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Incest खेल ससुर बहु का
"हमे शरम आती है।"उसने एक हाथ अपने ससुर के बालों मे फिराते हुए कहा।

"अरे अब हमसे कैसी शर्म?",राजासाहब ने उसे थोडा सा अपनी तरफ घूमाते हुए अपने होठ उसकी एक चूची से लगा दिए।

"ऊओ..ऊवन्न....हह...!",मेनका की आँखे बंद हो गयी और वो अपनी गांड से अपने ससुर के लंड पर रगड़ने लगी। राजासाहब का मुँह उसकी एक चूची पे,उनका एक हाथ उसकी दूसरी चूची पे और उनका दूसरा हाथ उसकी चूत पे लग गये थे। मेनका तो जन्नत मे पहुँच गयी थी। उसके ससुर उसके नाज़ुक अंगो को छेड़ रहे थे और खास कर उनकी उंगली तो उसकी चूत को रगड़-रगड़ कर उसे गीली पर गीली किए जा रही थी।
मैत्री की पेशकश.


ये सारा नज़ारा दोनो शीशे मे देख और मस्त हो रहे थे। तभी राजासाहब ने उसे आगे झुकाया तो वो ड्रेसिंग टेबल का सहारा ले झुक गयी। उन्होने उसकी कमर पकड़ी और पीछे से अपना लंड उसकी चूत मे पेल दिया और उसे चोदने लगे। मेनका आँहे भरने लगी। चोद्ते हुए उन्होने ड्रेसिंग टेबल से क्रीम उठाई और उसकी गांड मे लगाने लगे। मेनका समझ गयी कि आज फिर उसकी गांड मारी जाएगी और ये ख़याल आते ही उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया।

राजासाहब वैसे ही चोद्ते रहे और थोड़ी देर बाद लंड उसकी चूत से निकाल उसकी गांड मे उतार दिया। उसे हल्का सा दर्द हुआ पर जैसे ही लंड गांड मे उतरा,उसके ससुर ने उसकी चूचिया और चूत को फिर से रगड़ना शुरू कर दिया और उसे दर्द से ज़्यादा मज़ा आने लगा। राजासाहब थोड़ी देर तक उसकी गांड मारते रहे और फिर लंड निकाल कर फिर से चूत मे डाल दिया। काफ़ी देर तक वो ऐसे ही शीशे मे अपनी बहू से नज़रे मिलाते हुए, बारी-बारी से उसकी चूत और गांड मारते रहे और इस दौरान मेनका 3 बार और झड़ गयी। अब उसकी टांगे जवाब दे रही थी। राजासाहब भी ये भाँप गये थे। उन्होने अपना लंड निकाला और उसे गोद मे उठा कमरे मे बिस्तर पे ले गये।

अब मेनका लेटी हुई थी और उसके ससुर उसके उपर चढ़ कर लंड उसकी चूत मे घुसा रहे थे। मेनका ने अपनी टांगो और बाहों मे अपने ससुर के बदन को कस लिया। अब राजासाहब अपनी बहू को उसी के बिस्तर मे चोद रहे थे। उनका बड़ा लंड  उसकी चूत को तेज़ी से चोद्ते हुए उसकी कोख पे चोट कर रहा था। हर चोट पे मेनका के जिस्म मे मज़े की लहर दौड़ जाती और उसकी आह निकल जाती। उसकी कसी चूत की दीवारें भी उसके ससुर के लंड को अपनी पकड़ मे कसे हुए थी। प्रस्तुतकर्ता मैत्री.
 
