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(31-03-2026, 02:03 PM)@@004 Wrote: अति उत्तम प्रस्तुति।।
लेकिन इतने बड़े रिहैब सेंटर में कोई भी कैमरा क्यों नहीं लगा हुआ था और राजा साहब से कही न कही चूक हुई है जो उन्होंने अपने दुश्मनों को कम कर आका है।
जी दोस्त आप की बात सही है अगर केमेरा होता तो भी बंद किये जा सकते थे
जी दुश्मन को कभी भी अपने से छोटा नहीं समजना चाहिए............
बने रहिये और बताते रहिये.....................
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चलिए दोस्तों अब आगे बढ़ते है और कहानी का मजा लेते है...............
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विश्वा की मौत को एक महीने से उपर हो गया। मेनका की मा भी आज वापस चली गयी थी,उसके पिता तो काफ़ी पहले ही चले गये थे। माँ उसे अपने साथ ले जाना चाहती थी पर उसी ने बाद मे आने को कह के बात टाल दी। आज उसे मौका मिला था अपने ससुर से बात करने का।
रात नौकरो के जाते ही वो उनके कमरे मे पहुँच गयी। राजासाहब सर झुकाए बैठे थे।
"आप राजा यशवीरसिंग ही है ना?" मैत्री की रचना.
राजासाहब ने सर उठा कर उसकी तरफ सवालिया नज़रो से देखा।
"मैं जिस राजा यशवीरसिंग को जानती थी वो तो एक हिम्मतवार और हौसले वाले इंसान थे।आप तो मुझे कोई और लग रहे हैं...एक ऐसा इंसान जिसकी शक्ल राजासाहब से मिलती है,बस।"
"मेनका, हमे प्लीज़ अकेला छोड़ दो।"
"क्यू? यहा अंधेरे मे हार मान कर आँसू बहाने के लिए?" मेनका उनके घुटनो पे हाथ रख उनके सामने बैठ गयी। "मेरी तरफ देखो,यश,बॅंगलुर पोलीस को शक़ था कि विश्वा की मौत उतनी सिंपल नही जितनी दिखती है। सेंटर के डॉक्टर्स और बाकी लोगो से बात करने के बाद ये बात साफ़ थी कि विश्वा ठीक होने की पूरी कोशिश कर रहा था फिर आख़िर उस रात ऐसा क्या हुआ कि वो वहा से भाग गया या फिर वो भागा नही उसे भगाया गया?"
"राजासाहब ने उसकी तरफ देखा,"देखो, मेनका हमारा बेटा अब वापस नही आएगा। अब क्या फायदा है इन बातो का।", वो उठ कर खिड़की पे चले गये और बाहर देखने लगे।
"फायदा नही राजा यशवीरसिंग, क़र्ज़ है आपके बेटे की मौत का। उसे हक़ है कि अगर उसकी मौत उसकी बुरी लत के बजाय किसी और कारण से हुई है, तो उस कारण का पता लगाया जाए और मौत के ज़िम्मेदार को सज़ा मिले।"उसने राजासाहब को अपनी तरफ घुमाया," ये देखिए",उसने उनका हाथ उठा कर उनके सामने किया जिसमे उसका दिया ब्रेस्लेट चमक रहा था।" राजकुल के सुर्य की चमक बरकरार रखने की ज़िम्मेदारी आपकी है। राजकुल का खून बहाया गया है और जिसने भी ये काम किया है उसे इसकी कीमत आपको चुकानी पड़ेगी।"
राजासाहब की नज़रे ब्रेस्लेट मे बने सुर्य पर टिकी हुई थी। किसी ने उनके बेटे की जान ली है और वो चुपचाप बैठे हैं? नही...आख़िर उन्हे हुआ क्या था जो वो इतने दीनो तक बैठे आँसू बहाते रहे? आज मेनका ने उन्हे फिर से जगाया है। अब तो वो अपने बेटे की मौत की गुत्थी सुलझा कर रहेंगे।
उन्होने ने मेनका के हाथ अपने हाथों मे ले लिए,"हमे होश मे लाने के लिए शुक्रिया,पता नही हमे क्या हो गया था। थॅंक यू,मेनका। अगर तुम नही होती तो हमारा क्या होता?" मैत्री की पेशकश.
