Thread Rating:
  • 16 Vote(s) - 2.44 Average
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5
Incest खेल ससुर बहु का
(24-03-2026, 02:23 PM)Ayush01111 Wrote: Pati marne wala hai kya biwi ne pati ko completly chodd diya hai or raja sahab ko apne bete se jyada apni jawas se jyada pyar hai apni icchao se jyada pyar hai kyu ki mujhe nahi dikh raha raja sahab ya menka koi bhi visvas ke sath hai vo akela hai bichara

जी आपकी बात सोचने लायक तो है.

Pati marne wala hai kya biwi ne pati ko completly chodd diya hai

पति ने ऐसा क्या किया है जो पत्नी उसके साथ रहे?????????????

पत्नी सिर्क एक साधन तो बिलकुल भी नहीं (आपका क्या ख्याल है?)

वैसे आपकी जानकारी के लिए: पति मरने के लिए नहीं पर अच्छा होने के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया है , मतलब मरने मारने की आशा कही नहीं है. और यस सब राजा साहब ने ही किया है.

राजा साहब की मनोव्यथा कहानी में दी गई है. वासना या हवस के तो सभी शिकार है बस मर्यादा का बारीक परदा खुलने की देर होती है.

raja sahab ya menka koi bhi visvas ke sath hai vo akela hai bichara

वो जहा भर्ती हुआ है वहा अकेला ही रहना पड़ता है.

अब वह "बेचारा" तो कही से नहीं है. अपने किये ही कर्मो से वह वहा है.

खेर आगे देखते है कहानी क्या दिखाती है


शुक्रिया दोस्त बने रहिये............

मैत्री.
Like Reply
Do not mention / post any under age /rape content. If found Please use REPORT button.
(24-03-2026, 02:24 PM)Ayush01111 Wrote: Mene pahle bhi pucha tha ki agat vishwas wapas aya to kya menka uske sath imandati se reh paygi ya ek pita apne bete ke sath nyay kar paeyge

जी आपका बहोत बहोत शुक्रिया की आप कहानी के लिए उत्स्साही है खास आर उसका अंत जान ने के लिए.


आपने पूछत होगा और मैंने बताया भी होगा

याद तो नहीं पर यहाँ फिर से ही सही............

अगर विश्वास आया तो................... (अगर)

हो सकता है ना आये............हो सकता है की वह दूसरी कोई औरत के प्रेम में पड जाए ...............हो सकता है कही चला जाए........हो सकता है की इस ससुर बहु के प्रेम को जान ने के बाद कही चला जाए..............हो सकता है कर जाए...ख़ुदकुशी......बहोत से" जो" औत "तो " है यहाँ पर.......कुछ भी हो सकता है.


चलिए मान लेते है की वापस आ गया तो क्या सिर्फ मेनका की ही जिम्मेदारी है की उसके साथ इमानदारी से रहने की????? उसका कोई फर्ज नहीं बनता????? अगर दोनों तरफ से सहमति हो तो हो भी सकता है की आगे उनका संसार अच्छा चले............अगर ऐसा होता है तो जब मिया बीबी राजी तो क्या करेगा पिताजी!!!!!!!!!!!


अब आगे क्या होगा यह तो कहानीकार ही बता सकती है.............या फिर कहानी के अंत में क्या होता है वहा तक कहानी को पढ़ना पड़ेगा...................


शुक्रिया दोस्त बने रहिये आपका क्युरियोसिटी को अंत तक समाप्त किया जाएगा.............


बने रहिये दोस्त.................

मैत्री.
Like Reply
(24-03-2026, 05:21 PM)@@004 Wrote: बहुत सुंदर प्रस्तुति

शुक्रिया दोस्त..............
Like Reply
(25-03-2026, 02:15 PM)maitripatel Wrote: जी आपका बहोत बहोत शुक्रिया की आप कहानी के लिए उत्स्साही है खास आर उसका अंत जान ने के लिए.


आपने पूछत होगा और मैंने बताया भी होगा

याद तो नहीं पर यहाँ फिर से ही सही............

अगर विश्वास आया तो................... (अगर)

हो सकता है ना आये............हो सकता है की वह दूसरी कोई औरत के प्रेम में पड जाए ...............हो सकता है कही चला जाए........हो सकता है की इस ससुर बहु के प्रेम को जान ने के बाद कही चला जाए..............हो सकता है कर जाए...ख़ुदकुशी......बहोत से" जो" औत "तो " है यहाँ पर.......कुछ भी हो सकता है.


