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Misc. Erotica अदला-बदली
#21
(11-03-2026, 06:23 PM)poorangyan Wrote: Good. Keep it up.

thanks
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#22
भाग 10

फिर हम दोनों ने बाथरूम जाकर एक-दूसरे को साफ किया। हम दोनों काफी थक गए थे, इसलिए हम एक-दूसरे से लिपटे हुए नंगे ही सो गए। जब सुबह मेरी आंख खुली तो मैं नंगी जीजू की बाहों में थी। मैं धीरे से उठी और नंगी ही अंकिता और दीपक के कमरे में गई। वो दोनों भी नंगे एक-दूसरे से चिपक के सोये हुए थे।
मेरे दिमाग में चुहल करने का ख्याल आया। मैंने आहिस्ता से अंकिता को उठाया और उसे कमरे के बाहर ले आई। मैंने उसे मेरा विचार बताया तो वो उसे भी अच्छा लगा। फिर उसने कमरे में जाकर अपने कपड़े उठाए और आकाश जीजू वाले कमरे में चली गई। मैंने भी वहां से अपने कपड़े उठाए और दीपक के पास चली आई। फिर मैंने अपने कपड़े पहने और दीपक को उठाया। उसने उठते ही मुझे अपने पास देखा तो उसने पूछा-
दीपक: डार्लिंग, तुम यहाँ कब आई?  
मैं: कब आई का क्या मतलब? मैं रात को तुम्हारे साथ ही तो इस कमरे में आई थी।  
दीपक: क्यों मजाक कर रही हो?  
मैं: कैसा मजाक, हम दोनों इस कमरे में कल रात को आए थे।  
दीपक: यहाँ तो मैं और अंकिता आए थे। और तुम और आकाश दूसरे कमरे में गए थे।  
मैं: तुम इतनी ज्यादा क्यों पी लेते हो? रात का नशा अभी तक नहीं उतरा क्या जो ऐसी ऊटपटांग बातें कर रहे हो?
दीपक: ऊटपटांग तो तुम बोल रही हो। रात को अंकिता और मैं साथ में थे।  
मैं: मेरे टल्ली पतिदेव, तुम रात भर मेरे साथ थे। और अंकिता अब भी अपने पतिदेव के साथ होगी।  
दीपक: अरे यार, कल हमने तय किया था कि हम एक रात के लिए बीवियों की अदला-बदली करेंगे?  
मैं: लगता है कि शराब ने तुम्हारा दिमाग खराब कर दिया है। पता नहीं क्या ऊलजलूल बोल रहे हो।
दीपक: क्या तुम्हें याद नहीं है कि तुम्हारे सामने ही आकाश ने मुझे बोला था कि तुम अंकिता को बेडरूम में ले जाओ और मैं मनीषा को दूसरे बेडरूम में ले जाता हूँ?  
मैं: तुमने कोई सपना देखा था क्या? और तुम अंकिता के साथ कुछ ऐसा-वैसा करने का सोच रहे थे क्या?  
दीपक: अरे यार, तुम ही तो इतने दिनों से मेरी और अंकिता की सेटिंग करवा रही थी और कल रात तुम्ही ने तो बोला कि जाओ, अंकिता के साथ मजे करो।
मैं: मैंने तुम दोनों की दोस्ती इसलिये करवायी थी कि तुम थोड़ी जीजा-साली वाली मस्ती कर सको। पर तुम तो उसके साथ सोने के सपने देखने लगे! मुझे तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं थी।  
दीपक: अरे यार, मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है। रात सच में तुम ही मेरे साथ थी?  
मैं: तुम्हें यकीन नहीं हो तो चलो, अंकिता और जीजू से पूछ लेते हैं कौन किसके साथ था। उठो, कपड़े पहनो और बाहर चलो।
फिर दीपक ने अपने कपड़े पहने और हम बाहर लिविंग रूम में आकर सोफे पर बैठ गए। दीपक के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थीं, और मैं उसे देखकर मुश्किल से अपनी हंसी रोक पा रही थी।  
तभी अंकिता और आकाश जीजू भी वहाँ आ गए। अंकिता ने तो कपड़े पहन रखे थे, पर जीजू नंगे थे। आते ही अंकिता बोली -  
अंकिता: मनीषा, जरा बता तू रात को कहाँ थी?