"नही,यश,अगर तुम नही होते तो हमारा क्या होता। तुमने इतनी मेहनत से कुल का मान और बिज़नेस को बनाए रखा है। ये सब हम अपनी आँखो के सामने मिट्टी मे मिलते तो नही देख सकते थे ना।"
राजासाहब ने मेनका की बात सुनकर उसे सीने से लगा लिया,फिर हाथों मे उसका चेहरा ले लिया, "इतने दीनो हम अपने गम मे खोए रहे,ये भी नही सोचा कि तुम पर क्या बीत रही होगी।", उनका ध्यान मेनका की सफेद साडी पे गया, "कल से ये मनहूस लिबास पहनने की कोई ज़रूरत नही है।"
बने रहिये..................दोस्तों...........
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दोस्तों एक अपडेट दिया है आपके मनोरंजन के लिए
बने रहिये आगे और भी है................
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"यश,दुनिया की नज़रो मे मैं एक विधवा हू और विश्वा को गुज़रे बस महीना भर ही हुआ है।लोग क्या कहेंगे?"
"गांड मराने गए लोग,ज़माना कहा से कहा पहुँच गया है और हमलोग अभी तक लिबास के रंग मे अटके हैं। हम देखेंगे कौन क्या कहता है।किस भोसड़ीके में इतना दम है की तुम्हे कुछ कह जाए।" मैत्री की पेशकश.
"समझने की कोशिश करो,यश। लोगो की हमारे परिवार से कुछ उम्मीदें होती हैं,उनके लिए हमे कुछ दिन तक ऐसे कपड़े पहन ने ही चाहिए।"
"ठीक है तो विश्वा की मौत के 3 महीने पूरे होने के बाद तुम ये सफेद साडी नही पहनॉगी।",राजासाहब उसे साथ लेकर अपने बिस्तर पे बैठ गये। उन्होने उसके कंधे पे अपना हाथ रखा हुआ था।
"अच्छा बाबा! जैसा तुम कहो।",मेनका ने उन से सॅट के बैठते हुए उनका हाथ अपने हाथों मे दबा लिया। मेनका पिछले एक महीने से नही चुदी थी। महल का माहौल विश्वा की मौत के कारण ऐसा हो गया था कि चुदाई का ख़याल उसके दिमाग़ से मीलो दूर था। पर इधर 2 दीनो से रात मे उसे राजासाहब के लंड की ज़रूरत महसूस होने लगी थी। मेनका,जोकि हर रात कम से कम 3-4 बार चुदती थी,उसे पिछली दो रातों को अपने जिस्म को ठंडा करने के लिए अपनी उंगली का सहारा लेना पड़ा था।
आज कई दीनो बाद उसका प्रेमी उसे अपने पुराने रंग मे आता दिख रहा था और उसकी चूत राजासाहब के लंड के लिए बेकरार होने लगी थी। उसे शांत करने के लिए वो अपनी टांग पे टांग चढ़ा के बैठ गयी और चूत को अपनी जांघों मे भींच लिया। उसे पता नही चल रहा था कि राजासाहब चुदाई के मूड मे है या नही। उसने बात आगे बढ़ने की गरज से पूछा,"तुम्हे तो याद भी नही होगा कि डॉक्टर पुरनदरे और बॅंगलुर पोलीस के अफ़सर तुमसे मिलके गये थे?"
"याद है पर बस इतना ही की डॉक्टर साहब माफी माँग रहे थे और पोलिस वाले फॉरमॅलिटीस पूरी करने के लिए कह रहे थे।",उनका हाथ मेनका के कंधे से फिसल कर नीचे उसकी नंगी कमर पे आ गया था। मैत्री की रचना.
