के आ गई। अभी-अभी हुई उनकी मालिश से उनकी गांड चमक रही थी। भरी हुई गांड और छोटी-छोटी काली झांटे उनकी चूत वाली जगह से झांक रही थी। इतने में उन्हें टेबल के नीचे गिरा झुमका नज़र आया, जिसे उठाने को वह घुटनों को जमीन पर टिका कर टेबल के नीचे आगे की ओर झुकी।

दोस्तों मैं यह सिचुएशन आप पर छोड़ता हूं कल्पना करो। मम्मी कैटवॉक करती हुई दो-तीन कदम आगे बढ़ी। बस दोस्तों यह मेरी चरम सीमा थी। मैं पैंट में ही झड़ने लगा। शरीर झटके खा रहा था, और खड़ा रहना भी मुश्किल हो गया। पैर कांप रहे थे। संभालने के लिए दरवाजा पकड़ा कि तभी मम्मी उसी हालत में गर्दन घुमा कर मुझे देखने लगी। मेरा कांपता जिस्म उन्हें मेरी हालत बयां कर रहा था।

मम्मी आई और धड़ाम की आवाज के साथ दरवाजा बंद हुआ। मैं आत्मग्लानि के साथ में वापस लौट आया। बिस्तर पर बैठ कर अपनी पेंट खोली और नीचे की ओर सरका दी। लंड सिकुड़ कर झूल रहा था। मेरा वीर्य मेरे लंड, आंड, और जांघो पर फैला पड़ा था। उसी हालत में लेट गया। आंखें बंद करते ही फिर से वहीं दृश्य सामने आ गया। लंड ने एक बार फिर सिर उठाया। इस बार बड़ी बेदर्दी से मैंने लंड को अपने पंजों में पकड़ा और मुठ मरने लगा।

वीर्य से सना गीला लंड आसानी से हाथों में फिसलने लगा। आवेग ऐसा था कि हाथ रुकते तो कमर से ऊपर की ओर धक्के मारने लगता। मैं दोनो हाथों से लंड को पकड़े झटके मार रहा था। पर इस बार आसान नहीं था झड़ना। मैंने तकिए को बगल में रखा, और उस पर लंड टिकाए लेट गया। मानों मम्मी की गांड पर लेटा था। झटके मारते-मारते झड़ गया और गहरी नींद में चला गया।

कुछ घंटों के बाद कमरे में हलचल हुई तो नींद खुली। मम्मी ने मुझे चादर ओढ़ा दी थी। जाते-जाते उन्होंने कहा, “रात हो गई है, बाहर आकर खाना खा लो”। मैं उठ कर कमरे में अटैच बाथरूम में गया तो पाया, मेरी वीर्य से सनी पेंट, और तकिए का कवर बाथरूम में पड़ा था। शायद मम्मी ने रखा था।

मैं फ्रेश हुआ और कमरे से बाहर आकर खाने के टेबल पर बैठ गया। मम्मी वहीं बैठी मेरा इंतजार कर रही थी।

मैने बड़ी ही मासूमियत से बोला: सॉरी मम्मी , आपने मुझे इस तरह से देखा। वो बॉडी मसाजर खुद ही वो सब कर रही थी। मैं सेल्फ सेटिस्फेक्शन के लिए कभी-कभी करता हूं। पर वो अचानक बाथरूम में आई, और वो सब करने लगी। मैंने उसे ऐसा करने को नहीं कहा था।

मम्मी : ठीक है मैं तुमसे बाद में बात करूंगी इस बारे में अभी खाना खा लो।

मैं मन में सोचा कि मम्मी शायद सेक्स के टॉपिक पर मुझसे कोई भी बात नहीं करना चाहती थी। खास कर मैंने जो उन्हें बिना कपड़ो के देख लिया था।

करीब रात के 12 बजे मुझे पियास लगी और मैं जागा । जब मेरी आंख खुली मेरी नजर मम्मी पर पड़ी। मम्मी लाल नाइटी मैं सो रही थी और उसकी नाइटी ऊपर उठी थी और आधे स्तन भी दिख रहे थे। मेरे दिल की धड़कन बढ़ने लगी और मैंने आहिस्ता आहिस्ता मम्मी के स्तन हाथ रखा।

वाह क्या मुलायम स्तन थे और फिर मैंने स्तनों को हल्का सा दबाया। फिर मैंने मम्मी की नाइटी थोड़ी ऊपर उठाई तो मुझे मम्मी की पैंटी दिखने लगी जो गुलाबी रंग की पैंटी थी। मैंने हिम्मत करके पैंटी पर हाथ रखा तो देखा कि मम्मी की चूत बहुत गर्म थी। और फिर मैंने अपना एक हाथ लंड पर रखा तो वह पूरी तरह खड़ा हो गया था।

मैं हिम्मत करके एक हाथ मम्मी की पैंटी पर फेर रहा था और दूसरे हाथ से लंड हिला रहा था। करीब आधे घंटे के बाद मैं बिस्तर पर ही झड़ गया मेरा सारा वीर्य बिस्तर पर ही गिर गया और उसके बाद मैं सो गया।

सुबह मेरा जल्दी आंखों खुली तो देखा मैं मम्मी से चिपककर सो रहा था तभी मम्मी मेरी तरफ मुड़ी आज वह बहुत प्यारी लग रही थी उनके स्तन हर सांस के साथ ऊपर नीचे हो रहे थे यह देखकर मेरा लंड खड़ा होने लगा तभी उन्होंने अपने आंख खोले और उनकी नजर मुझपर पड़ी उसने मुझे अपनी बाहों में भरकर मेरे होंठों पर किस किया और उठकर बाथरूम चली गई।


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तकरीबन पाँच मिनट बाद मम्मी बाथरूम से बाहर निकल और मुझे कहा "आज बहुत गर्मी है इसलिए मैं स्विमिंग पुल ‌मैं नहाने जा रही हुं तुम्हें नहाना हो तो नीचे आ जाना " और वह चली गई । मैं फ्रेश होकर थोड़ी देर बाद नीचे आ गया और स्विमिंग पुल के पास जा पहुँचा जहाँ मम्मी पहले से ही नहा रही थीं। मैंने सारे कपड़े उतारे सिर्फ अंडरवियर के और झट से स्विमिंग पुल में कूद गया और सीधा मम्मी के पास चला गया। मम्मी थोड़ी देर नहाने के बाद स्विमिंग पुल से बाहर निकलकर वह रखी कुर्सी पर बैठ गई। तभी एक आंटी मम्मी के बगल में बैठे मम्मी से बातचीत करने लगी । मैं थोड़ी देर नहाने के बाद स्विमिंग पुल से बहार आ गया और मम्मी के पास पहुंचा। जब मैं करीब पहुंचा तो वह आंटी कल सवेरे वाली बॉडी मसाज करने वाली महिला थी । उस आंटी ने मुझे " गुड मॉर्निंग " कहा , वापसी में मैंने भी उन्हें " गुड़ मॉर्निंग " कहा। थोड़ी देर हमलोग ने बात की फिर आंटी वह से चली गई। तभी मम्मी ने मुझे कहा " हमें अब कमरे में चलना चाहिए तैयार होने के लिए , क्योंकि हमें घूमने जाना है .

अब हम कमरे पहुंचकर तैयार हो गऐ । मम्मी ने साड़ी पहनी थी और मैं टी शर्ट और पैंट पहने हुए थे हमलोग बाहर जाने वाले थे कि किसी ने हमारे कमरे के दरवाजे खटखटाया जब मैंने दरवाजा खोला तो सामने आंटी खड़ी थी जो एक स्कर्ट और टॉप पहन थी, वो मस्त लग रही थी. फिर आंटी ने मम्मी को कहा कि चलो आज हम लोग बहुत मस्ती करेंगे और मुझे आँख मारकर बोली कि तू भी देख लेना और मस्ती कर लेना . और हम लोग घूमने चले गए।

अब पूरा दिन हम लोग बहुत घूमे और बिच पर खूब मस्ती की और हम सब रात को होटल में 7 बजे आ गये. जब हमलोग शाम को होटल पहुंचे तो एक अंकल ने आंटी को इशारा कर अपने पास बुलाया । आंटी और मम्मी वह पहुंचकर कुछ बातें कर रही थी और वो सब हंस रहे थे. फिर में अपने रूम में आ गया और आधे घंटे के बाद मम्मी आकर मुझसे बोली कि वह और आंटी लोग नीचे लॉन में जा रहे है तुम टी.वी देखो या जो मन करे करो, तो मैंने कहा ओके. अब मुझे समझ में आ गया था कि वो लोग कुछ इन्जॉय करेंगे.

फिर में मम्मी के जाने के बाद पीछे-पीछे गया तो मैंने देखो कि मम्मी और अंकल लॉन में बैठे थे. अब मम्मी अंकल के साथ बातें कर रही थी और अपने हाथ में शराब लेकर बहुत हंस रही थी. अब मुझे होटल में मम्मी बहुत ही खुश नज़र आ रही थी.

अब मम्मी और अंकल थोड़ा पीने के बाद आराम से गप्पे मार रहे थे. फिर मैंने देखा कि मम्मी को थोड़ा-थोड़ा नशा हो रहा था और उनकी साड़ी से उनका क्लीवेज साफ़ दिख रहा था और अंकल उसे घूर रहे थे. अब में उन लोगों की बातें सुनने के लिए सामने के एक पेड़ के पीछे गया और पेड़ के पीछे छुपकर उन लोगों की बातें सुनने लगा.

अंकल मम्मी के पास बैठ गये और ऐसे ही उनके हाथ छूने लगे, मम्मी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि किया करें

तभी अचानक से आंटी आई और बोली कि सॉरी गाइस थोड़ा लेट हो गया, डार्लिंग, मेरे पति ने कुछ बदमाशी तो नहीं की ना, तो मम्मी हँसने लगी. फिर अंकल बोले कि चलो अब रूम में चलते है और आंटी को आँख मारने लगे.

तब मुझे सब कुछ समझ में आया कि आज ज़रूर कुछ होने वाला है, लेकिन अब में भी उत्तेजित था. मम्मी ने इतना शराब पी लिया था कि चल भी नहीं पा रही थी, तो आंटी और अंकल मम्मी को पकड़कर रूम में ले गये । फिर आंटी थोड़ी देर बाद अपने रुम से बाहर आई और मेरे रूम की ओर जाने लगी । मैं भागता हुआ रूम में पहुंचा। जब आंटी रूम में आई तो मुझे सोया देखकर वो वहाँ से चली गयी. फिर में लॉन के पास जाकर एक कांच कि खिड़की के पास जाकर उनके रूम में देखने लगा तो में हैरान हो गया. अब मम्मी के सीने पर कपड़ा नहीं था और अब आंटी और अंकल उन्हें देखकर हंस रहे थे, अब मम्मी एकदम नशे में थी.

अंकल मम्मी की गाँड़ में लण्ड पेल रहे थे। दोनों का फेस दरवाजे के ऑपोजिट था इसलिये मुझे साफ दिख रहा था। मम्मी डॉगी बनी हुई थी। उनकी गोरी मोटी जांघ और बड़ी सी चूतड़ के बीच में उनकी काली सी मोटी चूत भीगी भीगी लग रही थी। चूत की दरार से एक मोटा लसलसा गोंद जैसा धार लटककर बह रहा था और जाकर जांघ में चिपक गया था।

मम्मी की चूतड़ के बीच अंकल का लण्ड पिस्टन की तरह चल रहा था जैसे खल में लोढे से पीटते हैं न, वैसा। ओह! पीछे से कैसा मस्त लग रहा था अंकल का बदन। कसी हुई पिंडली, जांघ से लेकर एड़ी तक घने बाल और पत्थर की जैसी सख्त चूतड़। पीठ के एक एक मसल्स ऐसे जैसे छेनी हथौड़ी से तराशा गया हो और पसीने बूंदों से चमकता हुआ।

अंकल मम्मी की गाँड़ पर चढ़ कर चोद रहे थे। मम्मी सिसकारी ले रही थी। उन्होंने अपनी गाँड़ उचका रखी थी और अंकल का खीरे जैसा तगड़ा लण्ड धप धप उनकी गाँड़ में दौड़ रहा था। मेरी धड़कन इतनी तेज थी कि मैं अपने साँस पर काबू नहीं कर पा रहा थी। देह में झुनझुनी भर गई थी और सर भन्ना रहा था।

सिसकी लेकर गाँड़ मरवाने का मजा तो मम्मी ही ले रही थी। मम्मी की गांड़ से टपकता अंकल का वीर्य यह गवाही दे रहा था कि मम्मी अपनी गांड़ बहुत मस्त से चुदवा चुकी थी और अब वह चूत मरवा रही थी। लगभग पांच मिनट तक मम्मी की चुत मारते रहने के बाद अंकल ने एक जोर का धक्का मम्मी की चुत में दिया पूरा लौड़ा मम्मी की चूत में उतार दिया सिर्फ उनका आँड़ बाहर रह गया।

उसी हालत में वह मम्मी की चुत में लण्ड हुचकाने लगे और मादरचोद , साली रांड जैसी गाली देते हुए चीखने लगे और फिर लंड खींचकर जोर जोर से मसलते हुए मम्मी की चुत में वीर्य गिराने लगे। वह जोर जोर से आह आह कर रहा था और लण्ड मसल रहा था। ऐसी आवाज और चीख जैसे किसी सांढ को भाला मार दिया गया हो।

पहले तो गाढ़े वीर्य की तीन पिचकारी मम्मा की चुत के अंदर मारी फिर लण्ड को निचोड़ निचोड़ कर पानी गिराने लगे। अंकल का वीर्य मम्मा की चुत से ढलककर टप टप बिछावन पर गिरने लगा। तभी मम्मी बोली " थैंक्स फॉर ऑल दिस" . तो आंटी बोली कि पंखुरी बेबी तुम चिंता मत करो यह तो कुछ भी नहीं है, अब तो यह तुम्हें और खुश करेंगे जान, बस देखो मेरा पति तुम्हें कैसे संतुष्ट करता है? उन्हें सब पता है कि तुम्हारे पति के छोटे लंड से तुम्हारा मन नहीं भरता है." अब मैं समझ गया कि वे लोग अब पोजिशन बदलेंगे। इससे पहले ही में वहाँ से खिसक गया । भाग कर सीधा अपना रूम में पहुंचा कर दरवाजा लगाकर सो गया ।

जब मेरी आंख खुली, तो सुबह करीब साढ़े चार बज चुके थे । मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो मम्मी बेड पर नहीं थी। लेकिन जब काफ़ी टाइम तक वो नहीं आई , तो मैं उठकर बाथरूम में जाकर फ्रेश होकर कमरे से बाहर निकलकर सीधे आंटी के कमरे के सामने पहुंच गया और उसके दरवाज़े को खटखटाया। थोड़ी देर बाद अंकल ने दरवाजा खोला और मैं अंदर गया। रातभर मम्मी की चुदाई से अंदर का माहौल बिगड़ा हुआ था। कमरे के अंदर मुझे सिगरेट और शराब की बदबू आ रही थी। मम्मी अब भी नींद में सो रही थी मैंने उसे जगाया । वह उठकर बाथरूम चली गई और थोड़ी देर बाद बाहर आई। जब वह बाहर आई तो मैंने मम्मी से गुस्से में कहा- मम्मी आप क्या कर रहे हो?

मम्मी: क्या कर रही हुं ?

मैं: आप शादीशुदा हो, और पापा के होते हुए किसी अंजान आदमी के कमरे में रातभर कैसे रुक सकती हो ।

मम्मी भी तैश में आकर बोली: तेरे पापा हैं यहां? दिख रहे हैं तुझे? मैं यहां यात्रा का आनंद लेना चाहती थी उनके साथ। लेकिन उनको इस चीज़ की कोई परवाह नहीं है। उनको मेरी परवा नहीं है. तो मैं उनका परवाह क्यों करूं? मैं तो वैसे ही एन्जॉय करूंगी जैसे मैंने प्लान किया था। अब तेरे पापा तो हैं नहीं, तो कोई और आदमी के साथ सही।

मैं: मम्मी आप किसी बाहर वाले आदमी के साथ ऐसा कैसे कर सकती हैं?

मम्मी: अब अंदर वाला आदमी कहां से लाऊं? तेरे पापा के बाद घर में तू ही है, तो तू मजे देगा मुझे (मम्मी ने मेरे करीब आते हुए कहा)? फ़िर वो हसने लगी, और मुझे कोई जवाब नहीं आया।

मैं कमरे से निकलकर बाहर आया और सीधे अपने कमरे में पहुंच गया और अंदर से दरवाजा बंद कर दिया। थोड़ी देर बाद दरवाजा पर किसी ने खटखटाया, मैंने दरवाज़ा खोला तो सामने मम्मी थी।वह अंदर आई और मुझे गले लगाकर " सोरी ' सोरी " बोली और कहा मुझे तुमसे उस तरह बात नहीं करना चाहिए था। मुझे माफ़ कर दो।

मैंने मम्मी को गले लगाया और कहा " इट्स ओके " । फिर मम्मी बोली मुझे ज़ोर का नींद आ रही है मैं सोने जा रही हुं और वह बेंड से सोने चली गई ।

मैंने सोचा मम्मी तो सो रही है क्यों ना आज टेरिस ( छत ) पर घूमने चलना चाहिए। तो मैं तैयार होकर कमरे से बाहर निकलकर दरवाजा बंद कर सीधे टेरिस ( छत ) पहुंच गया।

थोड़ी देर टेरिस ( छत ) पर घूमने के बाद में नीचे कमरे में पहुंचा।
मम्मी कमरे में नहीं थी. मैं कमरे के बाहर गया और लिफ्ट से नीचे गया। नीचे पहुंचकर देखा मम्मी स्विमिंग पूल के पास कुर्सी पर बैठी थी, और अंकल से बात कर रही थी। मम्मी ने आज येलो कलर की शॉर्ट्स पहनी थी, और साथ में ब्लू कलर का स्लीवलेस टॉप पहना था। उनका टॉप शॉर्ट था, तो जब वो बैठी थी, तो टॉप उठने की वजह से उनकी नंगी पीठ दिख रही थी। उनको ऐसे देख कर कोई भी मर्द का लंड पिघल जायेगा। मैं वहीं खड़े रहकर उनकी बातें सुनने लगा। मम्मी वैसे ही टाइम पास वाली बातें कर रही थी अंकल से । अंकल बातें करते हुए मम्मी की गोरी कमर पर अपना हाथ रख लिया। लेकिन मम्मी ने उसको कुछ नहीं कहा।

मुझे यह देखकर बहुत गुस्सा आया। मैंने सोचा कि मम्मी ने क्या तमाशा लगाया था। वो हमारी इज्जत को सारे आम नीलाम कर रही थी। मुझसे रुका नहीं गया, और मैं मम्मी के पास चला गया। वहां जाकर मैंने मम्मी को बोला- मम्मी, मुझे आप से कुछ बात करनी है। आप चलिए मेरे साथ.

मम्मी: बेटा , पहले अंकल को हैलो बोलो। और मैं रुककर आती हूं थोडा।

मुझे और गुस्सा आया, और मैंने मम्मी का हाथ पकड़ लिया। फ़िर मैं बोला- मुझे आपसे अभी बात करनी है। ये बोल कर मैंने मम्मी को खींचा, और अपने साथ लेके जाने लगा।

मम्मी मुझसे अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन मैं उनको खींचते हुए अपने साथ होटल के अंदर ले आया। फिर हम लिफ्ट में चले गए. लिफ्ट में जाते ही मैंने मम्मी का हाथ छोड़ दिया। मम्मी बहुत गुस्से में थी. वो बोली- तेरी हिम्मत कैसे हुई मुझे वहां से खींच कर लाने की!?

मैं: मम्मी मैं आपको ऐसा नहीं देख सकता किसी और आदमी के साथ।

मम्मी: जब तू खुद कुछ नहीं कर पाएगा, तो मुझे करने दे। तू भी साले अपने बाप की तरह है।


ये सुन कर मुझे गुस्सा आ गया. मैंने उसका वक्त मम्मी की कमर में हाथ डाला, और उनको अपने पास खींच लिया। फिर मैंने अपने होठों से चिपका दिया, और उनके होठों को चुनने लगा। मम्मी भी मेरा साथ देने लगी. अब मैं अपनी मम्मी की चुदाई का मन बना चुका था। मैं और मम्मी पागलों की तरह किस कर रहे थे, जैसे बरसों की भड़ास निकल रहे हो। मैं किस करते हुए अपने हाथ उनकी मोटी गांड पर ले गया, और शॉर्ट्स के ऊपर से उनको मुलायम चूतड़ दबाने लगा। आज तक मैंने सिर्फ गांड को आंखों से निहारा था, लेकिन आज उनको हाथों से छूने और दबाने का मौका मिल रहा था। गांड दबते मम्मी और उत्तेजित होने लगी। तभी हमारी लिफ्ट हमारे फ्लोर पर पहुंच गई, और हमें अलग होना पड़ा। जब हम लॉबी में से होते हुए अपने कमरे तक जा रहे थे, तो मम्मी मेरे आगे चल रही थी। मेरी नज़र उनकी मटकते हुए गांड़ पर थी।

फ़िर मम्मी ने दरवाज़ा खोला, और अंदर घुसे। अंदर जाते ही मैंने दरवाजा बंद किया, और फिर से मम्मी को पकड़ लिया। हम फिर से किस करने लगे, और किस करते हुए बिस्तार तक पहुंच गए। मैंने मम्मी को बिस्तर पर ले लिया, और उनके ऊपर आ के किस करने लगा। तकरीबन 10 मिनट तो हम एक-दूसरे के होठों को चुनेंगे। फिर हम अलग हुए, और एक दूसरे की आँखों में देखने लगे। मम्मी की आंखों में चुदाई की चाहत साफ दिख रही थी। फिर मैंने मम्मी के टॉप को उनके कंधों से खींचा, और उनकी गर्दन, कंधे, और क्लीवेज को छूने लगा। मम्मी मदहोश हो कर आहें भरने लगी. उनकी सांसे तेज़ हो गई, और वो हल्की आवाज़ में आह्ह आह्ह करने लगी। मम्मी के बदन की खुशबू कमाल की थी, मुझे और उत्साहित कर रही थी। किस करते हुए मैंने उनका टॉप नीचे से पकड़कर उठाया, और उसको निकाल दिया। फिर मैं पीछे चला गया, और मम्मी की ब्रा का हुक खोलने लगा।


हुक खोलते ही मैं मम्मी की नंगी पीठ छूने लगा, और उस पर जीभ फिराने लगा। मेरा दिल तो कर रहा था कि उनको खा ही जाऊं। फिर मैंने मम्मी को घुमाया, और उनके स्तनों को एक-एक करके चुनने लगा। मम्मी आहें भरते हुए बोली- आह्ह नयन , आज इतने सालों बाद इनको चूस कैसे लग रहा है? इन्हीं का दूध पी कर तू बड़ा हुआ है।

मैं: आज मैं तेरे दूध का कर्ज चुकाऊंगा मम्मी । फिर मैंने स्तन छोड़ कर नीचे गया, और शॉर्ट्स और पैंटी एक झटके में निकाल कर फेंक दी। मम्मी अब नंगी मेरे सामने थी, और उनकी चिकनी चूत जिसमें मैं बाहर आया था, भीगी हुई थी। मैंने जैसी ही मम्मी की गीली चूत पर हाथ रखा, मम्मी सकपका गई। फिर मैंने चूत की फाँको को खोला, और उसमें अपनी जीभ फिराने लगा। मम्मी अह्ह्ह अह्ह्ह करके मदहोश होने लगी. अब मैं जीब को अन्दर-बाहर करने लगा, और चूत के माँस को अपने मुँह में खींच-खींच कर चुनने लगा। मम्मी लगतार आहें भर रही थी। उनकी चूत का रस मेरे मुँह में जा रहा था, जो बहुत स्वादिष्ट था।

कुछ देर ऐसे ही चूत चाटने के बाद मैं खड़ा हुआ, और अपने कपड़े उतारने लगा। मम्मी मेरा मोटा और बड़ा लंड देख कर शॉक हो गई। वो जल्दी से मेरे सामने अपने घुटनों पर आ गई, और मेरे लंड को हाथ में लेके लंड चूसना शुरू कर दिया। यह एक सपना की तरह था, जब मेरी मम्मी मेरा लंड चूस रही थी। कुछ देर लंड चुनने के बाद मम्मी टांगें खोल कर लेतीं, और बोली- आ जा नयन और मैं मम्मी पर चढ़ गया, और लंड चूत पर सेट करके अंदर डालने ही वाला था कि तभी किसी ने दरवाजे को खटखटाया , मैं और मम्मी कुछ देर के लिए विराम अवश्य में पहुंच गए।

तभी मम्मी ने कहा - कौन है ? ( उधर से आंटी की आवाज आई )

आंटी - में हुं।

मम्मी ने कहा - थोड़ा वेट करो आती हुं । ( मम्मी ने मुझे बाथरूम में जाने को इशारा किया ) मैं बाथरूम में जाकर अपने खड़े लंड को शांत किया और अंदर से ही उनलोगों कि बातचीत सुनने लगा।

आंटी कमरे के अंदर आते ही मम्मी से कहा कि " मैं तुम्हें एक बात बताना चाहती थी आज रात इस होटल में एक बडे़ नेता जी आ रहें हैं उनके स्वागत में एक पार्टी रखी गई है। उस पार्टी में तुम्हें और तुम्हारे बेटे को आने का निमंत्रण दे रही हुं। हां एक बात और बतानी थी किया तुम मेरे साथ मार्केट चल सकती हो आज रात के पार्टी के लिए कुछ कपड़े खरीदना था

मम्मी:- अच्छा ठीक है , मार्केट कब चलना है।
आंटी:- दोपहर के समय। ( फिर आंटी चली गई तब मम्मी ने मुझे बाथरूम से बाहर निकल जाने को कहा ),

दोपहर को मम्मी और आंटी दोनों तैयार होकर मार्केट के लिए निकल गई और शाम तक मार्केट कर के वापस आईं। वापस आने के बाद मम्मी ने थोड़ी देर आराम किया और फिर नहाकर तैयार हो गई पार्टी में शामिल होने के लिए और मुझे भी जल्दी से तैयार होने को बोली , में फटाफट जाकर तैयार हो गया, थोड़ी देर बाद हमलोग पार्टी में शामिल होने के लिए पार्टी हॉल में पहुंच गए।

पार्टी हॉल में जब हमलोग पहुंचे तो पार्टी चालू हो चुकी थी और वहां बहुत बड़े-बड़े लोग आए हुए थे सभी लोग नेताजी का आने का इंतजार कर रहे थे तभी होटल के मैनेजर के द्वारा यह सूचना दी कि नेताजी अपने ऑफिस से निकल चुके हैं थोड़ी देर में पार्टी में पहुंचने वाले हैं

तकरीबन 30 मिनट के बाद नेताजी का काफिला पार्टी में पहुंच गया होटल के मैनेजर ने नेताजी का स्वागत किया । उसे पार्टी में आए हुए सभी बड़े लोगों ने नेताजी से मिलकर उनके साथ फोटो खिंचवाया । तभी आंटी मम्मी के पास आई और मम्मी से कहा :- चलो में तुम्हारी परिचय नेताजी से करवाती हूं और मम्मी को साथ ले गई और नेताजी से परिचय करवाया ।

मैंने एक बात पर विशेष को ध्यान दिया कि जब से मम्मी नेताजी से मिले हैं तब से वह मम्मी को धुर - धुर के देखे जा रहे थे , और बीच-बीच मम्मी को अपने पास बुलाकर बातचीत कर रहे थे नेता जी कि विषेश ध्यान मम्मी पर ही टिकी हुआ था ।

पार्टी 2 घंटे तक ही चली उसके बाद पार्टी खत्म हो गया जब नेताजी अपने कमरे में जा रहे थे तब उन्होंने आंटी को अपने पास बुलाया और वह मम्मी की ओर इशारा करके कुछ बातें किया और फिर अपने मेहमान कमरे में चले गए । आंटी मम्मी के पास आई और मम्मी से बोली की नेता जी तुम्हारे बारे में ही बात कर रहे थे वह तुमसे मिलकर बहुत खुशी हुए वह तुमसे कुछ और बात करना चाहते हैं इसलिए तुम्हें अपने कमरे में बुलाया है ।

मम्मी ने कहा : ठीक है चलो नेताजी से मिल लेते हैं मम्मी और आंटी नेता जी के कमरे में जाने लगी , तो मैं भी उन दोनों के साथ जाने लगा तो आंटी ने मुझे बाहरी रोकने को कहा ", तुम यहीं हॉल में इंतजार करो हमलोग बहुत जल्दी नेता जी से मिलकर बाहर आ जाएंगे अगर हम दोनों को आने मैं देरी हो तो तुम अपने कमरे में जाकर सो जाना " तो मैंने हां में सिर हिलाया और वहीं बैठके मम्मी और आंटी के बाहर आने का इंतजार कर रहा था जब मम्मी को बहार आने में समय लगा तो मुझे कुछ संदेह हुआ तो मैं होटल के पीछे बने गलियारे में सभी की नजर से बचकर घुसकर के सीधा में नेताजी के कमरे की खिड़की के पास जा पहुंचा , वहां पहुंचकर मैंने जो देखा उससे मुझे रूम के अंदर की हालत का पता चला और देखकर मैं दंग रह गया । आगे में आपको बताता हूं किया देखा।

आंटी बोली :- नेता जी आप के लिया बिस्तार और माल तैयार है अब बिना देर किए बिस्तर पर जाओ और रातभर इस माल के जिस्म का आनंद लो। आंटी कमरे के बाहर चली गई और दरवाजा बंद कर दिया । मम्मी पलंग पर बसुध पड़ी हुई थी उनकी हर सांस के साथ उनकी बड़ी बड़ी चूची ऊपर नीचे हो रही थी। नेता जी ने बिना देर किए अपना कपड़ा और मम्मी की साड़ी उतार दिया और केवल अंडरवियर और मम्मी ब्लाउज और पेटीकोट में पलंग पर लेट गये और मम्मी को बहो में भर लिया और उनको किस करते हुआ बोला।