मैं (हंसते हुए): जीजू, आप ऐसे ही कैसे आ गए? आपको पता नहीं कि मैं यहाँ हूँ। आपका भी नशा अब तक नहीं उतरा? जाओ, कपड़े पहन कर आओ।  
जीजू भी दीपक की तरह हक्के-बक्के लग रहे थे। वो वापस बेडरूम में गए। अंकिता भी उनके साथ गई और फिर जीजू कपड़े पहन के वापस आए।  
अंकिता: हाँ मनीषा, अब इन्हें बता कि तू रात भर कहाँ थी?  
मैं: कहाँ थी का क्या मतलब? मैं बेडरूम में थी, दीपक के साथ।
अंकिता: ये बोल रहे हैं कि तू रात भर इनके साथ थी ।  
मैं: हे भगवान, ये भी ऐसा बोल रहे हैं? दीपक भी बोल रहा है कि तू रात भर इसके साथ थी।  
अंकिता: दोनों ने इतनी पी है कि इनका नशा अभी तक नहीं उतरा!  
मैं: अंकिता, इन दोनों की नीयत खराब है। तभी ये ऐसी बातें सोच रहे हैं।  
दीपक: अरे, कल तक तो तुम दोनों तैयार थीं, आज क्या हो गया?  
आकाश: मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है। मनीषा, तुम सच में मेरे साथ नहीं थी कल?
मैं: जीजू, ये आप क्या बोल रहे हो? आपके साथ थोड़ा हंसी-मजाक कर लिया तो आप सीधे बेडरूम में ले जाने की बात कर रहे हो।  
अंकिता: अरे, इन दोनों ने जरूर इस तरह का कुछ प्लान बनाया होगा। वो तो अच्छा हुआ कि ये नशे में धुत्त हो गए, वरना ये हमारी अदला-बदली कर ही देते।  
मैं: सही बोल रही हो तुम।
आकाश: क्या बोल रही हो तुम लोग? कल सबके सामने सब की मर्जी से तय हुआ था.
मैं: कल हम सब ने डिनर किया. फिर हम पीने के लिए बैठे और उसके बाद हम अपने-अपने कमरे में चले गए.
अंकिता: इन लोगों के दिमाग में यह सब होगा. इसीलिए यह ऐसा सोच रहे हैं.
दीपक: अरे, ऐसा कुछ नहीं है.
आकाश: हां, हम ऐसा कुछ नहीं सोच रहे हैं.
दोनों के चेहरे देखने लायक हो गए थे. दोनों एक दूसरे की तरफ देख रहे थे. दोनों आश्चर्यचकित थे और सोच रहे होंगे की रात को मेरे साथ कौन थी. फिर मैंने अंकिता को इशारा किया कि अब यह मजाक खत्म करते हैं. उसने भी इशारे से अपनी रजामंदी जाहिर की.
मैं: आप दोनों अपनी-अपनी बीवी के सिर पर हाथ रखकर कसम खाओ की अपनी बीवी के प्रति हमेशा वफादार रहोगे.
आकाश: दीपक, चलो कसम खाते हैं वरना यह हमें नहीं छोड़ेंगी.
दीपक: हां, अब और कोई चारा नहीं है.
अब दीपक मेरे पास आया और आकाश जीजु अंकिता के पास गए. दोनों जैसे ही हमारे सिर पर हाथ रखने वाले थे तब मैं बोली -
मैं: अरे, हमने बोला था कि अपनी-आप बीवी के सर पर हाथ रखना है.
दीपक: हम वही तो कर रहे हैं.
अब अंकिता ने दीपक को कहा -
अंकिता: तो आप मेरे सर पर हाथ रखो.
आकाश: अंकिता, यह तुम क्या कह रही हो? तुम तो मेरी बीवी हो.
दीपक: और मनीषा मेरी बीवी है.
मैं: आप दोनों इतनी जल्दी भूल गए कि कल हमने क्या बोला था. एक दिन के लिए अंकिता दीपक की बीवी है और मैं आकाश जीजू की.
अब दोनों के समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्या चल रहा है.
आकाश: यह क्या हो रहा है? कभी कुछ और कभी कुछ!