चलिए मान लेते है की वापस आ गया तो क्या सिर्फ मेनका की ही जिम्मेदारी है की उसके साथ इमानदारी से रहने की????? उसका कोई फर्ज नहीं बनता????? अगर दोनों तरफ से सहमति हो तो हो भी सकता है की आगे उनका संसार अच्छा चले............अगर ऐसा होता है तो जब मिया बीबी राजी तो क्या करेगा पिताजी!!!!!!!!!!!


अब आगे क्या होगा यह तो कहानीकार ही बता सकती है.............या फिर कहानी के अंत में क्या होता है वहा तक कहानी को पढ़ना पड़ेगा...................


शुक्रिया दोस्त बने रहिये आपका क्युरियोसिटी को अंत तक समाप्त किया जाएगा.............


बने रहिये दोस्त.................

मैत्री.

So my second question ki kya bahu or sausur ne sahi kiya vikram ki kya galti pita se dushmani nikalne ke liye dushmano ne use nashadi banaya or biwi or pita ne kaam wasna me bhar kar  vikram ki xindagi barbad kar di ab vikram gayab hai as per english version so agar vikram vapas ata hai to kya use compensesation nahi milna chaiye jo chabhi raja sahab me apni kaam iccha ki purti ke liye bahu menka ko fi vo vikram ke handover kare . Or abhi tak kahi bhi menka ko guilt trip me bhi nahi dekha apne pati ko dhokha dene ke liye mene kya use hum guilt trip me jate dekh sakte hai
[+] 1 user Likes Ayush01111's post
Like Reply
(25-03-2026, 07:30 PM)Ayush01111 Wrote: So my second question ki kya bahu or sausur ne sahi kiya vikram ki kya galti pita se dushmani nikalne ke liye dushmano ne use nashadi banaya or biwi or pita ne kaam wasna me bhar kar  vikram ki xindagi barbad kar di ab vikram gayab hai as per english version so agar vikram vapas ata hai to kya use compensesation nahi milna chaiye jo chabhi raja sahab me apni kaam iccha ki purti ke liye bahu menka ko fi vo vikram ke handover kare . Or abhi tak kahi bhi menka ko guilt trip me bhi nahi dekha apne pati ko dhokha dene ke liye mene kya use hum guilt trip me jate dekh sakte hai

So my second question ki kya bahu or sausur ne sahi kiya vikram

सही और गलत का फैसला पाठक ही कर सकते है दोस्त.........

मेरे ख्याल से आप स्टोरी को ठीक से समज नहीं पाए..........


नशेडी बनाया नहीं गया पसर वो खुद बना है दोस्त...............ऐसे कई किस्से है जहा फिल्म देख के अपराध किया गया हो............क्या यह फिल्म मेकर का दोष है???????????



मेरे ख्याल से आप विश्व की जिंदगी की बात कर रहे है

वैसे देखा जाए तो विश्वा खुद के बच्चे का खुनी है और मेरे ख्याल से मेनका को अपने पति से कोई प्रेम नहीं होना चाहिए उसकी अनुभूति आप कर चुके होंगे कहानी में ........

विश्वा की जिंदगी में क्या है वो आनेवाला वक़्त ही बतायेगा इसके लिए ही तो स्टोरी को पढना है दोस्त...........

कहानी का लास्ट पेज पढ़कर कहानी के बारे में फैसला ना करे...........

सब से पहले कहानी को समजयिए फिर अंत तक पढ़े...मेरे ख्याल से आपके काफी सवाल जन्म लेते ही समाप्त हो जायेंगे


अगर विश्वा वापिस आता है तो राजसाब उसके लिए उसको पसंद हो वो सब करेंगे आखिर बेटा है........



खेर आगे आपके सभी सवालो के जवाब मिल जायेंगे

वैसे कहानी किसी पाठक को ध्यान में रख के नहीं लिखी जाती दोस्त....पाठको की रूचि के हिसाब से अपने तरीके से लेखक के हिसाब से चलती है


अगर विश्वा एक अच्छा पति होता एक अच्छा बेटा होता एक अच्छा परिवारजन होता तो इस कहानी की जरुरत ही क्या थी दोस्त????????????????


बने रहिये कहानी के साथ...................

शुक्रिया दोस्त

मैत्री.
Like Reply
चलिए दोस्तों कहानी को थोडा आगे ले के चलते है.................
Like Reply
राजासाहब अपनी बहू के साथ वापस महल आ गये थे और अब बैठ कर टीवी पर न्यूज़ देख रहे थे। मेनका अपने कमरे मे थी। सारे नौकर जा चुके थे और उन्हे डिस्टर्ब करने वाला कोई भी नही था। मैत्री की पेशकश.


