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Incest खेल ससुर बहु का
दोस्तों एक ओर छोटा सा अपडेट आपके मनोरंजन के लिए ..........................
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राजासाहब ने गोद मे बैठी अपनी बहू को चूमना शुरू कर दिया। उनके हाथ उसकी कमर और गांड को सहला रहे थे। मेनका भी उनकी किस का पूरा जवाब देते हुए अपनी गांड से उनके लंड को रगड़ रही थी। राजासाहब ने अपना हाथ कमर से हटा उसके ब्लाउस मे डाल दिया तो मेनका भी उनके शर्ट के बटन खोलने लगी। दोनो जल्दी से उठ खड़े हुए और एक दूसरे के कपड़े उतारने लगे।


नंगे होते ही दोनो एक दूसरे के गले लग गये और चूमने लगे। राजासाहब ने अपनी बहू की भारी-भरी गांड को जम के सहलाया और मसला। फिर मेनका उनके होठों को छोड़ उनके सीने को चूमते हुए नीचे उनके लंड तक आ गयी और अपने घुटनो पे बैठ उसे चूसने लगी। उनके अंडो को अपने कोमल हाथों मे दबा कर जब लंड को उसने ज़ोर से चूसा तो राजासाहब की आह निकल गयी। मैत्री की पेशकश

उन्हों ने उसे अपनी गोद मे उठा लिया और ड्रॉयिंग रूम मे आ गये। वहा उन्होने मेनका को सोफे पे लिटा दिया और उसके पेट को चूमने लगे। अपनी उंगली से उन्होने उसकी चूत को कुरेदना चालू कर दिया।

"
ऊहह!",मेनका की मस्त आंहे से फार्महाउस का वीराना भी गुलज़ार हो गया। राजासाहब का चेहरा उसकी चूत पे झुक गया और वो उसके चूत के दाने को अपनी जीभ से चाटने लगे। मेनका पागलों की तरह अपनी कमर उचकाने लगी और झड़ गयी। राजासाहब ने उसकी चूत से छूटे हुए सारे पानी को पी लिया।


फिर राजासाहब उठ कर उसके सर के पीछे खड़े हो गये,मेनका ने उनके लंड को अपनी आँखों के सामने देखा तो हाथ पीछे ले जा के उसने उनकी गांड को पकड़ लिया और अपना सर पीछे कर के उनका लंड एक बार फिर अपने मुँह मे लेकर चूसने लगी। राजासाहब ने हाथ नीचे ले जा कर उसके बोबले को दबाना और निपल्स को मसलना शुरू कर दिया।

तभी राजासाहब को कुछ ख़याल आया,उन्होने अपने लंड को मेनका के मुँह से निकाल लिया और भागते हुए किचन की तरफ चले गये। मेनका को हैरत हुई पर जब तक वो उठती राजासाहब वापस आ गये थे। उनके हाथ मे एक बोल था। राजासाहब उसके पास बैठ गये और बोल मे रखी चीज़ चम्चे से उसकी चूचियो पे डालने लगे।

"
ऊओ!",सीने पे ठंडा गीलापन महसूस हुआ तो मेनका की आ निकल गयी। उसने देखा राजासाहब उसकी चूचियों को आइसक्रीम से ढँक रहे थे। राजासाहब ने बोल किनारे रखा और टूट पड़े अपनी बहू की आइसक्रीम से सराबोर चूचियों पर। मेनका तो पागल हो गयी। राजासाहब ने चाट-चाट कर उसके सीने को साफ़ किया और फिर पहले उसकी नाभि को आइसक्रीम से भरा और फिर अपनी जीभ से साफ़ किया।


अब उसकी चूत की बारी थी। राजासाहब ने वहा भी आइसक्रीम लगाई और फिर चाट-चाट कर साफ़ किया। अपने ससुर की आइसक्रीम चाटती जीभ से मेनका दो बार झड़ गयी। अब उसकी बारी थी,वो उठी और पकड़ कर अपने ससुर को सोफे पे बिठा दिया और बोल से आइसक्रीम निकाल कर उनके लंड और अंडो पे लगा दिया। फिर लगी अपनी जीभ से वहा पे चाटने। सोफे पे टांगे लटकाए बैठे राजासाहब के मज़े का ठिकाना नही था। जैसे ही मेनका ने आइस-क्रीम की आखरी बूँद को चाट कर साफ़ किया,उन्होने उसे उठा कर सोफे पे बैठे-बैठे अपनी गोद मे अपने लंड पे बिठा लिया।