दीपक: हां भाई, दिमाग खराब करके रख दिया है.
अंकिता हंसने लगी. उसे देखकर मुझे भी हंसी आ गई. फिर मैं जीजू के पास गई अंकिता दीपक के पास. हम दोनों उनसे लिपट गई. फिर अंकिता बोली -
अंकिता: अरे यार, हम मजाक कर रहे थे! यह मनीषा का प्लान था.
आकाश: तो रात को मेरे साथ मनीषा ही थी?
मैं: हां, मैं ही थी आपके साथ.
दीपक: तुम लोगों ने तो हमें डरा ही दिया था.
मैं: और आप दोनों इतनी आसानी से बुद्धू बन गए!
फिर हम सब हंस पड़े और बैठकर बातें करने लगे. मैं आकाश जीजू के पास बैठी थी और अंकिता दीपक के पास. जीजू ने मेरे गले में बांह डाल रखी थी और अंकिता दीपक से चिपकी हुई थी. आकाश जीजू ने नाश्ते का ऑर्डर दिया हुआ था. जब वह आया तो हम सब ने मिलकर नाश्ता किया. फिर आकाश जीजू बोले -
आकाश: अब क्या प्लान है?
दीपक: इन्होंने हमें डराया है तो अब हम इनसे बदला लेंगे, यानी रात वाला प्रोग्राम दोबारा.
अंकिता: मेरा एक सुझाव है. अगर सबको अच्छा लगे तो हम वह कर सकते हैं.
मैं: बोल, क्या सुझाव है?
अंकिता: क्यों ना हम सब यहीं मजे करें?
आकाश: यानी लिविंग रूम में सब मिलकर?
दीपक: क्यों नहीं? परमानेंट बीवी के सामने टेंपरेरी बीवी के साथ करने में कितना मजा आएगा!
मैं: पागल हो क्या तुम सब? मैं सबके सामने नहीं करने वाली.
दीपक: करते हैं ना, यार. बहुत मजा आएगा!
अंकिता: जब रात को मैं और दीपक तुम दोनों की रासलीला देख रहे थे तब सच में बहुत मजा आ रहा था.
मैं: क्या? तुम हम दोनों को करते हुए देख रहे थे?
अंकिता: अब बन मत. मुझे पता है की तूने हमें अपने कमरे के दरवाजे पर देखा था. हमें देख कर तो तेरे पर और जोश चढ़ गया था!
दीपक: और अंकिता, क्या तुम्हें यह पता है कि यह दोनों भी रात को छुपकर हमारा प्रोग्राम देख चुके हैं?
अंकिता: बाप रे, क्या सच में? मुझे तो पता ही नहीं चला.
मैं: तुमने सच में देखा था हमें?
दीपक: हां, देखा था और यह भी देखा था कि आकाश तुम्हारे पीछे बैठकर तुम्हारी चूत सहला रहा था.
अंकिता: जब सब छुप कर देख ही चुके हैं तो फिर सब साथ में करते हैं ना.
मैं: यार, छुप कर देखना अलग बात है और ऐसे आमने-सामने करना अलग बात है. मुझे दीपक के सामने शर्म आएगी.
आकाश: देखो, दीपक तुम्हारे साथ करता ही है और वह तुम्हें मेरे साथ करते हुए भी देख चुका है तो अब  शर्म कैसी?
दीपक: हां डार्लिंग, अब शर्म छोड़ो और मजे करो.
अंकिता: यार, अब इतना भाव मत खा.
मैं: अच्छा ठीक है, पर पहले हम अपने असली पति के साथ शुरू करेंगे और बाद में अदला-बदली करेंगे.
आकाश: हां, यह भी ठीक है.
फिर दीपक मेरे पास आ गया और जीजू अंकिता के पास गए। हम पति-पत्नी ने किस करना शुरू किया। धीरे-धीरे चूमा-चाटी गहरी होती गई। जीजू ने अंकिता के कपड़े उतारने शुरू कर दिए और उन्हें देखकर दीपक ने भी मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए। थोड़ी ही देर में हम चारों ही एक-दूसरे के सामने नंगे थे।

क्रमश:
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#23
Waah! Maza aa gaya.
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#24
(12-03-2026, 11:54 PM)Glenlivet Wrote: Waah! Maza aa gaya.