नेता जी - हाय स्वीटी होश में आओ, जानेमन तूम बहुत खूबसूरत हो अपना नाम तो बताओ ।

मम्मी- धीरे बोलो ' पंखुड़ी ' ।

नेता जी - ओह, बहुत सुंदर नाम है डार्लिंग. और मम्मी की गार्डन को चूम कर बोला डार्लिंग सब कुछ भूल जाओ और आज रात इस जवानी का मजा लो। जिंदगी में इतनी औरत को चोदा हुं कि याद नहीं लेकिन आज पहली बार इतनी खूबसूरत हुस्न की मल्लिका को चोदने का मौका मिला है। अब नेता जी मम्मी के स्तनों को ब्लाउस के ऊपर से ही मसल रहे थे और मम्मी को किस भी कर रहे थे। अब नेता जी ने मम्मी के ब्लाउज का बटन खोल दिया और बिना देर किए मम्मी के बदन से ब्लाउज अलग कर दिया। ब्लाउज उतारते ही मम्मी की ब्रा में कसाई हुई चूची देखकर नेता जी की मुंह से ' आह ' निकल गया । रेड कलर की ब्रा में मम्मी का गोरा चूची देखकर नेता जी मदहोश हो गया और ब्रा के ऊपर से ही चूची को चूमने लगा। अब नेता जी ने मम्मी की टांगों पर हाथ फेरता हुआ उनकी पेटीकोट का नारा खोल दिया और उतार कर बिस्तर के नीचे गिर दिया , अब मम्मी ब्रा और पेंटी में उसके सामने थी । नेता जी मम्मी की तरफ देखकर बोले ' सच में पंखुड़ी तुम बहुत ही सुंदर हो तुम्हें देखकर तो कोई भी तुम्हें अपनी बीवी बनाना चाहेगा '

मम्मी- सर प्लीज मत करो ना. मैं एक पतिव्रता नारी हुं . ( उससे बिनती कर रही थी। )

मम्मी के मुंह से यह सुनकर नेता जी और जोश में आ गया और बोला "जानू किसी पतिव्रता औरत को चोदना में बहुत आनंद है " चिंता मत करो आज रात तुम्हें इतना मजा दुंगा कि आज के बाद सिर्फ चुदवाने का ही ख्वाब देखोगी । नेता जी की गन्दी बातों से मम्मी धीरे धीरे उत्तेजित होते जा रही थी अब मम्मी ने भी नेता जी का साथ देना शुरू कर दिया था। नेता जी ने बिना देर किए मम्मी की ब्रा और पैंटी खोल दी। मम्मी सर से पांव तक बिल्कुल नंगी पलंग पर पड़ी थी। नेता जी ने भी बिना देर किए अपना अंडरवेयर खोल दिया और मम्मी से बोला “, पंखुड़ी डार्लिंग तुम्हारा नंगा जिस्म बहुत खूबसूरत है तुम्हारे चूची और कूल्हे लाजवाब है तुम्हारे चूची एकदम बडे़ और तने हुए हैं "

मैंने कई औरतों की चूची को नंगे देखा है लेकिन ब्रा उतारने के बाद चूची ढिला हो जाता है लेकिन किसी औरत का इतना तना हुआ चूची पहली बार देख रहा हुं , जो किसी भी जवान आदमी को मदहोश करने के लिए काफी है। मम्मी नेता जी की बात सुनकर शर्म गई और नेता जी को बाहों में भर लिया , तभी नेता जी ने कहा "ओह पंखुड़ी तुम्हारा बदन एकदम नाज़ुक, मुलायम और रेशमी है" और उसके बाद मम्मी के होठों को चूसने लगा। नेता जी कुछ समय तक मम्मी का होंठ चूसता रहा और साथ ही अपना एक हाथ से मम्मी के चूची को दबाता और कभी निप्पल को मसलता और कभी अपने मुंह में लेकर निप्पल को दांतों से दबवाने लगता और दूसरे हाथ से मम्मी की कमर, जांघ और कूल्हों पर हाथ फेरता ।इससे मम्मी के मुंह से धीमी आवाज में कराह उठती । जैसे “….हहुउहह…..….उउउउफफफ्फ़….ऊऊहहहहह…. .आआह्ह्ह्ह….. मम्मु , मम्मी की कराहने की आवाज सुनकर नेता जी उत्तजित हो जा रहे थे । मम्मी बीच-बीच में बोलती “प्लीज और जोर से मसलिये….ऊऊहहहह… …और जोर से… ..हां और जोर से दबाओ मेरी चूचियों को…..बड़ा मजा आ रहा है मुझे…आपका हाथ बहुत अनुभव लगता है । शायद आपको मालूम है कि चूची के साथ कैसे खेला जाता है”और फिर करहाने लगती …आआहहहह…

यौउउउउउउउ …उउउउउह्ह्ह्ह…ऊउउउफफफ..” .आआआअह्हह्हह….ऊउउउफफफफफ्फ़… …उउउइइइम्म्म्माआआ… …ऊऊओह्ह्ह्ह… उउउउउउह्ह्ह्हह्ह….. सस्शह्ह्ह्ह…… उउउउम्म्म्म्म्म्म्म्आआआह्ह्ह्ह……..”

नेता जी मम्मी का चूची दबाते हुए बोले …तुम्हें कैसा लग रहा है पंखुड़ी डार्लिंग…।”

मम्मी बोली “….ऊओह्ह्ह मत पूछो.. ..मुझे बहुत ही मजा आ रहा है नेता जी … ….आप तो चूचियाँ निचोड़ने में एक्सपर्ट हो… ….बस यूं ही मेरी चूचियाँ दबाओ नेता जी… “…प्रिय तुम्हें मेरी चूचियाँ कैसी लग रही हैं…. …मेरी चूचियों को दबाने में कैसा लगा तुम्हें…।”

तभी नेता जी बोले " तुम्हारी चूचियां बहुत ही भरे-भरे हैं... डार्लिंग पंखुड़ी तुम्हारी गोल-गोल चूचियां काफी उठी हुई और बिल्कुल शेप में हैं... पंखुड़ी तुम्हारी फुल साइज चूचियों को दबाने में बड़ा मजा आ रहा है...''

अब नेता जी ने मम्मी की जांघ और उनकी चूत को चुमना शूरू किया. जैसे ही नेता जी ने अपना जिभ उसकी चुत पूर रखी । मम्मी के मुंह से आवाज निकल गई “….आआआअह्हह्हह ……उउउउउह्हह्ह….……..उउउउउउउउउउउफफफ्फ़……”….आआआह्ह्ह …..उउउउउउह्ह्ह्ह….. ऊऊओह्ह्ह्ह…..। तब मम्मी ने खुद को संभालते हुए बोली “…….ऊऊऊहह नेता जी बहुत हो गया…. अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है... आओ ना… ऊऊऊहह प्लीज़ नेता जी , चोदो मुझे…। अब देर मत करो... अब मुझे चोदो ना.... अब और कितनी देर करोगे , नेता जी ...अब ज्यादा बर्दाश नहीं होता है और मम्मी ने अपने दोनों टांगों को फैला दिया । नेता जी ने बिना देर किए अपना लंड उसकी चूत के मुँह पर रखकर एक जोरदार शॉट मारा तो उसका मोटा लंड मम्मी की टाइट चूत को चीरता हुआ पूरा अन्दर चला गया।

"... आआआआआहहह ऊऊओह मर गई। मम्मी चीख पड़ी। ..."

अब नेता जी ने अपना लंड धीरे धीरे मम्मी की चूत में आगे पीछे करने लगे। वह धीरे धीरे मम्मी को चोद रहे थे और मम्मी कराह रही थी ……आआआह्ह्ह्ह…. ….ओहहहहह…।” इधर मम्मी धीरे-धीरे अपना हिप्स भी हिला रही थी। मम्मी की चूत गर्म थी और नेता जी का लंड और टाइट और बड़ा होता जा रहा था, उसने अपनी स्पीड बढ़ा दी, जिससे मम्मी की मुंह से बहुत तेज आवाज निकलने लगा । उउउफफफ्फ़...…. इइइइइइइइइ....ओओओएचएच ....और ज़ोर से चोदो मुझे... आआआहहहह… और जोर से चोदो मुझे..आआआआहहहहहह…। मम्मी पूरी मस्ती कर रही थी “…ऊऊऊहहह…ददीईआररर.…..ऊऊऊहहहहह…उउम्म्म्माआआअह्हह ऊऊऊओह्हह्ह…”

नेता जी कहा " बड़ा मजा आ रहा है मुझे तुम्हें चोदने में पंखुड़ी " ।

मम्मी " … ….ओओह्ह्ह्ह नेता जी तुम बहुत अच्छा चोदते हो…..आआआह्हह्हह….. उउउउहहहह....उउउउउ...अुअुअुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुउहह तुम चुदाई में एक्सपर्ट हो. तुम्हें मालूम है कि औरत को कैसा चोदा जाता है .. ऐसे ही... हां ददीअरर यूं ही चोदो मुझे...बस चोदते जाओ मुझे...अब कुछ नहीं पूछो...आज जी भर के चोदो मुझे... नेता जी ...हां जमकर चोदो , तुम बहुत अच्छे हो...बस यूँ ही चोदाई करो मेरी...ऊओहहहहह... खूब चोदो मुझे..."

अब नेता जी मम्मी को फुल स्पीड से चोदे जा रहा था। उसने मम्मी के दोनों चूचियों को दबोच रखा था। धक.. धक.. फच... फच... पुक.. पुक.. की आवाज पूरे कमरे में गूँज रहा था। नेता जी लागातर एक घंटे तक मम्मी को चोदता रहा। इस दौरान मम्मी 3 बार झाड़ चुकाई थी लेकिन नेता जी के लंड ने भी तक अपना माल नहीं छोड़ा था । नेता जी मम्मी को ऐसे चोद रहा था जैसा हाथी खारगोश पर चढ़ा हुआ हो।

( लागातर एक घंटे तक चुदवाने के बाद ) मम्मी बोली - थोड़ा धीरे-धीरे कीजिये बहुत दुख रहा है नेता जी .

नेता जी अब और जोर जोर से धक्के मारने लगे. काम से काम और आधे घंटे तक चोदते रहे फिर अचानक बोले ' आआह्ह्हा... अब मेरा माल निकल ने वाला है। "

मम्मी- प्लीज़ बाहर निकालिये नहीं तो मैं प्रेग्नेंट हो जाऊँगी।

नेता जी -ये तो बहुत ही अच्छी बात है क्योंकि मुझे भी तो बेटा नहीं है। तो फिर तुम ही मुझे बेटा दिला दो। और मम्मी की चूत में ही झड़ गए और झड़ने के बाद मम्मी के बाजू में होकर लेट गये।

थोड़ी देर बाद मम्मी ने उन्हें बोला " अब तो हो गया अब मैं अपने कमरे में जाकर सो सकती हुं। " और मम्मी उठकर जाने लगती है मगर नेता जी ने उन्हें पकड़ लिया और कहा जा रही हो मेरी जान।
इतनी भी जल्दी क्या है और मम्मी को अपनी तरफ खींचकर किस करने लगे अब मम्मी भी उनका साथ देने लगी और मम्मी उन्हें बोली अब मैं आपकी हो गई हूं ना फिर भी। नेता जी- तू है ही इतनी मस्त माल , तुझे छोड़ने का मन ही नहीं होता। अब नेता जी ने लंड मम्मी की चूत में डाल दिया और मम्मी को जोर जोर से चोद रहे थे और मम्मी भी बेशर्मो की तरह उनसे चुदवाती रही और मम्मी उन्हें बोली " अब तो मैं जरूर प्रेग्नेंट हो जाऊंगी " और वह बेडशीट पकड़ कर मचल रही थी। थोड़ी देर बाद नेता जी ने मेरी जवान सेक्सी मम्मी को घोड़ी बना दिया बिस्तर पर, और अपना लम्बा मोटा काला लंड मेरी सेक्सी मम्मी की गदराई हुई गांड के छेद पर रगड़ने लगा तो मम्मी मना करने लगी: प्लीज़ नेता जी , गांड मत मारो। मैंने पहले कभी अपनी गांड में लंड नहीं लिया।
नेता जी बहुत हरामी मर्द था. वो बिना कुछ सुने अपने बड़े लंड को एक झटके में मम्मी की गदराई गांड में घुसा दिया। मम्मी की चीख निकल गयी ' आह्ह्ह्ह उफफ्फ्फ्फ़ ' नेता जी बिना रुके घपा-घप अपने लंड को मेरी मम्मी की गदराई गांड में पेलने लगा।

दोस्तों बहुत खूबसूरत नजारा था। मेरी मम्मी की गांड में नेता जी का बड़ा मोटा लंड घुसा हुआ था और नेता जी किसी रंडी की तरह मेरी मम्मी की गांड को चोद रहा था। फिर नेता जी ने मेरी सेक्सी मम्मी की गदराई गांड 30 मिनट तक चोदी। मेरी मम्मी भी अब मजा लेते हुए अह्ह्ह.. उम्म्म्म.. उफफफफ्फ़.. आआअहह.. उफफफफ्फ़.. चोदो नेता जी बोल रही थी। नेता जी मम्मी की गांड मारने के बाद मम्मी से अपना लंड चुसवाने लगा। मम्मी भी मजे लेते हुए नेता जी का मोटा लंड चुनने लगी। इसबार नेता जी ने अपना माल मेरी मम्मी के मुँह में भर दिया। मम्मी भी अब चुप-चाप नेता जी के सामने बिस्तर पर लेटी रही। थोड़ी देर बाद नेता जी अब सिगरेट पीने लगा, और मम्मी की चुचियों से खेलने लगा।

अब मुझे भी नींद आ रही थी इस अपने कमरे में चला गया वह पहुंचकर सीधे बिस्तर पर लेट गया, मुझे कब‌ नींद आ गई पता ही नहीं चला गया ।

जब मेरा नींद टूटा तब दोपहर हो चुका था और कभी तक मम्मी कमरे में नहीं आई थी । मैं बिस्तर से नीचे उतर कर बाथरूम में फ्रेश होकर आया तभी मम्मी के मोबाइल में रिंग बजा , मैंने मोबाइल में देखा तो कोई अननोन नंबर था फिर मैंने कॉल रिसीव किया तो उधर से मम्मी की आवाज आई। वह बहुत घवराई हुई लग रही थी और मुझ से बोल रही थी कि " प्लीज बेटा मुझे यहां से बाहर निकालो " तब मैंने मम्मी से कहा " तुम घबराओ नहीं मैं कोशिश करता हूं तुम्हें वहां से बाहर निकलने का और फिर फोन उधर से ही फोन डिस्कनेक्ट हो गया । मैं तुरंत पापा को फोन लगाया कहा " आज रात का ही ट्रैन का दो टिकट कटवाने को कहा " पापा ने इतना जल्दी आने का कारण पूछा तो मैंने बताया कि मम्मी को आपकी बहुत याद आ रही है इसलिए वह वापस घर आना चाहती है । फिर पापा ने कहा मम्मी से जरा बात करवाओ तो मैंने पापा से झूठ कहा कि मम्मी बाथरूम गई है वह बाथरुम से आएगी तो आपसे जरूर बात करेगी और थोड़ी देर बाद पापा ने दो टिकट कटवा के मम्मी के व्हाट्सएप पर भेज दिया ।

फिर मैं अपने कमरे से बाहर निकाल के नीचे गया नीचे जाकर मैंने एक होटल के कर्मचारी से पूछा कि मुझे नेताजी से मिलना है तो उसने होटल कर्मचारियों ने बताया कि नेताजी अभी कहीं बाहर गए हैं वह शाम को वापस आएंगे तो आप मिल सकते हैं तो मैं बिना समय गंवाए नेताजी के कमरे के पास गया चारों तरफ देखा उसके बाद दरवाजे को खोला का कोशिश किया तो दरवाजा बाहर से ही किसी ने चाभी से लॉक कर रखा था मैंने फिर उसी होटल कर्मचारियों को बुलाया और उस रिक्वेस्ट की कृपया मेरी मम्मी अंदर में फांसी उसे बाहर निकाल दे तो उसने मेरी मम्मी को बाहर निकलने से मना किया , मैंने उसे तुरंत 500 की दो नोट दिया तो वह मान गया और फिर वह चोरी से उसे कमरे का चाभी लेकर आया और मेरी मम्मी को बाहर निकाला । मम्मी के बाहर आने के बाद सीधा हम दोनों अपने कमरे में गए । कमरे में पहुंच कर मम्मी को मैंने पापा और मेरे बीच में सारी बात बताई । मम्मी ने भी कहा हां आज शाम को ही हमदोनों इस होटल को छोड़कर घर वापस लौट जाएंगे । शाम मैंने एक टैक्सी बुकिंग और वहां से स्टेशन के रवाना हो गए । स्टेशन पहुंच कर ट्रैन में बैठकर धनबाद वापस आ गये । इस तरह मैंने मम्मी की जान बचाई ।
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अगला भाग :- " मम्मी की सहेली अवंतिका का बेटा "

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उस घटना के बाद से मैंने मम्मी के अंदर एक परिवर्तन देखा , मम्मी अब मुझपे पहले से कुछ ज्यादा ही भरोसा करने लगी थी जैसे, अपना छोटे-छोटे और बड़ी - बड़ी बात मुझसे शेयर करने लगी थी और जब भी कोई मुसीबत उसपर आती वह सबसे पहले मुझे जरुर बताती ।

एक रात करीब 11 बजे के आसपास मैं अपने रूम में सो रहा था तभी किसी ने मेरे पैर को टच किया । जब मैंने देखा तो मम्मी थी मैंने मम्मी से पूछा मम्मी कोई काम है क्या मम्मी ने कहा " नहीं " फिर मम्मी थोड़ी देर रूक कर बोली की क्या मैं तुम्हारे बगल में ले सकती हूं । मैंने कहा " बिल्कुल "। अगर तुम उस दिन मेरी मदद नहीं करते तो मैं शायद आज जिंदा नहीं रहती । तभी मैंने उनके मुंह पे हाथ रख के उन्हें बोलने से रोक दिया और कहा की जब तक मैं जिंदा हूं आपको कुछ नहीं हो सकता मैं आपका हर समय ध्यान रखूंगा तब मेरी मम्मी ने मुझे अपने ओर खिंच और मेरे होठों पे किस किया । थोड़ी देर किस करने के बाद हम दोनों अलग हुए । उसी दौरान मैंने मम्मी से कहा क्या मैं आपका दुध पी सकता हूं। मम्मी ने कहा इसमें पूछने की क्या जरूरत है यह तो तुम्हारा है फिर मम्मी ने मुझे है अपने दोनों चूचियों के दर्शन करवाए। मैं एक चूची के निप्पल को मुंह में लेकर चूस रहा था और दूसरे को मसल रहा था
थोड़ी देर निप्पल चूसने के बाद दुध नही निकालना तो मैंने मम्मी से कहा " मम्मी आपके निप्पल से दुध नही निकालना रहा है तब वह हंस पड़ी।"

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दो महिलाएं, अंवतिका और पंखुड़ी , पार्क के एक एकांत कोने में बैठी हैं, सूरज की गर्मी और पास के फव्वारे की आवाज़ का आनंद ले रही हैं। उनकी बात-चीत, जो आमतौर पर सेक्स और डेटिंग के इर्द-गिर्द घूमती है, आज एक अप्रत्याशित मोड़ ले लेती है।

पंखुड़ी ( अंवतिका की सहेली): अरे अंवतिका , मुझे पता है कि तुम अपने बेटे मानव से बहुत प्यार करती हो, लेकिन क्या तुमने कभी नहीं चाहा कि तुम्हारे जीवन में भी कोई ऐसा आदमी हो जो तुम्हें वही सुख दे सके जो मानव के पिता तुम्हें देते हैं?

अंवतिका (शरमाते हुए): ओह, पंखुड़ी , कभी-कभी मुझे आश्चर्य होता है कि उस आदमी के साथ रहना कैसा होगा, जो मुझे वैसा महसूस करा सके जैसा मैं कल्पना करती हूं कि मानव के पिता कराते हैं। लेकिन मैं मानव के बारे में कभी भी उस तरह से नहीं सोच सकी। वह मेरा अनमोल बेटा है, मेरा सब कुछ है।

पंखुड़ी बोली: मैंने तुम्हें बेटे के बारे में नहीं बोली?

अंवतिका (शर्मिंदा महसूस करते हुए): ओह, आपका मतलब पार्टनर की तरह है? ख़ैर, मुझे नहीं पता। मुझे वास्तव में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं मिला जो मुझमें उस तरह रुचि रखता हो। अभिरंजन , मेरे पति, काफी अच्छे हैं, लेकिन हमारे बीच कोई स्पार्क नहीं है।

पंखुड़ी : ठीक है, आप जानते हैं, कभी-कभी चिंगारी अप्रत्याशित स्थानों में पाई जा सकती है। आप कभी नहीं जानते कि कब आपकी मुलाकात किसी ऐसे व्यक्ति से हो जाए जो आपका नज़रिया बदल दे। और कौन जानता है, शायद कोई यहीं इसी पार्क में हो।

तभी मानव आ जाता है वहां पर।

अंवतिका : यह मानव है, मेरा बेटा। मानव, यह पंखुड़ी है, मेरी सबसे करीबी दोस्तों में से एक। (अपनी घबराहट को छिपाने की कोशिश करते हुए ) मानव , तुम थोड़ी देर खेलने क्यों नहीं जाते, जब कि पंखुड़ी और मैं बातें करते हैं?

मानव : मम्मी पापा आपको अभी घर पर बुला रहे हैं

अंवतिका : ओह, हां, बिल्कुल। और घर के लिए निकलती है

( घर पहुंचकर )

अभिरंजन : अंवतिका , अरे, आप विचलित लग रही हैं। क्या सब ठीक है?

अंवतिका (आश्चर्य से अभिरंजन की ओर देखती है ): नहीं, बिल्कुल नहीं। तुम मेरे पति हो, और मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं। लेकिन कभी-कभी, मुझे बस गति में बदलाव की ज़रूरत होती है, मेरा ऐसा मतलब नहीं था। मैं जो महसूस करती हूं उसके प्रति ईमानदार हूं। मैं वादा करती हूं कि मैं हमेशा की तरह हमारे लिए समय निकालूंगी। क्या हम कृपया इस बारे में बाद में बात कर सकते हैं?

अभिरंजन : क्या तुम मुझसे बोर हो गए हो? मैं अपनी नौकरी पर जा रहा हूं

( अभिरंजन के जाने के बाद , पंखुड़ी अंवतिका के घर पर आतीं हैं)

पंखुड़ी : हाय अंवतिका ( घर में )।

अंवतिका पंखुड़ी की आवाज सुन कर उछल पड़ती है, फिर खुद को संभालती है और बोलती है हाय पंखुड़ी ।

पंखुड़ी : मैं बस आपसे कुछ महत्वपूर्ण बात करना चाहती थी। क्या हम कहीं बैठ सकते हैं?

फिर दोनों महिलाएं रसोई की मेज पर बैठ गई, एक-दूसरे को उम्मीद से देख रही थीं। पंखुड़ी : आप थोड़े परेशान लग रही हैं।

अंवतिका : बिल्कुल नहीं ?

पंखुड़ी : मानव , मुझे पसंद करता है |

अंवतिका : क्या ?

पंखुड़ी : हाँ वैसे। वह पार्क में मेरे गांड़ को घूर रहा था और जब भी मैं उससे बात करती हूं तो शरमा जाता है। ये बहुत प्यारा है।

अंवतिका : नहीं, नहीं, नहीं… आप गलत हैं। वह बस एक शर्मीला लड़का है। बस इतना ही।

पंखुड़ी : आपका बेटा मेरी गांड घूरता है।

अंवतिका : पंखुड़ी ! मेरा यह मतलब नहीं था। वह बस… वह तुम्हें पसंद करता है, एक दोस्त के रूप में। वह हमेशा अन्य लड़कियों के साथ भी ऐसा ही रहा है। वह बस एक मिलन सार बच्चा है।

पंखुड़ी : आपको देखना चाहिए कि जब मैं कोई ड्रेस पहनती हूं तो वह मुझे किस तरह देखता है। वह अपनी आंखें मेरी छाती से नहीं हटा सकता। वह निश्चित रूप से रुचि रखता है।

अंवतिका : मुझे नहीं पता… शायद तुम सही हो। मैं उससे इस बारे में बात करूंगी।

पंखुड़ी : इसके लिए शुभकामनाएं। बस सावधान रहो, अंवतिका. मानव केवल 19 वर्ष का है, और वह अभी भी बहुत छोटा और मासूम है।

अंवतिका : मुझे पता है, मुझे पता है। मैं सावधान रहूंगी। इसे मेरे संज्ञान में लाने के लिए धन्यवाद। (पंखुड़ी को गले लगाया)।

मानव : हां मम्मी , हाय पंखुड़ी आंटी।

अंवतिका : मानव ! आप पूरे समय सुन रहे थे?

मानव : क्या मम्मी ?

अंवतिका : कोई बात नहीं। मैं बस आप से पंखुड़ी द्वारा बताई गई किसी बात के बारे में बात करना चाहती थी। वह सोचती है कि आप उसे पसंद करते हैं।

पंखुड़ी (मुस्कुराते हुए): बिल्कुल, मानव । ऐसा लगता है जैसे आप मुझमें रुचि रखते हैं। क्या वह सच है?

मानव : नहीं मम्मी (शर्म के साथ)।

अंवतिका : ठीक है, अगर तुम उसे पसंद करते हो तो कोई बात नहीं। लेकिन आपको सावधान रहना होगा। वह तुमसे उम्र में बड़ी है, और वह तुम्हारी मम्मी की दोस्त है। आप ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहेंगे जिससे उसे असहजता हो या उसकी भावनाओं को ठेस पहुंचे।

पंखुड़ी मानव के लंड को आंखों से छेड़ती है पैंट के ऊपर से।

अंवतिका : मानव , तुम्हें समझना होगा कि पंखुड़ी क्या कह रही है। आप युवा हैं, और आप इन चीज़ों के बारे में नहीं जानते। बस सावधान रहें, ठीक है? और अगर आपको कोई सलाह चाहिए या आप किसी से बात करना चाहते हैं, तो आप हमेशा मेरे या अपने पिता जी के पास आ सकते हैं। हम आपकी मदद करेंगे।

पंखुड़ी : अंवतिका अगर आपका पति आपको खुश नहीं कर पाता तो अपने बेटे के साथ करो (मुस्कुराते हुये)।

अंवतिका (शरमाती हुई): पंखुड़ी , बस इतना ही काफी है। आप अनुपयुक्त हो रहे हैं।

पंखुड़ी : आपको कोशिश करनी चाहिए

अंवतिका (पंखुड़ी को नजरअंदाज करती है, मानव से बात करती रहती है): ठीक है मानव ? मैं जो कह रही हूं वह तुम समझ रहे हो? आपको सावधान रहना चाहिए, और अगर आपको किसी चीज़ की ज़रूरत है, तो हमें बताएं, ठीक है?

पंखुड़ी : मैं मानव को तुम्हारे लिए सेक्स के लिए मना सकती हूं।

अंवतिका (गुस्से में): पंखुड़ी , बस बहुत हो गया! आप यहां मदद नहीं कर रहे हैं। ऐसी बातें कहना बंद करो। वह नहीं जानता कि हम किस बारे में बात कर रहे है।

पंखुड़ी : मैं जा रही हूं, और सेक्स के लिए अपने शब्दों पर ध्यान से सोचूंगी।

अंवतिका : ठीक है, पंखुड़ी । बस जाओ। मानव ‌, मेरे साथ आओ। मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि आप जाएं और कुछ और करें।

( रात को… )

अंवतिका : खाना खा लो।

मानव : ठीक है मम्मी ।

अभिरंजन : मैं डिनर के साथ तैयार हूं।

अंवतिका : चलो फिर खाना खाते हैं। चलो, मानव । मानव को खाने की मेज पर ले गयी

अभिरंजन वह अंवतिका के कान में फुसफुसाता है : हमें रात में सेक्स करना चाहिए?

अंवतिका शरमाते हुए : ठीक है , आज रात आप अपने कमरे में सो सकते हैं। हम देखेंगे बाद में क्या होता है फिलहाल रात्रिभोज का आनंद लें।


( तीनों बिस्तर पर हैं, और सो रहे हैं। )

अंवतिका : आज का भोजन अच्छा था। मुझे लगता है ( मानव की ओर देखा कर ) तुम्हें भी थोड़ा आराम करना चाहिए, ठीक है? (उसके बगल वाले बिस्तर को थपथपाएं) तुम चाहो तो यहां सो सकते हैं।

मानव : मैं तुम्हारे साथ सोऊंगा मम्मी ।

अंवतिका (गर्मजोशी से मुस्कुराई, और बिस्तर को फिर से थपथपाया): ठीक है, फिर। गहरी नींद सो जाओ । (मानव को माथे पर चूमा) और याद रखना, अगर तुम्हें किसी भी चीज़ की ज़रूरत हो, तो बस मुझे बुला लेना, ठीक है? मैं यहीं हुं ‌।

अभिरंजन : चलो सेक्स करते हैं

अंवतिका (शरमाते हुए): अभिरंजन , मैं यहीं हूं। चलिए अभी उस बारे में बात नहीं करते। मानव सो रहा है।

अंवतिका : ठीक है शुभ रात्रि।

अंवतिका : शुभ रात्रि, लाइट बंद कर देती है और मानव के करीब आ जाती है। आरामदायक और सुरक्षात्मक महसूस करती है अच्छी नींद सोएं, जानेमन। तुम्हारे पिता जी और मैं तुमसे बहुत प्यार करते हैं।

( सुबह में… )

मानव का लंड खड़ा होता है और नींद में यह अंडरवियर में दिखाई देता है।

अंवतिका उठती है और अंडरवियर में मानव के लंड को खड़ा देखती है : ओह, मानव । तुम बहुत तेजी से बड़े हो रहे हो, मुस्कुराएं और उसका माथा चूमें आप कुछ आरामदायक कपड़े पहन सकते हैं और फिर नाश्ते के लिए नीचे आ सकते हैं।

मगर , मानव अभी भी सो रहा था।

अंवतिका मानव को धीरे से हिला कर जगाया : उठने का समय हो गया है। तुम्हारे पिता जी पहले ही उठ चुके हैं, और नाश्ता बना रहे हैं। हम उसे इंतज़ार नहीं कराना चाहते, है ना? मानव को देख कर गर्मजोशी से मुस्कुरायी ।

अंवतिका को पंखुड़ी की सेक्स वाली बातें याद आने लगीं। तभी अचानक मानव के लंड से वीर्य निकलने लगता है और चादर गंदी हो जाती है।

मानव : मम्मी , मेरे अंदर से क्या निकला?