राजासाहब काफ़ी देर से अपने आंडो मे उमड़ रहे सैलाब को रोके हुए थे और अब उनके धक्कों मे तेज़ी आ रही थी,मेनका भी नीचे से ज़ोर-जोर से अपनी कमर हिला रही थी। उसने अपने ससुर के बदन को कस के जाकड़ लिया और बिस्तर से उठती हुई उचक कर उन्हे चूमने लगी,उसकी चूत ने राजासाहब के लंड को बिल्कुल जाकड़ लिया और पानी छोड़ दिया। जैसे ही वो झड़ी की राजासाहब की कमर भी झटके खाने लगी और उनके लंड ने उसकी चूत को अपने पानी से लबालब भर दिया। मेनका के चेहरे पे खुशी और संतोष का भाव आया और वैसे ही अपने ससुर से लिपटी हुई थकान के मारे नींद की गोद मे चली गयी।

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आज के लिए बस यही तक फिर मिलेंगे अक नए रहस्यमय प्रसंग के साथ तबै तक के लिए मैत्री की तरफ से
जय भारत
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दोस्तों

आपके मनोरंजन के लिए कुछ अपडेट्स दिए है

कृपया पढ़े और अपनी राय दीजिये


शुक्रिया बने रहेने के लिए
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बेहद मजेदार प्रस्तुति
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(30-03-2026, 07:49 AM)@@004 Wrote: बेहद मजेदार प्रस्तुति

शुक्रिया दोस्त

बने रहिये
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चलिए दोस्तों कहानी को आगे ले जाते है ...........

जुड़े रहिये मेरे साथ इस कहानी में
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बेस्कॉम की वॅन रिहेब सेंटर के पीछे की दीवार के साथ बने उस सुनसान रास्ते पे खड़ी थी। उसके काले शीशों के अंदर कोई नही देख पाता पर अंदर जब्बार और मलिका बैठे थे। रात के 2 बज रहे थे और कल्लन सीडी के सहारे रिहेब सेंटर की दीवार पर चढ़ गया था। चढ़ने के बाद उसने सीडी उठा कर सेंटर के अंदर के तरफ लगा दी और उतर गया। उसने सीडी ज़मीन पे लिटा कर रख दी,उस एक मात्र गार्ड को दूर से वो सीढ़ी कभी नज़र नही आती,वैसे भी वो अपने गेट के कॅबिन से बाहर निकलता था ही नही।


कल्लन चुपके से सेंटर के अंदर जाकर दोनो मंज़िलो पे मरीज़ो के कमरे मे देखने लगा। हर मरीज़ के कमरे मे दीवार पे एक बोर्ड पे उस मरीज़ का नाम और उसकी केस डीटेल्स लगे थे। दूसरी मंज़िल के चौथे कमरे मे उसकी खोज ख़त्म हो गयी। विश्वा वहा बेख़बर सो रहा था। कल्लन फ़ौरन वहा से निकल बिल्डिंग का मुआयना करने लगा,बेसमेंट मे जनरेटर लगा था पावर बॅकप के लिए। उस जनरेटर को देखते ही उसके होठों पे मुस्कान खेलने लगी।

वॅन मे बैठे जब्बार से इंतेज़ार मुश्किल हो गया था। वो वक़्त काटने के लिए मलिका के जिस्म से खेलने लगा। उसकी शर्ट के बटन खोल वो उसकी चूचिया चूस रहा था और मलिका उसके पॅंट की ज़िप खोल उसके लंड को हिला रही थी कि तभी वॅन के शीशे पे दस्तक हुई। जब्बार ने अपना लंड अंदर किया और शीशा उतारा,कल्लन था। उसने दरवाज़ा खोला तो वो सीडी वॅन की छत पे चढ़ा अंदर पीछे की सीट पे बैठ गया।

"
कुछ बात बनी?",जब्बार वॅन स्टार्ट कर शहर की ओर चलने लगा।

"
हा,उसका कमरा भी मिल गया और उसे निकालने का रास्ता भी पर सब कल ही करना पड़ेगा।"

"
ठीक है।"

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बने रहिये...........
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आगे बढ़ते है.............
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मेनका की नींद खुली तो देखा कि उसके ससुर उसकी छाती दबाते हुए उसके निपल्स को मसल रहे थे और उन्हे अपनी जीभ से छेड़ रहे थे। उसने अंगड़ाई लेते हुए उन्हे लिटा दिया और उठ कर उनके लंड को अपने मुँह मे ले चूसने लगी। काफ़ी देर तक वो उनके लंड और अंडो को चूमती,चुस्ती रही और फिर उनके उपर चढ़ कर उनका लंड अपनी चूत मे ले लिया और उछल-उछल कर अपने ससुर को चोदने लगी।

 
********
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सोरी दोस्तों कुछ पार्ट छुट गया था तो शामिल कर दिया


जुड़े रहिये
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दुष्यंत वेर्मा का जासूस मनीष वो फोटो ले कर हर जगह छान-बीन कर रहा था।"अरे साहब,ये आदमी तो कुछ दिन पहले तक मेरे से माल ले जाता था,पर इधर अचानक गायब हो गया है। मेरे को भी इसकी तलाश है।" मैत्री की पेशकश.