Thank you.
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#25
भाग 11

दीपक मेरे मम्मे चूसने लगा और साथ में मेरी चूत को भी सहलाने लगा। अंकिता तो और आगे बढ़ गई थी। वो जीजू का लंड चूस रही थी। हम सब एक-दूसरे को देखते हुए मज़े कर रहे थे। मुझे थोड़ी शर्म आ रही थी, पर मज़ा भी आ रहा था। अंकिता तो ऐसे खुलकर लंड चूस रही थी जैसे हम वहां हों ही नहीं। उसे देखकर दीपक का भी जोश बढ़ गया और वो मेरी चूत पर किस करने लगा। मैं आहें भरते हुए चूत-चुम्बन का मजा ले रही थी। दीपक ने अपनी जीभ मेरी चूत मैं डाल दी और वो मुझे जीभ से चोदने लगा. मैं हाथ से उसका सिर अपनी चूत पर दबाते हुए मजे से सिसक रही थी।
उधर अंकिता का निप्पल जीजू के मुँह में था और जीजू अंकिता की चूत मे उंगली अंदर-बाहर कर रहे थे। अंकिता सिसकते और कराहते हुए मजे ले रही थी। अंकिता और आकाश जीजू थोड़ी देर में 69 की पोजीशन में आ गए। जीजू का लंड अंकिता के मुंह में था और जीजू का मुंह अंकिता की चूत पर था। दोनों मस्ती से एक-दूसरे को चूस-चाट रहे थे। उनको देखकर मेरा भी लंड चूसने का मन हो गया।
मैंने दीपक को सोफे पर बैठाया और मैं उसके पैरों के बीच में घुटनों पर बैठ गई। दीपक का खड़ा लंड मेरी आँखों के सामने था। मैंने पूरा लंड गले तक मुँह के अंदर ले लिया। कुछ सेकंड ऐसे ही रखा और फिर लंड को मुँह में अंदर-बाहर करके चूसने लगी। दीपक की आँखें बंद हो गई थीं और साँसें तेज चल रही थीं। हम दोनों ही उन पलों का मजा ले रहे थे। दीपक भी अपने लंबे लंड से मेरे मुंह को चोद रहा था।
दूसरी तरफ अंकिता की चुदाई चालू हो चुकी थी। अंकिता कालीन पर पीठ के बल लेटी हुई थी और आकाश जीजू उस पर चढ़कर उसे चोद रहे थे। मुझे बस आकाश जीजू के चूतड़ दिख रहे थे, जो तेजी से ऊपर-नीचे हो रहे थे। जीजु के धक्के ज़ोरदार हो चले थे और नीचे से अंकिता भी अपने चूतड़ उछाल-उछाल उनके धक्कों का जवाब दे रही थी। दोनों दुनिया से बेख़बर अपने मज़े में लिप्त थे।
थोड़ी देर में अंकिता मजे से चीखते हुए झड़ गई और उसका शरीर निढाल पड़ गया। पर जीजू का काम अभी तक नहीं हुआ था। वो पूरी स्पीड से अंकिता को चोदे जा रहे थे। उनको देखकर दीपक का भी मूड बन गया और उसने मुझे बोला कि मैं उसके ऊपर चढ़ूं। दीपक सोफे पर लेट गया और मैं उसके ऊपर आ गई। मैंने दीपक के लंड पर अपनी चूत को सेट किया और दीपक ने एक जोरदार धक्का मार के अपने लंड को मेरी चूत में घुसा दिया। मेरे मुंह से एक लंबी आह निकल गई। फिर मैं लंड पर उछल-उछल कर चुदवाने लगी। दीपक का लंड मेरी चूत की गहराइयों में पहुंच रहा था। उसका लंबा लंड मेरी चूत में खलबली मचा रहा था।
कुछ देर मुझे इस तरह चोदने के बाद दीपक बोला कि अब मुझे आकाश जीजू के लंड का भी मजा लेना चाहिए. मैं समझ गई कि वह अब अंकिता को चोदने का मजा लेना चाहता था. अब मुझे भी ऐतराज का कोई कारण नजर नहीं आ रहा था. अंकिता ने दीपक की बात सुन ली थी. शायद वह भी दीपक के लंड का मजा लेने के लिए लालायित थी. अंकिता दीपक के पास आ गई और उसने मुझे आकाश जीजू के पास जाने को कहा. मैं दीपक के ऊपर से उतर के आकाश जीजू के पास चली गई. मुझे अब भी दीपक के सामने जीजू से चुदने में थोड़ी शर्म महसूस हो रही थी.