तभी मेनका वहा आ गयी, उसने फिर वोही बॉमबे वाली काली नाइटी पहनी थी और उसके गले मे से उसका क्लीवेज चमक रहा था।,"क्या देख रहे हो,सोना नही है क्या?"

"
नही।",कह कर उन्होने उसे खींच कर अपने पास बिठा लिया।

"
फिर वही बात,अभी तक मन नही भरा?",उसने उनके शरारती हाथों को अपने सीने से हटाते हुए बोला।

"
नही और कभी भरेगा भी नही।",वो उसे चूमने लगे और रिमोट उठा कर टीवी बंद कर दिया।


फिर उसे गोद मे उठा लिया और चढ़ने लगे सीढ़ियाँ। थोड़ी देर बाद दोनो उनके बिस्तर मे लेते एक दूसरे को चूम रहे थे। राजासाहब उसके उपर चढ़े हुए थे और उनके हाथ उसकी नाइटी मे घुस कर उसकी ब्रा मे कसी चुचियाँ दबा रहे थे।मेनका उनके कुर्ते मे हाथ डाल उनकी पीठ सहला रही थी।

राजासाहब बेसबरे हो गये और उठ कर नंगे हो गये और अपनी बहू को भी नंगा कर दिया। मेनक अब केवल काले रंग की ब्रा और पेंटी मे थी। राजासाहब उस पर सवार हो उसे पागलों की तरह चूमने लगे। मेनका उनकी मर्दानगी का लोहा मान गयी पिछले 2 दीनो से इस आदमी ने सिवाय उसे चोदने के और कोई काम नही किया था फिर भी इतने जोश मे था। मैत्री की पेशकश.

उसने उनकी गांड को दबाना और अपने नाकुनो से हल्के-हलके नोचना शुरू कर दिया। राजासाहब पेंटी के उपर से ही उसकी चूत पर धक्के लगा रहे थे और मेनका गीली होती जा रही थी। उसने हाथ गांड से हटा उनका लंड पकड़ लिया और हिलाने लगी। राजासाहब ने करवट ली और उसे सीने से चिपका लिया औरचूमते हुए हाथ पीछे ले जाके उसकी ब्रा खोल दी।

थोड़ी देर तक उसकी पीठ सहलाते हुए उसके मुँह मे अपनी जीभ घुसा उसकी जीभ से खेलते रहे और फिर अपना हाथ पीछे से उसकी पेंटी के अंदर उसकी गांड पे सरका दिया और उसकी फांकों को मसलने लगे। मेनका मस्त हो गयी और जब राजासाहब उसकी पेंटी सरका कर घुटनो तक ले आए तो उसने खुद ही उसे अपने जिस्म से अलग कर दिया।

राजासाहब ने उसकी गांड मसल्ते हुए उसकी दरार को सहलाना शुरू कर दिया। ऐसा पहले उन्होने कभी नही किया था और मेनका के लिए ये बिल्कुल नया एहसास था। तभी उन्होने अपनी एक उंगली उसकी गांड की छेद मे डाल दी।

"
ओउ..च!",मेनक चिहुनक कर उनसे अलग होने लगी पर राजासाहब ने अपनी पकड़ मजबूत कर उसकी गांड मे उंगली जस की तस रहने दी।

"
क्या कर रहे हो! वहा नही?"

"
प्लीज़...",

"
नही, तुम पागल हो, दर्द होगा।"मेनका शर्मा गयी।

"
नही होगा,प्रॉमिस, होगा तो निकाल लूँगा, प्लीज़,जान,प्लीज़!",राजासाहब बच्चों की तरह ज़िद करने लगे।

"
ओके, पर दर्द हुआ तो मैं फिर कभी कैसे भी प्यार नही करने दूँगी।"

"
अरे मेरी जान दर्द होगा तब तो!" राजासाहब ने उसके होठों को अपने होठ से बंद कर दिया औरअपनी उंगली से उसकी गांड मारने लगे। थोड़ी देर मे 2 फिर 3 उंगलिया उसकी गांड मे अंदर-बाहर हो रही थी। मेनका को मज़ा आ रहा था। उसने सिर्फ़ सुना था पर आज पहली बार वो गांड मरवाने वाली थी।


राजासाहब उस से अलग होकर अपने क्लॉज़ेट मे गये और वहा से एक क्रीम ले कर आए। उन्होने अपनी बहू को उल्टा कर दिया और झुक कर उसकी मोटी गांड को चूमनेऔर चूसने लगे। जम के चूसने के बाद उन्होने अपनी जीभ उसकी गांड के छेद मे डाल दी। मेनका फिर चिहुनकि,"..ऊऊ...ऊ..."