अंवतिका : इसमें डरने की कोई बात नहीं है, यह मनुष्य बनने का एक हिस्सा है। तुम अब भी मेरे बेटे हो, और मैं तुम्हें हमेशा प्यार करती रहूंगी। और अंवतिका उसके 7 इंच के लंड को देख रही थी।

अभिरंजन : अंवतिका , तुम नाश्ता नहीं करोगे क्या ?

अंवतिका (अभिरंजन की आवाज़ सुन कर चौंक गई): मैं बस मानव की कुछ मदद कर रही हूं। मैं अभी आती हूं ।

( अंवतिका और अभिरंजन , मानव ने अब एक साथ नाश्ता किया, और उसके बाद अभिरंजन अपनी नौकरी पर और मानव कॉलेज चला गया )

तभी अंवतिका पंखुड़ी के पास जाती है।


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घर की दरवाजे की घंटी बजी , मैंने दरवाजा खोला उस औरत की ओर देखा, वो जीन्स शर्ट में थी. उसकी बड़ी चुचियां शर्ट से आधी बाहर दिख रही थीं. मैंने उनकी चूचियों को देखा और नमस्ते आंटी कहा. तभी अंवतिका ने कहा : मेरा चेहरा उपर है

वह अन्दर आ गईं और बैठ गईं. मेरी मम्मी बोलीं- बेटा, आज ये मेरे साथ ही रुकेंगी. मैं ओके बोल कर लेटने चला गया.

कुछ देर बाद मैं बाथरूम करने के लिए नीचे उतरा, तो मम्मी और उनकी सहेली की कुछ आवाजें आ रही थीं.

मैंने नीचे सोफे पर देखा, तो मम्मी और आंटी बात कर रही थीं. मैं चुपके से पास जाकर देखने लगा.

आंटी बोलीं- यार पंखुड़ी … आज मेरा मन चुदवाने को हो रहा है.
मम्मी बोलीं- हां यार मन तो मेरा भी है … पर किससे चुदवा लिया जाए?

आंटी ने मम्मी की नाइटी में हाथ डाल दिया और उनकी चुचियों को मसलने लगीं.

मम्मी- आआह अंवतिका … क्या कर रही हो?
आंटी बोलीं- आज तुम मुझे अपने दूध पिला दो.
मम्मी ने नाइटी खोल कर अपनी एक चूची को आंटी के मुँह में दे दिया.

आंटी मेरी मम्मी के बड़े निप्पल को काटने लगीं.
मम्मी- आआह उईई अंवतिका आराम से कर न … लगती है आह..

मैं ठगा सा खड़ा ये सब देखने लगा. कुछ देर बाद मम्मी भी आंटी की शर्ट को उतारने लगीं. वो आंटी के मम्मों को मसलने लगीं.

मम्मी - आआह हां अंवतिका पी ले मेरे दूध को … आआह … बड़ा मजा आ रहा है. वो दोनों वासना में एक दूसरे को चूमने में लगी थीं.

फिर आंटी ने मम्मी की नाइटी को पूरा उतार कर उनको नंगी कर दिया. मेरी मम्मी की चूत में आंटी अपनी उंगली करने लगीं.

मम्मी- आआह … उईईए. … अंवतिका आराम से … आआह मर जाऊंगी आआह …

आंटी मम्मी को होंठों से होंठों पर किस करने लगीं. आंटी ने मम्मी के मुँह में अपने थूक को डाल दिया. मम्मी उसको पी गईं.

मम्मी शायद ‘आआह..’ करके झड़ने लगीं.
आंटी बोलीं- पंखुड़ी अब तू मेरी चुत को चाट.

मम्मी ने आंटी की चूत में अपने मुँह को लगा दिया.

आंटी- आआह. … ऊऊऊ … चाटो … आआह … पंखुड़ी … बड़ा मजा आ रहा है.

कुछ ही देर में आंटी हांफते हुए झड़ गईं.
फिर मम्मी बाथरूम की ओर आने लगीं, तो मैं वहां से निकल गया.

थोड़ी देर बाद फिर मैं निचे आया , तो आंटी जा चुकी थीं.


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उस दिन घर पर कोई नहीं था नयन भी किसी काम से बाहर गया था , सुबह के 10 बज रहे थे और मैं नहा कर निकली ही थी कि तभी मानव मिलने आया जो कॉलेज ड्रेस में था

मैंने नहा कर अपनी मैक्सी पहनी, अंदर कुछ नहीं पहना। मैंने उसको बैठाया, चाय-नाश्ता कराया।

ऐसे ही मानव से बातें करने लगी। मानव ने बताया कि वह एक घंटे बाद वापस चला जाएगा।
उसने मुझसे कहा- पंखुड़ी आंटी , आप अच्छी लग रही हो!

वो मुझे कामुक नज़रों से देखने लगा, वो मेरे चूचियों को घूर रहा था। मैंने ब्रा नहीं पहनी थी और मैक्सी भी टाइट थी गहरे गले की! शायद इसलिए उसको मेरे उरोज दिख रहे होंगे।

यह सब सोच कर मेरी अन्तर्वासना जागृत होने लगी तो अनायास ही मेरी निगाह उसकी पैंट पर उसके लंड के उठान पर चली गई। टाइट पैंट में उसका खड़ा लंड साफ़ दिख रहा था। मैं समझ गई कि मानव क्या चाहता है।


मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मुझे क्या करना चाहिए।

तभी मैं कुछ काम से अन्दर जाने के लिए खड़ी हुई तो मानव बोला- आंटी, मैं आपसे गले तो मिला ही नहीं!

और वो मेरे पास आ गया। मैं कुछ समझ पाती उससे पहले ही उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मेरे गले पर अपने होंठ रख दिए। उसने मेरी कमर को पीछे से पकड़ लिया और हाथ कसने लगा।

कुछ देर के लिए तो मैं सब भूल गई और उसकी बाहों में खो गई। फिर वो मेरी कमर पर हाथ से सहलाते हुए मेरे कूल्हों पर हाथ ले आया। मैं उससे अलग हुई पर उसने हाथ वहाँ से नहीं हटाए और बोला- पंखुड़ी आंटी , आप नहीं जानती कि मुझे आपकी कितनी याद आती है। आपका चेहरा हर वक्त मेरी आँखों के सामने घूमता रहता है।

मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था, मैंने उससे कहा- तुम यहीं बैठो, मैं अभी आती हूँ!

और मैं बेडरूम में चली गई। मैंने सोचा मुझे मानव के सामने ऐसे बिना ब्रा-पैंटी के नहीं जाना चाहिए था पर मुझे उसकी बातें सुन कर अच्छा लगा था।

मैंने सोचा कि मुझे ब्रा-पैंटी पहन लेनी चाहिए तो मैं बेडरूम में आई और मैक्सी उतार दी।

इस वक्त मैं नंगी खड़ी थी। मैंने पहले ब्रा ली और पहन ली और जैसे ही मैंने पैंटी को अपनी एक टाँग में डाला, मानव ने मुझे पीछे से पकड़ लिया, उसके हाथ मेरे चुच्चों पर थे और वो उनको ब्रा के ऊपर से ही दबा रहा था। अभी मैं समझ ही नहीं पाई थी कि क्या हुआ है कि मुझे मानव ने पीछे से गर्दन पर चूमना शुरू कर दिया।

पैंटी मेरी एक जाँघ में ही रह गई।


मानव ने मुझे बिस्तर पर गिरा दिया और मेरे ऊपर आ गया और अपने लब मेरे होंठों पर रख कर चूसने लगा।

उसने मेरे हाथ पकड़ लिए जिससे मैं कुछ नहीं कर पाई। मैं अब समझ गई कि वो मुझसे चोद करके ही मानेगा।

कुछ देर तो मैंने उसका विरोध करने की कोशिश की पर वो मुझे किस करता रहा। अब मैंने भी उसको चूमना सुरू कर दिया, कहीं ना कहीं मेरा जिस्म भी अपनी प्यास बुझाना चाहता था। अब वो मेरी छाती पर छा गया और उसने दोनों चूचियों को ब्रा से निकाल लिया और चूमने और दबाने लगा। वो पागलों की तरह मेरे चूची चाटने और चूमने लगा जैसे उस पर शैतान सवार हो! और अपने लबों से मेरे निप्पल दबाने और चूसने लगा। वो एक निप्पल को मुँह से चूसता और फिर जल्दी से दूसरे निप्पल को चूसता और खींचता।

वो मेरे चूची को अपने हाथों से दबाने में कोई कसर नहीं रहने दे रहा था।

इस तरह कुछ देर में मैं गर्म होने से ढीली पड़ गई। कुछ देर बाद उसने मेरे हाथ छोड़ दिए और अपने हाथ से मेरे चूची दबाते हुए चूसने लगा। फिर मैंने अपने आप उसके मुँह को अपने चूची पर दबा दिया और उससे कहा- और जम के चूस!

मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मैं ऐसा बोल रही हूँ।


फिर उसने कुछ देर बाद मेरे चूची छोड़ दिए और मुझे किस करने लगा और मैं भी उसके बोसे लेने लगी। आज मेरी सेक्स की प्यास मुझसे ये सब करवा रही थी।

उसको चूमते हुए मैंने उसके लंड को उसकी पैंट के ऊपर से ही दबाना शुरू कर दिया। उसका लंड जानदार और मोटा मालूम पड़ रहा था।

फिर मानव खड़ा हुआ और मैं उसकी शर्ट उतारने लगी, मानव ने इस बीच अपनी पैंट उतार दी। मैंने देखा उसका लंड अंडरवीयर में पूरा तना हुआ था और बाहर निकलने को बेताब था। तो मैंने बेसबरी से उसका अंडरवीयर नीचे सरका दिया।

ऐसा करते ही उसका लंड उछल कर बाहर आ गया। उसका लंड काफ़ी बड़ा और मोटा था जिसको देख कर मुझे उसको चूसने का मन हुआ तो मैंने उसके लंड को पकड़ कर बेड के साइड में बैठ गई। मैंने उसकी चमड़ी को पीछे किया और उसका गुलाबी सुपारा चमकने लगा। उसका सुपारा बड़ा और खूबसूरत था स्ट्राबेरी जैसे चूसने के लिए ही बना हो!

मैं उसके सुपारे को हाथ से सहलाने लगी तो मानव बोला- आंटी , जल्दी चूसिए!
मैंने उससे कहा- तुझे बहुत जल्दी है ना?
और उसके सुपारे में अपने नाखून गड़ा दिए। वो आ…अहह…. करके चिल्लाया तो मैंने उसका सुपारा अपने मुँह में रख लिया और चूसने लगी।
इतना कोमल और मज़बूत लंड आज मुझे सालों बाद मिला था तो मैं उसको चूसती रही।

मानव आँखें बन्द करके आहह… कर रहा था, मैं उसके लटके हुए अंडकोष को हाथ से सहलाने और दबाने लगी। फिर मैंने अंडकोष को भी मुँह में लेकर खूब चूसा।
मानव ये सब सह नहीं पा रहा था और आ… आयई… ऊहह… कर रहा था।
अब उसका लंड तैयार हो गया था तो मैंने उससे कहा- चल लेट जा और मेरी फ़ुद्दी चाट!

वो लेट गया और मैं उसके मुँह पर जाकर टट्टी करने की हालत में बैठ गई। उसका चेहरा मेरी जांघों के बीच में दबा हुआ था और वो मेरी चूत को नीचे घुस कर चाट रहा था। मैं उसका लौड़ा चूसने लगी।

वो मेरी भगन के ऊपरी हिस्से को उंगली से रगड़ रहा था जिससे मुझे और मज़ा आने लगा। उसके चाटने से मेरे बदन में एक गज़ब की लहर उठी, मैं खुद को सम्भाल नहीं पाई और उसके लंड को मुँह में लिए हुए अपनी मंजिल पर पहुंच कर ढह गई। मगर ना मैंने मानव के लौड़े को मुंह से निकाला ना उसने मेरी फ़ुद्दी को छोड़ा।

उसके कुछ देर बाद मेरा पेशाब निकल गया पर मानव ने अपना मुँह नहीं हटाया और चूसता रहा। वो मुझसे बोला- वाओ.. पंखुड़ी आंटी ! आप तो कमाल की हो!

देखते ही देखते मेरा पेशाब कुछ उसके हलक से उतर गया और कुछ ने उसके चेहरे की धुलाई कर दी।

फिर मैं उसके चेहरे से उठ कर बिस्तर पर बैठ गई।
मानव मुझसे पूछने लगा- क्या हुआ? आप हट क्यों गई?
पहले तो मैं कुछ नहीं बोली फ़िर मैंने मानव से कहा- सॉरी! मेरा पेशाब निकल गया।
उसने कहा- नहीं आंटी , यह तो बहुत मज़ेदार था। आपके जिस्म से निकली हर चीज अमृत है! आई लव यू आंटी !

इतना बोल कर वो बारी बारी मेरे दोनों निप्पल चूसने लगा।

मानव मेरे पीछे गया और मेरे चूतड़ दबाते हुए बोला- वाह आंटी , आपके हिप्स कितने बड़े और सॉफ्ट हैं! मैं इनको चूम लूँ?
मैंने कहा- जो तुम चाहो वो करो!

वो बेड पर बैठ गया और मैं उसकी तरफ चूतड़ करके घोड़ी बन कर खड़ी हो गई। उसने मेरे कूल्हों को चूमा और फ़िर चाटने लगा।

वो मेरे चूतड़ों को पूरा दबा रहा था और उन पर थप्पड़ भी मार रहा था जिस से ठप्प्प… जैसी आवाज़ आ रही थी।

वो बहुत देर तक उनके साथ खेलता रहा। बीच बीच में वो मेरी जांघों को भी मसल रहा था।

फिर उसने मेरे चूतड़ों को दोनों हाथों से खोला और मेरी गाण्ड के छेद पर अपनी जीभ रख दी और उसको भी चाटने लगा।

मुझे तो यकीन नहीं हो रहा था कि कोई उस गाण्ड के छेद को चाट भी सकता है जहाँ से टट्टी निकलती है क्योंकि मैं दसियों मर्दों से चुद चुकी थी, कईयों से गान्ड मरवा चुकी थी, बहुत सारे लण्ड मैं अपने तीनों छेदों में ले चुकी थी, पर किसी ने मेरी गाण्ड को ऐसे नहीं चाटा था।

मैंने अपने बदन को ढील्ल छोड़ दिया जिससे मेरे चूतड़ और चौड़े हो गए और अब उसकी जीभ काफ़ी अन्दर तक जाने लगी।

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, यह मेरे 17-18 साल के सेक्स जीवन में लाजवाब तजुर्बा था, मज़ा था।

अब मैं घूमी और उसके लंड के ऊपर अपनी चूत ले गई और उसको पकड़ कर अपनी क्लिट पर रगड़ने लगी। कुछ देर बाद मैं उसके लंड पर बैठ गई। जैसे ही उसका लंड मेरी फ़ुद्दी में घुसा, मानव ने मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया।

मैं उसको चूमने लगी और अपने चूतड़ों को हिलाने लगी जिससे मानव आहह..माँ.. वाउ.. आंटी जोर से करो! बोलने लगा।


मेरी चूचियाँ उसकी छाती पर दबी हुई थी। कुछ देर तक ऐसा करने से मुझे मज़ा आया।

फिर मैंने अपनी स्पीड बढ़ाई और उसके लंड पर कूदने लगी। मुझे सेक्स में लंड पर कूदा कूदी करने में बहुत मज़ा आता है।
मानव बोला- आअहह… आंटी जी, हाँ ऐसे ही करिए!
मेरे बड़े बड़े चूची हवा में झूल रहे थे और मानव आँखें बन्द करके आहह… अह … कर रहा था।

फिर मैं थक गई तो उसके ऊपर लेट गई। उसने मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया और मेरी फ़ुद्दी में नीचे से धक्के मारन चालू कर दिए। उसका लंड बहुत तेज़ी से अंदर-बाहर होने लगा, वो मेरी चूत में इतनी तेज़ लंड चला रहा था कि मेरे दोनों कूल्हे हिलने लगे।

वो बहुत अच्छी चुदाई कर रहा था मेरी जिससे मुझे पूरा मज़ा मिल रहा था।

कुछ देर तक ऐसे चोदने के बाद उसने मुझे घुमा दिया और मेरे ऊपर आ गया जिससे हम मिशनरी पोज़िशन में आ गये। वो मेरी चूत में धक्के मारता रहा, साथ साथ वो मेरे चूची को भी चूस रहा था। मेरी चूत काफ़ी पानी छोड़ रही थी तो लण्ड फ़िसल फ़िसल कर चूत में अन्दर बाहर आ जा रहा था, उससे चुदाई में और भी मज़ा आने लगा।

मैं अपना एक हाथ अपनी भगनासा पर ले गई तो मानव के झटकों से मेरे दाने पर अपने आप ही रगड़ा लगने लगा, जिससे मुझे और ज़्यादा मज़ा आने लगा।

फिर मैंने अपनी टाँगें उसकी कमर पर क्रॉस करके कस ली और कुछ देर तक हम ऐसा ही करते रहे। फ़िर मानव की स्पीड कम होने लगी और वो धीमे हो गया तो मैंने उसका लंड अपनी चूत से निकाला। उसके लंड पर काफ़ी झाग़ जैसा लगा था, मैंने उसे पकड़ कर खींचा, उसके लंड को अपने मुँह में रख लिया और चूसने लगी। उसका लंड काफ़ी गर्म हो गया था।

कुछ देर चूसने के बाद उसने मैंने उसका लंड छोड़ा तो उसने मुझे घोड़ी बनने को कहा। मैंने वैसा ही किया और उसने झुक कर मेरी चूत में पीछे से मुँह लगा दिया और मेरी गीली पानी छोड़ रही फ़ुद्दी को पीछे से चाटने लगा, मेरी चूत में जो भी रस था वो उसको चाट रहा था, उसकी जीभ मेरी चूत में गुदगुदी कर रही थी जिससे मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, मेरे मुँह से हल्की आहह….उउफ..फफ्फ़…. करते रहो…. आहह.. की आवाज़ें निकल रही थी।

मानव मुझसे कह रहा था- आहह…. पंखुड़ी आंटी , आप कमाल की हो।

10 मिनट तक चाटने के बाद उसने अपना लंड मेरी चूत में बड़े आराम से डाल दिया और बड़े आराम से मेरे कूल्हों को हाथों से सहलाते हुए अपना लंड अंदर बाहर करने लगा।

उसने लगातार एक जैसी स्पीड से काफ़ी देर धक्के लगाए जिससे मैं परम आनन्द की तरफ बढ़ने लगी और कुछ ही देर में मेरी योनि ने पानी छोड़ दिया और मैं ज़ोर से आहह…. करते हुए ढीली हो गई।

पर उसने मेरी कमर पकड़े रखी और अब उसने ज़ोर-जोर से झटके मारने शुरु किए, उसका लंड मेरे पानी में फिसलने लगा जिससे पच…पच…की आवाज़ आने लगी।

मुझे बहुत सालों बाद इतना आनन्द मिला होगा। मैं चरमोत्कर्ष के नशे में डूब गई थी और एकदम ढीली पड़ गई पर मानव मेरी कमर को पकड़ के झटके मारता रहा..

पाँच मिनट बाद उसने मेरे पेट को कस कर पकड़ लिया ( मैं समझ गई वह झड़ने वाला है ) मैंने तुरंत उसके लंड को चुत से बाहर निकाला और वह आअहह… अम्म.. आंटी… चिल्लाते हुए उसके लंड की पिचकारी निकल पड़ी जिससे बहुत सारा वीर्य निकला ।

वो ऐसा करते ही मुझे लेकर बिस्तर पर गिर गया और मेरे बगल में लेट गया। हम दोनों की सांस बहुत तेज़ चल रही थी, उसने मुझसे कहा- थैंकयू पंखुड़ी आंटी जी! आज आपने मुझे बहुत मज़ा दिया। उसका लंड मेरी जाँघों में ही पड़ा रहा और छोटा हो गया

कुछ देर बाद मैं उठी और अपनी सफ़ाई करने वाशरूम चली गई।जब मैं लौट कर आई तो मानव मेरे दोनों चूतड़ों पर थप्पड़ मारता है
उसने दोबारा आने का वादा किया और मुझसे गले लग कर लिपट गया। उसने अपने कपड़े पहने और अपने कॉलेज चला गया ।
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जैसा की आपको पता है की एक दिन मैं , पंखुड़ी आंटी के घर पर गया था और हम दोनों के बीच जोरदार चुदाई हुई थी। पता नहीं कहां से नयन भैया कैसे विडियो बना लिये , नयन भैया विडियो दिखाकर मुझे ब्लैकमेल कर रहे है और कहते वह मेरी मम्मी अंवतिका को मेरे सामने चोदना चाहते हैं। वह बार बार कह रहे थे कि अपनी मम्मी को अपने सामने मुझसे चुदवाओ। मगर मैं ऐसा नहीं करूंगा तो वह विडियो मेरे पापा अभिरंजन को दिखा देगा। जब भी मैं कॉलेज आता या जाता तब तब वह मुझे धमकाते।

“नहीं , ऐसा मत करो। प्लीज, मुझसे गलती हो गई। आज के बाद ऐसा दोबारा नहीं होगा,” मैंने मिन्नतें की वह माने पर वह तैयार ही नहीं थे


आई आगे में आपको बताता हुं यह काम मैंने कैसे किया:-

शनिवार का दिन था मेरे कॉलेज में छुट्टी था मगर पापा आफिस गए हुए थे मम्मी किचन में काम कर रही थी मैं बहुत हिम्मत जुटा कर किचन पहुंचा। मैंने मम्मी से कहा - मम्मी , एक बार मेरे सामने नयन भैया तुम्हारे ऊपर चढ़ना चाहते है। चुदवा लो न?

तभी मम्मी ने मुझे एक जोरदार चमाट मारा और जोर से चिल्लाकर कहा " मानव " ये क्या कह रहा है तू ?” मेरी नज़रों से दुर हो जा " में भागता हुआ रूम में पहुंचा और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया।

इस तरह दो दिन बीत गया। एक शाम मम्मी ने दरवाजा खटखटाया और खोलने को कहा मैंने दरवाजा खोला तो मम्मी मेरे सामने थी वह रूम के अंदर आके दरवाजा लगाया और मैं सीधा उनके पैरों में गिर गया और रोते हुए माफी माँगने लगा।

मैं: मम्मी, सॉरी, माफ कर दो, गलती हो गई।

मम्मी : मानव , खड़े हो।

मैं: मम्मी, सॉरी।

मम्मी : मानव , खड़े हो, मैं नाराज़ नहीं हूँ, खड़े हो।

मैं: क्या? और मेरे बगल में बैठी । और मूझसे पूछे की तुमने मुझे ऐसा क्यों कहा तो मैंने उस सारी बात बताई तो वो कुछ नहीं बोली और चुपचाप मेरी बातें सुन रही थी जब मैंने उसे सारी बात बताई ।

तब मम्मी बोली- तुम भी क्या मुझे नयन से चुदते हुए देखना चाहते हो?

तब मैं बोला- मजबूर हैं मम्मी करना पड़ेगा।

तो मम्मी ने हाँ कर दी.

मैं बाहर आकर नयन भैया को मम्मी के फोन से फोनकर बता दिया कि मम्मी मान गयी है

अगली सुबह मैं पापा के आफिस जाने का इंतजार कर रहा था कि कब वो घर से आफिस के लिए जाए , उसके बाद मम्मी को चुदवा लूंगा।

जब पापा आफिस गए तब नयन भैया को मैंने फोन करके घर बुलाया। और यह बात मैंने मम्मी को बता दी थी।

मम्मी अपने रूम में थीं; मम्मी से मैंने कहा- थोड़ा सज-संवर लो दुल्हन की तरह … जब नयन भैया देखे तो तुम्हारे ऊपर टूट पड़े।

तो मम्मी सज-संवर कर बैठी। नयन भैया को मैं उसी रूम में ले गया।

मैंने इशारा किया तो फिर नयन भैया मम्मी के ऊपर चढ़ गया और मम्मी के प्यारे होंठों को चूसने लगा।
तब मैंने नयन भैया से कहा- आराम आराम से कर ये।


नयन भैया ने कहा- हां, क्यों नहीं ।

नयन भैया बोले - चल , जल्दी से अपने कपड़े निकाल। आज तेरी जवानी का रस पीना है।

मैं बगल में कुर्सी पर बैठ गया और मम्मी ने पूरे कपड़े निकाल दिए।
फिर नयन भैया मम्मी की चूचियों को आटे की तरह गूँथने लगे।

मम्मी अपनी चूचियों की मालिश बड़े आराम से करवा रही थी।

फिर नयन भैया ने मम्मी की टाँगों को फैलाकर अपना मोटा लन्ड मम्मी की चूत में एकाएक डाल दिया जिससे मम्मी की चीख निकल गई। ये चीख सुनकर नयन भैया जोश में आकर मम्मी को दनादन चोदने लगा।

मैं सामने बैठा देख रहा था. जब नयन भैया का मोटा लन्ड मेरी मम्मी भी झेल नहीं पा रही थी तो लगातार मुंह से चीखें निकाल रही थी। कुछ मिनट बाद मम्मी भी एकदम शांत होकर चुदाई का मजा लेने लगी।

नयन भैया मस्ती में मम्मी को पेल रहा था।
तब नयन भैया बोला- आंटी, मजा आ रहा है न? मम्मी ने भी सिर हां मैं हिला दिया।

उसके कुछ देर तक नयन भैया ने मम्मी को मस्त पेला और चोद चोदकर अपना माल मम्मी की चूत में ही गिरा दिया। फिर वह अपना मोटा लन्ड निकाल कर वो मम्मी के ऊपर ही लेट गया।

मेरी मम्मी की गदराई जवानी का मजा लेकर कुछ देर लेटा रहने के बाद वो कपड़े पहनकर चला गया। जाने से पहले नयन भैया ने मम्मी के होंठों को चूसकर और चूचियां मसलकर गया।

मम्मी नंगी ही बेड पर पड़ी थी उनकी चूत से अभी भी रस और नयन भैया के लंड का वीर्य मिलकर बाहर निकल रहा था। उनकी चूत की ये हालत देखकर मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था।
मैं भी मम्मी की चुदाई करना चाह रहा था।

मैंने उनकी चूत को पौंछा । उनकी वो मोटी गांड मेरे सामने थी। मैंने ना आओ देखा ना ताओ, सीधा एक चांटा कसकर मम्मी की गांड पर रख दिया। और दोस्तों, वो चांटा बहुत ज़ोर का था। बहुत ज़ोर से आवाज़ आई थी। और मम्मी भी एकदम से उछल पड़ी थीं। मेरे हाथ में भी दर्द हो रहा था।

तब मम्मी बोली- पागल है तू, ये क्या बदतमीज़ी है ? तू भी अभी चोदेगा क्या? तेरी उम्र नहीं है ये सब करने की।

मैं: मम्मी, अब सब्र नहीं होता, मैं आपको चोदना चाहता हूँ । तुम्हारी चूत की ये हालत देखकर मेरा लंड पागल हो चुका है मगर मैं पहले तुम्हारी गांड चुदाई करूंगा। तब आपकी चूत में अपना लंड पेलना चाहता हूँ । मैं तो आपके ये बड़े-बड़े चूची चूसना चाहता हूँ ।

वो बोली- ठीक है, जैसे मर्जी कर ले।

उसके बाद मैंने मम्मी को पलटा कर पेट के बल लिटा दिया और उसकी गांड में लंड को लगा दिया।

मैंने धीरे धीरे गांड में लंड अंदर डाल दिया और मम्मी की गांड को चोदने लगा। वो आराम से मेरे लंड से चुदने लगी।

मुझे मम्मी की गांड चुदाई में गजब का मजा आ रहा था। मम्मी भी आह्ह आह्ह … करते हुए मस्त चुदवा रही थी। उनकी चूचियां पूरी आगे पीछे हिल रही थीं।

कुछ देर तक मम्मी की गांड चोदने के बाद मेरा माल उनकी गांड में ही निकल गया। उसके बाद मैं बाहर चला गया । मैं बाहर मार्केट में चला गया। रात में ही मैं घर पहुंचा। मैंने देखा कि मम्मी बर्तन साफ कर रही थीं। मैं अपने रूम में चला गया।

कुछ समय बाद मम्मी खाना लेकर आईं और मैं खाना खाकर आराम करने लगा । थके होने के कारण कब नींद आ गयी मुझे पता नहीं चला।

अगली सुबह पापा के आफिस जाने के बाद मैंने और मम्मी ने 2-3 घंटे और जमकर चुदाई की और फिर हम दोनों बिस्तर पर ही लेट गए।

मम्मी : वैसे एक बात बता, तूने पंखुड़ी को भी इतना ही चोदा था? वैसे तुझे मुझमें और पंखुड़ी में कौन ज़्यादा पसंद है?


मैं: आप दोनों ही, दोनों में कुछ मुकाबला ही नहीं है। इसलिए मुझे आप दोनों को एक बार एक साथ चोदना है। कल पंखुड़ी आंटी को बुला लो।

मम्मी : एक साथ? तू हम दोनों को एक साथ झेल लेगा?

मैं: आप दोनों मुझे एक साथ झेलोगे।

मम्मी : हाँ, वो भी है। चल, ठीक है, कल बुलाती हूँ उसे कोई बाहना करके।

उसके बाद हम दोनों मेरे ही बिस्तर में नंगे ही सो गए। शाम को मैं उठा तो मम्मी बिस्तर में नहीं थीं। मैंने उन्हें पूरे घर में ढूँढा, लेकिन वो कहीं नहीं थीं। मुझे लगा शायद मार्केट गई होंगी। शाम को वह मार्केट से आई।

अगली सुबह...... पापा के आफिस जाने के बाद

मैं किचन में मम्मी की मदद कर रहा था खाना बनाने में। मम्मी पूरे किचन में मटक रही थीं और उस चक्कर में उनकी गांड भी… मैंने उनकी गांड की तरफ देखा और मेरा लंड खड़ा हो गया। मम्मी जैसे ही मेरे पास आके खड़ी हुईं, मैंने अपना हाथ उनकी गांड पर रख दिया।

मम्मी : नहीं, नहीं, सोचना भी मत। वैसे भी, कल रात की गांड माराई के बाद से मुझे बहुत दर्द हो रहा है और चलने में भी दिक्कत हो रही है।

मैं: अच्छा, तभी आप ऐसे चल रही हो। कोई ना, एक बार और चुदाई कर लेते हैं ना?

मम्मी : नहीं…

तभी डोरबेल बजी और मैं जाकर गेट खोलता हूँ। पंखुड़ी आंटी आ गई थीं। मैंने उन्हें अंदर लिया और गेट बंद करके सीधा उनकी गांड पर चांटा मारा, जिससे वो एकदम से उछल पड़ीं। वह अपनी गांड़ सहलाते हुए किचन पहुंची

मम्मी : क्या हुआ?

