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Incest खेल ससुर बहु का
(06-03-2026, 06:10 PM)@@004 Wrote: इंतजार

बस थोडा सा...........

Namaskar
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हर धक्के के साथ मेनका उनके लंड के टोपे को अपनी कोख पे लगता महसूस कर रही  थी  और  उसे इतना मज़ा आ रहा था की पुछो मत। तभी राजासाहब ने वैसे ही उसकी चूची चूस्ते हुए फिर से एक ज़ोर का धक्का मारा तो उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया, वो उचक कर अपने ससुर से चिपक गयी उनका जिस्म भी झटके खाने लगा  और  उसने उनके लंड से च्छूटता पानी अपनी चूत मे भरता महसूस किया।


यहाँ से आगे..............

थोड़ी देर दोनो वैसे ही पड़े रहे, फिर राजासाहब उसके उपर से उतर कर उसकी बगल मे लेट गये। मेनका भी करवट ले उनकी बाहों मे आ गयी  और  उनके सीने पर सर रख दिया। राजासाहब उसके बाल सहला रहे थे  और  बीच-2 मे उसके सर पर चूम रहे थे। मेनका उनके सीने के बालों मे उंगलिया फिरा रही थी।


थोड़ी देर बाद मनेका उठ कर बैठ गयी, उसका ध्यान अपनी चूची पर गया जहाँ राजासाहब ने थोड़ी देर पहले जम कर चूसा था। अब वहा पर एक बड़ा सा निशान पड़ गया था।

"क्या देख रही हो?" राजासाहब ने लेते-2 ही पूछा।

"आपकी कारस्तानी।" मेनका बनावटी गुस्से से बोली।
मैत्री की प्रस्तुति

"अब ये ऐसी खूबसूरत होंगी तो कारस्तानी तो ऐसी ही होगी।" राजासाहब उठ कर उस जगह पर हाथ फिराते हुए बोले।

"आप भी ना!", मेनका ने उनका हाथ एक तरफ कर दिया।

"ये क्या आप-आप लगा रखा है। आज से तुम हमे सिर्फ़ तुम कह कर पुकरोगी।" राजासाहब ने उसे फिर अपनी बाहों मे भर लिया।

"आज क्या हो गया है आपको,ये... ।"

"-..फिर आप! तुम कहो।"


मेनका के गाल लाल हो गये, "प्लीज़ क्यू सता रहे हैं?"

"क्यू सता रहे हो? तुम्हे हमारी कसम चलो ऐसे बोल कर दिखाओ।"

"ये बात-बात पे अपनी कसम क्यू देते है?"

"फिर आप।"

"अच्छा बाबा! तुम...क्या तुम बात-2 पर कसम देने लगते हो?"

"हो गया। अब नही देंगे।"


दोनो हंस पड़े।,
 
"ये कारस्तानी पसंद आई?",उन्होने उस निशान को सहलाते हुए पूछा। जवाब ने मेनका ने मुस्कुराते हुए हां मे सर हिला दिया।

"तब हम आपको एक और कारस्तानी दिखाते हैं।", राजासाहब उठे  और  मेनका के कुछ बोलने से पहले अपने वॉक-इन क्लॉज़ेट खोल उसके अंदर चले गये। थोड़ी देर बाद बाहर आए तो उनके हाथ मे 2 डब्बे थे।


वो मेनका के पास आकर बैठ गये।एक डब्बा उसको दिया,"खोलो।"

मेनका ने डब्बा खोला तो उसकी आँखें चौंधिया गयी,अंदर हीरो का एक बहुत बेशक़ीमती जड़औ हार जगमगा रहा था।

"ये मेनकासिंग के लिए है जिसके इनवॅल्युवबल कॉंट्रिब्यूशन के बदौलत राजकुल ग्रूप डील कर पाया।"
मैत्री द्वारा लिखित

"पर इतने कीमती तोहफे की क्या ज़रूरत थी?"