पर राजासाहब उसे मज़बूती से थामे अपनी जीभ से उसके छेद को चाट ते रहे। थोड़ी देर के बाद उसकी गांड सहलाते हुए उन्होने कहा,"जान,बिल्कुल मत घबराना, हम पर भरोसा रखो। ज़रा भी दर्द होगा तो हम रुक जाएँगे। तुम बस रिलॅक्स होकर अपने बदन और इसको ढीला छोड़ दो।",उन्होने उसकी गांड मे फिर उंगली कर दी।

बने रहिये दोस्तों..........
[+] 1 user Likes maitripatel's post
Like Reply
दोस्तों एक अपडेट आपके मनोरंजन के लिए दिया है

पढ़िए और अपनी राय दीजिये

तब तक आगे लिख रही हूँ
Like Reply
काफ़ी देर तक उसकी गांड को उंगली से मारते हुए वो उसको चूमते और सहलाते रहे। जब उन्होने देखा कि मेनका अब रिलॅक्स हो रही है तो उन्होने उसे उठा कर घुटनो पे कर दिया। मेनका ने भी अपनी गांड हवा मे उठा दी और मुँह तकिये मे छुपा लिया। राजासाहब अपनी उंगलियो मे क्रीम लगा कर उसके छेद मे लगा रहे थे। कुछ क्रीम उन्होने अपने लंड पे भी लगाई और फिर उसकी गांड के पीछे पोज़िशन ले ली। मैत्री की पेशकश


अपने हाथ से पकड़ कर उन्होने बहुत धीरे-2 से अपना लंड उसकी गांड मे घुसाना शुरू किया। लंड का सूपड़ा बहुत मोटा था, ऊ...ओ...ऊहह..",मेनका की आह निकल गयी।

"बस मेरी जान शुरू मे थोड़ी तकलीफ़ होगी।" राजासाहब उसकी पीठ सहलाते हुए अपने सूपदे को अंदर धकेलने लगे। थोड़ी ही देर मे सूपड़ा अंदर था और उन्होने बस सुपारे को ही गांड में अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। मेनका दर्द ख़तम हो गया और उसे अब मज़ा आने लगा। उसने सोचा भी नही था कि गांड मे लंड इतना मज़ा देता है। जब लंड अंदर जाता था तो उसकी गांड अपनेआप सिकुड कर लंड को कस लेती थी और उसके बदन मे मज़े की लहरें दौड़ जाती थी। गांड की इस हरकत से राजासाहब भी पागल हो रहे थे।


हल्के-2 धक्कों से उन्होने अब अपने पूरे लंड को गांड मे घुसाना शुरू किया। मेनका को हल्का दर्द हो रहा था पर उस से कही ज़्यादा मज़ा आ रहा था। गांड मरवाने से होनेवाले दर्द का डर भी ख़तम हो गया था और वो अब पूरा लुत्फ़ उठा रही थी।

थोड़ी ही देर मे लंड जड़ तक उसकी गांड मे था। जब राजासाहब ने धक्का मारा तो वो उठ कर पीछे बैठ गयी तो राजासाहब भी बैठ गये।

अब राजासाहब अपने घुटनो पे बैठे थे और उनकी गांड उनकी अंडे पे थी और मेनका भी वैसे ही उनके उपर बैठी थी और उसकी गांड उनके लंड से भरी थी। राजासाहब ने हाथ आगे ले जाकर उसकी चूचियो को मसलने लगे। उसके निपल्स पहले ही कड़े हो गये थे। राजासाहब उसकी गर्दन को चूम रहे थे की मेनका ने अपनी गर्दन घुमाई औरअपने होठों को उनके होठों पर कस दिया।

"दर्द तो नही हो रहा?",उन्होने उसके होठों को छोड़ते हुए और उसकी चुचियाँ दबाते हुए पूछा।अब उनका एक हाथ उसकी चूत पे था और उसके दाने को सहला रहा था।

"उन्न,उन्ह।" मेनका ने इनकार किया। राजासाहब अब फिर से उठ गये और दोनो डॉगी पोज़िशन मे आ गये। अब मेनका ने अपना सारा वजन अपने हाथों और घुटनो पे लिया हुआ था और पीछे से अपने ससुर से गांड मरवा रही थी। थोड़ी देर तक राजासाहब उसकी कमर थामे घुटनो पे खड़े बस उसकी गांड मारते रहे।


