Posts: 881
Threads: 9
Likes Received: 393 in 250 posts
Likes Given: 208
Joined: Jun 2021
Reputation:
9
अब आगे..................
"हेलो।"
"दुष्यंत बोल रहा हू,यशवीर। तुम्हारे केस के बारे मे कुछ बात करनी थी।"
"हा,भाई। बोलो,क्या पता चला?" राजासाहब ने अपना लंड अपनी बहू की चूत से खीच लिया पर उनका खाली हाथ अभी भी उसका सर सहला रहा था।
"भाई तुम शहर आ जाओ तो तुम्हे अच्छी तरह सारी बात समझा दू।" मेनका ने डेस्क से उतर कर अपने ससुर की एडी पे गिरी पॅंट को उठा कर उन्हे वापस पहना दिया। मैत्री की प्रस्तुति[b]।[/b]
"ठीक है,दुष्यंत, हम बस अभी निकलते हैं।" फोन काट कर उन्होने मेनका को अपने पास खींच कर चूमा और उसकी आँखों मे उठे सवाल का जवाब दिया।
"एक बहुत ज़रूरी काम से शहर जाना पड़ रहा है। रात तक लौट आएँगे। घबराईए मत। चिंता की कोई बात नही है। और इस नाजुक पारी को तैयार रखे।" उन्होने ज़मीन पर पड़ी पेंटी उसे थमाई।
मेनका उसे ले बाथरूम चली गयी। जब बाहर आई तो राजासाहब ने उसे गुडबाइ किस दी और चले गये।
-------------------------------------------------------------------------------
शहर के 5-स्टार होटेल के उस कमरे मे राजासाहब अपने जिगरी दोस्त के साथ बैठे थे पर कमरे मे उनके अलावा एक नौजवान भी था।
"यश,ये मनीष है। तुम्हारा केस यही इन्वेस्टिगेट कर रहा है। और ये राजा यशवीरसिंग हैं,मनीष।"
मनीष ने उन्हे प्रणाम किया तो राजासाहब ने जवाब मे सर हिलाके उस नौजवान को ठीक से देखा।
"इसकी उम्र पर मत जाना,यश। मेरे सबसे काबिल बन्दो मे से है ये।",दुष्यंत वर्मा फिर मनीष से मुखातिब हुए,"मनीष अब तुम सारी रिपोर्ट हम दोनो को दो।"
"जी सर।"
मनीष ने बोलना शुरू किया,
"सर,मैने राजपुरा और शहर की उन सभी जगहो पर जाकर तहकीकात की जहा कुंवर साहब का आन-जाना था। शुरू मे मुझे कहीं कोई सुराग नही मिला कि आख़िर उन्हे ड्रग कौन देता था। शहर के अपने मुखबिरो के ज़रिए मैने पता लगाया तो पाया कि यहा का किसी डीलर ने तो कभी उनसे कोई सौदा नही किया था। फिर राजपुरा जैसी छोटी जगह ये डीलर्स तो जाने से रहे। एक आदमी के बिज़नेस के लिए यहाँ का अपना हज़ारों का नुकसान-ये कोई सेन्स नही था।" थोडा रुक कर मनीष ने पानी का एक घूँट लिया।
"...मैने अपना ध्यान राजपुरा पर लगा दिया। मुझे पता चला कि कुंवर आदिवासियों के गाव महुआ की शराब लेने जाते थे। और यही किस्मत से मेरे हाथ एक बड़ा सुराग लग गया। आदिवासियों ने बताया कि कुंवर के अलावा भी एक शहरी आदमी था जो कि उनसे महुआ ले जाता था। उन्होने एक बार उसे कार मे बैठे कुंवर से कुछ बाते करते हुए भी देखा था। जब मैने उसका हुलिया,नाम आदि पूचछा तो कुछ खास नही पता चला।"