अंकिता तो सीधे दीपक के लंड पर टूट पड़ी. वह मजे से उसका लंड चूसने लगी. उसे दीपक के लंड का मजा लेते देख कर मेरी हिचक कम हो गई. जीजू ने मुझे प्यार से सोफे पर बिठाया और खुद मेरे सामने कालीन पर घुटनों के बल बैठ गए. उन्होंने मेरी टांगों को फैलाया और अपना मुंह मेरी चूत पर रख दिया. मेरे मुंह से एक आह निकली और मेरी आंखें बंद हो गई.
मैं अब यह भी भूल गई थी कि मैं दीपक के सामने थी. जीजू मेरी चूत अंदर तक चाट रहे थे और मैं उनकी जीभ का लुत्फ उठा रही थी. दीपक के चोदने से मेरी उत्तेजना काफी बढ़ चुकी थी. जीजू की जीभ ने मेरी उत्तेजना इतनी बढ़ा दी कि कुछ ही देर में मेरी चूत से पानी निकल गया. जीजू ने सारा पानी चाट लिया. जब जीजू ने मुंह हटाया तो मेरी आंखें खुली.
जीजू खड़े हो गए और उनका मोटा लंड मेरे सामने था. मैंने भी देर ना करते हुए पूरा लंड अपने मुंह में ले लिया. मैं अपना मुंह आगे पीछे करते हुए लंड को चूसने लगी. जीजू भी मेरा सर पकड़ के हल्के धक्कों से मेरा मुंह चोदने लगे.
उधर दीपक ने अंकिता को घोड़ी बनाकर उसे चोदना चालू कर दिया था. मुझे अंकिता के सुडौल नितम्ब दिख रहे थे. हर धक्के के साथ उसके मम्मे झूल रहे थे. दीपक भी पूरी जान लगाकर उसे चोद रहा था. वह बीच-बीच में अंकिता के चूतड़ पर थपकी भी दे रहा था. मजे से अंकिता की सिसकारियां निकल रही थी. अचानक दीपक ने चूत से लंड बाहर निकाला और एक ही धक्के में उसे अंकिता की गांड में पेल दिया. अंकिता की चीख निकल गई और वह बोली –
अंकिता: जीजू, गांड में डालने से पहले बोल तो देते.
दीपक: डार्लिंग, बोलता तो तुम डालने देती क्या?
अंकिता: तुम तो मेरी जान ही लोगे.
दीपक: जान नहीं, मैं सिर्फ तुम्हारी गांड लूंगा.
और दीपक अंकिता की कमर पकड़ कर उसकी गांड मारने लगा. अंकिता की सिसकियां पूरे कमरे में गूंज रही थी. साफ पता चल रहा था कि उसे कितना मजा आ रहा था.
इधर आकाश जीजू मेरे ऊपर आ गए और उन्होंने अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया. उनका पूरा लंड मेरी चूत को फैलाता हुआ अंदर जा रहा था और मैं 'आह उफ्फ' किये जा रही थी. जीजू के धक्के कभी हल्के होते तो कभी तगड़े. जीजू और मैं कुछ बोल नहीं रहे थे. हम बस एक दूसरे की आंखों में देख रहे थे.
फिर जीजु ने अपना लंड निकाल कर मुझे सोफे पर झुका दिया. उन्होंने मेरे चूतड़ फैला कर पिच्च से मेरी गांड पर थूका. मैं उनका इरादा समझ गई. जब उन्होंने अपना लंड मेरी गांड पर रखा तो मैंने पीछे देख कर उन्हें अपनी रजामंदी का इशारा कर दिया. उन्होंने सावधानी से लंड मेरी गांड में घुसाया. मैं एक बार उनका मोटा लंड अपनी गांड में ले चुकी थी इसलिए इस बार मुझे ज्यादा तकलीफ नहीं हुई. कुछ धक्कों के बाद मेरी गांड ने एडजस्ट कर लिया और मैं जीजू के धक्कों का मजा लेने लगी. अब कमरे में मेरी और अंकिता की सिसकारियां गूंज रही थी. जीजु मेरे पर झुक गये और उन्होंने मेरे मम्में पकड़ लिए. अब वह मम्मों को दबाते हुए मेरी गांड ले रहे थे. उनका हर धक्का मुझे जन्नत में ले जा रहा था.