अब दोनो एक दूसरे की आँखो मे झाँक रहे थे,मेनका की चूत राजासाहब के लंड से लोंक हो गई थी और उसके हाथों मे उनका चेहरा था जिसे वो चूम रही थी। राजासाहब भी उसके जिस्म को अपनी बाहों मे कसे हुए उसकी पीठ और गांड से खेल रहे थे।

मेनका ने अपने ससुर को चूमते हुए अपनी कमर हिलाकर उन्हे चोदना शुरू कर दिया। राजासाहब का लंड उसकी कोख पर चोट कर रहा था और उसकी चूत मे तो जैसे सैलाब आ गया था-पानी था कि छूटे ही जा रहा था।

उसने अपने ससुर के सर को पकड़ कर अपनी चूचियो पर झुका दिया। राजासाहब भी उसकी चूचियो को चूसने लगे। उसकी चूचिया तो अब पूरी तरह से उनके होंठो के निशान से भर गयी थी। राजासाहब के भी अंडो मे अब मीठा दर्द होने लगा था। उन्होने अपनी बहू की गांड को दबोच लिया और उसके निपल को चूस्ते हुए नीचे से बैठे-बैठे ऐसे धक्के मार के अपना पानी छोड़ा कि मेनका एक बार फिर उनके साथ झड़ गयी।

झड़ने के बाद दोनो वैसे ही बैठे एक दूसरे को चूमते रहे,"ये फार्महाउस तुम्हारा है?" मैत्री निर्मित


बस दोस्तों आज के लिए यही तक फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ तब तक के लिए मैत्री की ओर से जय भारत
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दोस्तों आज का एपिसोड दे दिया है

आपके प्रतिक्रया अपेक्षित है................

शुक्रिया

अगली कड़ी में मिलते है

मैत्री
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अदभुत
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अगली कड़ी की प्रतीक्षा है
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(16-03-2026, 06:31 PM)@@004 Wrote: अदभुत

शुक्रिया दोस्त @@@004
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(19-03-2026, 09:14 PM)@@004 Wrote: अगली कड़ी की प्रतीक्षा है

जी बिलकुल 


आज कड़ी देने का प्रयास करुँगी दोस्त

बने रहने के लिए शुक्रिया     Namaskar
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चलिए कहानी में थोडा आगे चलते है
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"नही,हमारा है।"उनका इशारा मेनका और अपनी तरफ था। मेनका ने नीचे देखा तो लंड झड़ने के बाद सिकुड़ने के बावजूद उसकी चूत मे ऐसे पड़ा था जैसे की अभी भी खड़ा हो। उसने अपनी चूत को हल्के से हिलाना शुरू किया।

"ये उन्ही प्रॉपर्टीस मे से एक है जिनके पेपर्स स्टडी मे हैं।"

"तुम तो ये सब दान करने वाले हो ना।"

"हा,बिल्कुल। पर सोचते हैं कि इस फार्म हाउस को अपने नाम कर ले और इसे अपने प्यार का आशियाना बना ले। क्या कहती हो?"

जवाब मे मेनका ने मुस्करा कर उनके होठ चूम लिए। उसकी चूत की हरकतों से राजासाहब का लंड फिर से गरम हो गया। वो वैसे ही उसकी चूत मे लंड डाले हुए खड़े हो गये और फार्महाउस के बेडरूम की तरफ बढ़ गये।


बेडरूम मे दाखिल होते ही मेनका चौंक गयी। पूरा कमरा जैसे सुहागरात के लिए सज़ा हुआ था। कमरे मे चारो तरफ फूल ही फूल भरे थे और बीचोबीच रखे बड़े से पलंग पर लाल गुलाब की पंखुड़िया बिखरी हुई थी।

उसने राजासाहब की तरफ सवालिया नज़रो से देखा।,"हमने केर टेकर को कहा कि हमारा कोई जान-पहचान वाला अपनी नयी दुल्हन को लेकर यहा आएगा और एक रात ठहरेगा तो उनके लिए उसने ये सजावट की और इसी बहाने हमने उसे छुट्टी भी दे दी कि वो जोड़ा नही चाहता कि कोई उन्हे डिस्टर्ब करे।"