पंखुड़ी : कुछ नहीं ।

मम्मी : चलो, मेरे कमरे में।

उसके बाद हम तीनों मम्मी के कमरे में गए और जाते ही मम्मी ने मुझे बिस्तर पर धक्का दे दिया और मेरी पैंट खोलने लगीं।

तभी पंखुड़ी आंटी बोली : यह क्या कर रहीं हैं ।

मम्मी बोली : वहीं जो तुम ने अपने घर में किया था।

मेरा लंड निकालकर मम्मी उसे चूसने लगीं। यह देखकर आंटी भी शामिल हो गई । वो दोनों इतने बढ़िया तरीके से मेरा लंड चूस रही थीं कि मुझे परम सुख मिल रहा था। थोड़ी देर की लंड चूसाई के बाद ही मैं झड़ गया और मेरा सारा वीर्य उन दोनों के मुँह पर था।

मम्मी और पंखुड़ी आंटी ने एक-दूसरे का मुँह चाटना शुरू किया और चाटते-चाटते मेरा पूरा वीर्य वो दोनों पी गईं। फिर मैंने अपने सारे कपड़े खोल दिए और पूरा नंगा हो गया। उन दोनों ने भी अपने कपड़े खोलना शुरू कर दिया। मम्मी ने सलवार-सूट पहना था और पंखुड़ी आंटी ने साड़ी। थोड़ी ही देर में वो दोनों भी नंगी हो गईं।

और दोस्तों, क्या बताऊँ आपको, उस समय मेरे सामने का क्या सीन था। दोनों हुस्न की परी लग रही थीं और एक तो दोनों का एक जैसा फिगर। मेरा लंड पूरा तन गया था। मैंने उन दोनों को बेड पर लिटाया और पहले पंखुड़ी आंटी की चूत चाटी, फिर मम्मी की। ऐसे ही थोड़ी देर तक मैंने दोनों की चूत चाटी। फिर मैंने मेरा लंड मम्मी की चूत पर सटाया, लेकिन मम्मी ने मुझे रोक दिया।

मैंने सीधा पंखुड़ी आंटी की तरफ देखा और बिना किसी इंतज़ार के उनकी चूत में लंड डाल दिया और उनकी चुदाई करने लगा।

मैं इधर पंखुड़ी आंटी को चोद रहा था, उधर मम्मी अपनी चूत में उंगली कर रही थीं। फिर वो खड़ी हुईं और आके पंखुड़ी आंटी के मुँह पर बैठ गईं। अब इधर मैं पंखुड़ी आंटी की चूत चोद रहा हूँ, उधर मम्मी पंखुड़ी आंटी से अपनी चूत चटवा रही हैं। मैंने भी मम्मी को किस कर दिया। एक ही समय में हम तीनों एक-दूसरे के साथ कुछ न कुछ कर ही रहे थे। करीब 15 मिनट पंखुड़ी आंटी की चुदाई करने के बाद मैं उनकी चूत में झड़ गया।

मम्मी : मैंने रुकने को बोला? चोदता रह। एक काम, अब इसकी गांड मार।

ये सुनके पंखुड़ी आंटी के रोंगटे खड़े हो गए, क्योंकि उन्हें भी पता था कि मेरा मोटा लंड अगर उनकी गांड में गया, तो वो उसे फाड़ देगा। मैंने पंखुड़ी आंटी को घोड़ी बनाया। वो मना करती रहीं, लेकिन मैंने नहीं सुनी और मेरा लंड उनकी गांड में डालना शुरू कर दिया।

पंखुड़ी आंटी की चीखें भी निकलने लगीं। जैसे ही मेरा लंड उनकी गांड में घुस गया, मैंने उनकी गांड मारनी शुरू कर दी। मुझे तो मज़ा आ रहा था, लेकिन पंखुड़ी आंटी का रो-रोकर बुरा हाल था। हालाँकि थोड़ी देर बाद उन्हें भी मज़ा आने लग गया था और मैंने उनकी गांड और बेरहमी से मारनी शुरू कर दी। करीब आधे घंटे बाद मैं उनकी गांड में झड़ गया।

करीब 2 घंटे तक ऐसे ही उनकी चुदाई करने के बाद उनकी हालत अदमरी जैसी हो गई थी। फिर मम्मी ने बोल ही दिया कि बस, काफी है। फिर मैंने मम्मी को लिटाया। और मैंने उनकी चूत में अपना लंड डाल दिया और उनकी चुदाई शुरू कर दी। मैं उन्हें पंखुड़ी आंटी से भी ज़्यादा बेरहमी से चोद रहा था।

मम्मी : आह… आह… आराम से, आराम से चोद ले, कहीं भाग नहीं रही हूँ। ओह… मर गई।

उसके बाद मैंने मम्मी को भी घोड़ी बनाया और उनकी गांड में मारने लगा। और वो भी पागलों की तरह चीख रही थीं और मैं भी उनकी गांड पागलों की तरह ही मार रहा था। करीब एक घंटे तक उनकी चुदाई करने के बाद हम तीनों बिस्तर पर ही ढेर हो गए।

उसके बाद हमने थोड़ा आराम किया और उसके बाद मैंने फिर मम्मी और पंखुड़ी आंटी को चोदा। कभी बाथरूम में, मेरे रूम में, कभी किचन में। रात तक तो दोनों के चलने का अंदाज़ ही बदल गया।

उसके बाद हमने खाना खाया और पंखुड़ी आंटी आज के लिए हमारे यहाँ ही रुक गईं। और इसी वजह से मैंने एक बार और दोनों को रात में चोद दिया। और फिर वो अगले दिन अपने घर गईं।
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शानदार प्रदर्शन ₹₹
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:::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: गांव की यात्रा::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::

स्पेशल अपडेट

जैसा कि आप लोगों ने पिछले पार्ट में पढ़ा की मम्मी पूरी दिन- रात मानव से जबरदस्त चूदती है और अगले दिन  मम्मी घर आती है सीधे अपने रूम में जाकर सो जाती है।

अब आगे ...

अगले दिन सुबह 9:00 बजे.......मैं दांत साफ करने के लिए बाथरूम गया। थोड़ी देर बाद बाथरूम से बाहर निकल आया। सीधे हॉल में पहुंचा । मम्मी पहले से ही जाग चुकी थीं और रसोई में नाश्ता बना रही थीं। मेरे लिए खाने की मेज पर एक कप गर्म चाय और कुछ बिस्कुट रखे हुए थे।  मैं बैठकर चाय और बिस्कुट का आनन्द  ( खाने ) लेने लगा । तभी मम्मी किचन से बाहर आई , मम्मी उस दिन बहुत कामुक लग रही थी। एक दम टाइट साड़ी और ब्लाउज पहननी हुई थी ब्लाउज बैकलेस था इसमें मम्मी की गोरी पीठ (पीठ) साफ दिख रही थी, साड़ी का पल्लू मम्मी के सिर पर था।। साड़ी नेट की थी जिसमें से उनके बड़े बड़े चूची का उभार और उनका पेट साफ नजर आ रहा था। मम्मी ने लाल रंग की साड़ी पहन ली थी, हाथो में चूड़िया, गले में मंगलसूत्र, कानो में बलिया। देखने में एक दम मस्त माल जैसी लग रही थी। उन्हें देखकर किसी के भी मन में चुदाई का ख्याल आ सकता है, तभी मैंने मम्मी से पूछा।

मैं : मम्मी कैसी रही अंवतिका और मानव के साथ आपकी स्पेशल   मीटिंग।

मम्मी :  में तुम्हें वहीं बताने वाली थी

मैं : तो बताओ

मम्मी : अरे बहुत मजा आया ।

( मम्मी मुझे अवंतिका और मानव के साथ रातभर की मीटिंग के बारे में बताने लगी  । मैं अनजान बन कर सुनता रहा मैंने मम्मी को या नहीं बताया कि मैं उनकी यह स्पेशल मीटिंग देख चुका हूं अगर बता देता तो मम्मी बुरा मान जाती । इसी में अनजान बनकर मम्मी की बातें सुनता रहा। सारी बातें सुनने के बाद में बोला ।

मैं : मम्मी मानव और अवंतिका के साथ मीटिंग करके आपको खुश तो होना ।

मम्मी: बहुत।

तभी मम्मी के मोबाइल पर पापा का फोन आया मम्मी ने पापा से बात किया ।

पापा: ........................ (कुछ सुनाई नहीं देना के कारण)

मम्मी: ठीक है लेकिन कब चलना है?

पापा:...................?

मम्मी: आज रात को। कितना बजे?

पापा: ....................?

मम्मी: शाम 7 बजे। अपने कार से । ओके मैं पैकिंग करती हूं।  ( फिर मम्मी ने फोन रख दिया )

तब मैंने मम्मी से पूछा : मम्मी हम दोनों कहीं जा रहे हैं किया।

तब मम्मी ने बोला : हम दोनों 20 दिन के लिए गांव जा रहे है वह हमारे कोई बहुत पुरानी मंदिर में पूजा पाठ का कार्य क्रम और मेला रखा गया है उसमें हम लोग शामिल होने के लिए जाना हैं

मैं: ऐसे अचानक से और पापा ?

मम्मी : हमदोनों को आज शाम 7 बजे ही अपने कार से चलना पड़ेगा। और पापा वह पूजा पाठ वाले दिन आयेंगे । तु अपने कमरे में जाकर अपना  समान पैक करो । मैं अपना सामान पैक कर लेती हुं

मैं: ठीक है।

रूम में जाकर के मैं अपना समान पैक करके नीचे हॉल में आता हूं उधर मम्मी भी अपने सारा सामान पैक करके वह भी नीचे आती है और हम दोनों शाम होने का इंतेज़ार करने लगते हैं।

शाम को घर की डोरबेल बजाई मैंने आके दरवाजा खोला तो सामने पापा खड़े थे।

पापा घर के अंदर आके बोले : जल्दी से तैयार हो गए। तबतक में अपनी कार लेकर आते । फिर हम दोनों तैयार हो घर से बाहर आये तब तक पापा कार लेकर आ चुके थे। फिर हम कार में बैठ गए । मम्मी पीछे वाली सीट पर बैठे थे और मैं कार चलाने लगे। थोड़ी देर बाद हमारी कार शहर से बाहर निकल गई , करीबन रात 9 बजे में कार को एक ढाबे पर रोक । में और मम्मी दोनों ने ढाबे में खाना खाया। फिर वापस से कार में सवार होकर निकल पड़ते हैं।  ( ऐसे भी हम लोग को गांव पहुंचने में कल सुबह होनी थी। )

पुरा रास्ता सुनसान था, रास्ते में एक भी घर नहीं दिख रहा था , पुरा जंगल ही था चारों तरफ , रास्ते पर एक भी स्ट्रीट नाइट नहीं थी सिर्फ कार के हैडलाइट से रास्ता दिखाई दे रहा था थोड़ी देर बाद मैंने कार में एक रोमांटिक सांग बजा दिया। जिससे हम दोनों एंजाय करते जा रहे थे।

तभी  अचानक से हमारी कार बंद हो जाती है । मैं कार स्टार्ट करने की बहुत कोशिश करता  हूं लेकिन कार स्टार्ट नहीं होती हैं । फिर मैं और मम्मी दोनों नीचे उतरकर धक्का मार के कार को सड़क के किनारे लाते हैं फिर कार बार्नेट के देखते हैं लेकिन हम दोनों को कुछ समझ नहीं आता है और आस - पास कोई भी मैकेनिकल शॉप नहीं होता है पुरा इलाका जंगल से भरा है

फिर मैं बोला -  मम्मी मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है इसको  अब मैकेनिकल ही ठीक कर सकता है और आस पास मैकेनिकल है भी नहीं और कोई गाड़ी आती जाती भी नहीं दिख रही है दिख जाती तो मदद मांग लेते।

मम्मी - नयन एक काम करते हैं हम दोनों कार के अंदर चलते हैं क्योंकि चारों तरफ़ जंगल है और रात का भी टाइम है कोई जानवर हमला कर दिया तो ?

मैं - हां मम्मी, सही बोल रही हो आप। चलो कार के अंदर ही बैठते हैं अगर कोई गाड़ी आती दिखी तो उससे मदद मांग लेंगे। नहीं तो हम लोगों को पूरा रातभर यहीं कार में ही गुज़ारनी पड़ेगी।

मम्मी - हां ठीक है।

मम्मी कार के अंदर जाकर बैठ जाती है । मैं बाहर ही रूक के थोड़ा देर देखता हूं की कोई गाड़ी दिख जाए । लेकिन कोई गाड़ी नहीं दिखाई देती है तो आखिर में मैं भी कार के अंदर जाने लगता हुं बैठने। जैसे मैंने कार का दरवाजा खोला अंदर का नजारा देखकर चौंक गया।
 
मम्मी कार के अंदर बिल्कुल नंगी थी और अपना सारा कपड़ा खोलकर आगे वाली सीट पर रख दी थी और वह अपना दोनों टांगें फैला कर । अपना चूत दिखाते हुए बोलती है

मम्मी : नयन डार्लिंग। अब देखता ही रहेगा , जल्दी से अपने कपड़े उतार कर आ जा ।

मैं तुरंत कार के अंदर जाकर कार को अंदर से लॉक कर दिया और सारा कपड़ा खोलकर बिल्कुल नंगा होकर सारा कपड़ा आगे वाली सीट पर रख दिया।

और सीधे मैं एक हाथ से मम्मी की एक चुची दबाता हुए दूसरी को मुंह में लेकर ज़ोर-ज़ोर से चुसने लगता हुं । मम्मी धीरे-धीरे अपने होश खोने लगी। अब वो भी मेरे बालों को सहलाते हुए, मेरा साथ देते हुए सिस्कारियां लेने लगती है । अब मैं दोनों चुचियों को बारी-बारी से चुसता रहता हूं और उसकी चुसने की आवाज इतनी जबरदस्त आ रही थी कि मैं क्या बताऊं। फिर मैंने अपना दाहिना हाथ  की दो उंगली उसके चुत में डाल देता हूं । इससे मम्मी दर्द के मारे कहरा उठी.

मम्मी : आआआआअहह!

मैंने बोला: मम्मी आपकी चूत तो आज भी काफी टाइट है. कितने साल हुए आपकी शादी को?

मम्मी ‌: 17 साल तो हो गए हैं.

अब मैं मम्मी की चूत पर धीरे-धीरे अपना लंड रगड़ने लगे। थोड़ी देर रगड़ने के बाद मैंने अपना लंड मम्मी की चूत के छेद पर सेट कर दिया। धीरे धीरे अपना लंड उनकी चूत में डालना शुरू किया। लेकिन सिर्फ लंड का टोपा वाला हिस्सा ही अंदर जाकर अटक गया। मैंने थोड़ा और ज़ोर लगाया और फिर से लंड अन्दर डालना शुरू किया। इस बार लंड का पूरा टोपा चूत में घुस गया।

तभी मम्मी बोली : " नयन बहुत दर्द हो रहा है। और दर्द में डूबी के मुझे कसके अपनी बाहों में दबा लिया। मैंने  फिर से ज़ोर लगाना शुरू किया ।

मम्मी इस बार दर्द के मारे बेहाल होकर मुझे बाहर निकालने को बोल रही थी। मम्मी : नयन प्लीज़ जल्दी करो, बहुत दर्द हो रहा है। ऐसा लग रहा था जैसे मम्मी की चूत मेरा  लंड से चुदना ही नहीं चाहती हो।

मैंने जैसे-तैसे अपना लंड मम्मी की चूत से बाहर निकाल लिया। तब मम्मी को थोड़ी राहत मिली । हम दोनों ने 2 मिनट रिलैक्स किया, फिर मैं वापस मम्मी की चूत में लंड डालने लगे, तो मम्मी ने रोक दिया।

मैं : मम्मी आप घबराइए मत शुरू में दर्द होता है। मैं यह बोलकर मम्मी को मनाने की कोशिश कर रहा था हैं। मगर मम्मी ने मुझे थोड़ी देर रूकने को बोला।

मैंने : मम्मी आप  तेल लेकर आई हो किया ?

मम्मी : अब मैं तेल लेकर घूमती हूं क्या और कितनी बार कहा है  तेल ना हो तो कम से कम थूक तो लगाया करो। लाओ, मैं थोड़ी देर चुसती हूँ। फ़िर अन्दर डालने में ज़्यादा तकलीफ़ नहीं होगी।

इसके बाद मैं  तुरेंत एक बाजू में अपनी पीठ लगाया और अपनी टांगे फैलाकर बैठ गया । मम्मी ने अपने बाल एक तरफ किये और नीचे झुककर मेरे लंड को हाथ में लेकर उसे सहलाने लगी। मैं इंतज़ार कर रहा था कि कब मम्मी मेरा लंड मुँह में लेले। लेकिन मम्मी मेरे लंड को एकदम गौर से देख रही थी, पता नहीं क्यों।

मैं : क्या हुआ ?

मम्मी : तेरा लंड बहुत अलग है, सच में।

मैं : ऐसा क्यों?

मम्मी : यह मेरे 9 महीने का कमाल है ।

फिर मम्मी ने मेरे लंड मुँह में लेकर उसे चुनना शुरू किया। मैं अपनी आंखें बंद करके मम्मी की पीठ सहलाने लगा । मेरा आधा ही लंड मम्मी के मुँह में जा रहा था। जैसी-जैसी मम्मी मेरा लंड को चूस रही थी, उसकी बहुत सारी लार नीचे टपकने लगी। करीब 10 मिनट तक मेरे लंड पर थूक कर और उसे चूसकर मम्मी ने उसे एकदम गीला कर दिया।

मैं : बस-बस मम्मी इतना काफी है.

फ़िर मैंने मम्मी के बाह को पकड़कर उन्हें उठाया और वापस मम्मी की दोनों टांगों ज़ोर से अपनी तरफ खींचकर उन्हें लीटा दिया। फिर थोड़ी देर उनकी चुचियाँ चूसकर अपना लंड चूत पे सेट किया। इसके बाद मैंने एक ज़ोर का धक्का मारा, तो मेरा आधा लंड मम्मी की चूत में चला गया। मम्मी को बहुत दर्द हुआ और वो चिल्लाई।

मम्मी : आआआआअहह!स्स्स्स्स्स!

जब वह दर्द के मारे झटपटाने लगी तो मैंने मम्मी के दोनों हाथ पकड़कर उन्हें उसके पेट पर टीका दिया ताकि लंड बाहर ना निकल जाए।

मैं : मम्मी बस एक और फिर मैंने एक आखिरी झटका दिया, जिससे मेरा पूरा लंड मम्मी की चूत में समा गया। मम्मी को जैसे 440 वोल्ट का झटका लगा।

मम्मी : ऊऊऊऊहह! आआह्ह्ह्ह!


मैं : बस बस मम्मी हो गया और अपना लंड मम्मी की चूत में वैसे ही रखकर मैं मम्मी के उपर गिर पड़ा और उन्हें किस करने लगा। क्योंकि मम्मी दर्द के मारे बहुत चिल्लाने लगी थी। सच कहता हूँ, मेरा लंड मम्मी की चूत में जाने के बाद मम्मी की चूत मानो चूहे के बिल से सीधी ट्रेन के टनल जितनी फेल हो गई थी।

मैंने काफ़ी देर तक बिना कुछ किये अपना लंड वैसे ही मम्मी की चूत में रखा, क्योंकि मैं मम्मी में थोड़ा सेटल होना चाहता था। मम्मी दर्द के मारे कांप रही थी और उसने मुझे अपनी बाहों में कैंची बनाकर एक दम कस के पकड़ लिया था।

मम्मी : नयन दर्द हो रहा है. बहुत तेज़ दर्द हो रहा है ।

मैं थोड़ी रूका रहा। फिर धीरे-धीरे आगे-पीछे होकर अपना लंड अंदर-बाहर करने लगे। जब से मेरा लंड मम्मी के चूत के अंदर गया था, तब से मम्मी  दर्द के मारे अपनी आँखें ही नहीं खोली रही थीं। मैं एक-दम धीरे-धीरे धक्का दे रहा था जिससे मम्मी की चूत फेल हो गई । करीब 10 मिनट तक ये सिलसिला चला. फ़िर मम्मी का दर्द धीरे-धीरे मजे में रूपान्तरित होने लगा। ये देखकर मैं अपनी धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाने लगे।

मैं: मम्मी अब कैसा लग रहा है?

मम्मी : स्स्स्स्स्स! पहले से बेहतर.

मैं : ठीक है, अब बहुत हो गया. हमारे पास ज़्यादा वक़्त नहीं है।

इतना बोलकर मैंने अचानक अपनी स्पीड बढ़ाई और पूरा दम लगा कर मम्मी को एक-दम ज़ोर से चोदने लगा । मम्मी की चीख निकल गयी.

मम्मी : ऊऊऊऊहह! दर्द के मारे उसने मुझे एक-दम कसके जकड़ लिया।

मम्मी : तुझे समझ नहीं आता क्या? कहा था ना थोड़ा आराम से करो!

लेकिन मैंने कुछ रिएक्ट नहीं किया, क्योंकि मेरा लंड अभी भी मम्मी के चूत में वैसा ही था। दर्द के मारे वो बेहाल हो चुकी थी। लेकिन मुझे मम्मी का ये व्यवहार ठीक नहीं लगा और मैंने अपना लंड मम्मी की चूत से बाहर निकाला और 5 मिनट तक मम्मी को किस करते रहा और मम्मी भी थोड़ा रिलैक्स हो गई।


मैं , मम्मी से अलग होकर कार का दरवाजा खोलकर कार से बाहर आ गया ।  इससे मम्मी को थोड़ी अजीब लगा और वह भी कार से बाहर आकर मेरे हाथ पकड़कर अपनी ओर खींच लिया और किस करने लगी । इस अंधेरे सुनसान जगह  पर थोड़ी देर किस करने के बाद उन्होंने मुझे कार के अंदर चलने को कहा  , मगर मैंने उसकी बात अनसुनी कर दिया तब उन्होंने मुझसे कहा :  " सॉरी मेरे राजकुमार  ,अपनी दासी को माफ कर दो"। और मैंने मम्मी को माफ कर दिया और फिर दोनों कार के अंदर आ गए । अंदर आकर कार का दरवाजा लॉक कर दिया।

फ़िर मैंने  वापस अपना लंड मम्मी की चूत में डाल कर उन्हें चोदना शुरू किया। मम्मी फिर से चिल्लाने लगी, लेकिन उसका मुंह में पहले से ही दबा दिया था। मैं लगातार 10 मिनट तक मम्मी को ठोकते रहा । फिर थोड़ा रिलैक्स होने के लिए मैंने अपना लंड बाहर निकालकर मम्मी के उपर  लेट गया . ये देखकर मम्मी ने एक चूची का निपल मेरे मुंह में लगा दिया । मम्मी को भी मजा आने लगा और वो मेरे बालों को सहलाने लगी । मैं भी बड़े चाव से उसे चूसने लगा । निप्पल चूसते चूसते अपना लंड मम्मी की चूत पर सेट किया और  एक ज़ोर का धक्का दिया और अपना लंड फिर एक बार मम्मी की चूत में डाल दिया और मम्मी को कस के अपनी बाहों में जकड़ कर में फिर से मम्मी को ज़ोरदार तरीके से ठोकने लगा । मम्मी फिर से चिल्लाने लगी.

मम्मी : मम्म्म्म्म्म… [मुंह दबा होने के कारण मम्मी की आवाज़ भी दब रही थी]

करीब 10 मिनट तक लगतार मैंने मम्मी को इस पोजीशन में चोदा। इतने में कुछ शॉकिंग हुआ , मुझे मम्मी के चूची के निप्पल से दूध निकलता महसूस हुआ । दूध एकदम मिठा था जब यह बात मैंने मम्मी को कहां तो उसके चेहरे पर एक अलग सुकुन महसूस दिख रहा था।

अब तक मम्मी 3 बार झड़ चुकी हुं । ये कहकर मम्मी उठने ही जा रही थी तो मैंने उन्हें रोक लिया।

मैं : रुकिए मम्मी आप 3 बार झड़ चुकी हैं , लेकिन मैं 1 बार भी नहीं।
मम्मी : मैं जानती हूँ, लेकिन मैं अब और नहीं कर सकती।

मैं : क्योंकि ?
मम्मी: क्योंकि मुझे जोर की पेशाब लगी है , चल हट मुझे बाहर जाकर पेशाब करने दे ।

मैं हट गया और कार के दरवाजे का लॉक खोलकर में और मम्मी दोनों बाहर निकले , मम्मी बाहर निकलकर थोड़ी दूर हटकर पेशाब करने बैठ गई जब वह पेशाब कर रही थी तो सुसु सुसु सुसु की आवाज मुझे सुनाई दे रही थी थोड़ी देर बाद वह आवाज बंद हो गई । तब मम्मी मेरे पास आकर बोली  : नयन चल अंदर चल। फिर हम दोनों अंदर आके दरवाजा लॉक दिया। और उनके ऊपर चढ़ गया ।

मम्मी : नयन , प्लीज़ बस भी करो अब. थकते नहीं क्या आप?

मैंने मम्मी की बात को इग्नोर करके उन्हें सीट पर लेटाया और उनकी चूत में लंड सेट किया और एक झटके में लंड अंदर पेल दिया  जिससे मम्मी जोर से कहराने लगीं ।


मम्मी: अह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स् ऊऊऊऊऊऊ आआआआ हाआआआआआ चोदोओओओओओओ और चोदोओओ अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह।अह्ह्ह्हह्ह्ह्लीईईईईईईईईईईई अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह।

मैं मम्मी को कार की पिछली सीट पर चोद रहे थे। शीशे पर मम्मी का चेहरा था और मम्मी ने सपोर्ट के लिए कार के ग्लास पर हाथ रखा था। और मैं मम्मी को लगातर चोदे जा रहे थे। कार के हिलने की वजह से चुर्र चुर्रर आवाजें आ रही थी। और मेरी मम्मी जोर जोर से सिसकियाँ ले रही थी।


मम्मी: अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह नयन बेबी मुझे चोदो मुझे और ज़ोर से चोदो मेरे राजकुमार बस मुझे चोदो।

मैं : हां मेरी माल ।  तेरा पति किसी काम का नहीं ऐसी माल बीवी को कैसे इग्नोर किये हुआ है । मम्मी: अह्ह्ह्हह्हह्हह्ह अह्हह्हह्हह्ह जेन दो उसे और चोदो मुझे अह्हह्हह्ह नयन , तुम्हारा लंड बहुत बड़ा है ये तो मेरी बचदानी तक पहुंच रहा है। अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह्ह्ह् अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऊऊऊऊऊओ मैं झड़ने वाली हूँ  नयन अह्ह्ह्हह्ह चोदो जोर से चोदो। मैं भी तबाद-तोड़ तारिके से मम्मी को चोदने लगे, थोड़ी देर बाद मैं मम्मी पर गिर पड़ा और उन्हें किस करते-करते चोदने लगे। अब मम्मी के मुंह से सिसकारियां की जगह  , आई लव यू नयन , आई लव यू नयन बोल रही थी  । ये सुनते ही मैंने ने 3 ज़ोरदार शॉट लगाते हुए अपना सारा वीर्य मम्मी की चूत में गिरा दिया, और मम्मी ने हर एक शॉट पर " लव यू नयन "  कहा।


मम्मी और मैं दोनों पसीने से नहाये हुए थे। मम्मी और मैं एक-दूसरे से करीब 15 मिनट तक ऐसे लिपटे हुए थे जैसे कि जनम-जनम के साथी हो। फिर मैंने  अपना लंड मम्मी की चूत से बाहर निकाला। मम्मी की चूत से मेरा और मम्मी के वीर्य का झरना बहने लगा। फिर मैं कार से बाहर आकर सबसे पहले , मैंने अपने कपड़े पहने और फिर मम्मी ने अपनी साड़ी पहनाई ।

तभी मुझे दुर से एक गांडी आती हुई दिखाई दी। मैंने मम्मी से उनका मोबाइल लिया और प्लस लाइट ओन करके और हवा में लहराने लगा । कुछ मीनट के बाद वह कार हमारी कार के पास आकर रुकी । तभी उस कार के ड्राइवर ने अपने दारवाजे का शीशा नीचे किया और मूझसे कहा " कोई समस्या है क्या " तो मैने उससे सारी बात बताई । वह मेरी बात सुनकर  अपनी कार से एक रसी निकल के मेरे कार के आगे में बाधा और अपने घर के पीछे बांधकर और हम दोनों को अंदर बैठने को कहा और मेरी कार को खींचता हुआ किसी मैकेनिकल दुकान के पास ले गया । मैंने फिर मैकेनिकल के कार दिखाई उसने कहा 1 घंटे में ठीक कर देता हूं। और उस भले आदमी का शुक्रिया अदा किया वह व्यक्ति अपने गन्तव्य की ओर बढ़ गया।

1 घंटे के बाद हमारी कार ठीक हो गई और मैकेनिकल के पैसे देकर आपने गांव के लिए रवाना हो गए ।

सुबह 7 बजे हम लोगों गांव पहुंच गए वह पहुंचकर सभी परिजनों से मुलाकात किया और  रातभर जगे होने के कारण हम दोनों सोने चले गए।




मेरी कहानी कैसी लगी मुझे जरूर बताएं
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...........................................। मम्मी के साथ वो 25 दिन ( गांव यात्रा ) ।.......................................…

उस रात गांव की यात्रा में मैंने मम्मी को एक सुनसान सड़क पर कार में खूब चोदा था। हम दोनों के लिए वो अनुभव बहुत ही रोमांटिक था जिसे मम्मी ने खूब पसंद किया। उस रात मम्मी को चोदने के बाद मम्मी मेरे साथ खुल चुकी थी इसलिए उन्हें उछाल उछाल के मुझसे चुदवा लिया।

मैंने मम्मी को एक और राउंड के लिए कहा था कार में लेकिन उन्हें मन कर दिया। क्योंकि उनका कहना था कि पापा के मुकाबले मेरा लंड उनसे बहुत बड़ा था जिसे लेने के बाद उनकी चूत में जलन होने लगी थी मैंने कार में उन्हें इतना जोर जोर से चोदा के उनकी हालत खराब हो गई थी।


( गांव का पहला शाम )

शाम के 5 बजे मेरी नींद खुली तो मैंने देखा मैं मम्मी के बदन से लिपटा हुआ था और मेरा एक हाथ उनके स्तन पर था और एक उनके कमर में डाल दिया था। मैं मम्मी से ऐसे लिपटा था जैसे वो मेरी मम्मी नहीं बलके बीवी हो। फिर मुझे याद आया कि कल रात हम दोनों के बीच में क्या हुआ था। वो याद आने के बाद मेरा लंड खड़ा होकर मम्मी को सलामी देने लगा।

मम्मी सो रही थी मैंने उनकी गार्डन पर किस किया और रेडी होने चला गया। थोड़ी देर बाद मैं बाथरूम से फ्रेश होकर आया तो वहाँ मम्मी नहीं थी। इसका मतलब वह कमरे से बाहर गई है । मैंने सोचा कि घूमने जाने से पहले मम्मी से मिल लू तो मजा आएगा इसलिए मैं वही बेडरूम में बैठ गया।

कुछ देर बाद मम्मी बेडरूम में आईं और मैं दरवाजे के पीछे खड़ा था इसलिए वो मुझे देख नहीं पाईं। मैं चुप चाप देख रहा था कि मम्मी क्या करेगी।

मम्मी : अरे नयन यहाँ भी नहीं लगता है घूमने चला गया। चलो अच्छा हुआ वरना फिर से मुझे चुदवाने के लिए मनाता ।

मम्मी अपनी कपड़े उतारने लगी थी जिसे देख के मुझे मजा आने लगा था। मैं चुपचप वही खड़ा रहा. मम्मी मेरी तरफ पीठ करके खड़ी थी इसलिए वो मुझे देख नहीं पाई। धीरे-धीरे करके उन्हें अपनी कपड़े उतार दी। अब वो पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी। उफ्फ ये नजारा मैं कभी नहीं भूल सकता। उनका नंगा बदन इतना खुबसूरत लग रहा था कि उन्हें फिर से चोदने का मेरा मन हो रहा था।

मैंने झट से जाकर उन्हें पीछे से पकड़ लिया तो मम्मी घवरा गई । लेकिन जब उसने मुझे देखा तो वो शांत हो गई।

मम्मी: तू अभी तक गया नहीं? मुझे लगा तू चल गया होगा।

मैंने उनके दोनों स्तनों को हाथों में पकड़ा और मसलने लगा।

नयन : आपका ये नजारा देखे बिना मैं कैसे चला जाता।

मम्मी मेरी बात सुनके शरमाने लगी.