फिर वो झुक गये और अपना सीना उसकी पीठ से सटा दिया,अपना मुँह उसकी गर्दन मे च्छूपा लिया और एक हाथ नीचे ले जाकर उसकी चूचियो दबाने लगे। मेनका को अपनी पीठ पे राजासाहब के सीने के बाल गुदगुदी करते महसूस हुए। उसकी चूत तो बस पानी छोड़े जा रही थी और गांड मे तो वो मज़ेदार एहसास हो रहा था की पुछो मत। मैत्री की लेखनी

राजासाहब ने अपना हाथ उसकी चूचियो से हटा उसकी चूत पे लगा दिया और लगे उसकी चूत मे उंगली करने और उसके दाने को रगड़ने। मेनका ने मुँह पीछे किया और अपने ससुर को पागलों की तरह चूमने लगी। राजासाहब ने भी लंड के धक्के और उंगलियो की रगड़ तेज़ कर दी। मेनका की गांड ने भी अब तेज़ी से उनके लंड को कसना शुरू कर दिया था और उसकी चूत बस पानी छोड़ ने ही वाली थी।

राजसाहब ने अपनी जीभ से उसकी जीभ के साथ खेलना शुरू कर दिया कि तभी मेनका का जिस्म अकड़ गया और उसकी कमर हिलने लगी और उसकी चूत ने उनकी उंगली और गांड ने लंड को बिल्कुल कस के जाकड़ लिया। वो झड़ गयी थी और गांड ने जैसी ही लंड को दबोचा,उनके लंड ने भी पानी छोड़ दिया। मेनका की गांड ने अपने आप सिकुड कर उनके लंड का सारा पानी निचोड़ लिया।

दोनो निढाल होकर बिस्तर पे गिर गये। जब लंड सिकुड गया तो राजासाहब ने उसे बाहर खींचा और मेनका को सीधा कर अपनी बाहों मे भर लिया।,"तकलीफ़ नही हुई ना?",वो उसके चेहरे को चूम रहे थे।

"नही।।",मेनका ने उन्हे अपने पास खींचा और उनके सीने मे मुँह छुपाकर वहा हौले-हौले चूमने लगी।



क्रमशः।।।।।।।।।।।।।।।।।।


दोस्तों बने रहिये ..................
[+] 1 user Likes maitripatel's post
Like Reply
दोस्तों दूसरा अपडेट भी दे दिया है .....................
Like Reply
पार्ट--9

गतान्क से आगे........


उस रात राजासाहब ने अपनी बहू को दोबारा नही चोदा। वो जानते थे कि अभी उसकी गांड को और चूत को थोड़ा आराम चाहिए था। वो मेनका को बाहों मे भर कर वैसे ही सो गये।

सवेरे मेनका की नींद खुली तो वो अपने ससुर के बिस्तर मे,उनकी बाहों मे नंगी पड़ी थी। वो हौले से उनके आगोश से निकली,उनके होठों को बहुत धीरे से चूमा और क्लॉज़ेट के रास्ते अपने कमरे मे चली गयी।

-------------------------------------------------------------------------------


आज के लिए यही तक दोस्तों फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ

तब तक के लिए मैत्री की ओर से जय भारत
Like Reply
दोस्तों आपके मनोरंजन के लिए ऊपर कुछ अपडेट्स दिए है कृपया पढ़े और अपने मतव्यो दे..............

शुक्रिया दोस्तों....बने रहने के लिए ............................
Like Reply
अति उत्तम
[+] 1 user Likes @@004's post
Like Reply
(28-03-2026, 09:10 AM)@@004 Wrote: अति उत्तम

शुर्क्रिया दोस्त

बने रहिये
Like Reply
चलिए कहानी में थोडा आगे बढ़ते है ......................
Like Reply
कल्लन बॅंगलुर पहुँच गया था और जब्बार और मेनका के साथ जब्बार के रूम मे बैठा था। मैत्री की पेशकश


"भाई,मुझे ये समझ नही आ रहा कि रिहेब सेंटर के अंदर कैसे घुसा जाए और राजा के पिल्ले को कैसे बाहर निकाला जाए?
तुम्हे जगह दिखा दी है और इसने तुम्हे अंदर के सारे डीटेल्स भी दे दिए हैं।",जब्बार ने मलिका की ओर इशारा किया,"अब तुम्ही कोई रास्ता सुझाओ।"

"एक रास्ता है पर उसके लिए कुछ चीज़ों की ज़रूरत पड़ेगी।"

"कौन सी चीज़ें?"