मेनका को लिए दिए राजासाहब बिस्तर पर लेट गये और लगे फिर से उसे चोदने लगे। थोड़ी देर तक मेनका उनके नीचे पड़ी चुदती रही,फिर उसने उन्हे पकड़े हुए करवट ले उन्हे अपने नीचे किया और उपर से कमर हिला-हिला कर चोदने लगी। उसकी भारी चूचिया उसके ससुर के बालों भरे सीने पे रगड़ खा रही थी और होठ उनके होठों से सटे थे।

थोड़ी देर दोनो ऐसे ही चुदाई करते रहे कि फिर राजासाहब उसे पलट कर उस पर सवार हो गये और उसे चोदने लगे। दोनो की इस उठा-पटक से गुलाब की पंखुड़ीयान मसल रही थी और कमरे मे मदहोश करने वाली खुश्बू फैला रही थी। मेनका फिर से हवा मे उड़ रही थी। उसने अपनी टांगे अपने ससुर की कमर पे कस दी और नीचे से झटके मारने लगी।राजासाहब ने अपना लंड पूरा बाहर निकाला और फिर एक ही झटके मे जड़ तक अंदर डाल दिया।

"ऊओ...ऊव्वववव...!",मेनका चिल्लाई। राजासाहब ने फिर से यही हरकत दुहराते हुए उसे और ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया। मेनका अब बिल्कुल आपे से बाहर हो गयी। उस ने अपने नाख़ून अपने ससुर की गांड मे गड़ा दिए और उसकी चूत पानी छोड़ने लगी। नाखूनओ की चुभन ने राजासाहब की कमर के हिलाने को और तेज़ कर दिया और वो एक बार फिर अपनी बहू की चूत के अंदर अपना पानी छोड़ने लगे।


क्रमशः..........

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जायिगा नहीं अभी लिख रही हूँ
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पार्ट 8

सवेरे राजासाहब की नींद खुली तो उन्होने देखा कि वो बिस्तर पर अकेले हैं, मेनका शायद बाथरूम मे थी। वो उठकर किचन मे आ गये और अपना अंडरवेर उठा कर पहन लिया,पेंट उठा कर उसमे से मोबाइल निकाला और बॅंगलुर डॉक्टर पुरन्दारे से बात करने लगे। मैत्री की लेखनी

खबर अच्छी थी,विश्वा अपनी लत छोड़ने की पूरी कोशिश कर रहा था। राजासाहब को खुशी हुई पर फिर मेनका का ख़याल आया तो चेहरे पे आई मुस्कान गायब हो गयी। वो जानते थे कि विश्वा आएगा तो ये सब बंद करना पड़ेगा पर वो मेनका के हुस्न और इश्क़ के दीवाने हो चुके थे। इसीलिए उन्होने ये फार्महाउस का प्रोग्राम बनाया था। वो चाहते थे कि बेटे के आने से पहले वो मेनका के साथ जम के प्यार के मज़े लूट ले।

इन्ही ख़यालों मे गुम उन्होने दुष्यंत वर्मा को फोन मिलाया,"क्या हाल है,दोस्त?"

"
सब बढ़िया,तू सुना।"

"
ठीक हू, उस तस्वीर वाले शख्स के बारे मे कुछ पता चला?"

"
नही यार,पहुँची चीज़ लगता है। उसका कोई सुराग नही मिला है। जब्बार से भी उसके तार जुड़ते नही दिखते हैं। वैसे जब्बार आजकल शहर से बाहर गया हुआ है। कहा ये मालूम नही।"

"
दोस्त,इधर जब्बार हमे परेशान नही कर रहा। इसीलिए हमे डर है कि या तो वो कोई बड़ी साज़िश रच रहा है या साज़िश की शुरुआत कर चुका है। पता नही क्यू हमारा दिल कहता है कि विश्वा को नशे की लत लगाने मे उसी का हाथ है।"

"
तू अब इतनी फ़िक्र मत कर,दोस्त, सब ठीक हो जाएगा और मेरा चेला मनीष इस मामले की तह तक पहुँच तेरी सारी मुश्किल आसान कर देगा।"

"
तेरे पे मुझे पूरा भरोसा है,दोस्त।"


इसके बाद दोनो दोस्तो ने कुछ इधर-उधर की बातें की और फोन काट दिया। सब ठीक हो जाएगा। हो तो जाएगा पर मेनका और उनके बीच का रिश्ता,क्या है इस रिश्ते की मंज़िल? राजासाहब के मन मे सवाल घूमड़ रहे थे की तभी मेनका वहा आ गयी।

उसने एक बाथरोब पहना हुआ था जो कि उसकी गांड तक ही आ रहा था,"मुझे कपड़े चाहिए?"