"
तुझे क्यू? तेरे ग्राहक कम हो गये हैं क्या?" मनीष शहर के एक पहुँचे हुए ड्रग डीलर से बात कर रहा था।

"
नही सर,उपरवाले के करम से धंधा मस्त चल रहा है। पर बात क्या है ना कि ये साला नशेड़ी लगता नही था। मुझे शुरू मे शक़ था,फिर लगा कि नया-नया शौक चढ़ा होगा पट्ठे को। पर जब ये गायब हो गया तो मुझे पूरा यकीन हो गया कि ये साला मुझसे माल खरीद कर आगे ज़्यादा दाम मे बेचता होगा। मा कसम! बहनचोद,मिल जाए तो साले की ऐसी-तैसी कर दूँगा।"

"
ठीक है,कर देना ऐसी-तैसी। पर उस वक़्त ज़रा मेरा भी ख़याल रखना,मैं भी इस से मिलना चाहता हू।" उसने उसे 1000 का नोट पकड़ाया।

"
ओके,सर।" सलाम ठोंक कर वो डीलर चलता बना।

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बॅंगलुर के उस बदनाम इलाक़े की उस तंग गली मे जब्बार और कल्लन चले जा रहे थे। यहा दिन के एक से 2 बजे भी सूरज की रोशनी बड़ी मुश्किल से आ रही थी। दोनो एक बड़े ख़स्ता हाल कमरे के आगे रुके। उस के दरवाज़े पे एक काफ़ी पुराना ज़ंक लगा ताला लगा था। कल्लन ने एक झटके मे उस ताले को तोड़ दिया। अंदर चारो तरफ धूल और  गंदगी थी। लगता था मानो इस कमरे मे बरसो से कोई इंसान नही आया था। कमरे मे एक अजीब सी बदबू फैली थी और परिंदो ने यहा अपने घोंसले बना लिए थे।

"
ये जगह ठीक लगती है। काम होने के बाद हम जब तक यहा से निकलेंगे तब तक के लिए हमारा राज़ यहा महफूज़ रहेगा।"

"
हा,आज रात ही काम ख़तम कर कल सवेरे यहा से निकल चलेंगे।" कल्लन ने बाहर आकर कमरे पे एक नया ताला लगा दिया। गली से निकल कर मेईन रोड तक आते हुए उनपर किसी ने कोई खास ध्यान नही दिया। ऐसे लोग यहा हमेशा ही घूमते नज़र आते थे।
मैत्री की रचना.

"
आज रात, बस, आज रात राजा की बर्बादी का आगाज़ हो जाएगा।" जब्बार ने कार मे बैठते हुए अपने आप से कहा। वहा से निकल दोनो अपने-अपने होटेल्स पहुँचे और  चेकआउट कर दिया। मलिका भी अपने होटेल से निकल चुकी थी। बेस्कॉम की वो वॅन कवर लगा कर एक होटेल की बेसमेंट पार्किंग मे खड़ी कर दी गयी थी। तीनो शहर मे अलग-अलग घूम कर अपना वक़्त काटने लगे और रात का इंतेज़ार करने लगे।

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बने रहिये............
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हर रात की तरह इस रात भी मेनका और राजासाहब उनके बिस्तर मे एक दूसरे की बाहों मे नंगे पड़े एक दूसरे के होंठ चूम रहे थे। राजासाहब के हाथ मेनका की गांड और चूची मसल रहे थे और मेनका उनका लंड हिला रही थी। राजासाहब उसके होठ छोड़ नीचे आए और उसकी एक चूची को मुँह मे भर लिया और चूसने लगे। मैत्री की प्रस्तुति.