"डॉक्टर साहब को यकीन है कि विश्वा खुद भागा नही था बल्कि कुछ और बात है। पोलिसवालो का भी कहना है की पोस्टमोर्टाम रिपोर्ट तो ड्रग ओवरडोस का कारण बताती है पर ये कौन बताएगा कि ड्रग्स उसने खुद लिए थे या किसी ने ज़बरदस्ती इंजेक्ट किए थे!" बात तो गंभीर हो रही थी पर मेनका इतने दीनो बाद अपने ससुर के करीब आने पर गरम हुए जा रही थी।
"ह्म्म। मुझे बॅंगलुर जाना पड़ेगा। अब पानी सर से उपर गुज़र गया है। इसके पीछे जो भी है उसे बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।"
"तुम पोलीस की मदद क्यू नही लेते? मैं नही चाहती तुम ख़तरे मे पडो।" उसने प्यार से राजासाहब के चेहरे पे हाथ फेरा।
"नही,मेनका,पोलीस के पास गया तो दुश्मन सतर्क हो जाएगा। इसबार मैं उसे बच के नही जाने दूँगा। हो ना हो इसमे जब्बार का ही हाथ है।"
"जो भी करना बहुत सावधानी से करना और ये ध्यान मे रखना कि तुम्हारे साथ मेरी जान भी जुड़ी है।", मेनका के जिस्म की आग की दाहक उसकी आँखों मे अब साफ़ नज़र आ रही थी। राजासाहब ने उसकी नशे से बोझिल आँखें देखी तो उनके दिल मे भी वोही आग भड़क उठी। उन्होने उसकी कमर पकड़ कर अपनी ओर खींची और अपने होठ उसके तपते होठों पे रख दिए। मेनका तो इसी बात का इंतेज़ार कर रही थी। वो उनसे चिपक गयी और दोनो एक दूसरे को पागलो की तरह चूमने लगे।राजासाहब उसके चेहरे को और गर्दन को अपनी किसो से सराबोर किए जा रहे थे।
आज के लिए बस यही तक फिर मिलेंगे एक नए अपडेट के साथ तब तक के लिए मैत्री की तरफ से जय भारत.
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दोस्तों एक और अपडेट आपकी खिदमत में............
प्लीज़ अपनी राय दीजिये.................
प्रतीक्षा....................
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I love ro see visva return and turn the table make menka and yash bad and bring them both in guilt trip chae jo bhi ho vo bhi insan hai sab ne apne hisse ki bahut galtiya ki hai chae menka ho yash ab writer ki marji par ha ek baat hai mujhe story acchi lagi pat maza tab ata hai jab har caracter ek baar gire or phir ek baar uth kar khada ho
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बेहतरीन अपडेट ।
अब राजा साहब पलटवार करेंगे।
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(01-04-2026, 08:57 PM)Ayush01111 Wrote: I love ro see visva return and turn the table make menka and yash bad and bring them both in guilt trip chae jo bhi ho vo bhi insan hai sab ne apne hisse ki bahut galtiya ki hai chae menka ho yash ab writer ki marji par ha ek baat hai mujhe story acchi lagi pat maza tab ata hai jab har caracter ek baar gire or phir ek baar uth kar khada ho
सब से पहले आप का शुक्रिया की आपको कहानी पसंद आ रही है.......
हलाकि आपके हिसाब से कहानी नहीं जा रही है उसका काफी दुःख है
आपकी बात सही है की कहानी में हर किरदार को एक तरीके से वजूद मिले पर ऐसा होना बहोत मुश्किल है ताकि उसमे ट्विस्ट लाने के लिए किसी किरदार को कुछ गवाना पड़ सकता है.............
मुझे खेद है की शायद आपके हिसाब से कहानी नहीं जा रही.............
आपका प्लाट आगे की कहानी में ध्यान में रखूंगी और जरुरत पड़े उपयोग करुँगी............
आपका बहोत बहोत आभार..............जुड़े रहिये कहानी के साथ.................
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(01-04-2026, 09:03 PM)@@004 Wrote: बेहतरीन अपडेट ।
अब राजा साहब पलटवार करेंगे।
शुक्रिया दोस्त
अब देखते है आगे क्या क्या होता है................कहानी के मोड़ कहा कहा ले जाता है...............
बने रहिये मेरे साथ इस कहानी में............
शुक्रिया दोस्त
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चलिए कहानी को थोडा आगे ले जाते है और कोशिश करते है की आगे क्या हुआ.................