"
पहने तो हुए हो।",राजासाहब का दिल उसे देखते ही फिर से हल्का हो गया और मस्ती के मूड मे आ गया।

"
प्लीज़ यश,दो ना कपड़े।",मेनका बच्चों की तरह मचली।

"
ओके।",राजासाहब वैसे ही केवल एक काला अंडरवेर पहने बाहर कार तक गये और एक पॅकेट लाकर उसे थमा दिया।

"
ये, इसे पहनु ना पहनु सब बराबर है।",मेनका के हाथों मे एक रेड कलर की 2-पीस स्ट्रिंग बिकिनी थी।

"
अरे पहन कर दिखाओ तो।"

"
पहनुँगी और 2 मिनिट मे तुम उतार भी दोगे। रात भर तो मेरी हालत खराब करते रहे। अब आज मुझमे इतनी ताक़त नही है। प्लीज़ ढंग के कपड़े दो ना।"

"
अरे,जान! बस एक बार इसे पहन कर दिखा दो।"राजासाहब ज़िद करने लगे।

"
एक शर्त पे पहनुँगी।"
मैत्री की पेशकश[b][/b]


"
क्या?"

"
पहनने के बाद तुम मुझे बिल्कुल भी हाथ नही लगाओगे।"

"
ये कैसी अजीब शर्त है?इसे पहन ने के बाद तो तुम्हे प्यार करने और ज़्यादा मज़ा आएगा।प्लीज़ छोडो ये शर्त-वर्त और पहन कर दिखाओ ना।"

"
ऊंन-हुंग,शर्त मानो तो पहनुँगी।"

"
ठीक है मानता हू शर्त, पर मेरी भी एक शर्त है, तुम खुद अपने कपड़े उतरोगी और फिर मैं तुम्हे तब तक प्यार करूँगा जब तक मैं चाहू।"

"
ठीक है,करते रहना इंतेज़ार,खुद तो मैं कपड़े उतारने से रही।"


मेनका ने बाथरोब खोल कर अपने जिस्म से सरका दिया। अब वो पूरी नंगी थी बस गले मे वोही चैन लटक कर उसकी छातिया चूम रही थी। मेनका ने बिकिनी की पेंटी उठाई और उसे अपनी टांगो से उपर किया और अपनी चूत को ढँकते हुए अपनी कमर पर उसकी डोरियाँ बाँधने लगी। उसकी नज़रे अपने ससुर के चेहरे पर टिकी थी और होठों पे शरारत भरी मुस्कान खेल रही थी।

राजासाहब के होठ सुख गये थे। वो बस भूखी निगाहों से अपनी बहू को घूर रहे थे। मेनका ने बिकिनी का ब्रा उठाया और अपने गले मे डाल लिया और अपने हाथ पीछे ले जाकर उसकी डोरियाँ बाँधने लगी।फिर घूम कर अपनी मखमली पीठ अपने ससुर के सामने कर दी,"इसे बाँध दो ना,प्लीस! और हाँ छूना नही।"

राजासाहब के सामने उनकी बहू की लगभग नंगी पीठ थी और नीचे स्विमस्यूट की पेंटी मे मुश्किल से समाती गांड। उन्होने हाथ बढ़ा कर डोरी बाँध दी। मेनका ने खाने का समान निकाला और अपने ससुर को बैठने का इशारा किया और झुक-झुक कर अपनी चूचिया उनके मुँह के सामने छल्काते हुए उन्हे नाश्ता परोसने लगी। राजासाहब की पेट की भूख तो उनके लंड की भूख के आगे कुछ भी नही थी। जब तक दोनो कहते रहे उनकी नज़रे बिकिनी के टॉप से झँकते अपनी बहू के क्लीवेज को घुरती रही।

मेनका को अपने ससुर को तड़पाने मे बहुत मज़ा आ रहा था। वो उठी और घूम कर किचन से बाहर चली गयी। राजासाहब भी उसके पीछे-पीछे चलने लगे।

मेनका जानती थी कि उसके ससुर उसके पीछे उसके रूप के जादू से खींचे चले आ रहे हैं और शर्त के कारण उनके हाथ बँधे है। उसने उन्हे और तड़पाने की सोची और अपनी गांड थोड़ा ज़्यादा मटका के और लहरा के चलने लगी। राजासाहब का लंड उनके अंडरवेर को फाड़ कर बाहर आने को बेताब हो उठा।