"..फिर एक दिन मैं इसी सुराग के फॉलो-उप के लए उन आदिवासियों के पास गया। वहा एक आदिवासी जो शहर मे नौकरी करता था,बैठा हुआ था और अपने कॅमरा मोबाइल से फोटो खिच रहा था। फोन मे कुछ प्राब्लम आई तो उसने मुझे दिखाया। देखा तो पाया कि मेमोरी फुल है। मैने उसे कहा कि कुछ फोटोस डेलीट करनी पड़ेगी।"
"..उसने कहा कि वो बताता जाएगा और मैं फोटोस डेलीट करता जाऊं। फोटोस डेलीट करते हुए मेरी नज़र एक फोटो पर पड़ी। उसमे एक गोरा-चट्टा शहरी था। बाकी सारे फोटो उन आदिवासीयो के थे तो फिर ये शहरी कौन था?" राजासाहब गौर से मनीष को सुन रहे थे।
"..उस आदिवासी ने बताया कि यही वो आदमी था। और यही वो फोटो है,सर।" मनीष ने अपना लॅपटॉप ऑन कर स्क्रीन राजासाहब की तरफ कर दी। फोटो मे 3 आदिवासी बैठे हंस रहे थे और पीछे फोटो के कोने मे वो शहरी था। राजासाहब के दिमाग़ मे उस इंसान का चेहरा छप गया।
"क्या गॅरेंटी है मनीष कि यही चुतिया इंसान ड्रग डीलर है?"
"ये राजासाहब।" मनीष ने एक छोटा सा पॅकेट आगे बढ़ाया जिसमे एककॅप्सुल था।
"ये एक बार इसकी जेब से गिर गया था और महुआ बेचने वाले आदिवासी ने दवा समझ कर अपने पास रख लिया था और फिर भूल गया था। इस आदमी की बात चलने पर उसे याद आया तो मुझ से इस 'दवा' के बारे मे पूछने लगा।" मैत्री की लेखनी[b]।
[/b]
"वेल डन, मनीष। आइ एम प्राउड ऑफ यू।" दुष्यंत वर्मा ने उसकी पीठ ठनकी।
बने रहिये................आगे और भी लिख रही हूँ[b]। [/b]
Posts: 881
Threads: 9
Likes Received: 393 in 250 posts
Likes Given: 208
Joined: Jun 2021
Reputation:
9
दोस्तों एक अपडेट दिया हुआ है
आप पढ़िए और अपनी प्रतिक्रया दीजिये तब तक मैं एक ओर अपडेट दे देती हूँ
•
Posts: 881
Threads: 9
Likes Received: 393 in 250 posts
Likes Given: 208
Joined: Jun 2021
Reputation:
9
"मनीष, आपने कमाल का काम किया है। हम चाहते हैं कि इस इंसान को ढूँढने मे आप हमारी मदद करें।" राजासाहब ने उस से हाथ मिलाया।
"सर,ये भी कोई कहने की बात है। जब तक पता ना चल जाए मैं भी चैन से नही बैठूँगा।" मैत्री की पेशकश
"..पर यश ये डोफा कौन हो सकता है? वही जाबर का साथी?"
"पता नही, दुष्यंत समझ नही आ रहा। जब्बार का कहने को तो धंधा प्रॉपर्टी डीलिंग का है पर असल मे डिस्प्यूटेड प्रॉपर्टीस को बिकवाना,किसी की प्रॉपर्टी पर ज़बरदस्ती क़ब्ज़ा कर उस से पैसे ऐंठना ये उसका असल काम है, मशहूर है कि उसकी जेब मे एक चाबियों का गुच्छा है जिस से कि दुनिया का कोई भी ताला खुल सकता है।" राजासाहब ने ग्लास उठा कर पानी पिया।"
..पर भेन्चोद ये ड्रग्स....ये मेरी भी समझ मे नही आ रहा। इस तस्वीर वाले आदमी को भी पहली बार देखा है। पर मेरा मन कहता है कि इस के तार जब्बार से ही जुड़े हैं। पर कैसे?"