मम्मी: बस भी कर ना।

नयन : आपको पता नहीं आप कितनी हॉट लग रही हैं। और नहाने के बाद आपको नंगा देखना हर मर्द का सपना है।

मम्मी: बेशर्म चुप कर. कुछ भी मत बोल.

मैंने उनके गर्दन पर चुंबन करना शुरू किया। मम्मी सिस्कारियां लेने लगी.

नयन : अरे सच बोल रहा हूँ मम्मी। मैं आपका बेटा हूं तो मेरा ये हाल है तो सोचो गैर मर्दों का क्या हाल होगा।

मेरा लंड पैंट में से खड़ा होकर मम्मी की गांड में जाने के लिए तैयार था। मेरे लंड की गर्मी को मम्मी महसूस कर रही थी।

मम्मी: अच्छा चल अब जल्दी से जा तू.

नयन : आप मेरे सामने इस तरह खड़ी रहोगी तो मैं कैसे जा सकता हूं घूमने ?

मम्मी: अच्छा बाबा मैं कपडे पहन लेती हूँ

नयन : ना...जब कपड़े उतार ही दिए हैं तो बिना कुछ किए मैं आपको पहनने नहीं दूंगा

मम्मी: अब क्या करेगा?

मैंने मम्मी के पैरो को फेला दिया और अपनी दो उंगलियों को उनकी चूत के होठों पर रखा और सहलाने लगा। मम्मी मुझे मना कर रही थी लेकिन रुकने का मेरा बिल्कुल इरादा नहीं था। मैने उनकी चूत को इस तरह छेड़ने लगा कि कुछ ही देर में मम्मी ने खुद को मुझे थमा दिया और सिस्कारियां लेने लगी

मैं उनकी गुलाबी चूत में उंगलियां डाल के अंदर बाहर करने लगा। मम्मी ने थोड़ी देर मन किया। लेकिन जैसे जैसे वो गरम होने लगी तब वो मेरा साथ देने लगी।

मम्मी के मुँह से आह्ह... उफ्फ्फ... वाली आवाज़ निकल रही थी जो सुन के मेरा लंड खड़ा हो रहा था।

मम्मी: आअहह बस करो और मुझे जाने दो ना किचन में बहुत सारे काम पड़े हैं।

नयन : जब तक मैं आपकी चूत का रस पी नहीं लेता तब तक आपको यहां से नहीं जाने दूंगा।

मम्मी समझ चुकी थी मैं नहीं मानने वाला इसलिए उन्हें अपनी आंखें बंद करनी पड़ीं और सिस्कारियां लेने लगीं। मैं उनके स्तनों को सहलाता था तो कभी उनके होंठों को चूसता था। मम्मी के अंदर इतनी आग लगी थी कि वो भूखी शेरनी की तरह मुझे किस कर रही थी। कभी-कभी अपने जीभ को मेरे मुँह में डाल देती और चूसता थी । मम्मी के साथ ये सब करने मुझे इतना मजा आ रहा था मैं बता नहीं सकता।

मम्मी झड़ने के करीब थी इसलिए मैंने उनकी चूत को चूसना शुरू किया जिसे मम्मी के बदन में करंट दौड़ने लगा। उन्होंने मेरे सर को अपनी चूत पर जोर से दबा दिया। एक परिपक्व औरत के कामरस का स्वाद बहुत मज़ेदार होता है और जब वो औरत मेरी मम्मी हो तो वो अमृत से भी बढ़कर होता है।

अचानक से मैंने उनकी चूत के होठों को फेला दिया और अपनी जीभ को चूत के अंदर डाल दिया। मम्मी बहुत जोर से सिसकारियां और मैं उनकी चूत की गहरी तक चाट रहा था। कभी मैं अपनी जीभ को अंदर बाहर करके उन्हें चोदता था तो कभी उसे अंदर तक चाट जाता था। कुछ ही देर के बाद मम्मी ने अपनी चूत से कामरस छोड़ दिया जिसे मैंने अच्छे से चाट लिया।

मम्मी बिस्तर पर लेटी हुई जोर जोर से हांफ रही थी और मैं उन्हें देखकर मुस्कुरा रहा था।

मम्मी (मुझे प्यार से मरते हुए): क्या नयन कभी भी शुरू जाता है । रात में ही तो किया था ना.

नयन : हां लेकिन आपको देख के मेरी भूख बढ़ जाती है इसलिए आज के बाद मैं आपको कितनी बार चोदता हूं वो देखना।

मम्मी: हे भगवान मतलब जब मेरी चूत प्यासी थी तब सेक्स नहीं मिला और जब मिल रहा है तो और ज्यादा मिल रहा है।

नयन : हां और मैं आपके साथ वो सब करने वाला हूं जो एक बॉयफ्रेंड अपनी गर्लफ्रेंड के साथ करता है।

मम्मी: लेकिन गर्लफ्रेंड क्यों? पत्नी क्यों नहीं?

नयन : क्योंकि शादी के बाद पति पत्नी के साथ ज्यादा फैंटेसीज ट्राई नहीं करता, लेकिन एक बॉयफ्रेंड अपनी गर्लफ्रेंड के साथ बहुत कुछ करता है।

मम्मी: ओह, तुम्हारा मतलब है कि तुम मुझे बहुत चोदना चाहते हो?

नयन : हां .

मम्मी: ठीक है मुझे जितना चोदना है उतना चोद लेना लेकिन पहले घुमने जाओ वरना थोड़ी देर बाद तुम मेरे साथ ही वर्कआउट कर लो गे बिस्तर पर।

मम्मी अब मेरे साथ बहुत खुल चुकी थी और हमारे बीच की दूरियां बहुत कम हो गई थीं। उनकी बात का मतलब मैं अच्छे से समझ गया था। और मुझे ये भी पता चला कि वो भी मुझसे बहुत चुदवाना चाहती है। अगर ऐसा न होता तो वो बात नहीं बोलती। अभी थोड़ा नाटक कर रही है लेकिन मैं उन्हें जल्दी ही मेरा लंड लेने की आदत डाल दूंगा।

फिर मैं घुमने चला गया और मम्मी ने खुद को साफ करके बेडरूम पहले जैसी कर दी और अपने काम में लग गई।

मेरे कानों में मम्मी की सिस्कारियां और उनका वो कामुक चेहरा नजर आ रहा था। आप ही बताइये जिसकी मम्मी दूध जैसी गोरी और इतनी हॉट फिगर वाली मालकिन हो उसके बेटे का लंड अपनी मम्मी के लिए रोज खड़ा होगा ही ना।

जैसे तैसे करके मैंने अपना घुमने का प्लान खत्म किया और घर आ गया। मैं हॉल में बैठा हुआ था और वहां कोई नहीं थी। मैं रसोई के पास गया और अंदर देखा तो मम्मी ने सफेद शर्ट डाली हुई थी जो थोड़ी पारदर्शी थी जिसमें से उनकी ब्रा स्ट्रिप दिख रही थी। और काली जीन्स डाली थी. मेरी नजर उनकी गांड पर पड़ी. आप सबको पता है कि मैं उनकी गांड मारने का कब से इंतजार कर रहा हूं।

मम्मी को देख के मेरा लंड पूरा तरह से तन गया। मेरी हालत बहुत ख़राब थी मुझे किसी भी हाल में मुठ मरना था। फिर मैंने सोचा ये बात मम्मी को बता देता क्योंकि ये बात उन्हें पसंद आई। किचन में जाने से पहले मुझे कन्फर्म करना था कि विमला काकी ( खाना बनाने वाली ) कहा है, मैं उसके हर कमरे ढुंढा लेकिन वो वहां नहीं थी।

मैंने उसे बहुत ढूंढा वो नहीं दिखी। मुझे लगा के वो घर चली गई लेकिन अचानक से मुझे याद आया कि आज विमला काकी ने छुट्टी ली हुई है । ( दादाजी ने बताया था )

मुझे कोई रिस्क नहीं लेना था इसलिए मैं निश्चित होकर किचन की तरफ़ भागा और मम्मी के पीछे खड़ा हुआ। मम्मी अपने काम में ही खोई हुई थी उनको पता ही नहीं था कि मैं उनके पीछे खड़ा हूं।

किचन में मम्मी को इस तरह काम करते हुए देख के मुझे अपनी एक पुरानी ख्याल याद आई जो मैं किसी शादीशुदा औरत के साथ करना चाहता था और वह किचन सेक्स था। ये आप में से कई लड़के की ख्वाहिश होगी क्यू कि ज्यादा लड़के अपनी मम्मी को किचन में काम करते हुए उनकी गांड को देखकर उनकी तरफ आकर्षित हो जाते हैं। मेरा भी यही हाल था और मैं एक दिन मम्मी को किचन में जरूर चोदूंगा।

मैंने मम्मी पीछे से गले लगाया जिसे वो थोड़ी डर गई।

मम्मी: क्या कर रहे हो नयन ? मैं कितनी डर गई.

नयन : आपको डराने के लिए ही ऐसा किया मैंने।

मम्मी: बहुत मज़ेदार... और मुझे छोड़ो घर में हमारे अलावा कोई लोग है।

मैंने अपने खड़े लंड को मम्मी की गांड पर रख के धीरे धीरे धक्के लगाते हुए कहा।

नयन: हां लेकिन यह वक्त मुझे आपसे कोई अलग नहीं कर सकता।

मम्मी: हे भगवान प्लीज़ नयन यहां कुछ मत करना मुझे किचन में ये सब बिल्कुल पसंद नहीं।

नयन (मम्मी के स्तनों को दबाते हुए): अच्छा जी। और उस दिन जब पापा रांची जाने वाले थे तब आप उन्हें किचन में ही लंड चूसने के लिए तैयार थी ।

मम्मी (शर्माते हुए): उफ्फ वो बात तुम्हें कैसे पता चली?

नयन : क्यूंकि मैंने वो सब देखा था।

मम्मी: मैं इसे स्वीकार करती हूं लेकिन मैंने उनका नहीं चुसा था , ठीक है।

नयन : इसकी वजह भी मैं ही हूं।

मम्मी: वो कैसे?

मैंने मम्मी के शर्ट के बटन खोल दिये। मम्मी मन कर रही थी लेकिन मैं रुकने वाला नहीं था। शर्ट ओपन होते ही मैंने उनकी ब्रा का हुक भी खोल दिया मम्मी बहुत शॉक्ड थी के मैं उनके साथ किचन में ये सब कैसे कर सकता हूँ।

नयन : क्यूंकि जब आप लंड चूसने वाली थी तब मैंने आप दोनों को आवाज दी ताकि आप चूस ना सको।

मम्मी: ओह तुम बहुत बुरे हो. मेरे पति कितना तड़प रहे थे उस दिन मुझे चुसवाने के लिए। तुम्हें पता है मैंने आज तक एक बार भी उनका लंड नहीं चूसा और उस दिन तुम ना होते तो चूस लेती ।

मैंने मम्मी को अपनी तरफ घुमाया। मेरी नज़र उनके चेहरे से हट के सीधा उनके चूची पर पड़ी। दूध जैसे गोरे स्तन जिनका साइज 36 था। एक बेटे के लिए ये बहुत बड़ा पल होता है जब वो अपनी मम्मी को ऐसी स्थिति में देखता है। मैं लगतार स्तनों को देख रहा था जिसकी मम्मी को पता चल गया कि मैं क्या करना चाहता हूँ। उन्हें मेरे दोनों हाथों को अपने स्तन पर रखा और कहने लगी।

मम्मी: मुझे पता है तुम्हें मेरे स्तन बहुत पसंद हैं। आगे बताओ.

मैं उनके स्तनों को मुँह में लेकर चूसते हुए बताने लगा।

नयन : मैं चाहता हूं कि आप अपने बेटे के लंड को चूसे । सुनने में कितना अच्छा लगता है ना? एक मम्मी ने अपने जवान बेटे का लंड चूसा।

मम्मी: हम्म , बाकी तो नहीं पता लेकिन तुम्हारी कल्पना कमाल की है। और तुम्हें उसकी ये हालत कैसी हुई ?

मम्मी ने लंड की तरफ इशारा करके कहा।

नयन : इसकी वजह भी आप ही हो।

मम्मी: अब मैंने क्या किया?

नयन : थोड़ी देर पहले कमरे में मैंने आपको शांत कर दिया लेकिन मेरे अंदर की आग का किया ?

मम्मी शरमाने लगी. उन्होंने कुछ सोचा फिर कुछ ऐसा किया जो मैं ने उनसे उम्मीद नहीं की थी।

वह शरारती मुस्कान करते हुए वो घुटनो पर बैठ गई। उन्हें देख के मैं दंग रह गया। क्योंकि मुझे यकीन नहीं हो रहा मम्मी सच में करने वाली है।

नयन : मम्मी आप क्या कर रही हो?

मम्मी (अपने बालों को बांधते हुए): बस देखते जाओ।

उन्होंने मेरी पैंट को पकड़ के नीचे किया। अंडरवियर में से मेरा लंबा लंड मम्मी को अपना इरादा साफ बता रहा था। मम्मी भी लंड को देख के नॉटी स्माइल दे रही थी. फिर अपने हाथों से लंड को थोड़ा सहलाया, फिर अपने हाथों से अंडरवियर को भी नीचे उतार दिया। मेरा लंड मम्मी के होठों के पास था। यह देखकर मेरे चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई। मम्मी ने लंड को गौर से देखकर कहा.

मम्मी : इसे देखकर साफ लग रहा है कि इसे शांत करना ही पड़ेगा। मुझे पता है! बहुत शरारती है. कल रात कार में मुझे इतना चोदा फिर भी मन नहीं भरा।

नयन : जब मम्मी इतनी सेक्सी हो तो कैसा किसी का मन भरेगा।

मम्मी को ये लाइन बहुत पसंद आई उनको मेरी आँखों में देखते हुए कहा।
मम्मी: इतना प्यार करना चाहते हो मुझे ?

नयन : हां मैं आपको हर जगह, हर कोने में, हर पोजीशन में प्यार करना चाहता हूं।

मेरी बात सुन के मम्मी बहुत खुश हुई और खड़े होकर मुझे किस करने लगी। मैंने भी उनको कस के पकड़ लिया और उनके होठों को चूसने लगा। ऐसा लग रहा था कि मुझे कोई अपने लेवल का मिल गया है जिसके साथ मैं सब कुछ कर सकता हूं। बहुत देर तक उन्हें किस करने के बाद मैंने उनकी जींस को उतारना शुरू किया लेकिन उन्होंने मुझे रोक दिया ।

मम्मी: नयन , प्लीज़ यहाँ नहीं. मुझे किचन में ये सब करना अच्छा नहीं लगता।

नयन : कोई बात नहीं हम बेडरूम में चलते हैं और आधी रात तक मैं आपको खूब प्यार करूंगा।

मम्मी (दोनों हाथों को कमर पर रख के): और खाने का क्या होगा?

नयन : होटल से मंगा लेंगे ना एक ही दिन की तो बात है। आप बस हां बोल दो क्यूंकि मैं दिन रात आप से लिपट के रहना चाहता हूं।

मम्मी: हाहाहा तू पूरा पागल है यह गांव है यहां तुझे होटल कहां मिलेगा . मैं हूं तो ऐसी बातें कर रहा हूं मेरी जगह तेरी कोई गर्लफ्रेंड होती ना तो भाग जाती है।

नयन : मुझे पता है लड़कियाँ झेल नहीं पाती हैं। पर आप हो इसलिए मुझे ज्यादा हॉर्नी फील होता हैं।

मम्मी: अभी नहीं कर सकते । कल रात तुमने जिस तरह मुझे चोदा उसका थोड़ा दर्द अभी भी है।

मम्मी फिर से घुटनो पर बैठ गई और मेरे लंड को सहलाने लगी।

मम्मी: सॉरी बेबी... लेकिन तुम्हारी जो भी विश है मैं एक घंटे बाद पूरी करूंगी।

नयन : पक्का?

मम्मी: हां बाबा पक्का।

मम्मी ने लंड को थोड़ी देर हिलाया और जब वो पूरी तरह से खड़ा हो गया तब उसे किस करना शुरू किया।

नयन : मम्मी इससे अंदर ले लो ना .

मम्मी: हां ठीक है।

मम्मी ने लंड की त्वचा को थोड़ा पीछे किया, फिर अपने होठों में पकड़ा और चूसने लगी। मेरे मुँह से सिस्कारियाँ निकलने लगी । कुछ ही देर में मेरे आधे लंड को अपने मुँह में ले लिया और अंदर बाहर करते हुए वो चूसने लगी। उनके मुँह में लंड देखकर मुझे सुकून मिल रहा था। कभी-कभी वो लंड अपने मुंह के अंदर जीभ से चाट रही थी। मम्मी और मैं एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे। उनके चेहरे पर ख़ुशी देख के मुझे जोश आ रहा था। कुछ देर बाद मैं झड़ने वाला था। मैंने मम्मी से कहा मैं झड़ने वाला हूं मम्मी ने तुरंत एक कटोरी ली और मेरे सारे वीर्य को एक कटोरी में रख लिया।

मम्मी: कैसा लगा?

नयन : आपका लंड चूसाई फील करके ऐसा लग रहा है कि अभी आपको पेल दूं।

मम्मी: ना बाबा इतनी जल्दी नहीं. तुम्हारा लंड बहुत बड़ा है इसे झेलते हुए मेरी हालत खराब हो जाती है ।

नयन : मम्मी मैं एक बात पूछूं।

मम्मी: हां पूछ।

नयन: मम्मी , आप इस वीर्य का किया करोगी। और मम्मी ने हंसते हुए कहा
मम्मी: हां हां हां , इसे चेहरे पर लगाउंगी।

फिर मम्मी अपने काम में लग गई और मैं फ्रेश होकर कमरे में चला गया। थोड़ी देर बाद मम्मी ने मुझे किचन में बुलाया , में किचन पहुंचा तो मम्मी कहां " खाना खाने का टाइम हो गया। तु अपने दादाजी को बुलाकर ले आ। मैं थोड़ी देर में दादा जी को भी बुलाकर ले आया। हम तीनों ने एक साथ खाना खाया और दादाजी अपने कमरे में चले गए और मम्मी किचन में सारा काम खत्म करने चली गई।

मैं अपने कमरे में जाकर कुछ काम करने लगा। मम्मी किचन का काम ख़त्म होने के बाद कमरे में चली आई । मम्मी अंदर आते ही झट से दरवाजा लॉक कर दी । दरवाज़े की आवाज़ सुनकर मैं पलट के देखा।

मम्मी : मैं तुम्हें ही ढूंढ रही थी। ऐसा हो ही नहीं सकता कि रात हो और तुम मेरा इंतजार ना करो।

नयन : आप अपने बेटे को सिड्यूस करने का कोई मौका नहीं छोड़ती।

मम्मी: मतलब?

नयन : आपको पता है कि आप नाइट शूट में बहुत हॉट लगती हैं। और आपका फिगर भी साफ दिखता है। इसलिए मुझे सिड्यूस करने के लिए आप ये सब करती हैं।

मम्मी: हां अब क्या करूं मेरे अंदर इतना आग जो भरा पड़ा है ।

नयन : और इसीलिये आप नाइट शूट के अंदर कुछ नहीं पहनती हो ।

मम्मी शर्मा गयी उनका शर्माना देखकर मैं उनके करीब गया और उनके होठों को चूसने लगा। मम्मी ने भी मेरा साथ दिया। एक दूसरे को सिड्यूस करते करते हम किसिंग करने लगे। मम्मी मुझे छाती, टांगें, लंड हर जगह सहला रही थी। और मैं उनके स्तन, नाभि, गांड को सहला रहा था। एक पल ऐसा आया जब हमें अलग होना पड़ा । हम दोनों बिस्तर पर बैठ गए और जल्दबाजी में एक दूसरे को देखने लगे।

नयन : मम्मी आपकी पसंदीदा पोजीशन कौन सी है?

मम्मी: ये कैसा सवाल है?

नयन : बताओं ना प्लीज .

मम्मी: मुझे मिशनरी पसंद है लेकिन डॉगी स्टाइल करने का अलग ही मजा है।

नयन : अच्छा इसका मतलब उस रात जब मैंने आपको देखा था तब आप पापा से डॉगी स्टाइल में चुद रही थीं।

मम्मी: हां मुझे जब भी एक अच्छा सेक्स चाहिए होता है तो मैं यह 2 पोजीशन ट्राई करती हूं।

मम्मी: लेकिन नयन…

नयन : देखो मम्मी प्लीज़ मना मत करना मैं आपको हर जगह, हर पोजीशन में चोदना चाहता हूँ। आपने आज तक जो मिस किया वो मैं आपको दूंगा। और आपको मेरा साथ देना पड़ेगा।

मम्मी: अच्छा बाबा, ठीक है। मैं आपके साथ हूँ।

नयन (धीरे से): अगर आप मेरी मम्मी न होतीं तो मैं कब आपसे शादी कर लेता।

मम्मी: सुना मैंने...वैसे आइडिया बुरा नहीं है।

फ़िर हम दोनों हँसने लगे। थोड़ी देर तक हँसने के बाद हमारा हँसना अचानक से बंद हो गया और हम दोनों एक दूसरे की आँखों में देखने लगे।

नयन : मम्मी सच में आप बहुत खुबसूरत हो।

मम्मी (शर्माते हुए): बस कर ना अब कितनी बार कहेगा।

नयन : उस रात का नजारा मेरी आँखों के सामने से कभी नहीं जा सकता। वह मुझे रोज़ रात में याद आता है।

मम्मी (शर्मते हुए): उफ्फ!!

नयन : मम्मी आज मैं आपके साथ थोड़ा अलग रोमांस करना चाहता हूं।

मम्मी: बाप रे! अब क्या नया लेकर आ गया तू?

नयन : डरो मत मम्मी. इससे पहले मैंने आपको जोर जोर से चोदा था लेकिन आज मैं चाहता हूं कि आपको बहुत प्यार से चोदू।

मम्मी: हम्म, दिलचस्प…

नयन : मैं चाहता हूं कि आप मुझे अपना बॉयफ्रेंड समझो और मुझसे चुदवा लो।

मम्मी (थोड़ा सोच के): ठीक है तुम्हारे लिए ये भी करूंगी।

कुछ ही देर में हम एक दूसरे के करीब आ गए और फिर से किस करने लगे। धीरे-धीरे मैं उनके नाजुक होठों को चूस रहा था। हम दोनों की आंखें बंद थीं। बहुत देर तक चुंबन करने के बाद हम रुक गए और एक दूसरे को देखने लगे।

मम्मी ने कुछ कहा नहीं लेकिन उनका इशारा मैं समझ गया। मेरी टीशर्ट और पैंट को उतार दिया। मैं सिर्फ अंडरवियर में था और उन्होंने मुझे हर जगह किस किया और जीभ से चाटना शुरू किया।

थोड़ी ही देर में मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया और छाती, टांगें, जांघें, गर्दन को छूने लगा। मेरा लंड पूरा तरह से खड़ा होकर मम्मी के जिस्म से प्यार करने के लिए बेकरार था। थोड़ी देर बाद उन्हें मेरी अंडरवियर भी उतार दी। मेरा लंड आज़ाद होते ही उनके हाथ में पकड़ा गया और सहलाने लग गई। चुंबन भी कर रही थी ।

नयन : मम्मी आप मेरे जांघों के बीच में आकर और इसे चूसो।

मम्मी ने वही किया मेरा लंड उनके मुँह में जाता ही मैं मजे से आवाज़ निकालने लगा। मैंने अपने हाथों से बेडशीट को पकड़ लिया क्योंकि मम्मी खूब अच्छे से चूस रही थी। लंड को अंदर बाहर करके मेरा जोश बढ़ाये जा रही थी ।

मम्मी ने बहुत ही अच्छा तरीके से लंड चुसकर चुदाई के लिए तैयार किया।

कुछ ही देर में उन्होंने नाइट शूट को उतार लिया । अब हम दोनो बिस्तर पर नंगे थे और मम्मी मेरे सामने नंगी लेती हुई थी। मैं एक पति की तरह मम्मी के जिस्म को चूम रहा था, चाट रहा था। कुछ देर तक मैंने उनकी जांघ को फैला दिया और उनकी नाज़ुक सी गुलाबी चूत को मैं पागलों की तरह चूस रहा था। मम्मी कामवासना में डूबी हुई जोर जोर से सिस्कारियां लेने लगी थी। उनकी चूत से निकलते हुए क्रीम को मैंने बड़े मजे लेते हुए चाट लिया।

मम्मी अपने हाथों से मेरे सर को पकड़ के सहला रही थी। वो मुझे बिना बोले बता रही थी उन्हें कितना मजा आ रहा था। कुछ पल बाद मैं उनसे अलग हुआ। मैंने देखा वह जोर जोर से हाफ रही थी और उनका चेहरा पर प्यारी सी मुस्कुराहट थी। उनका बदन पूरी तरह से लाल पड़ चूका था।

मम्मी: ओह नयन तुम सच में पागल हो तुमने मुझे दीवाना बना दिया । बस मन करता है कि दिन रात तुम्हारे साथ ऐसे बिस्तर पर पड़ी रहूं और तुमसे चुदवाती रहुं।

फिर मैंने उनसे कल का प्लान पुछा तो मम्मी बोली : कल तेरे पापा हमलोगों के पास गांव आ रहें हैं ।

मैं तो भुल ही गया था , मगर यह सुनकर मेरा जोश ठंडा पड़ गया और मैंने चूत चाटना छोड़ दिया।

मम्मी ने मेरे चेहरे पर मायूसी देखकर पुछा : मेरे राजकुमार बेटे के चेहरे पर मायूसी का कारण जान सकती हुं।

नयन: इस मायूसी का कारण पापा है। और मम्मी मेरे बात सुनकर हंस पड़ी और कहा।

मम्मी: तु उनकी टेंशन मत ले । लेकिन अब शुरू तो करो मुझसे रहा नहीं जा रहा ।

फिर मम्मी डॉगी स्टाइल में आ गई और मैं उनके पीछे बैठा। उनकी मदमस्त गांड मेरे सामने थी जिसे मैं सहला रहा था। उफ्फ्फ उनकी गांड बहुत कमाल लग रही थी मेरा दिल कह रहा था कि अभी उनकी गांड में लंड डाल के चोदू, लेकिन फिर मैंने खुद पर कंट्रोल किया।

मम्मी (सिसकारियाँ लेते हुए): आअहह , तुम ऐसे सहला रह है तो बहुत अच्छा लग रहा है

नयन (उनकी गांड को हल्के से दबाते हुए): सिर्फ सहलाने पर आपको इतना मजा आ रहा है जब मैं आपकी गांड मारूंगा तब आप जिंदगी भर याद रखोगी।

मम्मी: अच्छा , तो तुम मेरी गांड मारना चाहते हो?

नयन : हां. मैं तो कब से इसका दीवाना हूं।

मम्मी (मुस्कुराते हुए): हम्म तुम्हारी बातों से ही लग रहा है ।

नयन (उनके स्तनों को दबाते हुए): हां कुछ ऐसा ही समझो।

मम्मी मेरी बात सुनकर खुशी में झूम रही थी और मैं उन्हें सिड्यूस कर रहा था ताकि मैं उन्हें बेहतर अनुभव दे सकूं।

फ़िर मैंने अपने लंड को चूत के होंठों पर रखा और रगड़ने लगा। मम्मी मेरे लंड को अच्छा महसूस करने के लिए बीच बीच में आगे पीछे हो रही थी। उनकी तड़प से ही में समझ चूका था कि उनसे राह नहीं जा रहा है। और अचानक से मैं उनकी कमर को हाथ से जोर से पकड़ लिया और एक धक्का मारा। मेरा पूरा लंड उनकी चूत में चला गया और मम्मी ने आअह्ह्ह्ह... करके जोर से सिस्कारीयां ली। अब उनकी चूत की गर्मी मुझे लंड पर बहुत अच्छे से महसूस हो रही थी।

मम्मी: आअह्ह्ह्ह , नयन एक बार में ही पूरा अंदर डाल दिया??

नयन : हां... आपको कैसा लग रहा है?