मेनका फार्महाउस के पीछे बने पूल पर आ गयी,"वाउ!कितना अच्छा पूल है।"और उसने उसमे गोता लगा दिया और लगी तैरने। राजासाहब वही बैठ कर उस जलपरी को निहारने लगे। मेनका तैरते हुए आती और पानी मे उपर नीचे होती तो उसकी चूचियाँ जैसे उसके ब्रा मे से निकलने को मचल उठती।

तभी मेनका पूल के उस हिस्से मे जहा सिर्फ़ 4 फिट पानी था, आके खड़ी हो गयी थी अपने ससुर के सामने। उसके गोरे बदन पे पानी की बूंदे हीरों की तरह चमक रही थी।

"
क्या हुआ,यश? तबीयत तो ठीक है ना?" कह कर उसने हाथ सर के उपर ले जाके अंगड़ाई ली। ऐसा करने से उसकी छातिया उसके ब्रा के गले मे से और ज़्यादा नुमाया हो गयी। राजासाहब बुरी तरह तड़प रहे थे पर क्या कर सकते थे,शर्त जो मानी थी।


मेनका ने फिर तैरते हुए पूल के 2 चक्कर लगाए और फिर वही आ के खड़ी हो गयी और लगी अपनी अदाओं से अपने ससुर को तड़पाने। पर इस बार राजासाहब ने भी जवाब सोच लिया था। वो खड़े हो गये और अपना अंडरवेर उतार दिया। राजासाहब का लंड फंफनता हुआ बाहर आ गया। राजासाहब ने उसे हाथ मे लिया और लगे हिलाने।


आज के लिए बस यही तक

फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ तब तक के लिए मैत्री की तरफ से जय भारत
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अत्यंत कामुक प्रस्तुति
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(22-03-2026, 05:22 PM)@@004 Wrote: अत्यंत कामुक प्रस्तुति

शुक्रिया दोस्त

बने रहिये
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चलिए कहानी में थोडा और झाँकने की कोशिश करते है.................
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मेनका हैरत से उन्हे देखने लगी। वो पहली बार किसी मर्द को इस तरह से अपने लंड से खेलते देख रही थी। उसकी निगाहे अपने ससुर के लंड से चिपक गयी। इस लंड की तो वो दीवानी हो गयी थी। उसने राजासाहब को यूही तड़पाने के लिए शर्त दी थी पर हक़ीक़त मे वो भी हर वक़्त बस उनसे लिपट कर उनके लंड को अपने हाथों मे,अपने मुँह मे या अपनी चूत मे महसूस करना चाहती थी।


उसका हाथ अपने आप अपनी चूत पर चला गया था और उसे सहलाने लगा था। राजासाहब अपना लंड हिलाए चले जा रहे थे और मेनका की चूत गीली हुए जा रही थी। वो मस्ती मे आ रही थी और उसे अब कोई शर्त याद नही थी। उसने अपने हाथों से बिकिनी की डोरिया खोल दी और उसे पूल के पानी मे गिर जाने दिया।


राजासाहब की चाल काम कर गयी थी। वो भी पूल मे उतर गये और उसे बाहों मे भर उसे चूमने लगे। मेनका ने अपने हाथ मे उनका लंड पकड़ लिया और उनकी किस का जवाब देने लगी। राजासाहब ने उसकी गांड को दबाना चालू कर दिया तो मेनका हंसते हुए छटक कर उनसे दूर हो गयी और पानी मे तैरने लगी। राजासाहब भी उसके पीछे हो लिए और थोड़ी ही देर मे उसे पकड़ लिया।

पीछे से पकड़ के वो उस से चिपक गये और अपना लंड उसकी गांड की दरार मे अटका दिया। फिर तैरते हुए उसे कम गहराई वाली जगह लाके पूल की दीवार से लगा के पीछे से लंड चूत मे डालने लगे।