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दोस्तों कहानी को मैं थोडा स्पीड दे रही हूँ ताकि मेरी इंग्लिश में यही कहानी जो चल रही है उसको साथ साथ ले जा सकू
तकलीफ यह है की मैं दोनों कहानी को लिखने के लिए कभी कभी भूल जाती हूँ की कहा थी.............
और इंग्लिश में यह कहानी थोड़ी आगे है जिस को मैं साथ ले जाने के प्रयास में हूँ..............
अभी इंग्लिश वर्जन लिखना बंद किया हुआ है जब दोनों भाषा एक साथ चलने को काबिल हो जाएगी मैं वह पोस्ट करना शुरू कर दूंगी....
शुक्रिया दोस्तों
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मेनका का आँचल सरक कर नीचे हो गया था और सफेद ब्लाउस के गले मे से झँकता उसका क्लीवेज भारी सांसो के साथ उपर-नीचे हो रहा था। राजासाहब ने अपने होठ उसके क्लीवेज पे लगा दिए तो मेनका पागल हो उठी और उनका सर अपने सीने पे दबा दिया।
राजासाहब ने थोड़ी देर तक उसके सीने को चूमने के बाद उसके ब्लाउस के सामने की तरफ बने बटन खोल दिए। सफेद ब्रा मे क़ैद उसकी चूचिया मस्त लग रही थी और उसके कड़े निपल्स ब्रा कप्स मे नुकीले उभार बना रहे थे। राजासाहब वैसे ही ब्रा मे बंद उसकी चूचिया चूमने-चाटने लगे। उनके हाथ उसकी पीठ पर घूम रहे थे।घूमते हुए उनके हाथ उसकी ब्रा स्ट्रॅप के नीचे कुछ इस तरह घुसे की उसके हुक्स पटापट खुल गये। ब्रा के ढीले होते ही राजासाहब की जीभ उसकी पूरी छाती पे घूमने लगी और थोड़ी देर बाद ही उसका एक निपल उनके मुँह के अंदर था। जैसे ही रहा साहब ने उसके निपल को चूसा महीने भर की प्यासी मेनका झड़ गयी। मैत्री की पेशकश.
उसने उनका सिर कस के पकड़ लिया और अपने हाथ उनके कुर्ते के अंदर घुसा उनकी पीठ पे अपने नाख़ून गढ़ा दिए। राजासाहब के उसकी चूचिया चूसने मे उसका ब्रा और ब्लाउस अड़चन पैदा कर रहे थे। वो बेसबरे से होकर उसके सीने से अलग हुए और उन दोनो कपड़ो को उतार कर फेंक दिया और फिर से जुट गये उसके उरज़ोन को दबाने और चूसने मे।
मेनका अभी भी उनके कुर्ते के अंदर हाथ घुसा उनकी पीठ सहला रही थी की उसका एक हाथ फिसल कर आगे उनके सीने पे आया और वहा के बालों मे घुस गया। अब उसकी बारी थी। उसने अपने ससुर का कुर्ता उनके जिस्म से अलग किया और उन्हे धकेल कर बिस्तर पे लिटा दिया और उनके उपर झुक कर उनके बालों भरे सीने को चूमने लगी। उसने उनके एक निपल को अपने मुँह मे लेकर चूसना शुरू किया तो दूसरे को अपने नाख़ून से हल्के-हलके छेड़ने लगी।
"आ...अहह..",राजासाहब की आह निकल गयी और उनके लंड ने पायजामा मे तंबू बना दिया। मेनका छाती चूमते नीचे आई और उनकी नाभि मे अपनी जीभ डाल कर चाटने लगी। राजासाहब के लिए ये बिल्कुल नया अनुभव था और वो जोश से पागल हुए जा रहे थे। मेनका ने डोरी खींच कर उनका पायजामा खोला तो उन्होने अपनी गांड उठा कर खुद ही उसे उतार दिया। मैत्री की रचना.