मम्मी : मुझे बहुत मजा आ रहा है... अब रुकना मत ।

इतना बोल के मम्मी अपनी गांड को आगे पीछे करके लंड का पूरा अंदर ले रही थी। मैंने उनका साथ देते हुए धीरे-धीरे धक्के मारने लगा। हम दोनों के मुँह से सिस्कारियाँ निकल रही थी। मेरा लंड बिलकुल लोहे की तरह सख्त बन चूका था। धक्के के साथ कमरे में थप थप थप जैसी आवाज आने लगी और कामवासना में डूबी हुई मम्मी की सिस्कारियां मुझे जोश दिला रही थी।

मैं उन्हें लगातर चोद जा रहा था और वह मुझे उत्तेजित कर रही थी।

मम्मी: आअहह... आअहह... यस्स... बेबी ओह्ह्ह... यस्स... आअहह..... बहुत मजा आ रहा है मुझे आअहह... ओह्ह्ह ....आअहह.... और अंदर डालो आअहह... उफ्फ्फ.... बेटा तुम्हारा ये लंड मेरी चूत को आज खा जाएगा आअहह... उफ्फ्फ... माआआ....

उनकी बातें सुन के मेरा जोश बढ़ रहा था और मैं धीरे-धीरे स्पीड बढ़ा रहा था। मैंने उनके कमर को पकड़ के चोदना शुरू किया। पुरे कमरे में हम दोनों की आवाज़ गूंज रही थी। और हर ढक्के की वजह से बिस्तर की भी आवाज आ रही थी।

नयन : आअहह.... मम्मी आई लव यू…. आज मेरी तमन्ना पूरी हुई. आअहह... ओह्ह्ह... आप कितनी ख़ूबसूरत हो। आपका बेटा होकर मैं आपका इतना दीवाना हूं तो ज़रा सोचो बहार के लोगो का क्या हाल होता हो गा

मम्मी: आअहह... बेबी मुझे पता है लेकिन तुम्हारे लंड से चुदवाने के बाद मुझे अब कुछ नहीं चाहिए...ये स्स... आअहह... ओह्ह्ह... बेबी।

नयन : आपको इस पोजीशन में चोदकर मुझे ऐसा लग रहा है कि मैं आपका पति हूं

मम्मी : आह्ह्ह.... आह्ह्ह....

कुछ देर तक मैं उन्हें ऐसे ही चोदता रहा फिर हमने पोजीशन चेंज किया और अब मिशनरी में आ गए। मम्मी अब सीधे लेट थी और मैं उनके ऊपर आ गया। हम दोनों एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे। मम्मी को देख के ऐसा लग रहा था जैसे मुझे सालों से उनका ही इंतज़ार था।

फिर लंड को चूत पर सेट किया और मैं धक्के लगाने लगा। अचानक से उन्होंने मुझे खींच लिया और मेरे होठों को चूसने लगी।
करीब आधे घंटे तक चोदने के बाद मम्मी और मैं साथ में ही झड़ गए। मैंने सारा वीर्य उनके पेट पर निकल दिया। हम दोनों काफी थक चुके थे। हम एक - दूसरे को देखते-देखते कब सो गए ये हमें पता ही नहीं चला।

दुसरा दिन...........


अगली सुबह मेरी आंख ज़रा लेट खुली तो मैंने देखा कि मम्मी बिस्तर पर नहीं थी और घड़ी में दिन के 9 बज रहे थे।
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शानदार प्रदर्शन

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अगली सुबह ...........

सुबह के 9 बज रहे थे। बाहर तेज धूप थी और मैं अपने कमरे में गहरी नींद में सो रहा था। तभी मेरी मम्मी ने आकर मेरे कंधे को हिलाया और कहा, "बेटा, जल्दी उठो! तुम्हारी नींद पूरी हो गई हो तो बाहर आओ।"

मैंने मम्मी से कहा : आप चलो मैं थोड़ी देर में आता हुं और मैं उठकर बाथरूम में जाकर फ्रेश होकर बाहर आया। कमरे से निकलकर नीचे हॉल में पहुंचा । जब मैं वहां पहुंचा तो देखा पापा , बुआ और फुफा जी यह तीनों सोफे पर चाय पी रहे थे फिर मैं वहीं थोड़ी दूर हटकर सोफे पर बैठा , थोड़ी देर बाद मम्मी किचन से मेरे लिए कॉफी लेकर आ रही थी तब मेरी नजर मम्मी पर पड़ी।

मम्मी ने पर्पल कलर की साड़ी डाली हुई थी जो ट्रांसपेरेंट थी। उससे उनका गोरा जिस्म साफ दिख रहा था। साड़ी के अलावा ब्लाउज़ के अंदर फूले हुए गुब्बारों जैसे ( चूची ) का आकार बहुत ही बड़ा लग रहा था।

उन्होंने साड़ी अपनी नाभि से नीचे पहनी थी इसलिए नाभि भी दिख रही थी। चेहरे पर हल्का सा मेकअप करके वह बिल्कुल नई नवेली दुल्हन की तरह दिख रही थी।

मैंने धीरे से बोला : मम्मी एक बात कहू... आप इस साड़ी में बहुत खूबसूरत लग रही हो ।

मम्मी (शर्माते हुए): धन्यवाद. तुमने ही दी थी ये मुझे मेरे जन्मदिन पर । मुझे और तेरे पापा को भी ये बहुत पसंद है।

नयन : अच्छा

फिर मम्मी किचन में चली गई और वहां खाना बनाने का काम करने लगी।

तभी पापा ने मुझे अपने पास बुलाया और कहा : तेरी मम्मी को कुछ नये कपड़े चाहिए था तो तुम अपनी मम्मी के साथ कार में सवार होकर शॉपिंग मॉल में जाकर दिला दे ।

मेंने ' ओके ' कहां पापा । फिर मैं अपने कमरे में जाकर नहा धोकर कर तैयार हो गया मैं सफेद शर्ट और नीली जींस डाला हुआ था और स्पोर्ट शूज पहनकर नीचे आया और मम्मी को आवाज लगाई , मम्मी आई . हम दोनो कार में बैठे और घर से निकल गये माॅल के लिए।

अभी घर से निकलकर थोड़ी दूर गया ही थी मम्मी ने मुझे कुछ कहां

मम्मी: आज मैं बहुत एक्साइटेड हूं ।

नयन : मैं भी…

मम्मी : एक बात काहू... तुम बहुत गर्म लग रहे हो ।

हम ड्राइव करते हुए गांव से बाहर हाईवे पर जा चुके थे इसलिए यहां कोई ट्रैफिक नहीं था। तभी उन्हें मेरे करीब आकर मेरी जींस की ज़िप खोल दी।

नयन : आप किया कर रही हो मम्मी ? मम्मी ने कोई जवाब नहीं दिया और लंड बाहर निकाला और उसे सहलाने लगी।

नयन : अरे मम्मी बताओ ना क्या करने वाली हो ।

मम्मी ने लंड को थोड़ी देर हिलाया और नीचे झुककर के झट से मुंह मैं लेकर इस्तेमाल करने लगी । मेरे शरीर में जोर से करंट लगा। मैं उनकी हरकत को संतुष्ट नहीं कर पा रहा था। क्योंकि अब तक मम्मी ने ऐसी कोई हरकत नहीं की थी। लेकिन अब ये देख कर लग रहा था कि आगे बहुत कुछ होने वाला है।


उन्होंने लंड को होठों में पकड़ के चूसना शुरू किया जिससे मेरी सिस्कारियां निकलने लगीं। कार के अंदर सिर्फ लंड चूसने की आवाज सुनाई दे रही थी। मेरा लंड धीरे धीरे करके खड़ा होने लगा। मम्मी बहुत जोश में आ गई और उन्हें लंड को मुंह में अंदर बाहर करते हुए चूसना शुरू किया। अब मुझे बहुत दिक्कत हो रही थी गाड़ी चलाने में। मम्मी मेरे दोनो पैरो के बीच में सर रख के लंड चूस रही थी जो मुझे जन्नत की सैर करवा रहा था। हाईवे पर इसलिए गाड़ी भी रोक नहीं सकता थी। मेरा ध्यान भटक रहा था।

उन्होंने लंड की त्वचा को पीछे सरका दिया और झट से चुसने लगी। मेरे जोर से सिस्कारी निकल गये . ये सुनकर उनको बहुत मजा आ रहा था. मैंने एक हाथ उनके सिर पर रखा और बालों को सहलाने लगा। मम्मी ने अपनी जीभ निकल के लंड को चाटने लगी गई। अब मुझसे बर्दाश नहीं हो रहा था इसलिए मैं उनका नाम लेकर जोर जोर से चिल्ला रहा था। मम्मी अपने सर को जोर जोर से ऊपर नीचे करके अपना मुँह चुदवा रही थी। 10 मिनट के ब्लोजॉब के बाद मेरे लंड से जोरदार पिचकारी निकली जैसे मम्मी का पूरा मुँह वीर्य से भर गया और वो पीने लगी। मेरी आंखें बंद हो चुकी थी उनके ब्लोजॉब की वजह से।

मम्मी काफ़ी देर लंड को चूस के साफ़ करने में लगी हुई थी। फिर मम्मी लंड को बाहर से अंदर जींस में डाल दिया और जिप बंद करके अपनी सीट पर बैठ गई।

नयन : आअहह मम्मी आप ने तो मेरी जान ही निकाल दी ।

वो मुझे देखकर हंसने लगी. उन्होंने बॉक्स में से टिश्यू लिए और खुद को साफ करने लगी।

मम्मी: उम्म 3 दिन से ये करने की बड़ी इच्छा हो रही थी लेकिन तुम हो के मना कर देते थे। इसलिए यही मौका था.

नयन : मुझे आपसे यह बिल्कुल उम्मीद नहीं थी... लेकिन मुझे बहुत पसंद आया।

मम्मी: तुम्हारी पीढ़ी को ऐसे सरप्राइज बहुत पसंद आते हैं। मैं भी सीख रही हूं और तुम्हारा लंड बहुत टेस्टी है... मुझे पहले ये गंदा लगता था लेकिन जब पहली बार किया तब से इसकी लत लग गई है।

नयन : में यह सुनकर बहुत खुश हो गई। और देखते ही देखते हम रिसॉर्ट ( मॉल ) पहुंच गए। रिसॉर्ट ( माॅल ) एकदम बढ़िया था. वहां स्विमिंग पूल, जिम, गार्डन, पब आदि सब कुछ था। ये देखकर मम्मी बहुत एक्साइटेड थी। उन्हें मेरा हाथ पकड़ा और कहने लगी।

मम्मी: मैं बहुत भाग्यशाली हूं. जो मुझे तुम्हारे तरह बैटा मिला।

नयन : और मैं भी भाग्यशाली हूं जो मुझे आपका साथ मिला ।

मम्मी: हट पागल... ये चांस नहीं है. ये तो लाइफ टाइम अवसर है तुम्हारे लिए। चांस यूज़ कहते हैं जो एक ही बार मिलता है। लेकिन तुम्हें तो मैं रोज मिलती हूं ना।

फिर हम दोनों एक दूसरे को देखकर हंसने लगे..

हम रिसॉर्ट ( माॅल ) के रिसेप्शन पर गए जहां रिसेप्शनिस्ट और मैनेजर दोनों थे। आपका स्वागत है और आप दोनों साथ में बहुत अच्छे लग रहे हैं। मम्मी ने ख़ुशी में मेरा हाथ कस के पकड़ा हुआ था इसलिए उन्हें कहा ।

रिसेप्शनिस्ट : सर आप दोनों की लव मैरिज है ना?

मम्मी ने खुश होकर मेरी तरफ देखा और कहा।

मम्मी: हां आपको कैसे पता चला?

रिसेप्शन : मैडम आप ने सर का हाथ इतने जोर से पकड़ा है।

मैं कुछ बोलने वाला था तभी मम्मी बोली।

मम्मी (जल्दबाजी में): ओह हाँ हाँ हाँ।

फ़िर उन्होंने हमें लिफ्ट की तरफ इशारा किया मम्मी ने मुझे जल्दबाजी में लिफ्ट में चढ़ाया । लिफ्ट अंदर से खाली थी इसलिए अंदर जाने के बाद लिफ्ट का दरवाजा बंद हो गया, मम्मी ने मुझे कोने में ले लिया और मेरे ऊपर टूट पड़ा। वह मेरे होठों को चूसने लगी । काफ़ी देर तक हम एक दूसरे में खोए हुए थे। जैसा ही दरवाजा खुलने लगा तो हम नॉर्मल हो गए। लिफ्ट एक फ्लोर पर जाकर रूकी ।

फिर मम्मी मुझे एक रूम के अंदर ले गई। मैं अंदर गए तो देखा रूम पूरी तरह से सजा हुआ था। कमरे में हर जगह फूल लगे हुए थे और हनीमून कपल लिखा हुआ था। हर जगह दिल के आकार के गुब्बारे भी ये देखकर हम दोनों बहुत खुश थे। मैं रूम देखने लगा तो मम्मी ने दरवाजा लगा दिया।

मम्मी: वाह कितना ख़ूबसूरत है ना ये सब?

नयन : हां

मम्मी : काफ़ी सालो बाद ये सब मेरे लिए हुआ है।

नयन : हाँ , पर हमलोग यहां कपड़ा खरीदने आये हुए हैं ना । तब उन्होंने मुझे सारी बातें समझाईं।

मैं यह सुनकर उन्होंने जोर से गले लगाया। उनके स्तन मेरे सीने में दब गए। मैंने उनकी गांड पर हाथ रखा और सहलाने लगा। मम्मी काफ़ी देर तक मेरी बाहो में थी। उनके स्तन इतने मुलायम थे के मुझे वो खुद से अलग करने का मन ही नहीं हो रहा था।

मुझे एक कॉल आया जिसपर मैं बात करने लगा तो मम्मी बालकनी में चली गई। कॉल ख़तम होने पर मैं भी बालकनी में चला गया। बालकनी से रिसॉर्ट ( माॅल ) का पूरा नजारा दिख रहा था। स्विमिंग पूल में सब लोग एन्जॉय कर रहे थे जिनसे काफी कपल्स थे जो एक दूसरे में लगे हुए थे। ये देखकर मैंने मम्मी की कमर में हाथ डाल के उन्हें पीछे से गले लगा लिया।

मम्मी: मुझे बहुत मजा आ रहा है यहाँ।

नयन : इतनी जल्दी? अभी तो कुछ किया भी नहीं.

मम्मी: धत्त बदमाश…

नयन : ये स्विमिंग पूल देखकर मुझे कुछ याद आ गया।

मम्मी: क्या?

मम्मी: क्या?

नयन : कुछ दिन पहले हम शाम को हमारे छत के पूल में नंगे थे।

मम्मी (शर्माते हुए): हां जहां तुमने मुझे पगलो की तरह चोदा था।

नयन : हां. आप बहुत खुबसूरत लग रही थी तो मुझे कंट्रोल ही नहीं हुआ।

मम्मी: कंट्रोल करने की कोई जरूरत भी नहीं है। फीलिंग्स को दबा कर मत रखो उन्हें एन्जॉय करो।

नयन : अच्छा जी... तो हम एन्जॉय करेंगे?

मम्मी: क्या?

इतना बोल के मैंने उन्हें अपनी तरफ घुमाया और फिर से उनके गुलाबी होठों को चूसने लगा। मम्मी भी शर्मते हुए धीरे-धीरे मेरे होंठ चूस रही थी। हम दोनों काफी देर तक लगे रहे। बस एक दूसरे से अलग होना नहीं चाहते थे। साड़ी में उनकी खुबसुरती गजब ढा रही थी। मैंने उन्हें अपने बाहों में उठाया और बेडरूम में ले गया। बिस्तर के किनारे पर बहुत सारे कंडोम रखे हुए थे जिसे देखकर हम दोनों हंसने लगे।

मम्मी (शर्माते हुए): ये सब देखो... अब इन्हें कौन समझाए हमारे रिश्ते के बारे में।

नयन : समझने वाला कोई नहीं है इसलिए रहने दो हम सिर्फ एक दूसरे में ही खो जाते हैं।

मम्मी : ठीक है… जैसा आप कहें.. मेरे पतिदेव.

नयन : हाये ये शब्द आपके मुँह से सुनकर मेरा लंड फट जाएगा।

मम्मी: अरे नहीं ना... ऐसा कुछ नहीं होगा. मैं बहुत प्यार करूंगी. ख़ुश रखना ही मेरा धर्म है ।

नयन : में शाम तक आपके सारे छेद में लंड डाल के आपकी चीख निकलना चाहता हूँ।

मम्मी (शर्माते हुए): आअहह पीछे थोड़ा दर्द होगा ना... लेकिन कोई बात नहीं बेटे के साथ आई हूं।

नयन : वाह क्या बात है!!

इतना बोल के मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया। वो बिल्कुल किसी कामदेवी जैसी हॉट लग रही थी। मैं उनके ऊपर आ गया और उन्हें हर जगह चूमने लगा। धीरे-धीरे करके उनके बदन के हर हिस्से को चूमने लगा। कुछ देर बाद मैंने उनकी साड़ी को ऊपर उठा दिया जिसे उनके गोरे चिकने पैर नंगे हो गए। उन्हें देखकर लग रहा था कि मम्मी ने कल ही क्लीन किया था।

नयन : लगता है आप ने कल ही सारी तैयारी कर ली थी।

मम्मी ने मुझे बिस्तर पर खींच कर लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर आकर लेट गयी।

मम्मी: हां... मुझे पता है मेरा बेटा मुझे जानवर की तरह प्यार करेगा इसलिए तुम सब पसंद आये इसलिए तैयार कर ली है ‌।

नयन : अच्छा जी।

मम्मी: हां जी।

मैंने उन्हें फिर से पकड़ लिया और उनका पल्लू गिरा दिया और उनका गर्दन और स्तन के पास हर जगह चूमने लगा। मम्मी सिसकारियां ले रही थी और मैं उन्हें प्यार कर रहा था। हम सिर्फ रोमांस कर रहे थे। चुदाई के लिए बहुत वक्त पड़ा था। कभी मैं उनके ऊपर था तो कभी वो मेरे ऊपर थी इस तरह हम एक दूसरे में खोए हुए थे।

अचानक से वो मेरे ऊपर आ गई और उन्हें मेरे हाथ पकड़ के किस करना चालू कर दिया। काफ़ी देर तक हम एक दूसरे की आँखों में देखकर बने रहे। हम दोनो के होंठ लार से भीग चुके थे। फिर हम अलग हुए लेकिन मम्मी मेरे ऊपर ही थी और उन्होंने मेरे हाथों को पकड़ रखा था। उनके बाल उनके चेहरे पर आ गई थी जो बेहद खूबसूरत लग रही थी।

नयन : आपके हमारे रिश्ते में कुछ गलत नहीं लगता।

मेरा सवाल सुनकर वो थोड़ी सी सीरियस हुई और कहने लगी।

मम्मी: सच में अब मैं इसके बारे में नहीं सोचती...शुरूआत में बहुत सोचती थी और उसे मेरा दिमाग खराब हो जाता था। लेकिन जब मैंने वो सोचना छोड़ दिया तब मेरी जिंदगी ही बदल गई।

नयन : मैं बहुत पहले से आपके बारे में सोच रहा था लेकिन आपको जिस्म के आगे में जलते हुए देखने के बाद मुझसे रहा नहीं गया और बस हो गया।

मम्मी: हम्म , अब मुझे कभी अकेला महसूस नहीं होता। मेरी जरूरतों को तुम बहुत अच्छे से संतुष्ट कर देते हो। कभी कभी तो हद से ज़्यादा चोदते हो फिर बदन दर्द करने लगता है लेकिन उस प्यार के सामने वो कुछ भी नहीं लगता ।

नयन : मैं आपको जब भी देखता हूं तो मेरा मन करता है कि हम दोनों बेडरूम ही रहे और दिन रात मैं आपको प्यार करता रहुं । आपको पता है आपकी कामुक आवाजों वाली सिस्कारियां सुनने में बहुत मजा आता है। मेरा जोश बढ़ जाता है.

मम्मी : मुझे पता है... और मैं दोनों तरफ से तुमसे प्यार करती हूं। एक माँ के हिसाब से और एक gf के हिसाब से भी। तुम्हारी चिंता भी है और तुमसे चुदवाने की हवस भी।

इतना बोलते ही उन्होंने मेरे गर्दन को अपनी जीभ से चटाना शुरू कर दिया और मैं लेटे हुए सिर्फ आअहह.. आअहह..वाली आवाज निकाल रहा था।



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मेरी नज़र उनको नंगे पेट पर थी। उनकी नाभी बहुत खुबसूरत लग रही थी। ये सब देखकर मैंने मम्मी को चोदने का मन बना लिया था।

मैं उनके करीब गया और कहने लगा।

नयन : मम्मी आप बहुत हॉट लग रही हो।

मम्मी: सच्ची ।

नयन : मुझ पर विश्वास करो आप एकदम जवान लड़की लग रही हो। आपको ऐसा देखकर कोई भी घायल हो जाएगा।

मम्मी: लेकिन मुझे तो सिर्फ तुम्हें घायल करना है।

नयन : में तो हो चुका हुं .

मेरी बात सुनकर उन्होंने मुझे अपना करीब खींचा और कस के गले लगाया और मैंने भी उनकी पतली सी कमर में हाथ डाल के उन्हें गले लगा लिया। उनके जिस्म की भीनी-भीनी खुशबू मुझे पागल कर रही थी। हम अलग हुए और उन्होंने मुझे गाल पर किस किया।

मम्मी: मैं यह सब पहली बार कोशिश कर रही हूं वो भी तुम्हारी वजह से... धन्यवाद मेरी नयन ।

मम्मी के चेहरे पर बहुत ग्लो आ रहा था। वो शर्मते हुए बेहद सुंदर लग रही थी। उनके चेहरे पर एक तिल है जो उनके गाल पर है वो उनकी खूबसूरती को और भी बढ़ाता रहा है ।

मम्मी और मेरा ये रिश्ता शुरू होने से पहले हम नॉर्मल थे तब भी मुझे उनका तिल पसंद आता था। तब मैं उनके इतने करीब नहीं जाता था लेकिन कभी-कभी जब मुझ पर नियंत्रण नहीं होता तब मैं उनके गाल पर चुम लेता था जहां वो तिल था। उनको वो बहुत अच्छा लगता था.

उनके जिस्म पर एक और तिल है जो उनकी पीठ पर थोड़ा सा दाहिनी ओर है। मैं अक्सर उन्हें लिटा कर पीछे से चोदता हूं तब उनकी पीठ को पागलों की तरह चुमता और चाट लेता हूं। वो तिल को देखकर उन्हें प्यार करने का जोश और बढ़ जाता था।


फिर मम्मी ने मेरा हाथ पकड़ा और हम दोनों पति पत्नी की तरह चलते हुए लंच के लिए चले गए। लंच करने गए थे वहां हमारे आते ही सारे जवान लड़के और शादी शुदा मर्द मम्मी को ही घूर रहे थे। मैंने नोटिस किया कि हम लंच कर रहे थे फिर भी सारे मर्दों की नज़र मम्मी के जिस्म को घूर रही थी। खास करके उनका नंगा पेट देखकर सारे मर्द पागल हो चुके थे। लड़के तो मम्मी के सपने देख रहे थे और कुछ मर्द उन्हें देखकर अपने लंड की खुजली को शांत कर रहे थे।

हमने यहां वहां की बातें करते हुए लंच किया और वहां से निकल गए। कुछ देर वहां के बगीचे में बैठे जहां कुछ जोड़े थे जो एक दूसरे से लगे हुए थे। कोई रोमांटिक बातें कर रहा था तो कोई लड़का अपनी गर्लफ्रेंड को सहला रहा था तो कोई लड़का अपनी बीवी को किस कर रहा था। आप समझ सकते हैं कि क्या परेशानी होगी। उन्हें देखकर मम्मी बहुत शर्मा रही थीं।

मम्मी: ये सब लोग खुलेआम कैसे कर लेते हैं ये सब?

नयन : इसमें क्या बड़ी बात है

मम्मी: क्या अकेले में ऐसा करना ठीक है पर ऐसे खुलेआम करना थोड़ा अजीब नहीं है?

नयन : हर चीज़ का मजा होता है। आप आज तक साड़ी और वन पीस पहनती थीं लेकिन आज जींस टॉप पहननी हो तो आपको पसंद आया ना।

मम्मी: हम्म।

इतना बोलने के बाद मुझे आइडिया आया और मैंने उनके कमर में हाथ डाल दिया। हम बातें करने लग गए और मैं धीरे-धीरे मम्मी की पीठ को सहलाने लगा। कुछ देर बाद उसका असर होने लगा और वो थोड़ी सी परेशान दिख रही थी।

मम्मी: रुक जाओ... क्या कर रहे हो.

नयन : कुछ नहीं... अपनी बीवी को छेड़ रहा हूँ।

मम्मी (शर्माते हुए): बीवी? वो मैं सिर्फ उन लोगों के सामने हूं।

नयन : नहीं... हमने क्या तय किया था कि रिसॉर्ट में जाते ही हम पति पत्नी बन जाएंगे।

मम्मी: हम्म।

मैं उनको थोड़ा करीब आया और हल्के से उनके गले पर किस करने लगा। मम्मी बहुत शर्मा रही थी इसलिए मैं ज्यादा आगे नहीं बढ़ सका। मुझे उनके अंदर का ये डर निकलना था तो मैंने कुछ सोचा और कहा।

नयन : चलो... कहीं और चलते हैं।

मम्मी: ठीक है।

हम दोनों वहां बगीचे में ही घूम रहे थे जहां थोड़ा सा शेड था और कोई हमें सीधे नहीं देख सकता था लेकिन लोग हमारे पीछे से हमें देख सकते थे। मैं उन्हें वहां ले गया. मैंने मम्मी को दीवार के सहारे खड़ा किया और उनके करीब जाने लगा।

वो शर्मते हुए मुझे रोक रही थी लेकिन अब मेरा रुकने का इरादा नहीं था। मैंने झट से उनकी गर्दन को अपने हाथों में पकड़ा और उनके करीब जाने लगा। हम एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे। मम्मी का चेहरा शर्म से लाल पड़ चुका था और हमारा वक्त उनके साथ रोमांस करने का मजा ही कुछ अलग था।

धीरे-धीरे करके मैंने उनके होठों को चूसना शुरू कर दिया। उन्होंने अपने हाथ से मुझे हल्का सा पीछे धक्का देने लगी लेकिन जब मेरी पकड़ मजबूत थी तो उन्होंने ज्यादा फोर्स नहीं किया। हम एक दूसरे की आंखों में देखते हुए होठों को चूस रहे थे। मम्मी ने भी थोड़ी देर बाद मेरा साथ देना शुरू किया।

कुछ देर में हम एक दूसरे में खो गए और वो मेरे बालों को सहलाते हुए मुझे उत्साहित कर रही थी। मैं उनके मुंह में जीभ डाल देता हूं और वो जीभ को चूसने लगती हैं तो कभी वो ऐसा करती हैं। हम दोनों एकदम जोश में ये सब कर रहे थे।

एक वक्त आया जब उनपर नियंत्रण नहीं हुआ और उन्होंने मेरे हाथ को पकड़ के अपने चूची पर रखा। मैं समझ गया कि वो बहुत गरम हो चुकी है। मैंने उनके चूची को टॉप के ऊपर से पकड़ लिया और हल्के हल्के मसलने लगा। गुब्बरो जैसे बड़े चूची मेरे हाथों में थे और उनके साथ खेलने में बड़ा मजा आ रहा था।

मम्मी कामुक आवाज़ निकल रही थी कभी मेरे होठों को काट देती। ये इशारा था मेरे लिए कि वो चुदवाना चाहती है लेकिन मैंने उन्हें थोड़ा और छेड़ने का फैसला किया।

होंठों से उन्हें हर जगह चूमने लगा। गाल, आंखें, गर्दन, कान, चूची के आस-पास, आदि। इतना सारा प्यार मिलने की वजह से उनकी हालत खराब होने लगी। सांसे तेज हो चुकी थी और शरीर कांप रहा था उनका।

मम्मी: बेबी।

नयन (उन्हें हर जगह चूमते हुए): हम्म।

मम्मी: चलो ना।

नयन : कहां .

मम्मी: तुम्हें समझ नहीं आया?

नयन : क्या.

मम्मी: अरे रूम में चलते हैं.

नयन : क्या पसंद नहीं आया।

मम्मी: बहुत अच्छा लग रहा है.

नयन : फिर जाना कियो है .

मम्मी: अरे लेकिन कब तक यहीं करेंगे... मुझे इसके आगे जाना है।

नयन : मतलब.

मम्मी: उफ़ मुझे तुमसे चुदना है... प्लीज़ चलो ना अब कंट्रोल नहीं हो रहा मुझसे।

मैंने उन्हें देखकर स्माइल दी और हम चले गए कमरे में । हमारा फ्लोर आते ही मम्मी झट से रूम की तरफ भाग गई। शायद वो बहुत गरम हो चुकी थी। उन्हें देखकर मैं हंसने लगा । मैंने रूम को अनलॉक किया और हम अंदर चले गये। अंदर जाते ही मम्मी ने अपना टॉप उतार के फेक दिया। मैंने उनके पीछे हाथ डाल कर ब्रा का हुक निकाल दिया। ब्रा झट से मेरे हाथ में आ गई. मम्मी के लिए ये सब शॉकिंग था। और उनके चूची पर हमला बोल दिया। उन्हें दोनों हाथों में पकड़ के दबाने लगा। बिना ब्रा के वो उछल रहे थे और काफी बड़े लग रहे थे। उनके निपल्स भी कड़क हो चुके थे। मैंने उन्हें दबाना शुरू किया और वो आअहह आअहह करने लगी। वो बहुत तड़प रही थी.

मम्मी: आअहह... ओह्ह्ह... उम्म्... हान हाँ हाँ बेबी उम्म्म्म... स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्....

मैंने उनकी जींस भी उतार दी। वो सिर्फ पैंटी में थी. पैंटी काफ़ी गीली हो चुकी थी।

मम्मी: आअहह बेबी मेरी चूत को प्यार करो आअहह.......