उधर दीपक में अपना लंड अंकिता की चूत से बाहर निकाल लिया. वह नीचे लेट गया और अंकिता ने उसके ऊपर चढ़कर उसका लंड अपनी गांड में ले लिया. वह उस पर उछल-उछल कर गांड मरवाने लगी. हर धक्के के साथ उसके मम्में भी उछल रहे थे. दीपक उसके नीचे लेटा हुआ उसके धक्कों का मजा ले रहा था. अंकिता पूरा लंड अपने अंदर ले रही थी. इधर जीजू ने अपना लंड मेरी गांड से निकाला और मुझे दीवार से लगाकर खड़ा कर दिया. वे मेरे पीछे आए और उन्होंने खड़े-खड़े अपना लंड मेरी गांड में घुसा दिया. अब मैं खड़े-खड़े जीजू के लंड का मजा ले रही थी. जीजू धुआंधार धक्के लगा रहे थे और उनका मोटा लंड मेरी गांड की जबर्दस्त धुनाई कर रहा था.
कुछ ही देर में दीपक अंकिता की गांड में झड़ गया. तब तक अंकित तो दो बार झड़ चुकी थी. फिर दोनों पास पास लेटे हुए हमारी कामलीला देखने लगे. दीपक बहुत गर्व और खुशी से मुझे ठुकते हुए देख रहा था. अब मुझे भी उसके सामने अपनी गांड बजवाने में शर्म नहीं आ रही थी.
जीजु पुरी ताक़त से मेरी गांड की धज्जियां उड़ाने की कोशिश कर रहे थे. मेरी चूत ने एक बार पानी छोड़ दिया था और मैं अब दूसरी बार झड़ने वाली थी. जीजू समझ गए और उन्होंने अपनी रफ्तार बढ़ा दी. उनके लंड ने मेरी गांड में घमासान मचा रखा था. कुछ भी देर में हम दोनों एक साथ झड़ गये. उनकी गर्म पिचकारियां मुझे मेरी गांड के अंदर तक महसूस हो रही थी.
हम कुछ देर ऐसे ही खड़े-खड़े अपनी सांसों पर काबू करने की कोशिश करते रहे. फिर जीजू ने अपना लंड बाहर निकाला और हम वहीं नीचे लेट गये. कमरे में सन्नाटा छाया रहा. हम सब बस लेटे थे. कोई कुछ बोल नहीं रहा था. फिर कुछ देर बाद अंकिता हमारे पास आकर लेट गई. वह बोली -
अंकिता: आकाश, मेरी एक दबी हुई तमन्ना है. क्या वह आज पूरी हो सकती है?
आकाश: क्यों नहीं डार्लिंग, जो भी दबी-छुपी तमन्ना हो, वह आज पूरी कर लो. इसमें पूछने की क्या बात है?
अंकिता: उस तमन्ना को पूरा करने के लिए तुम दोनों पतियों को साथ में काम करना पड़ेगा.
आकाश: दोनों को साथ में क्या करना पड़ेगा?
अंकिता: मुझे तुम दोनों का एक साथ लेना है.
दीपक: तो इसमें क्या बड़ी बात है? तुम एक मुंह में ले लो और एक चूत में.
अंकिता: अरे, तुम लोग समझे नहीं. मैं कुछ और कह रही थी.
मैं: क्या तू एक साथ दो लंड अपनी चूत में लेना चाहती है? इससे तो तेरी चूत के चिथड़े उड़ जाएंगे.
दीपक: हां, और दो लंड एक साथ चूत में घुसेंगे भी नहीं.
अंकिता: अरे बाबा, दोनों लंड चूत में नहीं. एक चूत में और दूसरा गांड में! पर दोनों एक साथ.
आकाश: ओह, तुम्हारा मतलब है डबल पेनिट्रेशन?