"एक बेस्कॉम(बॅंगलुर पॉवेर को।) की वन और उसके साथ एक लंबी सीधी, अगर आज इनका इंतेज़ाम हो जाता है तो आज रात को मैं एक बार सेंटर के अंदर जाकर वहा का जायज़ा लूँगा और कल रात विश्वजीत को बाहर निकल लाऊंगा।"

"ओके,मैं कोशिश करता हू। तब तक तुम दोनो यही रहना।",जब्बार रूम से बाहर चला गया।


उसके निकलते ही मलिका दौड़ते हुए कल्लन की बाहों मे समा गयी और दोनो एक दूसरे को पागलों की तरह चूमने लगे। मलिका उसे चूमते हुए उसकी शर्ट के बटन खोलने लगी तो कल्लन उसकी टाइट जीन्स मे कसी गांड को दबाने लगा। मलिका ने उसकी शर्ट उतार कर उसे बिस्तर पर धकेल दिया और उस पर चढ़ कर बैठ गयी। वो भूखी शेरनी की तरह उस पर टूट पड़ी और उसकी छाती चूमने लगी।

उसने खुद ही अपनी शर्ट उतार दी,ब्रा उसने पहनी नही थी तो शर्ट खुलते ही उसकी छातिया कल्लन के सामने छलक गयी। उसने हाथ बढ़ा कर उन्हे दबोच लिया। मलिका अपनी गांड उसके लंड पे रगड़ रही थी। थोड़ी देर तक इसी तरह एक दूसरे के जिस्मो को मसल ने के बाद दोनो बेताबी से उठ बैठे और एक दूसरे की पॅंट उतार दी। मलिका अब पूरी नंगी थी,वही कल्लन अब केवल एक अंडरवेर मे था। मैत्री द्वारा लिखित[b][/b]

दोनो फिर एक दूसरे से चिपक कर चूमने लगे। मलिका ने अपना हाथ कल्लन के अंडरवेर मे डाल दिया और उसके लॅंड को मसलने लगी। कल्लन भी उसकी गांड को बेतहाशा रगड़ रहा था। मलिका झुकी और उसका अंडरवेर उतार कर फेंक दिया और उसके लंड को अपने मुँह मे भर लिया।

अब कल्लन बेड पे घुटनो के बल खड़ा था और मलिका उसके लंड को चूस रही थी। कल्लन ने मलिका के बालों को पकड़ा हुआ था और कमर हिला-हिला कर उसके मुँह को चोद रहा था। मलिका ने एक हाथ से उसके लंड को पकड़ा हुआ था और दूसरे से अपनी चूत के दाने को रगड़ रही थी। और अपनी चूत को एक अच्छे हमले के लिए तैयार कर रही थी।

अब कल्लन के लिए अपने पे काबू रखना नामुमकिन हो गया था। उसने मलिका को अपने लंड से अलग किया और उसे बेड पर पटक कर उसकी टांगे फैला दी। फिर अपने लंड को पकड़ कर एक ही झटके मे उसकी चूत मे उतार दिया।
"एयेए...आअहह।।!",मलिका कराही और उस से चिपक गयी। कल्लन का लंड उसकी चूत की गहराइयाँ नापने लगा और वो हवा मे उड़ने लगी। उसने अपने नाख़ून उसकी पीठ मे गढ़ा दिए और अपनी टांगे लपेट उसे अपने बदन से चिप्टा लिया। कल्लन ने अपने धक्के और तेज़ कर दिए और उसकी तेज़ चुदाई से मलिका तुरंत झड़ गयी। थोड़ी ही देर मे कल्लन ने भी उसके चूत के अंदर अपना वीर्यदान कर दिया। वो उसके सीने पे सर रख  हाँफने लगा।

थोड़ी देर तक वैसे ही पड़े रहने के बाद मलिका ने फिर से अपनी चूत सिकोड कर  उसके लंड को छेड़ना शुरू कर दिया। अपनी एक उंगली उसने उसके गांड के छेद मे डाल दी तो कल्लन भी फिर से गरम होने लगा। उसने फिर से अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया,लंड फिर से सख़्त हुआ तो उसके धक्कों मे और जोश आ गया और मलिका एक बार फिर चुदने लगी। मैत्री की रचना[b][/b]