"ये मनीष पता लगा ही लेगा। तुम चिंता छोडो। चलो कुछ खाते हैं।"
रात के 1:30 बज रहे थे पर राजासाहब अभी तक नही आए थे। शाम 7 बजे फोन आया था कि वो खाना खा कर आएँगे पर किसी भी हाल मे एक बजे तक आ जाएँगे। मेनका एक छ्होटा-सा वाइट केमिसोल जो कि बस उसकी पेंटी को ढके हुए थे, पहने बेचैनी से अपने कमरे मे चहलकदमी कर रही थी। अपने मोबाइल से वो लगातार अपने ससुर का मोबाइल ट्राइ कर रही थी पर बार- बार स्विच्ड ऑफ का मेसेज आ रहा था। क्लॉज़ेट का रास्ता उसने खोल दिया था और उसकी नज़रे बार-बार वहा जा रही थी।
तभी कार की आवाज़ आई,राजासाहब लौट आए थे। नीचे से नौकरों को बाहर कर दरवाज़ा बंद करने की आवाज़ आई तो मेनका अपने बिस्तर पर चादर ओढ़ कर लेट गयी। अपनी पीठ उसने क्लॉज़ेट की तरफ कर ली। वो गुस्से मे पागल हो रही थी।
थोड़ी देर बाद राजासाहब क्लॉज़ेट के रास्ते उसके कमरे मे दाखिल हुए, वो पूरे नंगे थे। राजासाहब ने चादर उठाई और लेट कर मेनका को पीछे से अपनी बाहों मे जाकड़ लिए।,
"जाओ,मुझे सोने दो।"मेनका ने उनका हाथ हटा दिया।
"क्या हो गया?"
"कुछ नही। हमे नींद आ रही है।"
"नही तुम नाराज़ हो। क्या ग़लती हो गयी भाई?"उन्होने फिर उसे जाकड़ लिया और पीछे से अपना नंगा बदन उसकी पीठ और गांड से चिपका दिया।
"एक तो इतनी देर कर दी,उपर से फोन भी नही उठा रहे थे और पूछते हो क्या ग़लती की!"
"फोन डिसचार्ज हो गया था और कहा था ना कि ज़रूरी काम था,उसी मे देर हो गयी। अब गुस्सा छोडो और प्यार करो।" उनका दाया हाथ उसकी पेंटी मे घुस गया और बाया उसकी गर्दन के नीचे आ गया और वही से उसकी चूचिया दबाने लगा।
अपनी गांड पे अपने ससुर का लंड महसूस करते ही मेनका ने अपना हाथ पीछे ले जा कर उसे पकड़ लिया और हिलाने लगी। "क्या प्रीकम था......आन्न....न्न्न्ह्ह्ह्ह्ह?" राजासाहब की उंगलिया उसके चूत के दाने को रगड़ रही थी।
बने रहिये...................
Posts: 881
Threads: 9
Likes Received: 393 in 250 posts
Likes Given: 208
Joined: Jun 2021
Reputation:
9
जी दोस्तों ओर एक अपडेट आपके मनोरंजन के लिए दे दिया है...........