"ये तुमसे किमती नही है।", राजासाहब ने हार उठा कर उसके गले मे पहना दिया।,

"अब ये दूसरा डिब्बा खोलो।"

उसको खोलते ही अंदर से एक गोल्ड चैन निकली जिसमे एक  हीरे का पेंडेंट लटका था। पेंडेंट मे हीरे से 'एम' बना था और 'एम' के बीच के 'वी' से एक सीधी लाइन नीचे निकल कर 'Y' बना रही थी। जब तक कोई बहुत गौर से नही देखता तो उसे कभी नही पता चलता कि पेंडेंट मे दोनो लेटर्स एम और Y हैं। दूर से तो बस लगता था जैसे की एम बना है।

"
और ये हमारी जान के लिए उसे हमारे प्यार का पहला तोहफा।", और वो चैन भी उसके गले मे डाल दी।


मेनका की आँखो मे खुशी के आँसू भर आए और वो आगे बढ़ कर अपने ससुर के गले लग गयी  और  सुबकने लगी।

"
अरे क्या हुआ?"

"
घबराईए मत।- आइ मीन घबराव मत, ये खुशी के आँसू हैं।", राजासाहब हंसते हुए उसकी पीठ पर प्यार से हाथ फेरने लगे।

"
हमने भी तुम्हारे लिए कुछ लिया है। हमारे कमरे मे रखा है। बस अभी लेकर आते हैं।"


कहानी जारी है कही जाइएगा नहीं.....

मैत्री..........
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दोस्तों एक छोटा सा अपडेट आपके समक्ष हाजिर है...............


कहानी का लुफ्त उठाये
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थोड़ी देर दोनो वैसे ही पड़े रहे, फिर राजासाहब उसके उपर से उतर कर उसकी बगल मे लेट गये। मेनका भी करवट ले उनकी बाहों मे आ गयी  और  उनके सीने पर सर रख दिया। राजासाहब उसके बाल सहला रहे थे  और  बीच-2 मे उसके सर पर चूम रहे थे। मेनका उनके सीने के बालों मे उंगलिया फिरा रही थी। मैत्री की प्रस्तुति


थोड़ी देर बाद मनेका उठ कर बैठ गयी, उसका ध्यान अपनी चूची पर गया जहाँ राजासाहब ने थोड़ी देर पहले जम कर चूसा था। अब वहा पर एक बड़ा सा निशान पड़ गया था।

"क्या देख रही हो?" राजासाहब ने लेते-2 ही पूछा।

"आपकी कारस्तानी।" मेनका बनावटी गुस्से से बोली।

"अब ये ऐसी खूबसूरत होंगी तो कारस्तानी तो ऐसी ही होगी।" राजासाहब उठ कर उस जगह पर हाथ फिराते हुए बोले।

"आप भी ना!", मेनका ने उनका हाथ एक तरफ कर दिया।
मैत्री की रचना

"ये क्या आप-आप लगा रखा है। आज से तुम हमे सिर्फ़ तुम कह कर पुकरोगी।" राजासाहब ने उसे फिर अपनी बाहों मे भर लिया।

"आज क्या हो गया है आपको,ये... ।"

"-..फिर आप! तुम कहो।"


मेनका के गाल लाल हो गये, "प्लीज़ क्यू सता रहे हैं?"

"क्यू सता रहे हो? तुम्हे हमारी कसम चलो ऐसे बोल कर दिखाओ।"

"ये बात-बात पे अपनी कसम क्यू देते है?"

"फिर आप।"

"अच्छा बाबा! तुम...क्या तुम बात-2 पर कसम देने लगते हो?"

"हो गया। अब नही देंगे।"


दोनो हंस पड़े।,
 
"ये कारस्तानी पसंद आई?",उन्होने उस निशान को सहलाते हुए पूछा। जवाब ने मेनका ने मुस्कुराते हुए हां मे सर हिला दिया।

"तब हम आपको एक और कारस्तानी दिखाते हैं।", राजासाहब उठे  और  मेनका के कुछ बोलने से पहले अपने वॉक-इन क्लॉज़ेट खोल उसके अंदर चले गये। थोड़ी देर बाद बाहर आए तो उनके हाथ मे 2 डब्बे थे।


वो मेनका के पास आकर बैठ गये।एक डब्बा उसको दिया,"खोलो।"

मेनका ने डब्बा खोला तो उसकी आँखें चौंधिया गयी,अंदर हीरो का एक बहुत बेशक़ीमती जड़औ हार जगमगा रहा था।

"ये मेनकासिंग के लिए है जिसके इनवॅल्युवबल कॉंट्रिब्यूशन के बदौलत राजकुल ग्रूप डील कर पाया।"

"पर इतने कीमती तोहफे की क्या ज़रूरत थी?"