-------------------------------------------------------------------------------

[+] 1 user Likes maitripatel's post
Like Reply
दोस्तों अक अपडेट दे दिया है


आपके राय की प्रतीक्षा में.............
Like Reply
दोपहर का वक़्त था और मेनका राजासाहब के ऑफीस चेम्बर मे उनकी चेर के बगल मे खड़ी उन्हे कोई फाइल दिखा रही थी। फाइल देखते-देखते राजासाहब ने अपना बाया हाथ उसकी कमर पे लगा दिया और उसकी गांड सहलाने लगे। मैत्री की पेशकश

"
क्या कर रहे हो? कोई देख लेगा।",वो अलग होने के लिए छटपटाने लगी तो राजासाहब ने अपनी पकड़ और मज़बूत कर दी," प्लीज़! छोडो ना।",मेनका को बहुत डर लग रहा था,कही कोई आ गया तो ग़ज़ब हो जाएगा, लेने के देने पद सकते है और बेकार में इस मजे के माहोल की गांड लग जायेगी, और उसके ससुर तो बिल्कुल पागल हो गये थे।

"
यश,प्लीज़! अभी नही! ऊऊओ...ऊऊहह..!",राजासाहब ने उसे वैसे ही चेर पे बैठ हुए पकड़ कर अपनी तरफ घुमा कर उसके पेट मे अपना मुँह घुसा दिया था।

"
आ....आआहह...! प्लीज़....छ्च..हहोड़ो नाअ....कोई आ...ना... जा...आए..."।राजासाहब उसकी नाभि मे अपनी जीभ फिरा रहे थे और उसके चिकने पेट को भी चूम रहे थे।उन्होने अपने हाथ उसकी पीठ से सरका कर नीचे उसकी गांड को सहलाना शुरू कर दिया तो मेनका उनके बाल पकड़ उन्हे अपने से अलग करने लगी। उसकी चूत गीली हो रही थी पर उसे बहुत डर भी लग रहा था।


तभी दरवाज़े पे दस्तक हुई तो वो छितक कर उनसे अलग हो अपनी साडी ठीक कर फाइल पढ़ने लगी। राजासाहब ने भी अपने बाल ठीक किए,"कम इन।"

"
अरे आप हैं सेशाद्री साहब! आपको नॉक करने की क्या ज़रूरत है।",उन्होने एक बहुत हल्की सी शरारती मुस्कान अपनी बहू की तरफ फेंकी जिसे सेशाद्री नही देख पाए। मेनका ने गुस्से से उन्हे देखा और फिर से फाइल पढ़ने लगी।

"
क्या हुआ कुँवारानी? आप परेशान लग रही हैं। तबीयत तो ठीक है ना?",सेशाद्री मेनका से मुखातिब हुए।

"
नही अंकल, तबीयत थोड़ी गड़बड़ लग रही है"

"
अरे,तब आप यहा क्या कर रही हैं? आपको तो घर जाकर आराम करना चाहिए। सर,मैं ग़लत तो नही कह रहा।"

"
नही,सेशाद्री साहब।"
मैत्री की रचना

"
तो मैं घर जाऊं?",मेनका ने बड़ी मासूमियत से अपने ससुर से पूचछा।

"
हा,हा! बिल्कुल।"

"
ओके",मेनका ऑफीस के दरवाज़े की ओर बढ़ गयी औरदरवाज़े पे पहुँच कर सेशाद्री की पीठ के उपर से अपने ससुर को मुँह चिढ़ा दिया। राजासाहब को मन ही मन सेशाद्री पे बहुत गुस्सा आ रहा था। अगर वो अभी नही आता तो वो मेनका को अभी चोद रहे होते। पर अब क्या किया जा सकता था। वो मन मार कर सेशाद्री के लाए पेपर्स पढ़ने लगे।

-------------------------------------------------------------------------------

बने रहिये दोस्तों...............



मैत्री.
[+] 1 user Likes maitripatel's post
Like Reply
आशा है की आपको कहानी पसंद आती होगी................
Like Reply
रात को महल से सारे नौकर बाहर चले गये तो राजासाहब ने दरवाज़ा बंद किया और केवल एक पायजामा पहने क्लॉज़ेट के रास्ते अपनी बहू के क्लॉज़ेट मे पहुँच गये। मेनका वहा अपनी साडी उतारना शुरू ही कर रही थी कि उन्हे देख चिहुन्क पड़ी। मैत्री की पेशकश.