मेनका की आँखों के सामने उनका बड़ा लंड पूरा तना खड़ा था। कितने दीनो बाद ये प्यारा लंड उसके सामने था। इधर राजासाहब ने शेव नही किया था तो उनकी झाँते पूरी तरह से उस बड़े लंड को घेरे हुए थी। उसने उसे बड़े प्यार से अपने हाथों मे लिया और एक उंगली के नाख़ून से धीरे-धीरे उनके लंड के सिरे से जड़ तक खुरचने लगी। राजासाहब की आँखे मज़े मे बंद हो गयी। मेनका ने अपना मुँह लंड के सुपारे पे रखा और केवल सुपारा मुँह मे भर चूसने लगी। राजासाहब नीचे से गांड हिला कर पूरा लिंड उसके मुँह मे पेलने की कोशिश करने लगे पर मेनका ने अपनी मुट्ठी मे उसे मज़बूती से जाकड़ उन्हे ऐसा नही करने दिया। राजासाहब उसकी इस हरकत से पागल हो गये और उसके सर को अपने लंड पे दबाने लगे।
बने रहिये आगे लिखना जारी है...........
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मेनका थोड़ी देर तक उन्हे ऐसे ही तडपाती रही और जब उन्हे लगा की वो ऐसे ही उन्हे झड़वा देगी तो उन्हे चौंकाते हुए उसने उनका पूरा लंड अपने मुँह मे भर लिया और चूसने लगी। राजासाहब ने नीचे से ज़ोर-जोर से कमर हिलाकर उसके मुँह को चोदना शुरू कर दिया। मेनका आज जी भर कर उनके लंड को चूसना चाहती थी। उसने हाथ रख कर राजासाहब को कमर हिलाना बंद करने का इशारा किया। उसने अपना मुँह लंड से अलग कर दिया और अपने ससुर की आँखों मे देखते हुए उनके अंडो को नाख़ून से छेड़ने लगी और लंड के आस-पास के बालो को चूमते हुए उन्हे जन्नत की सैर करने लगी।
उसके होठ घूमते हुए उनके अंडो पे कस गये। राजासाहब ने अपने हाथ उसके बालों मे घुसा दिया। मेनका ने लंड को हाथ मे भर ज़ोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया। वो अपने होठ अंडो से हटा उनके लंड पे लाई,राजासाहब को लगा की वो उनका लंड मुँह मे लेने वाली है तो उन्होने ने अपनी कमर उचकाई पर मेनका ने उनको तड़पाते हुए मुँह हटा लिया। अब वो मुँह नीचे लाती और लंड के सिरे के पास लाइ जैसे ही राजासाहब घुसाने को होते तो मुँह वापस खींच लेती। राजासाहब तो तड़प से पागल हो गये। उन्होने उसका सिर पकड़ अपने लंड पे लगा दिया और इस बार अपना लंड एक बार फिर उसके मुँह मे पूरा घुसा दिया।
मेनका ने उनका लंड अपनी मुट्ठी मे भर लिया और हिलाते हुए लगी चूसने। राजासाहब के लिए बात अब बर्दाश्त से बाहर हो गयी थी। उन्होने उसके सर को पकड़ नीचे से ज़ोर-जोर से कमर हिलाते हुए उसके मुँह मे अपना वीर्या गिरा दिया। मेनका उनका वीर्य पीने लगी जिसकी एक बूँद उसके होंठो के कोने से निकल कर उसकी ठुड्डी पे आ गयी। पूरा लंड चाट कर साफ़ करने के बाद वो उठी और अपनी ठुड्डी पे गिर आई उस बूँद को एक उंगली से पोछा और उस उंगली को मुँह मे ले चूसने लगी।
उसकी ये कातिल हरकत देख राजासाहब ने हाथ बढ़ा कर उसे खीच कर अपने उपर ले लिया और उसे चूमने लगे और अपने वीर्य का स्वाद चखने लगे। आज मेनका उन्हे तडपाने के मूड मे थी। जैसे ही राजासाहब ने उसके बदन पे अपनी बहो की गिरफ़्त मज़बूत की वो हँसती हुई अलग हो गयी। उन्होने हाथ बढ़ाया तो वो छितक कर अलग हो बेड से उतर गयी। मैत्री की पेशकश.
