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Incest खेल ससुर बहु का
(07-03-2026, 10:17 PM)rangeeladesi Wrote: वाह, बहुत मज़ेदार!

शुक्रिया दोस्त

आशा है की बने रहेंगे
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(09-03-2026, 07:09 PM)@@004 Wrote: अगली प्रस्तुति का इंतजार है

शुक्रिया दोस्त


प्रयत्न करुँगी आज एक एपिसोड देने के लिए

बने रहिये
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Bete ke wapas ane par kya bahu apna payni dharam nibhaeygi ya phir ab bete ka role khatam sari ayashi bahu or sasur hi karenge
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चलिए कहानी को थोडा आगे ले जाते है और देखते है क्या हो रहा है..............
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मेनका ने हाथ सर से उपर ले जाते हुए एक कातिल अंगड़ाई ली। उसने अपनी चूत पे  हाथ फिराया तो उसके हाथों मे वहा का पानी लग गया। उसने डेस्क पर से नॅपकिन उठा कर उसे साफ़ किया। तभी राजासाहब वापस आ गये।

"आओ," उन्होने उसका हाथ पकड़ कर उठाया तो मेनका लड़खड़ा गयी। चुदाई ने तो उसे पस्त कर दिया था। राजासाहब ने हाथ बढ़ा कर उसे थाम कर अपने कंधे से लगा लिया और चलने लगे। बाहर आकर स्टडी को लॉक किया और उसे ले अपने वॉक-इन क्लॉज़ेट मे आ गये।


क्लॉज़ेट क्या, छोटा-मोटा कमरा ही था। अंदर राजासाहब के कपड़े जूते और बाकी सामान करीने से लगा था। क्लॉज़ेट के एक तरफ एक ड्रेसिंग टेबल रखा था जिसके बगल मे उसी के साइज़ की एक पैंटिंग लगी थी। पैंटिंग मे एक लड़की अपना शृंगार कर रही थी। राजासाहब ने आगे बढ़ कर उस पैंटिंग को उतार दिया तो पीछे एक दरवाज़ा नज़र आया। उन्होने मेनका को लिया और उस दरवाज़े को खोल अंदर दाखिल हो गये।

मेनका को एक लगभग 6 फीट लंबा गलियारा नज़र आया जिसके आख़िर मे भी एक दरवाज़ा खुला था और वाहा से रोशनी आ रही थी। दोनो गलियारा पार कर उस दरवाज़े को भी पार कर गये।

"अरे!!", मेनका की सारी थकान काफूर हो गयी। वो अपने बेडरूम के वॉक-इन क्लॉज़ेट मे खड़ी थी, उसने देखा की उसके क्लॉज़ेट की वो पैंटिंग उतार कर एक तरफ रखी थी।

"ये क्या है?",राजासाहब के साथ वो अपने कमरे मे आ गयी।


राजासाहब उसके बिस्तर पर लेट गये और अपनी बाँहे खोल दी। मेनका थोड़ी हैरान सी उनमे समा गयी। राजासाहब ने उसे बाँहों मे भर अपने से चिपका लिया और एक लंबी किस दी।
"हमारे पुरखों की बगल के राज्य वाले राजाओं से हमेशा जंग होती रहती थी। राजपरिवार की सुरक्षा के लिए उपरी मंज़िल के राजपरिवार के कमरों को इस तरह से जोड़ा गया ताकि मुसीबत के वक़्त दुश्मन से बच कर भागा जा सके। इस महल मे ऐसे और भी रास्ते हैं।"

"पर हम इस रास्ते का इस्तेमाल केवल आपको प्यार करने के लिए करेंगे।"

"मेरा तो सर घूम रहा है, पहले वो तिजोरी और अब ये रास्ते।", उसने अपने सर पर हाथ रखा,"पर एक बात बताओ क्या नौकरों को भी पता है इन रास्तों के बारे मे?"

"2-3 पुराने खास नौकरों को जो कि इसका ज़िकरा किसी से भी नही करते।", राजासाहब उसकी एक बोबले के निपल को मसलने लगे

"उउंम...म्‍म्मह...अच्छा, और जब आप अपने कमरे मे चले जाएँगे तो हम ये भारी-भरकम पैंटिंग कैसे लगाएँगे?"