मेनका बहुत गरम हो चुकी थाई। उसने अपने ससुर को अपनी चूची से अलग किया और लिटा दिया और उनकी बगल मे घुटनो पे आके उनका लंड अपने मुँह मे ले लिया। राजासाहब ने हाथ बढ़ा कर उसकी गांड पकड़ी और खींच कर उसे अपने उपर ले लिया। अब दोनो 69 पोज़िशन मे थे। मेनका झुक कर अपने ससुर का लंड अपने हाथों मे भर अपने मुँह मे ले रही थी और वो नीचे से अपने हाथों से उसकी कमर पकड़ उसकी चूत को अपनी जीभ पे लगा रहे थे।

उसके ससुर की लपलपाति जीभ ने मेनका की चूत को पानी छोड़ने के लिए विवश कर दिया और वो कमर हिलाती हुई अपने ससुर के लंड को और ज़ोर से पकड़ कर चूसने लगी। वो उनके सुपारे से चूमती हुई नीचे लंड की जड़ तक आती और फिर उनके अंडो को एक-एक कर के अपने मुँह मे भर लेती। फिर जड़ से चूमती हुई वापस उपर सुपारे तक आती और फिर उसे अपने मुँह मे ले चूसने लगती। राजासाहब की जीभ तो लगातार उसकी चूत के दाने को छेड़ रही थी। बहुत देर तक दोनो ऐसे ही लगे रहे।

फिर राजासाहब उठे और मेनका को घुमा कर अपनी गोद मे बिठा कर उसकी चूत मे नीचे से लंड डाल दिया। अब मेनका अपने ससुर की गोद मे बैठी उनके लंड पे धीरे-धीरे हिल रही थी,उसकी बाहें उनकी गर्दन मे लिपटी थी और हाथ उनके बालों मे थे,टांगे उसने उनकी कमर पे लपेट रखी थी। राजासाहब भी नीचे से अपनी कमर हिला रहे थे,मेनका को बाहों मे भर वो उसकी पीठ और गांड सहला रहे थे। दोनो के होंठ एक दूसरे से जुड़े हुए थे।

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बने रहिये दोस्तों.............
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कल्लन कल रात की तरह ही सेंटर के अंदर घुसा और सीधा दूसरी मंज़िल पे पहुँच गया। यहा ड्यूटी रूम मे एक डॉक्टर सो रहा था। कल्लन विश्वा के कमरे मे पहुँचा,वो गहरी नींद मे था। कल्लन ने अपनी जेब से एक शीशी निकाल कर उसमे से एक लिक्विड निकाल अपने रुमाल को भिगोया और फिर वो रुमाल कस के विश्वा की नाक पे दबा दिया। विश्वा थोडा छटपटाया पर थोड़ी ही देर मे बेहोश हो गया। विश्वा के रूम मे उसका लॅपटॉप भी पड़ा था। उसकी हालत मे सुधार देखते हुए और उसका मन लगाए रखने के लिए डॉक्टर पुरन्दारे ने उसे ये रखने की इजाज़त दी थी पर बिना नेट कनेक्शन के। कल्लन ने लॅपटॉप ऑन कर कुछ टाइप किया और फिर उसे वैसे ही ओं छोड़ विश्वा के पास गया और उसे अपने कंधे पे उठाया और नीचे की तरफ बढ़ गया।


जब वो नीचे पहली मंज़िल पे पहुँचा तो किसी के आने की आहट सुनाई दी तो वो जल्दी से बगल के एक कमरे मे घुस गया। वहा एक मरीज़ सोया पड़ा था। कल्लन ने दरवाज़े की ओट से देखा,इस फ्लोर का डॉक्टर राउंड लेता हुआ हर कमरे मे देख रहा था और उसी के कमरे की ओर आ रहा था। कल्लन दरवाज़े के पीछे हो गया। अगर डॉक्टर अंदर आया तो उसके हाथों बेहोश ज़रूर होगा।