आपकी प्रतिक्रया की अपेक्षा
•
Posts: 881
Threads: 9
Likes Received: 393 in 250 posts
Likes Given: 208
Joined: Jun 2021
Reputation:
9
अब आधा प्रसंग छोड़ने का मन नहीं कर रहा
तो यह ससुर और बहु की प्राइवेट गेम का एपिसोड लिख देती हूँ
बने रहिये
•
Posts: 881
Threads: 9
Likes Received: 393 in 250 posts
Likes Given: 208
Joined: Jun 2021
Reputation:
9
"वक़्त आएगा तो सब बताएँगे,मेनका। अभी बस हमे प्यार करो।" राजासाहब ने उसका चेहरा अपनी तरफ घुमाया और दोनो एक-दूसरे को जमकर चूमने लगे। मेनका एक बार झड़ चुकी थी। राजासाहब ने उसका केमिसोल और पेंटी उसके जिस्म से अलग किए और पीछे से करवट लिए हुए ही अपना लंड उसकी चूत मे डाल दिया और उसकी पीठ से चिपक कर धक्के मारने लगे। उनका लंड मेनका के जी- स्पॉट से रगड़ खा रहा था और वो दुबारा झड़ गयी, इस बार उसकी चूत ने काफी चुतरस छोड़ा।
राजासाहब ने बिना उसकी चूत से लंड निकाले उसे घुटनो के बल उल्टा खड़ा कर दिया। मेनका का सर तकिये मे धंसा हुआ था और गांड हवा मे उठी हुई थी। उसके ससुर का लंड जड़ तक उसकी चूत मे डूबा हुआ था और उनके हाथ उसकी गांड और चूचियो को मसल रहे थे। राजासाहब ने उसे इसी पोज़िशन मे चोदना शुरू कर दिया, मेनका मस्ती मे झूम रही थी।
डॉगी स्टाइल मे चोद्ते-चोदते राजासाहब ने ऐसे ज़ोरदार धक्के मारे कि मेनका बिस्तर पर पेट के बल गिर पड़ी। राजासाहब भी धक्के रोके बिना उसके उपर लेट गये, अपने हाथ उसके नीचे ले जाकर उसकी चूचियाँ दबाने लगे और लगे अपनी बहू की चुदाई करने। मेनका ने अपना सर उठाकर पीछे घुमाया तो राजासाहब ने अपने होठ उसके होठों से लगा दिए।
दोनो एक-दूसरे को चूमते हुए चुदाई कर रहे थे। मेनका ने अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया और अपने ससुर के होठों को कस लिया, वो झड़ गयी थी और तभी राजासाहब ने भी उसकी चूचियो पे अपनी पकड़ बहुत मज़बूत कर दी और एक-एक धक्के लगा कर उसकी चूत मे अपना पानी छोड़ दिया।
-------------------------------------------------------------------------------
बस आज के लिए यही तक......फिर मिलेंगे एक नए अपडेट के साथ तब तक के लिए मैत्री की तरफ से जय भारत।
Posts: 881
Threads: 9
Likes Received: 393 in 250 posts
Likes Given: 208
Joined: Jun 2021
Reputation:
9
दोस्तों आप के मनोरंजन के लिए एक ओर छोटा सा अपडेट दे दिया है
अब तो आप अपनी प्रतिक्रया दीजिये!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
•
Posts: 966
Threads: 28
Likes Received: 336 in 257 posts
Likes Given: 3,112
Joined: Aug 2025
Reputation:
25
यह पूरी कहानी कई साल पहले पढ़ी थी. क्या आप उसमें कुछ बदलाव करके लिख रही हैं?
Posts: 51
Threads: 0
Likes Received: 47 in 47 posts
Likes Given: 77
Joined: Sep 2025
Reputation:
0
Posts: 881
Threads: 9
Likes Received: 393 in 250 posts
Likes Given: 208
Joined: Jun 2021
Reputation:
9
(13-03-2026, 12:00 AM)Glenlivet Wrote: यह पूरी कहानी कई साल पहले पढ़ी थी. क्या आप उसमें कुछ बदलाव करके लिख रही हैं?
मुझे नहीं पता आप ने कहा तक पढ़ी है फिर भी मैं यहाँ नहीं कोई बदलाव नहीं कर रही
शुक्रिया
Posts: 881
Threads: 9
Likes Received: 393 in 250 posts
Likes Given: 208
Joined: Jun 2021
Reputation:
9
(14-03-2026, 06:20 AM)@@004 Wrote: अति उत्तम प्रस्तुति।।
शुक्रिया दोस्त
•
Posts: 881
Threads: 9
Likes Received: 393 in 250 posts
Likes Given: 208
Joined: Jun 2021
Reputation:
9
चलिए कहानी को थोडा आगे ले जाते है
•
Posts: 881
Threads: 9
Likes Received: 393 in 250 posts
Likes Given: 208
Joined: Jun 2021
Reputation:
9
अब आगे.............