"वो केवल देखने मे भारी है। उठा कर देखना बिल्कुल हल्की है।", और अपने मुँह मे वो पूरी निपल के साथ स्तन भर ली।

"एयेए...आहह...इयश...!",उसने अपनी एक  टाँग अपने ससुर की टाँग पर चढ़ा दी और दोनो फिर से प्यार के समुंदर मे गोते लगाने लगे।

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ठीक उसी वक़्त शहर मे उनका दुश्मन भी अपनी रखैल की चूत चोदने के बाद उसकी गांड मार रहा था।

"...एक बात बता साली....ऊओवव्व!",जब्बार ने मलिका की गांड मे ज़ोर का धक्का मारा, वो घोड़ी बनी थी और जब्बार पीछे से उसकी गांड मार रहा था।

"बोल,छिनाल।"

"जब उस दिन की एंट्री फाइल मे है ही नही तो तुझे कैसे यकीन है कि वही पाइलट उस दिन राजा को ले गया होगा?"

"यकीन नही है,बस अंदाज़ा है। यकीन तो तू दिलाएगी जब उसे शीशे मे उतारेगी।",जब्बार ने अपनी उंगली उसली चूत मे डाल दी और दूसरे हाथ से उसकी स्तनों को मसलने लगा।

"कल रात वो "बिज़्ज़रे" डिस्को मे जाएगा। वही तू उसे अपने जाल मे फँसाएगी। वैसे भी तेरे ये छेद किस काम में आयेगे डार्लिंग। मई चाहता हु की ये छेद मेरे लंड औए काम आये और दुसरे सिर्फ देख के अपने लंड का माल गिरा दे।" उसके धक्कों की स्पीड बढ़ गयी थी।

"आ....अनन्न...वाहह....,ठीक है कुत्ते....आ....इयैयियैआइयीययी....ऐसे ही मार...फा...आड दे मेरी गा....आँड....ऊऊओ....ऊओह....! पता नहीं कुत्ते तू मेरी गांड क्यों मार रहा है ज्यादातर आगे का रास्ता भूल गया है क्या.....वैसे मेरी ये गांड भी मेरे काबू में नहीं, सब से ज्यादा मजा वही दे रही है ...... कब तक तू मेरे छेदों से जंग जीतेगा पता नहीं!",और वो झड़ गयी। जब्बार ने भी 3-4 बेरहम धक्के और लगाए और उसकी गांड मे पानी छोड़ दिया।


थोड़ी ही देर मे वो खर्राटे भर रहा था, पर मलिका की आँखों मे अभी भी नींद नही थी। उसे कल्लन का लंबा लंड याद आ रहा था। उसने जब्बार की तरफ देखा,जब उसे यकीन हो गया कि वो सो रहा है तो वो उठी और दबे पाँव कल्लन के कमरे मे चली गयी।

कल्लन चादर ओढ़ सो रहा था। मलिका उसकी चादर मे घुस गयी तो पाया कि वो नंगा है। उसने झट से उसके लंड को पकड़ लिया और हिलाने लगी। कल्लन की नींद खुल गयी,उसने मलिका को चित किया और टांगे फैला कर अपना लंड उसकी चूत मे पेल दिया। मलिका ने उसके कंधे मे दाँत गढ़ा अपने हलक से निकलती हुई चीख ज़ब्त की और अपनी टांगे उसकी कमर मे लपेट उस से चुदने लगी।

बने रहिये..................
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दोस्तों एक छोटा सा अपडेट दिया हुआ है आपके मनोरंजन के लिए

कृपया पढ़िए और अपना मंतव्य दीजिये ..................
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सुबह के 5 बज रहे थे। मेनका पूरी तरह से नंगी बेख़बर सो रही थी। बगल मे राजासाहब अदलेते से जागे हुए थे और उसकी जवानी को निहार रहे थे, वो भी पूरी तरह नंगे थे बस उनकी कलाई पर एक सोने का ब्रेस्लेट चमक रहा था। ब्रेस्लेट के बीच मे चमकता सूरज बना था जोकि उनका राजचिन्ह भी था। यही वो चीज़ थी जो कि मेनका ने मुम्बई मे उनसे छिपा कर खरीदी थी ताकि उन्हे सर्प्राइज़ दे सके। कल रात आख़िरी बार की चुदाई के बाद उसने अपने हाथों से ये उन्हे पहनाया था। मैत्री की प्रस्तुति.