तभी दरवाज़ा खुला,विश्वा को अपने दाए कंधे पे उठाए अपना बाया हाथ उसने उपर उठा लिया,अगर डॉक्टर अंदर आया तो बस गर्दन के पीछे एक वार पड़ेगा और वो बेहोश हो जाएगा। डॉक्टर ने दरवाज़ा खोल बाहर से ही झाँका और अंदर सोते हुए मरीज़ को देख दरवाज़ा खींच कर वापस चला गया। कल्लन ने राहत की सांस ली और थोड़ी देर उसी कमरे मे खड़ा रहा। फिर उसने बाहर झाँका,डॉ.अपने ड्यूटी रूम मे चला गया था। मैत्री की प्रस्तुति.

कल्लन नीचे आया और बेसमेंट मे पहुँचा। वहा एक कार कवर पड़ा था। उसने विश्वा को उसी कवर मे लपेटा और वही छोड़ दिया। फिर उसने जनरेटर के कनेक्शन्स निकाल दिए। तभी जब्बार बेस्कॉम की वॅन ले मैन गेट पे पहुँचा,"गार्ड भाई,उधर के कॉलेज हॉस्टिल से कंप्लेंट आई है,वहा कि बिजली ठीक करने के लिए थोड़ी देर के लिए पूरे फेज़ की लाइट बंद करेंगे, परेशान होके फोन पे कंप्लेंट मत करना,बस 25-30 मिनट का काम है।"

"
ठीक है,भाई! वैसे भी यहा जनरेटर है,कोई परेशानी नही होगी।" सेंटर के पास ही एक इंजिनियरिंग कॉलेज कम हॉस्टिल था और इसके अलावा 2-3 बिल्डिंग्स अंडर कन्स्ट्रक्षन थी। जब्बार वॅन ले आगे बढ़ा और जंक्शन बॉक्स खोल उसने सेंटर की बत्ती काट दी और वेन वापस ले कॉलेज की ओर जाने लगा।


जैसे ही वान सेंटर के पास पहुँची वो गार्ड हाथ हिलाता नज़र आया।

"
क्या हुआ?"

"
अरे भाई,हमारा जनरेटर नही चल रहा?"

"
अरे,अभी लाइट आ जाएगी,जेनरेटर का क्या करना है।"

"
देख लो भाई,मरीज़ो को तकलीफ़ हो जाएगी।" गार्ड ने बोला।

"
अच्छा भाई,पहले तुम्हारा ही काम करते हैं। गेट खोलो।"


वॅन अंदर लगा कर जब्बार उतरा,"कहा है जेनरेटर?"

"
वहा नीचे।",गार्ड नीचे जाने लगा।
मैत्री रचित कहानी.

"
तुम रहने दो,मैं देखता हू।",जब्बार बेसमेंट मे चला गया।

"
वॅन खुली है, इसे चुपके से उसमे पहुँचाओ और तुम भी उसमे छिप जाओ।"

"
ओके!" कल्लन धीरे-धीरे बाहर पहुँचा,गार्ड गेट के पास घूम रहा था। उस से छिपते हुए कल्लन ने विश्वा को अंदर डाला और खुद भी लेट गया। थोड़ी देर बाद जब्बार जनरेटर स्टार्ट कर बाहर निकला और वेन स्टार्ट कर दी,"हो गया भाई तेरा काम।"

"
शुक्रिया भाई।" गार्ड ने गेट खोला। इस पूरे दौरान जब्बार ने टोपी पहने हुई थी और अंधेरे की वजह से गार्ड ठीक से उसका चेहरा नही देख पाया। जब्बार ने वॅन कॉलेज की तरफ घुमाई और फिर पीछे आके दीवार के पास गिरी सीढ़ी उठाई और फिर घुमा कर जंक्शन बॉक्स के पास गया और सेंटर की बिजली कनेक्ट कर दी।

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आज के लिएय बस यही तक फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ तब तक के लिए मैत्री की तरफ से जय भारत.
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दोस्तों कुछ अपडेट्स आपके मनोरंजन के लिए दिए है

आशा है की आप सबको पसंद आएगा...............