दीपक: पर तुम दोनों जगह है एक साथ झेल पाओगी? तुम ब्लू फिल्म की एक्ट्रेस नहीं हो.
अंकिता: पता नहीं मैं झेल पाऊंगी या नहीं पर मैं ट्राई करना चाहती हूं.
दीपक: देखो यह फिल्म की शूटिंग नहीं है. कहीं तुम्हें चोट ना लग जाए.
अंकिता: तुम दोनों धीरे-धीरे करना. मुझे तकलीफ हो तो तुम रुक जाना.
आकाश: ठीक है, आज तुम्हारी यह तमन्ना भी पूरी करने की कोशिश करते हैं.
अंकिता: देखो, तुम्हारा लंड मोटा है इसलिए मैं इसे चूत में लूंगी. दीपक का लंड लंबा ज्यादा है पर मोटा कम है. इसलिए वह गांड के लिए ठीक रहेगा.
फिर हम सब उठे और बेडरूम में चले गये. डबल पेनिट्रेशन का निमंत्रण मिलने से दोनों मर्दों के लंड तन गये थे. जीजु पीठ के बल बेड पर लेट गये और अंकिता उनकी तरफ मुंह करके उनके ऊपर चढ़ गई. अंकिता ने अपनी चूत को लंड पर सेट किया और उसे धीरे-धीरे अंदर ले लिया. फिर वह जीजू के ऊपर लेट गई और उसने दीपक को इशारा किया कि वह गांड में लंड लेने के लिए तैयार है. दीपक ने अंकिता के पीछे जाकर उसकी टांगें फैला दी. उसने गांड पर थूका और अपना लंड गांड पर रख दिया. फिर अंकिता की कमर थाम कर उसने धीरे-धीरे लंड अंदर धकेलना शुरू किया. वह बहुत सावधानी से लंड को एक-एक इंच अंदर घुसा रहा था. अंकिता बड़ी हिम्मत से लंड को गांड में प्रवेश दे रही थी. कुछ मिनटो में पूरा लंड गांड में प्रवेश कर गया.
अब अंकिता दो मर्दों के बीच में लेटी थी. नीचे वाला लंड उसकी चूत में था और ऊपर वाला गांड में. दीपक ने धीरे-धीरे अंकिता की गांड में अपना लंड अंदर-बाहर करना शुरू किया. जीजू भी अपने चूतड़ उठा उठा कर अंकिता को चोद रहे थे. अंकिता की सैंडविच चुदाई शुरू हो गई थी.
मैं यह नजारा देखकर अंकिता के हौसले की दाद दे रही थी और साथ में अपनी चूत भी सहला रही थी. अंकिता के चेहरे पर थोड़ा दर्द दिख रहा था. उसके दोनों छेदों की ठुकाई एक साथ हो रही थी. जैसे-जैसे लंड उसके अंदर जाते उसके मुंह से सिसकारियां निकल जातीं. लगता था कि उसे इस काम में मजा आने लगा था. दीपक और आकाश जीजू के लंड शायद एक दूसरे से दूर नहीं थे. वे दोनों भी इस काम का मजा ले रहे थे.
जब दीपक गांड से लंड थोड़ा बाहर निकलता तब अंकिता थोड़ी ऊपर उठ जाती और उसकी चूत से लंड थोड़ा बाहर आ जाता. तभी जीजू नीचे से धक्का मार के लंड को फिर से चूत में डाल देते.
कुछ देर बाद तीनों उठकर अलग हो गए. अब दीपक पीठ के बल लेट गया. अंकित उसके ऊपर उसके पैरों की तरफ मुंह करके बैठ गई. उसने अपनी गांड दीपक के लंड पर रखी और धीरे-धीरे लंड अपनी गांड में ले लिया. फिर वह दीपक के ऊपर पीठ के बल लेट गई. आकाश जीजू उसकी फैली हुई टांगों के बीच आ गए. उन्होंने अंकिता के दोनों पैर अपनी कमर के दोनों तरफ किये और अपना लंड अंकिता की चूत पर रख दिया. फिर उन्होंने अपना लंड धीरे-धीरे चूत में पेल दिया. अब धक्के लगाने की ज्यादा जिम्मेदारी जीजू की थी. इस नई पोजीशन में अंकिता के दोनों छेदों की ठुकाई फिर से होने लगी. अंकिता के चेहरे पर अब दर्द की जगह खुशी दिख रही थी. उसकी तमन्ना जो पूरी हो रही थी.