"ये तुमसे किमती नही है।", राजासाहब ने हार उठा कर उसके गले मे पहना दिया।,

"अब ये दूसरा डिब्बा खोलो।"

उसको खोलते ही अंदर से एक गोल्ड चैन निकली जिसमे एक  हीरे का पेंडेंट लटका था। पेंडेंट मे हीरे से 'एम' बना था और 'एम' के बीच के 'वी' से एक सीधी लाइन नीचे निकल कर 'Y' बना रही थी। जब तक कोई बहुत गौर से नही देखता तो उसे कभी नही पता चलता कि पेंडेंट मे दोनो लेटर्स एम और Y हैं। दूर से तो बस लगता था जैसे की एम बना है।

"
और ये हमारी जान के लिए उसे हमारे प्यार का पहला तोहफा।", और वो चैन भी उसके गले मे डाल दी।


मेनका की आँखो मे खुशी के आँसू भर आए और वो आगे बढ़ कर अपने ससुर के गले लग गयी  और  सुबकने लगी।

"
अरे क्या हुआ?"

"
घबराईए मत।- आइ मीन घबराव मत, ये खुशी के आँसू हैं।", राजासाहब हंसते हुए उसकी पीठ पर प्यार से हाथ फेरने लगे।

"
हमने भी तुम्हारे लिए कुछ लिया है। हमारे कमरे मे रखा है। बस अभी लेकर आते हैं।"


राजासाहब ने चाभी से दरवाज़ा खोला  और  दोनो वैसे ही नंगे स्टडी के अंदर आ गये। राजासाहब ने लाइट जलाई तो मेनका पूरी स्टडी को ध्यान से देखने लगी। चारों तरफ शेल्व्स मे ज़मीन से छत तक किताबें भरी थी। बीच-बिच मे राजासाहब के पुरखों के पोरट्रेट्स लगे थे। कमरे के बीच मे एक बड़ा स्टडी डेस्क था और उसके पीछे एक लेदर-बॅक चेर।


राजासाहब कमरे के एक  कोने मे चले गये। उस कोने मे बुक-शेल्फ मे से वो किताबें निकालने लगे। मेनका हैरत से देख रही थी और समझने की नाकाम कोशिश कर रही थी। राजासाहब ने दस किताबें खिच-खीच कर निकाल दी। फिर मेनका को इशारे से बुलाया, मेनका वहा पहुँची तो देखा कि उस खाली जगह मे शेल्फ के पीछे का लकड़ी का हिस्सा दिख रहा था। उसने सवालिया नज़रो से अपने ससुर की तरफ देखा। राजासाहब ने मुस्कुराते हुए अपनी स्टडी से एक  पेन-नाइफ उठाई  और  शेल्फ के उस पिछले हिस्से की लकड़ी के दोनो सिरों पर जहा किताबें थी उपर से नीचे तक फिराया  और  वो लकड़ी का बोर्ड गिर पड़ा।

मेनका चौंक पड़ी तो राजासाहब हंस पड़े, "ये लूज बोर्ड है  और  ये देखो इसके पीछे क्या है।" मैत्री द्वारा लिखित

पीछे एक छोटी-सी तिजोरी नज़र आ रही थी। राजासाहब ने उसका कॉंबिनेशन लॉक  खोला  और  उसके अंदर से एक काग़ज़ों का पुलिंदा निकाला। उस पुलिंदे को ले कर राजासाहब मेनका का हाथ पकड़ कर डेस्क के पीचे लेदर बॅक चेर की तरफ चले गये। उस पर बैठ कर उन्होने मेनका की कमर मे अपना बाया हाथ डाला  और  उसे  अपनी गोद मे बिठा लिया। उसने भी अपनी दाई बाँह अपने ससुर के गले मे डाल दी।

"
हम जो आपको बताने जा रहे हैं उसे जान ने का हक़ केवल महल के राजा को होता है। ये राजा की मर्ज़ी है कि इस बात को कब वो अपने सबसे बड़े बेटे, यानी की  भावी राजकुमार को बताता है। हमने तो सोचा था कि डील फाइनल होते ही विश्वा को बताएँगे पर हमारी बदक़िस्मती कि वो कमज़ोर निकला और...यूधवीर तो हमे पहले ही छोड़ कर जा चुका है।", राजासाहब खामोश हो गये।