आपके मंतव्यो की अपेक्षा सह........................
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थोडा आगे...............

समय है तो आगे लिख देती हूँ

पढ़िए
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मेनका अभी भी अपने ससुर की गोद मे उनका लंड अपनी चूत मे लिए बैठी उन्हे चूम रही थी। राजासाहब थोड़ी ही देर पहले झडे थे पर दोनो का दिल अभी भी नही भरा था। राजासाहब झुक कर उसकी चूचियाँ चूसने लगे तो मेनका मस्त हो कर नीचे से कमर हिलाने लगी। राजासाहब ने उसकी गांड मसलते हुए एक उंगली उसकी गांड के छेद मे डाल दी। मेनका चिहुनक के और ज़ोर से उनके लंड पे उछलने लगी। राजासाहब का सोया लंड एक बार फिर से उनकी बहू की चूत के अंदर फिर से अपनी जगह बना रहा था। वो भी नीचे से अपनी कमर हिलाने लगे। उन्होने अपने हाथों मे उसकी गांड की फांके भर एक उंगली उसमे घुसाए हुए उठ कर अपने घुटनो पे बैठ गये और लगे उसे चोदने। मेनका मस्त हो गयी और उनसे लिपट कर चुदाई का मज़ा लेने लगी। राजासाहब झुक कर बारी-बारी से उसकी चूचिया और कड़े निपल्स को निचोड़ रहे थे। कमरे मे गीली चूत मे अंदर-बाहर होते लंड की फॅक-फॅक,राजासाहब की भारी साँसे और मेनका की आँहे गूँज रही थी। मैत्री की रचना.


मेनका के बदन मे बिजली दौड़ गयी और उसकी चूत ने चुतरस छोड़ दिया। राजासाहब की बहू उनसे कस के लिपट गयी,वो समझ गयी को वो झड़ रही है,उन्होने ने भी 2-3 ज़ोरदार धक्के लगाए और उसकी चूत मे पानी छोड़ दिया।

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उधर....


बने रहिये.................
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उधर....


विश्वा होश मे आया तो उसने अपने को एक बंध गंदे कमरे मे कुर्सी पे बँधा पाया। सामने जब्बार,कल्लन और मलिका खड़े थे।
"तू!!?" वो अपने बंधन खोलने की कोशिश करने लगा।

"आराम से कुंवर", जब्बार ने अपने दोनो साथियो को इशारा किया,"कुंवर साहब की खातिर शुरू करो।“


कल्लन और मलिका ने उसके बँधे हाथो की नसो मे इंजेक्षन्स लगाने शुरू कर दिए। मैत्री की पेशकश.

"नही..नही...मुझे छोड़ दे बहनचोद,कमीने!",विश्वा चिल्लाने लगा तो जब्बार ने उसके मुँह मे कपड़ा ठूंस दिया।" लगाते रहो इम्जेक्षन यह भोसड़ीके को, तब तक जब तक कुंवर साहब भगवान के पास ना पहुँच जाए।।"


विश्वा की आँखे ख़ौफ्फ से फैल गयी और कल्लन और मलिका उसे इंजेक्षन लगाते रहे।

थोड़ी ही देर बाद विश्वा बेसूध हो गया। तीनो ने दस्ताने पहने हुए थे और मलिका यूज़ की हुई सरिंजस उठा कर एक पॅकेट मे रख रही थी। कल्लन विश्वा की नब्ज़ देख रहा था, "काम हो गया।"

"यस!",जब्बार खुशी से चिल्लाया। खोलो इस बहनचोदकी रस्सियाँ और चलो बाहर।"


उन्होने विश्वा की लाश गली के एक नाले के पास गिरा दी और उस कमरे को वैसे ही खुला छोड़ कर अलग-अलग रस्तो से बॅंगलुर छोड़ने की तैयारी करने लगे।