राजासाहब मेनका को देखने लगे। सोते वक़्त कितनी मासूम लग रही थी। उसकी बड़ी-बड़ी छातियो के बीच उनकी दी हुई चैन चमक रही थी। साँसों के कारण उसकी स्तनों के उभार उपर नीचे हो रही थी। ये नज़ारा देख कर राजासाहब का सोया लंड फिर जागने लगा और उनका दिल किया कि अपने होठ अपनी बहू के निपल्स से लगा दें। पर तभी उन्हे समय का ध्यान आया, थोड़ी देर बाद दोनो को ऑफीस भी जाना था। अगर अभी वो मेनका को चोद्ते तो आज वो ज़रूर ऑफीस मिस कर देती जो कि वो बिल्कुल नही चाहते थे।

उन्होने एक लंबी साँस भरी और उठकर क्लॉज़ेट के रास्ते अपने कमरे मे चले गये। फिर वहाँ से मेनका की नाइटी और नेकलेस लाकर उसके बेड पे रख दिया और इस बार फाइनली अपने बेडरूम मे चले गये और क्लॉज़ेट के उस सीक्रेट रास्ते को बंद कर दिया।

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दोस्तों आज के लिए बस यही तक

फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ तब तक के लिए मैत्री की ओर से जय भारत.
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दोस्तों अपनी राय देना ना भूलिए प्लीज़
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समय है तो सोचा एक और छोटा सा अपडेट दे ही दू

enjoy दोस्तों
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राजकुल ग्रूप के ऑफीस के कान्फरेन्स हॉल मे राजासाहब अपने एंप्लायीस को डील के बारे मे और डील के पैसों से उन्हे मिलने वाले बोनस के बारे मे बता रहे थे," और अब एक आखरी अनाउन्स्मेंट, अभी तक कंपनी का केवल एक वाइस-प्रेसीडेंट था कुंवर विश्वजीत सिंग पर आज से दो वी.पी होंगे और दूसरी वी.पी होंगी कुँवारानी मेनका सिंग।"


तालियों की गड़गढ़त से हॉल गूँज उठा, “आज के बाद अगर हम ऑफीस मे ना हो तो हमारी जगह आप कुँवारानी को ही अपना सबसे बड़ा बॉस समझिए ये सारी बातें थी जो कि आपका जानना ज़रूरी था। अगले 2-3 दीनो मे बोनस की रकम आपके सॅलरी अकाउंट्स मे जमा करा दी जाएगी। थॅंक यू।"

मीटिंग के बाद मेनका राजासाहब के ऑफीस चेंबर मे बैठी थी,"क्या ज़रूरत है हमे वी.पी बनाने की?"

"अरे भाई,वैसे ही तुम एक वी.पी की सारी ज़िम्मेदारियाँ उठाती हो तो बना भी दिया।",पास आकर उसे चेर से उठाया और बाहों मे कस लिया।

"क्या कर रहे हो? कोई आ जाएगा।",मेनका छूटने की कोशिश करने लगी। चेहरे पर घबराहट और शर्म के मिले-जुले भाव थे।
मैत्री की प्रस्तुति.