मेनका ने भी बिना कुछ बोले बस उनके बालों मे हाथ फिराने लगी।

राजासाहब ने फिर कहना शुरू किया, "ये उस वक़्त की बात है जब रजवाड़े ख़तम हो रहे थे और  सारी रियासतें हिन्दुस्तान मे मिलाई जाने वाली थी। हमारे पिताजी को इस बात की भनक काफ़ी पहले लग गयी  और  वो समझ गये कि अब हमारा  वक़्त सचमुच ख़तम होने वाला है। इस पूरे राज्य मे हमारी काफ़ी ज़मीन  और  प्रॉपर्टी थी। इतनी जितनी कि कोई कभी सोच भी नही सकता। उन्होने धीरे-धीरे सारी प्रॉपर्टी को इस तरह बेचा कि किसी को ज़रा भी शक़ नही हुआ। जब भारत सरकार ने उन्हे हिन्दुस्तान मे मिलने को कहा तो वो झट से राज़ी हो गये।", मेनका गौर से उनकी बात सुन रही थी।



आज के लिए बस यही तक फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ तब तक के लिए मैत्री की ओर से जय भारत
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दोस्तों आपके मनोरंजन के लिए ऊपर २ अपडेट्स दिए है


आपके बहु मूल्य मंतव्यो की अपेक्षा सह...................
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अति उत्तम प्रस्तुति।।

लेकिन राजा साहब ऐसा कौन सा राज बताने वाले हैं।
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Nice update
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(06-03-2026, 10:23 PM)@@004 Wrote: अति उत्तम प्रस्तुति।।

लेकिन राजा साहब ऐसा कौन सा राज बताने वाले हैं।

शुक्रिया दोस्त

अब राजा साहब क्या बतेयेंगे वह तो आप को आज शाम तक के अपडेट में पता चलेगा

ज्यादा इंतज़ार नहीं करवाउंगी

शुक्रिया दोस्त


जुड़े रहिये....मेरे साथ कहानी में
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(06-03-2026, 10:31 PM)Loveakb18 Wrote: Nice update

शुक्रिया दोस्त

बने रहिये कहानी में........
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Iss story ka original name Mast Menaka...
the black cock
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(07-03-2026, 12:47 PM)Monster Dick Wrote: Iss story ka original name Mast Menaka...

आपकी मेहनत को सराहती हूँ

शुक्रिया
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चलिए कहानी में आगे बढ़ते है
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"पिताजी ने कुछ ज़मीन छोड़ दी थी और उन्होने वो सारी ज़मीन  और  प्रॉपर्टी सरकार को दे दी। सारा कुछ बेचने के बाद हुमारे पास जो भी रकम आई वो सब स्विस बॅंक मे जमा करा दी गयी।", उन्होने एक पेपर मेनका की तरफ बढ़ाया, "इसमे वो अकाउंट नंबर और  उनके कोड्स हैं जिन्हे बताने पर तुम्हे बॅंक अकाउंट ऑपरेट करने की इजाज़त देता है।",मेनका ने पेपर ले लिया पर वो अभी भी हैरत से अपने ससुर को देख रही थी।

"
राजकुल ग्रूप के हर साल के प्रॉफिट से कुछ पैसा निकाल लिया जाता है जिसे की अकाउंट्स बुक मे नही दिखाया जाता। अभी भी जो डील हुई है उसमे भी 30 करोड़ हमे अलग से मिले हैं। ये सारा पैसा भी इन बाँक्स मे जमा है।", उन्होने  बाकी पेपर्स भी उसके हाथों मे दे दिए, "ये उन प्रॉपर्टीस के पेपर्स हैं जो  हमने बाद मे खरीदी हैं। इनमे से कोई भी हमारे नाम से नही है।"

"
इस वक़्त तुम्हारे हाथों मे जो काग़ज़ात हैं, मेनका, उनकी कीमत जानती हो कितनी है?",मेनका ने बस ना मे सर हिला दिया।

" 350
करोड़।"

"
क्या?!!",मेनका का मुँह हैरत से खुल गया।

"
राजासाहब,आपने अपने देश से पैसे चुरा कर ये जमा किया है।", उसने काग़ज़ अपने ससुर के हाथों मे रख दिए। "क्या फायदा है इस दौलत का  और  क्या करेंगे  आप इतनी दौलत का? साडी बाहर बॅंक मे पड़ी है या आपके नाम से नही है...और  अपने दिल पे हाथ रख के कहिए क्या आपको सच मे इन पैसों की ज़रूरत है?"