"
अरे ये शुभ काम हमे करने दो, मेमसाब।",राजासाहब ने उसका आँचल पकड़ कर खींच दिया।

"
अभी जाओ। हमे कपड़े बदलने दो ना।",मेनका उनके हाथ से अपनी साडी खींचने लगी।

"
फिर ये दरवाज़ा क्यू खुला छोडा?",राजासाहब ने क्लॉज़ेट के सीक्रेट दरवाज़े की ओर इशारा किया।

"
ये तो कपड़े चेंज करने के बाद के लिए।",मेनका शर्मा गयी तो उसके ससुर ने उसे खींच अपने सीने से लगा लिया और उसके चेहरे को हाथों मे ले निहारने लगे। उसका आँचल नीचे गिर गया था और उसकी ब्लाउस मे भारी बोबले उनके बालों भरे सीने से दबी हुई थी।

"
तुम कितनी खूबसूरत हो,मेनका। हमे तो यकीन ही नही होता कि तुम सिर्फ़  हमारी हो।।",मेनका के गाल शर्म से लाल हो गये थे और आँखें बंद। राजासाहब ने उसकी बंद पलकों को और फिर गालों को चूम लिया। फिर हाथ उसकी कमर मे डाल उसके होठ चूमने लगे। मेनका भी उनसे लिपट गयी और अपनी जीभ उनके मुँह मे डाल उनकी जीभ से खेलने लगी।राजासाहब एक हाथ आगे लाए और उसकी कमर पे अटकी साडी को खींच दिया और फिर उसे उसके बदन से अलग कर दिया।


मेनका के हाथ उनकी पीठ पर घूम रहे थे और वो अपनी चूचियो को उनके सीने पे हल्के-हलके रगड़ रही थी। बीच-बिच मे हाथ नीचे ले जाकर उनके पायजामा मे घुसा वो उनकी गांड पे भी अपने नाख़ून गढ़ा रही थी। राजासाहब ने उसके पेटिकोट को भी नीचे सरका दिया। आज मेनका ने पेंटी नही पहनी थी तो राजासाहब अब उसकी नंगी गांड को जम के दबा रहे थे। उसकी चूत उसके ससुर की हरकतों से गीली होने लगी थी। इस बार जब उसके हाथ नीचे गये तो उन्होने उनके पायजामा को उनकी गांड से नीचे उतार दिया। पायजामा घुटनो तक आया तो उसने अपनी एक टाँग उठाई और पैर से उसे नीचे उनकी टांगो से उतार कर अलग कर दिया। मैत्री की प्रस्तुति.

अब राजासाहब पूरे नंगे थे और मेनका केवल ब्लाउस मे थी,दोनो एक दूसरे से चिपके एक दूसरे की पीठ और गांड सहलाते,अपनी छातिया रगड़ते चूम रहे थे। राजासाहब का तना हुआ लंड उनकी बहू की गीली चूत से सटा था और दोनो अपनी-अपनी कमर हिला कर लंड और चूत को एक साथ रगड़ रहे थे।

राजासाहब ने अपने हाथ पीछे ले जाकर मेनका के ब्लाउस के हुक खोल दिए और उसे नीचे उतार दिया। मेनका अब बिल्कुल गरम हो गयी थी,जब राजासाहब उसके ब्रा को उतारने लगे तो उसने हाथ नीचे कर अपनी चूचियाँ नंगी करने मे उनकी पूरी मदद की। अब दोनो पूरे नगे एक दूसरे के जिस्मो से खेल रहे थे।

चूमते हुए राजासाहब की नज़र बगल मे पड़ी तो उन्होने देखा की ड्रेसिंग टेबल के शीशे मे दोनो की परछाई नज़र आ रही थी। उन्होने चूमते हुए मेनका को इशारे से ये दिखाया तो वो शर्मा कर क्लॉज़ेट से बाहर जाने लगी। पर राजासाहब ने हाथ पकड़ कर उसे शीशे के सामने खड़ा कर दिया और पीछे से उसकी कमर मे हाथ डाल कर खड़े हो गये।

"
क्या कर रहे हो? कमरे मे चलो ना।" मेनका का शर्म से बुरा हाल था। शीशे मे उसका पूरा हुस्न नज़र आ रहा था और पीछे से चिपके उसके ससुर भी। उसे लग रहा था जैसे कोई और उन दोनो को देख रहा हो।

"
प्लीज़,यश चलो ना।!"
मैत्री की रचना.

"
क्यू मेरी जान?",राजासाहब उसकी चूचियाँ दबाते हुए उसके निपल्स मसल रहे थे और उनका मुँह उसकी गर्दन मे था।



दोस्तों बने रहिये...................

मैत्री.
[+] 1 user Likes maitripatel's post
Like Reply




Users browsing this thread: Thirstycrow12, 5 Guest(s)