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सुबह के 4 बज रहे था और राजासाहब अपने पलंग पे लेटे थे। उनकी बाई बाँह मेनका की गर्दन के नीचे थी और वो करवट ले उनके साथ उनके होठों को चूम रही थी। उसने अपनी बाई जाँघ अपने ससुर के जिस्म पे इस तरह चढ़ा रखी थी की उनका लंड उसके नीचे दबा था। वो अपने बाए हाथ से उनके सीने के बाल सहला रही थी और राजासाहब अपने दाए हाथ से उसकी बाई जाँघ को।


तभी राजासाहब का मोबाइल बजा,"हेलो!!! क्या?!!!।।"वो चौंक कर उठ बैठे और थोड़ी देर तक फोन सुनते रहे।

"क्या हुआ?",मेनका उठ कर उनके कंधे पे हाथ फेरने लगी।

"विश्वा सेंटर से भाग गया है। बस अपने लॅपटॉप पे मेसेज लिख छोडा है कि ड्रग्स की तलब अब उस से बर्दाश्त नही हो रही।"

"क्या?",मेनका के माथे पे चिंता की रेखाएँ खींच गयी।
मैत्री की रचना.


कहानी अभी जारी है कृपया बने रहे और अपनी राय देते रहे

क्रमशः............


दोस्तों आज के लिए बस यही तक.

जय भारत.
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लगता है अब तक का सब से ज्यादा लिखाई है यह..............

आपके कोम्मेंट की प्रतीक्षा में...................

मैत्री.
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दोस्तों एक और एपिसोड दाल रही हूँ

कृपया आप अपनी राय दे...............
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गतान्क से आगे।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।


आइए अब समय मे थोड़ा आगे चलते हैं-बस 2 दिन आगे।

महल मे मातम छाया हुआ था। राजासाहब अभी-अभी अपने हाथों से अपने दूसरे बेटे की भी चिता को आग दे कर लौटे थे। उस सुबह डॉक्टर पुरन्दारे के फोन के करीब 3 घंटे बाद बॅंगलुर पोलीस ने विश्वा की लाश को उस बदनाम मोहल्ले की गली से बरामद कर लिया था। राजासाहब तो बस बॅंगलुर के लिए निकलने ही वाले थे जब उन्हे ये मनहूस खबर मिली।

पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट मे मौत की वजह ड्रग ओवरडोस बताई गयी थी पर डॉक्टर पुरन्दारे का कहना था कि विश्वा अपनी लत को काफ़ी हद तक छोड़ चुका था और उन्हे बिल्कुल भी यकीन नही हो रहा था कि वो सेंटर से भाग गया था वो भी ड्रग्स के लिए। राजासाहब के लिए इन बतो का कोई मायने नही रह गया था, उनका दूसरा बेटा भी मौत के मुँह मे जा चुका था और अब वो अकेले थे, उनका वंश उनके बाद ख़तम हो जाने वाला था।

विश्वा की मौत ने उन्हे तोड़ दिया था और वो अपनी स्टडी मे बैठे अपनी किस्मत पे रो रहे थे। और मेनका......

मेनका को विश्वजीत की मौत का अफ़सोस था पर दुख...दुख नही था। और होता भी कैसे,उसने उसे कभी एक पत्नी का दर्जा दिया ही नही था। उसके लिए तो बस वो उसकी जिस्म की भूख मिटाने की चीज़ थी बस। मेनका को उसकी मौत पे जितना अफ़सोस था उस से कही ज़्यादा अपने ससुर की चिंता थी। इस हादसे के बाद वो बिल्कुल निराश और हताश हो गये थे। वो शख्स जो अभी तक ज़िंदगी की सभी मुश्किलो का सामना एक चट्टान की तरह करता आया था, आज उस सूखे पत्ते की तरह था जिसे वक़्त की हवाएँ जब चाहे, जहा चाहे उड़ा सकती थी।

मेनका उन्हे संभालना चाहती थी पर इस समय महल मे रिश्तेदारो की भीड़ थी, उसके मा-बाप भी वही थे। इन सब के होते उसे राजासाहब से बात करने का मौका ही नही मिल रहा था। और मौका मिलता भी तो क्या होता, वो अभी उनसे खुल कर बात भी तो  नही कर पाती, तो बस मेनका बस सही मौके का इंतेज़ार करने लगी। उसने ठान लिया था कि वो अपने ससुर और उनके द्वारा खड़े किए गये बिज़नेस को बर्बाद नही होने देगी। मैत्री की पेशकश.