राजासाहब उठे और उसकी साडी का पल्लू पकड़ कर उसे अपने पास खींच लिया।,"छोडो ना...मुझे नींद आ रही है।",मेनका उन्हे तड़पाने के इरादे से बोली।
"झूठ मत बोलो,चलो आ जाओ।",वो उसे फिर से बिस्तर पे ले जाने लगे।
"उउन्न्न...नही....नो",मेनका फिर मचली तो राजासाहब ने एक हाथ से उसकी कमर को जकड़ा और दूसरे से उसकी साडी खींच दी।
"ऊन्न्न्ह्ह...बदमाश कहीं के!",मेनका ने उनके सीने पे बनावटी गुस्से मे मुक्के मारे। अगले ही पल उसका पेटिकोट भी ज़मीन पे था और थोड़ी दे बाद वो केवल एक पेंटी मे अपने नंगे ससुर की बाहों मे उनके बिस्तर मे पड़ी उन्हे चूम रही थी। चूमते हुए राजासाहब ने उसकी पीठ पे हाथ फेरते हुए उसकी पेंटी मे हाथ डाल उसकी गांड को दबाने लगे। और उसकी गांड के छेद से खेलने लगे।
बने रहिये दोस्तों............
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दोस्तों
मैंने दो अपडेट दिए है आपके मनोरंजन के लिए
कृपया पढ़िए और अपने मंतव्यो दीजिये.....
आगे लिह्ना जारी है..............
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थोड़ी देर गांड दबाने के बाद उन्होने ने उसकी पेंटी को घुटनो तक सरका दिया और फिर अपनी टांग उठा कर उसकी पेंटी मे फँसा उसे पूरी तरह से अपनी बहू के जिस्म से अलग कर दिया। अब वो उसकी चूचियाँ चूस रहे थे और हाथ पीछे से उसकी गांड दबाने के बाद उसकी चूत मे घुस उसके दाने को रगड़ रहा था। मेनका जोश मे कमर हिलाने लगी। विश्वा की मौत के पहले उसकी गोरी चूचियाँ उसके ससुर की लव बाइट्स से भरी हुई थी,पर इधर एक महीने मे वो वापस बेदाग हो गयी थी। राजासाहब आज इस ग़लती को सुधारने मे लगे हुए थे और उसके सीने पे अपने होठों के निशान पे निशान छोड़े जा रहे थे। उनकी उंगली की रागड़ाई ने मेनका को फिर से झड़वा दिया।
बने रहिये दोस्तों...........
राजासाहब ने उसे लिटाया और उसकी चूचिया चूमते हुए नीचे उसके पेट पे आ गये,थोड़ी देर तक उनका मुँह उसके पेट और नाभि पे घूमता रहा और फिर वो उसकी जाँघो के बीच आ गये और उसकी टाँगे अपने कंधों पे चढ़ा ली। वो झुक कर उसकी चूत के आस-पास चूमने लगे। मेनका ने अपनी उंगलियो मे उनके बाल पकड़ लिए और बेचैनी से मचलने लगी। चूमते हुए जैसे ही राजासाहब के होंठो ने उसकी चूत को छुआ उसकी कमर हिलने लगी। राजासाहब की जीभ ने उसकी चूत को चाटना चालू कर दिया और उनके हाथ उसकी चूचियो और उनके निपल्स से खेलने लगे। मेनका अपने ससुर के सिर को अपनी भारी जाँघो मे दबा कर उनका मुँह अपनी चूत पे भींचने लगी। "ऊओ...ऊऊहह...या...ष्ह...!"
राजासाहब ने चाट-चाट कर उसकी चूत का सारा रस पी लिया। बीच-बिच मे वो अपने होठ उसकी चूत से हटा उसकी आंद्रूणई जाँघो को चूमने-चूसने लगते और कही भी अपने होंठो के निशान छोड़ देते। उनके हाथ उसकी बाहरी जाँघो को मज़बूती से थामे दबाते,सहलाते और फिर वापस उसकी मस्त चूचियो पे लग जाते। मेनका अपने ससुर की जीभ की चुदाई से 3 बार झड़ी। अब राजासाहब का लंड फिर से तैयार था। मैत्री की पेशकश.