मैंने झट से पैंटी को उतार दिया और चूत के होंठों को सहलाने लगा। वो जोर जोर से मेरा नाम लेने लगी। फिर मैंने चूत को चूसना शुरू किया और कुछ ही देर में वो बहुत मचलने लगी। उन्होंने मेरे बाल पकड़ लिए और चूत पर दबाने लगी। मैंने चूत के होठों को फेलाया और फिर से चूसने लगा। चूत बहुत पानी छोड़ रहा था और काफी गरम हो चुकी थी।

तभी अचानक से उन्होंने जोर से मुझे चूत पर दबाया और वो झड़ गई। चुत के पानी से उन्होंने मेरे चेहरे गीला कर दिये और वो जोर जोर से हाफने लगी।

मम्मी: आअहह.... आअहह..... हे भगवान तुम बहुत अच्छा फोरप्ले करते हो उम्म मुझे गरम करने के लिए ताकि मुझे नया अनुभव मिले आअहह......।

नयन : हां आप मेरी बीवी बन चुकी हो तो जो मुझे पसंद है वो सब आपके साथ तो करूंगा ही ना।

मम्मी मुझे देखकर मुस्कुराने लगी.

मैंने अपने कपड़े उतार दिये हम दोनों कमरे में नंगे थे। मेरा लंड पहले से ही खड़े थे इसलिए मम्मी ने उसे हाथ में लेकर चूसना शुरू किया। वो बहुत अच्छे से मुँह में लेकर चूस रही थी। कभी उसपर अपनी जीभ घुमा देती तो कभी उसे पूरा अंदर तक ले जाती। थोड़ी देर बाद वो भी गरम हो गई।

नयन : आप डॉगी स्टाइल में आओ... आज आप गांड मारने का मन बना रहे हैं।

मम्मी: ठीक है।

मम्मी डरते हुए डॉगी स्टाइल में आ गई। मैं उनके पीछे खड़ा हो गया। उनकी गांड बहुत गर्म लग रही थी। मैंने उनके चुत्तड़ो पर हाथ घुमाया और मम्मी सिस्कारियां लेने लगी।

नयन : मम्मी आज तो बहुत मजा आएगा। आप जिंदगी में दूसरी बार अपनी गांड मरवा रही हो।

मम्मी: हां लेकिन दर्द भी होगा... प्लीज आराम से करना।

नयन : हां.

मैंने तेल की बोतल से बहुत सारा तेल लेकर मम्मी की गांड में डाल दिया जिससे वो एकदम चिकनी हो गई। थोड़ा सा तेल अपने लंड पर भी लग गया। मैंने लंड को थोड़ी देर हिलाया जिससे वो पूरी तरह से तैयार हो गया।

मम्मी ने अपने दोनों हाथों से बेडशीट को पकड़ लिया। मैंने उनकी गांड को सहलाते हुए लंड को गांड के छेद पर रखा और रगड़ने लगा। गांड का छेद बहुत छोटा था और लंड काफी मोटा था। मम्मी को दर्द बहुत होने वाला था लेकिन मैं उन्हें आराम से चोदने वाला था।

मैंने उन्हें बताया बिना धक्का मारा और पहली बार में लंड का टोपा अंदर चला गया। मम्मी जोर से चिल्लाई मैंने झट से उनकी कमर को पकड़ लिया।

मम्मी : उउइइइ... माआआ.. मर गईईईई.. मैंन्न.. आअह्ह्ह ..निकालो बेटा आअह्ह्ह.. बहुत दर्द हो रहा है हैइइइ आअह्ह्ह्ह.. उउम्म्म्म.. ओह्ह्ह ..गॉडड।

नयन : बस थोड़ा सा बर्दाश्त करो शुरूवात में दर्द होगा।

वो थोड़ी देर शांत रही और मैंने फिर से धक्का लगाया, इस बार मेरा आधा लंड अंदर चला गया। मम्मी रोने लग गई. वो हिलने की कोशिश कर रही थी लेकिन मैंने कस के पकड़ा था इसलिए वो हिल नहीं सकी।

मम्मी की गांड बहुत टाइट थी. मेरे लंड को जकड़ लिया था. दर्द मुझे भी हो रहा था लेकिन गांड मरने का शौक इतना था के अब पीछे हटना असंभव था। मैंने उनकी चूत में उंगलियां डाल के अंदर बाहर करने लगा जिसे वो गरम होने लगी।

कुछ देर बाद वो भी जोश में आ गई और मैंने फिर से धक्का मारा। इस बार मेरा पूरा लंड उनकी गांड में घुस गया। मम्मी मेरा नाम लेकर जोर से चिल्ला रही थी लेकिन इस बार उन्हें भी गांड मरवाने का मन था।

लंड पूरा अंदर जाने के बाद हम दोनों को दर्द हो रहा था। कुछ देर हम दोनो वैसे ही थे। कुछ देर बाद जब दर्द कम हुआ तो उन्हें मुझे धक्के मारने को कहा। मैंने धीरे-धीरे करके लंड को अंदर बाहर करने लगा तो हम दोनो की सिस्कारियां निकलने लगी।

मैंने थोड़ा सा तेल और डाला जिसे अब गांड मरने में आसान हो गई। मम्मी को भी मजा आने लगा और वो अपने बेटे से गांड मरवा रही थी।

नयन : आअहह मम्मा आई लव यू आपकी गांड मरने का सपना मेरा आज पूरा हो गया।

मम्मी: आअहह हां और आज से मैं पूरी तरह से तुम्हारी हो गयी आअहह उम्म्म बहुत मजा आ रहा है आअहह।

मैंने धक्के लगाते हुए उनको बालो को पकड़ लिया। हम दोनों वाइल्ड सेक्स की तरफ बढ़ रहे हैं। ढक्को की रफ़्तार तेज़ हो रही थी।

कमरे में मम्मी की आवाज़ गूंजने लगी। मेरा जोश बढ़ रहा था. मैं लंड को पूरा तरह से बाहर निकाल के अन्दर डालने लगा. उनकी गांड पर मैं जोर से चाटा मार देता था जिसे वो आअहह आअहह कर रही थी।

कुछ ही देर में मैंने इतनी स्पीड बढ़ा दी के हम दोनों चिल्लाने लगे। बिस्तर भी जोर जोर से हिलाने लगा। मुझसे डर था कहीं वो टूट ना जाए लेकिन मुझे उसकी परवाह नहीं थी। मम्मी की गांड इतनी गर्म लग रही थी के मैंने अपनी सारी ताकत लगा दी।

मैंने करीब आधे घंटे तक अलग-अलग पोजीशन में उनकी गांड मारी। उसके बाद मैं अंदर ही झड़ गया। हम दोनो थक के बेहाल हो चुके थे। मैं मम्मी के ऊपर ही लेट गया। हम दोनों हफ़्ते हुए मुस्कुरा रहे थे। मम्मी के चेहरे की ख़ुशी बता रही थी के उनको गांड मरवाने में कितना मज़ा आया।

मम्मी: अपने बेटे को पहली बार कुछ ऐसा दिया जो वर्जिन था। मुझे दर्द बहुत हुआ लेकिन तुम्हारी ख़ुशी के सामने ये कुछ भी नहीं था।

नयन : धन्यवाद मम्मी।

मम्मी: मुझे बहुत मजा आया गांड मरवाने में और तुम बहुत अच्छा चोदते हो। ऐसे ही शाम तक चोदना। फिर मम्मी को थोड़ा आराम करने दिया क्योंकि उनकी गांड में बहुत दर्द हो रहा था। मैंने तय किया कि शाम तक 5 बार चोदूंगा। फिर हम दोनों को कब आंख लगी पता ही नहीं चला।
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जब मैं दोपहर 3 बजे जागा तो सीधे बालकनी में चला गया। वापस आने के बाद मैंने देखा कि मम्मी सोई हुई थी। तभी मुझे कुछ मस्ती करने का मन हुआ।

मम्मी तोलिया में थी कंबल के अंदर , और रिसॉर्ट ( माॅल ) में आने के बाद से वो अंदर ब्रा पैंटी नहीं पहनती थी। वो बहुत गहरी नींद में थी, तो मैं चुपके से उनके कंबल के अंदर चला गया। उनकी जांघ फेल हुई थी , जिसमें आसान हुई अंदर जाने में।

फिर हल्के से मैंने उनकी तोलिया को ऊपर की तरफ उठाया, जिसे वो नीचे से नंगी हो गई। अब मैं उनके दोनों जांघों के बीच में था। मैंने अपनी उंगलियों को चूत पर रखा, और सहलाने लगा। उन्हें कुछ रिएक्ट नहीं किया । क्योंकि वो बहुत गहरी नींद में थी।

मैंने थोड़ा सा और आगे बढ़ा, और चूत के अंदर उंगली डाल के अंदर-बाहर करने लगा। मुझे बड़ा मजा आने लगा। कुछ देर बाद मम्मी ने थोड़ी सी हलचल की, तो मैं उनकी टांगों और जांघों को छूने लगा। वो कामुक आवाज़ निकालने लगी. उनकी आंखें बंद ही थीं नींद में होने के कारण।

मम्मी: आहह उम्म आआहह बहुत अच्छा लग रहा है, उम्म हा, ऐसे ही करो।

थोड़ी देर बाद उनकी चूत से थोड़ा-थोड़ा पानी निकलने लगा, जिसे मैं समझ गया अब वो गरम हो चुकी थी। मैं उंगलियों को तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। मम्मी अब होश में आ गई और उन्होंने ने कहा-

मम्मी: आह्ह्ह कौन है?

नयन : में हुं आपका बेटा

मम्मी: आअहह तुम? ओह, क्या कर रहे हो ?

नयन : आपको नया अनुभव देना चाहता हूँ।

मम्मी: ठीक है बेटा।

उन्होंने मेरे सर पर हाथ रखा और सहलने लगी। फिर मैंने उनकी जाँघों को जीभ से चाटना शुरू किया। मम्मी मचलने लगी. कुछ देर बाद मैंने चूत के अंदर जीभ डाल दी, और जीभ से चोदने लगा। उनकी सिस्कारियां निकलने लगी. मुझे भी बड़ा मजा आ रहा था इस तरह उन्हें छेड़ने में।

कुछ देर बाद वो झड़ गई और चूत के पानी से मैं पूरी तरह से गीला हो चुका था। मैं जल्दी से वॉशरूम जाकर खुद को साफ करके आया। मम्मी बिस्तर पर लेटे हुए ज़ोर-ज़ोर से सांस ले रही थी।

मम्मी: तुम सच में कमाल के हो. मैंने सोचा नहीं थी।

नयन : हर तरह का अनुभव होना चाहिए ना।

मम्मी: हां, तुम्हारी बीवी बन के बहुत मज़ा आ रहा है।

नयन : और आपको इस तरह झड़ते हुए देख कर मुझे।

फिर मम्मी उठी, और फ्रेश होने चली गई। मम्मी फ्रेश होकर बाहर आई, और मैं क्या देखता हूं, उन्हें कुछ भी पहचाना नहीं था। वो पूरी तरह से नंगी थी.

नहाने की वजह से उनके जिस्म से पानी की बूंदे नीचे गिर रही थी। वो बहुत हॉट लग रही थी. ऐसा लग रहा था जैसे पानी में से आग निकल के बाहर आई हो। वो मिरर के पास जाकर बैठी. उनके हाथ में तौलिया था, जिसमें वो खुद के बालों को साफ कर रही थी। उनको देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया.

मैंने उन्हें आज तक ऐसा करते हुए कभी नहीं देखा था। आज मम्मी के तेवर अलग ही हैं। वो एक-दम मोहक लुक देकर आयने में से मुझे देख रही थी, जैसे वो मेरा रिएक्शन देखना चाह रही थी।

मैं उठा, और उनके पास जाकर खड़ा हुआ। हम दोनो आयने में एक दूसरे को देख रहे थे।

नयन : बहुत कातिलाना लाग रही हो .

मम्मी: धन्यवाद।

मैंने उनकी पीठ पर हाथ रखा और उन्हें सहलाने लगा। शायद वो ऐसी ही हरकत की तलाश में थी। मैं उन्हें यहां-वहा सहलाने लगा. वो बार-बार अपनी आंखें बंदकर रही थी। सामने आयने में उनके मोटे-मोटे चूची झूल रहे थे।

सच में वो नारियल की तरह लग रहे थे। और निपल्स भी काफी मोटे थे. मैंने उन्हें चूस-चूस के ही ऐसा कर दिया था। मम्मी दूध जैसी गोरी थी, इसलिए उनके जिस्म पर गिरा हुआ पानी एक-दम हीरे की तरह चमक रहा था

नयन : आप सच में काम-देवी लग रही हो।

मम्मी: यह सिर्फ तुम्हारे लिए है। आज सुबह तुमने मुझे पागल कर दिया। मैं झड़ गई थी, लेकिन फिर भी ऐसा लग रहा है जैसे मुझे और चाहिए। आज तक कभी ऐसा नहीं लगा.

नयन : आपकी चूची बेहद सुंदर लग रहे हैं।

मम्मी: धन्यवाद, बचपन में तुम इन्हें चुनते थे और बड़े होकर इनसे प्यार करने लगे हो।

नयन (शर्मते ह्यू): हां .

मम्मी (अपनी नाज़ुक सी चूत को जांघ फैलाकर दिखाते हुए): छोटे थे तब मेरी इसी चूत से निकले थे, और आज इसी के अंदर अपना दम-दार लंड डाल के मुझे दिन रात चोद रहे हो।

उन्होंने जैसा ही अपने जांघ को फैलाया, हल्के से चूत के होंठ खुल गए, जिसकी चूत के अंदर का गुलाबी हिसा दिखने लगा। चुत का दाना भी बेहद सुंदर लग रहा था। जैसे वो मुझे ही बुला रही थी।

मम्मी: और बचपन में तुम छोटे थे, तब मैं तुम्हारे सामने कपड़े बदल दिया करती थी। लेकिन आज तुम खुद मेरे कपड़े उतार के मुझसे प्यार करते हो।

वो इतने सेक्सी अंदाज़ से कह रही थी कि मेरा मूड ही बन गया। पता नहीं आज उन्हें कहा से ये सब सीखा था। ये उनका दूसरा वर्जन लग रहा था।

मेरी नज़र उनकी चूत पर थी जिसे देखकर मेरे मुँह में पानी आ रहा था। उसे देखकर लग रहा था कि मम्मी ने उसे अभी अच्छे से साफ किया हो। मम्मी ने मेरी नज़र पकड़ ली और झट से अपने जांघ को बंद कर लिया।

मम्मी: हां तो मैं कह रही थी कि तुम छोटे थे तब मैं तुम्हें बिना कपड़ों के रोज देखती थी। लेकिन आज ये स्पेशल मौका तुम्हें मिला है।

इतना बोल के वो खड़ी हुई, और उनके दोनों हाथों को सामने वाले ड्रेसिंग टेबल पर रख के मुझे अपनी गांड दिखने लगी। उनके चूतड बहुत बड़े हैं उन्हें हल्के से अपनी चूतड़ों फैलाए, जिससे उनकी गांड का छोटा सा छेद मुझे दिखने लगी। मैंने कुर्सी को साइड में रखा और उनके पीछे से पकड़ लिया।

मम्मी: अब आये ना मेरे करीब.

नयन : आपने मजबूर कर दिया मुझे।

हम दोनो एक-दम करीब थे। मैंने उनके गर्दन पर चूमना शुरू कर दिया, तो वो थोड़ी कामुक आवाजें निकलने लगीं। नहाने की वजह से वो कुछ ज्यादा ही गोरी लग रही थी। वो दूध की तरह चमक रही थी मेरे सामने। मैं आईने में उन्हें देखते हुए प्यार कर रहा था।

हम दोनो बहुत गरम हो चुके थे। मुझे वो खुले बालों में देखना पसंद है। इसलिए मैंने उनके बालों को खोल दिया, जिसे वो एक दम कयामत लग रही थी। उनके लम्बे बाल गांड तक आते थे। उफ़्फ़्फ़ उनसे ख़ूबसूरत औरत मैंने आज तक नहीं देखी। वो अपनी कामुक अदा के साथ मुझे देख रही थी।

नयन : आज आपको क्या हुआ है? आज तक आप ऐसे कभी नहीं थे.

मम्मी: क्यों? पसंद नहीं आई मैं ऐसे?

नयन : ऐसे तो आप भी ज्यादा हॉट लग रही हो। बस मुझ पर नियंत्रण नहीं हो रहा।

मम्मी: कंट्रोल क्यों कर रहे हो? हम यहां हनीमून के लिए ही आए हैं। तुम्हें मेरे साथ जो करना है करो. बस मुझे यहाँ खुल के तुमसे चुदना है।

उनकी बात सुनकर मेरे अंदर का शैतान जाग गया। मैंने झट से अपना शर्ट उतार के फेंक दिया। अंडरवियर को घुटनो तक नीचे कर दिया। मेरा लंड इतना तन्ना हुआ था, कि उसकी लम्बाई और मोट दिख रहा था।

मम्मी (लंड को देखकर): उफ्फ्फ मैं ये सब इसके लिए ही कर रही हूं। इसने मुझे पागल कर दिया है। उठते, बैठते, सोते, जागते बस इसकी ही कल्पना कर रही हूं।

मैंने लंड को हाथ में पकड़ा और हिलाने लग गया। कुछ देर में वो पूरी तरह से लंबा और मजबूत हो गया।

मैंने मम्मी को फिर से गले लगा लिया। इस बार लंड उनके जांघों के बीच में फंस गया जिसे वो फील करके गरम हो रही थी। वो थोड़ी तड़प रही थी. मैं उन्हें हर जगह सहला रहा था। बस पागल हो गया था उन्हें ऐसे देखकर और मुझे यकीन था कि आज मैं उन्हें कुछ ज्यादा ही चोदूंगा।

मैं दोनों हाथों को सामने ले गया, और चूची को पकड़ लिया। उन्हें हल्के-हल्के मसलने लगा. हम दोनों को बड़ा मजा आने लगा। धीरे-धीरे हम दोनो ही आवाज निकाल रहे थे। बहुत कामुक सीन था.

फ़िर मैं नीचे से लंड को आगे पीछे करने लगा, जिसे उनको और मज़ा आ रहा था। वो बिल्कुल किसी 25 साल की लड़की की तरह चुदने के लिए तड़प रही थी और आवाज़ निकल रही थी।

मम्मी: आअहह उम्म्म आअहह हाँ, बस करते रहो. उम्म, बहुत अच्छा लग रहा है। आअहह हा, इसे अब अंदर भी डाल दो मेरी जान। आह्ह्ह अपनी मम्मी को कब तक ऐसे तड़पाना चाहिए हो? आअहह मुझे अपना बना लो.

मैं बहुत उत्साहित हूं. उन्हें मैंने इशारा किया और मैं थोड़ा सा पीछे हुआ। उन्होंने हाथ आगे करके लंड को पकड़ लिया और उसे हिलाने लगी।


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मम्मी: उफ़ कितना बड़ा है ये आअहह, मैं तो मर रही हूँ इसे अंदर लेने के लिए आअहह।

मैं बहुत जोश में था. मम्मी ये सब मुझे जोश दिलाने के लिए कर रही थी। थोड़ी देर बाद उन्हें अपने जांघों को और फैला दिया, और लंड को चूत पर रखा। मैं थोड़ा सा आगे पीछे करके उसे चूत के होठों पर रगड़ने लगा। मम्मी बहुत तड़प रही थी.

मम्मी: अब डाल भी दो. मेरे अंदर आग लग गई है आअहह.

उनकी बात सुनते ही मैंने ज़ोर से धक्का मारा, और एक ही झटके में पूरा लंड अंदर चला गया। उन्होंने अपने दोनों हाथ से ड्रेसिंग टेबल पर कास के पकड़ लीजिए। उन्हें पता था अब तूफान आने वाला था। मैंने उनके कमर को पकड़ लिया, और ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा।

मम्मी लंड लेते हुए आवाज निकाल रही थी. उनकी चूत काफी टाइट थी, इसलिए मुझे मजा आ रहा था उनको चोदने में। मेरा लंड पूरा तरह से अंदर-बाहर हो रहा था। मैं पूरी तरह से लंड को बाहर निकालकर फिर अंदर डाल देता था। उनकी चूत के बच्चे-दानी तक लंड पहुंच रहा था, जिसमें वो पागल हो रही थी। मैं उनके चुत्तड़ों को सहलाने लगा।

मम्मी: आअहह... और ज़ोर से चोदो मुझे आअहह... आअहह. हा तुम मुझसे बहुत प्यार करते हो आअहह। हा धक्के मारो आअहह हां हां.

मैं ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा। मेरी कमर उनकी गांड पर ज़ोर-ज़ोर से लग रही थी, जिसे छप-छप-छप आवाज़ आ रही थी। पूरे कमरे में हम दोनो की ही आवाज सुनाई दे रही थी। चुत से हल्का-हल्का पानी निकलने लगा था.

मम्मी को ज़ोर-ज़ोर से चोदने की वजह से ड्रेसिंग टेबल हिलने लगा था। उनके एक्सप्रेशन बता रहे थे कि वो कितना एन्जॉय कर रही थी।

नयन : मैं किस्मत वाला हूं कि मुझे आपको चोदने का मौका मिला।

मम्मी: ये मौके तुम्हें बार-बार दूंगी. पागल कर दिया है तुमने मुझे। आअहह, और अब तो तुमने पति मान लिया है। बस मुझे रोज़ ऐसे ही आआह्ह्ह्ह चोदना। मुझे रोज़ चुदवाना है तुमसे.

नयन : हां, आज से आप मेरी हुई। आअहह सब कुछ करूंगा आपके साथ। दिन रात चोदूंगा और जब हम दोनो अकेले हो तो आप कपड़े नहीं पहनोगी आह्ह, बिल्कुल ऐसी ही रहोगी

मम्मी (मुस्कुराते हुए): आअह ठीक है, जो तुम कहो।

मैं स्थान बदलना चाहता था, लेकिन मम्मी को वही चोदना था, इसलिए मैं उन्हें लगतार चोदता रहा। मैं उन्हें हर जगह छूने और चाटने लगा, जिसमें वो जन्नत की सैर कर रही थी। बार-बार उनकी जाँघों को सहलाता था, जो उनका कमजोर बिंदु था।

मैंने उनकी पीठ को चूमना और चाटना शुरू किया, जिसे वो पागल होने लगी थी। मैंने एक उंगली को उनकी गांड के अंदर डाल दिया, जिसे वो अचानक से उछल पड़ी।

मम्मी: आअहह, क्या कर रहे हो बेबी आअहह?

नयन : आपको एहसास दिला रहा हूं कि मैं आपकी गांड मारने के लिए कितना पागल रहता हूं।

मम्मी: मैं जानती हूं जानू. आज तक तुम्हारे पापा को भी मरने नहीं दिया मैंने।

नयन: मुझे पता है वो भी आपकी गांड मारना चाहता है।

मम्मी शॉक होकर पूछने लगी: तुम्हें कैसे पता?

नयन : पापा जब रांची जाने वाले थे, तब आप उन्हें रोक रही थी। तो उन्होंने कहा कि तुम अपनी गांड मारने दोगी तो मैं रुक जाउंगा। लेकिन आपने उन्हें अनुमति नहीं दी

मम्मी (शर्माते हुए): उफ्फ, तुम भी ना। ये सब तुम्हें कैसे पता?

नयन : जब आप दोनों किचन में रोमांस कर रहे थे, तब मैंने देखा था

मम्मी: हे भगवान! मतलब तब से तुम्हारी नज़र थी मुझ पर?

नयन : हम्म, और ये भी पता है कि पापा को जाने से पहले उन्हें ब्लोजॉब चाहिए था।

मम्मी ये सब सुन कर एक-दम पानी-पानी हो गई थी।

मम्मी: हा उन्हें ब्लोजॉब लेना बहुत पसंद है।

नयन : हां, लेकिन मैं चाहता था कि आप अगला ब्लोजॉब अपने बेटे को दे। इसलिए मैंने आप दोनों को आवाज दी और ब्लोजॉब नहीं हुआ।

मम्मी: बहुत बड़े शैतान हो तुम. सच कहूं तो हमें वक्त मिला कि उनका लंड चुसने का बड़ा मन हो रहा था, क्योंकि अगली बार ये मौका कब मिलेगा ये हम दोनों को भी पता नहीं था।

नयन : आपने इतने साल उनकी बहुत सेवा की है। अब जरा अपने बेटे को ये मौका दो।

मम्मी रुक गई और वो मेरी तरफ पलट के खड़ी हुई। उन दोनों हाथों को मेरी गर्दन में डाल दिया, और मुझे चोदने का इशारा किया। मैंने फिर से लंड को चूत में डाल दिया और धक्के लगाने लगा।

मम्मी: अगर तुमने वो वाली सेवा मुझसे करवाई है, तो मुझे हर तरह से सेक्स का मजा दिलाना होगा। इतना कामुक बेटा मिला है मुझे बस अब जिंदगी में चुदाई का सुख मिलना चाहिए। मुझे पागल कर दो बेटा.

इतना बोल के हम दोनों एक-दूसरे के होंथो चुनने लगे। मैंने उन्हें करीब आधे घंटे तक चोदा। इस बीच वो 2 बार झड़ गई। मम्मी के झड़ने के बाद भी मैंने उन्हें फिर से सिड्यूस किया, और उन्हें गरम करके चोदा। फ़िर उनकी चूत में ही झड़ गया।

फिर क्या था, दिन भर हम कमरे में ही रहे। मम्मी ने मुझे बाहर जाने ही नहीं दिया। हम दोनों ही बिना कपड़ों के और पूरे दिन एक दूसरे से लिपटे रहे। कभी ओरल सेक्स कर रहे थे, तो कभी मैं उनकी गांड मार रहा था।

दिनभर कमरे में उनके चूदाई की आवाज आ रही थी। पापा ने उन्हें हनीमून पर जितना चोदा नहीं था, मैं उसे ज्यादा चोद रहा था। हमने ना किसी के कॉल उठाए, और ना कुछ किया। बस एक-दूसरे में खोये हुए थे। वो बिल्कुल जलपरी की तरह लग रही थी। मैं उन्हें हर जगह चोद रहा था। कभी बिस्तर पर, कभी सोफ़ा पर, कभी किचन में, कभी ज़मीन पर, कभी किसी कोने में दीवार के सहारे खड़ा करके।

हमने सारी सीमा पार कर दी थी. मेरा सारा स्टैमिना ख़त्म हो चुका था इतना उन्हें चोदा। मम्मी का बदन पूरी तरह से लाल पड़ चुका था इतना बेरहमी से हमने सेक्स किया था। वो दिन ऐसा ही रहा.
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Next update - पशु मेला

उस दिनभर की चुदाई में मैंने मम्मी के चूत के सारे रस निचोड़कर रख दिए। दिनभर की जबरदस्त चुदाई से हमदोनों को काफी थकान भी महसूस हो रही थी और फिर रात को हमलोग घर वापस आ गए। हमदोनों के शरीर में थकान की वजह से बिना कुछ खाए - पीए ही कमरे में जाकर सो गया। अगली सुबह जब मैं उठा तो मम्मी कमरे में बाल संवार रही थी आयने के सामने बैठकर मेरी पहली नजर मम्मी पर पड़ी उसे देखकर मेरे शरीर का थकान गायब हो। फिर हम दोनों नीचे आये मम्मी किचन में चली गई और मैं हाॅल में सोफे पर आराम से बैठा था थोड़ी देर बाद मम्मी दो कप कॉफी बनाकर लाई । हम-दोनों बैठकर पीने लगे । थोड़ी देर बाद पापा भी जोगिंग करके वापस आ चुके थे। हमारे पास आकर बैठे और से बात करने लगे। मैं चुपचाप सुन रहा था।

पापा - कल कि शॉपिंग कैसी रही।?

मम्मी - बड़ीया रहा।

पापा - तुमने कितने कपड़े खरीदे । ?

मम्मी - मैंने 2 सेट और नयन को भी एक 1 सेट दिलायें।

और फिर पापा उठकर अपने कमरे में जाने लगे। वह रूके और मुझसे बोले।

पापा - नयन तुझे बड़े ताऊ जी के बेटे ( मिथलेश ) ने बुलाया है उसे तुझसे कुछ काम है।

नयन - ओके, पापा मैं उनसे मिल लुंगा । फिर पापा कमरे में चले गए।

पापा के कहने पर मैं भैया के घर गया. मैं अपने घर की छत के रास्ते से ही उनके घर गया . जैसे ही मैं सीढ़ियों से नीचे गया घर में कोई नहीं था , जब मुझे एक कमरे में टीवी कि आवाज सुनाई दी तो मैं वहां पहुंचा । तभी मैंने देखा कि भैया ने टीवी पर ब्लू फिल्म चल रखी है और वे सोफे पर बैठकर अपना लंड हिला रहे थे.

ब्लू फिल्म में बड़ा ही सेक्स सीन चल रहा था. उसे देखकर मेरा लंड भी खड़ा हो गया. मगर तभी भैया की नज़र मुझ पर पड़ गई और उन्होंने तुरंत टीवी बंद कर दिया. उन्होंने अपना लंड पजामे में डाला और मेरे पास आ गए.

भैया- नयन तू कब आया. मुझे तो पता ही नहीं चला!

मैं- बस भैया तभी आया. जब आप लंड हिला रहे थे.

भैया- नयन तुमने देख तो लिया है. मगर किसी से कहना मत!
मैं- भैया हम दोनों दोस्त हैं न … आप चिंता मत करो. वैसे मेरा भी मन यह फिल्म देखने को कर रहा है.

चूंकि मैंने पहले कभी ब्लू फिल्म देखी नहीं थी तो जरा सी ब्लू फिल्म देख कर मेरी हालत खराब हो गई थी.

भैया- हम्म … तो तू मेरे साथ ब्लू फिल्म देखना चाहता है?
मैं- हां भैया, मेरा भी मन करता है. नयी नयी ब्लू फिल्म देखने का … एक बार सिर्फ दोस्त के मोबाइल में देखा है. मगर इतनी बड़ी स्क्रीन पर देखने का मज़ा ही अलग है!

भैया- चल देख ले यार. मैं कौन सा किसी से कहने वाला हूँ. वैसे तूने तो मेरी गांड ही फाड़ दी थी.अब उन्होंने फिर से टीवी चालू कर दिया. टीवी पर सामने एक औरत डॉगी स्टाइल में झुकी थी और पीछे से एक गोरा आदमी उसकी चूत ज़ोर ज़ोर से चोद रहा था.

ये देखते ही भैया का लंड खड़ा हो गया l भैया अपने लंड को सहलाने लगा और उन्होंने खुद का पजामा भी नीचे कर दिया.
उनका लंड 7 इंच के आस पास था और उसके आगे का मोटा टोपा खुला हुआ था.

भैया मेरे सामने ही अपना लंड हिलाने लगे. मैं एक बार टीवी की तरफ देखता और फिर भैया की तरफ देखता. भैया का लंड भी बिल्कुल उस गोरे आदमी जैसा ही लग रहा था और इधर मेरा भी लंड पैंट में हरकत दिखा रहा था.