"बिज़्ज़रे" नाइटक्लब खचाखच भरा था। म्यूज़िक और लोगों की बातचीत का शोर था और क्लब के बार के सामने ड्रिंक्स लेनेवालों की भीड़ जमा थी।
"एक्सक्यूस मी..मेराड्रिंक।" वो छोटा-सा ब्लॅक ड्रेस पहने लड़की बारटेंडर को अपना ऑर्डर देने की कोशिश कर रही थी पर इस भीड़ और शोर मे उसका ध्यान उस लड़की की तरफ जा ही नही रहा था। माजिद सुलेमान की नज़रे उस लड़की के ड्रेस से झाँकती गोरी टाँगों और जांघों के हिस्से को घूर रही थी।
"ये लीजिए अपनी ड्रिंक।" उसने भीड़ मे से हाथ बढ़ा कर बारटेंडर से एक ग्लास लिया और उस लड़की को पकड़ाया।
"थेंक यु।" माजिद ने डिस्को लाइट्स मे उस लड़की का चेहरा देखा- बला की खूबसूरत थी और ड्रेस के गले मे से झाँकता उसका क्लीवेज....उफ्फ!
"मुझे माजिद कहते हैं।"
"हाई! आइ'म रोमा।" उसने माजिद से हाथ मिलाया।
"आप अकेली आई यहाँ?"
"नही। अपनी सहेली और उसके बॉयफ्रेंड के साथ आई थी। पता नही दोनो कहा गायब हो गये।"
"आप अपने बॉयफ्रेंड के साथ नही आई?"
"मेरा ब्रेक-अप हो गया है।"
"ओह्ह आइ'म सॉरी।"
"नो यू शुडन’ट बी। आइ'म नोट। उसने मुझे किसी ओर के लिए छोड़ दिया।"
"ओह। वो शर्तिया बेवकूफ़ इंसान होगा जिसने आपके जैसी हसीन लड़की को छोड़ दिया।तो आप फिर से सिंगल हैं?"
"तारीफ के लिए शुक्रिया। जी हा,मैं सिंगल हू। और आप?"
""मैं भी।"
"आप क्या करते हैं?"
"मैं टॅक्सी-ड्राइवर हू।"
"जी?!"
"जी। मैं एक चार्टर एरक्रॅफ्ट कंपनी मे पाइलट हू। जो लोग प्लेन्स हाइयर करते हैं उन्हे उनकी मंज़िल तक पहुचाता हू।"
"ओह्ह।" दोनो हँसने लगे। “आप बहुत मज़किया हैं,मिस्टर माजिद?"
"प्लीज़ नो मिस्टर और नो आप।"
"ओक।तो तुम पाइलट हो। कितना एग्ज़ाइटिंग काम है। बहुत मज़ा आता होगा ना प्लेन उड़ाने मे।“
और ऐसी ही बातों से रोमा उर्फ मलिका ने उस पाइलट को शीशे मे उतारना शुरू कर दिया।
क्रमश.......
•
Posts: 881
Threads: 9
Likes Received: 393 in 250 posts
Likes Given: 208
Joined: Jun 2021
Reputation:
9
थोड़ी देर बाद होटेल के एक कमरे मे माजिद नंगा लेटा था और उसका लंड उसके उपर बैठी मलिका की चूत मे था। मलिका उसके उपर झुक कर अपने बाए हाथ से पकड़ कर अपनी बाई चूची माजिद के मुँह मे दे रही थी और माजिद के हाथ उसकी पीठ पर फिसल रहे थे। थोड़ी देर बाद उसने बाई निकाली और दाई चूची उसके मुँह मे डाल दी। माजिद ने ऐसी खूबसूरत लड़की पहले कभी नही चोदि थी और उसके लिए अब अपना पानी रोकना मुश्किल हो रहा था। उसने अपनी कमर हिला कर धक्के मारना शुरू किया तो मलिका उठ कर बैठ गयी और कमर हिला-हिला कर उसे चोदने लगी।
मलिका ने अपने हाथ अपने बालों मे फिराने शुरू कर दिए, माजिद की तो हालत बुरी हो गयी। उसने अपने हाथों से उसकी चूचिया मसलनी चालू कर दी और ज़ोर-जोर से कमर हिलाते हुए उसकी चूत मे झड़ गया। मलिका नही झड़ी थी पर जैसे ही उसने माजिद का पानी अपनी चूत मे महसूस किया वो झुक कर उस से चिपक गयी और झड़ने की एक्टिंग करने लगी।
मलिका उसके उपर से उतर कर उसकी बगल मे लेट गयी। माजिद उसे बाँह मे घेर कर उसका पेट सहलाने लगा।
"माजिद!" मैत्री की पेशकश
"ह्म्म!"