मेनका पलट गयी और उनके गले से लग गयी। अब उसकी चूत उसके ससुर के लंड के सामने थी उसने अपनी टाँगे फैला कर अपने हाथ से उनका लंड अपनी चूत मे डाला और फिर टाँगे उनकी कमर पर कस दी। दोनो के पेट के नीचे के हिस्से पानी मे थे। राजासाहब इसी तरह अपनी बहू की चूत चोदने लगे। मेनका उनसे चिपक कर मज़े के समंदर मे गोते लगाने लगी। अपने ससुर की चुदाई से ना जाने वो कितनी बार झड़ी उसे बाद मे याद भी नही था। बस इतना याद था कि उसकी चूत मे उसके ससुर का गरम वीर्या गिरा था और उसके बाद वो वैसे ही चूत मे लंड डाले उसे उठाए घर के अंदर आ गये थे और वो थक कर उनकी बाहों मे सो गयी थी।

मेनका की नींद खुली तो उसने देखा कि वो ड्रॉयिंग रूम के मखमली ईरानी गाळीचे पे लेटी थी,बगल मे उसके ससुर लेते थे और अपने ख़यालों मे खोए थे। घड़ी देखी तो 4 बज रहे थे, तो वो पिछले 4-5 घंटो से सो रही थी,और सोती भी क्यू ना,कल पूरी रात चुदाने के बाद राजासाहब ने उसे सुबह 3:30 बजे छोड़ा था। उसने करवट लेके उनके सीने पे सर रख दिया और वाहा पर के बालों से खेलने लगी,"क्या सोच रहे हो?"

"
कुछ नही।",राजासाहब उसके सर पे हाथ फेरने लगे।
मैत्री की पेशकश

"
ऐसी क्या बात है जो तुम मुझे बता नही रहे? उस दिन भी फोन आया और तुम भागते हुए शहर चले गये। आख़िर क्या मामला है,मैं जानना चाहती हू।",मेनका उनके सीने पे कोहनी रख उनके चेहरे को देख रही थी।

"
बात तुम्हे पसंद नही आएगी।"

"
मैं फिर भी सुनना चाहती हू।"

"
तो सुनो मैं विश्वा के बारे मे सोच रहा था।"


मेनका मुँह घुमा कर दूसरी तरफ देखने लगी।

"
देखा,मैने कहा था ना! हो गयी ना अपसेट।" उ उसके गालों को सहलाने लगे।

"
फिर भी बताओ शहर शहर क्यू गये थे?"

"
तो सुनो।" राजासाहब ने करवट ली तो मेनका भी करवट लेकर लेट गयी। अब दोनो एक दूसरे को देखते हुए करवट से लेते थे,"ये विश्वा की अपनी कमज़ोरी है कि वो इस बुरी लत का शिकार हुआ पर आख़िर वो कौन शख्स था जो उसे ड्रग्स देता था। मैं यही जानने की कोशिश कर रहा हू।" फिर उन्होने उसे दुष्यंत वर्मा और उनके इन्वेस्टिगेशन के बारे मे बताया।


उन्होने उसकी बाई जाँघ खींच कर अपनी दाई जाँघ पर चढ़ा दी और अपनी दाई टांग उसकी टांगो के बीच ऐसे डाल दी की लंड चूत से आ सटा। अपनी बाई हाथ उसकी गर्दन के नीचे दल उसी हाथ से उसके कंधे को सहलाने लगे और डाए हाथ से उसकी चूत को। मेनका ने अपना बाया हाथ उनकी गांड पे रख दिया और दया नीचे ले जाकर उनके लंड और अंडो को रगड़ने लगी।

"
आख़िर ये जब्बार आपसे इतनी नफ़रत क्यू करता है?"

"
इसका जवाब तो हम नही जानते, पहले तो सोचते थे कि वो पैसो के लिए ऐसा कर रहा है पर अब लगता है कि दुश्मनी की वजह कुछ और है। पर हमे समझ नही आता कि क्या? हम तो उसे जानते तक नही थे जब उसने हमारी मिल्स मे हंगामा करने की कोशिश की थी।"अब तक लंड तन चुका था और चूत भी गीली हो गयी थी। उन्होने अपनी बहू को लिटाया और एक बार फिर उस पर सवार हो उसकी चिकनी चूत चोदने लगे।

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क्रमश.......
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जब्बार बॅंगलुर पहुँच चुका था और डॉक्टर पुरन्दारे का क्लिनिक भी उसने देख लिया था। अब असल काम शुरू होता था,उसे अंदर जाकर ये पता करना था कि अंदर कितने लोग हैं और विश्वा कहाँ पे रहता है। तभी उसके मोबाइल पे मलिका को फ़ोन किया, वो बॅंगलुर एरपोर्ट से बोल रही थी। जब्बार जब तक उसे लेने एरपोर्ट पहुँचा तब तक उसके शैतानी दिमाग़ ने क्लिनिक के अंदर जाने का रास्ता सोच लिया था। मैत्री की प्रस्तुति