वो उठे और घुटनो के बल अपनी बहू की जाँघो के बीच बैठ गये। उन्होने अपना लंड उसकी चूत की दरार पे एक बार फिराया तो मेनका ने धीरे से अपनी कमर उचका उसे अपने अंदर लेने की कोशिश की। राजासाहब ने अपना लंड उसकी चूत पे ररड़ना शुरू किया। मेनका बेचैन हो गयी,वो चाहती थी की राजासाहब अब उसे अपने नीचे दबा कर उसे जम कर चोदे पर वो तो बस लंड उसकी चूत पे रगड़ कर उसे तडपा रहे थे।
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यह एपिसोड आधा छोड़ ने का मन नहीं है सो पूरा कर रही हूँ
बने रहिये और कहानी का स्वाद लेना चालू रखे
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"ऊ...ऊओह...प्लीज़....या....श..क...रो ना....!"
"क्या मेरी जान?",राजासाहब वैसे ही लंड रगड़ रहे थे। उन्होने लंड चूत पे रख हल्का सा धक्का दिया और फिर झट से निकाल लिया तो मेनका जोश मे पागल हो गयी। मैत्री की रचना.
"प्लीज़ जा...आन....और मत ताड़....पाओ...अब करो ना!"
"क्या करू? बताओ तो।"
"ऊ....ऊफ़....इसे घुसाओ....",अपनी बात से मेनका खुद शरमा गयी और अपने हाथो से अपना चेहरा ढक लिया।
"इसे क्या कहते हैं,जान?",उन्होने उसके हाथ चेहरे से हटा अपने हाथों मे ले लिए।
"हमे नही पता।",मेनका के गाल लाज के मारे लाल हो गये थे।
"तो ये अंदर भी नही जाएगा।"
"उन्न...उउन्न्ह...प्लीज़।"
"पहले इसका नाम बताओ।"
"हमने कहा ना हमे नही मालूम....एयाया...आअहह...!",राजासाहब ने लंड उसके दाने पे रगड़ दिया था।
"हम बताते हैं, इसे लंड कहते हैं और इसे चूत, अब बोलो कि हम क्या कहा घुसाएँ।"
मेनका का तो शर्म से बुरा हाल था। उसने अपनी आँखे बंद कर रखी थी पर वही उसका जिस्म अब ये तड़पन और बर्दाश्त नही कर सकता था। राजासाहब ने उसकी चूत पे लंड रगड़ना तेज़ कर दिया तो वो और बेचैन हो गयी और अपनी कमर उठा लंड को चूत मे घुसाने की नाकाम कोशिश करने लगी। राजासाहब ने उसके पेट पे हाथ रख उसकी कमर को वापस बिस्तर पे लिटा दिया,जल्दी बोलो।"
मेनका ने आँखे खोली और हाथ बढ़ा लंड को पकड़ लिया,"प्लीज़ यश...पना...अपना...लंड हमारी च..चूत मे घुसाओ।"
कहने की देर थी कि राजासाहब ने अपना लंड एक ही झटके मे उसकी कसी,गीली चूत मे उतार दिया।,"ऊऊ...ऊऊव्व्वव....!",मेनका चीख कर अपने ससुर से चिपक गयी और अपनी कमर हिलाते हुए उनके तेज़ धक्कों का जवाब देने लगी।"...हा...अन्णन्न्...य...श ऐसे....ही....करो....हमे आप....एयाया...आआआआअहह...अपने से....अलग म...त ...कर...ना...ऊऊ...ओओओएएएएएएएएए...!"
राजासाहब ने पहली बार अपनी बहू को चुदाई के दौरान ऐसे बोलते सुना था और उनका जोश तो दुगुना हो गया था। वो जम कर धक्के मार उसे चोद रहे थे,"..नही...मेरी जान,तुम सिर्फ़ हमारी हो। तुम्हे कभी नही छोड़ेंगे...जीवन भर ऐसे ही चोदेंगे....!" प्रस्तुतकरता मैत्री.
कमरे मे अब दोनो की आँहे और मस्त बाते गूँज रही थी। दोनो एक दूसरे के बदन मे डूबे जा रहे थे कि वो घड़ी आ गयी जब अपने उपर कोई ज़ोर नही रहता। मेनका की कमर ज़ोर से हिलने लगी और वो अपने ससुर से चिपक इनकी पीठ मे नाख़ून और कंधों मे दाँत गाड़ते हुए झाड़ गयी। वही राजासाहब के लंड ने जैसे ही उसकी चूत का पानी चखा,उसने भी 2-3 ज़ोरदार झटके मारे और अपने पानी से चूत को भर दिया।
राजासाहब ने करवट ले अपनी बहू को बाहो मे भर लिया और उसके मखमली बदन को प्यार से सहलाने लगे। थोड़ी देर की खामोशी के बाद मेनका ने उनके सीने मे प्यार से मुक्के मारे,"कितनी गंदी बातें बुलवाई हमसे!"