"तुम्हारे प्लेन मे काफ़ी माशूर लोग भी आते होंगे ना?"
"हुउँ।" माजिद झुक कर उसकी चूचिया चूसने लगा।
"कौन-कौन बैठा है तुम्हारे प्लेन मे?"
"राहुल द्रविड़,जॉन अब्राहम,प्रिटी ज़िंटा,सानिया मिर्ज़ा।" उसने चूसना छोड़ उन चूचियो को फिर से दबाना चालू कर दिया।
"रियली! और?" मलिका ने उसका लंड अपने हाथ मे ले लिया।
"और......कुछ पॉलिटिशियन्स।"
"और बिज़नेसमॅन?" वो अब लंड हिलाकर उसे दुबारा खड़ा कर रही थी।
"हा...जिंदल स्टील का मालिक आया था एक बार। और अपने राजकुल के राजासाहब को तो मैं हमेशा ले जाता हू।"
"सच मे? राजासाहब को भी! वाउ! कही तुम मुझे बना तो नही रहे माजिद?"
"अरे नही,मेरी जान, तुम्हे पता है मैं हर बार उनकी फ्लाइट पाइलट करता हू।" वो इस लड़की को इंप्रेस करने का मौका नही छोड़ना चाहता था। "और तुम्हे पता है कि उनका बेटा...-"
"-वो जो ड्रग अडिक्ट हो गया है?"
"हा, और जिसके बारे मे कोई नही जानता कि वो कहा गया है।" उसने मलिका को लिटा दिया और अपनी उंगली उसकी चूत मे डाल दी।,"पर मैं जानता हू।"
"!!अच्छा!!",मलिका ने आँखे बंद कर ऐसे जताया जैसे उसे बहुत मज़ा आ रहा था जबकि हक़ीक़त मे उसका पूरा ध्यान माजिद की बातों पर था। उसने सपने मे भी नही सोचा था कि बिना राजा का नाम लिए वो उसे ये सब बताने लगेगा।
"हा। राजासाहब का बेटा बॅंगलुर मे है किसी डॉक्टर पूरी नही पूर्वे....हा याद आया डॉक्टर पुरन्दारे के क्लिनिक मे।"
मलिका का काम हो गया था। उसने माजिद को अपने उपर खीच लिया जोकि अपना लंड उसकी चूत मे घुसाने लगा।
थोड़ी देर बाद माजिद को गहरी नींद मे सोता छोड़ मलिका लिफ्ट से नीचे होटेल के एग्ज़िट की तरफ जा रही थी। माजिद बेचारे को पता भी नही था कि उसने कितनी बड़ी ग़लती कर दी थी।
मलिका की चूत मे आग लगी थी। माजिद उसे ज़रा भी शांत नही कर पाया था। घर पहुँच कर जैसे ही उसने जब्बार को सारी बात बताई वो खुशी से पागल हो गया और उसे खींच कर अपनी बाहों मे भर चूमने लगा। यही तो मलिका चाहती थी। उसने भी एक हाथ से उसका लंड पकड़ लिया और दूसरे से अपने कपड़े उतारने लगी।
जब्बार अपने दोनो साथियों के साथ बॅंगलुर जाने की तैयारी करने लगा,
"हम तीनो अलग-अलग बॅंगलुर पहुँचेंगे और इस होटेल के रेस्टोरेंट मे मिलेंगे।" उसने मिलने का दिन और समय भी दोनो को बताया।
"यहा से हम मे से कोई भी सीधे बॅंगलुर नही जाएगा।हम सब यहा से 3 अलग-अलग शहरों को जाएँगे और वहा से बॅंगलुर जाएँगे और कोई भी अपना सही नाम इस्तेमाल नही करेगा।"
"वहा पहुँच तो जाएँगे पर विश्वजीत को रिहेब सेंटर से कैसे निकालेंगे?" ये सवाल कल्लन ने पूछा।