"हमारे ऑफीस मे बिना हमारी इजाज़त के कोई नही आ सकता।",राजासाहब ने उसके होठ चूम लिए।

"प्लीज़,यश मुझे डर लग रहा है। पागल मत बनो, ऑफीस है किसी को पता चल गया तो ग़ज़ब हो जाएगा।"

"हम पर भरोसा रखो,तुमसे ज़्यादा तुम्हारी फ़िक्र हम करते हैं।" और एक बार फिर उसके होंठ चूमने लगे। उन्होने अपने हाथों से नीचे से उसकी साड़ी उठानी शुरू कर दी। मेनका फिर कसमसाई,"प्लीज़",पर राजासाहब ने उसे अनसुना करते हुए साड़ी कमर तक उठा दी और अपने हाथों से उसकी पेंटी मे कसी गांड की फांको को मसलने लगे।


वैसे ही उसकी गांड पकड़ कर चूमते हुए उन्होने उसे डेस्क पर बैठा दिया और खुद उसके सामने चेर पर बैठ गये और एक झटके मे उसकी पेंटी उतार दी। मेनका कुछ कह पाती इस से पहले ही उसकी जांगे उसके ससुर के कंधे पे थी और उनके होठ उसकी चूत पे जा लगे।

"ऊओ...ऊ...",मेनका की सिसकारी निकल गयी। उसने अपनी जांघों मे अपने ससुर को भीच लिया और अपने हाथों से उनके सर को अपनी चूत पर दबाने लगी। राजासाहब के मुँह ने उसकी चूत को चाटना,चूमना औरचूसना चालू कर दिया और हाथ उसकी ब्लाउस मे कसी धाये को दबाने लगे।

 
मेनका को और क्या चाहिए था, मेनका मस्त हो गयी पर मन के किसी कोने मे पकड़े जाने का डर भी था। वो जल्दी से जल्दी झड़ना चाहती थी  और राजासाहब इसमे उसकी पूरी मदद कर रहे थे। थोड़ी ही देर मे मेनका ने अपनी गांड  डेस्क से उठा दी और अपने होठ काट अपनी सिसकारियों को ज़ब्त करते हुए अपने ससुर का मुँह अपने हाथों से अपनी चूत पे और दबा दिया और उसकी चूत ने ससुर के मुह में अपने चुतरस का प्रसाद दे दिया।

राजासाहब उठे,अपनी पॅंट खोली और अपना लंड निकाल कर डेस्क पर बैठी मेनका की गीली चूत मे डाल दिया। लंड घुसते ही मेनका उनसे लिपट गयी औरउनके धक्कों का मज़ा उठाने लगी,थोड़ी ही देर मे उसकी गांड फिर हिलने लगी। उसके होठ अपने ससुर के होठों से लगे थे और हाथ उनके पूरे शरीर पर फिर रहे थे। राजासाहब ने अपने हाथ नीचे से उसकी गांड पर कस दिए थे।दोनो चुदाई मे पूरी तरह डूब गये और थोड़ी ही देर मे दोनो के शरीर झटके खा कर झड़ गये।

दोनो वैसे ही लिपटे एक दूसरे को चूम रहे थे कि राजासाहब का मोबाइल बजा। मैत्री की लेखनी.


दोस्तों बस आज के लिए यही तक फिर मिलेंगे तब तक के लिए मैत्री की ओर से जय भारत
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दोस्तों आपके कमेन्ट की प्रतीक्षा में .......................
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बहुत मनोरंजक. धन्यवाद.
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बेहद खूबसूरत अपडेट
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(10-03-2026, 05:12 PM)rangeeladesi Wrote: बहुत मनोरंजक. धन्यवाद.

शुक्रिया दोस्त

बने रहिये
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(11-03-2026, 01:01 AM)@@004 Wrote: बेहद खूबसूरत अपडेट

बहोत शुक्रिया दोस्त

बने रहिये और प्रोत्साहित करते रहे
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कहानी आगे कब बढ़ेगी?
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(11-03-2026, 08:17 PM)rangeeladesi Wrote: कहानी आगे कब बढ़ेगी?

शुक्रिया दोस्त


आज ही थोडा आगे बाधा देती हूँ

बने रहिये
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Maine ek prashn kiya tha uske jawab ke intezar me hu kya bahu apna patni dharam pati ke wapas ane par nibha paygi ya apne yuvraj ke liye dusri rani ki vyastha karegi
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चलये कहानी को थोडा आगे बढ़ा देते है और जानते है क्या क्या हो रहा है .................
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