तभी भैया बोले- अरे यार जब तेरा लंड खड़ा हो गया है, तो उसे बाहर निकाल कर मुट्ठी मार ले न … रुक मैं करता हूँ. इससे पहले मैं कुछ कह पाता, भैया ने मेरी पैंट खोल दी और मेरा लंड बाहर निकल आया।

भैया - तेरा लंड भी तो काफ़ी बड़ा और मोटा है.

मैं - मगर भैया आपके लंड का टोपा काला है और मेरे लंड का टोपा गुलाबी हैं।

भैया- नयन , सब मर्दों का लंड अलग अलग होता है.अभी तो तुम्हारा लंड और भी बड़ा हो जाएगा!

भैया अपना लंड ज़ोर ज़ोर से हिला रहे थे. भैया का लंड वाकई काफ़ी मोटा था. उसका खुला हुआ टोपा और उभरी हुई नसें अलग ही दिख रही थीं.भैया काफ़ी देर तक मुट्ठी मारते रहे, तब जाकर भैया के लंड से पानी निकला.अपने लंड का पानी निकालने के बाद भी भैया का लंड जरा सा ही ढीला पड़ा था.
यह मेरे लिए एक अजीब सी बात थी.

अब भैया मेरा लंड हिलाने लगे और कुछ ही देर में मेरा शरीर अकड़ गया.मेरा पानी ज़मीन पर गिर गया. मैंने अपना लंड अन्दर कर लिया.

उस दिन के बाद से मैं और भैया काफी अच्छे दोस्त बन गए.

एक दिन भैया ने कहा- नयन तेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या?
मैं- भैया, मुझे तो लड़कियों से बात करते हुए भी डर लगता है … और आप गर्लफ्रेंड की बात कर रहे हो!

भैया- नयन , ये उम्र गर्लफ्रेंड बनाने की है. गर्लफ्रेंड होगी तो तू उसकी चुदाई कर पाएगा और तुझे मुट्ठी मारने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी!

मैं- भैया मुट्ठी तो आप भी मारते हो, क्या आपका मन नहीं होता है कि आप किसी लड़की की चुदाई करो!

भैया- नहीं यार, लड़की में वह मज़ा नहीं है, जो मज़ा किसी औरत को चोदने में है.

मैं- भैया आपने कभी किसी को चोदा है क्या?

भैया- नयन जिनकी जीएफ नहीं होती है. उनके पास औरत का ही सहारा होता है. मेरी सैटिंग मेरे पड़ोस की एक भाभी से है ।

मैं- ओह माय गॉड … आप गांव में पड़ोस की भाभी को चोद चुके हो?

भैया- हां नयन , मैंने उनकी चूत बड़े अच्छे से चोदी थी क्योंकि भाभी का पति उनकी गर्मी नहीं निकाल पाता था . वैसे तू बता, आज तक तूने किसी औरत को नंगी देखा है?

मैं- अरे कहां भैया, मेरी किस्मत बहुत खराब है. ना ही नंगी औरत देखी है. ना ही कभी चुदाई की है.

भैया- यार, वैसे जब गांव की औरतें छत पर आती हैं. तब मैं उनके गदराए जिस्म के दर्शन करता हूँ. बहुत मज़ा आता है. तू भी तो ऐसे देखता होगा!

मैं- हां भैया ।

भैया- तू भी छुपा रुस्तम है. सारे मज़े लेता है. मगर शक्ल से कितना सीधा लगता है. ऐसे दिखता है, जैसे कुछ जानता ही ना हो!

मैं- भैया वैसे सीधे तो आप भी बनते हो. मगर देखो, अन्दर ही अन्दर आप अपनी पड़ोस की भाभी को चोद चुके हो!

भैया- नयन , ये सब तो कभी कभी ही हो पाता है. हमेशा नहीं होता है. इसलिए मैं तो ऐसी औरत चाहता हूँ, जो रोज मेरे लंड की गर्मी को निकाले.

मैं- भैया ऐसी औरत कहां होती है, जो रोज रोज लंड लेना चाहे.

भैया- नयन , तू अभी छोटा है. तुझे क्या पता कि जो औरत जितनी सीधी होती है. उसकी चूत में उतनी ही आग होती है. जब मेरे पड़ोस की भाभी मेरे पास आई थीं तो वे बहुत शर्माती थीं. मगर जब चुदवाने लगी तो खुलकर चुदवाती थी .

मैं- वैसे भैया सच कहूँ, तो मुझे भी लड़की से ज्यादा आंटी पसंद हैं. उनकी चूचियां कितनी बड़ी बड़ी होती हैं. मन करता है कि बस हमेशा चूसता ही रहूँ.

भैया और मैं अब छत पर बैठकर औरतों की चूचियां और गांड देखा करते थे. वे कभी मुझे किसी की बड़ी बड़ी चूचियां दिखाते तो कभी मैं किसी आंटी की बड़ी गांड.

( मगर कहते हैं ना कि जो तुम दूसरों के लिए सोचते हो … वही कोई तुम्हारे घर वालों के लिए भी सोचता है. )

हम दोनों तीन - चार दिनों से औरतों की चूचियां और गांड देख रहे थे … और उनके बारे में बात भी कर रहे थे । फिर पांचवें दिन मैं और भैया बैठे थे. तभी मम्मी छत पर आ गईं.

मम्मी ने साड़ी और ब्लाउज पहना हुआ था. उनकी बड़ी बड़ी चूचियों की घाटी और उनका खुला हुआ पेट साफ दिख रहा था. मैंने देखा कि भैया मेरी मम्मी की जवानी को ताड़ रहे थे और उस वक्त उनका लंड झटके खा रहा था.

थोड़ी देर बाद मम्मी चली गईं. तब मैंने देखा कि भैया की नज़र मम्मी की गांड पर लगी थी.

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मैं- ये क्या देख रहे है भैया? वे मेरी मम्मी हैं.

भैया- सॉरी यार, ग़लती से नज़र चली गयी थी. मगर मैं क्या करता यार … तेरी मम्मी की चूचियां और गांड बहुत बड़ी है.

मैं- भैया, जुबान संभाल कर बात करो! आप मेरी मम्मी के बारे में गलत बात कर रहे हो!

भैया- अबे तू तो ऐसा गुस्सा हो रहा है. जैसे मैंने कुछ ग़लत कह दिया हो. अबे हर बंदा तेरी मम्मी की गांड और चूचियों का दीवाना है. वैसे भी वे हैं तो एक औरत ही … और तूने भी तो कभी उन्हें देखा ही होगा!

मैं- नहीं , देखा है ।

भैया- अच्छा एक बात बता … तूने कभी आपने मम्मी पापा को चुदाई करते देखा है?

मैं - अपने तो सारी हदें पार कर दीं और अब मैं घर जा रहा हूं और द्वारा कभी नहीं आऊंगा आपके घर। जब मैं अपने घर जाने लगा तो उन्होंने मुझे रोक लिया और अपने साथ मुझे नीचे अपने कमरे में लेते आये।

भैया ने टीवी पर ब्लू फिल्म लगा दी और मैं उनके टीवी पर ब्लू फिल्म देखने लगा.

भैया- तेरे पापा तो बहुत लकी हैं यार. तेरी मम्मी जैसा माल सबके नसीब में नहीं होता है. क्या मस्त चोदता होगा तेरा पापा, तेरी मम्मी को!

मैं- भैया आप बहुत बदतमीज़ हो, अब मुझे आपसे दोस्ती नहीं रखना.

फिर मैं गुस्सा होकर वहां से घर जा रहा था । जब मैं उनके कमरे से बाहर निकल रहा था तो भैया मुझे अपने पास रोकने का कोशिश कर रहे थे।

भैया- अरे सुन तो, क्या हो गया बे?

मैंने उनकी कोई बात नहीं सुनी, सीधा घर आ गया. दिनभर मम्मी से साथ काम करके और बातचीत करके किसी तरह दिनभर कट गया‌ । फिर रात का खाना खाकर सो गया.

अगले सबेरे जब मैं छत पर किसी काम से गया था तब भैया वहां पहले से ही बैठे थे. भैया की नज़र मुझ पर पड़ी और वे मुझे बुलाएं. क्योंकि भैया भी रोज़ इसी टाइम छत पर आकर मुहल्ले की आंटियों को देखते थे. क्योंकि दो दिन पहले मैं भी तो उनके साथ बैठ कर यही सब देखता था.


उन्होंने मुझे देखते ही आवाज़ लगाई- इधर आ नयन , मुझे एक बात बोलना है. मैं भैया के पास चला गया.

भैया- क्या हुआ… इतना गुस्सा हो गया है ? मैंने तेरी मम्मी के साथ कुछ ग़लत थोड़ी किया है . मैं तो सिर्फ बात कर रहा था. किसी के बारे में बात करने से किसी का कोई नुकसान थोड़ी हो जाता है.


मैंनें कुछ नहीं बोला.

भैया- ठीक है, चल अब नीचे चलें । फिर थोड़ी देर बाद मैं और भैया नीचे आ गए और नीचे आकर भैया टीवी पर ब्लू फिल्म लगा कर देखने लगे.

कुछ देर बाद मैं भी भैया के साथ ब्लू फिल्म देखने लगा. शायद भैया ने जानबूझ कर मम्मी की साइज़ की औरत की चुदाई वाली वीडियो लगाया था.

इस फिल्म में मेरी मम्मी की उम्र की महिला को एक जवान लड़का चोद रहा था. लेकिन मुझे क्या … मुझे तो चुदाई देखने में बहुत मज़ा आ रहा था.

अब भैया ने अपना 7 इंच का लंड निकाला और हिलाने लगे.

कुछ देर बाद भैया मेरे पास आए और उन्होंने अचानक से मेरी पैंट को नीचे कर दिया. टीवी पर चुदाई देख कर मेरा लंड भी टाइट हो गया था.

अब उन्होंने अपने एक हाथ से अपना लंड और दूसरे हाथ से मेरा लंड पकड़ा और वे एक साथ दोनों को हिलाने लगे.

मुझे भैया के हाथ से अपना लंड हिलवाने में बहुत मज़ा आ रहा था.

तभी मैंने कहा - भैया, आप मम्मी को चोदना चाहते हो? भैया यह सुनकर चौंक गए और मेरी तरफ देखे।

भैया- यार तू बुरा मत मानना. मगर जब मैंने तेरी मम्मी को पहली बार देखा था. मैं तभी से उन्हें चोदना चाहता हूँ.

मैं- भैया तो आप एक बार और कोशिश करके देख लो. हो सकता है वह मान जाएं.

भैया- नहीं यार, वे नहीं मानेंगी. तेरी मम्मी की चुदाई के लिए मुझे कुछ और प्लान करना पड़ेगा. जिससे वह मना नहीं कर पाएं और खुद मुझे अपनी चूत चोदने दे दें.

मैं- भैया कुछ प्लान है आपके पास?

भैया - हां , प्लान तो है पता नहीं काम करेगा कि नहीं।

फिर भैया ने प्लान बताया गांव में पशु मेला लगा हुआ है ,जहां पर अलग-अलग जहां पर अलग अलग प्रकार के पशु की खरीद बीकरी होती है और उसके साथ-साथ जलेबी के दुकानें भी लगती थी। तु अपने मम्मी को आज शाम मेला दिखाने के लिए ले आ बाकी सारा काम हो जाएगा।

............................................

दोपहर को मैं खाना खाने घर आया । थोड़ी देर हाॅल में बैठने के बाद मैंने मम्मी को आवाज लगाई ' मम्मी खाना निकाल दो मुझे भुख लगी है " फिर मम्मी कमरे बाहर आई और बोली " मुंह हाथ धोकर पापा को भी बुला ले और डायनिंग टेबल पर बैठ जा " फिर मम्मी किचन में चली गई खाना निकालने। मैंने पापा को बुलाकर हाॅल में रखे डायनिंग टेबल बैठा गया। थोड़ी देर बाद मम्मी हम दोनों का खाना लेकर आई खाने को दिया । मैं और पापा दोनों खाना खाने लगे तभी पापा ने कहा " पंखुड़ी तुम भी अपना खाना लेकर आओ और हमारे साथ खाओ । मम्मी किचन में गई अपने लिए खाना लेकर आई और हम लोग के साथ बैठक खाने लगी । मम्मी को अभी खाना खाते हुए थोड़ी ही देर हुआ था।


मैंने कहा, “ मम्मी , , गांव में मेला लगा है और वहां जलेबी की दुकान भी लगी है आज शाम को आप , में और पापा घुमने चलते हैं ना है।” और मम्मी ने कहा, “ठीक है , चलती हूँ। मगर तेरे पापा साथ चलेंगे तभी तो ना ” तब मैंने पापा से कहा " पापा ने कहा उन्हें मेला देखने मन नहीं है तुम और अपनी मम्मी को लेकर चले जा कार में बैठकर और मेला देखकर वापस आ जाना । फिर पापा ने अपना खाना खाय और कमरे में चले गए । फिर मैंने मम्मी की ओर देखा तो मम्मी ने कहा:- " टेंशन मत ले में तेरे साथ चलुंगी " । फिर हम दोनों खाना खा। मम्मी कमरे में चली गई और मैं हाॅल में बैठकर टीवी देखने लगा। थोड़ी देर बाद मम्मी ने मुझे कमरे में बुलाया जब मैं अंदर गया और दरवाजा बंद कर दिया जैसे मम्मी की तरफ देखा वह बिल्कुल नंगी लेटी थी और मुझे बिस्तर पर चुदवाने का निमंत्रण दे रही थी मैंने भी बिना देर किए अपने कपड़े उतार कर बिस्तर पर आ गया और चुदाई कार्यक्रम चालू कर दिया ।

थोड़ी देर बाद पापा मम्मी को ढूँढते हुए कमरे के पास आये और पापा ने मम्मी को आवाज़ दी , और अपने कमरे में आने को कहा और फिर चले गए । तब मम्मी और मैं कमरे में चुदाई कर रहे थे । पापा की आवाज सुनते ही मम्मी और मैं बिल्कुल शांत हो गए ।

पापा के जाने के बाद मम्मी ने कहा " पापा अगर दरवाजा खोलकर आ जाते तो पूरा सच बाहर आ जाता, कैसे उनकी बीवी अपने बेटे से चुदवाती है। लेकिन हम नहीं पकड़े गए " और फिर मैंने मम्मी को पापा के पास भेजा दिया और मैं भी कमरे से बाहर निकालकर पापा के कमरे के खिड़की के पास खड़ा कर देखने लगा। अंदर किया हो रहा है।

मम्मी के कमरे के अंदर जाते ही पापा ने भी मम्मी की चूत और गांड मारी। मैं खिड़की से देख कर मम्मी को चिढ़ा रहा था। पापा के सोने के बाद मम्मी वापस कमरे में आई, और कहा- तुमसे चुदने के बाद किसी और से चुदने का मजा ही नहीं आता।

मैंने तुरंत मम्मी को गोदी में उठाया, और बिस्तर पर लेके चोदा। थोड़ी देर बाद हम-दोनों बांहों में बांहें डालकर सो गया।

मेरी नींद शाम को टुटी मम्मी के जगाने पर और मुझे तैयार होने को बोलकर और बाथरूम में चली गई और 20 मिनट बाद बाहर आई।

मम्मी ने चॉकलेट रंग की साड़ी पहनी थी, जिसका ब्लाउज इतना डीप नेक था कि उनके चूची की गहरी दरार साफ दिख रही थी। दोनों चूचियों के बीच का हिस्सा और ऊपर का मांसल हिस्सा बाहर झलक रहा था, मानो कोई दूध का समंदर उफान मार रहा हो। उनकी ब्रा का स्ट्रैप बार-बार ब्लाउज से खिसककर कंधे पर आ जाता था, और मम्मी उसे बार-बार अंदर ठूंस रही थीं। मम्मी ने ऊँची हील वाली चप्पल पहनी थी, जिससे उनकी गांड़ चलते वक्त इस कदर हिल रही थी। उनकी गांड का हर हिलना ऐसा था जैसे कोई भारी भरकम जेली हवा में नाच रही हो।

शाम को हम दोनों लोग घर के लिए निकलते कार में सवार होकर
मैं कार चला रहा था । मम्मी कार के पीछे वाली सीट पर बैठी थी । मैंने कार को भैया के घर के सामने रोका और भैया को आवाज लगाई। भैया थोड़ी देर में बाहर आये और कार में पीछे वाली सीट पर बैठ गए फिर मैं कार चलाने लगा। रास्ते में भैया मम्मी ने बातचीत करते जा रहे थे।

हम तीनों 20 मिनट बाद मेला में पहुंच गए । मैंने गाड़ी एक रेस्टोरेंट के पास खड़ी की वह पर पहले से बहुत गाड़ी खड़ी थी और हल्का अंधेरा भी था । हम तीनों रेस्टोरेंट के अंदर गए और एक टेबल बुक किया और फिर हम तीनों कोइल्ड्रिंक और समोसा ऑर्डर किया। तीनों ने बैठकर कोइल्ड्रिक और समोसा खाया । खाने के बाद वहां बैठकर इधर उधर की बात करने लगे। तभी मिथलेश भैया ने मुझे वहां से जाने का इशारा किया । मैं समझ गया भैया ने मुझे क्यों इशारा किया ।

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मुझे समझ आ गया कि भैया मम्मी को चुदाई के लिए तैयार करने वाले हैं , शायद मेरे कारण मम्मी डर रही हैं या वह हिचक रहे हैं।

मैंने मम्मी से कहा, “मम्मी, चलो थोड़ा देर मेला घुम लेते हैं । ”

मम्मी: नयन में थोड़ी थकीं थकीं महसूस कर रही हुं तुम अपने भैया को साथ लेकर जाओ।

फिर मैंने भैया को कहा : चलो भैया थोड़ी देर मेला घुम कर आते हैं।

मगर भैया ने आंख मारते हुए कहा: मैं आंटी के पास रूक कर थोड़ी बातचीत करना चाहत हुं।

तब मैंने कहा, “ठीक है मैं अकेले मेला घुम लेता हूं ।” जब मैं जाने लगा।

मम्मी ने कहा : “ठीक है, पर जब आओगे तब मैं तुझे यही मिलुंगी ।”

फिर मैं रेस्ट्रोंट के पीछे से होते हुए पार्किंग में जा पहुंचा । पार्किंग में अंधेरा था, लेकिन उनकी गाड़ी पर रेस्टोरेंट की छत की लाइट थोड़ी पड़ रही थी, जिससे गाड़ी के अंदर कुछ कुछ दिख रहा था। फिर भी, शीशे के पास जाकर देखना पड़ता था। मैं वापस रेस्टोरेंट के पीछे खड़ा हो गया ,

वहीं से में रेस्टोरेंट के अंदर मम्मी और भैया को देख रहा था वह दोनों कुर्सियों पर बैठकर बातें कर रही थीं। उनकी बातों में हँसी-मजाक था, और मम्मी की आँखों में एक चमक थी, जैसे वो पहले से ही गर्म हो चुकी हों। मम्मी की साड़ी का पल्लू बार-बार खिसक रहा था, और वो जानबूझकर उसे धीरे-धीरे ठीक कर रही थीं, जैसे भैया को ललचाना चाहती हों। फिर वो दोनों बाहर चले गए। मैं चुपके से देख रहा था कि वो दोनों पार्किंग की तरफ जा रहे हैं । मैं समझ गया कि वो दोनों प्लान के मुताबिक गाड़ी में जाएँगे। मैं थोड़ी देर बाद कार के पीछे चला गया और अंदर झाँककर देखने लगी। कार का शीशे थोड़ा खुला था , क्योंकि गर्मी थी। उन्होंने एसी नहीं चलाया था, शायद इसलिए कि खड़ी गाड़ी स्टार्ट रखने से किसी को शक हो सकता था। जब मैंने अंदर झाँका, तो उफ्फ! ऐसा नजारा था कि मेरी साँसें थम गईं।

गाड़ी के अंदर का माहौल इतना गर्म था कि मानो कोई आग भभक रही हो। भैया मम्मी के ब्लाउज के अंदर हाथ डालकर उनके चूची को जोर-जोर से मसल रहा था। मम्मी की साड़ी कमर तक उठी हुई थी, और उनकी जाँघें पूरी तरह नंगी थीं। उनकी कच्छी थोड़ी नीचे खिसकी हुई थी, जिससे उनकी चूत की गीली झलक साफ दिख रही थी। वो इतनी गीली थी कि रस की बूँदें गाड़ी की सीट पर टपक रही थीं। गाड़ी में गर्मी थी, और मम्मी के माथे पर पसीने की बूँदें चमक रही थीं, जो उनकी उत्तेजना को और बढ़ा रही थीं।

मम्मी: “थोड़ा जल्दी करो, कोई आ जाएगा।”

मिथलेश : “आंटी, कोई नहीं आएगा। आप चिंता मत करो। वैसे
भी, पार्किंग में गाड़ी के पास कोई आता ही नहीं।”

मम्मी: “अरे, नयन थोड़ी देर के लिए मेला घुम गया है, वह कभी भी आ सकता है।”

मिथलेश : “ठीक है आंटी, चलो जल्दी करते हैं। अब अपने चूची तो बाहर निकालो।”

मम्मी ने अपने रसभरे चूची एक-एक करके ब्लाउज से बाहर निकाले। उनके चूची को देखकर भैया बस देखते रह गए। उनके निप्पल्स गहरे भूरे रंग के थे सख्त और उभरे हुए , जैसे उत्तेजना में फूल गए हों।

मिथलेश ने कहा, “आंटी, आपके एक-एक चूची में तो किलो-किलो दूध भरा होगा!”

मम्मी हँसते हुए बोलीं, “चलो, अभी इस चूची के उपर तुम्हारा हक़ है इससे निचोड़ लो ।”

भैया एक-एक करके चूची को पकड़कर चूसने लगे। अब उनका जीभ दाएं निप्पल पर गोल-गोल घूम रहा था । और फिर भैया दाएँ चूची को अपने दाँतों से हल्का-हल्का काट रहा था, और कभी-कभी इतनी जोर से निचोड़ रहा था कि मम्मी की सिसकारी में दर्द और मजा दोनों सुनाई दे रहे थे। मम्मी की सिसकारियाँ शुरू हो गईं, “उफ्फ… आह्ह…”

मम्मी भैया के लंड को पैंट के बाहर से मसल रही थीं। भैया का लंड पैंट में तनकर लोहे की रॉड जैसे हो गए थे। मम्मी ने भैया को देखकर कहा, “ मिथलेश , तुम मेरी चूत को गरम करो, और जल्दी करो प्लीज।” ये कहकर मम्मी ने अपनी साड़ी और ऊपर उठा ली और कार की सीट लेट गईं। उनकी जाँघें पूरी तरह खुली थीं, और उनकी चूत इतनी गीली थी कि गाड़ी की सीट पर रस की छोटी-छोटी बूँदें चमक रही थीं।

भैया उनकी जाँघों के बीच घुस गया और उनकी चूत को चाटने लगा। उसका पूरा मुँह मम्मी की जाँघों में दब गया था, और वो उनकी चूत को ऐसे चूस रहा था जैसे कोई भूखा शहद का छत्ता चाट रहा हो। उसकी जीभ मम्मी की चूत के दाने को बार-बार छू रही थी, और मम्मी का जिस्म हर बार सिहर उठता था। भैया ऊपर से मम्मी के रसभरे मम्मों को चूस रहा था, उनके निप्पल्स को मुँह में लेकर खींच रहा था। मम्मी की सिसकारियाँ अब और तेज हो गई थीं, “ऊँ… उफ्फ… आह्ह… और जोर से चूसो!” उनकी आवाज में एक बेताबी थी, जैसे उनके जिस्म की आग अब बर्दाश्त से बाहर हो रही हो।

कुछ देर बाद मम्मी ने भैया को अपनी जाँघों के बीच से निकाला और मम्मी उसकी गोद में बैठ गईं। भैया का लंड पहले से ही पैंट से बाहर था भैया ने खुद अपने लंबा और मोटा लंड बाहर निकाल रखा था । जैसे कोई काला साँप फन उठाए खड़ा हो। मम्मी ने अपनी चूत को उसके लंड पर टिकाया और धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगीं। हर धक्के के साथ गाड़ी चूं-चूं की आवाज कर रही थी, और मम्मी की सिसकारियाँ हवा में गूँज रही थीं, “आह्ह… ऊँ… उफ्फ…” और भैया मम्मी के चूची को चूस रहा था, उनके निप्पल्स को अपने दाँतों से हल्का-हल्का काट रहा था। मम्मी की चूत पूरी तरह गीली थी, और भैया का लंड उसमें आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था। हर धक्के के साथ मम्मी की गांड हिल रही थी, और गाड़ी की सीटें उनके जिस्म के वजन से दब रही थीं। मम्मी का चेहरा लाल हो गया था, और उनकी आँखें आधी बंद थीं, जैसे वो उत्तेजना के नशे में पूरी तरह डूब चुकी हों।


कुछ देर बाद मम्मी ने भैया से कहा, “ मिथलेश , अगली सीट फोल्ड करो।” भैया ने फुर्ती से अगली सीट फोल्ड कर दी। मम्मी अब घोड़ी बन गईं, उनकी गांड भैया के सामने थी, पूरी तरह खुली और उभरी हुई। भैया ने पीछे से उनकी चूत में अपना लंड डाला, लेकिन उसका लंड पूरा अंदर नहीं जा रहा था।

मिथलेश : “आंटी, इतनी बड़ी गांड है कि मेरा लंड तो चूत तक पहुँचेगा ही नहीं!”

मम्मी: “ट्राई तो करो, मिथलेश ।”

मम्मी ने अपनी गांड को और ऊपर उठाया, अपनी जाँघें और चौड़ी कीं। भैया ने फिर से कोशिश की, और इस बार उसका लंड मम्मी की चूत में गहराई तक घुस गया। मम्मी की सिसकारी निकली, “उफ्फ… आह्ह… और जोर से!”

भैया ने दूसरी सीट भी फोल्ड कर दी। अब मम्मी ने दोनों सीटों पर अपने हाथ रखे, एक टांग कार की पार्टिशन की एक तरफ और दूसरी टांग दूसरी तरफ रखकर इस तरह झुकीं कि उनका चेहरा गियर लीवर के पास था। उनके बड़े-बड़े चूची सीटों के बीच लटक रहे थे, और हर धक्के के साथ वो आगे-पीछे हिल रहे थे। उनकी गांड भैया के सामने पूरी तरह खुली थी, और कार की लाइट में उनकी चूत का रस चमक रहा था।

भैया ने कहा, “वाह, मेरी पंखुड़ी आंटी ! अब जाएगा मेरा सारा सामान तुम्हारी चूत में!”

मम्मी: “जल्दी करो, मिथलेश !”

भैया ने जोर-जोर से धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के के साथ मम्मी की गांड हिल रही थी, और गाड़ी भी उनके साथ हिल रही थी। मम्मी की सिसकारियाँ अब चीखों में बदल गई थीं, “ऊँ… उफ्फ… वाह… चोद ना मुझे… आह्ह!” भैया की स्पीड बढ़ गई, और मम्मी का जिस्म हर धक्के के साथ आगे-पीछे हो रहा था। अचानक भैया का लंड बाहर निकल गया, और वो बोला, “आंटी, होने वाला था, लंड क्यों बाहर कर दिया?”

मम्मी: “होने वाला था, तभी तो बाहर निकाला।”

मम्मी ने भैया का लंड पकड़ा और तेजी से मुठ मारने लगीं। भैया का सारा पानी बाहर निकला, इतना ज्यादा कि मम्मी के एक चूची पर सारा वीर्य फैल गया। मम्मी ने हँसते हुए कहा, “इतना सारा पानी, मिथलेश ! मेरे चूची तो डूब गए!”

करीब आधे घंटे बाद

फिर मम्मी ने भैया को देखा और बोलीं, “ मिथलेश , एक बार और करते हैं अब डालो अपना लंड मेरी चूत में।” भैया पीछे आ गया और उसने अपना लंड मम्मी की चूत में डाला। और जैसे ही वो अंदर गया, मम्मी की सिसकारी निकली, “उफ्फ… तुम्हारा लंड तो काफी मोटा है!”

भैया : “आंटी, इसबार मेरा लंड बाहर मत निकालना जब होने वाला होगा तो मैं बता दूंगा ”

मम्मी: “अंदर मत गिराना अपना रस।”

भैया : “नहीं, तुम्हारी गांड़ के ऊपर डालूँगा।”

भैया ने अब धीरे-धीरे धक्के शुरू किए, लेकिन जल्दी ही उसकी स्पीड बढ़ गई। मम्मी खुद को पीछे धकेल रही थीं, ताकि भैया का लंड इसबार और चूत की गहराई तक जाए। उनकी सिसकारियाँ अब सिसकियों में बदल गई थीं, “आह्ह… ऊँ… मिथलेश… और जोर से!” मम्मी की जाँघें तन गई थीं और उनकी चूत इतनी गीली हो गई थी कि हर धक्के के साथ पच-पच की आवाज गूँज रही थी। मिथलेश ने और तेज धक्के मारे, और जब उसे लगा कि वो झड़ने वाला है, उसने लंड बाहर निकाला और मम्मी की गांड पर सारा वीर्य गिरा दिया। मम्मी की गांड पर रस की बूँदें चमक रही थीं, और वो हाँफते हुए सीट पर लेट गईं।

मम्मी ने टिश्यू पेपर से अपने चूची और गांड साफ किए। फिर उन्होंने अपनी कच्छी पहनी, साड़ी ठीक की, और ब्लाउज में चूची समेटे। पूरी तरह तैयार होकर वो गाड़ी से बाहर निकलीं। उसके रेस्टोरेंट जाने से पहले में अंदर जाकर उसी टेबल पर बैठ गया।

मम्मी रेस्टोरेंट में आते ही मुझे देखकर चौंक गई और बोली : तुम कब आये।

मैंने कहा : मुझे आये हुए आधा घंटा हो चुका है मैंने कई जगह आपको खोजा आप नहीं दिखाई दिये तब मैं यहां आकर बैठ गया।

मम्मी: चलो अब घर चलते हैं काफी रात हो गई है।

कार में सवार होकर चल दिए । रास्ते में मम्मी चुप थीं, लेकिन उनके चेहरे पर एक अजीब-सी चमक थी, जैसे वो अभी भी उस चुदाई के नशे में डूबी हों। उनके होंठों पर हल्की-सी मुस्कान थी, और उनकी आँखें मानो कह रही थीं कि वो अपने जिस्म की आग को बुझाकर तृप्त हो चुकी हैं।
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