अब दोनों मर्दों ने अपनी स्पीड बढ़ानी शुरू कर दी. नीचे से दीपक अंकिता की गांड मार रहा था और ऊपर से जीजू उसकी चूत में दनादन शॉट मार रहे थे. इस दोहरे हमले से अंकिता जल्दी ही झड़ने की कगार पर पहुंच गई. वह मजे से सिसक रही थी. फिर उसकी चूत का पानी निकल गया और वह झड़ते हुए उन्हें रुकने को कहने लगी. पर इस मुकाम पर पहुँच कर दोनों मर्दों का रुकना शायद नामुमकिन था. ऊपर से मैं भी दोनों मर्दों को उकसा रही थी कि इसे दो लंड एक साथ लेने थे तो इसकी चूत और गांड का बैंड बजा दो. मेरे उकसाने से दोनों मर्दों का जोश और बढ़ गया और वह पूरी ताकत से उसे पेलने लगे.
थोड़ी देर बाद अंकिता को फिर से मजा आने लगा. वह मस्ती से आहें भरने लगी. धक्कों की रफ्तार के साथ अंकिता की आहें बढ़ने लगी. शायद वह फिर से झड़ने वाली थी. दीपक और आकाश जीजू ताबड़तोड़ धक्के मार रहे थे. थोड़ी सी देर में अंकिता सीत्कार करते हुए झड़ गई. उसके साथ ही आकाश जीजू और दीपक भी गुर्राते हुए झड़ गए.
कुछ देर आराम करने के बाद जब तीनों सफाई करके वापस आए तो हम सब साथ में बैठ गये. मैंने अंकिता से पूछा -
मैं: अंकिता, कैसा लगा दो लंड एक साथ लेने में?
अंकिता: क्या बताऊं यार, पहले तो दर्द हुआ पर बाद में जो मजा आया वह मैं बता नहीं सकती.
मैं: हां, वह तो तेरे चेहरे पर दिख रहा था.
दीपक: सच तो यह है कि मुझे भी एक नया ही मजा आया.
आकाश: हां, मजा तो मुझे भी बहुत आया पर मुझे ज्यादा खुशी इस बात की है कि अंकिता की तमन्ना आज पूरी हो गई.
अंकिता: मनीषा, एक बार तू भी इस तरह दोहरा हमला झेल कर देख.
मैं: ना बाबा, मैंने देखा था कि शुरू में तू कैसे दर्द से तड़प रही थी. मुझ में इतनी हिम्मत नहीं है. मैं तो एक बार में एक लंड से ही खुश हूं.
दीपक: पर तुमने देखा ना कि बाद में यह कितने मजे ले रही थी. तुम भी थोड़ी हिम्मत करो और एक बार डबल पेनिट्रेशन का मजा लेकर देखो.
मैं: आज तो नहीं पर फिर कभी मौका मिला तो सोचूंगी.
आकाश: चलो, यही सही. पर मनीषा की बात से ध्यान आया कि ऐसा मौका हमें फिर मिलेगा या नहीं?
मैं: क्यों नहीं मिलना चाहिए? यह टेंपरेरी पति वाला प्रोग्राम बहुत मजेदार है.
अंकिता: हां यार, अगला मौका जल्दी ढूंढो.
यह सुनकर दोनों मर्दों की बांछें खिल गई. और सच भी है कि दूसरे की बीवी को चोदने का मौका कौन छोड़ता है?
इस तरह हमारी पहली अदला-बदली पूरी हुई. अगर दोबारा अदला-बदली का मौका मिलता है तो मैं वह अगली कहानी में बताऊंगी.

समाप्त
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#26
Very entertaining story.
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#27
(14-03-2026, 11:42 AM)poorangyan Wrote: Very entertaining story.

thanks
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#28
Very good story.
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#29
(17-03-2026, 12:32 PM)ratipremi Wrote: Very good story.

thanks
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#30
Mazedar adla-badli.
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#31
(24-03-2026, 03:24 PM)Glenlivet Wrote: Mazedar adla-badli.

thanks
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