"वहा पहुँच कर हम सेंटर के बारे मे सारी जानकारी जुटाएँगे और फिर मैं आगे का प्लान बनाऊंगा। फिलहाल तो मैं हम सब के ट्रॅवेल प्लॅन्स अरेंज करता हू।" जब्बार फ्लॅट से बाहर निकल गया।
उसके निकलते ही मलिका दौड़ कर खड़े हुए कल्लन की गोद मे चढ़ गयी, अपनी टांगो से उसने उसकी कमर जकड़ ली और उसे चूमने लगी। कल्लन के हाथों ने उसकी गांड को थाम लिया। मलिका केवल एक टी-शर्ट पहने थी। कल्लन ने उसे एक दीवार से चिपका दिया और एक हाथ से उसको थाम कर दूसरे से अपनी पॅंट खोल अपना लंड निकाल लिया।
उसने खड़े-खड़े ही अपना लंड मलिका की चूत मे उतार दिया और उसे दीवार से लगा कर धक्के मारने लगा। मलिका अपनी जीभ से उसके कान को चाटने लगी और उसके बड़े लंड का मज़ा उठाने लगी।
-------------------------------------------------------------------------------
आज के लिए बस यही तक फिर मिलेंगे एक नए अपडेट के साथ।
जय भारत।।
Posts: 966
Threads: 28
Likes Received: 336 in 257 posts
Likes Given: 3,112
Joined: Aug 2025
Reputation:
25
(14-03-2026, 03:56 PM)maitripatel Wrote: मुझे नहीं पता आप ने कहा तक पढ़ी है फिर भी मैं यहाँ नहीं कोई बदलाव नहीं कर रही
शुक्रिया
मैंने वहां तक पढ़ी थी जहां दुनिया यशवीर और मेनका को मरा हुआ समझ लेती है और वे नाम बदल कर नयी जगह पति-पत्नी की तरह रहने लगते हैं.
Posts: 51
Threads: 0
Likes Received: 47 in 47 posts
Likes Given: 77
Joined: Sep 2025
Reputation:
0
अत्यंत उत्तम प्रस्तुति।।
लेकिन जब्बार अब मेनका के पति के साथ क्या करना चाहता है।।
Posts: 881
Threads: 9
Likes Received: 393 in 250 posts
Likes Given: 208
Joined: Jun 2021
Reputation:
9
(14-03-2026, 09:00 PM)Glenlivet Wrote: मैंने वहां तक पढ़ी थी जहां दुनिया यशवीर और मेनका को मरा हुआ समझ लेती है और वे नाम बदल कर नयी जगह पति-पत्नी की तरह रहने लगते हैं.
shukriya
THe END
•
Posts: 881
Threads: 9
Likes Received: 393 in 250 posts
Likes Given: 208
Joined: Jun 2021
Reputation:
9
(15-03-2026, 06:06 PM)@@004 Wrote: अत्यंत उत्तम प्रस्तुति।।
लेकिन जब्बार अब मेनका के पति के साथ क्या करना चाहता है।।
शुक्रिया दोस्त
जी हां जब्बार अब क्या कर रहा है यह आगे के एपिसोड बता पाएंगे
बने रहिये मेरे साथ कहानी में...............
•
Posts: 881
Threads: 9
Likes Received: 393 in 250 posts
Likes Given: 208
Joined: Jun 2021
Reputation:
9
चलिए कहानी में थोडा आगे बढ़ा जाए................