"
मेनका, ये पैसे किसी बुरे दिन हमारे काम आ सकते हैं।"

"
अगर बुरे दिन आएँगे तो क्या गॅरेंटी है की आपके ये पैसे भी सलामत रहेंगे?"

"
राजासाहब, हमारे पास वैसे ही बहुत दौलत है। इन पैसों को तो आपको दान कर देना चाहिए था। कम से कम लोगों की दुआ तो मिलती।", मेनका चुप हो गयी। राजासाहब ने सोचा नही था कि वो इस तरह से नाराज़ हो जाएगी, पर क्या ग़लत कह रही थी। आज इतनी दौलत है पर उसे भोगने वाला कौन है। एक बेटा मर चुका है और दूसरा पता नही कब वापस आएगा। राजासाहब सर झुकाए बैठे रहे और  मेनका भी वैसे ही खामोश उनकी गोद मे बैठी रही।


उन्होने उसका हाथ अपने हाथों मे थाम लिया,"हमने ये सारी बात आपको इसलिए बताई थी क्योंकि हमे आप पे जितना भरोसा हो गया है उतना कभी किसी पे नही हुआ। हमे नही पता कि उपर वाले ने हमारी कितनी उम्र लिखी है।", मेनका कुछ कहने को हुई पर उन्होने अपनी उंगली उसके होठों पे रख दी,"हमारे बाद अगर कोई राजकुल का ध्यान रख सकता है तो वो केवल आप हैं।"

"
पर हम आज आपको एक वचन देते हैं। अपने जीते जी हम ये सारा काला पैसा दान कर देंगे।"

"
हमारा दिल दुखाने का इरादा नही था।",मेनका की आवाज़ थोड़ी भर्रा गयी।

"
हमारा दिल पैसे की बात से दुखा भी नही। तुमने तो हमारी आँखे खोल दी। सच  मे, क्या फ़ायदा है ऐसी दौलत का जो किसी काम ही ना आ पाए। इसीलिए तो आपको वचन दिया है कि इसे दान कर देंगे। दिल तो हमारा दूसरी बात से दुखा है।",मेनका के चेहरे पर परेशानी छा गयी,"क्या कह दिया हमने?प्लीज़ बताइए।।",उसने उनके चेहरे को हाथों मे ले लिया।


राजासाहब के चेहरे पे गंभीरता आ गयी थी,"तुम गुस्से मे हमे फिर से आप बुलाने लगी थी।"

अभी आगे लिखा जा रहा है....
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दोस्तों और एक छोटा सा अपडेट आपके लिए दे दिया है ..........
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सुनते ही दोनो खिलखिला के हन्स पड़े। थोड़ी देर पहले जो तनाव पैदा हुआ था वो सारा अब हवा हो गया। हंसते हुए मेनका झुक कर अपने ससुर के होंठ चूमने लगी। राजासाहब ने उसकी कमर कस के पकड़ ली और लगे उसका रस पीने। चूमते हुए मेनका ने अपनी जाँघ पे कुछ गरम सा महसूस किया तो नीचे देखा। उसने पाया कि राजासाहब का लंड खड़ा होकर उसकी जाँघ से रगड़ रहा था। उसने हाथ बढ़ा कर उसे थाम लिया और थोडा रगड़ दिया।


उसके दिमाग़ मे एक ख़याल आया, वो खड़ी हुई और फिर कुर्सी पे राजासाहब के दोनो तरफ अपने घुटने रख एक हाथ से उनके लंड को पकड़ा  और  उस पर बैठने लगी। जब आधा लंड अंदर चला गया तो उसने उसे छोड़ अपने ससुर के कंधों पर बाहें रख उनके सर को हाथों मे थाम लिया और  उन्हे प्यार से चूमने लगी।

राजासाहब ने उसकी कमर पकड़ कर नीचे झुकना शुरू किया  और  उसकी चूत मे अपना पूरा लंड घुसाने लगे। मेनका को थोड़ा दर्द महसूस हुआ, पर साथ ही साथ  मज़ा भी बहुत आ रहा था। थोड़ी ही देर मे लंड जड़ तक चूत मे था। राजासाहब के  हाथों ने उसकी चौड़ी गांड को थाम लिया और उसे प्यार से मसलने लगे। मेनका ने अपनी जीभ उनके मुँह मे डाल दी  और  जम के चूमने लगी। जोश मे वो अपने ससुर से चिपक गयी, "ओह्ह।।", राजासाहब को सीने मे कुछ चुबा। दोनो ने अपने होठ जुड़ा किए तो पाया कि वो हीरो का नेकलेस उनके प्यार मे अड़चन बन रहा था। मेनका हाथ पीछे ले जा कर नेकलेस खोलने लगी,ऐसा करने से उसकी चूचिया और ज़्यादा उभर कर उसके ससुर के चेहरे के सामने चमकने लगी। राजासाहब ने अपना मुँह उन काम कलशो से लगा दिया और लूगे चूसने और चूमने।