थोड़ी देर बाद एक कार रिहेब सेंटर के गेट पर खड़ी थी,"प्लीज़ मैं देल्ही से आई हू और डॉक्टर साहब से मिलना बहुत ज़रूरी है।"

"मैं समझता हू,मेडम पर बिना अपायंटमेंट आप डॉक्टर साहब से नही मिल सकती।"

"अच्छा भैया तो बस एक बार मुझे उनसे फोन पर ही बात करवा दो,प्लीज़! मेरी रिसर्च का सवाल है।"

"अच्छा मेडम मैं कोशिश करता हू।" वो गार्ड अपने कॅबिन मे जा अपने फोन का रिसीवर उठा कर डाइयल करने लगा।

"लीजिए बात कीजिए।"

"हेलो!डॉक्टर पुरन्दारे,गुड ईव्निंग,सर! मेरा नाम कविता कपूर है, मैं देल्ही के 'हेल्ती' मॅगज़ीन मे रिपोर्टर हू। बेंगलूर एक पर्सनल विज़िट पे आई थी कि मुझे आपके सेंटर और आपकी डे-अडिक्षन थियरीस का पता चला, सर,मैं माफी चाहती हू कि बिना अपायंटमेंट,बिना फोन मैं इस तरह आ गयी, पर सर, क्या करू बिना आपका सेंटर देखे, आपसे मिले बिना जाने को मन नही माना।" जी हां,ये मलिका ही है जोकि सेंटर के अंदर जाने की कोशिश कर रही है।


जब्बार जानता था कि विश्वा उसे और कल्लन की शक्ल पहचानता है तो वो दोनो तो अंदर जा ही नही सकते, इसीलिए उसने मलिका को इस्तेमाल किया। उसे इतना पता था कि सनडे की वजह से 6 बजे शाम तक केवल ट्रेनी डॉक्टर ड्यूटी पे रहते हैं और सीनियर्स छुट्टी पे तो मलिका के पकड़े जाने का डर भी कम था।

"....थॅंक यू,सर! थॅंक यू सो मच!",उसने फोन गार्ड की तरफ बढ़ा दिया,"आपसे बात करेंगे।"

"मेडम,आपका काम हो गया। मैं आपको सेंटर डॉक्टर कुमार दिखा देंगे। जाइए।",मलिका के चेहरे पर जीत की मुस्कान खेल रही थी।


थोड़ी देर बाद मलिका की कार इन्स्टिट्यूट से बाहर आ गयी और बॅंगलुर शहर की ओर दौड़ने लगी। शहर पहुँचते ही जब्बार और वो एक रेस्टोरेंट मे बैठ गये,"क्या पता चला?"

"सेंटर मे सेक्यूरिटी बस गेट पे है। अंदर मे 2 फ्लोर्स पे 30 पेशेंट्स है। विश्वजीत किस फ्लोर पर है मुझे ये पता नही। पर रात मे बस एक-दो स्टाफ के लोग हैं और गेट पर एक गार्ड।"
प्रस्तुतकर्ता मैत्री

"वेल डन,जान!",जब्बार ने टेबल के नीचे उसकी जाँघ पे हाथ से दबाया।"अब बस कल्लन का इंतेज़ार है। चलो,कल तक वो भी आ जाएगा।"

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बने रहिये............
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दोस्तों दो छोटा एपिसोड दिए है


आशा है की आपको पसंद आएगा


आगे ससुर बहु की रतिक्रीड़ा को एन्जॉय करेंगे.............
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Pati marne wala hai kya biwi ne pati ko completly chodd diya hai or raja sahab ko apne bete se jyada apni jawas se jyada pyar hai apni icchao se jyada pyar hai kyu ki mujhe nahi dikh raha raja sahab ya menka koi bhi visvas ke sath hai vo akela hai bichara
[+] 1 user Likes Ayush01111's post
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Mene pahle bhi pucha tha ki agat vishwas wapas aya to kya menka uske sath imandati se reh paygi ya ek pita apne bete ke sath nyay kar paeyge
[+] 1 user Likes Ayush01111's post
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बहुत सुंदर प्रस्तुति
[+] 1 user Likes @@004's post
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