•
Posts: 881
Threads: 9
Likes Received: 393 in 250 posts
Likes Given: 208
Joined: Jun 2021
Reputation:
9
सवेरे थोड़ी देर से मेनका की आँख खुली। कल राजासाहब ने उसे कुछ ज़्यादा ही जम कर चोदा था। उसे मज़ा तो बहुत आया था पर उतनी ही थकान भी हो गयी थी। उसकी चूत आज कुछ ज्यादा ही दर्द कर रही थी। वह थोड़ी मुस्कुराई और अपने आप से कहने लगी की यह तो होना ही था जब तुम्हे चुदने का इतना शौक है और वो भी मुसल लंड से।
उसने सोचा कि आज ऑफीस ना जाए पर फिर लगा कि कल ही तो उसे वी-पी बनाया गया है और आज पहले दिन ही ग़ैरहाज़िर रहे, ये अच्छा नही लगेगा। फिर आज सॅटर्डे था, तो ऑफीस आधे दिन मे ही ख़तम हो जाना था।
मेनका रेडी होकर नीचे आई तो पता चला कि राजासाहब पहले ही ऑफीस जा चुके हैं तो वो भी फटाफट नाश्ता कर ऑफीस पहुँच गयी। आज राजासाहब ने ऑफीस मे कल वाली हरकत नही दोहराई तो उसने राहत की साँस ली पर साथ ही साथ थोड़ा निराश भी हुई। पर फिर आने वाली रात का ख़याल आते ही उसके होठों पर मुस्कान और चूत मे गीलापन आ गया।
शाम 4 बजे राजासाहब ने उस से ऑफीस से चलने को कहा। दोनो कार मे बैठ गये और राजासाहब ने ड्राइविंग शुरू कर दी। मैत्री की पेशकश
"अरे,ये किधर जा रहे हो? ये रास्ता तो घर नही जाता।"
"हा, हम घर जा भी नही रहे।"
"तो फिर कहा जा रहे हैं?" मेनका खिसक कर अपने ससुर से सॅट कर बैठ गयी।
"वो तो पहुँच कर ही पता चलेगा।" उन्होने भी उसे अपनी बाँह मे समेट लिया।
"हम रात तक वापस तो आ जाएँगे ना?"
"अब तो हम कल शाम को ही लौटेंगे।"
"ओह। पर हमे कपड़े तो ले लेने लेते घर से।"
"जहा हम जा रहें है वाहा कपड़ों की कोई ज़रूरत नही है मेरी जान।" राजासाहब ने उसके गाल पर चूम लिया।
"हटो। मैं बिना कपड़ों के नही रहूंगी।" मेनका बनावटी गुस्से से बोली।
"वो तो हम पहुँच कर देखेंगे।" उन्होने इस बार उसके होठ चूम लिए।
करीब 3 घंटे के बाद वो शहर को पार करते हुए अपनी मंज़िल पर पहुँच गये। वो एक बड़ा-सा फार्महाउस था जिसके अगल-बगल और कोई बिल्डिंग नही थी। सबसे पास वाला फार्म हाउस भी एक/2 किलोमीटर दूर था। राजासाहब ने कार से उतर कर गेट पे लटक रहा ताला खोला, कार अंदर की और गेट वापस लॉक कर दिया।
मेनका उतर कर अपने ससुर का हाथ थामे फार्महाउस को घूम कर देखने लगी। पीछे एक बड़ा स्विमिंग पूल था और चारो तरफ हरी घास बिछि थी। फार्म हाउस की बिल्डिंग बहुत आलीशान थी। किचन मे खाने का सारा समान मौजूद था।
"ये सारा इंतेज़ाम,यहा की देख-रेख कौन करता है?"
"केअरटेकर है। पर हमने उसे 2 दिन की छुट्टी दे दी है। अभी यहा हम दोनो के अलावा कोई भी नही है।" राजासाहब उसे बाहों मे पकड़ने के लिए आगे बढ़े तो मेनका छितक कर दूर हो गयी। "पहले कुछ खा लें।"
मेनका ने खाना निकाला तो राजासाहब ने उसे खींच कर अपनी गोद मे बिठा लिया और दोनो वैसे ही खाने लगे। मेनका की बड़ी गांड का दबाव पड़ते ही राजासाहब का लंड खड़ा हो गया और मेनका उसकी चुभन अपनी गांड पे महसूस करने लगी। खाना ख़तम होते-होते दोनो गरम हो चुके थे।
बने रहिये...........
•
|