उधर जब्बार जश्न मना रहा था,"ये लो मेरी जान,पियो।" उसने मलिका की कमर मे हाथ डाल बियर की बॉटल उसके होठ से लगा दी।

"
ये बताओ की मेरे अकाउंट मे मेरे पैसे जमा कराए की नही?" मलिका ने एकघूँट भरा।

"
हा,मेरी जान,कल बॅंक जाकर चेक कर लेना।" जब्बार ने उसकी कमर से हाथ उपर लाते हुए उसके टॉप मे घुसा कर एक चूची को दबोच लिया। मलिका ने उसके होठ चूम लिए,"एयेए...अहह...पूरे पैसे डाले है ना? या पिच्छली बार की तरह आधे ही डाले हैं?"

"
तू बस कल बॅंक जाकर देख लेना।",जब्बार ने उसका टॉप उतार फेंका और उसकी चूचियो को चूसने लगा। थोड़ी देर तक मलिका खड़ी उस से अपनी छातिया चुसवाती रही फिर उसे धकेल कर परे कर दिया और ज़मीन पे सोफे से पीठ लगा कर बैठ गयी और बियर की बॉटल मुँह से लगा ली। जब्बार को तो बस उसे चोदने का भूत  सवार था। उसने अपने कपड़े उतार दिए और मलिका के पास जाकर उसके हाथो से बॉटल छीन के अपना लंड उसके मुँह मे डाल दिया,"इसे पी,बियर से ज़्यादा नशा है इसमे।"


ये बात सच थी, मलिका के लिए तो एक मर्द का कड़ा और बड़ा लंड दुनिया की सबसे ज़्यादा नशीली चीज़ थी। वो लंड अपने मुँह मे ले चूसने लगी पर उसकी चूत को कल्लन के लंड का चस्का लग गया था और कल्लन उनके साथ राजपुरा आया नही था।

"
तेरा वो पालतू कहा है,ज़ालिम?",उसने जब्बार के आंडो को हाथ से दबाया और जीभ उसके लंड की छेद पे लगा दी।

"
उसे कुछ दीनो के लिए अंडरग्राउंड रहने को कहा है। जब ये विश्वा की मौत की खबर थोड़ी बासी हो जाए फिर वो बाहर आएगा।",उसने मलिका के सर को पकड़ लिया और अपनी कमर हिलाते हुए उसके मुँह को चोदने लगा।

"
अभी थोड़ी देर पहले जब तू नहा रही थी तब साले ने फोन किया था। उसे भी तेरी तरह अपने पैसों की चिंता लगी हुई थी।" जब्बार ने मलिका को वही ज़मीन पर लिटा दिया और उस पर चढ़ कर अपना लंड उसके अंदर घुसा दिया।

"
आआनन्नऊम्मन्नह...",मलिका उस से चुदने लगी और वो जानती थी की उसकी चुदाई से वो झडेगी भी फिर भी जब्बार मे वो कल्लन वाली बात नही थी। करीब 15 मिनिट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद जब्बार ने उसे छोडा और उठ कर बाथरूम चला गया। उसके जाते ही मलिका ने उसका मोबाइल उठाया, उसमे कल्लन का नंबर देखा और अपने मोबाइल से डायल करने लगी, "कहा है ज़ालिम? मेरी प्यास तो बुझा जाता।",वो फुसफुसाइ। कल्लन ने उसे अपना ठिकाना बता दिया पर शायद उसे पता नही था कि वो कितनी बड़ी ग़लती कर रहा था। मैत्री रचित कहानी.

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जय भारत.
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अति उत्तम प्रस्तुति।।

लेकिन इतने बड़े रिहैब सेंटर में कोई भी कैमरा क्यों नहीं लगा हुआ था और राजा साहब से कही न कही चूक हुई है जो उन्होंने अपने दुश्मनों को कम कर आका है।
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