"तुमने भी तो तडपा कर गंदी हरकत की थी। पर सच कहना मज़ा आया की नही।"
जवाब मे मेनका ने शर्मा कर उनके सीने मे मुँह छुपा लिया। राजासाहब नेभी हंसते हुए उसे अपने आगोश मे भर लिया।
क्रमशः।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
बने रहिये दोस्तों...............
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पार्ट—11
गतान्क से आगे।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
मेनका ने राजासाहब को लिटा दिया और उनके सीने पे अपनी बड़ी-बड़ी चूचिया रख के लेट गयी,"बॅंगलुर कब जाओगे?"
"सोचते हैं कल ही निकल जाएँ।",राजासाहब उसकी चिकनी कमर सहला रहे थे।
"हमे भी ले जाओगे ना?" मैत्री की कहानी.
"नही,मेनका,तुम्हे तुम्हारे मायके छोड़ देंगे।"
"क्यू?",मेनका अपनी कोहनी पे अपना भार रख थोड़ा उठ गयी। राजासाहब को अपने सीने पे उसकी चूचियो का दबाव बड़ा भला लग रहा था,उसके उठते ही छातिया हटी तो उन्होने हाथ कमर से उपर सरका उसकी पीठ दबा के उसके उरोजो को वापस अपने सीने पे दबा दिया।
"अभी तुम्हारा बॅंगलुर जाना ठीक नही होगा। ये कोई बिज़नेस डील नही है। तुम अपने माता-पिता के पास रहोगी तो हम निश्चिंत रहेंगे कि तुम सही-सलामत हो।"
"और हम कैसे निश्चिंत रहेंगे तुम्हारे बारे मे?",मेनका ने अपनी एक जाँघ उनके उपर चढ़ा दी।
"हमारी फ़िक्र मत करो। हम काम ख़त्म कर जल्दी वापस लौट आएँगे।",उन्होने उसकी जाँघ को खींच अब उसे अपने उपर पूरी तरह से ले लिया। अब मेनका की चूत उनके लंड पे लगी हुई थी। मैत्री की प्रस्तुति.
"तो ठीक है,कल हमे हमारे मायके छोड़ तुम बॅंगलुर चले जाना पर वादा करो कि जैसे ही वहा से वापस आओगे सीधा हमे लेने आओगे।"
"वादा तो कर दे पर तुम्हारे माता-पिता को अजीब नही लगेगा! और फिर वो ये भी तो चाहेंगे कि तुम उनके साथ कुछ और दिन रह लो।",राजासाहब ने उसकी गांड की फांको को फैलाते हुए नीचे से एक धक्का मारा तो लंड 3 इंच तक उसकी चूत मे घुस गया।
"...एयेए..यईईए....!...तुम उस...की चिंता मत क...रो...ऊऊ...ऊओह....मैं वो संभाल लूँगी। तुम एयेए...आहह..बस वा...अदा करो।",मेनका ने उठ कर अपनी कमर हिलाई और पूरा लंड अपने अंदर ले लिया।
"वादा करते हैं,मेरी रानी!",राजासाहब उठ बैठे और उसे अपनी बाहों मे कस उसकी चुचियाँ अपने मुँह मे भर ली। मेनका भी मस्त हो उनसे लिपट कर कमर हिला-हिला कर उन्हे चोदने लगी।
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दोस्तों आज के लिए बस यही तक फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ तब तक के लिए मैत्री की ओर से जय भारत.
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दोस्तों आज मैंने आपके मनोरंजन के लिए कुछ एपिसोड्स ऊपर दिए है
आशा है की आप सबको पसंद आएगा
और उम्मीद है की आप अपनी राय देना नहीं भूलेंगे..................
शुक्रिया दोस्तों
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