"
आ..अनन्नह...",मेनका ने नेकलेस को उतार डेस्क पर रखा, चैन उसने गले मे ही रहने दी  और  अपने हाथों मे अपने ससुर का सर जाकड़ लिया  और  अपनी कमर उचका-उचका कर उन्हे चोदने लगी। राजासाहब के हाथ उसके बालों से होते हुए उसकी  पीठ  और  गांड पे आके फिसलने लगे।


मेनका को इस पोज़िशन मे चुदाई करने मे बहुत मज़ा आ रहा था। इस मे वो पूरे कंट्रोल मे थी। आज तक जब भी वो अपने पति या ससुर से चुदी थी, तो वो उसके उपर रह कर धक्के मारते थे। पर आज उसकी मर्ज़ी थी कि वो कैसे धक्के लगती है। वो जी भरके अपने ससुर के लंड पे कभी तेज़ी से तो कभी हौले-होले तो कभी अपनी गांड घुमा-घुमा  कर, उच्छल रही थी।

राजासाहब के मज़ा का तो ठिकाना ही नही था। मेनका की कसी चूत उनके लंड पे रगड़ खा कर उन्हे जोश से भरे जा रहे थी। दोनो अब अपनी मंज़िल की ओर पहुँच रहे थे। मेनका ने उन्हे अपने आगोश मे और ज़ोर से जाकड़ लिए और अपनी गांड भी तेज़ी से उच्छलने लगी,राजासाहब ने अपने होठ उसकी छाती पे लगा के थोड़ी देर पहले बनाए निशान को और गहरा करना चालू कर दिया,उनकी कमर भी नीचे से हिलने लगी।



मेनका की चूत ने पानी छोड़ दिया और वो अपने ससुर से चिपक गयी। झड़ती हुई उसकी चूत ने राजासाहब के लंड को कस के जाकड़ लिया तो उनके लंड से भी बर्दाश्त नही हुआ और उसने भी अपनी पिचकारी से चूत को नहला दिया।



दोनो थोड़ी देर तक वैसे ही बैठे रहे,"तुम हमे कुछ देने वाली थी?",राजासाहब मेनका के कान मे फुसफुसाए।

"
हा,हमारे रूम मे है। जा कर लाते हैं।", मेनका उतरने लगी तो राजासाहब उसे लिए हुए उठ गये और घूम कर उसे चेर पे बिठा दिया और अपना लंड उसकी चूत से निकाल लिया। मेनका टांगे फैलाए कुर्सी पर बैठी थी, राजासाहब के लंड का पानी उसकी चूत से टपक रहा था।

"थोड़ी देर यही बैठो।", राजासाहब ने सारे कागज़ात उठा कर वापस तिजोरी मे डाल कर शेल्फ मे वापस किताबें लगा दी।

"
हम अभी आते हैं।",
वो स्टडी से बाहर चले गये।




आज के लिए बस यही तक परसों फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ, तब तक के लिए मैत्री की ओर से जय भारत[b] [/b]
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दोस्तों अभी अभी एक नया अपडेट दिया है

आशा है की आप सब कोपसंद आएगा


और उम्मीद है की आपके मंतव्यो जुरूर से देंगे

शुक्रिया दोस्तों
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अति उत्तम प्रस्तुति है।।

मेनका का तोहफा दो दिनों से देना रह जा रहा है।।।
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वाह, बहुत मज़ेदार!
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अगली प्रस्तुति का इंतजार है
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(07-03-2026, 05:10 PM)@@004 Wrote: अति उत्तम प्रस्तुति है।।

मेनका का तोहफा दो दिनों से देना रह जा रहा है।।।

जी बिलकुल दोस्त

थोडा सा समय का अभाव......वैसे तो नहीं कहना चाहिए पर थोडा सा exam का प्रेशर............

शुक्रिया दोस्त आशा है की बने रहेंगे.................

निराश नहीं करुँगी.................
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